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सड़क दुर्घटना में युवक की मौत : दल्लीराजहरा

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दल्लीराजहरा – वार्ड क्र 10 गाडरपूल के आगे खड़ी बोलेरो पिकअप वाहन में बाइक सवार द्वारा टक्कर मारने से युवक मौत हो गई | घटना कल रात्रि 10 बजे गाडरपुल के आगे लल्लन जयसवाल के पास की है मृतक अपने बाइक क्र CG07 LM 8705 से गाडरपूल की ओर जा रहा था कि तभी मेन रोड पर खड़ी बोलेरो पिकअप वाहन CG08 AC  3531 में जा घुसा और टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि

मृतक के सर एवं अन्य हिस्सों में काफी चोट लगी जिसे तत्काल शहीद अस्पताल ले जाया गया जहाँ उपचार के दौरान मृत्यु हो गई | मृतक का नाम कृष्णकांत ठाकुर पिता हरिराम ठाकुर उम्र 28 वर्ष निवासी दल्ली राजहरा का है जो कि CISF में नोकरी करता था | मृतक के बारे में सुचना देने वाले का नाम नारायण पिता फूलसिंह हल्बा 45 वर्ष वार्ड बॉय शहिद हॉस्पिटल है |

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रोड डी-माईनिंग की कार्यवाही कर सुरक्षा बलों द्वारा माओवादियों के लगाये गये आईईडी को बरामद करने में मिली सफलता

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सुन्दरराज पी. पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रंेज, विनीत खन्ना, पुलिस उप महानिरीक्षक, कांकेर रेंज, उ0ब0 कांकेर, पुलिस अधीक्षक, नारायणपुर मोहित गर्ग, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नीरज चन्द्राकर, नारायणपुर के निर्देषन में जिले में तैनात जिला बल, छसबल, आईटीबीपी, बीएसएफ सुरक्षा बलों द्वारा लगातार नक्सल विरोधी अभियान चलाया जा रहा है इसी तारतम्य में दिनांक 10.04.2021 को थाना कुरूषनार से जिला बल एवं आइटीबीपी की संयुक्त पुलिस पार्टी आर0ओ0पी0 एवं रोड डी-माइनिंग की कार्यवाही पर कुरूषनार से नारायणपुर की ओर रवाना हुई थी।

रोड डी-माइनिंग की कार्यवाही के दौरान थाना कुरूषनार से करीबन 04 कि0मी0 दूरी पर कोषा सेंटर खालेपारा के पास रोड से सटे जंगल में दो अलग-अलग स्थानों पर 02 नग टिफीन बम (01 टिफीन बम वजनी करीबन 02 कि0ग्रा0 एवं 01 टिफीन बम वजनी करीबन 01 कि0ग्रा0 ) लोकेट किया गया। बीडीएस टीम नारायणपुर द्वारा दोनों आईईडी को सावधानी पूर्वक डिफ्यूज किया गया और माओवादी नक्सलियों के सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने के नापाक मन्सुबें को असफल किया गया।

माओवादी नक्सलियों में सुरक्षा बलों से आमने-सामने की लड़ाई करने कि हिम्मत नहीं होती, वे अपनी मौत के डर के कारण छीपकर वार करना ही जानते है, इसलिए माओवादी नक्सली बहुतायात मात्रा में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आईईडी का प्रयोग करते है। नक्सलियों की इस रणनीति को जानते हुए सुरक्षा बलों द्वारा निरंतर रोड डी-माईनिंग की कार्यवाही कर माओवादियों द्वारा आईईडी लगाये जाने के संभावित स्थानों पर सर्चिंग की कार्यवाही की जा रही है, जिससे पिछले कुछ दिनों में लगातार नक्सलियों द्वारा लगाये गये आईईडी बरामद करने में सुरक्षा बलों को सफलता मिली है।

छोटे व्यापारियों को ध्यान में रखते हुए प्रातः 6 बजे से शाम 6 बजे तक व्यापार संचालन की अनुमति दे प्रशासन,भाजयुमो जिला अध्यक्ष अविनाश श्रीवास्तव ने बस्तर कलेक्टर को पत्र लिख कर किया आग्रह

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जगदलपुर-बस्तर जिले में प्रशासन के नए आदेश अनुसार व्यापार संचालन हेतु प्रातः 8 बजे से शाम 6 बजे तक समय निर्धारण किया है कोरोना काल मे छोटे व्यापारियों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए भारतीय जनता युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष ने प्रातः 2 घण्टे अतिरिक्त व्यापार संचालन की अनुमति हेतु मांग की है।

युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष अविनाश श्रीवास्तव ने बस्तर कलेक्टर को पत्र लिखकर कहा की जिला प्रशासन के द्वारा बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए समस्त व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन को लेकर हाल ही में आदेश जारी करके प्रातः 8ः00 बजे से लेकर संध्या 6ः00 बजे तक का समय निर्धारित किया गया है।

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संबंधित आदेश के जारी होने के पश्चात् शहर में सुबह के दौरान नाश्ता इत्यादि का ठेला गाड़ी लगाने वाले सैकड़ों परिवार एवं व्यायाम शाला (जिम) संचालक काफी असमंजस की स्थिति में हैं। क्योंकि प्रशासन के द्वारा व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन का समय प्रातः 8ः00 बजे से निर्धारित हैं। जबकि इन सभी का व्यवसाय ही प्रातः 6ः00 बजे से शुरू होता है और लगभग दो-तीन घण्टे में ही पूरा हो जाता है और इतने समय में ही अपना व्यवसाय चलाकर यह सभी परिवार अपना जीवन-यापन करते हैं।

प्रशासन के द्वारा समय निर्धारण को लेकर जारी किये गए आदेश से ऐसे छोटे-गरीब व्यवसायी कोरोना वायरस से पहले भूख से ही मर जायेंगे। क्योंकि यह आदेश उन सभी गरीबों के लिए सम्पूर्ण लाॅकडाउन से कम नहीं है।

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प्रसाशन बस्तर जिले के छोटे-गरीब व्यावसायियों के प्रति उदारतापूर्वक विचार करके व्यवसाय संचालन के समय में परिवर्तन करते हुए प्रातः 6ः00 बजे से संचालन की अनुमति दे ताकि वह भी बिना किसी चिंतामय वातावरण के व्यवसाय करके अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें।

फ़ोर्स का हर जवान बस्तरिया बन जाता है,वो किसी जाति धर्म का नही,वो आदिवासी नहीं,भारतवासी बन जाता है….तररेम हमले पर विशेष लेख

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बीजापुर:–एक असम की लेखिका ने लिखा कि जो जवान बीजापुर एनकाउंटर में शहीद हुए उन्हें शहीद का दर्जा नहीं दिया जाना चाहिए क्योंकि वो वेतन लेकर काम करते हैं । हालांकि महोदया गिरफ्तार हो गयी हैं लेकिन उनसे मैं पूछना चाहता हूँ कि फिर तो सीमा पर शहीद होने वाले सैनिक को भी शहीद का दर्जा नहीं देना चाहिए क्योंकि वो भी सैलरी लेता है ? सिर्फ आपके जैसे कीबोर्ड वारियर्स जो कमरे में बैठ कर वैचारिक उल्टियाँ करते हैं उनकी गिरफ्तारी पर ही आपको क्रांतिकारी का दर्जा मिलना चाहिए ।

एक बहुत ही “उच्च कोटि” के सामाजिक कार्यकर्ता ने लिखा कि सिपाही बंदूकधारी मजदूर होता है । अपने बच्चों को पालने के लिए बंदूक उठाता है और जंगल में जाकर आम जनता को मारता है । बिलकुल सही कहा आपने कि अपने परिवार का पेट पालने के लिए ही हम पुलिस में आते हैं, सैलरी के लिए ही लेकिन जब वर्दी पहनते हैं तो उसके अंदर से कैसी फीलिंग आती है वो आप कभी समझ नहीं सकते । देश के लिए कुछ करने का जज़्बा उस सैलरी पर भारी पड़ जाता है । मालूम नहीं होता कि किस गोली पर हमारा नाम लिखा है लेकिन

फिर भी जाते हैं ऑपरेशन में इसलिए कि कल को हमारे बच्चे ये ना कहें कि पापा तो पुलिस में थे मम्मा लेकिन कुछ कर नहीं पाए,नक्सली तो अब शहरों में भी पहुँच गए हैं । इन “उच्च कोटि/इलीट क्लास” के सामाजिक कार्यकर्ता को लगता है कि पुलिस अशांति फैला रही तो बता दीजिए कि नक्सलियों ने पिछले तीन दशकों में कहाँ कहाँ शांति लायी है ? आप सोच से अच्छी तो हमारे प्रधान आरक्षक शहीद रमेश जुर्री की सोच थी -” साब जी ये नक्सली लोग बस अपना अस्तित्व बचाने में लगा है,भोला भाला गाँव वालों को पहले बहकाता है जल,जंगल,जमीन के नाम पर और जब कोई नहीं मानता या विरोध करता है तो उसको मुखबिर बोल कर जनताना अदालत में मार देता है,जनता डरके आगे विरोध नहीं करता.. हम लोगों का पहुँच नहीं है वहाँ तक इसलिए हमारे ऊपर भरोसा नहीं जनता को.. जहाँ जहाँ कैम्प खुलता है साब जी वहाँ का जनता क्यों हमारे साथ हो जाता जरा बताइए ?”

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एक महोदया ने लिखा कि इस लड़ाई में दोनों तरफ सिर्फ आदिवासी ही मारे जाते हैं । महोदया के ज्ञान के लिए बता दूँ कि हालाँकि ये आदिवासी बहुल इलाका है लेकिन जो फ़ोर्स यहाँ लड़ती है वो सम्पूर्ण भारतवर्ष से आती है । सीआरपीएफ में यू पी,बिहार,झारखंड, तमिलनाडु, केरल,राजस्थान, नागालैंड,जम्मू हर जगह से लड़के नक्सलियों से लोहा लेने के लिए आते हैं । अभी जो जवान नक्सलियों की कैद में बैठा हुआ है फिर भी शेर की बेफिक्री के साथ दिख रहा है वो भी जम्मू का ही रहने वाला है । शहीद दीपक भारद्वाज भी आदिवासी नहीं था बल्कि उसकी तो जाति भी मुझे पता नहीं, आप खोजियेगा, हमारा काम बस नक्सली खोजना है । यहाँ फ़ोर्स का हर जवान

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बस्तरिया बन जाता है, वो किसी जाति का नहीं रहता,किसी धर्म का नहीं रहता ,वो आदिवासी नहीं .. भारतवासी बन जाता है ।
सोसल मीडिया पर लिखना बहुत आसान है । ज़मीन पर उतरना बहुत मुश्किल । ऐसी सोच से नक्सलियों और उनके समर्थकों के हौसले बुलंद होते हैं । शहीदों की शान में गुस्ताखी होती है । गुस्ताखी होती है उस माँ की कोख पर जिसने इन शहीदों को जन्म दिया,उस विधवा बीवी पर जिसका सुहाग देश के लिए मिट गया, उस बहन पर जो कभी अपने भाई की कलाई पर राखी नहीं बांध पाएगी ।

“बुद्धिजीवी” बनने के चक्कर में “बुद्धूजीवी” ना बने ।

(लेखक छग पुलिस में डीएसपी हैं)

जीरागांव नक्सली हमले पर बड़ा खुलासा, तीन घण्टे देर से न पहुंचता हिड़मा,तो मुमकिन थी ताड़मेटला से बड़ी वारदात ! बीपी जैकेट और हेलमेट धारी नक्सलियों के साथ स्नाइपर भी शामिल थे बटालियन में

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बीजापुर। शनिवार 3 अप्रैल को जौनागुड़ा-टेकुलगुड़ा के बीच नक्सलियों से मुठभेड़ में देश ने 22 जवानों को खो दिया, लेकिन घटना के छह दिन बाद होश उड़ा देने वाला खुलासा सामने आया है। सूत्र बताते हैं कि मुठभेड़ के दिन माओवादियों की बटालियन नंबर एक का कमांडर माड़वी हिड़मा जिसे हमले का मास्टरमाइंड बताया जा रहा था, शुरूआती मुठभेड़ के वक्त वह घटना स्थल से दूर सुकमा जिले के सरहदी इलाके में मौजूद था और वही से कुछ घंटों तक मुठभेड़ में शामिल जवानों को उसके वहां पहुंचने तक रोककर रखने की कमांड दे रहा था। मुठभेड़ शुरू होने के करीब तीन घंटे बाद हिड़मा मौके पर पहुंचा और जवानों पर हमला बोल रहे लाल लड़ाको को कमांड देने लगा। अन्यथा यहां ताड़मेटला से बड़ी वारदात संभव थी। जिसका उल्लेख कोबरा बटालियन के एक जवाना द्वारा वायरल आॅडियो में भी किया गया है।

बताया गया कि मुठभेड़ की शुरूआत जौनागुड़ा से हुई। जहां सबसे पहले नक्सलियों ने जवानो ंको ट्रैप करना शुरू किया। यह बात भी सामने आई कि जवानों की शहादत लेने नक्सलियों ने कोई एम्बुश नहीं किया था। उन्हें केवल जवानों के पहुंचने की सूचना मिली थी। जिसके बाद नक्सली जौनागुड़ा से लेकर टेकुलगुड़म-जीरागांव तक बंट गए थे। मुठभेड़ में शामिल एक जवान की मानें तो नक्सली जवानों पर ”बडी ”फायर कर रहे थे। बडी फायर का मतलब एक पेड़ की आड़ लेकर तीन से चार नक्सली एक ही जवान को टारगेट कर फायर करने लगते हैं और नक्सलियों की यही रणनीति जवानों को नुकसान पहुंचाने के लिए तैयार की गई थी।

जौनागुड़ा में जवानों को पहला नुकसान उठाना पड़ा था। जिसके बाद जवान गोलीबारी का जबाव देने टेकुलगुड़म की ओर आए और मकानों की ओट में खुद को महफूज करने की कोशिस की, बावजूद टुकड़ों में बंटे नक्सलियों ने ना सिर्फ बुलेट बल्कि यूबीजीएल, देशी लांचर से हमला बोला, जिसमें जवानों को और बड़ा नुकसान हुआ।

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जौनागुड़ा में जवानों को पहला नुकसान उठाना पड़ा था। जिसके बाद जवान गोलीबारी का जबाव देने टेकुलगुड़म की ओर आए और मकानों की ओट में खुद को महफूज करने की कोशिस की, बावजूद टुकड़ों में बंटे नक्सलियों ने ना सिर्फ बुलेट बल्कि यूबीजीएल, देशी लांचर से हमला बोला, जिसमें जवानों को और बड़ा नुकसान हुआ।

जारी मुठभेड़ के बीच वायरलेस सेट पर लाल लड़ाकों को मैदान पर डटे रहने और बटालियन के और लड़ाकांे को लेकर जल्द पहुंचने की सूचना हिड़मा लगातार पहुंचा रहा था। यह बात भी सामने आई कि अगर नक्सलियों ने एम्बुश किया होता तो नुकसान और बड़ा था। जवानों के आॅपरेशन पर निकलने की सूचना हिड़मा को भी देर से मिली थी, जिसकी वजह से नक्सली एम्बुश करने में नाकाम रहे थे। इधर मुठभेड़ जारी थी, सुरक्षा बल और नक्सली, दोनों तरफ से गोलीबारी जारी थी,उधर हिड़मा अपने साथ एक अन्य पलटन लेकर जौनागुड़ा पहुंच रहा था। बता दें कि एक वायरल आॅडियो में एक जवान यह कहता सुनाई पड़ा रहा कि अगर जवान नक्सलियों की घेराबंदी को नहीं भेदते तो शहादत का आंकड़ा और भी बढ़ जाता।

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बाॅक्सः

जो बातें सामने आई हैं इसमें कोराना काल के दौरान नक्सलियों का संगठन मजबूत होने का दावा किया गया है। बीते एक साल में देष जब कोरोना संकट से जूझता रहा, नक्सली संगठन बस्तर में बड़ी तादाता में युवाओं को संगठन में भर्ती कराने में कामयाब हुए। निष्चित ही यह दावे सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का सबब बन सकते हैं। चंूकि तीन अप्रैल को जवानों को घेरने के लिए नक्सलियों की बटालियन नंबर एक के कुशल लड़ाकों के साथ नए प्रशिक्षित जोशीले लड़ाकों को भी मैदान पर उतारा गया था।

बाॅक्सः

नक्सलियों तक जवानों द्वारा चलाए जा रहे आॅपरेशन की सूचना पहुंचने में देरी की वजह से बटालियन एक का कमांडर हिड़मा मौके पर देर से पहुंचा था। इतना ही नहीं गत डेढ़ माह पूर्व पूवर्ती इलाके में नक्सलियों से जवानों की जो मुठभेड़ हुई थी, जिसमें नक्सलियों को नुकसान उठाना पड़ा था, सूत्र बताते हैं कि इलाके में हिड़मा की पलटन मौके से काफी दूर थी, इसके अलावा आॅपरेशन की खबर भी इस दरम्यान हिड़मा तक देर से पहुंची थी। नतीजतन यहां उल्टे नक्सलियों को नुकसान उठाना पड़ा था।

बाॅक्सः

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार तीन अप्रैल को हुए मुठभेड़ के दौरान माओवादियों की बटालियन की ओर से नक्सली सिर्फ पेड़ों और मेड़ों की आड़ से ही नहीं बल्कि पहाड़ियों से भी गोलियां बरसा रहे थे। जिसमें चैकाने वाली इस बात का खुलासा हुआ है कि माओवादी अब मुठभेड़ों में अपने साथ स्नाइपर भी लेकर चलने लगे हैं। पहाड़ियों से जो माओवादी जवानों पर गोलियां चला रहे थे उनमें से कुछ स्नाइपर बताए जा रहे हैं, जो लगातार जवानों को टारगेट कर रहे थे।

नगर निगम की कई टीकाकरण केंद्रों में टिका कार्य में लगे स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को कई प्रकार की परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है.

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टीका लगाने गए कुछ लोगों ने इस आशय की शिकायत अखबारनवीज़ों के सामने की है.

टीका कार्य में लगे महिला एवं पुरुष स्वास्थ्य कर्मियों के अनुसार, केंद्र में टीका के रखरखाव के अलावा लगाए जाने वाले लोगों के बैठने की उचित व्यवस्था नहीं है; क्योंकि कोरोना एक उच्च स्तरीय मापदंड वाला वैक्सीन है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, इसे लगाए जाने के पश्चात लोगों को घबराहट, जी-मचलाना, उल्टी के अलावा चक्कर जैसी समस्या भी आ सकती है.

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इसके मद्देनजर शासन के स्वास्थ्य विभाग का स्पष्ट निर्देश है कि ऐसे कोविड टीकाकरण केंद्रों पर मरीजों को टीका लगने के पश्चात बैठने की उचित व्यवस्था के साथ-साथ साफ पेयजल एवं सुलभ शौचालय की व्यवस्था भी होनी चाहिए. लेकिन, शहर के कुछ प्रमुख टीका केंद्रों में ऐसी व्यवस्था के नहीं होने के बावजूद टीकाकरण का काम किया जा रहा है.

शहर के एमएलबी स्कूल, दंतेश्वरी कॉलेज के सामने, पँचरास्ता हाई स्कूल; जहां प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में लोग आकर टीका लगवा रहे हैं; वहां, किसी प्रकार की अप्रिय घटना होने की स्थिति में स्वच्छ जल, सुलभ शौचालय के साथ-साथ एंबुलेंस की व्यवस्था भी नहीं रखी गई है.

निगम आयुक्त प्रेम कुमार पटेल, इस टीकाकरण के कार्य को प्रमुखता के साथ लेकर जनहित में टीकाकरण कार्य को संपादित करवा रहे हैं. वहीं, स्वास्थ्य विभाग के मातहत कार्य करने वाले अधिकारी एवं कर्मचारी, टीकाकरण केंद्रों में ऐसी सुविधा अब तक मुहैया करने में अपना ध्यान तक नहीं दे पा रहे हैं.

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भारत की कम्युनिष्ट पार्टी (माओवादी), गलगम मिलिशिया प्लाटून सेक्शन सी के कमाण्डर का आत्मसमर्पण

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उप महानिरीक्षक ऑप्स केरिपु श्री कोमल सिंह, पुलिस अधीक्षक बीजापुर श्री कमलोचन कश्यप, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बीजापुर के मार्ग दर्शन में जिले में चलाए जा रहे माओवादी उन्मूलन अभियान के तहत 01 माओवादी :-
रमेश माड़वी पिता स्व0 मल्ला माड़वी उम्र 30 वर्ष जाति मुरिया साकिन गलगम स्कूलपारा थाना उसूर जिला बीजापुर ( ग्राम गलगम मिलिशिया प्लाटून का सी सेक्शन कमाण्डर )

ने आज दिनांक 10.04.2021 को अति0पुलिस अधीक्षक बीजापुर डॉ.पकंज शुक्ला, उप पुलिस अधीक्षक ऑप्स श्री आशीष कुंजाम के समक्ष माओवादियो की खोखली विचारधारा, जीवन शैली, भेदभाव पूर्ण व्यवहार एवं प्रताड़ना से तंग आकर तथा छत्तीसगढ़ शासन के पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर आत्मसमर्पण किया ।

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रमेश माड़वी पिता स्व0 मल्ला माड़वी उम्र 30 वर्ष जाति मुरिया साकिन गलगम स्कूलपारा थाना उसूर जिला बीजापुर ( ग्राम गलगम मिलिशिया प्लाटून का सी सेक्शन कमाण्डर )

माओवदी संगठन में कार्य का विवरण :-
वर्ष 2003 मे उसूर एलओएस सपनक्का द्वारा माओवादी संगठन में बाल संघम के पद पर भर्ती किया गया, जहां 5 वर्ष कार्य करने के बाद वर्ष 2008 में ग्राम गलगम को मिलिशिया सदस्य बनाया गया । वर्ष 2016 में गलगम मिलिशिया सेक्शन सी का सदस्य बनाया गया , वर्ष 2017 में गलगम मिलिशिया प्लाटून में सेक्शन सी का कमाण्डर बनाया गया ।

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माओवादी घटना में शामिल :-

  1. वर्ष 2018 में पामेड़ एलओएस डिप्टी कमाण्डर सोढी हुंगा पिता पाण्डू के नेतृत्व में आवापल्ली व उसूर रोड़ में ग्राम सीतापुर के आगे कुशवाह बस को रोककर बस मे बैठे यात्रियों को उतारकर बस को आग लगाकर जलाने में शामिल ।
  2. वर्ष 2019 में ग्राम उसूर का उईका सन्नू के खेतो में काम कर रहे 02 डोजर ट्रेक्टर वाहन को आग लगाकर जलाने की घटना में शामिल
    लंबित स्थाई वारंटी :-
    आत्मसमर्पित माओवादी के विरुद्ध थाना उसूर मे 01 स्थाई वारंट भी लंबित था l

उक्त माओवादी द्वारा संगठन में परिवार से मिलने नही देने, माआवादियों की विचारधारा, जीवन शैली एवं भेदभाव पूर्ण व्यवहार से त्रस्त होकर, भारत के सविधान में विश्वास रखते हुये, छत्तीसगढ़ शासन की आत्मसमर्पण नीति से प्रभावित होकर रमेश माड़वी द्वारा पुलिस के समक्ष समर्पण किया गया । समर्पण करने पर इन्हें उत्साहवर्धन हेतु शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत् रू 10000/- (दस हजार रूपये) नगद प्रोत्साहन राशि प्रदाय किया गया।

गुटखा पाउच से हो रही गन्दगी

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20 कदम स्वच्छता की ओर अभियान और मेरा वार्ड सुन्दर वार्ड अभियान में लगातार सफाई करने पर अनुभव कहता है कि 4 प्रकार का कचरा लोग लगातार अनजाने में कर रहे हैं :

1) गुटखा का पाउच
2) चॉकलेट, नमकीन, पेप्सी, फ्रुटी का पैकेट
3) चाय का कप
4) दारु की बोतल, प्लास्टिक ग्लास, पानी पाउच

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उपरोक्त चीजें लोग लगातार रोड नाली में फेंक रहे हैं। सबसे ज्यादा संख्या में गुटखा पाउच लोग रोड पर फेंक रहे हैं। किसी भी पान दुकान या गुटखा बेचने वाले दुकान के आस-पास गुटखा पाउच का भण्डार पड़ा रहता है। कई लोग एक दिन में 40 पाउच तक खा जाते हैं। इस पर गंभीरता से रोक लगाने का निर्णय निगम क्षेत्र में लिया गया है। अब से गुटखा बेचने वाले दुकान और गुटखा खाकर सड़क पर पाउच फेंकने वालों पर जुर्माना और उन्हीं से सफाई का कार्य कराया जायेगा। कृपया इस मैसेज को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचायें।

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स्वच्छ जगदलपुर, सुन्दर जगदलपुर
आयुक्त, नगरपालिक निगम, जगदलपुर

बस्तर में मृत प्रायः हुआ कांग्रेस का छात्र संगठन एनएसयूआई ने नहीं मनाया कहीं भी स्थापना दिवस

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गया है जिसका मुख्य कारण अपने-अपने गुट में घिरे हुए छात्रों द्वारा इंकावन स्थापना दिवस भी नहीं मना पाए।दु:ख की बात है कि नेतागण सोशल मीडिया में भी बधाई नहीं दे पाए।

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भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन एनएसयूआई बस्तर में वैसा कोई भी कार्य नहीं करता जिससे छात्रों का भला हो,वह कार्य जरुर करतें हैं जिसके कारण स्वयं मुंह मियां मिट्ठू बनें रहते हैं। उदाहरण के लिए देखा जाए शहीदों को श्रद्धांजलि देने के नाम पर माज विरहा गुट व मनोहर सेठिया द्वारा अलग-अलग श्रद्धांजलि दी गई। वहीं दो दिन बाद जब स्थापना दिवस समारोह आया तो उससे किनारे लग गये। दूसरी तरफ बस्तर जिला अध्यक्ष शहबाज खां नाम के ही अध्यक्ष रह गयें हैं क्योंकि उनके द्वारा कांग्रेस कमेटी के कार्यक्रम से भी दूरी बनाते हैं और बस्तर जिले के प्रभारी आदित्य सिंह को कोई लेना-देना नहीं है।

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कर्फ्यू का पालन कराने सड़को पर उतरी बस्तर पुलिस, देर रात सड़को पर घूमकर रात्रि कर्फ्यू का उल्लंघन करने वाले 17 लोगो पर कोतवाली पुलिस की कार्यवाही…

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जगदलपुर:- जिले में बढ़ते कोरोना के संक्रमण को देखते हुए जिला प्रशासन ने 14 घण्टे का रात्रि कर्फ्यू लगाया है। शाम 6 बजे से सुबह 8 बजे तक किसी भी दुकान को खोलने एवम सड़को पर घूमने की अनुमति नही होगी।

आज सुबह कोतवाली चौक में पुलिस कर्मचारियों को कर्फ्यू का पालन कराने और लोगो को जागरूक करने हेतु टीमें रवाना की गई , जो घर से बेबजह निकल कर सड़को पर घूमते एवम समय से पूर्व दुकानो का संचालन करने वाले व्यक्ति को यह टीमें समझाईस देगी। जो भी कर्फ्यू का पालन नही करेगा उसके खिलाफ कड़ी कार्यवाही जिला प्रशासन एवम पुलिस प्रशासन कर सकता है।

आज शहर के अनेको स्थान पहुँचक पुलिस की टीमो के द्वारा मॉर्निंग वॉर्क पर निकले लोगो को समझाईस देते पुलिसकर्मी नजर आये तो वही कर्फ्यू समय अंतराल में दुकानों का संचालन करने वाले दुकानदारों को भी पुलिसकर्मियों ने समझाईस देते हुए दुकाने 8 बजे तक बन्द रखने की बात कही।

वही अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ओम प्रकाश शर्मा ने कहा कि जो व्यक्ति बेबजह सड़क पर निकलने वाले एवम कर्फ्यू के समय पर अपनी दुकानें खोलने वाले ऐसे व्यक्तियों को आज समझाईस देने पुलिस टीमो को रवाना किया। यह टीमें शहर के अनेको स्थान पर पहुँचकर वेवजह घूमने एवम दुकानों का संचालन करने वाले व्यक्तियों को समझाईस देगी।

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इस दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ओम प्रकाश शर्मा , नगर पुलिस अधीक्षक हेमसागर सिदार, कोतवाली थाना प्रभारी एमन साहू, बोधघाट थाना प्रभारी धनंजय सिन्हा सहित कई पुलिसकर्मी मौजूद थे।

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कर्फ्यू का उल्लंघन करने वाले 17 लोगो पर कार्यवाही..

वही 9 अप्रैल की रात कोतवाली पुलिस ने सड़को पर बेबजह घूमने वाले लोगो पर कार्यवाही की है। कर्फ्यू का उल्लंघन करते हुए 17 लोगो को कोतवाली पुलिस ने रात्रि गस्त के दौरान पकड़ा है, इन सभी लोगो को समझाईस देते हुए कोतवाली पुलिस द्वारा चलानी कार्यवाही की गई है।

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