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वार्ड पार्षद द्वारा रंगोली प्रतियोगिता करवाया गया एवं विजेता को परुस्कार वितरण किया

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पार्षद रोशन द्वारा अनोखे अंदाज में अपने वार्ड वासियों के साथ मनाया दीपावली पर्व :

सैय्यद वली आज़ाद – नारायणपुर


जिला मुख्यालय नारायणपुर के वार्ड क्रं. 8 महावीर मंदिर पार्षद श्री रोशन गोलछा द्वारा कराई गई रंगोली प्रतियोगिता जिसमें वार्ड के माताओं बहनों व बेटियों ने बढ़ चढ़ के आनंद के साथ लिए हिस्सा!

नारायणपुर जिले के वार्ड क्रं. 8 के चहेते पार्षद रोशन गोलछा लगातार वार्ड वासियों के साथ कुछ ना कुछ नया करने की व वार्ड को और बेहतर करने कि कोशिश मे रहतें हैं उनके द्वारा इस महामारी के दौरान वार्ड मे दिवाली का माहौल इस कदर रंगारंग किया गया कि रंगोली के रंग भी कम पड़ गए उन्होंने इस दिपावली घर- घर जाकर माता, बहनों को रंगोली वितरण किया व एकाएक रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन कर सभी वार्ड वासीयों के मन में हर्षोल्लास का दिप प्रज्ज्वलित कर दिपावली का माहौल और भी जगमग कर दिया,रंगोली प्रतियोगिता में माता, बहनों ने हिस्सा लिया जिसमें प्रथम स्थान पर केसर जैन, द्वितीय स्थान पर पायल चंद्राकर व सुम्मी जैन, तीसरे स्थान पर चन्द्रिका निषाद,दिशा राठौड़,सीमा कड़ीयाम बनी रही,वहीं प्रतिभागीताओं को पार्षद रोशन गोलछा व वार्ड के वरिष्ठों के द्वारा पुरस्कार के साथ सम्मानित किया गया निर्णायक भूमिका में अनूप भट्टाचार्य एवं दल व सोशल मीडिया की अहम भूमिका रही श्री रोशन गोलछा द्वारा समय-समय पर अपने वार्ड में किया जाने वाला पहल अतुलनीय व सराहनीय कदम है !

अतिसंवेदनशील क्षेत्र कोलेंग के बच्चे लगायेंगे चौके-छक्के, संसदीय सचिव रेखचंद जैन व क्रेडा अध्यक्ष मिथिलेश स्वर्णकार का जताया आभार

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जगदलपुर।बस्तर जिले के दरभा ब्लाक के अतिसंवेदनशील क्षेत्र कोलेंग के युवक अब क्रिकेट के खेल में चौके-छक्के लगाएंगे।इनकी मुराद संसदीय सचिव व जगदलपुर विधायक रेखचंद जैन तथा अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण(क्रेडा) अध्यक्ष मिथिलेश स्वर्णकार ने पूरा किया। खेल सामग्री मिलने पर युवाओं ने नेताओं का आभार व्यक्त किया ।


अतिसंवेदनशील क्षेत्र कोलेंग के युवकों द्वारा जगदलपुर विधायक एवं संसदीय सचिव रेखचंद जैन एवं छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय उर्जा विकास अभिकरण के अध्यक्ष मिथिलेश स्वर्णकार से मुलाकात कर उन्हें दिपावली की शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर वहां के जनपद सदस्य एवं क्रिकेट टीम के युवाओं ने नेता द्वय से क्रिकेट किट की कमी की बात बताई जिस पर संसदीय सचिव एवं विधायक जगदलपुर रेखचंद जैन एवं क्रेडा चेयरमैन मिथिलेश स्वर्णकार ने तत्काल क्रिकेट किट मंगवा कर उन्हें प्रदान किया जिस पर संवेदनशील नक्सली प्रभावित क्षेत्र कोलेंग के युवाओं ने दोनों नेताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आप दोनों नेताओं की वजह से अब सुदूरवर्ती कोलेंग के युवाओं को भी क्रिकेट खेलने के लिए अत्याधुनिक खेल सुविधाएं प्राप्त हो गई है और क्षेत्र के समस्त युवा आप दोनों नेताओं का आभार व्यक्त करते हैं।

इस अवसर पर विधायक जगदलपुर एवं संसदीय सचिव रेखचंद जैन के साथ छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय उर्जा विकास अभिकरण के अध्यक्ष मिथिलेश स्वर्णकार के साथ जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री हेमू उपाध्याय एवं जनपद सदस्य भानू राम एवं क्रिकेट टीम के कप्तान मन्नु कश्यप के साथ क्षेत्र के युवा भी मौजूद रहे।

नहाय – खाय से शुरू होगा सूर्योपसना का महापर्व छठ

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छ्ठ बिहार,क्षारखण्ड , पूंर्वाच्चल तथा नेपाल का सर्वाधिक महत्वपूर्ण पर्व है। इसकी महत्ता इतनी है कि बिहारी मूल के लोग दुनिया के किसी भी कोने/हिस्से में रहे,वे अपने पैतृक घर / परिवार जरूर लौटते हैं या लौटने की पुरी कोशिश करते हैं और जो नही जा पाते,वो अपने आसपास ही छोटा – सा बिहार और पूर्वाच्चल बना लेते है। आज हालात यह है भारत के सभी शहरों/ कस्वों के साथ_ साथ दुनिया के अनेक देशों में छ्ठ पर्व घुमधाम व पुरी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।छत्तीसगढ में भी ऐसा कोई शहर / नगर नहीं है जहाँ छठ व्रतियों की भीड नहीं जुटती ।


अपनी ऊर्जा से समस्त जगत को चलायमान रखनेवाले सूर्यदेव और उनकी माता अदिति की प्रमुख रूप से अराघना का ये छ्ठपर्व संभवतःसनातन हिन्दू संस्कृति के प्राचीनतम् त्यौहारों में से एक मात्र लोकपर्व है| किंवदंतियों की माने तो दीनानाथ(सूर्यदेव) और छ्ठी मैया(माता) की उपासना चार दिन होती है।बैसे जब त्यौहार इतना पुराना हो और उससे गहरा लगाव हो तो आस्था का सैलाब हर कहीं होना स्वाभाविक है। लेकिन अगर जो इस बार घर से दूर हैं तो आप अपने पैतृक प्रान्त का एक प्रतिरूप अपने पास ही तैयार करना चाहते है तो मेरा इस लेरव में वार्णित विधि- बिघान आपकी कुछ मदद जरूर कर सकते हैं:—-


हमारे देशमें सुर्योपासना के लिए प्रसिद्ध पर्व है छ्ठ मूलतः सूर्य षट्टी ब्रत होने के कारण इसे छ्ठ कहा गया है।यह पर्व वर्ष में दो बार मनाया जाता है। पहली बार चैत्र में और दुसरी वार कार्तिक में। चैत्र शुक्ल पक्ष षष्ठी पर मनाये जाने वाले छ्ठ पर्व को चैती छ्ठ तथा कार्तिक शुक्ल पक्ष षष्ठी पर बनाये जाने वाले छ्ठपर्व को कार्तिक( कतकी)छ्ठ कहा जाता है। पारिवारिक सुख -समृद्धि तभा मनोंवांक्षित फलप्राप्ति के लिए छ्ठ पर्व मनाया जाता है। इस पर्व को स्त्री और पुरूष समान रूप से मनाते हैं। लोक परम्परा के अनुसार सूर्यदेव और षष्ठी मैया का सम्बन्ध पुत्र और माता का है। लोक मातृका षष्ठी की पहली पुजा सूर्य ने ही की थी। छ्ठ पर्व की परम्परा में बहुत गहरा विज्ञान छिपा हुआ है। षष्ठी तिथि (छ्ठ) एक विशेष खगौलीय अवसर है । उस समय. सूर्य की परावैगनी किरणें पृथ्वी की सतह पर सामान्य से अधिक मात्रा में एकत्र हो जाती है। उसके संभावित कुप्रभावों से मानव की यथा संभव रक्षा करने का सामर्थ इस परम्परा में है।

छठ पर्व का धार्मिक महत्व
सूर्मषष्टी अथवा छ्ठ पूजा सूर्योपासना का महोत्सव है। सनातन घर्म के पांच प्रमुख देवताओ मैं से एक सूर्यनारायण हैं। वाल्मीकि रचित रामायण में ॥आदित्य हृदय स्त्रोत ॥ के द्दारा सूर्यदेव का जो स्तवन किया गया है ,उससे उनके सर्वदेवमय सर्वशाक्तिमय स्वरूप का बोध होता है। सूर्य आत्मा जगतस्तस्युषश्च सूर्य सूक्त के इस वेद मंत्र के अनुसार भगवान सूर्य को सम्पूर्ण जगत का आत्मा कहा गया है। सूर्य का अर्थ सरति आकाशे सुवति कर्माणि लोक प्रेरयति वा वतलाया गया है ,अर्थात आकाश में चलते हुए लोक में जो कर्म की प्रेरणा दे ,उसे सूर्य कहा गया है। पुराणों में सूर्य को प्रत्यक्ष देवता कहा गया है। मोदनी में सूर्य को ग्रह विशेष बतलाया गया है। सूर्य के व्युप्पत्ति लभ्य अर्थ के अनुसार आकाश मण्डल से संचार की प्रेरणा देते हुए जो ग्रहों के राजा है,वही सूर्य है। पौरोहित्य शास्त्र के अनुसार सूर्य का जन्मस्थान कलिन्ग देश,गोत्र-कथ्यप,रक्त-वर्ण है। ग्रहराज होने के कारण ज्योतिष शास्त्र मानता है कि ग्रहों की अनुकूलता हेतु भगवान भाष्कर की पूजा करनी चाहिए ।पूजन में अर्ध्य का विघान मिलता है।कहा गया है कि सूर्य़ को अर्ध्य.देने से पाप विनिष्ट हो जाते हैं। स्कन्दपुराण में तो स्पष्ट उल्लेख है कि सूर्य कि सूर्य को वगैर अर्ध्य दिये भोजन तक नहीं करना चाहिए|पौरोहित्य शास्त्र के अनुसार अर्ध्य में आठ बस्तुओं का समावेश अर्थात जल,दूघ,कुश का अगला भाग,दघि ,अक्षत,तिल,यव और सरसों को अर्ध्य का अंग बतलाया है। अर्ध्य देने के लिए तांबे एंव पीतल की घातु के लोटे (जलपात्र) का प्रयोग करना चाहिए| शास्त्रों के अनुसार उगते हुए सूर्य एंव डूबते हुए सूर्य के सामने अर्ध्य देना चाहिए । पुराणों के अनुसार सूर्यदेव षष्ठ अर्थात छठवें दिन तेजोमय प्रकाश के साथ माता अदिति के समक्ष प्रकट हुए थे,इसीलिए माता अदिति को छ्ठी -मैइया के स्प में स्तुति की जाती है। ब्रती प्रसिद्ध छ्ठ पूजा के अवसर पर विशेष रन्य से सांय एव प्रातःकालीन सूर्य को अर्ध्य देकर सूर्य षष्ठी (छठ) ब्रत का परंम्परागत स्प से अनुपालन कर पवित्रता एंव तपस्या को चरमोत्कर्ष पर पहुंचाते है।


लोक उत्सव का स्वरूप
छ्ठ पूजा चार दिवसीय उत्सव है। इसकी शुरूआत चैत्र/ कार्तिक शुक्लपक्ष चतुर्थी को तभा समाप्ति चैत्र’ कार्तिक शुक्लपक्ष सप्तमी को होती है। झ्स दौरान व्रतघारी स्त्री/ पुरूष लगातार 36घंटे का निर्जला ब्रत रखते हैं। इस दौरान वे पानी भी ग्रहण नहीं करते!


कार्तिक छ्ठ व्रत 2020 का विवरण:


*18 नवम्बर 2020 : नहाय खाय
*19 नवम्बर 2020 : खरनापूजा
*20 नबम्बर 2020 : संध्या अर्ध्य
*21 नवम्बर 2020 : प्रातः अर्ध्य


. ( क ) नहाय खाय
पहला दिन शुक्लपक्ष चतुर्थी तिथी को नहाय खाय के रूप में मनाया जाता है। आमावस्या तिथी से सबसे पहले घऱ की पुरी तरह सफा३ि कर उसे पावित्र बनाया जाता है।इसके वाद लाल रंग की खाद्य जैसे टमाटर यादि खाना पूर्णतः वर्जित हो जाता है।छ्ठ व्रत की तैयारी शुरू हो जाता है तभा चुल्हा यदि का निर्माण किया जाता है। शुक्लपक्ष की चतुर्थी तिथी को प्रातः काल व्रती स्नान ध्यान से निवृत होकर सुद्धता और पावित्रता से निर्मित साकाहारी भोजन का सेवन करता/ करती है। इसी के साथ छ्ठ ब्रत की शुरूआत हो जाता है। परिवार के सभी सदस्य व्रती। के भोजनोपंरात ही भोजन ग़हण करते हैं।भोजन के रन्प में कददु(लौकी) -दाल और चावल ओल( जीमीकंदा) ,हरा वैगन,गोभी की शब्जी तथा चना दाल सेंधा नमक में बनाया हुआ खाने की परम्परा है।


( ख ) लोहंडा और खरना
दुसरे दिन अर्थात शुक्ल पक्ष पंचमी तिथी को व्रतघारी दिनभर निर्जला उपवास रखने के बाद शाम को भोजन करते हैं। इसे ॥ खरना॥ कहा जाता है। खरना का प्रसाद लेने के लिए सभी परिजनोंको निमंत्रित किया जाता हैा प्रसाद के रन्प खीर,घी लगा रोटी,चना दाल,चावल तथा चावल का पिट्ठा विशेष रन्प से बनाया जाता है| गन्ने का रस यदि उपलब्ध हो तो उसे प्रमुखता दी जाती है अन्यथा गुड का उपयेग होता है लेकिन प्रसाद में नमक या चीनी का उपयोग नही किया जाता है।खरना का विशेष प्रसाद सोहारी(घी लगा हुआ विशेष रोटी) और रसिया (गन्ना का रस अथवा गुड का खीर) होता है जिसे व्रती रात्रि में पूजा- अर्चना के वाद ही ग्रहण करता हैा इसी के बाद शुरू होता है व्रती का 36घंटे का कठोर निर्जला व्रत । विशिष्ट हालात में व्रती यदि मजबुरी हो तो रात्री में गौमुखी (गाय की तरह शरीर की अवस्था बनाकर) जल ग़हण किया जा सकता है।छ्ठ ब्रत के दौरान स्वच्छता और पावित्रता का विशेष रन्प से ध्यान ररवा जाता हैा


( ग ) संध्या अर्ध्य
तीसरे दिन अर्थात शुक्ल षष्ठी को दिन में छ्ठ प्रसाद बनाया जाता हैा प्रसाद के रन्प मैं ठेकुआ,जिसे टिकरी भी कहते हैं,के अलावा चावल के लडडू ( लड्डुआ) बनाते हैं। इसके अलावा चढ़ावा के स्प में लाया गया साँचा(चीनी का एक विशिष्ट साचा में बना मिठाई) ,गन्ना और फल भी छ्ठ प्रसाद के स्प में शामिल होता है। शाम को पुरी तैयारी और व्यवस्था कर बाँस की टोकरी में अर्ध्य का सूप सजाया जाता है ओर ब्रति के साथ परिवार और परिजन लोग अस्ताचलगामी सूर्य को अर्ध्य देने घाट की ओर चल पड़ते हैं। सभी छ्ठव्रती एक नीयत नदी/ तालाव / पोखर के किनारे एकत्र होकर सामहिक रन्पसे अर्ध्य दिया जाता है तथा छ्ठी मैया का प्रसाद भरे सूप से पूजा की जाती है । अर्ध्य के साथ ही हुमाद से हवन किया जाता है जिसमें व्रती के वाद घाट पर उपस्थित सभी लोग भाग लेते हैं। पूजन में सूर्य की पत्नी ॥ प्रत्यूषा ॥ और उनसे उत्पन्न सूर्यपुत्र ॥शनिदेव ॥की भी अर्चना की जाती हैाछ्ठी मैइया की प्रसाद भरे सूप लेकर ब्रती जल में स्नान कर खड़ी हो जाती है 1 तत्पश्चात परिजन द्वारा सूर्य को जलऔर दुघ का अर्ध्यदिया जाता हैा इस दौरान कुछ घण्टे के लिए वहाँ मेले का दृथ्य बन जाता है।


( घ ) उषा अर्थात प्रातः अर्ध्य
,चौथे दिन अर्थात शुक्ल पक्ष सप्तमी की शुबह उदियमान सूर्य को अर्ध्य दिया जाता हैा ब्रती अपने पुरे प्रियजनों के साथ उसी स्थान पर पुनः एकत्र होते हैं जहाँ उन्होंने शाम को अर्ध्य दिया था। पुनः पिछली संध्या की प्रक्रिया की पुनरावृति होती है तथा हुमाद से कण्डे ( गोबर का बना) से अग्नि प्रञ्जवलित कर ह्बन करते है । विशेष रन्प से सूर्यदेव की ब्याहता पत्नी उषा और उनसे उत्पन्न पुत्र यम तभा यमी की भी पुजा – अर्चना की जाती हैा अन्त में ब्रती कच्चे दुघ का शरबत पीकर तथा थोड़ा प्रसाद खाकर व्रत पूर्ण करते हैं । तत्पश्चात घाट पर उपस्थित सभी पारिजनों को प्रसाद वितरित किया जाता है।


( ङ) व्रत
छ्ठ त्यौहार मूलतः इतिहास के पन्नों में दर्ज ॥मगध॥ जनपद का महापर्व है लेकिन अब इसकी ०यापकता सम्पूर्ण भारत ही नही वल्कि विथ्वव्यापी हो गया है। छ्ठ न सिर्फ आस्था का महापर्व है बल्कि श्रद्धा की महापरीक्षा भी है।छ्ठ उत्सव के केन्द्र में एक कठिन तपस्या की तरह हैा व्रत रखने वाले स्त्री को परबैतिन भी कहा जाता हैा चार दिनों के इस व्रत में ब्रती को लगातार उपवास करना होता है।भोजन के साथ ही सुखद शैय्या का भी त्याग किया जाता हैापर्व के लिये आरक्षित विशेष कमरे में ही व्रती फर्स/ जमीन पर एक कबंल / चादर के सहारे ही रात बिताई जाती है। उत्सव में शामिल होने वाले लोग नए कपड़े पहनते हैं। पर व्रती ऐसे कपड़े पहनते हैं जिनमें किसी प्रकार की सिलाई नहीं की होती है lमहिलाएं साड़ी और पुरूष घोती पहनकर छ्ठ करते हैं।शुरू करने के बाद छ्ठ पर्व को सालो-साल तक करना होता है जबतक कि अगली पीढ़ी की किसी विवाहित स्त्री/ पुरूष को इसके लिए तैयार न कर लिया जाए । घर / परिवार में किसी की मृत्यू हो जाने पर यह पर्व नहीं मनाया जाता है।छ्ठ व्रत प्रमुख रन्प से पुत्र/ पुत्री की प्राप्ति हेतु,सन्तान की लम्बी उम्र के लिए,निरोगी शरीर और परिवार की सुख समृद्धि के लिए किया जाता है।


. व्रत करने वाले सभी ब्रती सुवह से ही स्नान कर गेहूं सुखाते हैं। इस वात का विशेष तौर से ध्यान रखा जाता है कि कोई पशु / पक्षी इन दानों को चुगने नहीं पाये/ आमावश्या के वाद पुरे छ: दिन लहसुन/ प्याज आदि का पुरे परिवार में सेवन पूर्णतः वर्जित होता है।पकवान / प्रसाद बनाते समय शुद्धता और पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है।तीसरे दिन सूर्यास्त के समय तथा चतुर्थ दिन प्रातः काल पति/ पुत्र में से कोई सिर पर बहगी( प्रसाद से भरा टोकरी) रखकर अपने परिवार व इस्टों के साथ पास के घाट पर जाते हैं। अर्ध्य में तीन चीजें का विशेष महत्व है,बांस से बना सूपा,टोकरी और प्रसाद । प्रसाद में सामान्यतः ठेकुआ,मौसमी फल,गन्ना, नारियल आदि रखे जाते हैं। व्रती पहले नदी / तालाव में स्नान करते हैं। फिर गीले ही कपडे पहने ही प्रसाद को सुपे में रखकर दोनों हाथ से पकड़कर जल में खड़े हो जाते हैं। दीपक भी जलता रहता है। सभी परिजन दोनो समय (संध्या / प्रातः) बारी -बारी सेअर्ध्य देते हैं। अर्ध्य देने के बाद गोबर कें कंडे से जलते हुए आग में सामान्यतः शुद्ध व पवित्र घी में मिला हुआ हुमाद से हवन किया जाता है। व्रती के वाद सभी हवन करते हैं। हवन सम्पन्न होने के वाद व्रती व्रत तोड़ता है।व्रती के प्रसाद ग़हण करने के बाद घाट पर उपस्थित सभी सदस्यों को प्रसाद वितरित किया जाता है।तदुपरान्त वचे प्रसाद की टोकरी को लेकर सभी अपने -अपने घर लौट जाते ह़ै तथा प्रसाद वितरित करते हैं। कार्तिक मास की तरह ही चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की षष्टी तिथी को छ्ठ पूजा का आयोजन इसी तरह घुमघाम से मनाया जाता हैा छ्ठ पर्व के दिनों में माहौल पूर्णतः घार्मिक होता है तथा महिलायें विशेष रूप से सूर्यदेव और छठी मईया की सामुहिकं गीत गाकर पुरे वातावरण को आध्यात्मिक बनाने में को३ि कसर शेष नहीं रखती है ।

अंतरराज्यीय गांजा तश्कर चढ़ा पुलिस के हत्थे, उत्तरप्रदेश मध्यप्रदेश बिहार राजस्थान के ग्राहक को करता था गांजा का सप्लाई, 3 वर्षों से इस गोरखधंधे में था संलिप्त

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जगदलपुर। गत दिवस चैनल इंडिया में ओडिशा के तस्करों पर कार्रवाई नहीं करने का समाचार प्रमुखता से छापा गया था और खासकर अंतरराज्यीय पुलिस कोआर्डिनेशन मीटिंग के संबंध में भी समाचार प्रकाशित हुई थी जिसके बाद बस्तर पुलिस हरकत में आया और ओडिशा के एक गांजा तस्कर को गिरफ्तार किया है जोकि मध्यप्रदेश ,उत्तर प्रदेश बिहार व राजस्थान जैसे राज्यों में गांजा सप्लाई करता था।


पुलिस सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार 12.08.2020 को आरोपीगण आकाश ठाकुर पिता विजय सिंह ठाकुर जाति गोंड उम्र 26 वर्ष निवासी पिपरिया नयाटोला बेनर्जी कालोनी थाना पिपरिया होशंगाबाद मध्यप्रदेश , राजेश कोरी पिता भागचंद कोरी जाति कोरी उम्र 35 वर्ष निवासी पिपरिया गांधी वार्ड थाना पिपरिया होशंगाबाद मध्य प्रदेश,तेजराम पटेल पिता पुरूषोत्तम पटेल जाति कुरमी उम्र 36 वर्ष निवासी पिपरिया हाउस नं . 321 इंदिरा गाधी वार्ड 02 तहसील आफिस के पास होशंगाबाद मध्यप्रदेश , अशोक अहिरवार पिता शंकर लाल अहिरवार जाति चमार उम्र 34 वर्ष निवासी शोभापुर माता मोहल्ला थाना सोहागपुर जिला होशंगाबाद मध्यप्रदेश द्वारा इनोवा क्र . एमपी 05 सीबी 2369 में अवैध रूप से मादक पदार्थ गांजा परिवहन करते पाये जाने पर कब्जे से जुमला मात्रा 88.200 किग्रा . अवैध मादक पदार्थ जप्त किया गया था व उपरोक्त आरोपियों के खिलाफ अपराध कमांक 85/20 धारा 20 ( ख ) एनडीपीएस एक्ट कायम कर आरोपीगणों को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया है । आरोपियो से पुछताछ करने पर उड़ीसा के गांजा सप्लायर सुकदेव नायक निवासी कोरापुट उड़ीसा से गांजा खरीद कर लाना बताया गया था ।


अंतरराज्यीय समन्वय पुलिस समिति की बैठक के बाद बस्तर पुलिस द्वारा धड़ाधड़ गांजे के तश्करों को गिरफ्तार कर रही थी किन्तु उड़ीसा से सहयोग नहीं मिल रहा था। गत दिवस चैनल इंडिया में खबर प्रकाशित होने के बाद बस्तर पुलिस अधीक्षक दीपक झा ने पुलिस के अधिकारियों को अंतर्राज्यीय समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया गया था जिसके बाद भानपुरी थाने से एक टीम ओड़िशा के कोरापुट भेजा गया था । इस टीम ने आरोपी सुखदेब नायक पिता खगपति नायक निवासी मांझीगुड़ा व्यापारीगुड़ा जिला कोरापुट उड़ीसा की लगातार पता तलाश कर सायबर सेल जगदलपुर के सहयोग से घेराबंदी कर अभिरक्षा में लेकर पुछताछ किया गया । गांजा तस्कर सुखदेव नायक ने यह बात कबूली की वह गांजे तस्करी के गोरखधंधे में वर्षों से शामिल है । सुखदेव द्वारा पिछले तीन वर्षों से गांजा का सप्लाई किया जा रहा है । मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, राजस्थान ,बिहार के तश्करों को अब तक 100 क्विंटल से ज्यादा के गांजा का सप्लाई कर चुका है।आन्ध्रप्रदेश, उड़ीसा राज्य के सीमा के जंगलों से गांजा लाकर कमीशन के आधार पर गांजा ग्राहको को विकय करता था । आरोपी पुर्व में अपने क्षेत्र का सरपंच रहा चुका है जिससे क्षेत्र में अच्छा पकड़ रखता है।* आरोपी सुकादेब नायक के अपराध स्वीकर करने एवं उक्त प्रकरण में संलिप्तता होने व पर्याप्त साक्ष्य सबुत पाये जाने से दिनांक 13.11.20 को गिरफ्तार किया जाकर न्यायिक रिमांड पर माननीय न्यायालय जगदलपुर पेश किया गया है।

48वाँ वर्ष में बंगाली कालीबाड़ी में माँ काली की पूजा अर्चना की गई

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दल्लीराजहरा – 14/11/2020 को बंगाली कालीबाड़ी में माँ काली की पूजा अर्चना की गई । यह 48वाँ वर्ष में मननीय मुख्यातिथि तपन सूत्रधर जी,मैडम सूत्रधर, नगर पालिका अध्यक्ष शिबू नायर जी, मैडम संगीता नायर जी, कृष्णा सिंग जी, प्रशांत बोकडे जी, मंडल सर् जी, मैडम पुरोबी वर्मा जी द्वारा 108 दिप प्रज्वलित की गई, एवम काली बाड़ी की बॉण्डरी वाल की शिबू नायर जी घोषणा की गई |

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Breaking दल्लीराजहरा के एक वृद्ध ने बीमारी से तंग आकर मौत को गले लगाया

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दल्लीराजहरा के वार्ड क्र 26 कमल मोटर्स के सामने निवास करने वाले एक वृद्ध रामशंकर दुबे पिता चन्द्रिका प्रसाद दुबे उम्र 79 ने बीमारी से तंग आकर आत्महत्या कर लिया | अपने ही घर के हाल के पंखे में रस्सी का फंदा डाल कर आत्महत्या कर ली और आत्महत्या करने से

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पहले एक सुसाइड नोट छोड़ा जिसमे बताया गया है कि मृतक लगभग 9-10 साल अस्थमा बीमारी से पीड़ित होने के कारण उसने यह कदम उठाया | पुलिस मौके पर पहुंचकर शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है |

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Breaking दल्ली-डौण्डीलोहारा मार्ग पर जाटादाह के पास संतरा से भरा मेटाडोर दुर्घटनाग्रस्त, ड्राइवर कंडक्टर हुए घायल

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डौण्डीलोहारा – दल्ली-डौण्डीलोहारा जाटादाह के पास आज सुबह संतरा से भरा मेटाडोर पलट जाने से उसमे सवार ड्राईवर और कंडक्टर घायल हो गए है जिन्हें उपचार हेतु 108 से डौंडी लोहारा के चिकित्सालय ले जाया गया है | प्राप्त जानकारी के अनुसार यह हादसा तेज गति के कारण बताई जा रही है | घटनास्थल पर मेटाडोर पलटने के बाद

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उसमे रखा संतरा बिखरने से आसपास के ग्रामीण उस पर टूट पड़े | घटना की जानकारी मिलने के पश्चात् पुलिस मौके पर पहुँच चुकी थी और हुए हादसे के बारे में जांच पड़ताल की जा रही है | घायलों के बारे में अभी जानकारी नहीं मिली है |

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गोवर्धन पूजा क्या है ?? श्री पाटेश्वर धाम के संत राम बालक दास जी द्वारा ऑनलाइन सत्संग

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15 नवम्बर गोवर्धन पर्व


प्रतिदिन की भांति श्री पाटेश्वर धाम के संत राम बालक दास जी के द्वारा सीता रसोई वाट्सएप ग्रुप में आज सुबह 10 बजे से 11 बजे एवम दोपहर 1 बजे से 2 बजे तक ऑनलाइन सत्संग का आयोजन किया गया जिसमें अपने ओजस्वी वाणी से गोवर्धन पूजा के बारे में संत श्री ने कहा भारतीय पर्वों की एक प्रधानता रही है कि उसमें प्रकृति का समावेश अवश्य रहता है।

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प्रकृति के वातावरण को स्वयं में समेटे सनातन धर्म के त्यौहार अपना अमिट प्रभाव डालते हैं। फसल के घर आने की खुशी में जहाँ दीपावली मनाई जाती है ! वहीं दूसरे दिन मनाया जाता है “अन्नकूट”। जैसा कि नाम से ही परिभाषित हो रहा है कि नवान्न घर पहुंचने के बाद ही उसे कूटकर तैयार किया जा सकता है।
अन्नकूट के दिन नए – नए व्यंजनों को बनाकर नए अन्न का भोजन करने की परम्परा रही है। द्वापर से इसी दिन प्रारम्भ हुई गोवर्धन – पूजा।

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गोवर्धन पूजा क्या है ?? जब गोकुलवासी इन्द्र की पूजा करने की तैयारी करते हैं उसी समय बालकृष्ण ने गोवर्धनपूजा का प्रस्ताव रखा। गोवर्धन पूजा अर्थात “प्रकृति पूजा”।
परमात्मा ने जब जब इस धरती पर अवतार लिया है तब तब प्रकृति से अपना प्रेम दर्शाया है। प्रकृति के संरक्षण के बिना इस सृष्टि एवं जीवमात्र का संरक्षण सम्भव नहीं है। इसीलिए परमात्मा ने अवतारों के माध्यम से गंगा – यमुना के रूप में नदियों की पूजा, तो गोवर्धन के रूप में पहाड़ों की। परमात्मा ने सदैव ही प्रकृति के संरक्षण को महत्व दिया है। गोवर्धन पूजा के दिन छप्पन प्रकार के भोग भगवान को अर्पण किए जाते हैं। और भगवान उसे प्रेम से स्वीकार
करते हैं। ईश्वर आपके छप्पन भोग नहीं बल्कि आपकी भावना व श्रद्घा देखते हैं। गोवर्धन पूजा का यही कारण था कि हम अपने प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण स्वयं करें।

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आज के परिवेश में जहाँ मनुष्य एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ मे तत्परता से प्राकृतिक संसाधनों का विनाश कर रहा है, वहीं वह प्रतिपल मौत के मुहाने पर खड़ा भी है। जिस प्रकार पृथ्वी का दोहन, पहाड़ों को तोड़ना मानव ने जारी रखा है उसी प्रकार प्राकृतिक आपदायें मानव को काल के गाल में पहुँचा रही हैं। हम भूल गए कि हमारे पहाड़ स्वयं श्रीकृष्ण के स्वरूप “गोवर्धन” हैं।

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हम भूल गये कि नदियां हमारी मां हैं। पृथ्वी को माता कहकर पुकारने वाला मानव आज उसी की छाती छलनी करने पर तुला है, जिसके परिणाम स्वरूप आये दिन भूकम्प, स्खलन,पहाड़ों का टूटना जारी है, जो कि सम्पूर्ण मानव जाति के लिए शुभ संकेत नहीं है। मैं आज बड़े दु:ख के साथ कह रहा हूँ कि जिस प्रकार लोग अपने कृषि योग्य भूमि का शहरीकरण करते जा रहे हैं वह दिन दूर नहीं जब देश बिना अन्न के भुखमरी के मुहाने पर खड़ा होगा। समुद्र – मंथन

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करके देवताओं ने १४ रत्न प्राप्त किए थे। पर आज मानव समुद्र का अंधाधुंध दोहन करके आये दिन सुनामी जैसे रत्न ले रहा है और मानव जाति को मौत में ढकेल रहा है। हमें आज फिर
से आवश्यकता है अपने साहित्यों को पढकर उसके मर्म को समझने की। यदि ऐसा नहीं किया गया तो आने वाला दिन और भी भयावह ही होगा। गोवर्धन पूजा के माध्यम से आईए हम प्रतिज्ञा करें कि हम स्वयं इनके प्रति जारूक रहकर समाज को भी जागरूक करने का प्रयास

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करेंगे ! तभी अन्नकूट या गोवर्धन पूजा मनाना सार्थक होगा।
आप सब भी 9425510729 वाट्सएप नम्बर पर मैसेज करके
इस सत्संग से रोज जुड़ सकते है

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जय सियाराम
जय गौमाता जय गोपाल

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महिला जज ने खुद लिखा अपनी मौत का फरमान, की आत्महत्या

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मुंगेली – गोवर्धन पूजा के दिन अर्थात दीपावली के दूसरे दिन मुंगेली की जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने खुद लिखा अपनी मौत का फरमान और अपने ही घर के पंखे में फांसी पर लटककर अपनी जान दे दी । प्राप्त जानकारी के अनुसार महिला जज यहां अपने सरकारी आवास में अकेले रहती थी मार्टिन के पति की मौत करीब साल-डेढ़ साल पूर्व हो गई थी। उनका बेटा रायपुर के एक निजी कंपनी में कार्यरत है।

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सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मुंगेली की जिला एवं सत्र न्यायाधीश  55 वर्षीय महिला कांता मार्टिन का शव उनके बैडरूम पर झूलता हुआ मिला। इस प्रकार का हादसा यह दूसरा हादसा है इसी बंगले में 10 साल पहले भी एक महिला जज ने आत्महत्या करके अपनी ही जान ले ली थी।

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मुंगेली पुलिस के अनुसार रविवार की सुबह जब देर तक बंगले के दरवाजे नहीं खुला तब CJM के द्वारा पुलिस को खबर दी गई। पुलिस ने संदेहजनक परिस्थितियों के मद्देनजर बंगले में दस्तक दी । बाद में मुंगेली एसपी भी आ गए। उन्होंने खिड़की से जब महिला जज का बेडरूम

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देखा तो उनकी आंखें फटी रह गई। उन्होंने अपनी ही साड़ी को अपने लिए फांसी का फंदा बनाया था । पुलिस को सूचना मिलते ही तत्काल मौके पर पहुँच मामले की जांच की जा रही है।

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बस्तर में वन व खनिज आधारित उद्योगों के लिए जमीन आवंटित करेगी सरकार, नगरनार स्टील विनिवेशीकरण के विरोध में बचेका सामने आए, बोघधाट में सिंचाई परियोजनाओं के लिए बस्तरवासियों को लिया जायेगा विश्वास में

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जगदलपुर। नगरीय निकाय व श्रम विभाग के संसदीय सचिव व रेखचंद जैन ने कहा कि नवा छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को साकार करने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा बस्तर में उघोगों को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रही है जिसके लिए जमीन आवंटित किया जायेगा। वन व खनिज आधारित उद्योगों की स्थापना से भी बस्तरवासियों के उत्थान के लिए मिल का पत्थर होगा। बचेका द्वारा इसका लाभ ले। संसदीय सचिव रेखचंद जैन ने इस दौरान नगरनार स्टील प्लांट डी-मर्जर मामले में बचेका को खुलकर सामने आने की अपील की। बोघधाट परियोजना को लेकर सरकार की स्थिति को भी संसदीय सचिव रेखचंद जैन ने स्पष्ट किया।

बस्तरहित के लिए सभी को एकजुट होने की जरूरत
शहर जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष राजीव शर्मा ने कहा कि बस्तरहित में सभी को एकजुट होकर बस्तर विकास के लिए एक मंच पर आने की जरूरत है। नगरनार स्टील प्लांट डी-मर्जर व बोघधाट परियोजना को लेकर बस्तरहित के लिए कार्य करने की जरूरत है। महापौर श्रीमती सफीरा साहू ने शहर विकास के लिए जनता व बचेका से सहयोग व सुझाव मांगा है। इस दौरान सांसद दीपक बैज ने चेम्बर की मांग रेलवे संचालन पर अपनी बातों को रखते हैं जिसके लिए केंद्रीय स्तर पर भी पहल करने की बात कहीं। पूर्व विधायक संतोष बाफना, पूर्व अध्यक्ष संतोष जैन, भंवर बोथरा ने भी अपनी बातों को रखा। स्वागत भाषण बस्तर चेंबर ऑफ कॉमर्स अध्यक्ष किशोर पारख व मंच संचालन तथा आभार व्यक्त महामंत्री राजकुमार दंडवाणी ने किया।

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