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पेशी से जेल ले जाते समय फरार आरोपी को दुर्ग रेल्वे स्टेशन से बालोद पुलिस ने किया गिरफ्तार

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मामले का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है, कि प्रार्थी ने रिपोर्ट दर्ज कराया कि घटना दिनांक 06.06.2022 को उप जेल बालोद से आरोपियों को मुलजिम पेशी कराने जिला न्यायालय बालोद ले गये थे कि पेशी कराने के बाद आरोपी राजेन्द्र कुमार बंजारे पिता गैंदलाल उम्र 25 साल साकिन वार्ड क्रमांक 04 जैतखाम चौक राजपूर चौकी करही बाजार थाना बलौदाबाजार जिला बलौदाबाजार (छ0ग0) पेषी होने के उपरांत आरोपी को बस में बैठाते समय हाथ में लगे हथकडी को खिसका कर हाथ को निकालकर न्यायालय परिसर बालोद के सामने से पुलिस अभिरक्षा से फरार हो जाने से थाना बालोद में अपराध क्रमांक 265/2022 धारा 224 भादवि का अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया।

प्रकरण के फरार आरोपी एवं गिरफतारी हेतु पुलिस पुलिस महानिरीक्षक दुर्ग रेंज बी.एन.मीणा के निर्देशन पर पुलिस अधीक्षक बालोद जितेन्द्र कुमार यादव के मार्गदर्शन में, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बालोद हरीष राठौर एवं पुलिस अनुविभागीय अधिकारी बालोद प्रतीक चतुर्वेदी व सायबर सेल डी.एस.पी राजेष बागडे के द्वारा एक विशेष टीम तैयार कर दुर्ग-रायपुर-बिलासपुर टीम को रवाना किया गया था, कि मुखबीर सूचना एवं तकनिकी सहायता से आरोपी का बिलासपुर से दुर्ग ट्रेन के माध्यम से आने की सूचना पर रेल्वे स्टेशन दुर्ग पर धेराबंदी कर आरोपी को गिरफ्तार कर एवं पूर्व के अपराध क्रमांक 187/22 में जारी गिरफतारी वारंट पर न्यायालय पेश किया गया।
प्रकरण में विवेचना एवं आरोपी के पतासाजी में थाना प्रभारी बालोद निरीक्षक नवीन बोरकर, उपनिरीक्षक खगेन्द्र पठारे, आरक्षक भोपसिंह साहू, प्रवीण साहू, प्रहलाद कुर्रे, महिला आरक्षक नमिता यादव, सायबर सेल से आरक्षक योगेश सिन्हा, राहुल मनहरे, मिथलेश यादव की सराहनीय भूमिका रही है।

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मुझ पर भी होती ‘‘डी. एम. एफ” की मेहरबानी तो, मैं भी सजती “दुल्हन” की तरह

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अमरेश झा

कोंडागांव :- किसी भी क्षेत्र के विकास एवं सुंदरता को निहारने के पीछे वंहा के शासन व अधिकारियों का बहुत बड़ा योगदान व तपस्या होता है, जिसमें कोंडागांव जिला बनने के बाद भी यंहा के शासन एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने इसके भौतिक सुंदरता को निखारने में कोई कसर नही छोड़ी है। लेकिन किसी भी विकास कार्य के लिए सबसे अहम होता है बजट और ऐसी ही अतिआवश्यक बजटों में से एक होता है ‘‘डी. एम. एफ.” फण्ड, जो प्रशासन की योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए महत्वपूर्ण बजटों में से एक होता है जिसे प्रशासनिक अधिकारी अपने क्षेत्र के विकास के लिए आवस्यकता अनुसार खर्च करते हैं, और कोंडागांव के विकास के लिए इस मद का भरपूर उपयोग भी किया गया है जिसे कोंडागांव में भौतिक रूप से देखा भी जा सकता है। जिनमे जिला अस्पताल अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, और इस कड़ी में कई और भी निर्माण कार्य हुए हैं जो कोंडागांव की जनता एवं क्षेत्र के लिए बहुत जरूरी भी था, बल्कि इस फण्ड से कोंडागांव ने विकास के नए आयाम भी तय किये हैं जिसमें कोई दोमत नहीं है। परंतु जब बात आती है कोंडागांव जिला मुख्यालय के हृदय स्थल में स्थिति प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की तो विकास की बातें बेमानी सी लगती है क्योंकि यह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र आज भी अपनी बदहाली पर आंसु बहा रहा है, और अपनी जीर्णोद्धार के लिए टकटकी लगाए किसी बजट का बाट जोहते हुए सोच रहा है कि काश मुझपे भी शासन प्रशासन की नजर पड़ती और मैं भी किसी दुल्हन की तरह सजती।

मुझ पर भी होती ‘‘डी. एम. एफ” की मेहरबानी तो, मैं भी सजती “दुल्हन” की तरह

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अमरेश झा

कोंडागांव :- किसी भी क्षेत्र के विकास एवं सुंदरता को निहारने के पीछे वंहा के शासन व अधिकारियों का बहुत बड़ा योगदान व तपस्या होता है, जिसमें कोंडागांव जिला बनने के बाद भी यंहा के शासन एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने इसके भौतिक सुंदरता को निखारने में कोई कसर नही छोड़ी है। लेकिन किसी भी विकास कार्य के लिए सबसे अहम होता है बजट और ऐसी ही अतिआवश्यक बजटों में से एक होता है ‘‘डी. एम. एफ.” फण्ड, जो प्रशासन की योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए महत्वपूर्ण बजटों में से एक होता है जिसे प्रशासनिक अधिकारी अपने क्षेत्र के विकास के लिए आवस्यकता अनुसार खर्च करते हैं, और कोंडागांव के विकास के लिए इस मद का भरपूर उपयोग भी किया गया है जिसे कोंडागांव में भौतिक रूप से देखा भी जा सकता है। जिनमे जिला अस्पताल अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, और इस कड़ी में कई और भी निर्माण कार्य हुए हैं जो कोंडागांव की जनता एवं क्षेत्र के लिए बहुत जरूरी भी था, बल्कि इस फण्ड से कोंडागांव ने विकास के नए आयाम भी तय किये हैं जिसमें कोई दोमत नहीं है। परंतु जब बात आती है कोंडागांव जिला मुख्यालय के हृदय स्थल में स्थिति प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की तो विकास की बातें बेमानी सी लगती है क्योंकि यह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र आज भी अपनी बदहाली पर आंसु बहा रहा है, और अपनी जीर्णोद्धार के लिए टकटकी लगाए किसी बजट का बाट जोहते हुए सोच रहा है कि काश मुझपे भी शासन प्रशासन की नजर पड़ती और मैं भी किसी दुल्हन की तरह सजती।

नौकरी लगाने के नाम पर लाखों की ठगी करने वाले पर मेहरबान हैं मेडिकल कॉलेज के डीन और अधीक्षक – जनसभा

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  • नौकरी लगाने के नाम पर लाखों की ठगी करने वाले श्रवण भास्कर को मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल परिसर में एंट्री क्यों ? – जनसभा
  • कॉल मी सर्विस कंपनी के स्थानीय मैनेजर श्रवण भास्कर नौकरी लगवाने के नाम पर खुलेआम कर रहे हैं ठगी – डॉ. अरुण पाण्डेय्
  • 20 महिलाओं से लगभग 5 लाख रुपये लेने की बात पुलिस के सामने स्वीकार किया

छत्तीसगढ़ । जनसभा संगठन के बैनर तले मेडिकल कॉलेज/हॉस्पिटल जगदलपुर में सुरक्षा और सफ़ाई व्यवस्था संभालने वाली कंपनियों द्वारा आर्थिक अनियमितता की शिकायत लेकर लगातार महीनों से प्रदर्शन जारी है। परंतु शासन प्रशासन दोनों इस गंभीर विषय पर मुख बधिर होकर बैठे हुए हैं। ऐसा आरोप जनसभा के अध्यक्ष डॉ. अरुण पाण्डेय् ने लगाया है। जानकारी होकि मेडिकल कॉलेज/हॉस्पिटल जगदलपुर में सुरक्षा व्यवस्था संभालने वाली कंपनी सीडीओ सेक्युरिटिस एंड पब्लिक हेल्पलाइन और सफ़ाई व्यवस्था संभालने वाली कंपनी कॉल मी सर्विस दोनों के द्वारा पूर्व में अपने कर्मचारियों को शासन द्वारा तय न्यूनतम वेतनमान अनुसार भुगतान नही किया जाता था। जिस समस्या को जनसभा ने गंभीरता से उठाया तथा लंबे संघर्ष के बाद अब सैकड़ो कर्मचारियों को वेतन बढ़कर मिलना आरंभ हो चुका है। लेकिन कर्मचारियों की अनेकों मांगे अब तक लंबित है, जिस तऱफ कंपनी प्रबंधन और प्रशासन चुप्पी साधे बैठे हुए हैं। कॉल मी सर्विस के स्थानीय मैनेजर श्रवण भास्कर द्वारा मेडिकल कॉलेज/हॉस्पिटल जगदलपुर में नौकरी लगाने के नाम पर लगभग 5 लाख की वसूली बस्तर के बोलेभले आदिवासी महिलाओं से की गई और लंबे इंतज़ार के बडिस बात की शिकायत थाना में करने के उपरांत श्रवण भास्कर ने परपा थाना प्रभारी के समक्ष लगभग 5 लाख की वसूली की बात स्वीकार की है। बावजूद इसके अब तक महिलाओं का पैसा वापस नही हो पाया है। इसी प्रकार सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे कंपनी के कर्मचारी राजू बघेल पर बस्तर के युवाओं ने नौकरी लगाने के नाम पर पैसों की ठगी का आरोप मीडिया के समक्ष लगाया है।

नौकरी लगाने के नाम पर पैसों की ठगी करने वाले को संरक्षण क्यों ?- डॉ. अरुण पाण्डेय्

जनसभा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अरुण पाण्डेय् का कहना हैकि जब श्रवण बजास्कर द्वारा स्वयं पुलिस के अधिकारियों के समक्ष नॉकरी लगाने के नाम पर लगभग 5 लाख रुपये की ठगी करने स्वीकार कर लिया गया है। तब उसके विरुद्ध संबन्धित कंपनी प्रबंधन और मेडिकल कॉलेज / हॉस्पिटल प्रबंधन द्वारा कार्यवाही क्यों नही की गई है ? पैसों की ठगी करने वाले को आख़िरकार संरक्षण क्यों दिया जा रहा है? इसी प्रकार मेडिकल कॉलेज / हॉस्पिटल जगदलपुर में सुरक्षा व्यवस्था संभालने वाली कंपनी सीडीओ सेक्युरिटिस एंड हेल्पलाइन के कर्मचारी राजू बघेल पर भी युवाओं ने नौकरी लगाने के नाम पैसे की ठगी का आरोप लगाया है। डॉ. अरुण पाण्डेय् ने कहा कि मेडिकल कॉलेज / हॉस्पिटल परिसर में नौकरी लगाने के नाम पर खुलेआम अनुबंधित कंपनी के कमर्चारियों द्वारा पैसों की ठगी का रैकेट चल रहा है। इस बात की जानकारी के बावजूद मेडिकल कॉलेज के डीन और अधीक्षक द्वारा अनुबंधित कंपनी पर अब तक कार्यवाही क्यों नही की जा रही है ?

पैसों की ठगी करने वालों को मेडिकल कॉलेज / हॉस्पिटल परिसर में किया जाए प्रतिबंधित

अनुबंधित कंपनियों के कर्मचारियों द्वारा मेडिकल कॉलेज / हॉस्पिटल जगदलपुर में इस तरह का काम करके सरकारी संस्था की प्रतिष्ठा व इस पर जनता का विश्वास कम करने का प्रयास किया जा रहा है। इन कर्मचारियों पर कड़ी कार्यवाही करते हुए म तत्काल परिसर में आने पर प्रतिबंध लगाना चाहिए। अन्यथा की स्तिथि में जनसभा जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध प्रदर्शन करने बाध्य होगी।

बस्तर वनमंडल : बिना साइन बोर्ड लगाए जगदलपुर वन परिक्षेत्र के अधिकारी करा रहे लाखों के निर्माण कार्य

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भ्रष्टाचार : लाखों रुपए के पुलिया निर्माण के कार्य बिना साइन बोर्ड के वन विभाग के अधिकारी करवा रहे कहावत है जंगल में मोर नाचा किसने देखा और यह कहावत अगर किसी विभाग में सबसे अच्छी तरीके से फलीभूत होती है तो वह विभाग वन विभाग ही है क्योंकि लाखों के निर्माण कार्य के अलावा कई ऐसे कार्य हैं जिसे वन विभाग के अधिकारी कागजों में पूरा कर राशि आहरण करने के लिए कुख्यात रहे हैं और इसमें काफी हद तक छोटे अधिकारियों को बड़े अधिकारियों का संरक्षण किसी न किसी तरीके से मिलता रहता है जिससे विभाग के लोग शासन को करोड़ों रुपए की क्षति किसी न किसी तरीके से नुकसान पहुंचाते हैं इसी प्रकार से शासन का स्पष्ट निर्देश होता है कि किसी भी निर्माण कार्य को शुरू करने से पहले साइन बोर्ड लगाना अनिवार्य होता है

जिसमें निर्माण कार्य से संबंधित जानकारी देनी होती है जैसे की लागत राशि मजदूरों को देने जाने दिए जाने वाले मजदूरी भुगतान का विवरण के अलावा कार्य की समय सीमा और निर्माण एजेंसी का नाम लिखा जाना होता है लेकिन वन विभाग के अधिकतर निर्माण कार्यों में वन विभाग के अधिकारी लगातार लापरवाही बरत रहे हैं ताजा मामला शहरी क्षेत्र से लगा आमागुड़ा से धुरगुड़ा जाने

वाले मार्ग में स्थित वन विभाग के इलाके में दिख रहा है जहां लाखों के पुलिया निर्माण का कार्य जगदलपुर वन परिक्षेत्र के अधिकारी बिना साइन बोर्ड लगाए ही करवा रहे हैं निर्माण कार्यों को शुरू करने से पहले इस प्रकार की लापरवाही शासकीय विभागों के अधिकारी जानबूझकर करते हैं ताकि निर्माण कार्यों के संबंध में कोई भी जानकारी क्षेत्र के लोगों और जनप्रतिनिधियों को ना मिल पाए और आसानी से ही कार्य पूरा हो जाए और भ्रष्टाचार करने की उनकी मंशा भी पूरी हो जाए जगदलपुर वन परिक्षेत्र द्वारा कराए जा रहे उक्त निर्माण के कार्य स्थल का दौरा करने पर यह भी पाया गया कि निर्माण स्थल पर वन विभाग का कोई भी अधिकारी अथवा कर्मचारी उपस्थित नहीं रहा जिससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि निर्माण कार्य भी केवल मजदूरों के भरोसे ही वन विभाग करवा रहा है जबकि निर्माण स्थल पर विभाग के कर्मचारी अथवा इंजीनियर का होना अनिवार्य होता है इसे आसानी से कल्पना की जा सकती है कि जब शहरी क्षेत्र में इस प्रकार की लापरवाही वन विभाग के अधिकारी बरत रहे हैं तो दूरस्थ क्षेत्रों में चल रहे कार्यों में वन विभाग के अधिकारी कितनी संवेदनहीनता के साथ कार्य कर रहे होंगे कार्य पूरा होने के पश्चात वन विभाग के अधिकारी साइन बोर्ड लगाने के पैसे तक खा जाते हैं मगर साइन बोर्ड नहीं लगाते यह समझना समझ से परे है विभाग के बड़े अधिकारी इस प्रकार के निर्माण कार्य जो शहरी क्षेत्र में चल रहे हैं उनके शुरू होने से पहले या निर्माण कार्य के दौरान भी निर्माण स्थल का दौरा करते हैं या नहीं उनकी कार्यप्रणाली पर भी यह सवाल उठना भी लाजमी है इस मामले में वन विभाग के एसडीओ आशीष कुमार से चर्चा करने पर उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों को शुरू करने से पहले साइन बोर्ड लगाने के संबंध में शासन से कोई भी दिशा निर्देश वन विभाग को प्राप्त नहीं हुआ है और विभाग निर्माण कार्यों के शुरू होने या पूरा होने के बाद कभी भी साइन बोर्ड लगाने लगाने के लिए पूर्ण रूप से स्वतंत्र है |

बस्तर वनमंडल : बिना साइन बोर्ड लगाए जगदलपुर वन परिक्षेत्र के अधिकारी करा रहे लाखों के निर्माण कार्य

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भ्रष्टाचार : लाखों रुपए के पुलिया निर्माण के कार्य बिना साइन बोर्ड के वन विभाग के अधिकारी करवा रहे कहावत है जंगल में मोर नाचा किसने देखा और यह कहावत अगर किसी विभाग में सबसे अच्छी तरीके से फलीभूत होती है तो वह विभाग वन विभाग ही है क्योंकि लाखों के निर्माण कार्य के अलावा कई ऐसे कार्य हैं जिसे वन विभाग के अधिकारी कागजों में पूरा कर राशि आहरण करने के लिए कुख्यात रहे हैं और इसमें काफी हद तक छोटे अधिकारियों को बड़े अधिकारियों का संरक्षण किसी न किसी तरीके से मिलता रहता है जिससे विभाग के लोग शासन को करोड़ों रुपए की क्षति किसी न किसी तरीके से नुकसान पहुंचाते हैं इसी प्रकार से शासन का स्पष्ट निर्देश होता है कि किसी भी निर्माण कार्य को शुरू करने से पहले साइन बोर्ड लगाना अनिवार्य होता है

सड़ो की बाईट निचे लेंगे |

जिसमें निर्माण कार्य से संबंधित जानकारी देनी होती है जैसे की लागत राशि मजदूरों को देने जाने दिए जाने वाले मजदूरी भुगतान का विवरण के अलावा कार्य की समय सीमा और निर्माण एजेंसी का नाम लिखा जाना होता है लेकिन वन विभाग के अधिकतर निर्माण कार्यों में वन विभाग के अधिकारी लगातार लापरवाही बरत रहे हैं ताजा मामला शहरी क्षेत्र से लगा आमागुड़ा से धुरगुड़ा जाने वाले मार्ग में स्थित वन विभाग के इलाके में दिख रहा है जहां लाखों के पुलिया निर्माण का कार्य जगदलपुर वन परिक्षेत्र के अधिकारी बिना साइन बोर्ड लगाए ही करवा रहे हैं निर्माण कार्यों को शुरू करने से पहले इस प्रकार की लापरवाही शासकीय विभागों के अधिकारी जानबूझकर करते हैं ताकि निर्माण कार्यों के संबंध में कोई भी जानकारी क्षेत्र के लोगों और जनप्रतिनिधियों को ना मिल पाए और आसानी से ही कार्य पूरा हो जाए और भ्रष्टाचार करने की उनकी मंशा भी पूरी हो जाए जगदलपुर वन परिक्षेत्र द्वारा कराए जा रहे उक्त निर्माण के कार्य स्थल का दौरा करने पर यह भी पाया गया कि निर्माण स्थल पर वन विभाग का कोई भी अधिकारी अथवा कर्मचारी उपस्थित नहीं रहा जिससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि निर्माण कार्य भी केवल मजदूरों के भरोसे ही वन विभाग करवा रहा है जबकि निर्माण स्थल पर विभाग के कर्मचारी अथवा इंजीनियर का होना अनिवार्य होता है इसे आसानी से कल्पना की जा सकती है कि जब शहरी क्षेत्र में इस प्रकार की लापरवाही वन विभाग के अधिकारी बरत रहे हैं तो दूरस्थ क्षेत्रों में चल रहे कार्यों में वन विभाग के अधिकारी कितनी संवेदनहीनता के साथ कार्य कर रहे होंगे कार्य पूरा होने के पश्चात वन विभाग के अधिकारी साइन बोर्ड लगाने के पैसे तक खा जाते हैं मगर साइन बोर्ड नहीं लगाते यह समझना समझ से परे है विभाग के बड़े अधिकारी इस प्रकार के निर्माण कार्य जो शहरी क्षेत्र में चल रहे हैं उनके शुरू होने से पहले या निर्माण कार्य के दौरान भी निर्माण स्थल का दौरा करते हैं या नहीं उनकी कार्यप्रणाली पर भी यह सवाल उठना भी लाजमी है इस मामले में वन विभाग के एसडीओ आशीष कुमार से चर्चा करने पर उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों को शुरू करने से पहले साइन बोर्ड लगाने के संबंध में शासन से कोई भी दिशा निर्देश वन विभाग को प्राप्त नहीं हुआ है और विभाग निर्माण कार्यों के शुरू होने या पूरा होने के बाद कभी भी साइन बोर्ड लगाने लगाने के लिए पूर्ण रूप से स्वतंत्र है |

बस्तर वनमंडल : बिना साइन बोर्ड लगाए जगदलपुर वन परिक्षेत्र के अधिकारी करा रहे लाखों के निर्माण कार्य
वरिष्ठ अधिकारियों का संरक्षण या लापरवाही

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भ्रष्टाचार : लाखों रुपए के पुलिया निर्माण के कार्य बिना साइन बोर्ड के वन विभाग के अधिकारी करवा रहे

कहावत है जंगल में मोर नाचा किसने देखा और यह कहावत अगर किसी विभाग में सबसे अच्छी तरीके से फलीभूत होती है तो वह विभाग वन विभाग ही है क्योंकि लाखों के निर्माण कार्य के अलावा कई ऐसे कार्य हैं जिसे वन विभाग के अधिकारी कागजों में पूरा कर राशि आहरण करने के लिए कुख्यात रहे हैं और इसमें काफी हद तक छोटे अधिकारियों को बड़े अधिकारियों का संरक्षण किसी न किसी तरीके से मिलता रहता है जिससे विभाग के लोग शासन को करोड़ों रुपए की क्षति किसी न किसी तरीके से नुकसान पहुंचाते हैं इसी प्रकार से शासन का स्पष्ट निर्देश होता है कि किसी भी निर्माण कार्य को शुरू करने से पहले साइन बोर्ड लगाना अनिवार्य होता है जिसमें निर्माण कार्य से संबंधित जानकारी देनी होती है जैसे की लागत राशि मजदूरों को देने जाने दिए जाने वाले मजदूरी भुगतान का विवरण के अलावा कार्य की समय सीमा और निर्माण एजेंसी का नाम लिखा जाना होता है लेकिन वन विभाग के अधिकतर निर्माण कार्यों में वन विभाग के अधिकारी लगातार लापरवाही बरत रहे हैं ताजा मामला शहरी क्षेत्र से लगा आमागुड़ा से धुरगुड़ा जाने वाले मार्ग में स्थित वन विभाग के इलाके में दिख रहा है जहां लाखों के पुलिया निर्माण का कार्य जगदलपुर वन परिक्षेत्र के अधिकारी बिना साइन बोर्ड लगाए ही करवा रहे हैं निर्माण कार्यों को शुरू करने से पहले इस प्रकार की लापरवाही शासकीय विभागों के अधिकारी जानबूझकर करते हैं ताकि निर्माण कार्यों के संबंध में कोई भी जानकारी क्षेत्र के लोगों और जनप्रतिनिधियों को ना मिल पाए और आसानी से ही कार्य पूरा हो जाए और भ्रष्टाचार करने की उनकी मंशा भी पूरी हो जाए |

जगदलपुर वन परिक्षेत्र द्वारा कराए जा रहे उक्त निर्माण के कार्य स्थल का दौरा करने पर यह भी पाया गया कि निर्माण स्थल पर वन विभाग का कोई भी अधिकारी अथवा कर्मचारी उपस्थित नहीं रहा जिससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि निर्माण कार्य भी केवल मजदूरों के भरोसे ही वन विभाग करवा रहा है जबकि निर्माण स्थल पर विभाग के कर्मचारी अथवा इंजीनियर का होना अनिवार्य होता है |

इसे आसानी से कल्पना की जा सकती है कि जब शहरी क्षेत्र में इस प्रकार की लापरवाही वन विभाग के अधिकारी बरत रहे हैं तो दूरस्थ क्षेत्रों में चल रहे कार्यों में वन विभाग के अधिकारी कितनी संवेदनहीनता के साथ कार्य कर रहे होंगे |

कार्य पूरा होने के पश्चात वन विभाग के अधिकारी साइन बोर्ड लगाने के पैसे तक खा जाते हैं मगर साइन बोर्ड नहीं लगाते,
यह समझना समझ से परे है विभाग के बड़े अधिकारी इस प्रकार के निर्माण कार्य जो शहरी क्षेत्र में चल रहे हैं उनके शुरू होने से पहले या निर्माण कार्य के दौरान भी निर्माण स्थल का दौरा करते हैं या नहीं उनकी कार्यप्रणाली पर भी यह सवाल उठना भी लाजमी है |

इस मामले में वन विभाग के एसडीओ आशीष कुमार से चर्चा करने पर उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों को शुरू करने से पहले साइन बोर्ड लगाने के संबंध में शासन से कोई भी दिशा निर्देश वन विभाग को प्राप्त नहीं हुआ है और विभाग निर्माण कार्यों के शुरू होने या पूरा होने के बाद कभी भी साइन बोर्ड लगाने लगाने के लिए पूर्ण रूप से स्वतंत्र है |

बिना खनिज अनुज्ञा पत्र के गोदावरी इस्पात कंपनी द्वारा खनिज परिवहन पर कार्यवाही की मांग : शिवसेना

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भानूप्रतापपुर, विगत दिनों कर्मचारी फेडरेशन के हड़ताल के दौरान कच्चे आरी डोंगरी में लोहा खदान की लीज धारक गोदावरी इस्पात कंपनी द्वारा बिना अनुज्ञा पत्र के लौह अयस्क रायपुर परिवहन कराया जा रहा था। जो कि एक जघन्य अपराध है। जिसकी कच्चे नाका में जांच होने पर मामले का खुलासा हुआ। जिसकी जांच वन विभाग द्वारा किया जा रहा है किंतु लगभग दो महीना बीतने के बाद। किसी अज्ञात दबाव के चलते वन विभाग द्वारा इस मामले की जांच को अंजाम पर नहीं पहुंचाया जा रहा है। गोदावरी इस्पात कंपनी द्वारा बिना अनुज्ञा पत्र के लौह अयस्क रायपुर ले जाने के मामले की जांच की मांग को लेकर शिवसेना द्वारा वन मंडल अधिकारी पूर्व मंडल भानूप्रतापपुर को ज्ञापन सौंपकर संपूर्ण मामले की जांच कर बिना अनुज्ञा पत्र के लौह अयस्क रायपुर ले जाने वाली गोदावरी इस्पात कंपनी पर कार्यवाही की मांग किया।शिवसेना मांग करती है कि इस मामले की तत्काल जांच की जाए।

सोरगांव में सीएसी के मार्गदर्शन व ऊर्जावान प्रभारी शिक्षक धनेश्वर सिंह ध्रुव के प्रयास से पोषण वाटिका तैयार किया

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भानपुरी खंड बस्तर के सोरगांव संकुल के अंतर्गत संचालित प्राथमिक शाला सोरगांव में सीएसी के मार्गदर्शन व ऊर्जावान प्रभारी शिक्षक धनेश्वर सिंह ध्रुव के प्रयास से पोषण वाटिका अर्थात किचन गार्डन तैयार किया गया है जिसमे मौसमी सब्जी जैसे बरबट्टी, भिंडी, मूली, तोरई, पपीता व झीरा भाजी आदि का फसल लिया जा रहा है। आज भी स्कूली बच्चों के लिए किचन गार्डन से ही समूह की महिलाओं ने ताजा बरबट्टी तोड़कर मध्यान्ह भोजन में उपयोग किए।

फसल उगाने से पहले समूह की महिलाएं और शिक्षक पोषण वाटिका तैयार करने के लिए मिट्टी तैयार करती हैं। इस क्षेत्र के सीएसी डमरू दास पंत ने बताया कि इस संकुल के लगभग तीन चार स्कूलों में पोषण वाटिका तैयार की गई हैं। और अगले वर्ष जहां भी अहाता बना है वहां भी इसी तरह का पोषण वाटिका तैयार करने हेतु शिक्षकों से अपील किया जाएगा। पोषण वाटिका से ताजा सब्जी तो मिलता ही है और रसायनिक खाद रहित सब्जी उगाने का प्रयास रहता है।

संयुक्त टीम ने किया कोंडागांव मटन मार्केट का औचक निरीक्षण

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अमरेश झा

कोंडागाँव के सयुंक्त टीम द्वारा कोंडागाँव मटन मार्केट का सुबह 7 बजे आकस्मिक निरिक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान कटने के लिए लाये गए 52 बकरी – बकरो का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, जिसमें अस्वस्थ पाए गए 5 बकरी को तत्काल पशुचिकित्सालय भेजकर उपचार करवाया गया। सयुंक्त टीम के द्वारा पशुवध गृह के समस्त मालिको का पंजीयन करवाने का निर्णय लिया गया एवं सोमवार को नगरपालिका में पंजीयन हेतु आवेदन प्रस्तुत करने निर्देश दिये गये जिसके उपरांत अपंजीकृत दुकानदारों पर कार्यवाही की जावेगी। भारत सरकार के निर्देशानुसार समस्त पशुवध गृह का पंजीयन किया जाना प्रस्तावित है जिससे उचित रूप से सभी पशुओ का एंटिमोर्टेम परीक्षण में पास होने पर ही मटन विक्रय हेतु काटा जाएगा। डॉ नीता मिश्रा ने बताया कि वर्तमान में मनुष्यों में होने वाले 60 प्रतिशत बीमारी पशुओ से आते है इसलिए समस्त पशुओ का स्वस्थ परीक्षण करना अनिवार्य है। अव्यवस्थित परिसर में फैली गंदगी पर मुख्य नगर पालिका अधिकारी दिनेश डे ने बताया कि सभी पशुवध गृहो के मालिकों को पंजीयन उपरांत व्यवस्थित तरीके से काउंटर आवंटित किये जाएंगे एवं परिसर की सफाई हेतु विशेष स्वच्छता अभियान आयोजित किया जाएगा।

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