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मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में प्रसूता से अमानवीय बर्ताव

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  •  सिजेरियन के बाद वार्ड में शिफ्ट करते समय कर्मियों ने दिखाई संवेदनहीनता
  • ऑपरेशन से हुई डिलवरी, दर्द से तड़पती रही महिला

जगदलपुर डिमरापाल स्थित शासकीय मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल में में एक प्रसूता महिला के साथ अमानवीय बर्ताव किए जाने की घटना सामने आई है। ऑपरेशन से डिलवरी कराने के बाद दर्द से तड़पती महिला को दूसरे वार्ड में शिफ्ट करने के दौरान स्टाफ नर्स और वार्ड आया ने गंभीर लापरवाही बरती। पीड़ा से बेहाल महिला को बेड उपलब्ध कराने के बजाय घंटों व्हील चेयर पर बिठाए रखा गया।

बीते 8 दिसंबर को बस्तर जिले के अति संवेदनशील क्षेत्र कोलेंग निवासी सीतावती नाग को डिलवरी हेतु मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में एडमिट किया गया। उसका जटिल ऑपरेशन के बाद प्रसव हुआ। महिला को दूसरे दिन लेबर वार्ड से प्रसूति वार्ड में शिफ्ट करने के दौरान परिजनों से ही कह दिया गया कि मरीज को बेड से उठाकर व्हील चेयर पर बिठाओ। मौजूद कर्मियों ने महिला को स्ट्रेचर से ले जाने की जरूरत नहीं समझी। जबकि उस समय महिला की स्थिति काफी नाजुक थी और दर्द से कराह भी रही थी। परिजनों के आपत्ति करने पर नर्स और आया उनसे बदसलूकी पर उतर आए। जब दूसरे वार्ड में प्रसूता महिला को पहुंचाय गया, तो वहां कोई स्टाफ नर्स उपलब्ध नहीं थी। वार्ड आया मरीज को उसी हालात में व्हील चेयर पर छोड़कर मरीज़ के परिजनों से यह कहते हुए चलती बनी कि तुम लोग बेड पर अपनी चादर बिछाओ और मरीज को उठाकर खुद ही बेड पर रखो, यहां चादर नहीं मिलेगी। इस प्रकार लगभग 10 मिनट तक डिलवरी मरीज व्हील चैयर में दर्द से परेशान होती बैठी रही। पीड़िता के परिजनों ने स्टाफ नर्स के वार्ड में नहीं होने से हताश होकर मोबाइल फोन से वीडियो बनाकर सामाजिक कार्यकर्ताओं के माध्यम से मेडिकल कॉलेज के डीन को भेज दी। इसी बीच पहुंची स्टाफ नर्स परिजनों को डांटते हुए कहने लगी कि इस वक्त रात 8 बजे मरीज को तुम लोग वार्ड में लाओगे, तो कोई नहीं देखेगा। जब मामला डीन तक पहुंचा तो स्टॉफ नर्स एक दूसरे पर दोषारोपण करने लगीं। ड्यूटी पर तैनात नर्स, आया, वार्डबॉय में तालमेल का अभाव भी देखा गया। वार्ड में तैनात नर्स ने 10 दिसंबर को सुबह 7 बजे ट्रीटमेंट के दौरान महिला के परिजनों से दुर्व्यवहार करते हुए कहा कि तुम लोग वीडियो बनाकर शिकायत करते हो, अभी दवाई दे रही हूं, फिर से वीडियो बनाकर भेजो।

दूसरे राज्यों से भी जुड़े हैं स्टील प्लांट से लोहा चोरी के तार

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  •  पुलिस ने दर्ज किए पांच कर्मचारियों के बयान
  • ट्रक ड्राईवरों की तलाश चल रही है अनेक प्रदेशों में

अर्जुन झा

जगदलपुर नगरनार स्टील प्लांट से लोहा चोरी के तार अन्य राज्यों से भी जुड़े होने की खबर है। प्लांट के कुछ अधिकारी -कर्मचारियों, सीआईएसएफ जवानों और ठेकेदारों की संलिप्तता पर भी पुलिस की नजर है। पुलिस ने प्लांट प्रबंधन से लोहा निकासी के दस्तावेज मंगाए हैं। फरार ट्रक ड्राईवरों की तलाश के लिए कुछ प्रदेशों में बस्तर जिला पुलिस की टीमें भेजी गई हैं।

राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) के नगरनार स्टील प्लांट से बीते दिनों हुई लगभग 25 लाख रु. मूल्य के पिग आयरन चोरी के मामले में फिलहाल पुलिस के हाथ खाली हैं। खबर है कि प्लांट की लोडिंग साईट के सुपरवाईजर सहित वहां ड्यूटी करने वाले 5 कर्मचारियों के बयान पुलिस ने दर्ज कर लिए हैं। अब तक इस मामले में पुलिस को कोई खास सफलता नहीं मिली है। खबर है कि ट्रक चालक की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम दीगर राज्य रवाना की गई है। वाहन चालक के पकड़े जाने के बाद ही रहस्य से पर्दा उठ सकता है। विशेष सूत्रों से जानकारी मिली है कि एनएमडीसी के कुछ कर्मचारी लोहा माफिया से सांठगांठ कर लोहा चोरी को अंजाम दिलाते आ रहे थे। गिरोह के जरिए विगत दो माह से कच्चा लोहा चोरी का कारोबार चल रहा है। इससे सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ के जवानों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। ज्ञात हो कि नगरनार स्टील प्लांट से 8 दिसंबर को एक ही नंबर सीजी 04 एमके 9383 के दो ट्रकों को पिग आयरन की निकासी करते पकड़ कर सीआईएसएफ ने नगरनार पुलिस के हवाले किया था। दोनों टूक अभी पुलिस की अभिरक्षा में हैं और मामले की जांच नगरनार पुलिस कर रही है। पुलिस प्लांट के दस्तावेजों को भी खंगालने में भी जुटी है। प्लांट के कई कर्मचारियों से पूछताछ की जा चुकी है।

धोखाधड़ी का मामला दर्ज

स्टील प्लांट के शुरू होने के कुछ दिन बाद से ही लोहा माफिया सक्रिय हो गए थे। चर्चा है कि छत्तीसगढ़, ओड़िशा, प. बंगाल और महाराष्ट्र के लोहा कारोबारियों से प्लांट के एक अधिकारी के अच्छे संबंध हैं। प्लांट के कर्मचारियों की मदद से लोहा माफिया कच्चे लोहे की चोरी को अंजाम देने लगे थे। इसमें सीआईएसएफ के जवानों के भी लिप्त होने की चर्चा है। खबर है कि अब तक कई ट्रक पिग आयरन पार किया जा चुका है। इससे नगरनार स्टील प्लांट को अब तक करोड़ों का चूना लगाया जा चुका है। नगरनार थाने से मिली जानकारी के अनुसार पिग आयरन लदे दोनों ट्रक अभी पुलिस अभिरक्षा में हैं। मामले में धारा 420, 468, 471 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना की जा रही है। ट्रक चालकों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें कुछ राज्यों की ओर कूच कर चुकी हैं। चालकों की गिरफ्तारी से मामले का राजफाश हो जाएगा।

वर्सन

मंगाए गए हैं दस्तावेज

नगर पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने बताया कि पिग आयरन चोरी मामले में लोडिंग साईट के सुपरवाईजर सहित 5 कर्मचारियों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं। प्लांट के अधिकारियों से दस्तावेजों की मांग की गई है। दस्तावेजों की भी पड़ताल होगी।

विकास कुमार, सीएसपी, जगदलपुर

परीक्षा दे रहे बच्चों पर गिरा स्कूल की छत का प्लास्टर

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  • मिडिल स्कूल के 6 विद्यार्थी हुए मामूली रूप से घायल

कोंडागांव मिडिल स्कूल बनियागांव में परीक्षा देते बैठे बच्चों पर भवन की छत का प्लास्टर भरभरा कर गिर पड़ा। हादसे में कई बच्चों को मामूली चोटें आई हैं। घायल बच्चों को उपचार के लिए प्राचार्य ने अपने वाहन से तत्काल जिला चिकित्सालय भेजा।

शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बनियागांव की प्राचार्य ज्योति एक्का के मुताबिक विद्यालय में अर्ध वार्षिक परीक्षाएं चल रही हैं। परीक्षा के दौरान कक्षा छठवीं, सातवीं और आठवीं के विद्यार्थियों को भवन के एक कमरे में बिठाया गया था। इसी बीच दोपहर करीब 1 बजे उसी कमरे की छत का प्लास्टर उखड़कर बच्चों पर आ गिरा। इससे 6 बच्चों को मामूली चोट आई है। उन्हें प्राचार्य की कार से कोंडागांव अस्पताल भेजकर उनका प्राथमिक उपचार कराया गया। सभी बच्चे स्वस्थ हैं। विद्यालय में कक्षा छठवीं से आठवीं तक कुल 182 बच्चे अध्यनरत हैं। ग्रामीणों ने बताया कि इस शाला भवन का निर्माण सन 2000 में हुआ था। इन 23 वर्षों में भवन की हालत खस्ता हो गई है। छत काफी कमजोर हो चली है। छत और दीवारों से सीपेज की समस्या बनी रहती है। आएदिन छत के किसी न किसी हिस्से का प्लास्टर गिरते रहता है। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि शाला भवन में कभी भी गंभीर दुर्घटना हो सकती है। उन्होंने मिडिल और हायर सेकंडरी स्कूल के लिए नए भवन बनवाने की मांग की है।

अधिकारियों की गर्दन पर अभी भी कसा है नेताओं का ‘पंजा’

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  •  राजनैतिक दबाव में पंचायत सचिव को कर दिया बर्खास्त
  • सुकमा जिले के अधिकारी कर रहे हैं दबाव में काम

अर्जुन झा

जगदलपुर बस्तर संभाग के अधिकारियों की गर्दन पर अभी भी नेताओं का ‘पंजा’ कसा हुआ है। अधिकारियों पर दबाव डालकर पूर्व सत्ताधारी दल के नेता अपनी मर्जी के मुताबिक काम करा रहे हैं।पंचायत स्तर के जो कर्मचारी नेताओं के मनमाफिक काम नहीं करते, सरकारी कार्यों की रकम में धांधली कर हिस्सा नहीं देते उन्हें बर्खास्त करा दिया जाता है या फिर अधिकारियों के जरिए प्रताड़ित किया जाता है। पंजे का ऐसा ही खेल सुकमा जिले में भी चल रहा है। इस जिले में एक पंचायत सचिव को इसलिए बर्खास्त करा दिया गया क्योंकि उसने जनपद के अधिकारियों और नेताओं के कहे अनुसार निर्माण एवं विकास कार्यों की राशि में गड़बड़ी नहीं की और नेताओं व अफसरों को हिस्सा नहीं मिल पाया।

सुकमा जिले के कोंटा विकासखंड की तीन ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों की शिकायत पर सुकमा जिला पंचायत सीईओ देवनारायण कश्यप ने दो सदस्यीय टीम गठित कर पंचायत सचिवों से जुड़े मामले की जांच कराई थी। जांच में कथित रूप से आर्थिक अनियमितता पाए जाने पर पंचायत सचिव उदय भास्कर को बर्खास्त कर दिया गया। जिला पंचायत सीईओ की यह तत्परता सुुकमा जिले में चर्चा का विषय बन गई है। वहीं विगत चार वर्षों से एलमपल्ली पंचायत की जांच वाली फाईल सीईओ के दफ्तर के मेे धूल खाते पड़ी है। इस पंचायत के मामले की निष्पक्ष जांच कराने को लेकर साहब के हाथ पांव फूल जाते हैं। इसका मुख्य कारण राजनीतिक दबाव को बताया जा रहा है। कांग्रेस नेताओं के एजेंट बनकर काम करने वाले पंचायत सचिव पर जिले के अफसर भी मेहरबान हैं। सत्ता परिवर्तन होते ही भाजपा नेता अब पेंडिंग मामले की फाईल खुलवाने के लिए मंत्रिमंडल गठन का इंतजार कर रहे हैं। कोंटा ब्लाक की कामाराम, कोडासांवली एवं दुलेड ग्राम पंचायतों में विभिन्न विकास व निर्माण कार्यों में कथित अनियमितता की शिकायत ग्रामीणों द्वारा जिला पंचायत सीईओ से की गई थी। शिकायत की जांच के लिए जिला पंचायत सीईओ के आदेश पर दो सदस्यीय दल गठित किया गया था। जांच दल में सहायक परियोजना अधिकारी बलवंत सिंह मार्को एवं एक अन्य अधिकारी शामिल थे। जांच रिपोर्ट के आधार पर शासकीय राशि की गड़बड़ी आरोप में सीईओ श्री कश्यप ने पंचायत सचिव को बर्खास्त करने की कार्रवाई 30 नवम्बर 2023 को की है।

दबाव में बदला जांच अधिकारी

पहले मामले की जांच सुकमा जिले से सहायक जिला पंचायत सीईओ द्वारा निष्पक्ष रूप से की जा रही थी। खबर है कि कांग्रेस नेताओं की मर्जी के अनुसार जांच प्रतिवेदन न बनने पर आनन फानन में सहायक जिला पंचायत सीईओ को जांच प्रक्रिया से हटाकर जांच की जिम्मेदारी एक जूनियर कर्मचारी को सौंप दी गई थी। जूनियर कर्मचारी ने नेताओं के इशारे पर जांच रिपोर्ट आनन- फानन में तैयार कर अपने चहेते अफसर को सौंप दी। इसके बाद सचिव के खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई कर दी गई।

नहीं हुई निष्पक्ष जांच

बर्खास्त पंचायत सचिव उदय भास्कर ने आरोप लगाया है कि उनके साथ नाइंसाफी हुई है। राजनीतिक दबाव में निष्पक्ष जांच नहीं हुई और एकपक्षीय कार्रवाई कर दी गई। उदय भास्कर का कहना है कि जांच के दौरान उनका पक्ष तक नहीं लिया गया और न ही किसी प्रकार नोटिस दिया गया है। उन्होंने कहा कि तालाब निर्माण सहित अन्य कार्यों की मजदूरी राशि सरपंच, उप सरपंच एवं जनपद सदस्य की उपस्थित में प्रदान की गई है। राशि वितरण की पावती भी दी गई थी। श्री भास्कर ने आरोप लगाया है कि पंचायत के कुछ अधिकारी उन पर नियम विरूद्ध कार्य करने के लिए दबाव बनाते रहे हैं। ऐसा नहीं करने पर राजनीतिक दबाव में भेदभाव पूर्ण तरीके से जांच कर षड़यंत्र के तहत कार्रवाई की गई है। उन्होने कहा कि पूर्व सचिव द्वारा गबन की गई राशि का दोष उन पर मढ़ दिया गया है। उन्होने जांच दल पर आरोप लगाया है कि बदले की भावना से उन्हें फंसाया गया है।

तो खुल जाएगी कोंडागांव की फाईल

जिला पंचायत सीईओ ग्रामीणों की शिकायत पर जन भावना के अनुसार कार्य किया करते हैं, लेकिन राजनीतिक दबाव में आकर कई बार वे ग्रामीणों के भावना के विपरीत कदम उठाने के लिए भी मजबूर हो जाते हैं। कोंटा ब्लाक की एलमपल्ली ग्राम पंचायत से जुड़ी शिकायत पर भी ऐसा ही हुआ है। इस पंचायत के पूर्व सचिव द्वारा की गई गड़बड़ियों की जांच में भारी गड़बड़ी की गई है। अनियमितता उजागर होने के बाद भी मामला फाईलों में बंद है। खबर है कि एक राजनेता ने अधिकारी पर सचिव की अनियमितता की फाईल बंद करने का दबाव डाला है। अधिकारी को धमकाया गया कि अगर एलमपल्ली के पंचायत सचिव की फाईल खुली, तो कोंडागांव जिले में रहते तुम्हारे द्वारा की गई गड़बड़ी की फाईल भी खुलवा दी जाएगी। इस धमकी से अधिकारी के हाथ पांव फूल गए और उन्होंने पंचायत सचिव का मामला ही बंद कर दिया। वर्तमान में यह सचिव पूर्व मंत्री के गृह क्षेत्र में पदस्थ है।

पेंशनरों का नही लिया बयान

पेंशन भुगतान को लेकर ग्रामीणों द्वारा की गई शिकायत के आधार पर मामले की जांच कराई गई थी। जिन पेंशन धारकों को पेंशन की पात्रता है उनका बयान तक जांच के दौरान दर्ज नहीं किया गया। उन ग्रामीणों का बयान दर्ज किया गया है, जिनका पेंशन से कोई सरोकार नहीं है। यही हाल मजदूरी भुगतान मामले का भी है। जिन्हें पेंशन एवं मजदूरी का भुगतान बराबर किया गया है। इसकी पावतियां सचिव ने संभाल रखी है। निर्माण कार्यों में अनियमितता मामले में मूल्यांकन करने वाला अधिकारी एवं पंचायत इंस्पेक्टर भी संदेह के दायरे में है।

छात्र नेताओं ने किया विधायक लखेश्वर बघेल का स्वागत

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  •  इच्छापुर जोन के कार्यकर्ता और छात्र नेता पहुंचे निवास

जगदलपुर इच्छापुर जोन एवं पीजी कॉलेज छात्र संघठन के पदाधिकारी आज बस्तर विधायक लखेश्वर बघेल को बधाई देने उनके जगदलपुर निवास में पहुंचे।

आए लोगों ने विधायक लखेश्वर बघेल को बुके भेंटकर उनका अभिनंदन किया। बघेल ने कहा कि तीसरी बार फिर मुझे बस्तर विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं ने आशीर्वाद दिया है। समस्त क्षेत्र वासियों, एवं समस्त संगठनों को नमन करते हुए उनके प्रति आभार प्रकट करता हूं। मैं यह जीत बस्तर विधानसभा क्षेत्र की जनता और कार्यकर्ताओं को समर्पित करता हूं। आप सबके सहयोग से बस्तर में विकास की गति लगातार जारी रहेगी। बस्तर विधान सभा क्षेत्र से पुनः विधायक निर्वाचित होने पर विधानसभा स्तरीय कार्यकर्तााओं का दिल से आभार। यह जनता का प्रेम और आशीर्वाद है कि उन्होंने मुझे तीसरी बार विधायक के रूप में चुना है। यह जीत क्षेत्र की जनता और कांग्रेस के कर्मठ कार्यकर्ताओं की जीत है। इस दौरान लखेश्वर मंडावी, चैतराम कश्यप, सुलोकश्यप, सोनू कश्यप, सोनसाय कश्यप, सुकमन कुंजाम, हरि मंडावी, अयनेश्वर, तुलाराम, भोलाराम, लक्की, कुबेर, बिसु कश्यप, मंगल राम, सुकलाल मरकाम, माखन मरकाम,राहुल ध्रुव, भयरम कश्यप, लक्ष्मण कश्यप, राजू मुड़मा, कमलेश नाग, कांग्रेस कार्यकर्ता व ग्रामवासी उपस्थित थे।

विशेष सफाई अभियान में वार्डों की हो रही सफाई

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शहर को स्वच्छ व सुंदर बनाने के उद्देश्य से निगम प्रशासन लगातार सफाई अभियान चलाकर स्वच्छ व सुंदर बनाने में प्रयासरत है ,इस मुहिम को अग्रसर करते आयुक्त श्री हरेश मंडावी सतत निगरानी करते हुए स्वयं सुबह इस सफाई अभियान का निरीक्षण करते अधिकारियों एवं कर्मचारियों से चर्चा कर इसे सफल बनाने के योजना बनाकर सफाई व्यवस्था को व्यवस्थित करने का प्रयास कर रहे हैं । नगर निगम के द्वारा कलेक्टर के निर्देश पर चलाए जा रहे विशेष सफाई अभियान लगातार चलाए जाकर सफाई कर्मचारियों की गैंग बनाकर शहर के वार्डो में सफाई किया जा रहा है । जिससे वार्ड के नालियों की पूरी तरह सफाई की जा रही है । इस अभियान का वार्ड के लोगों के द्वारा काफी सराहना की किया जा रहा है ।

साथ ही सफाई कर्मचारी ,स्वच्छता दीदी ,एन यु एल एम की टीम सफाई करने के साथ वहां के रहवासियों एवं दुकानदारों को मुहिम से जोड़कर शहर को स्वच्छ सुंदर बनाने के लिए नालियों एवं सड़कों पर कचरा ना डालने का संकल्प दिलाया जा रहा है । इस सफाई अभियान से शहर की जनता का पूरा सहयोग मिलने के साथ अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है । आज इस अभियान को मोतीलाल नेहरू ,अटल बिहारी वाजपेई ,राजेंद्र नगर ,मदर टेरेसा ,व अन्य वार्डो में नालियों एवं पुलियों का सफाई कर्मचारियों से सफाई कर अभियान चलाया गया । स्वच्छता विभाग के हेमंत श्रीवास ,अजय बनिक ,दामोदर ,सुशील कर्मा व अन्य अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे ।

नारायणपुर जिले में चार नक्सली चढ़े पुलिस के हत्थे

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  • हत्या, आईईडी ब्लास्ट, मार्ग अवरुद्ध करने की वारदातों में रहे हैं लिप्त

जगदलपुर हत्या, आईईडी विस्फोट, मार्ग बाधित करने समेत अन्य गंभीर वारदातों में शामिल रहे चार नक्सलियों को गिरफ्तार करने में नारायणपुर जिला पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है।

पुलिस अधीक्षक पुष्कर शर्मा के नेतृत्व में नारायणपुर पुलिस लगातार नक्सल विरोधी अभियान चला रही है। इसी कड़ी में 4 संदेहियों को पकड़ा गया है। इनमें समलू कोर्राम निवासी हितुलवाड़, शंकर कश्यप निवासी गुमटेर, लखमा कोर्राम निवासी गुदाड़ी एवं धनसिंग कोर्राम निवासी बड़ेनहोड़ पारा कोंगेरा शामिल हैं। पूछताछ करने पर समलू कोर्राम और शंकर कश्यप ने इसी साल 7 एवं 9 अप्रैल को पेरमापाल व बाहकेर के मध्य ग्रामीणों तथा सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने के इरादे से किए गए आईईडी विस्फोट में शामिल होना स्वीकार किया है। इन दोनों घटनाओं पर थाना छोटेडोंगर में अलग अलग अपराध पंजीबद्व हैं।

लखमा कोर्राम ने 20 मार्च 2023 को मुख्य मार्ग पर धनोरा और ओरछा के मध्य पत्थर एवं लकड़ी रखकर आवागमन अवरूद्व करने की घटना में शामिल होना स्वीकार किया है। जिस पर थाना ओरछा में अपराध पंजीबद्व किया गया था। धनिसिंग कोर्राम ने बताया है कि उसने गत 4 नवंबर को कौशलनार साप्ताहिक बाजार में अन्य माओवादियों के साथ मिलकर रतन दुबे की हत्या की वारदात को अंजाम दिया था। इस मामले में थाना झारा में अपराध पंजीबद्व है। आरोपी समलू कोर्राम एवं शंकर कश्यप को थाना छोटेडोंगर एवं आरोपी लखमा कोर्राम को थाना ओरछा के अपराध एवं आरोपी धनसिंग कोर्राम को थाना झारा के अपराधिक प्रकरण में गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर न्यायालय पेश किया गया है। छोटेडोंगर थाने में समलू कोर्राम पिता पाण्डे कोर्राम उम्र 28 वर्ष निवासी हितुलवाड़ एवं शंकर कश्यप पिता सिंगलू कश्यप उम्र 25 वर्ष निवासी ग्राम गुमटेर के खिलाफ धारा 147, 148, 149, 307, 120 बी भादवि. 3, 5 वि.प.अधिनियम 10, 13, 16, 20, 23, 38, 39 यूएपीए के तहत जुर्म पंजीबद्ध है। लखमा कोर्राम पिता चैतूराम कोर्राम उम्र 42 वर्ष निवासी गुदाड़ी थाना ओरछा के खिलाफ धारा 147, 148, 149, 341, 431, 120 बी भादवि. 25 आए 3(2) लो.स.क्ष.नि.अधिनियम 8 (1)(3) (5) छग जन सुरक्षा अधिनियम के तहत मामला दर्ज है। वहीं धनसिंह कोर्राम पिता मुंगाराम कोर्राम उम्र 40 वर्ष निवासी बड़ेनहोड़पारा कोंगेरा थाना झारा के खिलाफ धारा 302, 34 भादवि, 25, 27 आर्म्स एक्ट 10, 13, 16, 20, 38, 39 यूएपीए का मामला दर्ज है।

विधिक सेवा प्राधिकरण के पैरालिगल वालिटियर्स के द्वारा मेला में आये नागरिकों को पांपलेट के माध्यम से कुल 30,000 हजार व्यक्तियों को विधिक जानकारी

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बालोद, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा संचालित योजनाओं के क्रियान्वयन एवं प्रचार-प्रसार हेतु तथा छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा जारी स्टेट प्लॉन आफ एक्शन के अनुसार जिला न्यायाधीश बालोद डॉ० प्रज्ञा पचौरी, अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बालोद के निर्देशानुसार एवं श्रीमती सुमन सिंह, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बालोद के मार्गदर्शन में राजाराव पठार ग्राम करेंझार में आयोजित यीर मेला के अवसर पर दिनांक 08 दिसंबर से 10 दिसंबर तक जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बालोद द्वारा विधिक जागरूकता के प्रचार-प्रसार हेतु स्टॉल लगाया गया है। जिसमें राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) द्वारा संचालित योजनाएं नालसा की योजनाएं आदिवासियों के अधिकारों का संरक्षण और प्रवर्तन के लिए विधिक सेवाएं योजना 2016, पीडित क्षतिपूर्ति योजना 2011 एवं पीडित क्षतिपूर्ति योजना 2018, महिला हेल्पलाईन की जानकारी, घरेलू हिंसा से महिलाओं की सुरक्षा अधिनियम 2005, साइबर काईम से बचाव, निःशुल्क विधिक सहायता व सलाह, नालसा का टोल फ्री नंबर 15100, सालसा का यूट्यूब चैनल जनचेतना निःशुल्क विधिक सहायता प्राप्त करने आदि के संबंध में बैनर के माध्यम से विधिक जानकारी प्रदान किया गया एवं सरल कानूनी शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य देख-रेख अधिनियम 2017 अन्य पुस्तकों के माध्यम से भी विधिक जानकारी प्रदान किया गया तथा दिनांक 16.12.2023 को आयोजित होने वाले नेशनल लोक अदालत के बारे भी जानकारी दिया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पैरालिगल वालिटियर्स के द्वारा मेला में आये नागरिकों को पांपलेट के माध्यम से कुल 30,000 हजार व्यक्तियों को विधिक जानकारी दिया गया।

आदिवासी मुख्यमंत्री देकर कांग्रेस को चारों खाने चित्त कर दिया भाजपा ने

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  • आखिरकार वैसा ही हुआ, जैसा श्रमबिंदु ने बताया था
  • अपनों को हराने के खेल ने कांग्रेस का ही बिगाड़ा खेल

अर्जुन झा

जगदलपुर आखिरकार वैसे ही हुआ, जैसा कि श्रमबिंदु ने पहले ही बता दिया था। भाजपा ने छत्तीसगढ़ को विष्णुदेव साय के रूप में पहला आदिवासी मुख्यमंत्री देकर कांग्रेस को चारों खाने चित्त कर दिया है। बस्तर के वरिष्ठ आदिवासी नेता दीपक बैज और मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार टीएस सिंहदेव बाबा को हरवाकर कांग्रेस के कुछ बड़े नेताओं ने छत्तीसगढ़ में अपनी ही पार्टी की बड़ी फजीहत करा दी है, कांग्रेस को कहीं का नहीं छोड़ा है। अब तो बस्तर ही नहीं, बल्कि समूचे छत्तीसगढ़ के आदिवासी भी भाजपा की जय जयकार करने लगे हैं। आने वाले लोकसभा चुनाव में और संभवतः भविष्य में होने वाले तमाम चुनावों में भी कांग्रेस की भद्द पिट सकती है। कांग्रेस के पास वक्त अभी भी है भाजपा से सबक लेकर आत्मघाती कदम उठाने से बचने के लिए। वरना कांग्रेस को इतिहास की पार्टी बनने से कोई नहीं बचा सकता।

श्रमबिंदु ने अपने पिछले अंक में ‘न रहेगा बांस, न बजेगी बंसी के फेर में बजा कांग्रेस का बैंड’ शीर्षक से एक विस्तृत खबर प्रकाशित की थी। इसके अलावा एक अन्य खबर में श्रमबिंदु ने ही राज्य को आदिवासी मुख्यमंत्री मिलने की संभावना भी जताई थी। ये दोनों खबरें शत प्रतिशत सही साबित हुईं। पहली खबर में बताया गया था कि मुख्यमंत्री की रेस से हटाने के लिए दिग्गज नेता टीएस सिंहदेव और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज की राजनीतिक हत्या करा दी गई। न रहेगा बांस, न बजेगी बंसी के चक्कर में कांग्रेस का ही बैंड बजवा दिया गया। टीएस सिंहदेव पहले से ही मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार रहे हैं। वहीं आदिवासी मुख्यमंत्री की मांग उठने पर दीपक बैज सबसे बड़ा चेहरा होते। भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए कांग्रेस के ही चंद नेताओं को अपने राजनैतिक अस्तित्व की चिंता सताने लगी थी। यही वजह है कि इन नेताओं टीएस सिंहदेव और दीपक बैज को हर हाल में विधानसभा का चुनाव न जीतने देने के लिए पूरी ताकत झोंक रखी थी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष, कांग्रेस के आदिवासी विभाग के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, बस्तर लोकसभा क्षेत्र के सांसद एवं बस्तर के तेजतर्रार आदिवासी नेता दीपक बैज कांग्रेसी क्षितिज पर दैदीप्यमान सितारे बनकर चमकने लगे थे। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और ज्यादातर पदाधिकारी तथा बड़े नेता भी दीपक बैज को पसंद करने लगे थे। यही बात छत्तीसगढ़ के उन कांग्रेस नेताओं को खटकने लगी थी, जो सत्ता के शिखर पर बने रहने के लिए आकुल व्याकुल रहते हैं। दीपक बैज का राजनैतिक अस्तित्व खत्म करने के लिए साजिशें रची जाने लगीं। इसके तहत दीपक बैज को चंद दिनों पहले हुए विधानसभा चुनाव में उनकी पुरानी सीट बस्तर के चित्रकोट से मैदान पर उतरवा दिया गया। दो बार इस विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके दीपक बैज मतदान के कुछ दिनों पहले तक आंधी की तरह छाए हुए थे। साजिशबाज नेताओं को जब लगने लगा कि दीपक बैज यह चुनाव भी जीत जाएंगे, तो उन्होंने साम, दाम, दंड, भेद की नीति अपना ली। बस्तर संभाग के ही एक बड़े नेता तथा निगम, प्राधिकरण में काबिज कुछ स्थानीय नेताओं को दीपक बैज का विजय रथ रोकने के काम में लगा दिया। अपने आका के फरमान पर अमल करते हुए इन पांच नेताओं ने रातों रात ऐसा चक्रव्यूह रच डाला कि दीपक बैज उसे भेद ही नहीं पाए। चित्रकोट क्षेत्र के गांव – गांव में जाकर इन कांग्रेस घाती नेताओं और उनके आदमियों ने कांग्रेस समर्थक मतदाताओं को बरगलाना शुरू कर दिया। मतदाताओं के बीच यह बात प्रचारित की गई कि एक व्यक्ति चार पांच पद सम्हाल नहीं पाएगा, क्षेत्र का वह विकास नहीं करा पाएगा, जनता को समय नहीं दे पाएगा। लोग बहकावे में आ गए और रातों रात बाजी पलट गई। दीपक बैज को हार का सामना करना पड़ा।

दीपक बैज से था अस्तित्व को खतरा

अगर दीपक बैज यह चुनाव जीत गए होते और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनने की स्थिति में आदिवासी मुख्यमंत्री की मांग उठती या फिर कांग्रेस आला कमान किसी आदिवासी विधायक को ही मुख्यमंत्री बनाने का फैसला कर लेता, तो निसंदेह दीपक बैज ही एकमात्र विकल्प होते। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए सत्ता लोभी चंद कांग्रेस नेताओं ने दीपक बैज को निपटवा दिया। दीपक बैज उच्च शिक्षित राजनेता हैं। उनमें काम करने का वो जज्बा है, जो बहुत कम नेताओं में देखने को मिलता है। उनमें सामर्थ्य, सोचने समझने की क्षमता, बिना लाग लपेट के अपनी बात रखने की कला और विरोधी दलों के भी लोगों का दिल जीत लेने की अनूठी प्रतिभा है। अगर वे एक बार मुख्यमंत्री बन जाते, तो कम से कम दो दशक तक उनके मुकाबले कांग्रेस में कोई दूसरा नेता खड़ा नहीं हो पाता। कांग्रेस के जयचंदों को बांसुरी की यह धुन रास नहीं आई और उन्होंने बांस को ही जड़ से खत्म कर दिया। ऐसा करके वे यह समझ बैठे हैं कि बांस ही नहीं रहेगा, तो बांसुरी कैसे बनेगी और बजेगी। मगर यह उनकी बड़ी भूल है। शायद वे यह नहीं जानते कि दीपक बैज उस हस्ती का नाम है जो खाक से उठकर फलक तक पहुंचा है। बस्तर का यह दीपक एक दिन छत्तीसगढ़ की राजनीति में सितारा बनकर चमकेगा।

निपटा दिए गए सबके सब

कांग्रेस पार्टी के नेता अपनी सारी ऊर्जा एक दूसरे को निपटाने में ही जाया कर देते हैं। इस तुच्छ राजनीति के शिकार एक अकेले दीपक बैज ही नहीं हुए हैं, बल्कि उन तमाम नेता भी बने हैं, जो कांग्रेस के स्वार्थी नेताओं के लिए चुनौती साबित होते। क्षुद्र राजनीति के शिकार नेताओं में सरगुजा राज परिवार के टीएस सिंहदेव, साजा के अपराजेय योद्धा रविंद्र चौबे, दुर्ग ग्रामीण के सहज सरल नेता ताम्रध्वज साहू, कवर्धा सीट के अल्पसंख्यक नेता मोहम्मद अकबर समेत कुछ अन्य शामिल हैं। 2018 का विधानसभा चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर जो घमासान चला था, उसकी अनुगूंज कांग्रेस के दिल्ली दरबार तक पहुंची थी।उस समय टीएस सिंहदेव और भूपेश बघेल मुख्यमंत्री पद के दावेदार थे। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने भूपेश बघेल को मुख्यमंत्री बनाकर टीएस सिंहदेव को यह कहकर तसल्ली दी थी कि ढाई साल तक भूपेश बघेल फिर अगले ढाई साल तक आप मुख्यमंत्री रहोगे। आखिर तक टीएस सिंहदेव बाबा को मुख्यमंत्री की कुर्सी नसीब नहीं हो पाई।

विधानसभा चुनाव के चंद माह पहले बाबा को उप मुख्यमंत्री बना दिया गया। इस बार अगर कांग्रेस की सरकार बनती, तो टीएस बाबा मुख्यमंत्री पद के सबसे प्रबल दावेदार होते। सिंहदेव को मुख्यमंत्री बनाना कांग्रेस हाईकमान के लिए मजबूरी बन जाती। बाबा को भी हराने के लिए साजिश वाला खेल खेला गया। यही नहीं बाबा की दुर्गति का नमूना कांग्रेस नेतृत्व के समक्ष पेश करने के लिए सरगुजा जिले के अन्य कांग्रेस प्रत्याशियों को भी हरवा दिया गया। वहीं सामान्य सीट जगदलपुर से कांग्रेस उम्मीदवार जतिन जायसवाल को महज इसलिए हरवाया गया कि वे टीएस सिंहदेव की पसंद के प्रत्याशी थे। इसी तरह सामान्य वर्ग के ब्राह्मण नेता रविंद्र चौबे, मुस्लिम समुदाय के वरिष्ठ नेता मोहम्मद अकबर, साहू समाज के वरिष्ठ विधायक ताम्रध्वज साहू को भी हराने के लिए कोई कसर बाकी नहीं रखी गई।

कांग्रेस के गाल पर तमाचा

छत्तीसगढ़ की सत्ता पर पूर्ण बहुमत के साथ वापसी कर चुकी भाजपा ने राज्य को पहला आदिवासी मुख्यमंत्री देकर कांग्रेस के गाल पर ऐसा तमाचा जड़ दिया है कि उसकी झन्नाहट से उबरने के लिए कांग्रेस छत्तीसगढ़ में अच्छी खासी सर्जरी करनी -करानी पड़ेगी। आदिवासी समुदाय के नेता विष्णुदेव साय को मुख्यमंत्री बनाकर भाजपा ने आदिवासियों के नाम पर राजनैतिक रोटी सेंकती आ रही कांग्रेस के आदिवासी वोट बैंक में बड़ी सेंध लगा दी है। कांग्रेस भले ही भाजपा पर दलित, आदिवासी, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक विरोधी होने का आरोप लगाती रही है, मगर सच्चाई कुछ और है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं पिछड़ा वर्ग से आते हैं। उनके मंत्रिमंडल और भाजपा संगठन में दलित, अजा अजजा, ओबीसी, अल्पसंख्यक सभी वर्गों को महत्व दिया गया है। राज्य को प्रथम आदिवासी मुख्यमंत्री मिलने से प्रदेश का पूरा आदिवासी समुदाय आल्हादित हो उठा है। कांग्रेस से जुड़े आदिवासी नेता और मतदाता भी भाजपा के इस कदम की प्रशंसा करते नहीं थक रहे हैं। इस वर्ग को अब भाजपा में उम्मीद की किरण नजर आने लगी है। कहीं ऐसा न हो कि छत्तीसगढ़ का आदिवासी समुदाय कांग्रेस से पूरी तरह छिटक जाएं। तब 2024 के लोकसभा चुनाव और 2028 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की जो दुर्गति होगी, उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। आदिवासी, दलित, ओबीसी, अनुसूचित जाति व अल्पसंख्यक कार्ड खेलती आ रही कांग्रेस को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। वहीं भाजपा छत्तीसगढ़ में इस कदर मजबूत हो जाएगी कि उसे चुनौती दे पाना भी कांग्रेस के लिए मुश्किल हो जाएगा।

अपराध नियंत्रण ब्यूरो ने मनाया अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस

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जगदलपुर के दलपत सागर परिसर में क्राइस्ट कॉलेज जगदलपुर व राष्ट्रीय मानवाधिकार अपराध नियंत्रण ब्यूरो ने मनाया अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस ।”पहचान : मेरा सम्मान मेरा अधिकार ” थीम ले कर नुक्कड़ नाटक के माध्यम से मानवाधिकारों के बारे में जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन क्राइस्ट कॉलेज जगदलपुर के छात्रों के द्वारा किया गया, ।

जिसका मुख्य आकर्षण का केंद्र ट्रांसजेंडर रहे, राष्ट्रीय मानवाधिकार अपराध नियंत्रण ब्यूरो के संभाग अध्यक्ष जगमोहन सोनी जी ने मानवाधिकार के मुख्य उद्देश्य सम्मान समानता और स्वतंत्रता के बारे में उपस्थित लोगों के अंदर जागरुकता लाई। आयोजन के दौरान क्राइस्ट कॉलेज जगदलपुर व राष्ट्रीय मानवाधिकार अपराध नियंत्रण ब्यूरो की पूरी टीम व शहर के कई गनमान्य नागरिक व छात्र छात्राएं भारी मात्रा में उपस्थित ‌‌हुए

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