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कैबिनेट मंत्री टी एस सिंह देव,सांसद बस्तर दीपक बैज सहित बस्तर विकास प्राधिकरण

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कैबिनेट मंत्री टी एस सिंह देव,सांसद बस्तर दीपक बैज सहित बस्तर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष व बस्तर विधायक लखेश्वर बघेल बने अखिल भारतीय युवक परिषद द्वारा रक्तदान अभियान का हिस्सा इस दौरान मनोहर लूनीया, जतिन जायसवाल,बलराम मौर्य,जानकी राम, दिनेश यदु, कविता साहू, सुशील मौर्य, आशीष मिश्रा, रोजवीन दास, प्रशांत जैन, राजेश चौधरी, शेमियल नाथ, अनुराग महतो,सायमा अशरफ सहित समस्त कार्यकर्त्तागण मौजूद रहे |

टाउनशिप तथा माइंस की समस्याओं पर प्रबंधन से यूनियन प्रतिनिधियों की चर्चा

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आज 16 सितंबर को राजहरा माइंस ऑफिस में मुख्य महाप्रबंधक के सभागार में टाउनशिप तथा माइंस से जुड़ी समस्याओं पर मुख्य महाप्रबंधक श्री समीर स्वरुप तथा संयुक्त खदान मजदूर संघ के प्रतिनिधिमंडल की बैठक हुई। यूनियन प्रतिनिधियों ने अनेक समस्याओं पर विस्तारपूर्वक चर्चा की। सचिव कमलजीत सिंह मान ने कहा कि देखा जा रहा है कि काफी लंबे समय से टाउनशिप से जुड़ी समस्याओं को सुलझाने में नगर प्रसाशन विभाग द्वारा लगातार लापरवाही और अनदेखी की जा रही है। टाउनशिप के क्वार्टर की समस्या की शिकायत दर्ज करने के बावजूद कर्मचारियों के क्वार्टर में उचित मरम्मत नहीं की जा रही है। क्वार्टर की खराब खिड़की, दरवाजे, फ्लोरिंग का काम, रूफ लीकेज की समस्या, कोर्टयार्ड के रिपेयरिंग की समस्या, टार फेल्टिंग का कार्य शिकायत दर्ज कराने के बाद भी समय पर ठीक नहीं करवाया जाता है, बल्कि समस्याओं को अटेंड करने में लंबी लंबी वेटिंग लगी होती है, जो कि कभी कम ही नहीं होती। टाउनशिप के अंदर जगह-जगह गाजर घास व घनी झाड़ियां हो गई हैं, बैक लाइन क्लीनिंग का कार्य नहीं हो रहा है जिसके कारण गंदगी है, सड़कों में जगह-जगह गड्ढे हो गए हैं जिसके कारण आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं, इन समस्त समस्याओं से कर्मचारी पस्त व निराश हो चुके हैं।

प्रतिनिधियों ने कहा कि टाउनशिप से संबंधित समस्याओं खिड़की दरवाजे, फ्लोरिंग की मरम्मत, सीपेज की मरम्मत, सड़कों के गड्ढे, कोट्यार्ड की मरम्मत, सीवरेज लाइन की सफाई आदि कार्यों को प्राथमिकता से करवाया जाए। टाउनशिप की सड़कों पर गाय-भैंसों की समस्या ऐसी है, जिससे हम सबका हमेशा सामना होता रहता है। इन पशुओं के सड़क में जमघट के कारण कई बार घातक दुर्घटनाएं घटित हुई हैं, इन पशुओं के नियंत्रण के लिए स्थायी समाधान किया जाना चाहिए।

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यूनियन प्रतिनिधियों ने चर्चा में यह भी कहा कि राजहरा क्लब के पास स्थित चौपाटी के आसपास आए दिन असामाजिक तत्वों के द्वारा मारपीट तथा शोरगुल मचाया जाता है तथा चौपाटी वाले चौक पर हमेशा असामाजिक तत्वों का जमावड़ा बना रहता है, ये लोग नशे की हालत में अनाप शनाप शब्दों का प्रयोग करते हैं, जिससे वहां से गुजरने में महिलाओं को शर्मिंदा होना पड़ता है। इसी तरह का माहौल भीष्म रथ के पास भी होता है, जहां पर विशेष तौर पर शाम या रात के वक्त खुले आम असामाजिक तत्वों को शराब का सेवन करते हुए देखा जा सकता है, और इन्हीं असामाजिक तत्वों के कारण पूरे टाउनशिप की गरिमा खराब होती जा रही है। अतः चौपाटी एवं नगर के गौरव भीष्म रथ के क्षेत्र की व्यवस्था को बहुत गंभीरता से लेते हुए तत्काल ठीक किया जाना चाहिए। चौक चौराहे पर हुल्लड़ एवं छेड़खानी करने वालों पर नजर रखकर कार्यवाही की जाए ताकि ऐसी भीड़ इकट्ठी ना हो।प्रतिनिधियों ने क्वार्टर के मामले पर यह भी कहा प्रबंधन थर्ड पार्टी को आवास प्रदान करने में बहुत उदार है, जबकि अपने ही कर्मचारी को आवास प्रदान करने में या वर्तमान आवास को रिटेंशन देने में कंपनी की सारी उम्र सेवा करने के बाद सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारी को बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है, उसे बहुत पापड़ बेलना पड़ता है। जो एम्पलाई रिटायर हो गए हैं उन्हें कंपनी से कम से कम 6 माह के लिए आसानी से क्वार्टर मिल पाए इसकी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।

खदान में कार्यरत ड्रिल, शॉवेल, डंपर, डोजर व अन्य वाहनों के प्रचालकों को पूर्व में यूनिफॉर्म का कपड़ा तथा वॉशिंग एलाउंस दिया जाता था, यह वर्तमान में बंद है, इसे पहले की तरह दिया जाना जल्द से जल्द प्रारंभ करवाया जाए। खदान चिकित्सालय की सोनोग्राफी मशीन काफी दिनों से खराब है, जिससे मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। प्रतिनिधियों ने मांग की, कि जब तक सोनोग्राफी मशीन ठीक नहीं हो जाती, तब तक के लिए सोनोग्राफी प्रायवेट संस्था में कराने तथा उसके रिंबर्समेंट की सुविधा दी जावे। इसके अतिरिक्त16 चिकित्सालय में निविदा आधार पर कार्यरत दो महिला चिकित्सकों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद अब यहां कोई भी महिला चिकित्सक उपलब्ध नहीं है, जिससे महिला मरीजों को परेशानी हो रही है। अतः शीघ्र महिला चिकित्सकों की भर्ती कराई जावे।

मुख्य महाप्रबंधक समीर स्वरुप साहब ने प्रतिनिधियों की तमाम बातें ध्यानपूर्वक सुनीं तथा कहा कि ये समस्याएं कर्मचारियों से सीधी जुड़ी हुई समस्याएं है, जिनका निदान होना सचमुच आवश्यक है। इन समस्याओं को बहुत दिनों से महसूस किया जा रहा था, और इनका समाधान हमारी प्राथमिकता में निश्चित तौर पर सबसे ऊपर रहेगा, क्वार्टरों में मरम्मत आदि के लिए आवश्यक राशि का प्रावधान हो चुका है, अतः अब इनके निदान में कोई रुकावट नहीं है। यूनियन प्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए समस्त समस्याओं पर तत्काल सकारात्मक कदम उठाया जाएगा।

मुख्य महाप्रबंधक साहब की इस सकारात्मक घोषणा पर समस्त प्रतिनिधियों ने खुशी जाहिर किया। इस चर्चा में सचिव कमलजीत सिंह मान, दान सिंह चंद्राकर, तोरण लाल साहू, आर.पी. बरेठ, राजेश कुमार साहू, कुलदीप सिंह, मोतीलाल जॉर्ज, श्रीनिवासलू, सोमित साहू, गुरमीत सिंह, विष्णुराम साहू, धनराज साहू, ओ.पी. शर्मा, जीवनलाल साहू, दिलीप सुखदेवे, आर पी सिंग, रामपाल, डी एल सोनवानी, नरेन्द्र जनवंधू, पी एस भंडारी, देवेंद्र उईके, हीरेंद्र कुमार साव, समसुद्दीन अंसारी, हंस कुमार, वाई एल देशमुख, संजय जैन, प्रवीण शर्मा, श्याम सुंदर, कांता राव, कोमल निर्मलकर, नरोत्तम तारम, मल्लूराम साहू, सुनील सिंग, तेजराम साहू, विजय देशमुख, मोहन मारकंडे, संतु राम, पवन गंगबोइर , अरुण यादव, धनुष ठाकुर, बाबूलाल बामलिया आदि शामिल थे।

दल्लीराजहरा पिल्टर प्लांट विश्वकर्मा जयंती बड़े धूमधाम से मनाया गया

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दल्लीराजहरा – प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी 17 सितंबर 2022 को विश्वकर्मा बाबा जी की पूजा एवं जयंती धूमधाम से मनाई गई। भगवान विश्वकर्मा बाबा जी को दुनिया का पहला वास्तुकार माना गया हैं। देव शिल्पी विश्वकर्मा जी के जन्मदिन के दिन शिल्पकार, कारीगर, किसी भी मशीनरी का काम करने वाले लोग भगवान विश्वकर्मा जी की पूजा करते हैं।साथ ही अपने कार्य में कुशलता और उन्नति का आशीर्वाद मांगते हैं। इसी संदर्भ में भिलाई इस्पात संयंत्र के जियोलॉजी विभाग (सेम्पलिंग) में दल्ली यंत्रीकृत खदान के महाप्रबंधक एस. रजा साहब , वरिष्ठ प्रबंधक प्रवीण मराठे साहब, सचिन, लिप्सा मैडम,पन्डा मैडम, पाली प्रभारी सुरेश कुमार जेना, मिलाप कुर्रे, राकेश कश्यप, अरुण वैद्य, एवं सहकर्मी जीवन लाल साहू, हुमन साहू, रुम लाल, राजकुमार, बंशीलाल, नारायण, विल्सन, जितेन्द्र, शैलेन्द्र कुमार, पन्नालाल, बीरबल, दीपक, प्रभा, खिलेश्वरी एवं सेम्पलिंग विभाग के समस्त अधिकारी एवं कर्मचारी सम्मिलित हुए।

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सुकमा में हरा सोना के नाम पर लूट

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ख़रीदा गया 40 लाख गड्डी तेन्दूपत्ता, विभाग को दी 11 लाख गड्डी खरीदी की जानकारी ऊंची कीमत पर बेचकर उड़ीसा भेज दिया गया हजारों बोरा तेन्दूपत्ता
जगदलपुर/सुकमा। सुकमा वन मंडल के कोंटा वन परिक्षेत्र में तेंदूपत्ता खरीदी में भारी घपलेबाजी कर ठेकेदारों ने शासन को लाखों के राजस्व की लगाई चपत लगा दी है। तीन समितियों में हुए घालमेल में एर्राबोर समिति के द्वारा की गई खरीदी पर नजर डालें तो लगभग 10 फड़ों में 40 लाख 64 हजार 124 गड्डी तेंदूपत्ता की वास्तविक खरीदी कर विभाग को 11 लाख 57 हजार 8 सौ गाड़ी खरीदी की जानकारी भेजी गई। 29 लाख 63 हजार गड्डी यानि की हजारों मानक बोरा तेंदूपत्ता उड़ीसा में पार कर दिया गया । एक समिति में हुए घालमेल के आंकड़ों पर नजर डालें तो शासन को डेढ़ करोड़ से अधिक के राजस्व का नुकसान होने की खबर है। 4 हजार रूपए मानक बोरा खरीदी कर 10 हजार रूपए मानक बोरा की दर से बिक्री किए जाने की जानकारी विभागीय सूत्रों से मिली है। उक्त तेंदूपत्ता का संग्रहण शासकीय रिकार्ड में दर्ज होता तो शासन को इसका राजस्व प्राप्त होता। खबर है कि शासन को मिलने वाले राजस्व को ठेकेदार आपस में विभागीय अधिकारियों एवं प्रबंधन से सांठगांठ कर डकार गये। विभाग के अधिकारी अब जांच के नाम पर खानापूर्ति कर ऐसे दोषियों को क्लिनचीट देन की तैयारी में है। पुलिसिया जांच में ढिलाई के कारण ठेकेदार सलाखों से बाहर आ चुके हे। ज्ञातव्य हो कि सुकमा वन मंडल के कोंटा वन परिक्षेत्र एर्राबोर समिति अ और ब एवं कोंटा समिति अ में भ्रष्टाचार करते हुए हजारों बोरा तेंदूपत्ता खरीदी उड़ीसा पार किया जा चुका है। मामला उजागर होने के बाद भी जांच दल मुकाम तक नहीं पहुंच पाया है। ऐसी खबर है कि जांच में लीपापोती कर दोषियों को बचाने की साजिश रची जा चुकी है। जांच निष्पक्ष हुई तो प्रबंधक, पोषक अधिकारी एवं विभाग के अधिकारी पर गाज गिर सकती है लेकिन इन्हे बचाने मामले पर पर्दा डालने तथा राजनीतिक आकाओ से भी दबाव बनाये जाने की खबर है।
शासन को डेढ़ करोड़ की चपत विभागीय सूत्रों एवं फड़ मुंशी से जानकारी मिली है कि एर्राबोर के अधीन लगभग 10 समितियों में 8 हजार से अधिक संग्राहकों से 40 लाख 64 हजार गड्डी तेंदूपत्ता की वास्तविक खरीदी की गई थी, जिसका भुगतान 1 करोड़ 62 लाख 56 हजार रु. किया जाना था। ठेकेदारों ने विभागीय अधिकारी से सांठगांठ कर वास्तविक खरीदी न दिखाकर विभाग को 11 लाख 57 हजार 8 सौ गड्डी खरीदी का आंकड़ा दिखाया है। इस तरह 29 लाख से अधिक गड्डी का घालमेल किया जा चुका है जो 5 हजार मानक बोरा से अधिक है और उसे दीगर प्रांतों में ठिकाने लगाया ला चुका है। जानकारी के अनुसार 4 रूप्ए की दर से खरीदा गया हरा सोना 10 रूपए गड्डी की दर से बिक्री होने की खबर है जिसमें 6 रूपए शासन को लाभ प्राप्त हुआ है। खरीदी का वास्तविक आंकड़ा शासकीय रिकार्ड में दर्ज होता तो शासन को डेढ़ करोड़ से अधिक का लाभा प्राप्त होता। यह सिर्फ एक समिति का आंकड़ा है इन तीन समितियों की निष्पक्ष जांच हुई तो बड़ा घोटाला उजागर हो सकता है। निकासी में किसका संरक्षण
कोंटा वन परिक्षेत्र में खरीदा गया 10 हजार से अधिक मानक बोरा तेंदूपत्ता उड़ीसा ठेकेदारों द्वारा पार किया जा चुका है। जांच का विषय है कि किसके संरक्षण में भारी संख्या में हरा सोना उड़ीसा पार कराया गया । जांच दल उनके खिलाफ कार्रवाई कर पायेगी या फिर अन्य मामलों की जांच की तरह जांच रिपोर्ट फाइलों में ही दबकर रह जाएगी? विभाग द्वारा 4 हजार मानक बोरा हरा सोना मलकानगिरी में जब्त किया जा चुका है। जिसे बस्तर लाने में वन विभाग के पसीने छूटने लगे हैं । जब्त किया गया 8 सौ मानक बोरा तेंदूपत्ता ही लाया जा सका है।
गुणवत्ता में भिन्नता भी
मलकानगिरी में ठेकेदारों द्वारा गोदामों में रखवाए गए तेंदूपत्ता की जांच की जाये तो अन्य गोदामों से तेंदूपत्ता की बरामदगी हो सकती है। सुकमा वन मंडल में 52 पत्तों की गड्डी तैयार की जाती है और 1 मानक बोरा में 6 सौ गड्डी की भर्ती की जाती है। यहां का पत्ता मोटे आकार का होता है। उड़ीसा के संग्राहकों द्वारा 42 पत्तों की गड्डी बनाई जाती है। 8 सौ गड्डियों की भराई एक बोरे में की जाती है. मामले की निष्पक्ष जांच होने पर बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा हो सकता हे। ठेकेदारों द्वारा समर्थन मूल्य से 1 रूपए 25 पैसा संग्राहकों को देने का वादा किया गया था जो अप्राप्त है। चल रही है जांच प्रक्रिया
सुकमा डीएफओ ने बताया कि सभी संग्राहकों को बकाया राशि का भुगतान कर दिया गया है। तेंदूपत्ता खरीदी में हुए भ्रष्टाचार की जांच चल रही है जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जायेगी।

प्राथमिक शाला सोरगांव में बस्ता विहीन शिक्षा आयोजन के तहत स्कूली बच्चों का रस्सा खींच प्रतियोगिता का हुआ आयोजन

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भानपुरी विकास खंड बस्तर के सोरगांव संकुल के अंतर्गत संचालित प्राथमिक शाला सोरगांव में शासन के निर्देशानुसार प्रत्येक शनिवार को बस्ता विहीन शिक्षा का आयोजन के तहत इस शनिवार विभिन्न प्रकार के खेल गतिविधि का आयोजन किया गया जिसमे रस्सा खींच प्रतियोगिता में बच्चों ने उत्साह और आनंद लेकर भाग लिए। निर्णायक के रूप में स्वयं प्रभारी शिक्षक धनेश्वर ध्रुव व आश्रम की शिक्षिका जसिंता इक्का व धर्मेंद्र प्रधान रहे। संकुल के सीएसी डी डी पंत ने खेल के लिए रस्सा उपलब्ध कराए व बताए कि बच्चे इस तरह के खेल व अन्य सह शैक्षिक गतिविधि कराए जाने से गुमसुम व संकोची प्रवृति का बच्चा भी मुखर हो जाता है और बच्चों का आत्म विश्वास बढ़ जाता है। शाला त्यागी होने की प्रवृति में कमी आता है।

बस्तर का अदम्य साहसी अभिनेता – चेंदरू , बेहाल है छत्तीसगढ़ के मोगली का परिवार

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छत्तीसगढ़ के एकमात्र ऑस्कर अवार्ड विजेता चेंदरु के परिजनों की सुध कब लेगी सरकार ? बस्तर के टार्जन की पुण्यतिथि पर विशेष रपट

जगदलपुर.नारायणपुर जिले के गढ़ बंगाल गांव ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के फ़िल्म जगत का जाना माना नाम रहा है चेंदरू, जिसे हम सब छत्तीसगढ़ के मोगली और बस्तर के जंगलों के टार्जन के नाम से भी जानते हैं। चेंदरू यानि वही शख्स, जो बचपन में शेर, तेंदुआ जैसे हिंसक और खतरनाक जंगली जानवरों के साथ बेखौफ़ और बिंदास होकर खेला करता था. बस्तर के इस वन पुत्र ने कच्ची अल्प उम्र में ऐसा कारनामा कर दिखाया था, जो आज तक कोई और नहीं कर पाया है. जंगली जानवरों के साथ चेंदरू की अनोखी दोस्ती ने हॉलीवुड का भी ध्यान खींचा और हॉलीवुड के एक बड़े फ़िल्म निर्माता ने अपनी फ़िल्म में चेंदरु को मुख्य किरदार के तौर पर जगह दी. यह फ़िल्म पूरी दुनिया में ना केवल चर्चित हुई, बल्कि उसे ऑस्कर अवार्ड से भी नवाजा गया. यह चेंदरु की पहली और आखिरी फ़िल्म थी। उसके बाद आज तक अंतरराष्ट्रीय फिल्मों में छत्तीसगढ़ के किसी कलाकार को इतनी प्रसिद्धि नहीं मिली।

कभी छत्तीसगढ़ के मोगली तथा ‘बस्तर का टाइगर बॉय ‘ के नाम से विख्यात रहा यह अंतर्राष्ट्रीय हीरो आज हमारे बीच नहीं है. 18 सितंबर 2013 को 78 वर्ष की उम्र में चेंदरु सदा सदा के लिए अनंत यात्रा पर चला गया. आज उसकी 9 वीं पुण्यतिथि है। एक बेहद सफल, बेहद चर्चित अंतरराष्ट्रीय फिल्म के हीरो चेंदरू की जिंदगी का बड़ा हिस्सा गुमनामियों में बीता। चेंदरू ने अंतर्राष्ट्रीय पटल पर संपूर्ण भारत का नाम रोशन किया है. चेंदरू द्वारा अभिनीत फिल्म को वर्ष 1958 में कांस फिल्म फेस्टिवल में भी प्रदर्शित किया गया था । चेंदरू के जीवन काल में उसे जो सम्मान मिलना चाहिए था वह नहीं मिला। फिल्म के साथ ही 1960 के दशक में स्वीडिश तथा अंग्रेजी भाषा में चेंदरू के नाम से जो किताबें और फिल्म तैयार की गई थी वह समय के साथ-साथ उसके परिवारजनों के पास आज नहीं है । आज उसका परिवार किसी तरह मजदूरी करके गुजर बसर कर रहा है । पाठ्यक्रम में शामिल हो चेंदरु की शौर्यगाथा चेंदरू के जीवन काल में जो फिल्म तैयार हुई थी तथा अनेक देशों में रिलीज हुई थी उसे संग्रहित किए जाने की आवश्यकता है. बस्तर के इस पहले हॉलीवुड अभिनेता के संबंध में स्वीडिश व अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित सचित्र पुस्तक का हिंदी हल्बी तथा गोंडी बोली भाषा में अनुवादित कर प्रकाशित करवाया जाना चाहिए। बतौर मुख्य भूमिका निभाने वाले अंतरराष्ट्रीय फिल्म के नायक चेंदरू ने बाघ और तेंदुए के बीच रहकर वन्य प्राणियों के साथ मानवीय भावना का परिचय दिया, उसकी गाथा जन-जन तक पहुंचाया जावे ।छत्तीसगढ़ के शालेय पाठ्यक्रम में चेंदरु की शौर्यगाथा को शामिल किया जाने की जरुरत है ताकि आने वाली पीढ़ी को चेंदरू से अवगत कराया जा सके, यही उसके तथा परिवार जनों का वास्तविक सम्मान होगा, चेंदरु के प्रति वास्तविक श्रद्धांजलि होगी ।

बेहाल है छत्तीसगढ़ के मोगली का परिवार

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छत्तीसगढ़ के एकमात्र ऑस्कर अवार्ड विजेता चेंदरु के परिजनों की सुध कब लेगी सरकार?-
बस्तर के टार्जन की पुण्यतिथि पर विशेष रपट

जगदलपुर नारायणपुर जिले के गढ़ बंगाल गांव ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के फ़िल्म जगत का जाना माना नाम रहा है चेंदरू, जिसे
हम सब छत्तीसगढ़ के मोगली और बस्तर के जंगलों के टार्जन के नाम से भी जानते हैं। चेंदरू यानि वही शख्स, जो बचपन में शेर, तेंदुआ जैसे हिंसक और खतरनाक जंगली जानवरों के साथ बेखौफ़ और बिंदास होकर खेला करता था. बस्तर के इस वन पुत्र ने कच्ची अल्प उम्र में ऐसा कारनामा कर दिखाया था, जो आज तक कोई और नहीं कर पाया है. जंगली जानवरों के साथ चेंदरू की अनोखी दोस्ती ने हॉलीवुड का भी ध्यान खींचा और हॉलीवुड के एक बड़े फ़िल्म निर्माता ने अपनी फ़िल्म में चेंदरु को मुख्य किरदार के तौर पर जगह दी. यह फ़िल्म पूरी दुनिया में ना केवल चर्चित हुई,

बल्कि उसे ऑस्कर अवार्ड से भी नवाजा गया. यह चेंदरु की पहली और आखिरी फ़िल्म थी। उसके बाद आज तक अंतरराष्ट्रीय फिल्मों में छत्तीसगढ़ के किसी कलाकार को इतनी प्रसिद्धि नहीं मिली। कभी छत्तीसगढ़ के मोगली तथा ‘बस्तर का टाइगर बॉय ‘ के नाम से विख्यात रहा यह अंतर्राष्ट्रीय हीरो आज हमारे बीच नहीं है. 18 सितंबर 2013 को 78 वर्ष की उम्र में चेंदरु सदा सदा के लिए अनंत यात्रा पर चला गया. आज उसकी 9 वीं पुण्यतिथि है। एक बेहद सफल, बेहद चर्चित अंतरराष्ट्रीय फिल्म के हीरो चेंदरू की जिंदगी का बड़ा हिस्सा गुमनामियों में बीता। चेंदरू ने अंतर्राष्ट्रीय पटल पर संपूर्ण भारत का नाम रोशन किया है. चेंदरू द्वारा अभिनीत फिल्म को वर्ष 1958 में कांस फिल्म फेस्टिवल में भी प्रदर्शित किया गया था । चेंदरू के जीवन काल में उसे जो सम्मान मिलना चाहिए था वह नहीं मिला। फिल्म के साथ ही 1960 के दशक में स्वीडिश तथा अंग्रेजी भाषा में चेंदरू के नाम से जो किताबें और फिल्म तैयार की गई थी वह समय के साथ-साथ उसके परिवारजनों के पास आज नहीं है । आज उसका परिवार किसी तरह मजदूरी करके गुजर बसर कर रहा है ।
पाठ्यक्रम में शामिल हो चेंदरु की शौर्यगाथा
चेंदरू के जीवन काल में जो फिल्म तैयार हुई थी तथा अनेक देशों में रिलीज हुई थी उसे संग्रहित किए जाने की आवश्यकता है. बस्तर के इस पहले हॉलीवुड अभिनेता के संबंध में स्वीडिश व अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित सचित्र पुस्तक का हिंदी हल्बी तथा गोंडी बोली भाषा में अनुवादित कर प्रकाशित करवाया जाना चाहिए। बतौर मुख्य भूमिका निभाने वाले अंतरराष्ट्रीय फिल्म के नायक चेंदरू ने बाघ और तेंदुए के बीच रहकर वन्य प्राणियों के साथ मानवीय भावना का परिचय दिया, उसकी गाथा जन-जन तक पहुंचाया जावे ।छत्तीसगढ़ के शालेय पाठ्यक्रम में चेंदरु की शौर्यगाथा को शामिल किया जाने की जरुरत है ताकि आने वाली पीढ़ी को चेंदरू से अवगत कराया जा सके, यही उसके तथा परिवार जनों का वास्तविक सम्मान होगा, चेंदरु के प्रति वास्तविक श्रद्धांजलि होगी ।

सौर ऊर्जा पेयजल योजना ढप

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बस्तर ब्लॉक ग्राम पंचायत अडावाल आश्रित ग्राम भरनी माध्यमिक साला तथा प्राथमिक शाल स्कूल मैं सौर ऊर्जा क्रीडा विभाग या पीएचई विभाग द्वारा विगत वर्ष लगभग 3 से 4 साल पहले वाटर सेट स्थापित किया गया था
8 /1/2022 से सौर ऊर्जा वाटर सेट खराब होने के कारण से स्कूली बच्चों को पेयजल का दिक्कत का सामना करना पढ़ रहा है माध्यमिक शाल प्रधान अध्यापक मानसिंह कश्यप जी द्वारा ग्राम पंचायत आड़ावाल को लिखित मे आभास कराया गया था
एवं ग्राम पंचायत सचिव द्वारा क्रीड़ा विभाग एवं पीएचई विभाग को सूचित करते हुए अनुरोध तथा गांव के पंच एवं जनप्रतिनिधि सरपंच द्वारा समस्या का निवारण करने हेतु सरपंच द्वारा प्रयास किया गया
किंतु इस समस्या का निवारण करने हेतु क्रीड़ा विभाग पीएचई विभाग ने कहा की हमें इस विषय में नहीं मालूम हम नहीं जानते पूछने पर इस समस्या का निवारण कहां से होगा क्रीड़ा विभाग और पीएचई विभाग एक दूसरे को बता रहे हैं हाथ खड़े कर दिया माध्यमिक शाला एवं प्राइमरी साला प्रधानाध्यापक तथा पाठशाला के सभी शिक्षक गण एवं छात्र-छात्राएं प्रशासन से अनुरोध करता है की सौर ऊर्जा वाटर सेट को जल्द से जल्द उपयोग करने लायक ठीक करवा दे

बस्तर का अदम्य साहसी अभिनेता – चेंदरू

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नारायणपुर जिले के गढ़बंगाल का जाना माना नाम चेंदरू, जिसे हम सब छत्तीसगढ़ का मोंगली के नाम से भी जानते हैं । चेंदरू ने अल्प आयु में वह अंगूठा कारनामा कर दिखाया जो आज तक किसी ने नहीं किया। चेंदरू वह शख्स था जिसने छोटी सी उम्र में जिस फिल्म में काम किया था उसकी पहली और आखरी थी। फिल्म को ‘ऑस्कर अवार्ड’ से नवाजा गया, उसके बाद आज तक किसी अंतरराष्ट्रीय फिल्मों में छत्तीसगढ़ के किसी नायक को इतनी प्रसिद्धि नहीं मिली।

छत्तीसगढ़ का मोगली तथा ‘बस्तर का टाइगर बॉय ‘ के नाम से परिचित अंतर्राष्ट्रीय हीरो आज हमारे बीच नहीं रहा 18 सितंबर 2013 को 78 वर्ष की उम्र में सदा सदा के लिए अनंत यात्रा पर चला गया चला गया, आज उसकी 9 वीं पुण्यतिथि है । एक बेहद सफल, बेहद चर्चित अंतरराष्ट्रीय फिल्म के हीरो चेंदरू के जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा गुमनामियों में बीता। चेंदरू ने अंतर्राष्ट्रीय पटल पर संपूर्ण भारत का नाम रोशन किया है, चेंदरू द्वारा अभिनीत फिल्म को वर्ष 1958 में कांस फिल्म फेस्टिवल में भी प्रदर्शित किया गया था । चेंदरू के जीवन काल में उसे जो सम्मान मिलना चाहिए था उसे नहीं मिला। फिल्म के साथ ही 1960 के दशक में स्वीडिश तथा अंग्रेजी भाषा में चेंदरू के नाम से जो किताबें और फिल्म तैयार की गई थी वह समय के साथ-साथ उसके परिवारजनों के पास आज नहीं है । आज उसका परिवार किसी तरह मजदूरी करके गुजर बसर कर रहा है । चेंदरू के जीवन काल में जो फिल्म तैयार हुई थी तथा अनेक देशों में रिलीज हुई थी उसे संग्रहित किए जाने की आवश्यकता है, बस्तर का पहला हॉलीवुड अभिनेता के संबंध में स्वीडिश व अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित सचित्र पुस्तक का हिंदी हल्बी तथा गोंडी बोली भाषा में प्रकाशित करवाया जाना चाहिए।

बतौर मुख्य भूमिका निभाने वाला अंतरराष्ट्रीय फिल्म का नायक चेंदरू बाघ और तेंदुए के बीच रहकर मानव और वन्य प्राणियों के बीच रहकर मानवता का परिचय दिया, उसकी गाथा जन-जन तक पहुंचाया जावे ।चेंदरू के संबंध में बस्तर के प्राथमिक शालाओं में उसकी शौर्यगाथा पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ी को चेंदरू से अवगत कराया जा सके, यही उसके तथा परिवार जनों का वास्तविक सम्मान होगा, वास्तविक श्रद्धांजलि होगी ।

भ्रष्टाचार में भगवान को भी नहीं बख्श रही कांग्रेस सरकार- केदार

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रायपुर छत्तीसगढ़ प्रदेश भाजपा महामंत्री केदार कश्यप ने बस्तर के ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर के जीर्णोद्धार में भारी भ्रष्टाचार की परतें उधड़ने का हवाला देते हुए कहा है कि जिस मंदिर से लाखों भक्तों की आस्था जुड़ी है, वहां भी कांग्रेस भ्रष्टाचार करने से बाज नहीं आय। कांग्रेस की भ्रष्टतम सरकार ने भगवान को भी नहीं बख्शा। इनके चापलूस दरबारी इन्हें छत्तीसगढ़ का भगवान बता रहे हैं और ये जगत के स्वामी भगवान जगन्नाथ के मंदिर के काम में भी कारनामे दिखा रहे हैं। प्रदेश भाजपा महामंत्री केदार कश्यप ने कहा कि यदि इस भ्रष्टाचार को सरकार का संरक्षण प्राप्त नहीं है तो भगवान के घर में डाका डालने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए । लोक निर्माण मंत्री और विभाग प्रमुख पर कार्यवाही की जाये । लोक निर्माण विभाग में भ्रष्टाचार के लिए सीधे तौर पर विभागीय मंत्री व विभाग के नौकरशाह जिम्मेदार हैं और सरकार के मुखिया होने के कारण मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की नैतिक जिम्मेदारी है कि वे भ्रष्टाचार मुक्त सरकार दें लेकिन उनकी सरकार तो भ्रष्टाचार के नरवा में लोट रही है। हर काम में कमीशन बंधा है। भूपेश बघेल कमीशन सरकार चला रहे हैं। उनकी सरकार में किसी भी लोक निर्माण में इतना कमीशन डकारा जा रहा है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता सम्भव ही नहीं है। जब लागत राशि का बड़ा हिस्सा भूपेश बघेल की कमीशन मंडली हड़प लेगी तो ठेकेदार क्या पुण्य कमाने फोकट में काम करेगा ? यही कारण है कि इस सरकार के जो थोड़े निर्माण कार्य हो रहे है वो भी दुर्दशा ग्रस्त हैं। हर काम में भ्रष्टाचार की दुर्गंध आ रही है। बाकी जगह तो भ्रष्टाचार चरम पर है ही, अब तो फर्जी भगवान कांग्रेस सरकार की कृपा से भगवान के घर में भी सेंधमारी हो गई।

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