बकावंड 21 कपावडर पुलिस थाना अंतर्गत करपावंड के गदिया पारा जयमनी देवागन लॉकडाउन के नियम को खुला उल्लंघन करते दोषी पर करपावंड के पुलिस दर्द के साथ गदिया पारा पहुंचे इस दौरान जयमनी देवागन के निवास मैं विवाह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा था जिसमें कई लोग की मौजूदगी रही जबकि प्रशासन द्वारा कोविड नियम के चलते विवाह आयोजन मे खासकर लॉकडाउन अवधि मे 20 लोगो को शामिल होने की अनुमति दी गई है कि नतु विवाह कार्यक्रम में लॉकडाउन के नियमो का खुला मामला करपावड गदिया पारा का उल्लंघन करते पाया गया दोषी के विरूध्द दंडात्मक कार्रवाई करते हुए 5000 का जुर्माना वसूला गया |
डॉ विनायक सेन और शहीद अस्पताल की देन है मितानिन योजना
दल्लीराजहरा – मज़दूरों के लिए अस्पताल चालू करने वाले छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध मजदूर-किसान नेता छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के संस्थापक शहीद शंकर गुहा नियोगी है। जिनकी महज 48 वर्ष की उम्र में 28 सितंबर 1991 को भिलाई स्थित उनके अस्थायी निवास पर तड़के चार बजे के करीब खिड़की से निशाना बनाकर गोली मारी गई थी।
1981 में दो डॉक्टरों, आशीष कुंडू और विनायक सेन ने अपने सपने को साझा करने के लिए ‘नियोगी जी’ (जैसा कि उन्हें लोकप्रिय कहा जाता था) की टीम में शामिल हो गए और इसके बाद डॉ पवित्र गुह मेडिकोज ने इसे अभ्यास में डाल दिया। ठीक एक साल बाद डॉ सैबाल जाना उनके साथ शामिल हो गए और केवल दल्लीराजहरा के निवासी रह गए जो अभी वर्तमान समय मे शहीद अस्पताल चलाने के लिए सबसे वरिष्ठ चिकित्सक के रूप में बने हुए हैं और चिकित्सा के अलावा, वे सर्जरी और प्रसूति-स्त्रीरोग विज्ञान को समान दक्षता के साथ करते हैं।ज्ञात हो कि डॉ विनायक सेन और शहीद हॉस्पिटल के द्वारा ही प्रथम बार दल्लीराजहरा में मितानिन योजना अभियान चलाया गया था जो आज पूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य में लागू किया गया है।
वर्तमान समय मे चल रहे महामारी कोरोना वायरस में शहिद अस्पताल को आइसोलेशन सेंटर बनाने के साथ साथ कोरोना से पीड़ित मरीजों के उपचार हेतु स्वास्थ्य विभाग ने अनुमति प्रदान की है। सन 1991 में नियोगी जी के सपनो के विरुद्ध जाकर बीएसपी के पूंजीपति कर्मचारियों ने नियोगी जी की हत्या की थी आज वही बीएसपी के कर्मचारी अपने बीएसपी प्रबंधन के बनाये अस्पताल में इलाज कराना छोड़ कर शहीद अस्पताल में अपना इलाज कराने के लिए राजनीतिक जुगाड़ और इधर उधर से फोन कर अपना इलाज कराने के लिए बाधित हो रहे है। नियोगी जी के विचारधारा को ना मानने वाले बीएसपी के पूंजीपति कर्मचारी आज नियोगी विचारधारा से चलने वाले शहीद अस्पताल के आगे झुकने को मजबूर हो चले है। ज्ञात हो कि बीएसपी द्वारा संचालित अस्पताल में बीएसपी के कोरोना मरीजों का इलाज नही किया जा रहा है। अस्पताल मात्र रिफर सेंटर बना हुआ है। जिस पर वर्तमान सीजीएम तपन सूत्रधार ने चुप्पी साध ली है। और बीएसपी कर्मचारियों को नियोगी विचारधारा के आगे नसमस्तक होना पड़ा।
वर्तमान समय मे चल रहे महामारी कोरोना वायरस में शहिद अस्पताल को आइसोलेशन सेंटर बनाने के साथ साथ कोरोना से पीड़ित मरीजों के उपचार हेतु स्वास्थ्य विभाग ने अनुमति प्रदान की है। सन 1991 में नियोगी जी के सपनो के विरुद्ध जाकर बीएसपी के पूंजीपति कर्मचारियों ने नियोगी जी की हत्या की थी आज वही बीएसपी के कर्मचारी अपने बीएसपी प्रबंधन के बनाये अस्पताल में इलाज कराना छोड़ कर शहीद अस्पताल में अपना इलाज कराने के लिए राजनीतिक जुगाड़ और इधर उधर से फोन कर अपना इलाज कराने के लिए बाधित हो रहे है। नियोगी जी के विचारधारा को ना मानने वाले बीएसपी के पूंजीपति कर्मचारी आज नियोगी विचारधारा से चलने वाले शहीद अस्पताल के आगे झुकने को मजबूर हो चले है। ज्ञात हो कि बीएसपी द्वारा संचालित अस्पताल में बीएसपी के कोरोना मरीजों का इलाज नही किया जा रहा है। अस्पताल मात्र रिफर सेंटर बना हुआ है। जिस पर वर्तमान सीजीएम तपन सूत्रधार ने चुप्पी साध ली है। और बीएसपी कर्मचारियों को नियोगी विचारधारा के आगे नसमस्तक होना पड़ा।
विदित हो कि शहीद अस्पताल ने उन ग्यारह संविदा कर्मियों से अपना नाम कमाया जिन्होंने अपनी मांगों के लिए पुलिस फायरिंग और 1977 के 2-3 जून को दल्ली-राजहरा में छत्तीसगढ़ खान श्रमिक संघ (सीएमएसएस) के अधीन रहते हुए अपनी जान की बाजी लगा दी। 3 जून, 1983 को शहीद दिवस पर, अस्पताल में एक बूढ़े खनकदार लाहर सिंह और एक बूढ़े किसान हलाल खोर द्वारा 15-बिस्तरों और एक आउटडोर क्लिनिक के प्रतीक को खोला गया।
जल्द ही ये प्रयास एक बड़े लोगों के स्वास्थ्य आंदोलन में बदल गए और डॉक्टरों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की टीम ने 1994 तक अपनी क्षमता को बढ़ाकर 60 बेड कर दिया और वर्तमान समय मे नयी केंद्रीय कमेटी के 7 सदस्यों की टीम के साथ शहीद अस्पताल लगभग 170 बिस्तर वाला अस्पताल है जो लगभग 100 किमी से अधिक के जलग्रहण क्षेत्र की सेवा करता है। यह चिकित्सा, शल्यचिकित्सा, प्रसूति और स्त्री रोग, दंत चिकित्सा, बाल चिकित्सा और भौतिक चिकित्सा जैसी चौतरफा स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करता है, जो बहुत ही उचित लागत पर विनम्र आजीविका के साथ आबादी की सेवा करता है। यह एक अपडेटेड पैथोलॉजिकल लेबोरेटरी चलाता है और सप्ताह में 6 दिन ओपन आउट पेशेंट सेवाएं उपलब्ध हैं। और यह राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन के तहत आईसीटीसी केंद्र और तपेदिक के लिए एक डॉट केंद्र भी रखता है। शहीद अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत गरीब लोगों को सेवाएं प्रदान करने का एक चैंपियन है।
शहीद अस्पताल को एक नीति के रूप में किसी भी फंडिंग एजेंसियों से कोई पैसा नहीं मिलता है। यह अभी भी देश भर में और विदेशों में भी एक स्वयंसेवक के रूप में शहीद शंकर गुहा नियोगी के सपने को पूरा करने के लिए स्वास्थ्य स्वयंसेवकों को आकर्षित करता है।
बस्तर ब्लॉक के मावलीगुड़ा पंचायत में छेपडा पारा में पानी की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है लोग पानी के लिए हाहाकार मचा रहे हैं त्राहि-त्राहि हो रहे हैं। वही छेपडा पारा के पंच जलन राम के द्वारा अपने खर्च पर वार्ड वासियों को पानी पिलाने की बीड़ा उठाया और प्रति टैंकर रु 300 की दर पर अपने खर्च से वार्ड वासियों को पानी पिलाकर प्यास बुझाने में काफी मदद कर रहा है ज्ञात हो कि नल जल योजना की सुविधा गांव के आधे वार्ड में होने के कारण आधा से ज्यादा गांव पेयजल की संकट से जूझ रहा है। जिसे पंचायत के सचिव सरपंच का ध्यान भटका हुआ नजर आता है।
देश में जब से कोरोना महामारी आई है तब से निजी अस्पतालों की चांदी हो गई है कोरोना इलाज के नाम पर मरीजों को अनाप शनाप बिल थमाया जा रहा है | छत्तीसगढ़ सरकार ने सभी निजी अस्पतालों में कोरोना मरीजों के इलाज के लिए अधिकतम खर्च की सीमा तय की हुई है उसके बावजूद सरकार इन अस्पतालों पर लगाम कसने में असफल नजर आ रही है | निजी अस्पताल सीधे सीधे दलाली के धंधे पर उतर आये है सीधे शब्दों में कहे तो जिंदगी का सौदा |
राजधानी रायपुर में कोरोना के इलाज के नाम पर खुलेआम लूट कि घटना सामने आई है जिसे बीजेपी नेता गौरीशंकर श्रीवास ने स्टिंग ऑपरेशन कर भाटागांव में स्थित लक्ष्मी केयर सुपर स्पेशियालिटी हॉस्पिटल का काला सच सामने लाया है कि किस प्रकार मरीजों की जिंदगी के साथ सौदा किया जाता है |
रायपुर का यह निजी अस्पताल कोरोना मरीज को भर्ती करने से पहले ही 3.50 लाख की मांग कर रही है और यदि मरीज को वैंटीलेटर या आईसीयू की दरकार रही तो फीस बढ़कर 5 लाख रुपये और वह भी नकद, अस्पताल प्रबंधन चेक लेने के तैयार नहीं | अब देखना यह है शासन द्वारा क्या कार्यवाही की जाती है |
दल्लीराजहरा – डौंडी ब्लॉक में कोरोना का दूसरा चरण बहुत ज्यादा घातक साबित हो रहा है और दल्लीराजहरा में तो ऐसा कोई वार्ड अछूता नहीं जहाँ कोरोना संक्रमित मिल ना रहे हो | लॉकडाउन के बावजूद इस प्रकार कोरोना के संक्रमण में तेजी यह कह पाना मुश्किल है कि ये जो चल रहा है वह कोरोना का दूसरा चरण है या तीसरा | अब तो केंद्र सरकार द्वारा भी लॉकडाउन का निर्णय राज्य सरकार पर छोड़ दिया गया है | लॉकडाउन कोई भी लगाया चाहे वह राज्य हो या जिला प्रशासन जब तक हम और आप घर पर लॉकडाउन न हो जाए इस गति को कोई नहीं रोक सकता |
डौंडी ब्लॉक में डौंडी एवं आसपास के क्षेत्र एवं दल्लीराजहरा में वार्डवार मिले संक्रमितों कि जानकारी इस प्रकार है –
|| विशेष अनुरोध – सिटी मीडिया नगर के समस्त नागरिकों एवं पाठकों से अनुरोध है कि सोशल डिस्टेसिंग एवं मास्क का सदैव उपयोग करें और फिर से कोविड को महामारी का रूप न लेने दे ||
जगदलपुर। बस्तर के जंगलों में माओवादियों व सुरक्षा बलों के बीच शह-मात के खेल में माइंडगेम चल रहा है। माओवादियों द्वारा सितंबरअक्टूबर के बीच से अप्रैल तक अपहरण कर हत्या करने के की मामले सामने आ रहें हैं और इन सबके बीच सुरक्षा बलों द्वारा माओवादियों को मौत के घाट उतारा जा रहा हैं। माओवादी संगठन व सुरक्षा बलों द्वारा विज्ञप्ति जारी कर एक-दूसरे को दोषी ठहराया जा रहा है।इन दोनों के पाटों के बीच बस्तर के लोग पीस रहें हैं। बस्तर में वामपंथी माओवादियों का एरिया सिकुड़ता जा रहा है और पुलिस के हौसले बुलंद हैं।भले ही तर्रेम जैसी घटनाओं के कारण सुरक्षा बल बैकफुट पर आ गए हैं किंतु टीसीओसी के दौरान भी सुरक्षा बलों को रणनीतिक के तहत् बदनाम करने माओवादियों द्वारा माइंडगेम खेल रहें हैं। माओवादियों के प्रवक्ता विकल्प ने कथित तौर पर ड्रोन हमले की विडियो जारी की तो क्षण भर में पुलिस महानिरीक्षक पी. सुंदरराज ने अफवाह बता दिया जिसके कारण इस बात का बाजार गर्म है कि दोनों शह-मात का खेल खेल रहें हैं।
ज्ञात हो कि सीआरपीएफ के जम्मू-कश्मीर के जवान को छोड़कर मानवतावादी होने का प्रमाण उन्होंने किया किन्तु जिस प्रकार बस्तर के सिविलियन वह जवानों को मार दोहरा चरित्र उजागर कर रहें हैं जिससे उनकी युक्तियां उन पर भारी पड़ रहा है या युं कहें अपनी दखल साबित करना चाह रहें हैं।
संयुक्त खदान मजदूर संघ दल्ली राजहरा के सचिव कामरेड कमलजीत सिंह मान एवं कार्यालय सचिव राजेश कुमार साहू ने कोरोना महामारी के बढ़ते फैलाव में खदान में कार्यरत नियमित एवं ठेका श्रमिकों की समस्याओं से अवगत कराने बाबत मांग पत्र सौंपा श्रीमान मुख्य मुख्य महाप्रबंधक खदान आई ओ सी राजहरा को मांग पत्र में कहा गया कि प्रबंधन से यह मांग है कि राजहरा के अंदर ही कोविड-19 से संक्रमित कर्मचारियों का उपचार होना चाहिए जिसमें की ऑक्सीजन युक्त बेड एवं आई सी यू जैसी सुविधाएं हो ऑक्सीजन लेवल कम होने पर रेमडेसीविर इंजेक्शन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो यह व्यवस्था माइंस हॉस्पिटल राजहरा मैं इसलिए होनी चाहिए कि इस बीमारी का अंत कब होगा किसी को भी पता नहीं है |
खदान प्रबंधन को चाहिए कि खदानों में भी काफी संख्या में कर्मचारी कोविड-पॉजिटिव पाए जा रहे हैं इसलिए सभी विभागों में रोस्टर व्यवस्था से कार्य कराकर कर्मचारियों को राहत देने का कार्य करना चाहिए |
प्रबंधन ने यह भी मांग की गई थी कि प्रत्येक विभाग में ठेका श्रमिक उत्पादन कार्य में लगे हैं इन कर्मचारियों एवं उनके परिवार के सदस्यों का कोविड- पॉजिटिव पाए जाने पर उन्हें छुट्टी की कोई सुविधा नहीं है इन ठेका कर्मचारियों को भी कोरोना पॉजिटिव होने पर छुट्टी का लाभ प्रदान करने का आदेश प्रबंधन जारी करें |
सचिव कमलजीत सिंह मान ने कहा कि हमारी प्रबंधन से अपील है कि कोरोना के प्रकोप को रोकने एवं खदान कर्मचारियों के बेहतर इलाज की स्थानीय स्तर पर लंबे समय के लिए व्यवस्था की जाए यदि 7 दिनों के भीतर प्रबंधन इस पर कोई ठोस पहल नहीं करता है तो कर्मचारी सीधी कार्यवाही करने के लिए बाध्य होंगे जिसकी संपूर्ण जवाबदारी प्रबंधन की होगी |
गुंडरदेही। भारतीय जनता पार्टी के मंडल अध्यक्ष दुष्यन्त कुमार सोनवानी ने कहा कि ऐसा प्रतीत हो रहा है कि प्रदेश सरकार में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और स्वास्थ्य मंत्री के बीच छिड़े सत्ता संघर्ष ने अब गैंगवार की शक्ल ले ली है और इसका खामियाजा प्रदेश भुगत रहा है। श्री सोनवानी ने कहा कि कोरोना के चलते स्थिति विकराल होने के बावज़ूदसामूहिकता की ऐसी कमी है किस्वास्थ्य मंत्री को ही भरोसे में नहीं लिया जा रहा है,कोविड को लेकर होने वाली बैठकों से स्वास्थ्य मंत्री को ही दूर रखा जाता है। यहां तक किराज्यपाल द्वारा बुलायी गयी सवर्दलीयबैठक में भी विभागीय मंत्री को सीएम बघेल ने अवसर नहीं दिया। इससे पहले खुद स्वास्थ्य मंत्री पिछले वर्ष सार्वजनिकरूप से नाराजगी जाहिर की थी।
भाजपा मंडल अध्यक्ष ने कहा कि सीएम बघेल का अहंकार सिर चढ़कर बोल रहा है। हद तो तब हो गयी जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बुलायी गयी मुख्यमंत्रियों की वचुर्अल बैठक में भी शामिल होने के बदले सीएम बघेल ने असम में चुनाव प्रचार करना अधिक ज़रूरी समझा। खुद भी नहीं आये और स्वास्थ्य मंत्री को भी उस बैठक में शामिल नहीं होने दिया। श्री सोनवानी ने कहा कि ऐसी गंभीर बैठकों को भी घृणित राजनीति की भेंट चढ़ा दिया जाता है। पिछले दिनों आयोजित सवर्दलीय बैठक में पहले कहा गया कि सभी आमंत्रितों को लिंक भेजा जाएगा, नेतागण जहां हैं वहीं से जुड़ सकते हैं लेकिन ऐन बैठक के समय सबको रायपुर जिला पंचायत भवन बुला लिया गया। श्री सोनवानी ने कहा कि यह सब इसलिए किया गया ताकि उस समय जशपुर में रहे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय बैठक में शामिल न हो सकें और उसे ही बाद में मुद्दा बनाया जाए जबकि कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम को कोंडागांव से ही बैठक में शामिल होने की सुविधा दे दी गयी। भाजपा की तरफ से फिर भी प्रदेश उपाध्यक्ष शामिल हुए लेकिन कांग्रेस, भाजपा अध्यक्ष के उपस्थित नहीं होने का कारण नहीं बताकर कांग्रेस झूठ बोलती रही।
भाजपा मंडल अध्यक्ष ने कहा कि अब जब प्रदेश सरकार को प्रदेश के बिगड़ते हालात पर त्वरित निर्णय करना चाहिए,स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने का प्रयास करना चाहिए, छत्तीसगढ़ की जनता की चिंता करनी चाहिए, तब प्रदेश सरकार और सीएम असम से आये बोडो प्रत्याशियों को शराब परोसने, उनके लिए बकरा भात की व्यवस्था में लगी है। चित्रकोट में उनके होने का खुलासा हो जाने के बाद प्रत्याशियों को अज्ञात जगह में छिपाया गया है। श्री सोनवानी ने कहा कि भाजपा द्वारा सवाल उठाने पर बड़ी हिकारत से बघेल यह स्वीकार करते हैं कि वे असम के प्रत्याशियों की मेहमाननवाजी कर रहे हैं। मुख्यमंत्री बघेल का यह जवाब शर्मनाक है कि ये सभी प्रत्याशी पहले भाजपा गठबंधन में थे। ऐसे गैर जिम्मेदार सीएम से आप और क्या उम्मीद कर सकते हैं? श्री सोनवानी ने कहा कि सरकार को चाहिए कि असम के उन प्रत्याशियों को जहां भी छिपा कर रखा गया है, उन सभी का कोविड टेस्ट कराया जाए और उसे सार्वजनिक किया जाए। ऐसे ही ज़मातियों के कारण पिछली बार छत्तीसगढ़ बुरी तरह संक्रिमत हुआ था।
भाजपा मंडल अध्यक्ष ने सवाल किया है कि शराब के सेस का पैसा मुख्यमंत्री बघेल ने असम चुनाव में खर्च कर दिया है? शराब की हर बोतल पर जो 20 रुपए कोरोना टैक्स लगाकर लोगों से वसूला जा रहा है, सेस 400 करोड़ और डीएमएफ फंड में जमा 800 करोड़ रुपये जो जमा है, उसका अभी तक कितना पैसा खर्च किया गया है, छत्तीसगढ़ की जनता जानना चाहती है। क्या ये सारे पैसे असम चुनाव में खर्च कर दिए गए हैं? उन पैसों का कोई हिसाब नहीं लेकिन मुख्यमंत्री बघेल फिर से झूठी गंभीरता दिखाते हुए ‘सीएम रिलीफ फंड’ के नाम पर राशि जुटा रहे हैं। कैम्पा फंड का बुरी तरह दुरुपयोग किया गया है, उससे नियमों को ताक पर रख लग्जरी वाहन खरीदे गए हैं। श्री सोनवानी ने कहा कि इसके अलावे केंद्र से दी गई तमाम सहायता का क्या किया गया, इसका कोई हिसाब नहीं है। इससे अधिक शर्मनाक बात क्या हो सकती है कि प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा दिए गए वेंटीलेटर को खोल कर भी इतने दिनों में नहीं देखा गया। अब जब इतनी किल्लत हुई है तो कह रहे हैं कि वेंटीलेटर खराब है। क्या सालभर में प्रदेश सरकार उनकी मरम्मत भी नहीं करा सकती थी? श्री सोनवानी ने कहा कि दरअसल केंद्र हर तरह से सहायता देने को तैयार है लेकिन इनकी नीयत वहां से केवल पैसे मांगने में है ताकि उसकी बंदरबांट ये कर सकें।
मण्डल अध्यक्ष ने कहा कि स्थानीय स्तर पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गुंडरदेही में लगातार तीन- तीन दिन , चार- चार दिनों तक कोविड 19 जांच किट का अभाव रहता है जिससे यह अस्पताल रिफर सेंटर बना हुआ है ।मरीज परेशान है और कोविड 19 वैक्सीन नियमित रूप से नही लग रहा है ।अन्य टीकाकरण केंद्रों जैसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ,उपस्वास्थ्य केंद्र में भी लगभग यही स्थिति है । वैक्सिनेसन नही होने से कोविड 19 से संक्रमित होने का भय बना रहता है ।प्राथमिक स्वास्थय केंद्रों में ऑक्सीजन सिलेंडरों एवम आवश्यक उपकरणों के अभाव के साथ साथ योग्य चिकित्सकों की कमी है । जिसके कारण कोविड 19 के अलावा अन्य बीमारियों के मरीजों को समूचित उपचार नही मिल पाता । ऐसे में सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों को इस ओर ध्यान देना चाहिये ।
मण्डल अध्यक्ष ने कहा कि गांवो को कंटेन्मेंट जोन घोषित किये है उन गाँवो में मरीजों की उचित देख भाल व इलाज नही मिल रहा है । वे मरीज मितानिन ,कोटवार ,पटवारी एवम ग्रामीण स्वास्थ्य सयोजको के भरोसे छोड़ दिये गए है । कांग्रेस के शासनकाल में अधिकारी कर्मचारी भी परेशान है और अपनी जान को जोखिम में डाल कर ड्यूटी कर रहे है उन्हें न किसी प्रकार की सुरक्षा किट उपलब्ध कराए गए है और न ही अधिक ड्यूटी के बदले अतिरिक्त वेतन भत्ता दे रहे है ।और न कोई घोषणा की है ।और न ही किसी प्रकार से उनके जीवन से सम्बंधित बीमा सुविधा प्रदान किये है । भाजपा मंडल गुंडरदेही के अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल से मांग किया है कि उपरोक्त सारी अनियमित व्यवस्था को सुधारने एवम प्रदेश के आम जनता को मूल भूत सुविधा प्रदान करने कहा
अस्पतालों में दवाईयां, बेड जैसी सुविधाओं के लिए तरस रहे लोग- लोकेश बेसरा
सर्वविदित है कि इस कोरोना महामारी ने हमारी पूरी छत्तीसगढ़ को अपनी चपेट में ले लिया है । मरीजों को अस्पतालों में न तो पर्याप्त बेड, न दवाई मिल रही है, लोग बहुत परेशान है । 15 साल की रमन सरकार से तंग आकर लोगों ने भूपेश बघेल की सरकार को चुना था , लोगों को विश्वास था कि भूपेश बघेल की सरकार में चुने हुए जनप्रतिनिधि जनता के लिए काम करेंगे लेकिन इस महामारी के समय भी हमारे स्थानीय विधायक चन्दन कश्यप अपनी जिम्मेदारी से उलट जनता की मुश्किलों का समाधान नहीं कर रहे हैं । क्षेत्र को सेनिटाइज तक नहीं किया जा रहा है ।
विधायक जनप्रतिनिधियों को लोग इसलिए चुनते हैं कि वह जनता के मुश्किलों का समाधान करेंगे, लेकिन हमारे नारायणपुर विधानसभा के विधायक चन्दन कश्यप , लोकसभा सांसद दीपक बैज जी जनता के बीच नहीं दिख रहे हैं ,इससे लोगों में इन जनप्रतिनिधियों के खिलाफ काफी रोष है ।
आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़ के सभी विधायकों ,11 लोकसभा सांसदों ,पांच राज्यसभा सांसदों से सवाल पूछती है जनप्रतिनिधि जी जनता के सवालों का जवाब दो – आप कहां हो, ऐसा तो नहीं कि अपने क्षेत्र की जनता को छोड़कर असम से आये वीआईपी नेताओं आवभगत में लीन हैं ? नारायणपुर की जनता चन्दन कश्यप जी आपसे जानना चाहती है- स्थानीय जनता की समस्या के समाधान के लिए आपने क्या- क्या प्रयास किए?
आम आदमी पार्टी भूपेश सरकार से भी सवाल पूछना चाहती है कि उन्होंने अपने चुनाव घोषणापत्र में कहा था कि शिक्षा और स्वास्थ्य पर काम करेंगे तो आज स्वास्थ्य की व्यवस्था में छत्तीसगढ़ क्यों पिछड़ा है ? क्यों लोगों को इस महामारी में बेड और दवाइयों की किल्लत झेलनी पड़ रही है ? भूपेश सरकार शराब पर लिए जा रहे अतिरिक्त शुल्क को अब शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर के शुल्क के तौर पर ले रही है, पिछले साल की तुलना में 2021 में भी भूपेश सरकार दुवारा शराब से 5 हजार करोड़ की आय का लक्ष्य रखा गया है,। जनता जानना चाहती है कि आखिर यह जनता के टैक्स का पैसा कहां खर्च हो रहा है , क्यों नहीं इन पैसों से छत्तीसगढ़ के अस्पतालों को ठीक किया जा रहा है ।
आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार से कहना चाहती है कि आपसी खींचतान जो उनके सरकारों के बीच में हो रहा है , ये सही नहीं है साथ ही भाजपा को कहना चाहती है , उनका आयुष्मान योजना देश के कई राज्यों उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश सभी में फेल हो गया है, केंद्र से छत्तीसगढ़ को मदद दिलाने की बजाय वे आयुष्मान भारत योजना का क्यों रोना रो रहे हैं ।
दल्लीराजहरा और चिखलाकसा का एकमात्र शासकीय चिकित्सालय जो इस वैश्विक महामारी में एक एम्बुलेंस के भरोसे चल रहा है | दल्लीराजहरा, चिखलाकसा एवं आसपास के क्षेत्रों में जिस प्रकार से कोरोना संक्रमितों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है काफी सोचनीय है और एकमात्र एम्बुलेंस के सहारे ही कोरोना मरीजों को आइसोलेशन सेंटर तो कभी जिला अस्पताल ले जाया जाता है | जिस कारण काफी सारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है | उक्त परिस्थिति को देखते हुए सांसद प्रतिनिधि विक्रम ध्रुवे ने जिला कलेक्टर जन्मेजय महोबे से एम्बुलेंस 108 की मांग की |