अर्जन्दा थाना क्षेत्र के ग्राम चौरेल मंदिर के पास एक अज्ञात व्यक्ति का शव मिलने से इलाके में हड़कंप । स्थानीय लोगों के द्वारा पुलिस को सुचना दी । पुलिस को सुचना मिलते ही घटना स्थल पर पहुंची । लोगो द्वारा बताया गया कि यहां विछित अज्ञात व्यक्ति 3-4 दिनो से आस पास घुमता नजर आया था । पुलिस घटना की जांच में जुटी है ।
जैबेल गांव की महिलाओं तक नहीं पहुंचा प्रधानमंत्री मोदी का जल जीवन मिशन
- आज भी तीन किमी दूर नदी में झिरिया खोदकर पानी का इंतजाम करती हैं महिलाएं =
-अर्जुन झा-
बकावंड केंद्र सरकार के जल जीवन मिशन के तहत आज प्रायः हर गांव में पीने के शुद्ध पानी का इंतजाम किया जा रहा है, मगर बस्तर जिले जैबेल गांव की महिलाओं का नसीब फूटा हुआ है कि उनके गांव तक मोदी का यह मिशन पहुंच नहीं पाया है। या फिर अधिकारी ही उन्हें जल जीवन मिशन के लाभ से वंचित रखना चाहते हैं। गांव की महिलाएं, युवतियां और छोटी छोटी बच्चियां आज भी तीन किलोमीटर दूर नदी से पानी लाकर काम चलाने मजबूर हैं।
बस्तर जिले के विकासखंड बकावंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत जैबेल के ग्रामीणों को आज भी बूंद बूंद पानी के लिए मोहताज होना पड़ रहा है। बरसात का मौसम खत्म होते ही और गर्मी के शुरूआती दिनों से ही जैबेल के लोगों को पीने के पानी के लिए नदी नालों पर निर्भर होना पड़ता है। जैबेल गांव से तीन किलोमीटर दूर स्थित नदी में गड्ढे खोदकर झिरिया बनाया जाता है, फिर वहां से पानी को छानकर बर्तनों में भरकर महिलाएं घर लाती हैं। उसी पानी को पीने और भोजन बनाने के काम में लिया जाता है। महिलाओं को पूरे दिन के पानी की व्यवस्था के लिए नदी के कम से कम पांच चक्कर लगाने पड़ते हैं। मतलब महिलाओं को एक दिन में तीस किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। इसके बाद भी उन्हें शुद्ध पानी नसीब नहीं हो पाता। ऐन परीक्षाओं के समय बालिकाओं और युवतियों को अपनी सारी ऊर्जा पानी की व्यवस्था में खपानी पड़ती है। वे परीक्षा की तैयारी नहीं कर पातीं। इस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान भी जैबेल गांव में दम तोड़ता नजर आ रहा है। महिलाएं भी सुबह से शाम तक पानी के इंतजाम में ही खटती रहती हैं। चिलचिलाती धूप में मातृशक्ति को परेशान होना पड़ रहा हैं। ऐसे में केंद्र सरकार द्वारा लाया गया नारी शक्ति वंदन अधिनियम और छत्तीसगढ़ सरकार की महतारी वंदन योजना जैबेल की महिलाओं के लिए बेमानी ही हैं। सरकार जब उन्हें जल संकट से मुक्ति नहीं दिला सकतीं तो बड़ी से बड़ी योजना भी मातृशक्ति का भला नहीं कर सकती।ऐसे करना पड़ता हैं पानी का प्रबंध
जिस नदी से महिलाएं पानी का इंतजाम करती हैं, वह जैबेल गांव से तीन किलोमीटर दूर स्थित है। महिलाएं पहले नदी की रेत को खोदकर गड्ढा करती हैं। गड्ढे में रिस रिस कर आने वाले पानी को कटोरे की मदद से गुंडी और बाल्टीयों में भरा जाता है। फिर पानी भरी गुंडियों और बाल्टी को सिर पर रखकर महिलाएं, युवतियां और बच्चियां घर लाती हैं।. यह काफी मेहनत वाला काम होता है। महिलाएं जितना पानी नहीं भर पातीं उससे कहीं ज्यादा उन्हें पसीना बहाना पड़ जाता है। पानी का इंतजाम करने के बाद उन्हें घर में झाड़ू पोंछा, बर्तन मांजने, कपड़े धोने, भोजन तैयार करने जैसे तमाम काम भी निपटाने पड़ते हैं। ऐसे में उनके आत्मनिर्भर बनने के सपने भी चूर चूर हो रहे हैं।
पानी के लिए यह कवायद बीते कई वर्षों से यूं ही चली आ रही है। गर्मी का मौसम शुरू होते ही नदी नालों में झिरिया खोदकर गड्ढे से पानी निकाल कर रोज ले जाना पड़ता है। इसके अलावा गांव के किसान झिरिया के पानी से अपनी फसलों की सिंचाई भी करते हैं। जल जीवन मिशन के तहत गांव में पेयजल व्यवस्था पर अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। ग्राम पंचायत के सरपंच सचिव भी के पानी के इंतजाम पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।विधायक से नाराज हैं महिलाएं
बकावंड विकासखंड का जैबेल गांव बस्तर विधानसभा क्षेत्र में आता है। विधायक लखेश्वर बघेल की संवेदनहीनता ही कहें कि वे जैबेल की महिलाओं की इस विकराल समस्या के प्रति उदासीन बने हुए हैं। विधायक जब भी क्षेत्र के दौरे पर होते हैं, तो हर बार जैबेल के ग्रामीण उन्हें जल संकट से अवगत कराते हैं, मगर विधायक लखेश्वर बघेल हैं कि एक कान से सुनते हैं और दूसरे कान से निकाल देते हैं। केंद्रीय मद से स्वीकृत कार्यों को अपनी उपलब्धि बताकर अपनी पीठ आप थपथपाने वाले विधायक लखेश्वर बघेल से जैबेल गांव की महिलाएं सख्त नाराज चल रही हैं। विधायक के प्रति यह नाराजगी आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को भारी नुकसान पहुंचा सकती है।
डॉ प्रियंका बिस्सा व्यास के “रक्तवीर” अभियान ने राजिम कुंभ में बनाया विश्व रिकॉर्ड
राजिम कुम्भ कल्प 2024 में डॉ प्रियंका बिस्सा व्यास टीम, नेहरू युवा केंद्र , सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मगरलोड एवं छत्तीसगढ़ नर्सिंग कॉलेज के सहयोगी युवा साथियों द्वारा वृहद् स्तर पर निःशुल्क रक्त प्रशिक्षण शिविर “रक्तवीर” स्वास्थ्य शिक्षा एवं जागरूकता अभियान किया गया|
इस “रक्तवीर” अभियान को विराट संत समागम में मात्र पांच दिनों में 23,180 लोगो को ब्लड टेस्ट कार्ड उपलब्ध कर नया विश्व रिकॉर्ड दर्ज किया गया| इस ब्लड टेस्ट कार्ड में हाइट (लम्बाई), वेट (वजन), ब्लड प्रेशर, शुगर, ब्लड ग्रुप , हीमोग्लोबिन , सिकलिंग एवं एच.आई.वी. की निःशुल्क जाँच किया गया | गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की प्रतिनिधि सोनल शर्मा ने विधिवत पूरी जाँच के उपरांत विश्व रिकॉर्ड की घोषणा किया | माननीय मुख्यमंत्री पत्नी श्रीमती कौशल्या देवी जी , माननीय धर्मस्य मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल एवं गरियाबंद विधायक श्री रोहित साहू जी द्वारा सम्मानित किया गया । शासकीय स्वास्थ्य विभाग मगरलोड की बी.एम.ओं डॉ शारदा ठाकुर ने बताया की प्रशिक्षण कराने वालों में 65% लोगो को बी.पी, शुगर की भी जानकारी नहीं थी लेकिन रक्तवीर अभियान से स्वास्थ्य जानकारी लाखों लोगो तक पहुँची | नेहरु युवा केंद्र जिला अधिकारी श्री अर्पित तिवारी जी, छ.ग नर्सिंग की प्रशासनिक अधिकारी भारवी वैष्णव प्राचार्य कर्ष जी, गुरु डॉ वासु वर्मा ने सभी स्वयंसेवकों में उत्साह बनाया रखा व प्रोत्साहित किया|


राष्ट्रपति सम्मानित डॉ प्रियंका बिस्सा व्यास ने बताया की ब्लड प्रेशर , शुगर व बीएमआइ के नियंतरण से व्यक्ति निरोगी रहता है| इस अभियान में लोगो में जागरूकता लाने के लिए पुरे मेला में घूम-घूम कर जाँच की गयी जो सबसे चुनौतीपूर्ण रहा| इस अभियान में 195 वालंटियर्स व सहयोगी अजय बोराल, अंकिता टंडन, ऐश्वर्य,सृष्टि, विनय, आशी, मुस्कान एवं लैब टीम में किशोर देवांगन, संतोष, तरुण, गार्गीशंकर सेन, रितेश, संजय एवं भुवन का विशेष योगदान रहा |इसके पूर्व 2018 में प्रियंका टीम के यह अभियान भारत का पहला ब्लड टेस्ट कार्ड बना जिसमे 11,551 लोगो की रक्त जाँच कर उन्हें कार्ड उपलब्ध कराया गया था | इसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रशंसा हुई । राजिम कुंभ 2024 में इटली, फ़्रांस से आये लोगो ने भी इस अभियान में अपना प्रशिक्षण कराया|


इस वर्ष के प्रथम नेशनल लोक अदालत का आयोजन आज होगा
बालोद- इस वर्ष के प्रथम नेशनल लोक अदालत का आयोजन आज किया जाना है। जिला न्यायाधीश/ अध्यक्ष डॉ० प्रज्ञा पचौरी अध्यक्ष ने बताया कि लोक अदालत में प्री-लिटिगेशन प्रकरण में बी०एस०एन०एल, विद्युत विभाग, नगर पालिका, बीमा कंपनी बैंक से प्राप्त लोन के प्रकरण का निराकरण किया जाता है। चेक बाउंस के प्रकरण, भरण पोषण अन्य राजीनामा योग्य दांडिक प्रकरणों का निराकरण किया जाता है। पूर्व लोक अदालत की भांति इस वर्ष भी राजस्व प्रकरणों का निराकरण किये जाने के संबंध में चर्चा की गई। तहसील न्यायालय में पैरवी करने वाले अधिवक्तागण से खातेदारों के मध्य आपसी बंटवारे के मामले, वारिसों के मध्य बंटवारे विकय पत्र, दान पत्र, वसीयतनामा आदि के आधार पर नामांतरण के मामलें का आदि का निराकरण लोक अदालत में करने को कहा। श्रीमती सुमन सिंह, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने बताया कि लोक अदालत में किसी पक्षकार की ना हार होती ना जीत। सौहार्द्र पूर्ण तरीके से पक्षकारों के मध्य आपसी राजीनामा कर प्रकरण का निराकरण किया जाना है। नेशनल लोक अदालत जिला न्यायालय बालोद के साथ-साथ तालुका न्यायालय डौण्डीलोहारा, दल्लीराजहरा एवं गुण्डरदेही में आयोजित की जायेगी।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर जिला स्तरीय महिला खेलकूद प्रतियोगिता का हुआ आयोजन
- स्व. सरयू प्रसाद अग्रवाल स्टेडियम बालोद में आयोजित खेल में बालिकाओं और महिलाओं ने उत्साह के साथ लिया हिस्सा
बालोद, 08 मार्च 2024 कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल के निर्देशनुसार जिला प्रशासन बालोद और खेल एवं युवा कल्याण विभाग बालोद के सहयोग से अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आज 08 मार्च को स्व. सरयू प्रसाद अग्रवाल स्टेडियम बालोद में जिला स्तरीय महिला खेलकूद प्रतियोगिता का हुआ शुभारंभ। प्रतियोगिता में 02 वर्ग के अंतर्गत 09 से 18 वर्ष की बालिकाएं तथा 18 से 35 वर्ष की महिलाओं के लिए विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की गई। जिसमे दौड़, लंबी कूद आदि खेलों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में डिप्टी कलेक्टर सुश्री प्राची ठाकुर, खेल प्रतियोगिता की नोडल अधिकारी के रूप में मौजूद थी। उन्होंने प्रतिभागी बालिकाओं और महिलाओं से भेंट कर खेल प्रतियोगिता में अपना बेहतर प्रदर्शन करने उनका उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम में प्रतिभागियों के लिए पेयजल, भोजन एव स्वास्थ्य सुविधा की भी व्यवस्था रखी गई थी।


दुधमुंहें बालक सहित तीन की लोहंडीगुड़ा जनपद क्षेत्र के गडदा घाटी में मौत
- चित्रकोट मेला देखने जा रहे थे किलेपाल के ग्रामीण
जगदलपुर। लोहंडीगुड़ा की प्रसिद्ध चितरकोट मेला देखने जा रहे किलेपाल सहित दीगर क्षेत्र के ग्रामीणों की ऑटो गड़दा घाट में पलट गई जिसके कारण एक दुधमुंहे बालक मासूम सहित तीन की घटनास्थल पर ही मौत हो गई वहीं 15-16 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है।

लोहंडीगुड़ा जनपद पंचायत क्षेत्र के
गड़दा घाटी के नीचे सुबह 11:30 बजे ऑटो अनियंत्रित होकर गिर गई है।112 स्टाफ मौका स्थल पर पहुंच कर देखे कि एक ऑटो में करीबन 20 लोग बैठे हुए थे जिसमें ऑटो चालक पवन गावडे पिता बुधराम गावडे उम्र 50 वर्ष निवासी बस्तानार ऑटो क्रमांक सीजी 17 केवाई 576 2 में चला रहा था जिसमें बैठकर 20 लोग चितरकोट मेला देखने जा रहे थे, तभी गड़दा घाटी के पास रोड खराब व ढलान होने के कारण पीछे का चक्का गड्ढे में फंस जाने से ऑटो आनियंत्रित होकर घाटी के नीचे गिर गई जिसमें सवार दो बच्चे व एक महिला की मौत हो गयी। मृतिका नेवलू पोयामी पिता सोनू पोयामी उम्र 10 वर्ष जाति माड़िया निवासी किलेपाल पटेल पारा , सानमु गावडे पिता पवन गावडे उम्र 10 महीनें जाति माडिया निवासी बस्तानार व एक अज्ञात महिला जिसकी जानकारी सामने नहीं आई है,इन तीनों की मौकास्थल पर ही मौत हो गई।

108-112 बने देवदुत
गडदा घाट में घायल हुए लोगों के लिए 112 व108 स्टाफ देवदुत बनकर आए, उन्होंने लगभग 16 लोगों को किलेपाल स्वास्थ्य केंद्र में जाकर भर्ती कराकर प्राथमिक उपचार करवाया जिसमें से की लोगों की स्थिति खराब थी जिनको मेडिकल कॉलेज डिमरापाल भेजा गया।

पोटा केबिन हॉस्टल अग्निकांड में जिंदा जल गई आदिवासी छात्रा
- सर्व आदिवासी समाज ने सरकार पर फोडा ठीकरा
जगदलपुर बस्तर संभाग के बीजापुर जिले के आवापल्ली स्थित आदिवासी गर्ल्स हॉस्टल पोटा केबिन में बीती रात हुई भीषण अग्नि दुर्घटना में लापता एक छात्रा की मृत्यु हो जाने की खबर है।सर्व आदिवासी समाज ने इसकी पुष्टि की है। वहीं सर्व आदिवासी समाज ने इस घटना के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।
सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष अशोक कुमार तलांडी के नेतृत्व में प्रतिनिधि मंडल ने घटना स्थल का दौरा किया और अधिकारियों तथा मृत छात्रा के परिजनों से चर्चा की। प्रतिनिधि मंडल में अशोक कुमार तलांडी, गोंडवाना समाज जिलाध्यक्ष नरेंद्र बुरका, हल्बा समाज प्रमुख गुज्जा राम पवार, आदिवासी समाज के ब्लाक संरक्षक बीएस नागेश, परधान समाज प्रमुख राम प्रसाद नक्का, दोरला समाज प्रमुख धुर्वा वीरैया, गोपाल, सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग से चंद्रशेखर अंगमपली, गोंड समाज सदस्य तलांडी संतोष, महिला प्रभाग से लक्ष्मी ककेम, चिल्का मोडियम, सुशीला कोरम व अन्य समाज प्रमुखों ने बीजापुर जिले के आवापल्ली बालिका पोटा केबिन का दौरा करने के बाद बताया कि आग से पूरी पोटा केबिन पूर्णतः जलकर राख हो गई है। इस घटना में एक मासूम बच्ची की दर्दनाक मौत हुई है। बच्ची की आत्मा की शांति के लिए समाज प्रमुखों ने 2 मिनट मौन धारण किया और बच्ची को श्रद्धांजलि दी। समाज प्रमुखों ने मौके पर जाकर मामले की अपने स्तर पर जांच भी की। पोटा केबिन अग्निकांड में बच्ची की मौत तथा कन्या आश्रमों, शिक्षा परिसरों और छात्रावासों में रह रहे आदिवासी बच्चों की सुरक्षा के संदर्भ में अधिकारियों व मृत बालिका के परिजनों से रूबरू चर्चा की।

जिसमें स्पष्ट हुआ कि आदिवासी समाज के बच्चे और युवा शिक्षा ग्रहण करना चाहते हैं, पर सरकार की नाकामी की वजह से बीजापुर जिले के विभिन्न शासकीय आश्रमों, छात्रावासों पोटा केबिन में आएदिन घटनाएं हो रही हैं। अशोक तलांडी ने सरकार को आड़ेहाथ लेते हुए चेतावनी दी है कि इस प्रकार की लापरवाही नहीं चलेगी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय पार्टियां पक्ष विपक्ष में रहते हुए केवल खानापूर्ति के लिए एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करते हैं।आदिवासी बहुल क्षेत्र में पांचवी अनुसूची, छठवीं अनूसूची पेसा कानून वन अधिकार अधिनियम के पालन साथ यहां के जल, जंगल, जमीन पर आदिवासियों के अधिकार पर कोई भी दल गंभीरता नहीं दिखाता। अशोक कुमार तलांडी ने कहा कि हम आदिवासी जल, जंगल, जमीन के रखवाले और परंपरा, बोली भाषा के साथ ही भारतीय संविधान को मानने वाले लोग हैं। हम कतई नहीं चाहते कि जब कभी भी इस प्रकार के घटनाएं हों, तो छोटे कर्मचारियों को स्थानांतरित व निलंबित किया जाए। जबकि आश्रम, छात्रावासों, शैक्षणिक संस्थाओं के समुचित प्रबंधन और आदिवासी क्षेत्रों के सर्वागीण विकास के लिए जिला प्रशासन को केंद्र व राज्य सरकार द्वारा करोड़ों का बजट दिया जाता है। हमारी मांग है कि शिक्षा के क्षेत्र में विगत 20 सालों से विभिन्न विभागों को किस किस मद से कितनी राशि आंबटित की गई है, उसे सार्वजनिक किया जाए। समाज प्रमुखों के साथ बैठक कर शासन प्रशासन समन्वय के साथ काम करे तभी आदिवासियों का भला हो पाएगा। स्थापित करना चाहते है। अशोक तलांडी ने कहा कि ऐसी घटनाएं सरकार की नाकामी को दर्शाती हैं। यहां के मूल निवासियों को अच्छी शिक्षा ग्रहण कराने के उद्देश्य से करोड़ों का बजट आता है पर आज भी कई आश्रमों, छात्रावासों, पोटा केबिनों में समस्याओं का अंबार है। हॉस्टलों में स्वास्थ्य सुविधाओं, शौचालय, चारदीवारी, भवनों की दुर्दशा, विद्युत वायरिंग की कमी है। तलांडी ने आगे कहा कि पोटा केबिन का बच्चों को शिक्षा देने के उद्देश्य से वैकल्पिक व्यवस्था के रूप निर्माण हुआ था। सरकारें आईं गईं लेकिन आज तक शिक्षा का मंदिर जैसे भवनों का निर्माण नहीं किया गया। जिसका खामियाजा यहां के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। सरकार से मांग है कि शिक्षा से जुड़े खंडहर भवनों की जगह यथाशीघ्र नए भवनों का निर्माण किया जाए। आवपल्ली पोटा केबिन में अध्ययनरत छात्राओं के आवश्यक सामान के साथ शैक्षणिक कागजात जलकर राख हो गए हैं। शासन व जिला प्रशासन से मांग है कि यथाशीघ्र संस्था में शिविर आयोजित कर बच्चों का आवश्यक कागजात बनवाए और संस्थाओं में संबंधित अधिकारी कर्मचारी नियमित रहें। अधिकांश जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी नदारद रहते हैं। जिला प्रशासन के नियंत्रण के आभाव में ऐसी घटनाओं की वृद्धि हो रही है।
महाशिवरात्रि पर देवड़ा – रामपाल पहुँचकर भाजपा प्रत्याशी ने की पूजा अर्चना क्षेत्र के खुशहाली की कामना की
- झाड़ेश्वर बाबा की पूजा अर्चना की
जगदलपुर:- आज महाशिवरात्रि के अवसर पर अनेको क्षेत्र के मंदिर पहुँचकर भाजपा प्रत्याशी महेश कश्यप ने पूजा अर्चना की है। रामपाल स्थित बाबा लिंगेश्वर, देवड़ा स्थित बाबा झाड़ेश्वर, कुदालगॉव, किंजोली सहित अन्य शंकर मन्दिर पहुँचकर बस्तर लोकसभा के भाजपा प्रत्याशी ने भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना की है।
रामपाल मन्दिर पहुँचकर महेश कश्यप ने सपत्नीक बाबा लिंगेश्वर की दर्शन कर क्षेत्र के सुख समृद्धि की कामना भी की है। इस दौरान प्रत्याशी ने सभी से मुलाकात कर स्नेह व सहयोग का आग्रह किया है। इस दौरान नगरनार मण्डल अध्यक्ष सुब्रतो विश्वास, राधेश्याम पेन्द्रे,गणेश नागवंशी,कीर्ति पाढ़ी,शेखर विश्वास सहित अन्य मौजूद थे।
दंतेवाड़ा पहुंचे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, हेलीपैड पर हुआ भव्य स्वागत
- साय का विधायकों और अफसरों ने किया स्वागत
- दंतेश्वरी फाइटर की थर्ड जेंडर जवान ने भेंट की बुके
जगदलपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय महाशिवरात्रि के दिन शुक्रवार 8 मार्च को बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय पहुंचे। दंतेवाड़ा के कारली हेलीपेड पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने आत्मीय स्वागत किया। इस दौरान दंतेश्वरी फाइटर की एक थर्ड जेंडर जवान ने भी मुख्यमंत्री को बुके भेंट की

एक दिवसीय प्रवास पर दंतेवाड़ा पहुंचे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने एंटी लैंड माईन व्हीकल का अवलोकन किया और दंतेश्वरी फाईटर्स की महिला जवानों के साथ फोटो खिंचवाई। इस दौरान मुख्यमंत्री साय का दंतेश्वरी फाइटर्स के तृतीय लिंग जवान रानी मंडल ने पुष्प भेंटकर स्वागत किया। इस मौके पर दंतेवाड़ा विधायक चैतराम अटामी, विधायक चित्रकोट विनायक गोयल तथा अन्य जनप्रतिनिधि, कमिश्नर बस्तर श्याम धावड़े, आईजी बस्तर रेंज सुंदरराज पी., आयुक्त जनसंपर्क मयंक श्रीवास्तव, कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी, पुलिस अधीक्षक गौरव राय तथा जिला प्रशासन के अधिकारी मौजूद थे।


अपने ही घर में घिर गए हैं कवासी लखमा और उनके बेटे हरीश, हो रहा है प्रबल विरोध
- सुकमा जिले के युवाओं की नाराजगी कांग्रेस को पड़ सकती है भारी
- पिता -पुत्र से नाराज हो चले हैं कोंटा के युवा मतदाता
-अर्जुन झा-
जगदलपुर पूर्व मंत्री तथा कोंटा के मौजूदा विधायक कवासी लखमा और उनके पुत्र हरीश कवासी का अपने ही घर में घिर गए हैं। उनका प्रबल विरोध शुरू हो गया है। सुकमा जिले के युवा इन दोनों पिता पुत्र के खिलाफ लामबंद हो गए हैं। युवा मतदाताओं की नाराजगी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को भारी पड़ सकती है
कांग्रेस नेता कवासी लखमा बस्तर संभाग के सुकमा जिले में स्थित कोंटा विधानसभा सीट से लगातार चुनाव जीतते आए हैं। इसकी एक बड़ी वजह है कोंटा क्षेत्र के मतदाताओं का भोलापन।दरअसल कवासी लखमा राजनीति के बड़े ही चतुर और शातिर खिलाड़ी बन चुके हैं।कोंटा विधानसभा क्षेत्र में सुकमा शहर भी आता है और इस विधानसभा क्षेत्र के 90 फीसदी मतदाता अनुसूचित जनजाति वर्ग के हैं। समाज का यह तबका बड़ा ही सीधा, सरल और हर किसी पर आंख मूंद कर विश्वास करने वाला तबका है। उनके इसी भोलेपन के बेजा फायदा अब तक कवासी लखमा उठाते आ रहे हैं। भोले भाले आदिवासियों को ठगने की कला में कवासी लखमा माहिर हैं।
आदिवासी अपनी आस्था, संस्कृति और परंपरा से बेइंतहा प्यार करते हैं और उसके संरक्षण के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तत्पर रहते हैं। चूंकि कवासी लखमा और उनके बेटे हरीश कवासी भी आदिवासी हैं। इसलिए वे आदिवासियों के गुण को अच्छी तरह से जानते हैं। मगर राजनीति में आने के बाद उनका आदिवासी प्रेम दिखावे भर का रह गया है। कवासी लखमा ने आदिवासियों को अपनी राजनीति चमकाने का आधार बना लिया है। इसके लिए वे साम, दाम, दंड, भेद, आस्था, पर्व परंपराओं तक का सहारा लेने से भी नहीं चूकते। दिल के साफ आदिवासी कवासी लखमा के ‘छद्म आदिवासी प्रेम’ के जाल में उलझ कर रह जाते हैं। वे उन्हें अपना मसीहा मान बैठते हैं और उन्हें हर बार के चुनाव में अपने वोटों से निहाल कर देते हैं। कवासी लखमा की जीत का एक सबसे बड़ा कारण कांग्रेस और इंदरा दाई (इंदिरा गांधी) भी है। कम्युनिस्ट पार्टी से विमुख होने के बाद कोंटा विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं का झुकाव कांग्रेस की ओर ज्यादा हो गया है। मगर कांग्रेस के पाले में आ चुके आदिवासी मतदाताओं से भी पिता पुत्र की जोड़ी छल करने पर आमादा हो गई है। इस चरित्र को कोंटा के आदिवासी युवा अब समझ चुके हैं और कवासी लखमा एवं हरीश लखमा के विरोध में मुखर हो उठे हैं।
इसलिए नाराज हैं आदिवासी युवा
कवासी लखमा और हरीश कवासी के प्रति कोंटा क्षेत्र के आदिवासी युवाओं की नाराजगी बेवजह नहीं है। इन युवाओं का कहना है कि 2018 के विधान सभा चुनाव के दौरान कोंटा क्षेत्र में अपने पिता के कवासी लखमा के पक्ष में प्रचार के लिए पहुंचे हरीश कवासी लखमा ने युवा पीढ़ी से जो वादे किए थे, उन्हें पूरा नहीं किया और अपने चहेते लोगों को उपकृत करने का काम किया है। यही वजह रही कि जब 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान फिर से पहुंचे हरीश कवासी को युवाओं ने उनकी क्लास लगाकर काफी खरी खोटी सुनाई थी। युवाओं का कहना था कि पांच साल तुमने सरकार का मजा लिया ओर अब वोट मांगने आए हो, जब काफी देर तक ग्रामीण उन्हें घेरे रहे तब अंत में बड़ी मुश्किल से वे वहां से किसी तरह निकल भागे। अब लोकसभा सीट से टिकट की मांग करने पर भी युवा विरोध करने लगे हैं। युवा ही नहीं, बल्कि हर आयु वर्ग के मतदाता हरीश कवासी के विरोध कर रहे हैं। इन लोगों का आरोप है कि कांग्रेस पार्टी के नाम पर वर्षों से सुविधा भोगने वाले अब इसी पार्टी को नेस्तानाबूद करने पर तुल गए हैं। अपने किए कर्मो से बचने बीजेपी की गोद में बैठकर पार्टी को हराने प्रयास कर रहे हैं।


