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सूखत के नाम पर झुकता कांटा, किसानों का हो रहा घाटा

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  • सूखत के नाम पर ठगा जा रहा है बस्तर के किसानो को
  • धान की क्वालिटी के नाम पर भी परेशान किया जा रहा है निरीह किसानों को

अर्जुन झा

बकावंड विकासखंड बकावंड के धान खरीदी केंद्रों में किसानों को सरेआम ठगा जा रहा है। सूखत के नाम पर प्रति बोरी ज्यादा धान तौला जा रहा है। इस तरह सूखत के बहाने तराजू के कांटे को झुकाकर किसानों का घाटा किया जा रहा है। धान की क्वालिटी के नाम पर भी निरीह किसानों को परेशान किया जा रहा है।

बकावंड विकासखंड ही नहीं, अपितु बस्तर जिले के सभी धान खरीदी केंद्रों में किसानों को इसी तरह से चूना लगाने का खेल चल रहा है। जगदलपुर विधानसभा क्षेत्र के कुछ खरीदी केंद्रों में तो पूर्व विधायक रेखचंद जैन इस खेल का भंडाफोड़ कर चुके हैं। बकावंड विकासखंड में स्थित जिला सहकारी बैंक के अधीन सभी धान खरीदी केंद्रों में सूखत की आड़ में खरीदी केंद्र प्रभारियों, समिति प्रबंधकों, समिति अध्यक्षो व अधिकारियों की मिलीभगत से किसानों को ठगी का शिकार बनाया जा रहा है। ‘सूखती के लिए झुकती’ के खेल में लाखों के वारे न्यारे किए जा रहे हैं। आदिम जाति सेवा सहकारी समिति बकावंड के धान खरीदी केंद्र बकावंड के साथ ही ग्राम धनवा के खरीदी केंद्र में ऐसे ही खेल का प्रत्यक्ष उदाहरण देखने को मिला है। खरीदी केंद्रों में प्रति बारदाना (बोरा) 80 किलोग्राम धान पर दो से चार किलोग्राम तक अतिरिक्त धान किसानों से लिया जा रहा है। इस तरह प्रति क्विंटल औसतन तीन किलोग्राम ज्यादा धान किसानों से लिया जा रहा है। अतिरिक्त धान लेने का विरोध करने वाले किसानों को अपना धान वापस ले जाने के लिए कहा जाता है। खरीदी में लगे कर्मचारी दलील देते हैं कि धूप पड़ने से खरीदकर बोरों में रखे गए धान का वजन सूखकर कम हो जाता है। इसकी भरपाई हम थोड़ी न करेंगे। इसके अलावा धान की क्वालिटी को निम्न स्तर का बताते हुए खरीदने से इंकार भी कर दिया जाता है, अथवा रेट कम मिलने की बात कही जाती है। अतिरिक्त धान लिए जाने तथा क्वालिटी के नाम पर परेशान किए जाने से किसानों में आक्रोश देखा जा रहा है। धान खरीदी केंद्र प्रभारी एवं प्रबंधक की मिलीभगत से किसानों का धान अधिक मात्रा में तौलकर किसानों के पसीने की कमाई पर डाका डाला जा रहा है। किसानों से छल के इस खेल को उच्च अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है। खरीदी केंद्र प्रभारी का कहना है कि धूप में धान सूखता है और उसका वजन कम हो जाता है। इसलिए किसानों से सूखत के नाम पर थोड़ा ज्यादा धान लिया जाता है। इसमें किसानों की भी सहमति रहती है।

 

रेखचंद जैन जता चुके हैं नाराजगी

जगदलपुर के पूर्व विधायक रेखचंद जैन सूखत के नाम पर किसानों से अतिरिक्त धान लिए जाने को लेकर नाराजगी जता चुके हैं। जैन ने गत दिवस नानगुर और बड़े मुरमा के धान खरीदी केंद्रों का निरीक्षण किया था। इस दौरान उन्होंने पाया था कि सूखत के बहाने किसानों से अधिक मात्रा में अतिरिक्त धान लिया जा रहा है। इसके अलावा पुरानी दर पर और कम लिमिट में धान की खरीदी चल रही है।  जैन ने इसे किसानों के साथ भाजपा का छल निरुपित किया। जैन का कहना था कि धूप में जरूर धान सूखता है, मगर सूखत की दर इतनी ज्यादा भी नहीं रहती कि प्रति क्विंटल के पीछे दो -तीन किलो अतिरिक्त धान लिया जाए। जैन ने खरीदी केंद्र प्रभारी को हिदायत दी कि सूखत के अतिरिक्त धान लेने का जो मात्रा तय की गई है, उतनी ही मात्रा में अतिरिक्त धान लिया जाए और किसानों को परेशान न किया जाए। पूर्व विधायक एवं संसदीय सचिव रेखचंद जैन ने कहा है कि भाजपा सत्ता में आ चुकी है, मगर आज भी भाजपा के चुनावी वादे के मुताबिक 3100 रुपए क्विंटल की दर से तथा प्रति एकड़ 21 क्विंटल के मान से धान की खरीदी नहीं की जा रही है। इससे साबित होता है कि भाजपा ने किसानों से छल किया है। इसके अलावा किसानों का कर्जा माफ न करने पर भी रेखचंद जैन ने भाजपा को आड़े हाथ लिया है।

खपाया जा रहा है ओड़िशा का धान

बकावंड विकासखंड की सीमाएं ओड़िशा राज्य से लगी हुई हैं। इसका बेजा लाभ शराब व धान तस्कर उठा रहे हैं। ओड़िशा के व्यापारी तथा बकावंड ब्लॉक के धान कोचिया ओड़िशा के किसानों से धान खरीद कर उसे बकावंड ब्लॉक के खरीदी केंद्रों में खपा रहे हैं। ये व्यापारी और कोचिए स्थानीय किसानों के नाम पर आसानी से धान बेचने में सफल हो जाते हैं। खरीदी केंद्र प्रभारी इन व्यापारियों और कोचियों से मोटा कमीशन लेकर इस गैर कानूनी कृत्य को अंजाम देने में मदद करते हैं। बकावंड ब्लॉक का ग्राम धनवा ओड़िशा से लगा हुआ है। यहां के धान खरीदी केंद्र में भी ओड़िशा का धान खपाया जा रहा है। कोचिया द्वारा ओड़िशा के किसानों से खरीदे गए धान को धनवा खरीदी केंद्र में बेचा जा रहा है। धान खरीदी केंद्र प्रभारी की इसमें मिलीभगत है। ज्ञात हो कि बीते वर्ष भी बकावंड खरीदी केंद्र में गोलमाल हुआ था, जिसकी जांच अब तक चल रही है।बस्तर संभाग के खरीदी केंद्रों में ओड़िशा का धान खापाए जाने के कई मामले जिला प्रशासन और पुलिस के अधिकारी पकड़ चुके हैं। कोंडागांव में कुछ दिनों पहले ही ओड़िशा का दो ट्रक धान पकड़ा गया था। माकड़ी पुलिस तथा भानपुरी पुलिस भी ओड़िशा का धान लदे मिनी ट्रक और ट्रेक्टर को पकड़ चुकी है। बावजूद धान की तस्करी थमने का नाम नहीं ले रही है।

वर्सन

लगवाएंगे रोक

अवैध धान की खरीदी और सूखत के नाम पर ज्यादा मात्रा में धान लेना गलत है। अगर खरीदी केंद्र प्रभारी ऐसा कैसा कर रहा रहा है, तो मैं जाकर पता करूंगा और इस पर रोक लगवाऊंगा।

फूलसिंह बिसाई,

प्रबंधक, आदिम जाति सहकारी समिति, बकावंड

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण तथा छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार दल्ली राजहरा न्यायालय में लोक अदालत का आयोजन किया गया

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दल्लीराजहरा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण तथा छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बालोद के मार्गदर्शन में दिनांक 16.12.2023 को व्यवहार न्यायालय दल्लीराजहरा में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया।

नेशनल लोक अदालत में कुल 396 आपराधिक रखे गये थे जिन प्रकरणों का निराकरण हुआ एवं समझौता राशि के रूप में 229451 रुपए प्राप्त हुई। नेशनल लोक अदालत के पीठासीन अधिकारी श्रीमती सोनी तिवारी (व्यवहार न्यायाधीश) एवं सदस्य अधिवक्ता इसराइल शाह एवं राकेश द्विवेदी थे । नेशनल लोक अदालत में व्यवहार न्यायालय के अधिवक्ताओ का सहयोग रहा, साथ ही बैंक, नगर पालिका, विद्युत विभाग के कर्मचारी भी उपस्थित रहे।

18 लाख पीएम आवास के निर्णय से गरीबों में खुशी की लहर: सुरेश गुप्ता

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  •  अंबेडकर वार्ड में भाजपा ने मनाया जश्न, बांटी मिठाई
  1. जगदलपुर छत्तीसगढ़ के 18 लाख गरीब परिवारों को प्रधानमंत्री आवास दिलाने के फैसले से भाजपा कार्यकर्ताओं और आम लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई है। नगर मंडल भाजपा अध्यक्ष सुरेश गुप्ता के नेतृत्व में आज शुक्रवार की शाम शहर के अंबेडकर वार्ड में तिरंगा चौक पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। लोगों को मिठाई बांटी गई और प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, दोनों उप मुख्यमंत्रियों, विधायक केदार कश्यप व किरण देव के प्रति आभार जताया गया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में छत्तीसगढ़ के 18 लाख गरीब परिवारों को प्रधानमंत्री आवास उपलब्ध कराने का निर्णय लिए जाने पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए भाजपा नगर अध्यक्ष सुरेश गुप्ता एवं भाजपा नेताओं ने गरीब जनता के बीच मिठाई बांटकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उप मुख्यमंत्री अरुण साव व उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा को इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए बधाई दी। नगर मंडल अध्यक्ष सुरेश गुप्ता ने उपस्थित जन समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा प्रधानमंत्री आवास की मंजूरी न दी जाने के खिलाफ भाजपा लगातार आंदोलनरत करती रही। कांग्रेस सरकार ने दुर्भावना वश योजना को रोक रखा था। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव के नेतृत्व में केंद्र मंडल, जिला और प्रदेश स्तर पर प्रधानमंत्री आवास गरीबों को दिलवाने हेतु लगातार आंदोलन किया गया। अरुण साव ने प्रदेश स्तर के आंदोलन के मंच से घोषणा की थी कि भाजपा की सरकार बनते ही पहली ही कैबिनेट बैठक में गरीबों को उनका अधिकार दिलाया जाएगा।सुरेश गुप्ता ने रायपुर के प्रधानमंत्री आवास आंदोलन को याद करते हुए कहा कि, जिस वक्त छत्तीसगढ़ की गरीब जनता को प्रधानमंत्री आवास से वंचित रखा गया था, उनके अधिकारों को दिलवाने के लिए प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव के नेतृत्व में तत्कालीन गूंगी बहरी भ्रष्ट कांग्रेस की सरकार से गरीबों को उनका अधिकार दिलवाने के लिए विधानसभा का घेराव किया गया था, उस वक्त कांग्रेस की दमनकारी सरकार ने पूरे प्रदेश से आए गरीब जनता और भाजपा नेताओं के पर आंसू गैस के गोले फेंकवाए थे। कई भाजपा नेता घायल हुए थे। इस आंदोलन में जगदलपुर के हमारे कई नेताओं को भी गंभीर चोटे आई थीं।आंदोलन को कुचलने के लिए सरकार ने भरपूर प्रयास किए। इसे छत्तीसगढ़ के साथ पूरे देश की जनता ने देखा था। छत्तीसगढ़ के सारे प्रमुख नेताओं को जेलों में बंद किया गया, प्रताड़ित किया गया, फिर भी भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता कांग्रेस के इस दमनकारी नीति से न डरे और ना डिगे। सुरेश गुप्ता ने कहा कि जिस तरह से पहली कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री आवास की अटकी पड़ी फाईल को फिर से खुलवाया और उस पर हस्ताक्षर कर वंचित पीड़ित गरीबों को उनका अधिकार देने का निर्णय लिया है इससे पूरे छत्तीसगढ़ की गरीब जनता में खुशी छा गई है। राज्य की जनता अपने मुख्यमंत्री को धन्यवाद देकर अपने सपने को पूरा होते देख रही है। जनता द्वारा छत्तीसगढ़ में भाजपा के वादे पर किए गए विश्वास पर खरा उतरने का यह पहला कदम है। श्री गुप्ता ने कहा – हमारे नेताओं ने पहले ही कह दिया था कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनते ही पहली कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री आवास के हितग्राहियों को उनका अधिकार दिलाने के लिए मुख्यमंत्री सबसे पहले प्रधानमंत्री आवास की फाईल पर हस्ताक्षर करेंगे, उसके बाद ही मुख्यमंत्री निवास ग्रहण करेंगे। सुरेश गुप्ता ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता का भाजपा को जो अपार स्नेह एवं आशीर्वाद मिला है और जनता ने भारतीय जनता पार्टी के वादों तथा प्रधानमंत्री श्री मोदी की गारंटी पर विश्वास किया है आज उस विश्वास पर कायम रहते हुए हमारी सरकार ने पहला कदम बढ़ा दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपनों को पूरा करने के लिए छत्तीसगढ़ की सरकार कटिबद्ध है। इस निर्णय के बाद छत्तीसगढ़ की गरीब जनता में हर्ष का वातावरण है। सुरेश गुप्ता ने कहा कि हमारे विधायक केदार कश्यप, किरण देव और विनायक गोयल को भी हम सभी धन्यवाद देते हैं कि प्रधानमंत्री आवास के संघर्ष में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी। इस निर्णय के लिए जगदलपुर शहर के प्रधानमंत्री आवास के दायरे में आने वाले समस्त गरीब जनता की ओर से छत्तीसगढ़ सरकार को बधाई शुभकामनाएं दी गई। इस अवसर पर आशुतोष पाल, राकेश तिवारी, अभय दीक्षित राजा यादव, प्रकाश झा,योगेश ठाकुर, योगेश शुक्ला, रिंकू पांडे, सूर्यभूषण सिंह, रोशन झा, सूरज केशरवानी, शैलेष श्रीवास्तव, केतन महानंदी, प्रेम हरीश पार्क, रितेश सोनी, भुवनेश ध्रुव, सूर्यप्रकाश पटनायक, दशरथ गुप्ता, रवि शर्मा, नरेश साहू, लोकेश राव, अमित मेहता, वसीम खान, राजेश साव, कमल संती, सुखचंद बघेल, रितेश सोनी, जीवन सेठिया, रवि डे, किरण दीवान, कमला सेठिया, नारायणी गोस्वामी, सुजाता डहरिया, भागवती सेठिया, राकेश साहू, बसंती, कमल तांती, शैलेंद्र भारती, सुशील प्रसाद नायक, बसंती सिन्हा, दुर्गा साहू, जामबती, अंबिका नाग के साथ वार्डवासी उपस्थित थे।

लखेश्वर को नेता प्रतिपक्ष के रूप में देखना चाहते हैं आदिवासी

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  • कांग्रेस से बस्तर विधायक को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाने की मांग

जगदलपुर बस्तर संभाग के वरिष्ठ कांग्रेस विधायक लखेश्वर बघेल को छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाने की मांग आदिवासी समुदाय के लोग कर रहे हैं। आदिवासियों का कहना है कि भाजपा ने तो प्रदेश को आदिवासी मुख्यमंत्री दे दिया है। ऐसे में आदिवासी मुख्यमंत्री के सामने प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस का भी कर्तव्य बनता है कि वह नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी अपने किसी वरिष्ठ और अनुभवी विधायक को सौंपे। बस्तर के कांग्रेस विधायक इस नजरिए से नेता प्रतिपक्ष के लिए सर्वथा उपयुक्त हैं।

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के अप्रत्याशित परिणाम आए हैं। कांग्रेस राज्य में अपनी सत्ता नहीं बचा पाई और अब विपक्ष की भूमिका में आ गई है। आदिवासी बहुल बस्तर संभाग में भी कांग्रेस को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। बस्तर के आदिवासी समुदाय के लोगों का कहना है कि विषम परिस्थितियों के बावजूद बस्तर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी लखेश्वर बघेल ने शानदार जीत हासिल करने में सफल रहे हैं। लखेश्वर बघेल एक ही विधानसभा सीट से लगातार तीसरी बार जीत दर्ज कराने वाले पहले आदिवासी नेता बन गए हैं। वे अनुभवी कांग्रेस नेता हैं। सत्ता परिवर्तन की लहर के बावजूद बस्तर विधानसभा सीट से जीत की हैट्रिक लगाने वाले लखेश्वर बघेल बस्तर के एक कद्दावर नेता के रुप में जाने जाते हैं। पिछले कई वर्षों तक उन्होंने बस्तर जिला संगठन के अध्यक्ष के रुप में संगठन को सम्हाला, पार्टी को मजबूत बनाने में बड़ी भूमिका निभाई और कांग्रेस को जिले की तीनों सीटें जितवाने में उनका अहम रोल रहा है। पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार ने उन्हें अति महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देते हुए बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया। प्राधिकरण अध्यक्ष के रूप में बघेल ने बस्तर संभाग के सभी जिलों के विकास और आदिवासियों के कल्याण के लिए उल्लेखनीय कार्य किए हैं। आदिवासी संस्कृति, परंपराओं, पूजा पद्धति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए उन्होंने बड़ा योगदान दिया है। आदिवासियों की समृद्ध परंपरा नवाखाई जोहार भेंट कार्यक्रम की श्रृंखला शुरू कर उन्होंने नई पीढ़ी को पुरातन आदिवासी संस्कृति से जोड़े रखने की अनूठी पहल की है।बस्तर के गांवों में देवगुड़ी, मातागुड़ी निर्माण, सिरहा, गुनिया, मोहरिया, बजनिया आदि के लिए मानदेय की अहम योजना लाकर लखेश्वर बघेल ने उन्हें बड़ी राहत दी है। आदिवासियों के कल्याण और आदिवासी संस्कृति के उत्थान के लिए लखेश्वर बघेल द्वारा किए गए प्रयासों की चर्चा न सिर्फ बस्तर संभाग, बल्कि राजनांदगांव, मोहला, मानपुर, अंबागढ़ चौकी, कवर्धा, जशपुर, रायगढ़, सरगुजा आदि जिलों तथा तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, ओड़िशा, महाराष्ट्र आदि पड़ोसी राज्यों के आदिवासियों के बीच भी हो रही है। आदिवासी समुदाय के अनेक समाज प्रमुखों ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी मुख्यमंत्री के सामने नेता प्रतिपक्ष भी आदिवासी समुदाय से ही होना कांग्रेस के लिए हितकर साबित होगा। बस्तर सीट से कांग्रेस विधायक लखेश्वर बघेल नेता प्रतिपक्ष पद के लिए सबसे बेहतर विकल्प हैं। आदिवासियों ने अभा कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी, राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी, केसी वेणुगोपाल, प्रदेश कांग्रेस की प्रभारी कुमारी शैलजा, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज से की है।

बस्तरिया कमल, दिखा रहे हलचल

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  • नीलकंठ – केदार बन सकते हैं गद्दीदार
  • कहीं न कहीं दिखेगा लता-विक्रम का पराक्रम

(अर्जुन झा)

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के चुनाव में बस्तर से कांग्रेस का बोरिया बिस्तर सिमट गया है। भाजपा के सूखे सरोवर में एक साथ 8 कमल खिल उठे हैं। चुनाव के पहले बस्तर में कांग्रेस का मखमली बिस्तर बिछा हुआ था। उसके पांव जमीं पर नहीं पड़ रहे थे। बस्तर की सभी 12 सीटों पर एकछत्र राज कर रही थी। कल चमन था, आज इक सेहरा हुआ, देखते ही देखते ये क्या हुआ? जो हुआ, वह कांग्रेस की करनी का फल है। जिस पेड़ पर बैठे, उसी को काट रहे थे, यह तो अनुभव किया जा रहा था। इसके अलावा कांग्रेस यह हकीकत भूल बैठी थी कि शोहरत की बुलंदी पल भर का तमाशा है, जिस शाख में बैठे हो, वह टूट भी सकती है! 5 साल की सत्ता में कांग्रेसी बौरा गए थे। सब मिलकर कांग्रेस को ही काटने में लगे थे। ऐसे में नतीजा वही निकला, जो निकलना था। सत्ता से 5 साल के वनवास में उन नकचढ़े भाजपाइयों का अहंकार टूट गया, जो 15 साल की सत्ता में यह सुध बिसरा गए थे कि जहाज का पंछी कितना भी उड़ ले, लौटकर जहाज पर ही आना पड़ता है। जनता जहाज है और राजनेता पंछी। यह बात जब वे भूल जाते हैं और पंख जवाब दे देते हैं तो फिर जनता की शरण में आना पड़ता है। गनीमत है कि भाजपा के पंछियों को यह हकीकत पांच साल में समझ आ गई। कांग्रेस में इसके विपरीत प्रभाव दिखा। खैर, हो होना था, सो हो गया। जो पहले बस्तर में 15 साल तक धूम मचा रहे थे, वे भी हमारे अपने बस्तरिया ही थे। 5 साल में जिनके पर कुछ ज्यादा ही निकल आए, वे भी बस्तर के लख्ते जिगर थे। अब फिर जिन्हें बस्तर की जनता ने जिम्मेदारी सौंपी है, वे सभी बस्तर की संतान हैं। सभी का स्वागत, सभी का सम्मान। अब बात करें कि कांग्रेस के समय सत्ता में बस्तर की स्थिति की तो सभी सीटें कांग्रेस को सौंप देने वाले बस्तर को सिर्फ एक मंत्री मिला। कार्यकाल पूरा होते होते आखिर में यह संख्या 2 पर पहुंची। मगर उल्टा नुकसान हुआ। 15 साल तक भाजपा की सरकार में बस्तर का जलवा रहा है। लगभग सभी बड़े चेहरे मंत्री बने। इनमें केदार कश्यप, विक्रम उसेंडी, लता उसेंडी, महेश गागड़ा के नाम शामिल हैं। इस बार चुनाव जीतने वाले पूर्व मंत्रियों में केदार कश्यप, विक्रम उसेंडी, लता उसेंडी जैसे बड़े नाम के साथ ही नौकरशाह से राजनेता बने नीलकंठ टेकाम भी शामिल हैं। नीलकंठ को अचानक भाजपा की टिकट मिली और उन्होंने केशकाल में विधानसभा उपाध्यक्ष रहते संतराम नेताम को परास्त कर दिया। पूर्व मंत्री लता उसेंडी कांग्रेस के मोहन मरकाम से लगातार हार के बाद इस बार जीत गईं। मोहन ने लता को मंत्री रहते हुए हराकर शुरुआत की थी तो लता ने मोहन का सत्ता का सफर तब रोक दिया, जब वे मंत्री थे। विक्रम उसेंडी रमन सिंह की सरकार में मंत्री रहे, कांकेर के सांसद रहे, प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वे वरिष्ठ आदिवासी नेता हैं और केदार कश्यप तो पिछली बार हार के शिकार होकर भी भाजपा संगठन के प्रदेश महामंत्री रहे हैं। भाजपा के तीनों महामंत्री चुनाव जीते हैं। इनमें से एक प्रखर हिंदुत्व के प्रतिनिधि विजय शर्मा उप मुख्यमंत्री बन चुके हैं। एक महामंत्री ओपी चौधरी को भी सम्मान मिल सकता है लेकिन एक अन्य महामंत्री केदार कश्यप सत्ता की राजनीति के पुराने खिलाड़ी हैं। वे बस्तर के विजेताओं में भाजपा के सबसे अनुभवी नेता हैं। 15 साल सरकार में बस्तर का चेहरा रहे हैं। अब खबर यह भी है कि विष्णुदेव मंत्रिमंडल में ज्यादातर नए चेहरे हो सकते हैं लेकिन क्षेत्रीय संतुलन के लिहाज से वरिष्ठ को भी अहमियत दी जा सकती है। नए नेतृत्व की बात है तो नीलकंठ फ्रेश फेस हैं। राजनीति में ताजा हवा के झोंके हैं। नवीनता लानी है तो वे विष्णु सरकार में मंत्री हो सकते हैं। केदार और नीलकंठ की संभावना अधिक चर्चित हो रही है। यदि बस्तर को दो मंत्री मिले तो यह दोनों स्थान पा सकते हैं। लता के साथ उलझन फिलहाल यह है कि केंद्रीय राज्यमंत्री के पद से इस्तीफा देने वाली रेणुका सिंह की वजनदारी ज्यादा है। वे लता से पहले महिला बाल विकास मंत्री रह चुकी हैं। इस बार महिला मंत्री की संख्या बढ़ी तो सांसद से विधायक बनीं गोमती साय को भी नजरअंदाज करना मुश्किल होगा। ऐसे में यदि लता मंत्री नहीं बनीं तो वे भविष्य में महिला आयोग की सिरमौर बन सकती हैं। वैसे भी वे भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं और आने वाले लोकसभा चुनाव में उन्हें बस्तर सीट से उतारने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। विक्रम उसेंडी को कहीं समायोजित किया जा सकता है। भाजपा ने आदिवासी मुख्यमंत्री दे दिया है। इसलिए अब संगठन पर आदिवासी नहीं बैठ सकता, ऐसा कोई बंधन नहीं है लेकिन आम तौर पर ऐसा नहीं होता है। तब भी भाजपा प्रयोगधर्मी राजनीतिक दल है। जब यह आदिवासी दिवस पर आदिवासी अध्यक्ष हटाकर उसे ही सरकार में आते ही मुख्यमंत्री बना सकती है तो कुछ भी कर सकती है।

नगरनार स्टील प्लांट से लोहा परिवहन में स्थानीय वाहन मालिक को प्राथमिकता देने की मांग – गीता मिश्रा भू-प्रभावितों की उपेक्षा अब ग्रामीण बर्दाश्त नहीं करेंगे

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जगदलपुर बस्तर जिले के एच एम एस एवं नगरनार मण्डल के महिला मोर्चा अध्यक्ष गीता मिश्रा ने एनएमडीसी के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। स्थानीय वाहन मालिक को प्लांट से लोहा परिवहन की प्राथमिकता देने की मांग की है ताकि प्लांट से होने

वाली चोरियों को रोका जा सके । उन्होनें कहा कि एनएमडीसी इसे गंभीरता से नही लेती है तो स्थानीय टुक कारोबारियों के उपेक्षा के विरोध उग्र आन्दोलन किया जायेगा जिसकी जिम्मेदारी एनएमडीसी प्रबंधन की होगी।

एचएमएस जिला अध्यक्ष एवं नगरनार मण्डल के महिला

मोर्चा अध्यक्ष गीता मिश्रा ने भी आरोप लगाया है कि राजधानी के लोहा कारोबारी एवं बाहरी ट्रांसपोर्टस एवं वाहन मालिक के सांठ-गांठ में प्लांट से लोहा की चोरी काफी समय से चलता आ रहा है जिससे बस्तर जिले का बदनामीहो रही है। उन्होने कहा कि नगरनार आन्दोलन

 

प्लांट से लोहा की परिवहन का कार्य जिले के ट्रक कारोबारियों को प्राथमिकता के आधार पर दिया जाये। जिले से बाहर के वाहनों को प्लांट से लोडिंग का कार्य पूरी तरह प्रतिबंधित करने की मांग की है। उन्होने कहा कि प्रबंधन के इस लापरवाी से भू- प्रभावित भी उपेक्षि हो रहे हैं। उन्होने कहा कि प्रबंधन परिवहन कार्य को लेकर सप्ताह दिनों में ठोस रणनीति नहीं बनाई और स्थानीय ट्रक मालिकों को प्राथमिकता नहीं दिए जाने पर उग्र की चेतावनी दी है।

ग्रामीणों का दिल जीत रहे हैं सीआरपीएफ के जवान

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  • सिविक एक्शन कार्यक्रम के जरिए कर रहे हैं मदद
  • एफ 188वीं बटालियन पुसपाल घाट ने गांवों में वितरित की सोलर लाईट

जगदलपुर बस्तर में नक्सली समस्या के उन्मूलन के लिए तैनात केंद्रीय रक्षित बल (सीआरपीएफ) के जवान न सिर्फ अमन कायम करने का काम कर रहे हैं, बल्कि जनसेवा के कार्यों से ग्रामीणों का दिल भी जीत रहे हैं। सीआरपीएफ द्वारा समय -समय पर चलाए जाने वाले सिविक एक्शन कार्यक्रम से लोगों का भरोसा सुरक्षा बलों के प्रति बढ़ता जा रहा है। सीआरपीएफ की 188वीं बटालियन पुसपाल घाट बस्तर भी अपने परिचालनिक क्षेत्र के गांवों में नक्सल पीड़ित ग्रामीणों के जीवन में बदलाव की बयार बहाने का काम कर रही है।

सीआरपीएफ की 188वीं बटालियन द्वारा अपने ऑपरेशनल एरिया में स्थित

बस्तर के सुदूरवर्ती एवं नक्सल प्रभावित गांव छोटे बदरंगा, रतेंगा व परोदा में सिविक एक्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सिविक एक्शन कार्यक्रम भवेश चौधरी कमांडेंट 188वीं बटालियन के कमांडेंट भवेश चौधरी निर्देशन में उप कमांडेंट युद्धवीर सिंह व सहायक कमांडेंट बन्नाराम एवं अन्य अधीनस्थ अधिकारियों व जवानों तथा ग्रामीणो की उपस्थिति में संपन्न हुआ। सिविक एक्शन कार्यक्रम के तहत 188वीं बटालियन सीआरपीएफ द्वारा अपने परिचालनिक क्षेत्र छोटे बदरंगा, रतेंगा, परोदा में सोलर स्ट्रीट लाईट लगाई गई। इस अवसर पर सीआरपीएफ 188वीं बटालियन के सहायक कमांडेंट बन्नाराम ने बताया कि सिविक एक्शन कार्यक्रम से ग्रामीणों व सुरक्षा बलों के बीच बेहतर व मधुर संबंधों को बढ़ावा मिल रहा है। देश के विकास व इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने हेतु ग्रामीणों व सुरक्षा बलों के बीच मधुर संबंध होना आवश्यक है। इस अवसर पर मौजूद पचासों ग्रामीणों ने सीआरपीएफ के इस कार्य की भूरि भूरि प्रशंसा की। ग्रामीणों का कहना था कि सीआरपीएफ द्वारा इस प्रकार के कार्यक्रम का आयोजन समय- समय पर किया जाता है, जिससे हम ग्रामवासियों को बेहतर लाभ मिल रहा है तथा सभी स्थानीय नागरिक सीआरपीएफ की कार्यप्रणाली से बहुत खुश हैं। सोलर स्ट्रीट लाईट वितरण पर ग्रामीणों ने सीआरपीएफ का आभार भी व्यक्त किया।

नेगानार के ग्रामीणों को झटके पे झटके दे रही है बिजली

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  •  बिजली के अप डाउन से खराब हो रहे हैं उपकरण
  • शिकायत के बाद भी हफ्तों फाल्ट दूर नहीं करते कर्मी

अर्जुन झा

बकावंड बस्तर संभाग के गांवों में विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारी – कर्मचारियों की स्वेच्छाचारिता का खामियाजा ग्रामीणों को भोगना पड़ रहा है। बिजली संबंधी समस्याओं को दूर करने में इस कदर कोताही बरतने की सारी हद पार कर जाते हैं कर्मचारी। कुछ ऐसा ही नेगानार में देखने को मिल रहा है। यहां के ग्रामीणों को बिजली झटके पे झटके दे रही है। हाई – लो वोल्टेज के कारण ग्रामीणों के विद्युत उपकरण बर्बाद हो रहे हैं। शिकायत पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

बकावंड विकासखंड के ग्राम नेगानार के ग्रामीणों के लिए बिजली की सुविधा परेशानी का सबब बन गई है।यहां के उपभोक्ताओं के घरों, दुकानों, हालर मिल आटा चक्की, सिंचाई पंपों में बिजली आपूर्ति कभी भारी हाई वोल्टेज के साथ होने लगती है, तो कभी वोल्टेज इस कदर डाउन हो जाता है कि बल्ब भी ढंग से नहीं जलते और टिमटिमाते से प्रतीत होते हैं। अत्यधिक वोल्टेज में बिजली सप्लाई होने पर टीवी, फ्रिज, पंखे, कूलर, इलेक्ट्रिक आयरन, ट्यूब लाईट, बल्ब, मिक्सर ग्राईंडर व अन्य विद्युत चलित उपकरण जल जाते हैं। कई ग्रामीणों के चार्जिंग में रखे मोबाईल फोन व चार्जर तथा अनेक किसानों के मोटर पंप जल चुके हैं। गांव के दर्जनों घरों से इस तरह की शिकायतें प्रायः रोज आती रहती हैं। रोज हजारों रुपए के उपकरण खराब हो रहे हैं। नेगानार व आसपास के गांवों के लिए नियुक्त विद्युत विभाग के एरिया मिस्त्री को सूचित किए पंद्रह दिनों से ज्यादा समय गुजर जाने के बाद भी विद्युत आपूर्ति को सामान्य बनाने की दिशा में कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ग्राम नेगानार में इस तरह के हालात बीस दिनों से बने हुए हैं। अब तक दर्जनों पंखे, टीवी सेट्स, बल्ब, ट्यूब लाईट, इलेक्ट्रिक प्रेस आयरन, मोबाईल फोन, चार्जर, मोटर पंप आदि खराब हो चुके हैं। बिजली की इस तबाही से ग्रामीण त्रस्त हो चले हैं। फिर भी बिजली विभाग के अधिकारी कर्मचारी मौन बने हुए हैं। ज्ञात हो कि सालभर पहले भी विभाग को नेगानार की इस समस्या से अवगत कराया गया था। तब स्थायी समाधान न कर काम चलाऊ मरम्मत का काम कर दिया गया था। नतीजतन अब फिर से वैसी ही समस्या आ खड़ी हुई है।विद्युत कंपनी के अधिकारी कर्मचारी गांवों का कभी दौरा ही नहीं करते। वे ब्लॉक मुख्यालय स्थित दफ्तर में ही सारा समय गुजार देते हैं।

और भी हैं कई समस्याएं

वोल्टेज अप – डाउन के अलावा विद्युत संबंधी और भी कई परेशानियां नेगानार के ग्रामीणों के समक्ष मुंहबाये खड़ी हैं। गांव में कहीं बीच रोड पर बिजली पोल खड़े कर दिए गए हैं, तो कहीं किसी ग्रामीण के घर की चारदीवारी के अंदर स्टे तार (पोल सपोर्टर) लगा दिए गए हैं। कुछ स्थानों पर सड़क किनारे लगे पोलों के तार काफी नीचे हैं। सामान लदे ट्रक, मिनी ट्रक, पिकअप आदि वाहन गुजरते हैं तब बिजली के झूलते तार वाहनों पर लदे सामान से टकराने लगते हैं। तारों के टकराने से जबरदस्त स्पार्किंग होती है और आग लगने का खतरा पैदा हो जाता है।दरअसल सड़क की ऊंचाई थोड़ी ज्यादा है और पोल बौने होते जा रहे हैं। ऐसे बिजली खंभों खम्भे को ऊंचा करना निहायत ही जरूरी है। अन्यथा गांव में कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है। इस तरह विभाग की घोर लापरवाही के कारण ग्रामीणों की जान जोखिम में पड़ गई है।

पूरे ब्लॉक में अव्यवस्था का आलम

ऐसे हालात अकेले नेगानार गांव में ही नहीं हैं, बल्कि बकावंड विकासखंड के अधिकतर गांवों के ग्रामीणों को भी ऐसी ही त्रासदी के दौर से गुजरना पड़ रहा है। विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही का खामियाजा विकासखंड के दूरस्थ गांवों के ग्रामीणों को कुछ ज्यादा ही भोगना पड़ रहा है। विद्युत कंपनी के स्थानीय प्रभारी अधिकारी दूर दराज के गांवों का दौरा करने नहीं जाते और वहां की परेशानियां उनके संज्ञान में नहीं आ पाती। बरसात के मौसम में तो दूर दराज के गांवों में तो हफ्ते पंद्रह दिनों तक बिजली गुल रहती है। ग्रामीण हलकान और परेशान होते रहते हैं। फिर भी फाल्ट दूर कर बिजली बहाल करने में तत्परता नहीं दिखाई जाती। इस बदइंतजामी को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।

भाजपा के झूठ के खिलाफ जारी रखेंगे लड़ाई : लखेश्वर बघेल

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  • विधानसभा स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन में नतीजों पर किया गया मंथन

बकावंड बस्तर विधायक लखेश्वर बघेल ने विधानसभा स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन में कहा कि कार्यकर्ता चिंतन मनन कर आत्मावलोकन करें। भाजपा झूठ के दम पर चुनाव जीत गई है, लेकिन हमें हार नहीं मानना है। भाजपा के झूठ को जनता के सामने हमें लाना है।

विधानसभा चुनाव के बाद पूरे छत्तीसगढ़ में पहली बार कांग्रेस के विधानसभा स्तरीय समीक्षा बैठक का आयोजन बस्तर विधानसभा में विधायक लखेश्वर के गृह ग्राम गिरोला में किया गया।

को संबोधित करते बस्तर विधानसभा में जीत की शानदार हैट्रिक लगाने वाले विधायक लखेश्वर बघेल ने कहा कि भाजपा झूठ की बुनियाद पर खड़ी है। नरेंद्र मोदी ने हर व्यक्ति के खाते में 15 लाख रु. डालने का जुमला फेंककर प्रधानमंत्री बने हैं। वहीं छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने किसानों व महिला स्व सहायता समूहों से झूठा वादा कर जनता के साथ धोखाधड़ी की है। विधायक लखेश्वर बघेल ने कहा कि कांग्रेस ने लोगों को सीधे राहत देने का कार्य किया है। प्रत्येक तीज त्यौहार के लिए अनुदान, राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत किसानों को बोनस देने का काम किया है। इसकी लोगों ने बहुत ही सराहना की है। भाजपा ने झूठ का पुलिंदा थमाकर लोगों को गुमराह करने व बरगलाने का काम किया है। इसी झूठ के दम पर उसने छत्तीसगढ़ में सरकार बनाई है। कांग्रेस के समस्त कार्यकर्ता राज्य के हर एक परिवार के साथ खड़ा है। किसी को कोई चिंता करने की जरूरत नहीं है। हम प्रत्येक परिवार के हक के लिए लड़ेंगे। लोगों को न्याय दिलाना ही हमारा पहला धर्म है। श्री बघेल कहा कि आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी भाजपा के हर झूठ को लेकर जनता के बीच जाएगी। सच्चाई के लिए हम लड़ेंगे और मोहब्बत के साथ जीतेंगे। छत्तीसगढ़ मॉडल क्यों फेल हुआ यह चिंतन का विषय है। प्रदेश में बस्तर जिले की सारी सीटें कांग्रेस के लिए सबसे सुरक्षित सीट मानी जाती हैं, लेकिन ऐसा क्या हुआ कि लोगों की सहानुभूति कांग्रेस के प्रति कम हो गई, यह चिंतन मनन का विषय है। लखेश्वर बघेल ने कहा कि इस बार के चुनाव में कांग्रेस के परंपरागत वर्चस्व वाले गांवों में भी हमें मुंह की खानी पड़ी है। जबकि भाजपा के गढ़ में हमने परचम लहराया है। इस बारे में भी चिंतन मनन करने की जरूरत है।  बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार ने जिन योजनाओं का क्रियान्वयन किया था, उनकी पूरे देश मे सराहना हुई थी। कांग्रेस का घोषणा पत्र भी भाजपा से बेहतर था। हमारी योजनाओं और कामों को हम लोगों तक नहीं पहुंचा पाए और भाजपा का झूठ लोगों पर हावी हो गया। यह चिंता का विषय है।

आदिवासी मुख्यमंत्री बनाए जाने पर भाजपाइयों ने मनाया जश्न

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  •  कांग्रेस के भ्रष्टाचार के खिलाफ लोगों ने लगाई मुहर

बकावंड छत्तीसगढ़ में आदिवासी मुख्यमंत्री बनने पर बस्तर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत करपावंड मंडल के मुख्य बाजार चौक पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने आतिशबाजी और मिठाई बांटकर जश्न मनाया। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस शासनकाल की योजनाओं को को भ्रष्टाचार का जरिया निरुपित किया। छत्तीसगढ़ में भाजपा की जीत की खुशी में बाजार चौक पर भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा जमकर पटाखे फोड़े गए और एक दूसरे का मुंह मीठा कराया गया। आमजनों को भी मिठाई बांटी गई। पार्टी के आदिवासी नेता विष्णुदेव साय को मुख्यमंत्री बनाए जाने पर भाजपा नेताओं ने कहा कि भाजपा सभी समुदायों का सम्मान करती है और सबका साथ, सबका विश्वास, सबका विकास की भावना के साथ काम करती है। भाजपा ने ही देश को प्रथम महिला आदिवासी राष्ट्रपति दिया और अब छत्तीसगढ़ को आदिवासी मुख्यमंत्री दिया है। कांग्रेस के नेता भाजपा पर आदिवासी विरोधी होने का झूठा आरोप लगाते रहे हैं। जबकि छत्तीसगढ़ विधानसभा के चुनावों में ही राज्य के ही कुछ बड़े कांग्रेस नेताओं ने बस्तर संभाग में अपने प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज, मोहन मरकाम, चंदन कश्यप व अन्य आदिवासी प्रत्याशियों को हरवाने का काम किया है। भाजपा नेताओं ने कहा कि प्रदेश की जनता ने कांग्रेस के भ्रष्टाचार के खिलाफ मतदान कर भाजपा को साफ सुथरी सरकार बनाने का मौका दिया है। कांग्रेस द्वारा किए गए सारे भ्रष्टाचार की अब जांच होगी और भ्रष्टाचारी कांग्रेस नेता जेल जाएंगे। इस अवसर पर द्रोपती देवांगन, मंडल अध्यक्ष परीश बेसरा, फुलकेश्वर मंडल अध्यक्ष, शोभाराम वरिष्ठ कार्यकर्ता,अशोक ठाकुर उपाध्यक्ष, लखीराम मिश्रा, सीताराम यादव, संतूराम कश्यप, ओमप्रकाश गुप्ता, बंशीधर कश्यप, मंगलूराम कश्यप, कमलोचन भारती, खगेश्वर भारती, सुदर्शन बेसरा, फूलचंद कश्यप, धनसिंह बघेल, गोवर्धन बघेल, रामदयाल बघेल, राजकुमार समेत बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता मौजूद थे।

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