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पंडरी तराई तालाब को मिला पुनर्जीवन, नागरिकों में छाई खुशी

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20 साल पुरानी मांग पूरी कर दी महापौर संजय पांडेय ने

तालाब के कायाकल्प, गहरीकरण व सौंदर्यीकरण का कार्य शुरू

जगदलपुर नगर निगम जगदलपुर द्वारा शहर से जुड़े ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और जल संरक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसी क्रम में वार्ड क्रमांक 35 छत्रपति शिवाजी वार्ड स्थित पंडरी तराई तालाब के जीर्णोद्धार, गहरीकरण और सौंदर्यीकरण का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। वर्षों से उपेक्षित पड़े इस तालाब के पुनर्जीवन से क्षेत्रवासियों में खुशी का माहौल है। जानकारी के अनुसार पंडरी तराई तालाब कभी क्षेत्र का प्रमुख जलस्रोत हुआ करता था, जहां वर्षा जल संग्रहित कर ग्रामीणों की आवश्यकताओं की पूर्ति की जाती थी। समय के साथ तालाब की स्थिति खराब होती गई और इसका जलभराव क्षेत्र भी लगातार कम होता गया।

स्थानीय ग्रामीणों और वार्ड पार्षद श्यामसुंदर बघेल द्वारा लंबे समय से तालाब के संरक्षण और विकास की मांग की जा रही थी। नगर निगम प्रशासन द्वारा महापौर संजय पांडे के मार्गदर्शन में तालाब का गहरीकरण, तटबंध निर्माण तथा सौंदर्यीकरण का कार्य कराया जा रहा है। वर्तमान में तालाब के मध्य भाग में लगभग आठ फीट तक गहरीकरण किया जा रहा है, जबकि चारों ओर मजबूत तटबंध बनाए जा रहे हैं, ताकि वर्षभर जल संरक्षण सुनिश्चित हो सके। बताया जाता है कि स्कूलपारा, बादलपारा और पटेलपारा सहित आसपास के क्षेत्रों के लोग पिछले लगभग 20 वर्षों से तालाब के जीर्णोद्धार की मांग कर रहे थे। निर्माण कार्य ठेकेदार अशोक पांडे द्वारा नगर निगम की निगरानी में किया जा रहा है। वार्ड पार्षद श्यामसुंदर बघेल ने बताया कि तालाब में पहले सीमित मात्रा में पानी ठहर पाता था, लेकिन गहरीकरण के बाद इसकी जल संग्रहण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि कार्य पूर्ण होने के बाद यह तालाब जल संरक्षण के साथ-साथ क्षेत्र की सुंदरता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि तालाब के पुनर्जीवन से भूजल स्तर में सुधार होगा, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा तथा क्षेत्र का समग्र विकास होगा। महापौर संजय पांडेय और नगर निगम की इस पहल को ग्रामीण और शहरी विकास की दिशा में एक सराहनीय कदम माना जा रहा है।

पलारी में कांग्रेस का परचम, अध्यक्ष पद सहित परिषद में भी बहुमतवार्ड क्रमांक 4 में टाई के बाद लॉटरी से हुआ पार्षद का फैसला

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बालोद नगर पंचायत पलारी के आम निर्वाचन में कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अध्यक्ष पद पर कब्जा जमा लिया है। कांग्रेस प्रत्याशी यानेश साहू ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 506 मतों के बड़े अंतर से पराजित कर अध्यक्ष पद अपने नाम किया। परिणाम घोषित होते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह की लहर दौड़ गई तथा जीत का जश्न मनाया गया।अध्यक्ष पद की जीत के साथ ही परिषद में भी कांग्रेस को बहुमत मिला है। 15 वार्डों वाली नगर पंचायत में कांग्रेस समर्थित 9 प्रत्याशी विजयी रहे, जबकि भाजपा को 5 सीटों पर सफलता मिली। एक वार्ड में मुकाबला बेहद रोचक रहा, जहां दोनों प्रत्याशियों को समान मत प्राप्त हुएवार्ड

क्रमांक 4 में टाई, लॉटरी से हुआ निर्णयनगर पंचायत पलारी के वार्ड क्रमांक 4 में प्रत्याशी तीरथ राम साहू एवं खिलेंद्र कुमार साहू को समान रूप से 127-127 मत प्राप्त हुए। दोनों अभ्यर्थियों के बीच बराबरी की स्थिति बनने पर निर्वाचन नियमों के तहत लॉटरी पद्धति से विजेता का चयन किया गया। लॉटरी प्रक्रिया में तीरथ राम साहू को विजयी घोषित करते हुए वार्ड क्रमांक 4 का पार्षद निर्वाचित किया गया।बम्हनीडीह में भाजपा की बड़ी जीतवहीं नगर पंचायत बम्हनीडीह में भारतीय जनता पार्टी ने अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाया। भाजपा प्रत्याशी रमेश डडसेना ने कांग्रेस उम्मीदवार रामलाल सहारे को 789 मतों के अंतर से हराकर जीत दर्ज की।सहसपुर लोहारा में भी भाजपा का कब्जानगर पंचायत सहसपुर लोहारा के अध्यक्ष पद के उपचुनाव में भाजपा की अधिकृत प्रत्याशी सरिता संतोष मिश्रा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 754 मतों के अंतर से पराजित कर अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाया।प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में संपन्न हुई मतगणनापलारी नगर पंचायत की मतगणना प्रक्रिया शांतिपूर्ण एवं पारदर्शी तरीके से संपन्न हुई। संपूर्ण गणना कार्य के दौरान सामान्य प्रेक्षक श्रीमती शलमा फारुकी (आईएफएस), अपर कलेक्टर एवं उप जिला निर्वाचन अधिकारी चंद्रकांत कौशिक, रिटर्निंग ऑफिसर एवं एसडीएम गुरूर आर.के. सोनकर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे और पूरी प्रक्रिया की निगरानी करते रहे।पलारी में कांग्रेस की जीत को स्थानीय राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जबकि बम्हनीडीह और सहसपुर लोहारा में भाजपा की सफलता ने दोनों प्रमुख दलों के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को और रोचक बना दिया है।

वन महकमे ने लकड़ी माफियाओं पर कसी नकेल

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मामला संज्ञान में आते ही रेंजर रजक ने की त्वरित कार्रवाई

पांच लोगों पर वन अधिनियम के तहत दर्ज किया गया मामला

अर्जुन झा-

बकावंड विकासखंड बकावंड की ग्राम पंचायत मैलबेड़ा के जंगल में हुई पेड़ों की अवैध कटाई के मामले में वन विभाग के क्षेत्रीय रेंजर सौरभ रजक ने शानदार एक्शन लिया है। मामले में पांच लोगों को आरोपी बनाया गया है। चार आरोपी उड़ीसा के हैं और एक मोखागांव का निवासी है। रेंजर सौरभ रजक की इस कार्रवाई की स्थानीय ग्रामीण जमकर तारीफ कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि पिछले लगभग एक महीने से उड़ीसा के चार लोग मैलबेड़ा के जंगल में लगातार पेड़ों की अवैध कटाई कर रहे थे। इस अवैध कटाई में करपावंड और सोनपुर क्षेत्र के भी कुछ लोग मदद कर रहे थे। ये लोग जंगलों से काटे गए पेड़ों की चिरान बना कर तस्करी कर रहे थे।

ग्रामीणों की शिकायत के बाद वन विभाग के एक कर्मी ने लकड़ी काटने में उपयोग किए जा रहे आरा को जप्त कर लिया था। हमारे समाचार पत्र ने इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। मामला संज्ञान में आते ही क्षेत्रीय रेंजर सौरभ रजक तुरंत एक्शन मोड में आ गए। उन्होंने अपनी टीम के साथ मौका मुआयना किया और काटे गए पेड़ों का पंचनामा बनाया। श्री रजक ने जांच पड़ताल कर जंगल माफियाओं को चिन्हित किया और उनके खिलाफ वन अधिनियम के तहत अपराध दर्ज कर लिया गया। नामजद आरोपियों में नकुल पिता महादेव भतरा, जलंधर पिता रामधर भतरा, सोनाधर पिता रामधर भतरा एवं बालचंद पिता बुधराम भतरा और अर्जुन पिता गंगाधर परजा शामिल हैं। अर्जुन परजा करपावंड थाना क्षेत्र के मोखागांव का निवासी है। बाकी चारों आरोपी उड़ीसा के सिंगसारी थाना अंतर्गत ग्राम पंचायत कनकी के निवासी हैं। पहले क्षेत्र के जो ग्रामीण इस अवैध कटाई को लेकर नाराज चल रहे थे, वे अब रेंजर सौरभ रजक द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई से बेहद खुश हैं। ग्रामीणों ने रेंजर रजग की जमकर तारीफ करते हुए उनसे इसी तरह की सजगता की अपेक्षा की है।

फिर दिखा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के युवा जोश का जलवा, जहां बैठे थे धरने पर, वहां जीते कांग्रेस के 8 पार्षद

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शिवनंदनपुर नगर पंचायत में लहराया कांग्रेस का परचम

अर्जुन झा-

जगदलपुर छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटीके युवा अध्यक्ष दीपक बैज के युवा जोश का जलवा एकबार फिर देखने को मिला है।सरगुजा में पीसीसी चीफ दीपक बैज ने बड़ा कमाल कर दिखाया है। सरगुजा की नवगठित शिवनंदनपुर नगर पंचायत में कांग्रेस के आठ उम्मीदवार पार्षद चुनकर आए हैं। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के गृहनगर जगदलपुर के इंदिरा वार्ड के उप चुनाव में भी कांग्रेस ने झंडा गाड़ दिया है।

सरगुजा जिले की नई बनी नगर पंचायत शिवनंदनपुर में ऐन चुनाव के बीच एक बड़ा राजनैतिक बखेड़ा खड़ा हो गया था। वहां कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष के खिलाफ पुलिस ने आर्म्स एक्ट समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज कर लिया था। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा के दबाव में आकर पुलिस ने कांग्रेस के जिला पदाधिकारी के खिलाफ यह कार्रवाई की है। छत्तीसगढ़ की आम जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं पर होने वाली ज़्यादती तथा जन समस्याओं को लेकर हमेशा संघर्ष करते रहे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने विश्रामपुर शिवनंदनपुर के जिला पदाधिकारी पर केस दर्ज होने के मामले में भी मोर्चा खोल दिया था। जानकारी मिलते ही दीपक बैज बिना समय जाया किए तुरंत विश्रामपुर पहुंच गए थे। पुलिस कार्रवाई के विरोध में श्री बैज कार्यकर्ताओं के साथ थाने के सामने ही धरने पर बैठ गए थे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज इस कदर आक्रोशित हो चले थे कि उन्होंने थाने से ही शिवनंदनपुर नगर पंचायत चुनाव संचालन की घोषणा कर दी थी। दीपक बैज के इस तेवर को देखते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव बाबा भी विश्रामपुर पहुंच गए थे। कांग्रेस के कड़े तेवर के आगे सरकार को झुकना पड़ा और आर्म्स एक्ट का मामला रद्द कर दिया गया।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के इस कदम से विश्रामपुर और शिवनंदनपुर रातों रात समूचे छत्तीसगढ़ और नई दिल्ली तक सुर्खियों में आ गए। शिवनंदनपुर नगर पंचायत में हुए चुनाव के नतीजे आज घोषित किए गए। यहां 15 वार्डों में से 8 वार्डों में कांग्रेस के पार्षद चुनकर आए हैं। हालांकि यहां कांग्रेस ने बहुमत हासिल कर लिया है, मगर अध्यक्ष पद कांग्रेस की स्थानीय स्तर की गुटबाजी की भेंट चढ़ गया। पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज द्वारा लगातार पूरे प्रदेश में कांग्रेस नेताओं के साथ मिलकर किए गए धरना आंदोलन और की गई पदयात्राओं के चलते आम लोगों के बीच कांग्रेस के प्रति जो विश्वास पैदा हुआ है, उसी ही परिणाम स्वरूप आज नतीजे कांग्रेस के पक्ष में आए और कांग्रेस की बड़ी जीत हुई है। कांग्रेस की यह जीत युवा प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज और उनके साथियों की जीत है जो लगातार लोगों से जुड़े रहे और उन्होंने जनता के हित में कार्य करते रहे हैं। इसी तरह जगदलपुर नगर निगम के इंदिरा वार्ड में पार्षद पद के लिए हुए उप चुनाव में कांग्रेस के रामकृष्ण तिवारी की बड़ी जीत हुई है। बता दें कि जगदलपुर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं स्थानीय विधायक किरण सिंह देव का गृह क्षेत्र है।

बालोद जिले में अवैध खनन पर लगातार कार्रवाई, दो दिनों में जेसीबी, चैनमाउंटेन मशीन, हाइवा और ट्रैक्टर जब्त

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बालोद, 04 जून। जिले में खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण के खिलाफ प्रशासन का अभियान लगातार जारी है। कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देश पर खनिज विभाग द्वारा बीते दो दिनों में डौण्डी और गुंडरदेही विकासखंड क्षेत्रों में कार्रवाई करते हुए अवैध खनन में संलिप्त कई वाहनों को जब्त किया गया है।खनिज विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार 2 जून को डौण्डी विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बेलोदा के आश्रित ग्राम अरजगुंडरा में औचक निरीक्षण के दौरान रेत के अवैध उत्खनन में लगी एक नारंगी रंग की जेसीबी 215 एलसी चैनमाउंटेन मशीन (इंजन क्रमांक 95404111) को जब्त किया गया।

उक्त वाहन को कोटवार, उपसरपंच एवं ग्रामीणों की उपस्थिति में सुपुर्द किया गया।इसके बाद 3 जून की रात्रि लगभग 11:30 बजे गुंडरदेही विकासखंड के ग्राम खेरूद में तांदुला नदी किनारे खनिज विभाग की टीम ने निरीक्षण किया। इस दौरान एक जेसीबी और हाइवा अवैध उत्खनन एवं परिवहन गतिविधियों में संलिप्त पाए गए। कार्रवाई के दौरान वाहन चालक मौके से भागने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन टीम ने दोनों वाहनों को जब्त कर थाना अर्जुंदा में सुरक्षार्थ रखवा दिया।वहीं ग्राम खेरूद के ही एक अन्य स्थान पर खनिज मिट्टी के अवैध उत्खनन एवं परिवहन में लगी एक जेसीबी और ट्रैक्टर को भी जब्त किया गया।

इन वाहनों को भी आगे की कार्रवाई के लिए थाना अर्जुंदा में सुरक्षित रखा गया है।जिला खनिज अधिकारी ने बताया कि सभी प्रकरणों में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि जिले में खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण पर रोक लगाने के लिए खनिज विभाग की जांच टीम लगातार निगरानी कर रही है तथा भविष्य में भी ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।लगातार हो रही कार्रवाई से अवैध खनन एवं परिवहन में संलिप्त लोगों में हड़कंप मचा हुआ है, वहीं प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि खनिज संसाधनों की चोरी और अवैध दोहन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

बैंक की लापरवाही से गुम हो गया जीवन प्रमाण पत्र

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पेंशनर अब्दुल सत्तार भटकते रहे पेंशन पाने

संघ की पहल पर मिल गई सात माह की पेंशन

जगदलपुर बैंक प्रबंधन की लापरवाही का खामियाजा बेकसूर पेंशनरों को किस तरह भुगतना पड़ता है इसकी बानगी पेंशनर अब्दुल सत्तार खान के मामले में देखने को मिली है। मामला सेंट्रल बैंक मुख्य शाखा जगदलपुर का है। तुर्रा यह कि बैंक प्रबंधन न तो पेंशनरों से सीधे मुंह बात करने को तैयार रहता है और न ही अपनी गलती स्वीकार करने को। हताश, परेशान पेंशनर जब अपने संघ के संपर्क में आते हैं तब मामला तूल पकड़ता है।

पेंशनर्स संघ ने कहा है कि बैंक प्रबंधन अपने रवैये में तत्काल सुधार करे, अन्यथा पेंशनर सेंट्रल बैंक से खाते हटाकर अन्य बैंक में खोलने के लिए बाध्य हो जाएंगे। भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ बस्तर संभाग के अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय मंत्री रामनारायण ताटी ने कहा है कि पेंशनरों को प्रत्येक वर्ष नवंबर माह में जीवितता प्रमाण पत्र जमा करना होता है। अब्दुल सत्तार खान जो संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं, उन्होंने भी नियमानुसार बैंक में जीवितता प्रमाण पत्र जमा किया था। किंतु बैंक प्रबंधन की लापरवाही से अब्दुल सत्तार खान का जीवितता प्रमाण पत्र गुम हो गया। प्रमाण पत्र गुम होने पर बैंक की जिम्मेदारी यह थी कि तत्काल संबंधित पेंशनर को इसकी सूचना दे जो नहीं दिया गया। 27 अप्रैल 2026 को बैंक से अब्दुल सत्तार खान के पास फोन आता है कि आपका जीवितता प्रमाण पत्र न होने के कारण आपका पेंशन बैंक खाते में जमा नहीं हो रही है, आप फौरन बैंक पहुंचकर जीवितता प्रमाण पत्र जमा करें। अब्दुल सत्तार खान ने पुनः जीवितता प्रमाण पत्र जमा किया।

इसके बाद भी अप्रैल माह के अंत में अन्य पेंशनरों के साथ अब्दुल सत्तार खान की पेंशन बैंक खाते में जमा नहीं हुई। मामला संगठन के संज्ञान में लाए जाने पर संगठन की ओर से ताटी ने सेंट्रल बैंक पहुंचकर शाखा प्रबंधक से इसका कारण जानना चाहा। उन्होंने जीवितता प्रमाण पत्र जमा न होने का कारण बताया। श्री ताटी ने कहा कि अब्दुल सत्तार खान ने समय पर जीवितता प्रमाण पत्र जमा कर दिया था, बैंक से मिसिंग हुआ तो उसकी सजा अब्दुल सत्तार खान क्यों भुगते? इस पर प्रबंधक ने कोई सकारात्मक जवाब नहीं दिया। श्री ताटी ने कहा देखिए जीवितता प्रमाण पत्र जमा करने के लिए जितनी जिम्मेदारी पेंशनर की है, उतना ही जिम्मेदारी बैंक की भी है। यदि कोई पेंशनर अत्यंत बुजुर्ग है, अशक्त है या लंबी बीमारी से ग्रसित है तो इन परिस्थितियों में बैंक की जवाबदारी बनती है कि वह अपने कर्मचारी को पेंशनर के घर भेजकर जीवितता प्रमाण पत्र ले। मगर आप लोग प्रायःऐसा नहीं करते।

जिसका खामियाजा बेकसूर पेंशनरों को भुगतना पड़ता है। ताटी स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब्दुल सत्तार की पेंशन आखिर कब आएगी?प्रबंधक ने मई माह के अंत में जमा करने का भरोसा दिलाया। ताटी ने कहा यह रवैया ठीक नहीं है अपने रवैये में सुधार करें, अन्यथा संघ से जुड़े सभी पेंशनर सेंट्रल बैंक से खाते हटाकर अन्य बैंक में खोलने के लिए बाध्य हो जाएंगे। संघ के आरएन ताटी, किशोर जाधव, अब्दुल सत्तार खान, शिव कुमार मिश्रा, रमापति दुबे, एलएस नाग, एसडी माझी, पीएस ठाकुर ,एमडी राठौर, सुरेश कुमार दलाई, बीएस नेताम, धरम सिंह मंडावी, अनिता राज करमजीत कौर, सरिता पांडे, सुषमा झा, जयमनी ठाकुर, शुभ्रा कुंडू, उषा चिखलीकर, रेखा सेन, के. बेलसरिया एवं जय ईशाक ने भी बैंक प्रबंधन के रवैए को गैरजिम्मेदाराना बताया है।

बंगाल में झालमुरी और बस्तर में पानी की बोतल का जादू

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मुख्यमंत्री विष्णु देव रुके एक छोटी सी किराना दुकान पर, सामने थी बदलाव की बड़ी गाथा

आत्मसमर्पित नक्सली की दुकान से मुख्यमंत्री साय ने खरीदी पानी की बोतल

अर्जुन झा

जगदलपुर हाल के दिनों में हमने देखा था कि बंगाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एक दुकान से खरीदी गई दस रुपए की झालमुरी ने बंगाल विधानसभा चुनाव की दिशा ही बदल दी थी, वहां दस रुपए की झालमुरी भाजपा के लिए जादुई करिश्मा साबित हुई। वैसा ही नजारा बस्तर में भी देखने को मिला है। बस्तर संभाग के बीजापुर जिले के एक सुदूर गांव की एक छोटी सी किराना दुकान से प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दस रुपए की पानी की बोतल क्या खरीदी, उस पानी की स्नेहिल फुहार का जादू पूरे बस्तर में चल गया है। दरअसल मुख्यमंत्री ने जिस दुकान से पानी बोतल खरीदी, उसके मालिक आत्मसमर्पित नक्सली दंपत्ति हैं। मुख्यमंत्री को जब पता चला कि दुकान मालिक पहले नक्सली थे, उनके मुंह से ये बोल फूट पड़े- यही है बदलते बस्तर और नए बीजापुर की असल तस्वीर

प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार के तहत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बीजापुर जिले के सुदूर वनांचल स्थित ग्राम कोंडापल्ली पहुंचे थे। जन चौपाल के लिए जा रहे मुख्यमंत्री का काफिला अचानक एक छोटी सी किराना दुकान के सामने रुक गया। बाहर से देखने पर यह एक सामान्य दुकान थी। लेकिन उसके भीतर संघर्ष, साहस और बदलाव की एक असाधारण कहानी छिपी थी। यह दुकान आत्मसमर्पित दंपत्ति मासा तामो और जयमोती की थी। मुख्यमंत्री दुकान के भीतर पहुंचे दोनों से आत्मीयता से बातचीत की और उनके जीवन में आए बदलाव के बारे में जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने दुकान से पानी की बोतल खरीदी और दोनों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि आत्मनिर्भरता ही नए जीवन की सबसे बड़ी पहचान है। मासा तामो का बचपन गरीबी और अभावों में बीता। बचपन में पिता का साया उठ गया और पढ़ाई का अवसर कभी नहीं मिला। वर्ष 2007 में परिस्थितियों के कारण वह नक्सली संगठन से जुड़ गया। उधर जयमोती की कहानी भी संघर्षों से भरी रही। बचपन में माता-पिता का निधन हो गया और जीवन की कठिन परिस्थितियों ने उन्हें भी उसी रास्ते की ओर धकेल दिया। संगठन में दोनों की मुलाकात हुई और वर्ष 2021 में उन्होंने विवाह कर लिया। लेकिन समय के साथ दोनों ने महसूस किया कि हिंसा का रास्ता उनके भविष्य और आने वाली पीढ़ियों के लिए उचित नहीं है। अक्टूबर 2025 में उन्होंने साहसिक निर्णय लेते हुए आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।

पुनर्वास केंद्र में नए जीवन का आगाज

बीजापुर पुनर्वास केंद्र पहुंचने के बाद दोनों के जीवन में नया अध्याय शुरू हुआ। पहली बार उन्हें अक्षर ज्ञान मिला, कौशल विकास का प्रशिक्षण मिला और शासन की विभिन्न योजनाओं से उन्हें जोड़ा गया। राशन कार्ड, आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, बैंक खाता और अन्य आवश्यक दस्तावेज बनवाए गए। महिला एवं बाल विकास विभाग की सक्षम योजना के तहत जयमोती को एक लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। इसी सहायता से कोंडापल्ली में उनकी छोटी सी किराना दुकान शुरू हुई। मुख्यमंत्री से चर्चा के दौरान मासा और जयमोती ने बताया कि अब वे सम्मानपूर्वक जीवनयापन कर रहे हैं। दुकान से होने वाली आय से परिवार की जरूरतें पूरी हो रही हैं। भविष्य को लेकर नई उम्मीद जगी हैं। दंपत्ति ने कहा कि कभी उन्होंने नहीं सोचा था कि जीवन में ऐसा बदलाव आएगा। लेकिन सरकार की पुनर्वास नीति और प्रशासन के सहयोग ने उन्हें नई पहचान दी है।

नए बस्तर की जीवंत तस्वीर

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि मासा और जयमोती की कहानी केवल दो व्यक्तियों की कहानी नहीं, बल्कि बदलते बस्तर की कहानी है। यह इस बात का प्रमाण है कि अवसर, विश्वास और सहयोग मिलने पर कोई भी व्यक्ति मुख्यधारा में लौटकर सम्मानजनक जीवन जी सकता है। कोंडापल्ली की उस छोटी सी दुकान पर कुछ मिनटों का यह संवाद सुशासन तिहार का सबसे भावनात्मक पल बन गया। यह दृश्य बता रहा था कि बस्तर अब भय और हिंसा की नहीं, बल्कि विश्वास, विकास और नई उम्मीदों की धरती बन रहा है। मासा तामो और जयमोती आज उन लोगों के लिए प्रेरणा हैं, जो अंधेरे से निकलकर उजाले की राह चुनना चाहते हैं। उनकी कहानी संदेश देती है कि वापसी का रास्ता हमेशा खुला होता है और एक नया जीवन हमेशा संभव होता है।

बस्तर और आदिवासी अंचलों के विकास की सर्वोच्च प्राथमिकता सरकार की जिम्मेदारी: अनवर खान

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तहसीलदारों की हड़ताल ने खोल दी सुशासन की पोल: अनवर खान =

जगदलपुर छत्तीसगढ़ प्रदेश मदरसा बोर्ड के पूर्व सदस्य अनवर खान ने प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते कहा है कि प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। जनता समस्याओं से जूझ रही है, सरकार बड़े-बड़े दावे कर रही है मगर प्रदेश की जनता को जमीनी स्तर पर बुनियादी सुविधाओं के अलावा अपनी जरूरतों की आपूर्ति के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

कांग्रेस नेता अनवर खान ने कहा है कि पंचायतों से सुशासन त्यौहार के लिए अवैध वसूली की जा रही है। शहरी निकायों सहित पंचायतों के विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़े हुए हैं। कई पंचायत के जनप्रतिनिधि संसाधनों एवं बजट की कमी से चिंतित व परेशान हैं। पूरे प्रदेश में पंचायत व्यवस्था कमजोर हो रही है और ग्रामीण विकास प्रभावित हो रहा है।उन्होंने कहा है कि सुशासन त्योहार से सरपंच परेशान व हताश होकर सामूहिक इस्तीफा दे रहे हैं। इस पर सरकार की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। सरकार अपनी नाकामी छुपाने के लिए सुशासन त्योहार के माध्यम से ध्यान भटकने का कार्य कर रही है। राज्य सरकार विशेष पिछड़ी जनजातियों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए विशेष योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन करने में पूरी तरह विफल साबित हुई।अनवर खान के कहा है कि सीतापुर के नायब तहसीलदार तुषार मानिक के साथ हुई मारपीट की घटना के विरोध में और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर सोमवार से तहसीलदार और नायब तहसीलदारों ने बेमियादी हड़ताल शुरू कर दी है। कलमबंद, कामबंद हड़ताल से राजस्व व शासकीय कार्य पूरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। एक तरफ छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार सुशासन त्यौहार मना रही है और दूसरी तरफ भाजपा सरकार की तानाशाही रवैये के खिलाफ प्रशासनिक अधिकारियों का कलम बंद हड़ताल जारी है। सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। एक तरफ सुशासन का ढकोसला त्यौहार और दूसरी तरफ प्रशासनिक अधिकारी अत्याचार का शिकार हो रहे हैं।

जल शोधन संयंत्र की कार्यप्रणाली सुचारू

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पेयजल की गुणवत्ता पूरी तरह सुरक्षित : महापौर

जगदलपुर:– पावर हाउस स्थित फिल्टर प्लांट में इंटेकवेल, सेटलिंग टैंक व फिल्टर का महापौर संजय पांडेय ने अपने टीम के साथ अवलोकन किया। इस दौरान एलम, ब्लीचिंग, क्लोरीन सहित सभी रसायनों का सही ढंग से मिलावट कर टेस्टिंग किया गया। टेक्निकल टीम ने बताया वर्तमान में इंद्रावती नदी के पानी में टर्बिडिटी (गंदलापन) कम है। ऐसी स्थिति में जल शोधन प्रक्रिया के दौरान पानी को कीटाणुरहित करने के लिए उपयोग किए जाने वाले केमिकल डोजिंग पंप के माध्यम से सोडियम हाइपोक्लोराइट की मात्रा निर्धारित स्तर से अधिक जाने की संभावना रहती है। इसी को ध्यान में रखते हुए जलप्रदाय शाखा द्वारा सोडियम हाइपोक्लोराइट की संतुलित मात्रा सुनिश्चित करने के लिए नल की टोटी (वाल्व) का उपयोग किया जाता रहा है । इसके पश्चात पेयजल की गुणवत्ता की जांच एवं परीक्षण कराया जाकर स्वच्छ पानी सप्लाई की जातीहै ।महापौर ने स्पष्ट किया है कि जल शोधन संयंत्र की आवश्यक व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित हैं तथा नागरिकों को सुरक्षित एवं शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। निगम प्रशासन द्वारा नियमित रूप से पानी की गुणवत्ता की जांच की जा रही है और पेयजल आपूर्ति की सतत निगरानी भी की जा रही है।उन्होंने आगे बताया वर्तमान में नदी का पानी में गंदलापन कम है।

डोजिंग पंप से सोडियम हाइड्रोक्लोराइड की मात्रा बहुत ज्यादा बढ़ जाती है जिसे कंट्रोल करना मुश्किल होता है। जिसे देखते हुए लोकली कम सोडियम हाइपो क्लोराइड डालने के लिए एक वैकल्पिक व्यवस्था के अंतर्गत नल की टोटी लगाकर बहुत ही कम मात्रा में सोडियम हाइड्रोक्लोरराइड डाला जा रहा है। डोजिंग पंप का कार्य बारिश होने पर फिल्टर प्लांट में किया जाएगा।

नगर निगम के तकनीकी अमले संजीव कर्ण ने बताया बरसात के मौसम में जो गंदा पानी आता है उसमें रसायन मिलाया जाता है। सामान्य दिनों में रसायन की मात्रा अधिक न हो जाए इस बात को ध्यान में रखते हुए मैन्युअल बूंद बूंद टपकाया जाता है। लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर रसायन युक्त पानी का सैंपलिंग कर टेस्टिंग के बाद ही पानी टंकी में सप्लाई होता है। इस प्रकार स्वच्छ व पीने युक्त पानी टंकी से होकर घरों तक पहुंचता है।मौके पर जल कार्य एमआईसी सदस्य सुरेश गुप्ता, लक्ष्मण झा, संजय विश्वकर्मा, राजपाल कसेर, ईई गोपाल भारद्वाज, अमर सिंह, संजीव कर्ण, रितेश पांडे, राजकीरण अम्भोरे, माधोराव चौहान आदि उपस्थित रहे।

गौतम अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत पर चढ़ा सियासी रंग

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बीएमओ को निशाना बनाकर भेजे गए गुमनाम पत्र पर उठे सवाल

भानुप्रतापपुर तहसील दुर्गूकोंदल के ग्राम चाहचांड निवासी कमलेश कोमरा के परिवार में हुई जच्चा-बच्चा की मौत का मामला अब स्वास्थ्य व्यवस्था और स्थानीय राजनीति के केंद्र में आ गया है। इस संवेदनशील मामले में नया मोड़ तब आया, जब ब्लॉक कांग्रेस कमेटी भानुप्रतापपुर के अध्यक्ष को एक गुमनाम शिकायती पत्र मिला। इस पत्र में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भानुप्रतापपुर और बीएमओ डॉ. सचेंद्र गोटा पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

जानकारी के अनुसार, गर्भवती महिला द्रौपदी कोमरा को प्रसव पीड़ा होने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भानुप्रतापपुर में भर्ती कराया गया था। जांच में एमनियोटिक फ्लूइड (वाटर लेवल) अत्यंत कम पाए जाने के बाद परिजन बेहतर उपचार की उम्मीद में उन्हें भानुप्रतापपुर स्थित गौतम हॉस्पीटल ले आए। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में समय पर सिजेरियन ऑपरेशन नहीं किया गया, जिसके चलते मां और नवजात दोनों की मौत हो गई। मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि जच्चा-बच्चा की मौत के बावजूद पोस्टमार्टम नहीं कराया गया। ऐसे में मौत के वास्तविक कारणों को लेकर कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं।

गुमनाम पत्र से बढ़ा विवाद

इस घटनाक्रम के बीच सामने आए एक गुमनाम पत्र में पूरे मामले के लिए बीएमओ डॉ. सचेंद्र गोटा को जिम्मेदार ठहराते हुए निजी अस्पतालों में मरीज भेजने और कथित कमीशनखोरी के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि पत्र की विश्वसनीयता को लेकर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस गौतम हॉस्पीटल में उपचार के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत हुई, उस अस्पताल की भूमिका पर पत्र में लगभग कोई चर्चा नहीं की गई है। इसके बजाय पूरा ध्यान केवल शासकीय अस्पताल और बीएमओ पर केंद्रित दिखाई देता है।

निशाने पर बीएमओ ही क्यों?

जच्चा-बच्चा की मौत के मामले में लगातार सामने आ रहे घटनाक्रमों ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि कहीं वास्तविक मुद्दे से ध्यान हटाकर किसी शासकीय अधिकारी को निशाना बनाने की कोशिश तो नहीं हो रही है। परिजनों के आरोप सीधे तौर पर उपचार और ऑपरेशन में कथित देरी से जुड़े हैं, लेकिन हाल के दिनों में चर्चा का केंद्र गौतम हॉस्पीटल के बजाय बीएमओ और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को बनाया जा रहा है। इससे क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। मामले में अब डाक विभाग की ट्रैकिंग रिपोर्ट ने एक नया मोड़ ला दिया है। शिकायत पत्र को बालोद से भेजा गया बताया जा रहा था, लेकिन स्पीड पोस्ट ट्रैकिंग के अनुसार उसकी बुकिंग रविग्राम सब पोस्ट ऑफिस (पिनकोड 492001) से 26 मई को की गई थी। ट्रैकिंग रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से बुक्ड एट रविग्राम सो दर्ज है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि यदि पत्र बालोद से भेजा गया था तो उसकी बुकिंग रविग्राम से कैसे हुई? वहीं पत्र में दर्ज मोबाइल नंबर भी बंद बताया जा रहा है और शिकायतकर्ता की पहचान स्पष्ट नहीं हो सकी है।

निष्पक्ष जांच की मांग*स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जांच का केंद्र वहीं होना चाहिए जहां उपचार हुआ तथा जहां घटना घटी। साथ ही यह भी जरूरी है कि बिना ठोस प्रमाण किसी व्यक्ति या अधिकारी को निशाना बनाने के प्रयासों की भी जांच की जाए।फिलहाल पूरे मामले में प्रशासनिक जांच और तथ्यात्मक निष्कर्ष का इंतजार है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में जच्चा-बच्चा की मौत के वास्तविक कारण, गौतम हॉस्पीटल की भूमिका और गुमनाम पत्र के पीछे की सच्चाई सामने आ पाती है या नहीं?

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