जगदलपुर। कुशाभाऊ ठाकरे नये बस स्टैंड में जिला व पुलिस प्रशासन की कार्रवाई से पचास मजदूरों को विजयवाड़ा जाने से रोका गया और गुप्ता ट्रेव्हल पर कार्रवाई की गई। दूसरी तरफ कार्यवाही करने के दौरान एसडीएम जी आर मरकाम के अभद्र व्यवहार से पत्रकारों के बीच नोंक-झोंक भी हुई।
बस्तर जिला मुख्यालय के बस स्टैंड से बड़ी संख्या में मजदूरों का पलायन जारी है।इसी तारतम्य में मंगलवार को जिला प्रशासन द्वारा कार्यवाही करते हुए गुप्ता ट्रेव्हलस से विजयवाड़ा जाने वाले यात्रियों को उतार कर जांच किया गया तो इस दौरान बस्तर के कोण्डागांव व तोकापाल से मजदूरों के पलायन होने की जानकारी सामने आई जिनका नाम जिला प्रशासन द्वारा दर्ज किया गया। इस दौरान एसडीएम जी आर मरकाम ,नायब तहसीलदार सहित अन्य पुलिस अधिकारी भी मौजूद थे। पत्रकारों द्वारा जब इस मामले में एसडीएम जीआर मरकाम से प्रतिक्रिया देने की जानकारी लेनी चाहिए तो वह पत्रकारों से ही नोंक-झोंक करने लगे। एसडीएम मरकाम ऐसी ही विवादों के कारण हर बार जिला प्रशासन की किरकिरी करते हैं।
दल्लीराजहरा – देश की केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों एवं तमाम फेडरेशनों ने केंद्र सरकार के श्रमिक विरोधी एवं जन विरोधी नीतियों के खिलाफ 26 नवम्बर 2020 को एक दिवसीय आम राष्ट्रीय हड़ताल की घोषणा की है |
दल्लीराजहरा – केंद्र सरकार द्वारा वर्तमान में लागू 29 विभिन्न श्रम कानूनों को मिलकर चार नए कोर्ट बनाने का प्रयास किया जा रहा है जिसमें कई आपत्तिजनक व्यवस्था को जोड़ा गया है। इस संबंध में भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध खदान मजदूर संघ भिलाई के महामंत्री एमपी सिंह ने कहा कि देश के सभी श्रम संगठनों द्वारा केंद्र सरकार के इस प्रयास का विरोध किया जा रहा है। भारतीय मजदूर संघ ने केंद्र सरकार के इस कदम का विरोध करते हुए 10 -16
अक्टूबर 2020 को चेतावनी सप्ताह एवं 28 10 2020 को विरोध दिवस के रूप में मनाते हुए प्रधानमंत्री के नाम से ज्ञापन सौंपा था। इस कड़ी में दिनांक 26 11 2020 को देश भर में श्रम संगठनों द्वारा विरोध के रूप में हड़ताल किया जा रहा है ।
भारतीय मजदूर संघ एवं इससे संबद्ध सभी श्रम संगठनों ने केंद्र सरकार के इस प्रयास का विरोध करता है किंतु दिनांक 26 11 2020 को प्रस्तावित हड़ताल से अपने आपको अलग रखता है।
भारतीय मजदूर संघ का यह स्पष्ट मानना है कि उक्त प्रस्तावित हड़ताल पूर्णता राजनैतिक है।एक तरफ जहां भारतीय मजदूर संघ ने चेतावनी सप्ताह एवं विरोध दिवस के समय केवल कर्मचारी हित से जुड़े इस मामले पर ही केंद्र सरकार का विरोध किया वहीं इस हड़ताल में शामिल श्रम संगठनों ने अपने राजनीतिक आकाओं के इशारे पर इसमें अन्य मुद्दों को जोड़कर और कर्मचारियों को इस हड़ताल में झोंक कर केवल अपने राजनीतिक स्वार्थ की पूर्ति करने का
प्रयास किया है।आज सेल में रोज नए नए नियम और परिपत्र के माध्यम से कर्मियों को मिलने वाली सुविधाओं में लगातार कटौती हो रही है। वेतन समझौता विगत 4 वर्षो से लंबित है।सेल के निदेशक वित्त अपने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में यह कहते हैं कि वेतन समझौता करने के लिए तो सेल प्रबंधन तैयार है किंतु कर्मियों को एरियस नहीं मिलेगा क्योंकि सेल इतने फायदे में नहीं है।किंतु इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल में शामिल श्रम संगठनों ने अपने केंद्रीय चार्टर ऑफ डिमांड में इस मुद्दे को शामिल नहीं किया और स्थानीय स्तर पर कर्मियों का सहयोग पाने के लिए इसे स्थानीय मुद्दे के रूप में जोड़ दिया गया है।
संघ का यह मानना है कि अगर हड़ताल केंद्र सरकार के द्वारा प्रस्तावित लेबर कोर्ट के विरोध में है तो ऐसे में उस में अन्य मुद्दों को जोड़कर अपने आकाओं के इशारे पर राजनैतिक स्वार्थ की पूर्ति के लिए इस्पात कर्मियों को रोकने का प्रयास क्यों? और फिर जब घाटे का रोना रोकर सेल प्रबंधन लगातार सुविधाओं में कटौती कर रहा है तो इस घाटे के लिए जिम्मेदार कारण भ्रष्टाचार के विरोध में यह श्रम संगठन चुप क्यों हैं? आज इस हड़ताल में शामिल एक प्रमुख वामपंथी श्रम संगठन (एटक) के कार्यकारी अध्यक्ष को अपने श्रमिकों के शोषण और कंपनी के
अधिकारी के साथ मिलकर भ्रष्टाचार के माध्यम से कंपनी के पैसे के साथ हेराफेरी करना साबित हो चुका है फिर भी प्रबंधन के अधिकारियों के साथ मिलकर इस श्रम संगठन के कुछ पदाधिकारी उक्त ठेकेदार और कंपनी के अधिकारी को बचाने में लगे हैं ऐसा क्यों?एक तरफ कंपनी द्वारा उन ठेका श्रमिकों को तत्काल कार्य से निकाल दिया जाता है जो वेल्डिंग मशीन चोरी करते हुए पकड़ाते हैं वहीं दूसरी तरफ कंपनी के पैसों को भ्रष्ट तरीके से बंदरबांट करने वाले अधिकारी पर और ठेकेदार पर अब तक कोई कार्यवाही क्यों नहीं, क्योंकि चोरी दोनों ने की है
मगर तरीका अलग अलग था एक ने कंपनी द्वारा खरीदा गया वेल्डिंग मशीन चोरी किया और एटक के कार्यकारी अध्यक्ष ने सीधे कंपनी के पैसे और श्रमिकों का वेतन का गबन किया मगर सजा मिली उसे छोटी चोरी में पकड़े गए चोरों को और एटक के कार्यकारी अध्यक्ष आज भी चोरी पकड़े जाने के बाद भी कंपनी के खास बने बैठे हैं और आज भी श्रमिक हित का दिखावा कर ईस हड़ताल में शामिल होकर भोले-भाले श्रमिकों को ठगने में लगे हैं,क्या ईसका विरोध नहीं होना चाहिए,आज ऐसी चोरी के कारण कंपनी फंड की कमी का हवाला देकर नियमित कर्मचारियों की सुविधाओं में लगातार कटौती कर रही है और ऐसे भ्रष्ट ठेकेदार अपना जेब भरने में लगे हैं मगर कोई ईसका विरोध नहीं कर रहा है न कंपनी के अधिकारी और एटक के नेता, विचार करें?भारतीय मजदूर संघ इस हड़ताल में शामिल अन्य सभी श्रम संगठनों के
पदाधिकारियों से यह पूछता है कि जब विरोध प्रस्तावित लेबर कोर्ट का है तो ऐसे में अन्य मुद्दों को इसमें शामिल करना क्या राजनीतिक हथकंडा नहीं है?भ्रष्टाचार के विरोध में सड़क पर उतारकर हल्ला करने का दिखावा करना लेकिन अपने ही कार्यकारी अध्यक्ष का शोषण और भ्रष्टाचार साबित होने के बावजूद उस पर कोई कार्यवाही ना करना और चुप रहना चाहिए साबित नहीं करता है कि 26 11 2020 को प्रस्तावित हड़ताल केवल एक दिखावा है क्योंकि जब कोई भी श्रम संगठन कंपनी में व्याप्त भ्रष्टाचार पर चुप्पी साध लेवे तो उसके द्वारा किया जा रहा कोई भी कार्य संदिग्ध हो जाता है।ऐसे में जो अन्य श्रम संगठन इस हड़ताल में साथ दे रहे हैं वो ईस पर विचार जरूर करें।
भारतीय मजदूर संघ दिखावे के लिए किसी तरह के भी राजनैतिक हथकंडे का विरोध करता है और इसलिए इस हड़ताल में शामिल महत्वपूर्ण मुद्दा (श्रम कानून में प्रस्तावित संशोधन का विरोध) का समर्थन करता है लेकिन दिखावे के लिए और केवल राजनैतिक स्वार्थ पूर्ति के लिए किए जा रहे इस हड़ताल से अपने आपको अलग रखता है।साथ ही सभी कर्मियों से यह अपील करता है कि हड़ताल में शामिल होने अथवा ना होने के लिए वे स्वयं अपने विवेक का इस्तेमाल करते हुए निर्णय लेवे क्योंकि स्थानीय खदान प्रबंधन में बैठे आला अधिकारी भी वामपंथी विचारधारा के पोषक है और आईओसी में होने वाले प्रत्येक हड़ताल का पर्दे के पीछे में रहते हुए समर्थन करते हैं। ऐसे में प्रबंधन से किसी तरह की कोई उम्मीद करना बेकार है। क्योंकि सभी कर्मचारियों और ठेका श्रमिकों को स्मरण दिला दूं कि कुछ वर्ष पूर्व भी ईस तरह की राष्ट्रीय मुद्दों पर राजहरा खदान में हड़ताल किया गया था और कुछ घंटों बाद ही तत्तकालीन महाप्रबंधक खदान के साथ राष्ट्रीय स्तर की मांग को पूरा करा लिया गया था जबकि उनकी सभी इकाइयों ने पुरे देश में हड़ताल किया पर सिर्फ राजहरा खदान में अपने स्वार्थ पूर्ति के लिए हड़ताल समाप्त कर दिया गया था। भिलाई में भी हड़ताल जारी रहा था, बाकी आप लोगों को विचार करना है कि ऐसी राजनीति से प्रेरित हड़ताल में शामिल होना है या नहीं, भारतीय मजदूर संघ भी केन्द्र सरकार के ईस श्रम कानून का विरोध करता है और हमने कर्मचारी हित से जुड़े मामलों पर ही केन्द्र सरकार के ईस कानून का विरोध भी किया है और आगे भी करते रहेंगे जब तक सरकार इसमें संशोधन नहीं करतीं हैं मगर राजनीति से प्रेरित ईस हड़ताल से अपने को संघ अलग रखता है।
इन क्रांतिकारी विचारों से परिपूर्ण, ऑनलाइन सत्संग का आयोजन सीता रसोई संचालन को प्रातः 10:00 से 11:00 बजे और दोपहर 1:00 से 2:00 संत श्री राम बालक दास जी के सानिध्य में किया गया जिसमें सभी भक्तगण हजारो भक्त जुड़ें प्रतिदिन की भांति सुंदर ऑनलाइन सत्संग का आयोजन भक्तों के भजनों एवं माताओं के रामचरित मानस की चौपाइयों के साथ ही आनंददायक रहा, ऋचा बहन के मीठा मोती से सभी को प्रेरणा प्राप्त हुई, कि यदि आप विश्व में परिवर्तन लाना चाहते हैं तो पहले स्वयं को परिवर्तित कीजिए सत्संग को आगे
बढ़ाते हुए ऋचा बहन ने भक्ति मार्ग पर प्रश्न करते हुए कहा कि, ज्ञान की पंथ, कृपाण की धार क्यों कहा जाता है? इस पंक्ति के भाव का विस्तार करते हुए बाबा जी ने बताया कि बहना भक्ति क्या है ,ज्ञान क्या है, वैसे तो ईश्वर को प्राप्त करने के कई रास्ते हैं और इसी को प्राप्त करने के लिए भक्तों को चार भागों में विभाजित भी किया गया है । एक होता है अर्थार्थी, एक होता है
आर्त,एक ज्ञानी और एक जिज्ञासु,आर्त का अर्थ होता है जो दुखी होकर दुख में भगवान को सुमिरन करता है आर्त भाव से भगवान को पुकारता है भगवान जो अनाथों के नाथ है ऐसे भक्त जिन्हें प्रार्थना भी नहीं आती उनमें पशुता होती है लेकिन वह हृदय और भाव के साथ बिना किसी विधि विधान की रचना के भी भगवान को पुकारते हैं तो ईश्वर उनकी अवश्य प्रार्थना सुनते हैं भक्तों की प्रार्थना से भगवान दौड़े चले आते हैं।
दूसरे हैं जिज्ञासु, अर्जुन संजय, विदुर ,अक्रूर ,उद्धव या फिर माता शबरी की तरह जिज्ञासा करने वाले भक्त होते है जिन्हें परमात्मा ज्ञान से भर देता है , उनको परिपूर्ण कर देता है जब भक्त जिज्ञासु हो तो परमात्मा उनका गुरु बन कर उन्हें उपदेश कर उसकी सारी जिज्ञासा को शांत करते हैं तीसरे भक्त होते है अर्थार्थी , जो कि भगवान की सकाम भक्ति करते हैं जो हमें
कभी नहीं करना चाहिए परंतु यह भी भगवान का ही रचा हुआ एक रूप है, की भक्त अर्थार्थी भी हो सकता है हम अपने माता-पिता से ही नहीं मांगेंगे तो किससे मांगेंगे , संसार में यदि किसी से मांगना भी हो तो परमात्मा से मांगे परंतु उसे स्वार्थनिष्ठा ना बनाएं भक्ति ही रखें उसे पिता मानकर आप कुछ मांग सकते हैं परंतु वे इतने दया कृपा निधान है कि बिना मांगे ही हमारी झोली भर देते हैं |
चौथे भक्त है ज्ञानी भक्त, भगवान कहते हैं कि वैसे तो भक्तों सभी मुझे बहुत प्रिय है परंतु ज्ञानी भक्त भगवान को अति प्रिय है ज्ञानी भक्त ऐसे होते हैं कि वे स्व विवेक का प्रयोग करते हैं अंधविश्वास नहीं करते भगवान के विभिन्न रूपों में व्याप्त है उसे समझते हैं।
भक्तों के स्वरूप को जानने के बाद हम ज्ञान की पंथ कृपाण की धार क्यों कहा जाता है, जानते हैं कृपाण एक राजपुताना शस्त्र है जिसमे दोनों तरफ धार होती है उसे तब उपयोग किया जाता है जब आप शत्रुओं से चारों ओर से घिर जाते हैं तब सिपाही ताबड़तोड़ हमला कर अपनी रक्षा करता है उसी प्रकार ज्ञान सभी संशय को काटने में सक्षम रहता है हमारे जीवन के सभी भ्रम को उसी तरह जला देता है जिस तरह अग्नि तिनके को जला देती है इसलिए ज्ञान का उपयोग
भी तभी करें जब उसके अलावा कोई उपाय ना बचा हो क्योंकि यहां दूधारी तलवार है जिस पर आप चलेंगे तो भी मरेंगे परंतु इसका उपयोग भी सोच समझ कर करना चाहिए ज्ञानी को कभी कभी अभिमान भी हो जाता है वह अपने ज्ञान से अपने को भगवान समझने लगता है इसलिए ज्ञान को अभिमान ना बनाए, इसीलिए इसको कृपाण से तुलना की गई है |
इस प्रकार आज का सत्संग पूर्ण हुआ जय गौ माता जय गोपाल जय सियाराम
पनारापारा हाईस्कूल में छात्राओं को संसदीय सचिव, महापौर व सभापति ने किया सायकल वितरित
जगदलपुर। नगर पालिका निगम क्षेत्र के पनारापारा हाईस्कूल में संसदीय सचिव रेखचंद जैन, महापौर श्रीमती सफीरा साहू व निगम अध्यक्ष श्रीमती कविता साहू की गरिमामयी उपस्थिति में सरस्वती सायकिल योजना अंतर्गत 46 छात्राओं को सायकिल वितरित किया और प्रावीण्य सूची में आएं तीन छात्राओं का सम्मान भी किया गया। संसदीय सचिव रेखचंद जैन ने छात्राओं को आर्शिवचन देकर कहा कि स्वामी विवेकानंद व अब्दुल कलाम जी ने अपना पूरा जीवन देश को समर्पित किया। उनके दिए गए आर्शिवचन को आज के समय में अपने जीवन में आत्मसात करने की जरूरत है।
संसदीय सचिव रेखचंद जैन ने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए नि: शुल्क शैक्षणिक सामग्री प्रदान कर रहें हैं जिसका लाभ अधिक से अधिक लेकर बच्चों को मन लगाकर पढाई करना चाहिए और अच्छे अंकों से उत्तीर्ण होकर शैक्षणिक संस्था, शिक्षकों और परिवार का नाम रोशन करें। महापौर श्रीमती सफीरा साहू व निगम अध्यक्ष श्रीमती कविता साहू ने भी बच्चों का उत्साह वर्धन करते पढ़ाई के प्रति ईमानदार बनने की सलाह दी।इस दौरान खंड़ शिक्षा अधिकारी मानसिंह भारद्वाज ने भी संबोधित किया तथा प्राचार्य श्रीमती खलखो ने भी शाला प्रतिवेदन प्रस्तुत कर शालाओं की समस्याओं को ओर अपना ध्यान आकर्षित किया। आभार- प्रदर्शन शिक्षिका श्रीमती डंबेश्वरी जोशी ने किया है।मंच संचालन शिक्षक हलधर बिसाई ने किया। इस दौरान शाला विकास व प्रबंधन समिति अध्यक्ष जीवन बघेल, प्र्रदेश महासचिव योगेश पानीग्राही, वरिष्ठ कांग्रेसी कुलदीप भदौरिया, युवक कांग्रेस प्रदेश सचिव अजय बिसाई, युवा नेता अल्ताफ खां, बीआरसी गरुड़ मिश्रा, संकुल समन्वयक भरत यादव, डालेश्वर ठाकुर, भूपेश पानीग्राही, शिक्षक शिक्षिकाओं व स्कूल छात्र- छात्राओं व गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
जगदलपुर। बस्तर विकास का सपना यानी एनएमडीसी के नगरनार स्टील प्लांट को विनिवेशी करण से बचाने बस्तर जाग उठा है। इस प्लांट के डी मर्जर के खिलाफ शंखनाद हो चुका है। कांग्रेस ने आंदोलन की कमान संभाल ली है। नगरनार प्लांट बचाने के लिए पिछले दिनों हुई सर्वदलीय बैठक से केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने दूरियां बना ली लेकिन राज्य की सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस की ओर से लोकसभा में बस्तर का प्रतिनिधित्व कर रहे सांसद दीपक बैज ने मोर्चा का नेतृत्व स्वीकार कर लिया है।
उन्हें बस्तर का नगरनार स्टील प्लांट बचाने किए जाने वाले संघर्ष का अगुआ चुना गया है। कांग्रेस के विधायकों ने भी संघर्ष में कंधा से कंधा मिलाकर साथ देने की ठानी है तो भाजपा को छोड़कर अन्य दलों ने भी प्रभावित क्षेत्र की जनता के साथ मिलकर इस संघर्ष को मुकाम तक पहुंचाने का फैसला किया है। नगरनार स्टील प्लांट को विनिवेश से बचाने के लिए आर्थिक नाकेबंदी के साथ ही पेसा कानून जैसे विकल्प पर विचार विमर्श किया गया है। गौरतलब है कि पूर्व में छत्तीसगढ़ में भाजपा शासन काल के समय भी नगरनार स्टील प्लांट के विनिवेश की आशंका को देखते हुए जबरदस्त आंदोलन किया गया था। जिसका नेतृत्व अब के मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस के तत्कालीन मुखिया भूपेश बघेल ने किया था।
अब जब भाजपा की केंद्र सरकार ने नगरनार स्टील प्लांट के डी मर्जर को हरी झंडी दे दी है तो कांग्रेस ने एक बार फिर से संघर्ष का रास्ता चुना है। बस्तर से लोकसभा सांसद दीपक बैज और छत्तीसगढ़ से कांग्रेस की राज्यसभा सांसद फूलो देवी नेताम सहित बस्तर के सभी कांग्रेसी विधायक तथा अन्य जनप्रतिनिधि नगरनार स्टील प्लांट को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। लोकसभा सांसद दीपक बैज और राज्यसभा सांसद फूलो देवी ने पहले से ही इस मामले में केंद्र सरकार तक अपनी भावना पहुंचा दी थी लेकिन केंद्र सरकार ने इस पर कोई जवाब दिए बिना ही नगरनार स्टील प्लांट के विनिवेश का रास्ता खोलने का कदम उठा लिया, जिससे बस्तर आंदोलित हो उठा है।
राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने स्तर पर बस्तर के विकास के लिए छोटे-छोटे स्टील प्लांट लगाने का विचार व्यक्त किया है। इस पर भी भाजपा की ओर से कटाक्ष किया जा चुका है। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह तो यह सवाल भी उठा चुके हैं कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल स्टील प्लांट के लिए जमीन कहां से लाएंगे। उन्हें जवाब दिया जा चुका है कि जमीन बस्तर की ही होगी और इतने बड़े प्लांट नहीं लगाए जा रहे कि जमीन की कमी हो। यहां सवाल यह है कि जब पूर्व में भाजपा ही नगरनार स्टील प्लांट को बस्तर के विकास के लिए महत्वपूर्ण मान रही थी और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यह कह चुके थे कि नगरनार स्टील प्लांट बस्तर विकास का एक बड़ा सहयोगी होगा। जब नगरनार स्टील प्लांट को बस्तर विकास के लिए मील का पत्थर माना जाता रहा है तो अब आखिर क्यों प्लांट के डी मर्जर की नौबत आ गई।
कांग्रेस और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का यह मत सामने आया है कि बस्तर विकास के लिए नगरनार स्टील प्लांट बहुत जरूरी है और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तो बस्तर में छोटे-छोटे स्टील प्लांट की स्थापना के लिए भी विचार व्यक्त कर चुके हैं। दरअसल भूपेश बघेल चाहते हैं कि बस्तर में इतने स्टील प्लांट लगें कि यहां का युवा उनमें रोजगार पा सके और लोग नक्सलवाद के कुचक्र का शिकार बनने के बजाय बस्तर विकास में सहभागी बनें। बस्तर में रोजगार की कमी और विकास के अभाव में ही नक्सलवाद को पंख लगे हैं। शोषण ने उन पंखों को और ताकत दी है। लेकिन अब कांग्रेस की राज्य सरकार का पूरा प्रयास है की बस्तर को ऐसे सुनियोजित विकास की दशा में आगे बढ़ाया जाए जिससे अमन चैन का माहौल भी बन सके।नगरनार स्टील प्लांट के विनिवेश का विरोध यहां की जनता इसीलिए कर रही है क्योंकि यह बस्तर विकास के सपने के तौर पर वर्षों से देखा जा रहा है। जब यह बनकर तैयार हो गया तो उसके विनिवेश का रास्ता खोलना बस्तर वासियों के साथ बहुत बड़े अन्याय के तौर पर देखा जा रहा है। अब यहां की जनता ने तय किया है कि केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ आर्थिक नाकेबंदी जैसे कदम उठाए जाएंगे। बिगुल बज चुका है। संघर्ष शुरु हो चुका है। अभी तो यह अंगड़ाई है आगे बहुत लड़ाई है… इस तर्ज पर कांग्रेस इस मुद्दे को आगे बढ़ा रही है तो भाजपा बस्तर की भावना के प्रतिकूल आचरण कर जनता से दूर हो रही है। वैसे भी बस्तर से भाजपा का बोरिया बिस्तर उठ चुका है। अब यही हाल रहा तो आगे भी उसे मुश्किल होगी।
जगदलपुर *महारानी अस्पताल के वीर गुंडाधुर वार्ड के सभागार में संसदीय सचिव, महापौर व सभापति सहित अन्य जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोरोनावायरस जांच हेतु कंटेंटमेंन जोन बनाने हेतु चर्चा किया गया। संसदीय सचिव रेखचंद जैन ने कहा कि वैश्विक माहामारी कोविड-19 को लेकर सभी को गंभीरतापूर्वक कार्य करने की जिम्मेदारी सभी लोगों की है। इस हेतु स्वास्थ्य विभाग के गाईड लाईन को पालन करने की आवश्यकता है। ठंड़ के मौसम में इसके बढ़ने की संख्या ज्यादा है और जनता को ज्यादा से ज्यादा स्वास्थ्य जांच कराना जरूरी है। मुख्यमंत्री चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डां. चतुर्वेदी द्वारा कोरोनावायरस यानि कोविड -19 की उत्पत्ति सहित उसके विस्तार के संदर्भ में विस्तार से जानकारी दी। नगरपालिक निगम आयुक्त प्रेमसाय पटेल द्वारा वार्ड पार्षदों के कोरोना काल में दिये योगदान की तारीफ की।
दल्ली राजहरा – अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद परिषद दल्ली राजहरा द्वारा कलेक्टर महोदय को केंद्रीय विद्यालय के स्थान में परिवर्तन न करने हेतु ज्ञापन दिया गया जिसमें राकेश देवांगन पूर्व जिला संयोजक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने बताया कि दल्ली राजहरा के साथ हमेशा से अछूता व्यवहार होता आ रहा है और जिलाधीश महोदय को इस मांग से अवगत
कराया गया मांग पूरा न किये जाने पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद आंदोलन हेतु बाध्य होगी। मुख्य रुप से उपस्थित पूर्व नगर अध्यक्ष दुष्यंत ताम्रकर,नगर मंत्री उमाशंकर साहू ,रविंदर गुप्ता, नितिन कुमार,पंकज साहू,प्रवीण साहू,गजेंद्र देवांगन,गौरव कौमार्य,शुभम बरनवाल,मनन गुप्ता आदि विद्यार्थी उपस्थित है।
विदित हो कि विगत दिनों बालोद जिला वन विभाग द्वारा वन क्षेत्र में जामडीपाट पाटेश्वर धाम आश्रम निर्माण के विरूद्व कब्जा व बेदखली शब्द का उपयोग करत हुए एकतरफा नोटिस दिया गया है। जबकि पाटेश्वर धाम की तरह छत्तीसगढ़ के वनक्षेत्र में अनेक देव स्थान व आश्रम स्थापित है, किन्तु नोटिस केवल पाटेश्वर धाम आश्रम को ही दिया गया है |
चूँकि इस क्षेत्र में कुछ समय से हिन्दू प्रतिकों पर लगातार प्रहार किया ज रहा है, इसलिए ऐसा प्रतीत होता है कि वनांचल क्षेत्र में हिन्दु धर्म संस्कृति व गहरी आस्थ के प्रतीक बन चुके 40 वर्ष पुराना आश्रम को द्वेषपूर्ण एक तरफा नोटिस देना कोई गहर शाजिश है। इसके अलावा स्थानीय ग्राम पंचायत से लेकर आदिवासी समाज को आश्रम के विरूद्व भड़का कर सामाजिक समरसता को छिन्न-भिन्न करने का प्रयास भी निंदनीय है |
महोदया जी, विगत कई वर्ष से जामड़ीपाट पाटेश्वर धाम द्वारा शासन प्रशासन से जमीन का पट्टा प्रदान करने हेतु आवेदन के माध्यम से आग्रह किया जा चुक है, किन्तु प्रशासन द्वारा आवेदन पर विचार करने की बजाय उन्हे बेदखली का नोटिस देन सोची समझी साजिश प्रतीत होता है।
अतः आपसे निवेदन है कि यदि शीघ्र ही बालोद जिला वन विभाग सहित स्थानीय जिला प्रशासन इस संबंध में काई सकारात्मक निर्णय नहीं लेता है तो समस्त हिन्द संगठनों सहित जनता को न्याय मांगने सड़क पर उतरना पड़ेगा, इसकी समस्त जिम्मेदार प्रशासन की होगी।
दल्ली राजहरा – लौह अयस्क खदान समूह के डिप्लोमा इंजीनियर की बैठक 22 नवंबर को साहू सदन दल्ली राजहरा में हुई। डिप्लोमा इंजीनियर को चिदंबर राव, राजेश कुमार साहू , मोहिद शफी, रवि नारायण राव, बी के मिश्रा, रवि शंकर देशमुख, रामपाल, डी एस चौहान, महेश खोड़के, ए के राजोरिया, सी एल लहरें , पी एस पटेल, मनोज कुमार भोई, वेंकट महिलांगे , राजकुमार मुंडा ने संबोधित किया।
डिप्लोमा इंजीनियरों ने एक सुर में कहा कि प्रबंधन पदनाम और केरियर ग्रोथ के मुद्दे पर डिप्लोमा इंजीनियरों का शोषण कर रही है। प्रबंधन को यह जानना चाहिए कि यह मुद्दा कहीं ना कहीं हमारे सामाजिक सम्मान एवं प्रतिष्ठा से जुड़ा है। देश के अन्य संस्थानों में अपने ही बराबर योग्यता वाले अन्य साथियों से पदनाम एवं प्रमोशन में पीछे होने के कारण इस वर्ग के कर्मचारियों के साथ उनके परिवार भी बहुत दुखी हैं, क्योंकि किसी व्यक्ति के तरक्की में उसके परिवार की भी खुशी छुपी होती है।
राजेश कुमार साहू ने कहा कि आज सेल में डिप्लोमा इंजीनियर की स्थिति यह है कि जूनियर को डिग्रेड करके S-3 ग्रेड में ज्वाइन कराया जा रहा है, एवं उनका पदनाम सम्मानजनक नहीं है। साथ ही जो वरिष्ठ डिप्लोमा इंजीनियर है वह वर्कर के अधिकतम ग्रेड S-11 में 8 से 10 वर्ष से रुके हुए हैं। उसके आगे ग्रेड भी नहीं है। उन्हें आर्थिक क्षति भी हो रही है। कुछ डिप्लोमा इंजीनियर की अभी भी 5 से 10 वर्षों की सेवा अवधि बची हुई है। प्रबंधन डिप्लोमा इंजीनियर को जवाबदारी तो पूरी दे रहा है, लेकिन जहां डिप्लोमा इंजीनियर को कुछ देने की बात आती है तो यह कह कर टाल देता है कि यह मामला कारपोरेट ऑफिस का है।
डिप्लोमा इंजीनियर को सम्मानजनक पदनाम ना मिलने के कारण यह लोग हतोत्साहित हो रहे हैं, और उनमें आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि हम डिप्लोमा इंजीनियर को आज ग्रैजुएट इंजीनियर के प्रारंभिक पद पर लगभग 10 वर्षों में पहुंचना चाहिए था वह आज 25- 30 वर्ष बाद भी वहां तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। अभी भी लोगों के 5 से 10 वर्ष बचे हुए हैं। जबकि इतने वर्षों में देश के किसी भी संस्थान में ऐसा नहीं होता है पर इसके बारे में कोई नहीं सोच रहा है। इसलिए पदनाम और कैरियर ग्रोथ के मुद्दे पर हड़ताल में शामिल होने के लिए ना चाहते हुए भी मजबूर हैं।
उन्होंने आगे कहा कि हम डिप्लोमा इंजीनियर को आज ग्रैजुएट इंजीनियर के प्रारंभिक पद पर लगभग 10 वर्षों में पहुंचना चाहिए था वह आज 25- 30 वर्ष बाद भी वहां तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। अभी भी लोगों के 5 से 10 वर्ष बचे हुए हैं। जबकि इतने वर्षों में देश के किसी भी संस्थान में ऐसा नहीं होता है पर इसके बारे में कोई नहीं सोच रहा है। इसलिए पदनाम और कैरियर ग्रोथ के मुद्दे पर हड़ताल में शामिल होने के लिए ना चाहते हुए भी मजबूर हैं।
महेश खोड़के और रवि नारायण ने कहा कि हम चाहते हैं :-
(1). सन 2017 में इस्पात मंत्रालय द्वारा जूनियर इंजीनियर पदनाम एवं कैरियर ग्रोथ (प्रमोशन) अन्य संस्थानों की तरह लागू करने के आदेश के बावजूद भी प्रबंधन द्वारा लटकाया जा रहा है. डिप्लोमा इंजीनियरों ने स्पष्ट कहा कि पदनाम और कैरियर ग्रोथ नहीं तो एक दिवसीय हड़ताल में शामिल होने के पश्चात आगे अनिश्चितकालीन हड़ताल के लिए भी बाध्य होंगे।
(2). सेल चेयरमैन श्री अनिल कुमार चौधरी ने नए वर्ष 2020 की शुभकामना बधाई संदेश में यह घोषणा की थी कि कर्मचारियों को सम्मानजनक पद जल्द दे दिया जाएगा लेकिन यह वर्ष भी समाप्ति की ओर है और उच्च प्रबंधन द्वारा कर्मचारियों को सम्मानजनक पदनाम नहीं दिया जा रहा है।
ए के राजोरिया और आर. एस. देशमुख ने कहा कि यहां पर उपस्थित सभी डिप्लोमा इंजीनियरों ने भी यह बात स्पष्ट कहा कि सबसे ज्यादा समस्या प्रबंधन की डिप्लोमा इंजीनियर के प्रति विरोधी नीतियों से है, जो कि समझ से परे है कि डिप्लोमा इंजीनियर को जब देश में सभी संस्थानों में चाहे वह पब्लिक सेक्टर हो या प्राइवेट सेक्टर या गवर्नमेंट सभी जगह जब जूनियर इंजीनियर पदनाम (ज्वाइनिंग से ही) मिल रहा है साथ ही जैसी प्रमोशन पॉलिसी सब जगह है हम लोग भी तो वही मांग रहे हैं हम कोई अलग से नहीं मांग रहे, कुछ अधिक नहीं मांग रहे हैं फिर भी इस प्रकार से लटकाना कहीं ना कहीं कंपनी का नुकसान करना ही दर्शाता है। जबकि हम डिप्लोमा इंजीनियर हमारी पूरी क्षमता के साथ कंपनी के प्रत्येक जिम्मेदारी को लेते हुए उत्पादन के लक्ष्य को प्राप्त करने में अपना सर्वोच्च लगा दे रहे हैं। यदि प्रबंधन हमें सम्मानजनक पदनाम जल्द नहीं देता है तो आने वाले समय में डिप्लोमा इंजीनियर उग्र कदम उठाने के लिए बाध्य होंगे जिसकी पूरी जवाबदारी उच्च प्रबंधन की होगी।
चिदंबर राव
राजेश साहू ने इस्पात मंत्रालय द्वारा 1 मई 2017 को जारी एक आदेश (No. 8(37)/2016-SAIL-PC, Government of India, Ministry of Steel, SAIL Division, Udyog Bhavan, New Delhi) की प्रति दिखाते हुए कहा कि इस आदेश में साफ-साफ लिखा गया है कि SAIL के डिप्लोमा इंजीनियर को BHEL और BSNL की तर्ज पर जूनियर इंजीनियर पदनाम प्रदान किए जाने की कार्यवाही की जावे, किन्तु इस्पात मंत्रालय के इतने स्पष्ट आदेश के बावजूद डिप्लोमा इंजीनियर को आज तक जूनियर इंजीनियर पदनाम नहीं दिया गया है, जो दिखाता है कि प्रबंधन इस्पात मंत्रालय के आदेश को भी नकारता रहा है, जिसके कारण डिप्लोमा इंजीनियर्स काफी हतोत्साहित हुए हैं। लौह अयस्क खदान समूह के डिप्लोमा इंजीनियर्स द्वारा सम्मानजनक पदनाम न दिए जाने के मुद्दे को इस्पात मंत्री के समक्ष उठाने का निर्णय ले चुके हैं और जल्द ही इस्पात मंत्री को इस संबंध में ज्ञापन देंगे।