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रिकॉर्ड मतों से जीतकर 22 वर्षीय किरण बनीं दुबे उमरगांव की सरपंच

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  • किरण ने जीत में तोड़ा अपने चाचा का रिकॉर्ड
  •  किरण को 378 मतों से मिली ऐतिहासिक जीत

जगदलपुर राजनीति में युवाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। इसका ताजा उदाहरण ग्राम पंचायत दुबे उमरगांव में देखने को मिला। यहां 22 वर्षीय कुमारी किरण मौर्य ने सरपंच पद पर जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया है। उन्होंने 378 मतों के बड़े अंतर से विजय हासिल की है।

वहीं पिछले सरपंच चुनाव में किरण के चाचा राम्या राम मौर्य ने 321 वोट से जीत दर्ज की थी। अपने चाचा रिकार्ड तोड़ते हुए किरण ने त्रिकोणीय

मुकाबले में बड़ी जीत दर्ज कराई है। किरण के सरपंच चुने जाने से पूरे गांव में खुशी का माहौल है। किरण मौर्य पूर्व सरपंच एवं सरपंच संघ अध्यक्ष राम्या राम मौर्य की भतीजी हैं। इससे पहले राम्या राम मौर्य इसी ग्राम पंचायत के सरपंच रह चुके हैं। अब उसी परिवार से किरण मौर्य ने यह उपलब्धि हासिल की है। यह पहली बार है कि एक ही परिवार से लगातार दूसरी बार सरपंच चुना गया है।

सबसे कम उम्र वाली सरपंच

किरण मौर्य न केवल अपने गांव की, बल्कि पूरे ब्लॉक की सबसे युवा सरपंच बनी हैं। 22 वर्ष की उम्र में इस उपलब्धि को प्राप्त करना राजनीति में युवाओं की बढ़ती रुचि और नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है। किरण मौर्य की जीत के बाद पूरे गांव में जश्न का माहौल है। उनके परिवार और समर्थकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। ग्रामवासियों ने उन्हें बधाई दी और उनके नेतृत्व में गांव के विकास की उम्मीद जताई। यह जीत साबित करती है कि अगर युवा राजनीति में सक्रिय हों और सही नेतृत्व दें, तो वे बदलाव लाने में सक्षम हो सकते हैं।

बनवासी मौर्य और उनकी पत्नी संतोषी ने रच दिया इतिहास

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  • पति जिला पंचायत सदस्य, तो पत्नी सरपंच निर्वाचित

बकावंड भाजपा द्वारा की गई उपेक्षा से दुखी होकर निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले वरिष्ठ भाजपा नेता बनवासी मौर्य के साथ उनकी धर्मपत्नी संतोषी मौर्य ने भी जीत का इतिहास रच दिया है। बनवासी मौर्य जिला पंचायत सदस्य चुने गए हैं, तो उनकी पत्नी सरपंच निर्वाचित हुई हैं। इस जीत ने क्षेत्र में मौर्य दंपत्ति की ने बकावंड ब्लॉक में गहरी पकड़ का सबूत दे दिया है।

बकावंड विकासखंड में जिला जिला पंचायत बस्तर के निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक -9 से निर्दलीय चुनाव लड़कर बनवासी मौर्य भारी अंतर से विजयी हुए हैं। वहीं उनकी पत्नी संतोषी मौर्य बनियागांव ग्राम पंचायत की सरपंच निर्वाचित हुई हैं। मौर्य दंपत्ति ने क्षेत्र की जनता को हार्दिक धन्यवाद देते हुए उनका आभार माना है। बनवासी मौर्य और संतोषी मौर्य ने कहा है कि वे ग्रामीणों की सेवा, हर समस्या के निराकरण और उनके हर काम के लिए हमेशा ततपरता के साथ खड़े रहेंगे। उल्लेखनीय है कि क्षेत्र में मजबूत पकड़ रखने और पार्टी के प्रति सदैव निष्ठावान रहने वाले लोकप्रिय जननेता बनवासी मौर्य की उपेक्षा करते हुए भाजपा ने क्षेत्र क्रमांक-9 से कमजोर प्रत्याशी को मैदान पर उतार दिया था। इससे व्यथित होकर बनवासी मौर्य निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनावी समर में कूद गए थे। क्षेत्र के मतदाताओं में उनके फैसले पर मुहर भी लगा दी है। अब भी समय है कि भाजपा बनवासी मौर्य को अपने बहुमत वाली बस्तर जिला पंचायत में बड़ी जिम्मेदारी देकर अपनी भूल सुधार सकती है।

मतगणना में गड़बड़ी का आरोप, जनपद कार्यालय में हंगामा

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  • गुस्साए प्रत्याशी और ग्रामीण पहुंचे दफ्तर में

जगदलपुर बस्तर जिले के बास्तानार ब्लॉक में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में गड़बड़ी की शिकायत लेकर प्रत्याशी व ग्रामीण किलेपाल जनपद पंचायत निर्वाचन अधिकारी के पास पहुंचे किलेपाल नंबर दो ओर बड़े बोदेनार के प्रत्याशियों और ग्रामीणों का आरोप है कि मतगणना में गड़बड़ी हुई है। मतगणना पत्र पर कुछ और लिख दिया गया है। मतगणना सूची भी पीठासीन अधिकारियों द्वारा उपलब्ध नहीं कराई गई।किलेपाल नंबर दो और बोदेनार के प्रत्याशियों ने आज निर्वाचन अधिकारी को रिकाउंटिंग और हर मत पत्र को चेक करने के लिए आवेदन दिया। निर्वाचन अधिकारी ने पंचायत राज अधिनियम का हवाला देते हुई कहा कि यह जानकारी मैं नहीं दे सकता न ही पुनः गणना करवा सकता हूं।आप लोगों को शिकायत कल ही करना था। इस पर प्रत्याशी भड़क उठे। उनका कहना था कि प्रत्याशी के लिए कैसे आवेदन करना है किस दिन आवेदन करना है मतगणना पुनः मतगणना कैसे करना है इसकी जानकारी हम लोगों को पहले से प्रशिक्षण के माध्यम से देना चाहिए। यहां कम शिक्षित लोग हैं हम लोगों को यह जानकारी है ही नहीं कि तुरंत इसका आवेदन करना चाहिए अन्यथा हम लोग उसी समय इसकी शिकायत करते जब पोलिंग बूथ में मतगणना हो रही थी। देर रात तक मतगणना चलती रही और वहां बिजली की भी व्यवस्था नहीं थी। पीठासीन अधिकारी और और अन्य मतदान कर्मी जल्दबाजी में चले गए। किलेपाल-1 से पंच चुनाव में गड़बड़ी ओर बड़े बोदेनार ओर किलेपाल नम्बर 2 से सरपंच पद की मतगणना में गड़बड़ी की शिकायत की गई और पुनः मतगणना कराने के लिए आवेदन दिया गया है।

बोदेनार प्रत्याशी महरु राम ने आरोप लगाया कि वहां पर बोमड़ा नामक व्यक्ति जिसका मतदाता सूची में नाम ही नहीं है उससे विपक्ष के एजेंट ने फर्जी वोट दिलवाया है।

वर्सन

एसडीएम से करें शिकायत

जो भी शिकायत है वह एसडीएम से कर सकते हैं। उनके दिशा निर्देश पर ही पुनः मतगणना की जा सकती है।

अंकुर रात्रे,

निर्वाचन अधिकारी बास्तानार

बस्तर में शहर से लेकर गांव तक खिला कमल

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  • जिला पंचायत की कुर्सी पर भाजपा का कब्जा बरकरार, मगर कौन होगा अध्यक्ष ?
  • जनपद पंचायतों में कब्जा जमाने भाजपा कांग्रेस ने शुरू की जोड़तोड़
  • अधिकांश जनपदों में भाजपा का पलड़ा भारी 

अर्जुन झा

जगदलपुर बस्तर जिला पंचायत में भाजपा का कब्जा बरकरार है। भाजपा समर्थित 12 सदस्य चुनाव जीतकर आए हैं। इस तरह भाजपा ने जिला पंचायत में अपना दबदबा बरकरार रखा है। वहीं जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी किसे सौंपी जाएगी, इसे लेकर फिलहाल सस्पेंश बना हुआ है।

संगठन के सूत्रों की मानें तो वेदवती कश्यप अध्यक्ष की दौड़ में सबसे आगे हैं। उनका अध्यक्ष बनना लगभग तय माना जा रहा है। वहीं भाजपा के दो सीनियर नेताओं बनवासी मौर्य और सारिता पाणिग्रही के नामों को लेकर भी चर्चा सरगर्म है। बनवासी मौर्य और सारिता पाणिग्रही शुरू से भाजपा के निष्ठावन कार्यकर्ता रहे हैं। उनकी जमीनी पकड़ गांवों में बेमिसाल है। इसके बावजूद भाजपा ने जिला पंचायत चुनाव में सारिता पाणिग्रही और बनवासी मौर्य को नजरअंदाज कर उनके क्षेत्रों में कमजोर प्रत्याशी उतार दिए। अपनी उपेक्षा से दुखी होकर बनवासी मौर्य एवं सारिता पाणिग्रही ने बागी होकर चुनाव लड़ा और दोनों जीत भी गए। इतनी बड़ी जीत के बाद भी उनकी आस्था भाजपा पर बनी हुई है। भाजपा संगठन चाहे तो भूल सुधार करते हुए इन दोनों में से किसी को जिला पंचायत अध्यक्ष बना सकती है। इसी तरह जिले की सात जनपद पंचायतों में से अधिकांश जनपद पंचायतों में भाजपा समर्थिंत सदस्य चुनकर आए हैं। जिन जनपद पंचायतों में संख्या बल कम है वहां भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां जनपद अध्यक्ष की कुर्सी पर कब्जा जमाने की जोड़ तोड़ में जुट गई हैं। दो चार दिनों में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी कि किस जनपद में किसकी ताजपोशी होती है। ज्ञातव्य हो कि कांग्रेस को जहां आपसी गुटबाजी में सत्ता से बाहर का रास्ता देखना पड़ा था और भाजपा सत्ता में आने के बाद से लगातार जीत की ओर अग्रसर हो रही है। निकाय चुनाव में जहां कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो चुका है तो वहीं पंचायत चुनाव में भी कांग्रेस को तगड़ा झटका लगा है। जिला पंचायत, जनपद एवं ग्राम पंचायतों में अधिकांश जगहों पर भाजपा की जीत से एक बार फिर गांव गांव में कमल खिल चुका है।

बनवासी, सारिता या वेदवती?

बस्तर जिला पंचायत के 15 सदस्यों में से भाजपा समर्थिंत 12 से अधिक सदस्यों ने जीत दर्ज कर जिला पंचायत में भाजपा का कब्जा बरकरार रखा है।भाजपा द्वारा अधिकृत 10 प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की है तो वहीं दो ऐसे सदस्य हैं जो पार्टी से बगावत कर चुनाव जीत गए हैं। जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक 8 से सरिता जितेंद्र पाणिग्रही और क्षेत्र क्रमांक 9 से बनवासी मौर्य हैं तो कट्टर भाजपा समर्थक लेकिन उन्होंने स्वतंत्र चुनाव लड़ा था। सारिता पाणिग्रही और बनवासी मौर्य ने भाजपा समर्थिंत प्रत्याशियों को पराजित कर जीत दर्ज की है। इन्होंने पार्टी के समक्ष क्षेत्र में अपनी पकड़ होने का बड़ा सबूत दे दिया है। भाजपा संगठन भी दो निर्दलीय प्रत्याशी को जीत के बाद भाजपा अपनी जीत बता रही है। इस लिहाज से अध्यक्ष पद के लिए सारिता पाणिग्रही और बनवासी मौर्य की दावेदारी तो बनती है। जिला पंचायत में कांग्रेस को मात्र दो सीटों पर जीत दर्ज कर संतुष्ट होना पड़ा है। इस हिसाब से कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी से कोसो दूर है। फिलहाल अध्यक्ष की दौड़ में वेदवती कश्यप, बनवासी मौर्य और सारिता पाणिग्रही के नामों की चर्चा है।

जनपद पंचायतों में जोड़तोड़

बस्तर जिले की 7 जनपद पंचायतों में अधिकांश में भाजपा प्रत्याशियों की जीत से भाजपा को अध्यक्ष की कुर्सी के लिए ज्यादा मशक्कत नहीं करनी होगी। सिफ नामों को लेकर विचार मंथन कर सक्रियता के आधार पर नाम की घोषणा करनी होगी। जगदलपुर जनपद में जहां भाजपा की पूर्ण बहुमत हैं तो वहीं बस्तर के 24 में से 15 भाजपा समर्थिंत प्रत्याशी जीत कर आए हैं। यहां कांग्रेस को 9 सीटें ही मिल पाई हैं। लोहंडीगुड़ा में भाजपा की बहुमत है। जिन स्थानों पर आंकड़ा बहुमत के करीब नहीं है, वहां भाजपा अध्यक्ष की कुर्सी की जोड़तोड़ में जुट गई है तो वहीं कांग्रेस के नेता निराश हो चुके हैं।

बागी सारिता पाणिग्रही और बनवासी मौर्य ने जीतकर दिखा दी अपनी ताकत

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  • भारतीय जनता पार्टी के बागी नेताओं का दिखा दम
  • भाजपा के फैसले पर खड़े होने लगे हैं अब सवाल 

बकावंड जिला पंचायत बस्तर के दो निर्वाचन क्षेत्रों से भाजपा के दो बड़े बागी नेताओं की जीत ने भाजपा के फैसले पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस चुनाव में निर्वाचित भाजपा नेत्री सारिता पाणिग्रही और बनवासी मौर्य की शानदार जमीनी पकड़ देखने को मिली है। ये दोनों निर्वाचित जिला पंचायत सदस्य लंबे समय से भाजपा से जुड़े हैं और आज भी उनके मन में भारतीय जनता पार्टी के प्रति उतनी ही आस्था है, जितनी पहले थी। इन दोनों नेताओं की बकावंड ब्लॉक में जमीनी पकड़ बेहद मजबूत है और इसी के दम पर वे चुनाव जीतकर आए हैं।

जिला पंचायत बस्तर के चुनाव के अंतिम चरण में क्षेत्र क्रमांक 8 से सरिता जितेंद्र पाणिग्रही ने बीजेपी समर्थित प्रत्याशि को बड़े अंतर से हरा दिया है। वहीं क्रमांक 9 से बनवासी मौर्य ने भी बीजेपी समर्थित प्रत्याशी को पराजित किया है। इन क्षेत्रों के लोगो का कहना है कि इन दोनों ने बागी होकर भी अपने अपने क्षेत्र में कमल खिला दिया है। जानकारों का कहना है कि किसी कारण या राजनीतिक विरोध के चलते इन्हें पार्टी के जिला संगठन के कुछ लोगो द्वारा दरकिनार किया गया था, अतः इन्हें बीजेपी का समर्थन नहीं मिला किंतु इन्होंने अपनी पकड़ बनाई है और अपनी जीत सुनिश्चित कर ली। सारिता पाणिग्रही, उनके पति जितेंद्र पाणिग्रही और बनवासी मौर्य बस्तर जिले में किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। ये भाजपा के कद्दावर नेताओं में गिने जाते हैं। जितेंद्र और सारिता पाणिग्रही तथा बनवासी मौर्य शुरू से भाजपा से जुड़े रहे हैं और हमेशा पार्टी के सिद्धांतों पर चलते हुए जनसेवा में अग्रणी रहे हैं। समाज के हर वर्ग के सुख दुख में ये तीनों नेता हमेशा सहभागी बनकर उनका कष्ट हरते रहे हैं। जनपद व जिला पंचायत और जिला प्रशासन के सहयोग से जन समस्याओं को दूर करने के लिए भी वे हमेशा तत्पर रहते रहे हैं। यही वजह है कि जनता के बीच उनकी लोकप्रियता आसमानी बुलंदियों तक पहुंच चुकी है। यही छवि और लोकप्रियता सारिता पाणिग्राही एवं बनवासी मौर्य की जीत के मुख्य कारक रहे हैं। सारिता और बनवासी की इस जीत ने भाजपा के प्रत्याशी चयन के फैसले पर सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर पार्टी ने किस मापदंड के तहत प्रत्याशी चुने थे। वैसे ये दोनों अभी भी पार्टी के प्रति निष्ठावान हैं, बशर्ते पार्टी नेतृत्व उनके सम्मान का ध्यान रखे।

दर्जनभर से अधिक लोगों ने थामा कांग्रेस का दामन

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  • शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य ने पहनाया कांग्रेसी गमछा

जगदलपुर आज संभाग मुख्यालय जगदलपुर के राजीव भवन में कांग्रेस की रीतिनीति व छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज की कार्यशैली से प्रभावित होकर बस्तर जिला कांग्रेस कमेटी शहर अध्यक्ष सुशील मौर्य के समक्ष दर्जनों लोगों ने कांग्रेस का दामन थामा। शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य ने कांग्रेसी गमछा पहनाकर विधिवत कांग्रेस प्रवेश कराया। कांग्रेस प्रवेश करने वालों में शोभा गंडोत्रा, गुरमीत कौर, कलसी, रजिंदर कौर, अनुशा दया, मुनमुन कश्यप, जिया ख़ान, रंजीता नायर, रेहाना बेगम, सुनीता हान, सोसन वृंदा गुंडे सहित अन्य लोगों ने कांग्रेस प्रवेश किया। इस अवसर पर महामंत्री ज़ाहिद हुसैन, सुषमा सुता, महिला कांग्रेस अध्यक्ष लता निषाद, कोषाध्यक्ष असीम सुता, उपाध्यक्ष नीला सुक्रिया, ललिता राव आदि मौजूद रहे।

 

प्रशासन और आबकारी विभाग ने दी शराब दुकानों में दबिश

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  •  झूठी निकली ओवर रेट में शराब बेचने की शिकायत

जगदलपुर बस्तर जिले की शराब दुकानों में ओवर रेट पर शराब बेची जाने की शिकायत गलत साबित हुई है।

ओवर रेट में शराब बेची जाने की शिकायत के बाद कलेक्टर हरिस एस. के निर्देश पर अपर कलेक्टर सीपी बघेल ने जिले की शराब दुकानों की गोपनीय ढंग से जांच की। जांच में सभी दुकानों में निर्धारित व प्रिंट रेट में ही शराब बेचे जाने की बात सामने आई। इसके अलावा सीसीटीवी फुटेज में भी शासन द्वारा निर्धारित मात्रा में ही विक्रय करना पाया गया।

जांच उपरांत टीम ने कलेक्टर को जांच रिपोर्ट सौप दी है। जानकारी के मुताबिक शहर व ग्रामीण क्षेत्रों के शराब दुकानों में ओवर रेट में शराब बेचे जाने की शिकायत लगातार मिल रही थी। शिकायत को देखते हुए कलेक्टर हरीश एस ने जांच के लिए अपर कलेक्टर सीपी बघेल के नेतृत्व में टीम बनाई थी। टीम द्वारा गोपनीय तरीके से जिले की शराब दुकानों में ग्राहकों को भेजकर शराब खरीदवाई गई। सभी दुकानों में प्रिंट रेट में ही शराब बेची जा रही थी। सोमवार को अपर कलेक्टर के निर्देश पर आबकारी विभाग और प्रशासन की संयुक्त टीम द्वारा शराब दुकानों की जांच की गई।

शराब दुकानों में निर्धारित दर से अधिक दर पर शराब विक्रय की पुष्टि नहीं हुई। शराब खरीदने गए ग्राहकों से अधिक दर लिए जाने के संबंध में पूछताछ करने पर ग्राहकों ने भी प्रिंट रेट पर ही मदिरा खरीदना बताया। टीम द्वारा दुकानों में जाकर अनियमितता के संबंध में जांच की गई जांच में सभी मदिरा दुकानों में विक्रय दर प्रदर्शित मिली। वहीं सभी दुकानों में टोलफ्री नंबर 14405 प्रदर्शित होना भी पाया गया। दुकान के समस्त कर्मचारी निर्धारित यूनीफार्म में पाए गए। टीम द्वारा संग्रहित मदिरा स्कन्ध में से रेंडम आधार पर बोतलों की जांच की गई जिसमें सभी बोतलों में सुरक्षा होलोग्राम स्टीकर, बैच नंबर तथा एमआरपी प्रदर्शित होना पाया गया। किसी भी प्रकार की अवैध मदिरा नहीं पाई गई और न ही किसी भी प्रकार की मिलावट के सबूत मिले। मंदिरा दुकानों में सीसीटीवी फुटेज जांच करने पर विक्रेताओ द्वारा शासन से निधारित मात्रा में मदिरा विक्रय कर विक्रय की गई मदिरा का बिल दिया जाना पाया गया।

जनपद पंचायत बस्तर के क्षेत्र क्रमांक- 22 से हेमराज बघेल की शानदार जीत

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  • कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने जमकर मनाया जश्न 

जगदलपुर जनपद पंचायत बस्तर के क्षेत्र क्रमांक 22 से हेमराज बघेल ने शानदार जीत दर्ज की है। उनकी जीत पर ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं ने जमकर जश्न मनाया।

जनपद पंचायत बस्तर के क्षेत्र क्रमांक 22 में ग्राम पंचायत आड़ावाल, भाटपाल, कोलचुर, परचनपाल और महुपाल बरई आती हैं। यहां से जनपद सदस्य पद पर हेमराज बघेल ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 560 मतों के अंतर से हराया। हेमराज बघेल को 2332, शामनाथ कश्यप को 1772, जगेश बघेल को 497, तुलाराम कश्यप को 252 मत प्राप्त हुए। हेमराज बघेल ने ग्राम पंचायत आड़ावाल से 766 मत, कोलचूर से 614 मत भाटपाल से 590 मत, महूपालबरई से 313 मत, परचनपाल से 49 मत प्राप्त किए हैं। चुनाव परिणामों के अनुसार हेमराज बघेल की मतदाताओं का व्यापक समर्थन मिला है। जिससे वे जनपद पंचायत के नए सदस्य बन गए। इस जीत के बाद उनके समर्थकों में उत्साह का माहौल है और गांवों में खुशी की लहर दौड़ गई है। हेमराज बघेल ने जीत के बाद कहा कि यह जीत जनता की जीत है, जिन्होंने मुझ पर भरोसा जताया। उन्होंने आगे कहा कि वे क्षेत्र के विकास और जनता की समस्याओं के समाधान के लिए पूरी निष्पक्षता से कार्य करेंगे। चुनाव परिणाम घोषित होते ही समर्थकों ने जमकर जश्न मनाया। ढोल- नगाड़ों के साथ विजय रैली निकाली गई और कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी जाहिर की। हेमराज बघेल ने बताया कि वे क्षेत्र में सड़क, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के लिए विशेष ध्यान देंगे। उन्होंने कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य ग्रामीण विकास को गति देना और जनता की समस्याओं का समाधान निकालना है।राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस जीत के पीछे हेमराज बघेल की जमीनी पकड़ और जनता के बीच उनकी लोकप्रियता महत्वपूर्ण रही। यह जीत जनपद पंचायत बस्तर की राजनीति में एक नया संदेश लेकर आई है।

दुकानदारों को ब्रिटानिया बिस्किट के खाली पैकेट्स थमा रहे हैं वितरक

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  •  ग्राहक को खाली पैकेट मिलने पर हुआ खुलासा 

जगदलपुर स्थानीय वितरक गांवों के दुकानदारों को ब्रिटानिया बिस्किट के खाली पैकेट्स वाले जंबो पैक थमा रहे हैं। कोड़ेनार स्थित एक दुकान में भी ऐसे ही बिना बिस्किट वाले पैकेट्स का जंबो खपा दिए गए है। जंबो पैक में बिस्किट के एक दर्जन पैकेट्स रहते हैं, जिनमें कई पैकेट्स देखने में तो भरे नजर आते हैं, जबकि खोलकर देखने पर उसमें एक भी बिस्किट नहीं रहता। ऐसा ही एक मामला ग्राम कोड़ेनार में सामने आया है। इसका खुलासा एक ग्राहक के बिस्किट खरीदने पर हुआ।

बिस्किट बनाने वाली नामी कंपनी ब्रिटानिया का मीठा बिस्कुट गुड डे आम और खास लोगों के बीच स्वाद एवं किफायती दर के कारण काफी लोकप्रिय है। अब इस बिस्किट की बढ़ती लोकप्रियता पर बट्टा लगाने का प्रयास स्थानीय वितरक कर रहे हैं। आज कोड़ेनार पुलिस थाना के पास स्थित एक दुकान में एक ग्राहक को बिस्कुट का खाली जंबो पैक ग्राहक के हाथ में दिया गया। हालांकि डिब्बा को देखते ही ग्राहक और दुकानदार माजरा समझ गए, मगर ऐसे ही जंबो पैक से खाली पैकेट्स निकलना, निश्चित रूप से इस प्रसिद्ध कंपनी की साख पर बट्टा लगने जैसा है। आशंका व्यक्त की जा रही है कि ब्रिटानिया बिस्किट के स्थानीय वितरक ज्यादा मुनाफे के चक्कर में ऐसा घालमेल कर रहे हैं। बिस्किट निर्माता कंपनी को इस ओर ध्यान देना चाहिए।

रामपाल गांव में है भगवान श्रीरामचंद्र के हाथों स्थापित प्राचीन शिवलिंग, जन आस्था का बड़ा केंद्र है यह

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  • वनवास के दौरान प्रभु श्रीराम ने स्थापित किया था लिंगेश्वर शिवलिंग को
  • बस्तर में कई जगह मौजूद हैं श्रीराम की निशानियां 

अर्जुन झा-

बकावंड भगवान श्रीरामचंद्र ने अपने वनवास काल में लंबा समय बस्तर के जंगलों में गुजारा है। बस्तर के जंगलों को दंडाकरण्य कहा जाता है और श्रीराम चरित मानस ग्रंथ में दंडाकरण्य का कई जगह उल्लेख है। भगवान रामजी की ढेरों निशानियां बस्तर संभाग में आज भी मौजूद हैं। इन्हीं में एक है भगवान श्रीरामचंद्र द्वारा स्थापित प्राचीन शिवलिंग। संयोग देखिए कि जिस गांव में यह अति प्राचीन शिवलिंग स्थापित है, उसका नाम भी रामपाल है। इस गांव को संभवतः भगवान राम ने ही बसाया होगा। श्रीराम के हाथों स्थापित शिवलिंग को लिंगेश्वर शिवलिंग के नाम से जाना जाता है और पूरे इलाके में यह धार्मिक आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है।

बस्तर जिला मुख्यालय जगदलपुर से महज 10 किमी दूर स्थित बकावंड ब्लॉक के ग्राम रामपाल में रामायण काल का शिवलिंग स्थापित है। बताया जाता है कि प्रभु श्रीराम ने अपने वनवास के दौरान यहां पर लिंगेश्वर शिवलिंग की स्थापना की थी। इसकी पुष्टि दिल्ली के श्रीराम सांस्कृतिक शोध संस्थान के विशेषज्ञों ने भी की है। यह शोध संस्थान 50 सालों से श्रीराम के वनवास पर शोध कर रहा है। इसी शोध में यह जानकारी मिली है। बकावंड जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत करनपुर के आश्रित ग्राम रामपाल में करीब 38 धाकड़ ठाकुर परिवार निवासरत हैं। पूरा गांव श्रीराम और भगवान शिव की पूजा करता है। यहां स्थित लिंगेश्वर शिव मंदिर कई कविदंतियों, मान्यताओं और दंतकथाओं से जुड़ा हुआ है। यहां के पुजारी अर्जुन सिंह ठाकुर ने बताया कि उनके पूर्वज करीब डेढ़ सौ साल से इस लिंगेश्वर शिव की पूजा करते आ रहे हैं। कैलाश सिंह ठाकुर ने बताया कि खोदाई के दौरान यह शिवलिंग प्राप्त हुआ है। जमीन के अंदर खोदाई कराने से शिवलिंग की थाह नहीं मिली। खोदाई के दौरान जमीन के अंदर ऊपरी सतह की अपेक्षा शिवलिंग की मोटाई अधिक पाई गई। आज तक इस शिवलिंग का कोई अंत नही मिला है। मनेर सिंह ठाकुर ने बताया कि बचपन में शिवलिंग की ऊपरी सतह में कुछ गड्ढे थे, जो अब भर गए है। वहीं धीरे-धीरे शिवलिंग की लंबाई भी बढ़ रही है।

बस्तर में यहां रहे थे श्रीराम

वनवास के दौरान भगवान श्रीराम लंबे समय तक बस्तर में रहे। शोधकर्ता डॉ. राम अवतार ने अपनी किताब में लिखा है कि श्रीराम धमतरी से कांकेर पहुंचे। कांकेर में रामपुर जुनवानी, केशकाल घाटी शिव मंदिर, राकस हाड़ा नारायणपुर, चित्रकोट शिव मंदिर, तीरथगढ़ सीता कुंड, कोटि महेश्वर कोटमसर कांगेर, ओड़िशा के मल्कानगिरी, रामाराम के चिटमिट्टीन मंदिर सुकमा व इंजरम कोंटा में श्रीराम ने वनवास के दिनों में यहां से होकर गुजरे।

बस्तर दशहरा से संबंध

बस्तर के दशहरे में फूलरथ की परिक्रमा भी श्रीराम और मां दुर्गा से जुड़ी हुई है

टेंपल कमेटी के उपाध्यक्ष विजय भारत ने बताया कि बस्तर दशहरा भी श्रीराम और मां दुर्गा से जुड़ा हुआ है। फूल रथ परिक्रमा से पहले माता का छत्र दंतेश्वरी मंदिर से निकलता है, तो पहले कांकालीन मंदिर में पूजा होती है। फिर जगन्नाथ मंदिर परिसर में मौजूद श्रीराम मंदिर में पूजा होती है। इसके बाद दंतेश्वरी और राम मंदिर के पुजारी टोकरी में फूल लेकर रथ पर चढ़ते हैं। यहां पर पूजा विधान के बाद ही फूलरथ की परिक्रमा होती है।

काफी गहराई तक है शिवलिंग

बस्तर में श्रीराम द्वारा स्थापित इस लिंगेश्वर शिवलिंग का जमीन में कितनी गहराई तक धंसा हुआ है, अबतक इसकी थाह नहीं मिल पाई है। वहीं शिवलिंग की लंबई अंत, बढ़ती जा रही लंबाई भी लगातार बढ़ती जा रही है। इस शिवलिंग को लेकर 50 साल से शोध चल रहा है।

मंदिर परिसर की खोदाई में ईस्वी सन 1860 की घंटी भी मिली है। मंदिर के जीर्णोदार के लिए परिसर की खोदाई की गई। इस दौरान पुरानी ईंट, पत्थर और एक घंटी मिली है। इस घंटी में 1862 और लंदन लिखा हुआ है। शोधकर्ताओं से मिली जानकारी के अनुसार तत्कालीन ब्रिटिश राज्यपाल ने यह घंटी मंदिर में चढ़ाई थी। वहीं पुरातात्व विभाग ने ईट और पत्थर का सैंपल लिया है, जिससे यह पता लगाया जाएगा कि यह कितने साल पुराने हैं। राजपूत क्षत्रिय धाकड़ समाज के जिला सहयोजक जगत सिंह ठाकुर ने बताया कि शोध में यह पुष्टि हुई है कि लिंगेश्वर शिवलिंग की स्थापना भगवान श्रीराम ने ही की है।

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