दिनांक 30.06.24 को करीबन 12.00 बजे ग्राम जुंगेरा के ओम प्रकाश टेकाम द्वारा थाना आकर प्रकरण के घटना स्थल पर किसी लडकी की लाश पेड पर लटकने की अपूर्ण सूचना देने पर तस्दीक कार्यवाही हेतू मौके घटना स्थल पहुंचकर तस्दीकी दौरान मृतिका के भाई एवं कोटवार के द्वारा ग्राम जुंगेरा गुडरा पारा कर्रा झाड में मृतिका द्वारा फांसी लगाकर मृत्यु होने की सूचना देने पर थाना डोंडी लोहारा पुलिस ग्रामीणों रिश्तेदारों के साथ मौके पर जाकर देखने पर एक कर्रा झाड पर मृतिका के द्वारा सफेद कलर मटमैला स्कार्फ कपडा से फांसी लगाने से मृत अवस्था में लटका हुआ था। जो प्रार्थी के रिपोर्ट पर मौके पर पहले देहाती मर्ग इन्टीमेशन क्रमांक 0/24 बाद असल मर्ग क्र. 40/24 धारा 174 जा.फौ. कायम कर जांच कार्यवाही में लिया गया है। जांच में पाया गया हैं, कि मृतिका का ग्राम जुंगेरा के ओमप्रकाश टेकाम के साथ पिछले करीबन 2-3 वर्षो से प्रेम संबंध था, और वे दोनो अक्सर एक साथ घुमते फिरते थे, मृतिका के द्वारा आरोपी प्रेमी ओम प्रकाश को शादी करने के लिए बोलने पर ना तो स्वंय शादी करने के लिए तैयार होता था, और ना ही चमेली को किसी दूसरा लडका के साथ शादी करने देता था, इसी बात से कुं. चमेली बहुत परेशान व दुखी रहती थी, और इसी दौरान दिनांक 29.06.24 के सुबह मृतिका अपने प्रेमी आरोपी ओमप्रकाश के घर गयी थी, तो आरोपी द्वारा मृतिका को डांट कर अपने घर से भगा दिया गया, जिससे मृतिका मानसिक रूप से अत्यधिक परेशान एवं प्रताड़ित हो, मजबुर होकर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली हैं। जो कि आरोपी का कृत्य अपराध धारा 306 भादवि का प्रथम दृष्टया अपराध घटित करना पाये जाने से आरोपी ओम प्रकाश टेकाम के विरूध्द अपराध क्रमांक 109/24 धारा 306 भादवि पंजीबध्द कर विवेचना में लिया गया हैं। प्रकरण के आरोपी ओमप्रकाष से पूछताछ करने पर अपराध घटित करना स्वीकार करने एवं अब तक की विवेचना से आरोपी के विरूद्ध अपराध धारा सदर घटित करने के साक्ष्य सबुत पाये जाने से एवं गिरफ्तारी के पर्याप्त आधार होने पर आरोपी ओमप्रकाश टेकाम पिता स्व. नारायण टेकाम उम्र 28 साल साकिन जुंगेरा थाना डौण्डीलोहारा जिला बालोद को दिनांक 03.07.24 के 13.45 बजे विधिवत् गिरफ्तार कर गिरफ्तारी की सूचना उसके परिजन को दी गयी है। मामला सदर जुर्म अजमानतीय होने न्यायिक हिरासत पर जेल भेजा गया है।
दिल्ली पहुंचते ही फुल एक्शन मोड में आ गए बस्तर सांसद महेश कश्यप, मिले मंत्री गडकरी से
- केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के समक्ष रखी अहम मांगें
-अर्जुन झा-
जगदलपुर दिल्ली पहुंचते ही बस्तर लोकसभा क्षेत्र से नवनिर्वाचित सांसद महेश कश्यप बस्तर की समस्याओं को सुलझाने और यहां आवागमन की सुविधाएं बढ़ाने के लिए फुल एक्शन मोड में आ गए हैं। सांसद महेश कश्यप ने आज दिल्ली प्रवास के दौरान केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गड़करी से मुलाक़ात की। इस दौरान सांसद महेश कश्यप ने बस्तर लोकसभा क्षेत्र के कई विषयों और बुनियादी जरूरतों को लेकर केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया।

इस दौरान बस्तर सांसद ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को पत्र सौपकर बस्तर संसदीय क्षेत्र की प्रमुख सड़क सम्बंधित समस्याओं से अवगत कराया। महेश कश्यप ने दंतेवाड़ा जिले में रेलवे क्रासिंग पर फ्लाई ओवर बनवाने, जगदलपुर से रायपुर राष्ट्रीय राजमार्ग को फोरलेन बनाने, रायपुर से विशाखापत्तनम तक निर्माणधीन भारत मला रोड से बस्तर को जोड़ने के लिए हेतु जगदलपुर से एक लिंक रोड की स्वीकृति प्रदान करने, बस्तर संभाग के बीजापुर से गढ़चिरौली होकर महाराष्ट्र को जोड़ने वाली सड़क को अतिशीघ्र पूर्ण कराने का आग्रह केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से किया।

पट्टनम से बारेगुड़ा रोड लंबाई 12 किमी पर मट्टीमारका के पास इंद्रावती नदी नदी पर पुल निर्माण स्वीकृत कर महाराष्ट्र को जोड़ने की मांग सांसद ने की है। राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 30 जो कि बस्तर को दक्षिणी राज्यों से जोड़ने वाला मुख्य मार्ग है। इस मार्ग पर जगदलपुर से कोंटा और जगदलपुर से सुकमा तक 120 किमी सीसी रोड तथा सुकमा से कोंटा तक दूरी 90 किमी सीसी रोड का डामरीकरण कराने की भी मांग की है। लगातार बस्तर के प्रमुख मुद्दों को लेकर दिल्ली में सम्बंधित मंत्रियों को अवगत कराने का कार्य सांसद महेश कश्यपद्वारा किया जा रहा है।
दंतेवाड़ा में नेताओं ने बुरी तरह धोकर रख दिया पत्रकारों को, एसपी हावी हो गए कलेक्टर पर
- विधायक चैतराम ओटामी बैट भांजते आए नजर
-अर्जुन झा-
जगदलपुर बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय में हर किसी की धुलाई करने वाले पत्रकारों को भरी महफिल में नेताओं ने धो डाला। वहीं पुलिस अधीक्षक ने कलेक्टर को पटखनी दे दी। यह दृश्य देख रहे लोग तालियां बजाकर स्वागत करते नजर आए। चौंकिए मत न तो नेताओं ने पत्रकारों की पिटाई की है और न ही कलेक्टर और एसपी में किसी तरह की लड़ाई हुई है। दरअसल हम बात कर रहे हैं क्रिकेट मैच की। इस मैच में पत्रकारों की टीम की नेताओं की टीम ने बुरी गत बना दी। वहीं कलेक्टर की टीम की एसपी की टीम ने दुर्गति कर दी। दंतेवाड़ा में चल रही शौर्य स्मृति कप क्रिकेट प्रतियोगिता 2024 के तहत 2 जुलाई को दो सद्भावना मैच खेले गए। पहला सदभावना मैच प्रेस इलेवन और जनप्रतिनिधि इलेवन के मध्य खेला गया।

जिसमें प्रेस इलेवन ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। निर्धारित 10 ओवर में 7 विकेट खोकर प्रेस इलेवन की टीम 49 रन ही बना सकी। लक्ष्य का पीछा करते हुए जनप्रतिनिधि इलेवन ने मात्र एक विकेट खोकर आसानी से जीत हासिल कर ली। जनप्रतिनिधि इलेवन की टीम में दंतेवाड़ा विधायक चैतराम अटामी, नंदलाल मुड़ामी प्रदेश महासचिव भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा, कुणाल ठाकुर युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष, सुमीत भदौरिया युवा मोर्चा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य, राजा शर्मा पार्षद दंतेवाड़ा, अजय अवस्थी युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष गीदम एवं अन्य लोग शामिल थे।

विधायक चैतराम ओटामी ने कमेंट्रेटर की भूमिका निभाते हुए पूरे मैच में कमेंट्री की और पूरे मैच के दौरान अपनी टीम का हौसला भी बढ़ाया। इस मैच के बाद दूसरा सदभावना मैच पुलिस टीम और कलेक्ट्रेट टीम के मध्य खेला गया जिसमे जिला कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी एवं पुलिस अधीक्षक गौरव राय आमने सामने थे। जिलाधीश ने टॉस जीत कर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। पहले बल्लेबाजी करते हुए पुलिस टीम ने 10 ओवर में 4 विकेट खोकर 64 रन बनाए और कलेक्ट्रेट की टीम को 65 रनों का लक्ष्य दिया। लक्ष्य का पीछा करते हुए कलेक्ट्रेट की टीम निर्धारित 10 ओवर में 8 विकेट खो कर 47 रन ही बना सकी और पुलिस टीम ने इस मैच को 17 रनों से जीत लिया। इस मैच के मैन ऑफ द मैच पुलिस टीम से डीएसपी आशीष नेताम रहे जिन्होंने हरफनमौला खेल दिखाते हुए बल्लेबाजी में 18 गेंदों पर 26 रन बनाए और गेंदबाजी करते हुए 2 ओवर में 8 रन देकर 3 विकेट चटकाए।
कोंटा के तथाकथित शेर को एक कोंटे में बिठा दिया बस्तर लोकसभा क्षेत्र के मतदाताओं और कांग्रेस नेताओं ने
- चादर से बाहर पैर फैलाना भारी पड़ गया पूर्व मंत्री को
- बस्तर का सम्राट बनने की चाहत ले डूबी नेताजी को
-अर्जुन झा-
जगदलपुर गीदड़ कभी शेर की जगह नहीं ले सकता और जितनी चादर उतना पैर फैलाओ। ये दोनों कहावतें आम इंसानी जिंदगी में अमूमन रोज ही इस्तेमाल होती हैं और हकीकत से भरी भी हैं। ये कहावतें इन दिनों समूचे बस्तर संभाग में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। इसलिए, क्योंकि हमारे बस्तर के एक कांग्रेस नेता ने पूरे बस्तर का सम्राट और शेर बनने की चाहत पाल जो रखी थी। चादर छोटी थी, लेकिन वे पैर ज्यादा पसारने लगे थे। हदें भूलकर ये नेताजी कुछ ज्यादा ही बावले हो चले थे, मगर मतदाताओं ने तो उनकी औकात ही नापकर रख दी। वहीं संभाग के बहुसंख्यक कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने साफ जता दिया है कि आप सिर्फ कोंटा के लायक हो इसलिए एक कोंटे तक ही सीमित रहो, पूरे बस्तर का सम्राट बनने के लिए मुंगेरी लाल मत बनो, तो ही बेहतर है।
हम बात कर रहे हैं छत्तीसगढ़ सरकार में आबकारी मंत्री रहे बस्तर संभाग के सुकमा जिले के कोंटा से विधायक कवासी लखमा की। कवासी लखमा अपने बड़बोलेपन और उल जलूल हरकतों के लिए विख्यात हैं। मंत्री बनने से पहले तक कवासी लखमा अपने भोलेपन के लिए भी जाने जाते थे। मगर कहते हैं न कि जब आदमी को पद और पैसा मिल जाता है, तो वह वह औकात से बाहर जाकर छलागें मारने लग जाता है। ऐसा ही कुछ हमारे लखमा जी के साथ भी हुआ। भूपेश बघेल ने उन्हें आबकारी जैसा कमाऊ विभाग क्या दे दिया, वे आसमान छूने की कोशिश करने लगे। अहंकार से पूरित होकर बस्तर के नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी हेय दृष्टि से देखने तथा अपमानित करने लगे। ‘सैंया भये कोतवाल, तो डर काहे का’ कहावत भी उन पर चरितार्थ होने लगी। यानि मुख्यमंत्री मेहरबान तो लखमा पहलवान। सो कवासी लखमा पर सियासी पहलवानी का जूनून ऐसा चढ़ा कि बस्तर के गामा पहलवानों के सामने भी खुलकर ताल ठोंकने लगे। भूल गए कि सियासी चांदनी चार दिन ही चमकती है। कवासी लखमा कोंटा से लगातार छह बार जीत दर्ज करा चुके हैं। निसंदेह यह एक बड़ी उपलब्धि है, मगर वे भूल गए कि मतदाताओं का मूड बदलते देर नहीं लगती। जिन कार्यकर्ताओं की मेहनत से जीत मिलती है, उन्हें उपेक्षित करना भी भारी पड़ सकता है। यही भूल और गरुर कवासी लखमा को भारी पड़ गया है। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के भीतर चली जोड़तोड़ और टांग खिंचाई की राजनीति के चलते कवासी लखमा को हाल के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस हाई कमान ने बस्तर सीट से टिकट दे दिया। भाजपा ने भी इस सीट पर बिल्कुल नए चेहरे महेश कश्यप को उतारा। तब लखमा को शायद लगा था कि महेश को तो आसानी से निपटा देंगे। मगर वे भूल गए कि सामने महेश यानि शंकर, भोलेनाथ महादेव खड़े हैं। जिनकी तीसरी आंख खुली तो कांग्रेस के लिए प्रलय भी आ सकता है। प्रखर हिंदूवादी महेश कश्यप ने सियासत से दूर रहते हुए भी आदिवासियों के धर्मान्तरण के खिलाफ और आदिवासी संस्कृति के संरक्षण व हिदुत्व के जागरण के लिए बस्तर संभाग में बड़ी मुहिम चलाई थी। बस्तर में उनका नाम प्रचलित हो गया था। बावजूद सियासी तौर पर कवासी लखमा के सामने उनका कद थोड़ा छोटा था। छोटे सियासी कद वाले महेश कश्यप ने कद्दावर कवासी लखमा को ऎसी पटखनी दी है कि उसका दर्द सालों साल कवासी लखमा को महसूस होता रहेगा। कवासी लखमा की हार के पीछे उनका गरूर, बड़बोलापन और नेताओं व कार्यकर्ताओं के प्रति उपेक्षा भाव मुख्य कारक रहे। मतदाताओं के साथ ही क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं ने भी ऊंची उड़ान भर रहे कवासी लखमा के पर एक झटके में ही कतर कर रख दिए। उनकी औकात नाप कर रख दी, उन्हें बता दिया कि पूरे बस्तर का सम्राट और शेर बनने की कोशिश मत करो, कोंटा के हो, एक कोंटे तक ही सीमित रहो, उसी में आपकी भलाई है।
डौकी’ देकर नापी औकात
कांग्रेस हाई कमान भी छत्तीसगढ़ के चालबाज खिलाड़ी नेताओं के दबाव में आकर कवासी लखमा को बस्तर लोकसभा सीट से टिकट देने पर मजबूर हो गया। कांग्रेस नेतृत्व ने शायद कवासी लखमा का वजन जानने का लिए उन्हें उम्मीदवार बना दिया था। कांग्रेस नेतृत्व ने कवासी लखमा सुकमा के नेता हैं या बस्तर के नेता, इसका टेस्ट करने के लिए लोकसभा का टिकिट उन्हें थमा दिया। टिकट मिलने के बाद जब अपने को होशियार और बस्तर का बड़ा नेता समझने वाले लखमा को उनकी हैसियत मालूम पड़ी तो वे चुनावी मंच से बोलने लग गए कि बेटे के लिए बहू मांगने गया था, पार्टी ने मुझे डौकी दे दी, मुझे ही शादी करना पड़ी।अर्थात लखमा ने किसी और के लिए जाल बिछाया था, लेकिन वह खुद के ही जाल में बुरी तरह फंस गए। बस्तर के मतदाता ‘बहू’ और ‘डौकी’ जैसे अल्फाजों में नहीं फंसे। लखमा की महत्वाकांक्षा बड़बोलेपन छत्तीसगढ़ के एक बड़े नेता की भी महत्वाकांक्षा ने कवासी लखमा को जाल में बुरी तरह फंसा दिया। अब शायद कांग्रेस आलाकमान को भी मालूम चल गया हो गया होगा कि कवासी लखमा तो केवल कोंटा सुकमा के ही नेता हैं, पूरे बस्तर के लायक नहीं। बेचारे कवासी लखमा! न माया रूपी ‘डौकी’ यानि सांसदी मिली, न राम यानि मजबूत सियासी कद मिला। बड़े नेता की साजिश में फंसकर कहीं के नहीं रहे।
बड़े नेता की चाल नाकाम
कवासी लखमा को मोहरा बनाकर रायपुर के एक बड़े नेता ने जो चाल चली थी, वह भी नाकाम हो गई। दरअसल रायपुर के तथाकथित बड़े नेता ने छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का सर्व शक्तिमान नेता बनने के लिए बस्तर के दो बड़े आदिवासी नेताओं को आपस में लड़ाकर अपनी रोटी सेंकने के लिए बड़ी साजिश रची थी। पहले इस बड़े नेता ने विधानसभा चुनाव में बस्तर संभाग के ज्यादातर विधानसभा सीटों पर अपनी ही पार्टी के आदिवासी नेताओं को हरवाया, ताकि छत्तीसगढ़ की कांग्रेसी राजनीति में आदिवासियों का वर्चस्व न बढ़ने पाए और पिछड़े वर्ग से आने वाला वह नेता ही कांग्रेस की राजनीति का केंद्र बिंदु बना रहे। कांग्रेस के इस बड़े नेता को भी लोकसभा का उम्मीदवार बनाया था, मगर चुनाव में उन्हें भी हार का सामना करना पड़ा। वहीं दूसरी ओर बस्तर लोकसभा सीट के चुनाव में कवासी लखमा के कम अनुभव का लाभ उठाया कुछ चापलूस नेताओं ने। इन नेताओं ने चुनाव के दौरान कवासी लखमा का भरपूर दोहन किया। इन्हीं चापलूस नेताओं ने कवासी लखमा के साथ मिलकर रायपुर के बड़े नेता के इशारे पर विधानसभा चुनावों में चित्रकोट सीट से बड़े कद वाले आदिवासी नेता पीसीसी चीफ दीपक बैज, दंतेवाड़ा सीट से शहीद नेता महेंद्र कर्मा के बेटे छविन्द्र कर्मा और नारायणपुर सीट से उभरते युवा आदिवासी नेता चंदन कश्यप को हराने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी थी। बहरहाल लोकसभा चुनाव ने साबित कर दिया है कि कवासी लखमा केवल सुकमा के ही नेता हैं। बस्तर के बड़ा नेता बनने की चाह ने उन्हें खुद के बुने जाल में फंसा दिया है।
मुखर हो उठे हैं कांग्रेसी
विधानसभा चुनाव के बाद लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस को मिली करारी हार के बाद पूरे छत्तीसगढ़ के वे आम कांग्रेस कार्यकर्ता और नेता जो केवल पार्टी के प्रति निष्ठावान रहकर काम करते रहते हैं, अब मुखर हो उठे हैं। ये नेता कार्यकर्ता दिल्ली से आई फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के सामने बड़े नेता और कवासी लखमा की करतूतों का भंडाफोड़ करने से जरा भी नहीं हिचक रहे हैं। कांकेर और रायपुर में फैक्ट फाइंडिंग कमेटी द्वारा ली गई बैठकों में राज्य के विभिन्न इलाकों से पहुंचे हजारों कार्यकर्ताओं ने बड़े नेता और उनके झंडाबरदारों के खिलाफ जमकर शिकायतें की। कवासी लखमा के खिलाफ भी बहुत शिकायत हुई। अब फंसे लखमा कहीं के नहीं रहे।
शहीद महेंद्र कर्मा विश्व विद्यालय को केंद्र सरकार से मिला सौ करोड़ रुपए का अनुदान
- प्रारंभ होंगे नए स्नातक, स्नातकोत्तर एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रम
- रंग लाई प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष एवं विधायक किरण देव की मेहनत
जगदलपुर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक किरण देव ने जानकारी देते हुए बताया कि शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय को पीएम ऊषा योजना के अंतर्गत मल्टी डिसिप्लिनरी विश्वविद्यालय हेतु 100 करोड़ का अनुदान प्राप्त हुआ है। इस हेतु विश्वविद्यालय में नए विषयों के अध्यापन तथा शोध की आवश्यकता होगी। जिससे यहां शोध की गुणवत्ता उत्तम हो सके। किरण देव ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा इस वर्ष के बजट में विश्वविद्यालय को 20 नए विभाग तथा 33 नए पाठ्यक्रम संचालित करने हेतु बजट का प्रावधान किया गया था। वर्तमान में यहां 10 विभागों में 14 कोर्सेस का संचालन किया जा रहा है। नए सत्र से विश्वविद्यालय में कामर्स, बॉटनी, केमिस्ट्री, जियोलॉजी, गणित, फिजिक्स, स्टेटिस्टिक्स, जूलॉजी, इकोनॉमिक्स, जियोग्राफी, हिन्दी, हिस्ट्री, साइकोलॉजी तथा सोशियोलॉजी आदि विषयों में स्नातक तथा स्नातकोत्तर की पढ़ाई शुरू होगी। इसके साथ ही इस क्षेत्र में रोजगारपरक शिक्षा प्रदान करने की श्रृंखला में लाइब्रेरी साइंस में बी. लिब तथा एम. लिब की भी पढ़ाई प्रारंभ होगी। अब तक इस कोर्स को करने के लिए अंचल के छात्रों को रायपुर या बिलासपुर जाना पड़ता था। अब जगदलपुर में यह कोर्स आरंभ होने से छात्रों को सुविधा होगी। विधायक देव ने कहा कि हमारी सरकार बस्तर अंचल की शिक्षा व्यवस्था में सुधार, उच्च शिक्षा की सुगमता तथा गुणवत्ता को लेकर गंभीर है। पूर्व में भी हमारी सरकार ने ही अंचल में विश्वविद्यालय की स्थापना की थी तथा वर्तमान में भी हमारी सरकार इस विश्वविद्यालय के उन्नयन को लेकर गंभीर है। इसी कड़ी में सरकार के प्रयास से विश्वविद्यालय शिक्षा के नए नए आयाम गढ़ रहा है। विश्वविद्यालय के विकास को लेकर हम पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। विधायक किरण देव ने विश्वविद्यालय के विकास के लिए केंदीय शिक्षा मंत्री से मिलकर उनसे विशेष आग्रह किया था। जिसके फलस्वरूप यह बड़ी अनुदान राशि स्वीकृत हो सकी है। इस हेतु किरण देव ने प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री तथा मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया है। देव ने उच्च स्तरीय शिक्षा सुविधा मिलने के लिए बस्तर संभाग के विद्यार्थियों को बढ़ाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।
बकावंड के बीएमओ की अनदेखी ने ले ली आदिवासी शिशु की जान
- टीके लगाने के बाद हुई नवजात शिशु की मौत
-अर्जुन झा-
बकावंड विकासखंड बकावंड में खंड चिकित्सा अधिकारी की लापरवाही के कारण स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए घातक साबित हो रही है। टीकाकरण और ग्रामीणों के इलाज की मॉनिटरिंग बीएमओ डॉ. हरीश मरकाम ढंग से नहीं कर पा रहे हैं। नवजात बच्चों को टीके असावधानी पूर्वक लगाए जा रहे हैं। ऐसे ही लापरवाही से लगाए गए टीके ने डेढ़ माह के आदिवासी बच्चे की जान ले ली है। इस मामले में बीएमओ डॉ. हरीश मरकाम पूरी तरह जिम्मेदार हैं, मगर ठीकरा उस एएनएम पर फोड़ दिया जाएगा, जिसकी निगरानी में बच्चे को टीके लगाए गए थे। मामला विकासखंड बकावंड की ग्राम पंचायत वन कोमार का है। आदिवासी महिला मीनावती के डेढ़ माह के शिशु को उप स्वास्थ्य केंद्र गारेगा में 8 मई 2024 को पहला टीका बीसीजी लगा था। इसके बाद 26 जून 2024 को आईंपीवी का दूसरा टीका लगाया गया। इसके बाद पीसीवीओ, पीवी के तीन टीके लगाए गए। टीके लगने के बाद मां मीनवती अपने बच्चे को लेकर घर वनकोमार चली गई।
लेकिन रात में अचानक बच्चे को तेज़ बुखार हो गया एवं उसे सांस लेने में बड़ी तकलीफ होने लगी। मासूम बच्चे को बुखार से कांपते देखकर मीनावती घबरा गई। सिरप पिलाने के बाद बच्चे की तबीयत में थोड़ा सा सुधार होने पर मां ने चैन की सांस ली और बचा भी कुछ देर के लिए सो गया। रात्रि 2-3 बजे के बीच बच्चे को अचानक फिर से तेज़ बुखार चढ़ गया और बच्चे की तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई। दूसरे दिन सुबह 10 बजे मासूम बच्चे की मौत हो गई। इस विषय को लेकर नर्स वी. रेखा नागेश से पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि हो सकता है कि बच्चे को पहले से बुखार रहा हो एवं बच्चा कमजोर रहा होगा। या फिर वह बरसात में भीग गया होगा। उसी के चलते बच्चे की तबीयत बिगड़ी होगी। बच्चे की मां मीनाबती का कहना है कि उसका बच्चा पूरी तरह स्वस्थ था। हंसते खेलते हुए बच्चे को मैं उप स्वास्थ्य केंद्र गारेगा ले गई थी। मैं नहीं जानती कि कौन सा टीका लगने के कारण मेरे बच्चे की मौत हुई है। मैं अशिक्षित हूं मुझे किसी प्रकार का ज्ञान नहीं है।


नहीं हो रही मॉनिटरिंग
इस मामले में बकावंड के बीएमओ डॉ. हरीश मरकाम सूचना देने के बाद भी चुप्पी साधे बैठे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मीना के बच्चे की मौत के लिए डॉ. हरीश मरकाम सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं। बीएमओ का फर्ज डॉ. हरीश मरकाम सही ढंग से नहीं निभा रहे हैं। वे टीकाकरण व शासन की स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं की मॉनिटरिंग नहीं करते। बच्चों को लगाए जाने वाले टीके एक्सपायरी तो नहीं हो गए हैं इसकी भी जांच दूरस्थ गांवों के स्वास्थ्य केंद्रों या गांवों में तैनात एएनएम के पास जाकर करने की जरूरत नहीं समझते। जबसे वे बकावंड बीएमओ का प्रभार सम्हाल रहे हैं तबसे विकासखंड में स्वास्थ्य सेवा का बुरा हाल हो गया है। बकावंड सीएचसी में व्याप्त अव्यवस्था को लेकर इस संवाददाता ने पहले भी खबर प्रकाशित की थी। तब हाल जानने बस्तर सीएमएचओ को बकावंड जाना पड़ा था। सुदूर वन ग्राम पंचायत बनकोमार के आदिवासी दंपत्ति के बच्चे की मामले में भी बीएमओ डॉ. हरीश मरकाम की अकर्मण्यता सामने आई है बकावंड स्वास्थ्य केंद से जुड़ी नर्स रेखा नागेश की देखरेख में उक्त बच्चे को टीके लगाए गए थे। इसके बाद बच्चे की अचानक मौत हो गई। इससे आदिवासी समाज के लोग काफी उद्वेलित हो उठे हैं।उन्होंने कलेक्टर और विभागीय मंत्री तक इसकी शिकायत करने की बात कही है।
विवादित बयान के विरोध में संजीव सिंह के नेतृत्व में भाजयुमो राजहरा का विरोध प्रदर्शन, राहुल गांधी का पुतला फूंका
दल्लीराजहरा भारतीय जनता युवा मोर्चा अध्यक्ष संजीव सिंह के नेतृत्व में दल्ली राजहरा जैन भवन चौक में राहुल गांधी का पुतला फूंका गया। भाजयुमो का आरोप था कि राहुल गांधी ने संसद में हिंदुओं को हिंसक कह कर हिंदुओ की मान सम्मान को ठेस पहुंचाई है। भाजपा युवा मोर्चा के नगर अध्यक्ष संजीव सिंह ने कहा कि हिंदु समुदाय कभी हिंसा नहीं करता, संसद में राहुल गांधी ने जिस तरह पूरे हिंदु समुदाय को हिंसा करने वाला बताया है वह बर्दाश्त करने योग्य नहीं है इससे देश के करोड़ों हिंदुओं की भावनाएं आहत हुई हैं। जबकि हिंदू समाज हमेशा प्यार, प्रेम, दया, सहिष्णुता के संदेश से प्रेरित होकर आचार व्यवहार करता है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे किसी नेता को हिंसा को किसी धर्म से जोड़ना शोभा नहीं देता। इस दौरान पूर्व जिला कोषाध्यक्ष सुदेश सिंह, भाजपा मंडल अध्यक्ष राकेश द्विवेदी राजहरा,मंडल उपाध्यक्ष रमेश गुर्जर,मंत्री जनार्दन सिंगरौल, कोषाध्यक्ष रमेश जैन,पूर्व एल्डरमैन नागेंद्र चौधरी, अल्पसंख्यक मोर्चा जिला महामंत्री दमनदीप सिंह, अनुसूचित जाति मोर्चा अध्यक्ष बंटी चोपडे,भाजयुमो प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य भूपेंद्र श्रीवास विहिप नगर अध्यक्ष शंकर साहू,पार्षद राजेश काम्बले, अनुसूचित जाति जिला सदस्य सागर गनीर, भाजयुमो महामंत्री एम एस श्रीजीत, उपाध्यक्ष दादू गुप्ता, प्रणव साहू, मनीष पाठक, दुर्गेश गुप्ता, सुमित जैन, सुदीश नायर, आदित्य चौधरी, एम अमन, नदीम बड़गुजर, संतोष यादव, धनराज दर्रो,शुभम गुप्ता एवं युवा मोर्चा के कार्यकर्ता उपस्थित थे ।
देश में 1 जुलाई से नए तीन कानून लागू हो गए है जाने क्या नए तीन कानून
देश में कल यानी 1 जुलाई से तीन नए आपराधिक कानून लागू हो गए हैं. इसके साथ ही तीन पुराने कानून खत्म कर दिए गए हैं. इससे पहले, भारत में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) और 1872 का भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू था। अब इसकी जगह भारतीय न्यायिक संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) ने ले ली है। चूंकि पुराने कानून दशकों से लागू हैं, इसलिए नए आपराधिक कानून को लागू करने में कई चुनौतियां सामने आएंगी। परंतु, भारत सरकार नए आपराधिक कानून से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
सुनवाई पूरी होने के 45 दिन के भीतर अपना फैसला दें
नए आपराधिक कानून के लागू होने के बाद किसी भी आपराधिक मामले में मुकदमा खत्म होने के 45 दिन के भीतर फैसला सुनाया जाएगा. सभी राज्य सरकारों को गवाहों की सुरक्षा और समर्थन के लिए गवाह संरक्षण योजना लागू करनी होगी।
रेप पीड़िता का बयान महिला पुलिस अधिकारी दर्ज करेगी
बलात्कार पीड़िता का बयान महिला पुलिस अधिकारी द्वारा उसके अभिभावक या रिश्तेदार की उपस्थिति में दर्ज किया जाएगा। मेडिकल रिपोर्ट 7 दिन के अंदर पूरी हो जाएगी.
नाबालिग से सामूहिक बलात्कार के मामले में मृत्युदंड या आजीवन कारावास
महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों के खिलाफ सख्त नियम बनाए गए हैं। बाल तस्करी एक जघन्य अपराध है और इसके लिए कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म पर मौत की सजा या आजीवन कारावास का प्रावधान किया गया है।
शादी का झूठा वादा कर लड़कियों को छोड़ने वालों पर कार्रवाई की जाएगी
शादी का झूठा वादा कर शारीरिक संबंध बनाने वालों को अब बख्शा नहीं जाएगा। नए आपराधिक कानून में उन लोगों के लिए सजा का प्रावधान किया गया है जो शादी का झूठा वादा करके महिलाओं से शारीरिक संबंध बनाते हैं और बाद में उन्हें छोड़ देते हैं।
महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में मुफ्त प्राथमिक चिकित्सा और चिकित्सा उपचार
महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में पीड़िता को मुफ्त प्राथमिक चिकित्सा और चिकित्सा उपचार दिया जाएगा। इसके साथ ही उसे 90 दिनों के भीतर नियमित अपडेट पाने का अधिकार होगा.
एफआईआर की कॉपी पाने और 14 दिन के अंदर रिपोर्ट देने का अधिकार
आरोपी और पीड़ित दोनों को 14 दिनों के भीतर एफआईआर, पुलिस रिपोर्ट, आरोप पत्र, बयान, कबूलनामे और अन्य दस्तावेजों की एक प्रति प्राप्त करने का अधिकार होगा।
जीरो एफआईआर के तहत ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें
अब आपको किसी भी घटना से संबंधित एफआईआर दर्ज कराने के लिए पुलिस स्टेशन आने की जरूरत नहीं है। घटना की रिपोर्ट ऑनलाइन भी दर्ज कराई जा सकती है। जीरो एफआईआर के तहत कोई भी व्यक्ति किसी भी पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज करा सकता है, चाहे उसका क्षेत्राधिकार कुछ भी हो।
बच्चा खरीदने पर सख्त सजा का प्रावधान
वेश्यावृत्ति के उद्देश्य से बच्चा खरीदने पर कम से कम सात साल की कैद और 14 साल तक की सजा हो सकती है और जुर्माना होगा।
गिरफ्तार व्यक्ति अपनी पसंद के व्यक्ति को सूचित कर सकता है
किसी भी गिरफ्तार व्यक्ति को अपनी पसंद के व्यक्ति को अपनी स्थिति के बारे में सूचित करने का अधिकार है ताकि उसे तत्काल सहायता मिल सके। गिरफ्तारी विवरण पुलिस स्टेशनों और जिला मुख्यालयों में प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा ताकि परिवार और दोस्त इसे आसानी से देख सकें।
फॉरेंसिक टीम का अपराध स्थल पर जाना अनिवार्य है
गंभीर अपराधों के मामलों में फोरेंसिक विशेषज्ञों की एक टीम का अपराध स्थल पर जाना और सबूत इकट्ठा करना अनिवार्य है।
ट्रांसजेंडर समुदाय को लिंग में शामिल किया गया
लिंग समानता को बढ़ावा देने के लिए अब ट्रांसजेंडर समुदाय को भी इसमें शामिल किया गया है। महिलाओं के खिलाफ कुछ अपराधों के लिए, जहां तक संभव हो पीड़िता का बयान महिला मजिस्ट्रेट द्वारा दर्ज किया जाएगा।
महिलाओं के खिलाफ अपराध के कुछ मामलों में महिला मजिस्ट्रेट बयान दर्ज करेंगी
अगर महिला मजिस्ट्रेट नहीं है तो पुरुष मजिस्ट्रेट को महिला की मौजूदगी में बयान दर्ज करना होगा. बलात्कार से संबंधित बयान ऑडियो-वीडियो माध्यम से दर्ज किए जाएंगे, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित होगी और पीड़िता को सुरक्षा मिलेगी।
गाड़ी रोककर लूट करने वाले तीन आरोपी को पुलिस ने पकड़ा
- पुलिस अधीक्षक बालोद के निर्देशन ,अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पर्यवेक्षण एवं एसडीओपी बालोद के नेतृत्व में बालोद पुलिस को मिली सफलता लूट के 03 आरोपी गिरफ्तार।
- थाना बालोद क्षेत्र के दैहान जंगल के पास ट्रक को रोक कर प्रार्थी से मोबाईल और पैसे लूट कर आरोपी द्वारा चाकू से किया गया था हमला।
- अज्ञात आरोपियों के पतासाजी हेतु सायबर सेल एवं थाना बालोद से बनाये थे विशेष टीम।
- त्रिनयन एप से मिली विशेष सफ़लता
- सीसीटीवी फुटेज से हुई आरोपियों का शिनाख्त।
दिनांक 29.06.2024 को दोपहर 12ः30 को प्रार्थी राजभान साकेत पिता स्व. श्री मयकू प्रसाद साकेत उम्र 47 साल निवासी कतरा थाना गढ. जिला रिवा म.प्र. हाल ट्रक ड्रावयर गिधाली दल्लीराजरा जिला बालोद ट्रक लेकर धमतरी से दल्लीराजरा जा रहा था कि बालोद दैहान जंगल के पास तीन व्यक्ति उसके ट्रक के सामने अपने मोटरसायकल को लगाकर उसे रोके और उसके ट्रक में चढकर उसके साथ मारपीट करने लगे और उसके जेब में रखे 1550 रूपये एवं टेक्नो कंपनी का मोबाईल लूट लिए उसी दौरान उसमें से एक व्यक्ति चाकू निकाल कर उसके गले के पास हमला कर दिया। प्रार्थी घबराकर ट्रक लेकर वंहा से कुसुमकसा गया जंहा कुछ लोग खून से लथपथ उसे जिला अस्पताल बालोद भर्ती कराया गया। प्रार्थी की रिपोर्ट पर थाना बालोद में अपराध क्रमांक 346/2024 धारा 394 34,भादवि पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक, एस आर भगत के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार जोशी के पर्यवेक्षण में एसडीओपी बालोद देवांश सिंह राठौर के नेतृत्व में सायबर सेल बालोद व थाना बालोद से विशेष टीम बना कर अज्ञात आरोपी के पतासाजी हेतु टीम बनाकर विवेचना में लगाया गया। टीम द्वारा घटना स्थल से बालोद टाउन के देशी शराब दुकान, पेट्रोल पंप अन्य स्थानो का त्रिनयन एप की मदद से 25 से 30 सीसीटीवी फुटेज को खंगाल कर संदेहियो के हुलिया के आधार पर प्रार्थी को दिखाया गया जिसमे आरोपियो की पहचान हई जिससे टीम द्वारा 03 आरोपियो को गिरफ्तार कर आज दिनांक को न्यायिक रिमांड पर भेजा गया। आरोपियो के कब्जे से 01 नग मोटरसायकल , एक नग लोहे का बटन चाकू,, नगदी लूट का रकम 750 रूपये बरामद किया।
आरोपियों के नाम पताः-
1. निरज धु्रवे पिता चतुरसिंह धु्रवे उम्र 26 वर्ष पता-रोशन नगर वार्ड 20 बालोद पाररास थाना बालोद जिला बालोद (छ.ग)
2. मनीष कुमार यादव पिता राजेन्द्र यादव उम्र 19 वर्ष पता-वार्ड क्र 12 गंजपारा दषौदी तालाब बालोद थाना बालोद जिला बालोद (छ.ग)
3. प्रशांत सोनी उर्फ चीकू मोनू पिता रमेंश सोनी उम्र 30 वर्ष पता- मरार पारा बालोद थाना बालोद जिला बालोद (छ.ग)
उक्त प्रकरण में आरोपियों के पतासाजी व गिरफ्तारी में विशेष भूमिकाः-
थाना बालोद – थाना प्रभारी बालोद निरीक्षक श्री रवि पाण्डेय,, उ0नि0 श्रीमति कमला यादव, स0उ0नि धरम भूआर्य ,प्रधान आरक्षक हरिषचंद सिन्हा,,आरक्षक भोप सिंह साहू, मोहन कोकिला, वेदप्रकाश भुआर्य ,ठनेष टेमार्य, लोकेश, की सराहनीय भूमिका रही है।
सायबर सेल टीम:- सायबर सेल प्रभारी उ0नि0 जोगेन्द्र साहू, आरक्षक पूरन देंवागन ,आरक्षक विपिन गुप्ता आरक्षक आकाश दुबे की सराहनीय भूमिका रही है ।
भगवान महादेव का चित्र दिखाकर भूपेश को ‘महादेव’ के जाल में फंसा दिया राहुल गांधी ने, गजब धोया संतोष पाण्डेय ने
- महादेव एप सट्टा मामले में भूपेश बघेल की लिप्तता याद दिलाई सांसद पांडेय ने
- कहा – सट्टे की आड़ में गटक गए 6 हजार करोड़
-अर्जुन झा-
जगदलपुर छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित महादेव सट्टा एप मामले की गूंज लोकसभा में भी सुनाई दी। इस मामले को लेकर राजनांदगांव के सांसद संतोष पाण्डेय ने जहां राहुल गांधी की गजब धुलाई कर दिया वहीं बिना नाम लिए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का तथाकथित काला चिट्ठा खोलकर रख दिया। दरअसल विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक दिन पहले सदन में देवों के देव भगवान महादेव का चित्र दिखाते हुए हिंदुओं और भाजपा के लोगों को हिंसक बताते हुए कहा था कि देश में ये लोग हिंसा भड़काते हैं। राहुल गांधी के इस बयान से संसद में तो बवाल मचा ही, देशभर में आक्रोश के हालात देखे जा रहे हैं। लोकसभा में राजनांदगांव के सांसद संतोष पाण्डेय तो राहुल गांधी को तो नसीहत दी ही, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को भी कटघरे में खड़ा कर दिया। संतोष पाण्डेय ने कहा – राहुल जी आप जिन महादेव की तस्वीर दिखा रहे हैं,
वो हम सबके आराध्य हैं।पूरी सृष्टि में उनकी सत्ता चलती है, मगर आपके मुख्यमंत्री ने तो महादेव सट्टा वालों का संरक्षक बनकर छह हजार करोड़ रुपए कमा लिए। आप क्या हमें महादेव जी की तस्वीर दिखा रहे हैं। अपने मुख्यमंत्री की करतूत देखिए, जिनकी वजह से छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का बंठाधार हो गया है। हिंदू समाज और भाजपा को हिंसावादी कहे जाने पर भी सांसद संतोष पाण्डेय ने राहुल गांधी को खूब सुनाई। उन्होंने कहा कि हिंदू तो उदार और विनम्र होते हैं सबको साथ लेकर चलते हैं। हिंदू सनातन धर्मग्रंथ भी हमें सदभाव और अहिंसा का पाठ पढ़ाते हैं। आप हिंदुओं को बदनाम मत कीजिए। हिंसक तो उस तथाकथित शांतिदूत समाज के लोग हैं जो माता वैष्णो देवी के दर्शन करने जा रहे श्रद्धांलुओं की जान ले लेते हैं, राजस्थान के टेलर कन्हैया का सिर कलम कर देते हैं। हम सौ करोड़ हिंदुओं को भगवान अमरनाथ के दर्शन के लिए सेना और पुलिस की मदद लेनी पड़ती है। जरा उनके बारे में भी तो बोलकर देखिए राहुल जी, आप नहीं बोल पाएंगे, आपके मुंह में दहीजम जाएगा। सांसद संतोष पाण्डेय ने सदन में राहुल गांधी और भूपेश बघेल की बखिया उधेड़ कर रख दी।
हार के जिम्मेदार भूपेश
लोकसभा और विधानसभा के चुनावों में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को मिली करारी हार के लिए सिर्फ कांग्रेसी ही नहीं भाजपाई भी भूपेश बघेल को ही जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। राजनांदगांव के सांसद संतोष पाण्डेय ने लोकसभा ने भूपेश बघेल का नाम लिए बगैर पुरजोर अंदाज में कहा कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को पूर्व मुख्यमंत्री ने ही डुबोया है। महादेव सट्टा, कोयला घोटाला, शराब घोटाला जैसे बड़े कांड पूर्व मुख्यमंत्री के कार्यकाल में हुए, जो कांग्रेस की हार के कारण बने हैं। वहीं दूसरी ओर पूरे छत्तीसगढ़ के बड़े कांग्रेस नेता भी हार के लिए भूपेश बघेल को दोषी करार दे रहे हैं। छत्तीसगढ़ आई कांग्रेस की फैक्ट फाइडिंग कमेटी के सामने भूपेश बघेल, कवासी लखमा समेत कुछ अन्य नेताओं की करतूतों की शिकायतों की झड़ी लग गई है।












