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बाहरी नक्सली बरगलाते आ रहे हैं बस्तर संभाग के युवाओं और आदिवासियों को

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  •  तेलंगाना और महाराष्ट्र के नक्सलियों का रहा वर्चस्व 
  • पहली बार इतनी बड़ी संख्या में मारे गए बाहरी 

अर्जुन झा

जगदलपुर बस्तर संभाग के आदिवासियों और युवाओं को बाहरी नक्सली बरगलाते आ रहे थे। बस्तर की युवा पीढ़ी को हिंसा की आग में झोंककर ये बाहरी नक्सली अपना घर भरते आए हैं। अब उनका नेटवर्क तेजी से ध्वस्त होता जा रहा है। पूर्वी अबूझमाड़ की मुठभेड़ में मारे गए 31 नक्सलियों ज्यादातर बाहरी हैं और सभी टॉप लेवल के लीडर थे। इतनी बड़ी क्षति से बचे खुचे नक्सली लीडर्स का बौखलाना लाजिमी है। इसी बौखलाहट में अब नक्सली लीडर स्थानीय नक्सलियों और ग्रामीणों को मुठभेड़ के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। हो सकता आने वाले दिनों में ये नक्सली निरीह ग्रामीणों और लोकल नक्सालियों की हत्याएं करने लगें, तो इसमें आश्चर्य वाली बात नहीं होगी।

बस्तर संभाग को नक्सलियों का गढ़ माना जाता रहा है। अब नक्सलियों का किला ढहता जा रहा है। छत्तीसगढ़ पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की साझी रणनीति कारगर साबित हो रही है। पुलिस और केंद्रीय अर्ध सैन्य बल बस्तर के आदिवासियों की जितनी नरम रुख अख्तियार कर उनके हित में काम कर रहे हैं, उतनी ही कड़ाई नक्सलियों के प्रति दिखा रहे हैं। बाहर से आए नक्सलियों ने जहां बस्तर की धरती को रक्त रंजित करने का काम किया, वहीं यहां के भोलेभाले युवाओं और आदिवासियों के साथ झूठी हमदर्दी दिखाते हुए उन्हें यहां की सरकार और सिस्टम के खिलाफ भड़काने व बरगलाने का काम किया। यहां के युवा और आदिवासी उन्हें अपना हितैषी मान बैठे और उनके भ्रमजाल में फंसते चले गए। इस तरह बाहरी नक्सलियों ने बस्तर संभाग में अपना अच्छा खासा नेटवर्क तैयार कर लिया। बाहरी नक्सली अपने पुलिस और सुरक्षा बलों के खिलाफ अभियानों के दौरान स्थानीय युवाओं और आदिवासियों को सामने कर देते थे। मारे जाते थे बेचारे स्थानीय लोग। बाहरी नक्सली स्थानीय लोगों से सड़कों पर स्पाईक लगाने, आईईडी प्लांट करने, फोर्स के मूवमेंट की सूचना उपलब्ध कराने, बैनर पोस्टर, पंप्लेट लगवाने, सड़कें खोदकर आवागमन बाधित करने जैसे काम कराते रहे हैं। मुठभेड़ों के दौरान बाहरी नक्सली अपने स्थानीय कैडर को सामने कर खुद सुरक्षित बच निकलते थे और मारे जाते थे स्थानीय लोग।

कुछ अरसा पहले तक जब भी फोर्स और नक्सलियों की मुठभेड़ें होती थीं, स्थानीय कैडर के आदिवासी ही मारे जाते थे। तब विपक्षी दल सरकार पर आदिवासियों की हत्या कराने का आरोप लगाते मैदान पर उतर जाते थे। ऐसा कांग्रेस और भाजपा दोनों की सरकारों के दौरान होता था।

बदल गई हवा की दिशा

अब हवा की दिशा बदल चुकी है। बयार उल्टी दिशा में बहने लगी है। यहां के युवा और आदिवासी बाहरी नक्सलियों के मनोभाव को समझ चुके हैं। नक्सलियों से उनका मोहभंग हो चुका है। सरकार और सिस्टम के प्रति उनकी आस्था बढ़ गई है। नक्सलियों के पास स्थानीय कैडर की नितांत कमी हो चुकी है। अब मोर्चे पर खुद बाहरी नक्सलियों को उतरना पड़ रहा है। इसका नतीजा यह हो रहा है कि बड़े पैमाने पर बाहरी नक्सली और उनके टॉप लीडर्स मारे जाने लगे हैं। तेलंगाना और महाराष्ट्र के जो टॉप नक्सली लीडर्स यहां आतंक का राज कायम किए हुए थे, वे तेजी से हलाक होते जा रहे हैं। चाहे कांकेर की मुठभेड़ हो, या बीजापुर की या फिर नारायणपुर के पूर्वी अबूझमाड़ की ताजा मुठभेड़। इन सभी मुठभेड़ों में मारे गए प्रायः सभी नक्सली या महाराष्ट्र और तेलंगाना के ही हैं।

करोड़ों वसूल चुके हैं बाहरी नक्सली

दरअसल बस्तर संभाग में तेंदूपत्ता और अन्य वनोपजों तथा खनिज संपदा की प्रचुरता है। यहां बड़े पैमाने पर ठेकेदारों के माध्यम से सड़क, पुल पुलियों का निर्माण भी चलता रहा है। बाहरी नक्सली पहले तेंदूपत्ता ठेकेदारों से लाखों रुपए वसूला करते थे। अब सरकारी स्तर पर तेंदूपत्ता खरीदी हो रही है। इसके अलावा नक्सली खनिज खदान लीजधारकों ठेकेदारों, निर्माण कार्यों में लगे ठेकेदारों और व्यापारियों से हर माह लाखों रुपए वसूलते आ रहे हैं। बाहरी नक्सली यहां से करोड़ों अरबों रुपए जमा कर अपने घरों में भेजते आए हैं। बाहरी नक्सली अपने बच्चों को बड़े शहरों के महंगे स्कूलों में पढ़ाई करवा रहे हैं और बस्तर के बच्चों के स्कूलों को आग के हवाले करते रहे हैं। रायपुर, भिलाई जैसे बड़े शहरों में बाहरी नक्सली अपने परिवार को रखते रहे हैं। भिलाई के एक पॉश इलाके में कुछ वर्ष पहले डोंगरगढ़ के एएसपी रहे मौजूदा एसपी मनीष शर्मा ने छापा मारकर ऐसे ही एक परिवार का पर्दाफाश किया था। इस परिवार के बच्चे भिलाई के सबसे महंगे स्कूल में पढ़ते थे। इससे जाहिर होता है कि नक्सली आदिवासियों के हितैषी नहीं बल्कि उनके दुश्मन हैं।

आंकड़े बताते हैं सच्चाई

बस्तर संभाग में इस वर्ष मारे गए नक्सलियों के आंकड़ों पर गौर करें तो हकीकत खुद बखुद सामने आ जाती है। बस्तर के अकेले नारायणपुर जिले में सन 2024 में अब तक संचालित नक्सल विरोधी अभियानों कुल 44 माओवादी मारे गए हैं, 29 गिरफ्तार किए गए हैं एवं 47 माओवादियों द्वारा आत्मसमर्पण किया गया है। मारे गए ज्यादातर नक्सली दूसरे राज्यों के हैं। इसी तरह पूरे बस्तर संभाग में अब तक कुल 188 नक्सलियों के शव बरामद हुए हैं, 706 गिरफ्तार किए गए हैं और 733 नक्सलियों द्वारा आत्मसमर्पण किया जा चुका है। कुल मिलाकर नक्सलियों के खेमे से अब तक 1627नक्सली बाहर हो चुके हैं। इनमें ज्यादातर टॉप लीडर और बाहरी नक्सली हैं। इस तरह बस्तर में नक्सलियों की कमर टूट चुकी है।

बीएसपी प्रबंधन चिकित्सकों का भुगतान न करने के कारण स्वास्थ्य संस्थाओं ने श्रमिकों एवं उनके परिजनों की चिकित्सा सुविधा बंद की

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दल्लीराजहरा बीएसपी प्रबंधन के साथ माइंस कार्यरत ठेका श्रमिको के जीवन के साथ किया जा रहा हैं खिलवाड़ माइंस क्षेत्र में कार्य करने वाले ठेका श्रमिको को चिकित्सा सुविधा कराने को लेकर स्थानीय शहीद हॉस्पिटल एवम ज्योति हॉस्पिटल के साथ अनुबंध किया गया था किन्तु पिछले आठ नौ माह से उक्त चिकित्सा संसाधनों का भुगतान नहीं किए जाने के कारण उक्त संसाधनों द्वारा उक्त ठेका श्रमिको की चिकित्सा सुविधा बंद कर दिया गया हैं । बीएसपी प्रबंधन की इस तरह की ठेका श्रमिको की सुविधा के साथ अनदेखी प्रबंधन द्वारा श्रमिको का शोषण किया जाना सदैव अनुचित हैं बीएसपी प्रबंधन द्वारा माइंस क्षेत्र में कार्यरत ठेका श्रमिको के साथ सौतेला व्यवहार किया जाता हैं ।

दल्ली राजहरा में स्थित एक मात्र बीएसपी अस्पताल भी रिफर सेंटर बन कर रहा गया हैं ऐसे में किसी घटना दुर्घटना में आपात कालीन चिकित्सा की अभाव में अपने जीवन से हाथ धोना पड़ सकता हैं । भाजपा मंडल अध्यक्ष राकेश द्विवेदी ने पूर्व में भी माइंस क्षेत्र में कार्यरत श्रमिको के शोषण के शिकायत श्रममंत्री लखन लाल देवांगन से को गई थी ।स्थानीय श्रम अधिकारी कानों में रूई डाल कर बैठे हुए हैं चिकित्सा सुविधाएं बंद होने की शिकायत जल्द ही स्थानीय कांकेर लोकसभा सांसद भोजराज नाग श्रम विभाग एवं इस्पात मंत्री से किया जाएगा।

नक्सल ऑपरेशन पर केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की महत्वपूर्ण बैठक कल

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  • मुख्यमंत्री साय और उपमुख्यमंत्री शर्मा होंगे शामिल
  • उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा आज दिल्ली रवाना

 

रायपुर, 6 अक्टूबर 2024- केंद्रीय गृह मंत्रीअमित शाह कल 7 अक्तूबर 2024 को नक्सल ऑपरेशन के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण बैठक लेंगे। इस बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री श्री विजय शर्मा तथा पड़ोसी राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल होंगे। उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा को इस बैठक में विशेष रूप से बुलाया गया है। बैठक नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे अभियानों की समीक्षा करने और आगे की रणनीतियों पर चर्चा करने के लिए आयोजित की जा रही है।उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा आज दिल्ली रवाना हो गए।

 

गृह मंत्री  अमित शाह ने छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए दृढ़ संकल्प व्यक्त किया है। पिछले नौ महीनों में सुरक्षा बलों ने 190 से अधिक नक्सलियों को समाप्त करने में सफलता प्राप्त की है जिससे नक्सलवाद के खिलाफ चल रही लड़ाई को एक नई दिशा मिली है। इस बैठक में नक्सल ऑपरेशन, सुरक्षा बलों की उपलब्धियों और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास योजनाओं पर भी चर्चा की जाएगी।

 

उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री  विजय शर्मा ने कहा की नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास दोनों को प्राथमिकता दी जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री के नेतृत्व में चल रहे अभियानों से इस समस्या के समाधान की दिशा में सकारात्मक प्रगति हो रही है। बैठक में पड़ोसी राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल होंगे क्योंकि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में अंतरराज्यीय समन्वय महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस बैठक में भविष्य की कार्ययोजनाओं और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति स्थापित करने के लिए आवश्यक कदमों पर भी निर्णय लिया जाएगा।

यह बैठक न केवल सुरक्षा बलों की रणनीतियों को सशक्त करेगी, बल्कि नक्सलवाद के समूल खात्मे की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को भी गति प्रदान करेगी।

शिक्षक गढ़ते है बच्चों का भविष्य: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव

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  •  सम्मेलन में शामिल हुए विधायक किरण देव 

जगदलपुर नगर के पं. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सभागार टाऊन हाल में रविवार को आयोजित संभाग स्तरीय संविदा शिक्षक एवं कर्मचारी संघ के सम्मेलन में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक किरण देव बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए ।

देव ने मां सरस्वती के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। सम्मेलन को संबोधित करते भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक किरण देव ने कहा कि शिक्षकों का कार्य बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। बच्चों के भविष्य को गढ़ने में शिक्षकों की अहम भूमिका होती है। बस्तर जैसे क्षेत्र में शिक्षक पूर्ण परिश्रम से कार्य कर रहे हैं। बस्तर के बच्चों के उज्ज्वल भविष्य व जीवन निर्माण का लक्ष्य निर्धारित कर कार्य करना सुनिश्चित करें । श्री देव ने सम्मेलन आयोजन के लिए सभी शिक्षकों को बधाई व शुभकामनाएं दी। विशिष्ट अतिथि के रूप में महापौर सफीरा साहू ने भी सम्मेलन में शिक्षकों को संबोधित किया। आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय के समूचे संभाग से शिक्षक शिक्षिकाएं सम्मेलन में उपस्थित थे। कार्यक्रम में आत्मानंद स्कूल के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। आत्मानंद विद्यालय के प्रतिभावान छात्रों को मुख्य अतिथि किरण देव द्वारा पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। सम्मेलन में आत्मानंद शिक्षक संघ प्रदेश अध्यक्ष विकास तिवारी, रवि गढ़पायले, संभागीय अध्यक्ष भावना दुबे, जिला अध्यक्ष प्रीति साइमन, शिल्पा भदौरिया, सरिता धर, रिदम स्वामी, नीरज साहू, राकेश साहू सहित आत्मानंद विद्यालय के शिक्षक शिक्षिकायें उपस्थित थे।

छात्र जीवन से ही नेतृत्व क्षमता का विकास अहम: बघेल

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  • छात्रसंघ शपथ ग्रहण में पहुंचे डीईओ बीआर बघेल:

तोकापाल स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल तोकापाल में छात्रसंघ का शपथ ग्रहण संपन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला शिक्षा अधिकारी बलिराम बघेल थे।

समारोह को संबोधित करते हुए बघेल ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है इसमें लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसकी अच्छी समझ छात्र जीवन से ही सही एवं प्रायोगिक तरीके से स्थापित की जाए तो यह लोकतांत्रिक देश के लिए सबसे अच्छा संकेत है। डीईओ बलिराम बघेल ने कहा कि इस प्रकार के चुनाव से युवा छात्र नेतृत्व की भूमिका निभाने और स्कूल द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारी को निभाने के लिए तैयार होते हैं। उन्होंने स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम विद्यालय तोकापाल में चुने गए विद्यार्थियों हेड बॉय पृथ्वी नाग, हेड गर्ल तृषा ठाकुर को बैच तथा सैशेस पहनाकर कार्यक्रम की शुरुआत की।

इसके पश्चात चुने गए समस्त नेतृत्वकर्ता सेलिना कश्यप, श्रवण सेठिया, छविंद्र कश्यप, कृति सोनी, अभिषेक कश्यप, प्रेमवती मौर्य, अंश वर्मा, मोक्ष ठाकुर, शैलेंद्र कच्छ, एनोस नाथ, यूरेका दास, चंद्रिका, ध्रुवराज विश्वास, साहिल कावड़े, एनिमा कश्यप, कुमकुम ध्रुव को विधिवत जिम्मेदारी दी गई। इस अवसर पर अतिथि के रूप में शालिनी बघेल संस्था के प्राचार्य विधु शेखर झा, उप प्राचार्य ईरम रहीम एवं समस्त शिक्षक शिक्षिकाओं ने बैच पहनाया।जिला शिक्षा अधिकारी की अगुवाई मार्च पास्ट के रूप में एनसीसी के छात्र-छात्राओं द्वारा अच्छे से किया गया। विद्यार्थी कतारबद्ध खड़े थे। हेड बॉय पृथ्वी नाग के द्वारा संस्था की उपलब्धियां को बताया गया तथा हेड गर्ल तृषा ठाकुर ने आवश्यक सुविधाओं के लिए अपनी बात रखी। इस पर जिला शिक्षा अधिकारी बलिराम बघेल ने सेजेस तोकापाल की उपलब्धियां की सराहना करते हुए कहा कि इस बार इस संस्था के द्वारा जिला स्तर पर ग्रामीण सूची में तृतीय स्थान तथा विकासखंड स्तर पर प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त किया गया है यह बताता है कि यहां के विद्यार्थी कितने अच्छे हैं शिक्षक शिक्षिका भी बहुत अच्छा मेहनत करते हैं। सत्र 2024-25 में आप सभी को शुभकामनाएं है कि आप राज्य स्तर की प्राविण्य सूची में अपना स्थान बनाएं

इसके साथ ही एक पेड़ मां के नाम इस अभियान के अंतर्गत जिला शिक्षा अधिकारी बलिराम बघेल के द्वारा शाला परिसर में वृक्षारोपण भी किया गया। इस अवसर पर संस्था के ऑटो चालकों के साथ अभिभावक भी मौजूद थे।कार्यक्रम के अंत में न्योता भोज भी किया गया।

इस कार्यक्रम को संस्था के सभी विद्यार्थियों एवं शिक्षक शिक्षिकाओं ने बड़े ही उत्साह पूर्वक संपन्न किया जिसमें प्रमुख रूप से संस्था के प्राचार्य विधु शेखर झा, उप प्राचार्य ईरम रहीम, श्रीदेवी सिंह ,सोनाक्षी मजूमदार ,स्वाति लवंग ,अर्पणा सिंह, राजीव सिंह ठाकुर ,नीलम भास्कर, काजल यादव, लता जोशी ,मानसी बघेल, नीता शुक्ला ,इंद्र राज सोनवानी ,ज्योत्सना कश्यप, मोहनीश पांडे ,पंकज मूर्ति ,तनय घोष, रुपिंदर कौर ,स्नेहा श्रीवास्तव ,महेश सोनी, जयदेव मौर्य, कुंती बघेल आदि की सक्रिय भूमिका थी। मंच संचालन ईरम रहीम ने किया एवं धन्यवाद ज्ञापन वरिष्ठ लेक्चरर श्रीदेवी सिंह ने दिया।

तड़ीपार शहर में कर रहा धमा-चौकड़ी, दुकान से लूट ले गया साउंड सिस्टम

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  • कलेक्टर ने कर रखा है जिला बदर, शहर में मचा रहा है उधम 

जगदलपुर विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा की सुरक्षा व्यवस्था के दावों के बीच जिलाबदर आरोपी अमरीश सिंह द्वारा गोलबाजार में लुट की घटना को अंजाम दिया गया। उसका खौफ ऐसा है कि उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने में दो दिनों का समय लग गया।

इस घटनाक्रम के बाद आरोपी फरार हो गया है। जिससे सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई है। नवरात्रि के प्रथम दिवस 3 अक्टूबर की शाम 5 बजे गोलबाजार चौक, सदर वार्ड स्थित संकेत इलेक्ट्रॉनिक दुकान में तड़ीपार अमरीश सिंह राजपूत जा धमका और इस दुकान में काम करने वाले दीपक सिंह पिता स्व. समरजीत सिंह उम्र 57 वर्ष जाति क्षत्रिय निवासी को डरा धमकाकर दुकान से 6-6 हजार रुपए कीमत के 2 नग ब्लूटूथ ट्रली स्पीकर बाक्स लूटकर ले गया। दीपक सिंह यहां का कर्मचारी हैं और इस घटना के बारे में दुकान में काम करने वाले लडका मनोज माली और राजू के सामने यह घटनाक्रम हुआ है। पीड़ित दीपक सिंह ने दुकान मालिक कमल खुराना को बताया तथा दीपक सिंह इतना डर गया था कि उसने 5 अक्टूबर को दोपहर में रिपोर्ट दर्ज करवाई। कोतवाली पुलिस ने इस मामले में अपराध पंजीबद्ध किया है किंतु तड़ीपार फरार है। कलेक्टर हरीश एस ने दशहरा पर्व को देखते हुए लॉ एंड ऑर्डर सुनिश्चित करने की बात कही थी और उसी दिन तड़ीपार अमरीश सिंह राजपूत शहर में किन्नरों की बारात के दिन सिरहासार में रात को एक सफेद गाड़ी में घुमते देखा गया। वहीं दूसरे दिन शहर के व्यवसतम चौक में लुट की घटना को अंजाम दिया। ज्ञात हो कि तत्कालीन कलेक्टर विजय दयाराम के. ने अमरीश सिंह के खिलाफ जिल बदर का आदेश जारी किया था। इसके बाद भी वह शहर में घुमता देखा जा सकता है। इस आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने से शहर में भय का माहौल है।

बड़ी सफलता के बाद देवी मां दंतेश्वरी के दरबार में पहुंचे उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

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  • बस्तर की आराध्य देवी की गृहमंत्री ने की पूजा-अर्चना  

जगदलपुर नक्सलियों के खिलाफ बड़ी जंग जीतने के बाद छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने एक दिनी प्रवास पर दंतेवाड़ा पहुंचे। वहां उन्होंने बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के दर्शन पूजन कर प्रदेश की जनता की सुख समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।

बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा एवं नारायणपुर जिलों के सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित अबूझमाड़ में नक्सल मोर्चे पर पुलिस और सुरक्षा बलों ने 31 नक्सली मार गिराए हैं। इस बड़ी उपलब्धि के बाद उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के मां दंतेश्वरी के दरबार में पहुंचने के कई मायने निकाले जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए डिप्टी सीएम विजय शर्मा माई के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने आए थे। इस दौरान उनके साथ में कृषि एवं आदिवासी विकास विभाग मंत्री राम विचार नेताम और वन मंत्री केदार कश्यप भी पहुंचे थे। इस दौरान विधायक दंतेवाड़ा चैतराम अटामी, पूर्व मंत्री महेश गागड़ा सहित क्षेत्र के अन्य जनप्रतिनिधियों और बस्तर आईजी सुंदरराज पी, डीआईजी कमलोचन कश्यप, कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी, एसपी गौरव राय तथा जिला प्रशासन के अन्य अधिकारियों ने स्वागत किया।

सटीक सूचना और अचूक वार ने दिलाई अबूझमाड़ में पुलिस और सुरक्षा बलों को अब तक की सबसे बड़ी कामयाबी

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  • मारे गए 31 नक्सलियों में सवा करोड़ के 16 नक्सली भी शामिल
  • अत्याधुनिक हथियारों का जखीरा भी बरामद 

अर्जुन झा

जगदलपुर पूर्वी बस्तर के दंतेवाड़ा और नारायणपुर जिलों की सीमा पर अबुझमाड़ क्षेत्र में हुई नक्सलियों और पुलिस के बीच मुठभेड़ में रिकॉर्ड 31 नक्सली ढेर कर दिए गए हैं। पुलिस और सुरक्षा बलों की अब तक की इस सबसे बड़ी कामयाबी के पीछे बिल्कुल सटीक सूचना और अचूक वार का सबसे बड़ा योगदान रहा है। 4 और 5 अक्टूबर के दिन को नक्सली शायद ही भूल पाएंगे, क्योंकि इतना बड़ा जख्म पुलिस और सुरक्षा बलों ने उन्हें जो दिया है।

पूर्वी अबूझमाड़ के नेंदूर और थुलथुली के बीच जंगलों में नक्सलियों और सुरक्षा बलों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई थी। मुठभेड में 35-36 से भी ज्यादा नक्सलियों के मारे जाने की संभावना है। हालांकि अभी तक डीके एसजेडसी, डीवीसी, पीएलजीए कंपनी नंबर 6 के कई कैडर के 18 पुरूष एवं 13 महिला नक्सलियों सहित कुल 31 सशस्त्र वर्दीधारी नक्सलियों के शव बरामद हो चुके हैं।इसके अलावा बड़ी संख्या में नक्सलियों के घायल होने तथा कुछ और नक्सलियों के मारे जाने की प्रबल संभावना है। मृत नक्सलियों में 25 लाख की इनामी डीके एसजेडसी एवं पूर्वी बस्तर इंचार्ज नीति उर्फ उर्मिला भी शामिल है। अभी तक 15 नक्सलियों के शवों की शिनाख्त हुई है।में डीके एसजेडसी के अलावा दो कैडर 8 लाख इनामी डीबीसीएम एवं 9 कैडर पीएलजीए कंपनी 6 के शामिल हैं। शेष की शिनाख्त की कोशिशें जारी हैं।

मुठभेड़ के बाद मौके से एक नग लाईट मशीन गन, 4 नग एके 47 राइफल, 6 नग एसएलआर, 3 नग इंसास , 2 नग 303 बंदूक सहित कई अन्य हथियार बरामद किए गए हैं। ज्ञात हो कि जंगल में पूर्वी बस्तर डिवीजन, पीएलजीए कंपनी 6, इंद्रावती एरिया कमेटी, प्लाटून 16 आदि के शीर्ष नक्सलियों के मौजूद होने की सटीक सूचना पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों के खुफिया तंत्र ने जुटाई थी। इस सूचना के आधार पर संयुक्त टीम ऑपरेशन पर निकली थी। टीम में दंतेवाड़ा डीआरजी, नारायणपुर डीआरजी और एसटीएफ के निशानेबाज जवान शामिल थे। बरसात में उफनते नदी नालों और माड़ की पहाड़ियों को पार कर यह टीम नक्सलियों के गढ़ में पहुंची और बड़ी सफलता हासिल की। हालांकि मुठभेड़ में एक घायल जवान घायल हुआ है और रायपुर में उसका इलाज चल रहा है। उसकी स्थिति सामान्य एवं स्थिर। अन्य सभी जवान सुरक्षित हैं। अभियान के दौरान 4 अक्टूबर को दोपहर के समय नेंदूर -थुलथुली के जंगल में पुलिस पार्टी एवं नक्सलियों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई जो देर शाम तक लगातार चली। फायरिंग बंद होने पर सभी टीमों ने अपने-अपने दिए गए टॉस्क क्षेत्र में सर्चिंग शुरू की। घटना स्थल के अलग-अलग स्थानों से 18 पुरूष एवं 13 महिला कुल 31 सशस्त्र वर्दीधारी नक्सलियों के शव बरामद हुए हैं।

मारी गई 25 लाख की नीति

मारे गए नक्सलियों में 25 लाख इनामी डीकेएसजेडसी सदस्य नीति उर्फ उर्मिला सहित 8 लाख के ईनामी कई पीएलजीए कंपनी नंबर 6 के सदस्य और डीवीसीएम रैंक के नक्सली शामिल हैं। इनमें

नीति के अलावा सुरेश सलाम,डीवीसीएम, मीना माडकम डीवीसीएम, अर्जुन पीपीसीएम पीएलजीए कंपनी 6, सुंदर पीपीसीएम पीएलजीए कंपनी 6, बुधराम पपीसीएम पीएलजीए कंपनी 6, सुक्कू, पपीसीएम पीएलजीए कंपनी 6, सोहन एसीएम बारसूर एसी, फूलो, पपीसीएम पीएलजीए कंपनी 6, बसंती पीपीसीएम पीएलजीए कंपनी 6, सोमे पपीसीएम , पीएलजीए कंपनी 6, जमीला उर्फ बुधरी, पीएम पीएलजीए कंपनी 6, रामदेर, एसीएम, सुकलू उर्फ विजय एसीएम, जमली एसीएम, सोनू कोर्राम एसीएम अमदेई शामिल हैं। इन 16 नक्सलियों पर 1 करोड़ 30 लाख से ज्यादा का ईनाम घोषित था। अन्य 15 नक्सलियों की शिनाख्त की प्रक्रिया जारी है।

एसपी राय की अपील

दंतेवाड़ा पुलिस अधीक्षक गौरव राय ने कहा है कि पूर्वी बस्तर डिवीजन क्षेत्र के दुर्गम जंगल एवं विकट भौगोलिक परिस्थितियों में रहने वाले मूल निवासियों को नक्सलवादी विचारधारा से बचाना और उन्हें माओवादी सिद्धांतों के आकर्षण से बाहर निकालना ही हमारा मुख्य उद्देश्य है, ताकि क्षेत्र में विकास एवं शांति कायम हो सके। हम उन सभी मूलवासियों जो बाहरी विचारधारा और बाहर के नक्सली नेताओं के गलत प्रभाव में फंस गए हैं, उनसे अपील करते हैं कि वे नक्सलवाद एवं नक्सली विचारधारा को त्याग कर शासन की आत्मसमर्पण पुनर्वास नीति के जरिए समाज की मुख्यधारा से जुड़ें और हथियार

मार गिराए शीर्ष नक्सली: आईजी

बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी. ने बताया कि वर्ष 2024 में माओवादियों संगठन के शीर्ष नेतृत्व को सुरक्षा बलों द्वारा भारी क्षति पहुंचाई गई है। विगत 9 महिने में डीकेएसजेडसी जोगन्ना जिला पेदापल्ली, तेलंगाना राज्य, डीकेएसजेडसी रंधेर जिला वारंगल राज्य तेलंगाना, डीकेएसजेडसी रूपेश गढ़चिरौली महाराष्ट्र, टीसीएससी मेंबर सीआरसी -2 कमांडर सागर जिला भूपलपल्ली तेलंगाना, डीवीसीएम शंकर राव जिला भूपलपल्ली तेलंगाना, डीवीसीएम विनस जिला वारंगल तेलंगाना, डीवीसीएम जगदीश बालाघाट मप्र, एसीएम संगीता उर्फ सन्नी गढ़चिरौली महाराष्ट्र, एसीएम लक्ष्मी मलकानगिरी ओड़िशा, एसीएम रजीता वारंगल तेलंगाना जैसे दूसरे राज्यों के सीनियर माओवादी कैडर को सुरक्षा बल अलग अलग मुठभेड़ों में ढेर कर चुके हैं।

अब तक ढेर किए 44

नारायणपुर के पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार ने द्वारा बताया कि वर्ष 2024 में नारायणपुर जिले में संचालित नक्सल विरोधी अभियान में अब तक कुल 44 माओवादी मारे गए हैं, 29 गिरफ्तार किए गए हैं एवं 47 माओवादियों द्वारा आत्मसमर्पण किया गया है

उप पुलिस महानिरीक्षक दंतेवाड़ा कमलोचन कश्यप ने बताया कि इस ऑपरेशन के बाद नक्सलियों के गढ़ रहे पूर्वी बस्तर डिवीजन के माओवादियों में भय का माहौल है। इस क्षेत्र को नक्सली शीर्ष नेतृत्व अपना सुरक्षित ठिकाना मानते हैं। नक्सली नेतृत्व इस ऑपरेशन उपरांत ग्रामीणों एवं अपने निचले कैडर पर दोषारोपण कर रहे हैं। सुरक्षा बलों का नक्सलियों के अटैकिंग फोर्स के स्तंभ पर यह कड़ा प्रहार है।

अब तक 188 शव बरामद

पुलिस महानिरीक्षक, बस्तर रेंज सुंदरराज पी. ने एक जानकारी में बताया कि प्रतिबंधित सीपीआई माओवादी संगठन के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने के उद्देश्य से स्थानीय जिला पुलिस बल, डीआरजी तथा केंद्रीय अर्धसैनिक बलों द्वारा आपसी बेहतर तालमेल एवं रणनीति के साथ काम करने के परिणाम स्वरूप वर्ष 2024 में बस्तर संभाग में अब तक कुल 188 नक्सलियों के शव बरामद हुए हैं, 706 गिरफ्तार किए गए हैं और 733 नक्सलियों द्वारा आत्मसमर्पण किया जा चुका है।

गांव को महामारी से बचाती हैं टलनार गांव की आराध्य देवी दुलार देई माता

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  • चावल और कच्चा दूध अर्पित करने की परंपरा है देवी मां को
  • ग्रामीणों की अटूट आस्था है मातारानी दुलार देई पर
  • नवरात्रि पर अर्जुन झा की विशेष रिपोर्ट-

बकावंड वैसे तो बस्तर संभाग में देवी देवताओं के पचासों स्थान और सबकी अपनी अपनी परंपराएं और पूजा पद्धति हैं। बस्तर की प्रमुख आराध्य देवी दंतेश्वरी माई है। इन्हीं दंतेश्वरी माई का अंश बकावंड विकासखंड की टलनार ग्राम पंचायत में माता दुलार देई के रूप में विराजमान है। यह देवी गांव की कुलदेवी है और लगभग डेढ़ सौ साल से ग्रामीण पूरी श्रद्धा भक्ति के साथ माता दुलार देई की पीढ़ी दर पीढ़ी आराधना करते आ रहे हैं। आइए हम आपको सुनाते हैं मातारानी दुलार देई की गौरव गाथा…

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बस्तर जिले की जनपद पंचायत बकावंड की ग्राम पंचायत टलनार में मां दुलार देई की आराधना लगभग डेढ़ सौ साल से की जा रही है। दुलार देई माता को कच्चा दूध अर्पित करने की परंपरा का निर्वहन ग्रामीण आज तक बखूबी करते आ रहे हैं। किवदंति है कि मां दुलार देई ने गांव वालों को महामारी के प्रकोप से बचाया था। आज भी गांव में जब कभी कोई रोग फैलने लगता है, तब ग्रामीण माता दुलार देई की ही शरण में पहले जाते हैं।

गांव के बड़े बुजुर्ग बताते हैं कि मातारानी दुलार देई का मंदिर करीब 140 से 150 वर्ष पूर्व से स्थापित है।माता दुलार देई की प्रतिमा बस्तर से लाई गई थी। दुलार देई की बड़ी बहन का नाम गंगा देई माता है। दशकों पहले जब अज्ञात रोगों के प्रकोप के चलते ग्रामीणों की मौत होने लगी तब माता दुलार देई की प्रतिमा की स्थापना मंदिर बनाकर पुरखों ने की थी। इस मंदिर के प्रथम पुजारी सुधु शुंडी थे और अभी 5 वी पीढ़ी के पुजारी बनसिंह हैं। इस मंदिर में जोत जलाने का क्रम करीब 20 साल से जारी है। टलनार गांव के अलावा आसपास के तथा सुदूर गांवों के भक्त भी माता दुलार देई के दरबार में दोनों नवरात्रियों पर ज्योत जलवाने लगे हैं। मंदिर की सारी व्यवस्थाएं ग्रामीण मिलजुल कर करते हैं। दुलार देई को दंतेश्वरी माई का अंश माना जाता है। ग्रामीण बताते हैं कि कालरा हैजा की शिकायत से पचासों ग्रामीण की मौत हो गई थी, तब आपस में सलाह कर बस्तर से माई जी मूर्ति गांव में लाकर पूजा अर्चना शुरू की गई। इसके बाद रोग का कहर थम गया। जबसे गांव में माता दुलार देई की प्रतिमा स्थापित हुई तबसे आज तक टलनार में किसी भी रोग का प्रकोप नहीं हुआ है।

शनि, मंगल को पूजा, चावल का प्रसाद

माता दुलार देई की पूजा विधि कुछ खास है। विशेष दिन और अवसर पर माता रानी की विशेष पूजा की जाती है। शनिवार और मंगलवार को यह विशेष पूजा की जाती है और माता को चावल तथा कच्चे दूध का भोग का अर्पित किया जाता है। ग्रामीणों के मुताबिक दुलार देई माता को उबला हुआ नहीं, बल्कि कच्चा दूध ही पसंद है।

गांव को महामारी से बचाती हैं टलनार गांव की आराध्य देवी दुलार देई माता

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  • चावल और कच्चा दूध अर्पित करने की परंपरा है देवी मां को
  • ग्रामीणों की अटूट आस्था है मातारानी दुलार देई पर
  • नवरात्रि पर अर्जुन झा की विशेष रिपोर्ट-

बकावंड वैसे तो बस्तर संभाग में देवी देवताओं के पचासों स्थान और सबकी अपनी अपनी परंपराएं और पूजा पद्धति हैं। बस्तर की प्रमुख आराध्य देवी दंतेश्वरी माई है। इन्हीं दंतेश्वरी माई का अंश बकावंड विकासखंड की टलनार ग्राम पंचायत में माता दुलार देई के रूप में विराजमान है। यह देवी गांव की कुलदेवी है और लगभग डेढ़ सौ साल से ग्रामीण पूरी श्रद्धा भक्ति के साथ माता दुलार देई की पीढ़ी दर पीढ़ी आराधना करते आ रहे हैं। आइए हम आपको सुनाते हैं मातारानी दुलार देई की गौरव गाथा…

बस्तर जिले की जनपद पंचायत बकावंड की ग्राम पंचायत टलनार में मां दुलार देई की आराधना लगभग डेढ़ सौ साल से की जा रही है। दुलार देई माता को कच्चा दूध अर्पित करने की परंपरा का निर्वहन ग्रामीण आज तक बखूबी करते आ रहे हैं। किवदंति है कि मां दुलार देई ने गांव वालों को महामारी के प्रकोप से बचाया था। आज भी गांव में जब कभी कोई रोग फैलने लगता है, तब ग्रामीण माता दुलार देई की ही शरण में पहले जाते हैं।

गांव के बड़े बुजुर्ग बताते हैं कि मातारानी दुलार देई का मंदिर करीब 140 से 150 वर्ष पूर्व से स्थापित है।माता दुलार देई की प्रतिमा बस्तर से लाई गई थी। दुलार देई की बड़ी बहन का नाम गंगा देई माता है। दशकों पहले जब अज्ञात रोगों के प्रकोप के चलते ग्रामीणों की मौत होने लगी तब माता दुलार देई की प्रतिमा की स्थापना मंदिर बनाकर पुरखों ने की थी। इस मंदिर के प्रथम पुजारी सुधु शुंडी थे और अभी 5 वी पीढ़ी के पुजारी बनसिंह हैं। इस मंदिर में जोत जलाने का क्रम करीब 20 साल से जारी है। टलनार गांव के अलावा आसपास के तथा सुदूर गांवों के भक्त भी माता दुलार देई के दरबार में दोनों नवरात्रियों पर ज्योत जलवाने लगे हैं। मंदिर की सारी व्यवस्थाएं ग्रामीण मिलजुल कर करते हैं। दुलार देई को दंतेश्वरी माई का अंश माना जाता है। ग्रामीण बताते हैं कि कालरा हैजा की शिकायत से पचासों ग्रामीण की मौत हो गई थी, तब आपस में सलाह कर बस्तर से माई जी मूर्ति गांव में लाकर पूजा अर्चना शुरू की गई। इसके बाद रोग का कहर थम गया। जबसे गांव में माता दुलार देई की प्रतिमा स्थापित हुई तबसे आज तक टलनार में किसी भी रोग का प्रकोप नहीं हुआ है।

शनि, मंगल को पूजा, चावल का प्रसाद

माता दुलार देई की पूजा विधि कुछ खास है। विशेष दिन और अवसर पर माता रानी की विशेष पूजा की जाती है। शनिवार और मंगलवार को यह विशेष पूजा की जाती है और माता को चावल तथा कच्चे दूध का भोग का अर्पित किया जाता है। ग्रामीणों के मुताबिक दुलार देई माता को उबला हुआ नहीं, बल्कि कच्चा दूध ही पसंद है।

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