- शहर के किसी भी दुकान में गुड़ाखू का स्टॉक नही पांच रुपए का गुड़ाखू बीस रुपए में बिक रहा
- कोरोना को लेकर प्रशासन की गाईडलाइन अब तक नही हुई जारी लोगो मे लॉकडाउन को लेकर संशय
कांकेर – महिलाओं में बचत योजनाओं को प्रोत्साहन देने के लिए साख सहकारी समिति आवश्यक है। इससे न केवल महिलाओं में बचत के प्रति जागरूकता आयेगी वरन् सहकारी संस्था से जुड़ने से नेतृत्व विकास भी होगा और सहकारिता की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में महिलायें भाग ले सकेंगी। उक्त उद्गार जिला सहकारी संघ कांकेर के अध्यक्ष सियो पोटाई के है। वे साख सहकारी समिति के गठन पर महिलाओं को संबोधित कर रही थी। उन्होने कहा कि महिलाओं में बचत करने की प्रवृति होती है। छोटी-छोटी बचत करके एक बहुत बड़ी पूंजी का निर्माण किया जा सकता हैं जो आडे वक्त पर काम आती है। जिला सहकारी संघ ऐसे संस्थाओं को बनाने में मदद करता है। ज्ञातब्य हो कि कुछ दिन पूर्व ही सियो पोटाई देश के 18 राज्यों के महिला सहकारिता समितियों के चुने हुए प्रतिनिधियों के साथ राष्ट्रीय सम्मेलन में सम्मिलित हुई थी। जहां महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की बात कहते हुए देश भर के महिला प्रतिनिधियों की ओर से महिला सहकारी समितियों द्वारा घोषण पत्र जारी किया गया था।
उन्होने कहा कि छत्तीसगढ़ सोसायटी अधिनियम 1960 एवं नियम 1962 के द्वारा ऐसे संस्थाओं को विभिन्न प्रकार के संरक्षण प्रदान किये गये है। भारत के आयकर अधिनियम 1961 की धारा 80 पी के अनुसार साख सहकारी संस्था के सदस्यों को लाभांश से प्राप्त आय टैक्स फ्री है। ऐसे संस्थाओं के सदस्यों को समिति में ऋण सुविधा तो मिलती है इसके साथ ही लोकतांत्रिक व्यवस्था होने के कारण संचालक मंडल में प्रतिनिधित्व करने का अवसर भी मिलता है। जिला सहकारी संघ के अध्यक्ष सियो पोटाई जिले में साख सहकारी समिति के गठन को लेकर निरंतर प्रयत्नशील है इसके लिए उनके द्वारा प्रचार-प्रसार औंर आन्दोलन भी चलाया जा रहा है।
प्रस्तावित साख सहकारी समिति के विषय में जिला उपभोक्ता भण्डार के पूर्व अध्यक्ष कमला गुप्ता ने कहा कि वे हाल ही में आईसीए-एपी ( एशिया-प्रशांत ), एनसीयूआई और सेवा भारत के संयुक्त तत्वाधान में महिला पदाधिकारी हेतु राष्ट्रीय कार्यशाला नई दिल्ली में शामिल हुई थी। जिसमें देश भर से प्रतिभागियों के रूप में लगभग 100 महिला सहकारिताएं अपने अनुभव साझा किये एवं भविष्य में आने वाली चुनौतियों पर विचार किये। इस कार्यशाला से प्रेरित होकर कांकेर जिले के महिलाओं द्वारा एक शाख सहकारी समिति बनाने पर विचार किया जा रहा है। जिसमें कांकेर जिले के ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इस महिला सहकारिता से न केवल महिलाएं संगठित होंगी वरन् बचत योजनाओं को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही साथ बहुत कम ब्याज दर पर सदस्य महिलाओं को ऋण मिलेगा। साख सहकारी समिति के क्षेत्र में जिले के लिए यह क्रांतिकारी कदम होगा। श्रीमती कमला गुप्ता ने कहा कि कांकेर जिले के जो महिलाएं साख सहकारी समिति के सदस्य बनना चाहतें है वे साधारण आवेदन पत्र देकर, आधार कार्ड, परिचय प्रमाण पत्र, पते का प्रमाण पत्र एवं पासपोर्ट साईज के फोटो के साथ जिला सहकारी संघ कांकेर में संपर्क कर सकते है।
इस अवसर पर जिला सहकारी संघ मर्यादित कांकेर के अध्यक्ष सियो पोटाई, जिला उपभोक्ता सहकारी संघ के पूर्व अध्यक्ष कमला गुप्ता, मोना साहू, नीरा साहू, सुनीता सलाम, राजीम तेता, सहित अन्य महिलाएं उपस्थित थे।
नारायणपुर के ग्राम गुर्रा में कल दो समुदाय के बीच मरांतरण को लेकर बलवा होने के पश्चात सर्व आदिवासी समाज द्वारा आज नारायणपुर बंद का आह्वान किया गया था बंद के दौरान बेकाबू भीड़ द्वारा विश्वदिपति स्कूल परिसर पर स्थित चर्च पर हमला कर दिया जिसके रोकने के प्रयास में लगे पुलिस कप्तान पर भी पथराव कर दिया गया जिससे उन्हें चोट आई।

घटना की मुख्य वजह
नारायणपुर जिले के एड़का परगना के जनजाति समाज द्वारा धर्मान्तरित लोगों को घर वापसी के लिए ग्राम गुर्रा में बैठक रखी गई थी उक्त बैठक में मसीही समाज के सैकड़ों लोगों ने पहुंचकर अनुसूचित जनजाति समाज के लोगों पर हिंसक हमला कर दिया मुक्त हिंसक झड़प में 5 ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हुए थे इसी घटना को लेकर सर्व आदिवासी समाज द्वारा नारायणपुर बंद का आह्वान किया गया था आज सुबह से ही बखारूपारा स्थित गोंडवाना समाज में हजारों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग एकत्रित हुए थे।

बंद के द्वारा अनियंत्रित हुई भीड़
बंद के दौरान कुछ उपद्रवी बेकाबू लोगों द्वारा बंगला पारा क्षेत्र में स्थित विश्व दीप्ति कॉन्वेंट स्कूल परिसर में स्थित चर्च पर हमला कर तोड़फोड़ करने लगे जिसे रोकने के प्रयास में पुलिस बल के साथ जिला कप्तान सदानंद कुमार मौके पर पहुंचे थे इसी दौरान पुलिस को देख कुछ अज्ञात लोगों द्वारा पथराव किया गया उक्त पथराव में जिले के कप्तान सदानंद कुमार को सिर पर चोट लगी प्रशासन ने शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है । समाचार लिखे जाने तक नारायणपुर का वातावरण शांतिपूर्ण था।

घरबैठे Amazon के साथ ऑनलाइन शॉपिंग करें, स्पेशल ऑफर के साथ लिंक क्लिक करें
https://36bestonlinesale.com/home

रायपुर धर्मांतरण से नाराज ग्रामीणों द्वारा नारायणपुर एसपी सदानंद कुमार पर पथराव के बाद भाजपा जिलाध्यक्ष रुपसाय सलाम पर लाठीचार्ज की खबर आ रही है। सलाम पर ही लोगों की भीड़ लाने और चर्च पर पथराव करने का आरोप है। इस घटना के बाद माहौल और गरमा गया है। बड़ी संख्या में लोग अभी भी घटनास्थल पर जमा हैं, वहीं कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल भी मौजूद है।
छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल और नक्सल प्रभावित नारायणपुर जिले से बड़ी खबर सामने आ रही है। धर्मांतरण का विरोध कर रहे ग्रामीणों के पथराव में एसपी सदानंद के सिर पर पत्थर लगा है और वे घायल हो गए हैं। उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल मौजूद है।जानकारी के मुताबिक हफ्तेभर पहले नारायणपुर के एरका गांव में ईसाई समुदाय के लोग आए थे। उन्हें गांववालों ने मार कर भगा दिया था। इसके दूसरे दिन गांव में बड़ी संख्या में समाज के लोग आए। उन्होंने गांववालों से मारपीट की। यह मामला कुछ दिन शांत रहा, फिर रविवार को ईसाई समाज के कुछ लोग फिर गांव पहुंचे और धर्मांतरण के लिए दबाव बनाया। जब गांव वालों ने विरोध किया तो उनसे मारपीट की। इसी के विरोध में मंगलवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण जुटे थे और चर्च में पथराव कर रहे थे। इस दौरान उन्हें रोकने पहुंचे एसपी पर भी पत्थर लगा और वे घायल हो गए।
बस्तर जिले के अनेक गांव प्राकृतिक सौंदर्य और मनोहारी जलप्रपातों के लिए प्रख्यात तो हैं, मगर बुनियादी सुविधाओं के लिए मोहताज भी हैं। शुद्ध पेयजल और अच्छी सड़कों का अभाव इन गांवों में आजादी के 75 वर्ष बाद भी बना हुआ है। इन्हीं में से एक गांव है बीजाकसा रतेगा, जो खूबसूरत वाटरफाल के लिए माशहूर है। एक बड़े जल प्रपात को अपने दामन में समेटे इस गांव के लोगों को पीने के लिए शुद्ध पानी नसीब नहीं हो पा रहा है। यहां के ग्रामीण आज भी झिरिया का पानी पीने मजबूर हैं। जलप्रपात का नजारा देखने आने वाले पर्यटकों को भी पानी के लिए तरसना पड़ता है।
बस्तर की वादियों को कुदरत ने बेइंतहा खूबसूरती से नवाजा है। जैव विविधता वाले हरे भरे जंगल, कलकल बहती नदियां, झरझर झरते झरने बस्तर की वादियों की खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं, मगर जब चांद खुद दागदार है, तब भला बस्तर की हसीन वादियां बेदाग कैसे रह सकती हैं? बस्तर को यह दाग कुदरती तौर पर नहीं लगा है, बल्कि हमारे रहनुमाओं की बेदर्दी के चलते लगा है। रहनुमा अगर जिम्मेदारी से काम करते, तो गांवों को आजादी के सात दशक बाद भी समस्याओं से जूझना नहीं पड़ रहा होता। कुछ ऐसी ही अनदेखी का शिकार बस्तर विकासखंड की ग्राम पंचायत रतेगा बीजाकसा हुई है। खूबसूरत नजारे समेटे हुए इस गांव में कलकल झरते जलप्रपात की अनुगूंज चौबीसों घंटे सुनाई देती है। यहां की करीब 200 की आबादी जलप्रपात के करीब रहकर भी पीने के पानी के लिए मोहताज है। गांव में न तो नल जल योजना शुरू हो सकी है और न ही पेयजल उपलब्ध कराने के लिए कोई और इंतजाम किया गया है। आज भी यहां के ग्रामीण आदिम युग में जीते प्रतीत हो रहे हैं। पेयजल और अन्य जरूरतों की पूर्ति के लिए रतेगा बीजाकसा के ग्रामीणों को झिरिया के पानी पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
पर्यटक भी होते रहते हैं परेशान
इस गांव में रोजाना सैकड़ों पर्यटक आते हैं। ये पर्यटक बस्तर की अर्थव्यवस्था में योगदान देते हैं, लेकिन न तो गांव वालों को पानी की समस्या से छुटकारा मिल पाया है और न ही पर्यटकों को साहूलियतें मिल पा रही हैं। मूलभूत सुविधाओ से वंचित इस गांव के लोग पीने के पानी की व्यवस्था करते अपनी सारी ऊर्जा खपा डालते हैं। ग्राम पंचायत रतेगा को वाटरफॉल पर्यटन क्षेत्र घोषित किया गया है। जो पर्यटक जानते हैं कि रतेगा बीजाकसा में पेयजल की व्यवस्था नहीं है, वे अपने साथ पानी की बोतलें लेकर आते हैं। वहीं जो इस तथ्य से अनजान रहते हैं, उन्हें पीने के पानी के लिए तरसना पड़ता है।
दिनांक 02.01.2023 पुुलिस महानिरीक्षक दुर्ग रेंज दुर्ग डॉ आनंद छाबड़ा के पर पुलिस अधीक्षक बालोद डॉ जितेन्द्र कुमार यादव के मार्गदर्षन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हरिश राठौर के निर्देषन एवं उप पुलिस अधीक्षक सुश्री नवनीत कौर , उप पुलिस अधीक्षक वीना वाधवानी, एसडीओपी बालोद प्रतीक चर्तुवेदी ,उप पुलिस अधीक्षक सायबर सेल राजेश बागडे , नगर पुलिस अधीक्षक कर्ण कुमार उके, उप पुलिस अधीक्षक बोनिफास एक्का, उप पुलिस अधीक्षक एस एस मौर्य के पर्यवेक्षण व सायबर सेल प्रभारी दिलेश्वर चंद्रवंशी के नेतृत्व में साइबर जागरूकता अभियान में सामुदायिक पुलिसिंग के तहत 105 नग गुम मोबाईल हैण्डसेट सायबर सेल टीम द्वारा दीगर राज्य एवं दिगर जिलों से रिकवर किया गया। पुलिस अधीक्षक बालोद डॉ जितेन्द्र कुमार यादव के द्वारा पुलिस कार्यालय बालोद में 105 नग गुम मोबाईल हैण्डसेट उनके वास्तविक मालिक को सुपुर्द किया गया।कुल 105 नग मोबाईल किमती 15,75,000 रूपये(पन्द्रह लाख पछत्तर हजार) लगभग।पूर्व मे भी बालोद पुलिस द्वारा गुम मोबाईल वितरण कार्यक्रम के माध्यम से आज दिनांक तक कुल 614 नग गुम मोबाईल बरामद कर उसके वास्तविक स्वामी को किया गया है सुपु़र्द बालोद पुलिस द्वारा गुम मोबाईल के आवेदनो में कार्य किया जा रहा हैं।

बालोद पुलिस के हाथो खोये मोबाईल पाकर प्रसन्न हुए लोग पुलिस विभाग का किया धन्यवाद ज्ञापित। नये वर्ष पर पुलिस अधीक्षक बालोद डॉ जितेन्द्र कुमार यादव के द्वारा गुम मोबाईल धारको को उसके गुम मोबाइ्रल लौटाकर दिया नये वर्ष का तोफह।
सामुदायिक पुलिसिंग के तहत जिला बालोद में गुम मोबाईल के संबध में पुलिस कार्यालय सायबर सेल ,थाना/चौकी से आवेदन प्राप्त हुआ था। जिसमें कार्यवाही करते हुए सायबर सेल टीम बालोद द्वारा गुम मोबाईल हैण्डसेट कम्पनी मोटो, सैमसंग, विवो, ओप्पो, रियलमी, इनफिनिक्स एन्ड्रायड मोबाईल फोन को टेªस कर दीगर राज्य झारखण्ड, बिहार एवं अन्य जिलों रायपुर ,कांकेर , दुर्ग ,राजनांदगांव, कबीरधाम ,धमतरी ,खैरागढ़ छुईखदान गड़ई से उसे रिकवर किया गया। जिसमंे 105 नग मोबाईल हैण्डसेट को आज दिनांक 02.02.2023 को पुलिस कार्यालय सिवनी बालोद में सभी 105 आवेदकों को उनका गुम मोबाईल सेट प्रदाय किया गया। पूर्व मे भी पुलिस अधीक्षक बालोद के द्वारा 509 नग गुम मोबाईल फोन बरामद कर उनके वास्तविक मालिक को सुपुर्द किया जा चुका है।

गुम मोबाईल कार्यक्रम के माध्यम से पुलिस अधीक्षक बालोद डॉ जितेन्द्र कुमार यादव के द्वारा सभी मोबाईल प्राप्तकर्ताओं को बधाई के साथ ही साइबर ठगी के विभिन्न तरीकों को विस्तार पूर्वक बताते हुए । ठगी से बचने के गुर सुझायें। ठगी के बाद रिपोर्ट का समय अहम होता है आर्थिक ठगी के नुकसान से बचने के लिए पुलिस द्वारा सोषल मिडिया के माध्यम से चलाये जा रहे साइबर कवच अभियान से जुड़कर सतर्क रहने का सुझाव दिया गया। और बालोद पुलिस के Facebook Page- Balod Police CG (https://www.facebook.com/profile.php?id=100084291996671) से जुड़ कर साइबर क्राईम जागरूकता अभियान में शामिल होकर स्वयं एंव दूसरो को भी साइबर ठगी व अपराध से बचने जागरूक करने अपील किया गया।
गुम मोबाईलों को रिकवर करनें में सायबर सेल प्रभारी निरीक्षक दिलेश्वर चंद्रवंशी , निरीक्षक अमित तिवारी ,प्रधान आरक्षक भुनेष्वर मरकाम, प्रधान आरक्षक रूमलाल चुरेन्द्र, आरक्षक विवेक शाही ,आरक्षक पूरन प्रसाद देंवागन, आरक्षक विपिन गुप्ता, आरक्षक राहुल मनहरे , आरक्षक संदीप यादव, आरक्षक आकाष दुबे , आरक्षक मिथले यादव ,आरक्षक योगेष पटेल , आरक्षक गुलजारी साहू , आरक्षक योगेष गेडाम ,आरक्षक राहुल गजपाल ,आरक्षक चद्रषेखर यादव , आरक्षक पिपेष्वर बंजारे, योगेश सिन्हा एवं सभी थाना/चौकी का सराहनीय भूमिका रहा।

घरबैठे Amazon के साथ ऑनलाइन शॉपिंग करें, स्पेशल ऑफर के साथ लिंक क्लिक करें
https://36bestonlinesale.com/home

तहसील साहू संघ दल्ली राजहरा का त्रिवाषिक आम चुनाव सम्पन्न हुआ.जिसमे तीन प्रत्याशी अध्यक्ष पद के लिए थे.युवराज साहू, गोविन्द साहू, राधेश्याम साहू थे.जिसमे युवराज साहू को 18, गोविन्द साहू को 14 , राधे श्याम को 13 मत प्राप्त हुआ.जिसमे युवराज साहू अध्यक्ष निर्वाचित हुआ है.उपाध्यक्ष पद (पुरुष) के लिए दो प्रत्याशी रेखू राम साहू एवं रामेश्वर साहू थे.जिसमे रेखू राम साहू को 29 मत एवं रामेश्वर साहू को16 मत मिला.रेखू राम साहू उपाध्यक्ष निर्वाचित हुआ.उपाध्यक्ष(महिला) के तीन प्रत्याशी थे.संगीता साहू को 18 मत, अंजू साहू को 14 मत, वीणा साहू को 13 मत मिला.संगीता साहू विजयी हुई.



घरबैठे Amazon के साथ ऑनलाइन शॉपिंग करें, स्पेशल ऑफर के साथ लिंक क्लिक करें
https://36bestonlinesale.com/home

दंतेवाडा/छत्तीसगढ़ भाजपा प्रदेश मंत्री व महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष ओजस्वी भीमा मंडावी ने कहा है कि पिछले साल केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ शासन द्वारा उपार्जित पूरा धान खरीदा था। इस वर्ष प्रदेश भाजपा ने एक नवंबर से धान खरीदी के लिए दबाव बनाया। हमारे लगातार जोर देने पर कांग्रेस सरकार पहली नवंबर से धान खरीदना प्रारंभ कर रही है। केंद्र की मोदी सरकार ने इस वर्ष भी छत्तीसगढ़ के किसानों को लगभग •21000 करोड़ रुपये का भुगतान करके 61 लाख मीट्रिक टन चावल मतलब 91 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का निर्णय किया है। केंद्र सरकार धान खरीदी के लिए 18655 करोड़, साथ ही धान का परिवहन हेतु 300 करोड़, चावल परिवहन के लिए 136 करोड़, बारदाना के लिए 1000 करोड़, सिलाई आदि के लिए 136 करोड़, और लगभग 1000 करोड़ मंडी टैक्स भी देती है। उसपर भी राज्य सरकार किसानों को सच्चाई से दूर रख कर मात्र कुछ पैसे देकर झूठा श्रेय लेती है। केंद्र द्वारा इतने पैसे देने के बावजूद राज्य सरकार हजारों करोड़ रुपए उधार लेती है। उधार का वह पैसा कहां जाता है, किसी को पता नहीं।
बकावंड इस विकास खंड के ग्राम मोंगरापाल में जिला स्तरीय टी 20 व्हाइट लेदर बॉल क्रिकेट प्रतियोगिता संपन्न हुई।का आयोजन किया गया था। फाइनल में लालबाग ने मोंगरापाल ए टीम को करारी शिकस्त दी।
मोंगरापाल में लगातार 20 वर्षों से क्रिकेट प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। इस वर्ष स्व. घनश्याम सिंह ठाकुर की स्मृति में यश क्रिकेट क्लब मोंगरापाल द्वारा यह प्रतियोगिता आयोजित की गई थी। प्रतियोगिता में 20 टीमों ने भाग लिया था। विजेता टीम को 33,333 रुपए नगद व ट्राफी तथा उप विजेता टीम को 22,222 रुपए नगद व ट्राफी दी गई। साथ ही व्यक्तिगत पुरस्कारों में बेस्ट बैट्समैन, बेस्ट बॉलर, बेस्ट विकेट कीपर, मैन ऑफ द सीरीज आयोजन समिति द्वारा दिया गया।

क्रिकेट प्रतियोगिता का फाइनल मैच शनिवार को लालबाग एवं मोगरापाल (ए) के मध्य खेला गया। टॉस जीतकर लालबाग की टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 171 रन बनाए। लालबाग की ओर से अनस ने सर्वाधिक 71 रन बनाए, जिसमें 11 चौके व 1 छक्का शामिल हैं। सागर शर्मा ने 35 रनों का योगदान दिया। मोंगरापाल की शुरुआत ही निराशाजनक रही। पूरी टीम 46 रनों पर धराशायी हो गई और लालबाग की टीम ने ट्रॉफी पर कब्जा जमा लिया। उसे प्रथम इनाम 33, 333 रुपए का इनाम प्रकाश ठाकुर द्वारा प्रदान किया गया। द्वितीय इनाम मोंगरापाल (ए) को ट्राफी व नगद 22, 222 रुपए जिला पंचायत उपाध्यक्ष मनीराम कश्यप ने प्रदान किया। बेस्ट डेब्यू राधिका फाईटर क्लब, बेस्ट फील्डर कैलाश मोंगरापाल बेस्ट कैचर गोविंद सेमरा, बेस्ट विकेट कीपर खुशहाल मोंगरापाल, बेस्ट बैट्समैन अक्की लालबाग, बेस्ट बॉलर हिमांशु सेठिया मोंगरापाल, मैन ऑफ द मैच फाइनल अनस लालबाग एवं मैन ऑफ द सीरीज सागर शर्मा लालबाग को प्रदान किया गया। मंगल सिंह ठाकुर की स्मृति में केदार ठाकुर द्वारा ट्रॉफी प्रथम एवं लिमेश ठाकुर की स्मृति में प्रेम सिंह ठाकुर द्वारा मैन ऑफ द सीरीज प्रदाय किया गया। इस अवसर पर माध्यमिक शाला मोंगरापाल, माध्यमिक शाला बोरपदर, ग्राम बोदागुड़ा एवं मोंगरापाल के बच्चों द्वारा मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम का संचालन अमित पाल ने किया।
इस अवसर में जनपद सदस्य धनुर्जय कश्यप व प्रतियोगिता आयोजन प्रभारी सह संयोजक रघु सेठिया, संरक्षक दुलब सूर्यवंशी सरपंच मोंगरापाल, संरक्षक अमित पाल, अध्यक्ष बंशीधर कश्यप, उपाध्यक्ष नील कुमार बघेल, अनिल खंडालकर, सचिव ईश्वर बघेल, सचिव भगत कश्यप, कोषाध्यक्ष मेघनाथ सेठिया, मैदान प्रबंधक घासीराम सेठिया, कार्यकारिणी सदस्य नरहरि ठाकुर, वल्लभ, देवनाथ सेठिया, विक्रम कश्यप, वेदप्रकाश, फूलसिंह, विश्वनाथ, बबला, डमरु कश्यप, शत्रुघ्न सिंह ठाकुर, प्रेमनाथ कश्यप, प्रथम कश्यप, सरादू सेठिया, पीतम कश्यप, खुशहाल सेठिया, हिमांशु सेठिया, शंभूनाथ कश्यप, डिकेश कश्यप, अर्जुन, तुलसी सेठिया, हेमंत सेठिया, हरेश मौर्य, क्षेत्र के क्रिकेट प्रेमी व दर्शक बड़ी संख्या में मौजूद थे।
अर्जुन झा
जगदलपुर राज्य सरकार द्वारा सड़कों के निर्माण और रख रखाव के लिए जो नई व्यवस्था की गई है, वह ठेकेदारों के लिए परेशानियों का सबब बन गई है। सड़कों से संबंधित कार्यों को अंजाम देने के लिए राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ रोड इंफ्रा स्ट्रक्चर डेवलपमेंट लिमि. का गठन किया है। इस संस्था की कार्यप्रणाली में इतनी पेचीदगियां हैं कि ठेकेदारों के भुगतान का स्ट्रक्चर हिल गया है। ठेकेदारों के माध्यम से कराए गए कार्यों की विभिन्न स्तरों पर जांच पूरी कर ली जाने के बाद भी उन्हें महिनों भुगतान नहीं किया जाता।
छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में नई सड़कों के निर्माण और पुरानी सड़कों के रख रखाव के लिए छत्तीसगढ़ रोड इंफ्रा स्ट्रक्चर डेवलपमेंट लिमि. का गठन किया है। यह संस्था बैंक से ऋण लेकर सड़कों से संबंधित कार्य कराती है। संस्था के प्रबंध निदेशक आईएएस सारांश मित्तल को बनाया गया है। लोक निर्माण विभाग को इसके अधीन कर इस विभाग के जरिए कार्य ठेकेदारों से कराया जाता है। वर्तमान में इस संस्था द्वारा बैंक ऋण से राज्य के सुदूर नक्सल प्रभावित एवं संवेदनशील इलाकों में लगभग पांच हजार करोड़ की लागत से सड़कों का निर्माण और संधारण कार्य कराया जा रहा है। बस्तर संभाग में भी कई सौ करोड़ के कार्य संस्था द्वारा ठेकेदारों के माध्यम से कराए जा रहे हैं। पूरे राज्य में संस्था द्वारा कराए जा रहे कार्यों की निगरानी लोक निर्माण विभाग के मैदानी स्तर के इंजीनियर्स, एसडीओ तथा कार्यपालन अभियंता करते हैं। सड़कों के निर्माण के लिए समय सीमा तय कर संबंधित ठेकेदारों को तय समय में कार्य पूरा करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। कार्य पूरा ना होने पर ठेकेदारों पर पेनाल्टी लगाई जाती है। मगर ठेकेदारों को भुगतान समय पर नहीं किया जाता। इसलिए वे कार्य पूर्ण नहीं करा पाते। राशि न मिलने की वजह से ठेकेदार जिन संस्थानों से निर्माण सामग्री खरीदते हैं, उन्हें उनके बिलों का तथा रोड रोलर, डंपर, टिप्पर आदि का किराया और मजदूरों के पारिश्रमिक का भुगतान करने में असमर्थ हो जाते हैं। सड़कों के निर्माण में लगे प्रायः सभी ठेकेदारों के सैकड़ों करोड़ रु. का भुगतान अटका हुआ है। वे कर्ज लेकर बिलों व मशीनों के भाड़े तथा मजदूरी का भुगतान कर रहे हैं। समय पर रकम न मिलने के कारण निर्माण सामग्री आपूर्ति करने वाले प्रतिष्ठानों, मशीनरी किराए पर देने वालों तथा मजदूरों की नजरों में ठेकेदारों की विश्वनीयता घटती जा रही है। ठेकेदार परेशान हो चले हैं। उनका कहना है कि भुगतान प्रक्रिया का सरलीकरण किया जाना चाहिए। पहले लोक निर्माण विभाग के ईई द्वारा कार्य पूर्णता की ओर अग्रसर होने के आधार पर ठेकेदारों को तुरंत चेक जारी कर दिए जाते थे। तब कार्य करने में ठेकेदारों को बड़ी सहूलियत होती थी। अब भुगतान में तरह तरह की पेचीदगियां खड़ी हो गई हैं।
जांच पर जांच, फिर भी भुगतान में अड़ंगा
छत्तीसगढ़ रोड इंफ्रा स्ट्रक्चर डेवलपमेंट लिमि. के अस्तित्व में आने के बाद ठेकेदारों को किए जाने वाले भुगतान में ढेरों पेचीदगियां आ गई हैं। ठेकेदारों द्वारा कराए जाने वाले सड़क निर्माण की जांच लोक निर्माण विभाग के सब इंजीनयर व एसडीओ करते हैं। वे जांच प्रतिवेदन अपने कार्यपालन अभियंता के समक्ष प्रस्तुत करते हैं। कार्य से संतुष्ट होने पर कार्यपालन अभियंता ओके रिपोर्ट विभाग के इंजीनियर इन चीफ को प्रेषित करते हैं। इसके बाद इंजीनियर इन चीफ ठेकेदार के भुगतान की अनुशंसा के साथ प्रतिवेदन छत्तीसगढ़ रोड इंफ्रा स्ट्रक्चर लिमि. के एमडी के पास भेजते हैं। एमडी संतुष्ट होते हैं, तभी भुगतान का आदेश जारी होता है और चेक काटे जाते हैं। इस प्रक्रिया में कई माह लग जाते हैं। तब कहीं जाकर ठेकेदारों को राशि मिल पाती है। एमडी या उनके अधीन लेखपाल व बड़े बाबू छुट्टी पर हों, तो फिर भुगतान महिनों लटका रहता है। इन दिनों स्वयं एमडी लंबे अवकाश पर चल रहे हैं। उनके दफ्तर में ठेकेदारों के भुगतान से संबंधित दर्जनों प्रकरण लटके पड़े हैं।
परेशान हो रहे हैं आदिवासी मजदूर
ठेकेदारों को समय पर चेक न मिलने से वे अपने कर्मचारियों और निर्माण में लगे मजदूरों को उनका पारिश्रमिक का भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। बस्तर संभाग में छत्तीसगढ़ रोड इंफ्रा स्ट्रक्चर डेवलपमेंट लिमि. द्वारा कई सौ करोड़ की लागत से सड़कों का निर्माण कराया जा रहा है। इन निर्माण कार्यों में बस्तर के आदिवासी मजदूरों को रोजगार तो मिल रहा है, मगर उनके पसीने की कीमत उन्हें नहीं मिल पा रही है। बस्तर के आदिवासी मजदूर तथा ठेकेदारों के कर्मचारियों के समक्ष परिवार के भरण पोषण की समस्या खड़ी हो गई है। वे अपनी पगार के लिए बार बार ठेकेदारों के समक्ष मिन्नतें करते हैं, लेकिन भुगतान प्रक्रिया की जटिलता के कारण वे भी विवश हैं। ठेकेदारों का कहना है कि भुगतान की प्रक्रिया को सरल किया जाना चाहिए, तभी सबको राहत मिल सकती है।