प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी की मंशा अनुरूप विधायक जगदलपुर एवं संसदीय सचिव रेखचंद जैन खिलाड़ियों को लगातार प्रोत्साहित कर रहे हैं एवं उन्हें खेलने के लिए खेल सुविधाएं उपलब्ध करवा रहे हैं
इसी कड़ी में आज विधायक जगदलपुर एवं संसदीय सचिव रेखचंद जैन ने शहर के पं मोतीलाल नेहरू वार्ड के युवा खिलाड़ियों को क्रिकेट किट प्रदान किया
उन्होंने बच्चों को कहा कि हमारे प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी बच्चों के खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने को लेकर गंभीर प्रयास कर रहे हैं और इसके लिए उन्होंने खेल विकास प्राधिकरण का भी गठन किया है आपके खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए हम सभी प्रयास कर रहे हैं और शहर में बेहतरीन क्रिकेट ग्राउंड का भी निर्माण किया जा रहा है आप सभी खिलाड़ियों के उज्जवल भविष्य की कामना करता हूं
मनुष्य के कल्याण के लिए आवश्यक है भीतर का प्रकाश आत्मा ही है परमात्मा को पाने का माध्यम, अतः उसे जगाना होगा। सहज योग ध्यान पद्धति पतन्जलि योग पद्धति के आठ अंगों यम नियम आसन प्राणायाम प्रत्याहार ध्यान धारणा समाधि के सिद्धान्त का अनुमोदन करती है, इसमें आरंभ के चार अंग भौतिक शरीर के सुख एवं रोग क्लेश निवारण के लिये हैं, और शेष चार मन मस्तिष्क एवं आत्मिक सुख का साधन हैं। ध्यान की अवस्था का अनुभूत प्रयोग ही श्री माताजी निर्मला देवि प्रणीत सहजयोग की विशेषता है। ध्यान की अनुभव सिद्धता का आनंद जो कुछ मिनिटों की प्रार्थना से ही लेना गूंगे के गुड़ के समान शब्दातीत है, जिन खोजा तिन पाइयाँ गहरे पानी पैठ। सहज योग ध्यान के माध्यम से आत्मा के जागरण के द्वारा आनंद का अमृत जीवन को सीचता है, रोग शोक भय आशंका पीड़ा सबका नाश हो कर आत्मिक सुख प्राप्त होता है। मनुष्य का कल्याण ध्यान के द्वरा बड़ी सहजता से होता है इसी कारण इसे सहजयोग कहा जाता है। संसार की अनेक सभ्यताएं प्रकाश की आराधना श्रद्धा और समर्पण से करती रही हैं क्योंकि प्रकाश ही परम शक्ति का प्रतीक है जो जीवन को नवरता से अमरत्व की ओर ले जाने का प्रेरक है।
राष्ट्रीय सहजायोग ट्रस्ट नई दिल्ली एवं सहजयोग प्रतिष्ठान पुणे द्वारा सहजयोग स्वर्ण जयंति वर्ष के उत्सव रूप में देश भर में 16 भारतीय भाषाओं में लगातार 12 घण्टे तक ऑनलाईन ध्यान की अनुभव सिद्ध पद्धति का निशुल्क प्रशिक्षण के 16 कार्यक्रम आगामी 3 जनवरी 2021 रविवार को प्रातः 9 बजे से रात्रि 9 बजे तक आयोजित किये जाना तय है। जिसमें 40 मिनिट के प्रत्येक सत्र में प्रात: 9 बजे से रात्रि 9 बजे तक लगातार 16 भाषाओं में ध्यान सिखाया जाएगा। www.sahajayoga.org.in/live ऑन लाईन लिंक के साथ ही टोल फ्री नंबर 18002700800 पर संपर्क किया जा सकता है।
जगदलपुर।बस्तर रेंज में भारतीय दण्ड विधान के तहत गत वर्ष 2019 की तुलना में आलोच्य वर्ष 2020 में हत्या , हत्या का प्रयास , नकबजनी , चोरी , अपहरण / व्यपहरण , धोखाधड़ी , उपेक्षापूर्ण कार्य से मृत्यु / दुर्घटना , आगजनी शीर्ष एवं नक्सली वारदातों में कमी आई है । वर्ष 2017 से 2020 तक भारतीय दण्ड विधान के तहत पंजीबद्ध अपराधों के चार वर्षीय तुलनात्मक आकड़े निम्नानुसार है ।
बस्तर संभाग अंतर्गत एनडीपीएस एक्ट के तहत वर्ष 2020 में 187 आरोपियों के कब्जे से 9,806 कि.ग्रा . अवैध मादक पदार्थ ( गांजा ) जप्त कर कुल 99 प्रकरण पंजीबद्ध किये गये हैं । जप्त मादक पदार्थ ( गांजा ) का अनुमानित बाजार मूल्य रू . 4,90,00000 / ( चार करोड़ नब्बे लाख ) है।
बस्तर क्षेत्र में नक्सल विरुद्ध अभियान संबंधी जानकारी छत्तीसगढ़ शासन की ” विश्वास – विकास – सुरक्षा ” त्रिवेणी कार्य योजना के अनुरूप बस्तर क्षेत्र में तैनात छत्तीसगढ़ पुलिस , केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल , सीमा सुरक्षा बल , भारत – तिब्बत सीमा पुलिस एवं सशस्त्र सुरक्षा बल द्वारा बेहतरीन कार्य करते हुये नक्सल गतिविधियों के ऊपर प्रभावी कार्यवाही की जा रही है । आगामी दिनों में इस कार्यायोजना को और बेहतर क्रियान्वयन करते हुये क्षेत्र में शांति व्यवस्था स्थापित करने के साथ – साथ विकास कार्य को गति प्रदान करने अनुकूल वातावरण निर्मित की जायेगी । बस्तर संभाग अंतर्गत वर्ष 2020 में नक्सल विरोधी अभियान हेतु जिला स्तर में बोदली , तिरिया , भडरीमहु जिला दन्तेवाड़ा में भोगाम , टेटम , बड़ेकरका , जिला नारायणपुर कड़ेमेटा , जिला बीजापुर में घरमावरम , तरैम , बेचापाल , जिला कांकेर में कामतेडा , कटगांव एवं जिला सुकमा में कमारगुड़ा , मिनपा इस प्रकार कुल 14 नवीन सुरक्षा कैम्प स्थापित किये गये हैं । इन कैम्पों के माध्यम से नक्सल विरोधी अभियान के साथ – साथ जनसुविधा के लिए आवागमन हेतु सड़क , पुल – पुलिया निर्माण कार्य को भी सुरक्षा प्रदान की जा रही है ।
बस्तर संभाग अंतर्गत स्थापित किये गये नवीन सुरक्षा कैम्पों की जानकारी : जिला स्थापित किये गये नवीन सुरक्षा कैम्प बस्तर बोदली, तिरिया, भडरीमहु, दन्तेवाड़ा भोगाम, टेटम, बड़ेकरका, नारायणपुर कड़ेमेटा, बीजापुर धरमावरम, तरम, बेचापाल,कांकेर कामतेड़ा, कटगांव, सुकमा कमारगुडा, मिनपा शामिल है।
बस्तर संभाग अन्तर्गत सुरक्षा बलों के माध्यम से वर्ष 2020 में निम्नानुसार . विकास कार्यों को गति प्रदान की गई है : आरआरपी योजना के माध्यम से Road connectivity विकसित किया जा रहा है । वर्ष 2020 में लगभग 400 कि.मी. सड़क निर्माण का कार्य पूर्ण हो चुका है । पल्ली – बारसूर सड़क जो विगत 30 वर्षों से निर्माण नहीं हो पाया था , जिसे प्रारम्भ किया जाकर वर्तमान में निर्माण कार्य प्रगति पर है । इसी प्रकार कई वर्षों से बंद पड़ा अरनपुर – जगरगुंडा मार्ग को माह नवम्बर , 2020 में कमारगुड़ा कैम्प स्थापित किया जाकर वर्तमान में निर्माण कार्य प्रगति पर है , जिससे जगरगुंडा , बासागुड़ा , अरनपुर क्षेत्र के ग्रामीणों को अपने जिला एवं विकासखण्ड मुख्यालय तक आवागमन में सुविधा होगी । इन्द्रावती नदी के ऊपर 03 महत्त्वपूर्ण पुल ( बड़ेकरका , छिंदनार ” जिला दन्तेवाड़ा एवं फुण्डरी ” जिला बीजापुर ” ) का निर्माण कार्य प्रगति पर है । एयर कनेक्टिविटी हेतु हैदराबाद – जगदलपुर – रायपुर विमान सेवा दिनांक 21.09.2020 से प्रारम्भ किया गया । एल.डब्ल्यू.ई क्षेत्रों में अत्यंत नक्सल संवेदनशील ईलाके में स्थित जिला सुकमा के ग्राम गोलापल्ली , पालोड़ी , एलारमडगु में बिजली सुविधा उपलब्ध कराई गई । SCA ( Special Central Assistance ) फण्ड का महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चरल गैप को कम करने में उपयोग किया जा रहा है । अधिकांश नक्सल प्रभावित इलाकों में काफी लम्बे समय पश्चात स्कूल / आश्रमों को प्रारम्भ कराया गया । सार्वजनिक वितरण प्रणाली ( PDS ) के दुकानों को नवीन स्थापित सुरक्षा कैम्पों के नजदीक खुलवाया गया । जैसे पोटाली , बोदली । वर्ष 2020 में बस्तर संभाग अंतर्गत पुलिस / सुरक्षा बलों द्वारा संचालित नक्सल विरुद्ध अभियान में 112 पुलिस – नक्सली मुठभेड़ हुई , जिसमें 40 माओवादी मारे गये , 438 माओवादी गिरफ्तार किये गये एवं माओवादियों के 80 हथियार एवं 290 आईईडी बरामद किये गये हैं । क्षेत्र में माओवादियों के विरूद्ध अभियानों के संचालन के साथ – साथ नक्सल प्रभावित इलाकों में माओवादी कैडरों को आत्मसमर्पण करने हेतु प्रेरित करने के उद्देश्य से पुलिस एवं सुरक्षा बलों द्वारा लगातार प्रयास किया जा रहा है । विशेषकर जिला दन्तेवाड़ा में ” लोन वर्राटू ” अभियान चलाया जा रहा है , जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आये हैं । वर्ष 2020 में 342 माओवादियों द्वारा हिंसा त्यागकर माओवादी संगठन को छोड़कर शासन की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर आत्मसमर्पण किया गया , जिन्हें शासन की पुनर्वास नीति के तहत आर्थिक सहायता एवं अन्य सुविधाएं प्रदान की गई है । बस्तर संभाग अंतर्गत जिलों के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में ग्रामीण जनता में पुलिस के प्रति अविश्वास , डर की भावना को खत्म करने , पुलिस एवं जनता के मध्य संबंध को मजबूत करने के उद्देश्य से पुलिस द्वारा सामुदायिक पुलिसिंग कार्यक्रम प्रारंभ किया गया । शुरूआत में सामुदायिक पुलिसिंग को सिविक एक्शन के नाम से चलाया गया , फिर इसे और गति देने एवं सार्थक बनाने के लिये स्थानीय बोली गोंडी , हल्बी , भतरी इत्यादि भाषाओं में विभिन्न नाम दिये गये हैं , जिनका विवरण निम्नानुसार है ।
जिला सामुदायिक पुलिसिंग कार्यक्रम का नाम हिन्दी शाब्दिक अर्थ आमचो बस्तर आमचो पुलिस हमारा बस्तर हमारा पुलिस , बीजापुर मनवा पूना बीजापुर मेरा नया बीजापुर, सुकमा तेंदमून्ता बस्तर जागो बस्तर, दन्तेवाड़ा मनवा दन्तेवाड़ा- मनवा पुलिस मेरा दन्तेवाड़ा- मेरा पुलिस, नारायणपुर निया नार निया पुलिस अपना गांव अपना पुलिस, आमचो पुलिस कोण्डागांव आमचो पुलिस आमचो संगवारी, हमारा पुलिस हमारा संगवारी, कांकेर जोहार संगवारी, अभिनंदन साथियों
जिलों में सामुदायिक पुलिसिंग कार्यक्रमों के माध्यम से पुलिस एवं जनता के मध्य दूरी कम की जाकर बेहतर सेवा देने हेतु लगातार कार्यवाही की जा रही है । प्रतिबंधित गैर कानूनी माओवादी संगठन का असली चेहरा को उजागर करने हेतु बस्तर संभाग में पुलिस / सुरक्षा बलों द्वारा “ बस्तर ता माटा ” के नाम से स्थानीय भाषाओं का इस्तेमाल करते हुये माओवादियों के विरूद्ध प्रचार अभियान ( Psy Ops / Counter Propaganda War ) संचालित किया जा रहा है । वर्ष 2020 में COVID – 19 , Lockdown इत्यादि चुनौती की परिस्थिति में पुलिस / सुरक्षा बलों के कुल 6960 अधिकारी / कर्मचारी संक्रमित होने के बावजूद भी बस्तर क्षेत्र की जनता के जान – माल की सुरक्षा हेतु स्थानीय पुलिस बल , विशेष बल ( STEIDRG / COBRA ) एवं केन्द्रीय सुरक्षा बल ( CRPF , BSF , ITBP , SSB ) द्वारा समर्पित होकर कार्य किया गया ।
जगदलपुर। जिला मुख्यालय के जिला शिक्षा अधिकारी के पद पर किसकी नियुक्ति होगी उसको लेकर अफवाहों का बाजार गर्म है। नये वर्ष में जिला शिक्षा अधिकारी राजकुमार कठौते ने इसकी तगड़ी लामबंदी प्रारंभ कर दिया है जिसके तहत् ऐसा लगता है कि इनकी लॉटरी लग सकती है। दूसरी तरफ अंडरग्राउंड होकर कई शिक्षक भी जिला शिक्षा अधिकारी पद हेतु लालायित हैं और पर्दे के पिछे इनके द्वारा मंत्री के चक्कर लगा रहे हैं।ज्ञात हो कि जिला शिक्षा अधिकारी राजेंद्र झा किसी मामले को लेकर सस्पेंड है।
प्रतिदिन की भांति ऑनलाइन सत्संग का आयोजन संत श्री राम बालक दास जी के द्वारा किया गया, जिसमें सभी भक्तगण जुड़कर अपनी जिज्ञासाओं का प्रतिदिन समाधान प्राप्त कर रहे हैं आज के सत्संग परिचर्चा में पुरुषोत्तम अग्रवाल जी ने कुंभ मेले पर जिज्ञासा रखते हुए बाबा जी से प्रश्न किया कि इसके लगने का प्रयोजन क्या है, मेले की विशेषता को प्रकट करते हुए बाबा जी ने बताया कि कुंभ मेला हरिद्वार नासिक उज्जैन एवं प्रयागराज में संतों का आगमन होना इसमें मेले का आयोजन होना विशेष महत्व का है क्योंकि इसके पीछे वेद पुराणों में कई
कथाएं और घटनाओं का वर्णन हमें मिलता है समुद्र मंथन का होना,मंथन में अमृत घट का प्रकट होना,अमृत घट के लिए देव दानव का युद्ध होना जैसे देवासुर संग्राम भी कहा जाता है यह देवासुर संग्राम में जब अमृत के लिए युद्ध हुआ तो इसे लेकर दानव भागे जहां जहां पर देव दानव इकट्ठे होते इसके लिए संघर्ष होता तो वहां वहां पर कहते हैं कि अमृत की कुछ बूंदें भी गिर पड़ी इनमें मुख्य है हरिद्वार प्रयागराज नासिक और उज्जैन इन स्थानों पर अमृत कलश से छलका है और चारों जगह पर अमृत की बूंदें टपकी है इस तरह चार स्थानों पर कुंभ की संरचना हुई अमृत तो देव दानव में बांटा गया राहु केतु को मिला और इनका सर भी कटा तत्पश्चात देवों को इसका पान प्राप्त हुआ और ऋषि यों ने इसके पश्चात बैठक कर निर्णय लिया कर क्यों ना
भारत को चार भागों में जोड़कर धार्मिक समरसता के लिए सामाजिक सद्भावना के लिए सभ्यता के प्रचलन व संस्कृति के विस्तार के लिए सनातन धर्म की रक्षा के लिए सर्व धर्म का पालन करने हेतु सर्व कल्याण हेतु एक ऐसा मेला लगे जिसमें संपूर्ण विश्व एक होकर भारत की संस्कृति का दर्शन करें यह केवल और केवल भारत की संत शक्ति ही कर सकती थी और जो कि सफल भी है कुंभ का निर्णय हुआ संतो का निर्णय समाजवाद विश्व कल्याण की भावना के लिए होता है संतों की वाणी जगत कल्याणी विश्व कल्याणी होती है अतः उत्तराखंड के हरिद्वार में मध्य खंड प्रयाग में मध्य खंड उज्जैन में और मध्य दक्षिण खंड नासिक में इस तरह से 4 भाग में भारत को चार खंडों में बांटा गया कुंभ का निश्चय किया गया और जहां जहां संत वहां वहां पर कुंभ जैसे तीर्थहुए जहां जहां संतों की वाणी हुई वहां वहां पर अमृत का पान हुआ इस तरह
से चार कुंभ हुए अब कुंभ की व्यवस्था हुई संतों ने सेवा कैंप लगाए और सब वहां आने लगे स्नान भोजन हेतु वहां पर इकट्ठे होने लगे और उस समय के राजा महाराजाओं को भी यह अनुभव हुआ क्यों ना हम भी वहां अपने गुरुदेव को लेकर गंगा स्नान करें इस तरह लाखों लोगों का ऐसा समागम प्राप्त हुआ जहां सर्व समाज इकट्ठा होने लगा संतों का दर्शन प्राप्त होने लगा एक साथ भोजन भजन किया जाने लगा वह भी एक एक दो दो महीने तक पर्व को भी तय किया गया कौन-कौन सी पुण्य तिथियों पर गंगा जी गोदावरी जी और यमुना जी में स्नान हो यह तय किया गया राजा महाराजा इस कुंभ में अपने अपने गुरुओं के लिए ठाट से झांकी सजाकर आया करते कोई अपने गुरु को हाथी पर तो कोई रथ में बैठा कर तो कोई बाजे गाजे के साथ तो कोई चतुरंगी सेना के साथ शाही स्नान के लिए लाता था और वही परंपरा आज भी है शाही स्नान की लेकिन आज राजा परंपरा नहीं साधु संत बाबा जी अपने ही रथो को सजाते हैं और अपने अपने भक्तों के साथ यहां पर स्नान हेतु आते हैं |
हमारे छत्तीसगढ़ से भी शाही स्नान जब जाता है तो पंथी नाचा राउत नाच पंडवानी रामधुनी एक साथ नाचते हुए आनंद लेते हुए आगे बढ़ते हैं और हमारे छत्तीसगढ़ का मंडप पूरे कुंभ में दर्शनीय होता है प्रति कुंभ छत्तीसगढ़ से भी श्री पाटेश्वर धाम तीर्थ द्वारा मंडप का आयोजन किया जाता है जिसमें छत्तीसगढ़ के सभी लोगों के लिए निशुल्क भोजन भजन एवं रुकने की व्यवस्था की जाती है जिसका निर्णय इस वर्ष के लिए भी किया जा रहा है |
इसी सत्संग परिचर्चा पर विचार रखते हुए रिचा बहन ने जिज्ञासा रखी कि क्या केवल गंगा जी स्नान करने पर हमारे पाप धुल जाते हैं इस विषय को स्पष्ट करते बाबा जी ने बताया कि गंगा मैया जितनी पवित्र है पूरे ब्रह्मांड में दूसरा कुछ नहीं है कलयुग में गंगा जल ही है जिसके कारण पाप हमें छू नहीं पा रहे हैं |
गंगा मैया जीसके कारण आज भारतवर्ष के लोग भी नास्तिक होने से बचे हुए है,पाप करने के बाद व्यक्ति सोचता है कि मेरा जीवन ही व्यर्थ हो गया और वह या तो आत्महत्या कर लेता है या पाप ही करते जाता है परंतु गंगा स्नान कर वह नए विचार सोचने लगता है वह सोचता है कि अब मेरे पुराने पाप धुल गए हैं अब कुछ अच्छा कर सकते हैं जैसे गौमाता हमें अन्न धन से पवित्र करती है वैसे ही गंगा मैया हमें सात्विकता प्रदान करती है शुद्धि से तन मन विचारों को पवित्र करती है गंगा मैया पाप जरूर धोती है परंतु पापियों के पाप नहीं धोती, जाने अनजाने में यदि कोई गलती कर देता है तो गंगा मैया उन्हें अपनी गोद में बैठाकर निर्मल धारा में झाड़-पोछ कर पवित्र कर देती है लेकिन पापियों के पाप जो कि जान सोचकर करते हैं मां गंगा भी ऐसे पापियों को कभी क्षमा नहीं करती जो व्यक्ति मन से पूर्णता पवित्र होकर मां के पास संकल्प लेता है कि वह कभी भी इस तरह के कृत्य नहीं करेगा मैं उसे अवश्य ही निर्मल कर देती है | इस प्रकार आज का ज्ञान पूर्ण एवं आनंद में सत्संग पूर्ण हुआ जय गो माता जय गोपाल जय सियाराम
भूमकाल यानी भूमि का कम्पन मतलब परिवर्तन बस्तर बस्तर्वासियों का है। भुमकाल का मकसद शोषण, बाहरी दखल, ठेकेदारी से बचाना।1910 में गुंडा धूर को रानी कुंवर ने आंदोलन का नेतृत्व सौंपा था |
अपनी जमीन बचाने अंग्रेजों से भिड़ गए थे बस्तर के आदिवासी…
छत्तीसगढ़ सरकार एनएमडीसी के नगरनार स्टील प्लांट को खरीदने तैयार है। विधानसभा में इस बाबत शासकीय संकल्प सर्वसम्मति से पारित हो चुका है। लेकिन इस पर चर्चा के दौरान जो प्रसंग सामने आए हैं, उससे एक बार फिर साबित हो गया है कि अपनी जमीन के लिए अंग्रेजों से भिड़ जाने वाले बस्तर के लोग अपना इतिहास नहीं भूले हैं। वे अपनी सामर्थ्य को अच्छी तरह जानते और पहचानते हैं। यही कारण है कि नगरनार स्टील प्लांट के डिमर्जर की सूरत में भूमकाल की पुनरावृत्ति की बात की जा रही है। बस्तर अंचल के चित्रकोट विधायक राजमन बेंजाम ने नगरनार डी- मर्जर मामले में बड़ा बयान देते हुए विधानसभा में कहा है कि नरेंद्र मोदी आदिवासियों को हल्के में न लें।
यदि नगरनार स्टील प्लांट डी-मर्जर मामले में केंद्र सरकार अपने निर्णय वापस नहीं लेती तो आदिवासी फिर दूसरा भूमकाल करने से नहीं चूकेंगे। इस मामले में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि केंद्र सरकार की कमेटी ने नगरनार इस्पात संयंत्र के विनिवेश को मंज़ूरी दी थी। 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने केंद्र सरकार को पत्र लिखा था कि यदि विनिवेश किया गया तो नक्सलवाद को काबू करना मुश्किल हो जाएगा। सीएम बघेल ने प्रतिपक्ष भाजपा पर निशाना साधते हुए यह भी बता दिया कि टाटा प्लांट से जमीन लेकर हमने किसानों को लौटाई है। आज वहाँ के आदिवासी किसान सारे लाभ उठा रहे हैं।
बीते दो सालों से हम बस्तर के आदिवासियों का विश्वास जीतने का काम कर रहे हैं, चाहे जमीन लौटाने की बात हो, चाहे तेंदूपत्ता बोनस देने की बात हो, चाहे नौकरी देने की बात हो. यही वजह है कि बस्तर में नक्सली पॉकेट में सिमट गए हैं. ये लोग बोल नहीं पा रहे हैं कि ये बस्तर के आदिवासियों के साथ हैं या केंद्र सरकार के साथ। नगरनार इस्पात संयंत्र छत्तीसगढ़ सरकार ख़रीदेगी। मंत्री रविंद्र चौबे ने भी भाजपा पर हमला बोला कि सरकार ने उदारता के साथ ज़मीन का अधिग्रहण किया था। बस्तर के लोगों ने भी उम्मीद के साथ लाल आतंक वाले इलाक़े में इसकी सहमति दी थी। लोगों ने पब्लिक सेक्टर के संयंत्र के लिए इसकी मंज़ूरी दी थी। उद्योग के लिए 610 हेक्टेयर ज़मीन का अधिग्रहण किया गया था, इसमें से केवल क़रीब सौ हेक्टेयर ज़मीन का ही हस्तांतरण एनएमडीसी को किया गया है शेष ज़मीन अब भी राज्य सरकार के अधीन है। पब्लिक सेक्टर के लिए नगरनार संयंत्र को तमाम तरह की मंज़ूरी दी गई थी न कि निजी सेक्टर के उद्योग के लिए ये अनुमति दी गई। उन्होंने यह भी बता दिया कि ये इलाक़ा पेसा क़ानून प्रभावित इलाक़ा है।
स्थानीय आदिवासी यदि इस निजीकरण का विरोध करेंगे तो हमारे लिए भी मुमकिन नहीं हो पाएगा। कांग्रेस विधायक राजमन बेंजामिन ने कहा कि नगरनार इस्पात संयंत्र के लिए आदिवासियों ने अपनी ज़मीन दी है, यदि वहाँ विनिवेश हुआ तो बस्तर में एक और भूमकाल आंदोलन होगा. बस्तर का आदिवासी अपने हक़ की लड़ाई लड़ेगा। राजमन ने बस्तर के तमाम लोगों और उनके नुमाइंदों की आवाज बुलंद की तो बस्तर के सभी विधायकों ने नगरनार स्टील प्लांट को खरीदने के फैसले पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के प्रति आभार व्यक्त किया है। उद्योग मंत्री कवासी लखमा के नेतृत्व में बस्तर अंचल एवं अन्य इलाकों के विधायकों एवं जनप्रतिनिधियों के प्रतिनिधि मंडल ने सीएम से सौजन्य मुलाकात कर बस्तर के नगरनार स्थित इस्पात संयंत्र को आदिवासियों के हितों की रक्षा के लिए राज्य सरकार द्वारा खरीदने के निर्णय के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया। सीएम ने प्रतिनिधि मंडल को आश्वस्त किया है कि छत्तीसगढ़ सरकार बस्तर अंचल में रोजगार सृजन के अवसर को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। बस्तर में उद्योगों की स्थापना से स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने और रोजी-रोजगार की तलाश में अन्य राज्यों में जाने से रोकने में मदद मिलेगी।
इस अवसर पर संसदीय सचिव शिशुपाल सोरी, जगदलपुर विधायक रेखचन्द जैन, चित्रकोट विधायक राजमन बेंजाम, केशकाल विधायक संतकुमार नेताम, दंतेवाड़ा विधायक श्रीमती देवती कर्मा, अंतागढ़ विधायक अनूप नाग, नगरी सिहावा विधायक डॉ. लक्ष्मी ध्रुव, मनेन्द्रगढ़ विधायक डॉ. विनय जायसवाल, भरतपुर-सोनहत विधायक गुलाब कमरो, क्रेडा अध्यक्ष मिथिलेश स्वर्णकार सहित सत्तार अली एवं अवधेश गौतम उपस्थित थे। यानी पूरे बस्तर ने नगरनार मामले में अपनी भावना स्पष्ट कर दी है। जहां तक दूसरे भूमकाल आंदोलन की बात है तो बस्तर के लोग इससे सहमत ही होंगे, यह चर्चा के दौरान मंत्री चौबे के इशारे से भी ध्वनित हो गया। भूम काल का अर्थ भूमि के कम्पन अर्थात परिवर्तन से है। व्यवस्था के खिलाफ ऐसे आंदोलन से है, जो बस्तर को शोषण से बचाने के लिए हो। बस्तर बस्तर वासियों का है। अपनी जमीन बचाने के लिए आदिवासी अब से एक सौ दस साल पहले अंग्रेजी हुकूमत से भिड़ गए थे। गुंडा धूर के नेतृत्व में हुआ आंदोलन याद दिलाया जा रहा है। यहां खास बात यह है कि नक्सली समस्या से जूझ रहा बस्तर अब विकास के लिए प्रतिबद्ध है। यह विकास निजीकरण से नहीं हो सकता। बल्कि इससे लाल आतंक को रोक पाना मुश्किल होगा। यह बात भाजपा सरकार के तात्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह अपनी पार्टी की केंद्र सरकार को बता चुके हैं। कायदे से केंद्र सरकार को इससे सहमत हो जाना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हुआ तो अब छत्तीसगढ़ ने जो प्रस्ताव दिया है, उस पर फैसला लिया जाए।
भारतीय जनता पार्टी जिला बस्तर जिलाध्यक्ष रूपसिंह मण्डावी ने जिला पदाधिकारीयों एवं जिला कार्यकारिणी की घोषणा प्रदेशाध्यक्ष मा. विष्णुदेव साय जी एवं प्रदेश महामंत्री (संगठन) मा. पवन साय जी की अनुशंसा पर की, जो सूची निम्नानुसार हैः-
उपाध्यक्षः-
1. श्री योगेन्द्र पाण्डे (जगदलपुर) 2. श्री श्रीधर ओझा(जगदलपुर) 3. श्री श्रीनिवास मिश्रा (जगदलपुर) 4. श्री रघुवंश श्रीवास्तव (नगरनार) 5. श्रीमती गोदावरी साहू (जगदलपुर) 6. श्रीमती रूखमणी बघेल(लोहण्डीगुड़ा)
महामंत्री
1. श्री रामाश्रय सिंह (जगदलपुर) 2. श्री वेदप्रकाश पाण्डे (बकावण्ड)
कोषाध्यक्ष
1. श्री रजनीश पानीग्राही(जगदलपुर)
मंत्री
1. डाॅ0 व्ही0एस0 राजपूत(बस्तर) 2. श्री बुधराम करटम (बास्तानार) 3. श्री बबलू कुमार नाग (तोकापाल) 4. श्री नरसिंह राव (जगदलपुर) 5. सुश्री ललिता बघेल (बकावण्ड) 6. श्रीमती राजकुमारी सेठिया(नानगुर)
कार्यकारिणीः-
श्री बैदुराम कश्यप (बड़ेमोरठपाल)
श्री विद्याशरण तिवारी (जगदलपुर)
श्री लच्छूराम कश्यप (लोहण्डीगुड़ा)
श्री आंनद मोहन मिश्रा (जगदलपुर)
श्री शेषनारायण तिवारी (जगदलपुर)
श्री उत्तमलाल वर्मा (जगदलपुर)
श्री राजाराम तोड़ेम (जगदलपुर)
श्री सुधीर पाण्डेय (जगदलपुर)
श्री अनिल शर्मा (जगदलपुर)
श्री विजय पाण्डे (भानपुरी)
श्री संजय पाण्डे (जगदलपुर)
श्री राजेन्द्र बाजपेयी (जगदलपुर)
श्रीमती लक्ष्मी कश्यप (जगदलपुर)
श्रीमती देवकी कश्यप (लोहण्डीगुड़ा)
श्री योगेन्द्र कौशिक (जगदलपुर)
श्री संजय विश्वकर्मा (जगदलपुर)
श्री समुंदसाय कच्छ (तोकापाल)
श्री अजय सिंह (जगदलपुर)
श्री बृजेश भदौरिया (जगदलपुर)
श्री नागेन्द्र पाण्डे (जगदलपुर)
श्री रामानंद मिश्रा (बस्तर)
श्री आलोक अवस्थी (जगदलपुर)
श्री तरूण चोपड़ा (भानपुरी)
श्री नरेश गुप्ता (करपावण्ड)
श्री चंद्रशेखर जोशी (तोकापाल)
श्रीमती स्नेहलता बैस (बकावण्ड)
श्रीमती मनीता सेठिया (नानगुर)
श्री संतोष बघेल (दरभा)
श्री भोला श्रीवास्तव (दरभा)
श्री फिरोज बस्तरिया (जगदलपुर)
श्री उमाकांत सिंह (जगदलपुर)
श्री मनोरंजन राय (जगदलपुर)
श्री धरम दास (जगदलपुर)
श्री सुरेन्द्र सिंह गिल (जगदलपुर)
श्री हाफिज भाई(जगदलपुर)
श्री बृजबिहारी झा (जगदलपुर)
श्री बी. जयराम (जगदलपुर)
श्री अश्वनी कुमार सरडे (जगदलपुर)
श्री अरूण त्रिपाठी (जगदलपुर)
श्री अजय अग्रवाल (जगदलपुर)
श्री वनवासी मौर्य (बनियागांव, बकावण्ड)
श्री रिंकू पाण्डेय (जगदलपुर)
श्री लच्छिन यादव (तोकापाल)
श्री विजय तिवारी (भानपुरी)
श्री दुर्जन कश्यप (करपावण्ड)
श्री अरूण परिहार (बस्तर)
श्री रोहित त्रिवेदी (बकावण्ड)
श्री अर्जुन सेठिया (नगरनार)
श्री कोषाराम पोयाम (बास्तानार)
श्री बालसिंह ठाकुर (लोहण्डीगुड़ा)
श्री लक्ष्मीनिवास पाण्डे (मारडूम, लोहण्डीगुड़ा)
श्री नारायण बिसाई (बकावण्ड)
श्री मोहन जोशी (बकावण्ड)
श्री जितेन्द्र पानीग्राही (बकावण्ड)
श्री धरमपाल महावर (जगदलपुर)
श्री राधे सेठिया (नानगुर)
श्री जीवन दास (जगदलपुर)
श्री के.के. द्विवेदी (जगदलपुर)
श्री दिलीप कुशवाहा (जगदलपुर)
श्री निर्मल सोनी (जगदलपुर)
श्री पवन भदौरिया (जगदलपुर)
श्री राममूर्ति पाण्डे (जगदलपुर)
श्री सरबजीत सिंह सूरी (जगदलपुर)
श्रीमती दयावती देवागंन (जगदलपुर)
श्रीमती मालती आचार्य (जगदलपुर)
श्रीमती प्रमीला कपूर (जगदलपुर)
श्रीमती पार्वती कश्यप(लोहण्डीगुड़ा)
श्रीमती प्रिया मुचाकी (बास्तानार)
श्रीमती महावती मण्डावी (बास्तानार)
श्रीमती शकुंतला कश्यप (बस्तर)
श्री दंतेश्वर राव नायडू (जगदलपुर)
श्री कृष्णकांत शुक्ला (जगदलपुर)
श्री तेजनारायण दुबे (जगदलपुर)
श्री दिनेश दास (जगदलपुर)
श्री मोहन सिंह (जगदलपुर)
श्री गोविंद शर्मा (जगदलपुर)
श्री राजेश श्रीवास्तव (जगदलपुर)
श्रीमती पदमनी कश्यप (तोकापाल )
श्रीमती सुशीला सेठिया (नानगुर)
श्रीमती नीलावती कश्यप (दरभा)
स्थायी आमंत्रित सदस्यः- 1 श्री किरण सिंह देव 2 श्री केदार कश्यप 3 श्री दिनेश कश्यप 4 डाॅ0 सुभाऊ कश्यप 5 श्री सुभाष राव 6 श्री शरद अवस्थी 7 श्री संतोष बाफना 8 श्री श्रीनिवास राव मद्दी 9 श्री कमलचंद्र भंजदेव 10 श्रीमती वेदबती कश्यप 11 श्री मनीराम कश्यप विशेष आमंत्रित सदस्य 1 श्री प्रेम थवानी 2 श्री शीलचंद जैन 3 श्री धरमूराम मण्डावी 4 श्री रैतु राम बघेल 5 श्री निर्देश दीवान 6 श्रीमती पदमा कश्यप 7 श्रीमती रामवती भण्डारी 8 श्रीमती सीताबाई नाग 9 श्रीमती मालती मण्डावी 10 श्रीमती सरिता पानीग्राही 11 श्रीमती शालिनी सेमसन रूपसिंह मण्डावी जिलाध्यक्ष भाजपा, जिला बस्तर (छ.ग)
भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जनजाति मोर्चा जिलाध्यक्ष विक्रम ध्रुवे को बनाया गया | भारतीय जनता पार्टी के उर्जावान कार्यकर्ता वर्तमान में सांसद मोहन मंडावी के सांसद प्रतिनिधि भी है | चिखलाकसा नगर पंचायत चुनाव में अध्यक्ष पद पर निर्विरोध भाजपा को विजयी दिलाने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी | अनुसूचित जनजाति प्रदेशाध्यक्ष द्वारा
प्रदेश उपाध्यक्ष देवेन्द्र माहला को बनाया गया एवं गिरधर ठाकुर को प्रदेश मीडिया प्रभारी बनाया गया इसी प्रकार प्रदेश कार्यसमिति में होरीलाल रावटे एवं सोमेश सोरी को लिया गया है जो कि वर्तमान समय में सोमेश सोरी नगर पंचायत डौंडी के अध्यक्ष पद पर निर्वाचित है | होरीलाल रावटे जिला पंचायत सदस्य है | अनुसूचित जनजाति मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष द्वारा जिला बालोद के भाजपा कार्यकर्ताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है | जिसके लिया भाजपा के समस्त कार्यकर्ताओं द्वारा धन्यवाद् ज्ञापन दिया गया है |
सचिव संघ ब्लॉक अध्यक्ष चुनुराम सिन्हा द्वारा सचिवों के अनिश्चितकालीन हड़ताल के एक सूत्री मांग के संबंध में अवगत कराया गया कि पंचायत सचिवों का शासकीयकरण किया जावे मांग के संबंध में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष देवलाल ठाकुर के द्वारा ग्राम पंचायत सचिव के मांगों को जायज बताते हुए कहा कि ग्राम पंचायत सचिव ग्राम स्तर में शासन की योजनाओं का संपादन एवं संचालन में शासन की महत्वपूर्ण रीड है जो आम जनता के जन्म से लेकर
मृत्यु तक के समस्त कार्य को सुचारू रूप से करते हैं साथ ही मैं पंचायत सचिवों के मांग के संबंध में पंचायत मंत्री से सचिवों की मांग के संबंध में स्वयं अवगत कराऊंगा सचिवों की मांग को रखूंगा एवं पूर्व जनपद पंचायत उपाध्यक्ष दुष्यंत गिरी गोस्वामी द्वारा कहां गया कि पंचायत स्तर में ग्राम पंचायत सचिवों द्वारा शासन की समस्त योजनाओं का निष्ठा पूर्वक निर्वहन किया जाता है |
पंचायत सचिव का शासकीय करण की मांग जायज है जिसे शासन को अवश्य पूरी करनी चाहिए सचिव संघ के अनिश्चितकालीन हड़ताल का समर्थन सरपंच संघ के अध्यक्ष पोषण लाल देवांगन संतराम ताराम सचिव सरपंच संघ एवं संतराम पिस्दा कोषाध्यक्ष भी उपस्थित हुए सरपंच संघ डौंडीलोहारा के द्वारा भी पंचायत सचिवों की मांग को जायज बताते हुए शासन को पंचायत सचिव की मांग पूरी करने इस पंडाल के माध्यम से सूचित किया गया तथा मांग पूरी नहीं होने पर सरपंच संघ भी समर्थन में हड़ताल पर उतरेंगे |
आज की हड़ताल में मीडिया प्रभारी दिनेश कुमार गंजीर उपाध्यक्ष महेंद्र बाघमरिया रूपा कटघरे सचिव मेमन सिंह अटल सलाहकार देवलाल मालेकर जागेश्वर साहू पुरानीक जगनायक प्रवक्ता परसराम देशमुख शिवकुमार साहू अजय उर्वशा टुमन भालेंद्र हेमलता मानिकपुरी करुणा देवांगन दिनेश्वरी विश्वकर्मा जया मानिकपुरी राजेश्वरी पटेल खिलेश्वरी भूआर्य बलदाउ प्रसाद देवांगन रूपचंद यदुवंशी लचछन पटेल जितेन्द्र मालेकर रवि किरण यादव योगेश साहू विदेश जननायक भूपेंद्र यादव मोहित मांलेकर हेमंत केसरिया 120 ग्राम पंचायत के सचिव धरना प्रदर्शन स्थल पर डटे रहे।
बालोद – आज दिनाँक 01/01/2020 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महोदय, जितेन्द्र सिंह मीणा द्वारा , नवीन मंगलतराई कैम्प का विजिट किया गया। नवीन कैम्प भवन में शिफ्टिंग की गई है।
आज नव वर्ष 2021 के अवसर पर, मंगलतराई कैम्प में जिला बल के पुलिस अधिकारी/कर्मचारियों तथा CAF के अधिकारी/कर्मचारियों को नव वर्ष की शुभकामनाएं दी गईं तथा मिष्ठान वितरण किया गया । सभी जवानों से चर्चा किया गया।
इस दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दौलत राम पोर्ते, निरीक्षक रामसत्तु सिन्हा, मंगलतराई कैम्प प्रभारी ASI निर्मल यादव, APC शिव कुमार तिवारी उपस्थित थे।