जगदलपुर बस्तर संभाग के सुकमा जिले में आईआईडी ब्लास्ट में घायल हुई दोनों महिलाओं से उप मुख्यमंत्री व गृहमंत्री विजय शर्मा ने आज रायपुर के एम्स पहुंचकर मुलाकात की और उनका हालचाल जाना। श्री शर्मा ने डॉक्टरों को उनके बेहतर इलाज के लिए कहा।
आईईडी ब्लास्ट में घायल बस्तर संभाग के सुकमा जिले के जगरगुंडा थाना क्षेत्र अंतर्गत भीमापुरम गांव के एक घर नक्सलियों ने बंदूक के बल पर आईआईडी छुपाकर रख दिया था। जिसमें ब्लास्ट होने से दोनों महिलाएं कल घायल हो गईं थीं। उप मुख्यमंत्री शर्मा ने एम्स के डॉक्टरों से उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। एम्स के डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि दोनों खतरे से बाहर हैं और उनका समुचित उपचार किया जा रहा है। श्री शर्मा ने दोनों के बेहतर से बेहतर इलाज के निर्देश दिए। जैसे ही यह खबर बस्तर पहुंची, लोग उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा की तारीफ करने लगे। लोगों ने कहा कि हर जनप्रतिनिधि और नेता को ऐसा ही होना चाहिए।
लगातार बिजली गुल से परेशान जनता का दर्द सुनाया भाजपा नेता सुरेश गुप्ता ने
जगदलपुर लगातार अंचल में बिजली गुल होने से सभी परेशान हैं। भीषण गर्मी के बीच हल्की आंधी बारिश से बिजली तारों का टूटना, ट्रांसफार्मर खराब होना, घंटों बिजली बंद रहना और लाइट बंद होने के दौरान उपभोक्ता द्वारा विद्युत विभाग के कॉल सेंटर में फोन करने पर कंप्लेंट के लिए फोन रिसीव नहीं होने से विद्युत उपभोक्ताओं में आक्रोश है।
बार बार और लंबे समय तक बिजली गुल रहने और विद्युत विभाग के कॉल सेंटर में फोन नहीं लगने, लगातार फोन व्यस्त बताने जैसी समस्याओं को लेकर भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष सुरेश गुप्ता ने आज विद्युत वितरण कंपनी के नगर प्रभारी अधीक्षण अभियंता एके अग्रवानी से मुलाकात कर सारे परेशानियों पर विस्तार से चर्चा की। नगर अध्यक्ष सुरेश गुप्ता ने कहा कि थोड़ी भी हवा पानी आने पर बिजली का गुल हो जाना और और लंबे समय तक लाइट बंद रहना आम बात है।इस दौरान विभाग द्वारा किसी भी जिम्मेदार अधिकारियों तक उपभोक्ता अपनी बात आसानी से पहुंचा पाएं ऐसे कॉल सेंटरों में जिन्हे जिम्मेदारियां मिली है उनके द्वारा फोन रिसीव नहीं किया जाता। फोन को उठा कर रख दिया जाता है। ऐसी शिकायतों से उपभोक्ता परेशान हैं। सुरेश गुप्ता ने बताया कि चर्चा के दौरान कार्यपालन अभियंता एके अग्रवाणी ने कहा कि विगत पिछले 5 वर्षों में जो भी कार्य विद्युत विभाग द्वारा उपभोक्ता के हित में किए जाने थे, ऐसे कार्य नहीं हो पाए। इसका खामियाजा उपभोक्ता भोग रहे हैं। मगर अब इससे निजात दिलाने हेतु पूरी कार्य योजना बन गई है।बहुत जल्द ही इस पर कार्य प्रारंभ हो जाए गा। अग्रवानी ने बताया की 11 केवी लाइन जो ओपन तार पर है इसे पूरे बस्तर में बदलने की योजना पूर्व से रही है और उसे पूर्व की सरकार ने पूरा नहीं किया। इसे अब जाकर अमल में लाया गया है। 11 केवी खुली लाइन को केबल लाइन में तब्दील कर देने से आने वाले समय में उपभोक्ताओं को परेशानी से मुक्ति मिलेगी। कार्यपालन अभियंता श्री अग्रवानी ने बताया कि 11 केवी में खुले तारों की जगह केबल तार लगाया जाएगा, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। यह कार्य आचार संहिता समाप्त होने के बाद इसकी स्वीकृति मिलते ही पूरे बस्तर में युद्ध स्तर पर होगा।नगर मंडल भाजपा अध्यक्ष सुरेश गुप्ता ने कार्यपालन यंत्री विद्युत विभाग नगर प्रभारी से कहा कि कॉल सेंटर में उपभोक्ताओं का फोन नहीं लगता या फोन नहीं रिसीव नहीं किया जाता है, इनकी मॉनिटरिंग हेतु यहां सीसी कैमरा लगवाया जाए जिससे जिम्मेदार अधिकारी मॉनिटरिंग कर सकें। विभाग से जो फोन मिला है उसमें कॉल वेटिंग सिस्टम डाला जाए जिससे, व्यस्तता से जो उपभोक्ता के फोन आते हैं उन्हें कॉल बैक कर उनकी समस्या सुनी जा सके और शहर के जिन क्षेत्र में लगातार बिजली गुल हो रही है उसका कारण को जानकर उसमें सुधार किया जाए। जिससे उपभोक्ता को राहत मिले सके। इस अवसर पर नगर उपाध्यक्ष राकेश तिवारी, शशि पाठक, योगेश ठाकुर, प्रेम यादव, भुवनेश ध्रुव भी उपस्थित रहे।
पत्रकार पवन नाग और नीलांबर भद्रे ने पेश की शानदार मिसाल
अर्जुन झा
बकावंड तमिलनाडु में ठेकेदार द्वारा दो साल से बंधक बनाकर रखे गए विकासखंड बकावंड के एक मजदूर को ब्लाक के दो पत्रकारों ने बड़ी सूझबूझ का परिचय देते हुए सकुशल छुड़ा लाया है। बकावंड के युवा पत्रकार पवन नाग और नीलम भद्रे की इस बेमिसाल पहल से न सिर्फ उनका समाज, बल्कि बस्तर की पत्रकार बिरादरी भी गौरवान्वित हुई है। दोनों पत्रकारों की सर्वत्र प्रशंसा हो रही है।
बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड की ग्राम पंचायत छिंदगांव निवासी युवा मजदूर बलराम बघेल पिता सुबस बघेल दो साल पहले रोजी रोटी की तलाश में तमिलनाडु चला गया था। तबसे उसका परिवार से संपर्क टूट गया था। फोन से बात नहीं हो पा रही थी। परिवार और समाज के लोग परेशान हो उठे थे। जब इस बात की जानकारी बकावंड के युवा पत्रकार एवं भाजपा के मीडिया प्रभारी पवन कुमार नाग और पत्रकार नीलांबर भद्रे को हुई, तो उन्होंने बलराम को हरे हाल में ढूंढ कर लाने की ठान ली। उन्होंने प्रशासनिक मदद के अलावा खुद की सूझबूझ से तमिलनाडु जाकर बंधक बने बलराम को वापस बस्तर लाकर अपने समाज और पत्रकार संघ को गौरवान्वित किया है। पत्रकारों ने इस मामले में थाना प्रभारी करपावंड से लिखित शिकायत की गई थी। थाना प्रभारी ने मामले को संज्ञान में लेते हुए तत्काल संपर्क करने की कोशिश की। बलराम बघेल की बस्तर वापसी के लिए बस्तर से तमिलनाडु गए पत्रकार पवन कुमार नाग ने बताया कि बलराम की घर वापसी में आरएसएस बस्तर संघ प्रमुख राममूर्ति अय्यर की भी बड़ी भूमिका रही। अय्यर ने तमिलनाडु के ठेकेदार से तमिल भाषा में बात की। तब कहीं जाकर बलराम को छुड़वाने में कामयाबी हासिल हुई। लिए दोनों पत्रकारों को एक सप्ताह तक तमिलनाडु में रहना पड़ा। जगदलपुर के वरिष्ठ पत्रकार अर्जुन झा ने पत्रकार साथी पवन कुमार नाग और निलांबर भद्रे की इस शानदार पहल को जमकर सराहा है और उन्हें शाबासी दी है।
बस्तर में शांति बहाली रास नहीं आ रही कांग्रेसियों को
अर्जुन झा-
जगदलपुर छत्तीसगढ़ के वन मंत्री और बस्तर संभाग के युवा एवं धाकड़ आदिवासी नेता केदार कश्यप प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज एवं कांग्रेस पर आज जमकर बरसे। उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति बहाली कांग्रेस को पसंद नहीं आ रही है।
मंत्री केदार कश्यप ने विशेष बातचीत में कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज राग आलापना बंद करें, विधवा विलाप न करें। उन्होंने कहा कि दीपक बैज को यह नहीं भूलना चाहिए कि उनके कार्यकर्ता और पदाधिकारी ही अपराधों में लिप्त रहे हैं। चाहे नारायणपुर की बात करें या बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा की या फिर पखांजुर की। नारायणपुर के विक्रम बैस हत्याकांड में पकड़े गए आरोपी कांग्रेस के पदाधिकारी रहे हैं। एक आरोपी तो एनएसयूआई का अध्यक्ष भी रह चुका है। पखांजुर में असीम राय हत्याकांड का खुलासा कर आरोपियों को जल्द पकड़ लिया गया। मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि हमारे छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार दृढ इच्छाशक्ति के साथ बस्तर संभाग में शांति स्थापना के लिए काम कर रही है। नक्सल समस्या के उन्मूलन और यहां के निवासियों की सुरक्षा एवं उनके हितों के संरक्षण के लिए ठोस उपाय किए जा रहे हैं। इसके अच्छे परिणाम भी सामने आने लगे हैं। वन मंत्री एवं आदिवासी नेता केदार कश्यप ने कहा कि बस्तर में शांति बहाली से कांग्रेसियों के पेट में मरोड़ उठने लगी है। कांग्रेस के नेता यह कभी नहीं चाहते कि बस्तर शांत रहे, यहां अमन और तरक्की की बयार बहे। इसीलिए वे हर अच्छी पहल में नकारात्मकता ढूंढने में लगे रहते हैं। केदार कश्यप ने पीसीसी चीफ दीपक बैज को सलाह दी है कि वे राग आलापना और गाल बजाना बंद कर बस्तर की भलाई में योगदान दें।
जगदलपुर बस्तर शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुशील मौर्य ने कहा है कि आदिवासी विरोधी भाजपा की सरकार बनते ही छत्तीसगढ़ में निर्दोष आदिवासियों की हत्या का सिलसिला सा चल पड़ा है।बस्तर संभाग संभाग में फर्जी मुठभेड़ों की आड़ में आदिवासियों की सरेआम हत्याएं कराई जा रही हैं। भाजपा का आदिवासी विरोधी चेहरा सामने आ गया है।
बीजापुर जिले में बीते 10 मई को पीडिया के जंगलों में हुई पुलिस-नक्सली मुठभेड़ में 12 आदिवासी ग्रामीणों की मौत को लेकर आदिवासी समाज द्वारा एनकाउंटर पर सवाल उठाते हुए इसे फर्जी मुठभेड़ बताया गया है। साथ आदिवासी समाज द्वारा आज 28 मई को बस्तर बंद का आह्वान किया गया था। इस बंद को बस्तर जिला कांग्रेस कमेटी ने समर्थन दिया। शहर कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य ने कहा कि कांग्रेस हमेशा से आदिवासी समाज के साथ खड़ी रही है। आदिवासियों के उत्थान और बस्तर में शांति स्थापना के लिए पूर्ववर्ती हमारी कांग्रेस सरकार जो काम और प्रयास किए वह मील का पत्थर साबित हुए थे। तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और हमारे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने आदिवासियों के दर्द को करीब से देखा और उसे दूर करने के लिए शानदार पहल भी की। कांग्रेस सरकार के प्रयासों से बस्तर शांति का टापू बनने की ओर तेजी से अग्रसर हो रहा था। दुर्भाग्य से हमारी सरकार चली गई और भाजपा सत्ता में आ गए। इसके बाद बस्तर और यहां के आदिवासियों के लिए बुरे दौर की शुरआत हो गई। कांग्रेस नेता सुशील मौर्य ने कहा है कि भाजपा सरकार आने के बाद बस्तर में अब तक जितनी भी मुठभेड़ें हुई हुईं हैं, उनमें ज्यादातर निरीह आदिवासी ही मारे गए हैं। यह आरोप प्रभावित परिवारों और उनके गांव वालों ने भी लगाए हैं। शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य ने पीडिया मुठभेड़ को आदिवासियों का नर संहार निरुपित करते हुए कहा कि अब आदिवासी इसके विरुद्ध लामबंद हो गए हैं और इसका खामियाजा भारतीय जनता पार्टी को भोगना ही पड़ेगा।शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य ने कहा कि प्रदेश में भाजपा की सरकार बनते ही निर्दोष आदिवासीयों की हत्या का सिलसिला लगातार जारी है। प्रदेश की भाजपा सरकार की आदिवासियों को खत्म करने की यह बड़ी साजिश है। सरकार नहीं चाहती कि आदिवासियों को जल, जंगल और जमीन का हक मिले। वह वन एवं खनिज संपदा को अपने पूंजीपति मित्रों के हवाले करना चाहती है। इस वजह से आदिवासियों को नक्सली बताकर फर्जी मुठभेड़ों में मरवा रही है। भाजपा की सरकार बनते ही बस्तर में भयावह वातावरण उत्पन्न हो गया है। सारे ग्रामीण खौफ में जी रहे हैं। जबकि पूरा बीजापुर जिला इस फ़र्जी मुठभेड़ के विषय से भलीभांति परिचित है। श्री मौर्य ने कहा है कि पीड़िया नक्सली -पुलिस मुठभेड़ को सभी वर्गों, ग्रामीणों, सामाजिक संगठनों, मीडिया कर्मियों ने फर्जी मुठभेड़ करार दिया है। प्रदेश की भाजपा सरकार को इस फर्जी मुठभेड़ में मारे गए सभी निर्दोष आदिवासी ग्रामीणों की हत्या की हाईकोर्ट के जज की निगरानी में जांच करानी चाहिए। मौर्य ने कहा कि आदिवासी समाज द्वारा 28 मई को जो बस्तर बंद का आह्वान किया गया था, उसे कांग्रेस पार्टी पूर्ण समर्थन रहा है।
ग्राम ठेमाबुजुर्ग माँ दंतेश्वरी मंदिर तालाब का उद्घाटन किया गया।
‘सकल जैन समाज जल क्रांति’ के तहत इस तालाब के पुनर्जीवन की जिम्मेदारी फोर्स मोटर्स के चेयरमैन डॉ. अभय जी फिरोदिया ने ली है।
इस सुनहरे अवसर पर श्रीमति लाकेश्वरी देवहारी, श्रीमती तुलसा बाई सतिमा बाई, चंद्रकली बाई, कमितला बाई, संगीता बाई, रेखा बाई, तिरोंदी बाई शिव प्रसाद बारला,जीतेन्द्र कोठारी,जशराज यादव, भरत विश्वकर्मा, नदलाल,बलकरण, मनराखन, मंगलसिंग, चेतन सिंह,ज़िला कार्यक्रम समन्वयक प्रवीण साहू मान्यवरों के साथ सभी ग्रामवासी एवं किसान मौजूद रहे।
पीडिया मुठभेड़ की हाई कोर्ट के जज की निगरानी मे जांच की मांग -अर्जुन झा- जगदलपुर नक्सल पुनर्वास नीति को लेकर अब छत्तीसगढ़ में सियासी जंग शुरू हो गई है। कांग्रेस जहां मुठभेड़ों और पुनर्वास नीति को लेकर सवाल उठा रही है, वहीं सरकार पूरे एक्शन मोड में नजर आ रही है। पुनर्वास नीति को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज द्वारा सवाल उठाए जाने पर कल गृहमंत्री विजय शर्मा ने कांग्रेस से सुझाव मांगा था और आज पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज ने गृहमंत्री विजय शर्मा को पत्र लिखकर सुझाव भी भेज दिया। पत्र में कांग्रेस ने और भी कई सवाल उठा दिए हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने पत्र में लिखा है कि पीडिया मुठभेड़ हो या कांकेर के कोयलीबेड़ा मुठभेड़ की बात हो कांग्रेस पार्टी ने अपनी ओर से सवाल नहीं खड़ा किया, सवाल वहां के ग्रामीणों ने खड़ा किया है। कांग्रेस ने ग्रामीणों की मांग के बाद जांच कमेटी बनाई। जांच कमेटी में आदिवासी नेता शामिल थे। जांच कमेटी ने ग्रामीणों से बात करने के बाद जो तथ्य पाए वह दुखद हैं। ग्रामीण और साक्ष्य बता रहे हैं कि मुठभेड़ में मारे गए कुछ लोग निर्दोष थे। सरकार को इस मामले की जांच कराने से परहेज क्यों है? हाईकोर्ट के वर्तमान जज की देख-रेख में जांच करा ली जाe ताकि स्थितियां साफ हो सके। कांकेर मुठभेड़ में मारे गए लोगो के भी नक्सली होने पर सवाल खड़ा हुआ था। तब भी जांच की मांग हुई थी, सरकार ने जांच क्यों नहीं करवाई ? उप मुख्यमंत्री बस्तर में शांति के लिए जितने चिंतित आप हैं उतनी ही चिंतित कांग्रेस पार्टी भी है। कांग्रेस पार्टी बस्तर में शांति बहाली के सरकार के हर कदम के साथ खड़ी है लेकिन यह प्रयास बस्तर के मासूम आदिवासियों की जिंदगी की शर्त पर होंगे तो यह हमें मंजूर नहीं। बस्तर में कांग्रेस की सरकार ने विश्वास, विकास, सुरक्षा के मूल मंत्र को लेकर शांति बहाली के जो प्रयास शुरू किए थे उसके फलस्वरूप बस्तर में शांति की स्थापना भी हुई। नक्सली गतिविधियां 80 प्रतिशत तक कम हुई। वर्तमान सरकार ने उस पर अविश्वास क्यों जताया? वर्तमान में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिल रही है तो उसका बड़ा कारण है पूर्ववर्ती सरकार ने दूरस्थ रिमोट क्षेत्रों जो कैंप बनाए और इन कैम्पो के माध्यम से सुरक्षा बलो ने स्थानीय ग्रामीणों का भरोसा जीता है। कांग्रेस सरकार के पहले सुरक्षा बलो के कैम्पो में रसद सामग्री तक सरकार नहीं पहुंचा पाती थी। विश्वास, विकास, सुरक्षा का परिणाम था कि दूरस्थ क्षेत्रों में कैम्प के साथ अंदरूनी इलाकों में सड़कें, पुल-पुलिया बनाये गए, बंद पड़े 350 से अधिक स्कूलों को खोला गया, स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाई गयी, मुख्यमंत्री हाट बजार क्लिनिक के माध्यम से लोगों का इलाज किया गया। जल, जंगल, जमीन पर आदिवासियों के अधिकारों को और मजबूत बनाने का प्रयास हुआ। वन अधिकार पट्टे सामुदायिक वन अधिकार पट्टे बांट कर उनमें एक नया भरोसा पैदा किया गया। 67 से अधिक वनोपजों की खरीदी कर आदिवासियों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया गया। बस्तर का हर आदिवासी नक्सली नहीं है। इस भावना के साथ कांग्रेस की सरकार ने काम किया था। सुरक्षाबलों और सरकार ने बस्तर के लोगों का भरोसा जीता जिसका परिणाम हुआ वहां नक्सली गतिविधियों में 80 प्रतिशत की कमी आई।15 सालों तक भाजपा के रमन राज में हुये फर्जी एनकाउंटर से आदिवासियों का भरोसा डिगा था। हिडमा मड़कम, मीना खल्को की हत्याओं से पूरे छत्तीसगढ़ का आदिवासी आहत हुआ था। जंगल में रहने वाला हर आदिवासी नक्सली है, यह सोच घातक है। इसी सोच का परिणाम था कि हजारों निर्दोष आदिवासी जेल में वर्षों तक बंद रहे। कांग्रेस सरकार ने उनको रिहा करने हेतु जस्टिस पटनायक कमेटी बनाकर रिहाई का मार्ग प्रशस्त किया। दुर्भाग्यजनक है कि आपकी सरकार फिर उसी सोच पर आगे बढ़ रही निर्दोष आदिवासी जेलों में बंद किये जा रहे। पीडिया बीजापुर में दो दर्जन से अधिक लोगों को जेलों में बंद किया गया है। किसी मुठभेड़ के बाद यदि एक भी निर्दोष आदिवासी की हत्या की खबर सामने आती है तो भरोसा टूटता है आपके लिए यह एक संख्या हो सकती है लेकिन वह किसी का बेटा, पिता, पति, भाई भी होता है हमारे आदिवासी समाज का अभिन्न अंग होता है। ज़ब एक भी निर्दोष की हत्या की खबर सामने आती है तो समूचा बस्तर कराह उठता है। पंद्रह सालो तक सुरक्षा बलो और नक्सलियों के दो पाटो के बीच बस्तर का आदिवासी पिस रहा था, पांच सालो में उसमें कमी आयी थी, दुर्भाग्य है आपकी सरकार की अनिर्णय वाली नीति के कारण फिर से एक बार वही हालात बन गए है। आदिवासी झूठ नहीं बोलता यदि गांव के लोग सवाल खड़ा कर रहे तो उससे भागिए मत उसकी जाँच करवाइये। पीडिया में मारे गये 6 लोगों का आपराधिक रिकार्ड गृहमंत्री जारी कर रहे, शेष लोग क्यों मारे गए यह सरकार बताए?
आदिवासियों का भरोसा न टूटे
बैज ने कहा है कि आप बस्तर में शांति बहाली के लिए मुझसे सलाह मांग रहे तो मैं आपको बता दूं बस्तर को शासक बनकर नहीं अपना समझ कर देखिए। जो विश्वास पिछली सरकार ने आदिवासियों का अर्जित किया था उसको मत तोड़िये, ज़ब तक बस्तर के लोगों का भरोसा अर्जित नहीं कर पाएंगे इस लड़ाई को नहीं जीत पाएंगे। पूर्ववर्ती सरकार के विश्वास, विकास, सुरक्षा के मूलमंत्र को जारी रखा जाए। सुरक्षा बलों को निर्देश दिया जाए कि किसी भी एनकाउंटर में निर्दोष आदिवासी की हत्या न हो, किसी भी निर्दोष आदिवासी को जेल में न डाला जाए। सरकार का आचरण लोगों का भरोसा जीतने वाला हो। इसी मूलमंत्र के रास्ते चल कर पूर्ववर्ती सरकार ने बस्तर में शांति की स्थापना में बड़ी सफलता हासिल की थी, यही मार्ग श्रेयष्कर होगा।
आपकी बेचारगी ठीक नहीं
दीपक बैज ने कहा है -विजय शर्मा जी आप प्रदेश के गृहमंत्री हैं।आपकी अनिर्णय वाली स्थिति, अकुलाहट वाली स्थिति और बेचारगी ठीक नहीं है।कभी आप नक्सलियों से सुझाव मांगते हैं, कभी नक्सलियों के घर लाल भाजी खाने का प्रस्ताव रखते हैं, कभी हाथ जोड़कर विपक्ष से सुझाव मांगते हैं। आप इतने बेबस क्यों हैं।गृह विभाग सम्हल नहीं रहा है तो छोड़ क्यों नहीं देते?
अल्पसंख्यक मोर्चा के नेता स्वाधीन जैन ने मुख्यमंत्री का माना आभार दल्लीराजहरा छत्तीसगढ़ की सड़कों पर खुलेआम घूम रही गायों की सुरक्षा और दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए विष्णुदेव सरकार राज्य में गौ अभ्यारण्य योजना ला रही है। सीएम विष्णु देव साय ने इस संबंध में कार्ययोजना तैयार करने के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा गौ अभ्यारण्य बनाने की घोषणा पर अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश मीडिया प्रभारी स्वाधीन जैन ने मुख्यमंत्री को बधाई और धन्यवाद दिया है तथा उनका आभार माना है। प्रदेश मीडिया प्रभारी स्वाधीन जैन ने कहा कि मुझे इस बात की अत्यंत खुशी है कि विष्णुदेव साय की सरकार सड़कों पर घूम रही गायों की सुरक्षा, देखभाल और संरक्षण के लिए गौ अभ्यारण्य बनाएगी। इससे निश्चित रूप से सड़कों पर भूखी- प्यासी घूम रही गायों को नियमित भोजन, देखभाल और चिकित्सा सुविधा मिलेगी और सड़क दुर्घटनाओं पर भी रोक लगेगी।
हेमचंद मांझी को बताया कॉर्पोरेट घरानों का दलाल -अर्जुन झा- जगदलपुर बस्तर संभाग के नारायणपुर जिले के प्रसिद्ध आदिवासी वैद्य हेमचंद मांझी को पद्मश्री सम्मान सम्मान मिलना नक्सलियों को शायद चुभने लगा है। यही वजह है कि मांझी को नक्सली संगठन ने कॉर्पोरेट घरानों का दलाल बताते हुए खुली धमकी दे डाली है। हेमचंद मांझी के खिलाफ गांवों में बैनर टांगे गए और पर्चे चस्पा किए गए हैं।
नक्सली संगठन भाकपा माओवादी की पूर्व बस्तर डिवीज़न कमेटी ने पर्चे में आरोप लगाया है कि कॉर्पोरेट घरानों के लिए काम करने वाला हेमचंद मांझी निको जायसवाल कंपनी का सेवक है। आमदई पहाड़ को बेचने वाले हेमचंद मांझी को देश की राष्ट्रपति द्वारा पद्मश्री पुरस्कार दिए जाने का हम विरोध करते हैं। आगे लिखा है कि जल- जंगल-जमीन को बचाने के लिए संघर्ष करें।नारायणपुर जिले के छोटे बोंगर मुंडाटीका निवासी हेमचंद मांझी प्रसिद्ध वैद्यराज और जनता के सेवक हैं। वे जड़ी बूटियों से जटिलतम रोगों का भी सफल ईलाज करते आ रहे हैं। उनकी जनसेवा को देखते हुए देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों उन्हें पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया है।
उसके बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी हेमचंद मांझी को बधाई देते हुए कहा कि 5 दशकों से ज्यादा समय से बस्तर सहित पूरे छत्तीसगढ़ के ग्रामीणों को प्राकृतिक और किफायती स्वास्थ्य सेवा प्रदान कर रहे अबूझमाड़ के प्रख्यात वैद्यराज हेमचंद माझी जड़ी बूटी की दवाइयों से अपने ज्ञान और सेवाभव की बदौलत मरीजों का उपचार कर रहे हैं। नक्सली संगठन ने इस पर भी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए पर्चे में लिखा है कि अगर हेमचंद मांझी पूरे बस्तर और छत्तीसगढ़ के लोगों की जान की परवाह है तो देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों पद्मश्री पुरस्कार से क्यों नवाजे गए? हेमचद मांझी अपने वर्ग का आदमी नहीं है। यह तो कॉर्पोरेट घरानों के हाथों बिक चुका है। अपना बस्तर आदिवासी समुदाय के लोगों की भूमि है और छत्तीसगढ़ धान का कटोरा के नाम से प्रसिद्ध है। बस्तर में जंगल पर निर्भर लोग रहते हैं। धान के कटोरा छत्तीसगढ़ के किसान आत्महत्या करने क्यों मजबूर हैं? आगे लिखा है कि बस्तर और छत्तीसगढ़ की धरती खनिज संपदा से भरी हुई है और यहां के लोग कठोर मेहनती हैं। बस्तर की जनता का जीवन सीधा और सरल है। यहां के लोग अपनी पुस्तैनी जमीन का महत्व को समझ नहीं पाते हैं। जिससे कॉपोरेट घरानों के हाथों आसानी से बिक जाते हैं। इस वजह से लूटेरे वर्गों की गिद्ध दृष्टि बस्तर की संपदा पर पड़ी हुई है। अगर हेमचंद मांझी निस्वार्थ भाव से जनता की सेवा कर रहा है तो स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई सुविधा और अस्तित्व की जो लड़ाई जनता लड़ रही है, उसके पक्ष में आकर क्यों खड़ा नहीं होता?2020 से पूरे बस्तर संभाग में जन आंदोलन चल रहा है। हेमचंद मांझी जिस जिले में पैदा हुआ है, वहां पर भी छोटे डोंगर थाना अंतर्गत मढ़ोनार पंचायत में ही मढोनार जन आंदोलन 1साल 5 महिने से चल रहा है, लेकिन एक दिन भी धरना स्थल पर जाकर हेमचंद मांझी ने आंदोलन का समर्थन नहीं किया। फिर वह कैसे प्रसिद्ध वैद्यराज और जन सेवक हो सकता है?मढोनार स्थल पर धरना बैठे लोग अपने घर-द्वार छोड़ पेड़ों की छांव तले गर्मी, बारिश ठंड से जूझते हुए जल, जंगल, जमीन को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। फिर हेमचंद मांझी जनता के पक्ष में क्यों खड़ा नहीं हो रहा है। हेमचंद मांझी गरीब, आदिवासी जनता का सेवक नहीं है। छत्तीसगढ़ के मरीजों का इलाज करके उनकी जान बचाने वाले डॉक्टरों, नर्सो को पुरस्कार देना बहुत दूर की बात है, उनकी पहचान तक नहीं होती है। लेकिन न चल पाने वाला हेमचंद मांझी बुजुर्ग अधभक्त सोच रखने वाले ने जड़ी बूटी दवाई देकर पुजारी के नाम से इतना बड़ा
कौन सा काम किया है, जो इसको पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
हिंदू राष्ट्र के लिए इस्तेमाल
नक्सली संगठन ने आगे लिखा है कि इंदिरा गांधी के जमाने से 20 साल की उम्र से लेकर अभी 80- 90 साल का बुजुर्ग को पद्मश्री पुरस्कार देकर उसका इस्तेमाल मोहन भागवत, विजय शर्मा, विष्णुदेव साय का पर्दा न खुले इसके लिए और हिंदू राष्ट्र निर्माण करने लिए किया जा रहा है। आमदई पहाड़ में सर्वे करने से लेकर फर्जी जनसुवाई तक हेमचंद गांझी का ही हाथ है। आमदई पहाड़ पर निको कंपनी के लिए रास्ता बनाना, पुलिस जवानों का मनोबल को बढ़ाया और नया पुलिस कैम्प खोलने के लिए उद्द्घाटन करने वाला मुखिया हेमचंद मांझी ही है। सागर साहू, कोमल मांझी, हरी मांझी, गिरी जैसे लोगों को निको जायासवाल कंपनी का दलाल ग्रुप बनाकर आमदई पहाड़ को खदान खोलने का काम शुरू किया गया। हेमचंद मांझी को निको कंपनी कि ओर से 11 करोड़ भी दिया गया है। हेमचंद मांझी को कॉरिटीकरण, सैनिकीकरण, ब्राम्हणीय हिन्दुत्व फासीवादी नीति को अमल करने वाला बताया गया है।
शहर जिला कांग्रेस ने दी पं. नेहरू को श्रद्धांजलि जगदलपुर आज बस्तर जिला कांग्रेस कमेटी शहर द्वारा संभाग मुख्यालय राजीव भवन में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू की पुण्यतिथि मनाई गई। इस दौरान पं. नेहरू की प्रतिमा पर माल्यार्पण व पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शहर कांग्रेस जिला अध्यक्ष सुशील मौर्य ने कहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू दूरदर्शी नेता थे। जब उन्होंने देश की बागडोर संभाली थी, उस समय देश के सामने कई तरह की चुनौतियां थीं। उन चुनौतियों का सामना करते हुए उन्होंने देश को प्रगति के पथ पर अग्रसर किया। पंडित नेहरू एक युग थे, जिन्होंने नए भारत की आधारशिला रखी। छत्तीसगढ़ के भिलाई इस्पात संयंत्र की स्थापना पं नेहरू ने सोवियत रूस के सहयोग से कराई थी। देशहित में उनके योगदान को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता। इस दौरान पूर्व विधायक रेखचंद जैन, वरिष्ठ कांग्रेस नेता सतपाल शर्मा, अंगद प्रसाद त्रिपाठी, नरेंद्र तिवारी, पम्मी जसवाल, रविशंकर तिवारी, लक्ष्मण दादा, घनश्याम तिवारी, संजय पाणिग्रही, रिका कर्मा एवं अन्य उपस्थित थे।