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सुकमा में हरा सोना के नाम पर लूट

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ख़रीदा गया 40 लाख गड्डी तेन्दूपत्ता, विभाग को दी 11 लाख गड्डी खरीदी की जानकारी ऊंची कीमत पर बेचकर उड़ीसा भेज दिया गया हजारों बोरा तेन्दूपत्ता
जगदलपुर/सुकमा। सुकमा वन मंडल के कोंटा वन परिक्षेत्र में तेंदूपत्ता खरीदी में भारी घपलेबाजी कर ठेकेदारों ने शासन को लाखों के राजस्व की लगाई चपत लगा दी है। तीन समितियों में हुए घालमेल में एर्राबोर समिति के द्वारा की गई खरीदी पर नजर डालें तो लगभग 10 फड़ों में 40 लाख 64 हजार 124 गड्डी तेंदूपत्ता की वास्तविक खरीदी कर विभाग को 11 लाख 57 हजार 8 सौ गाड़ी खरीदी की जानकारी भेजी गई। 29 लाख 63 हजार गड्डी यानि की हजारों मानक बोरा तेंदूपत्ता उड़ीसा में पार कर दिया गया । एक समिति में हुए घालमेल के आंकड़ों पर नजर डालें तो शासन को डेढ़ करोड़ से अधिक के राजस्व का नुकसान होने की खबर है। 4 हजार रूपए मानक बोरा खरीदी कर 10 हजार रूपए मानक बोरा की दर से बिक्री किए जाने की जानकारी विभागीय सूत्रों से मिली है। उक्त तेंदूपत्ता का संग्रहण शासकीय रिकार्ड में दर्ज होता तो शासन को इसका राजस्व प्राप्त होता। खबर है कि शासन को मिलने वाले राजस्व को ठेकेदार आपस में विभागीय अधिकारियों एवं प्रबंधन से सांठगांठ कर डकार गये। विभाग के अधिकारी अब जांच के नाम पर खानापूर्ति कर ऐसे दोषियों को क्लिनचीट देन की तैयारी में है। पुलिसिया जांच में ढिलाई के कारण ठेकेदार सलाखों से बाहर आ चुके हे। ज्ञातव्य हो कि सुकमा वन मंडल के कोंटा वन परिक्षेत्र एर्राबोर समिति अ और ब एवं कोंटा समिति अ में भ्रष्टाचार करते हुए हजारों बोरा तेंदूपत्ता खरीदी उड़ीसा पार किया जा चुका है। मामला उजागर होने के बाद भी जांच दल मुकाम तक नहीं पहुंच पाया है। ऐसी खबर है कि जांच में लीपापोती कर दोषियों को बचाने की साजिश रची जा चुकी है। जांच निष्पक्ष हुई तो प्रबंधक, पोषक अधिकारी एवं विभाग के अधिकारी पर गाज गिर सकती है लेकिन इन्हे बचाने मामले पर पर्दा डालने तथा राजनीतिक आकाओ से भी दबाव बनाये जाने की खबर है।
शासन को डेढ़ करोड़ की चपत विभागीय सूत्रों एवं फड़ मुंशी से जानकारी मिली है कि एर्राबोर के अधीन लगभग 10 समितियों में 8 हजार से अधिक संग्राहकों से 40 लाख 64 हजार गड्डी तेंदूपत्ता की वास्तविक खरीदी की गई थी, जिसका भुगतान 1 करोड़ 62 लाख 56 हजार रु. किया जाना था। ठेकेदारों ने विभागीय अधिकारी से सांठगांठ कर वास्तविक खरीदी न दिखाकर विभाग को 11 लाख 57 हजार 8 सौ गड्डी खरीदी का आंकड़ा दिखाया है। इस तरह 29 लाख से अधिक गड्डी का घालमेल किया जा चुका है जो 5 हजार मानक बोरा से अधिक है और उसे दीगर प्रांतों में ठिकाने लगाया ला चुका है। जानकारी के अनुसार 4 रूप्ए की दर से खरीदा गया हरा सोना 10 रूपए गड्डी की दर से बिक्री होने की खबर है जिसमें 6 रूपए शासन को लाभ प्राप्त हुआ है। खरीदी का वास्तविक आंकड़ा शासकीय रिकार्ड में दर्ज होता तो शासन को डेढ़ करोड़ से अधिक का लाभा प्राप्त होता। यह सिर्फ एक समिति का आंकड़ा है इन तीन समितियों की निष्पक्ष जांच हुई तो बड़ा घोटाला उजागर हो सकता है। निकासी में किसका संरक्षण
कोंटा वन परिक्षेत्र में खरीदा गया 10 हजार से अधिक मानक बोरा तेंदूपत्ता उड़ीसा ठेकेदारों द्वारा पार किया जा चुका है। जांच का विषय है कि किसके संरक्षण में भारी संख्या में हरा सोना उड़ीसा पार कराया गया । जांच दल उनके खिलाफ कार्रवाई कर पायेगी या फिर अन्य मामलों की जांच की तरह जांच रिपोर्ट फाइलों में ही दबकर रह जाएगी? विभाग द्वारा 4 हजार मानक बोरा हरा सोना मलकानगिरी में जब्त किया जा चुका है। जिसे बस्तर लाने में वन विभाग के पसीने छूटने लगे हैं । जब्त किया गया 8 सौ मानक बोरा तेंदूपत्ता ही लाया जा सका है।
गुणवत्ता में भिन्नता भी
मलकानगिरी में ठेकेदारों द्वारा गोदामों में रखवाए गए तेंदूपत्ता की जांच की जाये तो अन्य गोदामों से तेंदूपत्ता की बरामदगी हो सकती है। सुकमा वन मंडल में 52 पत्तों की गड्डी तैयार की जाती है और 1 मानक बोरा में 6 सौ गड्डी की भर्ती की जाती है। यहां का पत्ता मोटे आकार का होता है। उड़ीसा के संग्राहकों द्वारा 42 पत्तों की गड्डी बनाई जाती है। 8 सौ गड्डियों की भराई एक बोरे में की जाती है. मामले की निष्पक्ष जांच होने पर बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा हो सकता हे। ठेकेदारों द्वारा समर्थन मूल्य से 1 रूपए 25 पैसा संग्राहकों को देने का वादा किया गया था जो अप्राप्त है। चल रही है जांच प्रक्रिया
सुकमा डीएफओ ने बताया कि सभी संग्राहकों को बकाया राशि का भुगतान कर दिया गया है। तेंदूपत्ता खरीदी में हुए भ्रष्टाचार की जांच चल रही है जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जायेगी।

प्राथमिक शाला सोरगांव में बस्ता विहीन शिक्षा आयोजन के तहत स्कूली बच्चों का रस्सा खींच प्रतियोगिता का हुआ आयोजन

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भानपुरी विकास खंड बस्तर के सोरगांव संकुल के अंतर्गत संचालित प्राथमिक शाला सोरगांव में शासन के निर्देशानुसार प्रत्येक शनिवार को बस्ता विहीन शिक्षा का आयोजन के तहत इस शनिवार विभिन्न प्रकार के खेल गतिविधि का आयोजन किया गया जिसमे रस्सा खींच प्रतियोगिता में बच्चों ने उत्साह और आनंद लेकर भाग लिए। निर्णायक के रूप में स्वयं प्रभारी शिक्षक धनेश्वर ध्रुव व आश्रम की शिक्षिका जसिंता इक्का व धर्मेंद्र प्रधान रहे। संकुल के सीएसी डी डी पंत ने खेल के लिए रस्सा उपलब्ध कराए व बताए कि बच्चे इस तरह के खेल व अन्य सह शैक्षिक गतिविधि कराए जाने से गुमसुम व संकोची प्रवृति का बच्चा भी मुखर हो जाता है और बच्चों का आत्म विश्वास बढ़ जाता है। शाला त्यागी होने की प्रवृति में कमी आता है।

बस्तर का अदम्य साहसी अभिनेता – चेंदरू , बेहाल है छत्तीसगढ़ के मोगली का परिवार

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छत्तीसगढ़ के एकमात्र ऑस्कर अवार्ड विजेता चेंदरु के परिजनों की सुध कब लेगी सरकार ? बस्तर के टार्जन की पुण्यतिथि पर विशेष रपट

जगदलपुर.नारायणपुर जिले के गढ़ बंगाल गांव ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के फ़िल्म जगत का जाना माना नाम रहा है चेंदरू, जिसे हम सब छत्तीसगढ़ के मोगली और बस्तर के जंगलों के टार्जन के नाम से भी जानते हैं। चेंदरू यानि वही शख्स, जो बचपन में शेर, तेंदुआ जैसे हिंसक और खतरनाक जंगली जानवरों के साथ बेखौफ़ और बिंदास होकर खेला करता था. बस्तर के इस वन पुत्र ने कच्ची अल्प उम्र में ऐसा कारनामा कर दिखाया था, जो आज तक कोई और नहीं कर पाया है. जंगली जानवरों के साथ चेंदरू की अनोखी दोस्ती ने हॉलीवुड का भी ध्यान खींचा और हॉलीवुड के एक बड़े फ़िल्म निर्माता ने अपनी फ़िल्म में चेंदरु को मुख्य किरदार के तौर पर जगह दी. यह फ़िल्म पूरी दुनिया में ना केवल चर्चित हुई, बल्कि उसे ऑस्कर अवार्ड से भी नवाजा गया. यह चेंदरु की पहली और आखिरी फ़िल्म थी। उसके बाद आज तक अंतरराष्ट्रीय फिल्मों में छत्तीसगढ़ के किसी कलाकार को इतनी प्रसिद्धि नहीं मिली।

कभी छत्तीसगढ़ के मोगली तथा ‘बस्तर का टाइगर बॉय ‘ के नाम से विख्यात रहा यह अंतर्राष्ट्रीय हीरो आज हमारे बीच नहीं है. 18 सितंबर 2013 को 78 वर्ष की उम्र में चेंदरु सदा सदा के लिए अनंत यात्रा पर चला गया. आज उसकी 9 वीं पुण्यतिथि है। एक बेहद सफल, बेहद चर्चित अंतरराष्ट्रीय फिल्म के हीरो चेंदरू की जिंदगी का बड़ा हिस्सा गुमनामियों में बीता। चेंदरू ने अंतर्राष्ट्रीय पटल पर संपूर्ण भारत का नाम रोशन किया है. चेंदरू द्वारा अभिनीत फिल्म को वर्ष 1958 में कांस फिल्म फेस्टिवल में भी प्रदर्शित किया गया था । चेंदरू के जीवन काल में उसे जो सम्मान मिलना चाहिए था वह नहीं मिला। फिल्म के साथ ही 1960 के दशक में स्वीडिश तथा अंग्रेजी भाषा में चेंदरू के नाम से जो किताबें और फिल्म तैयार की गई थी वह समय के साथ-साथ उसके परिवारजनों के पास आज नहीं है । आज उसका परिवार किसी तरह मजदूरी करके गुजर बसर कर रहा है । पाठ्यक्रम में शामिल हो चेंदरु की शौर्यगाथा चेंदरू के जीवन काल में जो फिल्म तैयार हुई थी तथा अनेक देशों में रिलीज हुई थी उसे संग्रहित किए जाने की आवश्यकता है. बस्तर के इस पहले हॉलीवुड अभिनेता के संबंध में स्वीडिश व अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित सचित्र पुस्तक का हिंदी हल्बी तथा गोंडी बोली भाषा में अनुवादित कर प्रकाशित करवाया जाना चाहिए। बतौर मुख्य भूमिका निभाने वाले अंतरराष्ट्रीय फिल्म के नायक चेंदरू ने बाघ और तेंदुए के बीच रहकर वन्य प्राणियों के साथ मानवीय भावना का परिचय दिया, उसकी गाथा जन-जन तक पहुंचाया जावे ।छत्तीसगढ़ के शालेय पाठ्यक्रम में चेंदरु की शौर्यगाथा को शामिल किया जाने की जरुरत है ताकि आने वाली पीढ़ी को चेंदरू से अवगत कराया जा सके, यही उसके तथा परिवार जनों का वास्तविक सम्मान होगा, चेंदरु के प्रति वास्तविक श्रद्धांजलि होगी ।

बेहाल है छत्तीसगढ़ के मोगली का परिवार

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छत्तीसगढ़ के एकमात्र ऑस्कर अवार्ड विजेता चेंदरु के परिजनों की सुध कब लेगी सरकार?-
बस्तर के टार्जन की पुण्यतिथि पर विशेष रपट

जगदलपुर नारायणपुर जिले के गढ़ बंगाल गांव ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के फ़िल्म जगत का जाना माना नाम रहा है चेंदरू, जिसे
हम सब छत्तीसगढ़ के मोगली और बस्तर के जंगलों के टार्जन के नाम से भी जानते हैं। चेंदरू यानि वही शख्स, जो बचपन में शेर, तेंदुआ जैसे हिंसक और खतरनाक जंगली जानवरों के साथ बेखौफ़ और बिंदास होकर खेला करता था. बस्तर के इस वन पुत्र ने कच्ची अल्प उम्र में ऐसा कारनामा कर दिखाया था, जो आज तक कोई और नहीं कर पाया है. जंगली जानवरों के साथ चेंदरू की अनोखी दोस्ती ने हॉलीवुड का भी ध्यान खींचा और हॉलीवुड के एक बड़े फ़िल्म निर्माता ने अपनी फ़िल्म में चेंदरु को मुख्य किरदार के तौर पर जगह दी. यह फ़िल्म पूरी दुनिया में ना केवल चर्चित हुई,

बल्कि उसे ऑस्कर अवार्ड से भी नवाजा गया. यह चेंदरु की पहली और आखिरी फ़िल्म थी। उसके बाद आज तक अंतरराष्ट्रीय फिल्मों में छत्तीसगढ़ के किसी कलाकार को इतनी प्रसिद्धि नहीं मिली। कभी छत्तीसगढ़ के मोगली तथा ‘बस्तर का टाइगर बॉय ‘ के नाम से विख्यात रहा यह अंतर्राष्ट्रीय हीरो आज हमारे बीच नहीं है. 18 सितंबर 2013 को 78 वर्ष की उम्र में चेंदरु सदा सदा के लिए अनंत यात्रा पर चला गया. आज उसकी 9 वीं पुण्यतिथि है। एक बेहद सफल, बेहद चर्चित अंतरराष्ट्रीय फिल्म के हीरो चेंदरू की जिंदगी का बड़ा हिस्सा गुमनामियों में बीता। चेंदरू ने अंतर्राष्ट्रीय पटल पर संपूर्ण भारत का नाम रोशन किया है. चेंदरू द्वारा अभिनीत फिल्म को वर्ष 1958 में कांस फिल्म फेस्टिवल में भी प्रदर्शित किया गया था । चेंदरू के जीवन काल में उसे जो सम्मान मिलना चाहिए था वह नहीं मिला। फिल्म के साथ ही 1960 के दशक में स्वीडिश तथा अंग्रेजी भाषा में चेंदरू के नाम से जो किताबें और फिल्म तैयार की गई थी वह समय के साथ-साथ उसके परिवारजनों के पास आज नहीं है । आज उसका परिवार किसी तरह मजदूरी करके गुजर बसर कर रहा है ।
पाठ्यक्रम में शामिल हो चेंदरु की शौर्यगाथा
चेंदरू के जीवन काल में जो फिल्म तैयार हुई थी तथा अनेक देशों में रिलीज हुई थी उसे संग्रहित किए जाने की आवश्यकता है. बस्तर के इस पहले हॉलीवुड अभिनेता के संबंध में स्वीडिश व अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित सचित्र पुस्तक का हिंदी हल्बी तथा गोंडी बोली भाषा में अनुवादित कर प्रकाशित करवाया जाना चाहिए। बतौर मुख्य भूमिका निभाने वाले अंतरराष्ट्रीय फिल्म के नायक चेंदरू ने बाघ और तेंदुए के बीच रहकर वन्य प्राणियों के साथ मानवीय भावना का परिचय दिया, उसकी गाथा जन-जन तक पहुंचाया जावे ।छत्तीसगढ़ के शालेय पाठ्यक्रम में चेंदरु की शौर्यगाथा को शामिल किया जाने की जरुरत है ताकि आने वाली पीढ़ी को चेंदरू से अवगत कराया जा सके, यही उसके तथा परिवार जनों का वास्तविक सम्मान होगा, चेंदरु के प्रति वास्तविक श्रद्धांजलि होगी ।

सौर ऊर्जा पेयजल योजना ढप

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बस्तर ब्लॉक ग्राम पंचायत अडावाल आश्रित ग्राम भरनी माध्यमिक साला तथा प्राथमिक शाल स्कूल मैं सौर ऊर्जा क्रीडा विभाग या पीएचई विभाग द्वारा विगत वर्ष लगभग 3 से 4 साल पहले वाटर सेट स्थापित किया गया था
8 /1/2022 से सौर ऊर्जा वाटर सेट खराब होने के कारण से स्कूली बच्चों को पेयजल का दिक्कत का सामना करना पढ़ रहा है माध्यमिक शाल प्रधान अध्यापक मानसिंह कश्यप जी द्वारा ग्राम पंचायत आड़ावाल को लिखित मे आभास कराया गया था
एवं ग्राम पंचायत सचिव द्वारा क्रीड़ा विभाग एवं पीएचई विभाग को सूचित करते हुए अनुरोध तथा गांव के पंच एवं जनप्रतिनिधि सरपंच द्वारा समस्या का निवारण करने हेतु सरपंच द्वारा प्रयास किया गया
किंतु इस समस्या का निवारण करने हेतु क्रीड़ा विभाग पीएचई विभाग ने कहा की हमें इस विषय में नहीं मालूम हम नहीं जानते पूछने पर इस समस्या का निवारण कहां से होगा क्रीड़ा विभाग और पीएचई विभाग एक दूसरे को बता रहे हैं हाथ खड़े कर दिया माध्यमिक शाला एवं प्राइमरी साला प्रधानाध्यापक तथा पाठशाला के सभी शिक्षक गण एवं छात्र-छात्राएं प्रशासन से अनुरोध करता है की सौर ऊर्जा वाटर सेट को जल्द से जल्द उपयोग करने लायक ठीक करवा दे

बस्तर का अदम्य साहसी अभिनेता – चेंदरू

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नारायणपुर जिले के गढ़बंगाल का जाना माना नाम चेंदरू, जिसे हम सब छत्तीसगढ़ का मोंगली के नाम से भी जानते हैं । चेंदरू ने अल्प आयु में वह अंगूठा कारनामा कर दिखाया जो आज तक किसी ने नहीं किया। चेंदरू वह शख्स था जिसने छोटी सी उम्र में जिस फिल्म में काम किया था उसकी पहली और आखरी थी। फिल्म को ‘ऑस्कर अवार्ड’ से नवाजा गया, उसके बाद आज तक किसी अंतरराष्ट्रीय फिल्मों में छत्तीसगढ़ के किसी नायक को इतनी प्रसिद्धि नहीं मिली।

छत्तीसगढ़ का मोगली तथा ‘बस्तर का टाइगर बॉय ‘ के नाम से परिचित अंतर्राष्ट्रीय हीरो आज हमारे बीच नहीं रहा 18 सितंबर 2013 को 78 वर्ष की उम्र में सदा सदा के लिए अनंत यात्रा पर चला गया चला गया, आज उसकी 9 वीं पुण्यतिथि है । एक बेहद सफल, बेहद चर्चित अंतरराष्ट्रीय फिल्म के हीरो चेंदरू के जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा गुमनामियों में बीता। चेंदरू ने अंतर्राष्ट्रीय पटल पर संपूर्ण भारत का नाम रोशन किया है, चेंदरू द्वारा अभिनीत फिल्म को वर्ष 1958 में कांस फिल्म फेस्टिवल में भी प्रदर्शित किया गया था । चेंदरू के जीवन काल में उसे जो सम्मान मिलना चाहिए था उसे नहीं मिला। फिल्म के साथ ही 1960 के दशक में स्वीडिश तथा अंग्रेजी भाषा में चेंदरू के नाम से जो किताबें और फिल्म तैयार की गई थी वह समय के साथ-साथ उसके परिवारजनों के पास आज नहीं है । आज उसका परिवार किसी तरह मजदूरी करके गुजर बसर कर रहा है । चेंदरू के जीवन काल में जो फिल्म तैयार हुई थी तथा अनेक देशों में रिलीज हुई थी उसे संग्रहित किए जाने की आवश्यकता है, बस्तर का पहला हॉलीवुड अभिनेता के संबंध में स्वीडिश व अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित सचित्र पुस्तक का हिंदी हल्बी तथा गोंडी बोली भाषा में प्रकाशित करवाया जाना चाहिए।

बतौर मुख्य भूमिका निभाने वाला अंतरराष्ट्रीय फिल्म का नायक चेंदरू बाघ और तेंदुए के बीच रहकर मानव और वन्य प्राणियों के बीच रहकर मानवता का परिचय दिया, उसकी गाथा जन-जन तक पहुंचाया जावे ।चेंदरू के संबंध में बस्तर के प्राथमिक शालाओं में उसकी शौर्यगाथा पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ी को चेंदरू से अवगत कराया जा सके, यही उसके तथा परिवार जनों का वास्तविक सम्मान होगा, वास्तविक श्रद्धांजलि होगी ।

भ्रष्टाचार में भगवान को भी नहीं बख्श रही कांग्रेस सरकार- केदार

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रायपुर छत्तीसगढ़ प्रदेश भाजपा महामंत्री केदार कश्यप ने बस्तर के ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर के जीर्णोद्धार में भारी भ्रष्टाचार की परतें उधड़ने का हवाला देते हुए कहा है कि जिस मंदिर से लाखों भक्तों की आस्था जुड़ी है, वहां भी कांग्रेस भ्रष्टाचार करने से बाज नहीं आय। कांग्रेस की भ्रष्टतम सरकार ने भगवान को भी नहीं बख्शा। इनके चापलूस दरबारी इन्हें छत्तीसगढ़ का भगवान बता रहे हैं और ये जगत के स्वामी भगवान जगन्नाथ के मंदिर के काम में भी कारनामे दिखा रहे हैं। प्रदेश भाजपा महामंत्री केदार कश्यप ने कहा कि यदि इस भ्रष्टाचार को सरकार का संरक्षण प्राप्त नहीं है तो भगवान के घर में डाका डालने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए । लोक निर्माण मंत्री और विभाग प्रमुख पर कार्यवाही की जाये । लोक निर्माण विभाग में भ्रष्टाचार के लिए सीधे तौर पर विभागीय मंत्री व विभाग के नौकरशाह जिम्मेदार हैं और सरकार के मुखिया होने के कारण मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की नैतिक जिम्मेदारी है कि वे भ्रष्टाचार मुक्त सरकार दें लेकिन उनकी सरकार तो भ्रष्टाचार के नरवा में लोट रही है। हर काम में कमीशन बंधा है। भूपेश बघेल कमीशन सरकार चला रहे हैं। उनकी सरकार में किसी भी लोक निर्माण में इतना कमीशन डकारा जा रहा है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता सम्भव ही नहीं है। जब लागत राशि का बड़ा हिस्सा भूपेश बघेल की कमीशन मंडली हड़प लेगी तो ठेकेदार क्या पुण्य कमाने फोकट में काम करेगा ? यही कारण है कि इस सरकार के जो थोड़े निर्माण कार्य हो रहे है वो भी दुर्दशा ग्रस्त हैं। हर काम में भ्रष्टाचार की दुर्गंध आ रही है। बाकी जगह तो भ्रष्टाचार चरम पर है ही, अब तो फर्जी भगवान कांग्रेस सरकार की कृपा से भगवान के घर में भी सेंधमारी हो गई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के जन्मदिन पर जिला अध्यक्ष ध्रुवे के नेतृत्व में वृक्षारोपण किया गया

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दल्ली राजहरा/डौंडी जिला अध्यक्ष अनुसूचित जनजाति मोर्चा व सांसद प्रतिनिधि श्री विक्रम धुर्वे के नेतृत्व में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 72 वे जन्मदिन के अवसर पर सेवा पकवाड़ा कार्यक्रम के तहत चिखलाकसा वार्ड क्रमांक 12 में बने नवीन सार्वजनिक गार्डन में वृक्षारोपण किया गया । ध्रुवे ने कहा की आज देशभर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जन्मदिन धूमधाम से मनाया जा रहा है. 17 सितंबर 1950 को पैदा हुए नरेन्द्र दामोदर मोदी देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने आजाद भारत में जन्म लिया. नरेंद्र मोदी ने 26 मई 2014 को भारत के 15वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी. 5 साल बाद 2019 में इन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत की.। ध्रुवे जी ने आगे कहा की नरेंद्र मोदी जी देश ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के लिए प्रेरणाश्रोत है । इस दौरान नगर पंचायत चिखलाकसा अध्यक्ष श्रीमती भिखी मसीया उपाध्यक्ष अब्दुल इब्राहिम सैयद वरिष्ठ भाजपा विजय डरसेना पार्षद गण तिहारू राम आर्य विमला जैन कुंती देवांगन सुनीता गुप्ता लीला डरसेना,संगीता साहू, लता पथोडे आशीष गुप्ता,जीवन व चिखलाकसा के ग्रामीण वह भाजपा के कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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छुड़ाए गए तेलंगाना में बंधक बस्तर के 24 मजदूर

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  • Llप्लाईवुड फैक्ट्री मालिक ने जप्त कर लिए थे श्रमिकों के एटीएम और आधार कार्ड-
    -बिना मजदूरी दिए लगातार कराया जा रहा था काम
  • संसदीय सचिव रेखचंद जैन की पहल पर मिली मुक्ति
    जगदलपुर. तेलंगाना में बंधक बनाए गए बस्तर संभाग के दो दर्जन मजदूरों को आज मुक्त कराकर ले आया गया. इस मामले में संसदीय सचिव एवं क्षेत्रीय विधायक रेखचंद जैन की पहल पर जिला एवं पुलिस प्रशासन ने सजगता के साथ त्वरित कार्रवाई की. छुड़ाए गए मजदूरों को फैक्ट्री मालिक से मजदूरी के बकाया करीब तीन लाख रूपये का भुगतान भी कराया गया. मालिक ने मजदूरों के विभिन्न दस्तावेज भी छीन रखे थे, जिन्हें भी वापस दिलाया गया.
    रोजी रोटी की तलाश में तेलंगाना गए बस्तर व कोंडागांव जिले जिले के 5-5, दंतेवाड़ा व नारायणपुर जिले 4-4 तथा बीजापुर व कांकेर जिले के 3-3 मजदूरों को फैक्ट्री मालिक के चंगुल से छुड़ाया गया है. इन मजदूरों को तेलंगाना के विकाराबाद और रंगारेड्डी जिलों में संचालित हैदराबाद प्लाईवुड कंपनी में काम पर रखा गया था. फैक्ट्री मालिक ने इन मजदूरों के आधार कार्ड, एटीएम कार्ड तथा अन्य दस्तावेजों को छीन लिया था. वहीं मजदूरों से लगातार काम लेने के बावजूद उन्हें मजदूरी का भुगतान भी नहीं किया जा रहा था. मजदूरों ने अपने शोषण की जानकारी किसी तरह अपने परिजनों व अन्य ग्रामीणों तक पहुंचाई. इसके बाद नेतानार ग्राम के ग्रामीण संजय नाग ने जगदलपुर के सजग विधायक व संसदीय सचिव रेखचंद जैन को मामले से अवगत कराया. श्री जैन ने तत्काल स्थानीय कलेक्टर चंदन कुमार इस गंभीर प्रकरण से अवगत कराया और बंधक बनाए गए मजदूरों की सकुशल रिहाई जल्द से जल्द सुनिश्चित करने के लिए कहा. कलेक्टर ने फ़ौरी कार्रवाई करते हुए मजदूरों की रिहाई के लिए एक टीम का गठन किया. इस टीम में राजस्व निरीक्षक जगन्नाथ चालकी, श्रम निरीक्षक नमिता जॉन पुलिस के प्रधान आरक्षक धनसिंह बघेल व आरक्षक जयंती कश्यप को शामिल किया गया था. टीम ने तेलंगाना पहुंचकर विकाराबाद के कलेक्टर से संपर्क किया. वहां के जिला और पुलिस प्रशासन के सहयोग से सभी 24 श्रमिकों को फैक्ट्री मालिक के चंगुल से मुक्त करा लिया गया. मजदूरों के छीने गए सभी दस्तावेज तथा रोकी गई मजदूरी के 2 लाख 63 हजार 100 रूपये का भुगतान भी कराया गया. इन सभी मजदूरों को लेकर टीम आज जगदलपुर लौट आई. श्रमिकों ने यहां कलेक्टर चंदन कुमार से मुलाक़ात की. श्रमिकों को समझाईश दी गई की वे काम की तलाश में जिले या राज्य से बाहर जाने से पहले इसकी सूचना पंचायत सचिव को अनिवार्य रूप से दें. इसके बाद यहां के श्रम पदाधिकारी पंकज बिचपुरिया द्वारा बस्तर, कोंडागांव, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, बीजापुर तथा कांकेर जिलों के श्रम पदाधिकारियों के सहयोग से सभी मजदूरों को उनके गृह ग्रामों के लिए रवाना कर दिया गया.
    ऐसे ही सजग हों सभी रहनुमा
    दूसरे राज्य हों या फिर छत्तीसगढ़ के दीगर जिले, हर जगह बस्तर के आदिवासियों और मजदूरों का शोषण होता ही है, लेकिन अगर जनप्रतिनिधि चौकन्ने और अपनी अवाम के प्रति जिम्मेदार हों, तो मजदूरों को शोषकों के चंगुल से ठीक उसी तरह बचाया जा सकता है, जैसे उक्त मजदूरों को बचाया गया. संसदीय सचिव एवं विधायक रेखचंद जैन बस्तर के वनपुत्र श्रमिकों की रिहाई के लिए जिस जिम्मेदारी, साजगता और संजीदगी का परिचय दिया, वह काबिले तारीफ़ है. अगर छत्तीसगढ़ के सारे रहनुमा रेखचंद जैन जैसे हो जाएं, तो मजदूरों का शोषण नहीं हो सकेगा. फैक्ट्री मालिक के चंगुल से मुक्त होकर लौटे श्रमिकों के चेहरों पर ख़ुशी अलग ही झलक रही थी. इन श्रमिकों ने संसदीय सचिव जैन, कलेक्टर चंदन कुमार तथा पुलिस प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया.

विश्व हिंदू परिषद, मातृशक्ति व बजरंग दल के लोग दल्ली राजहरा नगर के कई मुद्दों को लेकर मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे

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दल्ली राजहरा को उप जिला, उप तहसील का दर्जा व जिले का नाम संयुक्त जिला बालोददल्ली राजहरा किया जाए। दल्ली राजहरा में केन्द्रीय विद्यालय की स्थापना अविलम्ब की जाये। यू.पी.एस.सी. एवं पी.एस.सी. परीक्षा की तैयारी हेतु खनिज न्यास मद से फी कोचिंग व लायबेरी की स्थापना की जाये। घायलों के इलाज हेतु सर्व सुविधा युक्त ट्रामा सेंटर ब्लड बैंक की स्थापना की जाये। दल्ली राजहरा में बसे समस्त वाडा (1से शतक) के निवासियों को निःशुल्क पट्टा प्रदान किया जाये। तथा सभी वार्ड के निवासियों को पी.एम आवास प्रदान किया जाये। नगर के सभी 64 ऑगनबाड़ी केन्द्रों के लिए जमीन व भवन निर्माण हेतु राशि प्रदान की जाये। राजहरा नगर में गोठान का निर्माण कराया जाये। दल्ली राजहरा से राजनांदगांव तक रेल लाईन का निर्माण कराया जाये। स्थानीय रेल्वे स्टेशन में प्रतिक्षालय, सीसीटीव्ही कैमरा व सर्वसुविधायुक्त यात्री प्रतिक्षालय का निर्माण कराया जाये। पार्किंग स्टैण्ड तथा अण्डर बीज का भी निर्माण तत्काल कराया जाये। कौशल विकास केन्द्र की स्थापना हो। बी.पी.एल. व निर्धन परिवारों को शादी, मृत्यु व जन्म के समय 25 हजार रूपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाये। सेक्टर 09 अस्पताल मिलाई में राजहरा के सभी परिवारों व उससे लगे गांवों के परिवारों को खूबचंद बघेल स्वास्थ्य योजना से उपचार व लाभ मिले। खनिज न्यास मद की राशि का 50 फीसदी राशि राजहरा नगर के विकास पर खर्च किया जाये ।

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