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भाजपा का सफाया तय : दीपक बैज

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  •  बनने जा रही है इंडिया गठबंधन की सरकार

जगदलपुर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने चुनाव परिणामों के रुझान पर कहा कि भाजपा का सफाया हो रहा है। जो थोड़ी बहुत सीटें उसे मिल रही हैं, वो उसके सहयोगी दलों की वजह से मिल रही हैं।

मतगणना के रुझान आने के बाद पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए दीपक बैज ने कहा कि इस लोकसभा चुनाव में भाजपा की हालत बड़ी पतली हो गई है। जिन मोदी जी के चेहरे पर भाजपा ने चुनाव लड़ा है, उन्हीं मोदी जी को वराणसी सीट पर पहले दो राउंड की काउंटिंग में को शिकस्त झेलनी पड़ी, बाद में उनकी स्थिति थोड़ी सम्हली है। जबकि हमारे नेता राहुल गांधी रायबरेली ओर वायनाड दोनों ही सीटों से लगातार बढ़त बनाए हुए हैं और जीत की ओर अग्रसर हैं। श्री बैज ने कहा – इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि मोदी जी और भाजपा के खिलाफ देश में कितना आक्रोश है, कितना अंडर करेंट है। मोदी लहर, मोदी लहर की हवा फैलाकर भाजपा ने देश में माहौल बनाने की कोशिश की थी, लेकिन जनता ने भाजपा को सिरे से नकार दिया है। पीसीसी चीफ दीपक बैज ने कहा कि असली लहर तो कांग्रेस और इंडिया गठबंधन की चली है। हम लोग देख रहें हैंकि मोदी जी खुद जिनके चेहरे पर पूरा चुनाव लड़ा जा रहा है वो खुद शुरुआती दौर पर पीछे थे अभी आधी मतगणना भी नही हुई है और इंडिया गठबंधन बहुत अच्छी स्थिति में है और शाम होते होते आप देखेंगे कि हमारा गठबंधन सरकार बना रहा है।दीपक बैज ने छत्तीसगढ़ me कांग्रेस के प्रदर्शन के सवाल पर कहा कि अभी एक सीट पर हम आगे चल रहे हैं और 4 सीटों पर नेक टू नेक फाइट है। छत्तीसगढ़ में भी शाम तक हमारे पक्ष में ही परिणाम आएगा और हम पहले से बेहतर स्थिति में रहेंगें। दीपक बैज ने कहा कि देश में अंततः इंडिया गठबंधन की सरकार बनने जा रही है।

नक्सलियों के खिलाफ हर मोर्चे पर कामयाब जंग लड़ रहे हैं छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा

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  •  नक्सलियों के स्लीपर सेल का जीत रहे भरोसा, हासिल कर रहे हैं जनविश्वास भी
  • नक्सल गढ़ में खुला उम्दा अस्पताल, आत्मसमर्पण का दौर भी जारी

-अर्जुन झा-

जगदलपुर छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार नक्सल समस्या उन्मूलन की दिशा में ठोस रणनीति के साथ आगे बढ़ते हुए कामयाबी के झंडे गाड़ती चली जा रही है। इसमें उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा की बड़ी भूमिका है। विजय शर्मा का अब तक का परफॉरमेंस बताता है कि नक्सल मोर्चे पर वे छत्तीसगढ़ के पहले सफलतम गृहमंत्री के रूप में प्रतिष्ठित हो चुके हैं।

गृहमंत्री का दायित्व सम्हाने के बाद से विजय शर्मा शायद ही कभी चैन से बैठे हों। कभी वे बस्तर संभाग के घोर नक्सल प्रभावित गांवों के दौरे पर चले आते हैं, वहां पुलिस और सुरक्षा बलों के जवानों के कैंप में जाकर उनका हौसला अफजाई करते हैं, ग्रामीणों के बीच पहुंच कर उनकी समस्याएं और सुख दुख पूछते हैं तथा उनका निदान कराते हैं और फिर रायपुर लौटकर उस गांव के सरपंच, उप सरपंच एवं किसी युवा को खुद ही फोन लगाकर समस्या के निदान की स्थिति के बारे में पूछते हैं तो कभी उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा रायपुर के अस्पताल में भर्ती आईईडी ब्लास्ट में घायल सुकमा की महिलाओं से मिलने पहुंच जाते हैं। जब एक जनप्रतिनिधि इतना जागरूक होगा, तो स्वाभाविक है प्रशासनिक अमला भी मुस्तैद रहेगा ही। जवानों का जोश भी हमेशा हाई बना रहेगा। सजग जनप्रतिनिधि जनता के दिलों में आसानी से अपना घर बना ही लेता है। विजय शर्मा के ऐसे कदमों के सुकमा और बस्तर की जनता कायल हो गई है। बस्तर संभाग के सुकमा, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और कांकेर जिलों के धुर नक्सल प्रभावित गांवों लगातार पुलिस और सुरक्षा बलों के कैंप स्थापित किए जा रहे हैं। जहां सुरक्षा और शांति होगी वहां विकास के रास्ते खुद बखुद बन जाते हैं और ऐसा ही कुछ बस्तर संभाग में देखने को मिल रहा है। सुकमा जिले के सबसे ज्यादा संवेदनशील गांव पूवर्ती में सीआरपीएफ द्वारा सर्व सुविधायुक्त अस्पताल का खोला जाना भी विजय शर्मा की एक बड़ी उपलब्धि है। दूसरी ओर नक्सलियों और नक्सल समर्थक ग्रामीणों का आत्मसमर्पण बड़े पैमाने पर हो रहा है। आत्म समर्पण का रिकॉर्ड बनता जा रहा है। यह भी गृहमंत्री के रूप के रूप में विजय शर्मा की बड़ी सफलता है। इन सारी बातों का लब्बो लुआब यही है कि गृहमंत्री एवं उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा नक्सलियों के खिलाफ हर मोर्चे पर कामयाब जंग लड़ रहे हैं। ऐसे में बस्तर में शांति स्थापना तय है।

कोंडागांव में किया मंथन

कोंडागांव बस्तर को नक्सलवाद की काली छाया से मुक्त करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार बहुआयामी प्रयास कर रही है। एक साथ अनेक मोर्चों पर पहल, प्रयास और कार्य किए जा रहे हैं। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने 2 जून को कोंडागांव में समाज के बुद्धिजीवी वर्ग के साथ सरकार की पुनर्वास नीति को और किस ढंग से बेहतर किया जा सकता है तथा नक्सल पीड़ित परिवारों के लिए क्या अच्छा किया जा सकता है। इस विषय पर करीब 4 घंटे तक गहन विचार विमर्श हुआ। उक्त विषय पर समाज के विकास में कार्यरत लोगों से राय जानी। साथ ही विचार साझे किए गए। उल्लेखनीय है कि उप मुख्यमंत्री व गृह मंत्री श्री विजय शर्मा ने हाल ही में गूगल फार्म जारी कर पुनर्वास नीति के संबंध में सुझाव मांगे हैं। उन्होंने माओवादियों से भी अपील की है कि वे ही बताएं पुनर्वास नीति में क्या चाहते हैं।

फरसगांव में नगर पंचायत की नाक के नीचे तन गई दोमंजिला अवैध दुकान, बेसुध पड़ा है अमला

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  •  नगर पंचायत काम्प्लेक्स से सटाकर बना रहा दुकान

अमरेश झा

कोंडागांव यूं तो निवास एवं व्यवासायिक प्रयोजन हेतु दुकान अपने पसंद से कहीं भी और कभी भी बना सकते हैं, मगर जमीन अपनी हो और समस्त दस्तावेज सही हो तभी। वहीं कोंडागांव जिले के फरसगांव ब्लॉक में ऐसा देखने को नहीं मिल रहा है। यहां एक कहावत चरितार्थ हो रही है कि सैया भये कोतवाल तो डर काहे का। जी हां इस कहावत को चरितार्थ किया है फरसगांव के एक दुकानदार ने।

दरअसल फरसगांव के बस स्टैंड पर बन रहे नगर पंचायत के नए व्यवासायिक परिसर से लगकर इन दिनों शासकीय भूमि पर अवैध रूप से मनमाना निर्माण कार्य करवाने का मामला प्रकाश में आया है। फरसगांव बस स्टैंड में निर्माणाधीन व्यवसायिक काम्प्लेक्स के ठीक बगल में एक और दोमंजिली दुकान का निर्माण कार्य तेजी से कराया जा रहा है। लेकिन उक्त निर्माण कार्य हेतु न तो नगर पंचायत से अनुमति ली गई है, न ही संबंधित व्यक्ति के पास जमीन का कोई वैध दस्तावेज है। बावजूद इसके नगर के बीचों बीच धड़ल्ले से निर्माण कार्य करवाया जा रहा है। नगर पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों को सब कुछ पता होने के बावजूद अब तक किसी प्रकार की कार्रवाई न करना नगर में जनचर्चा का विषय बना हुआ है। फरसगांव की जनता के बीच तो यहां तक चर्चा है कि संबंधित दुकानदार द्वारा नगर पंचायत के अधिकारी, कर्मचारियों से लेकर वहां के जनप्रतिनिधियों तक को अच्छा खासा नजराना देकर उक्त निर्माण कार्य कराया जा रहा है तभी संबंधितों ने इतने बड़े स्ट्रक्चर को नजर अंदाज कर रखा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार नगर पंचायत फरसगांव द्वारा बस स्टैड में काम्प्लेक्स बनवाने के लिए जिला खनिज न्यास निधि मद से 25 लाख रुपए की राशि प्राप्त हुई थी। जिसके पश्चात नगर पंचायत ने काम्प्लेक्स के निर्माण का कार्य शुरू करवा दिया था। वर्तमान में लगभग 70-80 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा भी हो चुका है। लेकिन इसके साथ साथ काम्प्लेक्स की दीवार से सटाकर उतनी ही तेज गति से एक अन्य भवन का निर्माण कार्य भी चल रहा है। जिसमें न तो नगर पंचायत से कोई अनुमति ली गई है न ही अन्य नियमों का पालन किया जा रहा है।

सिर्फ नोटिस देकर इतिश्री

दुकान निर्माण के लिए संबंधित व्यक्ति ने नगर पंचायत से न तो अनुमति ली है और न ही एनओसी प्राप्त किया है। बावजूद नगर पंचायत प्रशासन अवैध निर्माण रोकने कोई एक्शन नहीं ले रहा है। नगर पंचायत के अधिकारी संबंधित व्यक्ति को सिर्फ नोटिस भेजकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ले रहे हैं। जमीनी कार्रवाई का सर्वथा अभाव दिख रहा है। अवैध निर्माण करने वाले व्यक्ति को पहले दो नोटिस भेजे जा चुके हैं और तीसरा नोटिस भेजने की तैयारी की जा रही है। पहला नोटिस 10 फ़रवरी को और दूसरा नोटिस 4 मार्च को भेजा गया था। संबंधित व्यक्ति ने दोनों नोटिस को बहुत ही हल्के में लिया और नोटिस का जवाब देना भी मुनासिब नहीं समझा। वहीं तीन माह गुजर जाने के बावजूद अवैध निर्माण पर रोक नहीं लगाई जा सकी है। इससे तो यही लगता है कि अवैध निर्माण को कहीं न कहीं प्रश्रय मिला हुआ है।

वर्सन

होगी कार्रवाई

दुकान निर्माण हेतु नगर पंचायत से अनुमति नहीं दी गई है। हम संबंधित व्यक्ति को दो नोटिस भेज चुके हैं। एक और नोटिस भेजकर उन्हें सम्पूर्ण दस्तावेजों के साथ तलब कर रहे हैं। यदि दस्तावेज नहीं होंगे तो भवन के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

अजय सिंह राजपूत,

   सीएमओ, नगर पंचायत, फरसगांव

नक्सलियों ने की मोबइल टॉवर में आगजनी

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जगदलपुर बस्तर संभाग के नारायणपुर जिला अंतर्गत के धौड़ाई थाना क्षेत्र के दुडमी गांव में नक्सलियों ने मोबइल टावर में आगजनी की है। नक्सलियों की मंशा मोबइल फोन कनेक्टीविटी के पूरे सिस्टम को तबाह करने की थी, मगर केबल ही जल पाया। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस। टावर कनेक्शन का वायरिंग जला है।

प्रेशर आईईडी के चपेट में आने एक ग्रामीण गंभीर घायल

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जगदलपुर बस्तर संभाग के बीजापुर जिले में रविवार की सुबह 9 -10 के बीच प्रेशर आईईडी की चपेट में आने से ग्राम छुटवाई का एक ग्रामीण बुरी तरह घायल हो गया है। जानकारी के अनुसार शौच करने के लिए सड़क किनारे गया छुटवाई निवासी 35 वर्षीय माड़वी नंदा प्रेशर आईईडी की चपेट में आ गया। इससे उसका दांया पैर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ है। शरीर के अन्य हिस्सों में भी चोट आई है। सीआरपीएफ के फील्ड अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर ईलाज के लिए माड़वी नंदा को जिला चिकित्सालय बीजापुर रेफर किया गया‌ है। घटना बीजापुर जिले के तर्रेम थाना क्षेत्र के तोयानाला के पास की है। एसपी डॉ. जितेंद्र यादव ने घटना की पुष्टि की है।

सड़क पर चलती बस में लगी आग, कुद कर बचाई जान

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रायपुर अभनपुर के पास चलती बस में लगी आग । बताया जा रहा है कि महिंद्रा ट्रेवल्स बस क्रमांक सीजी 19 एफ 0251 बस्तर से रायपुर आ रही थी । तभी अभनपुर के मोहन ढाबा के पास बस के एडिटर वाले हिस्से से काला धुआं उठाना शुरू हो गया l जो बस के अंदर भरने लगा। बस में कुल 40 के करीब यात्री सवार थे जो घबराकर यात्रियों ने बस के दरवाजे और खिड़कियों से कुद कर अपनी जान बचाई । बस में सवार सभी यात्री सुरक्षित हैं ।सभी यात्रियों को दूसरी बस से रायपुर रवाना किया गया मौके पर पहुंची अभनपुर पुलिस और दमकल विभाग ने आग पर काबू पा लिया।

लोकतंत्र बनाम माओवाद पर विचार गोष्ठी कल

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जगदलपुर बस्तर शांति समिति जगदलपुर द्वारा ‘लोकतंत्र बनाम माओवाद’ थ्येन आनमन की विरासत का बोझ विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन 3 मई को सुबह 9.30 बजे 11. 30 बजे तक किया गया है। शहर के नया बस स्टैंड में जिला पंचायत के सामने स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी हॉल में होने वाली इस विचार गोष्ठी के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा होंगे। अध्यक्षता वन मंत्री केदार कश्यप करेंगे मुख्य वक्ता प्रसिद्ध लेखक एवं विचारक राजीव रंजन प्रसाद होंगे। नगर एवं अंचल के बुद्धिजीवियों एवं अमन पसंद नागरिकों से विचार गोष्ठी में उपस्थिति की अपील की गई है।

मुसीबत में पड़े मरीजों का कैसे हो उपचार जब एंबुलेंस ही पड़ गई हैं बीमार

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  •  कोंडागांव में गंभीर मरीजों का अब भगवान ही सहारा

अमरेश झा-

कोंडागांव आज भी जब कोई एंबुलेंस सायरन बजाती हुई तेजी से निकलती है, तो हर व्यक्ति मन ही मन भगवान से यही विनती करता है कि भगवान यह व्यक्ति जो भी हो, उसकी जान बचा लेना।मगर जीवन रक्षक की भूमिका निभाने वाली एंबुलेंस ही बीमार पड़ जाए तो मुसीबत में फंसे मरीजों का हाल क्या होगा ?

जिन मरीजों की जान पर बन आई होती है, उनकी प्राण रक्षा में एंबुलेंस की अहम भूमिका होती है। ऐसे में अगर एंबुलेंस ही बीमार हालत में पड़ी हो तो मरीजों का भगवान ही मालिक है। अगर एंबुलेंस अपनी ही लाचारी पर आंसू बहाने लगे तो फिर क्या कहा जा सकता है। जी हां हम बात कर रहे हैं कोंडागांव जिले की सरकारी एम्बुलेंसों की जो कोंडागांव के विभिन्न गैराजों में विगत कई महीनों से और कुछ तो कई वर्षों से खराब होकर खड़ी हैं। उनका हालचाल जानने वाला कोई नहीं है। एक कॉल पर सडक़ों पर दौडऩे वाली एम्बुलेंस इन दिनों जहां कबाड़ हो रही हैं। वहीं एम्बुलेंस के कई पुर्जे गायब भी हो चुके हैं। उसके बाद भी जिम्मेदार एम्बुलेंस को उठवाने में कोई रूचि नहीं दिखा रहे हैं। गौरतलब है कि मरीजों की सुविधा के लिए स्वास्थ्य विभाग को एंबुलेंस उपलब्ध कराई जाती है। इसके लिए शासन द्वारा लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं। जिससे आपातकाल में गंभीर बीमारी से ग्रसित या विषम परिस्थिति में मरीज को समय पर अस्पताल लाया जा सके। लेकिन यह तभी संभव है जब एंबुलेंस फिट हालत में हो। पुरानी एंबुलेंस विभाग ठीक करने की जहमत नहीं उठाता । जिसके चलते सभी पुरानी एम्बुलेंस खड़ी कर दी गई हैं। वह जंग खाने लगी हैं। लंबे समय से खराब खड़ी एंबुलेंस जंग और धूल खा रही हैं। एंबुलेंस की स्थिति जर्जर हो चुकी है। लेकिन विभाग इस ओर से आंखें मूंदे बैठा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा इनकी नीलामी के लिए भी कोई पहल नहीं की जा रही है। आपातकाल में मरीजों की जान बचाने वाली एंबुलेंस धूल, मिट्टी, धूप, वर्षा से स्वयं दम तोड़ रही है। जब अस्पताल में गम्भीर रूप से बीमार कोई मरीज को आकस्मिक दुर्घटनाओं में घायल व्यक्ति को लाया जाता है तो डॉक्टरों द्वारा उक्त घायलों या मरीजों को अन्य बड़े अस्पताल में रेफर कर दिया जाता है तब भी एम्बुलेंस का ही सहारा लिया जाता है। फिर इन एम्बुलेंसों के असली महत्व का पता चलता है? और इन्ही हालातों में जब परिजन इन एम्बुलेंसों के बारे में पता करते है तो मालूम पड़ता है कि जो एम्बुलेंस बची है, वो किसी अन्य मरीज को छोड़ने गई है।

उसके बाद कितनी बार अस्पताल परिसर में विवाद की स्थिति निर्मित होती है। संबंधित डॉक्टरों का कहना होता है कि एम्बुलेंस की व्यवस्था नही है और जो है भी वे या तो खराब पड़ी है या किसी अन्य मरीज को छोड़ने अन्य जगहों पर गई हैं। ऐसे में मरीजों के स्वास्थ्य की स्थिति चिंतनीय है।आपको बताते चले कि अति इमरजेंसी सेवा में काम आने वाली 108 और 102 नंबर की फ्री एंबुलेंस सेवा का असल हाल देखना हो तो मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के पीछे नजर डालिए। यहां छह से सात एंबुलेंस कबाड़ में तब्दील हो चुकी हैं। यही हाल अन्य अस्पतालों या कार्यालय परिसर में भी देखने को मिल जाती है। जहां इन कंडम एंबुलेंस को इस तरह से छोड़ दिया गया है, जो झाड़ियों में गुम हो गई हैं। परंतु विभाग कुंभकर्णी नींद से जागने में अपनी असमर्थता जता रहा है अब तो कोई चमत्कार ही विभाग को नींद से जगा सकता है।

अब छाछ, लस्सी, सॉफ्ट ड्रिंक से नहीं, चिल्ड बियर से गला तर करने लगी है अपने शहर की नारी

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  • सचमुच मॉडर्न हो रहा है हमारा अपना जगदलपुर
  • मेट्रो सिटी की तर्ज पर शराब दुकानों में पड़ने लगे बस्तर की नारी के कदम

अर्जुन झा-

जगदलपुर कौन कहता है हमारा बस्तर जिला, हमारा अपना जगदलपुर शहर पिछड़ा हुआ है? कौन कहता है हम बस्तरिहा आज भी आदिम युग में जी रहे हैं? न – न, ऐसा कहने की जुर्रत भी मत कीजिएगा। हम भी और हमारे शहर की मातृशक्ति भी मेट्रो सिटीज़ के मॉडर्न सोसाइटी वालों की तरह कतई पीछे नहीं हैं। हमारे शहर की युवतियां और दो – तीन बच्चों वाली माताएं भी बेधड़क शराब दुकानों से चिल्ड बियर और व्हीस्की खरीदकर अपना गला तर करने लगी हैं।

शेष दुनिया के लोग बस्तर को अनपढ़, नासमझ और लंगोटी पहनकर रहने वालों का इलाका मानते हैं। लोगों की धारणा बन गई है कि बस्तर के लोग आदिम युग में जी रहे हैं। दुनिया की चकाचौंध बस्तर तक नहीं पहुंच पाई है, बस्तरिहा सल्फी, ताड़ी और महुआ की शराब से अपने नशे की लत पूरी करते हैं। ऐसा मानने वाले लोग मुगालते में न रहें। बस्तरिहा अब मेट्रो सिटीज़ के लोगों से कतई पीछे नहीं रह गए हैं। यकीन न हो तो अच्छी तरह से आंखें खोलकर इस तस्वीर पर नजरे इनायत कर लीजिए, आपको बदलते भारत के साथ तेजी से बदलते बस्तर और जगदलपुर की झलक साफ दिख जाएगी। चौंकिएगा मत यह तस्वीर जगदलपुर की ही है।शहर के चांदनी चौक स्थित शराब दुकान में यह युवती और महिला धनिया, मिर्च का भाव पता करने नहीं पहुंची थीं, बल्कि गला तर करने का खास सामान लेने गईं थीं।भीषण गर्मी में हमारे शहर की कुछ महिलाएं अब ठंडे पानी, छाछ, दही, लस्सी, नीबू पानी, आम पना या आइसक्रीम से अपना गल तर नहीं करतीं, बल्कि वे जमाने के साथ चलते हुए चिल्ड बियर के साथ व्हीस्की का कॉकटेल पैग मारकर अपने गले और आत्मा को तृप्त करने लगी हैं। यह कोई एक दिन की बात नहीं है, बल्कि अमूमन रोज कुछेक महिलाएं और युवतियां शराब दुकानों में बेधड़क पहुंचकर मन पसंद ब्रांड की व्हीस्की और बियर खरीद कर ले जाती हैं। एक शराब दुकान के सेल्समैन के अनुसार उनकी दुकान में अक्सर आम महिलाएं शराब खरीदने आती हैं। लेकिन अब कुछ दिनों से कुछ कुलीन परिवारों की महिलाएं भी खुद दुकान पहुंच अपनी मनपसंद ब्रांड की बीयर और शराब की मांग करती हैं। चांदनी चौक रस्थित शराब दुकान के सेल्समैन बताते हैं कि सरकार बदलने के साथ ही शराब की मनपसंद ब्रांड मिलने लगी है।अब महिलाएं भी शराब दुकान में आकर शराब खरीदने लगी हैं।

विकासखंड शिक्षा कार्यालय परिसर में प्राचीन गुरुकुल जैसा हराभरा और शांत, सुरम्य वातावरण

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  •  बीईओ मानसिंह भारद्वाज और स्टॉफ का प्रकृति प्रेम अर्जुन झा
    जगदलपुर शिक्षा विभाग नई पीढ़ी को संवारने का ही काम नहीं करता, बल्कि प्रकृति को भी संवारने का काम करता है। इसका ताजा उदाहरण है विकासखंड शिक्षा कार्यालय जगदलपुर में देखने को मिला है, जहां हरियाली अनुपम छटा बिखेर रही है। यह संभव हो पाया है विकासखंड शिक्षा अधिकारी मानसिंह भारद्वाज और उनके स्टॉफ के प्रकृति प्रेम के चलते। यह कार्यालय पुराने दौर के गुरुकुल का आभास कराता है।
    बस्तर जिला इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है। इंसान, पशु पक्षी सब गर्मी से बेहाल हुए जा रहे हैं। पेड़ पौधे भी सूखने लगे हैं। शीतल छांव देने वाले पेड़ निर्जीव ठूठ में तब्दील हो चले हैं। मवेशी छांव की तलाश में भटकते रहते हैं। इंसान भी हलाकान है। ऐसे जानलेवा हालात में विकासखंड शिक्षा कार्यालय परिसर जगदलपुर हरियाली से आच्छादित नजर आ रहा है। यहां बहने वाली शीतल बयार तन मन में नई स्फूर्ति ला देती है। गर्मी से बेहाल परिंदे भी यहां आकर चहकने लग जाते हैं। पक्षियों की चहचहाहट दिल को सुकून पहुंचाती है। मानो परिंदे भी कैंपस को हरियाली से आच्छादित करने वाले बीईओ मानसिंह भारद्वाज और उनके स्टॉफ का यशोगान कर रहे हों। विकास खंड शिक्षा कार्यालय परिसर में तरह तरह के पेड़ पौधे लगाए गए हैं, जो पूरे परिसर में हरियाली बिखेर रहे हैं। पक्षियों के लिए पानी के सकोरे भी कुछ पेड़ों पर टांगे गए हैं। यानि यहां हर प्राणी का ध्यान रखा गया है। बीईओ मानसिंह भारद्वाज बताते हैं कि कार्यालय परिसर में यह हरितिमा हमारे सहकर्मियों के प्रकृति प्रेम की बदौलत आ पाई है। हमारे सारे सहकर्मी साथी इन पेड़ पौधों की नियमित देखभाल करते हैं, उन्हें खाद पानी देते हैं।


यह संयोग है या दैव योग?
कार्यालय परिसर में लगे कई पेड़ पौधों के बीच रुद्राक्ष का एक पेड़ हरे हरे फलों से लदा नजर आया। जिज्ञासा हुई तो हमने बीईओ मानसिंह भारद्वाज से इस बारे में पूछा। उन्होंने बताया कि इस पेड़ को भी कर्मचारियों ने ही लगाया है। कर्मचारियों की प्रकृति के प्रति निष्ठा का ही सुफल है कि अब रुद्राक्ष का यह पेड़ फलों से लद चुका है।कुछ समय बाद इस देव वृक्ष के ये देव आभूषण पककर देवालयों, देवताओं और श्रद्धावान लोगों के कंठ की शोभा बनेंगे। वैसे रुद्राक्ष को देव, आचार्यो और गुरुओं का गहना भी माना जाता है।विकासखंड शिक्षा कार्यालय भी हमारे गुरुओं का ही कार्यालय है। इस कार्यालय में रुद्राक्ष पेड़ का होना क्या महज एक संयोग है या दैवयोग? वैसे परिसर में रुद्राक्षे लगाने के पीछे खंड शिक्षा अधिकारी मानसिंह भारद्वाज का तर्क था कि यह पेड़ घना और हृदय को शांति पंहुचने वाली छांव देता है। सनातन परंपरा के अनुसार चूंकि यह देव वृक्ष है अतः शिक्षा परिसर में इसे लगाए जाने से इस परिसर के अलावा आसपास का भी वातावरण शांत और शुद्ध रहता है। पुराने जमाने गुरुकुलों में इस प्रकार के ही पौधे और वृक्ष लगाए जाते रहे हैं।

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