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दरभागुड़ा के दर्जनों संग्राहक को हरा सोना का नहीं हुआ भुगतान

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ठेकेदार के घर पहुंचे संग्राहक मायूस लौटे

विभाग नहीं ले रहा सुध

जगदलपुर/सुकमा। सुकमा वन मंडल के कोटा वन परिक्षेत्र के दर्जनों संग्राहक को तेंदूपत्ता का भुगतान नहीं मिला है। दो दिन पूर्व दरभागुड़ा के दर्जनों संग्राहक कोंआ ठेकेदार के घर पहुंचे और वहां से मायूस होकर लौटे। इन गरीबों की सुनने वाला कोई नहीं। सप्ताह 15 दिनों से लगा रहे चक्कर वन विभाग भी बेखबर।

ज्ञातवय हो कि हरा सोना के नाम पर एक बड़ा खेल चल रहा है जिसमें वन विभाग के साथ पुलिस विभाग का भी संरक्षण प्राप्त है। गरीब आदिवासी के हरा सोना के भुगतान नहीं होने का मामला लगातार प्रकाशित किया जा रहा है। खबर के बाद विभाग के बड़े अफसरों ने सुकमा के अधिकारियों को फटकार लगाई और भुगतान कराने के निर्देश दिये। खबर प्रकाशन के बाद विभाग हरकत में आया और यह जानकारी मिली है कि मुलाकिसोली के संग्राहक का भुगतान कराया गया है। ग्रामीणों ने हमारे कोंटा संवाददाता का आभार माना।

ठेकेदार के घर पहुंचे संग्राहकः

तेंदूपत्ता के ठेकेदार के द्वारा एक माह से भुगतान को लेकर टरकाया जा रहा है खबर है कि दरभागुड़ा के लगभग 50 से अधिक संग्राहक को 7 लाख से अधिक का भुगतान नहीं कराया
गया है।

जानकारी के अनुसार दरभागुड़ा के लगभग दो दर्जन से अधिक संग्राहक जो भुगतान को लेकर कोंटा ठेकेदार के घर पहुंचे और भुगतान को लेकर मांग करने लगे लेकिन ठेकेदार से संपर्क नहीं होने के कारण ठेकेदार के परिजनों से मिलकर सभी ग्रामीण मायूस वापस लौट आये। दरभागुड़ा के अलावा आसपास के कई संग्राहको के लाखों का भुगतान बकाया है जो आये दिन ठेकेदार के चक्कर लगाते फिर रहे है।

एनजीटी ने छत्तीसगढ़ में राजस्थान के कोयला ब्लॉकों के लिए साफ किया रास्ता

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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने छत्तीसगढ़ में राजस्थान सरकार की खनन परियोजनाओं के लिए पर्यावरण मंजूरी के खिलाफ आवेदन को, योग्यता और महत्व की कमी के कारण खारिज कर दिया है। राजस्थान सरकार के तीन महत्वपूर्ण कोल ब्लॉकों के लिए रास्ता साफ करते हुए, एनजीटी ने अपने आदेश में कहा कि ‘आवेदक द्वारा कोई भी सुसंगत सफाई दी नहीं गयी है।’

राजस्थान सरकार को लगातार उन विरोधियों से चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जो भारत के सबसे बड़े कोयला उत्पादक राज्य, छत्तीसगढ़ में खनन परियोजनाओं के लिए कानूनी बाधाएं पैदा करना चाहते हैं। स्टेट यूटिलिटी राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (आरआरवीयूएनएल) को लगभग एक दशक पहले, परसा पूर्व और केंते बासन ब्लॉक के लिए पर्यावरण मंजूरी मिली थी, जो पहले से ही सालाना करीब 15 मिलियन टन कोयले का उत्पादन कर रहा है। हालांकि, निहित स्वार्थ वाले लोग, करीब 5,000 लोगों के लिए रोजगार का स्रोत बने इस विकास परियोजना को, पटरी से उतारने के लिए निरर्थक मामले दर्ज कर रहे हैं।

एनजीटी का यह अनुकूल आदेश, आरआरवीयूएनएल के लिए एक और जीत है, जिसने हाल ही में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के समक्ष अपने ब्लॉक के खिलाफ पांच मामले जीते हैं। यह पांच केस भी माननीय कोर्ट ने याचिकाकर्ता के पास कोई विधिमान्य दलील ना होने के कारण खारिज कर दी थी। राजस्थान हाई कोर्ट के पांच निर्णयों के साथ अब एनजीटी के भी सकारात्मक आदेश से, कथित आंदोलनकारीओ की मंशा को धक्का भी पहुंचा है और अब सरगुजा जिले में महत्वपूर्ण माइनिंग परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा सकेगा।

वर्तमान में, राजस्थान अपनी आधी कोयला जरूरतों को छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में स्थित अपने निजी पीईकेबी ब्लॉक से पूरा करता है, और अब वह दो अन्य परसा ब्लॉक और केते एक्सटेंशन ब्लॉक से भी कोयला उत्पादन शुरू करने की भी योजना बना रहा है। यह आदेश राजस्थान को परसा और केते एक्सटेंशन ब्लॉक के लिए माइनिंग प्रोजेक्ट्स की योजनाओ को भी आगे बढ़ाने में मदद करेगा। एक बार पूरी तरह से चालू होने के बाद, आरआरवीयूएनएल के तीन प्रोजेक्ट्स, छत्तीसगढ़ सरकार को महत्वपूर्ण टैक्स और रॉयल्टी राशि का योगदान देने के अलावा, लगभग 25,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा करेंगे।

एनजीटी ने अपने आदेश में कहा, “आवेदन की शिकायत वर्ष 2011 और 2012 में दी गई पर्यावरण मंजूरी और पर्यावरण मंजूरी के बाद के पुनर्वैधीकरण से संबंधित है, जिसे एमओईएफ और सीसी द्वारा आदेश 25.06.2015 के तहत जारी किया गया था। इसमें आवेदक द्वारा कोई भी सुसंगत सफाई दी नहीं गयी है और पर्यावरण मंजूरी को चुनौती नहीं दी गई है।”

सरगुजा की उदयपुर तहसील में कोयला खनन के अनुदान को चुनौती देने के लिए भोपाल की एनजीटी की केंद्रीय जोनल बेंच के समक्ष एक आवेदन दायर किया गया था। जिसमे लोकल इकोलॉजी के हित में एक्सपर्ट कमेटी का गठन करके, अन्य लोगों के बीच कोल प्रोजेक्ट्स की मंजूरी को रद्द करने की मांग की थी । एनजीटी ने पाया कि आवेदन पोषणीय नहीं है क्योंकि न तो किसी प्रकार की सामग्री का खुलासा नहीं किया गया है और न ही पर्यावरण मंजूरी को चुनौती दी गई है।

डामर की चादर फट गई शहर की सड़क हुई बर्बाद

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गुणवत्ता की खुली पोल,बारिश पूर्व शहर के कई सड़कों का हुआ था कायाकल्प जगदलपुर – बारिश के पूर्व शहर के कई सड़क को मरम्मत के नाम पर डामरीकरण की गई थी। पहली ही बारिश में डामर की सड़क उखड़ जाने से सड़क बर्बाद हो गई और जनता धूल से परेशान हो रहे है। प्रशासन के नाको तले गुणवत्ता की इस कदर धज्जियां उड़ाई जा रही है कि शहर की सड़कें गुणवत्ता बयां कर रही है।

ज्ञातव्य हो कि प्रदेश के मुख्यमंत्री के बस्तर प्रवास के दौरान शहर की कई सड़कों जिसमें शहीद पार्क से चांदनी चौक और हनुमान मंदिर चौक, संजय बाजार, धरमपुरा मार्ग सहित अन्य कई सड़कों पर रिपेयरिंग कर लाखों रूपए के डामरीकरण के नाम पर लोक निर्माण विभाग द्वारा खर्च किया गया था। जिन मागों पर डामरयुक्त चादर बिछाकर गुणवत्ता कुछ दिन बाद की सच्चाई को बयां करने लगी है। शहर में हाल ही में रिपेयर की गई अधिकांश सड़क की डामरयुक्त चादर फट चुकी है और सड़क धूल से पटने लगी है जिससे राहगिरों को भारी परेशानिनयों का सामना करना पड़ रहा |

रिपेयरिंग के नाम पर खानापूर्तिः

सत्ताधारी दल के कई वरिष्ठ नेताओं के साथ भाजपा के नेता एवं शहर की जनता ने आरोप लगाया है कि सड़क रिपेयर के नाम पर घटिया सामग्री का उपयोग कर खानापूर्ति मात्र किया गया है। जिन सड़कों की मरम्मत कराई गई है उन सड़कों के डामर उखड़ गये है और आम जनता परेशान हो रही है। शहर की जनता ने आरोप लगाया है कि विभाग की उदासिनता एवं ठेकेदार की मनमानी के कारण प्रशासन के नाक के नीचे इस प्रकार के घटिया कार्य होना राशि के दुरूपयोग की ओर इशारा करता है।

जिला मुख्यालय में गुणवत्ता की इस कदर अनदेखी की जा रही है तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि शहर के बाहर दूरस्थ अंचल में गुणवत्ता का क्या हाल होगा। निगम के नेता प्रतिपक्ष संजय पांडे एवं भाजपा पार्षदों ने भी आरोप लगाया है कि कांग्रेस के राज में गुणवत्ता को दरकिनार कर कमीशन के लालच में घटिया कार्यों को अंजाम दिया जा रहा है जिसका उदाहरण शहर की सड़के है।

कांग्रेस ने “राष्ट्रपति के गौरव” का किया अपमान, कांग्रेस की आदिवासी विरोधी मानशिकता का उजागर, देश से मांगे माफ़ी- केदार कश्यप

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राष्ट्रपति के अपमान के विरोध में बस्तर संभाग के सभी जिले सहित देश के कोने कोने में हो रहा कॉग्रेस का विरोध

कांग्रेस नेता के बयान से आदिवासी समाज को पहुंची ठेस, आदिवासी महिला का राष्ट्रपति बनना कांग्रेस को नहीं आ रही रास

जगदलपुर:- भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता व पूर्व मंत्री केदार कश्यप ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी कि राष्ट्रपति द्रोपति मुर्मू जी के ऊपर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी की निंदा करते हुए कहां महामहिम राष्ट्रपति किसी दल के नहीं होते बल्कि पूरे देश का होते है, राष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पद की गरिमा को बनाएं रखना चाहिए। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने जिस निष्क्रट मानसिकता और बहुत ही घटिया पन का परिचय दिया है वह अछम्य है। कांग्रेस की मानसिकता ही आदिवासी विरोधी महिला विरोधी मानसिकता है, कॉग्रेस पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी और अधीर रंजन चौधरी को देश से माफी मांगनी चाहिए।

आगे कश्यप जी ने कहा कि आजादी के 75 वर्षों में कांग्रेस ने 55 वर्षों तक देश में राज किया लेकिन कभी भी कांग्रेस ने जनजाति वर्ग को देश के सर्वोच्च पद पर नहीं पहुंचने दिया, डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम और रामनाथ कोविंद को देश का राष्ट्रपति बना कर एनडीए ने अनुसूचित जनजाति व अनुसूचित जाति वर्ग को इस पद पर पहुंचाया परंतु कॉग्रेस के नेता अमर्यादित टिप्पणी कर राष्ट्रपति जी को अपमानित करने का कार्य कर रहे हैं जो दुर्भाग्यपूर्ण है।

कांग्रेस नेता के बयान से जनजाति आदिवासी समाज को पहुंची ठेस, आदिवासी महिला का राष्ट्रपति बनना कांग्रेस को नहीं आ रहा रास

कश्यप ने कहा कि देश में पहली बार कोई आदिवासी महिला राष्ट्रपति बनी है, जिस दिन उसके नाम की घोषणा की गई उसी दिन से कांग्रेस की टिप्पणियां सामने आने लगी, उसी दिन कांग्रेस के एक प्रवक्ता ने कहा कि भाजपा द्वारा राष्ट्रपति प्रत्याशी का चयन भारत के बहुत बुरे दर्शन का प्रतिनिधित्व करता है जैसे शब्दों का प्रयोग किया था, आगे कश्यप ने आरोप लगाते हुए कहा कि देश में पहली बार बनी आदिवासी राष्ट्रपति को कांग्रेस स्वीकार नहीं कर पा रही है और सोनिया के निर्देशन पर उनका अपमान करने पर उतर आए हैं, यह जुबान फिसलने की गलती नहीं बल्कि जानबूझकर राष्ट्रपति को अपमानित करने और नीचा दिखाने की कोशिश की गई है सोनिया गांधी ने चौधरी को लोकसभा में नेता नियुक्त किया है उन्हें माफी मांगनी चाहिए।

राष्ट्रपति के अपमान के विरोध में बस्तर संभाग के सभी जिले सहित देश के कोने कोने में हो रहा कॉग्रेस का विरोध

कश्यप ने बताते हुए कहा की राष्ट्रपति द्रोपति मुर्मू जी के ऊपर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी से पूरा देश आहत है जिसके विरोध में बस्तर संभाग के सातों जिलों सहित देश के कोने कोने में कांग्रेस पार्टी के विरोध में पुतला दहन कर प्रर्दशन हो रहे हैं।

राष्ट्रपति का अपमान देश का अपमान है..दुष्यंत सोनवानी

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कांग्रेस के सांसद अधीर रंजन चौधरी के द्वारा राष्ट्रपति महामहिम श्रीमति द्रौपदी मुर्मू जी के लिए प्रयोग किए गए अपमानजनक शब्द के विरोध में भारतीय जनता पार्टी मंडल गुंडरदेही के मंडल अध्यक्ष दुष्यंत सुनवानी ने कहा कि अधीर रंजन चौधरी कांग्रेस पार्टी का चाल चरित्र चेहरा है। एक गरीब जनजाति महिला भारत देश की राष्ट्रपति बन गई, कांग्रेश पार्टी इस बात को बर्दाश्त नहीं कर पा रही है और जानबूझकर राष्ट्रपति को अपमान करने के लिए कांग्रेस नेता के द्वारा इस तरह का बयान दिया गया हैं।

कांग्रेस पार्टी के नेताओं को शर्म आनी चाहिए और इस तरक राष्ट्रपति को अपमानित करने के लिए कांग्रेस पार्टी को सारे व राष्ट्रपति से माफी मांगनी चाहिए। महामहिम राष्ट्रपति का अपमान संपूर्ण राष्ट्र का अपमान है इस कृत्य के लिए कांग्रेसी नेता की जितनी निंदा की जाए कम है। मंडल के महामंत्री सौरभ चोपड़ा ने कांग्रेस के नेता के बयान को कांग्रेस की बौखलाहट बताया। आदिवासी समाज जन जातियों के उत्थान के लिए कांग्रेस पार्टी ने कभी कुछ नहीं किया, राष्ट्रपति के रूप में आदिवासी जनजाति महिला को कांग्रेस स्वीकार नहीं कर पा रही है।

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छत पर धारदार हथियार से गला रेतकर महिला की हत्या

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अर्जुन्दा के ग्राम भालूकोनहा रहने वाली महिला की धारदार हथियार से उसके घर के छ्त पर हत्या कर दी गई । महिला का नाम संध्या राजपूत बताया जा रहा हैं वह लंबे समय से अकेली रहती थी महिला का विवाह 2013 में बालोद के विजय छत्री के साथ हुआ था 2 साल साथ रहने के बाद आपसी विवाद के कारण दोनों अलग रहने लगे थे संध्या राजपूत अर्जुंदा के भालुकोंहआ में अकेली रहती थी ।

महिला का ससुराल बालोद के आमापारा में था कुछ समय पूर्व एक मामले में उसके पति विजय छत्री को जेल हो चुकी है महिला का मायका ग्राम खरसुली में बताया जा रहा हैं मौके पर मोबाइल भी प्राप्त हुआ हैं । अर्जुंदा पुलिस, स्पेशल स्क्वाड टीम, साइबर सेल सहित फॉरेंसिक टीम मामले की जांच में जुटी हैं पुलिस द्वारा हत्या की पुष्टि किया गया है । पुलिस द्वारा घटना देर रात या सुबह की बताई जा रही है पुलिस को सुबह 11:00 बजे के आसपास घटना की जानकारी प्राप्त हुई यह भी ज्ञात हुआ कि महिला का ग्रामीणों से संबंध ठीक नहीं था।

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अधिकारी – कर्मचारी का आंदोलन लेकिन 24 घंटे ड्यूटी निभाने वाले पुलिस कर्मियों को आज भी सायकल भत्ता 18 रु ये तो नाइंसाफी ही कहा जाए

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डौंडी- पूरे छत्तीसगढ़ मे हर वर्ग के शासकीय कार्यालयों के कर्मचारी- अधिकारी वर्ग को 22% महंगाई भत्ता दी जा रही है व पेंसनरो को 17 % राशि दिए जाने के आरोप लगाकर अपनी हक की लड़ाई उक्त संघ के लोग लड़ रहे है। उनकी मांगों को शासन द्वारा अभी तक निराकरण नही किया गया। क्या यह संघ ये बात जानते है कि हमारे भारत देश मे 24 घंटे फर्ज की ड्यूटी निभाते आ रहे पुलिसकर्मियों की तनख्वाह कितनी है व इन्हें कितना भत्ता मिल पा रहा है।

जानकारी के अनुसार राज्य के समस्त शासकीय कार्यलयों में अधिकारी- कर्मचारियों को फिक्स डिपाजिट देय भत्ता मिल रहा है। किंतु दुर्भाग्य ही कहा जाये कि हमारे पुलिस प्रशासन के 24 घंटे ड्यूटी निभाने वाले कर्मचारियों को केवल आज भी सायकल भत्ता 18 रु, फिक्स टीए 25 रु, वर्दी भत्ता 60 रु, पौष्टिक आहार 100 रु, स्वास्थ्य भत्ता 200 रु व आवास भत्ता 697 रु ही मिल रहा है। आप सभी का सोचनीय तथ्य है कि चौबिसिय घण्टे जिले व विकासखंड का देखरेख करने वाले सिपाही अपने कर्तव्य के प्रति कितने जिम्मेदारी पूवर्क निर्वाहन करते आ रहे है।

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उन्हें शासन द्वारा ना तो स्ट्राइक का प्रवाधान दिया गया है और ना ही किसी तरह का अपने अधिकार क्षेत्र की लड़ाई लड़ने का परमिशन। ऐसे में चौबीस घण्टे कार्य करने वाले पुलिस कर्मी आखिर जाए तो किसके पास । गौरतलब है कि अधिकारी-कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर हड़ताल मे है। परंतु देश सेवा मे लगे पुलिसकर्मियों की सुध कौन ले रहा है.???

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी का पुतला फूंका भाजयुमो गुंडरदेही ने

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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सांसद अधीर रंजन चौधरी द्वारा भारतीय गणराज्य के नवनिर्वाचित महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपति मुर्मू जी को अपमानित करने वाले शब्दों के प्रयोग करने के विरोध में भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के द्वारा अधीर रंजन का पुतला दहन किया गया।

युवा मोर्चा के मंडल अध्यक्ष श्रीकांत वर्मा ने कहा कि एक आदिवासी महिला के राष्ट्रपति पद पर नियुक्त होने से कांग्रेस पार्टी पूर्ण रूप से आहत नजर आ रही है, राष्ट्रपति के चुनाव में खुले तौर पर कांग्रेस द्वारा अपना प्रत्याशी खड़ा कर विरोध जताया जिसमें उसे करारी हार का सामना करना पड़ा ।अब जबकि श्रीमती द्रोपति मुर्मू राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित हो चुकी है कांग्रेस को अब भी उनसे इतनी तकलीफ है कि उनके नेता उनके खिलाफ सार्वजनिक रूप से अपशब्द का प्रयोग कर रहे हैं। अवसर पर भाजयुमो कार्यकर्ताओं के साथ जिला भाजपा के नेता गण पूर्वविधायक गण,गुंडरदेही भाजपा मंडल के पदाधिकारी कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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रेगड़गड़ा पंचायत में ढाई वर्ष में 61 ग्रामीणों की मौत का जिम्मेदार कौन?

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जिला पंचायत सदस्य की शिकायत के बाद जागा प्रशासन

बीएमओ ने जिला प्रशासन को पूर्व में भी कराया था अवगत

जिला एवं जनपद स्तर की स्वास्थ्य टीम करेगी कैम्प, होगी जांच

उच्च स्तरीय स्वास्थ्य दल भेजकर जांच की दरकार

जगदलपुर कोटा – सुकमा जिले के कटा विकसखंड के अंतर्गत रेगड़गट्टा पंचायत में ढाई वर्ष में बीमारी से 61 ग्रामीणों की मौत हुई है जिसमें अधिकांश 20 से 40 वर्ष के ग्रामीण है। इन ग्रामीणों की मौत का जिम्मेदार कौन? स्वास्थ्य विभाग ने आशंका जाहिर की है कि यूरिक एसीड की मात्रा बढ़ने एवं यूरीन इंफेक्शन के कारण मौत हो हुई है। पूर्व में बीएमओ कोंटा के द्वार शिविर लगाकर जांच में यूरिक एसिड बढ़ने का खुलासा हुआ था जिसकी जानकारी सकमा में स्वास्थ्य विभागके सीएमओ और प्रशासन को भी अवगत कराते हुए मेडिकल कॉलेज से टीम भेजकर उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की गई थी। बीएमओ के जांच रिपोर्ट पर गंभीरता बरती जाती तो कुछ ग्रामीणों को जिंदगी बचाई जा सकती थी। सुकमा जिला पंचायत सदस्य एवं सीपीआई नेता राम सोढ़ी ग्रामीणों की मौत पर चिंता जताते हुए प्रशासन को जगाने का काम किया है। खबर है कि शिकायत के बाद जिला प्रशासन जागा है और सुकमा एवं कोटा से स्वास्थ्य विभाग का दल रेगड़गट्टा में कैम्प कर मामले की जांच करेंगी।

ज्ञातव्य हो कि आजादी के 74 वर्षों बाद भी बस्तर अंचल के कई इलाकों में बुनियादी सुविधा नहीं पहुंच पाई है, लोग बेहतर बुनियादी सुविधा के अभाव में मौत का शिकार हो रहे है। सत्ता में बैठे राजनीतिक दल के नेता हमेशा यह कहा करते है कि शासन की योजनाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाई जा रही है और शिक्षा स्वस्थ्य हमारी प्राथकिता होगी। स्वास्थ्य और शिक्षा पर बेहतर ध्यान केन्द्रीत किया जाता तो शायद यूरिक एसिड़ की समस्याओं से ग्रामीणों की मौत नहीं होती।

30 माह में 61 ग्रामीणों की मौत:

प्रदेश के अंतिम छोर पर बसा सुकमा जिले के कटा विकासखंड के एक दर्जन से अधिक ऐसे पंचायत है जहां निवासरत परिवार बनियादी सुविधओं से जूझ रहा है। कोंटा से लगभग 25 किमी दूर रेगड़गट्टा पंचायत में जहां एक सामान्य सी बीमारी अपना पांव पसार चुकी है जिसके चलते 61 ग्रामीणों की मौत हो चुकी है। वर्ष 2020 में 18,2021 में 19 एवं 2022 में अब तक 24 प्रामीणों की मौत हो चुकी है। मरने वालों में अधिकांश 20 से 40 वर्ष के युवा शामिल है।

शिकायत के बाद जागा प्रशासनः

सीपीआई नेता एवं जिपं सदस्य रामा सोढ़ी ने जनता की सेवा का दायित्व उठते हुए उन ग्रामीणों की मैत पर चिंता जाहिर करते हुए जिला प्रशासन को मौत को लेकर अवगत कराया। सुकमा डिप्टो कलेक्टर को पत्र सौंप यह मांग की गई है कि स्वास्थ्य टीम भेजकर मामले की जांच करते हुए ग्रामीणों को बेहतर उपचार दिया जाये।

यूरिक एसिड बढ़ने से मौत की आशंका:

कोंटा के बीएमओ ने बताया कि ग्रामीणों की मौत की जानकारी मिलने के बाद रेगड़गट्टा में फरवरी एवं मई में कैम्प कर ग्रामीणों के ब्लड एवं यूरिन की जांच कराई गई थी जिसमें अधिकांश की रिपोर्ट में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ना पाया गया। उन्होंने आशंका जाहिर की है कि उक्त कारणों से ग्रामीणों की मौत हुई होगी। बीएमओ ने बताया कि इसकी जानकारी सीएमओ सुकमा एवं जिला प्रशासन को अवगत कराते हुए मेडिकल से टीम भेजकर उच्च स्तरीय जांच का आग्रह किया गया था।

मौत का जिम्मेदार कौन?:

प्रारभिक स्तर की जच में आई कमियों को ध्यान में रखते हुए प्रशासन एलर्ट हो जाता तो शायद कई ग्रामीणों की जान बचाई जा सकती थी। जिला प्रशासन ने उन ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सविधा की व्यवस्थ न करये जाने का आरोप जिपं सदस्य ने लगाया है। खबर है कि शिकायत के बाद जिला प्रशासन ने जिला स्तर की स्वस्थ्य टीम भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है और गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार के लिए जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज भेज जायेगा।

मृतक के परिजन से मिलने पहुँचे सांसद प्रतिनिधि विक्रम ध्रुवे

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दल्लीराजहरा- नगर के वार्ड क्रमांक 15 में  बिजली करंट  से हुए मौत के मामले में अंततः मकान मालिक और ठेकेदार पर कानून की गाज गिरी। नवभारत संवाददाता एवम सांसद प्रतिनिधि विक्रम ध्रुवे के द्वारा लगातार मामले को सज्ञान में लेकर पीड़ित पक्ष के लिए आवाज उठाया जा रहा था। स्थानीय पुलिस प्रशासन की ओर से नगर पुलिस अधीक्षक मनोज तिर्की एवम एएसआई नंद किशोर सिन्हा और बिजली विभाग के कनिष्ठ अभियंता सुनील ठाकुर  ने  अपनी कागजी कार्यवाही व जांच पर अपना पूर्ण  सहयोग प्रदान करते हुए  मकान मालिक राजेन्द जायसवाल व ठेकेदार  को मौत का जिम्मेदार ठहराते हुए उनपर थाना राजहरा में अपराध दर्ज किया गया।  थाना राजहरा में दर्ज एफआईआर क्रमांक  251/22  के अनुसार सउनि के पद पर पदस्थ एएसआई नंद किशोर सिन्हा ने अपनी प्रथम सूचना रिपोर्ट में बताया कि थाना राजहरा के मर्ग क्रमांक 26/22 धारा 174 जाफौ के मृतक अनिल बघेल पिता चैतोराम बघेल उम्र 32 वर्ष ग्राम नर्राटोला थाना डौण्डी का मर्ग जांच दौरान घटना स्थल निरीक्षण शव पंचनामा कार्यवाही पीएम रिपोर्ट तथा गवाहों के कथन पर पाया कि मृतक घटना दिनांक 15.07.2022 को मकान मालिक राजेन्द्र जायसवाल के मकान निर्माण कार्य ठेकेदार के संरक्षण में मजदूरी काम अन्य मजदूरों के साथ कर रहा था, मकान के उपरी हिस्सा में 11 केवी बिजली लाईन गुजरा है,

जिससे निर्माण कार्य के दौरान मजदूरी करते समय चालू बिजली लाईन के संपर्क में आने से बिजली की शक लगने से मृत्यू हुआ है जांच के दौरान बिजली विभाग के अधिकारी से पूछताछ कर मकान मालिक को मकान निर्माण कार्य नही करने हेतू लिखित नोटिस दिया गया था इसके बाद भी मकान मालिक राजेन्द्र जायसवाल एवं ठेकेदार द्वारा मृतक से उपेक्षा पूर्वक कार्य कराया गया जिस कारण मृतक बिजली करंट के संपर्क में आने से मृत्यू हुआ है जो जांच के प्रथम दृष्टया में मकान मालिक राजेन्द्र जायसवाल सा0 वार्ड क्र0 15 नियोगी नगर राजहरा एवं ठेकेदार का कृत्य धारा 304 ए, 34 भादवि का घटित करना पाया गया है अपराध पंजीबंद्ध कर विवेचना में लिया गया है।

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बिजली विभाग के कनिष्ठ अभियंता सुनील ठाकुर एवम नगर पुलिस अधीक्षक मनोज तिर्की ने नगरवासियों से अपील की है कि जब भी मकान निर्माण का कार्य किया जाए तो हाई वोल्टेज बिजली के तारो को देखते हुए ही कार्य करें। मकान के नज़दीक बिजली के तार होने पर मकान निर्माण कार्य को रोक देवे और बिजली विभाग को सूचित करें। ताकि किसी प्रकार के भी जानमाल के नुकसान से बचा जा सके।

मृतक अनिल बघेल के घर पहुँचे सांसद प्रतिनिधि*

ग्राम नारराटोला निवासी मृतक अनिल बघेल के निवास स्थल पर सांसद प्रतिनिधि विक्रम ध्रुवे, भाजपा डौन्डी मंडल अध्यक्ष मनीष झा, नगर पंचायत चिखलाकसा अध्यक्ष भिखी मसिया, राधिका भारद्वाज एवम रजनी जायसवाल ने मृतक अनिल बघेल के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें धैर्यपूर्वक कार्य करने एवम बिजली करंट से होने वाली मृत्यु उपरांत शासन प्रशासन की ओर से मिलने वाली सहायता राशि की जानकारी देते हुए राजहरा थाना में तत्काल एफआईआर करने के बाद कही थी। मृतक अनिल बघेल के परिजनों की हालात से रूबरू होकर पहुँचे सांसद प्रतिनिधि विक्रम ध्रुवे आक्रामक तेवर में नज़र आये। जिसके बाद उन्होने स्थानीय बिजली विभाग एवम थाना प्रभारी से लगातार संपर्क रख जांच की कार्यवाही की पल पल खबर ली और अंत मे एफआईआर सफलतापूर्वक किया गया।
सांसद प्रतिनिधि विक्रम ध्रुवे ने कहा कि डौन्डी-लोहारा विधानसभा क्षेत्र के रहवासियों के लिए वह हमेसा साथ खड़े है। शासन प्रशासन से मिलने वाली सारी सुविधाओ को वह धीरे धीरे जनता के समक्ष ला रहे है ताकि क्षेत्र की जनता को जानकारी और उसका लाभ मिल सके।

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