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शासन विरोधी एवं चुनाव बहिष्कार वाले पांपलेट, पर्चा के साथ 4 मिलिशिया सदस्य गिरफ्तार

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  • नक्सलियों के लिए आरोपी करते थे लेव्ही वसूली भी
  • राशन का भी इंतजाम करते रहे हैं माओवादियों के लिए
    जगदलपुर बस्तर संभाग के बीजापुर जिले में पुलिस ने नक्सलियों के लिए काम करने वाले चार मिलिशिया सदस्यों पकड़ा है। कहा जा रहा है कि ये लोग नक्सलियों के लिए लेव्ही वसूली व राशन पानी का इंतजाम करने, शासन विरोधी एवं चुनाव बहिष्कार के आह्वान संबंधी पंप्लेट पर्चे चस्पा करने का काम करते थे।
    बीजापुर जिले में चलाए जा रहे नक्सल विरोधी अभियान के तहत 23 फरवरी 24 को थाना कुटरू एवं डीआरजी की टीम पोनड़वाया, केतुलनार की ओर सर्चिंग पर निकली थी। इसी दौरान दल को पोनड़वाया पहाड़ी के वाटर पॉइंट के पास नक्सलियों का जमावड़ा लगे होने की सूचना मिली। डीआरजी के दल द्वारा वहां दबिश दी गई। स्थल की घेराबंदी कर चार संदिग्ध व्यक्तियों को पकड़ा गया। चारों लोग नक्सली संगठन के मिलिशिया सदस्य बताए गए हैं। उनके नाम जयसिंग मुडामी, फागूराम पोयाम, गोविंद वट्टी और गुट्टा उद्दे हैं। पकड़े गए मिलिशिया सदस्यों के कब्जे से प्रतिबंधित नक्सल संगठन के शासन विरोधी और चुनाव बहिष्कार के पर्चे, पांपलेट, पटाखे, बैटरी आदि बरामद किए गए हैं। पुलिस के मुताबिक ये लोग नक्सल संगठन में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे थे। वे पूर्व में भी शासन विरोधी गतिविधियों में संलिप्त थे। शासन विरोधी पर्चा पम्पलेट लगाने, नक्सलियों के लिए लेव्ही वसूली, मीटिंग के लिए ग्रामीणों को एकत्रित करने, नक्सलियों के लिए राशन इकठ्ठा करने जैसे कार्यों में ये मिलिशिया सदस्य सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। पकड़े गये मिलिशया सदस्यों के खिलाफ छग विशेष जनसुरक्षा अधिनियम 2005 की सुसंगत धाराओं के तहत अपराध कायम कर एवं वैधानिक दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें न्यायिक रिमांड पर न्यायालय बीजापुर में पेश किया गया।

शाला भवनों की रंगाई पोताई की आड़ में करतूत पर लीपापोती

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  • जैबेल शैक्षणिक संकुल में अनुदान राशि की जमकर अफरा तफरी का मामला
  •  मामला उजागर होने के बाद स्कूलों का रंग रोगन शुरू
    -अर्जुन झा-
    बकावंड सीआरसी अनुदान और शाला अनुदान की राशि की अफरा तफरी का मामला उजागर किए जाने के बाद जैबेल संकुल केंद्र में शालाओं की नए सिरे से रंगाई पोताई कराकर संकुल समन्वयक ने अपनी करतूत पर लीपापोती शुरू दी है।
    बस्तर जिले के बकावंड ब्लाक के संकुल केंद्र जैबेल में शिक्षा विभाग से मिली सीआरसी ग्रांट और शाला अनुदान राशि की संकुल समन्वयक द्वारा जमकर गड़बड़ी की गई है। विभिन्न चुनावों के दौरान गांवों में ज्यादातर मतदान केंद्र शालाओं में ही बनाए जाते हैं।प्रशासन द्वारा मतदान के पूर्व शाला भवनों की साफ सफाई और रंग रोगन कराया जाता है, ताकि मतदान कर्मियों को साफ सुथरा और तनाव रहित माहौल मिल सके। हालिया निपटे छत्तीसगढ़ विधानसभा के चुनावों के दौरान भी जैबेल संकुल के अनेक शाला भवनों की साफ सफाई और रंग रोगन कराया गया था। जिला प्रशासन द्वारा कराया गया यह काम जैबेल के संकुल समन्वयक के लिए कमाई का जरिया बन गया। संकुल समन्वयक ने शालाओं की चुनाव के दौरान की रंगाई पोताई को सीआरसी ग्रांट और शाला अनुदान मद से किया जाना दर्शाकर हजारों रुपए हजम कर लिए। इस संवाददाता ने प्रमुखता से उजागर किया था। रंगाई पोताई की आड़ में खेल करने के अलावा संकुल समन्वयक अरुण पाण्डेय ने स्कूलों में खेल सामग्री, घड़ियां व अन्य सामान प्रदान करने में भी बड़ी कमाई की है। बताते हैं कि इन सामग्रियों की रकम की वसूली स्कूलों से की गई थी। जांच में यह मामला सही पाए जाने पर उन्हें बीआरसी पद से हटा दिया गया था। तब की कांग्रेस सरकार में बैठे रसूखदार जनप्रतिनिधियों के दम पर वे पुनः बकावंड ब्लॉक में वापस नियुक्त हो गए। वापसी के बाद वे आज भी सुर्खियों में बने रहते हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारी उनके खिलाफ शिकायतों को आश्चर्य जनक ढंग से नजरअंदाज करते आए हैं। चर्चा है कि संकुल समन्वयक अपनी अवैध कमाई का हिस्सा अधिकारियों तक भी पहुंचाते हैं। इसीलिए शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होती। कई स्कूलों में अनुदान राशि जारी होने के बाद भी रंगाई पोताई कार्य नहीं हुआ है। इस विषय को लेकर पहले विपक्ष में रहे भाजपा के जनप्रतिनिधि सवाल उठते रहे हैं। वहीं अब संकुल समन्वयक ने शालाओं की रंगाई पोताई का काम शुरू करा दिया है। चर्चा है कि ऐसा करके वे अपने किए की लीपापोती कर रहे हैं। इधर बकावंड के विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने भी हमारी खबर पर संज्ञान लेते हुए ब्लॉक के सभी संकुल समन्वयकों को आदेश जारी कर कहा है कि सीआरसी ग्रांट और शाला अनुदान मद की राशि का उपयोग वास्तविक कार्यों में और समय पर करें तथा विकासखंड शिक्षा कार्यालय को इस बाबत रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

यूनियन और ठेका श्रमिकों का संघर्ष रंग लाया, खदान ठेका श्रमिकों को मिला चिकित्सा सुविधा का लाभ

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दल्लीराजहरा खदानों में कार्यरत ठेका श्रमिकों को परिवार सहित चिकित्सा सुविधा देने की मांग पर लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष का सुखद परिणाम आ ही गया प्रबंधन ने 22 फरवरी को ठेका श्रमिकों को परिवार सहित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का ऐलान कर ही दिया। जिससे तमाम खदान ठेका श्रमिकों में हर्ष का माहौल है। उल्लेखनीय है कि बिगत जनवरी 2023 में हिंदुस्तान स्टील एंप्लाइज सीटू एवं छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ के संयुक्त नेतृत्व में खदान के ठेका श्रमिकों ने माइंस भत्ता, नाइट शिफ्ट एलाउंस, और चिकित्सा सुविधा के लिए एकदिवसीय सफल हड़ताल की थी जिसमें खदान का पूरा उत्पादन लगभग ठप हो गया था । इसी हड़ताल के दौरान यूनियन और प्रबंधन के मध्य हुए समझौते में ठेका श्रमिकों को माइंस भत्ता, नाइट शिफ्ट एलाउंस के साथ ही चिकित्सा सुविधा का लाभ दिए जाने पर सहमति बनी थी। माइंस अलाउंस ₹100 प्रतिदिन एवं नाइट शिफ्ट एलाउंस ₹90 प्रतिदिन दिए जाने की कार्रवाई तो अगस्त 2023 में पूर्ण कर ली गई थी। लेकिन चिकित्सा सुविधा दिए जाने के मामले में प्रबंधन के ढीले रवैया से नाखुश खदान ठेका श्रमिकों ने पुनः जुलाई 2023 में एक सफल हड़ताल की, इसके बाद से इस दिशा में प्रबंधन द्वारा 6 माह तक कार्य करते हुए चिकित्सा सुविधा देने की प्रक्रिया तय की गई,। इस बीच प्रबंधन और यूनियन के मध्य इस सुविधा को देने में आने वाली तमाम परेशानियों पर कई बार बैठकर चर्चा की गई तथा संभावित परेशानियों का निराकरण करते हुए यह तय किया गया की खदान के ठेका श्रमिकों को उनके ठेकेदार के माध्यम से दल्ली राजहरा के शहीद अस्पताल एवं ज्योति अस्पताल में परिवार सहित बाह्य रोगी चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाएगी, जिसका पूरा खर्च प्रबंधन द्वारा वहन किया जाएगा । प्रक्रिया तय होने के बाद 22 फरवरी 2024 को मुख्य महाप्रबंधक खदान के कांफ्रेंस हॉल में सभी यूनियनों एवं ठेकेदारों की उपस्थिति में प्रबंधन ने खदान ठेका श्रमिकों को परिवार सहित चिकित्सा सुविधा प्रदान किए जाने का ऐलान किया । तथा साथ ही कुछ ठेका श्रमिकों को मेडिकल ओपीडी बुक प्रदान कर इस सुविधा का शुभारंभ किया गया । इस अवसर पर मुख्य महाप्रबंधक खदान आर बी गहरवार, सहायक महाप्रबंधक कार्मिक एम डी रेड्डी, यूनियन प्रतिनिधि पुरुषोत्तम सीमैया, प्रकाश सिह छत्रीय, राजेंद्र बेहरा, सोमनाथ उइके, राजाराम बरगढ, रामचरण नेताम ,लखन लाल चौधरी, अनिल यादव, तिलक राम मानकर, मुस्ताक अहमद, अभय सिंह एवं शहीद अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ शैवाल जाना, ज्योति हॉस्पिटल के इंचार्ज.डॉक्टर अशोक कुमार ठाकुर उपस्थित थे l

खदान ठेका श्रमिकों के ऐतिहासिक संघर्ष पर मिली इस चिकित्सा सुविधा के लिए ठेका श्रमिकों ने हिंदुस्तान स्टील एंप्लाइज यूनियन सीटू, छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ सहित तमाम सहयोग करने वाले संगठनों एवं प्रबंधन को धन्यवाद ज्ञापित किया।

जबसे बनी है डबल इंजन की सरकार, छत्तीसगढ़ में मचा हाहाकार: दीपक बैज

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  • फेल हो गई है प्रधानमंत्री मोदी की हर गारंटी : बैज

जगदलपुर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष व बस्तर के सांसद दीपक बैज ने संभाग मुख्यालय जगदलपुर के जिला कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन में प्रेसवार्ता कर केंद्र की मोदी व छत्तीसगढ़ की साय सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार देश में बढ़ रही मंहगाई पर नियंत्रण करने में पूरी तरह फेल हो चुकी है। 100 दिन में महंगाई कम करने का झांसा देकर जनता के प्रति जवाबदेही से मोदी सरकार ने मुंह मोड़ लिया है। भुखमरी के इंडेक्स पर भारत लगातार नीचे जा रहा है।

दीपक बैज ने कहा कि देश में बेरोजगारी चरम सीमा पर है। 45 करोड़ युवा वर्ग केंद्र सरकार की गलत आर्थिक नीतियों के चलते नौकरी की तलाश ही बंद कर चुके हैं बेरोजगारी ऐतिहासिक रूप से शिखर पर है। मोदी सरकार की गलत नीतियों के कारण देश की अर्थव्यवस्था गर्त में जा चुकी है। जीडीपी लगातार गिर रहा है। देश पर कर्जभार तीन गुना बढ़ गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 2014 की तुलना में 20 परसेंट कम होने के बावजूद डीजल पेट्रोल के दाम बढ़ रहे हैं। मोदी सरकार का ध्यान सिर्फ पूंजीपतियों को मुनाफा देने पर केंद्रित है। पीसीसी चीफ दीपक बैज ने कहा कि मोदी सरकार किसानों को एमएसपी नही दे रही है। उल्टे अपने हक के लिए आंदोलनरत किसानों को कील की दीवार खड़ी कर उन्हें रोक रही है और उन पर आंसू गैस के गोले छोड़े जा रहे हैं। 100 स्मार्ट सिटी बनाने का दम भरने सरकार अभी तक आवासहीनों को चिन्हाकित नही कर पाई है। मोदी सरकार कांग्रेस पार्टी के बैंक खातों को फ्रीज कर लोकतंत्र की हत्या कर रही है। इसका कांग्रेस पार्टी पुरजोर विरोध करती है।

महतारी वंदन में छल क्यों?

दीपक बैज ने कहा कि प्रदेश की साय सरकार ने महतारी वंदन योजना में सबको बराबर लाभ देने की बात कही थी। वह भी सिर्फ चुनावी जुमला निकला। प्रदेश की महिलाओं से साय सरकार ने धोखा किया है। जब योजना का लाभ सभी को मिलना था तो चुनाव पश्चात इस योजना में विभिन्न नियम व शर्ते क्यों लागू की गईं? दीपक बैज ने कहा कि मोदी व प्रदेश की साय सरकार आरक्षण पर मुहर लगाए और इसका लाभ सभी को मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि नगरनार स्टील प्लांट का निजीकरण न होने देने की बात कहना सिर्फ चुनावी जुमला था। केंद्र सरकार जल्द ही इसका निजीकरण करने वाली है। यदि नहीं तो सरकार स्पष्ट जवाब दे। दीपक बैज ने कहा कि बस्तर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में बीजेपी की सरकार आते ही शांति का माहौल भंग हो चुका है। महिलाओं, बहनों पर अत्याचार की घटना बढ़ रही है। बीजेपी राज आते ही शांत छत्तीसगढ़ अब अशांति की ओर बढ़ रहा है।

साधराम मामले पर चुप्पी क्यों

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने आगे कहा कि बिरनपुर मामले पर साय सरकार जब सीबीआई जांच करवा रही है, तो साधराम यादव की हत्या की क्यों नहीं करवाती ? सिर्फ राजनीतिक फायदे देखने? उन्होंने कहा कि सरकार को साधराम यादव की हत्या की भी सीबीआई जांच अवश्य करवानी चाहिए। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की बैगा जनजाति के तीन व्यक्तियों की नृशंस हत्या पर भी पर्दा डालने का कार्य यह प्रदेश सरकार कर रही है। सिलेंडर फटने के नाम पर हुई मौत का हवाला देकर शासन प्रशासन इस हत्या को दबाने का प्रयास कर रहे हैं। क्या छत्तीसगढ़ के आदिवासी मुख्यमंत्री होने के नाते इस नृशंस हत्या की जांच करवाएंगे? प्रेसवार्ता में शहर जिलाध्यक्ष सुशील मौर्य, ग्रामीण जिलाध्यक्ष बलराम मौर्य,पूर्व विधायक रेखचंद जैन, महापौर सफीरा साहू, सभापति कविता साहू, हनुमान द्विवेदी, अंगद प्रसाद त्रिपाठी, भुवन झा आदि भी मौजूद रहे।

प्रशासन की पहल पर अब जन सहभागिता से हर हफ्ते होगा न्योता भोजन

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  • कलेक्टर और सीईओ ने भी ग्रहण किया न्योता भोजन
    जगदलपुर नगर के टाउन हाल में विद्यार्थियों के लिए शुक्रवार को न्योता भोजन का आयोजन किया गया। कलेक्टर विजय दयाराम के. जिला पंचायत सीईओ प्रकाश सर्वे, जिला शिक्षा अधिकारी भारती प्रधान, अन्य वरिष्ठ अधिकारियों पत्रकारों तथा समाज के प्रबुद्धजनों ने भी न्योता भोजन में भोजन ग्रहण किया।
    इस अवसर पर कलेक्टर विजय दयाराम के. कहा कि न्योता भोजन की अवधारणा सामुदायिक भागीदारी पर आधारित है। मुख्यमंत्री की पहल पर समाज, वरिष्ठ नागरिक या सामान्य जनों द्वारा स्कूली बच्चों के साथ भोजन करने का कार्यक्रम शुरू किया गया है। यह विभिन्न त्यौहारों या अवसरों जैसे वर्षगांठ, जन्मदिन, विवाह और राष्ट्रीय पर्व आदि पर बड़ी संख्या में लोगों को भोजन प्रदान करने की भारतीय परम्परा पर आधारित है। समुदाय के सदस्य ऐसे अवसरों, त्यौहारों पर अतिरिक्त खाद्य पदार्थ या पूर्ण भोजन के रूप में बच्चों को पौष्टिक और स्वादिष्ट भोजन प्रदान कर सकते हैं। यह पूरी तरह स्वैच्छिक है और समुदाय के लोग अथवा कोई भी सामाजिक संगठन या तो पूर्ण भोजन का योगदान कर सकते हैं या अतिरिक्त पूरक पोषण के रूप में खाद्य सामग्री का योगदान कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि पौष्टिक आहार हर व्यक्ति को नसीब नहीं होता है इसलिए अन्न का महत्व समझते हुए अनाज को व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा इस प्रकार का आयोजन समाजों और वरिष्ठ नागरिकों की सहभागिता से प्रत्येक सप्ताह करने का प्रयास किया जाएगा। शुक्रवार को कलेक्टर विजय दयाराम के. एवं जिला पंचायत सीईओ प्रकाश सर्वे ने स्कूली बच्चों को भोजन परोस कर कर स्वयं समाज के लोगों और पत्रकारों के साथ न्योता भोजन किया। शहर के टाउन हॉल में न्योता भोजन प्रशासन के साथ- साथ मैत्री संघ और बौद्ध समाज के पदाधिकारियों के सहयोग से आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में समाजों के प्रतिनिधियों ने भी अपना वक्तव्य दिया। इस अवसर पर जिला शिक्षा अधिकारी भारती प्रधान, बीईओ एम. भारद्वाज सहित शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित थे। ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के स्कूलों में प्रधानमंत्री पोषण शक्ति योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों को दिए जाने वाले गर्म भोजन को सामुदायिक भागीदारी की बदौलत और अधिक पोषक बनाने की अभिनव पहल की गई है। शाला अवधि में विद्यार्थियों को भोजन प्रदाय करने के लिए संचालित प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना गाईड लाईन में सामुदायिक आधार पर तिथि भोजन के प्रावधान के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य में इसे ‘न्योता भोजन’ के नाम से लागू करने का निर्णय लिया गया है। न्योता भोजन का उद्देश्य समुदाय के बीच अपनेपन की भावना का विकास, भोजन के पोषक मूल्य में वृद्धि तथा सभी समुदाय वर्ग के बच्चों में समानता की भावना विकसित करना है। न्योता भोजन की अवधारणा सामुदायिक भागीदारी पर आधारित है। यह पूरी तरह से स्वैच्छिक है और समुदाय के लोग अथवा कोई भी सामाजिक संगठन स्कूलों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को पूर्ण भोजन का योगदान कर सकते हैं अथवा अतिरिक्त पूरक पोषण के रूप में खाद्य सामग्री का योगदान कर सकेंगे। न्योता भोजन, स्कूल में दिए जाने वाले भोजन का विकल्प नहीं होगा, बल्कि यह विद्यार्थियों को दिए जा रहे भोजन का पूरक होगा।

शिक्षक के फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में कमिश्नर -कलेक्टर आए एक्शन मोड में

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  • प्रभारी प्राचार्य के. रामा यशवंत पर होगी कार्रवाई
  • फर्जी जाति प्रमाण पत्र से नौकरी पाने पाने का आरोप
    -अर्जुन झा-
    जगदलपुर बस्तर संभाग के सुकमा जिले के एर्राबोर हायर सेकंडरी स्कूल के प्रभारी प्राचार्य के जाति प्रमाण पत्र का मामला अब बस्तर संभाग के कमिश्नर तक पहुंच गया है। इसे लेकर कमिश्नर और सुकमा के कलेक्टर अब एक्शन मोड में आ गए हैं। कमिश्नर कार्यालय से प्राप्त निर्देश के तहत कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी सुकमा को निर्देश दिया है कि प्रकरण की जांच कर एक हफ्ते में रिपोर्ट पेश करें।
    आरोप है कि के. रामा यशवंत ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाकर उसके जरिए शिक्षा विभाग में नौकरी पा ली है। वे पहले शिक्षक थे और प्रमोशन पाते हुए प्रभारी प्राचार्य के पद तक पहुंच गए हैं। वर्तमान में वे सुकमा जिले के कोंटा विकासखंड अंतर्गत शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला एर्राबोर में प्रभारी प्राचार्य के पद पर कार्यरत हैं। बीजापुर जिले के निवासी के. रामा यशवंत के जाति प्रमाण पत्र का मामला जिला स्तरीय जाति प्रमाण पत्र छानबीन समिति के समक्ष भी विचाराधीन है। जिला स्तरीय छानबीन समिति के. रामा यशवंत को उनकी वंशावलि, पटवारी मिसल रिकॉर्ड, कोटवार रजिस्टर पंजीयन आदि की प्रतियों के साथ उपस्थित होने के लिए कई बार नोटिस जारी कर चुकी है। उक्त शिक्षक कभी मेडिकल अनफिट, तो कभी जरूरी कार्य का बहाना बनाकर समिति के समक्ष उपस्थित होने से बचते आ रहे हैं। जिस दौरान के. रामा यशवंत ने खुद को मेडिकल अनफिट बताकर समिति के समक्ष उपस्थित होने में असमर्थता जताई थी, उस समय वे अपनी शाला में ड्यूटी करते देखे गए थे। उनकी बहानेबाजी को देखते हुए लगता है कि दाल में कुछ तो काला है।

अब कौन बचाएगा…?
ताजा मामला इस प्रकार है कि कोंटा नगर पंचायत के वार्ड क्रमांक 4 निवासी नागेंद्र ओलेम ने बस्तर संभाग आयुक्त कार्यालय में शिकायती आवेदन प्रस्तुत कर के. रामा यशवंत को फर्जी जाति प्रमाण पत्र के मामले में पद से बर्खास्त कर उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराने की मांग की है। इस पर संज्ञान लेते हुए संभाग आयुक्त के निर्देश पर उप आयुक्त ने सुकमा के कलेक्टर को पत्र जारी कर जांच के लिए कहा है। कलेक्टर ने सुकमा के जिला शिक्षा अधिकारी को आदेशित किया है कि मामले की विस्तृत जांच कर प्रतिवेदन कलेक्टर कार्यालय में प्रस्तुत करें। वहीं पता चला है कि के. रामा यशवंत को पिछले कई साल से कथित फर्जीवाड़ा करने के बाद भी जिला शिक्षा अधिकारी सुकमा और पूर्व मंत्री के कुछ सिपहसालार लेनदेन के चलते बचाते आ रहे हैं। अब मामले पर संभाग आयुक्त और कलेक्टर के के एक्शन मोड में आ जाने से शिक्षक का बचना असंभव हो गया है।

अवैध रूप से शराब तस्करी करने वाले 3 कोचिया गिरफ्तार

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  • अवैध शराब बेचने वाले 01 कोचिया गिरफ्तार, कब्जे से एक मोटर सायकल, 5 लीटर से अधिक शराब जप्त एवं सार्वजनिक स्थल पर शराब सेवन करने वाले 03 व्यक्ति गिरफ्तार

दल्लीराजहरा  पुलिस अधीक्षक एस.आर. भगत एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक  सुषील कुमार नायक के निर्देषन में जिले में अवैध व्यवसाय जुआ, सट्टा अवैध शराब के विरूद्ध चलाये जा रहे अभियान के तहत उप पुलिस अधीक्षक (मुख्या) बालोद सुश्री नवनीत कौर के मार्ग दर्शन मे थाना डौण्डीलोहारा पुलिस द्वारा आज दिनांक 22.02.24 को प्राप्त मुखबीर सूचना की तस्दीक करते हुए आरोपी (1) सुखित राम गायकवाड पिता गांधी राम उम्र 35 वर्ष, साकिन दुबचेरा थाना डौण्डीलोहारा जिला बालोद के कब्जे से अवैध रूप से 18 पौवा देषी प्लेन शराब, 06 नग अध्धी देषी प्लेन शराब जुमला 5.490 लीटर किमती 2400 रूपये, शराब बिक्री रकम 600 रूपये एवं शराब परिवहन करने में उपयोग किये उक्त मो.सा. क्र. सीजी 07 आई क्यू 6921 कीमती 6,000/रू. जप्त कर आरोपी के विरूद्ध अप. क्र. 43/24 धारा 34(2) आब. एक्ट के तहत कार्यवाही करते हुए आरोपियो को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमाण्ड पर माननीय न्यायालय पेष किया गया है। एवं इसी प्रकार डौण्डीलोहारा में आम जगह बैठ कर शराब पीने की षिकायत पर कार्यवाही करते हुए आरोपी (1) धन सिंह कोलियारे पिता हिरामन सिंह उम्र 55 वर्ष साकिन रेंघई थाना बालोद (2) मनेश कुमार पिता चैनूराम करैत उम्र 32 वर्ष साकिन टटेंगा थाना देवरी (3) यषवंत कुमार उर्वषा पिता सुखुराम उर्वषा उम्र 35 वर्ष, साकिन कोरगुडा षिकारीपारा थाना बालोद जिला बालोद (छ.ग.) के विरूध्द अप.क्र. 41/24, 42/24, 44/24 धारा 36(च)1 आब.एक्ट के तहत कार्यवाही करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। थाना डौण्डी लोहारा क्षेत्र में अवैध शराब, जुआ, सट्टा में संलिप्त व्यक्तियो के विरूद्ध निरंतर कार्यवाही जारी है।

कर्मचारियों व अधिकारियों की लंबित मांगों के समाधान के लिए मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

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  •  अधिकारी- कर्मचारी फेडरेशन ने खोला मोर्चा
    जगदलपुर छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के प्रांतीय आव्हान पर प्रदेश के कर्मचारियों व अधिकारियों की लंबित मांगों के समाधान के लिए 23 फरवरी को भोजन अवकाश के दौरान बस्तर विकास खंड के अधिकारी कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री एव
    एवं मुख्य सचिव के नाम एसडीएम कार्यालय में ज्ञापन सौंपा।
    बीते 11 फरवरी को कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के साथ हुई बैठक में शासन के उपेक्षा पूर्ण रवैये के विरोध एवं मांगों के समाधान हेतु शासन का ध्यान आकृष्ट कराने के लिए यह ज्ञापन अनुविभागीय अधिकारी राजस्व एवं तहसीलदार की अनुपस्थिति में रीडर घनश्याम जैन को सौंपा गया। ज्ञापन में कर्मचारियों के लिए मोदी की गारंटी अनुसार केंद्र के समान चार प्रतिशत महंगाई भत्ता देय तिथि देने, प्रदेश के कर्मचारियों के लिए मोदी की गारंटी अनुसार जुलाई 2019 से समय- समय पर देय महंगाई भत्ते की लंबित एरियर्स राशि का समायोजन जीपीएफ खाते में करने, वेतन विसंगति एवं अन्य मुद्दों के लिए गठित पिंगुआ कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक करने, सातवें वेतनमान की एरियर्स की अंतिम किस्त का भुगतान जल्द करने की मांग की गई है। ज्ञापन सौंपने के दौरान फेडरेशन के ब्लॉक संयोजक प्रदीप मिस्त्री , कैलाश जैन, शैलेंद्र तिवारी, योगेश हरदाहे, लेखराज बघेल, चैतेंद्र पाणिग्रही, अनिता कश्यप, माधुरी मोरला, सर्वानी साहू, नरेंद्र ठाकुर, महेश कश्यप, लिखेश जोशी, नोहर सिंह देहारी, सुखराम, अमित कुंडू आदि कर्मचारी उपस्थित थे।

सुकरी बाई का निधन

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बकावंड प्रदेश भाजपा कार्यकारिणी सदस्य बनवासी मौर्य की सासु मां सुकरी बाई का 82 वर्ष की आयु में गुरुवार की रात्रि 11 बजे निधन हो गया। वे अस्वस्थ चल रही थीं और हॉस्पिटल में उनका इलाज चल रहा था। सुकरी बाई ने अपने गृहग्रान धनपूंजी में अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार 23 फरवरी को गृहग्राम धनपूंजी में किया गया।

बस्तर संभाग में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बहुत कुछ करने की है दरकार

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  • चित्रकोट, तीरथगढ़ में सस्ते कॉटेज बनाने की जरूरत
  •  ग्रामीणों द्वारा संचालित होम स्टे पड़ रहे हैं भारी
  • पर्यटन मंडल के कॉटेज हैं महंगे, नहीं रुक पाते पर्यटक
    -अर्जुन झा-
    जगदलपुर बस्तर संभाग के पर्यटन स्थल बाहर से आने वाले सैलानियों को भारी पड़ रहे हैं। पर्यटन स्थलों में रुकने खाने की सुविधाen बड़ी महंगी हैं। आम पर्यटक यहां कुछ दिन बिताने का साहस नहीं जुटा पाते। लिहाजा पर्यटकों को बस्तर की ओर आकर्षित करने के लिए अभी शासन स्तर पर बहुत कुछ करने की दरकार है।
    बस्तर संभाग में पर्यटन और धार्मिक आस्था के लिहाज से अपार संभावनाएं हैं। यहां चित्रकोट वाटर फॉल, तीरथगढ़ वाटर फॉल, दंतेश्वरी मंदिर दंतेवाड़ा, केशकाल घाटी, कोरली का इंद्रावती व्यू पॉइंट, विशाल गणेश प्रतिमा, सुकमा जिले का रामा राम मंदिर जैसे दर्जनों दर्शनीय स्थल हैं। इन स्थलों पर आम पर्यटकों के ठहरने के लिए सुविधापूर्ण और सस्ती आरामगाह नहीं है। चित्रकोट, तीरथगढ़ में पर्यटन मंडल के कॉटेज तथा स्थानीय ग्रामीणों द्वारा संचालित होम स्टे हैं, मगर ये इतने महंगे हैं कि आम सैलानी यहां ठहर ही नहीं सकते। कॉटेज और निजी होम स्टे का किराया बहुत ज्यादा है और वहां भोजन भी महंगा है। ऐसे में जिला पंचायत के माध्यम से हर दर्शनीय स्थल पर सुविधापूर्ण और सस्ते कॉटेज बनाए जाने की जरूरत है, ताकि इन स्थानों पर ज्यादा से ज्यादा पर्यटक आ सकें।

सस्ते सुलभ इंतजाम जरुरी
बस्तर में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए आम सैलानियों को सुविधा उपलब्ध कराना पहली आवश्यकता है। बस्तर के पर्यटन स्थलों में पर्यटकों के ठहरने और भोजन के लिए सस्ती और सुलभ व्यवस्था नहीं है। जो निजी व्यवस्थाएं हैं, वे काफी महंगी हैं। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के कॉटेज और ग्रामीणों द्वारा संचालित होम स्टे का किराया बहुत ज्यादा है। भारी भरकम किराया वहन कर पाना मिडिल क्लास और लोवर मिडिल क्लास के बूते की बात नहीं है। इस संदर्भ में जिला प्रशासन को सुझाव दिया गया है कि हर दर्शनीय स्थल पर कम से कम 10 -15 कमरों वाला विश्राम स्थल बनवाया जाए। वहां पार्किंग व्यवस्था भी हो। इन विश्राम स्थलों में सोलर एनर्जी का उपयोग कर बिजली की व्यवस्था की जा सकती है। सोलर एनर्जी से मोटर पंप चलाकर वहां जलापूर्ति भी की जा सकती है। ऐसा करके इन विश्राम स्थलों पर अतिरिक्त खर्च से बचा जा सकता है। सस्ता विश्राम बनाने से जहां आम लोगों को राहत मिलेगी, वहीं बस्तर के पर्यटन स्थलों तक ज्यादा से ज्यादा सैलानी पहुंच रात्रि विश्राम भी कर पाएंगे। बस्तर का पारंपरिक बाजार और व्यंजनों का कारोबार बढ़ेगा। परिवहन सुविधा का विस्तार होगा। स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा तथा क्षेत्र विशेष की पारंपरिक वस्तुओं काष्ठ शिल्प, टेराकोटा शिल्प, बांस शिल्प की वस्तुओं की बिक्री भी बढ़ेगी। इन विश्रामस्थली का संचालन का दायित्व महिला स्व सहायता समूहों को दिया जा सकता है। इससे ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकेंगी।

युवाओं को मिलेगा रोजगार
सस्ते और सुलभ विश्रामस्थल बनने से बाहरी पर्यटक यहां ज्यादा दिन ठहर पाएंगे और बस्तर के ज्यादा से ज्यादा दर्शनीय स्थलों का आनंद उठा पाएंगे। युवकों को गाइड का काम मिलेगा। यहां के नए पर्यटन स्थलों की पूछ परख बढ़ेगी। जैसा ढोलकल के बाद अब लोग कोरली और तिरिया पहुंचने लगे हैं। नागरिकों का सुझाव है कि इस दिशा में जिला पंचायत को काम करना चाहिए।

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