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छात्रावासों को आबाद करने सांसद महेश कश्यप ने की पहल, सहायक आयुक्त को लिखा पत्र

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  • सांसद महेश कश्यप ने सहायक आयुक्त को अपने हाथ से लिखा पत्र
  •  रंग ला रही जिला पंचायत सदस्य सारिता की पहल
    -अर्जुन झा-
    बकावंड ब्लॉक मुख्यालय बकावंड में निर्मित ढाई -ढाई सौ सीटर आदिम जाति बालक छात्रावास और बालिका छात्रावास के दिन अब फिरेंगे। सात साल से वीरान पड़े ये दोनों छात्रावास अब छात्र छात्राओं से जल्द आबाद होंगे। बस्तर के सांसद महेश कश्यप ने आदिम जाति कल्याण विभाग बस्तर के सहायक आयुक्त को पत्र लिखकर छात्रावासों में छात्र छात्राओं के दाखिले की प्रक्रिया जल्द शुरू कराने कहा है।
    बस्तर क्षेत्र के विधायक लखेश्वर बघेल के प्रयासों से बकावंड में करीब पंद्रह करोड़ रुपयों की लागत से 250- 250 सीटों की क्षमता वाले आदिम जाति के विद्यार्थियों के लिए बालक एवं बालिका छात्रावासों का निर्माण कराया गया है। आदिम जाति कल्याण विभाग से सीटों की स्वीकृति न मिलने के कारण ये दोनों छात्रावास सात साल से वीरान पड़े हैं। देखरेख के अभाव में सर्व सुविधायुक्त दोनों भव्य छात्रावास जर्जर होते जा रहे हैं।

क्षेत्र की कर्मठ एवं सक्रिय जिला पंचायत सदस्य सरिता पाणिग्रही ने छात्रावासों के लिए सीटों की स्वीकृति और उनकी बदहाली का मुद्दा उठाया था। सारिता पाणिग्रही के मुताबिक 7 वर्ष से सीट स्वीकृत नहीं होने के कारण छात्रावासों की दोनों बिल्डिंगें खंडहर तब्दील होती जा रही हैं और आदिवासी विद्यार्थियों खासकर क्षेत्र की छात्राओं को आवासीय सुविधा नही होने के कारण आगे की पढ़ाई करने में दिक्कत हो रही है। बकावंड ब्लॉक के दूरस्थ गांवों की बेटियों को बीच में ही पढ़ाई छोड़ देनी पड़ रही है। उनकी शिक्षा में प्रतिकूल असर पड़ रहा है। जिला पंचायत सदस्य सारिता पाणिग्रही का कहना है कि एक तरफ हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय कन्या शिक्षा को प्रोत्साहित करते हुए बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के लक्ष्य के साथ समर्पित भाव से काम कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक लापरवाही के चलते सात साल बनकर तैयार छात्रावासों में हमारे बेटे बेटियों को दाखिला नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने इस ओर सांसद महेश कश्यप और बस्तर जिला प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराया था।

सांसद कश्यप की सादगी
बस्तर के नव निर्वाचित सांसद महेश कश्यप ने तत्काल मामले को गंभीरता से लिया है। सीधे सरल व्यक्तित्व के धनी आदिवासी पुत्र सांसद महेश कश्यप ने तुरंत आदिम जाति कल्याण विभाग बस्तर के सहायक आयुक्त को पत्र लिखकर बकावंड के दोनों छात्रावासों के लिए सीट स्वीकृत करने और वहां जल्द से जल्द छात्रों तथा छात्राओं के दाखिले की प्रक्रिया शुरू कराने को कहा है। सहायक आयुक्त को यह पत्र सांसद महेश कश्यप ने स्वयं अपने हाथों से लिखा है। पत्र में सांसद  कश्यप ने बड़े ही विनयी भाव से कहा है कि सीटों की स्वीकृति जल्द से जल्द दिलाने की कृपा करेंगे। पत्र की इस पंक्ति से आभास होता है कि सांसद जैसे महत्वपूर्ण पद पर रहते हुए भी महेश कश्यप प्रशासनिक अधिकारियों का पूरा सम्मान करते हैं और विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर चिंतित भी हैं। अन्यथा अक्सर विधायक व सांसद जब भी किसी कार्य के लिए अधिकारियों को पत्र लिखते हैं, तो उसमें आदेशात्मक पुट दिखाई देता है। उम्मीद की जा रही है कि आदिम जाति कल्याण विभाग के सहायक आयुक्त सांसद महेश कश्यप की ‘विनती’ पर जल्द पहल करेंगे। वहीं सांसद महेश कश्यप के दखल के बाद अब लोगो में उम्मीद जाग उठी है कि इसी सत्र से ही दोनों छात्रावासों का लाभ बकावंड अनुभाग के छात्र छात्राओं को मिलने लगेगा।

कांग्रेस की समीक्षा बैठक में कवासी लखमा ने निकाली भड़ास, कहा- मुझे अपनों ने ही हराने का काम किया

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  • समीक्षा बैठक में नेताओं ने दिखाए कड़े तेवर
  • पूर्ववर्ती सरकार के उपेक्षा पूर्ण रवैए और संगठन को ठहराया जिम्मेदार
    -अर्जुन झा-
    जगदलपुर छत्तीसगढ़ में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार की समीक्षा के लिए आयोजित बैठक रार का केंद्र बन गई। पार्टी के वरिष्ठ नेता वीरप्पा मोइली और हरीश चौधरी हार की समीक्षा करने रायपुर आए थे। दोनों वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में हुई बैठक में कोंटा सुकमा के विधायक एवं पूर्व मंत्री कवासी लखमा ने जमकर अपनी भड़ास निकाली। उन्होंने बस्तर लोकसभा सीट से अपनी हार के लिए कांग्रेस के ही नेताओं को पूरी तरह जिम्मेदार ठहरा दिया। इसके अलावा रायपुर एवं महासमुंद लोकसभा सीटों पर मिली हार पर भी कोहराम मचा। रायपुर सीट पर जहां प्रत्याशी को ही हार के लिए जिम्मेदार बताया गया, वहीं महासमुंद सीट पर पराजय की वजह कार्यकर्ताओं की उपेक्षा को बताया गया। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की भी कई नेताओं ने जमकर बखिया उधेड़ी।
    वीरप्पा मोइली और हरीश चौधरी ने छत्तीसगढ़ के पार्टी नेताओं के साथ तीन बैठकें की। पहली बैठक वरिष्ठ नेताओं के साथ हुई। उसके बाद महासमुंद और रायपुर लोकसभा सीट की हार पर मंथन हुआ। तीनों ही बैठकों में आपसी गुटबाजी का नजारा देखने को मिला। बैठक में ज्यादातर प्रत्याशी तो खामोश रहे, मगर बस्तर सीट से लोकसभा प्रत्याशी रहे कवासी लखमा बेहद मुखर नजर आए। उन्होंने अपने चिर परिचित अंदाज में अपनी हार के लिए सीधे तौर पर अपनों पर ही ठीकरा फोड़ दिया। कवासी लखमा ने कहा कि चुनाव में पार्टी नेताओं ने काम ही नहीं किया, बड़े नेता प्रचार करने तक नहीं आए और तो और मुझे रायपुर से भी कोई सहयोग नहीं मिला। लखमा ने कहा कि मेरी हार बहुत ही कम अंतर से हुई है। अगर रायपुर से सहयोग मिला होता और नेताओं ने मदद की होती, तो बस्तर सीट आज कांग्रेस के कब्जे में होती। कवासी लखमा ने आरोप लगाया कि पार्टी में गुटबाजी हावी है, हर कोई सुपर पॉवर बनना चाहता है। इसका खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ रहा है। कवासी लखमा ने कहा कि बस्तर सीट पर मिली पराजय के लिए पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी भी जवाबदेह है। लखमा और अन्य नेताओं ने संगठन के कामकाज के तरीकों पर ही सवाल खड़े कर दिए। कवासी लखमा ने तो अपने मन में भरा सारा गुबार ही बाहर निकाल दिया।

    कांग्रेस सरकार ने की थी उपेक्षा
    वहीं रायपुर लोकसभा सीट पर हार के लिए वरिष्ठ नेताओं और जिला संगठन ने प्रत्याशी को ही जिम्मेदार बता दिया।कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि अपनों के कारण ही चुनाव में हार हुई है। समीक्षा बैठक के दौरान नेताओं ने कहा कि सरकार में रहते हुए पांच साल तक कार्यकर्ताओं की अनदेखी की गई, उसका परिणाम मिला है। हार के लिए कांग्रेस सरकार पूरी तरह से जिम्मेदार है। कहा गया कि कार्यकर्ताओं ने तो काम किया लेकिन प्रत्याशियों को जिस तरह से चुनाव लड़ना चाहिए वैसा नहीं लड़ा गया। इसका खामियाजा पार्टी को लोकसभा चुनाव में भुगतान पड़ा है। बैठक में साथ ही रायपुर के नेताओं को कम प्रतिनिधित्व मिलने की बात भी कही गई। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव राजेश तिवारी ने कहा कि कांग्रेस सरकार में पांच साल कार्यकर्ताओं की अनदेखी हुई इसका परिणाम हमें देखने को मिला है। उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि हार के लिए सरकार जिम्मेदार है। राजेश तिवारी ने माना कि मुख्यमंत्री का सलाहकार रहेते हुए मैं भी उसमें शामिल हूं। राजेश तिवारी ने कहा कि संगठन ने भरपूर कोशिश कर चुनाव लड़ने में पूरा योगदान दिया। उन्होंने समय पर प्रचार सामग्री नहीं पहुंचने का आरोप लगाया और संगठन में आपसी सामंजस्य नहीं होने के चलते हारने की बात कही।

    हार का ठीकरा प्रत्याशी पर
    समीक्षा बैठक में रायपुर लोकसभा क्षेत्र में पराजय पर महामंत्री, उपाध्यक्ष, महापौर, पूर्व महापौर सहित वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि यहां से प्रत्याशी रहे विकास उपाध्याय पहले से ही चुनाव नहीं लड़ना चाहते थे। चुनाव में उनकी कार्यशैली कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलने की नहीं रही। चुनाव जिस तरह से लड़ना चाहिए वैसा नहीं लड़ा। यहां के कार्यकर्ताओं ने पूरी लगन और निष्ठा से काम किया इसके कारण पिछले चुनाव में जहां कांग्रेस को 4 लाख 89 हजार वोट मिले थे वहीं इस चुनाव में 4 लाख 75 हजार वोट मिले। इससे साफ है कि कार्यकर्ताओं ने पूरी मेहनत की। संगठन और प्रत्याशी के बीच सामंजस्य की कमी महसूस की गई। महासमुंद के चुनाव परिणाम की समीक्षा के दौरान महासमुंद के वरिष्ठ नेताओं ने सीधे तौर पर कहा कि यहां पर साहू जाति के लोगों को साधने का जो प्लान पार्टी ने बनाया था वह पूरी तरह फेल रहा। ताम्रध्वज साहू को बाहरी प्रत्याशी होने के कारण इसका लाभ नहीं मिला। नेताओं ने यहां तक कहा कि सरकार में मंत्री रहते हुए ताम्रध्वज साहू महासमुंद के प्रभारी मंत्री थे, लेकिन उस दौरान यहां के कार्यकर्ताओं और आम लोगों का काम नहीं करने का खामियाजा उन्हें व्यक्तिगत तौर पर भुगतना पड़ा।

    अभी बदलाव नहीं : पायलट
    प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट ने कहा कि यह समीक्षा बैठक संगठन में बदलाव के लिए नहीं है। अभी नगरीय निकाय चुनाव सामने है, पार्टी काे मजबूत करने नए सुझाव के लिए यह बैठक आयोजित की गई है। नए आईडिया आएंगे तो आगे पार्टी की कार्यशैली में बदलाव करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव की अपेक्षा पार्टी को लोकसभा चुनाव में 5-6 लाख अधिक वोट मिले हैं, लेकिन पार्टी लोकसभा चुनाव में एक सीट पा सकी। कांकेर लोकसभा में कम अंतर से हारे हैं

खंडहर में तब्दील होते जा रहे हैं 15 करोड़ के दो छात्रावास

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  •  7 साल बाद भी आबाद नहीं हो पाए हॉस्टल
    अर्जुन झा
    बकावंड़ ब्लॉक मुख्यालय बकावंड में करोड़ों रुपयों की लागत से निर्मित आदिम जाति कल्याण विभाग के 250 -250 सीटर अनुसूचित जनजाति बालक एवं छात्रावास लगता है सिर्फ कमीशनखोरी के लिए ही बनवाए गए हैं। सात साल पहले इन छात्रावासों का उपयोग आज तक शुरू नहीं हो पाया है। इसमें बस्तर के विधायक लखेश्वर बघेल की भूमिका पर भी अब सवाल उठने लगे हैं।
    बस्तर क्षेत्र के विधायक लखेश्वर बघेल ने सात साल पहले छात्रों एवं छात्राओं के लिए अलग अलग छात्रावास निर्माण हेतु करीब 15 करोड़ रुपए की स्वीकृति दिलाई थी। आदिम जाति कल्याण विभाग के इन छात्रावासों की क्षमता ढाई ढाई सौ सीटर है। प्रत्येक छात्रावास के लिए 7 करोड़ 28 लाख 56 हजार रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति मिली थी और निर्माण के लिए कार्य एजेंसी आदिम जाति जाति कल्याण विभाग के सहायक आयुक्त को बनाया गया था। लगभग पंद्रह करोड़ की लागत से अनुसूचित जनजाति के छात्रों एवं छात्राओं के लिए निर्मित इन पोस्ट मैट्रिक छात्रावासों में सात साल बीत जाने के बाद भी दाखिला शुरू नहीं हो पाया है। वीरानी का दंश झेल रहे दोनों छात्रावास भवन देखरेख के अभाव में अब जर्जर होने लगे हैं।

बकावंड में हायर सेकंडरी स्कूल और महाविद्यालय भी है, मगर पोस्ट मैट्रिक छात्रावासों का लाभ यहां के विद्यार्थियों को नहीं मिल पा रहा है। नतीजतन दूर दराज के गांवों के छात्र छात्राएं जगदलपुर में रहकर पढ़ाई करने मजबूर हैं। क्षेत्रीय विधायक लखेश्वर बघेल की निष्क्रियता के चलते क्षेत्र के आदिवासी बच्चे आश्रम छात्रावास में रहकर पढ़ाई करने से वंचित हैं। करोड़ों के भवन बनकर तैयार हैं लेकिन उनका उपयोग नहीं होने के चलते भवन जीर्ण शीर्ण होते जा रहे हैं। 7 वर्ष से दोनों छात्रावास छात्र छात्राओं के दाखिले की बाट जोह रहे हैं। दोनों हॉस्टलों में करीब 500 विद्यार्थी आवास के साथ अध्ययन करते मगर पिछले 7 वर्ष से दोनों छात्रावास भवन खाली पड़े हैं।

कमीशनखोरी का आरोप
स्थानीय जिला पंचायत सदसाय सरिता पाणिग्रही का कहना है स्थानीय विधायक लखेश्वर बघेल की अकर्मण्यता की वजह से यह हॉस्टल चालू हो नही पाए हैं। ये केवल करोना काल में हॉस्पिटल और गोदाम के तौर पर काम आए थे। उन्होंने कहा की सरकार जब शिक्षा अलख जगा रही है, तब स्थानीय विधायक की चुप्पी आश्चर्यजनक है। सारिता पाणिग्रही ने आरोप लगाया है कि केवल कमीशनखोरी के लिए विधायक लखेश्वर बघेल छात्रावास भवनों के निर्माण तक सक्रिय रहे। छात्रावासों को शुरू कराने के लिए पहल नहीं कर रहे हैं। जिला पंचायत सदस्य सारिता पाणिग्रही ने कलेक्टर से मांग की है कि करोड़ो रुपए की लागत से बने इस छात्रावासों को तत्काल शुरू कर छात्र छात्राओं को वहां प्रवेश दिलाएं।

स्तरहीन सोलर स्ट्रीट लाईट लगाए जाने से नगर पंचायत फरसगांव की सड़कों पर पसरा अंधेरा

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  •  नगर को अंधेरे में झोंककर ठेकेदार ने अपना घर आंगन कर लिया गुलजार

अमरेश झा-

कोंडागांव केंद्र और राज्य शासन सौर ऊर्जा के अधिकाधिक उपयोग और सोलर लाइट को प्रोत्साहन देते विभिन्न योजनाओं और मद से गांव-गांव और कस्बों में क्रेडा विभाग के माध्यम से बिजली के खंभे व लाइट तो लगा रहे हैं, लेकिन इस योजना के संचालन की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों और ठेकेदारों पर है, वे इस महत्वाकांक्षी पहल का भट्ठा बिठाने पर तुल गए हैं। इसका एक बड़ा उदाहरण कोंडागांव जिले के फरसगांव में देखने को मिल रहा है।

फरसगांव नगर पंचायत क्षेत्र में स्तरहीन सोलर बिजली उपकरणों के उपयोग के चलते करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद क्रेडा विभाग आमजन को रोशनी उपलब्ध नहीं कर पा रहा है। वहीं शासन की मंशा भी फ़लीभूत नहीं हो पा रही है, जिससे आने वाले समय में ज्यादा से ज्यादा लोग सौर ऊर्जा के उपकरणों से जुड़ सके। नेशनल हाईवे 30 पर स्थित नगर पंचायत फ़रसगांव इसका एक ताजा उदाहरण है जहां नेशनल हाईवे में ही सौर ऊर्जा से संचालित होने वाले खंभे व लाइट करोड़ो रुपयों की लागत से लगाए गए हैं, लेकिन सड़कों में अंधेरा पसरा रहता है। उक्त सड़कों पर लगे स्ट्रीट सोलर लाइट पर न तो नगर पंचायत ध्यान दे रही है नाहीं कोई अन्य अधिकारी। जबकि मुख्य मार्ग होने के चलते हर छोटे बड़े अधिकारी का इस मार्ग में आना जाना होता ही रहता है। लेकिन इस स्तरहीन कार्य पर अब तक जवाबदेह लोगों पर किसी प्रकार की कार्रवाई न होने के चलते कही न कही अंदरूनी क्षेत्र में बुलंद हौसलों के साथ ऐसे स्तरहीन कार्य करने वाले ठेकेदारों द्वारा और ज्यादा स्तरहीन कार्य कराए जाने की संभावना से इंकार नही किया जा सकता। वहीं फरसगांव में लगे हाई स्ट्रीट सोलर लाइट पर जानकारी लेने के लिए जब क्रेडा विभाग के कार्यपालन अभियंता मनीष सिंह नेताम के मोबाइल फोन से संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। जिसके चलते उक्त कार्य की लागत व बिजली सुधार की स्थिति के बारे में जानकारी नहीं मिल सकी।

पहली बारिश में महारानी अस्पताल जगदलपुर का ऑपरेशन थिएटर बन गया स्वीमिंग पूल

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  • रात में हुई बारिश ने खोली अस्पताल प्रबंधन की पोल

अर्जुन झा-

जगदलपुर बस्तर जिले का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल महारानी जिला चिकित्सालय जगदलपुर अव्यवस्था का शिकार हो गया है। बीती रात हुई बरसात ने अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर को स्वीमिंग पूल में में तब्दील करके रख दिया है। ऑपरेशन थिएटर में जलधारा फूट पड़ी है और वहां लबालब पानी भर गया है। ऐसे में इमरजेंसी केस आ गया तो दिक्कत हो सकती है।

 

महारानी अस्पताल के प्रमुख ऑपरेशन थिएटर में जल भराव की स्थिति निर्मित हो गई है। बीती रात जगदलपुर में जमकर बरसात हुई। इस बारिश का साइड इफेक्ट महारानी जिला चिकित्सालय में देखने को मिला है। जिला चिकित्सालय के मुख्य ऑपरेशन थिएटर में रात से ही जल भराव की स्थिति देखी जा रही है। बारिश के चलते ऑपरेशन थिएटर की दीवारों से जलधारा फूट पड़ी है। पानी की तेज धार दीवार से होकर ऑपरेशन कक्ष में पहुंच रही है और पूरे ऑपरेशन थिएटर की फर्श पर पानी भर गया है। ऑपरेशन थिएटर में रखे कीमती चिकित्सकीय सामान और ऑपरेशन में प्रयुक्त होने वाले उपकरण एवं सहायक दवाएं भीगकर खराब होने की स्थिति में पहुंच गई हैं। अस्पताल के कर्मचारियों ने जैसे तैसे ऑपरेशन टेबल व अन्य सामानों को बाहर निकाला। ऑपरेशन थिएटर से उलींच उलींचकर पानी को निकालने की कोशिश कर्मचारी लगातार कर रहे हैं, मगर दीवारों से बहकर आ रही धार इतनी प्रबल है कि कुछ ही देर में ऑपरेशन थिएटर फिर लबालब हो जाता है। समाचार लिखे जाने तक भी जल प्रवाह थमा नहीं था।. संभवतः छत पर भरा पानी दीवारों से रिस कर ऑपरेशन थिएटर में पहुंच रहा है। ऑपरेशन थिएटर में पानी भरने से इमरजेंसी केस वाले मरीजों का ऑपरेशन नहीं हो पा रहा है। अस्पताल के नवनिर्मित आपात कक्ष के पीछे आधुनिक ऑपरेशन थिएटर बनाया गया है, जहां सभी तरह के जटिल ऑपरेशन इस अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संजय प्रसाद व अन्य सर्जनों द्वारा किया जाता है, किंतु रात में हुई बारिश से इस प्रमुख ऑपरेशन थिएटर के सारे कमरों में पानी घुस भर गया है। शुरुआती बरसात में यह आलम है, तो पूरे मानसून के दौरान स्थिति कैसी रहेगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। शुक्रवार सुबह जब ऑपरेशन के लिए मरीजों को लेकर परिजन पहुंचे तब उन्होंने यह नजारा देखा। सूत्र बताते हैं कि आज अस्पताल में किसी भी मरीज का ऑपरेशन नहीं किया जा सका। इस मामले में अस्पताल अधीक्षक सह सिविल सर्जन बचते फिर रहे हैं और ऑपरेशन योग्य मरीजों के परिजन डाक्टरों को ढूंढते भटकते रहे हैं

अभी शुरू हुआ है सीजन

मानसून सीजन की शुरुआत अभी ढंग से हुई भी नहीं है कि महारानी अस्पताल का यह हाल हो गया है। अभी मानसून का पूरा सीजन बाकी है। ऐसे में आने वाले दिनों में अस्पताल का और किस कदर बुरा हाल होगा, अंदाजा लगाया जा सकता है। पूरे बस्तर संभाग में सर्व सुविधाओं से युक्त दो ही बड़े अस्पताल हैं। एक है स्व. बलिराम कश्यप मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल डिमरापाल जगदलपुर और दूसरा महारानी जिला चिकत्सालय जगदलपुर। वैसे तो संभाग के बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, कांकेर व कोंडागांव जिलों में भी जिला चिकित्सालय हैं, मगर सुविधाओं, सर्जन और विशेषज्ञ डॉक्टरों के मामले में जगदलपुर के ही दोनों अस्पताल ज्यादा समृद्ध हैं। इसे देखते हुए पूरे संभाग से क्रिटिकल केसेस जगदलपुर के लिए ही रेफर किए जाते हैं। इसके अलावा नक्सली हमलों व आईईडी ब्लास्ट में घायल होने वाले लोगों को सबसे पहले जगदलपुर के ही अस्पतालों में लाया जाता है। महारानी जिला चिकित्सालय के ऑपरेशन थिएटर में सर्जरी बंद रहने से गंभीर मरीजों की प्राण रक्षा पर खतरा पैदा हो सकता है।

महारानी जिला अस्पताल में आयुष्मान भारत प्रोत्साहन राशि घोटाले को लेकर कर्मचारी संघ ने भी खोला मोर्चा

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  • नोडल अधिकारी डॉ. शर्मा को तुरंत हटाएं : परिहार
  • स्वा. कर्म. संघ ने आयुक्त और कलेक्टर से की मांग

अर्जुन झा-

जगदलपुर: महारानी जिला चिकित्सालय जगदलपुर में महारानी अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना की प्रोत्साहन राशि के लाखों रुपयों के घोटाले को लेकर अब छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने भी मोर्चा खोल दिया है। संघ के उप प्रांताध्यक्ष एवं बस्तर जिला अध्यक्ष अजय प्रताप सिंह ने बस्तर संभाग के कमिश्नर और बस्तर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर योजना के नोडल अधिकारी डॉ. भंवर लाल शर्मा को तुरंत पद से हटाकर मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और प्रोत्साहन राशि योजना से सभी कर्मियों को बराबर बराबर दिलाने की मांग की है।

उल्लेखनीय है कि महारानी जिला चिकित्सालय जगदलपुर में आयुष्मान भारत योजना की प्रोत्साहन राशि में बड़े घोटाले को इस संवाददाता ने उजागर किया था। योजना के नोडल अधिकारी डॉ. भंवर लाल शर्मा ने प्रोत्साहन राशि अपने चहेतों के नाम दर्शाकर आहरित कर ली है और वास्तविक हकदार कर्मचारियों को प्रोत्साहन राशि दी ही नहीं है। मामले की शिकायत पीड़ितों ने बस्तर संभाग के आयुक्त और कलेक्टर से की है। शिकायत के मुताबिक महारानी अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना के नोडल अधिकारी डॉ. भंवरलाल शर्मा ने प्रोत्साहन राशि का वितरण नियम विरुद्ध कर दिया है। उनके द्वारा अपने चहेतों को डाटा एंट्री कार्य दिया जा रहा है और जिन्हें प्रोत्साहन राशि मिलनी चाहिए, उन्हें नहीं देकर कुछ ही लोगों के बीच अधिक राशि का वितरण किया जा रहा है। शिकायत के साथ प्रोत्साहन राशि वितरण की सूची भी बस्तर के दोनों उच्च अधिकारियों को उपलब्ध कराई गई है सूची में बताया गया है कि डॉ. भंवर लाल शर्मा ने अपने नाम पर 56 लाख 50 हजार 884 रुपए, कॉउंसलर अनुश्री पाल के नाम पर 1 लाख 72 हजार 319 रुपए, डाटा एंट्री ऑपरेटर संजीव झा के नाम पर 1 लाख 69 हजार 606 रुपए, डाटा एंट्री ऑपरेटर संतोषी दोहरे के नाम पर 1 लाख 48 हजार 604 रुपए, फार्मासिस्ट अंकुश मेश्राम के नाम पर 2 लाख 67 हजार 954 रुपए, फार्मासिस्ट विपुल सागर जग्गी के नाम पर 2 लाख 72 हजार 189 रुपए, फार्मासिस्ट शुभम त्रिपाठी के नाम पर 2 लाख 80 हजार 600 रुपए, डाटा एंट्री ऑपरेटर चामसिंह बघेल के नाम पर 1 लाख 54 हजार 205 रुपए और लैब मैनेजर विनोद पाणिग्रही के नाम पर 1 लाख 99 हजार 975रुपए 54 पैसे का वितरण दर्शाकर पूरी राशि आहरित कर ली है। इस तरह आयुष्मान भारत योजना की प्रोत्साहन राशि में डॉ. भंवर लाल शर्मा द्वारा लाखों रुपए की धांधली की गई है। शिकायत कर्ताओं ने महारानी जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन सह अस्पताल अधीक्षक डॉ. संजय प्रसाद पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत के मुताबिक डॉ. संजय प्रसाद की भांजी अनुश्री पॉल जिला चिकित्सालय में कॉउंसलर हैं, मगर उन्हें नियम विरुद्ध तरीके से आयुष्मान भारत योजना की डाटा एंट्री के कार्य में लगवा कर डॉ. प्रसाद ने दोहरा लाभ दिलवाया है। अनुश्री पॉल को डाटा एंट्री कार्य के एवज में 1 लाख 72 हजार 319 रुपए की आयुष्मान भारत योजना मद से प्रोत्साहन राशि दिलाई गई है। इसके अलावा अनुश्री पॉल को कॉउंसलर के तौर पर तन्खावाह तो मिलती ही है, हेपेटाईटिस डाटा एंट्री ऑपरेटर के तौर पर भी हर माह दो हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि मिल रही है। बताया गया है कि अनुश्री पाल ने हेपेटाईटिस डाटा एंट्री का कार्य बंद कर दिया है, फिर भी उन्हें प्रति माह इस कार्य के एवज में दो हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। इस तरह सिविल सर्जन डॉ. संजय प्रसाद ने अपने पद का दुरूपयोग करते हुए अपनी रिश्तेदार को अनुचित आर्थिक लाभ दिलाया है।

परिहार आए एक्शन मोड में

छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के उप प्रांताध्यक्ष एवं बस्तर जिला अध्यक्ष अजय प्रताप सिंह परिहार भी इस घोटाले को लेकर अब एक्शन मोड में आ गए हैं। श्री परिहार से आयुष्मान भारत योजना से जुड़े पीड़ित कर्मचारियों ने प्रोत्साहन राशि घोटाले की शिकायत कर उनसे संघ के माध्यम से हस्तक्षेप की अपील की थी। इसके बाद अजय प्रताप सिंह परिहार ने बस्तर के संभाग आयुक्त श्याम धावड़े, बस्तर कलेक्टर विजय दयाराम के. और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त संचालक को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में श्री परिहार ने आयुष्मान भारत योजना प्रोत्साहन राशि घोटाला को संगीन मामला बताते हुए डॉ. भंवर लाल शर्मा को तत्काल योजना के नोडल अधिकारी पद से मुक्त कर मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और प्रोत्साहन राशि योजना से जुड़े सभी अधिकारी कर्मचारियों को समान रूप से आवंटित कराने की मांग की है। अजय प्रताप सिंह परिहार ने कहा है कि मामले को तत्काल गंभीरता से लिया जाना जरूरी है, ताकि डॉ. भंवर लाल शर्मा लीपापोती न करने पाएं।

डीएव्ही मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल उलनार में प्रवेशोत्सव

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जगदलपुर नए शिक्षा सत्र 2024- 25 में शाला प्रवेशोत्सव के अवसर पर डीएव्ही मुख्यमंत्री विद्यालय परिसर उलनार में नवप्रवेशी बच्चों का तिलक लगाकर स्वागत किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत प्राचार्य एवं नवप्रवेशी बच्चों द्वारा सरस्वती माता के छायाचित्र की पूजा अर्चना के साथ की गई। इस अवसर पर बच्चों को पाठय पुस्तकों एवं चॉकलेट का वितरण किया गया। कक्षा 2 के विद्यार्थियो द्वारा एक मनमोहक प्रस्तुति दी गई जिसमे नवप्रवेशी बच्चों ने भी हर्षोल्लास के साथ भाग लिया। वो भी खुशी से झूम उठे। विद्यालय आने का उत्साह बच्चों में भी दिखा। प्राचार्य मनोज शंकर द्वारा शिक्षा से सबंधित महत्वपूर्ण बातें विद्यार्थियों को बताई गई तथा बच्चों के शिक्षा में शिक्षकों एवं पालकों की अहम भूमिका के बारे में भी प्राचार्य ने प्रकाश डाला। इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षक, पालक एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।

नया शिक्षा सत्र शुरू, मगर छत्तीसगढ़ का शिक्षा विभाग फिलहाल है बेसहारा, केदार कश्यप सम्हालेंगे विभाग?

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  • ‘जंगल’ के जंजाल से मुक्त होना चाहते हैं कश्यप
  • शिक्षा मंत्री रह चुके केदार बस्तर और छग में शिक्षा की नई क्रांति लाने बेताब
  • वन विभाग छोड़कर शिक्षा मंत्रालय सम्हालने इच्छुक हैं केदार कश्यप

अर्जुन झा

जगदलपुर छत्तीसगढ़ में नया शैक्षणिक सत्र आरंभ हो चुका है, मगर प्रदेश का शिक्षा विभाग फिलहाल बेसहारा जैसा ही है। इस बीच चर्चा सुनाई दे रही है कि प्रदेश के वन मंत्री और बस्तर संभाग के ऊर्जावान युवा आदिवासी नेता केदार कश्यप वन मंत्रालय छोड़कर शिक्षा विभाग सम्हालने के इच्छुक हैं। हालांकि यह बात पुष्ट नहीं है, मगर सियासी गलियारों में चल रही चर्चा तो कुछ ऎसी ही दास्तां बयां करती दिख रही है। कहा जा रहा है कि केदार कश्यप वन विभाग को छोड़कर शिक्षा मंत्रालय सम्हालने में ज्यादा दिलचस्पी रखते हैं। इन चर्चाओं को इसलिए भी बल मिलता है क्योंकि केदार कश्यप डॉ. रमन सिंह मंत्रिमंडल में शिक्षा मंत्री रह चुके हैं और उन्हें इस विभाग का खासा तजुर्बा भी है।

भाजपा के वरिष्ठ नेता बृजमोहन अग्रवाल के सांसद चुने जाने और शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिए जाने के बाद फिलहाल शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री विष्णु देव सम्हाल रहे हैं। विष्णु देव साय अनुभवी नेता हैं, मगर उन पर काम का बोझ ज्यादा है और देर सबेर मुख्यमंत्री  साय शिक्षा मंत्रालय किसी और मंत्री को सौंप सकते हैं। ऐसे में  साय के समक्ष सबसे बेहतर विकल्प केदार कश्यप ही हो सकते हैं। सूत्र बताते हैं कि केदार कश्यप जंगल के जंजाल से मुक्त होना चाहते हैं और साफ सुथरे माने जाने वाले शिक्षा विभाग को ही सम्हालने में ज्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं। डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में केदार कश्यप क्योंकि शिक्षा मंत्री रह चुके हैं और शिक्षा विभाग में बढ़िया काम करते हुए शानदार परफॉरमेंस दिखा चुके हैं। तब राज्य में शिक्षा व्यवस्था की बेहतरी के लिए उन्होंने बड़े ही सार्थक और उत्कृष्ट परिणाम मूलक कार्य किए थे। अपने पिछले कार्यकाल में केदार कश्यप शिक्षा विभाग के आधारभूत ढांचे को बेहतर ढंग से समझ चुके हैं और इस विभाग में और क्या कुछ करना है, इसका अंदाजा भी लगा चुके हैं। केदार कश्यप सुशिक्षित और अनुभवी नेता हैं और उनमें अकूत क्षमता भी है, मगर एक मुख्यमंत्री होने के नाते उन पर जिम्मेदारियों का बड़ा बोझ है। इसलिए वे शिक्षा विभाग का जिम्मा किसी और को सौंप सकते हैं। इस बीच जानकारी मिल रही है कि मौजूदा वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप वन मंत्रालय छोड़कर शिक्षा मंत्रालय की बागडोर सम्हालने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक केदार कश्यप की मंशा है कि जंगल (वन विभाग) के जंजाल से मुक्त होकर एकबार फिर शिक्षा मंत्रालय सम्हालने की जिम्मेदारी उन्हें मिल जाए। हालांकि इस संबंध में केदार कश्यप के करीबी सूत्रों ने न तो इसकी पुष्टि की है और न ही इस बात से इंकार किया है। इन चर्चाओं को बल इसलिए भी मिल रहा है क्योंकि केदार कश्यप डॉ. रमन सिंह के मुख्यमंत्रित्व के दौरान शालेय शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी कुशलता पूर्वक सम्हाल चुके हैं। उन्होंने शिक्षा विभाग को राज्य में मजबूत आधार दिया था, बस्तर संभाग सहित समूचे छत्तीसगढ़ में केदार कश्यप ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने की दिशा में बेहतरीन काम किया था। शिक्षा विभाग के शीर्ष अधिकारियों से लेकर जिला और ब्लॉक स्तर तक के अधिकारी कर्मचारी और शिक्षक शिक्षिकाएं सभी केदार कश्यप की कार्यप्रणाली और व्यवहार से बेहद खुश थे। कश्यप ने छात्र छात्राओं से लेकर शिक्षक शिक्षिकाओं और अधिकारी कर्मचारियों के हित में बतौर शिक्षा मंत्री शानदार काम किया था। बस्तर संभाग के स्कूलों में शिक्षा के स्तर में काफी सुधार आया था। यहां के ग्रामीणों में भी अपने बच्चों की पढ़ाई के प्रति दिलचस्पी जागने लगी थी।बस्तर के लोग शिक्षा मंत्री के रूप में केदार कश्यप के योगदान को आज भी याद करते हैं। इस लिहाज से आम जनता भी यही चाहती है कि केदार कश्यप फिर से शिक्षा मंत्रालय सम्हालें। वैसे किसे किस विभाग की जिम्मेदारी देना है, यह मुख्यमंत्री पर निर्भर है, मगर आमजन चाहते हैं कि शिक्षा विभाग सम्हाल चुके केदार कश्यप को ही शिक्षा मंत्रालय दिया जाए, भले ही वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय उनसे वापस ले लिया जाए। बस्तर और राज्य के विद्यार्थियों के हित में यही श्रेयष्कर होगा।

बलिराम कश्यप का था सपना

बस्तर में भाजपा के मजबूत आधार स्तंभ रहे दिवंगत नेता बलिराम कश्यप का भी यही सपना था कि बस्तर और छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था मजबूत हो, यहां के हर बच्चे को उत्कृष्ट शिक्षा मिले। अपने पिता के इस सपने को पूरा करने में शिक्षा मंत्री रहते केदार कश्यप पूरी ताकत से जुटे रहे। उच्च शिक्षित केदार कश्यप अपने पिता के इस सपने को पूरा करने की दिली इच्छा आज भी रखते हैं। संभवतः इसीलिए केदार कश्यप जंगल महकमे से मुक्त होकर साफ सुथरे शिक्षा विभाग का मंत्रालय सम्हालने सहर्ष राजी हो सकते हैं। केदार कश्यप के निर्वाचन क्षेत्र नारायणपुर के लोगों का तो यहां तक कहना है कि केदार कश्यप को पहले ही वन वन मंत्रालय की जगह शिक्षा मंत्रालय दे दिया जाना चाहिए था। वैसे अभीभी देरी नहीं हुई है यह विभाग अब श्री कश्यप को ही दे देना चाहिए। वैसे भी छत्तीसगढ़ में वन मंत्रालय को अभिशप्त माना जाता है। जिसने भी यह मंत्रालय सम्हाला, वह राजनीतिक रूप से हाशिये पर चला गया, या उसके साथ कोई न कोई अनहोनी जरूर हुई है।

कुम्हाररास स्कूल में बच्चों की ताजपोशी

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  •  अनूठे अंदाज में मनाया गया शाला प्रवेश उत्सव

जगदलपुर संकुल केंद्र एजुकेशन सिटी सुकमा के अंतर्गत प्राथमिक व माध्यमिक शाला कुमाररास मे शाला प्रवेश उत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान नव प्रवेशी बच्चों को ताज पहनाकर प्रेरणा दी गई कि आज के तुम राजकुमार आगे चलकर राजा बनोगे।

बस्तर संभाग के सुकमा जिले के कुम्हाररास की शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला में प्रवेश उत्सव का आयोजन किया गया। शाला प्रवेश उत्सव कार्यक्रम में मुख्य अतिथि भाजपा नेता दिलीप पेद्दी थे।कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधान अध्यापिका कुसुम शर्मा, प्रधान पाठक शीला सिंह ने की। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की पूजा अर्चना के साथ मुख्य अतिथि दिलीप पेद्दी द्वारा की गई। इसके बाद नव प्रवेशी बच्चों को तिलक लगाकर, माला पहनाकर निशुल्क गणवेश व पुस्तक वितरण मुख्य अतिथि व एसएमसी सदस्यों के हाथों से करवाया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भाजपा नेता दिलीप पेद्दी ने कार्यक्रम में उपस्थित समस्त बच्चों को अच्छे से पढ़ने, अपना व अपने माता पिता के साथ पूरे जिले व राज्य का नाम रौशन करने के लिए अनुशासन व लगन के साथ शिक्षा ग्रहण करने की प्रेरणा दी। साथ ही प्रेरणा दायक शब्दों से बच्चों को स्कूल प्रतिदिन आने की समझाईश दी व पालकों को भी शिक्षा का महत्व समझाते हुए अपने बच्चों को प्रतिदिन विद्यालय भेजने के लिए समझाईश दी।  पेद्दी ने राज्य व केंद्र सरकार द्वारा शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई नीतियों और किए जा रहे कार्य की प्रशंसा करते हुए उपस्थित बच्चों व पालकों को अधिक से अधिक लाभ लेते हुए बच्चों को शिक्षा का लाभ लेने की अपील की।साथ ही विद्यालय मे कुछ कमी होने पर जिला कलेक्टर व जिला शिक्षा अधिकारी के आलावा राज्य सरकार को अवगत कराकर समस्या का समाधान करवाने की बात कही। शाला प्रवेश उत्सव कार्यक्रम में मनोज मंडल, समर पाइक, अंजना पोया संकुल प्रभारी, लोकेंद्र नायक संकुल शैक्षणिक समन्वयक, एसएमसी सदस्य, पालक, शिक्षक, शिक्षिकाएं व स्कूली बच्चे उपस्थित थे।

नियद नेल्लानार योजना ने सुकमा जिले के अंतिम छोर के गांव परिया में बिखेरी विकास की हरियाली

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  • जहां उम्मीदें दम तोड़ चुकी थीं, वहां पहुंचा विकास
  • गांव में विकास कार्यों का कलेक्टर ने किया निरीक्षण

अर्जुन झा

जगदलपुर जहां उम्मीदें दम तोड़ चुकी थीं, वहां अब खुशियों की बहार नजर आने लगी है, नक्सलियों ने जिन गांवों को विकास की मुख्यधारा से काटकर रख दिया था, उन गांवों में भी अब विकास अंगड़ाई लेता नजर आ रहा है। कलेक्टर श्री हरिस. एस ने बुधवार को दुर्गम मार्ग से होकर जिले के अंतिम छोर पर स्थित ग्राम पंचायत बगडेगुड़ा के आश्रित ग्राम परिया में नियद नेल्लानार योजना के तहत सड़क निर्माण, आवास, मोबाईल नेटवर्क टॉवर, एसबीएम योजना सहित अन्य विकास कार्यों का निरीक्षण किया। कलेक्टर ने कहा कि शासन द्वारा नियद नेल्लानार योजना के तहत विकास कार्यों और आधारभूत संरचनाओं के विकास पर जोर दिया जा रहा है, इसी के तहत गांव के सर्वांगीण विकास में ग्रामीणजनों के सहयोग से अन्य विकास कार्यों की स्वीकृति देकर लाभ पहुंचाया जाएगा। उन्होंने नियद नेल्लानार योजनांतर्गत चिन्हांकित ग्राम परिया में पंचायत भवन, आंगनबाड़ी केंद्र भवन, पीएम आवास के तहत बने आवासों का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने नियद नेल्लानार योजना के तहत ग्रामीणों की सुविधाओं के लिए विकास कार्यों को गति दी है। विकास कार्यों को गति देने में ग्रामीणजनों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।

कलेक्टर ने कहा कि स्कूलों में बच्चों उपस्थिति सुनिश्चित कर शिक्षा ग्रहण करवाएं। नियद नेल्लानार योजनांतर्गत गांव में आधारभूत संरचनाओं का विकास के साथ जनता के सभी प्रकार के सहयोग के लिए है। इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ सुश्री नम्रता जैन ,एसडीओपी  परमेश्वर तिलकवार, एपीओ  बलवंत मार्काे, टीआई केरलापाल गोविन्द यादव , सचिव, सहायक रोजगार उपस्थित थे।

कलेक्टर ने पंचायत भवन सामसेट्टी की निरीक्षण के दौरान सचिव और रोजगार सहायक से मनरेगा, आवास की पूर्णता, मोबाइल नेटवर्क, जाति प्रमाण पत्र प्रदाय की जानकारी लेकर आवश्यक निर्देश दिए। कलेक्टर ने परिया सचिव से पीएम आवास में लम्बित प्रकरण की जानकारी ली, साथ ही परिया ग्राम में सोलर, पीडीएस भवन, शौचालय, हैडपंप, आंगनवाड़ी, जल जीवन मिशन सहित अन्य योजनाओं के क्रियान्वयन स्थिति के बारे में पूछा।

इस दौरान उपस्थित ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम परिया तक सड़क का समतलीकरण होने से आने जाने में हमे काफी सुविधा हुई है। इसके लिए उन्होंने शासन-प्रशासन का आभार व्यक्त किया। जिला पंचायत सीईओ सुश्री नम्रता जैन ने ग्रामीणों को शौचालय के उपयोग हेतु जागरुक करने को कहा। कलेक्टर ने ग्रामीणों से चर्चा के दौरान तेदुपत्ता खरीदी और भुगतान के संबंध में जानकारी ली। पीएम आवास के तहत हुए आवास निर्माण जो पूर्ण हो गए हैं, उनमें हितग्राही के नाम, लागत, वर्ष इत्यादि का उल्लेख शासन के निर्देश अनुसार करने कहा। इस दौरान कलेक्टर ने बगडेगुड़ा और परिया को जोड़ने वाले निर्माणाधीन पुलिया का भी निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्माण कार्य की गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखने तथा तय समय में निर्माण पूरा कराने के निर्देश दिए।

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