देश में जब से कोरोना महामारी आई है तब से निजी अस्पतालों की चांदी हो गई है कोरोना इलाज के नाम पर मरीजों को अनाप शनाप बिल थमाया जा रहा है | छत्तीसगढ़ सरकार ने सभी निजी अस्पतालों में कोरोना मरीजों के इलाज के लिए अधिकतम खर्च की सीमा तय की हुई है उसके बावजूद सरकार इन अस्पतालों पर लगाम कसने में असफल नजर आ रही है | निजी अस्पताल सीधे सीधे दलाली के धंधे पर उतर आये है सीधे शब्दों में कहे तो जिंदगी का सौदा |
राजधानी रायपुर में कोरोना के इलाज के नाम पर खुलेआम लूट कि घटना सामने आई है जिसे बीजेपी नेता गौरीशंकर श्रीवास ने स्टिंग ऑपरेशन कर भाटागांव में स्थित लक्ष्मी केयर सुपर स्पेशियालिटी हॉस्पिटल का काला सच सामने लाया है कि किस प्रकार मरीजों की जिंदगी के साथ सौदा किया जाता है |
रायपुर का यह निजी अस्पताल कोरोना मरीज को भर्ती करने से पहले ही 3.50 लाख की मांग कर रही है और यदि मरीज को वैंटीलेटर या आईसीयू की दरकार रही तो फीस बढ़कर 5 लाख रुपये और वह भी नकद, अस्पताल प्रबंधन चेक लेने के तैयार नहीं | अब देखना यह है शासन द्वारा क्या कार्यवाही की जाती है |
दल्लीराजहरा – डौंडी ब्लॉक में कोरोना का दूसरा चरण बहुत ज्यादा घातक साबित हो रहा है और दल्लीराजहरा में तो ऐसा कोई वार्ड अछूता नहीं जहाँ कोरोना संक्रमित मिल ना रहे हो | लॉकडाउन के बावजूद इस प्रकार कोरोना के संक्रमण में तेजी यह कह पाना मुश्किल है कि ये जो चल रहा है वह कोरोना का दूसरा चरण है या तीसरा | अब तो केंद्र सरकार द्वारा भी लॉकडाउन का निर्णय राज्य सरकार पर छोड़ दिया गया है | लॉकडाउन कोई भी लगाया चाहे वह राज्य हो या जिला प्रशासन जब तक हम और आप घर पर लॉकडाउन न हो जाए इस गति को कोई नहीं रोक सकता |
डौंडी ब्लॉक में डौंडी एवं आसपास के क्षेत्र एवं दल्लीराजहरा में वार्डवार मिले संक्रमितों कि जानकारी इस प्रकार है –
|| विशेष अनुरोध – सिटी मीडिया नगर के समस्त नागरिकों एवं पाठकों से अनुरोध है कि सोशल डिस्टेसिंग एवं मास्क का सदैव उपयोग करें और फिर से कोविड को महामारी का रूप न लेने दे ||
जगदलपुर। बस्तर के जंगलों में माओवादियों व सुरक्षा बलों के बीच शह-मात के खेल में माइंडगेम चल रहा है। माओवादियों द्वारा सितंबरअक्टूबर के बीच से अप्रैल तक अपहरण कर हत्या करने के की मामले सामने आ रहें हैं और इन सबके बीच सुरक्षा बलों द्वारा माओवादियों को मौत के घाट उतारा जा रहा हैं। माओवादी संगठन व सुरक्षा बलों द्वारा विज्ञप्ति जारी कर एक-दूसरे को दोषी ठहराया जा रहा है।इन दोनों के पाटों के बीच बस्तर के लोग पीस रहें हैं। बस्तर में वामपंथी माओवादियों का एरिया सिकुड़ता जा रहा है और पुलिस के हौसले बुलंद हैं।भले ही तर्रेम जैसी घटनाओं के कारण सुरक्षा बल बैकफुट पर आ गए हैं किंतु टीसीओसी के दौरान भी सुरक्षा बलों को रणनीतिक के तहत् बदनाम करने माओवादियों द्वारा माइंडगेम खेल रहें हैं। माओवादियों के प्रवक्ता विकल्प ने कथित तौर पर ड्रोन हमले की विडियो जारी की तो क्षण भर में पुलिस महानिरीक्षक पी. सुंदरराज ने अफवाह बता दिया जिसके कारण इस बात का बाजार गर्म है कि दोनों शह-मात का खेल खेल रहें हैं।
ज्ञात हो कि सीआरपीएफ के जम्मू-कश्मीर के जवान को छोड़कर मानवतावादी होने का प्रमाण उन्होंने किया किन्तु जिस प्रकार बस्तर के सिविलियन वह जवानों को मार दोहरा चरित्र उजागर कर रहें हैं जिससे उनकी युक्तियां उन पर भारी पड़ रहा है या युं कहें अपनी दखल साबित करना चाह रहें हैं।
संयुक्त खदान मजदूर संघ दल्ली राजहरा के सचिव कामरेड कमलजीत सिंह मान एवं कार्यालय सचिव राजेश कुमार साहू ने कोरोना महामारी के बढ़ते फैलाव में खदान में कार्यरत नियमित एवं ठेका श्रमिकों की समस्याओं से अवगत कराने बाबत मांग पत्र सौंपा श्रीमान मुख्य मुख्य महाप्रबंधक खदान आई ओ सी राजहरा को मांग पत्र में कहा गया कि प्रबंधन से यह मांग है कि राजहरा के अंदर ही कोविड-19 से संक्रमित कर्मचारियों का उपचार होना चाहिए जिसमें की ऑक्सीजन युक्त बेड एवं आई सी यू जैसी सुविधाएं हो ऑक्सीजन लेवल कम होने पर रेमडेसीविर इंजेक्शन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो यह व्यवस्था माइंस हॉस्पिटल राजहरा मैं इसलिए होनी चाहिए कि इस बीमारी का अंत कब होगा किसी को भी पता नहीं है |
खदान प्रबंधन को चाहिए कि खदानों में भी काफी संख्या में कर्मचारी कोविड-पॉजिटिव पाए जा रहे हैं इसलिए सभी विभागों में रोस्टर व्यवस्था से कार्य कराकर कर्मचारियों को राहत देने का कार्य करना चाहिए |
प्रबंधन ने यह भी मांग की गई थी कि प्रत्येक विभाग में ठेका श्रमिक उत्पादन कार्य में लगे हैं इन कर्मचारियों एवं उनके परिवार के सदस्यों का कोविड- पॉजिटिव पाए जाने पर उन्हें छुट्टी की कोई सुविधा नहीं है इन ठेका कर्मचारियों को भी कोरोना पॉजिटिव होने पर छुट्टी का लाभ प्रदान करने का आदेश प्रबंधन जारी करें |
सचिव कमलजीत सिंह मान ने कहा कि हमारी प्रबंधन से अपील है कि कोरोना के प्रकोप को रोकने एवं खदान कर्मचारियों के बेहतर इलाज की स्थानीय स्तर पर लंबे समय के लिए व्यवस्था की जाए यदि 7 दिनों के भीतर प्रबंधन इस पर कोई ठोस पहल नहीं करता है तो कर्मचारी सीधी कार्यवाही करने के लिए बाध्य होंगे जिसकी संपूर्ण जवाबदारी प्रबंधन की होगी |
गुंडरदेही। भारतीय जनता पार्टी के मंडल अध्यक्ष दुष्यन्त कुमार सोनवानी ने कहा कि ऐसा प्रतीत हो रहा है कि प्रदेश सरकार में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और स्वास्थ्य मंत्री के बीच छिड़े सत्ता संघर्ष ने अब गैंगवार की शक्ल ले ली है और इसका खामियाजा प्रदेश भुगत रहा है। श्री सोनवानी ने कहा कि कोरोना के चलते स्थिति विकराल होने के बावज़ूदसामूहिकता की ऐसी कमी है किस्वास्थ्य मंत्री को ही भरोसे में नहीं लिया जा रहा है,कोविड को लेकर होने वाली बैठकों से स्वास्थ्य मंत्री को ही दूर रखा जाता है। यहां तक किराज्यपाल द्वारा बुलायी गयी सवर्दलीयबैठक में भी विभागीय मंत्री को सीएम बघेल ने अवसर नहीं दिया। इससे पहले खुद स्वास्थ्य मंत्री पिछले वर्ष सार्वजनिकरूप से नाराजगी जाहिर की थी।
भाजपा मंडल अध्यक्ष ने कहा कि सीएम बघेल का अहंकार सिर चढ़कर बोल रहा है। हद तो तब हो गयी जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बुलायी गयी मुख्यमंत्रियों की वचुर्अल बैठक में भी शामिल होने के बदले सीएम बघेल ने असम में चुनाव प्रचार करना अधिक ज़रूरी समझा। खुद भी नहीं आये और स्वास्थ्य मंत्री को भी उस बैठक में शामिल नहीं होने दिया। श्री सोनवानी ने कहा कि ऐसी गंभीर बैठकों को भी घृणित राजनीति की भेंट चढ़ा दिया जाता है। पिछले दिनों आयोजित सवर्दलीय बैठक में पहले कहा गया कि सभी आमंत्रितों को लिंक भेजा जाएगा, नेतागण जहां हैं वहीं से जुड़ सकते हैं लेकिन ऐन बैठक के समय सबको रायपुर जिला पंचायत भवन बुला लिया गया। श्री सोनवानी ने कहा कि यह सब इसलिए किया गया ताकि उस समय जशपुर में रहे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय बैठक में शामिल न हो सकें और उसे ही बाद में मुद्दा बनाया जाए जबकि कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम को कोंडागांव से ही बैठक में शामिल होने की सुविधा दे दी गयी। भाजपा की तरफ से फिर भी प्रदेश उपाध्यक्ष शामिल हुए लेकिन कांग्रेस, भाजपा अध्यक्ष के उपस्थित नहीं होने का कारण नहीं बताकर कांग्रेस झूठ बोलती रही।
भाजपा मंडल अध्यक्ष ने कहा कि अब जब प्रदेश सरकार को प्रदेश के बिगड़ते हालात पर त्वरित निर्णय करना चाहिए,स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने का प्रयास करना चाहिए, छत्तीसगढ़ की जनता की चिंता करनी चाहिए, तब प्रदेश सरकार और सीएम असम से आये बोडो प्रत्याशियों को शराब परोसने, उनके लिए बकरा भात की व्यवस्था में लगी है। चित्रकोट में उनके होने का खुलासा हो जाने के बाद प्रत्याशियों को अज्ञात जगह में छिपाया गया है। श्री सोनवानी ने कहा कि भाजपा द्वारा सवाल उठाने पर बड़ी हिकारत से बघेल यह स्वीकार करते हैं कि वे असम के प्रत्याशियों की मेहमाननवाजी कर रहे हैं। मुख्यमंत्री बघेल का यह जवाब शर्मनाक है कि ये सभी प्रत्याशी पहले भाजपा गठबंधन में थे। ऐसे गैर जिम्मेदार सीएम से आप और क्या उम्मीद कर सकते हैं? श्री सोनवानी ने कहा कि सरकार को चाहिए कि असम के उन प्रत्याशियों को जहां भी छिपा कर रखा गया है, उन सभी का कोविड टेस्ट कराया जाए और उसे सार्वजनिक किया जाए। ऐसे ही ज़मातियों के कारण पिछली बार छत्तीसगढ़ बुरी तरह संक्रिमत हुआ था।
भाजपा मंडल अध्यक्ष ने सवाल किया है कि शराब के सेस का पैसा मुख्यमंत्री बघेल ने असम चुनाव में खर्च कर दिया है? शराब की हर बोतल पर जो 20 रुपए कोरोना टैक्स लगाकर लोगों से वसूला जा रहा है, सेस 400 करोड़ और डीएमएफ फंड में जमा 800 करोड़ रुपये जो जमा है, उसका अभी तक कितना पैसा खर्च किया गया है, छत्तीसगढ़ की जनता जानना चाहती है। क्या ये सारे पैसे असम चुनाव में खर्च कर दिए गए हैं? उन पैसों का कोई हिसाब नहीं लेकिन मुख्यमंत्री बघेल फिर से झूठी गंभीरता दिखाते हुए ‘सीएम रिलीफ फंड’ के नाम पर राशि जुटा रहे हैं। कैम्पा फंड का बुरी तरह दुरुपयोग किया गया है, उससे नियमों को ताक पर रख लग्जरी वाहन खरीदे गए हैं। श्री सोनवानी ने कहा कि इसके अलावे केंद्र से दी गई तमाम सहायता का क्या किया गया, इसका कोई हिसाब नहीं है। इससे अधिक शर्मनाक बात क्या हो सकती है कि प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा दिए गए वेंटीलेटर को खोल कर भी इतने दिनों में नहीं देखा गया। अब जब इतनी किल्लत हुई है तो कह रहे हैं कि वेंटीलेटर खराब है। क्या सालभर में प्रदेश सरकार उनकी मरम्मत भी नहीं करा सकती थी? श्री सोनवानी ने कहा कि दरअसल केंद्र हर तरह से सहायता देने को तैयार है लेकिन इनकी नीयत वहां से केवल पैसे मांगने में है ताकि उसकी बंदरबांट ये कर सकें।
मण्डल अध्यक्ष ने कहा कि स्थानीय स्तर पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गुंडरदेही में लगातार तीन- तीन दिन , चार- चार दिनों तक कोविड 19 जांच किट का अभाव रहता है जिससे यह अस्पताल रिफर सेंटर बना हुआ है ।मरीज परेशान है और कोविड 19 वैक्सीन नियमित रूप से नही लग रहा है ।अन्य टीकाकरण केंद्रों जैसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ,उपस्वास्थ्य केंद्र में भी लगभग यही स्थिति है । वैक्सिनेसन नही होने से कोविड 19 से संक्रमित होने का भय बना रहता है ।प्राथमिक स्वास्थय केंद्रों में ऑक्सीजन सिलेंडरों एवम आवश्यक उपकरणों के अभाव के साथ साथ योग्य चिकित्सकों की कमी है । जिसके कारण कोविड 19 के अलावा अन्य बीमारियों के मरीजों को समूचित उपचार नही मिल पाता । ऐसे में सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों को इस ओर ध्यान देना चाहिये ।
मण्डल अध्यक्ष ने कहा कि गांवो को कंटेन्मेंट जोन घोषित किये है उन गाँवो में मरीजों की उचित देख भाल व इलाज नही मिल रहा है । वे मरीज मितानिन ,कोटवार ,पटवारी एवम ग्रामीण स्वास्थ्य सयोजको के भरोसे छोड़ दिये गए है । कांग्रेस के शासनकाल में अधिकारी कर्मचारी भी परेशान है और अपनी जान को जोखिम में डाल कर ड्यूटी कर रहे है उन्हें न किसी प्रकार की सुरक्षा किट उपलब्ध कराए गए है और न ही अधिक ड्यूटी के बदले अतिरिक्त वेतन भत्ता दे रहे है ।और न कोई घोषणा की है ।और न ही किसी प्रकार से उनके जीवन से सम्बंधित बीमा सुविधा प्रदान किये है । भाजपा मंडल गुंडरदेही के अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल से मांग किया है कि उपरोक्त सारी अनियमित व्यवस्था को सुधारने एवम प्रदेश के आम जनता को मूल भूत सुविधा प्रदान करने कहा
अस्पतालों में दवाईयां, बेड जैसी सुविधाओं के लिए तरस रहे लोग- लोकेश बेसरा
सर्वविदित है कि इस कोरोना महामारी ने हमारी पूरी छत्तीसगढ़ को अपनी चपेट में ले लिया है । मरीजों को अस्पतालों में न तो पर्याप्त बेड, न दवाई मिल रही है, लोग बहुत परेशान है । 15 साल की रमन सरकार से तंग आकर लोगों ने भूपेश बघेल की सरकार को चुना था , लोगों को विश्वास था कि भूपेश बघेल की सरकार में चुने हुए जनप्रतिनिधि जनता के लिए काम करेंगे लेकिन इस महामारी के समय भी हमारे स्थानीय विधायक चन्दन कश्यप अपनी जिम्मेदारी से उलट जनता की मुश्किलों का समाधान नहीं कर रहे हैं । क्षेत्र को सेनिटाइज तक नहीं किया जा रहा है ।
विधायक जनप्रतिनिधियों को लोग इसलिए चुनते हैं कि वह जनता के मुश्किलों का समाधान करेंगे, लेकिन हमारे नारायणपुर विधानसभा के विधायक चन्दन कश्यप , लोकसभा सांसद दीपक बैज जी जनता के बीच नहीं दिख रहे हैं ,इससे लोगों में इन जनप्रतिनिधियों के खिलाफ काफी रोष है ।
आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़ के सभी विधायकों ,11 लोकसभा सांसदों ,पांच राज्यसभा सांसदों से सवाल पूछती है जनप्रतिनिधि जी जनता के सवालों का जवाब दो – आप कहां हो, ऐसा तो नहीं कि अपने क्षेत्र की जनता को छोड़कर असम से आये वीआईपी नेताओं आवभगत में लीन हैं ? नारायणपुर की जनता चन्दन कश्यप जी आपसे जानना चाहती है- स्थानीय जनता की समस्या के समाधान के लिए आपने क्या- क्या प्रयास किए?
आम आदमी पार्टी भूपेश सरकार से भी सवाल पूछना चाहती है कि उन्होंने अपने चुनाव घोषणापत्र में कहा था कि शिक्षा और स्वास्थ्य पर काम करेंगे तो आज स्वास्थ्य की व्यवस्था में छत्तीसगढ़ क्यों पिछड़ा है ? क्यों लोगों को इस महामारी में बेड और दवाइयों की किल्लत झेलनी पड़ रही है ? भूपेश सरकार शराब पर लिए जा रहे अतिरिक्त शुल्क को अब शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर के शुल्क के तौर पर ले रही है, पिछले साल की तुलना में 2021 में भी भूपेश सरकार दुवारा शराब से 5 हजार करोड़ की आय का लक्ष्य रखा गया है,। जनता जानना चाहती है कि आखिर यह जनता के टैक्स का पैसा कहां खर्च हो रहा है , क्यों नहीं इन पैसों से छत्तीसगढ़ के अस्पतालों को ठीक किया जा रहा है ।
आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार से कहना चाहती है कि आपसी खींचतान जो उनके सरकारों के बीच में हो रहा है , ये सही नहीं है साथ ही भाजपा को कहना चाहती है , उनका आयुष्मान योजना देश के कई राज्यों उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश सभी में फेल हो गया है, केंद्र से छत्तीसगढ़ को मदद दिलाने की बजाय वे आयुष्मान भारत योजना का क्यों रोना रो रहे हैं ।
दल्लीराजहरा और चिखलाकसा का एकमात्र शासकीय चिकित्सालय जो इस वैश्विक महामारी में एक एम्बुलेंस के भरोसे चल रहा है | दल्लीराजहरा, चिखलाकसा एवं आसपास के क्षेत्रों में जिस प्रकार से कोरोना संक्रमितों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है काफी सोचनीय है और एकमात्र एम्बुलेंस के सहारे ही कोरोना मरीजों को आइसोलेशन सेंटर तो कभी जिला अस्पताल ले जाया जाता है | जिस कारण काफी सारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है | उक्त परिस्थिति को देखते हुए सांसद प्रतिनिधि विक्रम ध्रुवे ने जिला कलेक्टर जन्मेजय महोबे से एम्बुलेंस 108 की मांग की |
जगदलपुर – इंद्रावती टाईगर रिजर्व के कथित रेस्ट हाउस में रायपुर में पदस्थ वन विभाग का अफसर 10 दिनों से रेस्ट हाउस में डेरा जमाये हुए है। विभाग के जिम्मेदार अफसर दे रहे गोल मोल जवाब। इंद्रावती टाईगर रिजवं विभाग के अफसरों को रूकने के लिए विभाग द्वारा एक कथित रेस्ट हाउस बननाया गया है जहां बकायदा चौकीदार की ड्यूटी लगाई गई है। उक्त रेस्ट हाउस में आने-जाने वालों को किसी प्रकार कोई पंजी नहीं बनाई गई है। इस रेस्ट हाउस में कब कौन आता है और कब जाता है जिसका किसी प्रकार का उल्लेख नहीं होता। वर्तमान में उक्त रेस्ट हाउस में विगत 10 दिनों से रायपुर में पदस्थ वन विभाग का एक अफसर 10 दिनों से डेरा जमाये हुए है जबकि उक्त रेस्ट हाउस में ठहरने को लेकर जिला प्रशासन के पास कोई जानकारी नहीं है। जबकि नियमों के अनुसार कोरोना के इस संक्रमणकाल में बाहर से आने वाले व्यक्तियों को कोरोना जांच अनिवार्य किया गया है वहां ठहरे अधिकारी की कोरोना जांच हुई की नहीं बताने वाला कोई नहीं।
सीसीएफ दिया गोलमाल जवाब: इंद्रावती टाईगर रिजवं विभाग के सीसीएफ श्री श्रीवास्तव से रेस्ट हाउस के संबंध में जानकारी चाही तो उन्होंने कहा कि विभाग के एक अधिकारी रायपुर से जगदलपुर आये थे जिनके परिवार में कोरोना संक्रमित होने के कारण वे यहां रूके है जबकि उनसे पूछा गया कि क्या उनका कोरोना टेस्ट कराया गया है तब साहब गोलमोल जवाब देते हुए फोन ही काट दिया और जवाब देने से बचते रहे।
प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संक्रमितों को मदद करने राजनीतिक दलों को हाथ बढ़ाने की दरकार
सत्ता-विपक्ष के लिए परीक्षा की घड़ी आगामी चुनाव में मुसीबतों का सहारा आयेगा काम
जगदलपुर कोरोना संक्रमण की दूसरी विस्फोट से जहां प्रदेश के अन्य जिलों की तहर बस्तर संभाग के लोग भी अछूते नहीं है। विस्फोट का कहर शहर से लेकर गांव तकट पडा है वहीं सत्ताधारी दल एवं विपक्षिय दल के नेता आरोप प्रत्यारोप लगाने को लेकर अपनी काबिलियत समझ रहे है। यह समय आरोप प्रत्यारोप लगाने का नहीं प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर प्रभावित परिवारों को मदद करे में हाथ बढ़ाने का है। राजनीति दलों के लिए जनता के समझा अग्नि परीक्षा का यही सही वक्त है। जनता के मुसीबतों में राजनीतिक दल सही साथ निभाने में कामयाब हए तो जनता आगामी चुनावी में भी उसी पार्टी को आशीवाद देगी। आरोप प्रत्यारोप को राजनीतिक चलती रही तो जनता सब देख रही है वक्त आने पर लोग हिसाब लेंगे। राजनीतिक दल जिस प्रकार बूथ लेबल पर अपना सिपाही तैयार कर एक दूसरे को परास्त करने में पूरी ताकत झोंक करते है उसी प्रकार इस संक्रमणकाल में भी राजनीतिदलों को टीम तैयार कर प्रशासन के सहयोग के लिए देने की दरकार है।
ज्ञातव्य हो कि कोरोना संक्रमण की बढ़ते आंकड़ों को लेकर सत्ताधारी दल एवं विपक्ष के नेता एक दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे है जहां विपक्षीय दल के नेता कोरोना संक्रमण का आंकड़ा बढ़ने को लेकर राज्य सरकार को दोषी मान रहे है तो छग में सत्ताधारी दल के लापरवाही के कारण हालात बदतर होने का , इंजेक्शन की कालाबाजारी तो ऑक्सीजन की कमी का आरोप लगाया जा रहा है। केन्द्र सरकार के प्रयासों का भाजपा के नेता तारीफों के पुल बांधने में लगे है तो वहीं सत्ताधारी दल के नेता भी केन्द्र की उदासिनता के कारण संक्रमण फैलने का आरोप लगा रहे है। सत्ताधारी दल के नेता यह आरोप लगा रहे है कि भाजपा दहशत फैलाने की राजनीति कर रही है। कांग्रेस का यह आरोप कि केन्द्र सरकार जिम्मेदारी के साथ काम नहीं कर रही है। इस प्रकार देश की दो बड़ी पार्टियां ऐसे कई आरोप प्रत्यारोप लगाने में उलझे है और जनता किसकी बात सही माने।
यह वक्त एकजुटता दिखाने का:संक्रमण के इस घड़ी में आरोप प्रत्यारोप लगाने का वक्त नहीं बल्कि दोनों पार्टियों को एकजुटता दिखाते हुए जनता का सहयोग करने का समय है जिस प्रकार राजनीतिक दल चुनाव के समय जनता को वोट बैंक के लिए मदद किया करती है आज वैसे ही मदद करने का वक्त आ गया है।
प्रशासन का बने सहयोगी: प्रशासनिक अफसर जो आज अपनी जान की परवाह किये बिनो शहर से लेकर गांव तक जनता को हर सुविधा मुहैय्या कराने को लेकर जी-जान से लगे है प्रशासन के इस प्रयास में आरोप प्रत्यारोप लगाने वाले राजनीतिक दलों को सहयोग करने के लिए प्रशासन के समक्ष हाथ बढ़ाने की दरकार है।
प्रशासन के द्वारा शुरू किये गये क्वारेंटाईन सेंटर के लिए राजनीतिक दल सक्रिय कार्यक्रताओं की टीम उपलब्ध कराती है तो प्रशासन के लिए बड़ा सहारा होगा। आज आलम यह है कि कई क्वारेटाईन सेंटर में अव्यवस्था का आलम है।
आरोप प्रत्यारोप लगाने वाले नेतागण उन स्थानों का मुआयना कर व्यवस्था बहाल करने में प्रशासन की मदद करने में हाथ बलाते है तो जनता कही न कही ऐसे राजनीतिक दलों को याद रखेगी और वक्त आने पर आशीर्वाद भी देगी |
बीजापुर@यह तस्वीरे बीजापुर जिले के भैरमगढ़ ब्लाक की है, जहाँ कोविड टीकाकरण को लेकर स्वास्थ्य अमला युद्धस्तर पर जुटा हुआ है। यहाँ इंद्रावती नदी के पार अबूझमाड़ का इलाका शरू होता है। “अबूझमाड़” जिसे नक्सलियों की अघोषित राजधानी भी कहा जाता है, इस दुरूह इलाके में जहाँ ना सड़क, ना पुल-पुलिये और ना ही मोबाइल कनेक्टिविटी है, ऐसे दुर्गम, संवेदनशील इलाकों में स्वास्थ्य कार्यकर्ता जोखिम उठाकर अपनी ड्यूटी पूरी कर रहे हैं। मंगलवार को भैरमगढ़ से हेल्थ टीम टाकिलोड के लिए रवाना हुई, जिसमे हेल्थ वर्कर, चिकित्सक और मितानिन शामिल थी । करीब 22 किमी का फासला पैदल और नाव से तय करने बाद हेल्थ टीम गाँव पहुँची। यहाँ 200 ग्रामीणों का स्वास्थ्य जांच के अलावा 60 ग्रामीणों को कोरोना का टीकाकरण भी किया गया।
भैरमगढ़ से माड़ के इस इलाके में दाखिल होने इंद्रावती को पार करने की चुनौती के बाबजूद स्वास्थ्य अमला जान की परवाह किये बिना जज्बे के साथ डोंगी पर सवार होकर इलाके में दाखिल हो रहे है और पिछड़े, निरकछर इस इलाके में बसे गाँव के बाशिंदों को कोरोना के प्रति जागरूक करते टीका लगाने प्रेरित कर रहे है, वो भी प्रतिकूल हालातों में।