विदित हो कि विगत दिनों बालोद जिला वन विभाग द्वारा वन क्षेत्र में जामडीपाट पाटेश्वर धाम आश्रम निर्माण के विरूद्व कब्जा व बेदखली शब्द का उपयोग करत हुए एकतरफा नोटिस दिया गया है। जबकि पाटेश्वर धाम की तरह छत्तीसगढ़ के वनक्षेत्र में अनेक देव स्थान व आश्रम स्थापित है, किन्तु नोटिस केवल पाटेश्वर धाम आश्रम को ही दिया गया है |
चूँकि इस क्षेत्र में कुछ समय से हिन्दू प्रतिकों पर लगातार प्रहार किया ज रहा है, इसलिए ऐसा प्रतीत होता है कि वनांचल क्षेत्र में हिन्दु धर्म संस्कृति व गहरी आस्थ के प्रतीक बन चुके 40 वर्ष पुराना आश्रम को द्वेषपूर्ण एक तरफा नोटिस देना कोई गहर शाजिश है। इसके अलावा स्थानीय ग्राम पंचायत से लेकर आदिवासी समाज को आश्रम के विरूद्व भड़का कर सामाजिक समरसता को छिन्न-भिन्न करने का प्रयास भी निंदनीय है |
महोदया जी, विगत कई वर्ष से जामड़ीपाट पाटेश्वर धाम द्वारा शासन प्रशासन से जमीन का पट्टा प्रदान करने हेतु आवेदन के माध्यम से आग्रह किया जा चुक है, किन्तु प्रशासन द्वारा आवेदन पर विचार करने की बजाय उन्हे बेदखली का नोटिस देन सोची समझी साजिश प्रतीत होता है।
अतः आपसे निवेदन है कि यदि शीघ्र ही बालोद जिला वन विभाग सहित स्थानीय जिला प्रशासन इस संबंध में काई सकारात्मक निर्णय नहीं लेता है तो समस्त हिन्द संगठनों सहित जनता को न्याय मांगने सड़क पर उतरना पड़ेगा, इसकी समस्त जिम्मेदार प्रशासन की होगी।
दल्ली राजहरा – लौह अयस्क खदान समूह के डिप्लोमा इंजीनियर की बैठक 22 नवंबर को साहू सदन दल्ली राजहरा में हुई। डिप्लोमा इंजीनियर को चिदंबर राव, राजेश कुमार साहू , मोहिद शफी, रवि नारायण राव, बी के मिश्रा, रवि शंकर देशमुख, रामपाल, डी एस चौहान, महेश खोड़के, ए के राजोरिया, सी एल लहरें , पी एस पटेल, मनोज कुमार भोई, वेंकट महिलांगे , राजकुमार मुंडा ने संबोधित किया।
डिप्लोमा इंजीनियरों ने एक सुर में कहा कि प्रबंधन पदनाम और केरियर ग्रोथ के मुद्दे पर डिप्लोमा इंजीनियरों का शोषण कर रही है। प्रबंधन को यह जानना चाहिए कि यह मुद्दा कहीं ना कहीं हमारे सामाजिक सम्मान एवं प्रतिष्ठा से जुड़ा है। देश के अन्य संस्थानों में अपने ही बराबर योग्यता वाले अन्य साथियों से पदनाम एवं प्रमोशन में पीछे होने के कारण इस वर्ग के कर्मचारियों के साथ उनके परिवार भी बहुत दुखी हैं, क्योंकि किसी व्यक्ति के तरक्की में उसके परिवार की भी खुशी छुपी होती है।
राजेश कुमार साहू ने कहा कि आज सेल में डिप्लोमा इंजीनियर की स्थिति यह है कि जूनियर को डिग्रेड करके S-3 ग्रेड में ज्वाइन कराया जा रहा है, एवं उनका पदनाम सम्मानजनक नहीं है। साथ ही जो वरिष्ठ डिप्लोमा इंजीनियर है वह वर्कर के अधिकतम ग्रेड S-11 में 8 से 10 वर्ष से रुके हुए हैं। उसके आगे ग्रेड भी नहीं है। उन्हें आर्थिक क्षति भी हो रही है। कुछ डिप्लोमा इंजीनियर की अभी भी 5 से 10 वर्षों की सेवा अवधि बची हुई है। प्रबंधन डिप्लोमा इंजीनियर को जवाबदारी तो पूरी दे रहा है, लेकिन जहां डिप्लोमा इंजीनियर को कुछ देने की बात आती है तो यह कह कर टाल देता है कि यह मामला कारपोरेट ऑफिस का है।
डिप्लोमा इंजीनियर को सम्मानजनक पदनाम ना मिलने के कारण यह लोग हतोत्साहित हो रहे हैं, और उनमें आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि हम डिप्लोमा इंजीनियर को आज ग्रैजुएट इंजीनियर के प्रारंभिक पद पर लगभग 10 वर्षों में पहुंचना चाहिए था वह आज 25- 30 वर्ष बाद भी वहां तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। अभी भी लोगों के 5 से 10 वर्ष बचे हुए हैं। जबकि इतने वर्षों में देश के किसी भी संस्थान में ऐसा नहीं होता है पर इसके बारे में कोई नहीं सोच रहा है। इसलिए पदनाम और कैरियर ग्रोथ के मुद्दे पर हड़ताल में शामिल होने के लिए ना चाहते हुए भी मजबूर हैं।
उन्होंने आगे कहा कि हम डिप्लोमा इंजीनियर को आज ग्रैजुएट इंजीनियर के प्रारंभिक पद पर लगभग 10 वर्षों में पहुंचना चाहिए था वह आज 25- 30 वर्ष बाद भी वहां तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। अभी भी लोगों के 5 से 10 वर्ष बचे हुए हैं। जबकि इतने वर्षों में देश के किसी भी संस्थान में ऐसा नहीं होता है पर इसके बारे में कोई नहीं सोच रहा है। इसलिए पदनाम और कैरियर ग्रोथ के मुद्दे पर हड़ताल में शामिल होने के लिए ना चाहते हुए भी मजबूर हैं।
महेश खोड़के और रवि नारायण ने कहा कि हम चाहते हैं :-
(1). सन 2017 में इस्पात मंत्रालय द्वारा जूनियर इंजीनियर पदनाम एवं कैरियर ग्रोथ (प्रमोशन) अन्य संस्थानों की तरह लागू करने के आदेश के बावजूद भी प्रबंधन द्वारा लटकाया जा रहा है. डिप्लोमा इंजीनियरों ने स्पष्ट कहा कि पदनाम और कैरियर ग्रोथ नहीं तो एक दिवसीय हड़ताल में शामिल होने के पश्चात आगे अनिश्चितकालीन हड़ताल के लिए भी बाध्य होंगे।
(2). सेल चेयरमैन श्री अनिल कुमार चौधरी ने नए वर्ष 2020 की शुभकामना बधाई संदेश में यह घोषणा की थी कि कर्मचारियों को सम्मानजनक पद जल्द दे दिया जाएगा लेकिन यह वर्ष भी समाप्ति की ओर है और उच्च प्रबंधन द्वारा कर्मचारियों को सम्मानजनक पदनाम नहीं दिया जा रहा है।
ए के राजोरिया और आर. एस. देशमुख ने कहा कि यहां पर उपस्थित सभी डिप्लोमा इंजीनियरों ने भी यह बात स्पष्ट कहा कि सबसे ज्यादा समस्या प्रबंधन की डिप्लोमा इंजीनियर के प्रति विरोधी नीतियों से है, जो कि समझ से परे है कि डिप्लोमा इंजीनियर को जब देश में सभी संस्थानों में चाहे वह पब्लिक सेक्टर हो या प्राइवेट सेक्टर या गवर्नमेंट सभी जगह जब जूनियर इंजीनियर पदनाम (ज्वाइनिंग से ही) मिल रहा है साथ ही जैसी प्रमोशन पॉलिसी सब जगह है हम लोग भी तो वही मांग रहे हैं हम कोई अलग से नहीं मांग रहे, कुछ अधिक नहीं मांग रहे हैं फिर भी इस प्रकार से लटकाना कहीं ना कहीं कंपनी का नुकसान करना ही दर्शाता है। जबकि हम डिप्लोमा इंजीनियर हमारी पूरी क्षमता के साथ कंपनी के प्रत्येक जिम्मेदारी को लेते हुए उत्पादन के लक्ष्य को प्राप्त करने में अपना सर्वोच्च लगा दे रहे हैं। यदि प्रबंधन हमें सम्मानजनक पदनाम जल्द नहीं देता है तो आने वाले समय में डिप्लोमा इंजीनियर उग्र कदम उठाने के लिए बाध्य होंगे जिसकी पूरी जवाबदारी उच्च प्रबंधन की होगी।
चिदंबर राव
राजेश साहू ने इस्पात मंत्रालय द्वारा 1 मई 2017 को जारी एक आदेश (No. 8(37)/2016-SAIL-PC, Government of India, Ministry of Steel, SAIL Division, Udyog Bhavan, New Delhi) की प्रति दिखाते हुए कहा कि इस आदेश में साफ-साफ लिखा गया है कि SAIL के डिप्लोमा इंजीनियर को BHEL और BSNL की तर्ज पर जूनियर इंजीनियर पदनाम प्रदान किए जाने की कार्यवाही की जावे, किन्तु इस्पात मंत्रालय के इतने स्पष्ट आदेश के बावजूद डिप्लोमा इंजीनियर को आज तक जूनियर इंजीनियर पदनाम नहीं दिया गया है, जो दिखाता है कि प्रबंधन इस्पात मंत्रालय के आदेश को भी नकारता रहा है, जिसके कारण डिप्लोमा इंजीनियर्स काफी हतोत्साहित हुए हैं। लौह अयस्क खदान समूह के डिप्लोमा इंजीनियर्स द्वारा सम्मानजनक पदनाम न दिए जाने के मुद्दे को इस्पात मंत्री के समक्ष उठाने का निर्णय ले चुके हैं और जल्द ही इस्पात मंत्री को इस संबंध में ज्ञापन देंगे।
जिला अध्यक्ष भारतीय गौ रक्षा मंच नागेंद्र चौधरी ने बालोद जिले के पाटेश्वर धाम आश्रम में वन विभाग की कार्रवाई को अमानवीय करार देते कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा है कि जिस प्रकार नोटिस भेजा जा रहा है उससे साफ ज्ञात होता है कि यह दुर्भावनावश किया जा रहा है। पाटेश्वर धाम आश्रम वालोद जिला ही नहीं वरन पूरे देश में अपना एक अलग स्थान
रखता है। आज पाटेश्वर धाम में कौशल्या जन्मभूमि मंदिर का निर्माण हो रहा है जो पूरे विश्व में ख्याति अर्जित कर रही है। यहां संचालित होने वाला सीता रसोई आश्रम में दूर-दराज से आने वाले दर्शनार्थियों को भोजन प्रसादी प्रदान की जाती है। ऐसे ही अनेक रचनात्मक कार्य
आश्रम परिसर में संचालित किए जाते हैं। ऐसे पुण्य भूमि पर वन विभाग की कार्रवाई शोभा नहीं देती है। पाटेश्वर आश्रम में सन 1975 में पूज्य सदगुरुदेव श्री रामजानकीदास जी महात्यागी का आगमन हुआ था उस दिन से आश्रम अस्तित्व में है।
क्षेत्र के पुराने निवासियों द्वारा भी बताया जाता है कि आश्रम में गुरुदेव के आगमन से दैवीय कार्य और भी बढ़ा और रामायण व सनातन धर्म का प्रसार हुआ। आश्रम के पहाड़ पर स्थित पाटेश्वर बाबा सैकड़ों वर्षों से पूजे जाते रहे हैं, जहां वर्तमान में ग्रामीणों व भक्ते ने सीढ़ी बना कर आवागमन को सुगम बनाया। आज वर्तमान में आश्रम के संचालक रामवालकदास दास जी महात्यागी हैं जिनके द्वारा अमेकधार्मिक व जनहित के कार्य संचालितकिए जाते हैं।
एक नजर – दल्लीराजहरा के किस वार्ड से कितने संक्रमित मिलें |
आज जिन वार्डों में कोरोना संक्रमितों की पहचान की गई है वे इस प्रकार है – वार्ड क्र 01 से 01, वार्ड क्र 04 से 01, वार्ड क्र 05 से 01, वार्ड क्र 08 से 02, वार्ड क्र 11 से 01, वार्ड क्र 18 से 01, वार्ड क्र 20 से 01, वार्ड क्र 21 से 02 और वार्ड क्र 24 से 01 की पुष्टि हुई है |
इस प्रकार एंटीजन से 04, और आरटीपीसीआर से 07 की रिपोर्ट के आधार पर कुल 11 लोग कोरोना संक्रमित मिले |
विशेष अनुरोध – सिटी मीडिया सिटी मीडिया भी नगर के समस्त नागरिकों एवं पाठकों से अनुरोध करता है कि घरों से कम से कम निकले एवं सोशल डिस्टेसिंग एवं मास्क का सदैव उपयोग करें जिससे स्वयं एवं अपने परिवार को सुरक्षित रख बड़ी हानि से बचे |
जगदलपुर।विधायक व संसदीय सचिव रेखचंद जैन ने नगरनार स्टील प्लांट डी-मर्जर व विनिवेशीकरण रोकने के लिए बुलाई गई बैठक में केंद्र की मोदी सरकार पर करारा हमला
बोलते हुए कहा कि नगरनार स्टील प्लांट डी-मर्जर के साथ बैलाडीला की खदानों को बेचा जाएगा,इसके लिए आर्थिक नाकेबंदी जैसे कठोर कदम भी उठाए जाएंगे। इस दौरान संसदीय सचिव रेखचंद जैन ने सांसद दीपक बैज को सर्वदलीय समीति के अध्यक्ष बनाए जाने की वकालत की है।
नक्सलियों का दावा-20 वर्षों में 4464 हमलों में मारे गए 2958 जवान और 294 माओवादियों की मौत
पहली बार नक्सलियों ने जारी किया बीस वर्षों का ब्योरा, एक साल तक पीएलजीए वर्षगाठ का किया ऐलान
बीजापुर:–बीजापुर। पुलिस और सुरक्षा बलों की घेराबंदी के बीच अपने आधार इलाकों में सिमट चुके माओवादियों ने पैठ मजबूत रखने आंकड़ों के जरिए संगठन की जमीनी हकीकत की पड़ताल में जुटे हैं। इसका खुलासा माओवादियों की केंद्रीय कमेटी की तरफ से जारी उस प्रेस नोट में हुआ है, जिसमें बीते 20 वर्षों में बस्तर में सक्रिय नक्सलवादियों की तरफ से किए गए हमलों, सफलता-अफसलता का ब्योरा रखने की कोशिश की गई है। जिसमें केंद्रीय कमेटी के प्रवक्ता अभय के हवाले से जारी प्रेसनोट में बीते बीस सालों में बस्तर में हुए नक्सली हमलों में नक्सलियों ने पुलिस व सुरक्षा बलों को अधिक और नक्सली संगठन को नुकसान कम होने का दावा किया है। दरअसल बस्तर में पिछले पांच दशकों से चल रहे माओवादियों के खूनी खेल के बीच अब माओवादियों द्वारा 2 दिसंबर 2020 से लेकर 1 दिसंबर 2021 तक लगातार एक साल तक पीएलजीए यानि माओवादियों के पीपुल्स लिब्रेशन गुरिल्ला आर्मी के स्थापना के 20 वीं वर्षगांठ मनाने का ऐलान किया है।
वही दूसरी ओर माओवादियों के केंद्रीय कमेटी द्वारा एक प्रेसनोट और पर्चा जारी कर पिछले बीस वर्षों में जवानों पर किए गए हमलों के अलावा अन्य लोगों की हत्याओं समेत 20 वर्षों में मारे गए माओवादियों के आंकड़ों का ब्योरा सार्वजनिक किया है। माओवादियों द्वारा जारी पर्चे में पीएलजीए द्वारा अंजाम दिए गए घटनाओं का उल्लेख करते हुए जवानों से लूटे गए हथियारों समेत कारतूसों का विवरण पर्चे में दिया गया है। माओवादियों द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के तहत् सन 2001 से लेकर सितंबर 2020 तक माओवादियों की गुरिल्ला आर्मी द्वारा जवानों पर छोटी और बड़े हमले मिलाकर 4464 हमले किए गए। माओवादियों के अनुसार इन हमलों में कुल 2958 जवान मारे गए हैं तो वही 3507 जवानों के घायल होने का दावा किया गया है। जबकि इन 20 सालों में माओवादी संगठन द्वारा 294 नक्सल सदस्यों के मारे जाने का दावा किया गया है। माओवादियों के केंद्रीय कमेटी के प्रवक्ता अभय ने एक प्रेस नोट जारी कर 26 नवंबर को प्रस्तावित अखिल भारतीय हड़ताल को समर्थन देने की बात करते हुए केंद्र सरकार को जनविरोधी मजदूर, कर्मचारी और किसान विरोधी सरकार करार दिया है।
साथ ही 2 दिसंबर से पीएलजीए की 20 वीं वर्षगांठ मनाने की बात का उल्लेख करते हुए एक आंकड़ा प्रस्तुत किया गया है। जिसमें पिछले 20 वर्षों के नफा और नुकसान का ब्योरा दिया गया है। पर्चो के अनुसार जवानों पर अब कि 4464 हमले किए गए। साथ ही राजनीति से जुड़े 222 राजनेताओं की हत्या करने के साथ ही मुखबिरी के नाम पर 1105 संगठन से गद्दारी करने वाले 143 और सलवा जुडूम समेत अन्य संगठन जो नक्सल संगठन की खिलाफत करते थे इनमें से 516 लोगों की हत्या की जिम्मेदारी माओवादियों ने ली है, इसके अलावा जवानों पर किए गए हमलों के बाद 2308 हथियार और करीब डेढ़ लाख से अधिक कारतूस बरामद करने का खुलासा माओवादियों द्वारा किया गया है। वही इन 20 वर्षों में विभिन्न मुठभेड़ों के दौरान नक्सल संगठन से जुड़े 294 माओवादियों के मारे जाने का खुलासा भी किया गया है, जिनमें सर्वाधिक 2018 में 42, 2019 में 16, 2020 में सितंबर तक 11,2017 में 17, 2016 में 19, 2013 में 25,2011 में 26, 2010 में 28, 2009 में 15, 2008 में 19और 2007 में 23 माओवादियों के मारे जाने की बात कही गई है। विदित हो कि पहली बार माओवादियों द्वारा एक साथ 20 वर्षां का आंकड़ा जारी किया गया है, जिसमें जवानों पर हमलों के साथ -साथ स्वयं के नुकसान और हथियारों की लूट समेत राजनेताओं की हत्याओं का जिक्र किया गया है, साथ ही संगठन के खिलाफ जाने वाले और माओवादियों का विरोध करने वालों की हत्याओं का जिक्र करते हुए 20 वर्षों की तमाम घटनाओं की जिम्मेदारी ली गई है। साथ ही पहली बार एक साल तक वर्ष गांठ मनाने की अपील भी की गई है।
बॉक्स
वहीं दूसरी ओर इस मामले में बीजापुर एसपी कमलोचन कश्यप का कहना है कि सुरक्षा बल के जवानों के हांथो पिछले 20 वर्षों में माओवादियों को बड़ा नुकसान पहुंचा है बावजूद विभिन्न मुठभेड़ों में मारे गए माओवादियों के आंकड़ों को नक्सल संगठन द्वारा छुपाया जा रहा है साथ ही मुठभेड़ों में घायल होने वाले माओवादियों की संख्या भी नहीं उल्लेख नही किया गया है,जबकि हमेशा खासकर बस्तर में सुरक्षा बल के जवान नक्सलियों पर भारी रहे हैं और जब भी आमने सामने की लड़ाई होती है तो नक्सली पीठ दिखा कर भाग जाते हैं ऐसे में माओवादियों द्वारा जारी किये गए आंकड़े महज स्वयं की क्षति को छुपाने मात्र की कोशिश है।
जगदलपुर – आज रावघाट थाना क्षेत्र के तहत कोसरौंडा एसएसबी के सामने सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई, जिसकी पुष्टि एसएसबी डीआईजी वी विक्रमण ने की है। सुरक्षा बलों ने 3 नक्सलियों को ढेर कर दिया है। इस मुठभेड़ में एक एसएसबी 33 बटालियन का जवान घायल हो गया है। घायल जवान को पैर में गोली लगी है। सुरक्षा बलों ने 3 नक्सलियों को मार दिया है, जिसमें 2 पुरुष, 1 महिला नक्सली शामिल हैं। नक्सलियों के पास से एके 47, एसएलआर, 12 बोर बंदूक और स्वचालित बंदूक बरामद हुई है |
जगदलपुर विधानसभा क्षेत्र के दरभा के मावलीपदर हायर सेकेण्डरी स्कूल में संसदीय सचिव व जगदलपुर विधायक रेखचंद जैन ने कहा कि पूर्व में मावलीपदर एक पंचायत था और भौगोलिक स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों की जरूरत को पूरा करते हुए विखंडित किया गया है तथा तीन पंचायत बनाये गये हैं जिससे पंचायतों में विकास की बयार बहेगी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार की सोच है कि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में त्रिवगति से विकास होगा।
जगदलपुर। बस्तर जिले के दरभा जनपद के हायर सेकंडरी स्कूल के कार्यक्रम में संसदीय सचिव व जगदलपुर विधायक रेखचंद जैन ने कहा कि अतिसंवेदनशील क्षेत्र मुंड़ागढ़ में चार नग बोरिंग खनन प्रारंभ करवाया गया। संसदीय सचिव रेखचंद जैन ने इस दौरान जल मिशन योजना अंतर्गत घर-घर स्वच्छ पेयजल आपूर्ति की जाएगी जिसके लिए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार कटिबद्ध है। इस दौरान संसदीय सचिव रेखचंद जैन ने चार अतिरिक्त कक्ष का निर्माण 20.14 लाख रुपए से निर्माण होगा ।इस दौरान सरस्वती सायकिल वितरण समारोह में 36 बच्चों को सायकिल वितरित किया गया है।
जगदलपुर। नगरीय निकाय क्षेत्र में लगातार स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार कार्य कर रही है और स्वास्थ्य सुविधाओं की समीक्षा हेतु जनप्रतिनिधियों को भी जिम्मेदारी दी जा रही है।इस हेतु मंगलवार को 24-11- 2020 को महारानी अस्पताल के गुंडाधुर भवन में विधायक व संसदीय सचिव रेखचंद जैन सहित पार्षदों की महत्त्वपूर्ण बैठक आयोजित किया गया है। इस दौरान स्वास्थ्य सुविधाएं व कोरोना जांच को लेकर रणनीति तय हो सकती है और ज्यादा से ज्यादा लोगों के जांच कराने का निर्देश दिया जा सकता है।