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कोरली की वादियां और नदी पुकारती हैं सैलानियों को

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  •  गजब का आकर्षण है बिनता की इन वादियों में
  • कोरली में नजर आती है इंद्रावती की अद्भुत छटा
  • अर्जुन झा

लोहंडीगुड़ा कोरली के नदी तट और बिनता घाटी की वादियों में गजब का आकर्षण है। यहै तट और वादियां सैलानियों को पुकारती हैं कि आओ जी भरके मेरा दीदार करो, तनाव भरी जिंदगी के कुछ पल हमारे दामन में बैठकर सुकून के साथ गुजरो। यकीन मानिए अगर अब बिनता घाटी और कोरली के नदी तट पर एकबार पहुंच गए, तो वहां से लौटने का मन नहीं करेगा। तो फिर देर किस बात की, तुरंत चले आइए बस्तर। यहां आकर गुजारिए कुछ हसीन पल।

     कुदरत ने छत्तीसगढ़ के बस्तर को बहुत सारी नेमतों से नवाजा है। बस्तर का कण कण प्रकृति की अनुपम गाथा सुनाते प्रतीत होते हैं। साल, बीजा, सागौन, तेंदू, खम्हार, छिंद समेत दर्जनों प्रजातियों के पेड़ों से आच्छादित जंगल, कलकल बहती नदियां, विहंगम जल प्रपात, अति प्राचीन गुफाएं, शैलचित्र एवं भित्तिचित्र, प्राचीन प्रतिमाएं, आसमान से गलबाहियां करते पहाड़ और पहाड़ों को चूमते बादल क्या कुछ नहीं दिया है प्रकृति ने बस्तर को। ऐसा लगता है कि कुदरत ने बस्तर को दिल खोलकर नेमतों से नवाजा है। बस्तर में विश्व प्रसिद्ध चित्रकोट जल प्रपात, तीरथगढ़ वाटरफॉल, कुटुमसर की गुफा, केशकाल घाटी का विहंगम दृश्य, बैलाडीला की पहाड़ियों पर विचरण करते कपसीले और स्याह बादलों के झुंड, प्राचीन और विशालकाय भगवान गणेश की अलौकिक प्रतिमा, दंतेवाड़ा स्थित मां दंतेश्वरी का पावन धाम, कांकेर स्थित मां कंकालिन का दिव्य दरबार के साथ ही अनगिनत दर्शनीय, रमणीय और पूज्यनीय स्थल हैं। इन जगहों पर आकर लोग अपना अतीत भूल जाते हैं, वर्तमान में खो जाते हैं और सुनहरे भविष्य का तानाबाना बुनने में मशगूल हो जाते हैं। यही वजह है कि बस्तर की हसीन वादियों में बारहों माह सैलानियों का जमघट लगा रहता है। देश के प्रायः सभी राज्यों के पर्यटकों की आमदरफ्त तो लगी ही रहती है, विदेशी सैलानी भी बड़ी संख्या में सुकून की तलाश करते बस्तर पहुंचते हैं। सभी पर्यटक लौटते समय खूबसूरत यादें सहेजकर अपने साथ ले जाते हैं। बस्तर में अब एक नया पर्यटन स्थल सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करने लगा है। यह पर्यटन स्थल है बिनता घाटी और इस घाटी की वादियों में बसा गांव कोरली। बस्तर के जिला मुख्यालय जगदलपुर सेमहज 70 किलोमीटर दूर स्थित बिनता घाटी की छटा तो देखते ही बनती है, इंद्रावती नदी के तट पर बसे गांव कोरली का भी नजारा दिल की गहराइयों में उतर जाता है।

कोरली का खूबसूरत नजारा

बिनता घाटी के दामन में बसा गांव कोरली भले ही उपेक्षित और विकास से कोसों दूर पिछड़ा हुआ गांव है, मगर यह प्रकृति प्रदत्त उपहारों से समृद्ध है। कलकल करती इंद्रावती नदी इस गांव के पांव पखारते हुए आगे बढ़ती है। कोरली की धरा का आचमन करती है इंद्रावती। कोरली के पास नदी अदभूत स्वरूप में नजर आती है। पहाड़ों से घिरे कोरली में आकर इंद्रावती नदी ठहर सी जाती है, मानो उसे भी कोरली से लगाव हो गया हो। गर्मी के दिनों में झुलसाती गर्म हवाएं नदी के जल का स्पर्श पाते ही शीतल बयार में तब्दील हो जाती हैं। शीतल बयार से बेचैन तन मन प्रफुल्लित हो उठता है। नदी किनारे से हटने का मन ही नहीं करता। रेतीले तट पर नदी में स्नान करते ग्रामीण और बच्चे बरबस ध्यान खींच लेते हैं। यहां मगरमच्छ भी देखे जा सकते हैं। चट्टानें नदी और कोरली गांव की सुंदरता में चार चांद लगा देती हैं। नदी में नौकयान की भी व्यवस्था है। डोंगियों से नौकयान का लूत्फ पुरसुकून और यादगार बन जाता है।

पर्यावरण के रखवाले हैं ग्रामीण

कोरली गांव में बमुश्किल पचास घर आबाद हैं और यहां के सारे निवासी मुरिया आदिवासी हैं। आदिवासी तो प्रकृति के पैदायशी पुजारी और रखवाले होते हैं, मगर कोरली के मुरिया आदिवासी प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण के लिए जो भूमिका निभा रहे हैं, उसकी दाद देनी ही पड़ेगी। कोरली और बिनता घाटी के नजारे का लूत्फ उठाने रोज पचासों लोग विभिन्न वाहनों से पहुंचते हैं। बाहर से आने वाले लोग अपने साथ पानी की प्लास्टिक बोतलें, खाने पीने के सामानों से भरे कैरीबैग, रेपर, झिल्ली, डिपोजल गिलास आदि लेकर पहुंचते हैं। कोरली के ग्रामीण पर्यटकों से आग्रह करते रहते हैं कि रेपर, झिल्ली, पॉलीथिन बैग्स, डिस्पोजल गिलास व कचरे को जहां तहां न फेंकें, एक जगह इकट्ठा रख दें। बाद में ग्रामीण कचरे और अपशिष्ट को दूर छोड़ आते हैं। यही नहीं ये ग्रामीण पर्यटक चाहें तो उनके लिए भोजन भी तैयार कर देते हैं।

वाहन चालक नए मोटर व्हीकल एक्ट पर अफवाहों से बचें : प्रशासन

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*वाहन चालक नए मोटर व्हीकल एक्ट पर अफवाहों से बचें : प्रशासन*
= ट्रांसपोर्टरों और ड्राईवरों को नए कानून की दी जानकारी =
= मानवता दिखाएं, तो बच जाएंगे कड़ी कार्रवाई से =
*जगदलपुर।* नए मोटर व्हीकल एक्ट को जिस तरह हौव्वा बना दिया गया है, उससे देश में उबाल आ गया है। इस एक्ट के अच्छे पहलुओं को छुपाकर एक्ट को जुल्म ठहराने की कोशिश की जा रही है। इस नए कानून में प्रावधान है कि दुर्घटना होने पर अगर वाहन चालक पुलिस या मजिस्ट्रेट को सूचना दे देते हैं, तो वे कड़ी कार्रवाई से बच जाएंगे। एक्ट में दुर्घटनाओं को जमानती अपराध बताया गया है। हिट एंड रन एक्ट को लेकर फैली भ्रान्तियों को दूर करने अब पुलिस और प्रशासन ने मोर्चा सम्हाल लिया है।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, अनुविभागीय दंडाधिकारी एवं नगर पुलिस अधीक्षक ने जगदलपुर में बस- ट्रक ट्रांसपोर्टरों और चालकों की बैठक लेकर नए मोटर यान अधिनियम पर फैली भ्रान्तियां दूर की। ट्रांसपोर्टरों और चालकों को नए कानून के बारे में विस्तृत जानकारी भी दी गई। वरिष्ठ अधिकारियों ने अफवाहों से बचने की समझाईश भी दी। कहा गया कि नए कानून से किसी को भी डरने की जरूरत नहीं है। दुर्घटनाओं में घायल होने वाले लोगों को त्वरित उपचार सुविधा मिल सके और दुर्घटनाओं पर नियंत्रण लग सके इस कानून का मुख्य उद्देश्य है। सड़क दुर्घटना में हताहत लोगों की तुरंत मदद कर वाहन चालक लंबी सजा से बच जाएंगे और जमानत प्राप्त करने के हकदार भी होंगे। ऐसा करके वाहन चालक लोगों की जान बचाकर स्वयं को अपराध बोध से मुक्त भी कर पाएंगे।
*बॉक्स*
*जान बचाने में बनें सहायक*
नए कानून धारा 106(1) में प्रावधान है कि जो कोई भी लापरवाही से कार्य करके किसी की मृत्यु का कारण बनता है, तो उसे किसी भी तरह के करावास से दंडित किया जाएगा। कारावास की अवधि 5 वर्ष तक हो सकती है। साथ ही जुर्मना भी लगाया जा सकता है। यह संज्ञेय एवं जमानती अपराध है। धारा 106 (2) में प्रावधान है कि जो कोई भी लापरवाही से वाहन चलाकर किसी व्यक्ति की मृत्यु का कारण बनता है और घटना के तुरंत बाद किसी पुलिस अधिकारी या मजिस्ट्रेट को इसकी सूचना दिए बिना भाग जाता है, तो उसे किसी भी तरह के करावास से दंडित किया जाएगा। कारावास की अवधि 10 वर्ष तक हो सकती है और जुर्मना भी लगाया जा सकता है | यह भी संज्ञेय एवं अजमानती अपराध है। लेकिन जो चालक एक्सीडेंट के बाद पुलिस अधिकारी या मजिस्ट्रेट को सूचना देते हैं, उनके ऊपर धारा 106(2) लागू ही नहीं होगी और वह कड़ी सजा से बच जाएगा। ऐसा करके संबंधित वाहन चालक घायल व्यक्ति की प्राण रक्षा भी कर पाएगा।

बीमा कंपनियों को लाभ पहुंचाने बनाया हिट एंड रन एक्ट : मलकीत

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  •  भारी भरकम जुर्माना और लंबी सजा का प्रावधान वाहन चालकों के प्रति अन्याय

रायपुर मोदी सरकार के काले कानून के खिलाफ वाहन चालकों द्वारा देशभर में की जा रही हड़ताल का समर्थन करते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गैदू ने कहा है कि निजी बीमा कंपनियों को लाभ पहुंचने के लिए यह जन विरोधी कानून थोपा गया है। वाहन चालक आर्थिक रूप से इतना सक्षम नहीं होते कि 7 लाख रुपए का जुर्माना भर सकें।

कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री मलकीत सिंह गैदू ने कहा है कि मोदी सरकार के नए कानून से गरीब ड्राइवरों पर दोहरी मार पड़ने वाली है। एक तरफ भारी भरकम जुर्माना, दूसरी तरफ 10 साल जेल की सजा। ऐसे में जब परिवार का कमाने वाला मुखिया ड्राइवर 10 साल के लिए जेल चला जाएगा, तो उसके परिजनों का क्या होगा? उनका भरण पोषण कैसे होगा? श्री गैदू ने कहा है कि केंद्र सरकार द्वारा थोपे गए इस काले कानून से देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले वाहन चालक बुरी तरह से भयभीत हैं। दुर्घटना जानबूझकर नहीं होती, ऐसे में भारी भरकम जुर्माना और लंबी सजा का प्रावधान वाहन चालकों के सामर्थ्य से बाहर है, अमानवीय और अव्यावहारिक है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गैदू ने कहा है कि मोदी सरकार की जन विरोधी नीतियों पर परदेदारी करने भाजपा के नेता कुतर्क कर रहे हैं कि अधिक जुर्माना राशि से दुर्घटनाओं में पीड़ितों को मुआवजा देने में मदद मिलेगी। सवाल यह है कि भारी भरकम बीमा प्रीमियम का क्या औचित्य है? मोदी सरकार की प्राथमिकताएं गरीब ड्राइवर की नहीं बल्कि बीमा कंपनियों को मुनाफा पहुंचाने की है। भारतीय जनता पार्टी और केंद्र की मोदी सरकार लोकतंत्र को खत्म करने पर अमादा है। मोदी सरका को जब- जब जन विरोधी कानून पास करना होता है, तब-तब षडयंत्र पूर्वक बिल पेश करने से पहले विपक्षी दलों के सांसदों को सदन से बाहर कर दिया जाता है। जिस तरह से कोविड काल में बिना चर्चा, बिना बहस के पूंजीपति मित्रों के मुनाफे के लिए एक-एक दिन में 12-12 श्रमिक विरोधी कानून पास किए गए, ठीक उसी तरह से विगत दिनों विपक्ष के सांसदों को षड़यंत्र पूर्वक सदन से बाहर करके जन विरोधी काले कानून थोप दिए गए। उन्हीं में से एक यह प्रावधान देश के गरीब वाहन चालकों के खिलाफ है। केंद्र की मोदी सरकार अहंकार छोड़कर गरीब ड्राइवरों की मांग पर तत्काल संज्ञान ले और नए कानून में संशोधन करे।

वेबसाईट पर छलक रही ब्रांडेड शराब, मयकशों की प्याली खाली

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  • दुकानों से ऊंची शराब गायब होने के मामले में बड़ा खुलासा
  •  बारों में उपलब्ध शराब दुकानों में क्यों नहीं आ रही?
    -अर्जुन झा-
    जगदलपुर आबकारी विभाग की वेबसाईट तो महंगी और ब्रांडेड शराब से छलक रही है, मगर मयकशों की प्याली खाली की खाली ही है। वेबसाईट में ऐसी शराब की उपलब्धता दिखाई जा रही है, लेकिन सरकारी दुकानों से वह नदारद है। वहीं बारों में ब्रांडेड शराब जमकर परोसी जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब आबकारी विभाग ही बारों और दुकानों में शराब की आपूर्ति करता है, तब भला दुकानों से महंगी शराब कैसे गायब है ?
    छत्तीसगढ़ शासन के आबकारी द्वारा संचालित अंग्रेजी शराब दुकानों में किसी भी अच्छी ब्रांड की शराब की उपलब्ध नहीं है। आबकारी विभाग की वेबसाईट को सर्च करने पर सभी दुकानों मे हर अच्छी किस्म की अंग्रेजी शराब की उपलब्धता दिखाई जा रही है। वेबसाईट के मुताबिक जगदलपुर के नया बस स्टैंड, केवरामुंडा, हिकमीपारा आदि की शराब दुकानों में बीयर, वाइन, वोदका, रम, व्हीस्की, स्काच, ब्रांडी आदि ऊंची ब्रांड वाली शराब उपलब्ध है, मगर जमीनी हकीकत कुछ और ही है। इनमें से किसी भी विलायती शराब दुकान में ब्रांडेड शराब है ही नहीं। वेबसाईट में ऑर्डर देने पर एक निश्चित रकम लेकर ब्रांडेड शराब देने का भी जिक्र है। ग्राहक ऊंची शराब की डिमांड करते -करते थक जाते हैं, मगर दुकानों के सेल्समैन वांछित ब्रांड उपलब्ध न होने व सप्लाई बंद रहने की दुहाई देते नहीं थकते। वहीं दूसरी ओर जगदलपुर शहर के सभी बारों में अच्छी किस्म की शराब आसानी से मिल रही है। बारों में ये ब्रांडेड शराब ऊंची कीमत पर मिलती है। विलायती दुकानों के साथ ही बारों में भी शराब आबकारी विभाग ही उपलब्ध कराता है। ऐसे में अब सवाल यह उठता है कि ऊंचे ब्रांड वाली शराब क्या सिर्फ बारों में बैठकर शौक पूरा करने वाले लोगों के लिए ही है? सवाल तो यह भी उठता है कि आबकारी विभाग की वेबसाईट झूठी है या फिर विभागीय अधिकारी झूठ का रायता फैला रहे हैं?
    श्रमबिंदु ने अपने पिछले अंक में आबकारी विभाग के अफसरों करनामे का भंडाफोड़ किया था। हमने बताया था कि आबकारी महकमे के आला अफसरों और जिला आबकारी अधिकारियों ने बस्तर संभाग के साथ ही छत्तीसगढ़ की ज्यादातर सरकारी अंग्रेजी शराब दुकानों में ब्रांडेड शराब की कृत्रिम किल्लत पैदा कर दी है। ब्लंडर प्राइड, सिग्नेचर, ओल्ड मंक जैसी ब्रांडेड शराब की जगह हल्के दर्जे की लोकल शराब सरकारी दुकानों के जरिए खपाई जा रही है। ग्राहकों को यह कहकर छला जा रहा है कि ब्रांडेड शराब का उत्पादन बंद हो गया है। लोगों को हल्के दर्जे की शराब पीने मजबूर किया जा रहा है। वहीं लोकल शराब में भी मिलावट की जा रही है। बस्तर संभाग समेत पूरे छत्तीसगढ़ की ज्यादातर अंग्रेजी शराब दुकानों में ग्राहकों को ब्लंडर प्राइड, सिग्नेचर, ओल्ड मंक, हंड्रेड पाईपर व अन्य ब्रांडेड व्हीस्की, रम, ब्रांडी, वोदका, बीयर नहीं मिल रही है। इन ब्रांडों वाली शराब की मांग करने पर ग्राहकों से कहा जाता है कि इनका उत्पादन बंद हो गया है और लंबे समय से आपूर्ति भी नहीं हो रही है। इनकी जगह ग्राहकों को 8 पीएम, एसी नीट, इंडिया नंबर 1, फ्रंट लाइन, आईबी, विकर, पार्टी स्पेशल जैसी हल्की क्वालिटी की लोकल शराब की बोतलें थमा दी जाती हैं।ग्राहकों से इनकी कीमत ब्रांडेड शराब की जैसी वसूली जाती है। ग्राहक मन मारकर स्तरहीन शराब खरीदने मजबूर हो जाते हैं।

    खेल तो कमीशनखोरी का है
    मध्यप्रदेश, ओड़िशा, दिल्ली, राजस्थान, आंध्राप्रदेश, महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों की शराब दुकानों में हर ब्रांडेड कंपनी की अंग्रेजी शराब मिल जाती है। सूत्र बताते हैं कि छत्तीसगढ़ में उक्त ब्रांडेड शराब की बिक्री कमीशनखोरी के चक्कर में नहीं करवाई जा रही है। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ व गोवा की कुछ शराब निर्माता कंपनियां अपनी शराब खपवाने के एवज में आबकारी विभाग के वरिष्ठ अफसरों तथा जिला आबकारी अधिकारियों को भारी भरकम कमीशन, महंगे गिफ्ट, फॉरेन टूर के पैकेज देते हैं। इसी फेर में छत्तीसगढ़ की सरकारी विलायती शराब दुकानों में ब्रांडेड लिकर कंपनियों की शराब की आपूर्ति बंद कर दी गई है। बस्तर संभाग के बस्तर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, सुकमा, नारायणपुर, कांकेर, कोंडागांव जिलों की शराब दुकानों के जरिए धड़ल्ले से लोकल ब्रांड की अंग्रेजी शराब खपाई जा रही है। लोकल शराब निर्माता कंपनियों से जिला आबकारी अधिकारियों को हर माह लाखों रुपए बतौर कमीशन मिल रहे हैं।

समय सीमा से बाहर के प्रकरणों को जल्द निपटाएं एसडीएम

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  •  अनुविभागीय दंडाधिकारियों को कलेक्टर की हिदायत
  • कलेक्टर विजय दयाराम के. ने ली समीक्षा बैठक
    जगदलपुर कलेक्टर विजय दयाराम के. ने राजस्व अधिकारियों की समीक्षा बैठक लेते हुए कहा कि राजस्व के समय सीमा से बाहर वाले प्रकरणों को अनुविभागीय दंडाधिकारी प्राथमिकता से निराकरण करवाएं। उन्होंने राजस्व कार्य के लिए जिले में उपलब्ध मानव संसाधनों का बेहतर उपयोग करने पर जोर देते हुए नए नायब तहसीलदारों को विभिन्न शाखाओं के साथ ही मैदानी स्तर की प्रशासनिक गतिविधियों का भी प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए।
    मंगलवार को जिला कार्यालय के प्रेरणा सभाकक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में राजस्व प्रकरण के दर्ज, निराकरण एवं लंबित की स्थिति का जायजा लेकर अधिकारियों को अपने स्तर पर लंबित प्रकरणों का निराकरण करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य स्तर पर राजस्व अधिकारियों की समीक्षा बैठक होने से पूर्व सभी राजस्व के प्रकरणों का निराकरण करना सुनिश्चित करें। कलेक्टर ने राजस्व के दर्ज, निराकृत और लंबित प्रकरणों की समीक्षा के साथ ही तहसीलवार अविवादित नामांतरण, लंबित अविवादित नामांतरण, भू राजस्व की बकाया वसूली, न्यायालय में लंबित विवादित नामांतरण, विवादित खाता विभाजन, लंबित अविवादित खाता विभाजन, सीमांकन, व्यपवर्तन के लंबित प्रकरणों, भूमि त्रुटि सुधार कार्य, भूमि बंटन, शासकीय भूमि पर अतिक्रमण को रोकने और जुर्माना वसूली, संहिता की धारा 107,16 (3), 151 दांडिक प्रकरणों का निराकरण, असीमांकित क्षेत्र की सर्वेक्षण, मसाहती सर्वे, नक्शा नवीनीकरण और ऑन लाइन भुइयां पोर्टल में अपडेशन जैसे मामलों पर विस्तृत चर्चा व समीक्षा की।कलेक्टर ने आरबीसी 6- 4 के तहत तहसीलदार के पास हस्तांतरित राशि में अतिरिक्त बजट को वापस करवाने के निर्देश दिए ताकि आवश्यकता वाले क्षेत्र को आबंटित किया जा सके। उन्होंने असीमांकित क्षेत्र के सर्वेक्षण कार्य में प्रगति लाने के लिए राजस्व के मैदानी अमलों को समर्पित रूप से लगाने पर बल दिया। बैठक में नगर पंचायत बस्तर चिन्हाकित क्षेत्र को नजूल घोषित करने के नियमों के अनुसार प्राथमिकता से कार्यवाही करने के निर्देश दिए। इसके अलावा धान खरीदी के संबंध में भी चर्चा की गई। उन्होंने धान खरीदी कार्य में एसडीएम और तहसीलदारों को धान उठाव करवाकर मिलर्स को भिजवाने हेतु वाहन अधिग्रहण करने की आवश्यकता पर ध्यान देने को कहा। साथ ही धान उपार्जन केंद्र के पास अतिरिक्त स्थल का चिंहाकन और आवश्यक व्यवस्था करने के निर्देश दिए। उन्होंने अनुभाग स्तर पर निरीक्षण कर छोटे किसानों को धान खरीदी कार्य में प्राथमिकता दिलाने कहा। बचे हुए धान खरीदी के दिनों को ध्यान में रखते हुए प्रतिदिन 9 हजार क्विंटल खरीदी होने की संभावना को देखते हुए केंद्र में नए बरदाना और पीडीएस बारदाना की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। इस अवसर पर सभी अनुविभागीय दंडाधिकारी, डिप्टी कलेक्टर, तहसीलदार और नायब तहसीलदार उपस्थित थे।

वाहन चालकों के प्रदर्शन में शामिल हुए बड़े कांग्रेस नेता

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  •  केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर की गई नारेबाजी

जगदलपुर केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए मोटर व्हीकल एक्ट भारतीय न्याय संहिता की धारा 279 को जन विरोधी तथा परिवहन व्यवसाय व आम लोगों के प्रतिकूल बताते हुए चक्काजाम कर रहे वाहन चालकों- मालिकों को कांग्रेस नेताओं ने अपना समर्थन दिया। इस कानून के खिलाफ वाहन चालकों ने दो दिन से मोर्चा खोल रखा है।
सैकड़ों वाहन चालकों को संबोधित करते ड्राइवरों के साथ कांग्रेस नेताओं ने जमकर नारेबाजी की। नेताओं ने कहा कि इस कानून के पीछे वाहन चालकों को बेवजह परेशान करने की केंद्र सरकार की नीयत दिखती है। कोई भी वाहन चालक कभी नहीं चाहता कि उससे कोई दुर्घटना हो। यदि आकस्मिक तौर पर ऐसा हो भी जाता है|

तो इसकी सजा उसे भुगतने का कानून बनाया गया है, जो पूरी तरह से गलत है। केंद्र की भाजपा सरकार को तत्काल राष्ट्रहित में इस कानून को वापस लेना चाहिए। इस दौरान शहर कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य, पूर्व विधायक रेखचंद जैन ,वरिष्ठ कांग्रेस नेता परमजीत सिंह जसवाल, संतोष सिंह, महेश द्विवेदी, अनुराग महतो, जाहिद हुसैन, अल्ताफ खान, विजेंद्र ठाकुर, अभिषेक नायडू, अजय उसेंडी, मनोज यादव, आदर्श दलई, राकेश चौधरी, निर्मल लोढ़ा आदि मौजूद थे। जाम के दौरान नहीं किसी से भीख मांगते, हम अपना अधिकार मांगते, काला कानून वापस लो वापस लो जैसे नारे लगातार गूंजते रहे।

गरीब व बेरोजगार युवाओं से फिर भाजपा शासनकाल में छलावा पिछली सरकार में किसी भी नौकरी पर थी परीक्षा से राहत

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जगदलपुर। छत्तीसगढ़ में सरकार बनते ही भाजपाई सरकार ने अपना फितरत दिखाना प्रारंभ कर दिया है। नौकरियों में फिर फीस वसूली किया जा रहा है जोकि गरीब, बेरोजगारों के साथ छलावा है। उक्त बातें प्रवक्ता योगेश पानीग्राही ने कही।
प्रवक्ता  पानीग्राही ने छत्तीसगढ़ पुलिस भर्ती के लिए जो नोटिफिकेशन जारी किया गया है, उसके अनुसार आवेदकों से शुल्क लेने का ऐलान किया है जिसके तहत् सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को 200 रुपए और अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति व पिछड़ा वर्ग के लिए 150 रुपए का शुल्क लिया जाएगा किंतु पूर्ववर्ती सरकार कांग्रेस सरकार ने परीक्षा नि: शुल्क कराने की घोषणा किया था। पानीग्राही ने कहा कि पीएससी समेत जितनी भी भर्तियां कांग्रेस सरकार में हुई किसी तरह का शुल्क नहीं लिया जा रहा था लेकिन यह निर्णय बेरोजगारों के साथ छलावा है।छत्तीसगढ़ सरकार को वर्तमान निर्णय को वापस लेते हुए परीक्षा शुल्क नहीं लेने का आव्हान किया है।

दस लाख का जुर्माना और दस साल की सजा गरीबों पर जुल्म : बघेल

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  • नया मोटर व्हीकल एक्ट वाहन चालकों के साथ बड़ा अन्याय : लखेश्वर बघेल

जगदलपुर बस्तर के विधायक लखेश्वर बघेल ने केंद्र की मोदी सरकार द्वारा वाहन चालकों के लिए बनाए गए कानून को जनविरोधी और वाहन चालकों से रोजगार छीनने वाला कदम बताया है।
लखेश्वर बघेल ने कहा है कि मोदी सरकार सत्ता के मद में चूर होकर लगातार जन विरोधी कानून बना रही है। अपने पूंजीपति मित्रों के इशारे पर किसानों के लिए बनाए गए तीन काले कानून जिसे करीब 650 किसानों की मौत के बाद वापस लिया गया। अब करीब डेढ़ सौ विपक्षी सांसदों को सस्पेंड करवा कर मोदी सरकार ने यह काला कानून लाया है।  बघेल ने कहा कि अनाजों और उड्डयन सेवा के बाद पूंजीपतियों की नजर देश के सड़क परिवहन व्यवसाय पर है। परिवहन व्यवसाय से करीब 22 करोड़ वाहन चालक और उनके परिवारों का गुजर बसर चलता है। इनमें से अधिकांश गरीब तबके के हैं। वाहन चालकों को 10 -12 हजार रुपये से ज्यादा मासिक मेहनताना भी नहीं मिलता। नए कानून के तहत दुर्घटना के बाद वाहन छोड़कर फरार होने, घायल को अस्पताल नहीं पहुंचाने पर चालकों पर दस लाख रुपये जुर्माना और दस साल की सजा का प्रावधान रखा गया है। यह गरीबों पर अत्याचार है। वाहन चालकों की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे दस लाख का जुर्माना भर सकें। कोई भी वाहन चालक जानबूझकर दुर्घटना करता नहीं। तो दो साल की सजा को बढ़ाकर दस साल करना एक तरह से सत्ता और कानून का दुरुपयोग है। बस्तर विधायक लखेश्वर बघेल ने कहा कि सड़क दुर्घटना के बाद स्थानीय लोगों का उग्र होना स्वभाविक है और देश में जिस तरह से मॉब लीचिंग के मामले बढ़ रहे हैं, उसे देखते हुए कोई भी वाहन चालक दुर्घटना के बाद वहां रुकने या घायल को अस्पताल पहुंचाने की जहमत उठाना नहीं चाहता। इस नए कानून के बाद कोई दीगर भी उसे अस्पताल पहुंचाने के पचड़े में पड़ना नहीं चाहेगा। इससे मौत के आंकड़ों में इजाफा होगा।  बघेल ने कहा कि सिर्फ ट्रक और बस चालक ही नहीं, अन्य दुपहिया वाहन और कार चालक भी इस कानून की जद में हैं। इस कानून का एक ही उद्देश्य है गरीबों से लूटकर उन्हें जेल भेजकर सरकारी खजाना भरना और पूंजीपतियों को परिवहन व्यवसाय सौंपकर वाहन चालकों को उनका गुलाम बनाना। विधायक ने कहा कि कांग्रेस पार्टी और सम्पूर्ण विपक्ष चालकों के खिलाफ लाए गए इस काले कानून का पुरजोर विरोध करेगा और 2024 के लोकसभा चुनाव में मोदी सरकार को उखाड़ फेंकेगा।

अफवाहों पर ना दे ध्यान… पैट्रोल पम्प के लिए डिपो से लगातार निकल रही है पेट्रोल तथा डीजल की गाड़ियां

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  •  नवीन भारतीय न्याय संहिता के हिट एंड रन मामले में घबराएं नहीं सिर्फ लापरवाह चालकों पर ही होगी न्याय संगत कार्यवाही

बालोद पुलिस आपसे सादर निवेदन करता है कि सोशल मीडिया पर चल रहे कुछ दिनों तक पेट्रोल पंप पर पेट्रोल व डीजल ना मिलने की लगातार अफवाहों पर ध्यान ना दें सभी पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल व डीजल की आपूर्ति के लिए रायपुर पेट्रोल डिपो से लगातार गाड़ियां निकल रही है। बालोद पुलिस सभी ड्राइवर बंधुओ से भी अपील करता है कि नवीन भारतीय न्याय संहिता के हिट एंड रन मामले में घबराएं नहीं नवीन भारतीय न्याय संहिता के अनुसार लापरवाह वाहन चालक द्वारा मृत्यु घटित करने और घटना के तुरंत बाद किसी पुलिस अधिकारी या मजिस्ट्रेट को इसकी सूचना दिए बिना भाग जाने पर ही न्याय संगत कार्यवाही की जायेगी।अतः आप सभी से सादर अनुरोध है कि किसी भी प्रकार की भ्रामक खबरों पर ध्यान ना दें और ना ही इन्हें किसी भी माध्यम से फैलाएं।

बालोद पुलिस ने पेश किया अपना वार्षिक रिपोर्ट (बालोद पुलिस की जनवरी 2023 से दिसंबर 2023 तक की कार्यवाही

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  •  सभी गंभीर प्रकरणों में दिखी बालोद पुलिस की त्वरित कार्रवाई, रिकार्ड समय में किया गया प्रकरणों का निराकरण।
  • चोरी/नकबजनी के प्रकरणो में पिछले वर्ष की तुलना में आयी 29% कमी। 2022 में कुल चोरी/नकबजनी के 222 मामले थे जो इस वर्ष घटकर 157 हैं।
  • शरीर संबधी अपराध में भी कमी आई है। हत्या के प्रकरण वर्ष 2022 में 16 थे जो इस साल घटकर 13 हैं । हत्या के प्रयास के पिछले वर्ष 11 मामले थे जो इस साल घटकर सिर्फ 06 हैं।
  • महिला संबंधी अपराध में भी कमी आई है। जिले के थानों में 2022 में दुष्कर्म (376 भादवि) के 77 मामले थे जो इस वर्ष 58 (24% कम) है। छेड़छाड़ (354 भादवि) के पिछले साल 40 प्रकरण थे जो इस वर्ष घटकर 33 (17% कम) है। स्त्री की लज्जा का अनादर करना (509 भादवि) के पिछले साल 08 प्रकरण थे जो इस वर्ष घटकर 02 (75% कम) है। 2023 में दहेज मृत्यु के एक भी प्रकरण दर्ज नही हुआ।
  • बालोद पुलिस के द्वारा 12 नाबालिक बालक एवं 53 नाबालिक बालिका एवं 285 गुम इंसान को अन्य राज्यों व जिलो से सकुषल बरामद कर उनके परिजनों को सुपूर्द कर उनके चेहरो पर आई मुस्कान।
  • धोखाधड़ी (420 भादवि0) के प्रकरण में भी कमी आयी है, वर्ष 2022 में धोखाधड़ी के 31 प्रकरण थे जो इस साल घटकर 21 हैं । धोखाधड़ी के 05 प्रकरणो में 11 आरोपियो को दिगर राज्य व जिला से गिरफ्तार किया गया।
  • वर्ष 2022 की अपेक्षा वर्ष 2023 में 50% अधिक की गई प्रतिबंधात्मक कार्यवाही । बालोद पुलिस द्वारा 2022 में 2280 शांती भंग करने वाले लोगो के खिलाफ कार्यवाही किया गया था जो 2023 में बढ़कर 3431 आरोपियों के विरूद्ध प्रतिबंधात्मक धाराओं में कार्यवाही किया गया।
  • साइबर क्राईम पर पुलिस का सीधा एक्शन साइबर सेल बालोद एवं थानो के माध्यम से पीड़ितों के लगभग 26.00 लाख रूपये को कराया गया होल्ड।
  • जुआ एक्ट में 127 एवं सट्टा के 174 कुल 301 प्रकरणों मे 742 आरोपियों के विरूद्ध कार्यवाही कर 1177355 रूपये जप्त किया गया है।
  • नशे के विरूद्ध अभियान का दिखा असर, आबकारी एक्ट की कार्यवाही करते हुए पुलिस ने पकड़ी शराब की कई बड़ी खेप, 2023 में जप्ती का आंकडा हुआ लगभग 3000 लिटर जिसकी कीमत करीबन 13.50 लाख है।
  • मादक पदार्थों की तस्करी के प्रकरण में बालोद पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत 13 प्रकरणों में 21 आरोपियों के विरूद्ध कार्यवाही कर 430.480 किलोग्राम गांजा जप्त किया गया है।
  • सड़क दुर्घटना में जनहानि (मृत्यु) के मामलो में 7% की आयी कमी। वर्ष 2022 में सड़क दुर्घटनाओं में 174 जनहानि हुई थी। वहीं इस साल 2023 मे सड़क दुर्घटनाओं में 162 जनहानि हुई ।

अपराध और उनका निराकरण-

अपराधों पर लगाम लगाना और अमन चैन कायम रखना बालोद पुलिस की प्राथमिकता है। जिले की लगातार बढ़ती आबादी और वाहनों की बढ़ती संख्या के बीच बालोद पुलिस अपने विभिन्न जागरूकता अभियान और कानूनी कार्यवाही से अपराध नियंत्रण स्थापित करने में सफल हुई है। वर्ष 2023 में संपूर्ण बालोद जिले के विभिन्न थानों में कुल 3225 अपराध दर्ज किए गए, पुर्व वर्षो के लंबित अपराध 197 थे इस प्रकार कुल 3422 प्रकरण थे जिसमें से 3238 प्रकरणों का निकाल हुआ, सिर्फ 184 मामले (5%)लंबित है। इस प्रकार निकाल का प्रतिषत 95% रहा है।

चोरी/नकबजनी के प्रकरणो में आयी कमी-

वर्ष 2023 में सम्पत्ति संबंधी अपराध (चोरी/नकबजनी) को सुलझााने में पुलिस को अप्रत्याशित रूप से सफलता मिली है। चोरी/नकबजनी के मामलों में भी पिछले साल की तुलना में 29ः की कमी आयी है, पिछले साल कुल चोरी/नकबजनी के 222 मामले थे जो इस वर्ष घटकर 157 हैं। चोरी नकबजनी के 60 प्रकरणो में 136 आरोपियों को गिरफ्तार कर चोरी के सोने चांदी के जेवरात, नगदी रकम सहित कीमती जुमला 1,42,91,457 (एक करोड़ बियालिस लाख इन्कानबे हजार चार सौ संतावन) रूपये बरामद किया गया है। थाना अर्जुन्दा अंर्तगत 138/23 धारा 457.380 भादवि बाफना ज्वेलर्स से हुए 95.00 लाख रूपये की चोरी के सभी सोने चांदी के जेवरात की 100% रिकवरी कर 12 आरोपियों को जेल भेजा गया।

महिला संबंधी अपराधो में आयी कमी-

महिला संबंधी अपराधों के समयसीमा में निराकरण के निर्देश हैं, इन अपराधों की निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है। जिले में महिलाओं के प्रति बालोद पुलिस की संवेदनषीलता एवं महिला सुरक्षा के प्रतिबद्धता के कारण महिला संबंधी अपराध में कमी आई है। जिले के थानों में 2022 में दुष्कर्म (376 भादवि) के 77 मामले थे जो इस वर्ष 58 (24% कम) है। छेड़छाड़ (354 भादवि) के पिछले साल 40 प्रकरण थे जो इस वर्ष घटकर 33 (17% कम) है। स्त्री की लज्जा का अनादर करना (509 भादवि) के पिछले साल 08 प्रकरण थे जो इस वर्ष घटकर 02 (75% कम) है। 2023 में दहेज मृत्यु के एक भी प्रकरण दर्ज नही हुआ।
शरीर संबधी अपराध में भी आयी कमी-
हत्या के दर्ज अपराधों में भी कमी है, वर्ष 2022 में हत्या के 16 प्रकरण दर्ज थे जो इस साल घटकर 13 मामले दर्ज किये गये हैं । इनमें कई अंधे कत्ल के मामले जैसे- थाना दल्लीराजहरा अंतर्गत कुसुमकसा शराब भट्ठी के पास मिली लाष, थाना डौण्डी अंतर्गत लिम्हाटोला मे मर्डर का मामला, आदि में साइबर सेल और पुलिस टीमों ने बड़ी सूझबूझ से आरोपियों को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे पहुंचाया। हत्या के प्रयास के पिछले वर्ष 11 मामले थे जो इस साल घटकर सिर्फ 06 हैं ।

गांजा तस्करों पर हुई बड़ी कार्यवाही-

जिले में साल भर मादक पदार्थों पर अभियान चलाकर कार्यवाही किया गया वहीं इस वर्ष 2023 में 13 प्रकरणों में लगभग 430.480 कि.ग्रा. मादक पदार्थ गांजा कीमती करीबन 42 लाख कोे जप्त किया गया तथा 21 आरोपियों को जेल भेजा गया है ।

अवैध शराब के विरूद्ध वृहद अभियान-

पुलिस ने अवैध शराब पर वृहद रूप से जन जागरूकता चलाया गया, प्रत्येक गांव में ग्रामीणों को अवैध शराब की सूचनाओं देने प्रेरित किया गया जिससे 2023 में बेहद अधिक अवैध शराब की जप्ती की गई है । इस वर्ष 2865 लीटर अवैध शराब कीमती करीबन 14 लाख की जप्ती की गई है । आबकारी के प्रकरणों में भी बढोत्तरी है वर्ष 2022 में जहां 1045 प्रकरण थे वहीं इस वर्ष 2023 में 1349 प्रकरण (29%अधिक) अवैध शराब के बनाये जा चुकें है ।

प्रतिबंधक कार्यवाही में 50% की रिकार्ड बढोत्तरी-

अपराधों में कमी लाने थानों में झगड़ा, मारपीट की प्राप्त होने वाली शिकायतों पर प्रतिबंधक कार्यवाही पर पुलिस विशेष ध्यान देती है पिछले वर्ष साल कुल 2280 प्रकरण विभिन्न प्रतिबंधक धारों पर कार्यवाही की गई थी जो इस वर्ष बढ़कर 3431 की जा चुकी है जिसके फलस्वरूप गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष करीब 50% की बढ़ोतरी है।

सड़क दुर्घटना में कमी लाने जागरूकता और कार्यवाही जारी-

जिला पुलिस द्वारा सड़क दुर्घटना में कमी लाने के लिए जिला प्रशासन, राष्ट्रीय राजमार्ग एवं परिवहन विभाग के साथ मिलकर तमाम आवश्यक कार्यवाही की जा रही है । साथ ही जन जागरूकता एवं मोटर व्हीकल एक्ट की कार्यवाही भी समानांतर रूप से जारी है। लापरवाह वाहन चालको के विरूद्ध मोटर व्हीकल एक्ट के तहत 8300 प्रकरणों में 31,67,000/- रूपये समन शुल्क व माननीय न्यायालय में 4084 प्रकरणो में समन शुल्क 11,59,060/- कुल समन शुल्क 43,26,060/- अर्थदण्ड लिया गया। मोटर व्हीकल एक्ट पर लगातार कार्रवाई से गत वर्ष की तुलना में सड़क दुर्घटनाओं में अल्प कमी देखने को मिला है। वर्ष 2022 में 369 सड़क दुर्घटनाओं में 174 जनहानि हुई और 322 व्यक्ति घायल हुये । वहीं इस साल 2023 मे 375 सड़क दुर्घटनाओं में 162 व्यक्तियों की मौत (पिछले साल से 12 कम) और 411 व्यक्ति घायल हुये । सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने थानों की पेट्रोलिंग, डायल 112 के रिस्पांस टाईम को बेहतर करने समय-समय पर मीटिंग लेकर पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया जा रहा है जिससे इस वर्ष सड़क दुर्घटना से जनहानि में कमी देखी गई है।

साइबर क्राईम पर फोकस-
बढ़ते साइबर अपराधों में कमी लाने की ओर जिला पुलिस का फोकस रहा, लगातार पुलिस टीमें जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से साइबर क्राइम के प्रति लोगों को जागरूक कर रही है । साइबर सेल की टीम द्वारा साइबर क्राईम से पीड़ित हुये लोगों की शिकायत प्राप्त होने पर तत्काल ठगी रकम को होल्ड कराया जाता है और उन्हें ठगी रकम वापस दिलाने में मदद करती है । साइबर सेल की टीम द्वारा इस वर्ष विभिन्न शिकायत पत्रों पर कार्यवाही करते हुए लगभग 26.00 लाख रूपए ठगों तक जाने से रोक कर बैंक में होल्ड कराया गया है । साइबर सेल की तत्परता से माननीय न्यायालय द्वारा होल्ड किये पैसे को पीड़ितों को रिलीज किया जा रहा है ।
पुलिस अधीक्षक जितेन्द्र कुमार यादव द्वारा पुलिसिंग में नवाचार के कई सफल प्रयोग कर जिले की पुलिसिंग को और मजबूत किया गया है । उन्होंने अलग-अलग तरह के अपराध के शिकार हुये लोगों को त्वरित रूप से न्याय दिलाने को अपनी प्राथमिकता में रखा जिसके लिये सभी अफसरों को पीड़ित की शिकायत या रिपोर्ट पर तत्काल विधि सम्मत कार्रवाई के निर्देश दिये गये हैं । जिला पुलिस द्वारा वर्ष 2023 की कार्यवाही की समीक्षा की गई है । पुलिस अधीक्षक श्री जितेन्द्र कुमार यादव द्वारा अपनी टीम को अनुशासित रहकर जिले की पुलिसिंग को और बेहतर बनाने की दिशा में नई कार्ययोजना और ऊर्जा के साथ कार्य करने निर्देशित किया गया है ।

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