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पार्षद पर जानलेवा हमला, अब हत्या का डर; पुलिस से मांगी सुरक्षा

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दली राजहरा अपनी हत्या की आशंका जताते हुए पार्षद वीरेंद्र साहू ने जिला पुलिस अधीक्षक को पत्र लिख कर सुरक्षा गार्ड देने की मांग की है। पार्षद वीरेंद्र साहू ने कहा है- मैं नगर पालिका राजहरा के महत्वपूर्ण वार्ड क्रमांक 7 राधाकृष्णन वार्ड का प्रतिनिधित्व करता हूं जहां कई निर्माण कार्य हो रहे हैं, मेरे द्वारा लगातार जनहित में कई लोगों से विवाद की स्थिति बनती रहती है। 11 मार्च की रात करीब 9 बजे टीचर्स कॉलोनी ग्राउंड के पास ब्लॉक नंबर -2 के सामने दर्जनभर असामाजिक तत्वों ने मुझ पर जानलेवा हमला भी किया था, मेरी जान बच गई, परंतु अब वही बदमाश मुझ पर घात मेरी हत्या करना चाहते हैं। मेरी सुरक्षा के लिए सुरक्षा व्यवस्था मुहैया कराई जाए।

अंतरप्रान्तिय चोर गिरोह के पांच सदस्य गिरफ्तार नगदी समेत मोबाइल बरामद

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जगदलपुर बीते दिनों शहर के ज्वेलरी शॉप से जेवरात की पूरी मामले में कोतवाली पुलिस में महाराष्ट्र निवासी अंतरराष्ट्रीय चोर की बहू के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया है उनके कब्जे से नदी ₹20000 समेत मोबाइल जप्त किया गया है सभी आरोपियों को रिमांड पर जेल भेजा गया। 23 अगस्त को महिला पुरुष चोरों द्वारा संगठित होकर शहर के एक ज्वेलरी दुकान में भीड़ भाड़ का फायदा उठाकर कान में पहनने वाला सोने का आभूषण पार कर दिया था. प्रार्थी सतीश सुर्यवंशी ने रिपोर्ट करवाई कि 23 अगस्त को रात्रि लगभग 09.00 बजे दुकान बंद करने से पहले सोने चांदी का मिलान करते समय सोने के आभूषण का वजन 11.500 ग्राम कम पाया गया दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरा का फूटेज चेक किया गया. जिसमें 23 अगस्त की शाम लगभग 05.09 मिनट से 05.20 बजे के मध्य दो अज्ञात महिलाये एवं दो अज्ञात पुरुष दुकान में आए.वहीं काउंटर में दोनो महिला खड़ी होकर सोने का कान में पहने वाला सुई धागा आभूषण भीड़ होने का फायदा उठाकर छिपाकर ले गए. रिपोर्ट पर अपराध कायम कर विवेचना में लिया गया।

विवेचना के दौरान चोरी किए गए सोने के आभूषण एवं अज्ञात चोर जी पतासाजी जी की जा रही थी. सायबर सेल की मदद से सभी आरोपियो को गिरफ्तार किया गया. उनसे पूछताछ करने पर सभी ने अपराध कबूल करते हुये चोरी किए सोने के कान के सुई धागा आभूषण को बिक्री करना बताया. प्राप्त रकम सभी में बराबर बाटना स्वीकार किया गया. पांचों आरोपी से शेष बिक्री रकम कुल 20,000 रुपए एवं 5 नग मोबाइल फोन कुल 50000 रुपए बरामद किया गया. पकड़े गए आरोपी पृथ्वीराज चौहान निवासी ग्राम आक्जुज जिला सोलापुर (महाराष्ट्र), रेखा चौहान सोलापुर (महाराष्ट्र), चेतन भाटी पुणे (महाराष्ट्र), संदीप गौड़ मुम्बई महाराष्ट्र तथा जयश्री पति महेन्द्र शैलके।

मर्डर का पुलिस ने किया सफल खुलासा, आरोपी को DJ कोर्ट से आजीवन कारावास

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ब्लाइंड मृतिका के हाथ पर बने “K.K.” टैटू से हुई पहचान, तकनीकी साक्ष्यों एवं वैज्ञानिक विवेचना से आरोपी तक पहुंची पुलिस

बालोद। थाना डौंडी लोहारा क्षेत्र में घटित एक सनसनीखेज ब्लाइंड मर्डर के मामले में पुलिस की प्रभावी एवं वैज्ञानिक विवेचना के परिणामस्वरूप आरोपी को माननीय DJ न्यायालय द्वारा आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया गया है।प्रकरण थाना डौंडी लोहारा के अपराध क्रमांक 19/26, धारा 103(1), 238 भारतीय न्याय संहिता (BNS) के अंतर्गत पंजीबद्ध किया गया था।मृतिका की पहचान बनी पहली बड़ी चुनौतीघटना के प्रारंभिक चरण में मृतिका की पहचान पुलिस के लिए बड़ी चुनौती थी। मृतिका के हाथ पर अंग्रेजी अक्षरों में “K.K.” का टैटू बना हुआ था। पुलिस ने इस टैटू को महत्वपूर्ण पहचान की कड़ी के रूप में लेते हुए तकनीकी एवं मैदानी स्तर पर जांच प्रारंभ की।लगातार प्रयास एवं जांच के दौरान मृतिका की पहचान बालोद के ग्राम पाररास निवासी कमला राजपूत के रूप में की गई।

आरोपी

मृतिका की पहचान होने के बाद पुलिस ने उसके संपर्कों, गतिविधियों एवं घटना से जुड़े प्रत्येक पहलू की गहनता से जांच की।तकनीकी साक्ष्यों से खुलती गई हत्या की कड़ियांमामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक मुकेश सिंह द्वारा प्रकरण की विवेचना को प्राथमिकता देते हुए थाना एवं साइबर सेल पुलिस टीम को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।विवेचना के दौरान घटनास्थल का सूक्ष्म निरीक्षण कर महत्वपूर्ण भौतिक एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्य संकलित किए गए। इसके साथ ही तकनीकी साक्ष्यों, वैज्ञानिक जांच एवं मैदानी विवेचना का प्रभावी उपयोग किया गया। उपलब्ध तकनीकी जानकारी का विश्लेषण कर घटनाक्रम की कड़ियों को आपस में जोड़ा गया, जिससे पुलिस आरोपी तक पहुंचने में सफल हुई जिससे आरोपी को आजीवन कारावास का सजा हुआ है।।

दशकों तक खून से लथपथ रहे बस्तर में अमन और तरक्की की पुरसुकून बयार

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फलीभूत होने लगी है आदिवासी नेता केदार कश्यप की भूमिका

नक्सलवाद से मुक्ति के बाद अब तेजी से बदल रहा है बस्तर

खौफ के स्याह साये निकल कर तरक्की के उजाले की ओर तेजी से बढ़ रही है आदिवासियों की पावन धरती

अर्जुन झा

जगदलपुर थम गए बारूदी धमाके और बंदूकों की तड़तड़ाहट। खून से लथपथ होती आ रही धरती पर अब गूंजने लगे हैं हल्बी, भतरी, गोंडी लोकगीतों के तराने। बाघ, तेंदुए निकल आए हैं अपनी मांदों से, गूंजने लगी है चिड़ियों की चहचहाहट। गोंड़, हल्बा, मुरिया और भतरा भतरी आदिवासी बेखौफ होकर कंद मूल, पान, पत्ते तेंदू, महुआ, चार, सल्फी बटोरने लगे हैं जंगलों में। चारों तरफ अमन की बयार बह रही है। उबड़ खाबड़ पथरीली पगडंडियों की जगह पक्की सड़कों ने ले ली है। स्कूलों में फिर से बच्चों की धींगा मस्ती दिखाई देने लगी है। ये है छत्तीसगढ़ के बदलते बस्तर की असल तस्वीर और इस खूबसूरत तस्वीर में रंग भरने का काम किया है बस्तर के माटी पुत्र, आदिवासी नेता एवं राज्य सरकार में वरिष्ठ मंत्री केदार कश्यप ने। आज सचमुच बस्तर में केदार की तपस्या फलीभूत होती दिख रही है।

बस्तर को लंबे समय तक देश के सबसे चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गिना जाता रहा। नक्सली हिंसा ने यहां केवल सड़क, स्कूल, स्वास्थ्य और संचार जैसी बुनियादी सुविधाओं को प्रभावित कर रखा था, बल्कि लोगों के रोजमर्रा के जीवन और मनोविज्ञान पर भी गहरी छाप छोड़ी थी। गांवों में सूरज ढलने के साथ जीवन का सिमट जाना, बच्चों की शिक्षा का बाधित होना, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच का कठिन होना और रोजगार के सीमित अवसर इस संघर्ष की मानवीय कीमत रहे हैं। यह तस्वीर किसी दूर बैठे आकलन की नहीं, बल्कि बस्तर के दूरस्थ और लंबे समय तक नक्सल प्रभावित रहे इलाकों में किए गए मैदानी अनुभवों पर आधारित है। इन क्षेत्रों की यात्राओं के दौरान ग्रामीण परिवारों के बीच समय बिताने, उनके घरों में जाकर बातचीत करने, खेतों और गांवों की परिस्थितियों को करीब से देखने तथा स्कूल, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र, सड़क, मोबाइल नेटवर्क और सरकारी सेवाओं की जमीनी स्थिति को समझने का अवसर मिला। बस्तर संभाग के सुकमा जिले के धुर नक्सल प्रभावित रहे जगरगुंडा, चिंतलनार, पुवर्ती, उसूर,आवापल्ली सहित दक्षिण बस्तर के कई आंतरिक इलाकों में लोगों से हुई बातचीत और प्रत्यक्ष अनुभवों में एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसमें बदलाव और चुनौतियां दोनों साथ दिखाई देते हैं। अब बस्तर के कई सुदूर इलाकों में तस्वीर बदलती दिखाई दे रही है। सुकमा, दंतेवाड़ा, नारायणपुर और बीजापुर के दूरस्थ इलाकों जैसे जगरगुंडा, चिंतलनार और पुवर्ती से लेकर उसूर–आवापल्ली तक सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के साथ सड़क, मोबाइल नेटवर्क, स्कूल, आंगनबाड़ी, खेल और आजीविका जैसी गतिविधियां उन क्षेत्रों तक पहुंच रही हैं, जहां कभी सरकारी उपस्थिति स्वयं एक चुनौती थी। यह बदलाव अभी पूर्ण नहीं है। दशकों तक हिंसा के वातावरण में रहने वाले समाज के मन से भय की स्मृतियां एक दिन में समाप्त नहीं हो सकतीं। फिर भी सबसे बड़ा परिवर्तन यह है कि बस्तर का ग्रामीण समाज अब धीरे-धीरे भय के बीच जीवन जीने से आगे बढ़कर अपने भविष्य की कल्पना करने लगा है।जगरगुंडा से चिंतलनार और आगे उसूर- आवापल्ली तक यात्रा करने पर यह मानसिक बदलाव सबसे पहले लोगों के व्यवहार में दिखाई देता है। दिन निकलने के साथ ग्रामीण अपने खेतों, बाजारों, स्कूलों और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए गांव के भीतर और बाहर अपेक्षाकृत निर्भीक होकर आते-जाते दिखाई देते हैं। सरकार और प्रशासन के प्रति लोगों का जुड़ाव भी पहले की तुलना में बढ़ता हुआ महसूस होता है।

अब भी जारी है एहतियात

हालांकि दिन ढलने के बाद स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। कई गांवों में लोग जल्दी अपने घरों को लौटना पसंद करते हैं और रात के समय अनावश्यक आवाजाही से बचते हैं। यही बस्तर के वर्तमान संक्रमण की वास्तविक तस्वीर है। दिन में बढ़ता आत्मविश्वास और रात में बची हुई सावधानी। स्थायी शांति की अगली कसौटी यही होगी कि सुरक्षा की यह भावना धीरे-धीरे ग्रामीणों के मन में स्थायी विश्वास में बदल सके। इस बदलाव का सबसे दिखाई देने वाला रूप सड़क और संचार के क्षेत्र में सामने आया है। पुवर्ती, रायगुड़ा, गलगम और दुगलमगुड़ा जैसे सुदूर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों तक प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से पक्की सड़कें पहुंचना केवल एक बुनियादी सुविधा का विस्तार नहीं है। यह उन इलाकों तक राज्य की पहुंच का प्रतीक भी है, जहां कभी पहुंचना ही एक बड़ी चुनौती माना जाता था।

डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ाने की दरकार

दूरसंचार के क्षेत्र में भी बदलाव दिखाई देता है। भोपालपट्टनम क्षेत्र के कुछ गांवों में जून 2026 में नए मोबाइल टावर लगाए गए। हालांकि नेटवर्क की स्थिति अभी भी समान नहीं है। कई दूरस्थ क्षेत्रों में मुख्यतः जीओ या बीएसएनएल का नेटवर्क ही उपलब्ध है और घाटी वाले क्षेत्रों में सिग्नल कमजोर पड़ जाता है। ऐसे क्षेत्रों के लिए केवल टावर लगाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि निरंतर और भरोसेमंद डिजिटल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना अगली प्राथमिकता होनी चाहिए।

पुल-रपटों का निर्माण जरूरी

यातायात के क्षेत्र में भी धीरे-धीरे बदलाव आया है। आंतरिक गांवों में मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा की उपस्थिति दिखाई देती है, लेकिन बसों की संख्या अभी सीमित है। दूसरी ओर निजी बसों का अपेक्षाकृत अधिक किराया निम्न आय वाले ग्रामीण परिवारों की आवाजाही को प्रभावित करता है और उनकी सीमित आय में से परिवहन पर होने वाला खर्च बढ़ाता है। मानसून बस्तर की इस चुनौती को और गंभीर बना देता है। नदी-नालों के उफान पर आने से कई प्रमुख मार्ग अस्थायी रूप से बाधित होते हैं और दूरस्थ गांव फिर से जिला और संभागीय मुख्यालयों तथा बड़े बाजारों से कटने लगते हैं। इसलिए बस्तर में अगली चुनौती केवल सड़क निर्माण नहीं, बल्कि बारहमासी कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना है। सड़क और संचार के साथ ऊर्जा की पहुंच भी दूरस्थ बस्तर के जीवन में धीरे-धीरे उजाला ला रही है। दूरस्थ क्षेत्रों के जनजातीय परिवारों के घरों, खेतों और सड़कों पर सीमित ही सही, लेकिन सोलर पैनल आधारित बिजली आपूर्ति दिखाई देना एक महत्वपूर्ण बदलाव है। जहां कभी अंधेरा दैनिक जीवन का स्वाभाविक हिस्सा था, वहां सौर ऊर्जा की छोटी-छोटी रोशनियां केवल बिजली की सुविधा नहीं, बल्कि जीवन में बदलती संभावनाओं का संकेत देती हैं। घरों में रोशनी से बच्चों के पढ़ने का समय बढ़ता है, खेतों में ऊर्जा की उपलब्धता उपयोगी गतिविधियों को संभव बनाती है और सड़कों पर रोशनी आवागमन में सुरक्षा की भावना को मजबूत करती है। इन दूरस्थ जनजातीय परिवारों के जीवन में सोलर ऊर्जा की यह पहुंच भले अभी सीमित हो, लेकिन यह उस बड़े परिवर्तन की शुरुआत है जिसमें विकास का प्रकाश धीरे-धीरे उन बस्तियों तक पहुंच रहा है, जो लंबे समय तक अंधकार और अलगाव से घिरी रही थीं।

प्रशासन की सेवाएं घर तक

बस्तर में बदलाव केवल सड़क, स्कूल और मोबाइल नेटवर्क तक सीमित नहीं है। नक्सल प्रभावित आंतरिक क्षेत्रों में प्रशासन और जनसेवा की प्रत्यक्ष उपस्थिति भी अब ग्रामीण जीवन का हिस्सा बनती दिखाई दे रही है। शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा जन सेवा केंद्र का ग्रामीण परिवारों के लिए त्वरित सेवा केंद्र के रूप में उपलब्ध होना इसी बदलाव का महत्वपूर्ण उदाहरण है। जिन इलाकों में कभी सरकारी सेवाओं तक पहुंच स्वयं एक चुनौती हुआ करती थी, वहां स्थानीय स्तर पर आवश्यक सेवाओं और सहायता के लिए सुलभ केंद्र मिलना राज्य और ग्रामीण समाज के बीच बढ़ते संपर्क को दर्शाता है।ऐसे सेवा केंद्रों का महत्व केवल उपलब्ध कराई जा रही किसी एक सेवा तक सीमित नहीं है। दूरस्थ जनजातीय परिवार के लिए गांव या घर के आसपास उपलब्ध कोई त्वरित सेवा केंद्र समय, यात्रा-व्यय और अनिश्चितता को कम करता है। इससे ग्रामीणों में यह भरोसा भी मजबूत होता है कि शासन की व्यवस्था केवल जिला मुख्यालय या बड़े कस्बों तक सीमित नहीं, बल्कि उनके गांवों और उनके निकट भी मौजूद है।

कुपोषण है बड़ी चुनौती

स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में भी सरकारी सेवाओं की पहुंच अब उन इलाकों तक बढ़ रही है, जहां पहले इनकी निरंतर उपलब्धता कठिन थी। दक्षिण बस्तर के कई हिस्सों में कुपोषण और हिडेन हंगर की चुनौती अभी भी दिखाई देती है। विशेष रूप से बच्चों और महिलाओं में पोषण की कमी को दूर करना एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है। हालांकि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से अब दूरस्थ परिवारों तक खाद्यान्न की पहुंच पहले की तुलना में बेहतर हो गई है। अनेक आंगनबाड़ी केंद्रों में ग्रामीण महिलाएं अपने छोटे बच्चों को लेकर नियमित पहुंच रही हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा बच्चों को पोषण सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। लेकिन दूसरी ओर भवनों की स्थिति और मानसून से जुड़ी समस्याएं भी सामने आती हैं। कई केंद्रों के आसपास जलभराव और भवनों की छत से पानी टपकने जैसी समस्याएं दिखाई देती हैं। मिट्टीमरका जैसे दूरस्थ गांव में आंगनबाड़ी केंद्र की सक्रिय उपस्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केवल पोषण केंद्र नहीं, बल्कि राज्य और ग्रामीण परिवार के बीच सामाजिक संपर्क का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है।

फिर से जल उठी शिक्षा की मशाल

शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव शायद बस्तर के भविष्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण संकेत है। कुआकोंडा, कोंटा, गंगालूर, उसूर, कुटरू और ओरछा जैसे लंबे समय तक नक्सल प्रभाव वाले क्षेत्रों में अब स्कूलों में विद्यार्थियों की उपस्थिति और शिक्षकों द्वारा अपेक्षाकृत निर्भीक होकर शिक्षण कार्य करना दिखाई देता है। जगरगुंडा में प्रस्तावित एजुकेशन सिटी को लेकर ग्रामीण परिवारों में सकारात्मक अपेक्षा है। दूसरी ओर जावंगा एजुकेशन सिटी से निकलकर राज्य स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों ने यह साबित किया है कि बस्तर के बच्चों में प्रतिभा की कमी नहीं है; उन्हें केवल अवसर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की जरूरत है। बस्तर के गांवों में बच्चों के सपने भी बदल रहे हैं। वे अब केवल अपने गांव या आसपास के क्षेत्रों में रोजगार की कल्पना नहीं करते, बल्कि उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी सेवाओं में जाने की इच्छा भी रखते हैं। ऐसे में स्कूल तक सड़क पहुंचाना पहला कदम है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के माध्यम से उस रास्ते को बेहतर भविष्य तक पहुंचाना अगली चुनौती है।

खेलों में बड़ी धमक

बस्तर के युवाओं में यह बदलाव खेल के मैदानों में भी दिखाई देता है। जिन क्षेत्रों में लंबे समय तक हिंसा का वातावरण रहा, वहां आज सुबह के समय किशोर और युवा सड़कों तथा मैदानों में दौड़ते दिखाई देते हैं। यह सामान्य दृश्य लग सकता है, लेकिन बस्तर की परिस्थितियों को देखते हुए यह सामाजिक परिवर्तन का महत्वपूर्ण संकेत है। बस्तर ओलंपिक ने इस ऊर्जा को एक व्यापक मंच दिया है। बस्तरिहा बटालियन और बस्तर फाइटर्स में भर्ती के अवसरों ने भी स्थानीय युवाओं के सामने सुरक्षा सेवाओं में रोजगार और सम्मानजनक करियर का एक रास्ता खोला है। जिस युवा शक्ति को कभी हिंसा प्रभावित वातावरण ने सीमित किया था, उसे अब खेल, शिक्षा और रोजगार की दिशा में मोड़ने की संभावना बन रही है।

लौट आए अपनी धरती पर

आजीविका के मोर्चे पर भी नक्सल-मुक्ति के बाद एक महत्वपूर्ण परिवर्तन दिखाई देता है। हिंसा के कारण अपने पैतृक गांव छोड़कर दूसरे स्थानों पर चले गए कुछ परिवार अब अपने गांवों में वापस लौट रहे हैं। सांड्रा जैसे सुदूर गांवों में ऐसे परिवार दिखाई देते हैं जो अपने पूर्वजों की जमीन पर लौटकर कृषि और वन उपज के माध्यम से जीवन फिर से खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन केवल गांव में वापस लौटना पर्याप्त नहीं है। परिवार तभी स्थायी रूप से टिकेंगे जब उनके पास पर्याप्त और विविध आय के स्रोत होंगे। पारंपरिक एकल फसल आधारित कृषि से जनजातीय परिवारों की आय लंबे समय तक सीमित रही है। अब सब्जी उत्पादन, बागवानी और अन्य कृषि गतिविधियों के साथ आय के विविधीकरण की संभावनाएं दिखाई दे रही हैं। वन विभाग के सहयोग से कुछ क्षेत्रों में काजू जैसी फसलों को बढ़ावा देने की दिशा में भी प्रयास हो रहे हैं। आजीविका के नए अवसरों के साथ बस्तर में पर्यटन भी जनजातीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का माध्यम बन सकता है। कांगेर वैली नेशनल पार्क क्षेत्र में स्थानीय जनजातीय परिवारों द्वारा होम स्टे की सुविधा शुरू करने की पहल इसका एक सकारात्मक उदाहरण है। इससे एक ओर क्षेत्र में पर्यटन के विकास और स्थानीय परिवारों के लिए आय के नए अवसर पैदा होने की संभावना है, तो दूसरी ओर बाहर से आने वाले पर्यटकों को जनजातीय जीवन, स्थानीय खान-पान, परंपराओं और संस्कृति को करीब से समझने का अवसर मिलता है। यदि इसे स्थानीय समुदाय की भागीदारी, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक गरिमा के साथ आगे बढ़ाया जाए, तो बस्तर में पर्यटन केवल घूमने की गतिविधि न रहकर जनजातीय समुदायों के लिए एक टिकाऊ आजीविका मॉडल बन सकता है। बस्तर में स्थायी आर्थिक पुनर्वास का मॉडल ऐसा होना चाहिए जिसमें एक परिवार केवल एक फसल पर निर्भर न रहे, बल्कि कृषि, वनोपज, बागवानी, पशुपालन, हस्तशिल्प, पर्यटन और स्थानीय प्रसंस्करण जैसे कई आय-स्रोतों से जुड़ सके। इसमें वन एवं सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने अहम भूमिका निभाई है। इस परिवर्तन की सबसे गहरी तस्वीर शायद बस्तर के सांस्कृतिक और सार्वजनिक जीवन में दिखाई देती है। लंबे समय तक हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों में सार्वजनिक सांस्कृतिक और राष्ट्रीय गतिविधियों का स्वतंत्र रूप से आयोजन अपने आप में बड़ा बदलाव है। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर जनजातीय युवाओं और युवतियों की व्यापक भागीदारी तथा लोक-सांस्कृतिक प्रस्तुतियां बताती हैं कि बस्तर की सांस्कृतिक पहचान अब नए आत्मविश्वास के साथ सार्वजनिक जीवन में लौट रही है।

पहली बार देखी तिरंगे की शान

इसी बदलाव का एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रतीक तिरंगा बना है। स्वतंत्रता के 80 वर्षों बाद पहली बार बस्तर संभाग की 92 ग्राम पंचायतों में तिरंगा ध्वज फहराया गया। यह केवल ध्वजारोहण का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि उन क्षेत्रों में राष्ट्रीय चेतना और नागरिक सहभागिता की नई अभिव्यक्ति थी, जहां लंबे समय तक हिंसा और भय के कारण सार्वजनिक गतिविधियां सीमित रही थीं। बीजापुर के सुदूर इंद्रावती नदी के तटवर्ती गांवों में निकाली गई तिरंगा यात्रा ने इस बदलाव को और जीवंत रूप दिया। दूरस्थ जनजातीय अंचल में ग्रामीणों और युवाओं की भागीदारी के साथ तिरंगे का गांवों तक पहुंचना इस बात का प्रतीक है कि राष्ट्रीय पहचान अब केवल शहरों और जिला मुख्यालयों तक सीमित नहीं रह गई है। वह बस्तर के सुदूर गांवों के सार्वजनिक जीवन में भी अपनी जगह बना रही है।

सांस्कृतिक चेतना का पुनर्जागरण

इसी क्रम में कुछ गांवों में ग्रामसभाओं द्वारा बाहरी धार्मिक प्रचार-प्रसार को लेकर सार्वजनिक रूप से अपने निर्णय दर्ज किए जाने की घटनाएं भी सामने आती हैं। इन्हें स्थानीय जनजातीय समुदाय द्वारा अपनी सांस्कृतिक और सामाजिक स्वायत्तता को लेकर व्यक्त किए जा रहे आग्रह के रूप में देखा जा सकता है। ऐसे मामलों में लोकतांत्रिक और संवैधानिक प्रक्रिया का सम्मान महत्वपूर्ण है, ताकि ग्रामसभा के अधिकार, प्रत्येक नागरिक की धार्मिक स्वतंत्रता और समुदाय की सांस्कृतिक पहचान के बीच संतुलन बना रहे। बस्तर की कहानी इसलिए केवल नक्सलवाद के कमजोर पड़ने की कहानी नहीं है। यह उस सामाजिक परिवर्तन की कहानी है जिसमें सड़क के साथ स्कूल पहुंच रहा है, स्कूल के साथ शिक्षक का भरोसा लौट रहा है, आंगनबाड़ी के साथ मां और बच्चे सरकारी व्यवस्था से जुड़ रहे हैं, मोबाइल टावर के साथ बाहरी दुनिया से संपर्क बढ़ रहा है, सौर ऊर्जा अंधेरे घरों और रास्तों तक रोशनी पहुंचा रही है, जन सेवा केंद्र के माध्यम से प्रशासनिक सेवाएं ग्रामीणों के करीब आ रही हैं, खेल के मैदान में युवा अपनी ऊर्जा लगा रहे हैं, पर्यटन के माध्यम से जनजातीय परिवारों के लिए नए अवसर बन रहे हैं और गांवों में तिरंगा सार्वजनिक जीवन का हिस्सा बन रहा है।

लाभार्थी नहीं, बनाना होगा मालिक

बस्तर का आने वाला दशक केवल नक्सल-मुक्ति की उपलब्धि को बनाए रखने का नहीं, बल्कि शांति को विकास, विकास को अवसर और अवसर को आत्मनिर्भरता में बदलने का दशक होना चाहिए। आने वाले वर्षों में यदि मजबूत कनेक्टिविटी के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य एवं पोषण, विश्वसनीय ऊर्जा और डिजिटल नेटवर्क, आधुनिक कृषि एवं वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था, जनजातीय पर्यटन, खेल और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों को एकीकृत रूप से आगे बढ़ाया जाता है, तो बस्तर देश के सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में से एक से उभरकर जनजातीय विकास, प्रकृति-आधारित अर्थव्यवस्था और समावेशी शांति का एक विशिष्ट मॉडल बन सकता है। आज जिन सुदूर गांवों में सड़क, सोलर रोशनी, मोबाइल नेटवर्क, स्कूल, जनसेवा केंद्र और होम स्टे जैसी छोटी-छोटी पहलें दिखाई दे रही हैं, वही भविष्य के बड़े परिवर्तन की आधारशिला बन सकती हैं। बस्तर का भविष्य इसलिए केवल इस बात में नहीं है कि यहां भय समाप्त हो, बल्कि इस बात में है कि यहां का बच्चा बेहतर शिक्षा पाए, युवा अपने गांव में अवसर देखे, परिवार अपनी जमीन और संस्कृति के साथ सम्मानजनक आय अर्जित करे और जनजातीय समाज विकास की प्रक्रिया का केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि उसका मुख्य भागीदार और निर्माता बने।

कमतर नहीं है केदार कश्यप की भूमिका

बस्तर संभाग में केंद्र और राज्य सरकार की जनहितैषी योजनाओं के सफल क्रियान्वन में बस्तर के वरिष्ठ आदिवासी नेता और छत्तीसगढ़ सरकार के वन, सहकारिता एवं जल संसाधन मंत्री मंत्री केदार कश्यप की बड़ी है। बस्तर को नक्सलमुक्त कराने, स्थानीय आदिवासियों को माओवाद के खिलाफ जागरूक बनाने में भी केदार कश्यप लगातार सक्रिय रहे हैं। नक्सलवाद से ग्रसित रहने के दौरान और नक्सल मुक्ति के बाद भी केदार कश्यप बस्तर के सुदूर कोंटा इलाके से लेकर अबूझमाड़ तक निरंतर दौरा करते आए हैं। जो आदिवासी भाजपा से छिटक चुके थे, उन्हें फिर भाजपा से जोड़ने में उनकी बड़ी भूमिका रही है। यही वजह है कि पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में भाजपा ने पूरे बस्तर संभाग में ऐतिहासिक जीत दर्ज कराई है। अगर बस्तर में पुनः बीजेपी को एकतरफा विजय दिलानी है तो केदार कश्यप को पूरी जिम्मेदारी देकर बस्तर के विकास की योजना तैयार करनी होगी। इसके पीछे ठोस वजह यह है कि केदार कश्यप यहां की संस्कृति, परंपारा, हर बोली भाषा, खान पान, रहन सहन, स्थानीय लोगों की तासीर और भौगोलिक परिस्थिति से भलिभांति परिचित हैं। बस्तर के आदिवासियों के बीच कश्यप परिवार की गहरी पैठ तबसे है जब इस परिवार के मुखिया रहे दिवंगत वरिष्ठ आदिवासी नेता एवं पूर्व सांसद बलिराम कश्यप ने बस्तर में भाजपा के लिए जमीन तैयार की थी।

बिंजली में सांसद महेश कश्यप ने कराया गृह प्रवेश, लखपति दीदियों से की सीधी चर्चा

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नारायणपुर बस्तर सांसद महेश कश्यप ने जिले के एक दिवसीय प्रवास के दौरान ग्राम बिंजली पहुंचकर प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राही इन्द्रनाथ दुग्गा के नव निर्मित आवास का निरीक्षण किया तथा उन्हें आवास की चाबी सौंपकर गृह प्रवेश कराया।इस दौरान इन्द्रनाथ दुग्गा ने बताया कि उनके परिवार को प्रधानमंत्री आवास योजना के साथ उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन, शौचालय निर्माण, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि एवं महतारी वंदन योजना का लाभ मिल रहा है। सांसद ने परिवार से चर्चा कर योजनाओं के प्रभाव की जानकारी ली।

सांसद ने ग्रामीणों से संवाद कर क्षेत्र में शांति और सुरक्षा के माहौल के बाद आए बदलावों की जानकारी भी प्राप्त की। ग्रामीणों ने बताया कि अब विकास कार्यों और शासकीय योजनाओं का लाभ गांव तक आसानी से पहुंच रहा है।इस अवसर पर सांसद ने लखपति दीदी समूह की महिलाओं से मुलाकात कर उनके स्वरोजगार, ऋण उपयोग और आजीविका गतिविधियों की जानकारी ली तथा उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

सेवा संकल्प अभियान के तहत सेवा सेतु शिविर आयोजित, योजनाओं का लाभ लेने की अपील

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नारायणपुर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में सेवा एवं समर्पण के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर चलाए जा रहे सेवा संकल्प अभियान के तहत मंगलवार को नगर पालिका परिसर में सेवा सेतु शिविर आयोजित किया गया। शिविर में विभिन्न विभागों द्वारा केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई तथा नागरिकों से आवेदन प्राप्त किए गए।कार्यक्रम में बस्तर सांसद महेश कश्यप ने कहा कि 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चल रहे इस अभियान का उद्देश्य शासन की योजनाओं और सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। उन्होंने नागरिकों से पात्रता के अनुसार विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने की अपील की। सांसद ने संबंधित अधिकारियों को शिविर में प्राप्त आवेदनों का शीघ्र परीक्षण एवं निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।कार्यक्रम को छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष रूपसाय सलाम, जिला पंचायत अध्यक्ष नारायण मरकाम तथा नगर पालिका अध्यक्ष इंद्र प्रसाद बघेल ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

अबूझमाड़ में 6 प्रेशर कुकर आईईडी और पाइप बम बरामद, मौके पर किया गया नष्ट

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नारायणपुर अबूझमाड़ क्षेत्र में चलाए जा रहे सघन तलाशी एवं क्षेत्र सैनिटाइजेशन अभियान के दौरान नारायणपुर पुलिस और 29वीं वाहिनी आईटीबीपी की संयुक्त टीम ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए 6 प्रेशर कुकर आईईडी तथा एक पाइप बम आईईडी बरामद किया। बम निरोधक दल ने सभी विस्फोटकों को आवश्यक सुरक्षा मानकों के तहत मौके पर ही सुरक्षित रूप से निष्क्रिय कर नष्ट कर दिया।पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार पटेल, 29वीं वाहिनी आईटीबीपी के कमान अधिकारी अभिषेक सूद तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ऑप्स) अक्षय साबद्रा के मार्गदर्शन में 5 अक्टूबर को संयुक्त टीम ने रैनार कैंप से माक्सोली–भाटबेड़ा–रैनार क्षेत्र में सघन तलाशी अभियान चलाया।

अभियान के दौरान सुरक्षा बलों को भाटबेड़ा क्षेत्र में संदिग्ध वस्तुएं दिखाई देने पर इलाके को घेरकर विस्तृत तलाशी ली गई।तलाशी के दौरान एक संदिग्ध डंप से 6 प्रेशर कुकर आईईडी और एक पाइप बम आईईडी बरामद किए गए। इसके अलावा आईईडी निर्माण में प्रयुक्त सामग्री भी जब्त की गई, जिसमें एक मल्टीमीटर, एक पेचकस, सोल्डरिंग तार, सोल्डरिंग आयरन तथा वाहन खोलने की तीन चाबियां शामिल हैं।बरामद विस्फोटकों को बम निरोधक एवं निष्क्रियता दल ने सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए मौके पर ही नष्ट कर दिया। दल का नेतृत्व सहायक उपनिरीक्षक मोहन ने किया।पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह सफलता सुरक्षा बलों की सतत सतर्कता, आपसी समन्वय और संयुक्त अभियान का परिणाम है। अबूझमाड़ क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों और विस्फोटक सामग्री की तलाश के लिए लगातार तलाशी अभियान जारी है।

युवती पर एसिड अटैक के आरोपियों को पुलिस ने 08 घंटे की भीतर किया गिरफ्तार

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पीड़ित युवती के कथित प्रेमी यश सोनकर ने ही रची थी एसिड फेंकने की साजिश।

बालोद शहर में निवासरत पीड़ित युवती प्रतिदिन की भांति लाइब्रेरी से अपने घर की ओर वापस जा रही थी, तभी एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा उस पर एसिड फेंककर हमला किया गया, जिससे छात्रा गंभीर रूप से घायल हो गई। पड़ोस के लोग उसकी आवाज सुनकर तत्काल मदद के लिए बाहर निकले तथा पीड़िता के पिता को जानकारी देकर उसे ईलाज के लिए तुरंत जिला अस्पताल बालोद लेकर गये।एसिड फेंककर आरोपी तत्काल तांदुला डैम की ओर फरार हो गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक किरण गंगाराम चव्हाण (भा.पु.से.) के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक चंद्रकांत गवर्ना के मार्गदर्शन में व्यापक सर्च अभियान चलाया गया साथ ही उप पुलिस अधीक्षक विनय साहू के नेतृत्व में विशेष टीम गठित कर संदिग्धों से पूछताछ की गई।

जांच में हुआ घटना का खुलासा

मामले की जांच में एसडीओपी विनय साहू की टीम द्वारा मौके से घटना के संबंध में साक्ष्य जुटाए गए एवं शहर में अलग अलग लोकेशन पर स्थित सीसीटीवी फुटेज को चेक किया गया। जुटाए गए तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पीड़ित युवती के कथित प्रेमी यश कुमार सोनकर, वर्तमान निवासी कुंदरूपारा, बालोद को संदेह के घेरे में लिया गया। यश सोनकर द्वारा कई प्रकार की मनगढ़ंत कहानियां बनाकर पुलिस को गुमराह करने का प्रयास किया गया।कड़ाई से पूछताछ करने पर यश सोनकर ने पीड़ित युवती से प्रेम संबंध स्वीकार किया तथा किसी अन्य जगह अफेयर एवं शादी हेतु स्वीकार नहीं किए जाने से गुस्से में आकर करीब तीन माह पूर्व अपने स्कूल फ्रेंड करण कुंजाम, निवासी भैरमगढ़, बीजापुर के साथ मिलकर युवती पर एसिड फेंकने की योजना बनाना स्वीकार किया।इस दौरान यश सोनकर लगातार युवती को मनाने का प्रयास कर रहा था। युवती द्वारा तैयार नहीं होने की स्थिति में उसने अपने दोस्त करण कुंजाम को 26 सितंबर को बालोद बुलाया। 27 सितंबर को एसिड खरीदकर गणेश झांकी के दौरान घटना को अंजाम देने की प्लानिंग की गई, लेकिन कड़ी सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए आरोपियों ने उस समय घटना को अंजाम नहीं दिया।इसके बाद 05 अक्टूबर को दोपहर 12:30 बजे, जब युवती लाइब्रेरी से अपने घर वापस लौट रही थी, तभी यश सोनकर के कहने पर करण कुंजाम द्वारा युवती पर एसिड फेंका गया। घटना के बाद करण कुंजाम तत्काल मौके से फरार होकर तांदुला बांध की ओर भागा।

वहां से लिफ्ट लेकर झलमला, मरकाटोला होते हुए चारामा पहुंचा।आरोपी यश सोनकर द्वारा अपराध स्वीकार किए जाने के बाद पुलिस द्वारा करण कुंजाम की तलाश की गई तथा उसे कोंडागांव से हिरासत में लिया गया।दोनों आरोपियों ने अपने मेमोरेण्डम कथन में घटना कारित करना स्वीकार किया है तथा घटना में प्रयुक्त एसिड एवं घटना के समय पहने हुए कपड़ों के संबंध में जानकारी उपलब्ध कराई, जिन्हें पुलिस द्वारा जप्त किया गया

पकड़े गए आरोपियों के नाम

1. यश कुमार सोनकर, पिता ईश्वर लाल सोनकर, उम्र 20 वर्ष, वार्ड नं. 11, ग्राम नेवारिकला, जिला बालोद। 2. करण कुंजाम, पिता दिनेश कुंजाम, उम्र 20 वर्ष, वार्ड नं. 15, भैरमगढ़, थाना भैरमगढ़, जिला बीजापुर। प्रकरण में दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। सराहनीय भूमिका उक्त कार्रवाई में थाना प्रभारी बालोद निरीक्षक शिशुपाल सिन्हा, थाना प्रभारी गुरुर निरीक्षक मुकेश सिंह, साइबर प्रभारी धरम भुआर्य, आरक्षक संजय सोनी सहित समस्त थाना स्टाफ कोतवाली बालोद एवं साइबर सेल टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। बालोद पुलिस की अपील*बालोद पुलिस आम नागरिकों से अपील करती है कि महिलाओं एवं युवतियों की सुरक्षा से संबंधित किसी भी संदिग्ध गतिविधि अथवा व्यक्ति द्वारा पीछा किए जाने, धमकी देने या परेशान किए जाने की जानकारी को नजरअंदाज न करें। ऐसी किसी भी घटना की सूचना तत्काल पुलिस को दें, ताकि समय रहते प्रभावी कार्रवाई की जा सके।बालोद पुलिस महिलाओं एवं युवतियों की सुरक्षा के लिए सदैव तत्पर है।

पास्को एक्ट का फरार आरोपी गिरफ्तार

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जगदलपुर पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा के निर्देशन में बस्तर पुलिस द्वारा अपराधी तत्वों एंव वारंटियों की धर पकड़ के लिए लगातार चलाए जा रहे अभियान के तहतपरपा थाना पुलिस ने पास्को एक्ट और अन्य वारदातों के फरा वारंटी रजत बोस पिता खिरौद बोस को गिरफ्तार कर लिया है।

आरोपी कोतवाल पारा शिवानंद आश्रम के पास नेगीगुड़ा जगदलपुर का निवासी है।आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुखनंदन राठौर एवं पुलिस अनुविभगीय अधिकारी लक्ष्मण पोटाई के मार्गदर्शन मे थाना प्रभारी निर्मला सिदार के नेतृत्व में टीम गठित की गई थी। आरोपी को माननीय न्यायलय पेश किया गया। पुलिस टीम में थाना प्रभारी निर्मला सिदार, सहायक उप निरीक्षक अजीत सिंह, प्रधान आरक्षक शत्रुघन धर दीवान, खेदुराम ठाकुर व लवण पाणिग्रही तथा आरक्षक महेंद्र कोमरे, रोहित नेताम व सोमा कवासी शामिल थे।

आपदा प्रबंधन के लिए वनांचल माधव सेवा कल्याण समिति ने बढ़ाया सहयोग का हाथबाढ़ प्रभावितों की सहायता के लिए मुख्यमंत्री बाढ़ आपदा राहत कोष में दिए 51 हजार रुपए

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जगदलपुर। बाढ़ प्रभावित परिवारों की सहायता एवं आपदा प्रबंधन के लिए वनांचल माधव सेवा कल्याण समिति ने सहयोग की पहल करते हुए मुख्यमंत्री बाढ़ आपदा राहत कोष में 51 हजार रुपए की सहायता राशि प्रदान की। समिति की ओर से मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय में बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा को 51 हजार रुपए का चेक सौंपा गया। इस अवसर पर समिति के कार्यकारिणी सदस्य कुंवर राज बहादुर सिंह राणा, सचिव तुलसीराम बघेल, हेम कुमार पटेल एवं संग्राम सिंह राणा उपस्थित रहे।

समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि प्राकृतिक आपदा की इस घड़ी में बाढ़ प्रभावित परिवारों के साथ खड़ा होना सामाजिक दायित्व है। समिति द्वारा अपनी क्षमता के अनुसार राहत एवं सहयोग के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

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