City Media - Latest Hindi News of Chhattisgarh
RakeshCity
previous arrow
next arrow
     
Home Blog

अबूझमाड़ की लौटती धड़कन: घोटुलों में फिर गूंजने लगी मांदर की थाप

0

नारायणपुर सुनील कथूरिया सूरज जैसे ही अबूझमाड़ की पहाड़ियों के पीछे ढलता है, जंगलों के बीच बसे गांवों में एक परिचित ध्वनि फिर सुनाई देने लगती है। यह किसी वाहन की आवाज नहीं, किसी सरकारी घोषणा का शोर नहीं और न ही किसी संघर्ष की आहट है। यह है मांदर की थाप—वह थाप जो पीढ़ियों से यहां के आदिवासी जीवन की धड़कन रही है।एक समय था जब शाम ढलते ही गांवों पर सन्नाटा उतर आता था। लोग जल्दी घर लौट आते थे, रास्ते सुनसान हो जाते थे और सार्वजनिक स्थानों पर जुटना जोखिम भरा माना जाता था। लेकिन आज तस्वीर बदल रही है। अबूझमाड़ के कई गांवों में घोटुल फिर आबाद हो रहे हैं। चेलिक और मोटियारिनों की टोलियां पारंपरिक वेशभूषा में गीत गाती हैं, मांदर की लय पर कदम थिरकते हैं और सामूहिक उल्लास का वातावरण बनता है।यह बदलाव केवल सांस्कृतिक गतिविधियों की वापसी नहीं है, बल्कि उस समाज के आत्मविश्वास की वापसी है जिसने वर्षों तक हिंसा, भय और अनिश्चितता का दौर देखा।*घोटुल: केवल एक भवन नहीं, संस्कृति की पाठशाला*बस्तर और अबूझमाड़ की आदिवासी संस्कृति में घोटुल का विशेष महत्व है। यह केवल युवाओं के मिलने-जुलने का स्थान नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक शिक्षा का केंद्र है। यहां नई पीढ़ी लोकगीत, नृत्य, रीति-रिवाज, अनुशासन, सामुदायिक जीवन और अपनी सांस्कृतिक पहचान को सीखती है।घोटुलों में गूंजने वाले गीत केवल मनोरंजन नहीं होते। उनमें जंगल, नदी, पहाड़, खेती, ऋतु परिवर्तन, प्रेम, संबंध और जीवन के अनुभवों की कथाएं समाहित रहती हैं। मांदर और पारंपरिक वाद्यों की धुन इन कथाओं को जीवंत बना देती है।इसीलिए जब घोटुलों की रौनक लौटती है तो उसका अर्थ केवल नृत्य और संगीत का लौटना नहीं होता, बल्कि पूरी सांस्कृतिक विरासत का पुनर्जीवन होता है।*भय से भरोसे तक का सफर*अबूझमाड़ लंबे समय तक नक्सल हिंसा और सुरक्षा चुनौतियों का केंद्र बना रहा। संघर्ष का प्रभाव केवल सुरक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि गांवों के सामाजिक जीवन पर भी पड़ा।ग्रामीण बताते हैं कि एक दौर ऐसा था जब शाम होते ही लोग अपने घरों में सिमट जाते थे। सार्वजनिक आयोजनों, त्योहारों और सामूहिक कार्यक्रमों में भागीदारी कम हो गई थी। कई गांवों में घोटुलों की गतिविधियां लगभग थम गई थीं।लेकिन हाल के वर्षों में सुरक्षा अभियानों और नक्सल प्रभाव में कमी के बाद परिस्थितियां धीरे-धीरे बदलने लगी हैं। गांवों में आवाजाही बढ़ी है, सामाजिक गतिविधियां फिर शुरू हुई हैं और लोगों के भीतर भरोसा लौटा है। इसी भरोसे की सबसे सुंदर झलक घोटुलों में दिखाई दे रही है।*शाम का नया अर्थ*आज अबूझमाड़ के कई गांवों में शाम का मतलब सन्नाटा नहीं, बल्कि उत्सव है।जैसे ही दिन ढलता है, युवा घोटुल की ओर बढ़ते हैं। मांदर की पहली थाप के साथ वातावरण जीवंत हो उठता है। युवतियां और युवक पारंपरिक नृत्य में शामिल होते हैं। गीतों की स्वर लहरियां दूर तक फैलती हैं। बुजुर्ग बैठकर इस दृश्य को देखते हैं और उनके चेहरे पर संतोष झलकता है।उनके लिए यह केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि अपनी पहचान को फिर से जीवित होते देखने का सुख है।*संस्कृति की वापसी, सामान्य जीवन की वापसी*ग्रामीणों के लिए शांति का अर्थ केवल हिंसा का कम होना नहीं है। इसका अर्थ है खेतों तक निर्भय पहुंचना, बच्चों का स्कूल जाना, बाजारों में चहल-पहल बढ़ना, त्योहारों का खुले मन से आयोजन और सामुदायिक जीवन का फिर से सक्रिय होना।घोटुलों में लौटती भीड़ इसी सामान्य जीवन की वापसी का प्रतीक बन गई है।यहां जुटने वाले युवा केवल गीत और नृत्य नहीं सीख रहे, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़ रहे हैं। वे उस सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं, जो पीढ़ियों से उनके समाज की पहचान रही है।*केवल सुरक्षा नहीं, विकास भी जरूरी*हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि इस सांस्कृतिक पुनर्जागरण को स्थायी बनाने के लिए केवल सुरक्षा पर्याप्त नहीं होगी।शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सड़क, संचार और युवाओं के लिए अवसरों का विस्तार भी उतना ही आवश्यक है। साथ ही आदिवासी समाज की परंपराओं और सांस्कृतिक संस्थाओं का सम्मान करते हुए उनके संरक्षण और संवर्धन पर विशेष ध्यान देना होगा।स्थानीय बुजुर्गों का अनुभव और युवाओं की भागीदारी मिलकर इस सांस्कृतिक पुनर्जीवन को और मजबूत बना सकती है।*मांदर की थाप में छिपा संदेश*अबूझमाड़ के घोटुलों में गूंजती मांदर की थाप केवल एक वाद्य की आवाज नहीं है। यह उस क्षेत्र की बदलती कहानी का संगीत है।यह उन गांवों की उम्मीद है जिन्होंने लंबे समय तक भय और संघर्ष का सामना किया। यह उन युवाओं का उत्साह है जो अपनी सांस्कृतिक पहचान को फिर से जी रहे हैं। यह उन बुजुर्गों की खुशी है जो अपनी परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचते देख रहे हैं।आज जब अबूझमाड़ की शामों में मांदर की थाप गूंजती है, तो वह केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं होता। वह एक संदेश भी होता है—कि जीवन अपनी स्वाभाविक लय में लौट रहा है, कि संस्कृति फिर सांस ले रही है और कि अबूझमाड़ अपनी पहचान के साथ एक नई सुबह की ओर बढ़ रहा है।घोटुलों की लौटती रौनक दरअसल अबूझमाड़ की लौटती मुस्कान है।

रक्षाबंधन से पहले महतारी वंदन की 31वीं किस्त से महिलाओं में खुशी

0

नारायणपुर रक्षाबंधन पर्व से पहले मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त महिलाओं के खातों में जारी किए जाने से हितग्राहियों में खुशी का माहौल है। नारायणपुर की हितग्राही विनिशा उसेंडी ने मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि योजना से मिलने वाली राशि परिवार की दैनिक जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण सहयोग दे रही है।उन्होंने बताया कि हर माह मिलने वाली आर्थिक सहायता से घरेलू खर्च, आवश्यक सामान और अन्य छोटी-बड़ी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलती है। उनके अनुसार यह योजना महिलाओं की आर्थिक निर्भरता कम करने के साथ-साथ आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता भी बढ़ा रही है।विनिशा उसेंडी ने कहा कि रक्षाबंधन जैसे पावन पर्व से पहले किस्त जारी होना महिलाओं के लिए खुशी और सम्मान का विषय है। उन्होंने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए उम्मीद जताई कि ऐसी जनकल्याणकारी योजनाएं आगे भी जारी रहेंगी।

मासूम के लिए देवदूत बना आईटीबीपी जवान, रक्तदान कर बचाई जान

0

नारायणपुर जिला अस्पताल में भर्ती 4 वर्षीय मासूम पंकज सलाम को तत्काल B+ रक्त की आवश्यकता थी। बच्चे की गंभीर स्थिति की जानकारी मिलने पर 45वीं वाहिनी आईटीबीपी के सेनानी राजीव गुप्ता के निर्देश पर आरक्षक एम. अरविंद ने आगे आकर स्वेच्छा से एक यूनिट रक्तदान किया।समय पर रक्त मिलने से मासूम के उपचार में सहायता मिली और परिजनों ने राहत की सांस ली। आईटीबीपी जवान की इस मानवीय पहल की क्षेत्र में सराहना हो रही है। परिजनों ने आरक्षक एम. अरविंद एवं 45वीं वाहिनी आईटीबीपी के प्रति आभार व्यक्त किया।

जर्जर पुलिया बनी हादसों का खतरा, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

0

दल्ली राजहरा। श्रमवीर चौक के समीप स्थित जर्जर पुलिया अब हादसे को खुला न्योता देती नजर आ रही है। पुलिया की खस्ताहाल हालत, सुरक्षा इंतजामों की अनदेखी और भारी वाहनों की बेरोकटोक आवाजाही के बावजूद जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं। हाल ही में तेज रफ्तार ट्रक की चपेट में आने से एक वृद्ध महिला की मौत की घटना ने प्रशासनिक लापरवाही की गंभीरता को उजागर कर दिया है। सवाल यह है कि किसी बड़े हादसे का इंतजार आखिर कब तक किया जाएगा?बताया जाता है कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मांग पर पूर्व में बीएसपी प्रबंधन द्वारा पुलिया की मरम्मत कराई गई थी।

भारी वाहनों को रोकने के लिए संकेतक बोर्ड और बैरिकेड भी लगाए गए थे। रविवार के साप्ताहिक बाजार के दौरान भीड़ को देखते हुए कुछ समय के लिए मार्ग खोलने की व्यवस्था थी, लेकिन धीरे-धीरे यह अस्थायी व्यवस्था स्थायी लापरवाही में तब्दील हो गई।जिन स्थानों पर भारी वाहनों को रोकने के लिए बैरिकेड लगाए गए थे, वहां अब प्रभावी रोकथाम नजर नहीं आती। नतीजतन भारी वाहन लगातार पुलिया से गुजर रहे हैं। पुलिया का कमजोर होता ढांचा और उस पर दौड़ते भारी वाहन किसी बड़े हादसे की आशंका को और बढ़ा रहे हैं।सबसे गंभीर स्थिति यह है कि यह मार्ग टाउनशिप क्षेत्र में आता है और यहां से स्कूली बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और स्थानीय नागरिकों की लगातार आवाजाही होती है। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था में थोड़ी सी भी चूक जानलेवा साबित हो सकती है।घटना के बाद नागरिकों और व्यापारियों में प्रशासन के प्रति नाराजगी है। नगर पालिका अध्यक्ष तोरण साहू एवं उपाध्यक्ष मनोज दुबे (पिंटू) ने मौके पर पहुंचकर पुलिया की स्थिति का निरीक्षण किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि लोगों की सुरक्षा के साथ किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बीएसपी प्रबंधन से तत्काल चर्चा कर स्थायी बैरिकेड लगाने तथा भारी वाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की बात कही।हादसे के बाद भी नहीं जागा प्रशासनस्थानीय लोगों का कहना है कि जब पुलिया की स्थिति पहले से जर्जर है और यहां दुर्घटना में एक महिला की जान जा चुकी है, तो फिर जिम्मेदार विभाग किसी और हादसे का इंतजार क्यों कर रहे हैं? लोगों की मांग है कि पुलिया का पूर्ण जीर्णोद्धार होने तक भारी वाहनों की आवाजाही तत्काल बंद की जाए और मजबूत स्थायी बैरिकेड लगाए जाएं।नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते सुरक्षा के ठोस इंतजाम नहीं किए गए तो भविष्य में होने वाले किसी बड़े हादसे की जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी? अब जरूरत सिर्फ आश्वासन की नहीं, बल्कि तत्काल कार्रवाई की है।

बिछड़े तेंदुआ शावकों का कराया उनकी मां से पुनर्मिलन

0

वनमंत्री केदार कश्यप के वन्यप्राणी संरक्षण के संकल्प को साकार किया बस्तर वनमंडल ने

कामयाब रहा 48 घंटे का रेस्क्यू और रेयूनाइट मिशन

अर्जुन झा

बकावंड। बस्तर वन मंडल ने राज्य के वन मंत्री केदार कश्यप के वन्य प्राणी संरक्षण के संकल्प को साकार करते हुए जीव दया और मानवीय संवेदना की बेहतरीन मिसाल पेश की है। अपनी मां से बिछड़े दो तेंदुआ शावकों को उनकी मां से मिलाने के लिए वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने लगभग 48 घंटे तक रेस्क्यू और रेयूनाइट ऑपरेशन चलाया। टीम की मेहनत रंग लाई और मां बच्चों का पुनर्मिलन हो गया।

दरअसल 22 अगस्त को बस्तर वन मंडल अंतर्गत चित्रकोट रेंज के दुर्गम पहाड़ी वन क्षेत्र में ग्रामीण बच्चों द्वारा तेंदुए के एक शावक को उठा कर गांव में ले आया गया था। बच्चे उसे बिल्ली समझ बैठे थे। इसकी सूचना मिलने पर वन विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए रात 11 बजकर 20 मिनट पर शावक को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया और उसी रात घने जंगल में सुबह करीब 4 बजे उसे चिन्हित स्थान पर सुरक्षित छोड़ दिया, लेकिन अगली सुबह निगरानी में सामने आया कि मादा तेंदुए ने शावक को स्वीकार नहीं किया। इसके बाद वन विभाग ने ग्रामीणों के सहयोग से दूसरे शावक की भी तलाश शुरू की।

दूसरा शावक भी मिल गया। इसके बाद दोनों शावकों को एकसाथ सुरक्षित स्थान पर रखा गया और उनकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ट्रैप कैमरे लगाए गए। लगातार निगरानी के बाद सोमवार की रात कैमरे में वो तस्वीर कैद हुई, जिसका सभी को इंतजार था। मादा तेंदुआ वापस लौटी और आखिरकार दोनों शावकों को अपने साथ ले गई। यह सिर्फ दो शावकों के अपनी मां से पुनर्मिलन की कहानी नहीं, बल्कि वन विभाग की तत्परता, ग्रामीणों की संवेदनशीलता और इंसान-वन्यजीव के बीच भरोसे की एक खूबसूरत मिसाल है। वन मंत्री केदार कश्यप ने वन्यप्राणी संरक्षण के इस संवेदनशील मिशन में जुटी वन विभाग की पूरी टीम और सहयोगी ग्रामीणों को सैल्यूट किया है। वहीं वन मंडल अधिकारी उत्तम कुमार गुप्ता ने कहा कि बस्तर में वन विभाग वनों और वन्य प्राणियों की सुरक्षा के लिए संकल्पित होकर काम कर रही है। यह मिशन भी उसी का नतीजा है।

केंद्र व राज्य सरकार देश व प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री साय

0

डौंडीलोहारा में आयोजित महतारी वंदन सम्मान समारोह में शामिल होकर महिलाओं एवं जिले वासियों को दी विभिन्न सौगातराज्य के 67 लाख से अधिक हितग्राहियों के खाते में 631 करोड़ से अधिक की राशि का किया अंतरणनगर पंचायत डौंडीलोहारा में सर्व सुविधायुक्त ऑडिटोरियम निर्माण, खरखरा जलाशय में नहरलिफ्ट निर्माण सहित अन्य विकास कार्यों की घोषणा की 102 करोड़ रुपए के विभिन्न विकास कार्यों का किया भूमिपूजन एवं लोकार्पणमहतारी वंदन योजना से लाभान्वित हितग्राहियों से बातचीत कर उनके जीवन में आ रहे बदलाव की सराहना की

बालोद, 25 अगस्त 2026मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व वाले केंद्र सरकार एवं छत्तीसगढ़ सरकार देश एवं प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार अपने ढाई वर्ष के कार्यकाल में मोदी की गारंटी के तहत किए गए सभी वायदों को पूरा कर राज्य में विकास की गंगा बहा रही है। मुख्यमंत्री श्री साय आज बालोद जिले के विकासखण्ड मुख्यालय डौण्डीलोहारा के लाल रघुवीर सिंह स्टेडियम में आयोजित महतारी वंदन सम्मान समारोह में शामिल होकर राज्य के माताओं, बहनों एवं बालोद जिले वासियों को विभिन्न विकास कार्यों की सौगात दी। इस अवसर पर उन्होंने माताओं एवं बहनों को सम्मान करने के साथ-साथ बालोद जिलें के 02 लाख 45 हजार 28 हितग्राहियों सहित पूरे प्रदेश के 67 लाख 28 हजार 918 हितग्राहियों के खाते में 631 करोड़ 38 लाख 37 हजार 700 रूपये की राशि का अंतरण कर उन्हें शुभकामनाएं दी। इस मौके पर मुख्यमंत्री श्री साय ने नगर पंचायत डौंडीलोहारा में सर्व सुविधायुक्त ऑडिटोरियम निर्माण, खरखरा जलाशय में लिफ्ट इरिगेशन की स्वीकृति एवं खरखरा जलाशय के पूरक नहर के जीर्णोद्धार एवं पुननिर्माण तथा धनगांव जलाशय के शीर्ष कार्य वियर के साथ नहर रिमाडलिंग लाइन निर्माण करने के अलावा नगर पंचायत डौण्डीलोहारा में मस्जिद चैक से शास्त्री नगर मार्ग में 05 करोड़ रूपये की लागत से पुलिया निर्माण तथा डौण्डीलोहारा विकासखण्ड में 19 करोड़ रूपये की लागत से संबलपुर से भीमकन्हार-मुड़िया मार्ग के निर्माण करने की घोषणा के साथ-साथ 102 करोड़ रुपए के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने महतारी वंदन योजना से लाभान्वित जिले के पांच हितग्राहियों से संवाद कर इस योजना के माध्यम से हितग्राहियों के जीवन में हो रहे बदलाव की भूरी-भूरी सराहना की। इस मौके पर कांकेर लोकसभा क्षेत्र के सांसद श्री भोजराज नाग, पूर्व सांसद सुश्री सरोज पांडे, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती तारणी पुष्पेंद्र चंद्राकर, राज्य एथेलेटिक संघ के उपाध्यक्ष श्री सौरभ लूनिया, नगर पंचायत डौण्डीलोहारा के अध्यक्ष श्री लाल निवेन्द्र सिंह टेकाम, पूर्व विधायक श्री वीरेंद्र साहू एवं श्री राजेंद्र राय, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि श्री चेमन देशमुख, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष श्री राकेश यादव, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्री देवलाल ठाकुर, जनपद अध्यक्ष श्रीमती कांति सोनबरसा, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि श्रीमती कुसुम शर्मा सहित कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा, पुलिस अधीक्षक श्री किरण गंगा राम चव्हाण, वन मंडल अधिकारी श्री अभिषेक अग्रवाल, अपर कलेक्टर श्री चंद्रकांत कौशिक एवं अन्य जनप्रतिनिधियों के अलावा बड़ी संख्या में महतारी बंधन योजना के हितग्राहियों एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं तथा नागरिकगण उपस्थित थे। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि मेरे लिए सौभाग्य का विषय है कि सावन के पवित्र महिने एवं रक्षाबंधन त्यौहार के ठीक पूर्व आज डौंडीलोहारा में आयोजित महतारी वंदन सम्मान समारोह में शामिल होने का मुझे अवसर प्राप्त हो रहा है। श्री साय ने कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से मातृ शक्तियों का सम्मान करने के साथ-साथ राज्य के महतारी वंदन योजना से लाभान्वित 68 लाख हितग्राहियों के खाते में 631 करोड़ 38 लाख 37 हजार 700 रूपये की राशि का अंतरण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा पिछले ढाई वर्षो के कार्यकाल में योजना के हितग्राहियों के खाते में 20 हजार करोड़ की राशि अंतरित की जा चुकी है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना राज्य के माताओं एवं बहनों को सशक्त एवं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उनके लिए प्रत्येक दृष्टि से अत्यंत कारगर एवं उपयोगी साबित हो रहा है। श्री साय ने कहा कि अब हमारी माताओं एवं बहनों को अपनी छोटी-मोटी जरूरत के लिए अपने पति एवं घर वालों के ऊपर आश्रित नहीं रहना पड़ता। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ की जनता से वायदा किया था कि छत्तीसगढ़ के माता एवं बहनों को हम आर्थिक रूप से सशक्त कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाएंगे। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा इसका अक्षरशः पालन करते हुए राज्य के माताओं एवं बहनों को आर्थिक रूप से सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसके तहत हमारी सरकार ने माताओं एवं बहनों का सम्मान करते हुए रक्षाबंधन त्यौहार के पूर्व आज 25 अगस्त को ही उनके खाते में महतारी वंदन योजना के 31वें किश्त की राशि का अंतरण करने का निर्णय लिया है। इस अवसर पर उन्होंने राज्य के माताओं एवं बहनों सहित पूरे प्रदेश वासियों को रक्षाबंधन के पवित्र त्यौहार की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी। श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के मंशानुरूप लखपति दीदी बनाने की दिशा में निरंतर कार्य की जा रही है। इसके तहत छत्तीसगढ़ राज्य में अब तक लक्ष्य से अधिक 13 लाख 85 हजार महिलाओं को लखपति दीदी बनाने में सफलता अर्जित की गई है। इसके अलावा केंद्र एवं राज्य सरकार के सहयोग से हमारी ड्रोन दिदिया ड्रोन के माध्यम से खेतों में खाद-बीज का छिड़काव कर अच्छी खासी आय अर्जित कर रही है। इसके साथ ही सुकन्या समृद्धि योजना भी राज्य के महिलाओं को स्वालंबी एवं आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण एवं कारगर साबित हो रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने पिछले ढाई वर्ष के दौरान राज्य में हुए विभिन्न विकास कार्यों के संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि पिछले कई वर्षों से हमारा बस्तर संभाग नक्सलवाद के दंश को झेल रहा था। लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के दृढ इच्छा के फलस्वरूप बस्तर को सशस्त्र नक्सलवाद से मुक्ति प्रदान कर हम बस्तर में विकास के नए अध्याय का शुरूआत कर रहे हैं। इस अवसर पर उन्होंने केन्द्र व राज्य सरकार के द्वारा बस्तर के सुदूर अंचलों में किए जा रहे विभिन्न विकास कार्यों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने ढाई साल के कार्यकाल के दौरान मोदी के गारंटी के तहत किए गए सभी वायदों को पूरा किया है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने 13 दिसंबर 2023 को राज्य की बागडोर संभालने के 14 अगस्त को राज्य में 18 लाख प्रधानमंत्री आवास निर्माण को स्वीकृति दी है। इसके अलावा राज्य में प्रति क्विंटल 3100 रूपये की दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी कर राज्य के अन्नदाता किसानों के श्रम को सम्मानित करने का कार्य किया है। इसके अलावा रामलला दर्शन योजना के तहत अब तक 50 हजार श्रद्धालुओं को भगवान रामलला का दर्शन कराया जा चुका है। इसी तरह 5500 रूपये मानक बोरा की दर से तेंदुपत्ता की खरीदी पर तेंदुपत्ता संग्राहकों को उनके मेहनत का वाजिब दाम दिलाया जा रहा है। इसके अलावा पंडित दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत भूमिहीन परिवारों को 10 हजार रूपये राशि की प्रदान कर उन्हें संबल प्रदान किया जा रहा है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने राज्य सरकार द्वारा भ्रष्टाचार के विरूद्ध जीरो टाॅरलेंस की नीति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राज्य में द्वारा भ्रष्टाचार पर संलिप्त लोगों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई की जा रही है। श्री साय ने कहा कि केन्द्र व राज्य सरकार के द्वारा जनजातीय वर्गों के सर्वांगीण विकास हेतु विशेष पिछड़ी जनजातियों के उत्थान हेतु प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत उनके गांवों में सड़क, बिजली, पानी एवं अन्य बुनियादी सुविधाओं के अलावा उन्हें शासन के अनेक जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ’सबका साथ, सबका विकास’ के मूलमंत्र को आत्मसात कर राज्य के चंहुमूखी विकास हेतु निरंतर कार्य कर रही है। श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मंशानुरूप विकसित भारत की तर्ज पर हम सब मिलकर विकसित छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण करेंगे। इसके लिए समुचित छत्तीसगढ़ वासियों का सहयोग एवं सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद श्री भोजराज नाग ने सावन के पवित्र महिने सावन के सावन के पवित्र महिने में माताओं एवं बहनों के सम्मान समारोह का आयोजन की भूरी-भूरी सराहना की। उन्होंने कहा कि इस पवित्र अवसर पर माताओं एवं बहनों के खाते में महतारी वंदन योजना के 31वें किश्त की राशि का वितरण अत्यंत महत्वपूर्ण है। श्री नाग ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाले छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाले केन्द्र सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर विकास की अनवरत गंगा बहाई जा रही है। समारोह को संबोधित करते हुए पूर्व सांसद सुश्री सरोज पाण्डे ने महतारी वंदन सम्मान समारोह के साथ-साथ राज्य के माताओं एवं बहनों के खाते में महतारी वंदन योजना के 31वें किश्त की राशि के अंतरण की भूरी-भूरी सराहना की। इस अवसर पर उन्होंने केन्द्र व राज्य सरकार के द्वारा चलाए जा रहे विकास कार्यों के संबध में विस्तार से प्रकाश डाला। स्वागत भाषण एवं प्रतिवेदन वाचन प्रस्तुत करते हुए कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने महतारी वंदन सम्मान समारोह के आज के इस महत्वपूर्ण आयोजन में उपस्थिति के लिए मुख्यमंत्री श्री साय को हृदय से धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मंशानुरूप बालोद जिला प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे वृहद वृक्षारोपण अभियान, मिशन अंकुर एवं अन्य रचनात्मक गतिविधियों के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। समारोह में मुख्यमंत्री श्री साय ने 3.2 करोड़ रूपये की लागत से 12 किमी लंबी उमरादाह से निपानी मार्ग, 26 करोड़ रूपये की लागत से अर्जुंदा ओडारसकरी मार्ग एवं 2.5 करोड़ रूपये की लागत से बालोद से पिकरीपार मार्ग निर्माण सहित 102 करोड़ रूपये की लागत से भूमिपूजन एवं लोकार्पण किया। क्रमांक/633/ठाकुर–00–

हत्या के मामले में 24 घंटे के भीतर आरोपी गिरफ्तार

0

नारायणपुर, 24 अगस्त। थाना झाराघाटी पुलिस ने हत्या के एक गंभीर मामले का 24 घंटे के भीतर खुलासा करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है।पुलिस के अनुसार थाना झाराघाटी में दर्ज अपराध क्रमांक 04/2026 के तहत हत्या के मामले की सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच शुरू की। विवेचना के दौरान मिले साक्ष्यों और परिस्थितिजन्य तथ्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपी बिसरू सलाम (49 वर्ष), निवासी पुजारीपारा, ग्राम छिनारी की पहचान कर उसे गिरफ्तार कर लिया।पूछताछ और आवश्यक वैधानिक कार्रवाई के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार पटेल के निर्देशन में की गई इस कार्रवाई में थाना प्रभारी राजकुमार राय सहित पुलिस टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मामले की आगे की विवेचना जारी है।

व्हाट्सएप हैकिंग मामले का खुलासा: भाजपा जिला अध्यक्ष का अकाउंट हैक कर पैसों की मांग करने वाला आरोपी उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार

0

नारायणपुर कुछ दिनों पूर्व भाजपा नारायणपुर जिला अध्यक्ष श्रीमती संध्या पंवार का व्हाट्सएप अकाउंट हैक कर उनके परिचितों से पैसों की मांग किए जाने का मामला सामने आया था। इस घटना से जिले में चिंता का माहौल बन गया था और लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई थी। अब नारायणपुर पुलिस ने साइबर अपराध के इस मामले में बड़ी सफलता हासिल करते हुए व्हाट्सएप अकाउंट हैक कर प्रतिरूपण करने वाले आरोपी को उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार कर लिया है।पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, भाजपा जिला अध्यक्ष श्रीमती संध्या पंवार ने 6 अगस्त को छोटेडोंगर थाना में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके मोबाइल नंबर का दुरुपयोग कर अज्ञात साइबर अपराधियों द्वारा उनका व्हाट्सएप अकाउंट हैक कर लिया गया। इसके बाद आरोपी ने उनके नाम और पहचान का उपयोग करते हुए परिचितों, समर्थकों तथा अन्य लोगों को संदेश भेजकर आर्थिक सहायता के नाम पर पैसों की मांग शुरू कर दी।मामले की जानकारी सामने आने के बाद लोगों को सतर्क किया गया और किसी भी प्रकार की धनराशि भेजने से पहले सत्यापन करने की अपील की गई थी। सौभाग्यवश किसी व्यक्ति के साइबर ठगी का शिकार होने की सूचना नहीं मिली।प्रकरण की जांच थाना छोटे डोंगर पुलिस एवं साइबर सेल द्वारा की गई। विवेचना के दौरान तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल डाटा एवं डिजिटल जानकारियों का गहन विश्लेषण किया गया। जांच में मिले सुरागों के आधार पर पुलिस टीम उत्तर प्रदेश पहुंची और बलिया जिले के बड़ा गांव निवासी रितेश गुप्ता (22 वर्ष) को गिरफ्तार कर लिया।गिरफ्तार आरोपी को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस के अनुसार आरोपी व्हाट्सएप अकाउंट हैक कर लोगों का प्रतिरूपण करते हुए उनके परिचितों से धनराशि मांगने का कार्य करता था।पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार पटेल के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अजय कुमार, एसडीओपी मनोज मंडावी तथा डीएसपी साइबर आशीष कुमार नेताम के पर्यवेक्षण में की गई इस कार्रवाई में थाना प्रभारी छोटे डोंगर निरीक्षक हरिशंकर प्रसाद ध्रुव, सहायक उप निरीक्षक रूमंत देवांगन, साइबर सेल प्रभारी सहायक उप निरीक्षक राजकुमार सोरी, आरक्षक कमल किशोर जोशी एवं साइबर सेल आरक्षक संदीप चौहान की महत्वपूर्ण भूमिका रही।पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी परिचित व्यक्ति के नाम से धनराशि मांगने वाले संदेश प्राप्त होने पर पहले संबंधित व्यक्ति से सीधे संपर्क कर सत्यापन करें। किसी भी संदिग्ध साइबर गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस अथवा साइबर हेल्पलाइन को दें।

नक्सल हिंसा पीड़ित परिवारों से मिले डॉ. प्रेमसाईं, दी आर्थिक सहायता

0

नारायणपुर। मां मातंगी दिव्य धाम के पीठाधीश्वर डॉ. प्रेमसाईं महाराज ने नारायणपुर प्रवास के दौरान दंडवन, छिनारी और कलेपाल पहुंचकर नक्सल हिंसा में अपने परिजनों को खो चुके परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता, राशन सामग्री एवं वस्त्र प्रदान कर सहयोग का संदेश दिया।

गुरुजी ने दंडवन में पंचम दास मानिकपुरी एवं छिनारी में सुखलाल गावड़े के परिजनों को 31-31 हजार रुपये तथा कलेपाल में मानकु पोटाई के परिजनों को 51 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की। इस दौरान उन्होंने कहा कि परिवार के सदस्य की कमी कोई सहयोग पूरा नहीं कर सकता, लेकिन समाज का दायित्व है कि ऐसे परिवारों के साथ खड़ा रहे।प्रवास के दौरान उन्होंने ग्रामीणों को शिक्षा के प्रति जागरूक किया तथा जरूरतमंद बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। वहीं गढ़बेंगाल स्थित राम मंदिर निर्माण के लिए 50 हजार रुपये की सहयोग राशि भी प्रदान की।

शिक्षकों की मांगों को लेकर नारायणपुर में ऐतिहासिक हड़ताल, सैकड़ों शिक्षक हुए एकजुट

0

नारायणपुर छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर मंगलवार को जिलेभर के सैकड़ों शिक्षकों ने अपनी लंबित मांगों के समर्थन में एक दिवसीय हड़ताल कर जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में शिक्षकों की उपस्थिति ने आंदोलन को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया। आंदोलन के दौरान शिक्षकों ने शासन के नाम ज्ञापन सौंपकर विभिन्न मांगों के शीघ्र निराकरण की मांग की।शिक्षक संघर्ष मोर्चा द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी (TET) की अनिवार्यता समाप्त कर सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने, प्रथम नियुक्ति तिथि से पूर्व सेवा गणना कर समस्त लाभ प्रदान करने, केंद्रीय वेतनमान के आधार पर वेतन निर्धारण, राजपत्र संशोधन तथा ब्रिज कोर्स के माध्यम से बी.एड. प्रशिक्षण की व्यवस्था करने जैसी प्रमुख मांगें शामिल हैं।हड़ताल में शामिल शिक्षकों ने कहा कि वर्षों से उनकी समस्याएं लंबित हैं, जिसके कारण शिक्षक संवर्ग में असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार मांग उठाने के बावजूद अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है, जिससे उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।आंदोलन के दौरान टीईटी की अनिवार्यता का मुद्दा प्रमुखता से उठा। शिक्षकों ने सेवारत शिक्षक संवर्ग के लिए टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने तथा पदोन्नति में इसे बाध्यता नहीं बनाए जाने की मांग की। इसके अलावा पंचायत संवर्ग में प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा गणना कर पुरानी पेंशन सहित शिक्षा विभाग में लागू अन्य लाभ देने तथा वेतन विसंगति दूर करने की मांग भी जोर-शोर से उठाई गई।शिक्षकों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। जिलेभर से पहुंचे शिक्षकों की एकजुटता ने स्पष्ट संकेत दिया कि शिक्षक अब अपनी मांगों के समाधान के लिए संगठित और गंभीर हैं।

MOST POPULAR

HOT NEWS