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Breaking भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल कोरोना पॉजिटिव

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में अब मंत्रियों की भी कतार लग चुकी है आये दिन किसी न किसी मंत्री या उनके सहायक कोरोना का शिकार हो रहे है आज भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. संक्रमित पाए जाने के बाद उन्हें रायपुर एम्स में भर्ती कराया गया है. परिवार के अन्य सदस्यों का भी कोरोना टेस्ट कराया गया किन्तु उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई है.

प्राप्त जानकारी के अनुसार गौरीशंकर अग्रवाल को पिछले दो-तीन दिन से बुखार व सांस लेने में परेशानी हो रही थी जिसके बाद उनका कोरोना टेस्ट कराया गया जिसमे रिपोर्ट में कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं | कुछ दिनों से वे घर में ही थे |

Big Breaking युवा कांग्रेस के विधान सभा अध्यक्ष पर जानलेवा हमला

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दल्लीराजहरा – युवा कांग्रेस के विधान सभा अध्यक्ष हरीश साहू घर के पास कॉलेज रोड धारदार हथियार से हमला हुआ, तत्काल नगर के शहीद अस्पताल ले जाया गया है अज्ञात हमलावर अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए हमले का कारण पता नहीं चल पाया है | प्राप्त जानकारी के अनुसार खाना खाने के पश्चात् टहलने के लिए निकले हुए थे तभी अचानक उन पर हमला हुआ | पुलिस शहीद अस्पताल पहुंच जांच पड़ताल की जा रही है | हमलावर बिना नंबर प्लेट की स्प्लेंडर मोटरसाइकिल दो लोग थे एवं मास्क पहने हुए थे

हरीश साहू

सीए, डॉक्टर वकील भी एमएसएमई क्रेडिट स्कीम के तहत गारंटी मुक्त लोन ले सकते हैं।

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नई दिल्ली – वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कहा कि अब इस स्कीम के तहत कारोबारी मकसद से व्यक्तिगत लोन भी लिया जा सकता है। हालांकि, लोन लेने के लिए स्कीम के तहत सभी पात्रताएं पूरी करनी होंगी। वित्तीय सेवाओं के सचिव देबाशीष पांडा ने कहा कि हमने इस योजना में अब डॉक्टर, चार्टर्ड अकाउंटेंट और वकील जैसे प्रोफेशनल्स को भी शामिल किया है। इन प्रोफेशनल्स को लोन देने के लिए भी वही प्रक्रिया अपनाई जाएगी, जो कारोबारियों के लिए अपनाई जाती है।

कोरोना आपदा से निपटने के लिए शुरू की गई 3 लाख करोड़ रुपए की एमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम का सरकार ने दायरा बढ़ा दिया है। अब इस स्कीम के तहत एमएसएमई के अलावा डॉक्टर, वकील और चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) भी अपने कारोबार को बढ़ावा देने के लिए गारंटी मुक्त लोन ले सकते हैं। साथ ही सरकार ने इस स्कीम में लोन आउटस्टैंडिंग की सीमा को बढ़ाकर दोगुना कर दिया है। 

लोन आउटस्टैंडिंग की सीमा दोगुनी की
 वित्तीय सेवाओं के सचिव देबाशीष पांडा ने बताया कि इस स्कीम का ज्यादा से ज्यादा कंपनियों को फायदा देने के मकसद से सरकार ने लोन आउटस्टैंडिंग की सीमा को बढ़ाकर दोगुना कर दिया है। अब जिन एमएसएमई पर 29 फरवरी को 50 करोड़ का लोन आउटस्टैंडिंग था, वह भी इस स्कीम के तहत लोन के लिए आवेदन कर सकते हैं। इस स्कीम के तहत गारंटेड एमरजेंसी क्रेडिट लाइन (जीईसीएल) फंड को 5 करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपए कर दिया है। इसके अलावा अब 250 करोड़ रुपए के टर्नओवर वाली कंपनियों को भी स्कीम का लाभ मिलेगा। अभी तक यह सीमा 100 करोड़ रुपए थी।
स्कीम के तहत अब तक 1.37 लाख के लोन को मंजूरी
वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 29 जुलाई तक बैंकों और नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनीज (एनबीएफसी) ने 1.37 लाख करोड़ रुपए के लोन को मंजूरी दे दी है। इसमें से 87,227 करोड़ रुपए का वितरण कर दिया गया है। देबाशीष पांडा ने बताया कि इस स्कीम के तहत छोटी कंपनियों को पर्याप्त रूप से कवर किया गया है। अब बड़ी कंपनियों को शामिल करने की तैयारी है। पांडा ने बताया कि 31 अक्टूबर तक इस स्कीम के तहत लोन लिया जा सकता है। वित्त मंत्री ने बताया कि योजना के विस्तार के लिए इसमें 1 लाख करोड़ रुपए का अतिरिक्त आवंटन किया गया है। इस स्कीम में 9.25 फीसदी की दर पर लोन मिलता है।

Big Breaking : डौडीलोहारा के संबलपुर के पास ट्रक ने बाइक को ठोका । बच्चे सहित दो की मौत

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डौडीलोहारा – ग्राम सोरली के पास ट्रक और बाइक में जोरदार टक्कर से बाइक में सवार युवक और बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई | मृतक युवक और बच्चा दोनों शिरपुर डौडीलोहारा के रहने वाले हैं । ग्राम सोरली के पास ट्रक और बाइक में जोरदार टक्कर राजनांदगांव – लोहारा मार्ग से लगा है | बताया जा रहा कि सिर पर जोरदार चोट लगने से दोनों की मौके पर ही मौत हो गई | घटना स्थल पर 108 रवाना हो गई है और घटनास्थल पर डौण्डीलोहारा पुलिस भी मौके पर मौजूद है शव का पंचनामा और आगे की करवाई की जा रही है |

Breaking स्कूल शिक्षा में अब 5+3+3+4 की नई व्यवस्था लागू, शिक्षा नीति लागू होते ही बदल जायेगा स्कूल से कॉलेज तक की पढ़ाई का तरीका, क्या नया होने वाला है, जाने

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रायपुर – भारत की नई शिक्षा नीति 34 साल बाद आई है. मोदी सरकार ने नई शिक्षा नीति को मंजूरी मिलने से  जहाँ युवा वर्ग में काफी हर्षौल्लास का माहौल है |

“ नई शिक्षा नीति से सुधरेगा युवाओं का भविष्य बेरोजगारी  को  खत्म करने में  सहायक होगी  स्कूल शिक्षा  उच्च शिक्षा  के साथ कृषि एवं  कानून चिकित्सा  व तकनीकी  शिक्षा के नए प्रयोग से संवरेगा भारत का भविष्य ”राकेश द्विवेदी, मंडल महामंत्री भारतीय जनता पार्टी

इस नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को एक अच्छी शुरुआत मानते हैं. और अब बिल्कुल निचले स्तर पर छात्रों को बुनियादी शिक्षा दी जा सकेगी ताकि वह बेहतर भविष्य के लिए तैयार हो सकें इतने वर्षों बाद अंग्रेजी शिक्षा नीति से मुक्ति और साथ ही अब तक लोग वोकेशनल एजुकेशन पर ज्यादा तवज्जो नहीं देते थे जिसकी वजह से हम सिर्फ ग्रेजुएट पैदा कर रहे थे लेकिन अब स्कूली शिक्षा में भी वोकेशनल एजुकेशन को शामिल करने से बेहतर छात्र निकल कर सामने आएंगे. |  बुधवार को कैबिनेट की बैठक में इसपर फैसला लिया गया. पूरे उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिए एक ही रेगुलेटरी बॉडी होगी ताकि शिक्षा क्षेत्र में अव्यवस्था को खत्म किया जा सके. नई शिक्षा नीति में 10+2 के फार्मेट को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है | अब इसे 10+2 से बांटकर 5+3+3+4 फार्मेट में ढाला गया है. इसका मतलब है कि अब स्कूल के पहले पांच साल में प्री-प्राइमरी स्कूल के तीन साल और कक्षा 1 और कक्षा 2 सहित फाउंडेशन स्टेज शामिल होंगे. फिर अगले तीन साल को कक्षा 3 से 5 की तैयारी के चरण में विभाजित किया जाएगा.

मल्टिपल एंट्री और एग्ज़िट सिस्टम में पहले साल के बाद सर्टिफिकेट, दूसरे साल के बाद डिप्लोमा और तीन-चार साल बाद डिग्री दी जाएगी। 4साल का डिग्री प्रोग्राम फिर M.A. और उसके बाद बिना M.Phil के सीधा PhD कर सकते हैं। नए सुधारों में टेक्नोलॉजी और ऑनलाइन एजुकेशन पर जोर दिया गया है। अभी हमारे यहां डीम्ड यूनविर्सिटी, सेंट्रल यूनिवर्सिटीज और स्टैंडअलोन इंस्टिट्यूशंस के लिए अलग-अलग नियम हैं। नई एजुकेशन पॉलिसी के तहते सभी के लिए नियम समान होगा।

नई शिक्षा नीति को कैबिनेट की हरी झंडी मिलने के साथ 34 साल बाद शिक्षा नीति में बदलाव किया गया है. नई शिक्षा नीति के तहत अब 5वीं तक के छात्रों को मातृ भाषा, स्थानीय भाषा और राष्ट्र भाषा में ही पढ़ाया जाएगा.

नई शिक्षा नीति को नीचे दिए गए बिन्दुओं के आधार पर इसे और विस्तृत में समझते है –

1.    नई शिक्षा नीति में शिक्षा का अधिकार (Right to Eductaion) कानून के दायरे को व्यापक बनाया गया है। अब 3 साल से 18 वर्ष के बच्चों को शिक्षा का अधिकार कानून, 2009 के अंदर लाया जाएगा।

2.    अब कला, संगीत, शिल्प, खेल, योग, सामुदायिक सेवा जैसे सभी विषयों को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। इन्हें सहायक पाठ्यक्रम (co-curricular) या अतिरिक्त पाठ्यक्रम ( extra- curricular) नहीं कहा जाएगा।

3.    सिंगल रेगुलेटर- मानव संसाधन विकास मंत्रालय यूजीसी और एआईसीटीई को एक साथ मिलाने की तैयारी कर रहा है. इससे एक रेगुलेटरी बॉडी बनाई जाएगी और मौजूदा रेगुलेटरी बॉडी को नए रोल में लगाया जाएगा. पूरे उच्च शिक्षा के लिए नेशनल हायर एजुकेशन रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन किया जाएगा.

4.    नई शिक्षा नीति बच्चों में जीवन जीने के जरूरी कौशल (life skills) और जरूरी क्षमताओं को विकसित किए जाने पर जोर देती है।

5.    नई शिक्षा नीति के तहत उच्च शैक्षणिक संस्थानों (High Education Institutions) में विश्वस्तरीय अनुसंधान और उच्च गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई (High Quality Teaching) पर जोर दिया गया है। अब हाइयर एजुकेशन में वर्ल्ड क्लास रिसर्च पर फोकस किया जाएगा।

6.    अंडर ग्रेजुएट प्रोग्राम का ढांचा भी बदला जाएगा। अब कोर्स के दौरान कई कक्षा से निकलने या प्रवेश करने के कई विकल्प दिए जाएंगे।

7.    पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान पद्धतियों को शामिल करने, ‘राष्ट्रीय शिक्षा आयोग’ का गठन करने और प्राइवेट स्कूलों को मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने से रोकने की सिफारिश की गई है।

8.    आयोग ने शिक्षकों के प्रशिक्षण में व्यापक सुधार के लिए शिक्षक प्रशिक्षण और सभी शिक्षा कार्यक्रमों को विश्वविद्यालयों या कॉलेजों के स्तर पर शामिल करने की सिफारिश की है।

9.    राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2019 को भारतीय लोगों, उनकी परम्पराओं,संस्कृतियों और भाषाओँ की विविधता को ध्यान में रखते हुए तेज़ी से बदलते समाज की ज़रूरतों के आधार पर तैयार किया गया है।

10.   शिक्षा प्रणाली में बदलाव करते हुए उच्च गुणवत्ता और व्यापक शिक्षा तक सबकी पहुँच सुनिश्चित की गई है। इसके ज़रिए भारत का निरंतर विकास सुनिश्चित होगा साथ ही वैश्विक मंचों पर – आर्थिक विकास, सामाजिक विकास, समानता और पर्यावरण की देख – रेख, वैज्ञानिक उन्नति और सांस्कृतिक संरक्षण के नेतृत्व का समर्थन करेगा।

11.   इस नीति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा के साथ कृषि शिक्षा, कानूनी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा और तकनीकी शिक्षा जैसी व्यावसायिक शिक्षाओं को इसके दायरे में लाया गया है।

स्कूल शिक्षा में अब 5+3+3+4 की नई व्यवस्था लागू, शिक्षा नीति लागू होते ही बदल जायेगा स्कूल से कॉलेज तक की पढ़ाई का तरीका, क्या नया होने वाला है, जाने

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रायपुर – भारत की नई शिक्षा नीति 34 साल बाद आई है. मोदी सरकार ने नई शिक्षा नीति को मंजूरी मिलने से  जहाँ युवा वर्ग में काफी हर्षौल्लास का माहौल है |

“ नई शिक्षा नीति से सुधरेगा युवाओं का भविष्य बेरोजगारी  को  खत्म करने में  सहायक होगी  स्कूल शिक्षा  उच्च शिक्षा  के साथ कृषि एवं  कानून चिकित्सा  व तकनीकी  शिक्षा के नए प्रयोग से संवरेगा भारत का भविष्य ”राकेश द्विवेदी, मंडल महामंत्री भारतीय जनता पार्टी

इस नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को एक अच्छी शुरुआत मानते हैं. और अब बिल्कुल निचले स्तर पर छात्रों को बुनियादी शिक्षा दी जा सकेगी ताकि वह बेहतर भविष्य के लिए तैयार हो सकें इतने वर्षों बाद अंग्रेजी शिक्षा नीति से मुक्ति और साथ ही अब तक लोग वोकेशनल एजुकेशन पर ज्यादा तवज्जो नहीं देते थे जिसकी वजह से हम सिर्फ ग्रेजुएट पैदा कर रहे थे लेकिन अब स्कूली शिक्षा में भी वोकेशनल एजुकेशन को शामिल करने से बेहतर छात्र निकल कर सामने आएंगे. |  बुधवार को कैबिनेट की बैठक में इसपर फैसला लिया गया. पूरे उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिए एक ही रेगुलेटरी बॉडी होगी ताकि शिक्षा क्षेत्र में अव्यवस्था को खत्म किया जा सके. नई शिक्षा नीति में 10+2 के फार्मेट को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है | अब इसे 10+2 से बांटकर 5+3+3+4 फार्मेट में ढाला गया है. इसका मतलब है कि अब स्कूल के पहले पांच साल में प्री-प्राइमरी स्कूल के तीन साल और कक्षा 1 और कक्षा 2 सहित फाउंडेशन स्टेज शामिल होंगे. फिर अगले तीन साल को कक्षा 3 से 5 की तैयारी के चरण में विभाजित किया जाएगा.

मल्टिपल एंट्री और एग्ज़िट सिस्टम में पहले साल के बाद सर्टिफिकेट, दूसरे साल के बाद डिप्लोमा और तीन-चार साल बाद डिग्री दी जाएगी। 4साल का डिग्री प्रोग्राम फिर M.A. और उसके बाद बिना M.Phil के सीधा PhD कर सकते हैं। नए सुधारों में टेक्नोलॉजी और ऑनलाइन एजुकेशन पर जोर दिया गया है। अभी हमारे यहां डीम्ड यूनविर्सिटी, सेंट्रल यूनिवर्सिटीज और स्टैंडअलोन इंस्टिट्यूशंस के लिए अलग-अलग नियम हैं। नई एजुकेशन पॉलिसी के तहते सभी के लिए नियम समान होगा।

नई शिक्षा नीति को कैबिनेट की हरी झंडी मिलने के साथ 34 साल बाद शिक्षा नीति में बदलाव किया गया है. नई शिक्षा नीति के तहत अब 5वीं तक के छात्रों को मातृ भाषा, स्थानीय भाषा और राष्ट्र भाषा में ही पढ़ाया जाएगा.

नई शिक्षा नीति को नीचे दिए गए बिन्दुओं के आधार पर इसे और विस्तृत में समझते है –

1.    नई शिक्षा नीति में शिक्षा का अधिकार (Right to Eductaion) कानून के दायरे को व्यापक बनाया गया है। अब 3 साल से 18 वर्ष के बच्चों को शिक्षा का अधिकार कानून, 2009 के अंदर लाया जाएगा।

2.    अब कला, संगीत, शिल्प, खेल, योग, सामुदायिक सेवा जैसे सभी विषयों को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। इन्हें सहायक पाठ्यक्रम (co-curricular) या अतिरिक्त पाठ्यक्रम ( extra- curricular) नहीं कहा जाएगा।

3.    सिंगल रेगुलेटर- मानव संसाधन विकास मंत्रालय यूजीसी और एआईसीटीई को एक साथ मिलाने की तैयारी कर रहा है. इससे एक रेगुलेटरी बॉडी बनाई जाएगी और मौजूदा रेगुलेटरी बॉडी को नए रोल में लगाया जाएगा. पूरे उच्च शिक्षा के लिए नेशनल हायर एजुकेशन रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन किया जाएगा.

4.    नई शिक्षा नीति बच्चों में जीवन जीने के जरूरी कौशल (life skills) और जरूरी क्षमताओं को विकसित किए जाने पर जोर देती है।

5.    नई शिक्षा नीति के तहत उच्च शैक्षणिक संस्थानों (High Education Institutions) में विश्वस्तरीय अनुसंधान और उच्च गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई (High Quality Teaching) पर जोर दिया गया है। अब हाइयर एजुकेशन में वर्ल्ड क्लास रिसर्च पर फोकस किया जाएगा।

6.    अंडर ग्रेजुएट प्रोग्राम का ढांचा भी बदला जाएगा। अब कोर्स के दौरान कई कक्षा से निकलने या प्रवेश करने के कई विकल्प दिए जाएंगे।

7.    पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान पद्धतियों को शामिल करने, ‘राष्ट्रीय शिक्षा आयोग’ का गठन करने और प्राइवेट स्कूलों को मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने से रोकने की सिफारिश की गई है।

8.    आयोग ने शिक्षकों के प्रशिक्षण में व्यापक सुधार के लिए शिक्षक प्रशिक्षण और सभी शिक्षा कार्यक्रमों को विश्वविद्यालयों या कॉलेजों के स्तर पर शामिल करने की सिफारिश की है।

9.    राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2019 को भारतीय लोगों, उनकी परम्पराओं,संस्कृतियों और भाषाओँ की विविधता को ध्यान में रखते हुए तेज़ी से बदलते समाज की ज़रूरतों के आधार पर तैयार किया गया है।

10.   शिक्षा प्रणाली में बदलाव करते हुए उच्च गुणवत्ता और व्यापक शिक्षा तक सबकी पहुँच सुनिश्चित की गई है। इसके ज़रिए भारत का निरंतर विकास सुनिश्चित होगा साथ ही वैश्विक मंचों पर – आर्थिक विकास, सामाजिक विकास, समानता और पर्यावरण की देख – रेख, वैज्ञानिक उन्नति और सांस्कृतिक संरक्षण के नेतृत्व का समर्थन करेगा।

11.   इस नीति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा के साथ कृषि शिक्षा, कानूनी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा और तकनीकी शिक्षा जैसी व्यावसायिक शिक्षाओं को इसके दायरे में लाया गया है।

Big Breaking छत्तीसगढ़ में सट्टा जुआ के चलते नौजवान आत्महत्या करने पर हो रहे मजबूर

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बालोद। प्रदेश के युवा आये दिन आत्महत्या करने के लिए मजबुर हो रहे हैं। चाहे वह मुख्यमंत्री निवास रायपुर में हो या फिर पुलिसिया कार्यवाही के चलते डौंडीलोहारा मंदिर में धनगांव के आदिवासी युवक की आत्महत्या की मामला या फिर जिला के गुरूर नगर के सुनील कुमार गंगबेर की आत्महत्या।

प्रदेश सरकार की बिगड़ती कानून व्यवस्था पर कई सवाल खड़ा करता है। यदि इन सवालों के जवाब समय पर नहीं तलाशा गया तो आने वाले समय में भूपेश बघेल की सरकार प्रदेश के जनता के नजर में गिर सकती है। भूपेश बघेल; पिछले रमन सिंह सरकार के कार्यकाल दौरान आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों से मिलकर तत्कालिक सरकार पर काफी मजबूती से सवाल दागते रहे हैं और इन्हीं जनहित के कार्यों को देखते हुए प्रदेश के जनता ने उन्हें भारी बहुमत के साथ सत्ता पर बिठाया है। प्रदेश के जनता की मुख्यमंत्री से ढेरो अपेक्षा के साथ आशाऐ बंधी हुई है और भूपेश बघेल की सरकार जनता के हित के कामों में जमकर जुटी हुई है; लेकिन सरकार के नाकों तले प्रदेश में इन दिनों कोरोना काल के दौरान जुआ और सट्टा में जमकर पैसा की दांव लगाया जा रहा है सूत्रों की मानें तो प्रदेश ने पुलिस विभाग को सख्ती से कार्रवाई करने का निर्देश दिया है, जिसके बाद से प्रदेश के कई हिस्सों से जुआरियों और सटोरियों को दबोचे जा रहे हैं जिसे देखकर ही प्रदेश की कानून व्यवस्था की अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

बालोद जिला के गुरूर थाना क्षेत्र जो सटोरियों और जुआरीयो के लिए स्वर्ग बना हुआ है; जहाँ पर बीते दिनों सुनील कुमार गंगेबर ने सट्टा के पैसा को लेकर किसी व्यक्ति के बार-बार फोन द्वारा पैसों की मांग से तंग आकर आत्महत्या कर अपनी मौत के पीछे कई सवाल छोड़ गया है, जिन सवालों का जवाब सत्ताधारी पार्टी के नेताओं ने खुद अपनी ही पार्टी के सरकार से पूछना शुरू कर दिया है। सुनील कुमार गंगबेर; जोगी जनता कांग्रेस के नेता रहे वर्तमान प्रदेश साहू समाज अध्यक्ष, अर्जुन हिरवानी के पड़ौसी थे और अर्जुन हिरवानी ने बालोद पुलिस अधीक्षक से मामले में गहराई से जांच कर दोषियों के विरूद्ध कड़ी कार्यवाही की बात कही है। वहीं प्रदेश के गृहमंत्री ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक को जांचकर कार्यवाही करने का निर्देश दिया है।

गुरूर पुलिस सुनील कुमार गंगबेर की काल डिटेल निकालकर उसके माध्यम से फोन करने वाले व्यक्ति की पहचान करने में जुटी हुई हैं। वहीं घटना को लेकर जोगी जनता कांग्रेस पार्टी के जिला अध्यक्ष पुनम साहू के साथ आम आदमी पार्टी ने सुनील कुमार गंगबेर की आत्महत्या को भूपेश बघेल सरकार की नाकामी बताया है और जल्द ही उचित कार्यवाही नहीं होने पर बड़ा आंदोलन करने की बात है।

बालोद पुलिस अधीक्षक जितेंद्र सिंह मीणा ने जिला के चार थाना प्रभारियों का तबादला कर दिया है वहीं कुछ प्रधान आरक्षको को भी इधर से उधर किया है सूत्रों की मानें तो सुनील कुमार गंगबेर की मौत से उनके परिवार के सदस्य सदमे में हैं तो वहीं कुछ अन्य और लोगों की सदमे में जाने की खबर है। चिटौद पंचायत के सरपंच व आम आदमी पार्टी नेता पुरषोत्तम सिन्हा ने गुरूर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच करने की मांग की है।

Breaking दल्लीराजहरा रेल्वे कॉलोनी में दो भाइयों के बीच आपसी मारपीट से बड़ा भाई घायल

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दल्लीराजहरा – आज दल्लीराजहरा के वार्ड क्र 24 रेल्वे कॉलोनी में दो भाइयों के बीच आपसी मारपीट से बड़ा भाई जख्मी हो गया है | प्राप्त जानकारी के अनुसार रवि कुमार यादव जो कि रेल्वे में शासकीय नौकरी में पदस्थ है किसी बात को लेकर छोटे भाई सावंत कुमार यादव के बीच में कहासुनी हुई दोनों भाई नशे में चूर थे, जिसके बाद मामला इतना ज्यादा बढ़ गया कि दोनों में घमासान लड़ाई हुई जिससे बड़ा भाई लहूलुहान हो गया फिर आसपास के लोगों द्वारा 108 को कॉल किया गया जिसके उपरान्त प्राथमिक उपचार किया गया इतना सब होने के पश्चात् भी मौके पर पुलिस नहीं पहुंची थी |

डिजिटल इंडिया को अपनाते हुए किसान भी अब डिजिटल माध्यम से फसल संबंधित समस्या का लिया समाधान

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बालोद – जगन्नाथ साहू | जिला बालोद के अन्तर्गत गुण्डरदेही ब्लॉक में आने किसानों ने व्हाट्स एप चैट वर्चुअल कैंप में जुड़े।

उक्त कार्यक्रम में कृषि विशेषज्ञ उगेंद्र पांडे रिलायंस फाउंडेशन प्रमुख भूपेंद्र साहू, प्रोग्राम सपोर्ट तोपेंद्र साहू समेत जिले के 30 किसानों ने हिस्सा लिया।

कार्यक्रम में कृषि में होने वाली सभी समस्याओं का विशेषज्ञ द्वारा समाधान किया गया कार्यक्रम में किसान भाई व्हाट्स एप पर प्रश्न लिख कर या फोटो या ऑडियो के माध्यम से किया और विशेषज्ञ ने उनका वैज्ञानिक तरीके से जवाब दिया ।

बकरीद विशेष – इस्लाामिक कैलेंडर के आखिरी महीने मनाते हैं बकरीद

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Eid Al-Adha Bakrid 2020 :बकरीद मीठी ईद के ठीक दो महीने के बाद इस्‍लामिक कैलेंडर के सबसे आखिरी महीने की 10 तारीख को मनाई जाती है। इस बार बकरीद 1 अगस्‍त को मनाई जा रही है। पूरी दुनिया के मुसलमान इस महीने में पवित्र मक्का सऊदी अरब में एकत्रित होकर हज मनाते हैं। ईद उल अजहा भी इसी दिन मनाई जाती है। माना जा रहा है कि इस बार कोरोना के चलते हज को लेकर केवल कुछ ही लोगों का समूह हज यात्रा पर जाएगा। आइए जानते हैं मुसलमानों में क्‍यों और कैसे मनाते हैं बकरीद का त्‍योहार।

Bakrid 2020: इस बार कब मनाई जाएगी बकरीद और क्‍या है इतिहास व कुर्बानी का अर्थ

कैसे मनाई जाती हैं बकरीद?

बकरीद (Bakrid) के लिए मुसलमान अपने घर में लाड़-प्‍यार से पल रहे बकरे की कुर्बानी देते हैं। जिन लोगों के घर में बकरा नहीं होता है वे ईद से कुछ दिन पहले बाजार से बकारा खरीदकर उसे घर ले आते हैं और फिर बकरीद के दिन उसकी कुर्बानी देते हैं। उसके बाद बकरे के मीट को 3 हिस्‍सों में बांट दिया जाता है। पहला हिस्‍सा गरीब फकीरों में बांट दिया जाता है और दूसरा हिस्‍सा रिश्‍तेदारों को भिजवाया जाता है और तीसरा हिस्‍सा घर में पकाकर खाया जाता है।

क्‍यों मनाते हैं बकरीद

बकरीद को कुर्बानी के जज्‍बात को सलाम करने के महापर्व के रूप में मनाया जाता है। अल्‍लाह की राह में पैगंबर मोहम्‍मद के पूर्वज इब्राहिम द्वारा दी गई कुर्बानी को याद करने के उपलक्ष्‍य में बकरीद मनाई जाती है। ऐसा माना जाता है कि इब्राहिम की इबादत से खुश होकर खुदा ने उनकी दुआओं को कुबूल किया और उसके बाद अल्लाह ने उनकी परीक्षा ली। इस परीक्षा में अल्लाह ने इब्राहिम से उनकी सबसे कीमती और प्यारी चीज की बली देने की मांग की।

जानिए कुर्बानी के बाद नालियों में खून बहाना गलत है या सही

शैतान को पत्‍थर मारने की परंपरा

बकरीद (Bakrid) के मौके पर सऊदी अरब में स्थित मुसलमानों के पवित्र धार्मिक स्‍थल मक्‍का में शैतान को पत्‍थर मारने की परंपरा निभाई जाती है। मान्‍यता है कि जब हजरत इब्राहिम खुदा के लिए अपने बेटे को कुर्बान करने चले थे तो इस शैतान ने उन्‍हें अपनी राह से डिगाने की कोशिश की थी। इसलिए हजयात्रा के अंतिम दिन शैतान को पत्‍थर मारने की परंपरा है।

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