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तड़ीपार शहर में कर रहा धमा-चौकड़ी, दुकान से लूट ले गया साउंड सिस्टम

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  • कलेक्टर ने कर रखा है जिला बदर, शहर में मचा रहा है उधम 

जगदलपुर विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा की सुरक्षा व्यवस्था के दावों के बीच जिलाबदर आरोपी अमरीश सिंह द्वारा गोलबाजार में लुट की घटना को अंजाम दिया गया। उसका खौफ ऐसा है कि उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने में दो दिनों का समय लग गया।

इस घटनाक्रम के बाद आरोपी फरार हो गया है। जिससे सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई है। नवरात्रि के प्रथम दिवस 3 अक्टूबर की शाम 5 बजे गोलबाजार चौक, सदर वार्ड स्थित संकेत इलेक्ट्रॉनिक दुकान में तड़ीपार अमरीश सिंह राजपूत जा धमका और इस दुकान में काम करने वाले दीपक सिंह पिता स्व. समरजीत सिंह उम्र 57 वर्ष जाति क्षत्रिय निवासी को डरा धमकाकर दुकान से 6-6 हजार रुपए कीमत के 2 नग ब्लूटूथ ट्रली स्पीकर बाक्स लूटकर ले गया। दीपक सिंह यहां का कर्मचारी हैं और इस घटना के बारे में दुकान में काम करने वाले लडका मनोज माली और राजू के सामने यह घटनाक्रम हुआ है। पीड़ित दीपक सिंह ने दुकान मालिक कमल खुराना को बताया तथा दीपक सिंह इतना डर गया था कि उसने 5 अक्टूबर को दोपहर में रिपोर्ट दर्ज करवाई। कोतवाली पुलिस ने इस मामले में अपराध पंजीबद्ध किया है किंतु तड़ीपार फरार है। कलेक्टर हरीश एस ने दशहरा पर्व को देखते हुए लॉ एंड ऑर्डर सुनिश्चित करने की बात कही थी और उसी दिन तड़ीपार अमरीश सिंह राजपूत शहर में किन्नरों की बारात के दिन सिरहासार में रात को एक सफेद गाड़ी में घुमते देखा गया। वहीं दूसरे दिन शहर के व्यवसतम चौक में लुट की घटना को अंजाम दिया। ज्ञात हो कि तत्कालीन कलेक्टर विजय दयाराम के. ने अमरीश सिंह के खिलाफ जिल बदर का आदेश जारी किया था। इसके बाद भी वह शहर में घुमता देखा जा सकता है। इस आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने से शहर में भय का माहौल है।

बड़ी सफलता के बाद देवी मां दंतेश्वरी के दरबार में पहुंचे उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

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  • बस्तर की आराध्य देवी की गृहमंत्री ने की पूजा-अर्चना  

जगदलपुर नक्सलियों के खिलाफ बड़ी जंग जीतने के बाद छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने एक दिनी प्रवास पर दंतेवाड़ा पहुंचे। वहां उन्होंने बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के दर्शन पूजन कर प्रदेश की जनता की सुख समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।

बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा एवं नारायणपुर जिलों के सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित अबूझमाड़ में नक्सल मोर्चे पर पुलिस और सुरक्षा बलों ने 31 नक्सली मार गिराए हैं। इस बड़ी उपलब्धि के बाद उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के मां दंतेश्वरी के दरबार में पहुंचने के कई मायने निकाले जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए डिप्टी सीएम विजय शर्मा माई के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने आए थे। इस दौरान उनके साथ में कृषि एवं आदिवासी विकास विभाग मंत्री राम विचार नेताम और वन मंत्री केदार कश्यप भी पहुंचे थे। इस दौरान विधायक दंतेवाड़ा चैतराम अटामी, पूर्व मंत्री महेश गागड़ा सहित क्षेत्र के अन्य जनप्रतिनिधियों और बस्तर आईजी सुंदरराज पी, डीआईजी कमलोचन कश्यप, कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी, एसपी गौरव राय तथा जिला प्रशासन के अन्य अधिकारियों ने स्वागत किया।

सटीक सूचना और अचूक वार ने दिलाई अबूझमाड़ में पुलिस और सुरक्षा बलों को अब तक की सबसे बड़ी कामयाबी

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  • मारे गए 31 नक्सलियों में सवा करोड़ के 16 नक्सली भी शामिल
  • अत्याधुनिक हथियारों का जखीरा भी बरामद 

अर्जुन झा

जगदलपुर पूर्वी बस्तर के दंतेवाड़ा और नारायणपुर जिलों की सीमा पर अबुझमाड़ क्षेत्र में हुई नक्सलियों और पुलिस के बीच मुठभेड़ में रिकॉर्ड 31 नक्सली ढेर कर दिए गए हैं। पुलिस और सुरक्षा बलों की अब तक की इस सबसे बड़ी कामयाबी के पीछे बिल्कुल सटीक सूचना और अचूक वार का सबसे बड़ा योगदान रहा है। 4 और 5 अक्टूबर के दिन को नक्सली शायद ही भूल पाएंगे, क्योंकि इतना बड़ा जख्म पुलिस और सुरक्षा बलों ने उन्हें जो दिया है।

पूर्वी अबूझमाड़ के नेंदूर और थुलथुली के बीच जंगलों में नक्सलियों और सुरक्षा बलों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई थी। मुठभेड में 35-36 से भी ज्यादा नक्सलियों के मारे जाने की संभावना है। हालांकि अभी तक डीके एसजेडसी, डीवीसी, पीएलजीए कंपनी नंबर 6 के कई कैडर के 18 पुरूष एवं 13 महिला नक्सलियों सहित कुल 31 सशस्त्र वर्दीधारी नक्सलियों के शव बरामद हो चुके हैं।इसके अलावा बड़ी संख्या में नक्सलियों के घायल होने तथा कुछ और नक्सलियों के मारे जाने की प्रबल संभावना है। मृत नक्सलियों में 25 लाख की इनामी डीके एसजेडसी एवं पूर्वी बस्तर इंचार्ज नीति उर्फ उर्मिला भी शामिल है। अभी तक 15 नक्सलियों के शवों की शिनाख्त हुई है।में डीके एसजेडसी के अलावा दो कैडर 8 लाख इनामी डीबीसीएम एवं 9 कैडर पीएलजीए कंपनी 6 के शामिल हैं। शेष की शिनाख्त की कोशिशें जारी हैं।

मुठभेड़ के बाद मौके से एक नग लाईट मशीन गन, 4 नग एके 47 राइफल, 6 नग एसएलआर, 3 नग इंसास , 2 नग 303 बंदूक सहित कई अन्य हथियार बरामद किए गए हैं। ज्ञात हो कि जंगल में पूर्वी बस्तर डिवीजन, पीएलजीए कंपनी 6, इंद्रावती एरिया कमेटी, प्लाटून 16 आदि के शीर्ष नक्सलियों के मौजूद होने की सटीक सूचना पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों के खुफिया तंत्र ने जुटाई थी। इस सूचना के आधार पर संयुक्त टीम ऑपरेशन पर निकली थी। टीम में दंतेवाड़ा डीआरजी, नारायणपुर डीआरजी और एसटीएफ के निशानेबाज जवान शामिल थे। बरसात में उफनते नदी नालों और माड़ की पहाड़ियों को पार कर यह टीम नक्सलियों के गढ़ में पहुंची और बड़ी सफलता हासिल की। हालांकि मुठभेड़ में एक घायल जवान घायल हुआ है और रायपुर में उसका इलाज चल रहा है। उसकी स्थिति सामान्य एवं स्थिर। अन्य सभी जवान सुरक्षित हैं। अभियान के दौरान 4 अक्टूबर को दोपहर के समय नेंदूर -थुलथुली के जंगल में पुलिस पार्टी एवं नक्सलियों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई जो देर शाम तक लगातार चली। फायरिंग बंद होने पर सभी टीमों ने अपने-अपने दिए गए टॉस्क क्षेत्र में सर्चिंग शुरू की। घटना स्थल के अलग-अलग स्थानों से 18 पुरूष एवं 13 महिला कुल 31 सशस्त्र वर्दीधारी नक्सलियों के शव बरामद हुए हैं।

मारी गई 25 लाख की नीति

मारे गए नक्सलियों में 25 लाख इनामी डीकेएसजेडसी सदस्य नीति उर्फ उर्मिला सहित 8 लाख के ईनामी कई पीएलजीए कंपनी नंबर 6 के सदस्य और डीवीसीएम रैंक के नक्सली शामिल हैं। इनमें

नीति के अलावा सुरेश सलाम,डीवीसीएम, मीना माडकम डीवीसीएम, अर्जुन पीपीसीएम पीएलजीए कंपनी 6, सुंदर पीपीसीएम पीएलजीए कंपनी 6, बुधराम पपीसीएम पीएलजीए कंपनी 6, सुक्कू, पपीसीएम पीएलजीए कंपनी 6, सोहन एसीएम बारसूर एसी, फूलो, पपीसीएम पीएलजीए कंपनी 6, बसंती पीपीसीएम पीएलजीए कंपनी 6, सोमे पपीसीएम , पीएलजीए कंपनी 6, जमीला उर्फ बुधरी, पीएम पीएलजीए कंपनी 6, रामदेर, एसीएम, सुकलू उर्फ विजय एसीएम, जमली एसीएम, सोनू कोर्राम एसीएम अमदेई शामिल हैं। इन 16 नक्सलियों पर 1 करोड़ 30 लाख से ज्यादा का ईनाम घोषित था। अन्य 15 नक्सलियों की शिनाख्त की प्रक्रिया जारी है।

एसपी राय की अपील

दंतेवाड़ा पुलिस अधीक्षक गौरव राय ने कहा है कि पूर्वी बस्तर डिवीजन क्षेत्र के दुर्गम जंगल एवं विकट भौगोलिक परिस्थितियों में रहने वाले मूल निवासियों को नक्सलवादी विचारधारा से बचाना और उन्हें माओवादी सिद्धांतों के आकर्षण से बाहर निकालना ही हमारा मुख्य उद्देश्य है, ताकि क्षेत्र में विकास एवं शांति कायम हो सके। हम उन सभी मूलवासियों जो बाहरी विचारधारा और बाहर के नक्सली नेताओं के गलत प्रभाव में फंस गए हैं, उनसे अपील करते हैं कि वे नक्सलवाद एवं नक्सली विचारधारा को त्याग कर शासन की आत्मसमर्पण पुनर्वास नीति के जरिए समाज की मुख्यधारा से जुड़ें और हथियार

मार गिराए शीर्ष नक्सली: आईजी

बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी. ने बताया कि वर्ष 2024 में माओवादियों संगठन के शीर्ष नेतृत्व को सुरक्षा बलों द्वारा भारी क्षति पहुंचाई गई है। विगत 9 महिने में डीकेएसजेडसी जोगन्ना जिला पेदापल्ली, तेलंगाना राज्य, डीकेएसजेडसी रंधेर जिला वारंगल राज्य तेलंगाना, डीकेएसजेडसी रूपेश गढ़चिरौली महाराष्ट्र, टीसीएससी मेंबर सीआरसी -2 कमांडर सागर जिला भूपलपल्ली तेलंगाना, डीवीसीएम शंकर राव जिला भूपलपल्ली तेलंगाना, डीवीसीएम विनस जिला वारंगल तेलंगाना, डीवीसीएम जगदीश बालाघाट मप्र, एसीएम संगीता उर्फ सन्नी गढ़चिरौली महाराष्ट्र, एसीएम लक्ष्मी मलकानगिरी ओड़िशा, एसीएम रजीता वारंगल तेलंगाना जैसे दूसरे राज्यों के सीनियर माओवादी कैडर को सुरक्षा बल अलग अलग मुठभेड़ों में ढेर कर चुके हैं।

अब तक ढेर किए 44

नारायणपुर के पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार ने द्वारा बताया कि वर्ष 2024 में नारायणपुर जिले में संचालित नक्सल विरोधी अभियान में अब तक कुल 44 माओवादी मारे गए हैं, 29 गिरफ्तार किए गए हैं एवं 47 माओवादियों द्वारा आत्मसमर्पण किया गया है

उप पुलिस महानिरीक्षक दंतेवाड़ा कमलोचन कश्यप ने बताया कि इस ऑपरेशन के बाद नक्सलियों के गढ़ रहे पूर्वी बस्तर डिवीजन के माओवादियों में भय का माहौल है। इस क्षेत्र को नक्सली शीर्ष नेतृत्व अपना सुरक्षित ठिकाना मानते हैं। नक्सली नेतृत्व इस ऑपरेशन उपरांत ग्रामीणों एवं अपने निचले कैडर पर दोषारोपण कर रहे हैं। सुरक्षा बलों का नक्सलियों के अटैकिंग फोर्स के स्तंभ पर यह कड़ा प्रहार है।

अब तक 188 शव बरामद

पुलिस महानिरीक्षक, बस्तर रेंज सुंदरराज पी. ने एक जानकारी में बताया कि प्रतिबंधित सीपीआई माओवादी संगठन के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने के उद्देश्य से स्थानीय जिला पुलिस बल, डीआरजी तथा केंद्रीय अर्धसैनिक बलों द्वारा आपसी बेहतर तालमेल एवं रणनीति के साथ काम करने के परिणाम स्वरूप वर्ष 2024 में बस्तर संभाग में अब तक कुल 188 नक्सलियों के शव बरामद हुए हैं, 706 गिरफ्तार किए गए हैं और 733 नक्सलियों द्वारा आत्मसमर्पण किया जा चुका है।

गांव को महामारी से बचाती हैं टलनार गांव की आराध्य देवी दुलार देई माता

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  • चावल और कच्चा दूध अर्पित करने की परंपरा है देवी मां को
  • ग्रामीणों की अटूट आस्था है मातारानी दुलार देई पर
  • नवरात्रि पर अर्जुन झा की विशेष रिपोर्ट-

बकावंड वैसे तो बस्तर संभाग में देवी देवताओं के पचासों स्थान और सबकी अपनी अपनी परंपराएं और पूजा पद्धति हैं। बस्तर की प्रमुख आराध्य देवी दंतेश्वरी माई है। इन्हीं दंतेश्वरी माई का अंश बकावंड विकासखंड की टलनार ग्राम पंचायत में माता दुलार देई के रूप में विराजमान है। यह देवी गांव की कुलदेवी है और लगभग डेढ़ सौ साल से ग्रामीण पूरी श्रद्धा भक्ति के साथ माता दुलार देई की पीढ़ी दर पीढ़ी आराधना करते आ रहे हैं। आइए हम आपको सुनाते हैं मातारानी दुलार देई की गौरव गाथा…

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बस्तर जिले की जनपद पंचायत बकावंड की ग्राम पंचायत टलनार में मां दुलार देई की आराधना लगभग डेढ़ सौ साल से की जा रही है। दुलार देई माता को कच्चा दूध अर्पित करने की परंपरा का निर्वहन ग्रामीण आज तक बखूबी करते आ रहे हैं। किवदंति है कि मां दुलार देई ने गांव वालों को महामारी के प्रकोप से बचाया था। आज भी गांव में जब कभी कोई रोग फैलने लगता है, तब ग्रामीण माता दुलार देई की ही शरण में पहले जाते हैं।

गांव के बड़े बुजुर्ग बताते हैं कि मातारानी दुलार देई का मंदिर करीब 140 से 150 वर्ष पूर्व से स्थापित है।माता दुलार देई की प्रतिमा बस्तर से लाई गई थी। दुलार देई की बड़ी बहन का नाम गंगा देई माता है। दशकों पहले जब अज्ञात रोगों के प्रकोप के चलते ग्रामीणों की मौत होने लगी तब माता दुलार देई की प्रतिमा की स्थापना मंदिर बनाकर पुरखों ने की थी। इस मंदिर के प्रथम पुजारी सुधु शुंडी थे और अभी 5 वी पीढ़ी के पुजारी बनसिंह हैं। इस मंदिर में जोत जलाने का क्रम करीब 20 साल से जारी है। टलनार गांव के अलावा आसपास के तथा सुदूर गांवों के भक्त भी माता दुलार देई के दरबार में दोनों नवरात्रियों पर ज्योत जलवाने लगे हैं। मंदिर की सारी व्यवस्थाएं ग्रामीण मिलजुल कर करते हैं। दुलार देई को दंतेश्वरी माई का अंश माना जाता है। ग्रामीण बताते हैं कि कालरा हैजा की शिकायत से पचासों ग्रामीण की मौत हो गई थी, तब आपस में सलाह कर बस्तर से माई जी मूर्ति गांव में लाकर पूजा अर्चना शुरू की गई। इसके बाद रोग का कहर थम गया। जबसे गांव में माता दुलार देई की प्रतिमा स्थापित हुई तबसे आज तक टलनार में किसी भी रोग का प्रकोप नहीं हुआ है।

शनि, मंगल को पूजा, चावल का प्रसाद

माता दुलार देई की पूजा विधि कुछ खास है। विशेष दिन और अवसर पर माता रानी की विशेष पूजा की जाती है। शनिवार और मंगलवार को यह विशेष पूजा की जाती है और माता को चावल तथा कच्चे दूध का भोग का अर्पित किया जाता है। ग्रामीणों के मुताबिक दुलार देई माता को उबला हुआ नहीं, बल्कि कच्चा दूध ही पसंद है।

गांव को महामारी से बचाती हैं टलनार गांव की आराध्य देवी दुलार देई माता

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  • चावल और कच्चा दूध अर्पित करने की परंपरा है देवी मां को
  • ग्रामीणों की अटूट आस्था है मातारानी दुलार देई पर
  • नवरात्रि पर अर्जुन झा की विशेष रिपोर्ट-

बकावंड वैसे तो बस्तर संभाग में देवी देवताओं के पचासों स्थान और सबकी अपनी अपनी परंपराएं और पूजा पद्धति हैं। बस्तर की प्रमुख आराध्य देवी दंतेश्वरी माई है। इन्हीं दंतेश्वरी माई का अंश बकावंड विकासखंड की टलनार ग्राम पंचायत में माता दुलार देई के रूप में विराजमान है। यह देवी गांव की कुलदेवी है और लगभग डेढ़ सौ साल से ग्रामीण पूरी श्रद्धा भक्ति के साथ माता दुलार देई की पीढ़ी दर पीढ़ी आराधना करते आ रहे हैं। आइए हम आपको सुनाते हैं मातारानी दुलार देई की गौरव गाथा…

बस्तर जिले की जनपद पंचायत बकावंड की ग्राम पंचायत टलनार में मां दुलार देई की आराधना लगभग डेढ़ सौ साल से की जा रही है। दुलार देई माता को कच्चा दूध अर्पित करने की परंपरा का निर्वहन ग्रामीण आज तक बखूबी करते आ रहे हैं। किवदंति है कि मां दुलार देई ने गांव वालों को महामारी के प्रकोप से बचाया था। आज भी गांव में जब कभी कोई रोग फैलने लगता है, तब ग्रामीण माता दुलार देई की ही शरण में पहले जाते हैं।

गांव के बड़े बुजुर्ग बताते हैं कि मातारानी दुलार देई का मंदिर करीब 140 से 150 वर्ष पूर्व से स्थापित है।माता दुलार देई की प्रतिमा बस्तर से लाई गई थी। दुलार देई की बड़ी बहन का नाम गंगा देई माता है। दशकों पहले जब अज्ञात रोगों के प्रकोप के चलते ग्रामीणों की मौत होने लगी तब माता दुलार देई की प्रतिमा की स्थापना मंदिर बनाकर पुरखों ने की थी। इस मंदिर के प्रथम पुजारी सुधु शुंडी थे और अभी 5 वी पीढ़ी के पुजारी बनसिंह हैं। इस मंदिर में जोत जलाने का क्रम करीब 20 साल से जारी है। टलनार गांव के अलावा आसपास के तथा सुदूर गांवों के भक्त भी माता दुलार देई के दरबार में दोनों नवरात्रियों पर ज्योत जलवाने लगे हैं। मंदिर की सारी व्यवस्थाएं ग्रामीण मिलजुल कर करते हैं। दुलार देई को दंतेश्वरी माई का अंश माना जाता है। ग्रामीण बताते हैं कि कालरा हैजा की शिकायत से पचासों ग्रामीण की मौत हो गई थी, तब आपस में सलाह कर बस्तर से माई जी मूर्ति गांव में लाकर पूजा अर्चना शुरू की गई। इसके बाद रोग का कहर थम गया। जबसे गांव में माता दुलार देई की प्रतिमा स्थापित हुई तबसे आज तक टलनार में किसी भी रोग का प्रकोप नहीं हुआ है।

शनि, मंगल को पूजा, चावल का प्रसाद

माता दुलार देई की पूजा विधि कुछ खास है। विशेष दिन और अवसर पर माता रानी की विशेष पूजा की जाती है। शनिवार और मंगलवार को यह विशेष पूजा की जाती है और माता को चावल तथा कच्चे दूध का भोग का अर्पित किया जाता है। ग्रामीणों के मुताबिक दुलार देई माता को उबला हुआ नहीं, बल्कि कच्चा दूध ही पसंद है।

बोनस पर प्रबंधन के रवैया के खिलाफ खदान कर्मियों ने भरी हुंकार, कहा कि हड़ताल होकर रहेगी

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दल्लीराजहरा अक्टूबर को दिल्ली में संपन्न एनजेसीएस बैठक में बोनस के मुद्दे पर प्रबंधन के नकारात्मक रवैये के खिलाफ पूरे सेल में 5 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन कार्यक्रम में हिस्सेदारी करते हुए खदान कर्मियों ने भी संयुक्त यूनियन मोर्चा के नेतृत्व में राजहरा माइंस ऑफिस के सामने जमकर प्रदर्शन किया और चेतावनी दी कि यदि बोनस के फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया गया तो खदानों में जल्द ही हड़ताल होगी ।

उल्लेखनीय है कि सेल कर्मचारियों के बोनस का विवाद गहराता जा रहा है। 1 अक्टूबर 2024 को दिल्ली में बोनस के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए सभी यूनियन को बुलाया गया था, प्रबंधन ने विवादित व अस्वीकार्य फार्मूले के अनुसार 26500 बोनस देने की घोषणा की । जिसे नकारते हुए सभी यूनियनों ने एक स्वर में कहा कि सेल में कर्मियों के योगदान,और उत्पादन व उत्पादकता को ध्यान में रखते हुए 2022 में दिए गए 40500 से कम बोनस पर बात नहीं बनेगी । लेकिन प्रबंधन नेअपनी मनमानी करते हुए सेल कर्मियों के खाते में 26500 रूपये की राशि डाल दी । सेल स्तर पर सभी यूनियन के नेताओं ने 2 अक्टूबर को बैठक कर तय किया है कि प्रबंधन के इस रवैया के खिलाफ आंदोलन आवश्यक हो गया है । आंदोलन की रूप रेखा तय करते हुए उन्होंने 5 अक्टूबर को सेल की सभी इकाइयों में संयुक्त प्रदर्शन किया । जिसके तहत राजहरा में भी खदान कर्मियों ने संयुक्त यूनियनों एटक, सीटू, इंटक, बीएमएस,छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ,के नेतृत्व में प्रदर्शन किया और प्रबंधन को ज्ञापन सौंपा ।

इस अवसर पर खदान कर्मचारियों को संबोधित करते हुए एटक के सचिव कमलजीत सिंह मान ने कहा कि सेल प्रबंधन नियमित एवं ठेका कर्मियों के मामले में लगातार मनमाना होते जा रहा है इसके खिलाफ निर्णायक संघर्ष जरूरी हो गया है। खदान कर्मी सेलस्तर के आंदोलन के साथ स्थानीय स्तर पर भी ठेका एवं रेगुलर कर्मचारियों की मांगों को लेकर लगातार संघर्षरत हैं ,आवश्यकता पड़ने पर हम अनिश्चित कालीन हड़ताल के लिए तैयार है। सीटू के कार्यकारी अध्यक्ष ज्ञानेंद्र सिंह एवं सचिव प्रकाश सिंह क्षत्रिय ने कहा कि वेज रिवीजन से लेकर अब तक हम देखते आ रहे हैं कि प्रबंधन एनजेसीएस के सर्वसम्मति की पर परिपाटी को तोड़ते हुए बहुमत के खेल पर उत्तर आया है, और अब हालात यह है कि वह किसी की नहीं सुन रहा है ।अब सेल प्रबंधन का रवैया बेहद नकारात्मक और मनमानीपूर्ण है । नियमित कर्मचारियों के वेज रिवीजन में एवं ठेका मजदूरों के वेतन तय करते समय भी प्रबंधन का रवैया ऐसा ही देखने को मिला है। और अब बोनस के मामले में भी प्रबंधन हिटलर शाही कर रहा है । जिससे श्रमिकों में काफी आक्रोश है प्रबंधन के इस रवैया को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता । इसलिए अब निर्णायक संघर्ष आवश्यक हो गया है । हम खदानों में हड़ताल के लिए पूरी तरह तैयार है। इंटक यूनियन के अध्यक्ष तिलक मानकर ने कहा कि सेल प्रबंधन के रवैया के खिलाफ खदान कर्मचारी करने एकजुट है और स्थानीय स्तर पर भी जो समस्याएं हैं उनके लिए हम सब एक होकर संघर्षरत है, यदि प्रबंधन ने जल्द से जल्द कर्मियों के हित में फैसला नहीं लिया तो हम हर हाल में हड़ताल पर जाने को बाध्य होगें। बीएमएस यूनियन के अध्यक्ष मुस्ताक अहमद ने कहा कि दिल्ली से लेकर दल्ली तक प्रबंधन का रवैया एक जैसा है जिस तरह दिल्ली में मनमानी चल रही है उस तरह स्थानीय स्तर के अधिकारी भी पूरी तरह भ्रष्टाचार में लिप्त होकर नियमित एवं ठेका श्रमिकों का शोषण कर रहे हैं जिसे हम किसी कीमत पर भी बर्दाश्त नहीं करेंगे और हम अनिश्चितकालीन हड़ताल में जाने को तैयार है । छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ के अध्यक्ष सोमनाथ उइके ने कहा कि राजहरा की परंपरा रही है कि नियमित और ठेका श्रमिक हमेशा कंधे से कंधा मिलाकर काम करते हैं, और इसी तरह एक जुट होकर अपने हक और अधिकार के लिए संघर्ष भी करते हैं। आने वाले दिनों में नियमित एवं ठेका कर्मियों की मांगों पर सभी एकजुट होकर हड़ताल समेत सभी प्रकार की कार्यवाही के लिए तैयार रहेंगे । उन्होंने कहा कि हम प्रबंधन को चेतावनी देते हैं कि वह जल्द से जल्द श्रमिकों की मांगों पर सकारात्मक विचार करे,अन्यथा खदान कर्मी अपनी परंपरा अनुसार अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए बाध्य होंगे। धन्यवाद ज्ञापन करते हुए एटक अध्यक्ष राजेंद्र बेहरा ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से सेल प्रबंधन पूरी तरह निरंकुश हो चुका है। अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच खाई बढ़ती जा रही है, यह भेदभाव जानबूझकर किया जा रहा है। इसलिए इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। आज हम प्रबंधन को मांग पत्र सौंप रहे हैं, यदि जल्द ही हमारी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो सेल की केंद्रीय यूनियनों के आह्वान पर हम हड़ताल में जाने के लिए बाध्य होंगे। जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी। प्रदर्शन के बाद प्रबंधन को ज्ञापन सौंपा गया तथा मुख्य महाप्रबंधक आर बी गहरवार से स्थानीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। जिसमें ठेका श्रमिकों का समय पर बोनस भुगतान करने, चिकित्सा सुविधा को विधिवत लागू करने, एवं ठेका श्रमिकों का समय पर को वेतन भुगतान तथा डीएवी स्कूल की समस्याओं पर चर्चा की गई । आज सौंपे गए ज्ञापन में 39 महीने के एरियर्स की राशि देने, बोनस फार्मूले पर विस्तृत चर्चा कर बोनस की राशि न्यूनतम 40500 से आगे बढने, पिछले वेज रिवीजन के सभी लंबित मुद्दों को हल करने की मांग की गई है। धरना प्रदर्शन का संचालन करते हुए सीटू अध्यक्ष पुरुषोत्तम सिमैया ने कहा कि यह आंदोलन चरणबद्ध चलेगा 14 और 15 अक्टूबर को दो दिवसीय विशाल धरने के बाद प्रबंधन को हड़ताल नोटिस सौंपा जाएगा। आज के कार्यक्रम में विनोद मिश्रा, तोरण लाल साहू राजाराम बरगढ़, श्रीनिवास, संतोष घराना, लखन चौधरी, एमपी सिंह, कुलदीप सिंह, समेत तमाम यूनियन नेताओं और खदान के नियमित एवं ठेका श्रमिकों ने सक्रिय भागीदारी की ।

 

साइबर जन जागरूकता पखवाड़ा

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यदि कोई अंजान व्यक्ति आपको काल मेसेज कर लुभावना ऑफर देता है या किसी सर्विस के ब्लॉक होने का भय दिखाता है किसी एक्सिस्टिंग सर्विस , ऑनलाइन खरीददारी या व्यक्तिगत जानकारी देकर आपको। विश्वास में लेता है तो सचेत हो जाइए आप साइबर ठगी के शिकार हो सकते है

डिजिटल दौर में आए दिन साइबर ठगी के नए नए तरीकों के बारे में हम सुनते है ,इन नए नए तरीकों से साइबर ठग लोगो को अपने जाल में फंसाते है

सर्विस ब्लॉक होने का भय दिखाकर

किसी भी प्रकार की सर्विस जो आप सर्विस प्रोवाइडर से ले रहे ,सीधे काल से या मेसेज से जिसने एक मोबाइल नंबर लिखा होता है ,सर्विस बंद हो जाने की जानकारी आपको भेजी जाती है ,की आपका सर्विस ब्लॉक हो गया है अगर सर्विंस कंटिन्यू करना है तो ऑन लाइन पैसे पे करना होगा

आपने किसी भी प्रकार की सर्विस पूर्व में ले के रखा है ,कहीं बीमा कराया है ,कोई लोन के रखा है ,जिसके बदले आपने अपना बायोडाटा दिया है ,बैंक में आपने केवाईसी फॉर्म भरते समय अपना डेटा मोबाइल न, पेन कार्ड ,आधार कार्ड न, फोटो ग्राफ दिया है , आपको उसी सर्विस प्रोवाइडर के नाम से फर्जी काल आ सकता है ,ऐसे जगह से आपकी डेटा चोरी हो चुकी होती है। आपको फोन के माध्यम से आपकी पूरी जानकारी दी जा कर विश्वाश में लेकर आपसे ठगी की जाती है।

ऑन लाइन खरीददारी

आज ई कॉमर्स का जमाना है ,समय की बचत और पैसे बचाने के हम ऑन लाइन खरीददारी करते है ,जो समान ऑनलाइन हमे दिखाया जाता है ,उसकी डिलीवरी होती नही है ,कई बार डिलीवरी लेने के बाद पता चलता है की प्रोडक्ट की जगह ईट पत्थर भेजे जाते है।

क्या करें

सर्विस ब्लॉक होने संबंधी काल या मेसेज आने पर चेक करे वास्तव में सर्विस ब्लॉक हुई है अथवा नहीं ,सर्विस प्रोवाइडर से सीधे बात करें

इनको भय में आकर पेमेंट नही करें

आपको फोन से आपके बारे में अगर पूरी जानकारी दी जाकर कोई लुभावना ऑफर बताया जाए तो सतर्क हो जाए ,सीधे सर्विस प्रोवाइडर से मिले ,लालच ने आकर कोई पेमेंट न करें।

ऑन लाइन खरीददारी करते समय सतर्क रहे ,विश्वशनीय साइट से ही खरीददारी करें

सही समान की डिलीवरी नही होने की स्थिति में उपभोक्ता फोरम के पोर्टल में ऑनलाइन या व्यक्तिगतकी जा सकती है।

घटना होने पर क्या करे 

साइबर अपराध घटित होने की स्थिति में 1930 पर काल करे सेंट्रल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल ,ww.cyber crime.gov.in पर रिपोर्ट करे।

 

 

झाड़ेश्वर परिवहन समिति का सांसद व विधायक ने किया उदघाटन

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जगदलपुर बस्तर जिले के जगदलपुर जनपद पंचायत क्षेत्र में स्थापित नगरनार स्टील प्लांट प्रभावितों ने संगठित होकर झाड़ेश्वर परिवहन समिति गठन किया है और परिवहन क्षेत्र में अपनी सक्रियता बढ़ाने नये कार्यालय की शुरुआत किया है जिसका विधिवत उद्घाटन सांसद महेश कश्यप व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव (जगदलपुर, विधायक) ने किया। इससे पूर्व बस्तरियां संस्कृति अतिथियों का स्वागत किया गया।

केंद्र सरकार की सार्वजनिक उपक्रम कंपनी एनएमडीसी द्वारा नगरनार में स्टील प्लांट की स्थापना किया है और अब यहां से उत्पादन शुरू हो गया है जिसके तहत् परिवहन कार्य के झाड़ेश्वर परिवहन समिति भी सक्रिय हुई है। नगरनार स्टील प्लांट क्षेत्र से सटे आमागुड़ा में भव्य कार्यालय का निर्माण किया गया है जिसमें परिवहन व्यवस्था सुचारू रूप से चलेगा। शनिवार को झाड़ेश्वर परिवहन समिति के आग्रह पर बस्तर सांसद महेश कश्यप व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव (जगदलपुर, विधायक) आमागुड़ा पहुंचे तथा परिवहन कार्यालय में पूजा अर्चना कर कार्यालय का लोकार्पण किया। नेता द्वय ने इस अवसर पर झाड़ेश्वर परिवहन समिति को बधाई और शुभकामनाएं दी तथा उज्जवल भविष्य की कामना किया।बस्तर सांसद महेश कश्यप व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव (जगदलपुर, विधायक) आमागुड़ा पहुंचे तब उनका जोशीले अंदाज में परिवहन समीति अध्यक्ष बनमाली नाग, सचिव रवि मानिकपुरी, बस्तर परिवहन संघ सचिव कन्हैया झा,श्रीमती गीता मिश्रा, रघु सेठिया,जलंधर बघेल,सीयाराम नाग,हरि साहू, खगेश्वर बघेल, लखीधर बघेल सहित अन्य उपस्थित थे।

जनता से पहले जैसा ही जुड़ाव और लगाव रखते हैं पूर्व विधायक रेखचंद जैन

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  • पूर्व विधायक जैन ने शव को दिया कांधा, गंभीर पीड़ितों का जाना हाल
  •  उल्टी -दस्त से मृत महिला के अंतिम संस्कार में हुए शामिल हुए रेखचंद 

जगदलपुर पूर्व विधायक रेखचंद जैन भले ही पूर्व हो चुके हैं, मगर क्षेत्र की जनता से उनका जुड़ाव और लगाव अपूर्व है। वे आज भी क्षेत्र के गांवों में जाकर लोगों का दुख दर्द साझा करते हैं।

रेखचंद जैन शनिवार को जगदलपुर विधानसभा क्षेत्र के मुंडागढ़, के आश्रित पारा कासरीरास, कोलेंग गए, जहां पिछले कुछ दिनों से उल्टी- दस्त के प्रकोप से ग्रामीण जूझ रहे हैं। इन वन ग्रामों में इस बीमारी के प्रकोप का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यहां एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो चुकी है। शनिवार को मृत महिला देवली के अंतिम संस्कार में शामिल हुए श्री जैन ने शव को कांधा भी दिया। उन्होने निकटतम रिश्तेदारों व शोकाकुल परिजनों को ढाढ़स बंधाया। इसके बाद  जैन ने कोलेंग अस्पताल जाकर वहां भर्ती छिंदगुर के पीड़ितों का हालचाल जाना। उन्होने डाक्टरों व उनके स्टाफ से भी चर्चा की और मरीजों के उपचार की जानकारी ली। रेखचंद जैन के ऐसे ही शानदार व्यवहार से लोग बेहद प्रभावित हैं और अपनी समस्याएं लेकर आज भी उनके पास पहुंचते हैं। जैन के साथ शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य, हेमू उपाध्याय, परमजीत सिंह जसवाल, नीलाम कश्यप, विजेंद्र सिंह, अल्ताफ़ उल्ला ख़ान, शादाब ख़ान पूर्व उप सरपंच मानूराम नाग व अन्य थे।

बस्तर दशहरा में रथ खींचने वाले समुदाय को दिया न्योता

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  • निमंत्रण देने किलेपाल पहुंचे सांसद कश्यप और तहसीलदार आशीष कुमार 

किलेपाल ऐतिहासिक बस्तर दशहरा के लिए किलेपाल परगना के लोगों को रथ खींचने का निमंत्रण देने के लिए बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष बस्तर सांसद महेश कश्यप और जगदलपुर तहसीलदार आशीष कुमार समिति के मेंबर मेंबरिन के साथ किलेपाल पहुंचे।

सांसद महेश कश्यप ने बस्तर दशहरा का रथ खींचने वाले समुदाय के लोगों को निमंत्रण दिया और रथ खींचने के लिए आने का आग्रह पूर्वक न्योता दिया। अपने उद्बोधन में तहसीलदार आशीष कुमार ने कहा कि परंपरागत चलते आ रहे परंपराओं को निर्वहन करते हुए आप सभी को निमंत्रण देता हूं। बस्तर दशहरा में रथ खींचने के लिए यथासंभव बस्तर दशहरा समिति द्वारा आप सभी की सेवा के लिए वहां पर सभी व्यवस्थाएं की गई हैं। किसी प्रकार की कमियां होंगी तो उन कमिययों को हम सभी दूर करने के लिए पूरा-पूरा प्रयास करेंगे। आप सभी ज्यादा ज्यादा लोग उपस्थित होकर बस्तर दशहरा के परंपरागत मान सम्मान को बनाएं रखें। कार्यक्रम में बस्तर सांसद महेश कश्यप बास्तानार तहसीलदार रोहन कुमार, भागवत साहू एवं मांझी मुखिया, चालकी, पटेल पुजारी मेंबर मेंबरिन परगना के लोग उपस्थित रहे।

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