जगदलपुर, 18 मार्च 2022 – बस्तर एकेडमी ऑफ डांस आर्ट लिटरेचर बादल एकेडमी आसना में होली का उत्सव बस्तरिया अंदाज में मनाया गया। यहां होली की पूर्व संध्या पर आयोजित होली महोत्सव में शामिल कलेक्टर रजत बंसल ने यहां के लोक कलाकारों के साथ नृत्य का आनंद लेने के साथ ही तुड़बुड़ी बजाकर वाद्य कलाकारों के साथ संगत दी। उन्होंने बस्तरवासियों को प्रेम और उमंग के इस पर्व की बधाई तथा शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर यहां कलाकारों द्वारा हल्बी, भतरी, गोंडी में मनमोहक लोकगीत प्रस्तुत किये गए। नानगुर के लोकनर्तकों द्वारा आकर्षक डंडार नृत्य प्रस्तुत किया गया। अंचल के प्रसिद्ध कलाकार लखेश्वर खुदराम, दिलीप पांडे, अबलेश कुमार, महेंद्र ठाकुर सहित अन्य कलाकारों द्वारा प्रस्तुत होली गीतों पर श्रोता झूमते रहे।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद छत्तीसगढ़ प्रांत का 54वां प्रदेश अधिवेशन 14 व 15 मार्च को धमतरी में संपन्न हुआ। जिसमें अभाविप के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री श्री प्रफुल्ल अकांत जी व क्षेत्रीय संगठन मंत्री श्री चेतस सुखाड़िया जी मुख्य रूप से उपस्थित थे।
अधिवेशन में प्रदेश के प्रत्येक जिलों के छात्र प्रतिनिधि सम्मिलित हुए जिसमें सत्र 2022-23 के कार्यो की रूपरेखा तैयार की गई व प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा की गई।बस्तर जिले के कार्यकर्ताओं भी अहम जिम्मेदारियां दी गई।
अधिवेशन में संगठन में अर्पित मिश्रा को एक बार फिर बस्तर विभाग का नेतृत्वकर्ता विभाग संयोजक के रूप में बनाया है तो शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय के छात्र नेता राहुल झा को प्रदेश तकनीकी की कमान सौंपी गई व जगदलपुर के नगर मंत्री यश ध्रुव को प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य का दायित्व भी दिया गया।
कुछ अन्य दायित्वों की भी घोषणाएं हुई-
जिला संयोजक के रूप में कमलेश दिवान, जिला सह संयोजक के रूप में वरूण सहानी, प्रदेश जनजाति छात्र कार्य सह प्रमुख राजेंद्र कश्यप,प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य में नीलु मौर्य, कार्तिक जैन,अासमन बघेल व अजय सेठिया।
40 पौवा देशी प्लेन शराब कीमती लगभग 3200 रूपये की गई जप्त । आरोपी के विरूद्ध 34(2) आब०एक्ट का मामला दर्ज कर भेजे गये जेल।
पुलिस अधीक्षक गोवर्धन ठाकुर के आदेशानुसार अनुविभागीय अधिकारी गुण्डरदेही सोनसाय मौर्य के मार्गदर्शन में होली त्यौहार शांति व्यवस्था ड्युटी पर लगे अधिकारी/कर्मचारियों को अवैध शराब परिवहन, असमाजिक तत्वों पर निगरानी रखने हेतु निर्देशित किये गये थे, थाना गुण्डरदेही में दिनांक 17.03.22 को मुखबीर से सूचना मिली कि एक व्यक्ति अत्याधिक मात्रा में शराब रखकर ग्राम चैनगंज रेल्वे पटरी के किनारे ग्राहक की तलाश में खड़ा है कि सूचना पर रेड कार्यवाही हेतु प्र0आर0 353 विरेन्द्र साहू के हमराह आर0 1732,144 के घटनास्थल रेल्वे पटरी के किनारे आरोपी से पुछताछ करने पर अपना नाम खेमलाल बघेल पिता कार्तिक राम बघेल उम्र 30 वर्ष साकिन रजोली थाना रनचिरई। जिला बालोद का निवासी होना बताया आरोपी के कब्जे से में एक प्लास्टिक बोरी में 40 पौवा देशी प्लेन शराब जुमला कीमती 3200 रूपये बरामद हुआ, जिसे मौके पर आरोपी से शराब रखने के संबंध में वैध कागजात पेश करने कहा गया जो कि किसी प्रकार का वैध कागजात पेश नही। करने पर शराब आरोपी के विरूद्ध अवैध शराब पाये जाने पर 34(2) आब०एक्ट के तहत मुकदमा कायम कर आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमाण्ड पर भेजा गया।
नाम आरोपी:- खेमलाल बघेल पिता कार्तिक राम बघेल उम्र 30 वर्ष साकिन रजोली थाना रनचिरई जिला बालोद
खैरागढ़। खैरागढ़ विधानसभा में उप चुनाव की घोषणा हो गई है। इसके साथ ही साथ यहां पर चुनाव आयोग ने चरणबद्ध रूप से उपचुनाव की तिथियों की भी घोषणा कर दी है। वहीं घोषणा होते ही तत्काल जिले में आचार सहिंता भी प्रभावशील हो गया है। जहां आज से नामांकन भरने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। ऐसे में छत्तीसगढ़ के सत्ता में काबिज कांग्रेस सरकार की पार्टी एवं विपक्ष में बैठी भारतीय जनता पार्टी के द्वारा उक्त विधानसभा में अपने अपने प्रत्याशियों के चयन हेतु दोनों पार्टी के संगठन प्रमुखों के द्वारा राजधानी से लेकर जिला एवं नगर में सर्वे एवं बैठकें लेने का दौर शुरू हो गया है। उक्त विधानसभा में गत 15 वर्षों में हुए चुनाव परिणाम की यदि हम समीक्षा करें तो हमें इस विधानसभा में प्रत्यासियों को लेकर कई तरह के सियासती समीकरण देखने को मिलता है। जहां पर कांग्रेस पार्टी को लोधी जातीय के प्रत्यासियों से हमेशा निराशा ही हाथ लगी है। जबकि इसके बाउजूद उक्त विधानसभा से कांग्रेस पार्टी से एक जाति वर्ग के द्वारा इस बार भी थोक के भाव में पुनः दावेदारी किया जा रहा है। खैर….
विधानसभा उपचुनाव में उम्मीदवारों को लेकर कांग्रेस पार्टी के संगठन को अपनी ही पार्टी में प्रत्यासि के चयन में इस वजह से भारी मशक्कत कर जातिवाद का सामना करना पड़ रहा है। इधर होली का त्यौहार सर पर है। ऐसे में आज से नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो गयी है। समय सीमा भी काफी कम बचा है। जहाँ खासकर कांग्रेस में टिकट को लेकर प्रत्यासियों में घमासान मचा हुआ है। सत्तासीन कांग्रेस में कुछ प्रमुख दावेदारों की दावेदारी सामने आई है।
जिसमें कांग्रेस से प्रबल दावेदारों में सबसे पहला नाम है, ऑल इंडिया प्रोफेशनल कांग्रेस राजनांदगांव के जिला अध्यक्ष उत्तम सिंह ठाकुर का नाम सबसे आगे चल रहा है। वहीं ब्लॉक कांग्रेस कमेटी खैरागढ़ की अध्यक्ष यशोदा नीलांबर वर्मा , पदमा सिंह , गिरवर जंघेल की दावेदारी भी सामने है। हम अपने पाठकों को बता दें कि खैरागढ़ की जनता ने सदैव चुनाव में कांग्रेस पार्टी को चौका देने वाला परिणाम दीया है। जब देवव्रत सिंह को कांग्रेस पार्टी से खैरागढ़ विधानसभा के आम चुनाव में टिकट नहीं मिला तो उन्होंने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देकर स्वर्गीय जोगी जी की क्षेत्रीय पार्टी में जॉइन कर इस विधानसभा से चुनाव लड़ा था । जहाँ देवव्रत सिंह के मध्य , कोमल जंघेल, गिरवर जंघेल जैसे जातीय समीकरण पर प्रभाव रखने की बात करने वालों के बीच चुनाव हुवा था। परिणामस्वरूप देवव्रत सिंह चुनाव जीत गए थे। ऐसे ही कुछ और चुनाव परिणाम हम आपको बताते हैं , जो यह सिद्ध करते हैं कि कांग्रेस पार्टी के लिए एक जातीय बाहुल्य वर्ग से ताल्लुकात रखने वाले प्रत्यासियों से सदैव चुनाव में कांग्रेस पार्टी को निराशा ही हाथ लगी है।
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हम बात करते हैं बीते कुछ ही वर्षों की जहां पर खैरागढ़ विधानसभा अन्तर्गत जिला पंचायत क्षेत्र के कुल 4 क्षेत्र क्रमांकों की, जहाँ पर सन-2020 में हुई जिला पंचायत चुनाव संपन्न हुई। जिसका परिणाम यहाँ के बाहुल्य जातीय समीकरण को ध्वस्त कर चुकी है।
क्षेत्र क्र-02
1- कांग्रेस समर्थित महिला प्रत्याशी प्रियंका जंघेल जो लोधी समाज की थी वह लोधी बाहुल्य क्षेत्र से भाजपा समर्थित महिला प्रत्याशी प्रियंका ताम्रकार (पिछडा़ वर्ग से) के लोधी बाहुल्य क्षेत्र से हार गई थीं। क्षेत्र क्र.04
2- कांग्रेस समर्थित महिला प्रत्याशी दशमत जंघेल (लोधी समाज से लोधी बाहुल्य क्षेत्र से) भाजपा समर्थित पुरुष प्रत्याशी -विक्रांत सिंह से (समान्य वर्ग से लोधी बाहुल्य क्षेत्र से) हार गई थी।
3.जनपद क्षेत्र -उपचुनाव-2022
कांग्रेस समर्थित लोधी समाज का प्रत्याशी- डोमार लोधी (लोधी बाहुल्य क्षेत्र से थे) जो भाजपा समर्थित समान्य वर्ग के प्रत्याशी- शैलेन्द्र मिश्रा (सामान्य वर्ग) के प्रत्यासी से हार गया था।
जातिवाद का तिलस्म तोड़कर जिला पंचायत सदस्य बने विक्रांत सिंह ने अपना प्रभाव एवं दबदबा यहाँ पर साबित कर दिखाया है।
इन्होंने बगैर सत्ता-सरकार के भी अपनी लोकप्रियता साबित की है। वे जतिवाद का तिलस्म तोड़कर जिला पंचायत सदस्य बने। जिला पंचायत उपाध्यक्ष के पद पर भी जब लड़ाया गया। तो वहाँ भी उन्होंने अपनी राजनीतिक कौशल और रणनीति के बलबूते पर जीत का परचम लहराया। जो यह साबित करता है कि खैरागढ़ में यदि कांग्रेस पार्टी पुनः जातीय समीकरण अपनाते हुए यदि एक बाहुल्य जाती से ताल्लुकात रखने वाले प्रत्यासी को यहाँ से चुनाव लड़ाता है तो परिणाम पूर्व की भांति विपक्ष के खाते में ही जाएगी। जिनसे अब सिख ले लेना चाहिए।
रायपुर खैरागढ़ विधानसभा उपचुनाव को लेकर सियासी दांव-पेंच शुरू हो गए हैं। जिला निर्वाचन अधिकारी ने उपचुनाव के लिए गुरुवार को अधिसूचना जारी कर दी। इसके साथ ही वहां पर नामांकन दाखिले की प्रक्रिया शुरू हो गई है। 24 मार्च तक नामांकन लिए जाएंगे। 28 मार्च को नाम वापसी के बाद प्रत्याशियों की अंतिम सूची जारी होगी। दोनों राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव तैयारी शुरू कर दी गई है। प्रत्याशी चयन को लेकर कांग्रेस ने 7 और भाजपा ने चार नामों का पैनल तैयार किया है।
खैरागढ़ उपचुनाव को लेकर कांग्रेस इस सीट को जीतने के लिए पूरा जोर लगाएगी। अब तक राज्य में हुए तीन उपचुनाव में कांग्रेस जीत दर्ज कर 70 सीटों पर कब्जा कर चुकी है। अब खैरागढ़ चुनाव जीतकर अपनी संख्या को और बढ़ाने की रणनीति तैयार कर रही है। प्रदेश कांग्रेस संगठन ने यहां पर प्रत्याशी चयन से पहले सर्वे कराया था। यहां की राजनीैतिक परिस्थितियों के आधार पर प्रत्याशी चयन किया जाएगा। बताया जाता है कि जो नाम आए थे, उनमें सात नामों का पैनल बनाकर हाईकमान को भेजा गया है। वहीं भाजपा ने भी यहां पर 10 नामों को सर्वे के दौरान प्रत्याशी चयन के लिए रखा था, इनमें से तीन नामों को केंद्रीय चुनाव समिति को भेजा गया है। बताया जाता है कि 24 मार्च को नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि है। उसके पहले नामों की घोषणा कर दी जाएगी।
राजपरिवार से चुनाव लड़ने दावेदारी
यहां पर राजपरिवार का इस सीट पर कब्जा था। देवव्रत सिंह के निधन के बाद उनकी पूर्व पत्नी और वर्तमान पत्नी के बीच विवाद के कारण यहां पर मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। वैसे दोनों पत्नियों ने विधानसभा चुनाव लड़ने की दावेदारी की है। अभी किसी भी राजनीतिक दल ने परिवार के विवाद के चलते इस पर कुछ नहीं कहा है। अगर राजपरिवार किसी भी राजनीतिक दल से चुनाव लड़ता है तो इसका व्यापक असर पड़ेगा। सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस राजपरिवार पर अपना दांव खेल सकती है। वर्तमान पत्नी विभा सिंह द्वारा पिछले दिनों प्रेसवार्ता के दौरान किए गए खुलासे में पहली पत्नी के बारे में कहा कि वे तलाक के बाद किसी और से शादी कर चुकी है। विवादों के बीच एक-दूसरे की पोल खोलने में लगी हैं।
छजकां ने अभी नहीं खोले पत्ते
खैरागढ़ विधानसभा में छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस के टिकट पर देवव्रत सिंह ने जीत दर्ज की थी। विधानसभा में छजकां विधायक रहते हुए देवव्रत सिंह पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी से पटरी नहीं बैठने के कारण विरोध किया था। उनका झुकाव कांग्रेस की ओर अधिक था। अभी तक छजकां की ओर से काेई संकेत नहीं मिले हैं। बताया जाता है कि यहां पर कांग्रेस और भाजपा के बीच ही मुख्य मुकाबला होने के आसार हैं।
बहुप्रतीक्षित मांग पूरी होने पर कर्मचारी संगठनों ने माना प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी का आभार
मिठाई बांटी एवं पटाखे जलाए,गुलाल खेलकर मनाई खुशियां
पुरानी पेंशन बहाली मोर्चा ( NOPRUF ) एवं छत्तीसगढ़ टीचर एसोसिएशन ( CGTA ) ने जमकर लगाए ” भुपेश है तो भरोसा है ” के नारे
विभिन्न कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने पुरानी पेंशन बहाली मोर्चा के तत्वावधान में पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल होने के बाद बजट सत्र से जगदलपुर पहुंचे विधायक जगदलपुर एवं संसदीय सचिव रेखचंद जैन एवं छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय उर्जा विकास अभिकरण के अध्यक्ष मिथिलेश स्वर्णकार का अभिनंदन किया इस अवसर पर उपस्थित विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने पटाखे जलाए तथा रंग गुलाल खेलकर मिठाई बांटी एवं खुशियां मनाई |
इस अवसर पर विभिन्न कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा की पेंशन पुरुष भूपेश बघेल जी ने जो पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल कर सौगात दी है वह कर्मचारियों के भविष्य के सामाजिक सुरक्षा के लिए अति आवश्यक था अब कर्मचारी रिटायर्ड होने के बाद अपने भविष्य को लेकर आश्वस्त हो गये हैं |
इस अवसर पर विभिन्न कर्मचारी संगठनों के कर्मचारी नेता एवं विभिन्न कर्मचारी संगठनों के कर्मचारी उपस्थित रहे |
रायपुर। रंगों के पर्व होली के अवसर पर राज्यपाल अनुसुईया उइके, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत और मुख्यमंत्री भूपेश बधेल ने प्रदेशवासियों को बधाई प्रेषित की है। प्रदेशवासियों से आग्रह करते हुए कहा कि होली के उत्सव की खुशियों में इस बात का विशेष ध्यान रखें कि कोरोना संक्रमण का खतरा समाप्त नहीं हुआ है। इससे बचाव के हर सावधानियों का ध्यान रखना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
राज्यपाल ने इस पावन अवसर पर सभी नागरिकों के जीवन में सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की है। उन्होंने कहा कि होली रंगों का त्यौहार है। यह लोगों के जीवन में उल्लास के रंग भर देता है और खुशहाली लाता है। यह त्यौहार, सांस्कृतिक एकता को मजबूती प्रदान करने तथा समाज में भाईचारे एवं समरसता की भावना को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि रंगों के इस पर्व को लोग आपस में मिल-जुल कर मनाएं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेशवासियों को रंगों के पर्व होली की बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने इस अवसर पर सभी नागरिकों के लिए सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की है। होली की पूर्व संध्या पर जारी अपने शुभकामना संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा, होली उत्साह और उमंग का त्योहार है। यह रंगों, खुशियों और मेल मिलाप का भी त्यौहार है। इस दिन ऊंच-नीच, छोटे-बड़े, जात-पात से परे सभी लोग आपसी स्नेह के रंग में सराबोर नजर आते हैं। यह दिन लोगों के बीच खुशियां बांटने का है। कोरोना काफी कम हो चुका है, लेकिन बचाव में ही सुरक्षा है। कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए त्योहार मनाएं। उन्होंने सभी लोगों से सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल होली मनाने की अपील की है।
स्पीकर बाेले- भाईचारे का देता है संदेश
छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने होलिका दहन व रंग उत्सव की प्रदेशवासियों को बधाई दी। विस अध्यक्ष डॉ. महंत ने कहा, होली रंगों तथा हंसी-खुशी का त्योहार है। प्यार भरे रंगों से सजा यह पर्व हर धर्म, संप्रदाय, जाति के बंधन खोलकर भाई-चारे का संदेश देता है। इस दिन सारे लोग अपने पुराने गिले-शिकवे भूल कर गले लगते हैं और एक दूजे को अबीर, गुलाल लगाकर बधाई देते हैं। यह भारत का एक प्रमुख और प्रसिद्ध त्योहार है, जो आज विश्वभर में मनाया जाने लगा है।
पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की शानदार जीत के बहाने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बधाई देने पहुंचे छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने केजरीवाल से छत्तीसगढ़ में 2023 चुनाव को लेकर सहयोग मांगा है। उनके प्रस्ताव पर केजरीवाल ने सीधे तौर पर कह दिया है कि उनकी पार्टी अपने दम पर राजनीति करती है। ऐसे में अमित जोगी ने अब मन बना लिया है कि छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस का विलय आप में करके छत्तीसगढ़ में आगामी विधानसभा चुनाव लड़ा जाएगा। इस संबंध में उन्होंने पार्टी कोर कमेटी की बैठक में विलय का प्रस्ताव लाएंगे।
छत्तीसगढ़ जनता कांग्रस का गठन पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने कांग्रेस से निकाले जाने के बाद किया था। उन्होंने 2018 के विधानसभा चुनाव में अपनी ताकत दिखाई और पांच सीटो पर जीत दर्ज की। उनके प्रतयाियों के कारण कई सीटों में भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ा और कांग्रेस को दो की लड़ाई में बडा फायदा हुआ। अजीत जोगी के निधन के बाद पार्टी की कमान डॉ. रेणु जोगी को सौपा गया, पर पार्टी के दो विधायकों ने विद्रोह कर दिया। पार्टी में अब दो विधायक ही उनके साथ हैं। जोगी की करशमाई नेतृत्व के चलते पार्टी पार्टी की पकड़ थी वह कम हो गई है। अब पार्टी कांग्रेस में विलय को लेकर रेणु जोगी के माध्यम ये सोनिया गांधी तक अपनी बात पहुंचा चुकी है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री अजीत जोगी के रहते अमित जोगी को पार्टी में एंट्री मिलना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा। ऐसे में आप पार्टी जो छत्तीसगढ़ में कुछ नेताओं के दम पर संगठन तैयार कर चुकी है, पर वह अपनी पहचान बनाने विफल रही। पिछले चुनाव में प्रदेश अध्यक्ष कोमल हुपेंडी के नेतृत्व में कुछ सीटों पर चुना लड़ी पर अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई। अब केजरीवाल से मुलाकात के बाद अमित छजकां का विलय आप में करने को तैयार हो गए हैं।
रेणु और धर्मजीत की सहमति के बाद फैसला
छजकां सुप्रीमों डॉ. रेणु जोगी और पार्टी के विधायक धर्मजीत सिंह की सहमति के बाद ही अमित जोगी के प्रस्ताव पर मुहर लगेगी। बताय जाता है कि कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने पर धर्मजीत सिंह जोगी कांग्रेस में शामिल हुए थे। वे कांग्रेस से तीन बार विधायक रहे चुके हैं। उनकी पार्टी में फूट पड़ने के बाद भी वे जोगी के साथ रहे। ऐसे में उनका इस बात पर विरोध हो सकता है। माना जा रहा है केि कोर कमेटी में अमित जोगी का प्रस्ताव पारित होने पर वे पार्टी छाेड़ अन्य पार्टी में शामिल हो सकते हैं ।रेणु जोगी के पास कोई विकल्प नहीं होने पर वे अमित कको ही साथ देंगी
छत्तीसगढ़ में सत्ता और संगठन के बीच सामजस्य की कमी के चलते प्रदेश संगठन में आपसी खींचतान बढ़ गई है। मामला एआईसीसी तक पहुंचा तो प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया ने भी कह दिया कि प्रदेश में चुनाव दो साल से कम समय बचा है उसके पहले यहां पर संगठन में असंतोष देखने को मिल रहा है। एआईसीसी ने प्रदेश प्रभारी के रिपोर्ट के बाद इशारा कर दिया कि छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को बदला जाए। पीसीसी अध्यक्ष मोहन मरकाम को इसका पता चलते ही उन्होंने अपने पद से इस्तीफा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को सौंप दिया है। अब उनको सरकार में मंत्री बनाने या फिर केंद्र में भेजे जाने के संकेत मिल रहे हैं।
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार बनने के बाद प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल को मुख्यमंत्री बनाया गया। उनके मुख्यमंत्री बनने के एक साल बाद मोहन मरकाम को आदिवासी क्षेत्र के विधायक होने के कारण प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई। मरकाम के अध्यक्ष बनने के बाद संगठन के कामकाज में पहले तो सुस्ती देखी गई। नियुक्ति के 6 माह बाद उनकी कार्यकारिणी बनी। कार्यकारिणी में उनके पसंद के आधार पर कई पदों में नियुक्ति दी गई। प्रदेश और जिला कार्यकारिणी बनने के बाद कई जिलों में नए अध्यक्षों की नियुक्ति भी हुई। सत्ता और संगठन के बीच समन्वय बनाने प्रदेश अध्यक्ष को कई गार प्रदेश प्रभारी ने ताकीद की पर इसे लेकर वे असफल रहे। चाहे वह राजनांदगांव का मामला हो या बिलासपुर का वहां पर संगठन और विधायक के बीच पटरी नहीं बैठ पाई। जांजगीर-चांपा जिले में अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर विधानसभा अध्यक्ष ने मरकाम को कई बार कहा पर उन्होंने नहीं उठाया। अंतत: दिल्ली के निर्देश पर हटाया गया।
कार्यकारिणी में भी दो गुट
प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में भी पीसीसी अध्यक्ष के समक्ष सत्ता और संगठन के बीच सामजस्य नहीं बैठने को लेकर कई बार शिकायत की गई। एक बैठक में मुख्यमंत्री ने मरकाम पर बैठक की सूचना नहीं देने का आरोप लगाते हुए कहा कि संगठन के मुखिया इसकी जानकारी दे तो सत्ता इस पर विचार करें। संगठन से कोई जानकारी नहीं आती ऐसे में कोई किसी कांग्रेस पदाधिकारी की क्या मंशा है उसे कैसे समझेगा।
निगम मंडल में नियुक्त पर विवाद
निगम मंडल में नियुक्ति को लेकर संगठन की ओर से मोहन मरकाम ने कई पदों पर नियुक्ति के लिए नाम दिए थे। वहीं मुख्यमंत्री ने सूची और जिले में कांग्रेस के पुराने पदाधिकारियों का नाम नहीं होने पर नाराजगी जताई थी। आपसी मालमेल नहीं होने के कारण निगम मंडलों में सरकार के दो साल का कार्यकाल पूरा होने तक कोई नियुक्ति नहीं हो पाई। संगठन के कार्यकर्ताओं में नाराजगी के चलते भी पीसीसी अध्यक्ष पर ठिकरा फोड़ा गया। मामले में मुख्यमंत्री ने एक बैठक बुलाई उसमें भी मरकाम शामिल नहीं हुए।
सदस्यता अभियान रूचि नहीं
प्रदेश कांग्रेस संगठन को 10 लाख नए सदस्य बनाने का टारगेट दिया गया था। टारगेट 15 फरवरी तक पूरा किया जाना था। प्रदेश अध्यक्ष मरकाम ने इसे पूरा नहीं किया। प्रदेश में सरकार होने के बाद भी जिलाें में कांग्रेस के सदस्य बनाने में प्रगति नहीं होने पर प्रदेश प्रभारी और कांग्रेस के निर्वाचन पदाधिकारियों ने मरकाम को कार्यशैली में बदलाव लाने की चेतावनी दी थी। बस्तर के तीन और सरगुजा संभाग के कई जिलों में कम सदस्य बने थे। वहाीं राजधानी सहित कई बड़े जिलों में लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया, इसे भी मरकाम की कमजोरी माना गया है।
चुनाव के पहले नई रणनीति
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार के तीन साल पूरे हो गए हैं। अब दोबारा सत्ता में आने नई रणनीति बन रही है। प्रदेश प्रभारी पुनिया ने संगठन में असंतोष को दूर करने का सुझाव दिया। सरकार ने संगठन को योजनाओं के प्रचार प्रसार की जिम्मेदारी दी गई थी, इसे पूरा नहीं कर पाई। ऐसे में अब संगठन में किसी नए व्यक्ति को अध्यक्ष बनाकर उनके नेतृत्व में चुनाव में उतरने का निर्णय लिया गया है। ताकी कांग्रेस दोबारा सत्ता में आ सके।
रायपुर 17 मार्च । छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि विभिन्न मामलों में बनी न्यायायिक जांच आयोग की रिपोर्टों से स्पष्ट हो रहा कि रमन सरकार के दौरान पन्द्रह सालों में छत्तीसगढ़ में निर्दोषों का अनेको बार क्रूर नरसंहार किया गया। विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस ने तत्कालीन रमन सरकार पर जो-जो आरोप लगाए थे एक-एक करके वे सभी प्रमाणित होते जा रहे हैं। तथ्यों से प्रमाणित है कि वादाखिलाफी और प्रशासनिक आतंकवाद रमन सरकार का मूल चरित्र था।मदनवाड़ा, सारकेगुड़ा, एडसमेटा, पेद्दागेलुर जैसे फर्जी मुठभेड़, ताड़मेटला में सैकड़ों आदिवासियों के घर जलाने की घटना, सोनकु और बिजलु जैसे मिडिल स्कूल के बच्चों को मारकर नक्सली बता देना, मीना खलखो और मडकम हिडमे जैसी जघन्य बलात्कार और हत्या के मामले पर विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस ने पूरी ताकत से उठाया, और अब जब एक एक करके जांच कमिटीयों और न्यायिक आयोग की जांच रिपोर्ट सामने आ रही है तो वे सारे आरोप जो तत्कालीन रमन सरकार पर कांग्रेस ने लगाए थे, लगातार प्रमाणित हो रहे हैं।
प्रदेश कांग्रेस के संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि रमन सरकार के दौरान बस्तर के 644 गांव के लगभग 3 लाख से अधिक आदिवासियों को अपना घर और अपना गांव छोड़कर पलायन करने मजबूर किया गया। जल, जंगल, जमीन के अधिकारों से बेदखल किया गया। बिना उद्योग लगाए ही लोहाडिगुडा में 4200 एकड़ जमीनें छीनी गई थी, जो भूपेश सरकार ने वापस किए, नक्सलवाद का डर दिखाकर हजारों स्कूल बंद कर दिए गए थे जो वर्तमान सरकार ने पुनः शुरू किया, जगरगुंडा बासागुड़ा राजमार्ग दशकों से बंद था जिसे भूपेश सरकार ने शुरू किया। विकास, विश्वास और सुरक्षा से स्थानी जनता का विश्वास जीता जा रहा है। सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक तीनों क्षेत्रों में बस्तर के स्थानीय जनता की सहभागिता सुनिश्चित हुई है। एडसमेटा मुठभेड़ की न्यायिक जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट हो गया है कि मारे गए तीन नबालिकों सहित सभी नौ लोग स्थानीय निर्दोष आदिवासी थे।
मदन वाड़ा की रिपोर्ट से स्पष्ट हुआ कि घटना में जिस अधिकारी की लापरवाही से एसपी सहित जवानों की शहादत हुई उस अधिकारी मुकेश गुप्ता को रमन सरकार ने सिर पर बैठा रखा था। तत्कालीन रमन सरकार के दौरान बस्तर में दर्जनों बार निर्दोष आदिवासियों ग्रामीणों को नक्सली बता कर मार दिया गया । इन फर्जी मुठभेड़ों में मारे गए ग्रामीणों को भाजपा ने उस समय नक्सली साबित करने पूरी ताकत लगा दिया था। न्यायायिक आयोगों की रिपोर्ट के बाद मृतकों को नक्सली बताने वाले भाजपा नेताओं को छत्तीसगढ़ की जनता से माफी मांगनी चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह में नैतिकता बची हो तो पन्द्रह साल तक प्रदेश में क्रूर और अत्याचारी सरकार चलाने के लिए प्रदेश की जनता से माफी मांगे।