दल्लीराजहरा वरिष्ठ समाजसेवी बीएसपी के पूर्व अधिकारी कंचन कुमार नदी (के.के. नंदी ) नंदी दादा का अस्वस्थ होने के कारण गुरुवार 21 दिसंबर 23 को निधन हो गया l उनकी अंतिम संस्कार 22 दिसंबर शनिवार सुबह 10:00 बजे चिखलाकसा (दल्ली राजहरा ) के मुक्ति धाम में होगा l बहुमुखी प्रतिभा के धनी के. के. नंदी जी बीएसपी कर्मचारी से अधिकारी तक का सफर तय किया l वह दल्ली राजहरा के एच एम इ गैरेज पदस्थ होते हुए अस्वस्थ होने के कारण आज से 15 साल पहले 1999 में व्ही आर लिए थे l वे दल्ली राजहरा के श्रमिक संगठन संयुक्त खदान मजदूर संघ (एटक ) के बहुत लंबे समय तक सचिव रहे तथा स्थानीय रविंद्र ग्रंथालय (बंगाली समाज ) के सक्रिय सदस्य रहे l साथ ही राजहरा क्रिकेट एसोसिएशन (आर सी सी ) में प्रमुख प्रतिष्ठित पद पर बहुत लंबे समय तक कार्यरत थे l समाज सेवा काम में भी वे बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते थे l श्रमिक नेता एवं बंगाली समाज के सक्रिय सदस्य गौतम बेरा ने कहा कि नंदी दादा का लौह नगरी दल्ली राजहरा हमेशा ऋणी रहेगा l उनके द्वारा किए गए कार्य हमेशा हमें उनकी याद दिलाते रहेंगे l नंदी जी का पैतृक निवास पश्चिम बंगाल है l लेकिन दल्ली राजहरा से उन्हें इतना प्रेम और लगाव रहा कि वे सेवानिवृत्त लेने के बाद भी दल्ली राजहरा में बीएसपी के क्वार्टर को किराए में लेकर यही बस गए l वह अपने पीछे पत्नि एक बेटा और बेटी का भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं l
जगदलपुर के लोगों को दीवाना बना दिया है इस ‘जुगनी’ ने
- बच्चे, बूढ़े, जवान सभी आशिक बन गए हैं बस्तर की जुगनी के
अर्जुन झा
जगदलपुर ‘हो…मेरी माही दा रंग सुनहरा लगे, ये चांद तेरा चेहरा लगे…. आंखों के रस्ते दिल में उतरके ले गई मेरी जान… जुगनी, जुगनी, जुगनी…। ‘ बॉबी देओल और रानी मुखर्जी अभिनीत हिंदी फीचर फिल्म बादल का यह गाना जितना मनभावन है, उतनी ही मनभावन बस्तर की जुगनी भी है। बस्तर की यह जुगनी हर जगह जलवा बिखेर रही है। हर शख्स दूसरे शख्स से पूछता नजर आता है कि तुमने जुगनी देखी क्या? कोई कहता है नहीं भाई, अभी तक तो नहीं। वहीं कोई शख्स तपाक से जवाब देता है कि देखी ही नहीं भाई, मैंने तो जुगनी को चख भी डाला है। क्या गजब का जायका है भाई जुगनी में। मैं तो दीवाना हो गया हूं, मुरीद और आशिक बन गया हूं अपनी इस जुगनी का।
जगदलपुर शहर और आसपास के गांवों में हर तरफ सिर्फ जुगनी की ही चर्चा है। क्या युवा, क्या बच्चे, क्या बूढ़े सभी पर जुगनी की आशिकी का भूत सा सवार हो गया है। जगदलपुर में नई – नई आई इस जुगनी ने ऐसा हंगामा मचा रखा है कि पूछो मत। उसके चाहने वालों की फेहरिश्त दिन ब दिन लंबी होती जा रही है। अमूमन हर किचन में जुगनी की धमक सुनाई देने लगी है। महिलाएं भी जुगनी को अपनाने में जरा भी गुरेज नहीं कर रही हैं। पति जब जुगनी को साथ लेकर घर पहुंचता है, तब पत्नी ताने मारते हुए कहती है – ले आए मेरी सौतन को! चलो कोई बात नहीं आज आपके लिए जुगनी को समर्पित कर देती हूं। चौंकिए मत जनाब ये जुगनी कोई हुस्न की मलिका नहीं है, मगर किसी हुस्न परी से कम भी नहीं है। यह जगदलपुर के बाजार में आई नई नवेली एक सब्जी है। कद्दू प्रजाति की यह हाईब्रिड सब्जी है। उसका रंग बिल्कुल माही दा रंग जैसा सुनहरा है और चांद सा खूबसूरत भी है वह। कद्दू परिवार की जुगनी गोल मटोल नहीं, बल्कि छरहरी है। इसकी खेती परचमपाल स्थित एक फार्म हाउस में की जा रही है।इन दिनों पीला और लंबा यह कुम्हड़ा बाजार में बिकने आ रहा है। आम कुम्हड़े की अपेक्षा जुगनी जरूर थोड़ी महंगी है, मगर इसका स्वाद लाजवाब होता है। इसमें पौष्टिक तत्वों की भरमार रहती है। कुम्हड़े की तरह यह बादी तासीर वाली नहीं होती। बाजार में अभी जुगनी 40 रू. किलो के भाव से बिक रही है। जुगनी की अच्छी डिमांड भी हो रही है। पहली ही नजर में लोग इसे पसंद कर लेते हैं और खरीदकर घर ले जाते हैं।
बस्ती अभी बसी नहीं, लुटेरे आ धमके
- नियुक्ति के लिए आवेदकों से वसूली में जुट गए जलसाज
जगदलपुर आदिवासी विकास विभाग द्वारा डाटा एंट्री ऑपरेटर पद के पात्र अपात्र आवेदकों की सूची चस्पा होते ही दलाल और जलसाज किस्म के लोग सक्रिय हो गए हैं। ये तत्व आवेदकों को फोन करके नौकरी लगवाने का झांसा देते हुए रकम की मांग कर रहे हैं। इस आशय की शिकायत मिलने के बाद आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त ने पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर उचित कार्रवाई का आग्रह किया है।

आदिवासी विकास विभाग में डाटा एंट्री ऑपरेटर पदों पर नियुक्ति के लिए आवेदन मंगाए गए थे। आवेदनों की छानबीन के बाद विभाग द्वारा पात्र व अपात्र आवेदकों की सूची जारी कर दी गई है। यह सूची जालसाजों और कुछ दलालों के हाथ भी लग गई है। अब यही लोग पात्र आवेदकों को मोबाईल फोन से कॉल करके झांसा दे रहे हैं कि वे पक्के तौर पर नौकरी लगवा देंगे। इसके लिए थोड़ी मोटी रकम की जरूरत पड़ेगी। आवेदकों को इस तरह के कॉल लगातार अलग अलग नंबरों से किए जा रहे हैं। डाटा एंट्री ऑपरेटर पद के अभ्यर्थी चितेश्वर सेठिया, अरविंद यादव, गोपाल कश्यप, राजकुमार, चंद्रहास यादव, शरदचंद्र शर्मा आदि को भी आए थे। इन अभ्यर्थियों ने मामले की शिकायत सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग से की। विभाग तुरंत हरकत में आ गया। सहायक आयुक्त ने बस्तर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, सीएसपी जगदलपुर और कोतवाली थाना प्रभारी को पत्र प्रेषित कर उक्त तत्वों के खिलाफ कार्रवाई का आग्रह किया है। सहायक आयुक्त ने पुलिस को अभ्यर्थियों के शिकायती पत्र व जालसाजों के वे फोन नंबर भी साझा किए हैं, जिनसे अभ्यर्थियों को कॉल किए जाते रहे हैं।
रिजर्व फारेस्ट में संचालित हैं खदानें और क्रशर प्लांट
- खदानों में उड़ रहीं एनजीटी के आदेशों की धज्जियां
- सरेआम पहुंचाया जा रहा पर्यावरण को भारी नुकसान
- ध्वनि और वायु प्रदूषण से ग्रामीणों का जीना दुश्वार
-अर्जुन झा-
जगदलपुर रिजर्व फारेस्ट में अवैध रूप से पत्थर खदान और क्रशर प्लांट संचालित किए जा रहे हैं। इससे न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि आसपास की बस्तियों में ध्वनि एवं वायु प्रदूषण भी फैल रहा है। यहां तक कि प्रदूषण की चपेट में स्कूल भी आ चुका है। डर के मारे पालकों ने अपने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया है। मामला ग्राम कड़माका है।
बस्तर जिले के विकासखंड दरभा के ग्राम कड़मा के ग्रामीणों का प्रदूषण के कारण गांव में रहना दूभर हो गया है। कड़मा गांव के पास रिजर्व फॉरेस्ट के अंदर खदान संचालित हैं। संरक्षित भूमि पर माइनिंग की अनुमति दे दी गई है। खदान मालिकों द्वारा पर्यावरण संरक्षण अधिनियम का पालन नहीं किया जा रहा है और वहां पर लगे नीलगिरी के पेड़ों को नुकसान पहुंचाया गया है। वेस्ट मैनेजमेंट सही से न होने के कारण सारे सॉलिड वेस्टेज को संरक्षित वन में डंप कर पर्यावरण को क्षति पहुंचाई जा रही है। वहां के ग्रामीणों का कहना है कि खदानों और क्रशर प्लांटों के प्रदूषण के कारण घरों की दीवारों, छत, पर, आंगन में और कमरों के भीतर धूल की मोटी परत जम जाती है। कुंए और दीगर जलस्त्रोत भी प्रदूषण से अछूते नहीं रह गए हैं। ग्रामीणों को पीने और भोजन बनाने के लिए साफ पानी नहीं मिल रहा है। रोड पर दिन रात भारी ट्रकों की आवाजाही लगी रहती है। प्रदूषण और ट्रकों की वजह से ग्रामीण अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे हैं और और न ही खुद रोजी मजदूरी के लिए कहीं जा पाते हैं। बच्चों का भविष्य तो खतरे में है ही, बच्चों की जान पर भी खतरा बना रहता है। खदानों तक जाने वाले ट्रकों के लिए एक ही रास्ता है, जो गांव के बीच से गुजरा हुआ है। ग्रामीणों की बस्ती होने के बावजूद पटवारी और तहसीलदार ने गलत सर्वे रिपोर्ट देकर रिहायशी क्षेत्र और संरक्षित वन क्षेत्र में खदानों की लीज दिलाने में मदद कीगई है। खदान संचालकों द्वारा संरक्षित वन क्षेत्र की फेंसिंग को तोड़ दिया गया है। संरक्षित वन क्षेत्र की फेंसिंग के सारे तारों को तोड़कर ट्रकों को वहां ले जाया जा रहा है। ट्रकों की आवाजाही से पेड़ पौधों को नुकसान पहुंच रहा है। और ध्वनि प्रदूषण और वायु प्रदूषण के कारण गांव के लोगों को आंख, कान, नाक से संबंधित तथा सांस, दमा व फेफड़े से जुड़ी बीमारियां हो रही हैं। लोगों का कहना है कि यहां की सभी खदानों में पर्यावरण के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। जिसके कारण उनका आए दिन तरह तरह की समस्या पैदा हो रही है।

काम कर रहे हैं बाल मजदूर
जब हमने खदान निरीक्षण के लिए जाने की अनुमति चाही, तो खदान मालिकों ने मना कर दिया। उनका कहना था कि कलेक्टर के आदेश के बिना आप खदान विजीट नहीं कर सकते। कुछ खदान संचालकों ने हमें अनुमति दी। अंदर जांच में पाया गया कि बाल मजदूरों से 100 रू. की दिहाड़ी पर दिनभर पत्थर की लोडिंग अनलोडिंग कराई जाती है। जिसका फुटेज हमारे पास है। खदान मालिक से संपर्क कर इस बारे में जानकारी चाही गई, तो उन्होंने कहा कि उनकी खदान में कोई बाल श्रमिक नहीं है। जो मजदूरी शासन के नियम के हिसाब से दी जाती है। वहीं वहां काम करने वाले बाल श्रमिकों से ने बताया कि 110 रुपए प्रतिदिन की रोजी के हिसाब से उन्हें मजदूरी दी जाती है और काम दिनभर कराया जाता है। नाबालिग की उम्र 17 साल है जो कि पिछले 2 साल से वहां पर कार्यरत हैं।एक और व्यक्ति जिसका पैर टूटा हुआ था वह भी वहां पर काम करते पाया गया। वहां पर जितने भी मजदूर काम करते हैं, उनको सेफ्टी नॉर्म्स के हिसाब से जूते हेलमेट, दस्ताने मास्क आदि भी नहीं दिए जाते हैं। इन खदानों में मजदूर खतरे के बीच काम करते हैं। इस वजह से कभी भी दुर्घटना हो सकती है। पूर्व में कई बार दुर्घटनाएं हो चुकी हैं इन खदानों में। उसके बावजूद माइनिंग ऑफिसर निरीक्षण कर चले जाते हैं और फाइलों में ओके, आल इस वेल दिखा देते हैं। जबकि ग्राउंड जमीनी तौर पर सारी कहानी उलट है। इन सब का जिम्मेदार कौन है?इसकी पड़ताल जारी रहेगी। देखते हैं सरकार इस पर क्या एक्शन लेती है और एनजीटी की गाइड लाईन का कितना पालन होता है और जिला एनवायरमेंट इंपैक्ट अथॉरिटी एसेसमेंट अथॉरिटी के नियमों का पालन हो रहा है कि नहीं यह जांच का विषय है। साथ ही स्टेट एनवायरमेंट इंपैक्ट एसेसमेंट अथॉरिटी के नियमों का पालन कितना किया जा रहा है ध्वनि प्रदूषण, वायु, प्रदूषण और पर्यावरण प्रदूषण के नियमों के पालन की जांच करने वाले अधिकारी से पूरी डिटेल लेकर अगले अंक में बताएंगे कि क्या चल रहा है?

एनजीटी में जाएगा मामला
ग्रामीण कहते हैं कि कलेक्टर के संज्ञान में इस ज्वलंत मुद्दे को लाकर कार्रवाई करने हेतु निवेदन और माइनिंग विभाग के अधिकारियों को तत्काल जांच एवं जो भी खामियां पाई जाती हैं उसके आधार पर उचित कार्रवाई करते हुए माईनिंग लीज तत्काल रद्द कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। अधिकारी खदान मालिकों से नियमों का पालन नहीं करा पाएंगे, तो ग्रामीण और स्वयंसेवी संगठन के लोग नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में अपील करने की सोच रहे हैं। अगर राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) में मामला चला गया, तो खनिज विभाग, वन विभाग, प्रशासन व पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण मंडल के कई अधिकारियों पर गाज गिरना तय है।
नक्सालियों ने आवापल्ली क्षेत्र में दो बसों में लगाई आग
- बीजापुर -आवापल्ली मार्ग पर माओवादियों का तांडव
- सड़कों पर पेड़ गिराकर किया आवागमन बाधित
अर्जुन झा
जगदलपुर बस्तर संभाग के बीजापुर जिले में बीती रात नक्सलियों ने जमकर तांडव मचाया। दो यत्री बसों में आग लगा दी और सड़कों पर पेड़ गिराकर तथा पत्थर रखकर आवागमन ठप कर दिया। इस घटना से क्षेत्र में दहशत का माहौल पैदा हो गया है। नक्सलियों के खौफ की वजह से शुक्रवार को भी बीजापुर जिले के कई हिस्सों में यात्री बसों और अन्य वाहनों की आवाजाही ठप रही। आगजनी की घटनाओं को नक्सलियों ने सीआरपीएफ कैंप से महज चार किमी दूर अंजाम दिया है। घटना स्थलों की ओर पुलिस और सुरक्षा बलों की टीमें रवाना हो गई हैं। जलाई गई एक बस रॉयल ट्रेवल्स रायपुर की और दूसरी बस कुशवाहा ट्रेवल्स की थी।
बीजापुर जिले के बासागुड़ा मार्ग पर नक्सलियों ने गुरुवार की रात दो यात्री बसों में आगजनी की। रायपुर से आवापल्ली के लिए रायल ट्रेवल्स की बस शाम को बीजापुर से रवाना हुई थी। बस जैसे ही आवापल्ली के ग्राम दुगईगुड़ा के पास पहुंची, नक्सलियों ने बस को घेर लिया और सभी यात्रियों को बस से उतारकर बस में आग लगा दी। इससे आवागमन हुआ बाधित हुआ। इस घटना से इलाके में दहशत का माहौल बना हुआ है। आवापल्ली से घटनास्थल के लिए पुलिस बल रवाना कर दिया गया है। आवापल्ली थाना क्षेत्र में यह घटना हुई है। बीजापुर के पुलिस अधीक्षक आंजनेय वार्ष्णेय ने की घटना की पुष्टि की है। माओवादियों ने आज 22 दिसंबर से भारत बंद का आह्वान कर रखा है। इस बंद के एक दिन पहले से ही नक्सलियों ने बीजापुर जिले में उत्पात मचाना शुरू कर दिया है। बस में आगजनी की दूसरी वारदात को नक्सलियों ने आवापल्ली से 12 किमी दूर मुख्य मार्ग के तिम्मापुर के करीब अंजाम दिया है। यहां कुशवाहा ट्रेवल्स की यात्री बस में आग लगा दी गई। यह बस जगदलपुर से बासागुड़ा के लिए रवाना हुई थी। रात करीब 7 बजे के तिम्मापुर के पास सभी यात्रियों को बस से उतारकर बस को फूंक दिया गया का। इस घटना से बासागुड़ा मार्ग पर आवागमन बाधित हुआ है। यात्रियों के साथ ही इलाके में दहशत का माहौल बनाकर नक्सलियों ने अपनी मौजूदगी का अहसास कराया है। एक ही सड़क पर 22 किलोमीटर के अंतराल में दो यात्री बसों में आगजनी की घटना से क्षेत्र में डर का आलम है। घटना स्थल के लिए सुरक्षा बलों और पुलिस फोर्स को रवाना कर दिया गया है। एसपी आंजनेय वार्ष्णेय ने इस दूसरी घटना की भी पुष्टि की है। दूसरी घटना बासागुड़ा थाना क्षेत्र की है।
स्टेट हाईवे को किया अवरुद्ध
दो यात्री बसों में आगजनी के बाद माओवादी संगठन द्वारा स्टेट हाईवे को जाम कर दिया गया। बीजापुर आवापल्ली मार्ग पर लकड़ी के ढेर लगाकर आग लगा दी गई। सड़क पर दर्जनों पेड़ गिराकर मार्ग अवरूद्ध कर दिया गया। पेड़ काट कर सड़क पर डाल दिए गए हैं। हाईवे पर और अगल बगल स्थित पेड़ों पर दर्जनों पर्चे नक्सलियों ने लगा रखे हैं।इलाके में दहशत का माहौल बना हुआ है। अंधेरा घिर जाने के कारण पुलिस और सुरक्षा बल घटना स्थल तक नहीं पहुंच पाए थे। बसों में आगजनी की दोनों घटनाओं को जिन स्थानों पर अंजाम दिया गया है, वे सीआरपीएफ कैंप से औसतन 4 किलोमीटर की दूरी पर हैं। घटना का जायजा लेकर लौट रहे पत्रकारों पर सीआरपीएफ के जवानों ने बंदूक तान दी और दुर्व्यवहार किया। माओवादियों द्वारा जमकर मचाए गए उत्पात की रिपोर्टिंग कर पत्रकार वापस लौट रहे 5 पत्रकारों का दल मुरकीनार सीआरपीएफ कैंप में वेरिफाई करने के नाम पर जवानों द्वारा पत्रकारों से बदसलूकी की गई। जवानों के इस व्यवहार से पत्रकारों में आक्रोश है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हर आने जाने वाले शख्स की कड़ी पड़ताल होती है। यहां तक कि नक्सल प्रभावित थानों में प्रवेश के दौरान भी ऐसी ही एहतियात बरती जाती है। सुरक्षा के लिहाज से ऐसी पड़ताल तो जायज है, मगर पत्रकारों से दुर्व्यवहार को कतई जायज नहीं कहा जा सकता।
नेशनल हाईवे पर लगाए बैनर पोस्टर
जगदलपुर – बीजापुर नेशनल हाईवे 63 पर कर्रेमरका व मद्देड़ के आसपास नक्सलियों ने एक दिन पहले ही पर्चे फेंककर और बैनर पोस्टर लगा रखे थे। इन पर्चे और बैनर पोस्टर्स में भारत बंद का आव्हान किया गया है। ऐसे ही एक पर्चे में लिखा है कि बिहार, झारखंड के क्रांतिकारी आंदोलन वाले इलाकों में जारी बर्बर दमन के विरोध में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी माओवादी के 22 दिसंबर के भारत बंद के आह्वान को सफल बनाएं। क्रांतिकारी जन आंदोलनों व आदिवासी जनता पर हो रहे सैन्य हमलों का विरोध करें और 15 से 22दिसंबर तक चलने वाले प्रचार आंदोलन सप्ताह को सफल बनाएं।
कलेजा छलनी करती चीत्कार
यात्री बसों में की गई आगजनी ने कई लोगों की रोजी रोटी का जरिया छीन लिया है। दो बस चालकों, दो कंडक्टरों, दो क्लीनरों और बस मालिकों की रोजी रोटी इन्हीं बसों के दम पर चलती थी। बसों में आग लगाकर नक्सलियों ने कई लोगों का निवाला छीन लिया है। निवाला छीनने को तो क्रांतिकारी आनोदलन हरगिज नहीं माना जा सकता। एक बस का मालिक और उसके ड्राईवर, कंडक्टर धू धू जलती बस को देख रोते बिलखते नजर आए। वे बिलख बिलख कर रो रहे थे। विलाप करते करते वे कह रहे थे – हमारी बस जल गई, अब हमारा क्या होगा, हम घर कैसे चलाएंगे? क्या इन निरीह लोगों की चीत्कार से पत्थर भी पिघलते प्रतीत हो रहे थे, हर किसी का कलेजा छलनी हुआ जा रहा था, लेकिन क्या नक्सलियों का दिल पिघलेगा? रात के अंधेरे में यात्रियों को संकट में डालकर उन तथाकथित आंदोलनकारी माओवादियों को आखिर क्या हासिल हुआ? इन मुद्दों पर कभी नक्सली आत्ममंथन करेंगे? इसी तरह नक्सली सड़क, पुल पुलियों, शाला भवनों को जलाकर क्या आम लोगों को दिक्कत में नहीं डाल देते, बच्चों का भविष्य बर्बाद नहीं करते? इस पर भी नक्सलियों को आत्म अवलोकन करने की जरूरत है। अन्यथा मौजूदा और आने वाली पीढ़ी नक्सलियों को धिक्कारती ही रहेगी, कोसती रहेगी और अपनी बर्बादी के लिए उन्हें ही जिम्मेदार मानती रहेगी।
शुक्रवार को थमे रहे बसों के पहिये
नक्सलियों के उत्पात के खौफ के चलते शुक्रवार को भी यात्री बसों और अन्य वाहनों का परिचालन बंद रहा। सुकमा,
बीजापुर, दंतेवाड़ा, बस्तर, कोंडागांव, नारायणपुर जिलों के अंदरूनी मर्गों पर शुक्रवार को यात्री बसें और दूसरे वाहन नजर नहीं आए। जिला मुख्यालयों के बस अड्डों में दर्जनों बसें खड़ी नजर आईं।वहीं पुलिस ने सुरक्षा के मद्देनजर अंदरूनी रुटों पर चलने वाली यात्री बसो का परिचालन बंद रहने की बात कही है। बस ऑपरेटरों के मुताबिक पुलिस ने शुक्रवार को बसों का परिचालन
बंद रखने बाबत मौखिक सलाह दी थी। आज अंदरूनी गांवों तक बसों का संचालन बंद रहने से यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ी। सभी स्थानों के बस स्थानकों पर सैकड़ों यात्री भटकते नजर आए अंदरूनी सड़कों पर वीरानी छाई रही। शनिवार से बसों और दीगर वाहनों की आवाजाही सामान्य होने की उम्मीद है।
ट्रक से टकराई बस मौके पर 3 लोगों की मौत वहीं 12 लोग घायल
बालोद: मरकटोला घाट के पास ट्रक और यात्रियों से भरी बस टकरा गई। जिससे तीन लोगों की मौके पर मौत | वहीं अन्य लोग घायल सूत्रों से जानकारी के अनुसार कल शाम से ट्रक पलटी हुई साइड में पड़ी थी | आज सुबह 8:30 के लगभग रायपुर तरफ से आ रही जीवन महिंद्रा की बस जो मरकाटोला घाटी के पास ट्रक क्रमाक cg 07 CH 8751 से जा टकरा गई जिससे मौके पर तीन लोग की मौत हो गई वही 12 लोग घायल हुए हैं मौके पर पुलिस पहुंच कर पंचनामा कर आगे की कार्यवाही की जा रही है घायलों को उपचार के लिए नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए चारामा भेजा गया तीनों मृतक को पोस्टमार्टम के लिए गुरुर भेजा गया है घटना पुरूर थाना क्षेत्र की है फिलहाल पुलिस एवं अधिकारी मौके पर पहुंच चुके हैं तो वहीं बालोद जिले के CMHO भी मौके पर मौजूद है !

राजहरा बाबा मंदिर के पास नर्सरी में फांसी लगाकर आत्महत्या
दल्लीराजहरा आज दोपहर राजहरा बाबा नर्सरी के पास एक आदमी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली सूत्रों से जानकारी के अनुसार बेटी के द्वारा दूसरे जाति में शादी करने से क्षुब्ध होकर घर से निकला था जो सागोन के पेड़ में गमछा से फांसी लगाकर आत्महत्या कर लिया है 11से 2.30 बजे की घटना बताया जा रहा है। मृतक का नाम धनराज निषाद उम्र 55 वर्ष वार्ड नंबर 2 पंडर दल्ली में रहता है। मृतक के तीन बच्चे हैं।


पीएम आवास के नाम पर जुमलेबाजी कर रही बीजेपी : बैज
- केवल 3799 करोड़ रू. से 18 लाख आवास बनाने का दावा जनता से दगाबाजी
रायपुर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि जिस तरह से 2 करोड़ रोजगार हर साल, 100 दिन में महंगाई कम करने और हर खाते में 15-15 लाख रुपए डालने का वादा जुमला साबित हुआ, उसी तरह से विधानसभा चुनाव के समय मोदी की गारंटी के नाम पर किए गए |
वादे भी जुमले साबित हुए हैं। पीएम आवास योजना 2015 में लागू हुई तब केंद्र और राज्य दोनों जगह बीजेपी की सरकारें थीं। 2011 की जनगणना को आधार मानकर छत्तीसगढ़ के लिए कल 18 लाख आवास का लक्ष्य तय किया गया था। 2015 से 18 तक रमन सरकार के दौरान मात्र 2 लाख 37 हजार ग्रामीण पीएम आवास तथा 19 हजार शहरी पीएम आवास बने। 2018 से 23 तक भूपेश सरकार ने 10 लाख से अधिक पीएम आवास बनाए। शेष लगभग 7 लाख आवास बनाने के लिए भूपेश बघेल सरकार ने विगत बजट में 3234 करोड़ का प्रावधान किया तथा 7 लाख आवासहीनों को मकान देने के लिए पहली किस्त अक्टूबर में ही भूपेश सरकार ने डाल दी थी। मुख्यमंत्री और भाजपा बताएं कि 18 लाख आवास किनके लिए बना रहे हैं? उनकी सूची सार्वजनिक करें। अनुपूरक बजट में पीएम आवास के लिए सिर्फ 3799 करोड़ का प्रावधान है। इतनी कम राशि में 18 लाख आवास कैसे बनेंगे इसका जवाब भाजपा दे।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि भाजपा के नेता बताएं कि 18 लाख पीएम आवास के लिए राज्यांश की राशि कितनी होती है? 3799 करोड़ की राशि अनुपूरक बजट में स्वीकृत की गई है। उससे 18 तो क्या 5 लाख आवास भी नहीं बनाए जा सकते हैं। असलियत यह है कि केंद्रीय योजनाओं में लक्ष्य तय करने का अधिकार राज्य को नहीं होता। 2011 के बाद से केंद्र की मोदी सरकार जनगणना के दायित्व से भाग रही है, ताकि षड़यंत्र पूर्वक नए हितग्राहियों को लाभ से वंचित रखा जा सके। अपनी नाकामी पर पर्देदारी करने मोदी सरकार द्वारा जनगणना नहीं कराने से सबसे ज्यादा नुकसान गरीब वर्ग का हुआ है। नए हितग्राहियों की पहचान कर उन्हें आवास देने के लिए कांग्रेस की सरकार ने छत्तीसगढ़ में आवास न्याय योजना शुरू की, जिसकी प्रथम किस्त भी सितंबर महीने में जारी की जा चुकी है, जिसे बंद करने का षड़यंत्र भाजपा सरकार रच रही है। भाजपा को अपने झूठ, जुमले और वादाखिलाफी के लिए छत्तीसगढ़ की जनता से माफी मांगनी चाहिए।
कांग्रेस ने मनाई वोरा की पुण्यतिथि व पं. शर्मा की जयंती
जगदलपुर शहर जिला कांग्रेस कमेटी ने स्थानीय राजीव भवन में अविभाजित मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पूर्व कोषाध्यक्ष, छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष स्व. मोतीलाल वोरा की पुण्यतिथि व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, समाज सुधारक और प्रसिद्ध साहित्यकार पं. सुंदरलाल शर्मा की जयंती पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुशील मौर्य उनके व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्व. मोतीलाल वोरा ने कई साल तक पत्रकारिता की।
उन्होंने पार्षद से मुख्यमंत्री और राज्यपाल तक का लंबा सफर तय किया। 1998 के चुनाव में वे राजनांदगांव से लोकसभा चुनाव जीते थे। 92 साल की उम्र में भी उन्होंने राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। वे संगठन के प्रति समर्पित रहते थे। मौर्य ने पं. सुंदरलाल शर्मा के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पं. सुंदरलाल शर्मा ने छत्तीसगढ़ में स्वाधीनता आंदोलन की मजबूती और जनजागरण के लिए भरसक प्रयत्न किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में फैले अंधविश्वास, छुआछूत, रूढिवाद जैसी कुरीतियों को दूर करने के लिए अथक प्रयास किया। वे किसानों के अधिकारों की लड़ाई के रूप में प्रसिद्ध कंडेल सत्याग्रह के प्रमुख सूत्रधार थे। श्री मौर्य ने कहा कि पं. शर्मा के जीवन मूल्य सदा प्रेरणा देते रहेंगे। इस दौरान वरिष्ठ कांग्रेसी सतपाल शर्मा, नरेंद्र तिवारी, कमलेश पाठक, जावेद खान, अभिषेक नायडू, नीलम कश्यप, सुलो कश्यप, शेखर आदि मौजूद रहे |
अवैध कारोबार, शराब बेचने वाले एवं आम जगह पर शराब पिलाने वाले के विरूद्ध एक्शन मोड पर
बालोद पुलिस अधीक्षक महोदय बालोद डॉ. जितेन्द्र कुमार यादव के निर्देशन में एवं अति. पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार नायक के मार्गदर्शन तथा समस्त राजपत्रित डिवजन प्रभारी अधिकारी के पर्यवेक्षण में अवैध कारोबार पर लगाम कसने दिनांक 20.12.2023 को जिले के थाना क्षेत्रों में अवैध रूप से शराब बेचने वाले एवं आम जगह पर शराब पिलाने वाले के विरूद्ध आबकारी एक्ट के तहत थाना बालोद, थाना सनौद, थाना गुरूर, थाना डौण्डी लोहारा, थाना सुरेगांव, थाना मंगचुवा, थाना गुण्डरदेही, थाना अर्जुन्दा, थाना पुरूर, थाना राजहरा, थाना डौण्डी, चौकी पिनकापार पुलिस द्वारा 34 मामलो में आबकारी एक्ट की कार्यवाही की गई।
▪️34(2) आबकारी एक्ट के कुल 3 प्रकरण, 03 आरोपी 95 पौव्वा, 17.190 बल्क लीटर जुमला कीमती 7600रू ।
▪️34(1) (क) (ख) के कुल 10 प्रकरण में 10 आरोपी 181 पौव्वा 38.580 बल्क लीटर जुमला कीमती 14.780रू बिक्री रकम 4070रू. ।
▪️36(च) (1) के कुल 16 प्रकरण, एवं 36 (सी) के 05 प्रकरण में कुल 23 आरोपियों पर कार्यवाही ।













