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कोविड 19 पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा हम कोरोना संक्रमण पर नजर रखे हुए है, कोरोना से प्रभावित नहीं होगी प्रदेश की अर्थव्यवस्था

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प्रदेश में फैलते कोरोना संक्रमण पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सुबह पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि अभी आर्थिक गतिविधियां बंद करने का सवाल ही नहीं उठता है हम देश और प्रदेश के संक्रमण पर नजर रखे हुए हैं सरकार ने स्कूल बंद करा दिए हैं भीड़भाड़ वाले इलाकों पर भी पैनी नजर रखी जा रही है रात का कर्फ्यू जहां संक्रमण की दर ज्यादा है वहां पर लगा दिया गया है वैक्सीनेशन को बढ़ावा देने के लिए स्वास्थ्य विभाग को हिदायत दी गई है कि ज्यादा से ज्यादा टीके लगाया जाए 15 से 18 वर्ष के बच्चों को भी टीकाकरण बहुत तेजी से किया जा रहा है यहां यह गौरतलब है कि प्रदेश के 7 जिलों में संक्रमण की दर अत्यधिक पाई जा रही है जहां राजधानी

रायपुर मैं लगातार मरीजों की संख्या बढ़ रही है तकरीबन 13% की दर से संक्रमण राज्य में फैल रहा है और आज के आंकड़े देखे तो वह बहुत ही भयावह नजर आ रहे हैं सिर्फ रायपुर में ही 931 केसेस कल पाए गए हैं अगर प्रदेश का आंकड़े की बात करें तो 10000 लगभग पहुंच चुका है हालांकि प्रदेश सरकार ने कोविड-19 को कड़ाई से पालन करने के लिए सख्त हिदायत प्रदेश में दी गई है सार्वजनिक स्थानों पर बगैर मास्क के पाए जाने पर जुर्माना निर्धारित किया गया है और अगर कोरोना से मृत्यु की दर की बात करें तो प्रदेश में अभी तक 3 मौतें हो चुकी हैं |

Breaking Corona Alert – दल्लीराजहरा में लगातार बढ़ रही कोरोना संक्रमितों की संख्या

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दल्लीराजहरा – देश एवं प्रदेश के साथ – साथ जिले में भी कोरोना संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

कल तक दल्लीराजहरा में 09 संक्रमितों की पुष्टि की जा चुकी है |

फिर से आज दल्लीराजहरा से 04 संक्रमितों की पुष्टि हुई है |

दल्लीराजहरा से अब तक कुल 13 एवं चिख्लाकसा से 01 संक्रमितों की पुष्टि की जा चुकी है |

कोरोना के मामले इसी तरह बढ़ते रहे तो लॉकडाउन जैसी स्थिति निर्मित होने में समय नहीं लगेगा | कोरोना के मिल रहे मामलों के बाद भी लोग नहीं चेत रहे हैं और बेफिक्र होकर घूम रहे हैं।

विशेष अनुरोध – सिटी मीडिया भी नगर के समस्त नागरिकों एवं पाठकों से अनुरोध करता है कि कोविड प्रोटोकॉल के तहत सोशल डिस्टेसिंग एवं मास्क का सदैव उपयोग करें जिससे स्वयं एवं अपने परिवार को सुरक्षित रख बड़ी हानि से बचे |

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पुष्प स्टील कंपनी के वादाखिलाफी से भड़के ग्रामीण, कंपनी द्वारा ग्रामीणों के लंबित मांगों को पूरा किया जाये अन्यथा चक्काजाम – शिवसेना

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दुर्गुकोंडल पुष्प स्टील कंपनी द्वारा लौह अयस्क खदान प्रारंभ किया गया तो कंपनी द्वारा क्षेत्र के लोगों से रोजगार शिक्षा स्वास्थ्य स्थानीय विकास का वादा किया गया था किंतु खदान प्रारंभ होने के आज 3 वर्ष बाद भी क्षेत्र के लोगों को समुचित मात्रा में रोजगार नहीं दिया जा रहा है और ना ही क्षेत्र में शिक्षा स्वास्थ्य विकास का कोई कार्य किया जा रहा है एवं क्षेत्र में खदान अधिनियम पर्यावरण अधिनियम मजदूरी अधिनियम का खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है, जिसके विरोध में क्षेत्र के जनप्रतिनिधि द्वारा आंदोलन प्रारंभ किया गया था जिससे शासन प्रशासन द्वारा आश्वासन देकर बंद करवा दिया गया था किंतु प्रशासन द्वारा पुष्प स्टील माइंस में क्षेत्रीय लोगों को उचित संख्या में काम दिलाने का वादा आज दिनांक तक पूरा नहीं किया गया है, जिसके विरोध में एवं निम्न मांगो को लेकर शिव सेना द्वारा दिनांक 06/01/2022 को पुष्प स्टील कंपनी के सामने ग्राम आमागढ़ में धरना प्रदर्शन कर चक्का जाम किया जाना था किंतु कोरोना बीमारी के कारण जिला प्रशासन द्वारा कांकेर जिले में धारा 144 लगाया गया है जिसके कारण हमारे द्वारा धरना प्रदर्शन और चक्का जाम न करके ज्ञापन प्रेषित किया जा रहा है |

हमारी निम्न मांगों को तत्काल पूरा करने का कष्ट करेंगे अन्यथा हमारे द्वारा कांकेर जिला में धारा 144 हटाने के बाद आपके खदान के समक्ष धरना प्रदर्शन चक्का जाम किया जाएगा |

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(1) पुष्प स्टील लौह अयस्क खदान में प्रभावित क्षेत्र के 700 मजदूरों को काम पर रखा जाए |

(2) पुष्प स्टील कंपनी द्वारा खदान प्रभावित क्षेत्र में शिक्षा स्वास्थ्य पेयजल सड़़क पुल पुलिया विकास का कार्य कराया जाए |

(3) पुष्प स्टील कंपनी द्वारा खदान प्रभावित क्षेत्र के वाहन मालिकों की गाड़ी भी खदान में लगाया जाये |

(4) पुष्प स्टील कंपनी शासन प्रशासन के सभी नियमों को मानते हुए खदान में कार्यपुष्प स्टील कंपनी शासन प्रशासन के सभी नियमों को मानते हुए खदान में कार्यरत मजदूरों को श्रम अधिनियम खदान अधिनियम के तहत समस्त सुविधा सुरक्षा उपलब्ध कराया जायें |

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जिसमें प्रमुख रूप से छत्तीसगढ़ शिव सेना प्रदेश महासचिव चंद्रमौली मिश्रा जिला महासचिव व युवा सेना जिला अध्यक्ष कांकेर खेमलाल माहला धनेश कुमार मिथिलेश कुमार विश्वनाथ मंडावी मनीष कुमार सुरेश कुमार नवल शैलेंद्र कुमार सिन्हा मानसिंह नरेटी नरेश कुमार संजय कुमार उइके गणपत राम कुमार सुमन ध्रुव नर्सिंग कोमल कुमार सुमन नरसिंह जैन परेश मानसिंह नरेटी नंदेश कुमार मिजाम साय बगेश्वर आचला रूपधर जैन मथेन नुरेटी गणेश राम टांडिया सुदेश कुमार अश्वनी जैन मोहन लाल दुग्गा डमेंन्द्र सिंह सुरेश कुमार सुनाऊ राम पोटाई धनेश्वर पटेल धर्मेंद्र सिंह भुनेश्वर पटेल नरेंद्रन नुरेटी श्याम दास पटेल सोमेश राना सुरेश कुमार भुआर्य एवं शिवसैनिक व ग्रामवासी उपस्थित थे |

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दासा की राशि और एरियर्स को लेकर श्रम संगठनों द्वारा सेल एवं बीएसपी प्रबंधन पर कर्मियों के साथ पक्षपात करने का आरोप लगाया

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हाल ही में सेल कर्मियों के वेतन समझौते के उपरांत खदान कर्मियों के बीच प्रबंधन द्वारा दिए जा रहे दासा की राशि और उसके एरियर्स कोलेकर आक्रोश पनप रहा था एवं विभिन्न श्रम संगठनों द्वारा भी सेल एवं बीएसपी प्रबंधन पर कर्मियों के साथ पक्षपात करने का आरोप लगाया जा रहा था। इस विषय पर बीएसपी के बंधक खदानों में कार्यरत तीन श्रम संगठनों – बी.एम.एस, एटक एवं इंटुक ने संयुक्त रूप से प्रबंधन के समक्ष इस बात को रखते हुए जल्द से जल्द निर्णय लेने हेतु कहा था किन्तु किसी तरह की कोई कारवाई न होते देख तीनों श्रम संगठनों ने दिनांक 07.01.2021 से अनिश्चितकालीन हड़ताल का नोटिस बीएसपी प्रबंधन एवं उप मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) रायपुर को 14.12.2021 को सौंपा। इस परिपेक्ष्य में दिनांक 03.01.2022 को बीएसपी प्रबंधन के साथ एवं दिनांक 04.01.2022 को उप मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) रायपुर के कर्म्यालय में भी प्रबंधन के साथ विस्तृत चर्चा हुई जिसमे उप मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) रायपुर ने प्रबंधन को श्रम संगठनों के साथ मिलकर चर्चा करने एवं समाधान करने का सुझाव दिया। अपने इस हड़ताल में तीनों श्रम संगठनों ने जो मांगें प्रबंधन के समक्ष राखी थी वे इस प्रकार हैं –

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(1) समस्त खदान कर्मियों को उनके बढे हुए वेतनमान के 10% राशि को तत्काल दासा के रूप में भुगतान किया जावे और उसका एरियर्स का भी भुगतान किया जावे।
(2) खदान में कार्यरत सभी ठेका श्रमिकों को रुपये 150/- प्रतिदिन के हिसाब से दासा का भुगतान किया जावे।
उप मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) रायपुर के सुझाव पर बीएसपी प्रबंधन ने दिनांक 06.01.2022 को तीनों श्रम संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ उनके मांगों पर विस्तृत चर्चा की। लम्बे चर्चा के उपरान्त दोनों पक्षों के बीच सद्भावपूएं वातावरण में लिखित समझौता हुआ जिसमे इन मुद्दों पर सहमति बनी –

(1) सभी नियमित कर्मियों को जनवरी माह के वेतन के साथ उनके बढे हुए वेतन के 8% राशि को दासा के रूप में दिया जावेगा और 18.11.2021 से 31.12.2021 तक का एरियर्स भी इसी के साथ भुगतान किया जावेगा। श्रम संगठनों के द्वारा 8% राशि का विरोध करने पर प्रबंधन ने कहा कि ये 8% राशि प्रबंधन द्वारा तय नहीं की गयी है बल्कि केंद्र सरकार के कार्यालय ज्ञापन क्रमांक – W-02/0028/2017-DPE(WC)-GL-XVI-17, Dated – 07.09.2017 के आधार पर किया दिया जाना तय हुआ है। पूर्व में भी जो 10% राशि दी जा रही थी वह केंद्र सरकार के कार्यालय ज्ञापन क्रमांक – 2(70)/08-DPE(WC)-GL-XVI/08, Dated – 08.11.2008 द्वारा तय की गयी थी। इस पर उक्त कार्यालय ज्ञापनों का अध्ययन करने के पश्चात सभी श्रम संगठनों ने इस बात पर आपत्ति की कि उक्त कार्यालय ज्ञापन में केवल अधिकारीयों और नॉन- यूनियन सुपरवाइजरी केटेगरी की बात की गयी है जिसपर बीएसपी प्रबंधन ने दो माह के भीतर इसपर सम्बंधित मंत्रालय से आवश्यक दिशा निर्देश प्राप्त कर कारवाई करने की बात मानते हुए कहा कि अगर मंत्रालय द्वारा सामान्य कर्मियों को 10% राशि देने हेतु मंजूरी दे दी जाती है तो उसका भुगतान कर दिया जावेगा। जहांतक दासा के एरियर्स की बात है तो इसपर भी दो माह के भीतर निगमित कार्यालय से आवश्यक कारवाई कर भुगतान कर दिया जावेगा। जहाँ तक पिछले वेतन समझौते के बाद के दासा एरियर्स राशि भुगतान की बात है तो अगर आरएमडी के खदानों में दिए गए एरियर्स को प्रबंधन द्वारा काटा नहीं गया है तो एक माह के भीतर उसका भी भुगतान कर दिया जावेगा। इस पर तीनों श्रम संगठन ने सहमति जताते हुए प्रबंधन के पक्ष को स्वीकार किया।

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ठेका कर्मियों के लिए दासा राशि भुगतान करने के मुद्दे पर प्रबंधन ने स्पष्ट कहा कि ठेका कर्मियों को दासा राशि भुगतान हेतु केंद्र सरकार की तरफ से कोई दिशा निर्देश नहीं है। इसपर सभी श्रम संगठनों ने कहा कि आज कंपनी के उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ने और बनाये रखने में ठेका श्रमिकों का भी नियमित कर्मियों की तरह बराबर का योगदान है ऐसे में उन्हें वंचित रखना उचित नहीं है। चर्चा के दौरान प्रबंधन ने माना कि श्रम संगठनों की बात सही है और सैद्धांतिक रूप से प्रबंधन श्रम संगठनों की मांग से सहमत है और इस मुद्दे पर एक कमिटी का गठन किया गया है जिसका निर्णय आने के उपरांत इस दिशा में समुचित कारवाई की जावेगी। प्रबंधन के इस बात से सभी श्रम संगठनों ने नाराजगी जताते हुए स्पष्ट किया कि वो इस बात को स्पष्ट उल्लेख करे कि उक्त कमिटी कबतक अपना रिपोर्ट देगी और कमिटी के रिपोर्ट को फाइनल करने के पहले सभी श्रम संगठनों से भी चर्चा करना आवश्यक होगा। लाबी चर्चा के उपरांत तीनों श्रम संगठनों द्वारा ठेका श्रमिकों को प्रतिदिन रूपए 150/- दासा के रूप में देने की मांग पर भी सैद्धांतिक सहमति बनी किन्तु उक्त राशि दासा के रूप में न देते हुए उसे खदान भत्ता के रूप में दिया जावेगा। साथ ही प्रबंधन ने यह भी स्वीकार किया कि 01.04.2022 से उक्त राशि भत्ते के रूप में ठेका श्रमिकों को दिया जावेगा। इसके अलावा पबंधन ने इस बात को भी स्वीकार किया कि दिनांक 01.04.2022 से ठेका श्रमिकों एवं उनके आश्रितों के लिए मेडिकल सुविधा भी शुरू कर दी जावेगी।

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तीनों श्रम संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि उक्त प्रस्तावित हड़ताल हेतु तय किये गए मुद्दों पर प्रबंधन के द्वारा किये गए सकारात्मक पहल के बाद हड़ताल का कोई औचित्य ही नहीं रह जाता था अतएव हड़ताल वापस लेने की घोषणा की गयी। किन्तु नियमित कर्मियों और ठेका श्रमिकों के लिए किये गए इस समझौते से कुछ ऐसे श्रम संगठन के पेट में दर्द होने लगा जो एक तरफ तो नियमित एवं ठेका श्रमिकों के मसीहा होने का दम्भ भरते हैं तो दूसरी तरफ उन्हें किसी भी तरह के लाभ से वंचित रखना अपना परम कर्तव्य समझते हैं। इस दिशा में सीटू एवं सीएमएमएस के नेतागण यह तो बताएं कि अगर वास्तव में वो नियमित एवं ठेका श्रमिकों का भला चाहते हैं तो दिनांक 07.01.2022 के प्रस्तावित हड़ताल का नोटिस उप मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) रायपुर को क्यों नहीं दिया? चूँकि इन दोनों श्रम संगठनों द्वारा उप मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) रायपुर को नोटिस नहीं दिया गया था अतएव प्रबंधन एवं उप मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) रायपुर ने इन दोनों श्रम संगठनों को समझौता वार्ता के प्रक्रिया से अलग रखा जिसके लिए ये स्वयं जिम्मेदार हैं। जहाँ तक सीएमएमएस की बात है तो तीनों श्रम संगठनों ने सीएमएमएस के मुखिया गणेश राम चौधरी से भी 06.01.2022 को होने वाले वार्ता में शामिल होने हेतु निवेदन किया था किन्तु उन्होंने इससे स्पष्ट मना कर दिया। श्री गणेश राम चौधरी द्वारा ठेका श्रमिकों को दासा के रूप में उनके मूल वेतन का 10% राशि देने, नाईट शिफ्ट अलाउंस देने एवं मेडिकल सुविधा देने की मांग की गयी थी जिसके अनुसार ठेका श्रमिकों को रुपये 35/- से लेकर रूपए 60/- प्रतिदिन ही मिलेगा। ऐसे में अब सभी ठेका श्रमिक यह तय करें कि तीनों श्रम संगठनों द्वारा किये गए समझौतानुसार मिलने वाली राशि उचित है या फिर श्री गणेशराम चौधरी द्वारा की गयी मांग सही है। जहाँ तक मेडिकल सुविधा की बात है तो प्रबधन ने इस सुविधा को 01.04.2022 से ठेका श्रमिकों के लिए शुरू करने की प्रतिबद्धता दिखाते हुए लिखित में इसे माना है। ऐसे में सीएमएमएस के नेता श्री गणेशराम चौधरी द्वारा की गयी सभी मांग भी पूरी हो चुकी है। तब मांग पूरी होने के बाद भी उनके द्वारा हड़ताल करना और सीटू द्वारा उसका समर्थन करना कितना सही है उसका निर्णय अब स्वयं सभी ठेका श्रमिक करें।

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जहाँ तक नियमित कर्मियों के लिए किये गए समझौते की बात है तो यह साफ़ है कि समझौता वार्ता से अपने आप को बाहर रखकर सीटू ने नियमित कर्मियों के साथ छलावा किया है और उनका यह कहना कि समझौता गलत हुआ है मात्र एक भ्रामक प्रचार है। दरअसल में सीटू एक ऐसा श्रम संगठन है जो किसी भी तरह से कर्मियों का भला नहीं चाहता है किन्तु अपने आप को नियमित कर्मियों / ठेका श्रमिकों का मसीहा बताता है। तीनों श्रम संगठनों के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट कहा कि आज जिन ठेकों में सीटू के श्रमिक कार्यरत हैं उनमे ठेकेदार द्वारा समुचित भुगतान नहीं किया जाता है। कागज में पूरा भुगतान दिखाकर श्रमिकों से पैसा वापस ले लिया जाता है लेकिन सीटू के नेता ऐसे ही ठेकेदार को संरक्षण देते हैं। पिछले बार भी वर्ष 2014 में दासा के मुद्दे को लेकर हुई लड़ाई में भी इन्होने अपने आप को श्रेष्ठ साबित करने हेतु मान्यता के आड़ में एक ऐसा घटिया समझौता किया था जिसका न तो कोई सर था और न ही पैर। मामला दासा के एरियर्स राशि का था जिसे आरएमडी के खदानों में दिया गया था लेकिन इसके लिए इन्होने मामले को समझने हेतु कमिटी की बात की जिसका न तो कभी गठन हुआ और न ही कोई क्रियान्वयन। जबकि एटक और इंटुक ने प्रबंधन के साथ वार्ता जारी राखी और बीएमएस ने मामले को कैट में रखते हुए वाद दायर की। जबकि सीटू ने मामले में चुप्पी साधे रखी। ऐसे में अब कर्मीगण स्वयं तय करें कि सीटू कितना कर्मियों के हित को चाहता है? सीटू और सीएमएमएस के विरोध को केवल दिखावा करार देते हुए तीनों श्रम संगठनों के प्रतिनधियों ने कहा की दरअसल में सीएमएमएस और सीटू के नेतागण किसी भी कर्मियों का भला नहीं चाहते हैं और उनका एक ही ध्येय है कि कर्मी आधा पेट खाना खाएं और उनके पीछे घूमें।

नक्सलियों ने एक युवती सहित दो युवक की जन अदालत में गला रेत कर की हत्या

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बीजापुर-नक्सलियों के द्वारा जनअदालत लगाते हुए 2 युवक समेत 1 युवती की धारदार हथियार से हमला कर उनकी हत्या कर दी, नक्सलियों ने इन तीनो के ऊपर पुलिस मुखबिरी का आरोप लगाया है |

जानकारी के अनुसार गंगालूर थाना क्षेत्र के इडिनार में नक्सलियों ने गुरुवार को जनअदालत लगाया, जहां नक्सलियों ने कमलू पूनम और महिला मांगी सहित एक पुरुष पर पुलिस की मुखबिरी का आरोप लगाते हुए मौत की सजा सुनाया और ग्रामीणों की मौजूदगी में उनकी निर्ममता पूर्वक हत्या कर दी, घटना की जानकारी ग्रामीणों ने गंगालूर के लोगों को दी,बीजापुर एसपी कमलोचन कश्यप ने इस मामले को लेकर कहा कि उन्हें भी इस इस घटना की जानकारी मिली है, घटना के सम्बंध में सारी जानकारियां एकत्र की जा रही है, उसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है. घटना के बाद से जिले के ग्रामीण क्षेत्रो में दहशत का माहौल व्याप्त हो गया है.फिलहाल पुलिस मामले की जानकारी इकट्ठा कर रही है |

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Job Alert – बालोद जिला न्यायालय में नियमित एवं संविदा पदों पर निकली सरकारी भर्ती

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बालोद – बालोद जिला एवं सत्र न्यायालय में नियमित स्टेनोग्राफर एवं संविदा सिस्टम ऑफिसर पदों पर सरकारी भर्ती निकली है |

अधिक जानकारी एवं फॉर्म के लिए संपर्क करें – 99815 59622 सर्वोदय बुक डिपो, NICETEC DALLIRAJHARA

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एकलव्य बेसोली व क्रीड़ा परिसर भानपुरी में समस्याओं का अम्बार, अभाविप ने सहायक आयुक्त व कलेक्टर के नाम सौंपा ज्ञापन

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एकलव्य में नियमित प्राचार्य की नियुक्ति व अधीक्षक को हटाने की मांग

जगदलपुर – अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने शुक्रवार को कलेक्टर व सहायक आयुक्त को ज्ञापन सौंपा ज्ञात हो कि अभाविप द्वारा पिछले दिनों 2 छात्रों के गायब होने पर आक्रोश व्यक्त करते हुये एकलव्य के प्राचार्य व अधीक्षक पर गैरजिम्मेदार व लापरवाही का आरोप लगाकर हटाने का मांग करते हुये आंदोलन किया था।

जिला संयोजक कमलेश दीवान ने बताया की एकलव्य विद्यालय बेसोली में मूलभूत समस्याएं व्याप्त है जिसमे पानी ,लाइब्रेरी, सीसीटीवी कैमरा, सुरक्षा गार्ड ,खेल मैदान प्रयोगशाला, यात्रा भत्ता समेत कई बिंदुओं पर ज्ञापन सौंपकर कार्यवाही की मांग की गई। साथ ही पिछले दिनों बच्चे गायब होने के मामले में जांच कर दोषियों पर कार्यवाही के करने के लिये भी सहायक आयुक्त ने आश्वासत किया है। ज्ञापन के दौरान विभाग संयोजक अर्पित मिश्रा ,जिला संयोजक कमलेश दीवान, यश ध्रुव व आसमन बघेल उपस्थित रहे।

क्रीड़ा परिसर अस्थाई भवन में संचालित,खेल शिक्षक की नियुक्ति नही हुई –

खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों के लिये भानपुरी में संचालित नवीन बालिका क्रीड़ा परिसर अस्थाई भवन में संचालित है जिसमे टूटे हुए शौचालय उपयोग करने छात्राओं की मजबूरी है, इसी क्रीड़ा परिसर में वर्षों से खेल शिक्षक की नियुक्ति नही हुई है जिसमे कारण प्रतियोगिता की तैयारियां नही हो पाती है ।

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शांति का टापू कहा जाने वाला छत्तीसगढ़ आज भाजपा की चालों का दंश झेल रहा है, इससे बचना होगा….हरीश कवासी

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(पीयूष मिश्रा)

रायपुर। बस्तर के युवा नेतृत्व के प्रतिनिधि हरीश कवासी का कहना है कि 21 वर्ष का युवा छत्तीसगढ़ अपने खुशनुमा माहौल और शांतिपूर्ण वातावरण को आज आज भाजपा के वैचारिक प्रदूषण की वजह से दूषित मानने को मजबूर है। शांति का टापू कहा जाने वाला छत्तीसगढ़ आज भाजपा की चालों का दंश झेल रहा है, इससे बचना होगा वरना भाजपा की सामाजिक सद्भाव विरोधी मानसिकता बस्तर का विकास बाधित कर देगी।

वनों से आच्छादित आदिवासियों का गढ़ कहे जाने वाले बस्तर संभाग के दूरस्थ क्षेत्र सुकमा कोंटा के प्रतिनिधि हरीश लखमा बस्तर में युवा आइकॉन के नाम से जाने जाते हैं। जिन्होंने नगरनार स्टील प्लांट के निजीकरण का व्यापक स्तर पर विरोध किया था। अपने पिता छत्तीसगढ़ शासन के मंत्री कवासी लखमा के जन्मदिन के अवसर पर रायपुर प्रवास पर पहुंचे। उन्होंने खास बातचीत में कहा कि छत्तीसगढ़ का माहौल बहुत शांतिपूर्ण है। मेरा जन्म हुआ है यहां, मैं आदिवासी वर्ग से आता हूं ,लेकिन भारतीय जनता पार्टी यहां अराजकता कायम करना चाहती है। 15 वर्षों तक राज करने वाली भारतीय जनता पार्टी के पास आज कोई एजेंडा नहीं है। जिसके कारण नगरीय निकाय चुनाव में भी उसे पराजय का सामना करना पड़ा। आज वह धर्मांतरण का नाम लेकर भोली भाली आदिवासी जनता को भड़काने का काम कर रही है लेकिन वह यह नहीं जानती कि भारतीय जनता पार्टी के चाल चरित्र से बस्तर की जनता अवगत हो चुकी है और वह किसी भी प्रकार के बहकावे में नहीं आने वाली। भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए हरीश लखमा ने कहा कि 2003 में जब भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी थी तब सुकमा में मात्र तीन चर्च थे 15 वर्षों के शासनकाल में उसकी संख्या बढ़कर 40 हो गई। मैं फिर से कह रहा हूं कि भाजपा के पास कोई मुद्दा नहीं है। दोहरी राजनीति करते हैं और शांतिपूर्ण माहौल को बिगाड़ने का काम करके फिर से सत्ता प्राप्त करना चाहते हैं लेकिन आज बस्तर की जनता इनको बहुत अच्छे से पहचान चुकी है और इनके नापाक मंसूबे अब कभी पूरे नहीं हो सकते क्योंकि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बस्तर और आदिवासियों के लिए एक से बढ़कर एक कार्य किए हैं जिससे आज बस्तर विकास की राह पर दौड़ रहा है।

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आपसी विवाद को लेकर चाकू से हमला करने वाले आरोपियों को कोतवाली पुलिस ने किया गिरफ्तार

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बस्तर पुलिस के द्वारा लगातार अपराधो की रोकथाम व नियंत्रण के लिये पेट्रोंलिग गश्त का अभियान चलाया जा रहा है। ज्ञात हो कि दिनांक 06.01.2022 को रात्रि लगभग 08ः00 बजे गणपति रिसाॅर्ट गोरिया बहार नाला पुल के पास आपसी रंजिश को लेकर दो पक्षो में हुये विवाद के संबंध में प्रार्थी राज कौशिक ने आरेापीगण पिंटु, शुभम सेट्ठी, शाहिल दास और सौरभ दास के खिलाफ मारपीट लड़ाई झगड़ा का रिपोर्ट दर्ज कराया था। रिपोर्ट की सूचना मिलने पर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंचकर घायलों को उपचार हेतु महारानी अस्पताल भेजा गया था। घटना की पुरी जानकारी के बाद आरोपियों के धर पकड़ हेतु वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जीतेन्द्र सिंह मीणा एवं अति0 पुलिस अधीक्षक ओमप्रकाश शर्मा के मार्गदर्शन में नगर पुलिस अधीक्षक किरण चण्हाण के पर्यवेक्षण में निरीक्षक एमन साहू के

नेतृत्व में टीम गठित किया गया था। घटनास्थल में जाकर आरोपियों का पता तलाश किया जा रहा था तभी आरोपी शुभम सेट्ठी व पिंटु कश्यप संजय बाजार में कहीं छुपे होने की सूचना मिली जिन्हे पुलिस पार्टी के द्वारा घेराबंदी करके पकड़ा गया। आरोपी पिंटु कश्यप के कब्जे से धारदार चाकू बरामद किया गया। दोनो आरोपियों के द्वारा प्रार्थियों के साथ आपसी विवाद होने पर चाकु तथा डंडे से हमला करके चोट पहुंचाना स्वीकार किया गया। अपराध स्वीकार करने पर दोनो आरोपियों 1. प्रशांत उर्फ पिंटु कश्यप पिता विजय कश्यप उम्र 22 साल नि0 आमागुड़ा लालबाग गैस गोदाम के पास जगदलपुर 2. शुभम सेट्ठी पिता दुर्गासन सेट्ठी उम्र 21 निवासी ईतवारी बाजार संजय मार्केट पुलिस चैकी के पीछे जगदलपुर के खिलाफ थाना कोतवाली जगदलपुर के अप0क्र0-07/2022 धारा 294,324,506-बी,34 भादवि0 25 आम्र्स एक्ट के तहत् कार्यवाही कर, गिरफ्तार कर, माननीय न्यायालय न्यायिक रिमांड पर भेजा गया।

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मामले के अनुसंधान में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाले पुलिस अधिकारी:
निरीक्षक एमन साहू, उपनिरीक्षक होरीलाल नाविक, पीयुष बघेल एवं बी0पी0 जोशी, सउनि0 सुधराम नेताम व प्रआर0 पुनीत शुक्ला।

मोदी जी की रैली में सुनने वाला एक भी व्यक्ति नही था तो क्यो जा रहे थे बाई रुट :- सांसद बैज..

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⏩ बस्तर सांसद दीपक बैज ने प्रधानमंत्री मोदी जी को पलट वार करते हुए कहा जब पंजाब के फिरोजपुर में 5 तारीख को होने वाली रैली को संबोधित करना ही था और उन्हें सुन ने वाला एक व्यक्ति भी नही था तो बाई रुट किस लिए जा रहे थे ?

सुरक्षा के नाम से देश मे तमाशा खड़ा किया जाना आपको शोभा नही देता। क्योंकि प्रधानमंत्री की सुरक्षा हर राज्य सरकार व आम नागरिक की जवाबदारी बनती है। तो इतना बड़ा तमाशा क्यो…जवाब दें प्रधानमंत्री ?

🔹 क्या आपके प्रोटोकॉल में बाई रूट जाने का उल्लेख था ?

🔹 क्या प्रधानमंत्री को सुरक्षा के दृष्टि से 112 कि.मी से अधिक सड़क मार्ग से जाना क्या जरूरी था ?

🔹 प्रधानमंत्री जी पंजाब के हालात को देखते हुए इतना लंबा दूरी बाई रुट ले जाने का निर्णय आखिर किसका था और क्यो लिया गया क्या इसकी जानकारी राज्य सरकार पहले से थी ?

🔹 मौसम रैली के दो दिन पहले से ही खराब था क्या आपके इंटलीजेंसी ब्यूरो (आई.बी) सुरक्षा एजेंसियों व एस.पी.जी को पता नही था ?

🔹 आपकी रैली में सुनने वाला एक व्यक्ति भी नही था तो किस लिए जा रहे थे बाई रूट ?

🔹 पंजाब के किसान संगठनो ने रैली में जाने से पहले ही बाईकाट कर दिया था क्या आपके इंटलीजेंसी ब्यूरो (आई.बी) सुरक्षा एजेंसियों को पता नही था ? केंद्र सरकार भी जानती है कि पंजाब में किसान मोदी सरकार के खिलाफ सड़क पर उतर कर जगह-जगह प्रदर्शन कर रहे है क्योंकि अभी भी उनकी कई मांगो को लेकर केंद्र सरकार उदासीन है। क्या इस परिस्थिति में यह निर्णय सही है ?

🔹 फिरोजपुर जहाँ किसान प्रदर्शन कर रहे थे वह क्षेत्र सिमावर्ती क्षेत्र होने के कारण 50 कि.मी. तक का क्षेत्र बी.एस.एफ.(BSF) के कब्ज़े में है जो कि केंद्र सरकार के अधीन है।

बस्तर सांसद दीपक बैज ने कहा कि बीजेपी के केंद्रीय मंत्री जो सवाल पंजाब सरकार से कर रहे है उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री से करना चाहिए क्योंकि प्रधानमंत्री की सुरक्षा का पूरा जिम्मा केंद्रीय गृह मंत्रालय को होता है जिसमें एस.पी.जी,आई.बी, बी.एस.एफ. एवँ सी.आर.पी.एफ. जैसी कई सुरक्षा एजेंसियां सभी तरह के सूचना एकत्रित कर कार्यक्रम के प्रोटोकॉल को जारी करते है। जो किसान सड़क में प्रदर्शन कर रहे थे उनके हाथों में कोई हथियार या नुकसान पहुंचाने योग्य सामग्री थी। आपकी सुरक्षा में सेंध भाजपा के कार्यकर्ताओं ने किया जो कि झंडा लिए आपके काफिले के समक्ष नारेबाजी कर रहे थे।

क्या प्रधानमंत्री मोदी किसानों से डर गए है…या नफरत करते है ? प्रधानमंत्री की रैली पूरी तरह से फैल हुई जिसे “सुरक्षा में चूक” नाम से डायवर्ट करने स्टंट है। यह आपके मुंह से ये शोभा देता है ?

इन सब अनसुलझे सवाल के जवाब देश की जनता जानना चाह रही है क्या देश के प्रधानमंत्री इतने कमजोर है इस से पहले भी कांग्रेस ने देश को कई प्रधानमंत्री दिए इंदिरा गांधी,राजीव गांधी जो की देश के लिए बलिदान हो गए पर किसी ने ये नही कहा कि हमारी जान को खतरा है।

एक सच्चा देशभक्त अपनी जान भी कुर्बान करने से पीछे नही हटता ना ही कहता “मेरी जान को खतरा है।” शहीद महेंद्र कर्मा जी झीरम घाटी हमले में सुरक्षा के जवानों आम नागरिकों को बचाने के लिए खुद आगे आकर सीने में गोली खाई और कुर्बानी दे दी परन्तु पीठ दिखाकर नही लौटे। क्या प्रधानमंत्री को इतना खतरा था इस तरह का जान का खतरा होना एक बार नही कई बार सार्वजनिक तरीके से मीडिया में बोलना पड़ रहा है जबकि उनकी सुरक्षा देश मे सबसे मजबूत सुरक्षा घेरे में होती है अगर वो सुरक्षित नही देश के आम नागरिकों का क्या होगा….इस से ये लगता है कि आप अब तक के सबसे कमजोर व लाचार प्रधानमंत्री है जो वहाँ के किसान व पंजाब सरकार को बदनाम करने में लगे हुए है।

🔘 प्रधानमंत्री मोदी जी आप चाहे कितने भी ड्रामा कर लें पंजाब में एक भी सीट भाजपा जीत नही पाएगी…

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