विकासखंड बकावंड अंतर्गत ग्राम पंचायत मुली में लगातार दो दिनों से वैक्सीनेशन किया जा रहा है 12 मई 2021को 222 लोगों का वेक्सीनेशन किया गया और आज 13 मई 2021 को 500 लोगों का टारगेट है ।
लाकडाऊन के नियमों का पालन करते हुए आज फ्रेंडशिप क्लब के युवाओं के द्वारा वैक्सीनेशन कराने हेतु वैक्सीन के प्रति लोगों को प्रेरित करते हुए मोटरसाइकिल से जागरूकता रैली भी निकाली गई , इस कार्यक्रम में ग्राम पंचायत के सरपंच पतिश्री मुन्नालाल मौर्य सचिव बद्रीनाथ बिसाई सनतकुमार बघेल श्रवणकुमार बघेल मोहनसिंह बघेल अरूण सेठिया मोहनभद्रे परपे पटेल सोमनभद्रे गोबर चितरसेन बिसाई एवं ग्राम के समस्त पंचगणों ने रैली में भाग लिया।
बस्तर में जब तक स्थानीय ग्रामीणों के द्वारा फलों का राजा कहा जाने वाला आमा तिहार अक्षय तृतीया में मनाया जा रहा है । कहा जाता है कि नया फल आम की रस्म पूर्ण नहीं कर ली जाती तब तक पेड़ों से आम तोड़ना वर्जित माना जाता है। बस्तर की संस्कृति का यह पहलू काफी रोचक है। जहां ग्राम देवताओं और पूर्वजों को सबसे पहले फल अर्पित किया जाता है। उसके बाद ही उसे जनसामान्य में खाने के उपयोग में लाया जाता है।
बस्तर में इन दिनों नदी नालों के किनारे आम के पेड़ लगाने वाले अपने पूर्वजों को याद कर आमा तिहार मनाया जा रहा है। इस आमा तिहार द्वारा पेड़ लगाकर सदा के लिये अमर होने की बात बस्तर में अक्षरशः सिद्ध हो रही है। अपने पूर्वजों के सम्मान में आमा तिहार जैसा उत्सव आपको और कहीं भी दिखाई नहीं देगा। आमा तिहार में किसी एक आम पेड़ के नीचे सभी ग्रामीण एकत्रित होते है। उस पेड़ की पूजा करते है। फिर पहली बार उस पेड़ से आम तोड़े जाते है। वहीं पूजा स्थल पर महिलायें आम की फाकियां बनाकर इसमें गुड़ मिलाती है। फिर सभी को आम की फांकियां प्रसाद स्वरूप वितरित की जाती है।
तथाकथित लोगों का मानना है कि ब है कि जब तक आम, महुआ या ईमली जैसे फलों के तोड़ने लिये ऐसे तिहार (त्यौहार) ना मना लिया जाये तब तक पेड़ो से इन फलों को तोड़ा नहीं जाता है। इसके पीछे मान्यता है कि बिना पूजा किये फल तोड़ने से ग्राम देवता नाराज हो जायेंगे। महामारी फैल जायेगी। सारे पशु मर जायेंगे। इसलिये पहले पूर्वजों को फल अर्पित करने एवं ग्राम देवता की पूजा के बाद ही पेड़ो से फल तोड़ा जाता है। आमा तिहार में पूर्वजों की श्राद्ध करने की पंरपरा भी यहां प्रचलित है।
गांव के सभी लोग किसी नाले के पास एकत्रित होकर पूर्वजों के याद में वहां आम की फांकियां नाले में विसर्जित करते है। फिर वहां जामून की लकड़ी गाड़कर उसके नीचे धान से भरे दोने रखते है। उन दोनो पर दीपक जलाये जाते है। फिर अपने पितरों को याद करते हुये सुख समृद्धि की कामना करते है।
बस्तर के विभिन्न क्षेत्रों में अलग अलग समाजों द्वारा विभिन्न तिथियों को आमा तिहार मनाते है। सामान्यतः आमा तिहार के लिये अक्षय तृतीया अंतिम दिन होता है। इस दिन जो ग्रामीण आमा तिहार नहीं मना पाते है वे पुरे साल भर आम नहीं खा पाते है। आमा तिहार को आमा जोगानी के नाम से भी जाना जाता है।
जगदलपुर। जगदलपुर जनपद पंचायत क्षेत्र के परपा ग्राम में कोरोना का बड़ा विस्फोट हुआ है और एक परिवार की लापरवाही सभी लोगों पर भारी पड़ी है दरअसल उस परिवार की गलती के कारण पूरा परवाह जद में आ गया है जिससे प्रशासन के हाथ पांव फूल गए हैं। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार 7 मई को एक परिवार द्वारा कोरोना की जांच कराई गई किंतु उसकी रिपोर्ट नहीं ली अब जब उसकी रिपोर्ट आई तो परिवार के लोग संक्रमित पाए । परपा में 7से 14मई के बीच दो से तीन शादियां इस गांव में हो चुकी है जिसमें कोविड गाईड लाईन का पालन नहीं करने का आरोप है। विगत दो दिनों से चल रही जांच में यह जानकारी सामने आई है कि एक परिवार के 14 लोगों के अलावा गांव के 74 लोगों की जांच की गई जिसमें कुल 24 लोग संक्रमित पाए गए हैं।कल फिर से परपा में जांच दल के जाने की संभावना है।
जगदलपुर। बस्तर के जंगल महकमे के सबसे बड़े दफ्तर सीसीएफ कार्यालय में लॉकडाऊन के बीच हुए टेंडर प्रक्रिया पर वरिष्ठ कांग्रेसी नेता उमाशंकर शुक्ला ने सवाल उठाया है। शुक्ला ने कहा है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से टेंडर प्रक्रिया पर शिकायत करेंगे।
वरिष्ठ कांग्रेसी उमाशंकर शुक्ला ने कहा कि विगत दिनों सीसीएफ कार्यालय में वन विभाग द्वारा मशीनरी व निर्माण कार्यों को लेकर टेंडर प्रक्रिया हेतु बाहरी ठेकेदारों को आमंत्रित किया गया था जोकि कोविड़ प्रोटोकॉल का सरासर उल्लंघन था। बाहरी ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने बीड प्रक्रिया अपनाई गई जिसके तहत् स्थानीय ठेकेदार बाहर हो गए जबकि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा है कि स्थानीय लोगों को काम मिले। सीसीएफ कार्यालय टेंडर प्रक्रिया को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहता है इसलिए टेंडर प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों के बीच इसकी उच्च स्तरीय जांच किए जाने हेतु अतिशिघ्र मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पत्र लिखा जायेगा।
ज्ञात हो कि लॉकडाऊन के बीच टेंडर प्रक्रिया पर इसीलिए भी सवाल उठाए जा रहें हैं क्योंकि जिला प्रशासन को भी इसमें अंधेरे में रखा गया। आनन-फानन में ठेकेदारों की निविदा निर्धारण प्रक्रिया पर एक ऐसे अनुविभागीय अधिकारी वन की डियुटी लगाई गई थी जोकि खुद आय से अधिक मामले में घिरे हुए हैं। इस ठेके प्रक्रिया में अपने को पाक-साफ दिखाने के लिए डीएफओ व सीसीएफ नदारद रहे और अपने विवादास्पद एसडीओ को पूरी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। सर्वाधिक दिलचस्प बात यह है कि 19 ठेकेदारों में मात्र 4 लोगों को ही पात्र पाया गया वह भी बाहरी ठेकेदार उसको लेकर भी की तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है।
जगदलपुर/प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल के निर्देशानुसार की इस लॉक डाउन मे कोई भी भूखा सो ना पए मुहिम के तहत आज धुर नक्सली क्षेत्र नागलसर,कोलवाडा,नेतानार,चितलगुर एवं गुमड वाडा पहुँचे जहाँ उन्होने समस्त ग्रामीणो को राहत सामग्री एवं मच्छर दानी क़ा वितरण किया एवं सभी लोगो से इस कोरोना की बीमारी से बचने के लिये सरकार द्वारा मुफ्त टीकाकरण क़ा लाभ उठाने की अपील भी की |
इस अवसर विकास दुग्गड़ नीलू राम बघेल ,सुनील दास ,फूल सिंह बघेल ,शंकर नाग, धन सिंह ,राधा मोहन दास ,लोकेश सेठिया, सरपंच रजनति बघेल,सोमा, ललित,बुधराम ,सचिव महेश ,सरपंच सोमारी नाग , लखमू, दसरू, साधु, मोगरा, गंगा, सरपंच सुकरा नाग, आयतु नाग, बलिराम ,जय, जोगी, नरसिह, फंडरु, सचिव मुरारी शर्मा ,राम साय ,सुकराम, काशीराम, सरपंच मौगाय राम, वादे नाग, सोमारु, दशमू, जयसिंह, साधु नाग, सरपंच जितेंदी बघेल, सौनधर नाग ,सोन साय ,बन सिंग, कामनु, लगोराम, जयराम, नरसिह गोयल ,मोगरा बघेल एवं मितानिन स्वास्थ विभाग के कार्यकर्ता पटेल ग्राम पुजारी ग्राम कोटवार उपस्थित रहे |
जगदलपुर। शांतिनगर वार्ड निवासी जैनीत जोना पिता स्व. जयवंत जोना उम्र 50 वर्ष कुछ दिनों से बीमार होने की वजह से रायपुर के जग्गनाथ अस्पताल में भर्ती थे। काफी कोशिश के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका 14 मई की सुबह 7:30 बजे उनका निधन हो गया, वे काफी मिलनसार मृदुभाषी थे। वे अपने पीछे माता व भाई बहनों से भरा परिवार भरा पूरा परिवार छोड़ गए ।आज उनका अंतिम संस्कार मसीही रीति रिवाज के अनुसार मसीही कब्रिश्तान में किया गया।
निगम कर्मचारियों के अपमान पर खेद प्रकट करें महापौर
स्वच्छता दीदी, ज़रूरतमंद निगमकर्मियो को भी महापौर निधि से मिले मदद- संजय पाण्डेय
नेता प्रतिपक्ष संजय पाण्डेय ने कहा है कि निगम के सफ़ाई कर्मचारियों को राहत देने के नाम पर उनका अपमान बंद करें महापौर ! विदित हो कि निगम के द्वारा सफ़ाई कर्मचारियों को एक महीने के लंबे लाँक डाउन में राहत के नाम पर राशन सामग्री दी गई है !इसमें 800 ग्राम आलू, 800 ग्राम प्याज़ और लगभग २०० ग्राम सोयाबड़ी दी गई है, कुल मिलाकर 1.8 किग्रा है , जिसकी गुणवत्ता भी बहुत निम्न है !
पाण्डेय ने महापौर को लिखे पत्र में कहा है कि जो लोग इतने विषम परिस्थितियों में अपने जीवन को खतरे में डालकर नगर निगम क्षेत्र को स्वच्छ रखने रात दिन मेहनत कर रहे हैं, जिन्हे शासन ने कोरोना योद्धा के नाम से नवाजा है,उन्हें राहत के नाम पर मात्र 40-50रु की घटिया सामग्री प्रदान करना बेहद आपत्तिजनक एवं अशोभनीय है।
75 लाख की वीड हार्वेस्टर मशीन एवं 35 लाख के डस्टबिन (निविदा पूर्व ही क्रय) की खरीदी करने वाला निगम , कोरोना योद्धाओं की कमजोरी का उनकी गरीबी का मजाक ना बनाये , इससे उनके साथ साथ उनका परिवार भी अपमानित हुवा है।
मुझे उम्मीद है कि मेरे पत्र की भावना को समझते हुये, आप अवश्य खेद प्रकट करेंगी । नेता प्रतिपक्ष ने कहा है कि शासन में बाहर रहने पर गरीबी हटावो ,और शासन में रहने पर गरीबो का अपमान करना उचित नहीं है। आपसे निवेदन है कि मिशन क्लीन सीटी में कार्यरत स्वच्छता दीदी,जिन्हे मात्र 6000रु मासिक मानदेय मिलता है,एवं निगम में कार्यरत सभी जरूरतमंद कर्मचारियों को भी ध्यान में रख कर उत्तम क्वालिटी एवं मात्रा की राहत सामग्री महापौर निधि से दी जावे, जिससे कम से कम एक परिवार की न्यूनतम जरूरते पूर्ण हो सके।
संजय पाण्डेय ने कहा है कि आशा है आप मेरे पत्र को गंभीरता से लेंगी एवं तदअनुसार निर्णय लेगी।
वर्तमान में जब पूरा विश्व कोरोना जैसी महामारी से जूझ रहा है तो समाज में कुछ ऐसे लोग भी है जिन्होंने अपने जज्बे और जुनून के बल पर समाज में बेहतर कार्य करते हुए समाज को एक नई दिशा देने का काम किया है। युथ फ़ॉर यूनीवर्सल एंड वोलिएंट्री एक्शन द्वारा ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें नेशनल यूथ आइकन अवार्ड 2021 दिया गया है। . छत्तीसगढ़. से इस अवार्ड के लिए . देवेंद्र देवांगन का चयन हुआ है। नेशनल यूथ आइकन अवार्ड 2021 समाज के उन युवाओं को समर्पित है जिन्होंने शिक्षा व समाज सेवा आदि क्षेत्रों में कार्य करते हुए एक नई मिसाल कायम की है ।
इसी तारतम्य में युथ फ़ॉर यूनीवर्सल एंड वोलिएंट्री एक्शन संस्था द्वारा छत्तीसगढ़ की सबसे दूरस्थ अंचल नारायणपुर जिला के अबूझमाड़ क्षेत्र से लगा हुआ ज्ञान ज्योति प्राथमिक शाला कोडोली के शिक्षक देवेंद्र कुमार देवांगन का राष्ट्रीय स्तर पर नेशनल यूथ आइकन अवार्ड लिए चयन किया गया है। विगत वर्षों से अपने नवाचार तथा कोरोनाकाल के दौरान राज्य शासन की महती योजना पढ़ाई तुम्हर द्वार के माध्यम से मोटरसाइकिल गुरुजी के रूप में पारा मोहल्ला क्लास का संचालन और नारायणपुर जिला में पालकों का मोबाइल नंबर लेकर टॉप पेरेंट्स टेलीग्राम ग्रुप का निर्माण कर बच्चों को ऑनलाइन क्लास के लिए सतत प्रेरित किया तथा वर्तमान कोराेना काल में भी मोहल्ला क्लास में बच्चों को कहानी पुस्तक प्रति सप्ताह ले जाकर देते हैं और उन्हें पढ़ाई के साथ राज्य के अन्य प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए प्रेरित करते रहते हैं।शिक्षक देवेंद्र कुमार देवांगन के चयन होने पर जिला शिक्षा अधिकारी श्री जी आर मंडावी जी , राजीव गांधी शिक्षा मिशन के जिला समन्वयक श्री भीमाशंकर रेडी, विकासखंड शिक्षाअधिकारी डॉ खेमेमेश्वर पानीग्राही, खंड स्रोत समन्वयक श्री अमर सिंह नाग,संकुल समन्वयक श्री अजय डेहरिया तथा संकुल के सभी शिक्षकों ने बधाई दिए।
सुन्दरराज पी, पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज, विनीत खन्ना, पुलिस उप महानिरीक्षक, कांकेर रेंज, उत्तर बस्तर कांकेर, मोहित गर्ग, पुलिस अधीक्षक नारायणपुर, नीरज चंद्राकर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नारायणपुर एवं अनुज कुमार, पुलिस अनुविभागीय अधिकारी नारायणपुर के निर्देशन में डीआरजी, जिला बल, छसबल, एसटीएफ, आईटीबीपी, द्वारा क्षेत्र में लगातार नक्सल विरोधी अभियान संचालित किया जा रहा है। पुलिस द्वारा चलाये जा रहे नक्सल विरोधी अभियान के तहत् दिनांक 14.05.2021 को थाना कुरूषनार जिला बल की पुलिस पार्टी नक्सली आरोपी पतासाजी हेतु गुडरीपारा बासिंग की ओर रवाना हुआ था। ग्राम कोडोली पुलिया के पास कुछ संदिग्ध व्यक्ति झोला पकड़े दिखे, जिसे घेराबंदी कर पकड़ा गया।
पूछताछ पर अपना नाम- 1. सुखदेव धु्रव पिता दसरू गोड़ उम्र 24 वर्ष जाति माडिया निवासी झारावाही थाना कुरूषनार (झारावाही जनमिलिशिया सदस्य) 2. लखनलाल नुरेटी पिता स्व.आयतू नुरेटी उम्र 27 वर्ष जाति माड़िया साकिन गुम्मा थाना कुरूषनार (झारावाही जनताना सरकार सदस्य) बताया। साथ में रखे झोला की तलाशी लेने पर सुखदेव ध्रुव से 01 नग प्रेशर कुकर आईईडी करीबन् 03 लीटर व लखन नुरेटी के झोला से बैटरी 08 नग, वायर करीबन् 12 मीटर ,सिरिन्ज 02 नग, डेटोनेटर 02 नग बरामद किया गया। सुखदेव धु्रव द्वारा दिनांक 10.04.2021 को कोसा सेन्टर टेकरी के पास आईईडी लगाने की घटना तथा लखन नुरेटी द्वारा दिनंाक 11.07.2020 को कोहकामेटा व किहकाड़ के बीच टेकरी के पास विस्फोट की घटना, जिसमें 01 गाय मारी गई व दिनांक 10.04.2021 को कोसा सेन्टर टेकरी के पास आईईडी लगाने की घटना में शामिल होना स्वीकार करने पर दिनांक 14.05.2021 को गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। गिरफ्तार नक्सली लखमू नुरेटी के विरूद्व पुलिस अधीक्षक नारायणपुर द्वारा 10 हजार का ईनाम उद्घोषित किया गया था।
लेखक एन. डी. मानिकपुरी अध्यक्ष पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी शोध पीठ
“अक्ति ( अक्षय तृतीया) तिहार” छत्तीसगढ़ महतारी के जतन करइया हमर किसान भाई मन के पहिली तिहार आय। हमर राज म अक्ति परब के बढ़ महत्तम हे। जुन्ना बेरा ले पुरखा मनके चलाय ये चलागन ह हमर राज के बढ़का धरोहर हे। गांव के मनखे मन ये परम्परा बड़ संजो के रखे हे अउ ये तिहार ल बड़ उछाह के साथ मनाथें।
अक्ति तिहार बइसाख महिना के अंजोरी पाख म तीज के दिन मनाए जाथे। ये परब म लइका, सियान के संग जवान के घलो भागीदारी रईथे, काबर के ये तिहार म सबके अलग-अलग बूता रईथे, तेखर सेती सबो के मन म तिहार ल लेके उछाह रईथे। पुरखा ले मिले जिम्मेदारी ल सबझन मिल बांट के निभाथें। गांव म देखे ल मिलथे के, अपन-अपन गांव के अपन-अपन नियम हे। पौनी-पसारी घलो अलग-अलग हे, फेर जम्मो गांव के कुछ बात एके रईथे। जइसे पौनी-पसारी राखे के नियम, गांव के देबी-देवता के पूजा पचीस्टा के नियम। नाऊ, राउत, बरेठ, लोहार कस बईगा घलो ह गांव के पौनी होथे। बईगा ह शीतला दाई, ठाकुरदईया (ठाकुरदेव), सांहड़ीन-सांहड़ा, ममा-भांचा, बूढ़ादेव-बूढ़ीदाई, मेड़ोदेव संग गांव के जम्मो देबी-देवता ल पूजथे। परब अउ मनउती के अनुसार बईगा गांव के देबी-देवता ल जोहारथे। गांव के मनखे मन के मानना हे येखर ले गांव म सुख शांति बने रईथे अउ देवधामी ह कोनो ल नई सताय। बईगा के ये बूता बर गांव के लोगन मन ओला दूसर पौनी-पसारी जइसे मान घलो देथें।
अक्ति के दिन जइसे सुरूज देवता उगासथे, उसनेच बईगा के अगुवाई मा गांवभर के घर पाछु एक झन ठाकुरदईया म बीज बोएं बर, नांगर जोते बर अउ पूजा करे बर जाथें। लुलुकहा सियानमन संग तूलमूलहा लइकामन घलो अगुवाय रइथें।
पूजा बर कण्डरा कर ले बीजबोनी(बांस से बनी टोकरी) बिसाय रथें। उही बीजबोनी टोकनी म बीज धरथें। बीजबोनी म धान, कोदो, तीली, गंहू, चना, तिवरा, राहेर, जौ, कुटकी, गोंदली संग बरछो जात के बीज होथे। टुकनी म नरियर अगरबत्ती, हुम बर गुड़-धूप, अउ नांगर लोहा घलो रखे जाथे।
ठाकुरदईया पहुँच के सब झन नांगर लोहा ल भूंइया म गड़िया देथें, फेर बईगा पूजा करथे। पानी छिच के बईगा बीज बोथे फेर लईका मन नांगर लोहा ल निकाल के ठाकुरदईया के आंवर भांवर घिरलाथे, ये परकार ले, ये ह पहिली बांवत होथे। बईगा ह बीज के कुछ हिस्सा ल बोते, कुछ हिस्सा ल अपन पास रखथे अउ कुछ हिस्सा ल किसान भाई मन लहूंटा देथे। बईगा ह नरियर फोर के परसाद देथे, तहां जम्मो झन अपन-अपन घर लहूंट जाथे। ठाकुरदईया म बांवत के पहिली कोनो पनिहारिन कुआं बोरिंग ले पानी नई लायं।अईसे बिहिनिया के बेरा कटथे।
ठाकुरदईया ले आके के मंझनिया तक गांव के मनखे मन अपन-अपन पुरखा के मठ (मृतकों की समाधि) अउ गांव के देबी-देवता म पानी रितोथे। तिहार के दू चार दिन पहिली मठ अउ गांव के देबी-देवता के जगह ल जगाय(जीर्णोद्धार) जाथे। सुघ्घर लिप बहार के सुन्दराय जाथे, फेर तिहार के दिन पानी रितोथें। संग म चना दार घलो डारथें। कोनो-कोनो मनखे शक्कर-गुड़ चढ़ाथें। परदेस म रहवइया मन तिहार बर घर आथें। आके अपन डीह-डोंगर(घर-द्वार) अउ अपन पूर्वज मठ म पानी रितोथें। पानी माटी के नवा चुकिया अउ करशी म दे जाथे। जेन ल तिहार के दू-चार दिन पहिली कुम्हार करा ले बिसाय बर लगथे। जुन्ना सियान मन अक्ति तिहार माने के बाद ही करशी के पानी पीयैं। माने जाथे, अईसे करेले पुरखा मन आशिरबाद देथे।
मंझनिया के बाद के बेरा ह लईकामन के होथे। काबर के ये बेरा ह पुतरी-पुतरा के बिहाव के बेरा होथे। कई गांव ये तिहार के असर 15 दिन पहिली ही देखे जा सकथे, काबर के पुतरी-पुतरा के बिहाव 15 दिन पहिली शुरू हो जथे। लइका मन के ये खेल म सियान मन घलो बरोबर भाग लेथे। कोनो गांव म तो ये पुतरी-पुतरा के बिहाव ह सिरतोन म नोनी-बाबू के बिहाव असन लगथे। कोनो नोनी पुतरी के महतारी बनथे, त कोनो नोनी पुतरा के महतारी बनथे। ये पारा ले वो पारा बरात जाथे, चउथिया जाथे अउ भांवर-टीकावन घलो होथे। लईकामन के पुतरी-पुतरा के बिहाव म सियनमन घलो सहिच के बिहाव कस बिपतियाय रईथे। अइसे माने जाथे, जेन नोनी-बाबू के बिहाव नई लगत हे वोला पुतरी-पुतरा के बिहाव खेलवा दें तहाँ ओकर बिहाव माड़ जथे। पुतरी-पुतरा के बिहाव झरे के बाद संझा पुतरी-पुतरा ल नोनी मन गांव के बाहिर म परसा, फूड़हर पेड़ म लुका देथे। कोनों-कोनों गांव म बाबू मन लकड़ी के बने तलवार म वो पुतरी-पुतरा ल मारथे घलो। पुतरी-पुतरा लुका के आये के बाद नोनी मन गोबर पानी छिंच के घर म घुसरथें।
टीकावन देवइया मनखे मन ल बजार ले बिसाय करी लाड़ू बांटे जाथे। ये परकार ले पूरा गांव ये तिहार ल मनाथें। अक्ति के दिन भगवान परसुराम के जयन्ती घलो होथे, तेखर सेती भगवान परसुराम के बिशेष पूजा करे जाथे। भगवान परसुराम ह क्षत्रीय मन के अहंकार ल दमन करे बर 28 घांव (बार) धरती ल क्षत्रीय विहीन करे रिहिस। भगवान परसुराम शौर्य अउ वीरता के प्रतीक हरे, तेखरे सेती कई गांव म लईकामन लकड़ी के तलवार बनाके लहराथें, ओमा महूर रंग लगा के खून के चिनहा घलो बनाथें। इहि दिन महाभारत काल म युधिष्ठिर महाराज ल अक्षय बरतन मिले रिहिस। जेखर जेवन कभू नई सिराय। इहि दिन भगवान कृष्ण ह अपन मितान सुदामा ले भेंट करके उंखर गरीबी दूर करे रिहिस। माने जाथे के आज के दिन पूजा-पाठ, हवन करे ले अक्षय यानि कभू नई सिराय वाले उमर अउ निरोगी काया मिलथे।
अक्ति म बिहाव-बर के सुघ्घर महूरत रईथे। अक्ति के भांवर पुरखा ले चले आत हे अउ येला बने माने जाथे। इही कारण हे के हमर राज म अक्ति म सबले ज्यादा बिहाव होथे। तइहा बेरा म गांव-गंवतरी जाये के मुउका अक्ति म मिलय। अक्ति म ममा-फूफू, समधी-सजन अउ घर-परिवार म जाएके अउ मेल-मिलाप के घलो सुघ्घर मुउका मिलथे। ये परकार ले अक्ति के उछाह रईथे। तइहा बेरा म बाल बिहाव ज्यादा होवत रिहिस, अब छत्तीसगढ़ राज बने के बाद मनखे मन जागरूक होइन हे अउ अब ये सब रूकगे हावय।
किसान भाई मन अक्ति तिहार मान के खेती-किसानी के तइयारी करथें। खेत के साफ सफाई, खातू डारे के बूता शुरू हो जाथे। किसान मन नांगर अउ किसानी के अवजार ल जतनथें। खातू अउ बीज के बेवस्था करथें। रेगहा, अधिया अउ किसानी के जम्मो करार अक्ति के दिन करे जाथे। इही दिन बसंत ऋतु खतम होथे अउ गर्मी शुरू होथे। संगे संगे किसानी के नवा बछर शुरू होथे।
वइसे तो हमर राज म नवा सरकार बने के बाद राज के मुखिया भूपेश बघेल ह छत्तीसगढ़ीया तिहार मन के महात्तम बढ़ा दिस। काबर के अब तक हमर राज म दूसर राज ले आए मनखे अउ टीवी सीरियल के नकल म करे उछाह जादा महात्तम दे रिहिन। छत्तीसगढ़ के संस्कृति अलग हे, ये बात के महात्तम ल भूपेश बघेल समझिस। जइसे हमर अक्ति तिहार म बरछो जात के मनखे म एक जगहा सकलाथे।
हमर राज म राजपत कमजोरी नो हय, ताकत आय। अक्ति तिहार इहां सामाजिक समरसता के प्रतीक हरे। अक्ति तिहार कस हमर राज के आने तिहार ल घलो जम्मो जात जुरमिल के उछाह मनाथे, जेन ह समूचा छत्तीसगढ़ी समाज ल सामाजिक अउ सांस्कृतिक उदारता बर दुनिया ले अलग करथे। हमर तिहार बार अउ चरितर ल देखले दुनिया के मनखे मन कहिथे “छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया” सब साल के तिहार म उछाह बरोबर देखेल मिलत हे, फेर ये बछर “उप्पत कोरोना” के सेती मनखे के जिनगी भूंजा गेहे। सबो झन इही सोंचत हे के अब काला खाबो अउ काला कमाबो।
हमर राज किसानहा राज हे। इहां खेती-किसानी अउ किसानी ले जुरे बनी-भूति करईया मनखे ज्यादा हे। तेखर सेती जम्मो मनखे बिपदा म किसान मन ल बड़ उम्मीद ले देखत हें। हमर सरकार घलो किसान मन ल बड़ साथ देवत हे। हमर किसान भाई मन डराय नई हे ये बिपत के बेरा म छाती ल चौड़ा करके खड़े हे अउ किसानी के काम ल धीरे-बाने शुरू कर देंहे। आज ये अक्ति तिहार म भगवान ले ये बिनती बिनोवन के किसान मन के कोठी ह सदा भरे राहय ताकि दुनिया म कोनो मनखे भूखे झन राहैं।