वर्षों से लाखों रुपयों का वेतन लेने वाले अधिकारी अगर मूलभूत सुविधाओं तक को अस्पताल में प्रबंधित नही कर पा रहे हैं, तब उनके बर्खाश्त करके उनके सतगं पर किसी जिम्मेदार व्यक्ति की पोस्टिंग क्यों नही किया जा रहा है?
महारानी अस्पताल ग़रीबो व मध्यमवर्गीय लोगों का अस्पताल है, उपचार की आशा के साथ लोग यहां आते हैं। उनके इस विश्वास को बनाये रखना ज़िला प्रशासन की भी जिम्मेदारी है। अस्पताल स्टॉफ द्वारा मरीज़ों व परिजनों से बात व्यवहार में नम्रता लाने हेतु उन्हें निर्देशित किया जाना चाहिए। साथ ही पूर्णतः निःशुल्क पैथोलॉजी, एक्सरे व सिटी स्कैन की सुविधा को अस्पताल प्रबंधन द्वारा सुचारू रूप से संचालित करने चाहिए।
शिवसेना के जिलाध्यक्ष डॉ. अरुण पाण्डेय् ने कहा कि उपचार हेतु आए मरीज़ों के परिजनों से उन्हें पता लगा कि पैथोलॉजी लैब में सभी जांच नही हो रही हैं, ऐसे में उन्हें बाहर निजी पैथोलॉजी लैब का रास्ता करना पड़ता है जहां काफी पैसे ख़र्च हो जाते हैं। इसी तरह समय पर साफ़ एक्सरे रिपोर्ट के ना मिलने पर भी काफी परेशानी होती है। उन्होंने आरोप लगाया हैकि सिटी स्कैन मशीन ज़िले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में मात्र कमीशन के खेल के चलते शोपीश बनकर रखा हुआ है। निजी सिटी स्कैन जांच कर्ताओं व अस्पताल प्रबंधन के द्वारा यह सब खेल रच गया है। आम जनता को सभी मिलकर दीमक की तरह उनका खून चूस रहे हैं और चुने हुए नेता सब जानकर भी चुप्पी साधे हुए हैं। उन्होंने कहा कि सबसे अधिक दुःख तब होता है जब आईएएस स्तर के अधिकारी भी इन सब पर जानकारी होते हुए भी अपनी आंखों में पट्टी बांधकर धृतराष्ट्र बनने की कोशिश करते हैं।
आज राजहरा खदान समूह के श्रम संगठन एटक के सचिव कमलजीत सिंह मान, इंटक के संगठन सचिव अभय सिंग और खदान मजदूर संघ भिलाई के महामंत्री एम पी सिंग ने संयुक्त रूप से एक ज्ञापन डायरेक्टर इंचार्ज भिलाई इस्पात संयंत्र के नाम मुख्य महाप्रबंधक राजहरा खदान समूह के कार्यलय भवन में सौंपकर ठेका कार्यों में पारदर्शिता लाने एवं दस वर्षों अथवा उससे अधिक समय तक लगातार कार्य करने वाले सभी ठेका श्रमिकों को पूर्व की तरह डीपीआर करने की मांग की और तीनों श्रमिक संगठन के नेताओं ने बताया कि
(१) वर्तमान में ऐसे कई ठेके हैं जिनमे पहले नियमित कर्मी कार्य करते थे। नियमित कर्मियों की संख्या कम होने से विगत एक दशक से अधिक समय से ऐसे कार्यों को प्रबंधन ठेका पद्धति से करा रहा है जैसे – प्लांट मेंटेनेंस, टिपर मेंटेनेंस, अस्पताल में एम्बुलेंस ड्राइवर, खदान में टिप्पर, जीप आदि के ड्राइवर्स, नाम बदलकर प्लांट में मक क्लीनिंग इत्यादि।
(२) इसके अलावा नित्य नए कार्य ठेके हेतु निविदा बुलाई जाती है।
(३) इन कार्यों में कार्य करने हेतु श्रमिकों को लेकर श्रम संगठनों एवं प्रबंधन के बीच विवाद होना देखा जा रहा है। उक्त विवाद के लिए हम सभी श्रम संगठन प्रमुख रूप से प्रबंधन को जिम्मेदार मानते हैं।
(४) महोदय, राजहरा की प्रचलित परंपरा के अनुसार अगर किसी कार्य के लिए रिपीट टेंडर होता है तो पहले से ही उक्त कार्य में कार्यरत श्रमिकों को प्राथमिकता के आधार पर कार्य पर लिया जाता है। इस परंपरा का लगभग सभी श्रम संगठन पालन करते आ रहे हैं।
(५) किन्तु विगत कुछ समय से यह देखने में आ रहा है कि प्रबंधन के कतिपय अधिकारी विशेष रूप से एक वर्ग विशेष के लोगों को ही काम पर रखने हेतु दवाब बनाने का प्रयास करता आ रहा है। ठेका श्रमिकों के निविदा में ऐसे नियम और शर्त डाले जाते हैं जो कानूनन गलत हैं। जैसे, कुछ निविदाओं में कामगारों के लिए दस वर्ष का अनुभव चाहिए होता है, तो कुछ निविदाओं में अप्रत्यक्ष रूप से नियम और कानून का गलत सहारा लेते हुए वरिष्ठता को प्राथमिकता दिए जाने की बात कही जाती है।
(६) किसी भी कार्यरत ठेके में धीरे धीरे तय संख्या से अधिक श्रमिकों को रख लिया जाता है और उनसे विविध विविध कार्य कराये जाते हैं। कुछ समय के बाद इन श्रमिकों के लिए प्रबंधन द्वारा एक ठेका निकल दिया जाता है और फिर अपने चाहते को रखने के लिए दवाब बनाया जाता है। पूछने पर अधिकारीयों द्वारा यह कहा जाता है कि उक्त श्रमिक पुराने हैं यह कहा जाता है कि ये श्रमिक खली बैठे हैं इसलिए इन्हे काम पर रखना होगा।
(७) इसी तरह के और भी अन्य कई दृष्टान्तहैं जिनमे कुछ अधिकारी विशेष लगाओ दर्शाते हुए अपने चहेतों के लिए हर संभव तरीके अपनाते हैं चाहे वो तरीका गलत या गैरकानूनी ही क्यों न हो।
(८) महोदय, आज कई ठेके बंद पड़े हैं और उन ठेकों में कार्यरत श्रमिक भूखे मर रहे हैं। लेकिन प्रबंधन उनके लिए रिपीट निविदा निकलने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाती है लेकिन अपने चहेते आदमियों के लिए सभी तरह के हथकंडे अपनाने से कोई परहेज ना करनेवाले अधिकारीगण अपने चहेतों के लिए सभी नियम और कानून ताक पर रख देते हैं। माइंस ऑफिस में रूम सर्विस का ठेका, टाउनशिप में डोर तो डोर क्लीनिंग का ठेका, पूर्व में हुए कैंटीन का ठेका, आदि आदि ऐसे कई कार्य हैं जो बंद पड़े हैं लेकिन प्रबंधन को उन्हें शुरू करने में कोई रूचि नहीं है।
(९) इसके अलावा लगभग अधिकांश ठेकों में ठेका कर्मियों का शोषण होता है। किसी ठेके में अंडर पेमेंट की समस्या, किसी में भत्ते न मिलने की समस्या, कई ठेकों में ठेका समप्थी के बावजूद २-३ महीने का वेतन अप्राप्त होना, किसी ठेके में बोनस राशि का भुगतान न होना, आदि आदि ऐसी समस्याएं हैं जिनकी जानकारी देने के बाद भी अधिकारीगण सिवाय आश्वासन देने के औरकुछ नहीं करते हैं।
(१०) महोदय दिनांक २०.०४.२०१५ को हुए त्रिपक्षीय समझौते में सेवाकाल के आधार पर एक उच्च ग्रेड देने की ही बात हुई थी।किसी भी कार्य में सेवाकाल के आधार पर, या गलत निविदा प्रक्रिया के द्वारा अपने किसी चहेते आदमी को ही कार्य पर रखने हेतु अनुचित दवाब डालने की कोई बात नहीं हुई थी। प्रबंधन के कुछ अधिकारीयों द्वारा इस तरह के गैर कानूनी हथकंडों से इन अधिकारीयों की मंशा पर कई सवाल खड़े होते हैं और लोगों को कंपनी की निविदा प्रक्रिया पर ऊँगली उठाने का मौका मिलता है जिससे कंपनी की छवि ख़राब होती है।
(११) महोदय, इस तरह के विवादस्पद मुद्दों में घिरकर कंपनी और अधिकारीयों की छवि तो धूमिल होती ही है साथ में नगर में बैठे बेरोजगार नवयुवकों में कंपनी एवं प्रबंधन के अधिकारीयों के विरुद्ध आक्रोश पनप रहा है जो कभी भी कानून व्यवस्था का रूप ले सकता है जिसके लिए प्रबंधन के चुनिंदा अधिकारी ही जिम्मेदार होंगे।
(१२) इन सभी अनियमितताओं को ध्यान में रखते हुए हम सभी अधोहस्ताक्षरकर्ता यह मांग करते हैं कि किसी भी ठेके कार्य में दस वर्ष या उससे अधिक समय से कार्यरत सभी कर्मियों को पूर्व की तरह उन्हें डीपीआर के रूप में नियुक्ति दे दी जावे। इसके पूर्व भी वर्षों से कार्यरत ठेका श्रमिकों को डीपीआर के रूप में नियुक्ति दी गयी थी जिससे जहाँ एक तरफ कंपनी के उत्पादकता में वृद्धि हुई थी वहीँ दूसरी तरफ श्रमिकों एवं उनके आश्रितजनों को काफी सुविधा उपलब्ध हो गयी थी। साथ ही हम सभी यह मांग भी करते हैं कि ठेकों के माध्यम से अपने चहेते आदमियों को काम पर रखने के प्रयास पर अंकुश लगाया जावे और भारतीय संविधान के अनुछेद 16 का पालन करते हुए सभी को काम के सामान अवसर उपलध कराया जावे। अगर प्रबंधन द्वारा हमारी इन उचित मांगों को नजरअंदाज किया जाता है तो मजबूरन हम सब अधोहस्ताक्षरित श्रम संगठन को कड़े कदम उठाने पड़ेंगे जिसकी जिम्मेदारी स्थानीय राजहरा खदान समूह और बीएसपी प्रबंधन की ही होगी। इन मुद्दों पर प्रबंधन से चर्चा हेतु हम सभी हमेशा तैयार हैं।
बस्तर कलेक्टर रजत बंसल ने शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चपक़ा ब्लॉक बस्तर का अटल टिंक्रिंग लैब का लोकार्पण स्कूली बच्चों से कराया.सर्वप्रथम ज़िला कलेक्टर सर द्वारा माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित किया. पश्चात् स्कूली छात्रा से फ़ीता कटवाकर अटल लैब का विधिवत लोकार्पण किया .अपने व्यस्त कार्यक्रम में समय निकालकर ज़िला कलेक्टर रजत बसंल ने शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चपक़ा के अटल लैब का लोकार्पण कर लैब के प्रत्येक प्रोजेक्ट व सेंसर के बारे में जानकारी ली बच्चों से सहजता के साथ कुछ प्रयोग दिखाने को भी कहा . साथ ही बच्चों से अपने लक्ष्य के बारे में पूछा तो किसी ने डाक्टर तो कुछ ने सेना में जाकर देश की रक्षा की बात कही बच्चों के जवाब से वे काफ़ी खुस हुए .स्कूल प्राचार्य लोकेश चंद्र पांडेय से अटल लैब का उद्देश्य पूछा तो बड़े सहजता के साथ इस लैब के उद्देश्य पर प्रकाश डाला. पश्चात् श्री कलेक्टर सर ने स्वयं जहां क्लास लगता है वहाँ जाने की बात कही पुनःमाता सरस्वती मंदिर में दीप प्रज्वलित कर स्कूल निरीक्षण किया .9वी से12वीप्रत्येक क्लास में जाकर बच्चों के साथ बैठ कर कुछ सवाल किए जिसे बच्चों ने बताया .उन्होंने रसायन जीव्विज्ञान फ़िज़िक्स प्रयोगशाला का भी निरीक्षण कर कुछ और सामान उपलब्ध कराने की बात कही लाइब्रेरी देखकर कुछ सुझावात्मक बात कहीं इस निरीक्षण में जनपद सदस्य नानु कश्यप भी उपस्थित थे.
उन्होंने वॉल प्रिंट व स्कूल रखरखाव देख कर काफ़ी संतुष्ट थे .जाते जाते प्राचार्य से कुछ माँग पूछे तो प्राचार्यजी ने ख़ाली पड़े बिल्डिंग में स्वामी आत्मानंद स्कूल व 08 एकड़ ख़ाली ज़मीन बाउंड्रीवॉल कुछ अन्य माँग रखी जिसे तत्काल पुरी करने की बात कही। इस अवसर पर जिला शिक्षा अधिकारी प्रधान भारती ,जनपद सदस्य नानु कश्यप ,बस्तर तहसीलदार कमलकिशोरसाहू ,एसडीओपी भानपुरी घनश्याम कामडे ,खण्ड शिक्षा अधिकारी मोती राम कश्यप, बीआरसी राजेंद्र ठाकुर सहायक खण्ड शिक्षा अधिकारी सुशिल तिवारी पाणिग्रही सर लैब प्रभारी प्रेमनाथ कश्यप सर व संकुल के सभी शिक्षक व पंचायत प्रतिनिधि उपस्थित थे.
जगदलपुर । कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी रजत बंसल बस्तर जिले मे बहुत कम कोविड-19 संकमण दर को देखते हुए अंत्येष्टि, दशगात्र, मृत्यु संबंधी कार्यक्रम के लिए शामिल होने वाले व्यक्तियों की संख्या में वृद्वि की है। जारी आदेश में कोविड-19 प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन करते हुए अंत्येष्टि, दशगात्र, इत्यादि मृत्यु संबंधी कार्यक्रम में शामिल होने वाले व्यक्तियों की कुल अधिकतम संख्या 50 रहेगी एवं सभी प्रकार के सभाओ के लिए शामिल होने वाले व्यक्तियों की कुल अधिकतम संख्या 150 रहेगी। आदेश का उल्लंघन करते पाये जाने पर नियमानुसार कार्यवाही की जावेगी पूर्व आदेश के शेष कंडिका यथावत लागू रहेगें। कलेक्टर ने उक्त आदेश दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144, आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 30, 34 सहपठित एपिडेमिक एक्ट 1897 यथा संशोधित 2020 द्वारा प्रदत्त शक्तियों के अधीन आदेश जारी किए हैं।
गणेश प्रतिमा विजर्सन दौरान बुजुर्ग व्यक्ति से गाली गलौच कर, मारपीट करने वाले मुख्य आरोपी को पकड़ कर कार्यवाही करने में बस्तर पुलिस को सफलता मिली है। ज्ञात हो कि दिनांक 20.09.2021 को रात्रि में धरमपुरा में मोटरू प्रकाश चौधरी को गणेश प्रतिमा विजर्सन जुलुस में शामिल उमेश सक्सेना, राहुल, वासू, व आशिष द्वारा आपस में लडाई झगड़ा हो रहे थे जिसे मोटरू प्रकाश के द्वारा समझाईश देने व आपस में लड़ाई मत करो कहने की बात पर आरोपियों ने मोटरू प्रकाश के साथ गाली गलौच कर, मारपीट किया गया था मामले में आहत के पुत्र मोटरू सूर्यरत्ना श्रीनिवास के रिपोर्ट पर थाना कोतवाली में धारा 294, 323, 506-बी, 456, 34 भादवि0 कायम कर, अनुसंधान में लिया गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुये वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जीतेन्द्र सिंह मीणा एवं अति0 पुलिस अधीक्षक ओमप्रकाश शर्मा के मार्गदर्शन में नगर पुलिस अधीक्षक हेमसागर सिदार के पर्यवेक्षण में निरीक्षक एमन साहू के नेतृत्व में टीम गठित किया गया। विवेचना के आरोपी वासु सेट्ठी को पकड़ा गया जिससे पुछताछ बाद आरोपी वासु सेट्ठी पिता कुप्पु स्वामी उम्र 23 साल निवासी धरमपुरा जगदलपुर को विधिवत् गिरफ्तारी के बाद न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है। मामले के अन्य आरोपी उमेश, राहुल व आशीष स्वामी की गिरफ्तारी शेष है। उक्त टीम द्वारा पतासाजी की जा रही है, जिनकी शीघ्र गिरफ्तारी की जावेगी।
महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाले पुलिस अधिकारी:
निरीक्षक – एमन साहू, सउनि0 – दिनेश उसेण्डी आरक्षक – प्रकाश नायक, शिव यादव।
मुंगेली में पदस्थ प्रधान आरक्षक को बिलासपुर रेंज में आयोजित सहायक उप निरीक्षक पदोन्नति परीक्षा में भाग लेने की मिली अनुमति
कोर्ट ने राज्य शासन और पुलिस विभाग को नोटिस जारी कर मांगा जवाब
बिलासपुर। प्रधान आरक्षक ज्वाला प्रसाद हिंडोले अब सहायक उप निरीक्षक की पदोन्नति परीक्षा में बैठ सकेगा। हाई कोर्ट ने उसे यह अंतरिम राहत प्रदान की है। पुलिस विभाग ने उसे पिछले पांच साल में एक बड़ी सजा होने का हवाला देकर परीक्षा के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था। प्रकरण में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अनादि शर्मा ने पैरवी की।कोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस विभाग को नोटिस जारी कर इस मामले में जवाबतलब भी किया है।
मामला इस प्रकार है कि 21 मई 2017 को लालपुर थाना, जिला मुंगेली में पदस्थ प्रधान आरक्षक ज्वाला प्रसाद हिंडोरे पर अपने अफसरों से अभद्र व्यवहार किये जाने के आरोपों के चलते पुलिस अधीक्षक मुंगेली के द्वारा याचिकाकर्ता की सेवा पुस्तिका में निंदा की सजा अंकित करने की कार्यवाही की गई थी। बाद में सजा को बढ़ाते हुए पुलिस अधीक्षक मुंगेली ने ‘आगामी एक वेतनवृद्धि एक वर्ष के लिए असंचयी प्रभाव से रोकने की सजा’ दी। पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज ने बाद में मामले को स्वतः संज्ञान में लेते हुए याचिकाकर्ता पर लागू हुई सजा में ‘दीर्घ शास्ति’ शब्द जोड़ दिया था। इस संबंध में याचिकाकर्ता के द्वारा पुलिस महानिदेशक, छ.ग. के समक्ष अपील प्रस्तुत की गई, लेकिन याचिकाकर्ता की अपील को निरस्त करते हुए पुलिस महानिदेशक, छ.ग. ने पुलिस महानिरीक्षक के द्वारा याचिकाकर्ता को दंडस्वरूप दी गई सजा जो ‘दीर्घ शास्ति’ वेतन में एक वेतनवृद्धि के बराबर कमी एक वर्ष के लिए मात्र, असंचयी प्रभाव से” के फैसले को सही ठहराया था।इस दौरान कार्यालय पुलिस अधीक्षक मुंगेली द्वारा प्रधान आरक्षक से सहायक उप निरीक्षक पदोन्नति परीक्षा हेतु संयुक्त वरीयता क्रम सूची का प्रकाशन किया गया। जिसमें ज्वाला प्रसाद हिंडोरे को बड़ी सजा होने का हवाला देकर अयोग्य घोषित बताया गया। इसके विरुद्ध हिंडोरे ने हाई कोर्ट अधिवक्ता अनादि शर्मा और नरेन्द्र मेहेर के माध्यम से याचिका दायर की। प्रकरण की सुनवाई 20 सितंबर 2021 को न्यायमूर्ति पी. सेम कोशी की अदालत में हुई। याचिका में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अनादि शर्मा द्वारा यह तर्क दिया गया कि वेतन में एक वेतनवृद्धि के बराबर कमी एक वर्ष के लिए मात्र, असंचयी प्रभाव से रोकने की सजा लघु शास्ति (छोटी सजा) की श्रेणी में आता है। तदोपरांत श्री शर्मा नें यह भी बताया की छोटी सजा में ‘दीर्घ शास्ति’ शब्द के जुड़ने मात्र से वह बड़ी सजा का प्रकार नहीं ले सकती और उपरोक्त बताई सजा को छोटी सजा के प्रारूप में रहने के कारण उसे बड़ी सजा के बराबर नहीं माना जा सकता।
उपरोक्त तर्कों के आधार पर माननीय उच्च न्यायालय ने मामले में अपनी राय देते हुए राज्य शासन और पुलिस विभाग को नोटिस जारी कर उनका जवाब माँगा है। इसके साथ ही याचिकाकर्ता के भविष्य तथा मामले की गंभीरता को मद्देनज़र रखते हुए हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सहायक उप निरीक्षक पदोन्नति परीक्षा में भाग लेने की अनुमति प्रदान करते हुए अंतरिम राहत दी है। अधिवक्ता अनादी शर्मा द्वारा लगाई गई याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति पी. सेम कोशी की अदालत ने न्यायहित में संबंधित विभाग को यह भी आदेश दिया कि याचिकाकर्ता के सहायक उप निरीक्षक के पद पर उम्मीदवारी को बिलासपुर रेंज में ही चयन के लिए सोच-विचार करें। जिससे याचिकाकर्ता को मुंगेली जिले के लिए आयोजित परीक्षा के छूट जाने की स्थिति में बिलासपुर रेंज के लिए आयोजित हो रही परीक्षा में भाग लेने का अवसर प्राप्त हो सके। उपरोक्त आदेश के तारतम्य में पुलिस विभाग द्वारा माननीय हाई कोर्ट के आदेश के परिपालन में याचिकाकर्ता हिंडोरे को बिलासपुर रेंज में आयोजित शारीरिक दक्षता परीक्षा में बैठने की अनुमति प्रदान की गई। उच्च न्यायालय सभी तर्कों और सबूतों के आधार पर मामले में अंतिम आदेश पारित करते समय याचिकाकर्ता की पदोन्नति के सम्बन्ध में भी अपना अंतिम फैसला सुनाएगी।
गुंडरदेही विधानसभा सहित गुंडरदेही नगर क्षेत्र में नशे की लत में भारी वृद्धि देखी जा रही है। गांव गांव में अवैध शराब और गांजे की सहज उपलब्धता युवा वर्ग को तेजी से अपने चपेट में ले रही है ।गुंडरदेही नगर पंचायत अंतर्गत शाम होते ही वार्डो की गलियों में नशेडियों का अड्डा बन जाता है ,बेखौफ होकर सड़क पर ही मजमा लगा कर शराब का आनंद लेते हुए देखे जा सकते हैं। वही गुंडरदेही में शीतला मंदिर से लगें क्षेत्र, हटरी पारा, पुराना स्कूल पारा ,वार्ड नंबर 5 में चलते फिरते गांजे की महक महसूस की जा सकती हैं। शासन प्रशासन कहां है ??किस ओर है?? नशे की लत में कब कौन क्या कांड कर दे, नशेड़ीयों के कारण क्षेत्र में लोग डरे सहमे से माहौल में जी रहे हैं।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि मतांतरण व धर्मांतरण रोकने के लिए जन जागरण अभियान चलाये जाने की जरूरत है और इसके लिए स्वयं आदिवासी समाज को आगे आने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री बघेल ने यह भी दोहराया है कि पेशा कानून का हो-हल्ला मचाया जाता है किंतु इसके लिए ड्राफ्ट तैयार नहीं किया जा रहा जिसके कारण वह अमलीजामा नहीं पहन रहा है यदि मसौदा सामने लाएं तो इस मुद्दे को सरकार तुरंत सुलझा लेगी।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बस्तर संभाग के आदिवासियों को भोजन हेतु अपने निवास में आमंत्रित किया था।उससे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आदिवासी समाज के लोगों से उनके क्षेत्र की समस्यायों को सूना था जिसमें धर्मांतरण पूर्व मतांतरण की बातें सामने आई थी जिसके लिए कई तर्क दिया गया था जिस पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्पष्ट रूप से कहा कि मतांतरण व धर्मांतरण रोकने के लिए सभी सामाजिक संगठनों को अपने -अपने समाज की बैठकों में यह बात रखनी होगी और निर्धन लोगों की मदद के लिए हाथ बढ़ाना होगा जिससे वह राह नहीं भटके। इस दौरान कई मांगें भी सामने आई जिसे जल्द से जल्द पूरा करने का भरोसा दिलाया। आदिवासी समाज से आए प्रतिनिधि मंडल ने राज्य सरकार की की महत्त्वपूर्ण योजनाओं को सराहा।
सिलगेर के लोग नौकरी व पैसे नहीं चाहते हैं इंसाफ
सिलगेर , धर्मांतरण, पेशा कानून जैसे मुद्दों पर राजनीति करने वाले लोगों को बिना नाम लिए लताड़ लगाई है। उन्होंने कहा कि धर्मांतरण पर बेवजह गाल बजा रहा है जबकि भाजपा के पंद्रह वर्षों के कार्यकाल में जमकर धर्मांतरण हुआ। वहीं पेशा कानून तय करने की कमेटी वाले भी सोए हुए हैं जिससे अनावश्यक बखेड़ा खड़ा हुआ है। सिलगेर मुद्दे पर उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ही नहीं वरन् यह पहली सरकार है जो सिलगेर तक अपनी जान जोखिम में डालकर गई। सरकार ने पहल कर उनके परिवार से चार बार बातें की। पीड़ित परिवार को नौकरी देने व मुआवजा देने की बात हुई किंतु वह लोग सिर्फ और सिर्फ मृतकों को इंसाफ मिले वह एक बात में कायम हैं। सिलगेर सहित इस मुद्दे पर राजनीति बर्दाश्त नहीं।
केशकाल । छत्तीसगढ़ राज्य की पिछली सरकार ने आनन फानन में ग्राम पंचायत – बिश्रामपुरी को नगरपंचायत -बिश्रामपुरी बना दिया और जब इसके खिलाफ स्थानिय लोगों ने जबरर्दस्त विरोध करते आंदोलन करना आरंभ कर दिया तो आनन फानन में नगरपंचायत को विघटित कर दिया। किसी नगरपंचायत को विघटित कर फिर से ग्राम पंचायत बना देने और उसके बाद उस ग्रामपंचायत-नगरपंचायत का विभाजन कर उसे 5 ग्राम पंचायत बना देने का यह अपने आप में अनूठा मामला रहा। पिछली सरकार के द्वारा राजनीतिक लाभ हानि के उद्देश्य से नगरपंचायत -ग्राम पंचायत बना देने के इस फैसले का दुष्प्रभाव पूरे क्षेत्रवासियों को आज भी भोगना पड़ रहा है। नवगठित ग्राम पंचायत के ग्रामवासियों और उनके द्वारा चुने गये पंच उपसरपंच सरपंच द्वारा शासन प्रशासन से अन्य ग्राम पंचायतों को मिलने वाले आबंटन एवं सुविधा की भांति आबंटन प्रदान करने की मांग लगातार लम्बे अरसे से किया जा रहा है पर अभी तक सुधि नहीं लिया गया । जिस उपेक्षा के चलते पंचायत भवन आंगन बाड़ी भवन विहीन नवगठित ग्राम पंचायत के लोगों को न आवास योजना का लाभ मिल पा रहा है और न जरूरतमंद वृद्ध -नि:शक्त-दिव्यांग- विधवा-परित्यक्ता को पात्रता होने के बावजूद पेंशन का लाभ ही मिल पा रहा है।मात्र मूलभूत मद की राशि के भरोसे अपने अस्तित्व को बचाये बनाये रखने वाले ग्राम पंचायतों के पंचायत पदाधिकारी और ग्रामवासी बहुत दुखी और आक्रोशित हैं। उल्लेखनीय है कि -बडेराजपुर ब्लाक के ग्राम पंचायत बिश्रामपुरी को डां रमनसिंह के नेतृत्व वाली पिछली भाजपाई सरकार ने नगरपंचायत बनवा दिया था और उसके खिलाफ आवाज आंदोलन उठने के चलते उसे विघटित कर फिर से ग्राम पंचायत बना दिया था। जिसके बाद ग्राम पंचायत बिश्रामपुरी को विभाजित करते हुए ग्राम पंचायत -बिश्रामपुरी (अ),ग्राम पंचायत-बिश्रामपुरी (ब),ग्राम पंचायत-बिरापारा,ग्राम -पंचायत-जिरा पारा,ग्राम पंचायत -खरगांव बना दिया गया। इस विभाजन पर नवगठित ग्राम पंचायत – बिश्रामपुरी के लोगों को सबसे कड़ी आपत्ति है जो आज भी कायम है। इनका कहना है की हमारे नवगठित पंचायत का ठिक से आजतक सीमांकन कर सरहद तक तय नहीं किया गया है। हमारे ग्राम पंचायत में नवीन शाला भवन बनाने तक के लिए जमीन तक नहीं बच गया है। ग्राम पंचायत -बिश्रामपुरी के लोग इतने खफा हैं की ग्राम पंचायत के आम चुनाव में कोई भी प्रत्याशी पंच पद हेतु अपना नामांकन तक नहीं भरा और उपचुनाव की घोषणा होने पर भी किसी ने नामांकन नहीं भरा फलस्वरूप पंचो का पद आज भी खाली पड़ा रह गया है।बड़े आश्चर्य की बात है की शासन प्रशासन के जवाबदेह पद पर बैठे किसी भी सक्षम अधिकारी द्वारा अभी तक नवगठित इन पांचों ग्रामपंचायतों के ग्रामवासियों और उनके पंचायत पदाधिकारियों द्वारा उठाये जाने वाले समस्या एवं मांग पर गौर करने एवं उसका निराकरण करने की पहल प्रयास तक नहीं किया गया जिससे उनकी नाराजगी कम होने की बजाय बढ़ते जा रही है।
ग्राम पंचायत खरगांव का है हाल बेहाल – नगरपंचायत -बिश्रामपुरी को विघटित कर बनाये गये 5 ग्राम पंचायत में से एक ग्राम पंचायत है खरगांव । जिसकी जनसंख्या -1363 मतदाता संख्या 883 है।
खैरात में चल रहा है पंचायत आंगनबाड़ी – नवगठित ग्राम पंचायत का आज तक खुद का भवन तक नहीं है इसलिए पंचायत सरपंच प्रभुलाल नेताम के ही घर पर लग रहा है और वो भी खैरात में ही। इस बारे में सरपंच प्रभुलाल नेताम का कहना है की क्या करूं पंचायत तो चलाना है हमारे यहां कोई शासकिय भवन नहीं है । आज तक कोई अधिकारी यह भी नहीं पूछे की पंचायत भवन कंहा कैसे चल रहा है ,भवन का किराया बिजली बिल कितना कैसे पटा रहे हो। सरपंच का कहना है की हमारे यहां ले देकर साल भर में मूलभूत मद का 35-40 हजार रूपया आता है उसमे स्टेशनरी लेते हैं और अन्य काम करते हैं पंचायत भवन का किराया और बिजली बिल जमा करने पैसा ही नहीं बचता जिसके चलते मुझे ही यह झेलना पड़ रहा है। पंचायत में दो आंगनबाड़ी संचालित है पर दोनों आंगनबाड़ी का खुद का भवन नहीं बना है ।दूसरों के घर में आंगनबाड़ी चलाया जा रहा है।
स्वीकृत आंगनबाड़ी भवन हुआ लापता – सरपंच प्रभुलाल नेताम का कहना है कि हम जब आंगनबाड़ी भवन के बारे में महिला बाल विकास अधिकारी से पूछे तो उनके द्वारा यह बताया गया की आपके यंहा के नहरपारा एवं खरगांव शीतलापारा में आंगनबाड़ी भवन बनाने धनराशि जब नगरपंचायत था तभी 2014मे पैसा स्वीकृत हो गया था । सरपंच का कहना है की नगरपंचायत के जमाने में 2004मे ही स्वीकृत आंगनबाड़ी भवन कंहा कैसे लापता हो गया और किसने लापता कर दिया यह खोज का विषय बना हुआ है।जिसके चलते लगभग 12-15वर्ष से आंगनबाड़ी दूसरे के घर में ही संचालित करना पड़ रहा है।
आवास योजना के लाभ से वंचित हैं ग्रामवासी – नवगठित पंचायत के सरपंच का पदभार 9जनवरी 2017को ग्रहंण करने वाले युवा सरपंच प्रभुलाल नेताम का कहना है कि हमारे पंचायत के पात्र आवासहिनों को केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार के आवास योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। आवास योजना का आबंटन ही हमारे पंचायत को प्रदान नहीं किया जा रहा है। जिसके चलते आवासहीन गरीबों को हम आवास नहीं दिला पा रहे हैं |
पेंशन राहत से भी नसीब नहीं हो पा रहा है जरूरतमंदों को – ग्राम पंचायत खरगांव के सरपंच का कहना है की हम जरूरतमंद पात्र वृद्ध नि:शक्त दिव्यांग विधवा परित्यक्तता लोगों को हम पेंशन का लाभ नहीं दिला पा रहे हैं।जब भी पंचायत से पात्र पेंशनधारियों का पेंशन प्रकरंण स्वीकृत करने जनपद पंचायत भेजा जाता है तो हमसे 2011की गरीबी रेखा सर्वे सूची मांगा जाता है जिसमे जो वास्तविक में गरीब हैं जिसके कारंण पेंशन प्रकरंण स्वीकृत नहीं किया जाता जिसके चलते जरूरतमंद पात्रता रखने वालों को पेंशन नहीं मिल पा रहा है।विधवा मेहतरीन सेवा रामप्रसाद जाति राऊत उम्र-61वर्ष,गंगाबाई बेवा फूलसिंह जाति राऊत उम्र 63वर्ष फूलबासन बेवा बैसाखू जाति गोंड उम्र 45वर्ष मानकी बेवा पेकडो जाति गोंड उम्र50वर्ष सत्यवती बेवा रामचंद जाति गोंड उम्र 42वर्ष सुकनतीन बेवा बुद्धु जाति गोंड उम्र 52वर्ष जैसे अनेक लोग हैं जो पेंशन के लिए आवेदन दे देकर लंबे समय से पेंशन मिलने का इंतजार कर रहे हैं।पर हम उन्हें पेंशन नहीं दिला पा रहे हैं जिससे वो लोग हम पर अपना गुस्सा उतारते हमें श्रापते हैं की तूम लोग हमको पेंशन तक नहीं दिला सकते तो तूम लोग किस काम के। सरकारी तंत्र के उपेक्षा से आहत पंचायत वासी और पंचायत पदाधिकारी अपनी व्यथा कथा सूनाते अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाते हताश निराश हो चुके हैं अब उनके पास अब अंतिम रास्ता बच गया है सामने आकर सड़क पर उतरकर आंदोलन करने का और शायद इसी का इंतजार करते हांथ पर हांथ धरे मौन साधे बैठे तमाशबीन बनकर देख र तोहे हैं सरकार की योजनाओं के लाभ से मरहूम लोगों को हलाकान परेशान होते सब्र की परीक्षा लेते ।
अखिल भारतीय विधार्थी परिषद के तीन दिवसीय प्रदेश अभ्यास वर्ग रायगढ़ मे 17,18 व 19 सित. को संपन्न हुआ जिसमे उद्घाटन सत्र मे विधार्थी परिषद के प्रदेश अध्यक्ष अरुण गुप्ता ,प्रदेश मंत्री शुभम जायसवाल व प्रदेश संगठन मंत्री प्रदीप मेहता उपस्थित रहे वर्ग मे विधार्थी परिषद छ.ग. प्रांत की आगामी कार्य योजना तथा रूपरेखा बनायी गयी ,तीन दिवसीय प्रदेश स्तरीय वर्ग मे संगठन का विस्तार किया गया जिसमे अखिल भारतीय विधार्थी परिषद बालोद जिला के जिला संयोजक हेतु पुनः सुमित कौशिक को जिला संयोजक नियुक्त किया गया , बालोद जिला संयोजक के घोषणा होते ही जिले के अंतर्गत आने वाली सभी इकाई के अभाविप कार्यकर्ताओं मे हर्ष की लहर दौड़ गई , तथा जिला संयोजक सुमित कौशिक ने कहा कि कार्यकर्ताओं का सम्मान हमारी सबसे पहली प्राथमिकता है तथा छात्रहित व समाजहित के लिए हम सभी को मिलकर कार्य करना होगा..