दोषी पाए गए गुरुकुल के डायरेक्टर, संयुक्त संचालक के आदेश पर दर्ज होगा एफआईआर जांच प्रतिवेदन से हुआ खुलासा, गुस्सैल रवैय्ये के चलते बच्चे को दिया था शारीरिक दंड दसवीं कक्षा के बच्चे को बाल खींचकर धकेला था टेबल में, चोट की भी पुष्टिजिला शिक्षा अधिकारी को मिला लिखित आदेश, विद्यालय की मान्यता भी होगी रद्दप्राचार्य सहित कई शिक्षकों ने दिया त्यागपत्र, प्राचार्य का पद अब स्वयं संभाल रहे डायरेक्टर जगदलपुर. ग्राम चिढईपदर स्थित संस्कार द गुरुकुल आवासीय विद्यालय में व्याप्त अनियमितताओं की शिकायत राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो द्वारा विभिन्न विभागों में किये जाने के बाद से ही इस विद्यालय की परेशानियाँ कम होने का नाम नहीं ले रही है. पूर्व से ही विवादों में घिरे इस आवासीय विद्यालय की मान्यता रद्द होने से लेकर यहाँ के डायरेक्टर पर अब विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर भी होगी. इस सम्बन्ध में संयुक्त संचालक ने जिला शिक्षा अधिकारी को आदेशित भी कर दिया है.गौरतलब है कि कुछ माह पूर्व यहाँ के डायरेक्टर अमित जैन ने संस्था के सभी गतिविधियों में बगैर प्राचार्य अभिषेक नायडू की अनुमति और विचार-विमर्श किये सीधे हस्तक्षेप करते हुए अपने स्वेच्छारिता और गुस्सैल रवैय्ये के चलते दसवीं कक्षा के छात्र को बेरहमी से बाल खींचते हुए टेबल में ढकेल दिया था और 14-15 झापड़ जड़ दिए थे. इस घटना में छात्र को टेबल में ढकेलने और अमित की घड़ी से सर पर गंभीर चोट भी लगी थी. इस घटना की जानकारी राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो, नयी दिल्ली की बस्तर इकाई को मिलने के बाद संभागीय अध्यक्ष जगमोहन सोनी और उनकी टीम के द्वारा विद्यालय पहुंचकर जानकारी प्राप्त की गयी जिसके आधार पर राज्य से लेकर क्षेत्रीय स्तर तक विभिन्न विभागों में इसकी लिखित शिकायत दी गयी थी. शिकायत के आधार पर संयुक्त संचालक आरपी आदित्य के आदेश पर जिला शिक्षा अधिकारी ने तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की. इस जांच टीम ने अपनी छ: बिंदु की रिपोर्ट में विद्यालय के डायरेक्टर अमित जैन को दोषी पाया है. यही नहीं, डायरेक्टर अमित द्वारा सभी नियमों को दरकिनार करते हुए शैक्षणिक गतिविधियों में भी हस्तेक्षेप किया जाता रहा है. जिससे यहाँ के शिक्षकों और बच्चों को मानसिक प्रताड़ना झेलना पड़ रहा है. संस्था के प्राचार्य अभिषेक नायडू ने अपने लिखित बयान में कहा है कि उन्हें भी संस्था के कई जरुरी कार्यों से अनभिग्य रखा जाता रहा है. जांच टीम ने स्पष्ट तौर पर यह कहा है कि संचालक ने जांच दल के समक्ष अपनी उपस्थिति ही दर्ज नहीं करायी थी.जांच दल की रिपोर्ट के बाद संयुक्त संचालक ने दिनांक 27 फरवरी 2023 को अपने पत्र क्रमांक 363 में जिला शिक्षा अधिकारी को आदेशित किया है कि विद्यालय प्रबंधन को नोटिस जारी करते हुए शाला की मान्यता समाप्ति की कार्यवाई की जाए साथ ही पुलिस में प्राथमिकी दर्ज करायी जाए. किन्तु खबर लिखे जाने तक इस बात का खुलासा नहीं हो सका की पखवाड़े भर से भी अधिक समय बीत जाने के बाद भी जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा इस मामले में क्या कुछ कार्यवाई की गयी है.गुरुकुल के प्राचार्य अभिषेक नायडू ने बताया कि डायरेक्टर की प्रताड़ना से तंग आकर उन्होंने भी त्यागपत्र दे दिया है. उनका कार्यकाल इस माह तक है. यही नहीं, संस्था के कई शिक्षकों ने भी इसी कारण से त्यागपत्र दिया है.मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकारी एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो के बस्तर संभाग अध्यक्ष जगमोहन सोनी ने कहा है कि निश्चित ही यह मामला बेहद गंभीर है और इस पर गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज होनी चाहिए. ऐसा प्रतीत हो रहा है कि जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा मामले में कोताही बरती जा रही है. आगामी कुछ दिनों में जांच रिपोर्ट के आधार पर एसपी को भी एफआईआर किये जाने हेतु शिकायत पत्र दिया जायेगा.
आदिवासियों और मसीहियों के बीच जमकर संघर्ष, कई घायल
- धर्मांतरित आदिवासी महिला के अंतिम संस्कार को लेकर चल रहे विवाद ने लिया उग्र रूप
- भेजरीपदर गांव में भारी पुलिस बल तैनात, बड़े अधिकारी भी पहुंचे
- ननकीराम कंवर समेत अनेक वरिष्ठ भाजपा नेता हालात जानने पहुंचे
तोकापाल बस्तर जिले की तोकापाल जनपद पंचायत का भेजरीपदर गांव सुलग उठा है। ईसाई धर्म अपना चुकी गांव की एक महिला के शव के अंतिम संस्कार को लेकर उपजे विवाद ने मंगलवार को उग्र रूप ले लिया। दोनों समुदायों के लोग आक्रामक हो उठे और एक दूसरे पर पत्थर बरसाने लगे। पथराव में चार पुलिस कर्मियों समेत दोनों समुदायों के अनेक लोग घायल हुए हैं। जख्मी पुलिस कर्मियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हालात को देखते हुए गांव में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी गांव में डेरा डाले हुए हैं। बस्तर संभाग में इन दिनों धर्मांतरण को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है।
गांव – गांव से आदिवासियों और मसीही समुदाय के लोगों के बीच आएदिन विवाद की खबरें आती रहती हैं। इसी क्रम में परपा थाना क्षेत्र और तोकापाल जनपद पंचायत क्षेत्र के भेजरीपदर गांव में रविवार को 45 वर्षीय महिला माते बेको पति मोसू बेको की मौत हो गई थी। माते बेको धर्म परिवर्तन कर ईसाई बन गई थी। धर्मांतरित माते बेको के शव को उसके परिजन आदिवासियों के लिए आरक्षित श्मशानघाट में अंतिम संस्कार के लिए ले गए थे। परिजन शव को वहीं दफनाना चाहते थे। आदिवासी समुदाय के लोग एकजुट होकर इसका विरोध करने लगे। माते बेको के परिजनों के समर्थन में ईसाई समुदाय के लोग सामने आ गए। बात बिगड़ती चली गई और दोनों समुदायों के बीच संघर्ष शुरू हो गया। दोनों पक्षो में जमकर पत्थरबाजी होने लगी। हालात को देखते हुए डीआरजी, तीन थानों के पुलिस बल समेत अन्य सुरक्षा बल गांव में तैनात कर दिए गए। स्थिति सम्हालने के फेर में चार पुलिस जवान पथराव में घायल हो गए। इसके अलावा दोनों समुदायों के भी कुछ लोगों को चोटें आने की खबर है। तोकापाल के प्रभारी एसडीएम तथा पुलिस व जिला प्रशासन के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी भेजरीपदर में डटे रहकर हालात पर नजर बनाए हुए हैं।इस गांव में ईसाई समुदाय एवं आदिवासी समुदाय के बीच में विवाद की यह पहली घटना है। विवाद के बाद प्रशासनिक और पुलिस प्रशासन ने इस गांव को सुरक्षात्मक दृष्टि से छावनी में तब्दील कर दिया है और दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया जा रहा है। समझाइश के बाद महिला के शव को परिजनों की निजी जमीन में दफना दिया गया है। मामला सुलझाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन ईसाई समुदाय एवं आदिवासी समुदाय के लोगों से लगातार बातचीत कर रही है। अब भी गांव में पुलिस बल तैनात है।
बस्तर में लगातार हो रही हैं ऐसी घटनाएं
बस्तर संभाग में बड़े पैमाने पर आदिवासियों का धर्मान्तरण हुआ है। इसे लेकर आदिवासी समुदाय तथा ईसाई समुदाय के लोगों के बीच टकराव के हालात बनते रहते हैं। संभाग के नारायणपुर में कूछ माह पहले इन्हीं दोनों समुदायों के बीच उपजे विवाद की परिणति भीषण संघर्ष के रूप में सामने आई थी। वहां कई दिनों तक तनावपूर्ण हालात बने रहे। इस विवाद को बड़ी मुश्किल से शांत किया जा सका था। बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड के ग्राम मालगांव में भी धर्म परिवर्तित कर चुकी एक महिला के अंतिम संस्कार को लेकर आदिवासी और ईसाई समुदाय के लोग आमने सामने हो गए थे। इस महिला की मौत छुई मिट्टी खदान धंसने से हुई थी। मृतका के परिजन अंतिम संस्कार ईसाई परंपरा के अनुसार करना चाहते थे, लेकिन आदिवासी समुदाय अपनी रीति के अनुसार अंत्येष्टि कराने पर अड़े हुए थे। चूंकि महिला पहले आदिवासी समुदाय की थी और धर्मान्तरित होकर ईसाई बन गई थी, इसलिए आदिवासी समुदाय अड़ा हुआ था। प्रशासनिक अधिकारियों की समझाईश के बाद बड़ी मुश्किल से मामला शांत हो पाया था। वहीं किलेपाल में आदिवासी समुदाय के भाजपा नेता की रहस्यमी परिस्थितियों में हुई मौत को लेकर भी आदिवासियों और ईसाई समुदाय के लोगों में जमकर विवाद हुआ था। किलेपाल में तब तनाव की स्थिति निर्मित हो गई थी।
भाजपा का प्रतिनिधि मंडल पहुंचा भेजरीपदर
भेजरीपदर में आदिवासियों और ईसाई समुदाय के लोगों के बीच टकराव और संघर्ष की जानकारी मिलने पर बस्तर एवं छत्तीसगढ़ के विभिन्न भागों से भाजपा से जुड़े अनेक वरिष्ठ आदिवासी नेता जगदलपुर पहुंच गए। बाद इन नेताओं का दल भेजरीपदर रवाना हो गए। इन नेताओं में पूर्व मंत्री द्वय ननकीराम कंवर व केदार कश्यप, दिनेश कश्यप, राजाराम तोड़ेम, बैदूराम कश्यप, लच्छूराम कश्यप, रूपसिंह मंडावी, पूर्व विधायक संतोष बाफना, संजय पाण्डेय, महेश कश्यप, शिवनारायण पाण्डेय, सुधीर पाण्डेय, तेजपाल शर्मा आदि शामिल थे। इन नेताओं ने भेजरीपदर के आदिवासी समुदाय के लोगों से चर्चा कर वस्तुस्थिति जानने का प्रयास किया।
प्रताड़ित किए जा रहे आदिवासी : लच्छूराम कश्यप
चित्रकोट के पूर्व विधायक एवं आदिवासी नेता लच्छूराम कश्यप ने आरोप लगाया है कि भेजरीपदर के आदिवासियों को प्रशासन के अधिकारी और मिशनरी के लोग प्रताड़ित कर रहे हैं। ईसाई समुदाय द्वारा किए गए हमले में चार पांच आदिवासियों को काफी चोटें आई हैं। आदिवासियों के श्मशान घाट में धर्म बदल कर ईसाई बन चुकी महिला के शव को दफनाने का प्रयास कर आदिवासियों को उकसाया गया। इसके बाद आदिवासियों पर हमला कर दिया गया। श्री कश्यप ने कहा कि पुलिस और प्रशासन के अधिकारी पीड़ित आदिवासियों की फरियाद सुनने को तैयार नहीं हुए और ईसाई समुदाय के समर्थन में खड़े हो गए। इस तरह गांव के निरीह आदिवासियों को दोनों तरफ से प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को पक्षपात नहीं करना चाहिए। उल्लेखनीय है कि कश्यप भेजरीपदर पहुंचे भाजपा नेताओं के प्रतिनिधि मंडल में शामिल थे।
नवरात्रि पर्व के दौरान शांतिपूर्ण तरीके से नवरात्रि पर्व के आयोजन हेतु किया गया रोड़ परिवर्तित
- गंगा मैय्या झलमला मंदिर झलमला से गुजरने वाले बड़ी माल वाहक वाहन चालकों से अपील परिवर्तित मार्ग का करे उपयोग
- बालोद पुलिस की दर्शनर्थियों से अपील निर्धारित स्थानों पर करे वाहनों की पार्किंग एवं परिवर्तित मार्ग का करे उपयोग।
बालोद पुलिस अधीक्षक बालोद डॉ जितेन्द्र कुमार यादव के निर्देशन में, श्रीमान् अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हरीश राठौर के मार्गदर्षन व उप पुलिस अधीक्षक बोनीफास एक्का के पर्यवेक्षण में यातायात प्रभारी दिलेश्वर चंद्रवंशी के नेतृत्व में गंगा मैय्या मंदिर झलमला में चैत्र नवरात्रि पर्व दिनांक 22.03.2023 से 30.03.2023 तक ज्योति कलश स्थापना एवं मेला का आयोजन होना है जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्वालुओं, आम नगारिकों एवं दर्शनार्थियों की भीड़-भाड़ होने की संभावना है, जिसके मद्देनजर रूट डायवर्सन चार्ट बनाया गया है।

रूट डायर्वन इस प्रकार है- धमतरी तरफ से आने वाले बड़ी मालवाहक वाहन धमतरी-गुरूर-झलमला तिराहा-पड़कीभाठ बायपॉस-पाररास होते हुए बटेरा चौक लोहारा से गतव्य स्थान के लिए आगे बढेंगे। दुर्ग से आने वाले बड़ी मालवाहक वाहन दुर्ग-गुण्डरदेही-पड़कीभाठ-बायपास होते हुए बटेरा चौक लोहारा से गतव्य स्थाना के लिए आगे बढेंगे। राजहरा की ओर से आने वाले बड़ी मालवाहक वाहन राजहरा-कुसुमकसा-बटेरा चौक लोहारा-पाररास बायपॉस-पड़कीभाठ होते हुए गतव्य स्थान के लिए आगे बढेंगे। इसी प्रकार राजनांदगांव की ओर से आने वाले बड़ी मालवाहक वाहन राजनांदगांव- लोहारा-बटेरा चौक-पाररास बायपॉस-पड़कीभाठ होते हुए गतव्य स्थान के लिए आगे बढेंगे। उपरोक्त रूट डायवर्सन चार्ट सभी बड़ी मालवाहक वाहनों के लिए दिनांक 22.03.2023 से 30.03.2023 तक लागू रहेगा।

वाहन चालको एवं श्रद्वालुओं के लिए 03 स्थानों में पार्किंग स्थान बनाया गया है। धमतरी गुरूर की ओर से आने वाले दर्शनार्थियों पुलिस कॉलोनी परिसर झलमला में पार्किंग करेंगें। दुर्ग गुण्डरदेही की ओर से आने वाले दर्शनार्थियों झलमला बाजार चौक में पार्किंग करेंगे एवं राजहरा राजनांदगांव की ओर से आने वाले वाहन सिवनी मैदान पार्किंग एवं बालोद बाजार हीरापुर जाने मोड़ के सामने पार्किंग करेंगे।

दर्शनार्थियों एवं आम जनता से बालोद पुलिस की अपील निर्धारित स्थानों में वाहन पार्किंग करें, निर्धारित पार्किंग स्थानों में ही वाहन पर्किंग कर सवारी उतारें। मालवाहक वाहन चालक परिचालक एवं मालिक परिवर्तित मार्ग का ही उपयोग करें, यातायात व्यवस्था बनाने एवं शांतिपूर्ण तरीके से चैत्र नवरात्रि पर्व के आयोजन हेतु जिला एवं पुलिस प्रशासन का सहयोग करें। अधिक जानकारी के लिए पुलिस कंट्रोल रूम बालोद 94791-91160, यातायात कार्यालय बालोद 94791-91274 पर संपर्क करें।

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छग में नहीं मिल रहा है अनेक जातियों को आरक्षण : बैज
- पात्र जातियां अनुसूचित जनजाति की सूची से बाहर क्यों : दीपक बैज
- बस्तर के सांसद ने लोकसभा में उठाया जनजातीय सूची का मुद्दा
बस्तर क्षेत्रीय सांसद दीपक बैज ने लोकसभा में प्रश्न लगाकर छत्तीसगढ़ की अनेक पात्र जातियों को अनुसूचित जनजाति की सूची से बाहर रखे जाने तथा इसकी वजह से इन जातियों के लोगों को आरक्षण का लाभ न मिल पाने का मुद्दा उठाया। सांसद दीपक बैज लोकसभा के बजट सत्र में लगातार सक्रिय और मुखर हैं। वे छत्तीसगढ़ और बस्तर के लोगों के हितों से जुड़े मुद्दे निरंतर उठाते आ रहे हैं। इसी कड़ी में बैज ने छत्तीसगढ़ की अनेक जातियों को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल न किए जाने और उन्हें आरक्षण के लाभ से वंचित रखे जाने का मामला भी प्रमुखता से उठाया। सांसद दीपक बैज ने अतारंकित प्रश्न के माध्यम से केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री से जानना चाहा कि कि पांच साल के दौरान सरकार को छत्तीसगढ़ से जातियों की सूची में सुधार के लिए कितने प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, क्या सूची में अंतर के कारण छत्तीसगढ़ की अनेक जातियों को अनुसूचित जनजाति को प्राप्त होने वाले आरक्षण का लाभ नहीं मिल पा रहा है, इस संबंध में ब्यौरा क्या है, इस संबंध में छत्तीसगढ़ राज्य सरकार से प्राप्त प्रस्तावों पर अब तक क्या कार्यवाही की गई है? बैज के प्रश्नों के जवाब में जनजातीय कार्य राज्यमंत्री बिश्वश्वेर टुडू ने बताया कि अनुसूचित जनजाति के रूप में किसी समुदाय की अधिसूचना जारी करने के लिए एक नोडल मंत्रालय है। हालांकि अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र जारी करने और सामाजिक स्थिति के सत्यापन की जिम्मेदारी राज्य शासन की है। 9 दिसंबर 2022 को संविधान ( अनुसूचित जनजाति ) आदेश पांचवा संशोधन विधेयक पेश किया गया था। यह विधेयक लोकसभा में पारित हो चुका है और राजयसभा में विचाराधीन है। इस विधेयक में छत्तीसगढ़ राज्य के संबंध में संविधान ( अनुसूचित जनजाति ) आदेश 1950 में कुछ जातियों के समावेश को प्रभावी बनाने के लिए संशोधन करने का प्रस्ताव है। राज्यमंत्री टुंडू ने सांसद दीपक बैज को बताया कि इन जातियों का विस्तृत ब्यौरा भी दिया जिसमें मात्रात्मक त्रुटियों को दूर करते हुए जातियों का उल्लेख है।
छत्तीसगढ़ में उपलब्ध कराए जा रहे हैं रोजगार के पर्याप्त अवसर
- सांसद बैज के प्रश्न के जवाब में केंद्र सरकार ने दी जानकारी
- राज्य में कामगारों की संख्या बढ़कर 64.9 प्रतिशत हो गई
- बिहार में बढ़ी बेरोजगारी, यहां सिर्फ 39. 3 प्रतिशत कामगार
बस्तर क्षेत्रीय सांसद दीपक बैज ने लोकसभा में बेरोजगारी का मुद्दा उठाया। उन्होंने बेरोजगारी दूर करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों और राज्यों में बेरोजगारों और कामगारों के आंकड़े मांगे। श्री बैज के प्रश्न के जवाब में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार राज्यमंत्री रामेश्वर तेली ने जो आंकड़े दिए, उनके मुताबिक छत्तीसगढ़ में कामगारों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है और राज्य में मार्च 2023 की स्थिति के अनुसार कामगारों की संख्या बढ़कर 64.9 प्रतिशत हो गई है। जबकि सन 2018 – 19 में संख्या 61.2 प्रतिशत थी यानि कामगारों की संख्या चार साल में करीब चार फीसदी बढ़ी है। वहीं दूसरी ओर रोजगार के मामले में बिहार की हालत बुरी है। यहां कामगारों की संख्या महज 39.3 फीसद है, जो बीते साल के मुकाबले 0.4 प्रतिशत और घटा है।बस्तर के सांसद दीपक बैज ने अतारांकित प्रश्न के जरिए बेरोजगारी की स्थिति के संबंध में विभिन्न मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा था। उन्होंने पूछा कि देश में बेरोजगारी और बेरोजगारों की क्या स्थिति है, बीते एक दशक के दौरान बेरोजगारी दर में कितनी वृद्धि हुई है, मौजूदा समय में बेरोजगारी दर कितनी है, उत्तरप्रदेश और देश में बेरोजगारी के उप शमन और रोजगार सृजन के लिए संचालित योजनाओं व कार्यक्रमों के नाम क्या हैं, इनसे क्या उपलब्धियां हासिल हैं एवं रोजगार पाने वाले युवाओं की संख्या कितनी है, चार वर्षों में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में कितने बेरोजगारों को रोजगार मिला है, बीते तीन सालों में सरकारी एवं निजी क्षेत्र में कितने लोगों को रोजगार मिला और इसकी राज्यवार स्थिति क्या है तथा क्या केंद्र सरकार बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता दे रही है? बैज के तमाम प्रश्नों का सिलसिलेवार लिखित जवाब केंद्रीय श्रम एवं रोजगार राज्यमंत्री रामेश्वर तेली ने दिया। उन्होंने बताया कि 2017- 18 में बेरोजगारी दर 6 प्रतिशत थी, जो 2021- 22 में घटकर 4.01 प्रतिशत हो गई है। यह बेरोजगारी दूर करने की स्थिति में सुधार को दर्शाता है। जनसंख्या अनुपात में कामगारों की संख्या में बढ़ोत्तरी की जानकारी देते हुए तेली ने सांसद दीपक बैज को बताया कि सन 2017-18 में कामगारों की संख्या जनसंख्या अनुपात में 42.3 प्रतिशत थी, जो क्रमशः बढ़ते बढ़ते 2021-22 में 52.9 प्रतिशत तक पहुंच गई है। मेक इन इंडिया, स्टार्ट अप इंडिया, स्टैंड अप इंडिया, डिजिटल इंडिया, सबके लिए आवास जैसे फ्लैगशिप कार्यक्रम आदि से रोजगार सृजित किए गए हैं। जनसंख्या अनुपात में राज्यवार कामगारों की संख्या के प्रतिशत की जानकारी भी केंद्रीय राज्यमंत्री रामेश्वर तेली ने सांसद दीपक बैज को दी है। इसमें छत्तीसगढ़ में कामगारों का प्रतिशत उत्साहजनक है। 2018-19 से 2021-22 तक के आंकड़े उपलब्ध कराए गए हैं। छत्तीसगढ़ में 2018-19 के दौरान कामगारों की संख्या 61.2 प्रतिशत थी। यह संख्या साल दर साल बढ़ते बढ़ते सन 2021-22 में 64.9 प्रतिशत तक पहुंच गई।
केंद्रीय लोक उद्यमों में कर्मी घटे
केंद्रीय श्रम एवं रोजगार राज्यमंत्री रामेश्वर तेली द्वारा बस्तर के सांसद दीपक बैज को उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार केंद्र सरकार के लोक उद्यमों में नियमित कर्मचारियों की संख्या लगातार घट रही है। केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक केंद्रीय सरकारी लोक उद्यमों में सन 2017-18 में नियमित कर्मचारियों की संख्या 10.71लाख, 2019-20 में 9.10 लाख, 2020-21 में 8.51थी। यह संख्या सन 2021-22 में और घट गई। 2021-22 के दौरान केंद्रीय सरकारी लोक उद्यमों में नियमित कर्मचारी महज 8.41 लाख ही रह गए। श्री तेली ने बताया कि राज्य कर्मचारी बीमा निगम के माध्यम से संचालित अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना के तहत बेरोजगारी लाभ बीमित श्रमिकों को दिया जा रहा है। इसे दैनिक आय के 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया गया है और इसकी अवधि 90 दिनों की है। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार राज्यमंत्री ने बेरोजगारी दूर करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए सांसद श्री बैज को बताया कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना, पं. दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना, पं. दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय योजना, राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन, प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना जैसे अनेक कार्यक्रम और योजनाओं के जरिए बेरोजगारी दूर करने व युवाओं को स्वरोजगार की ओर उन्मुख करने के उपाय किए गए हैं। पीएम गति शक्ति के तहत बंदरगाहों, एयरपोर्ट, सड़क, जन परिवहन, जलमार्ग, रेलवे और लॉजिस्टिक बुनियादी ढांचे के जरिए भी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं।
देवगुड़ियों का संरक्षण सरकार की प्राथमिकताओं में : रेखचंद जैन
- संसदीय सचिव ने आविप्रा अध्यक्ष लखेश्वर बघेल का जताया आभार
- मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में विकास के साथ आदिवासी संस्कृति को दिया जा रहा है बढ़ावा :- जैन
जगदलपुर संसदीय सचिव व जगदलपुर के विधायक रेखचंद जैन ने कहा है कि देवगुड़ियों का संरक्षण व संवर्धन तथा आदिवासी संस्कृति को पल्लवित करना और बढ़ावा देना भूपेश बघेल सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हैं। इस दिशा में सरकार द्वारा अतुलनीय कार्य किए जा रहे हैं।रविवार को जगदलपुर विधानसभा क्षेत्र के छह गांवों में देवगुड़ी संरक्षण व संवर्धन के लिए संबंधित ग्रामों के सरपंच, उप सरपंच, पंचों, सचिवों तथा ग्रामीणों को आवश्यक राशि के चेक सौंपते उन्होंने यह बात कही। जैन ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल गांवों के विकास के लिए सतत प्रयत्नशील रहने के साथ ही आदिवासी संस्कृति को प्रोत्साहित कर रहे हैं और भरपूर बढ़ावा भी दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में गांवों में विकास के उतने कार्य हो रहे हैं, जिनकी भाजपा के 15 साल के कार्यकाल में कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। जैन ने अंचल के प्रमुख देवी- देवताओं की गुड़ियों के संरक्षण व संवर्धन के लिए आवश्यक पहल करने एवं फंड उपलब्ध कराने हेतु बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण व इसके अध्यक्ष लखेश्वर बघेल का भी आभार माना।

छह देवगुड़ियों के लिए 26 लाख रुपए स्वीकृत
जगदलपुर विधानसभा क्षेत्र की छह देवगुड़ियों का 26 लाख रुपयों से संरक्षण- संवर्धन होने की बात कही गई। जैन ने बताया कि अब तक सैकड़ों देवगुड़ियों का कायाकल्प करने के लिए राशि प्रदान की जा चुकी है। रविवार को जिन छह देवगुड़ियों के संरक्षण- संवर्धन के लिए चेक दिए गए, उनमें जामावाड़ा 1 की परदेशिन माता, मारकेल 1 की जलनी माता, मांझीगुड़ा की बामनदेई माता, तुसेल की हिंगलाजिन माता, टोन्डापाल की मावली माता तथा नेतानार की मातागुड़ी सम्मिलित हैं। इन सभी देवगुड़ियों के संरक्षण संवर्धन का कार्य जल्द आरंभ हो जाएगा।
ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष बघेल ने सौंपा चेक
रविवार को चेक वितरण के समय तुसेल व टोंडापाल के पंचायत प्रतिनिधि नहीं पहुंच पाए थे। सोमवार को इन्हें विधायक रेखचंद जैन की ओर से कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष व जनपद सदस्य नीलूराम बघेल ने जगदलपुर स्थित विधायक कार्यालय में चेक सौंपा। इस दौरान सुनील दास, तुसेल के लखमूराम नागेश, रामनाथ बघेल, टोंडापाल के कमलू चालकी, जगदीश चालकी, उलनार के खगपति, शिबो पुजारी, मोहन आदि मौजूद थे।
स्वास्थ्य कार्यक्रमों में शत प्रतिशत लक्ष्य हासिल करें : डॉ. चतुर्वेदी
- मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने ब्लॉक के स्वास्थ्य केंद्रों का किया निरीक्षण
लोहंडीगुड़ा बस्तर जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आरके चतुर्वेदी ने 20 मार्च को लोहंडीगुड़ा के अनेक स्वास्थ्य केंद्रों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया एवं मौसमी बीमारियों की रोकथाम की तैयारियां देखीं।सीएमएचओ डॉ. आरके चतुर्वेदी ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लोहंडीगुड़ा, उप स्वास्थ्य केंद्र ककनार, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर काकनार एवं निर्माणाधीन उप स्वास्थ्य केंद्र चंदेला का निरीक्षण किया। उन्होंने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लोहंडीगुड़ा में विकासखंड के समस्त स्वास्थ्य सुपरवाइजरों की बैठक लेकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की स्थिति की समीक्षा की। लोहंडीगुड़ा विकासखंड के अपने प्रवास के दौरान सीएमएचओ डॉ. चतुर्वेदी ने ग्राम चंदेला में मलेरियामुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के तहत चलाई जा रही गतिविधियों का भी निरीक्षण किया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आरके चतुर्वेदी ने सभी राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में शत प्रतिशत लक्ष्य उपलब्धि सुनिश्चित करने हेतु निर्देशित किया। इस दौरान लोहंडीगुड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बीएमओ, सभी डॉक्टर्स, अन्य स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारी, चिकित्सक उपस्थित थे।
डॉ. चतुर्वेदी ने विद्यार्थियों को दी नसीहत
मुख्य चिकित्सा एवं जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आरके चतुर्वेदी ने लोहंडीगुड़ा विकासखंड के ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों के निरीक्षण के दौरान ग्रामीण शालेय विद्यार्थियों के स्वास्थ्य की जानकारी ली। उन्होंने मौके पर मौजूद छात्र – छात्राओं से उनके खानपान, भोजन करने, खेलने कूदने, रात में सोने और सुबह उठने के समय के साथ साथ पढ़ाई के लिए दिए जाने वाले समय के बारे में भी पूछा। डॉ. चतुर्वेदी ने विद्यार्थियों को मन लगाकर पढ़ाई करने तथा समय समय पर स्वास्थ्य केंद्र में पहुंचकर अपने स्वास्थ्य की जांच कराने की नसीहत दी। डॉ. आरके चतुर्वेदी ने छात्र – छात्राओं से स्वास्थ्यगत एवं पाठ्यक्रम से संबंधित प्रश्न भी पूछे और उनकी स्किल पर संतोष व्यक्त किया। एक छोटी छात्रा की हाजिर जवाबी से डॉ. चतुर्वेदी बेहद प्रभावित नजर आए। डॉ. चतुर्वेदी ने ग्रामीणों के बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण भी अपने सामने कराया और बच्चों को विटामिन, कैल्शियम, आयरन आदि की दवाएं दिलाई। बच्चों का वजन भी कराया गया। उन्होंने ग्रामीणों को अपने बच्चों और स्वयं के स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखने के लिए प्रेरित किया। ग्रामीणों से उन्हें मिल रही स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी भी डॉ. चतुर्वेदी ने ली।इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
सेलफोन की रौशनी में बस्तर और भानपुरी के अस्पतालों में ईलाज
- बिजली गुल होने पर मुसीबत में पड़ जाते हैं डॉक्टर और कर्मी
बस्तर स्वास्थ्य के क्षेत्र में मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने के सरकारी दावे बस्तर के धरातल पर धाराशाई होते नजर आ रहे हैं। आदिवासी बहुल जिलों में सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता में शामिल है, मगर स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील मामले में बस्तर जिले का हाल बेहाल है। बस्तर जिले के सिविल हॉस्पिटल भानपुरी एवं बस्तर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बिजली गुल हो जाने पर जब अंधेरा छा जाता है, तब मोबाइल फोन की रोशनी के सहारे मरीजों का उपचार करने की मजबूरी आन पड़ती है।
दरअसल इन दोनों हॉस्पिटलों में जनरेटर की व्यवस्था नहीं है। क्रेडा द्वारा सौर ऊर्जा चलित लाइट की व्यवस्था जरूर की गई है, लेकिन खराबी के कारण वह भी नहीं जल रही है।आदिवासी बहुल बस्तर संभाग के जिला मुख्यालयों में जरूर स्वास्थ्य सेवा बेहतर है, मगर ग्रामीण इलाकों के सरकारी अस्पतालों को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। बस्तर कहने मात्र को संभाग और जिला है, मगर दोनों प्रशानिक मुख्यालय जगदलपुर में हैं। बस्तर भले ही पूरी दुनिया में मशहूर है, मगर मूल गांव बस्तर की कहानी तो कुछ और ही है। बस्तर अनुविभागीय और तहसील मुख्यालय है। भानपुरी में भी तहसील कार्यालय है। भानपुरी में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और भानपुरी में सिविल अस्पताल की स्थापना शासन द्वारा जरूर की गई है, मगर इन दोनों अस्पतालों में जरूरी सुविधाएं मुहैया नहीं कराई गईं हैं। बस्तर के विद्युत विभाग की कार्यशैली और व्यवस्था तो जग जाहिर है। गावों और ब्लॉक एवं तहसील मुख्यालयों में बिजली की लचर व्यवस्था में सुधार की उम्मीद भी बेमानी है। बार बार बिजली गुल होना, घंटों बिजली न आना आम बात है। इस लचर विद्युत व्यवस्था से सरकारी अस्पताल भी प्रभावित हैं। बस्तर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और भानपुरी के सिविल अस्पताल भी विद्युत विभाग की लचर व्यवस्था का खामियाजा लंबे अरसे से भोगते आ रहे हैं। इन अस्पतालों में पिछले कई माह से बिजली की आंख मिचौली की समस्या बनी हुई है। खासकर गर्मी और बरसात के दिनों में बिजली गुल होने एवं तेज आंधी तूफान चलने और भारी बरसात होने पर बार बार और घंटों बिजली गुल हो जाने की समस्या पैदा हो जाती है। शाम ढलने के बाद बिजली गुल हो जाने पर बिजली के फिर से आने की गारंटी नहीं रहती।ज्यादातर बार तो पूरी रात या फिर चार पांच घंटे तक बिजली बंद रहती है। ऐसे में डॉक्टरों को मरीजों का ईलाज व चेकअप मोबाइल फोन के टार्च की रौशनी में करना पड़ता है। अस्पताल में भर्ती मरीजों के वार्डों में अंधेरा पसर जाता है। डॉक्टरों की केबिन में भी अंधेरा हो जाता है। वार्ड में नर्स मोबाइल की रोशनी में मरीजों को दवाइयां देती हैं और उनका ब्लड प्रेशर व बुखार चेक करती हैं, उन्हें सलाईन भी सेलफोन टॉर्च की रौशनी में चढ़ानी पड़ती है। ऐसा दृश्य अक्सर देखने को मिल जाता है।
सोलर पैनल में आई खराबी
भानपुरी और बस्तर तहसील मुख्यालय और पचासों गांवों के प्रमुख केंद्र हैं। इस लिहाज से इन दोनों स्थानों के सरकारी अस्पतालों पर इन पचासों गांवों के हजारों ग्रामीणों की निर्भरता है। इन दोनों अस्पतालों में पोर्टेबल जनरेटर तक की व्यवस्था शासन ने नहीं की है।क्रेडा द्वारा सौर ऊर्जा चलित बिजली की व्यवस्था अस्पतालों में की गईं है, लेकिन यह व्यवस्था भी फिजूल साबित हो रही है। सोलर पैनल्स, बैटरी और अन्य उपकरणों में तकनीकी खराबी आ गई है। इस खराबी को दूर करने के लिए कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। नतीजतन सौर ऊर्जा की बिजली का लाभ भी इन अस्पतालों को नहीं मिल पा रहा है।
क्रेडा से कर चुके हैं शिकायत
जब बिजली गुल हो जाती है, तब इमरजेंसी लाइट की मदद से काम निपटाते हैं। बस्तर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, भानपुरी तथा अन्य स्थानों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में सोलर लाइट व्यवस्था में खराबी है, बस्तर अस्पताल में बैटरी की प्रॉब्लम है। इस संबंध में क्रेडा के अधिकारियों और सीएमएचओ को अवगत करा चुके हैं।डॉ.शांडिल्य खंड चिकित्सा अधिकारी, बस्तर
अंतरराष्ट्रीय कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा का बालोद में होगा शिव महापुराण, नगर के इस समिति के अगुवाई में लोग आ रहे सामने
बालोद – अंतरराष्ट्रीय कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा का बालोद जिले में आगमन लगभग तय माना जा रहा है जिले के मां शीतला सेवा समिति व नगरवासियों द्वारा इस आयोजन को किया जाएगा। बालोद के जुंगेरा में 28 अगस्त से 1 सितंबर 2023 तक होने वाले शिव महापुराण में बड़ी संख्या में शिवभक्तों की आने की उम्मीद है ऐसे में भक्तों की बैठने और अंतर्राष्ट्रीय कथाकार की कथा का श्रवण वह आराम से कर सके इसके लिए पूरी व्यवस्थाएं की जाएगी। बालोद के जुंगेरा रानीतराई मार्ग स्थित मैदान में आयोजित इस शिव महापुराण कथा आयोजन को लेकर समाजसेवी भगवती साहू के द्वारा आयोजित सीहोर वाले अंतर्राष्ट्रीय कथाकार प्रदीप मिश्रा के श्री मुख से भक्तों को शिव महापुराण कथा का रसपान करने का मौका मिलेगा।आयोजक मां शीतला सेवा समिति की सदस्य भगवती साहू ने जानकारी देते हुए बताये कि अंतर्राष्ट्रीय कथाकार पंडित प्रदीप मिश्रा की कथा बालोद नगर के आसपास हो सके इसके लिए काफी समय से प्रयास किया जा रहा था छुरिया में पंडित प्रदीप मिश्रा के शिव महापुराण।



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झूठी और महिला विरोधी है की भूपेश बघेल सरकार : शालिनी
- महिला स्व सहायता समूहों से रोजगार छीना कांग्रेस सरकार ने
- नारी का श्राप ले डूबेगा झूठ की खेती करने वाले भूपेश बघेल को
- भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष शालिनी राजपूत का प्रहार
नगरनार बस्तर जिले के प्रवास के तहत नगरनार पहुंचीं भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष शालिनी राजपूत भूपेश बघेल सरकार पर जमकर बरसीं। उन्होंने भूपेश बघेल सरकार को झूठी और महिला विरोधी करार देते हुए कहा कि जबसे प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आई है, महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ गए हैं। महिलाओं और बच्चियों के दुराचार की घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि हुई है। कांग्रेस ने चुनाव के दौरान महिलाओं के लिए जो वादे किए थे, उनमें से एक भी वादा पूरा नहीं किया गया है।यहां महिला मोर्चा की नगरनार मंडल इकाई की परिचयात्मक बैठक में संवाददाताओं से चर्चा करते हुए मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष ने भूपेश बघेल सरकार पर ताबड़तोड़ प्रहार किए। उन्होंने कहा कि भूपेश बघेल सरकार झूठे वादों और थोथी चुनावी घोषणाओं के दम पर सत्ता में आई है। कांग्रेस ने जो भी चुनावी घोषणाएं की थीं, उनमें से एक भी वादे को कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार ने पूरा नहीं किया है। प्रदेश में शराबबंदी लागू करने, महिलाओं को रोजगार देने, रेडी टू ईट का काम सम्हालते आ रहे महिला स्व सहायता समूहों का कर्ज माफ करने, जैसे लुभाने वाले वादे कर सत्ता हथियाने के बाद कांग्रेस सारे वादों से मुकर गई है। इस सरकार के जाने का समय करीब है, लेकिन शराबबंदी लागू नहीं की जा सकी है, उल्टे शराब के कारोबार को खुद सरकार ने अपने हाथों में ले लिया है। सुश्री राजपूत ने कहा कि महिलाओं को रोजगार देने की बात हवा हवाई निकली। महिला स्व सहायता समूहों के कर्जे माफ करना तो दूर, उनसे रेडी टू ईट का काम छीनकर भूपेश बघेल सरकार ने 23 हजार स्व सहायता समूहों से जुड़ी लाखों महिलाओं को बेरोजगार कर दिया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ताओं और सहायिकाओं को केंद्र सरकार की ओर से मानदेय के रूप में साढ़े चार हजार रु. दिए जाते हैं। अब इसे मिलाकर दस हजार देने की बात कही गईं है, लेकिन इस पर अमल की जरा भी उम्मीद नहीं है, क्योंकि झूठ कांग्रेस के रग रग में समाया हुआ है। शालिनी राजपूत ने कहा कि प्रदेश में महिलाओं और छोटी बच्चियों के साथ दुष्कर्म की घृणित घटनाएं बढ़ती ही जा रही हैं। अनाचार के मामले में छत्तीसगढ़ छठें नंबर पर पहुंच गया है। भूपेश बघेल सरकार अपराध रोकने में पूरी तरह विफल रही है। शालिनी राजपूत ने कहा कि सुषमा स्वराज अवार्ड योजना के तहत महिला मोर्चा प्रदेश भर में मंडल और शक्ति केंद्र स्तर तक पहुंचकर विभिन्न विधाओं में पारंगत महिलाओं को सुषमा स्वराज अवार्ड देकर सम्मानित कर रही है। ऐसा करके हम मातृशक्ति का गौरव बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना को रोककर प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने महिलाओं का हक छीनने का काम किया है। संत सम्मेलन और समागम को सनातन धर्म का हिस्सा बताते हुए शालिनी राजपूत ने कहा कि धर्म से लोगों को जोड़े रखना अच्छी बात है। ऐसे सम्मलेन और समागम के दौरान संतों पर पुष्प वर्षा करने की जिम्मेदारी महिला मोर्चा की ही नहीं, बल्कि हर सनातनी की है। सुश्री राजपूत ने कहा कि मोर्चा से जुड़ी बहनों ने प्रदेश में अब फिर से भाजपा की सरकार बनाने के लिए कमर कस ली है।
नारी का अपमान करने वाले का सर्वनाश तय : सुधा
बस्तर जिला भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष सुधा मिश्रा भी इस दौरान मौजूद थीं। उन्होंने कहा कि पिछले दो माह पहले ही वे जिला अध्यक्ष नामित हुई हैं और जिला कार्यकारिणी की घोषणा की जानी है। इसी को ध्यान में रख वे जिले की सभी 11 मंडल ईकाइयों का दौरा कर रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने न तो अपना एक भी चुनावी वादा पूरा किया है, न ही एक भी नई योजना शुरू की है। जो भी योजनाएं चल रही हैं, वे पूर्ववर्ती भाजपा सरकार की हैं। उल्टे इस सरकार ने केंद्र सरकार की कई महत्वपूर्ण योजनाओं को रोक रखा है। लड़की हूं, लड़ सकती हूं का नारा देने वाली कांग्रेस की छत्तीसगढ़ सरकार ने महिलाओं को अधिकारों से वंचित करने और नारी सम्मान को ठेस पहुंचाने का ही काम किया है। सुधा मिश्रा ने कहा कि नारी का अपमान करने वाले का सर्वनाश हो जाता है। वैसा विनाश इस कांग्रेस सरकार का तय है। उन्होंने कहा कि बस्तर की माता बहनें जागरूक हो चुकी हैं, उनके साथ कांग्रेस द्वारा किए गए छल को वे भलीभांति समझ गईं हैं और कांग्रेस की विदाई का मन बना चुकी हैं। महिला मोर्चा की नगरनार मंडल अध्यक्ष गीता मिश्रा ने कहा बड़ी बहन शालिनी और सुधा दीदी के नेतृत्व में मंडल की बहनें भाजपा की सरकार गठन में योगदान देने के लिए पूरी तरह कमर कस चुकी हैं। हम सभी बहनें पार्टी और जनता के हित में समर्पित होकर लगातार काम कर रही हैं।


