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धान की सूखत के नाम जारी है किसानों से खुली लूट

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  • कचनार केंद्र में लिया जा रहा है 4 किलो ज्यादा धान
  •  केंद्र प्रभारी करती हैं किसानों से अभद्र व्यवहार
    अर्जुन झा

बकावंड धान की सूखत के बहाने किसानों से लूट का खुला खेल चल रहा है। बस्तर जिले के अधिकतर धान खरीदी केंद्रों में प्रति बोरा चार किलोग्राम तक अतिरिक्त धान तौला जा रहा है। बकावंड विकासखंड अंतर्गत कचनार स्थित धान खरीदी केंद्र में भी किसानों से जमकर ठगी की जा रही है। सूखत के नाम पर तराजू के धान वाले पलड़े को इतना ज्यादा झुका दिया जा रहा है कि किसानों की कमर टूटने लगी है। धान खरीदी केंद्र प्रभारी एवं प्रबंधक की मिलीभगत से किसानों के धान को अधिक मात्रा में तौलकर प्रत्येक धान बोरे में एक से चार किलोग्राम तक का ज्यादा धान लिया जा रहा है। किसानों से ठगी के इस खेल को धान खरीदी केंद्र प्रभारी व लेंपस प्रबंधक उच्च अधिकारियों की मिलीभगत से अंजाम देते आ रहे हैं। 80 किलोग्राम की भर्ती वाले बोरे में 84 किलोग्राम धान तौलकर मात्र 80 किलोग्राम ही खरीदी रजिस्टर में दर्ज किया जा रहा है। जो किसान अतिरिक्त धान तौले जाने का विरोध करते हैं, उन्हें डराया धमकाया जाता है। उनके धान को ज्यादा नमी वाला तथा गुणवत्ता विहीन बताकर रिजेक्ट कर दिया जाता है। ऐसे में दूर दराज के गांवों से धान बेचने पहुंचे किसान मजबूर होकर खरीदी केंद्र प्रभारी के सामने आत्म समर्पण कर देते हैं। खरीदी केंद्र प्रभारी के इस रवैए को लेकर किसानों में गहरी नाराजगी देखी जा रही है।

खप रहा है कोचिंयों का धान
कचनार गांव ओड़िशा की सीमा से लगा हुआ है। कचनार समेत आसपास के तथा ओड़िशा के गांवों में दर्जनों धान कोचिया सक्रिय हैं। स्थानीय कोचिए जरूरतमंद ग्रामीणों से 50 किलोग्राम से लेकर दो ढाई क्विंटल तक धान खरीद खरीद कर इकट्ठा कर लेते हैं और ज्यादा मात्रा में धान संग्रहित हो जाने पर उसे कचनार के खरीदी केंद्र में खपा देते हैं। इसी तरह ओड़िशा के कोचिए और व्यापारी वहां से ट्रेक्टरों व पिकअप वाहनों में भरकर लाए गए धान को इस खरीदी केंद्र में आसानी से बेच लेते हैं। उनके धान को स्थानीय किसानों के नाम पर खरीदा जाता है। इस तरह खरीदी केंद्र प्रभारी व प्रबंधक लाखों के वारे न्यारे कर रहे हैं। बीते वर्ष भी कचनार खरीदी केंद्र में इसी तरह गोलमाल किया गया था।खरीदी केंद्र प्रभारी ललिता राव चर्चा करने पर वे इस संवाददाता पर ही बिफर पड़ी। वे धमकाते हुए कहने लगीं कि कि आप हमारे धान खरीदी केंद्र में किसका परमिशन लेकर घुसे हो, आपके संपादक कौन हैं, बताओ। खरीदी केंद्र प्रभारी अपने स्टॉफ और किसानों से भी अभद्र व्यवहार करती हैं। खरीदी केंद्र प्रभारी के इस बेरूखे व्यवहार से किसान व स्टाफ भी परेशान हैं। खरीदी प्रभारी ने यह भी कहा कि कोई भी आए पहले परिचय देते हैं उसके बाद खरीदी केंद्र में घुसते की इजाजत दी जाती है। बाद में थोड़ा नरम पड़ते हुए खरीदी केंद्र प्रभारी ने कहा कि थोड़ा बहुत तो झूकत लेना पड़ता है। बाद में धान सूख जाता है तो इसकी भरपाई कैसे होगी? वहीं जिला सरकारी बैंक के मैनेजर श्री पांडे ने ज्यादा अतिरिक्त धान तौले जाने के सवाल का कोई जवाब नहीं दिया।
वर्सन
पता करवाता हूं
सूखत की वजह से तय मात्रा में ही अतिरिक्त धान लिया जाता है। अगर कचनार खरीदी केंद्र में ज्यादा अतिरिक्त धान लिया जा रहा है, तो पता करवा लूंगा।
-श्री नायक
लेंपस प्रबंधक, कचनार

मंडी बोर्ड के अधीक्षण यंत्री मेहरबान, तो गधे भी हो गए पहलवान

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  • अपात्र ठेकेदारों पर बरसती रही एसी की विशेष कृपा
  •  कांग्रेस शासनकाल में की गई नियमों की अनदेखी
    -अर्जुन झा-
    जगदलपुर खुदा मेहरबान, तो गधा भी पहलवान। यह कहावत छत्तीसगढ़ राज्य मंडी बोर्ड में चरितार्थ हो रही है। बोर्ड में इस कहावत की पंक्तियां कुछ बदल जाती हैं। यहां अधीक्षण अभियंता (एसी) मेहरबान, तो गधे भी पहलवान बन जाते हैं। गधे मेहनती तो होते हैं, पर उनमें समझदारी घोड़ों से कम ही होती है। मंडी बोर्ड में जो काम घोड़ों जैसी काबिलियत रखने वाले ठेकेदारों से कराए जाने चाहिए, उन्हें पूरा करने की जिम्मेदारी अपात्र और अल्प ज्ञानी ठेकेदारों को दे दी गई। योग्य ठेकेदार मुंह ताकते रह गए। इंजीनियर का काम टाइम कीपर से कराएंगे, तो काम का बेड़ागर्क होना ही है। कुछ ऐसी ही भर्राशाही मंडी बोर्ड में भी खूब चली है। अपने कांग्रेसी आकाओं को खुश करने के लिए एसी ने अपात्र ठेकेदारों को निर्माण कार्यों के ठेके दे दिए। सरकार बदलते ही अब नियम विरुद्ध दिए गए ऐसे ठेके के खिलाफ आवाज उठने लगी है।
    मंडी बोर्ड के अधिकारी कांग्रेसी मानसिकता वाले अपात्र ठेकेदारों को भी निर्माण कार्यों के ठेके देने के लिए नियमों को शिथिल करते रहे हैं। बोर्ड के अधीक्षण अभियंता के कामकाज पर उंगलियां उठ रही हैं। राज्य मंडी बोर्ड की तकनीकी शाखा पर कृषि उपज मंडियों में सड़क, प्लेटफार्म, शेड, भवन आदि बनवाने की जिम्मेदारी रहती है। कांग्रेस शासन के चला चली की बेला में तकनीकी शाखा के अधीक्षण अभियंता द्वारा कांग्रेस से जुड़े ठेकेदारों को निर्माण कार्यों के ठेके दे दिए गए। ये ठेकेदार संबंधित कार्य को कराने के लिए पात्र नहीं हों तब भी नियमों को शिथिल कर उन्हें ठेके देने का खेल चलता रहा। ऐसा करके अधिकारी ने शासन को जमकर चूना लगाया है। सूत्र बताते हैं कि तकनीकी शाखा के अधीक्षण यंत्री कांग्रेस शासनकाल में पूरे पांच साल तक ऐसे कृत्य को अंजाम देते रहे हैं। उनकी यह कारगुजारी सरकार बदलते ही सामने आने लगी है। पता चला है कि अधीक्षण यंत्री ने निविदा की शर्तों में बदलाव और नियमों को शिथिल कर अपात्र कांग्रेसी ठेकेदारों को पात्र घोषित कर करोड़ों के ठेके दे दिए गए। अब सरकार बदलने के बाद पीड़ित पात्र ठेकेदारों द्वारा इसकी मय सबूत लिखित शिकायत करने की गई है। मिली जानकारी के अनुसार रायपुर जिले के आरंग क्षेत्र में धनेली से धनसुली तक 3 किमी लंबी चार करोड़ रू. की लागत वाली सड़क के निर्माण के लिए निविदा आमंत्रित की गई थी। इस निविदा से पात्र ठेकेदारों को महज इसलिए बाहर कर दिया गया कि वे गैर कांग्रेसी हैं। ये ठेकेदार मंडी बोर्ड के सभी मापदंडों खरे उतरते हैं। निर्माण कार्यों का उनके पास खासा तजुर्बा भी है। ऐसे योग्य ठेकेदारों को बेतुके कारण बताकर निविदा से बाहर करके अपात्र ठेकेदार के नाम से आनन फानन में कार्य स्वीकृत कर दिया गया। कहा जा रहा है ऐसे ठेकेदार को कार्य देने में मंडी बोर्ड के सभी नियमों को शिथिल कर दिया गया है। इसके अलावा प्रदेश में मंडी बोर्ड से संबंधित अन्य निर्माण कार्यों में भी उक्त अधिकारी ने ऐसी ही भर्राशाही की है। विष्णुदेव साय सरकार अगर इन तमाम ठेकों की बारीकी से जांच कराती है, तो बड़ी गड़बड़ी और करोड़ों का घोटाला उजागर हो जाएगा।

    सवाल में उलझ गए अधीक्षण यंत्री
    अधीक्षण अभियंता एनके डिडवानी का कहना है कि ठेके देने में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। नियमानुसार ठेके दिए गए हैं। मगर श्री डिडवानी नियमों को शिथिल किए जाने और चुनाव से कुछ दिन पहले ही आनन फानन में ठेके दिए जाने, पात्र ठेकेदारों को निविदा से बाहर कर दिए जाने जैसे सवालों पर चुप रहे। बार बार कुरेदने पर भी उनकी खामोशी नहीं टूट पाई। इससे जाहिर होता है कि दाल में कुछ तो नहीं, बल्कि बहुत कुछ काला है।
    वर्सन
    गड़बड़ी हुई है, तो होगी जांच
    मामले के बारे में आपको अधीक्षण यंत्री से ही बात करनी चाहिए। फिर भी अगर ठेके देने में गड़बड़ी की गई है, तो इसकी जांच कराई जाएगी।
    -यशवंत कुमार
    एमडी, छ्ग राज्य मंडी बोर्ड

हसदेव के आदिवासियों और जंगल को बचाएं केदार कश्यप : सुशील

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  •  शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष मौर्य का वनमंत्री को सलाह

जगदलपुर बस्तर शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य ने वनमंत्री केदार कश्यप से हसदेव के जंगल, आदिवासियों और वन्य प्राणियों की रक्षा करने की अपील की है। यहां जारी एक बयान में सुशील मौर्य ने कहा है कि हसदेव के जंगलों में 50 हजार पेड़ों की कटाई की जा चुकी है। इससे सफेद भालू व अन्य जीव जंतुओं का अस्तित्व संकट में पड़ गया है। पेड़ों की कटाई का विरोध करने वाले आदिवासियों को जेल में डाला जा रहा है। सुशील मौर्य ने केदार कश्यप को वनमंत्री बनाए जाने पर बधाई देते व उनके उज्जवल राजनैतिक भविष्य की कामना करते हुए बस्तर व समस्त वन क्षेत्र की समस्याओं के निराकरण में महत्वपूर्ण व उल्लेखनीय कार्य करने का आग्रह उनसे किया है।  मौर्य ने कहा कि केदार कश्यप स्वयं आदिवासी वर्ग से हैं और वे जल जंगल एवं जमीन की अहमियत को बेहतर जानते हैं। सुशील मौर्य ने कहा है कि आदिवासी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय खुद सरगुजा संभाग से आते हैं पर वे हसदेव जंगल की कटाई पर मौन हैं, हसदेव के जंगल में अभी तक 50 हजार पेड़ काटे जा चुके हैं। इससे दुर्लभ सफेद भालू व अन्य जीव जंतुओं एवं दुर्लभ वनस्पतियों का अस्तित्व संकट में पड़ गया है। सरकार माईनिंग को तुरंत से निरस्त करे। जंगल का विनाश केवल पूंजीपतियों के लिए किया जा रहा है। देश के इतिहास में पहली बार सुरक्षा बलों की पहरेदारी में जंगल की कटाई की जा रही है और क्षेत्रीय आदिवासियों को जेलों में डाला जा रहा है। सुशील मौर्य ने प्रदेश के सभी पर्यावरण प्रेमियों से भी अपील की है कि वे आगे आकर मुख्यमंत्री व वनमंत्री को पत्र लिखकर कटाई पर प्रतिबंध लगाने की मांग करें। सुशील मौर्य ने आगे कहा कि इस स्थिति में केदार कश्यप की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है क्योंकि अब वे वनमंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। जब बड़ी घटना पर एक राज्य का मुख्यमंत्री मौन हो जाता है, तो उसके बाद विभागीय वनमंत्री की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।

पछता रहे हैं आदिवासी
सुशील मौर्य ने कहा है कि प्रदेश का आदिवासी समुदाय हसदेव में पेड़ों की कटाई से अपने मतदान पर पछता रहा है और कह रहा है कि आदिवासी मुख्यमंत्री कुछ नहीं कर पा रहे हैं। एक कमजोर आदिवासी नेता को प्रदेश की कमान दे दी गई है। उनका रिमोट कंट्रोल मोदी- शाह जैसे नेताओं के हाथों में है। विष्णुदेव साय सिर्फ नाम के मुख्यमंत्री रह गए हैं। इस स्थिति में अब वनमंत्री केदार कश्यप ही कुछ कर सकते हैं। वैसे अब देखना होगा कि केदार कश्यप आदिवासी हित में हसदेव जंगल कटाई पर कुछ कदम उठाएंगे या फिर कुछ न कर पाने वाले प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के रास्ते पर चलकर मंत्रीपद पर विराजमान होकर राजभोगने का आनंद लेते रहेंगे। अगर ऐसा हुआ, तो कांग्रेस पार्टी इसका पुरजोर विरोध करेगी।

साय सरकार के संरक्षण में अडानी करा रहे हसदेव के जंगलों का सफाया

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  •  कांग्रेस सरकार ने हसदेव अरण्य में जंगल कटाई रोकी थी, भाजपा ने दी खुली छूट

रायपुर/जगदलपुर हसदेव अरण्य क्षेत्र में जंगलों की कटाई तत्काल रोकने और खदान की नीलामी को निरस्त करने की मांग करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं सांसद दीपक बैज ने कहा है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार के संरक्षण में अडानी की कंपनी हसदेव अरण्य में जंगलों की कटाई करा रहा है। हसदेव को बचाने के लिए आंदोलन कर रहे आदिवासियों को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पुलिस गिरफ्तार कर जेल में डाल रही है, उन्हें डराया धमकाया जा रहा है। दुर्भाग्य है कि राज्य का मुखिया आदिवासी हैं, फिर भी आदिवासियों की मांग सुनी नहीं जा रही है। वन मंत्री केदार कश्यप को फाईल देखने की जरूरत नहीं है। कांग्रेस की सरकार ने विधानसभा में संकल्प पारित कर हसदेव अरण्य क्षेत्र में केंद्र सरकार के द्वारा कोल खनन के लिए जो नीलामी की गई है उसे निरस्त करने की मांग की थी। कांग्रेस सरकार ने हसदेव अरण्य क्षेत्र में वन कटाई पर कड़ाई से रोक लगाई थी, भाजपा के सरकार बनते ही अडानी सरकारी बंदूक के नोंक पर आदिवासियों को डरा धमका कर जंगलों को काट रहे हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं बस्तर के सांसद दीपक बैज ने कहा कि भाजपा सरकार ने अडानी के हितों के सवंर्धन के लिए राज्य के जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा अडानी को सौंपना शुरू कर दिया है। जैसे ही भाजपा की सरकार बनी, हसदेव अरण्य क्षेत्र में वनों की अंधाधुंध कटाई शुरू कर दी गई है। 50 हजार से अधिक पेड़ काटे जा चुके हैं। यहां पर कटाई के लिए आदेश और पर्यावरण स्वीकृति मोदी सरकार ने दी थी। कांग्रेस सरकार ने इस स्वीकृति को राज्य स्तर पर निरस्त कर दिया था तथा केंद्र को इसे निरस्त करने के लिए पत्र लिखा था। 31 अक्टूबर 2022 को इस संबंध में छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर सचिव ने भारत सरकार के वन महानिरीक्षक को पत्र लिखकर परसा ओपन कास्ट कोल माईंस में कोल उत्खनन पर प्रतिबंध लगाने तथा वन कटाई के प्रस्ताव को निरस्त करने को कहा था। विधानसभा में भी कांग्रेस सरकार ने प्रस्ताव पारित करवा कर केंद्र को भेजा था कि हसदेव अरण्य क्षेत्र की सभी कोल खदानों का आवंटन निरस्त किया जाए।दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने विधानसभा में 27 जुलाई 2022 को प्रस्तावित प्रस्ताव पारित कर हसदेव अरण्य, तमोर पिंगला और कोरबा के हाथी रिजर्व क्षेत्र के वनों में कोल ब्लॉक आवंटन रद्द करने का संकल्प लिया था। इस दौरान मोदी सरकार के कोयला मंत्री ने रायपुर आकर यह भी कहा था कि जहां पर कोल बेयरिंग एक्ट लागू होता है, वहां पेसा कानून के प्रावधान लागू नहीं होते। किसी की आपत्ति या सहमति से कोल खनन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। मोदी सरकार उस क्षेत्र में भी कोयले का खनन जारी रखेगी।

अब तक 12, वो किस्मत वाला तेरहवां आखिर होगा कौन…?

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  •  विष्णुदेव साय मंत्रिमंडल में कुल जमा तेरह मंत्री ही रहेंगे
  •  तेरहवें के फेर में उलझे हुए हैं वरिष्ठ भाजपा विधायक
    -अर्जुन झा-
    जगदलपुर तेरहवीं तो शोक और दुख की निशानी है, मगर छत्तीसगढ़ में तेरहवां खुशी का सबब बनेगा। पूरे राज्य में, खासकर भाजपा के लोगों में इस ‘तेरहवें’ को लेकर खासी चर्चा और संशय की स्थिति है। लोग एक -दूसरे से पूछ रहे हैं कि आखिर तकदीर वाला वो तेरहवां शख्स कौन होगा? विधायक आस भरी नजरों से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, प्रदेश भाजपा के प्रभारी ओम माथुर और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष किरण देव सिंह की ओर देख रहे हैं।
    छत्तीसगढ़ की जनता ने कांग्रेस को बेदखल कर भाजपा को राज्य की सत्ता सौंप दी है। विष्णुदेव साय के रूप में छत्तीसगढ़ को पहला विशुद्ध आदिवासी मुख्यमंत्री मिला है। राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री स्व. अजीत जोगी भी खुद को आदिवासी बताते रहे हैं, लेकिन उनकी जाति को लेकर विवाद अंत तक बना रहा। विष्णुदेव साय ने अपना मंत्रिमंडल भी गठित कर लिया है। पहले राउंड में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और दो उप मुख्यमंत्रियों अरुण साव तथा विजय शर्मा पहले ही शपथ ले चुके थे। मंत्रिमंडल के गठन में हो रहे विलंब को लेकर कांग्रेस भी भाजपा को ताने मारने लगी थी। काफी जद्दोजहद के बाद मुख्यमंत्री श्री साय ने अपनी केबिनेट की घोषणा की। दूसरे राउंड में नौ विधायकों को मंत्री बनाया गया, मगर उन्हें विभाग आवंटित नहीं किए गए। विभाग बंटवारे में काफी समय लगता देख कांग्रेस फिर से छींटाकशी पर उतर आई। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने यह भी कह दिया कि मलाईदार विभाग की लालसा में मंत्रियों के बीच द्वन्द छिड़ा हुआ है। भाजपा में खींचतान चल रही है। अंततोगत्वा विभाग भी आवंटित कर दिए गए। अब रिक्त रह गए एक मंत्री पद के लिए फिर से जिज्ञासा भरा वातावरण दिखाई देने लगा है। भाजपा की ओर से शुरू से कहा जा रहा है कि विष्णुदेव साय मंत्रिमंडल का आकार काफी छोटा रहेगा। मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री और दोनों उप मुख्यमंत्रियों समेत कुल जमा तेरह सदस्य रहेंगे। अब तक बारह सदस्य ही मंत्रिमंडल में हैं और तेरहवें सदस्य को लेकर कयासों, चर्चाओं का बाजार गर्म है। भाजपा के प्रदेश स्तर के नेताओं के साथ ही मैदानी स्तर के नेता और कार्यकर्ता भी आपस में इसी बात को लेकर चर्चा में मशगूल दिखाई दे रहे हैं। लोग एक दूसरे से पूछ रहे हैं कि आखिर वह तेरहवां खुश किस्मत विधायक कौन होगा भाई, जिसे मंत्री पद मिलेगा?

    वरिष्ठ विधायकों की हसरत
    भाजपा के वरिष्ठ विधायकों की हसरत भी हिलोरें मारने लगी है। इन विधायकों को भरोसा है कि वरिष्ठता क्रम को ध्यान में रखते हुए भाजपा मंत्री पद एलॉट करेगी। वरिष्ठ विधायकों में बस्तर संभाग से विक्रम उसेंडी और लता उसेंडी भी शुमार हैं। ये दोनों आदिवासी समुदाय के हैं और पहले भी मंत्री रह चुके हैं। इन दोनों को विभागीय मंत्रालय चलाने और प्रशासनिक अमले पर नकेल कसे रखने का अच्छा तजुर्बा भी है। साय मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री को मिलाकर चार सदस्य हैं। इससे प्रतीत होता है कि अब तेरहवां सदस्य गैर आदिवासी होगा। अगर ऐसा कदम भाजपा उठाती है, तो विक्रम उसेंडी, लता उसेंडी और अन्य आदिवासी विधायकों की हसरत धरी रह जाएगी। अजा वर्ग से दयाल दास बघेल इकलौते मंत्री हैं, लिहाजा इस वर्ग से मंत्री बनाए जाने की ज्यादा संभावना है। इसी तरह ओबीसी वर्ग से सर्वाधिक पांच मंत्री हैं। इसलिए अब इस वर्ग का दावा स्वतः खारिज हो जाता है। वहीं सामान्य वर्ग से उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा एवं बृजमोहन अग्रवाल ही मंत्री हैं। इसलिए जनरल केटेगरी के विधायकों में से भी कोई तेरहवां मंत्री बन सकता है।

साढ़े तीन लाख के गांजा के साथ मप्र का युवक गिरफ्तार

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  • स्कूटी से तस्करी करते पकड़ा गया युवक

नगरनार मध्यप्रदेश के एक युवक को गांजा की तस्करी करते नगरनार पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से साढ़े तीन लाख रू. मूल्य का 35 किलोग्राम गांजा और एक बिना नंबर प्लेट की नई स्कूटी की बरामद की गई है। 24 वर्षीय आरोपी अमन गुप्ता पिता नारायण गुप्ता वार्ड 8 आदर्श मार्ग अनूपपुर मध्यप्रदेश का निवासी है।
बस्तर के उप पुलिस महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जितेंद्र सिंह मीणा के निर्देशन में गांजा की तस्करी व बिक्री के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत यह मामला पकड़ा गया। 29 दिसंबर को सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति स्कूटी में गांजा रखकर ओड़िशा से जगदलपुर की ओर परिवहन कर रहा है। सूचना पर ग्राम धनपूंजी फॉरेस्ट नाका के पास घेराबंदी कर आरोपी अमन गुप्ता को पकड़ा गया। तलाशी लेने पर उसके पास से कुल 35 किलो गांजा एवं बिना नंबर वाली नई स्कूटी, नकद रकम 500 रू. व एक नग मोबाइल फोन बरामद हुए। सामान जप्त कर आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत अपराध सदर कायम किया गया है। आरोपी को न्यायिक रिमांड पर जगदलपुर न्यायालय में पेश किया गया।आरोपी को पकड़ने में निरीक्षक शिवानंद सिंह, उप निरीक्षक खोमराज ठाकुर व रनेश सेठिया, सहायक उप निरीक्षक सतीश तिवारी, प्रधान आरक्षक अहिलेश नाग, डीएसएफ आरक्षक जोगेश्वर कश्यप, आरक्षक चंद्रकुमार व सैनिक सत्यनारायण का योगदान रहा।

इनर व्हील क्लब के शिविर में 240 लोगों की शुगर व बीपी जांच

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  •  नागरिकों में जागरूकता लाने के लिए की गई पहल

जगदलपुर इनर व्हील क्लब ऑफ जगदलपुर द्वारा नगर के शहीद पार्क के सामने शनिवार को बीपी शुगर जांच शिविर लगाया गया। आम लोगों को डायबिटीज, ब्लड प्रेशर के पति जागरूक करने के लिए इनर व्हील क्लब ने यह पहल की थी। आजाद डायग्नोस्टिक सेंटर के सौजन्य से प्रीति आजाद की उपस्थिति में नागरिकों को डायबिटीज और ब्लड प्रेशर के प्रति सजग किया गया। इनर व्हील क्लब ऑफ जगदलपुर की अध्यक्ष ममता राणा ने बताया कि शिविर में 240 व्यक्तियों ने अपने ब्लड प्रेशर, डायबिटीज की जांच करवाई।

बहुत से व्यक्तियों को यह पता भी नहीं था कि उन्हें डायबीटीज है। उन्हें शिविर में ही इसके बारे में पता चला। कुछ व्यक्तियों का ब्लड शुगर बहुत ही अधिक था जिसकी उन्हें जानकारी नहीं थी। कुछ व्यक्ति ऐसे भी थे जिन्हें पता था कि उन्हें बीपी और शुगर है पर कोई तकलीफ नहीं होने या जांच कराने पर नॉर्मल आने पर वे दवाई लेना बंद कर चुके थे। प्रीति आजाद ने कहा कि बीपी और शुगर की रेगुलर जांच कराएं। भारत में बड़ी संख्या में लोग शुगर से ग्रसित हैं, पर उन्हें पता ही नहीं होता। क्योंकि वे जांच नहीं करवाते। 40 वर्ष और ऊपर के सभी व्यक्तियों को अनिवार्य रूप से 6 महीने या साल में कम से कम एकबार बीपी और शुगर की जांच करवानी चाहिए। शिविर में मुख्य रूप से इनर व्हील क्लब की पूर्व अध्यक्ष उषा गोंदी, पूर्व अध्यक्ष अरुणा जोबनपुत्रा, लाइबा चामड़िया, अमितेश, उर्मिला सहित इनर व्हील की सदस्य एवं डॉक्टर उपस्थित थे।

दल्ली राजहरा विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारी बालोद के भव्य अक्षत कलश शोभायात्रा में हुए शामिल

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दल्लीराजहरा श्री राम मंदिर के अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के अवसर पर अयोध्या पवन धाम से आए हुए पूजित अक्षत कलश का भव्य स्वागत के लिए के लिए मां शीतला मंदिर प्रांगण बालोद से संपूर्ण वार्ड के लिए भव्य शोभायात्रा निकाली गई l अक्षत कलश का बालोद के संपूर्ण वार्ड में भगवान श्री राम के सोहर गीत एवं जय श्री राम जय श्री राम के नारों के साथ भ्रमण कराया गया l यह भव्य अक्षत कलश शोभायात्रा बालोद के लिए ऐतिहासिक पल था जिस वार्ड के निवासियों के द्वारा भव्यता के साथ स्वागत किया गया l जगह-जगह आरती उतारी गई एवं पुष्प वर्षा से अक्षत कलश का स्वागत किया गया l विश्व हिंदू परिषद बालोद के जिला संयोजिका श्रीमती सत्या साहू कहा कि हमें विश्वास नहीं था कि बचपन से श्री राम मंदिर का जो सपना देख रहे हैं l वह पूरा हो पाएगा लेकिन भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में जो सपना लाल कृष्ण आडवाणी जी और मुरली मनोहर जोशी जी ने दिखाया था l आज उसे हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी ने पूरा कर दिखाया l यह हमारे भारत देश के लिए गौरव की बात है l कुछ वर्ष पहले श्री राम लला तंबू में विराजमान थे l आज विशाल और अद्भुत श्री राम मंदिर के गर्भ गृह में विराजित होंगे l दल्ली राजहरा से भव्य शोभायात्रा में श्रीमती सत्या साहू जिला संयोजिका विश्व हिंदू परिषद श्री नीलेश श्रीवास्तव जिला उपाध्यक्ष श्रीमती नंदा पसीने जिला सहसंयोजीका श्री शंकर साहू नगर अध्यक्ष विश्व हिंदू परिषद श्रीमती उषा साहू श्रीमती जानकी देवी शहर संयोजिका दल्ली राजहरा से भव्य अक्षत कलश शोभा यात्रा में विश्व हिंदू परिषद दल्ली राजहरा के पदाधिकारी बालोद पहुंचे थे l

जंगल के सपूत केदार कश्यप को बनाया गया वन मंत्री

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  • अब बस्तर को मिलेगा विकास का नया आयाम
  • जल संसाधन, जलवायु परिवर्तन कौशल विकास एवं सहकारिता विभाग भी मिले

जगदलपुर एक गीत इन दिनों पूरे छत्तीसगढ़ में बेहद लोकप्रिय हो चला है। गीत के बोल हैं – आदिवासी जंगल रखवाला…। इस बार जंगल की रखवाली और प्रकृति के संरक्षण का दायित्व सही में एक आदिवासी सपूत को मिला है। बस्तर के जंगलों के सपूत केदार कश्यप को विष्णुदेव साय मंत्रिमंडल में वन मंत्री बनाया गया है। इसके अलावा उन्हें जलवायु परिवर्तन, जल संसाधन कौशल विकास, सहकारिता जैसे अहम विभागों की भी जिम्मेदारी दी गई है। केदार कश्यप को वन मंत्री बनाए जाने से जंगल के रखवाले और प्रकृति के पुजारी आदिवासियों में खुशी व्याप्त हो गई है।
थोड़े लंबे इंतजार के बाद विष्णुदेव साय सरकार में शामिल मंत्रियों को विभाग आवंटित कर दिए गए। वनों से अच्छादित बस्तर संभाग में जन्मे, पले बढ़े और राजनीति का ककहरा सीखते हुए सियासत की बुलंदी पर पहुंचे वनपुत्र केदार कश्यप को वन, जलवायु परिवर्तन, जल संसाधन, कौशल विकास, सहकारिता जैसे महत्वपूर्ण विभाग दिए गए हैं। सही मायने में आदिवासी ही जंगल के रखवाले और प्रकृति के उपासक होते हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जंगल के निवासी आदिवासी सपूत केदार कश्यप को वनमंत्री बनाकर आदिवासी समुदाय का दिल जीत लिया है। नारायणपुर सीट से चुनकर विधानसभा में पहुंचे केदार कश्यप पर आदिवासियों को पूरा भरोसा है कि वे वनों का विनाश रोकने में सार्थक भूमिका निभाएंगे, जलवायु में आ रहे बदलाव को रोकने एवं प्रकृति के संरक्षण की दिशा में कारगर कदम उठाएंगे। एक आदिवासी मंत्री ही वनों की अहमियत को बेहतर ढंग से समझ सकता है। लोगों को उम्मीद है किया जल संसाधन मंत्री केदार कश्यप बस्तर संभाग में सिंचाई सुविधा के विस्तार, बस्तर के युवाओं के कौशल विकास और बस्तर में सहकारिता को भी नया आयाम देंगे।

सुरक्षित नव वर्ष आगमन हेतु बालोद पुलिस द्वारा की गई अपील

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  • उत्सव स्थलों पर होने वाली भीड़ में रहें सतर्क सुरक्षित जगह पर सुरक्षित तरीके से मनाएं नव वर्ष।
  • शराब पीकर वाहन न चलाएं, उचित समय तक ही ध्वनि यंत्र का उपयोग करें कोलाहल नियमों उल्लंघन करने से बचें।

पुलिस अधीक्षक महोदय डॉ जितेंद्र कुमार यादव के निर्देशन एवं अति. पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार नायक के मार्गदर्शन में 31st दिसंबर/ नव वर्ष 2024 में मनाएं जाने वाले उत्सव हेतु सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बालोद पुलिस जारी की गयी महत्त्वपूर्ण सुरक्षा एडवाइजरी। बालोद पुलिस सभी नागरिकों से अपील करता है नए साल के उत्सव में इन बातों का रखें ध्यान :-

निर्धारित समय सीमा पर ही पटाखे का उपयोग करें

सुरक्षित जगह पर सुरक्षित तरीके से नव वर्ष मनाएं

रात्रि में इवेंट स्थल पर पर्याप्त लाइट रहे, भीड़ भाड़ में अपराधिक तत्व से सतर्क रहें

शराब पीकर वाहन नहीं चलाएं, दोपहिया वाहन में तीन सवारी नहीं बैठे एवं हेलमेट पहन के गाड़ी चलाएं, तेज गति से वाहन नहीं चलाएं. फोर व्हीलर चलाते समय सीट बेल्ट का उपयोग करें

कोलाहल नियमों का उल्लंघन न करें

ध्वनि यंत्र का उपयोग निर्धारित डेसिबल पर रखें उच्चतम न्यायालय के आदेशानुसार ध्वनि यंत्र के उपयोग की समय सीमा का पालन करें

डेम या झरने किनारे वाली जगहों पर पिकनिक के लिए न जाएं, भीड़ में बच्चों को संभाल कर रखें

किसी भी प्रकार की सूचना देने के लिए संपर्क करें।

पुलिस कन्ट्रोल रूम बालोद
94791-91160📱📞

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