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यशस्वी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के प्रयासों को मिली बड़ी सफलता :- रेखचंद जैन

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छत्तीसगढ़ की 12 जातियों को अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिलने पर संसदीय सचिव रेखचंद जैन सहित विधायकों ने खुशी जाहिर की प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी से मिल कर आभार जताया छत्तीसगढ़ की 12 जातियों को अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिलने पर संसदीय सचिव रेखचंद जैन सहित विधायकों ने प्रसन्नता व्यक्त की है और अपनी शुभकामनायें प्रेषित की है. इसके लिए आज मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मिलकर आभार व्यक्त किया संसदीय सचिव रेखचंद जैन ने कहा कि समवेदनशील मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा छत्तीसगढ़ की विभिन्न जातियों को अनुसूचित जनजातियों में शामिल कराने के प्रयासों को बड़ी सफलता मिली है उन्होंने कहा कि विधायकों के लगतार माँग करने पर मुख्यमंत्री जी ने केंद्र सरकार को पत्र लिखा जिस पर त्वरित कारवाई करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने छत्तीसगढ़ की 12 जाति समुदायों को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की स्वीकृति दी है । उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 11 फरवरी 2021 को प्रधानमंत्री श्री मोदी को पत्र भेजकर छत्तीसगढ़ की विभिन्न जातियों को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने का आग्रह किया था संसदीय सचिव ने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य के 12 जाति समुदायों को छ.ग.राज्य के अनुसूचित जनजातियों की सूची में शामिल करने हेतु छ ग.शासन , रायपुर द्वारा समय – समय पर जनजातिय कार्य मंत्रालय द्वारा भारत सरकार को प्रस्ताव प्रेषित किया गया है । उपरोक्त प्रस्ताव में मात्रात्मक त्रुटि सहित समावेश / संशोधन किये जाने हेतु प्रस्ताव किया गया है । जिसका परीक्षण उपरांत भारत के जनगणना महानिदेशक ( RGI ) द्वारा अनुमोदन किया जा चुका है एवं राष्टीय अनुसूचित जनजातिय आयोग ( NCST ) भारत सरकार नई दिल्ली की बैठक संख्या 122 दिनांक 11.12.2019 को अनुमोदन छ.ग.राज्य के संबंध में भारत के संविधान के अनुच्छेद 342 के अंतर्गत अधिसूचित अनुसूचित जनजाति ( ST ) की सूची में संशोधन / समावेश कर छ.ग.राज्य में 12 जाति समुदायों को सम्मिलित करने हेतु क्रमश : 1 भारिया , भूमिया ( भूईया , भूईयों . भूवा . भूरया , भिया ) 2. धनवार ( धनुहार , धनुवार ) 3. नगेसिया ( नागासिया ) के समनार्थी किसान 4. सौरा , सवर , सवरा , संवरा 5. धांगड़ 6. विझिया 7. कोड़ाकू , कोडाकू 8. कोंध , कोंद 9. भारिया ( भरिया ) 10. पंडो , पन्डो , पण्डो 11. गोंड ( गोड़ ) 12. गदबा उल्लेखनीय है मात्रात्मक त्रुटि के कारण छग राज्य के उक्त समुदायों के लगभग 60 लाख लोगों को अनुसूचित जनजाति को प्राप्त होने वाली संवैधानिक अधिकार के लाभों से वंचित है , साथ ही यह समुदाय पिछले 18 वर्षों से शिक्षा , स्वास्थ्य , रोजगार , नौकरी , उच्च शिक्षा ( मेडिकल इंजीनियरिंग ) व राजनीतिक अधिकारों से लाभ से वंचित हो रहे है अब छत्तीसगढ़ राज्य के अनुसूचित जनजाति के सूची में उपरोक्त समुदायों को समावेश / संशोधन किये से इन समुदाय के लोगों को लाभ होगा |

लेबोरेटरी को बनाया मौत की प्रयोगशाला

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पॉलिटेक्निक कॉलेज क़े लिए प्रयोगशाला उपकरण खरीदी में घालमेल- जांच में स्तरहीन पाए गए उपकरण, फिर भी प्राचार्य ने लैब में खपा दिया. -घटिया उपकारणों क़े उपयोग से मंडरा रहा है विद्यार्थियों की जान पर खतरा- जगदलपुर/दंतेवाड़ा। दंतेवाड़ा जिले के गीदम जावंगा में संचालित एनएमडीसी डीएवी पॉलिटेक्निक कॉलेज में इलेक्ट्रीकल एवं मैकेनिकल विभाग की प्रयोगशाला क़े लिए उपकरण खरीदी में घालमेल का मामला उजागर हुआ। जब क्रय की गई सामग्री की गुणवत्ताा की जांच की गई, तो सारी सामग्री बहुत ही स्तरहीन ( डिग्रेड ) पाई गई. बावजूद संस्था क़े प्राचार्य ने जांच रिपोर्ट को दरकिनार कर सारे उपकरणों को मंजूरी देते हुए उन्हें विद्यार्थियों क़े प्रायोगिक कार्य क़े लिए प्रयोगशाला में रखवा दिया. प्रयोगशाला में कभी भी भीषण दुर्घटना हो सकती है और विद्यार्थियों की जान क़े लाले पड़ सकते हैं. वहीं जिला प्रशासन मामले की जांच क़े नाम पर महज खानापूर्ति करने में जुटा हुआ है. ज्ञातव्य हो कि शासन आदिवासी बाहुल क्षेत्र के बच्चों को तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराकर उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने के प्रयास में जुटा है. वहीं उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अधिकारी तकनीकी शिक्षा के नाम पर खानापूर्ति कर आदिवासियों की जिंदगी से खिलवाड़ करने में लगे हुए हैं। ऐसा ही एक मामला दंतेवाड़ा जिले के गीदम में संचालित पॉलिटेक्निक कॉलेज का उजागर हुआ है, जहां प्रयोगशाला में घटिया सामग्री का उपयोग कर लाखों के वारे-न्यारे किए जा रहे हैं। प्राचार्य ने डिग्रेड सामग्री को किया मंजूर जानकारी के अनुसार अगस्त 2021में उक्त कॉलेज की जरूरतों को देखते हुए प्रयोगशाला उपकरण के लिए जिला प्रशासन द्वारा टेण्डर बुलाया गया था। टेंडर क़े अनुसार 50 लाख की लैब सामग्री की खरीदी की जानी थी। टेण्डर प्रक्रिया पूर्ण होने के छह माह बाद लैब सामग्री सप्लाई का कार्य रायपुर के हनुमान पेपर वर्क्स को सामग्री आपूर्ति का आदेश दिया गया था. इस फर्म ने छह माह बाद उपकरण की सप्लाई की थी. कॉलेज के अनुभवनी स्टाफ द्वारा उक्त उपकारणों की जांच की गई, तो उपकरण डिग्रेड पाए गए थे। जांच दल ने प्राचार्य क़े समक्ष लिखित में प्रतिवेदन प्रस्तुत किया था। प्रतिवेदन में कहा गया था की सामग्री अमानक स्तर की है, जिन्हें प्रयोगशाला में उपयोग नहीं किया जा सकता है। इसके उपयोग से हादसे का भी आशंका पत्र में जाहिर की गई थी। उक्त सामग्री जनवरी 2022 में सप्लाई होने की बात लिखी गई थी। प्राचार्य ने जांच रिपोर्ट ठुकराई विशेष सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दो अनुभवी विभाग प्रमुखों द्वारा जांच उपरांत सौंपी गई रिपोर्ट और जताई गई खतरे की आशंका को प्राचार्य ने दरकिनार कर दिया. खबर है कि उस दौरान अवकाश पर रहे प्राचार्य के करीबी इलेक्ट्रीशियन विभाग प्रमुख क़े अवकाश से लौटने के बाद पुन: जांच रिपोर्ट तैयार कराकर उपकरणों क़े बेहतर होने का प्रमाण पत्र बनवा लिया गया. इसके बाद प्राचार्य ने सारी सामग्री को प्रायोगिक कार्य क़े लिए प्रयोगशाला में भिजवा दिया। प्रसनिक जांच भी संदिग्ध इस मामले की शिकायत दंतेवाड़ा कलेक्टर तक पहुंच गई है। तत्कालीन कलेक्टर सोनी द्वारा मामले की जांच संयुक्त कलेक्टर से कराई गई थी. लेकिन जांच में क्या निष्कर्ष निकला और क्या कार्रवाई की गई, इसका अब तक क़ुछ भी अता-पता तक नहीं है। फिर दोबारा हुई शिकायत के बाद पुन: उसी संयुक्त कलेक्टर को जांच की जिम्मेदारी वर्तमान कलेकटर द्वारा सौंपी गई है। मामले की जांच क़े लिए निष्पक्ष विशेषज्ञ टीम गठित ना किए जाने से जिला प्रशासन की भी भूमिका संदेह के घेरे में है। चर्चा है कि प्राचार्य जिला प्रशासन के जांच अधिकारी से सांठगांठ कर मामले की लीपापोती करने में जुटे हैं. कॉलेज के प्राचार्य से इस मामले में प्रतिक्रिया जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

ये क्या हो रहा है बस्तर के शिक्षा विभाग में!

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-पहले जवाइंट डायरेक्टर फिर एक विद्यार्थी की अकाल मौत-
-प्रभारी प्रधान पाठक का निलंबन कर मामले को सलटा लिया डीईओ ने-
-दोनों मामलों की गहराई से जांच क्यों नहीं कराई जा रही?

जगदलपुर। बस्तर जिले के शिक्षा विभाग में पिछले कुछ अरसे से जो कुछ घटित हो रहा है उसने पालकों के साथ ही विभागीय कर्मचारियों को भी चिंता में डाल दिया है. ऐसी घटनाओं से जिम्मेदार अफसरों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. लोगों का कहना है कि अफसर ऐसे मामलों की गहराई से जांच क्यों नहीं कराते, सिर्फ निलंबन की कार्यवाही कर मामले को ठंडे बस्ते में क्यों डाल दिया जाता है?

बुरुंदवाड़ा सेमरा में चार दिन पहले शाला अवधि के दौरान दूसरी कक्षा के एक विद्यार्थी की गड्डे में डूबकर हुई मौत के मामले में स्कूल की प्रभारी प्रधान पठिका शालिनी राव पर कार्यवाही करते हुए उन्हें ब्लाक शिक्षा कार्यालय में अटैच कर दिया गया है, लेकिन इस संवेदनशील मामले की विभागीय जांच होगी या जिम्मेदार लोगों को यूं ही बख्श दिया जाएगा. क़ुछ ऐसे ही सवाल जनमानस में तैर रहें हैं। प्रभारी प्रधान पाठिका पर कार्रवाई का आदेश जिला शिक्षा अधिकारी भारती प्रधान ने जारी किया है. आदेश में मामले की जांच की बात कहीं नहीं लिखी गई है, जिसके कारण आदेश ही सवालों के घेरे में है।
जगदलपुर खंड शिक्षा कार्यालय के अधीनस्थ प्राथमिक विद्यालय बुरुंदवाड़ा सेमरा के एक बच्चे की 12 सितम्बर 2022 को एक गड्डे में डूबकर मौत हो गई थी। यह वाकिया तब घटित हुआ जब सोमवार को दोपहर भोजन अवकाश के दौरान छात्र चंद्रशेखर बिसाई खेलते – खेलते मुरुम के गड्ढे में चला गया. छात्र की लाश वहां उसी गड्ढे में पाई गई थी.

सवालों के घेरे में डीईओ

इस घटनाक्रम के बाद बुरुंदवाड़ा ग्राम के ग्रामीण आक्रोशित हो उठे तथा घटना के लिए सीधे तौर पर पूरे स्कूल स्टॉफ को जिम्मेदार ठहराते हुए सभी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते रहे. इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमती प्रधान ने मामले को दबाते हुए सिर्फ निलंबन की कार्यवाही का आदेश जारी किया जबकि इस मामले में विभागीय जांच के लिए अधिकारियों की टीम गठित करना था. ऐसा नहीं किया गया. जिसके कारण अब जिला शिक्षा अधिकारी स्वयं सवालों के घेरे में आ गई हैं.

राज बना हुआ है अफसर की मौत

पूर्व में भी शिक्षा विभाग के एक अफसर की ऐसी ही विषम परिस्थितियों में मौत हो चुकी है. इस मौत पर से अब तक पर्दा नहीं उठ पाया है. सूत्रों के मुताबिक एक जिला शिक्षा अधिकारी और उनके प्रश्रयदाता क़ुछ लोगों की मनमानी तथा नियम विरुद्ध कार्यों की वजह से उक्त अफसर मानसिक रूप से बेहद परेशान चल रहे थे.

स्कूली बच्चे की डबरी में मौत के मामले में डीईओ सवालों के घेरे में…

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जगदलपुर। बुरुंदवाड़ा सेमरा स्कूल के बच्चे की गड्डे में डूबकर हुई मौत के मामले में जिला शिक्षा अधिकारी सवालों के घेरे में आ गई हैं क्योंकि भारी जन आक्रोश के बाद उन्होंने शाला की प्रभारी प्रधान अध्यापक को निलंबित कर खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में अटैच तो कर दिया लेकिन विभागीय जांच के लिए आदेश जारी नहीं किया। बताया जा रहा है कि प्रभारी प्रधान अध्यापक रचना राव पर कार्यवाही करते हुए ब्लाक कार्यालय में अटैच तो कर दिया गया है। लेकिन निष्पक्ष विभागीय जांच होगी या उपकृत किया जायेगा, इसको लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। यह निलंबन आदेश जिला शिक्षा अधिकारी भारती प्रधान ने जारी किया है। जिसके कारण आदेश ही सवाल के घेरे में है। जगदलपुर खंड शिक्षा कार्यालय के अधीन प्राथमिक विद्यालय बुरुंदवाड़ा सेमरा के एक बच्चे की 12 सितम्बर को एक गड्डे में डूबकर मौत हो गई थी। यह घटना तब घटित हुई, जब मध्यान्ह भोजन अवकाश के दौरान चंद्रशेखर बिसाई बिना बताए मुरुम गड्डे में गया और वहां उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद बुरुंदवाड़ा के ग्रामीण आक्रोशित हो गए तथा प्राचार्य राव व शिक्षिका आचार्य पर कार्यवाही की मांग करते रहे। जिसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमती प्रधान द्वारा मामले को दबाते हुए सिर्फ निलंबन की कार्यवाही का आदेश जारी हुआ जबकि इस मामले में विभागीय जांच अधिकारियों की टीम गठित करना था। वह नहीं की गई। जिसके कारण अब जिला शिक्षा अधिकारी स्वयं कठघरे में खड़ी हो गई हैं।

टाटा ग्रुप को दिया जाए नगरनार संयंत्र

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जनभावना: बस्तर अंचल के लोगों का कहना है कि निजी क्षेत्र के हवाले प्रस्तावित संयंत्र को करना ही है तो टाटा से बेहतर विकल्प नहीं – एयर इंडिया की तर्ज पर हो सकेगा नगरनार इस्पात संयंत्र का उद्धार – इस आदिवासी अंचल के लोगों की उम्मीदें भी होंगी फलीभूत
(अर्जुन झा)
जगदलपुर : बस्तर के लोगों की उम्मीदों और सपनों को पंख लगाने में सहायक साबित होने वाले प्रस्तावित नगरनार इस्पात संयंत्र को आकार देने की सरकारी कोशिश तेज हो गई है. चर्चा है कि सरकार इस संयंत्र को निजी क्षेत्र के हवाले करने जा रही है. ऐसी चर्चाओं के बीच अंचल से अब यह आवाज़ उठने लगी है क़ि नगरनार संयंत्र को निजी क्षेत्र के हवाले करना ही है, तो क्यों ना उसे टाटा ग्रुप के हवाले कर दिया जाए. इससे संयंत्र का कामकाज बेहतर ढंग से संचालित हो सकेगा और सदैव कर्मचारी एवं श्रमिक हित का ध्यान रखने वाला यह ग्रुप बस्तर के लोगों क़ी उम्मीदों पर खरा भी उतरेगा.

फिलहाल राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) के अधीन प्रस्तावित नगरनार इस्पात संयंत्र क़ी स्थापना के लिए कवायद तेज हो गई है. सूत्र बताते हैं कि सरकार इस इस्पात संयंत्र को निजी हाथों में सौंपने वाली है. इसके लिए टेंडर भी बुलाए जा रहे हैं. बस्तर के लोग चाहते हैं कि सरकार ही इस संयंत्र को चलाए और अगर निजी हाथों में सौंपने की ही सरकार की मंशा है, तो स्टील उद्योग का विशेषज्ञ माने जाने वाले टाटा उद्योग समूह को नगरनार संयंत्र सौंप दिया जाए. इसके पीछे लोगों की दलील है कि जिस तरह लगातार दुर्दशा का शिकार हो रही सरकारी विमानन कम्पनी एयर इंडिया टाटा के हाथ में जाने से सारे देश में यह उम्मीद जागी है कि अब इसका संचालन बेहतर तरीके से होगा और यात्री सुविधाओं में भी इजाफा होगा। ठीक उसी तरह से टाटा समूह के हाथों में जाने से नगरनार इस्पात संयंत्र भी विकास के आयाम को छुएगा. आज जिन क्षेत्रों में अच्छी विमान सेवाएं उपलब्ध हैं, वहां तेजी से विकास के रास्ते खुल रहे हैं। इसी भावना से बस्तर के मुख्यालय में विमान सेवा का दायरा बढ़ा है तो इसी सिलसिले में बस्तर में यह चर्चा भी छिड़ गई है कि बस्तर के नगरनार में स्थापित एनएमडीसी के स्टील प्लांट को निजी हाथों में सौंपने के लिए केंद्र सरकार उतावली है तो क्यों न इस प्लांट का संचालन अपने हाथ में लेने टाटा समूह पहल करे। कुछ साल पहले टाटा ने बस्तर में औद्योगिक विस्तार के लिए रूचि दिखाते हुए जमीन अधिग्रहण किया था। तब टाटा ग्रुप ने यहाँ बड़ी रकम खर्च कि थी. लेकिन बाद में कुछ ऐसे हालात बने कि टाटा का उद्योग स्थापित नहीं हो सका और आखिरकार समयावधि बीत जाने के बाद जमीन आदिवासियों को वापस हो गई। अगर टाटा का उद्योग बस्तर में स्थापित हो गया होता तो यहां के आदिवासियों को रोजगार के अवसर मिलते। अन्य बस्तरियों का भी भला होता तो बस्तर विकास की संभावनाएं भी तेजी से बढ़तीं। उम्मीद की जा रही थी कि टाटा का उद्योग स्थापित होने पर बस्तर का विकास टाटानगर जमशेदपुर की तर्ज पर संभव होगा। लेकिन किन्हीं कारणों से यह उम्मीद टूट गई। अब टाटा ने एयर इंडिया के उद्धार की पहल की है तो बस्तर में इन संभावनाओं की दस्तक का इंतजार शुरू हो गया है कि टाटा बस्तर के नगरनार स्टील प्लांट के लिए क्या वैसी ही पहल करेगा, जैसी एयर इंडिया के लिए की है? वैसे भी टाटा स्टील उद्योग क्षेत्र का एक विश्वसनीय ग्रुप है। टाटा समूह देश के लोगों के बीच औद्योगिक विकास के साथ साथ सामाजिक सरोकार का भी प्रतीक माना जाता है।
सांसद बैज उठा चुके हैं मुद्दा
नगरनार स्टील प्लांट के निजीकरण के प्रयासों का शुरू से ही भारी विरोध होता आया है. छत्तीसगढ़ विधानसभा में संकल्प पारित हो चुका है कि यह प्लांट राज्य शासन को दिया जाय। राज्य इसका संचालन करेगा। बस्तर सांसद दीपक बैज भी निजीकरण का पुरजोर विरोध करते हुए लोकसभा में भी यह मामला उठा चुके हैं लेकिन अब तक केंद्र की ओर ले ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि नगरनार स्टील प्लांट छत्तीसगढ़ सरकार को मिल सकता है। यदि यह राज्य को मिलता है तो सरकार खुद संचालित करे, यह बस्तर के लोग चाहते हैं किंतु तब की स्थिति में अगर राज्य ने किसी औद्योगिक संस्थान को इसके संचालन से जोड़ा तो बात वहीं की वहीं रह जायेगी। अब ऐसी स्थिति में कि जब नगरनार स्टील प्लांट का निजीकरण न होने की कोई गारंटी नहीं है तो स्टील क्षेत्र के अनुभवी उद्योग समूह टाटा द्वारा इस दिशा में पहल की जाय तो बस्तर के विकास की राह आसान हो सकती है। यहां के आदिवासियों ने पूर्व में टाटा को अपनी जमीन आखिर विकास की उम्मीद में ही तो दी थी। अब भी यही भावना है कि बस्तर क्षेत्र के विकास और बस्तरियों के रोजगार की संभावना लेकर टाटा की बस्तर वापसी होती है तो यह भी एक आशाओं से भरा कदम होगा। हम यहां इस मामले में राजनीतिक दृष्टिकोण से परे यह देखें कि यदि निजीकरण से बस्तर का कल्याण होने की उम्मीद निकल सकती है तो इसमें राजनीतिक अड़ंगेबाजी फिजूल है। बस्तर तो सिर्फ यही चाहेगा कि नगरनार स्टील प्लांट का संचालन ऐसा हो कि बस्तर के विकास को गति मिल सके और यहां के लोगों को रोजगार मिले।

किडनी फेल्योर-एनीमिया से 61 आदिवासियों की मौत

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जगदलपुर। बस्तर के सुकमा जिले में स्थित प्रदेश के आबकारी मंत्री के विधानसभा क्षेत्र कोंटा के रिगडगेट्टा गांव में ढाई वर्षो में 61 आदिवासियों की मौत किडनी फेल्योर, एनीमिया एवं अन्य बीमारियों से हुई है. इसका खुलासा जांच रिपोर्ट से हुआ है. मेडिकल कॉलेज के डीन ने भी इस बात की पुष्टि की है। स्वास्थ्य मंत्री के बस्तर प्रवास के दौरान इन ग्रामीणों की मौत का मामला सुर्खियों में रहेगा।

ज्ञातव्य हो कि सुकमा जिलीे के कोंटा विकासखंड के रेगडगट्टा में ढाई वर्षो में 61 ग्रामीणों की मौत का मामला इन दिनों प्रदेशभर में सुर्खियों में है। सीपीआई नेताओं द्वारा मामले की जानकारी सुकमा जिला प्रशासन को दिए जाने के बाद प्रशासन हरकत में आया था और स्वास्थ्य की टीम मामले की पड़ताल करने गांव पहुंची थी। स्वास्थ्य विभाग की पड़ताल में कई खुलासे भी हुए हैं और राजनीतिक दलों ने सरकार के खिलाफ जमकर हल्ला बोला था।
किडनी एवं खून की कमी से गई जान
मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. पैकरा ने बताया कि डॉक्टरों की टीम रेगडगट्टा में ग्रामीणों की मौत की पड़ताल करने पहुंचा था। पैकरा ने बताया कि डॉक्टरों की जांच रिपोर्ट के अनुसार आधा दर्जन ग्रामीणों की मौत किडनी की बीमारी से होने का खुलासा हुआ है। कुछ ग्रामीणों की मौत खून की कमी के कारण होने की बात सामने आई है। उन्होंने बताया कि 4 ग्रामीण ऐसे थे जो आत्महत्या कर अपनी जान गंवा चुके है। पैकरा ने कि खानपान एवं नशीले पदार्थो के सेवन से मौत होने की बात कही।
स्वास्थ्य मंत्री लगाएंगे क्लास

प्रदेश के स्वास्थ मंत्री टीएस सिंहदेव बस्तर प्रवास पर आ रहे हैं। खासतौर से वे बस्तर अंचल की स्वास्थ्य सुविधा को लेकर अधिकारियों से चर्चा करेंगे। ऐसी खबर है कि रेगडग़ट्टा में बीमारी से ग्रामीणों की मौत के मामले को लेकर भी जांच टीम से इस मामले में विस्तृत जानकारी ली जा सकती है।

आज जामा मस्जिद दल्ली राजहरा इंतजामिया कमेटी की एक आवश्यक बैठक संपन्न हुई

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जिसमें वक्फ बोर्ड द्वारा मस्जिद कमेटी का चुनाव करवाने हेतु लिखे गये पत्र पर चर्चा हुई और छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड द्वारा जो पत्र में मस्जिद कमेटी का चुनाव स्थानीय प्रशासन के सहयोग से पारदर्शी तरीके से करवाने की बात कही गई थी। इसी संदर्भ में आज इंतजामिया कमेटी द्वारा अनुविभागीय दंडाधिकारी दल्ली राजहरा को ज्ञापन सौंपकर कर राजहरा जामा मस्जिद में प्रशासन के सहयोग से चुनाव करवाने का निवेदन किया है।


छ0ग0 राज्य वक्फ बोर्ड का प्र.क्र.76/2022 रायपुर, दिनांक17/05/2022 को पत्र छत्तीसगढ वक्फ बोर्ड से प्राप्त हुआ था जिससे मस्जिद कमेटी का चुनाव स्थानीय प्रशासन से विधिवत पारदर्शी चुनाव सम्पन्न कराने की बात कही गयी थी परन्तु मस्जिद तामीर (निर्माण) कार्य प्रगति पर होने के कारण आम जमात ने मस्जिद तामीर होने के बाद चुनाव कराने की बात आपस में तय किया था।

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और तब तक के लिए आम जमात से पांच बुजुर्गों की एक इन्तेजामिया कमेटी बनाई थी जो वर्तमान में कार्यरत हैं। परन्तु जमात के कुछ लोगों द्वारा मस्जिद तामीर के पहले ही चुनाव की मांग बारंबार की जा रही है इसपर इन्तजामिया कमेटी ने बैठक कर मस्जिद कमेटी की चुनाव कराने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया है।

और इंताजामिया कमेटी के सदस्यों बाताया की ईद मिलादुन्नबी के बाद चुनाव के तारीखों का ऐलान भी कर दिया जावेगा। इंतजामिया कमेटी के सदस्यों का कहना है कि वर्तमान में मस्जिद निर्माण का कार्य सुचारू रूप से चल रहा है और इसमें आम जमात का भरपूर सहयोग भी मिल रहा है और इंताजामिया कमेटी मस्जिद निर्माण के लिए आसपास के मस्जिदों पर जाकर भी चंदे के लिए प्रयास कर रही है। लेकिन जमात कुछ लोग मस्जिद निर्माण से पहले चुनाव करवाना चाहते हैं तो हम ईस के लिए पुरी तरह तैयार है। हम नहीं चाहते हैं कि मस्जिद कमेटी के चुनाव को लेकर आम जमात में आपस में किसी तरह का मनमुटाव हो।और मस्जिद निर्माण के कार्य में किसी तरह की रुकावट आये।साथ ही समाज के कुछ लोगों का कहना है कि मस्जिद निर्माण हमारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए,अगर जरूरत हुई तो ईस विषय को लेकर मुस्लिम समाज का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन के राजहरा आगमन पर उनसे मिलकर पारदर्शी और लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव करवाने के लिए ज्ञापन सौंपेगा । इंतजामिया कमेटी 1,जनाब हाजी माजिद कुरैशी 2, जनाब सैय्यद साउद आलम 3, जनाब शेख नय्यूम 4, जनाब मोहम्मद आरिफ

लापरवाह प्राचार्य अटैच क्या मामले में होगी जांच बुरुंदववाड़ा में बच्चें की चार दिन पहले हुई थी मौत

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जगदलपुर।बुरुंदवाड़ा स्कूल के बच्चे की गड्डे में डुबकर हुई मौत के मामले में स्कूल प्राचार्य शालिनी राव पर कार्यवाही करते हुए ब्लाक कार्यालय में अटैच कर दिया गया है लेकिन विभागीय जांच होगी या उपकृत किया जायेगा उसको लेकर सवाल खड़े हो रहें हैं। यह आदेश जिला शिक्षा अधिकारी भारती प्रधान ने जारी किया है जिसके कारण आदेश ही सवाल के घेरे में है। जगदलपूर खंड शिक्षा कार्यालय अधीनस्थ प्राथमिक विद्यालय बुरुंदवाड़ा सेमरा के एक बच्चे की 12 सितम्बर 2022 को एक गड्डे में डुबकर मौत हो गई थी।

यह वाक्या तब घटित हुई जब सोमवार को दोपहर भोजन अवकाश के दौरान चंद्रशेखर बिसाई बिना बताए मुरुम गड्डे में गया और वहां उसकी मौत हो गई। इस घटनाक्रम के बाद बुरुंदवाड़ा ग्राम में ग्रामीण आक्रोशित हो गए तथा सिधे तौर पर प्राचार्य राव व शिक्षिका आचार्य पर कार्यवाही की मांग करते रहे जिसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमती प्रधान ने मामले को दबाते हुए सिर्फ निलंबन की कार्यवाही का आदेश जारी हुआ जबकि इस मामले में विभागीय जांच अधिकारियों की टीम गठित करना था वह नहीं हो पाया जिसके कारण अब जिला शिक्षा अधिकारी स्वयं कटघरे में खड़ी हो गई है।

बस्तर दशहरा कमेटी ने दिया मुख्यमंत्री को न्यौता

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विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा के निमंत्रण हेतु आज शाम रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में माननीय भूपेश बघेल जी से मुलाकात कर बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष माननीय सांसद दीपक बैज जी, उद्योग एवं आबकारी मंत्री माननीय कवासी लखमा जी, संसदीय सचिव व विधायक जगदलपुर रेखचंद जैन, दशहरा कमेटी के मांझी, दंतेवाड़ा पुजारी विजेंद्र जिया एवं समिति के सचिव तहसीलदार पुष्पराज पात्र ने प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी बस्तर दशहरा पर्व मनाने हेतु विधिवत न्यौता दिया। साथ ही विगत वर्ष बिना किसी बकाया राशि के दशहरा संपन्न हुआ इसके लिए भी माननीय मुख्यमंत्री को बस्तर सांसद ने आभार व्यक्त किया। इस दौरान लोहंडीगुड़ा से लक्ष्मण पटेल, अनुराग महतो एवं अन्य मौजूद रहे।

स्वास्थ्य मंत्री ने दी लगभग 12 करोड़ 66 लाख रुपए के 14 विकास कार्यों की दी सौगात

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जगदलपुर 15 सितंबर 2022/ स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने बस्तर संभागवासियों को लगभग 12 करोड़ 65 लाख रुपए के 14 विकास कार्यों की सौगात दी। उन्होंने डिमरापाल स्थित शासकीय मेडिकल कॉलेज परिसर में आयोजित समारोह में उन्होंने यह सौगात दी। इस अवसर पर बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष लखेश्वर बघेल, नगर निगम अध्यक्ष श्रीमती कविता साहू, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती अनिता पोयाम, स्वास्थ्य सचिव आर प्रसन्ना, मेडिकल कॉलेज के अधिष्ठाता डॉ यूएस पैकरा, अधीक्षक डॉ अनुरूप साहू सहित जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव ने इस अवसर पर 7 करोड़ 35 लाख रुपए के 8 कार्यों का भूमिपूजन और 5 करोड़ 30 लाख रुपए के 6 कार्यों का लोकार्पण किया।

इसमें मेडिकल कॉलेज परिसर में डेढ़ करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली ट्रामा सेन्टर भी शामिल है। इसके अलावा बस्तर जिले में विकासखंड बकावंड के ग्राम पाथरी में नवीन उप स्वास्थ्य केंद्र भवन निर्माण, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दरभा में हमर लैब निर्माण, कुम्हारपारा और धरमपुरा में शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण के लिए भूमिपूजन किया। जिला दंतेवाड़ा में 02 करोड़ 55 लाख रूपए की लागत से आयुष पाॅली क्लिनिक और 74 लाख से अधिक राशि से जिला अस्पताल परिसर में 20 बिस्तर का आईसोलेशन वार्ड का निर्माण, जिला बीजापुर के विकासखंड उसुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लगभग 37 लाख रूपए की लागत से 10 बिस्तर आईसोलेशन वार्ड का निर्माण का भूमिपूजन किए। स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव ने बस्तर जिले के कोठीयागुड़ा नवीन उप स्वास्थ्य केंद्र, दंतेवाड़ा जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र छिंदनार और बड़े तुंगनार में एक-एक नग 02जी स्टाफ क्वाटर, बीजापुर जिले के सकनापल्ली में आयुष भवन और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मडेड में 02 नग 02जी स्टाफ क्वाटर तथा नारायणपुर जिले के जिला अस्पताल परिसर में 05 नग 02एफ टाईफ व 05 नग 02जी टाईफ क्वाटर का लोकार्पण किए। स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव ने मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं का किया अवलोकन स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव ने शासकीय मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। उन्होंने ऑपरेशन थियेटर, डेंगू वार्ड, नवजात शिशु वार्ड, गहन चिकित्सा कक्ष का अवलोकन कर बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मंत्री ने मरीजों की कुशलक्षेम की भी जानकारी ली। उन्होंने मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में मॉडल वैक्सीनेशन कक्ष का भी शुभारंभ किया।

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