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धर्मांतरण कराने वालों के लिए काल बना “नीला बोर्ड

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बड़े पराली में भी धर्मांतरण पर लगी पूर्णतः रोक

पास्टर, पादरियों के प्रवेश और धर्मांतरण गतिविधियों पर लगा पूर्णतः प्रतिबंध

घर वापसी अभियान भी चल रहा है लगातार

अर्जुन झा

जगदलपुर नक्सलमुक्त बस्तर अब आधुनिक युग की सुख सुविधाओं से संपन्न होने के साथ ही अपनी प्राचीन समृद्ध संस्कृति और परंपराओं की ओर तेजी से लौट रहा है। नक्सलवाद का जख्म झेलने के बाद धर्मांतरण के जख्म को भरने में यहां के आदिवासी कमर कस चुके हैं। यही वजह है कि पूरे संभाग में नीला बोर्ड धर्मांतरण गतिविधियों में लिप्त लोगों के लिए बड़ा खतरा साबित हो रहा है। संभाग में धर्मांतरण के खिलाफ बड़े ही जोरदार ढंग से आवाज उठाई जाने लगी है। गांव गांव में लगे नीले बोर्ड इस बात की तस्दीक कर रहे हैं।

बस्तर संभाग में बड़े पैमाने पर आदिवासियों और अन्य समुदायों के लोगों का धर्मांतरण हुआ है। गांवों में आदिवासियों के आस्था के केंद्र मातागुड़ी और देवगुड़ी की अपेक्षा चर्चों की की संख्या बेतहाशा बढ़ गई है। जिन गांवों में चर्च नहीं है, वहां किसी मतांतारित व्यक्ति की झोपड़ी या मकान में हर सप्ताह प्रार्थना सभा का आयोजब होता है। वहीं गांवों में चंगाई सभाओं का आयोजन कर लोगों की मानसिक एवं शारीरिक बीमारियां दूर करने का दावा किया जाता है। कम पढ़े लिखे भोले भाले आदिवासी भ्रम जाल में फंसकर अपने समृद्ध विरासत को त्याग देते हैं और धर्म परिवर्तन कर लेते हैं। ताज्जुब की बात तो यह है कि जो अंग्रेज भारत को सपेरों, बाजीगरों जाहिलों और अंधविश्वास से भरे लोगों का देश बताकर हमारा मजाक उड़ाते रहे हैं, उन्हीं अंग्रेजों धर्म के लोग आज यहां अंधविश्वास फैला कर धर्मांतरण कराने में लगे हुए हैं।

आदिम संस्कृति और धर्म पर हो रहे बाहरी धर्म के हमले ने आज की शिक्षित आदिवासी पीढ़ी को उद्वेलित करके रख दिया है। छत्तीसगढ़ की जिस आदिम संस्कृति की पूरी दुनिया में अलग पहचान रही है, उस आदिवासी पहचान को बचाए रखने के लिए समाज ने कमर कस ली है। बस्तर के गांव गांव में बैठकें कर पास्टर, पादरियों और ईसाई धर्म प्रचारकों के प्रवेश पर रोक लगाई जा रही है। प्रवेश पर प्रतिबंध से संबंधित बोर्ड अब प्रायः हर गांव में नजर आने लगा है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि ये सारे बोर्ड नीले रंग के पेंट से पुते हुए हैं और उन पर सफेद रंग के पेंट से प्रवेश पर प्रतिबंध संबंधी वाक्य अंकित रहते हैं। बस्तर संविधान की पांचवी अनुसूची क्षेत्र अंतर्गत आता है। यहां पेसा अधिनियम लागू है। इसके तहत यहां के आदिवासियों को आदिम संस्कृति, पूजा पद्धति, रूढ़िवादी परंपराओं, जल जंगल और जमीन के संरक्षण का अधिकार प्राप्त है। इसी अधिकार का हवाला देते हुए यहां के आदिवासियों ने धर्मांतरण के खिलाफ जोरदार ढंग से आवाज बुलंद कर रखी है। बस्तर संभाग के कांकेर जिले की दुर्गूकोंदल तहसील की ग्राम पंचायत मंगहुर के ग्राम बड़े पराली में भी धर्मांतरण के खिलाफ ग्रामीण और आदिवासी एकजुट हो गए हैं। यहां भी पास्टर, पादरियों और धर्म प्रचार की आड़ में धर्मांतरण कराने वाले लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया है। ग्राम इरागांव का धर्मांतरित आदिवासी युवक अरुण कुमार हिड़को पिता सिरदर हिड़को ईसाई धर्म छोड़ कर अपने मूल धर्म में वापस लौट आया है। गांव वालों ने उसकी आरती उतार कर स्वागत किया और उसे अपने ग्राम समाज में शामिल कर लिया।

अंतिम संस्कार पर जगह जगह विवाद

वर्षों पहले धर्मांतरित हो चुके परिवारों के सदस्यों की मृत्यु होने पर उनके अंतिम संस्कार को लेकर बस्तर के सैकड़ों गांवों में विवाद की स्थिति निर्मित हो चुकी है। ऐसे हालात अब भी बनते रहते हैं। दरअसल मातांतरित परिवार गांव की जमीन पर ही अपने मृत परिजन को दफनाने की जिद पर अड़ जाते हैं। वहीं आम ग्रामीण अपनी परंपरा का हवाला देते हुए इसका विरोध करते हैं। चर्चा है कि कई गांवों में वन विभाग की जमीन पर कब्जा कर कब्रिस्तान बना लिए गए हैं। गांवों की जमीन में शव दफनाने के पीछे यही मंशा निहित होती है।

नए सत्र के लिए सख्त हुए बीईओ चंद्रशेखर यादव

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बकावंड विकासखंड शिक्षा अधिकारी चंद्रशेखर यादव ने नए शिक्षा सत्र को लेकर विभागीय अधिकारियों की बैठक ली।बैठक में मौजूद सभी 42 संकुल समन्वयकों को आवश्यक निर्देश दिए गए।बीईओ यादव ने निर्देशित किया कि विद्यालय खुलते ही सभी शैक्षणिक एवं प्रशासनिक कार्यों का सुचारू संचालन सुनिश्चित किया जाए, सभी शिक्षक एवं कर्मचारी समय पर विद्यालय में उपस्थित हों तथा नियमित रूप से शैक्षणिक कार्य संपादित करें। सभी शिक्षक वीएसके एप में अपनी उपस्थिति 100 प्रतिशत दर्ज करना सुनिश्चित करें, निर्धारित समय-सीमा के अनुसार पाठ्यक्रम पूर्ण कराया जाए,शासन एवं विभाग द्वारा जारी सभी निर्देशों का अक्षरशः पालन किया जाए, विद्यालय खुलने के एक घंटे के भीतर एप के माध्यम से उपस्थिति अनिवार्य रूप से प्रेषित की जाए, सभी विद्यालयों में प्रथम दिवस प्रवेश उत्सव उत्साहपूर्वक मनाया जाए। खंड शिक्षा अधिकारी चंद्रशेखर यादव ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही अथवा निर्देशों की अवहेलना पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

खनिज अधिकारियों ने आंखों पर पट्टी बांध कर की अवैध रेत भंडारण की जांच

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जांच के नाम पर दिखावा करके लौट गई टीम

डंप थी 1 हजार ट्राली से ज्यादा रेत, विभाग को नजर आई महज 200 ट्राली

ठेकेदार से खनिज विभाग की सांठगांठ

अर्जुन झा

बकावंड करपावंड तहसील के छिंदगांव में खनिज विभाग द्वारा रेत भंडारण पर की गई कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि जहां एक हजार ट्रॉली से ज्यादा रेत डंप थी, वहां खनिज विभाग की टीम को महज 200 ट्रॉली रेत नजर आई। ऐसा लगता है कि अधिकारियों ने अपनी आंखों पर पट्टी बांध कर अवैध रेत भंडारण की जांच की है। वहीं खनिज अधिकारियों और ठेकेदार के बीच सांठगांठ की बात भी सामने आई है।

हमने इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद प्रशासन एक्शन मोड में आया। उच्च अधिकारियों के निर्देश पर खनिज विभाग की टीम करपावंड तहसील के छिंदगांव पहुंची जरूर थी, मगर जांच के नाम पर महज दिखावा ही किया गया। गांव में 1 हजार ट्राली से अधिक रेत डंप थी, मगर खनिज विभाग को महज 200 ट्राली ही रेत नजर आई। विभाग ने सरपंच पति शरद बघेल एवं एक ठेकेदार को नोटिस जारी करने की जानकारी तो दी है, लेकिन नोटिस की विस्तृत जानकारी छुपा दी गई।पुख्ता जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के एक ठेकेदार ने खनिज विभाग से सेटिंग कर रखी है। खनिज विभाग के इशारे पर सरपंच पति एवं पंच द्वारा पेटफुली नदी से रेत का अवैध उत्खनन कर छिंदगांव पंचायत के गौठान में लगभग 1000 ट्राली रेत डंप की गई है। इसकी शिकायत किए जाने पर एसडीएम बकावंड मनीष वर्मा के आदेश पर खनिज विभाग की टीम मौके पर पहुंची थी लेकिन सांठगांठ के चलते जांच के नाम पर सिर्फ औपचारिकता ही पूरी की वापस लौट आई है।

रॉयल्टी की क्षति का हिसाब नहीं

खनिज विभाग की टीम को मौके से वापस आए चार दिन बीत चुके हैं, लेकिन इस रेत कांड में शासन को रायल्टी के रूप में मिलने वाली कितने रुपयों की क्षति हुई है, विभाग उसका आंकलन अब तक नहीं कर पाया है। विभागीय अधिकारी रॉयल्टी को लेकर बोलने से बच रहे हैं। विभाग द्वारा जारी विज्ञप्ति में रॉयल्टी की क्षति एवं कितनी जुर्माना वसूली की रकम का कहीं भी जिक्र नहीं है। खबर है कि जिले से बाहर के एक ठेकेदार के इशारे पर जेसीबी से अवैध रेत का उत्खनन किया जा रहा था। विभाग उक्त वाहन को भी जप्त नहीं किया गया है। यह भी एक बड़ा रहस्य है। अब देखने वाली बात यह है कलेक्टर आकाश छिकारा और एसडीएम मनीष वर्मा इस बड़े रेत घोटाले में क्या एक्शन लेते हैं,?

मसाला क्षेत्र विस्तार अंतर्गत किसानों को हल्दी एवं अदरक की खेती पर मिलेगी सब्सिडी

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बालोद 11 जून 2026 उद्यानिकी विभाग के राज्यपोषित मौसम खरीफ वर्ष 2026-27 अतर्गत बालोद जिले में मसाला क्षेत्र विस्तार में हल्दी एवं अदरक उत्पादन का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। उद्यानिकी विभाग के सहायक संचालक ने बताया कि ’पहले आओ, पहले पाओ के’ तहत जिले में रकबा 50 हेक्टेयर हल्दी एवं 33 हेक्टेयर अदरक हेतु कृषक अपने स्थानीय उद्यानिकी शासकीय उद्यान रोपणी में संपर्क कर योजना का लाभ ले सकते हैं। इस संबंध में अधिक जानकारी उद्यानिकी तकनीकी सहायक श्री मनीष कुमार निषाद के मोबाईल नंबर 9770644287 से संपर्क कर प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने बताया कि प्रमाणित, आधार बीज जिसमें हल्दी बीज प्रति हेक्टेयेर 25 क्विंटल एवं अदरक बीज प्रति हेक्टेयर 15 क्विंटल लगाकर फसल हल्दी में 47 हजार रूपये अनुदान एवं फसल अदरक में 49 हजार 800 रूपये का अनुदान प्राप्त कर सकेगें। उन्होंने बताया कि डौण्डी विकासखण्ड के किसान श्री विजय निकोसे के मोबाईल नंबर 6265269639, डौण्डीलोहारा विकासखण्ड के किसान श्री अनिल साहू के मोबाईल नंबर 7415793724, गुण्डरदेही विकासखण्ड के किसान श्री मुकेश कुमार वासनिक के मोबाईल नंबर 9926171139, बालोद विकासखण्ड के किसान श्री गणेश शंकर के मोबाईल नंबर 9098787674 एवं गुरूर विकासखण्ड के किसान श्री अखिलेन्द्र जगबेहड़ा के मोबाईल नंबर 7000540576 से संपर्क कर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। क्रमांक/311/ठाकुर

खनिज के अवैध उत्खनन, परिवहन, भण्डारण पर की जा रही है निरंतर कार्रवाई

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जिले में खनिज के अवैध उत्खनन, परिवहन में संलग्न वाहन को किया गया जप्त

बालोद, 11 जून 2026 कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देशानुसार जिले में खनिज के अवैध उत्खनन, परिवहन, भण्डारण पर निरंतर कार्रवाई की जा रही है। जिसके अंतर्गत खनिज विभाग द्वारा 09 जून 2026 को गुरूर विकासखण्ड एवं 11 जून को बालोद एवं गुण्डरदेही का औचक निरीक्षण किया गया। जिला खनि अधिकारी ने बताया कि निरीक्षण के दौरान रेत के अवैध परिवहन करते पाये जाने के कारण कुल 10 वाहनों को जप्त किया गया। जिसमें रेत से भरी 05 हाईवा सीजी 08 बीएफ 9424, सीजी 08 एल 3527, सीजी 24 टी 7853, सीजी 04 पीएच 2606, सीजी 08 बीएच 1082 एवं 03 टैक्टर मय ट्राॅली सीजी 07 सीवाय 7277, सीजी 24 वी 2089 एवं सीजी 047463 तथा मिट्टी (ईंट) से भरी 02 वाहन सोल्ड महेन्द्रा एवं सीजी 24 वी 3114 सहित 10 वाहनों को जप्त कर थाना आरक्षी केन्द्र बालोद, गुण्डरदेही एवं सनौद के अभिरक्षा में रखा गया है। उन्होंने बताया कि प्रकरण में नियमानुसार खान व खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम 1957 के तहत् कार्यवाही की जाएगी एवं भविष्य में भी खनिज जांच दल द्वारा खनिज के अवैध परिवहन, उत्खनन व भण्डारणकर्ताओं के विरूध्द निरंतर नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। क्रमांक/310/ठाकुर

जिले में खनिज के अवैध भण्डारण पर की गई कार्रवाई

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बालोद, 10 जून 2026 कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देशानुसार जिले में खनिज के अवैध उत्खनन, परिवहन, भण्डारण पर निरंतर कार्रवाई की जा रही है। जिसके अंतर्गत खनिज विभाग एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम के द्वारा 10 जून 2026 को गुण्डरदेही विकासखण्ड के ग्राम सिकोसा, रेंगाकठेरा, चन्दनबिहरी, देवरी ख का औचक निरीक्षण किया गया।

जिला खनि अधिकारी ने बताया कि खनिज विभाग द्वारा निरीक्षण के दौरान रेत के अवैध भण्डारण के 06 मामलों में खनिज रेत को जप्त कर ग्राम पंचायत एवं कोटवार को सुपुर्द किया गया है। उन्होंने बताया कि भविष्य में भी खनिज जांच दल द्वारा खनिज के अवैध परिवहन, उत्खनन व भण्डारणकर्ताओं के विरूध्द निरंतर नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। क्रमांक/306/ठाकुर

मोदी सरकार के 12 वर्ष: ऐतिहासिक निर्णयों, सुशासन और विकसित भारत के संकल्प का स्वर्णिम काल

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दल्लीराजहरा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने पर भाजपा नेताओं ने इसे सेवा, सुशासन, गरीब कल्याण, राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्र निर्माण का स्वर्णिम काल बताया। नेताओं ने कहा कि इस दौरान देश ने अनेक ऐतिहासिक एवं साहसिक निर्णयों के माध्यम से विश्व पटल पर अपनी अलग पहचान बनाई है। जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाना, तीन तलाक की प्रथा समाप्त कर मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाना, आतंकवाद के विरुद्ध सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक जैसी निर्णायक कार्रवाइयों के साथ ऑपरेशन सिंदूर की सफलता ने भारत की सुरक्षा और संप्रभुता को नई मजबूती प्रदान की है। साथ ही प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लेकर देश तेज गति से आगे बढ़ रहा है।भाजपा मंडल अध्यक्ष रामेश्वर साहू ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में गरीब, किसान, युवा एवं महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है। प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, जनधन योजना एवं किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं ने करोड़ों लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाया है तथा आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार हो रहा है।नगर पालिका अध्यक्ष तोरणलाल साहू ने कहा कि मोदी सरकार ने विकास को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का कार्य किया है।

देश में सड़क, रेल, हवाई अड्डों, डिजिटल सेवाओं और आधुनिक अधोसंरचना का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आधारभूत संरचनाओं को सशक्त बनाया जा रहा है।नगर पालिका उपाध्यक्ष मनोज दुबे ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने तकनीक, शिक्षा, खेल, अंतरिक्ष, रक्षा और विदेश नीति के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। वैश्विक मंचों पर भारत की प्रतिष्ठा लगातार बढ़ी है तथा युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं।विधानसभा मीडिया प्रभारी भूपेंद्र डहरवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में देश के लोकतांत्रिक इतिहास में नया कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं। यह उपलब्धि जनविश्वास, कुशल नेतृत्व और सुशासन की राजनीति की जीत है। उनके नेतृत्व में भारत ने जी-20 की सफल अध्यक्षता कर विश्व समुदाय में अपनी प्रभावशाली भूमिका स्थापित की है।पूर्व भाजपा मंडल अध्यक्ष राकेश द्विवेदी ने कहा कि मोदी सरकार के 12 वर्ष राष्ट्र निर्माण, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और जनसेवा के प्रति समर्पण का प्रतीक हैं। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम एवं महाकाल लोक जैसे कार्यों ने भारत की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दी है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 का संकल्प देश के प्रत्येक नागरिक की सहभागिता से साकार होगा और भारत विश्व का अग्रणी राष्ट्र बनकर उभरेगा।

संजो कर रखें देव बालिफूल की परंपरा को: लखेश्वर बघेल

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बस्तर की संस्कृति को आगे बढ़ाने का जिम्मा युवाओं पर

बस्तर औऱ ओडिशा के दो गांवों के बीच देव बालिफूल का रिश्ता

जगदलपुर जनजातीय बहुल बस्तर में मेल मिलाप और सामाजिक सौहार्द बढ़ाने मित्र बनाने की प्रथा सदियों से चली आ रही है। व्यक्ति व्यक्ति से मीत बदता है, बालिफूल बदता है। सबसे आकर्षक जुगलबंदी तब होती है जब पूरे के पूरे दो गांव आपस में मीत बन जाते हैं। यह बालिफूल कहलाता है। जब दो गांव आपस में मीत या बालिफूल बांध लेते हैं गांव के हर सुख-दुख, त्योहार, मेला मड़ई में सामूहिक सहभागिता करते हैं।

बात यहीं खत्म नहीं हो जाती। आश्चर्य की बात तो यह है कि बस्तर के संधकरमरी गांव के देवी-देवताओं ने सीमा पार ओडिशा के मोतीगांव के देवी-देवताओं से बालिफूल बांध रखा है। इससे पता चलता है कि यह कितनी पौराणिक परंपरा है। यह प्रथा कब से चली आ रही है किसी को नहीं पता, पर हमें इस सांस्कृतिक विरासत को संजो कर रखना है। ये बातें मंगलवार को छत्तीसगढ़ विधानसभा के उपनेता प्रतिपक्ष लखेश्वर बघेल ने अपने गृह जनपद के ग्राम संधकरमरी में देव बालिफूल उत्सव को मुख्य अतिथि के आसंदी से संबोधित करते हुए कहीं। बस्तर के जनजातीय समाज में एक से बढ़कर एक अनूठी सांस्कृतिक परंपराएं हैं जिनका परिपालन सदियों से होता चला आ रहा है। इनमें से एक देव बालिफूल की छटा यहां देखने को मिली। हर साल यह उत्सव मनाया जाता है कभी संधकरमरी के ग्रामीण अपने देवी-देवताओं के साथ मोतीगांव जाते हैं तो दूसरे साल मोतीगांव के ग्रामीण अपने देवी-देवताओं के साथ सीमा पार कर संधकरमरी आ पहुंचते हैं। इन दोनों गांव के बीच दूरी करीब 7 किमी है। बीच मे सरहद भी है, पर यह सरहद कभी बाधा नहीं बनी मेलजोल में। सरहद पार रोटी-बेटी का संबंध है और दोनों ओर भतरा जनजातीय क्षेत्र होने से सांस्कृतिक समानताएं भी हैं । इस कार्यक्रम में देवी देवता सहित आने वाले पूरे लोगों का सम्मान पारंपरिक लोक वाद्य यंत्रों के वादन और गाजे बाजे के साथ पैर धुला कर किया जाता है।

टीका लगाकर गमछा पहना कर या सिर पर पागा बांधकर किया जाता है। देव मिलन के बाद सामूहिक भोज होता है, दोनों गांव के लोग बैठकर सुख दुख, जंगल बचाने एक दूसरे के गांव के साथ सदैव खड़े रहने का संकल्प लेते हैं। मोतीगांव से प्रमुख रुप से चैतू सिरहा, बुधराम कलार, लैखन पुजारी, तुला सिरहा, भास्कर पुजारी, विद्या पुजारी, राजमन पुजारी, सरपंच नवीना, चित्रकला कलार, लखन भतरा,संध करमरी से पूर्व सरपंच तुलाराम बघेल, दामोदर कश्यप, मेघनाथ नाग, बेनीराम कश्यप, सुंदर सेठिया समेत दोनों गांव के सैकड़ों ग्रामीण इस उत्सव के सहभागी बने।

मुंडागांव में बुलडोजर एक्शन के विरोध में सामने आए पूर्व विधायक चंदन कश्यप

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प्रशासनिक अमले को लौटना पड़ गया बैरंग

जगदलपुर बस्तर जिले के भानपुरी थाना अंतर्गत ग्राम मुंडागांव में शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा कर और मकान बनाकर रह रहे लोगों को बेदखल करने पहुंची प्रशासनिक टीम को ग्रामीणों और कांग्रेस नेताओं के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। इस दौरान नारायणपुर क्षेत्र के पूर्व विधायक एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता चंदन कश्यप उग्र तेवर दिखाते हुए ग्रामीण के साथ खड़े नजर आए। दरअसल मुंडागांव के बाजार स्थल की सरकारी जमीन पर 16 परिवार मकान बनाकर वर्षों से निवासरत हैं। इन गरीब परिवारों के मकानों को तोड़ने और अवैध कब्जे हटाने के लिए तहसीलदार की टीम और पुलिस टीम जेसीबी बुलडोजर के साथ पहुंची थी। कार्रवाई शुरू होते ही स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों द्वारा भारी विरोध किया जाने लगा।मुंडागांव बाजार स्थल में अवैध कब्जा कर रखे 16 में से 13 लोगों को ही नोटिस दिया गया था।

मुंडागांव में प्रशासन द्वारा शासकीय भूमि से अवैध कब्जे हटाने के निर्देश दिए गए थे। अतिक्रमण हटाने के लिए तहसीलदार की टीम मौके पर जेसीबी लेकर पहुंची अवैध मकानों को तोड़ने के दौरान ग्रामीणों ने भारी विरोध किया। स्थानीय ग्रामीणो और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के विरोध के कारण टीम को बुलडोजर सहित वापस लौटाना पड़ा ।शासकीय जमीन पर वर्षों से काबिज लोगों को हटाने प्रशासन द्वारा आज तहसीलदार के नेतृत्व में एक टीम भेजी गई थी।जेसीबी के माध्यम से तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू होते ही सैकड़ों की भीड़ जमा हो गई। वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व विधायक चंदन कश्यप के नेतृत्व में ग्रामीणों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन सौंपते हुए इस कार्रवाई की निंदा की। श्री कश्यप ने ऐन बरसात के दौर में गरीब परिवारों की बेदखली को अमानवीय कदम बताया और कहा कि इन सभी परिवारों को इसी जगह पर रहने दिया जाए और उन्हें पट्टे प्रदान किए जाएं। जानकारी के अनुसार भानपुरी से लगे ग्राम मुंडागांव के बाजार स्थल पर सोलह लोगों ने कब्जा किया हुआ है, जिनमें तेरह लोगों को बार बार नोटिस देकर जगह खाली करने कहा गया था। उनके नहीं मानने पर आज तोड़फोड़ की कार्रवाई के लिए अमला पहुंचा था।

बस्तर जनपद कार्यालय के जनरेटर की सांस थमी, सारा काम ठप; सीईओ बोले- नहीं मिल रहे हैं मेकेनिक

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संकट को और ज्यादा बढ़ा दिया है पॉवर कट ने

जगदलपुर तेज गर्मी और उमस के बीच जनपद पंचायत बस्तर पहुंचने वाले ग्रामीणों को घंटों इंतजार के बाद मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। प्रधानमंत्री आवास, वृद्धा पेंशन, मनरेगा जॉबकार्ड और जन्म मृत्यु प्रमाणपत्र जैसे जरूरी कामों के लिए रोज सैकड़ों लोग दूर-दराज के गांवों से यहां आते हैं। लेकिन बिजली की आंख-मिचौली ने पूरे सिस्टम को ठप कर दिया है। जैसे ही लाइट जाती है, कंप्यूटर और प्रिंटर बंद हो जाते हैं।

कार्यालय में लगे सिर्फ दो इन्वर्टर से मुश्किल से एक-दो सिस्टम ही चल पाते हैं। नतीजा यह कि धूप में सफर करके आए बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे पसीने से लथपथ होकर घंटों इंतजार करते रहते हैं।लोगों का कहना है कि वे एक ही प्रमाण पत्र के लिए तीन-चार बार चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन बिजली न होने के कारण काम पूरा नहीं हो पा रहा है। कार्यालय परिसर में लगा जनरेटर पिछले कई महीनों से बंद पड़ा है। बिजली कटौती के समय पूरा ऑफिस सिर्फ दो इन्वर्टर के भरोसे चल रहा है, जो 20-25 मिनट से ज्यादा बैकअप नहीं दे पाते। इससे शासन की डिजिटल इंडिया और सुशासन के दावों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उमस भरी गर्मी में बिना पंखे-कूलर के बैठे ग्रामीण बेहाल हो जाते हैं।

वर्सन

मेकेनिक तो मिल जाए?

जनरेटर खराब हो गया है और मरम्मत के लिए मेकेनिक नहीं मिल पा रहे हैं। मेकेनिक मिलते ही जनरेटर को जल्द सुधरवा कर चालू कर दिया जाएगा।

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