- धरना प्रदर्शन के चलते आंगनबाड़ी केंद्र हो गए बंद
जगदलपुर बस्तर जिले के सुदूर वनांचल बास्तानार विकासखंड में महिला एवं बाल विकास विभाग की परियोजना अधिकारी उर्मिला खोब्रागढ़े की मनमानी और लापरवाही बच्चों पर भारी पड़ रही है। परियोजना अधिकारी के रवैए के खिलाफ आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ता एवं सहायिकाएं आंदोलन पर चली गई हैं। इसके चलते आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्था चरमरा गई है। विकासखंड के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में ताले लटक रहे हैं।

दरअसल विगत पांच वर्षों से बतौर प्रभारी विकासखंड में पदस्थ परियोजना अधिकारी आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ताओं से समन्वय बनाने और शासन की योजनाओं को सुचारू रूप से संचालित करने में नाकाम रही हैं। वर्तमान में स्थिति यह है कि क्षेत्र की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं परियोजना अधिकारी पर आतंक का राज कायम करने का आरोप लगाते हुए आंदोलित हो उठी हैं। कार्यकर्ताओं ने बताया कि परियोजना अधिकारी कभी भी आकस्मिक रूप से आंगनबाड़ी केंद्रों में उपस्थित होकर कार्यकर्ताओं को लगातार परेशान करने का कार्य करती हैं। जिसके चलते उन्हें बेवजह परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों के निरीक्षण के दौरान अनावश्यक आरोप लगाते हुए कारण बताओ नोटिस जारी कर कई कार्यकर्ताओं को बर्खास्त करने की धमकी भी परियोजना अधिकारी द्वारा दी जाती है। साथ ही प्रतिमाह मानदेय राशि और अन्य देयकों को बेवजह रोक दिया जाता है। इसके चलते आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को मानसिक प्रताड़ना के दौर से गुजरना पड़ रहा है।
विकासखंड के अधिकारियों की पदस्थापना पर गौर किया जाए तो 5 वर्षों में जनपद पंचायत बास्तानार के कई मुख्य कार्यपालन अधिकारियों की पद स्थापना और स्थानांतरण विकासखंड से हो चुका है, लेकिन परियोजना अधिकारी उर्मिला खोब्रागढ़े पांच साल से यहीं पदस्थ हैं। उन्हें को वर्तमान में दो विकासखंड संभालने की जिम्मेदारी दे दी गई है। उनके अधीन दरभा ब्लॉक और बास्तानार ब्लॉक शामिल हैं।लगातार 5 वर्षों से बास्तानार विकासखंड की प्रभारी होने की वजह से दोनों ही
विकासखंडों का शासकीय कार्य लगातार बाधित हो रहा है। दोनों ब्लॉकों में आंगनबाड़ी केंद्रों के कर्मचारियों के साथ परियोजना अधिकारी समन्वय बनाकर कार्य करने में अब तक नाकाम रही हैं। उनकी मनमानी और लापरवाही के चलते नौनिहालों के लिए शासन द्वारा संचालित योजनाओं का क्रियान्वयन भी प्रभावित हो रहा है। वर्तमान में बास्तानार विकासखंड की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं द्वारा परियोजना अधिकारी को हटाने की मांग को लेकर विकासखंड मुख्यालय में धरना प्रदर्शन किया जा रहा है। इसके चलते आंगनबाड़ी केंद्र बंद पड़े हुए हैं और महिला बाल विकास विभाग की लगातार किरकिरी भी हो रही है।



सभा को संबोधित करते हुए मंत्री कवासी लखमा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद आज अंदरूनी क्षेत्रों में सड़क, पानी, शिक्षा, चिकित्सा, बिजली की सुविधा मिल रही है, लोगों को वन अधिकार पट्टे दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पूर्व मैं कोर्रा पहाड़ गया था। पहले वहां बिजली, सड़क, स्कूल की सुविधा नही थी। मैं मोटर साईकल से गया था। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के प्रयास से इस गांव में आज बिजली, स्कूल, आंगनबाड़ी की सुविधा उपलब्ध हो गई है। जल्द ही सड़क का भी निर्माण किया जाएगा। आज कोर्रा पहाड़ गांव बदल रहा है। श्री लखमा ने ग्रामीणों से पूछा कि अभी आप लोगों को कैसा लग रहा है ? लोगों ने नक्सल प्रभाव कम होने की बात कही और बताया कि पहले राशन कार्ड काटने का काम किया जाता था, आज सभी का राशन कार्ड बनाने के साथ ही खाद्यान्न भी वितरण किया जा रहा है। पहले लोग घर से निकलने में डरते थे, आज लोग कहीं भी आ जा सकते हैं। रोड बनाने की मांग पर श्री लखमा ने कहा कि अंदर वालों से हम डरने वाले नहीं हैं। ग्रामीणों को सड़क, पानी, बिजली, शिक्षा, इलाज समेत सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने का काम हमारी सरकार कर रही है। उन्होंने आगे कहा कि आज के समय में रोड, पुल बनाना आवश्यक है। सड़क बनने से ही आपके गांव में विकास पहुंचेगा।एंबुलेंस, दवाई, खाद्यान्न व जरूरी सामानों की उपलब्धता व हॉस्पिटल जाने के साथ ही दूसरे गांव से जुड़ने के लिए रोड और पुल पुलिया बहुत जरूरी है। टेटराई जाने के लिए पक्की सड़क न होने के कारण गाड़ी नहीं पहुंच पाती है। एर्राबोर में टेटराई के लिए सड़क निर्माण की घोषणा मैने की थी। दिसंबर से मई के बीच रोड निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। मेड़वाई की रोड प्रस्तावित है, रेगडगट्टा में रोड का निर्माण चल रहा है आने वाले समय में सड़क मार्ग से बड़ी गाड़ी के जरिए जाऊंगा।उन्होंने कहा कि बारूवाड़ा और एर्राबोर की सबरी नदी में पुल बनाने का काम किया जाएगा। श्री लखमा ने कहा कि आज हमारी सरकार भूमिहीन किसानों, गायता, पुजारी, हाटपहरिया, मांझी, चालकी, कोटवार आदि को सात हजार रुपए सालाना मानदेय दे रही है। 2640 रु. क्विंटल में धान की खरीदी की जा रही है। आने वाले समय मे 3000 रुपए में धान की खरीदी की जाएगी। रोड, पुल निर्माण के साथ ही गरीब आदिवासियों की जेब मे सरकार की जनकल्याणकारी योजनों के माध्यम से पैसा पहुंचाने का काम किया जा रहा है। आज कोदो की 3200 रु. में तथा कोसरा की 3500 रु. में खरीदी की जा रही है। अंदरुनी क्षेत्र के गोलापल्ली, किस्टाराम, जगरगुंडा में हॉस्पिटल खोलने, आधार कार्ड, राशन कार्ड बनाने का काम कांग्रेस की सरकार कर रही है।