जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के मरवाही विधानसभा उपचुनाव की अंतिम गिनती शुरू हो गया है और इसके लिए सभी पार्टियों द्वारा पूरी ताकत झोंक दिया है। इसी तारतम्य में बस्तर के आदिवासी नेता व भाजपा प्रदेश प्रवक्ता केदार कश्यप भी प्रत्याशी गंभीर सिंह दमखम से ताकत झोंके हुए हैं। भाजपा प्रत्याशी डॉ.गंभीर सिंह के पक्ष में उषाड़,बेलझिरिया में आयोजित जनसभा को प्रदेश प्रवक्ता व पूर्व मंत्री केदार कश्यप ने संबोधित किया और कहा कि प्रदेशवासियों के साथ धोखा करने वाली भूपेश सरकार को जवाब देने का समय आ गया है और मरवाही की जनता का अपार समर्थन देखकर मुझे विश्वास है कि मरवाही में कमल का खिलना निश्चित है।
दिव्यांग युवक को घर पहुंच कर संसदीय सचिव ने दिया इलेक्ट्रॉनिक ट्रायसायकल
जगदलपुर। विवेकानंद वार्ड के देवचंद नाग पिता सुकरु नाग जोकि दिव्यांग हैं और उनको चलने-फिरने में तकलीफ होती थी जिसकी जानकारी मिलते ही संसदीय सचिव रेखचंद जैन दिव्यांग के घर पहुंचे और इसकी स्थिति को देखते हुए तत्काल समाज कल्याण विभाग के उपसंचालक से चर्चा करते हुए तत्काल बैटरी चलित ट्रायसायकिल मंगाकर वितरित किया। संसदीय सचिव रेखचंद जैन ने बताया कि जरुरतमंद दिव्यांगजनों को भूपेश बघेल सरकार के मंशानुरूप हर प्रकार की सहायता प्रदान करना प्राथमिकता है। जागरुक पार्षद पंचराज सिंह ने यह जानकारी उपलब्ध कराई जिसके बाद साथियों के साथ मिलकर दिव्यांगजन को ट्रायसायकिल वितरित किया गया। दिव्यांग देवीचंद नाग ने भी ट्रायसायकिल चलाकर देखा। दिव्यांग देवीचंद नाग ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल,संसदीय सचिव रेखचंद जैन व कांग्रेस पार्टी का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। इस दौरान सुशीला बघेल, कौशल नागवंशी, युवक कांग्रेस जिलाध्यक्ष जीशान कुरैशी, आईटी सेल प्रदेश महासचिव योगेश पानीग्राही, समाजसेवी अम्बरीष सिंह भी उपस्थित थे।
बंगाली समाज दल्ली राजहरा द्वारा शरद पूर्णिमा में “कोजागरि लक्ष्मी पूजा” का आयोजन किया गया।
दल्ली राजहरा – प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी दल्ली राजहरा बंगाली समाज द्वारा 30 अक्टुबर 2020 को संध्या 7:00 बजे रविन्द्र ग्रन्थागार के प्रांगण में विजयादशमी (दशहरा) के ठीक 5 दिन बाद शरद पूर्णिमा में “कोजागरि लक्ष्मी पूजा” का आयोजन किया गया।

इस वर्ष कोविड-19 महामारी को देखते हुए समिति ने समिति संख्या में व बिना महाप्रसाद वितरण के सोशल डिस्टेन्शिग के नियमों का पालन करते हुए व मास्क तथा सेनेटाईजर का उपयोग कर लक्ष्मी जी की छोटी सी प्रतिमा का अनावरण किया। इस कार्यक्रम के मुख्य

अतिथि नगर पालिका अध्यक्ष शीबू नायर जी व समाज के अध्यक्ष तपन सूत्रधार जी ने पुरोहित द्वारा धूप अगरबत्ती व जलाकर पूजा कर दीप प्रज्जवलीत कर पूजा आरम्भ किये। विशिष्ट अतिथि श्री कार्यकारी अध्यक्ष श्री एन.के.मण्डल जी व डॉ. शैवाल जाना, प्रशांत बोकड़े प्रदेश सचिव थे।

“कोजागरि लक्ष्मी पूजा” बंगाली समाज द्वारा विगत 62 वर्षों से निरंतर आयोजित किया जाता है। इस त्यौहार के मनाने के पीछे रिवाज यह है कि किसान जब अपने फसलों को पकने के बाद अपने घरों में लेकर आते हैं और उसे कोठी में भर कर साल भर के लिये अन्न की पूर्ति करते हैं। और बचे हुए फसल को बेचकर कर अपने पास धन जमा कर, अपने परिवार के साथ धान की बाली व कमल का फूल और माता के पंजा का आकार बना कर गाना गाया जाता है। ” ओसो माँ लक्ष्मी, वोसो घोरे” आमर घोरे थाको ऑलोकोरे”प्रसिद्ध गीत गाया जाता है।इसके बाद लोगों के बीच खीर पूढी व नारियल का लड्डू का भोग सभी को दिया जाता है।

इस “कोजागरि लक्ष्मी पूजा” कार्यकम को पूर्ण रूप से सफल बनाने में समाज के अध्यक्ष का कुशल नेतृत्व व सफल मार्गदर्शन में सभी नियमों का पालन करते हुए समाज के सभी महिलायें व पुरूष समितियों का विशेष योगदान रहा। प्रमुख रूप से महिला समिति की अध्यक्षा श्रीमती पुरोवी वर्मा, उपाध्यक्ष श्रीमती रीना पड्या, रेखा डे काकी माँ, संगीता बेरा, सोमिता घोष,

शिल्पी राय, अर्पणा चकवर्ती, अंजना पति. जोवा करफा, अंजू दास, गुलाबी मण्डल, श्रीमती सरकार, श्रीमती ठाकुर सहित महिला समिति के सदस्यगण उपस्थित थे।समिति के पुरूष सदस्यों में गौतम बेरा, गगन पडया, कनके बैनर्जी, शोभन चकवर्ती, एस.सी.सरकार, सपन चकवर्ती गौतम मायती,सजल पिंक डे, चन्द्रशेखर मण्डल, हरिठाकुर विश्वास, पिन्टू चकवर्ती, तरूण चंद्रा, रूपक दास उपस्थित राम महामार्ग
थे।
आज से शुभारंभ: संजय बाज़ार में लगेगी शिवसेना की सस्ते दाम की आलु – प्याज़ की दुकान
● बाज़ार में 80 रु. किलो तक बेची जा रही प्याज़, शिवसेना के स्टॉल में होलसेल क़ीमत पर उपलब्ध
● 01 नवम्बर से 10 नवम्बर तक शिवसेना लगाएगी विभिन्न वार्डो में सस्ते दाम की दुकान
जगदलपुर । देशभर में प्याज़ और आलू की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी का असर जब बस्तर के रसोई तक पहुंचा तो इसके दाम में प्रशासनिक नियंत्रण की मांग शिवसेना द्वारा उठाई गई। केंद्र सरकार की विफल आयात निर्यात नीति और किसानों की दुर्दशा के कारण सामान्य बाज़ार में प्याज़ और आलू की आवक में बाहरी कमी आई जिस कारण बाज़ार में इसकी क़ीमत आसमान छू रही है। जिसका खामियाजा आज प्रधानमंत्री को चुनने वाली जनता को ही उठाना पड़ रहा है।
बस्तर संभाग के गृहणियों को मेंहगाई से कुछ राहत दिलाने के उद्देश्य से शिवसेना के प्रदेश प्रमुख धनजंय सिंह परिहार के आदेश पर राज्य भर में शिवसैनिकों द्वारा अलग अलग ज़िलों में सस्ते आलू और प्याज़ की दुकान लगाई जा रही है। उन्होंने बताया कि बस्तर में कार्यक्रम के शुभारंभ के दिन विशेष रूप से शिवसेना ने महासचिव चंद्रमौली मिश्रा उपस्थित रहेंगे।
गौरतलब होकि प्याज़ और आलू की बढ़ती कीमतों से महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी होती है क्योंकि इससे घर का आम बजट बिगड़ जाता है।
शिवसेना के युवा इकाई के प्रदेश सचिव अरुण पाण्डेय् ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से जगदलपुर में प्याज़ 80-90 रुपये प्रतिकिलो और आलू 50-60 रुपये प्रतिकिलो तक बेची जा रही है।
युवासेना के प्रदेश सचिव अरुण पाण्डेय् ने बताया कि शिवसेना सामान्य जनता और ग़रीब किसानों मज़दूरों की पार्टी है जो आम नागरिकों के समस्या को समझती है। प्रशासन द्वारा बढ़ें हुए दाम पर प्रतिबंध लगाने उनकी मांग पर कलेक्टर ने हेल्पलाइन नम्बर भी जारी किया है, लेकिन बाज़ार में आलू प्याज़ के क़ीमतों में कमी नही आई है।
बस्तर की आम जनता को बढ़ती मेंहगाई से राहत दिलाने शिवसेना सस्ते आलू प्याज़ की दुकान राज्योत्सव के दिन से शुभारंभ कर रही है। प्रथम दिन शिवसेना का स्टॉल स्थानीय संजय बाज़ार पर लगाई जाएगी, इसके बाद विभिन्न वार्डो में यह स्टॉल लगाई जाएगी जहां आम नागरिकों को बाज़ार भाव से काफ़ी सस्ते में आलू प्याज़ उपलब्ध कराया जावेगा।
● सस्ते आलू प्याज़ की ख़रीदी के लिए स्वयं का थैला लेकर आना ज़रूरी
पॉलिथीन बंदी और पर्यावरण प्रेम को बढ़ावा मिले इस कारण शिवसेना अपने स्टॉल पर पॉलीथिन का इस्तेमाल नही करेगी। इसके लिए उन्होंने आम नागरिकों को स्वयं के साथ थैला लेकर आने की सलाह दी है।
● बिना मास्क के नही मिलेगी सस्ती आलू प्याज़
शिवसेना के तऱफ से साफ़ संदेश दिया हैकि कोरोना प्रोटोकॉल का पालन कड़ाई से करना ही कोरोना के ख़िलाफ़ जंग में जीत सुनिश्चित करेगी। अतः आम नागरिकों से संगठन ने अपील किया हैकि कोरोना प्रोटोकॉल के अनुसार ही सस्ते आलू प्याज़ के स्टॉल में पहुंचे और मास्क लगाए तथा पर्याप्त समाजिक दूरी बनाकर ही ख़रीदी करें।
लघु फिल्म के जरिये ग्रामीणों ने देखी सीआरपीएफ की गौरव गाथा, पातरपारा में 199 बटालियन के आयोजन में पहुंचे ग्रामीण
बीजापुर। गत 29 अक्टूबर को 199 बटालियन केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल मुख्यालय पातरपारा के प्रांगण में देश के सबसे बड़े तथा पुराने अर्धसैनिक बल एवं जनता के बीच में अच्छे तथा मधुर संबंध स्थापित करने के उद्देश्य से कार्यक्रम आयोजित किया गया । जिसमे आसपास के रिहायशी इलाकों से ग्रामीणों को आमंत्रित किया गया। जिसका प्रयोजन गांव वालों तथा दूर दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को सीआरपीएफ के बारे में जानकारी देना था।
सीआरपीएफ की महान संस्कृति तथा गौरवमई इतिहास की जानकारी देकर लोगों को खुद से जोड़ना था । लोगों को सीआरपीएफ द्वारा किए गए ऐतिहासिक एवं पराक्रम के कार्यों पर आधारित एक लघु कथा-चित्र डॉक्यूमेंट्री परिसर में मौजूद शहीद महादेव पाटिल ओपन एयर थिएटर में मौजूद जनता के लिए प्रदर्शित किया गया । आयोजित कार्यक्रम में बल के द्वारा देशहित, जनहित तथा समाज हित में किए गए कार्यों के बारे में भी जानकारी देकर लोगों को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के प्रति सम्मान-भाव तथा लोगों को इस बल से भावनात्मक रूप से

जुड़ने के लिए प्रेरित किया गया। ग्रामीणजनों को 21 अक्टूबर 1950, 9 की हॉट स्प्रिंग लद्दाख की घटना 9 अप्रैल 1965 की सरदार पोस्ट की घटना तथा 13 दिसंबर 2001 को संसद में आतंकी हमले की घटना को नाकाम करने में बल की भूमिका को डॉक्यूमेंट्री के रूप में बड़े पर्दे पर दिखाया गया । इस मंच के माध्यम से लोगों में बल के प्रति जागरूकता पुलिस-जनता में मधुर संबंध बनाए रखने का केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की 199 बटालियन द्वारा किया गया यह प्रयास भविष्य में लोगों को पुलिस बल को नजदीक से समझने तथा जुड़ने में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा । इस दौरान कमांडेंट लालचंद यादव, सेकेंड इन ऑफिसर देवेंद्र सिंह पाल , सुनील कुमार रंजन, उप कमांडेंट अरुण कुमार तिवारी,के एम बैजू मौजूद रहे ।
माओवादियों की लड़ाई में पुलिस ने मांझी व चालाकियों से मांगा अप्रत्यक्ष सहयोग
जगदलपुर। वामपंथी उग्रवाद प्रभावित बस्तर संभाग माओवादी समस्याओं से जूझ रहा है और राज्य सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए एक कारगर रणनीति बनाई है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने प्रथम बस्तर प्रवास पर आए थे तो पत्रकारों को बताया कि माओवादियों के खिलाफ कार्रवाई में पीड़ित, आत्मसमर्पित नक्सलियों, शहादत हुए जवानों से बैठकर माओवादियों से लड़ने की नीति बनाई जाएगी। इसी तारतम्य में बस्तर रेंज पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी की पहल पर बस्तर पुलिस द्वारा”बस्तर ता माटा” कार्यक्रम के तहत कई कार्यक्रम आयोजित कर रहें हैं। इसी परिपेक्ष्य में पुलिस जनता की सुख-दु:ख में जुड़कर पुलिस के प्रति जनता के समक्ष छवि सुधारने के सकारात्मक परिणाम मिल रहा है और माओवादियों से लड़ाई में पुलिस को लगातार सफलता मिल रही है।
बस्तर आईजी पी.सुंदरराज के बस्तर संभाग के मांझी एवं चालकियों के सम्मान कार्यक्रम में अपने-अपने परगना से संबंधित परिस्थिति को अवगत कराते हुये बस्तर संभाग के सातों जिलों में पुलिस एवं सुरक्षाबल द्वारा जनता के विश्वास अर्जित करने हेतु की जा रही सकारात्मक पहलुओं की सराहना की गई। पुलिस अधीक्षक बस्तर दीपक झा द्वारा समस्त मांझी एवं चालकियों को उपहार भेंटकर सम्मानित करते हुये सभी क्षेत्र की सुरक्षा एवं विकास कार्यों के प्रति सकारात्मक विचार एवं सुझाव देने हेतु आभार प्रकट किया गया।कुल मिलाकर पुलिस माओवादियों से लड़ने में अप्रत्यक्ष रूप से मांझी-चालकियों से अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग मां ग रही है।
व्यापारी से सांठगांठ कर, प्रभारी चला रहा कमीशन खोरी का खेल, वर्षों से पदस्थ इस प्रभारी के कार्यकलाप से हलाकान पंचायत वासी
जगदलपुर:छत्तीसगढ़ दुग्ध महासंघ की बस्तर इकाई जिसे जगदलपुर शहर से दूर सेमरा ग्राम पंचायत में स्थापित किया गया है। इस औद्योगिक इकाई को बस्तर में स्थापित करने के पीछे उद्देश्य यही था कि इस पंचायत के लोगों को रोजगार मिले एवं जिले के लोगों को सरकारी देवभोग दुग्ध प्रतिष्ठान के माध्यम से शुद्ध एवं ताजा दूध उपलब्ध हो सके।
लेकिन पिछले अविभाजित मध्यप्रदेश के जमाने में करोड़ो रुपए की लागत से बना यह दुग्ध संयंत्र अब लगभग बंद होने की कगार पर है।सेमरा ग्राम पंचायत के ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 1989-90 में सांची दुग्ध के नाम से इस संयंत्र के माध्यम से दुग्ध का प्रसंस्करण कर दूध की पैकेजिंग के अलावा दूध से बनने वाले अन्य वस्तुओं का निर्माण एवं उसकी बिक्री सुचारू रूप से की जाती थी।
समूचे बस्तर जिले के विभिन्न विकास खंड से दूध का संग्रहण किया जाता था। साथ ही साथ क्षेत्र के पशुपालकों को उनके पशुओं द्वारा दूध के उत्पादन विकास हेतु विभिन्न प्रकार की योजनाएं भी संचालित की जाती थी। जिससे ग्राम पंचायत के लोगों को इस औद्योगिक इकाई लगने का फायदा मिलता था।
किंतु छत्तीसगढ़ निर्माण के बाद भारतीय जनता पार्टी के कार्यकाल के दौरान दुग्ध महासंघ का पुनर्गठन किया गया।जिमसें अध्यक्ष रसिक परमार के बनने के साथ ही समस्त इकाइयों में नए प्रभारी की नियुक्ति हुई।
मिली जानकारी के अनुसार सेमरा स्थित देवभोग दुग्ध इकाई प्लांट के प्रभारी के रूप में जब से वर्तमान प्रभारी की नियुक्ति हुई है ।उसके पश्चात से ही इस इकाई का दोहन राजधानी के दुग्ध महासंघ अधिकारियों द्वारा किए जाने लगा है। इस इकाई से प्रतिदिन 8000 लीटर दूध की खरीद बिक्री होती थी।
गौपालकों की उपेक्षा कर व्यापारी से साठगाँठ
इस प्रभारी अधिकारी ने अपने पद स्थापना के बाद से इसमें स्थानीय गौपालको की उपेक्षाकर बाहर से दुग्ध मंगाना प्रारंभ कर दिया ।साथ ही इसके द्वारा ग्राम पंचायत की किसानों की उपेक्षा कर शहर के बड़े व्यापारियों को अपने निश्चित कमीशन के बदले दुग्ध की खरीद बिक्री का काम दे दिया गया। जो अब तक अनवरत जारी है।
देवभोग दुग्ध इकाई सेमरा से प्रतिदिन करीब 5000 लीटर दूध की आवक कांकेर जिले के पखांजूर क्षेत्र से होती है। इस दूध की पैकेजिंग सहित खुली बिक्री के तहत करीब 3000 लीटर दूध इस प्रभारी द्वारा अपने एक चहेते दुग्ध संचालक को दे दिया जाता है। बाकी बचे दूध को बस्तर के बाहर कुछ विभिन्न जगहों पर औपचारिकता के तौर पर भेजा जाता है।
वहीं कुछ दूध से पनीर अथवा दूध से दही बनाया जाता है।प्रतिदिन देवभोग की सेमरा इकाई के माध्यम से दूध की बिक्री अथवा उससे बनने वाले पदार्थों की बिक्री से करीब डेढ़ से दो लाख रुपए की आवक होने की संभावना बनती है।
प्रभारी ने बेरोजगारी बढ़ाया और खुद मलाई खाया
किंतु इस प्रभारी के माध्यम से अपने कार्यकाल से आज तक इस ग्राम पंचायत के बेरोजगारों के लिए किसी प्रकार की दुग्ध से संबंधित किसी भी प्रकार के रोजगार हेतु क्षेत्र के बेरोजगार महिला पुरुष को प्रोत्साहित नहीं किया जा रहा है।बल्कि इस प्रतिष्ठान की साख को गिराकर बस्तर जिले के अन्य निजी दूध एजेंसी को प्रोत्साहित किए जाने की बात सामने आ रही है।
यह भी जानकारी मिली है कि इस दुग्ध इकाई से जुड़े मार्केटिंग कर्मचारी जो पिछले कई महीनों से यहां पदस्थ हैं वे अपने दूध इकाई की मार्केटिंग नहीं करके दूसरे दुग्ध इकाइयों की मदद करते हैं। देवभोग दुग्ध इकाई प्रभारी के इस संयंत्र के माध्यम से ग्राम पंचायत एवं वहां के निवासियों को किसी भी प्रकार से प्रोत्साहित नहीं किए जाने की बात पर कई बार इस प्रभारी एवं पंचायत के प्रतिनिधि के बीच बातचीत हुई।किंतु इस प्रभारी के असहयोग पूर्ण रवैये के कारण आज तक इस औद्योगिक इकाई के माध्यम से पंचायत का विकास नहीं हो पाया।
सरकार बदली है तो प्रभारी क्यों नही ?
अब बदले राजनीतिक परिवेश में जब कांग्रेस की सरकार है। इस पंचायत के लोगों में विश्वास जाग उठा है कि अगर इस देवभोग दुग्ध इकाई के प्रभारी को हटाकर किसी ऊर्जावान अधिकारी को मौका दिया जाए तो इस जर्जर दुग्ध प्रतिष्ठान का कल्याण संभव हो सकता है। इन्हीं पंचायत के प्रतिनिधियों ने बताया कि वर्तमान देवभोग दुग्ध इकाई प्रभारी के द्वारा जो अपने चहेते दुग्ध विक्रय करने वाले ठेकेदार को काम दिया जाता है। उससे केवल इसी प्रभारी का फायदा होता है।
अगर दुग्ध महासंघ देवभोग रायपुर के अन्य पदाधिकारी इस प्रभारी के कार्यकाल की जांच कर इसे इसके चहेते ठेकेदार को हटाकर अगर इसी पंचायत के महिला स्व सहायता समूह के द्वारा दुग्ध का वितरण समेत अन्य पदार्थ बनाने का कार्य सौंपा जाए तो इससे पंचायत के लोगों को विशेषकर महिला स्व सहायता समूह को इसका लाभ मिलेगा। जिससे महिलाएं इस रोजगार के माध्यम से अपने आप को आत्मनिर्भर बना पाएंगी।
छत्तीसगढ़ महाप्रबंधक ने कहा होगी जांच
इस मामले पर जब छत्तीसगढ़ देवभोग दुग्ध महाप्रबंधक नरेंद्र दुग्गा से बात की गई तो उनका कहना था कि हमारे द्वारा स्वस्छ एव ताजा दूध उपलब्ध कराने का प्रावधान है। लेकिन बस्तर स्थित सेमरा देवभोग इकाई प्रभारी द्वारा अगर इस प्रकार की गड़बड़िया की जा रही है तो इसकी जांच अवश्य करायी जाएगी में स्वयं इस मामले को संज्ञान में लेकर कुछ दिनों के भीतर इसकी जांच कराऊंगा।
सुकमा Breaking – CRPF जवान ने खुद को गोली मारी
सुकमा – CRPF जवान ने खुद को गोली मारी
दोरनापाल स्थित 223 बटालियन में जवान ने की आत्म हत्या।
ओड़िसा के झारसुगुड़ा का रहने वाला था जवान।
जवान का नाम कमला कांता बताया जा रहा है।
कुछ दिन पहले ही अवकाश से लौटा था जवान।
प्रेम प्रसंग का बताया जा रहा मामला।
खबर की पुष्टि एसपी के एल ध्रव ने की।
मावली परघाव में आई माता की ससम्मान विदाई
जगदलपुर।छत्तीसगढ़ की सिध्दशक्ति पीठों में एक दंतेवाड़ा जिले में स्थित मां दंतेश्वरी देवी बस्तर दशहरा पर्व में शामिल होने आई हुई थी जोकि दशहरा पर्व की समाप्ति के बाद वापस लौट रही है जिनकी ससम्मान विदाई दशहरा कमेटी द्वारा किया गया है। विदाई के पूर्व बस्तर सांसद दीपक बैज, संसदीय सचिव रेखचंद जैन, हस्त शिल्प बोर्ड अध्यक्ष चंदन कश्यप ने स्थानीय मंदिर में पूजा अर्चना किया और क्षेत्र की जनता की खुशहाली की कामना की। ज्ञात हो कि बस्तर में 75 दिनों का दशहरा पर्व मनाया जाता है और इस पर्व में सभी गांवों को अलग-अलग जिम्मेदारी दी जाती है। कोरोना संक्रमण काल में भी सभी प्रकार की विधान निर्विघ्न संपन्न हुआ।
शासन के नियम दरकिनार,रेत खुदाई कानून तार -तार, बड़े आमाबाल में प्रशासन के प्रश्य में मशीनों से दिन-रात खुदाई
जगदलपूर। छत्तीसगढ़ राज्य सरकार द्वारा नई रेत नीति बनाया गया है और पर्यावरण संरक्षण के अनुरुप रेत खनन की अनुमति प्रदान किये जाने का प्रावधान है किंतु बड़े आमाबाल के रेत खनन ठेकेदार द्वारा शासन के नियमों को दरकिनार कर रेत कानून को तार -तार किया जा है। रेत खदान नियम को पालन कराने वाले प्रशासनिक अधिकारियों का सुस्त रवैय्या भी इसके लिए जिम्मेदार है।
देखें विडियो किस प्रकार अवैध खनन जारी है
छत्तीसगढ़ सरकार की रेत खनिज नीति के तहत बस्तर ब्लाक के बडे आमाबाल में नारंगी नदी में रेत उत्खनन हेतु …… पांड़े नामक किसी ठेकेदार को 2 वर्ष के लिए यह खनि पट्टा दिया गया है। खनि पट्टे में रेत खनन के लिए कई प्रकार की शर्ते दी गई है जिसमें खनन के मेन पावर का अधिक से अधिक उपयोग किया जाना है तो उसके विपरित जेसीबी मशीन से खुदाई किया जा रहाहै। वहीं रेत खनन के दौरान सीसीटिव्ही की निगरानी में यह उत्खनन होना चाहिए किंतु सम्पूर्ण क्षेत्र में कहीं भी सीसीटिव्ही नहीं है। इसी प्रकार स्थानीय लोगों को भी यह ठेकेदार काम नहीं दे रहा है जबकि कांग्रेस पार्टी के युवा नेता व व्यवसायी सूरज कश्यप इस उत्खनन कार्य में लगे हैं। सर्वाधिक दिलचस्प बात यह है कि देर रात तक मशीनों द्वारा उत्खनन किये जाने से इस क्षेत्र के लोगों की रात में खलल पढ़ रही है वहीं जिला खनिज विभाग द्वारा इस हेतु किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं करने से कई प्रकार की चर्चाओं का बाजार गर्म है।
बड़े आमाबाल रेत उत्खनन के बारे में जब स्थानीय संवाददाताओं ने चर्चा करने के लिए युवा नेता व व्यवसायी सूरज कश्यप से संपर्क किया तो पहले उसने सभी दस्तावेज वाट्सअप से भेजने की बात कही यहीं नहीं दूसरी तरफ दूसरे नेता के माध्यम से मामले को नहीं छापने के लिए दवाब बनाने की भी कोशिश की गई।पुःन जब चैनल इंड़िया के संभागीय मुख्य कार्यालय से इस बारे में युवा नेता सूरज कश्यप से चर्चा किया गया तो उन्होंने ज्यादा जानकारी देने की बजाय सिर्फ यह स्वीकार किया कि कोई पांड़े इसके ठेकेदार है सिर्फ वह यह कामकाज देखते है।सवाल यह है कि ठेकेदार ने तकनीकी स्तर पर जानकारी नहीं होने वाले व्यक्ति कौ यह जिम्मेदारी क्यों सौंपा हैं जिससे यहां अवैध उत्खनन जोरों से जारी है।


