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Breaking शासकीय कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य ने कॉलेज परिसर में फांसी लगाकर आत्महत्या की

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दुर्ग – शासकीय नागरिक कल्याण कॉलेज नंदिनी अहिवारा के प्रभारी प्राचार्य भुवनेश्वर नायक उम्र 60 वर्ष ने पुराने कॉलेज परिसर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है | घटना गुरुवार सुबह लगभग 8 से 9.30 बजे की है कॉलेज के स्टाफ जब कमरे में पहुंचे तो प्राचार्य का शव फंदे पर लटका हुआ मिला घटना की सुचना पुलिस को दी गई जानकारी मिलते ही नंदिनी थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुंच शव को नीचे उतार जांच में जुट गई है | इस प्रकार प्राचार्य द्वारा आत्महत्या से पूरा कॉलेज स्तब्ध है |

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कुलपति के निरिक्षण से तनाव में थे

प्राप्त जानकारी के अनुसार पिछले सप्ताह ही डॉ अरुणा पल्टा कुलपति हेमचन्द यादव विश्विद्यालय, दुर्ग औचक निरिक्षण के लिए कॉलेज का दौरा किया था निरिक्षण के दौरान कॉलेज में काफी सारी खामिया मिली थी जिस कारण कुलपति नाराज थी | उसी दौरान प्रभारी प्राचार्य भी अनुपस्थित थे जिसे देखते हुए कुलपति ने प्रभारी प्राचार्य को मिलने बुलाया था |

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नंदराज से अडानी की बिदाई का खाका तैयार,कल लग सकती है मोहर, रमन शासनकाल में नियम विरूध्द हुए थे खदान आवंटन

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जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के सर्वाधिक उग्रवाद प्रभावित बस्तर के दंतेवाड़ा जिले के बैलाडीला क्षेत्र में कुछ दिनों पहले सुर्खियों में आए नंदराज पहाड़ की लीज राज्य सरकार रद्द कर सकती है। कल राजधानी रायपुर में उक्त संबंध में उच्च स्तरीय बैठक आयोजित हुई है इस बैठक में एनएमडीसी के अध्यक्ष सुमित देव भी शामिल होने की संभावना है।

छत्तीसगढ़ सरकार एनएमडीसी और छत्तीसगढ़ मिनिरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के साझा उपक्रम से अडानी ग्रुप को बेदखल करने के लिए इस सौदे के तहत हुए समझौते को निरस्त करने का मन बना चुकी है।दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल- बैलाडीला क्षेत्र में एनएमडीसी की 13 नंबर लौह अयस्क डिपाजिट के नाम से यह लौह अयस्क परियोजना जानी जाती है। पिछले वर्ष इस परियोजना क्षेत्र में लौह अयस्क की खुदाई के लिए जैसे ही देश के प्रमुख औद्योगिक घराने अडानी समूह को ठेका मिला, वैसे ही आदिवासियों ने लौह अयस्क की खुदाई का विरोध करना प्रारंभ कर दिया था।

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बस्तर के लोगों ने इस लौह अयस्क परियोजना क्षेत्र में उत्खनन का पूरजोर विरोध किया यदि उक्त क्षेत्र में माइनिंग प्रारंभ की गई तो उनकी आस्था को ठेस पहुंचेगा ।इसके बाद वामपंथी उग्रवादी संगठन प्रतिबंधित माओवादी संगठन भी पर्दे के पीछे सक्रिय हो गया और परियोजना के विरोध में उग्र आंदोलन उठ खड़ा हुआ था। छत्तीसगढ़ सरकार ने आदिवासियों के उक्त विरोध को गंभीरता से लिया है।
आदिवासी समाज के मध्य एक पुख्ता और सकारात्मक संदेश देने के उद्देश्य से इस परियोजना को बंद कर सकती है।

1978 में हुई थी ठेका श्रमिकों की बेमुद्दत हड़ताल अविभाजित मध्यप्रदेश के संपूर्ण बस्तर जिले के दंतेवाड़ा में सन् 1978 में इसी इस परियोजना में लौह अयस्क की खुदाई बंद करने के विरोध में मजदूरों ने बेमियादी हड़ताल किया था। ठेका मजदूरों के इस उग्र आंदोलन के बाद पुलिस को गोली चलानी पड़ी थी जिसमें कुछ लोग मारे गए थे और कई घायल हो गए थे ।

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इस घटना को इतिहास में बैलाडीला गोलीकांड के नाम से जाना जाता है। दरअसल सन् 1978 के पहले अनूप चंद जैन कंपनी उक्त नंद राज पहाड़ पर लौह अयस्क का उत्खनन करा रही थी। लेकिन उस समय एनएमडीसी ने इस ठेका पद्धति को समाप्त करने का निर्णय लिया था जिसके बाद ठेका मजदूरों का असंतोष भड़का और यह संतोष गोलीकांड में परिणत हो गया।

ज्ञात हो कि एनएमडीसी बैलाडीला क्षेत्र में अपने किरंदुल कॉन्प्लेक्स के तहत 11बी, 14 नंबर और 11सी नामक तीन लौह-अयस्क परियोजनाओं का संचालन करती है। इसी प्रकार बचेली कॉन्प्लेक्स के अंतर्गत 10, 11ए, तथा पांच नंबर नामक लौह अयस्क खदानों में लौह अयस्क का खनन किया जा रहा है। कल रायपुर में आयोजित इस बैठक के बाद एनएमडीसी के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक सुमित देव बस्तर के नगरनार इस्पात परियोजना क्षेत्र के दौरे पर भी जायेगें। वे वहां नगरनार इस्पात संयंत्र के शीघ्र प्रारंभ किए जाने के संबंध में अधिकारियों के साथ बैठक भी करेंगे। यह पूरा मामला इसलिए भी दिलचस्प हो गया है।

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वैसे राष्ट्रीय स्तर पर इस पूरे मसले को इसलिए भी काफी महत्व मिल रहा है क्योंकि भाजपा की तत्कालीन रमन सिंह सरकार ने बैलाडीला कि उक्त लौह अयस्क खदान को ज्वाइंट वेंचर बनाकर पिछले दरवाजे से अडानी औद्योगिक समूह को सौंपा था । समझा जाता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नजदीकी होने के कारण अडानी औद्योगिक समूह को लाभ पहुंचाने की नियत से तत्कालीन सरकार ने उक्त करार को अंतिम रूप दिया था। इस कारण भी वर्तमान राज्य सरकार उक्त सौदे को निरस्त कर आदिवासी समाज का खैर ख़्वाब बनना चाहती है।

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प्रधान अध्यापिका को नहीं अपने स्कूल का ज्ञान, बच्चों से ज्ञापन लेकर बटोर रही सुर्खियां

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जगदलपुर। किसी भी स्कूल की देखरेख की जवाबदेही स्कूल के हेडमास्टर या प्राचार्य की होती है और इस हेतु बकायदा फंड भी मिलता है किंतु इस स्कूल की प्रधान अध्यापिका द्वारा सुर्खियों में आने जनप्रतिनिधियों की तरह बच्चों से ज्ञापन ले रही है तथा इसको बकायदा समाचार पत्र में भी प्रकाशित किया है। इस हेतु प्रधान अध्यापिका की जमकर किरकिरी हो रही है।

बस्तर ब्लॉक के ग्राम टाकरागुड़ा माध्यमिक शाला के 6वीं छात्र छात्राओं ने क्लास रूम में पंखे बंद होने और लाइट नहीं जलने को लेकर इसकी शिकायत हेडमास्टर राममणी गोयल से की और इसे जल्द जल्द से ठीक कराने को लेकर आवेदन दिया। अचानक छात्रों द्वारा दिए गए आवेदन को लेकर हेडमास्टर हरकत में आई और जल्द से जल्द इन समस्याओं को दूर करने की बात कही। अब प्रश्न यह उठता है कि क्या प्रधान अध्यापिका क्या कक्षाओं में भ्रमण नहीं करती या फिर राजनीतिक महत्वाकांक्षा इन साहिबा में कुलांचे भर रहा है। इस अवसर पर शिक्षिका तपस्या शुक्ला, देवाश्री कौशिक, सोनू झा, दुर्गेश्वरी बघेल मौजूद थे।

भारतकी आजादी का अमृत महोत्सव 75 वे वर्ष पर भिलाई इस्पात संयंत्र के लौह अयस्क खदान समूह द्वारा जन जागरूकता व कल्याण से संबंधित अनेक कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जा रहे

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भारतकी आजादी का अमृत महोत्सव75 वे वर्ष पर भिलाई इस्पात संयंत्र के लौह अयस्क खदान समूह द्वारा जन जागरूकता व कल्याण से संबंधित अनेक कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जा रहे हैं जिसमें लौह अयस्क समूह के पर्यावरण विभाग द्वारा राजहरा के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के विभिन्न शालाओं में जाकर छात्रों को पर्यावरण जागरूकता संबंधी जानकारी दी जा रही है साला के छात्रों द्वारा रैली के माध्यम से पूरे गांव में पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाने का प्रयास किया जा रहा है जिसके तहत दिनांक 2310 2021 को ग्राम साले के माध्यमिक विद्यालय के ग्राम साले के माध्यमिक विद्यालय के विद्यार्थियों को पर्यावरण जागरूकता संबंधी जानकारी देकर निबंध प्रतियोगिता के माध्यम से प्लास्टिक से जन सामान्य खेत खलिहान तथा पशुओ द्वारा इसके खाने से होने वाले हनी के संबंध में जानकारी दी जा रही है तथा रैली के रूप में भ्रमण कर बैनर के माध्यम से ग्रामीणों को जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है इसी कड़ी में दिनांक 25 दस 2021 को ग्राम बिटाल के माध्यमिक विद्यालय में छात्रों को इसी प्रकार की जानकारी के साथ पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम कराया गया |

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इसी कड़ी में भारत की आजादी का अमृत महोत्सव के 75 में वर्ष के अवसर पर व राज्योत्सव के उपलक्ष में 1 नवंबर 2021 को एक दिन का मुफ्त स्वास्थ शिविर का आयोजन स्थानीय सिटीजन क्लब में किया जा रहा है जिसमें ए एम आई हॉस्पिटल भिलाई के विभिन्न विशेषज्ञ डॉक्टरों जैसे ह्रदय रोग विशेषज्ञ हड्डी रोग विशेषज्ञ नेत्र रोग विशेषज्ञ नाक कान गला रोग विशेषज्ञ शल्यक्रिया विशेषज्ञ तथा जनरल मेडिसिन विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा संबंधित बीमारियों की जांच व सलाह एवं दवाइयां मुफ्त दी जाएगी समाचार पत्रों के माध्यम से राजरा एवं आसपास के क्षेत्र के जन सामान्य से लौह अयस्क खदान समूह अपील करता है कि परीक्षण शिविर का अधिक से अधिक संख्या में लाभ उठाएं खासकर कोण से प्रभावित व्यक्ति अवश्य ही इस चिकित्सा शिविर का लाभ लें |

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अमृत महोत्सव के अवसर पर खान प्रशिक्षण एवं सुरक्षा विभाग के सभागार में महिलाओं के लिए दिनांक 30 2021 को 1 दिन का कार्यशाला एवं प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया जा रहा है जिसमें नागरिक सुरक्षा आपदा प्रबंधन प्रथमोपचार बचाओ सेवा घरेलू सुरक्षा घरेलू उपकरण व विद्युत सुरक्षा के संबंध में विस्तार से जानकारी दी जाएगी अंत में प्रश्न उत्तर कार्यक्रम भी किया जाएगा जिससे महिलाओं में विभिन्न सुरक्षा संबंधी सजगता लाया जा सके यह प्रशिक्षण बीएसपी के मानव संसाधन विभाग के संकाय द्वारा प्रदान किया जाएगा |

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पुलिस अधीक्षक गिरिजा शंकर जायसवाल ने नारायणपुर पुलिस द्वारा संचालित निःशुल्क फिजिकल अभ्यास और कोचिंग मे शामिल आरक्षक बस्तर फाईटर भर्ती के अभ्याथियों से मिलकर किया मार्गदर्शन

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एसपी गिरिजा शंकर जायसवाल ने कहा बस्तर फाईटर में आरक्षक की नौकरी मेरिट के आधार पर लगेगी

आज दिनांक 27.10.2021 को एसपी गिरिजा शंकर जायसवाल ने नारायणपुर पुलिस द्वारा उप निरीक्षक संवर्ग भर्ती और आरक्षक बस्तर फाईटर भर्ती हेतु संचालित निःशुल्क फिजिकल अभ्यास और कोचिंग के अभ्याथियों से मिलकर उनका मार्गदर्शन किया। इस दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नीरज चन्द्राकर, रक्षित निरीक्षक दीपक साव, निरीक्षक मालिक राम, निरीक्षक आकाश मसीह सहित प्रशिक्षण टीम के अधिकारी/कर्मचारी व पुलिस भर्ती की तैयारी करने वाले लगभग 450 अभ्यार्थी डीआरजी ग्रेट हाॅल, नारायणपुर में उपस्थित रहे। इस दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नीरज चन्द्राकर ने भी हाई स्कूल ग्राउण्ड में चल रहे फिजिकल अभ्यास की समीक्षा करते हुए भर्ती के दौरान फिजिकल टेस्ट और परीक्षा में आने वाले संभावित प्रश्नों की तैयारी के संबंध में बारीकियों से अवगत कराया। उल्लेखनीय है कि बस्तर संभाग के सभी जिलों में आरक्षक बस्तर फाईटर की भर्ती प्रक्रिया जारी है, इसके तहत् जिला नारायणपुर में 300 पदों के विरूद्ध भर्ती प्रक्रिया चल रही है।

पुलिस अधीक्षक जायसवाल ने अभ्यार्थियों से कहा कि ये भर्ती जिला नारायणपुर के मूल निवासियों के लिये पहली बड़ी भर्ती है जिसमें केवल 300 स्थानीय युवाओं को नियुक्ति प्रदान की जाएगी। इस भर्ती की सबसे खास बात ये है कि इस भर्ती में स्थानीय बोली, हल्बी और गोण्डी के जानकार को 20 अंक बोनस भी प्रदान किये जायेंगे। आरक्षक बस्तर फाईटर के 300 पदों के विरूद्ध भर्ती में जिला नारायणपुर का कोई भी निवासी समान रूप से प्रतियोगिता में भाग लेकर फिजिकल टेस्ट, लिखित परीक्षा, स्थानीय बोली के ज्ञान और साक्षात्कार में प्राप्त अंकों के आधार पर मेरिट हासिल कर अपना नियुक्ति सुनिश्चित कर सकता है। उन्होनें कहा कि यह भर्ती पूरी तरह से पारदर्शी और भ्रष्ट्राचार मुक्त होगा। 

जायसवाल ने अभ्यार्थियों का मनोबल ऊँचा करते हुए कहा कि “आरक्षक बस्तर फाईटर की यह भर्ती न सिर्फ आपको देश-प्रेम और राज्य की सेवा करने अवसर प्रदान करेगी वरन् आप सबके लिये गरीमामय जीवन जीने, आर्थिक आजादी और सामाजिक स्टेटस प्रदान करने सहित आत्म निर्भर होने का भी अवसर प्रदान करती है।”

राजहरा खदान समूह भ्रष्टाचार का बना अड्डा, ठेका श्रमिकों का हो रहा खुलेआम शोषण

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केंद्रीय सरकार के सार्वजानिक उपक्रम महारत्न कंपनी सेल के इकाई भिलाई इस्पात संयंत्र के बंधक खदान राजहरा खदान समूह वर्तमान में खुलेआम भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है। यहाँ कार्यरत अधिकांश अधिकारी ठेकेदारों के साथ मिलकर न केवल ठेका श्रमिकों का खुलेआम शोषण कर रहे हैं बल्कि कंपनी के सार्वजानिक पैसे को अपना मान कर खुलेआम धांधली कर रहे हैं। भा.म.सं. से सम्बद्ध खदान मजदूर संघ भिलाई के अध्यक्ष (केंद्रीय) एम.पी.सिंह ने इस सम्बन्ध में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि आज राजहरा खदान समूह के हर चार में से दो अधिकारी खुले आम भ्रष्टाचार में लिप्त हैं ।

वर्ष 2020 में संघ ने भ्रष्टाचार का एक प्रकरण स्थानीय प्रबंधन के मुखिया मुख्य महाप्रबंधक खदान के सामने लाते हुए इसमें लिप्त अधिकारीयों पर समुचित कारवाई करने की मांग की थी। प्रकरण का संक्षिप्त विवरण देते हुए उन्होंने कहा कि राजहरा क्रशिंग प्लांट में एम एस राजहरा इंजीनियरिंग वर्क्स को मैन पावर सप्लाई का काम मिला था जिसका देख रेख ठेका कंपनी के तरफ से श्री अनिल यादव कर रहे थे एवं प्रबंधन के तरफ से उक्त कार्य का देख रेख तत्कालीन उपमहाप्रबंधक प्लांट श्री सुनाराम बास्के कर रहे थे। उक्त ठेका में कार्यरत श्रमिकों द्वारा संघ को यह शिकायत मिली कि उन्हें अर्धकुशल की जगह अकुशल श्रेणी के कर्मी का वेतन भुगतान किया जा रहा है। इस सम्बन्ध में जब संघ ने जानकारी इकट्ठा की तब यह बात सामने आयी कि उक्त ठेके में श्री सुनाराम बास्के एवं ठेका कंपनी के संचालक श्री अनिल यादव द्वारा षड्यंत्र रचकर एक तरफ खुले आम ठेका श्रमिकों का शोषण किया जा रहा था तो दूसरी तरफ कंपनी के सार्वजानिक पैसे को अपना समझते हुए कंपनी के साथ आर्थिक धोखाधड़ी भी की जा रही थी जिसमे एक तरफ मस्टर रोल में कम हाजिरी दिखाई जा रही थी तो दूसरी तरफ बिल में पूरे मैनडेज का भुगतान किया जा रहा था।

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इस सम्बन्ध में दस्तावेजिक सबूतों के साथ संघ के अध्यक्ष एम.पी.सिंह ने मुख्य महाप्रबंधक खदान के समक्ष प्रकरण को रखते हुए इसमें लिप्त अधिकारी श्री सुनाराम बास्के एवं ठेका कमपनी के संचालक अनिल यादव पर समुचित कारवाई करने की मांग की थी लेकिन किसी प्रकार की कार्रवाई न होते देखत संघ के अध्यक्ष ने मामले को कार्यपालक निदेशक (खदान एवं रावघाट) तथा प्रभारी निदेशक बी.एस.पी के समक्ष भी रखते हुए कारवाई की मांग की जिसपर आश्वासन तो दिया गया किन्तु वास्तविकता में कुछ किया नहीं गया तब संघ ने मामले की शिकायत सेल चेयरमैन से भी की जिसपर मामले में लिप्त व्यक्तियों पर समुचित कारवाई करने हेतु स्थानीय प्रबंधन को कहा गया किन्तु इसके बाद भी मुख्य महाप्रबंधक खदान द्वारा कोई कारवाई नहीं की गयी। तब संघ के अध्यक्ष एमपी सिंह ने मामले को बीएसपी के विजिलेंस विभाग के समक्ष रखते हुए कारवाई की मांग की।

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विजिलेंस विभाग द्वारा किये जा रहे कारवाई के बीच ही सुनाराम बास्के को उपमहाप्रबंधक से पदोनत्त करते हुए महाप्रबंधक प्लांट बना दिया गया, जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि कंपनी का आर्थिक नुक्सान पहुंचाने वाले अधिकारियों का प्रमोशन करके उनके कृत्यों को सही साबित करने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है। जबकि सुनाराम बास्के और अनिल यादव द्वारा सुनियोजित तरीके से कंपनी को चूना लगाकर अपना जैब भरा है कायदे से तो ईस आर्थिक धोखाधड़ी के लिए कंपनी के उच्च अधिकारियों को सुनाराम बास्के और अनिल यादव के ऊपर अपराध पंजीबद्ध कराना था किन्तु खदान के उच्च अधिकारी तो ईनको संरक्षण देने में लगे रहे जिसका जीवंत उदाहरण ये है कि विजिलेंस जांच के बीच सुनाराम बास्के को प्रमोशन देना है जबकि राजहरा खदान में किसी भी ठेकेदार द्वारा किसी तरह की गड़बड़ी करने पर उसे कंपनी से डी रजिस्टर किया जाता है और आर्थिक भ्रष्टाचार करने पर जिम्मेदार अधिकारी और ठेकेदार पर अपराध पंजीबद्ध कराना चाहिए। किंतु इस मामले में ऐसा बिल्कुल भी नहीं किया गया , जबकि यहां प्रमाणिक आर्थिक अपराध है।पर ईसपर कंपनी के अधिकारियों द्वारा किसी तरह की कार्यवाही का न करना ईसमे उच्च अधिकारियों की सलंग्लता को दिखाता है, जबकि अभी कुछ माह पूर्व दस्तावेज की ऐसी गड़बड़ी अर्पित एसोसियेट भिलाई द्वारा करना सामने आया था तब उस पर कार्रवाई करते हुए उसे भी बीएसपी से परमानेंट डी रजिस्टर कर दिया गया था और कंपनी का वेंडर कोड भी हमेशा के लिए रद्द कर दिया गया था किन्तु ठेकेदार अनिल यादव के ऊपर किसी तरह की कार्यवाही का न करना कंपनी के उच्च अधिकारियों की मिलीभगत को दिखाता है।

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बीएसपी के उच्च अधिकारियों द्वारा किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं करने पर संघ के अध्यक्ष एम.पी.सिंह ने मामले को कलेक्टर बालोद जिला जन्मजेय महोबे के संज्ञान में लाते हुए दोषियों पर समुचित कारवाई करने की मांग की। प्रकरण की जानकारी लेते हुए कलेक्टर बालोद ने मामले की जांच हेतु स्थानीय पुलिस थाने में संघ के आवेदन को भेज दिया। इस तारतम्य में संघ का एक प्रतिनिधिमंडल स्थानीय पुलिस प्रशासन के मुखिया सी.एस.पी राजहरा श्री मनोज टिर्की से मुलाकात की और मामले की जांच करते हुए दोषी व्यक्तियों पर समुचित कानूनी कारवाई करने का निवेदन किया जिसपर सी.एस.पी महोदय ने कहा कि मामले की जांच जारी है और शीघ्र ही समुचित कारवाई की जावेगी। इस सम्बन्ध में संघ को यह भी जानकारी मिली है कि उक्त भ्रष्टाचार में केवल महाप्रबंधक प्लांट सुनाराम बास्के ही नहीं बल्कि उनसे नीचे के अधिकारी भी शामिल हैं। इसका पुख्ता प्रमाण इसी बात से होता है कि सुनाराम बास्के के अनुपस्थिति में उक्त ठेका कार्य के देख रेख करने वाले अधिकारी ने भी ठेकेदार अनिल यादव को लाभ पहुंचाने के लिए गलत दस्तावेज, फर्जी बिल, और मास्टर रोल पर हस्ताक्षर कर कंपनी को आर्थिक नुक्सान पहुंचा कर अपना जैब भरा है ये वही कार्य है जो सुनाराम बास्के द्वारा लगातार अट्ठारह महीने से किया जा रही था और कंपनी को चूना लगाया जा रहा था। जिससे साफ पता चलता है कि कंपनी को चूना लगाने के लिए सुनियोजित तरीके से सुनाराम बास्के और उनके अधिनिस्थ अधिकारी एवं ठेकेदार अनिल यादव ने गलत दस्तावेज प्रस्तुत कर कंपनी से पैसा निकाल कर गबन किया है।

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कोरोना एवं निमोनिया के संभावित लक्षण समान होने के कारण लोगों में असमंजस, दशहरा उत्सव के पश्चात निमोनिया जैसे लक्षण वाले बच्चों की संख्या अस्पताल में बढ़ी

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जगदलपुर

बस्तर जिले में दशहरा महोत्सव के समाप्ति के पश्चात कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या में काफी इजाफा होने की खबरें सामने आ रही हैं. जिला प्रशासन द्वारा जारी स्वास्थ्य बुलेटिन में भी बताया गया है कि पिछले तीन दिनों के अन्तराल में कोरोना संक्रमितों की संख्या शून्य से बढ़कर 10 हो गयी है. वहीँ, डिमरापाल मेडिकल कॉलेज से आने वाली ख़बर ने लोगों को चिंता में डाल दिया है.

जानकारी के अनुसार, करीब 9 स्वास्थ्य कर्मचारी कोरोना से संक्रमित पाए गए हैं. जिन्हें होम आइसोलेशन में रखा गया है. यह जानकारी कोविड प्रभारी नवीन दुल्हानी द्वारा दी गयी है. बताते हैं कि किसी पार्टी में सम्मलित होने गए यह स्वास्थ्य कर्मचारी कोरोना से संक्रमित हो गए. हालाँकि, बस्तर जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोविड से बचाव हेतु पूरी व्यवस्था का दावा किया जा रहा है, लेकिन दशहरा उत्सव के पश्चात ही लगातार कोरोना संक्रमितों में वृद्धि होने के संकेत से संक्रमण के तीसरे दौर की सम्भावना से इंकार नहीं किया जा सकता है.

राजधानी रायपुर के वरिष्ठ चिकित्सकों द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार, कोरोना संक्रमण के तीसरे दौर में बच्चों पर इसका प्रभाव ज्यादा पड़ने की सम्भावना व्यक्त की गयी है. उनके अनुसार, 4 से 6 वर्ष के बीच सर्दी-खांसी, बुखार जैसे लक्षण दिखने पर उसे निमोनिया मानकर उसका इलाज किया जा रहा है. लेकिन, कोरोना संक्रमण के दौरान लगभग ऐसे ही लक्षण दिखने पर कई चिकित्सक अब निमोनिया रोग के दृष्टिकोण से उसका इलाज कर रहे हैं. हालाँकि, महारानी अस्पताल के प्रभारी अधीक्षक डॉ. संजय प्रसाद के अनुसार, कोरोना के लक्षण एवं निमोनिया से पीड़ितों के लक्षण में कोई समानता नहीं है, ऐसा कहा जा रहा है. लेकिन, शहर के कई निजी चिकित्सालयों के चिकित्सक इस बात से इत्तेफाक नहीं रख रहे हैं. उनका कहना है कि सर्दी-खांसी, बुखार जैसे लक्षण दिखने पर तत्काल कोरोना की जांच के बाद ही निमोनिया अथवा अन्य रोगों का इलाज करना चाहिए.

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पिछले माह से अब तक गणेश, दुर्गा पूजा के साथ ही दशहरा उत्सव के दौरान शहर के साथ-साथ ग्रामीण अंचलों में भी पूजा-पाठ के दौरान काफी भीड़ का एकत्र होना भी कोरोना संक्रमण के पुनः वापस होने की सम्भावना को जन्म दे रहा है. महारानी अस्पताल के प्रभारी अधीक्षक ने एक जानकारी में इस बात को स्वीकार किया है कि निमोनिया जैसे लक्षण वाले कई बच्चे अस्पताल में इलाज हेतु आ रहे हैं. लेकिन, इनमें कोरोना संक्रमण से सम्बंधित कोई लक्षण नहीं पाए गए हैं. एक दिन पूर्व ही जिला कलेक्टर द्वारा कोरोना से सम्बंधित वैक्सीन लगाने हेतु 26 अक्टूबर को कोरोना टास्क फ़ोर्स की बैठक बुलाकर टीकाकरण बढाए जाने पर जोर देने को कहा गया था. उनका कहना था कि कोरोना की संभावित तीसरी लहर से बचने के लिए टीकाकरण ही सबसे अधिक सशक्त उपाय है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि त्योहारी सीजन के दौरान बाज़ार में उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए जांच में भी तेज़ी लायी जाए.

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लेकिन, अगर सरकार चिकित्सालय एवं निजी चिकित्सालय में निमोनिया जैसे लक्षण वाले बच्चों की बढती संख्या पर ध्यान नहीं देकर उसे हलके में लिया गया तो कोरोना संक्रमण के तीसरी लहर की सम्भावना से इंकार नहीं किया जा सकता है.

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सड़क निर्माण कार्य बावड़ी में किया जा रहा लीपापोती कार्य

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जिला मुख्यालय नारायणपुर के अंतर्गत ग्राम बावड़ी से गोटा बेनूर पहुंच मार्ग तक डामर एवं सीसी सड़क के दोनो ओर मुरूम डाला गया हैं। और गोटा बेनूर पहुंच मार्ग के बाद डामर सड़क के दोनो ओर लाल एवं पीली मिट्टी से बाजार पारा ग्राम बोगला तक के डामर सड़क के दोनो ओर मिट्टी डालकर ट्रैक्टर से फैलाया जा रहा हैं जो पूर्ण रूप से लीपापोती सड़क निर्माण को दर्शा रहा है । अब वहाँ के ग्रामीणों के समझ मे यह नही आ रहा हैं कि सड़क के दोनो ओर मिट्टी डालने का काम चल रहा हैं या मुरूम डाला जा रहा है समझ से परे प्रत्यक्षदर्शियों के बताए अनुसार काम कराने वाले मुंशी से ठेकेदार का नाम पूछा गया तो बोला कि बाहर का ठेकेदार शर्मा द्वारा कार्य किया जा रहा हैं, फिर दोबारा ठेकेदार का नाम पूछा गया तो बचाव के करते मुंशी ने कहा कि ठेकेदार का नाम मालूम नही हैं। इस प्रकार गुणवत्ता हीन सड़क कार्य में ठेकेदार द्वारा किया जा रहा कार्य विभाग से जुड़े अधिकारी जाकर वहा देखे संज्ञान में लेवें की सड़क निर्माण कार्य मे इस प्रकार लीपापोती कार्य की जानकारी ले मुरूम डाल रहे हो या मिट्टी ।

अंतर्राज्यीय बस स्टैंड में आरटीओ व पुलिस प्रशासन के बीच तालमेल का अभाव, रोजाना खामियाजा भुगत रहे यात्रीगण

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जगदलपुर

अंतर्राज्यीय बस स्टैंड एक बार फिर अपनी अव्यवस्थाओं को लेकर चर्चा का केंद्र बना हुआ है. विगत कई वर्षों से निगम, पुलिस व स्थानीय प्रशासन द्वारा इसकी व्यवस्थाओं को सुधारने कई कवायद किये जा रहे हैं, लेकिन इस बस स्टैंड की हालत में अब तक कोई ख़ासा सुधार नहीं दिखाई दे रहा है. अब तो जनता भी थकहार कर इस बस स्टैंड को राम भरोसे कहावत से जोड़ने लगी है.

दरअसल, इस बार दीगर कारणों से यह बस स्टैंड चर्चे में है. दो वर्षों के कोरोनाकाल और लॉकडाउन के बाद यहाँ पर अंतर्रजियीय यात्रियों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है. जिसके चलते ऑटो चालक इन यात्रियों से मनमाना दर वसूलने लगे हैं. विशेषकर रात्रिकालीन बसों से देर रात यहाँ पहुंचने वाले यात्रियों को रोजाना इन ऑटो चालकों से दो-चार होना पड़ता है. कई दफा तो स्थिति काफी विषम हो जाती है. ये ऑटो चालक अपने ग्राहकों और इनके सामान को जबरन अपने ऑटो में डालने और यात्रियों के साथ खींचतान करने से भी गुरेज नहीं करते, जिसके चलते झड़प की स्थिति भी निर्मित हो जाती है.

ताज्जुब की बात तो यह है कि यहाँ स्थित पुलिस चौकी प्रभारी भी ऑटो चालकों के इन सब हरकतों से इतने तंग आ चुके हैं की अब वे अपनी जिम्मेदारियों का पूरा ठीकरा आरटीओ विभाग पर फोड़ने लगे हैं. उनका कहना है कि कई दफा ऑटो चालकों को समझाईश दी जा चुकी है बावजूद, स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा है.

इधर आरटीओ विभाग की उदासहीनता के चलते इन ऑटो चालकों के हौसले दिनोदिन आसमान छूने लगे हैं. बहरहाल, ऑटो चालकों, आरटीओ, निगम और पुलिस विभाग के बीच यात्री परेशान हो रहे हैं. यहाँ यह कहना लाजमी हो जाता है कि कुछ दिन पूर्व ही पुलिस प्रशासन एवं आरटीओ के तालमेल से ऑटो चालकों को समझाईश के साथ यात्रियों से मनमानी रकम नहीं लेने एवं उन्हें निर्धारित जगह पर खड़े होने की हिदायत भी दी गयी थी लेकिन ऑटो चालक अपने पुराने रवैय्ये से बाज नहीं आ रहे हैं जिसके कारण यात्री एवं ऑटो चालकों के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न हो रही है. समय रहते अगर आरटीओ विभाग, पुलिस प्रशासन से सहयोग लेकर अगर ऑटो द्वारा आवागमन करने का दर निर्धारण नहीं करती है तो कभी भी इस अंतर्राज्यीय बस स्टैंड में भारी विवाद की स्थिति निर्मित हो सकती है.

पुलिस महानिदेशक के आदेश की खुलेआम अवहेलना, शहर में धड़ल्ले से जारी है ओपन-क्लोज़ का कारोबार

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जगदलपुर

सरकार बदलने के साथ ही नए पुलिस महानिरीक्षक द्वारा पुलिस विभाग को फरमान जारी किया गया कि समस्त जिले के पुलिस अधीक्षक अपने क्षेत्रों में अवैध रूप से संचालित किये जाने वाली कार्यों पर ध्यान देकर तत्काल कार्यवाई करें, अगर जानकारी के बावजूद ऐसे कार्य किसी भी जिले में संचालित करने की बात सामने आएगी तो उस जिले के पुलिस अधीक्षक पर कार्यवाई की जाएगी. लेकिन, बस्तर जिले के जगदलपुर शहर के बोधघाट थाना अंतर्गत आने वाले कई क्षेत्रों में खुलेआम सट्टा का सञ्चालन किया जा रहा है.

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कुछ माह पूर्व ही डीजीपी के आदेश पर पूर्व पुलिस अधीक्षक द्वारा जगदलपुर शहर के तमाम क्षेत्रों में सट्टा के अवैध सञ्चालन को बंद करा दिया गया था. साथ ही साथ कुछ खाईवाल पर कार्यवाई कर उन्हें यह क्षेत्र छोड़ने पर मजबूर कर दिया गया था. किन्तु, पुलिस अधीक्षक बदलने के साथ ही बोधघाट थानाक्षेत्र में सट्टा सञ्चालन की गतिविधियाँ बढ़नी शुरू हो गयी है.

जानकारी के अनुसार, बोधघाट थानाक्षेत्र अंतर्गत आने वाले रेलवे कॉलोनी, नया बस स्टैंड क्षेत्र का इलाका के साथ ही साथ नयामुंडा के अंतर्गत आने वाले आंबेडकर चौक, बोधघाट चौक इत्यादि सट्टा सञ्चालन का प्रमुख केंद्र बन गया है. सूत्रों की बातों पर अगर विश्वास किया जाए तो केवल आंबेडकर वार्ड व बोधघाट क्षेत्र से ही सट्टा पर दांव लगाने वाले लोग, खाईवाल के माध्यम से प्रतिदिन 10 से 15 लाख रुपये तक का सट्टा इस क्षेत्र से लेकर शहर के ही अन्य खायिवालों को भेज देते हैं.

सट्टा सञ्चालन का आलम यह है कि अवैध रूप से संचालित सट्टा, कई लोगों के लिए लघु व्यवसाय का रूप बन गया है. सुबह से लेकर दोपहर एवं देर रात्रि तक ओपन-क्लोज़ के शौकीन लोग, बोधघाट चौक से लेकर आंबेडकर वार्ड क्षेत्र के कई जगहों पर खायिवालों के पट्टी-धारकों के पास नंबर लिखाते नज़र आते हैं. इस मामले पर कई बार क्षेत्र के लोगों द्वारा जिला पुलिस अधीक्षक के पास भी शिकायत की गयी, लेकिन जब सैय्याँ भये कोतवाल तो डर काहे का, की तर्ज पर सटोरिये खुलेआम सट्टा लिखने में मशगूल दिखाई देते हैं.

इसी क्षेत्र के कुछ कथित खायिवालों के अनुसार, इन पर पुलिस कार्यवाई इसलिए नहीं करती की सट्टा के व्यवसाय से प्रतिदिन कई लाख रुपयों की आमदनी होती है जिसका बटवारा पुलिस विभाग के साथ-साथ अन्य कुछ प्रशासनिक अमलों में भी होता है. चूँकि, सट्टा सञ्चालन के माध्यम से प्रतिमाह कई लाख रुपयों की आमदनी पुलिस के बड़े अधिकारियों से लेकर छोटे कर्मचारियों के बीच होती है. अतः इतनी बड़ी आवक को रोकने में वे अमूमन हिचकिचाहट महसूस करते हैं.

जगदलपुर शहर के कई थानों में वर्षों से पदस्थ पुलिस कर्मचारियों के अनुसार, थाने में अधिकारी एवं कर्मचारियों के पदस्थापना के समय से ही उन्हें यह जानकारी दे दी जाती है कि इस क्षेत्र में ऐसे कारोबार को आप कैसे सहूलियत से संचालित करा सकते हैं. वर्तमान में जगदलपुर शहर एवं उसके आसपास थाने के क्षेत्र से लाखों रुपयों की सट्टा-पट्टी, पट्टीदारों के माध्यम से खुलेआम बड़े व्यवसायी एवं प्रतिष्ठित कहे जाने वाले खायिवालों के पास पहुँच रही है. लेकिन सब कुछ जानने के बावजूद भी स्थानीय अधिकारी किसी भी प्रकार की कार्यवाई न कर, छत्तीसगढ़ शासन के पुलिस महानिरीक्षक के दिए गए आदेश की अवहेलना करने पर उतारू हैं.

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