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जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी के नेतृत्व में मुस्लिम समाज ने किया मुख्यमंत्री का इस्तकबाल

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दल्लीराजहरा _ जामा मस्जिद दल्ली राजहरा इंतजामिया कमेटी के सदस्य जनाब हाजी शेख माजिद कुरैशी सदर, शेखनय्यूम खान,सदर आरिफ खान,सदर साऊद आलम के नेतृत्व में मुस्लिम समाज के लोगों ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नगर आगमन पर उनका बड़ी गर्मजोशी से स्वागत किया और रोड़ शो में गुलाब की पंखुड़ियां मुख्यमंत्री पर डालकर उनका इस्तकबाल किया जिसे मुख्यमंत्री ने सहर्ष स्वीकार किया और मुस्लिम समाज का धन्यवाद दिया।

रोड शो के पश्चात मुख्यमंत्री से भेंट मुलाकात के कार्यक्रम में मुस्लिम समाज से इंताजामिया कमेटी के तीन सदस्य जनाब हाजी माजिद कुरैशी, जनाब शेख नय्यूम, जनाब आरिफ खान ने मुख्यमंत्री से भेंट कर सर्वप्रथम उनका लौहनगरी दल्ली राजहरा में इस्तकबाल किया और तत्पश्चात मुख्यमंत्री से मुस्लिम समाज के लिए जमात खाना (मंगलभवन) के लिए 50 लाख रुपए की मांग की जिस पर मुख्यमंत्री ने 10 लाख रुपए देने की घोषणा की और कहा मुस्लिम समाज के लिए पैसों की कमी नहीं होने देंगे ईस पैसे से शुरुवात करिये।जिस पर मुस्लिम समाज की ओर इंतजामिया कमेटी के सदस्यों ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया और इंताजामिया कमेटी ने मुख्यमंत्री को वक्फ बोर्ड द्वारा मस्जिद कमेटी में मुतवल्ली चुनाव के लिए प्रशासन को दिये निर्देश पर तत्काल कार्यवाही करने और अतिशीघ्र जामा मस्जिद कमेटी में मुतवल्ली चुनाव करवाने के लिए भी ज्ञापन सौंपा। इंतजामिया कमेटी के सदस्यों ने कहा कि इससे पूर्व क्षेत्र की विधियका और केबीनेट मंत्री अनिला भेंडिया ने अपने निधी से 05 लाख रुपए दिए हैं जिसका टेंडर नगर पालिका परिषद दल्ली राजहरा से हो चुका है और जल्द ही कार्य प्रारंभ हो जायेगा इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ शासन से मुस्लिम कब्रिस्तान के लिए लगभग 17 लाख रुपए स्वीकृत हो चुके हैं। ईन सभी कार्यों के लिए मुस्लिम समाज के इंताजामिया कमेटी के सदस्यों ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, क्षेत्रीय विधायक अनिला भेंडिया धन्यवाद करतीं हैं और आशा करती है कि भविष्य ईसी तरह मुस्लिम समाज के विकास के आप लोगों का सहयोग मिला ।

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जामा मस्जिद दल्ली राजहरा इंतजामिया कमेटी के सदस्य जनाब हाजी शेख माजिद कुरैशी सदर, शेखनय्यूम खान,सदर आरिफ खान,सदर साऊद आलम के नेतृत्व में मुस्लिम समाज के लोगों ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नगर आगमन पर उनका बड़ी गर्मजोशी से स्वागत किया और रोड़ शो में गुलाब की पंखुड़ियां मुख्यमंत्री पर डालकर उनका इस्तकबाल किया जिसे मुख्यमंत्री ने सहर्ष स्वीकार किया और मुस्लिम समाज का धन्यवाद दिया। रोड शो के पश्चात मुख्यमंत्री से भेंट मुलाकात के कार्यक्रम में मुस्लिम समाज से इंताजामिया कमेटी के तीन सदस्य जनाब हाजी माजिद कुरैशी, जनाब शेख नय्यूम, जनाब आरिफ खान ने मुख्यमंत्री से भेंट कर सर्वप्रथम उनका लौहनगरी दल्ली राजहरा में इस्तकबाल किया और तत्पश्चात मुख्यमंत्री से मुस्लिम समाज के लिए जमात खाना (मंगलभवन) के लिए 50 लाख रुपए की मांग की जिस पर मुख्यमंत्री ने 10 लाख रुपए देने की घोषणा की और कहा मुस्लिम समाज के लिए पैसों की कमी नहीं होने देंगे ईस पैसे से शुरुवात करिये।जिस पर मुस्लिम समाज की ओर इंतजामिया कमेटी के सदस्यों ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया और इंताजामिया कमेटी ने मुख्यमंत्री को वक्फ बोर्ड द्वारा मस्जिद कमेटी में मुतवल्ली चुनाव के लिए प्रशासन को दिये निर्देश पर तत्काल कार्यवाही करने और अतिशीघ्र जामा मस्जिद कमेटी में मुतवल्ली चुनाव करवाने के लिए भी ज्ञापन सौंपा। इंतजामिया कमेटी के सदस्यों ने कहा कि इससे पूर्व क्षेत्र की विधियका और केबीनेट मंत्री अनिला भेंडिया ने अपने निधी से 05 लाख रुपए दिए हैं जिसका टेंडर नगर पालिका परिषद दल्ली राजहरा से हो चुका है और जल्द ही कार्य प्रारंभ हो जायेगा इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ शासन से मुस्लिम कब्रिस्तान के लिए लगभग 17 लाख रुपए स्वीकृत हो चुके हैं। ईन सभी कार्यों के लिए मुस्लिम समाज के इंताजामिया कमेटी के सदस्यों ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, क्षेत्रीय विधायक अनिला भेंडिया धन्यवाद करतीं हैं और आशा करती है कि भविष्य ईसी तरह मुस्लिम समाज के विकास के आप लोगों का सहयोग मिलता रहेगा।

बाहरी मजदूरों की डिटेल नहीं थाने में,हर गांवों में बढ़ रहे असामाजिक तत्व

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जगदलपुर औधोगिक विकास बस्तर की जरूरत है वह अच्छी बात है किंतु उसके साथ बुराईयां भी सामने आती हैं।ऐसा ही निर्माणाधीन नगरनार स्टील प्लांट जगदलपुर में भी ऐसा ही मामले बढ़ रहें हैं जिसके तहत अवैध कबाड़ सहित गांवों में शांति भंग की जानकारी भी सामने आ रही है जिसके लिए नगरनार पुलिस की सुस्ती भी सामने आ रही है क्योंकि नगरनार स्टील प्लांट क्षेत्र में कितने कंपनी व कितने मजदूर कार्य कर रहें हैं उसका डाटा नहीं है।
बस्तर संभाग मुख्यालय के जगदलपुर ब्लाक के नगरनार क्षेत्र में नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन द्वारा नगरनार स्टील प्लांट क्षेत्र का निर्माण किया जा रहा है जोकि क्षेत्र के लिए अच्छी खबर है और नगरनार स्टील प्लांट में कई बड़ी- बड़ी कंपनियां काम कर रही है जिसके कुछ पेटी कांट्रेक्टर भी हैं जिसमें बाहरी क्षेत्रों के लोगों को कार्य हेतु लगाया है जोकि नगरनार के प्रभावित क्षेत्र में रहते हैं किंतु कंपनियों द्वारा विधिवत् जानकारी पुलिस और प्रशासन को नहीं है और विधिवत वेरीफिकेशन भी नहीं हुआ है जिसके कारण कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा गांवों में हुड़दंग मचाने से भी बाज नहीं आ रहें।

कंपनी नहीं कर रही एक्ट का पालन
सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट उल्लेख है कि स्टील प्लांट हो या दीगर प्लांट उसमें कार्य करने वाली निजी कंपनियों में कार्य करने वाले हर मजदूरों की चार स्तर पर बनाए जाने हैं जिसके तहत् मजदूरों का निवास सत्यापन हेतु आधार कार्ड या अन्य शासकीय दस्तावेज, पुलिस वैरीफिकेशन,श्रम विभाग का प्रमाण पत्र व पंचायत समिति द्वारा जारी प्रमाण पत्र उसके आधार पर कार्य करवाए जाने का प्रावधान है किंतु कंपनी लेबर एक्ट का उल्लघंन करता है।
दीगर कामों में लेकिन वेरीफिकेशन में नहीं
पुलिस का दायित्व है कि यदि उसके क्षेत्र में कोई मजदूर कार्य कर रहा है तो उसका वैरीफिकेशन पंचायत, कोटवार व अपने कर्मचारियों से माध्यम से करवाना चाहिए लेकिन नगरनार स्टील प्लांट में कितने मजदूर कार्य कर रहें हैं उसकी विधिवत वेरीफिकेशन नहीं कराई जा रही है जिसके कारण पुलिसिया कार्रवाई भी सवालों के घेरे में है।

कोई कंपनी यदि रिकॉर्ड छुपाती है तो होगी जांच :हेमसागर सिदार
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक व नगरनार क्षेत्र के अनुविभागीय अधिकारी पुलिस हेमसागर सिदार से मजदूरों के वेरीफिकेशन के संदर्भ में जानकारी चाहिए तो उन्होंने कहा कि इस हेतु एक सिस्टम बनाया गया है जिसके तहत् जो कंपनी यहां मजदूर काम कराने लाती है उसके द्वारा दस्तावेज दिया जाता है यदि कोई कंपनी लापरवाही बरत रही है तो इस संबंध में जांच के लिए संबंधित थाना प्रभारी को निर्देशित किया जायेगा।

बस्तर में बघेल और बैज की धूम

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  • दोनों नेताओं के नाम पर उमड़ पड़ती है हजारों की भीड़ |
  • नुवाखानी जोहार भेंट कार्यक्रम में आदिवासियों का सैलाब
  • परंपरा – संस्कृति का संरक्षण ही मेरा ध्येय -लखेश्वर बघेल

जगदलपुर. बस्तर में दो बड़े आदिवासी नेताओं की जोड़ी ने अच्छी – खासी धूम मचा रखी है. ये दोनों नेता जहां भी जाते हैं, वहां हजारों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती है. इस भीड़ में सिर्फ आदिवासी ही नहीं, बल्कि दूसरे समुदायों के भी लोग सैकड़ों की तादाद में पहुंचते हैं. ये जोड़ी है विधायक लखेश्वर बघेल और सांसद दीपक बैज की. इन दोनों नेताओं का जादू संसदीय और विधानसभा क्षेत्र की जनता के सिर चढ़कर बोल रहा है इस जोड़ी की लोकप्रियता का लाभ अंततः कांग्रेस को ही मिलने वाला है. बस्तर क्षेत्र में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं बस्तर विधायक लखेश्वर बघेल और बस्तर के सांसद दीपक बैज की एकसाथ उपस्थिति जरूर देखी जा सकती है. इन दोनों नेताओं के बीच ट्यूनिंग और केमिस्ट्री भी गज़ब की है. दोनों की कार्यशैली तथा विचारधारा लगभग एक जैसी ही है. अपने – अपने क्षेत्र की जनता के प्रति समर्पण ने इन दोनों नेताओं को जनता के दिलो – दिमाग़ में रचा बसा दिया है. करण अर्जुन की इस जोड़ी का जलवा ऐसा है कि विरोधी दलों के स्थानीय स्तर के नेता कार्यकर्त्ता भी इन दोनों के मुरीद बन गए हैं.

विधायक बघेल द्वारा आयोजित किए जा रहे नुवाखानी जोहार भेंट कार्यक्रम में भी ऐसा ही नज़ारा देखने को मिल रहा है. आदिवासियों का यह प्राचीन और पारम्परिक पर्व है. आधुनिकता की अंधी दौड़ में अन्य परंपराओं की तरह इस पर्व की भी परंपरा कहीं विलुप्त ना हो जाए, इसे ध्यान में रखते हुए विधायक बघेल इस पर्व का सामूहिक आयोजन पंचायत स्तर पर सालों से करते आ रहे हैं. ऐसे आयोजनों में बघेल और बैज भी उत्साह के साथ शामिल होते हैं. ऐसा ही एक बड़ा कार्यक्रम बकावंड ब्लॉक के राजनगर में भी किया गया. आरंभ में लोगों ने ग्राम के देवी – देवताओं की पूजा अर्चना की. पश्चात अतिथियों का स्वागत बाजे गाजे एवं लोकनृत्य के साथ किया.
संजोए रखें परम्परा को: बघेल विधायक बघेल ने लोगों को नुवाखानी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि संस्कृति के संरक्षण के लिए शुरू यह कार्यक्रम अब इस मुकाम पर पहुंच गया है कि इसका लोगों को बेसब्री से इंतजार रहता है. उन्होंने कहा मेरी इच्छा है कि मैं विधायक रहूं या न रहूं, ऐसे कार्यक्रम सतत जारी रहेगा. आप लोगों से मेरा यही आग्रह है कि अपनी परम्परा को सदैव संजोये कर रखें. यही हमारी मूल संस्कृति की विशिष्ट पहचान है. इसलिए इस त्यौहार को काफ़ी महत्व दिया जाता है. यह मंच राजनीति का नहीं है पर सच तो यह है कि भाजपा के पास गरीबों के विकास के लिए कोई एजेंडा नहीं है. वह देश के दो पूंजीपतियों के लिए काम करती है. पिछले 15 सालों में छत्तीसगढ़ में भाजपा की उपलब्धि घर-घर में शौचालय बनाना ही है, वो भी आधे अधूरे है. कार्यक्रम में 22 पंचायतों के सरपंच, सिरहा, पुजारी समेत ग्रामीणों की सहभागिता रही.बघेल मेरे राजनैतिक गुरु : बैज सांसद बैज ने कहा कि बस्तर में बारह महीने त्योहार मनाया जाता है.


माटी तिहार, हरियाली, नुवाखानी, दियारी, मेला मड़ई में बस्तर की संस्कृति दिखती है. वहीं भाजपा नकली त्योहार जैसे बिजली, चावल, मोबाइल त्योहार मनाती रही इसलिए जनता के दिल से उतर गई. उन्होंने लोगों को नुवाखानी की बधाई देते हुए कहा कि जब से लखेश्वर बघेल विधायक बने हैं हर साल यह कार्यक्रम बस्तर विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में उत्सव की तरह मनाया जा रहा है. ऐसा और कहीं देखने को नहीं मिलता. हर साल बस्तर की संस्कृति पर आधारित इस कार्यक्रम में देवी-देवताओं की पूजा अर्चना, वृद्धजनों का सम्मान, बेटी, बहन, महिलाओं को साड़ी वितरण जनसहयोग से एक अद्वितीय कार्यक्रम है. उन्होंने कहा कि स्व. महेन्द्र कर्मा और लखेश्वर बघेल उनके राजनीतिक गुरु हैं उनसे काफी कुछ सीखने का अवसर मिला है और आप लोग जब भी आवाज देंगे हम साथ खड़े होंगे. जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण अध्यक्ष बलराम मौर्य ने कहा कि भाजपा सरकार ने समाज की मांग के बावजूद विश्व आदिवासी दिवस पर अवकाश घोषित नहीं किया. छ्ग में कांग्रेस की सरकार बनते ही इस दिवस पर अवकाश घोषित किया गया. यही नहीं सभी तीज त्योहारों पर अवकाश घोषित कर परम्परा और संस्कृति को सहेजने का काम किया है.
कार्यक्रम में जानकीराम सेठिया, शिवराम बिसाईं, उत्तम नाईक, दिनेश यदु, सुखदेई बघेल, धनुर्जय कश्यप, खीरमणि सेठिया, आशीष मिश्रा, मानसिंह कश्यप, जानकीराम भारती आयतुराम भारती, बद्रीनाथ जोशी, नित्या चंद्राकर, विजय चंद्राकर, बुदरू राम बघेल, दिनेश सिंह, एचआर खान, तुलाराम भारती, महेश्वर भद्रे, मोहन लाल भारती, अर्जुन कश्यप, मुन्नी भारती, कुंती कश्यप, जितेंद्र तिवारी, राजेश कुमार, महेंद्र बघेल,नीलम कश्यप, हेमकुमार, विजय नाग अशिविन,सहित सैकड़ों ग्रामीण व कांग्रेस के लोग उपस्थित थे.

भाजपा द्वारा सेवा का फगवाड़ा कार्यक्रम 2 अक्टूबर तक,आज गंगा मुंडा तालाब के पास हुई सफाई

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जगदलपुर -17 तारीख से 22 तारीख तक पखवाड़ा कार्यक्रम अंतर्गत आज बुधवार सुबह 8:00 बजे गंगा मुंडा तालाब के पास पार्क और विश्वकर्मा जी के मंदिर के प्रांगण में स्वच्छता कार्यक्रम चलाया गया ! सेवा ही संकल्प कार्यक्रम अंतर्गत अमृत सरोवर गंगा मुंडा तालाब और इसके आसपास की सफाई योजना के संयोजक संजय पांडे, कृष्णा निषाद और प्रभारी राजा यादव के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ताओं ने सेवा ही संकल्प अंतर्गत श्रमदान कर स्वच्छता में अपनी भूमिका निभाई, इस अवसर पर माननीय किरण देव जी पूर्व प्रदेश महामंत्री ने आसपास के लोगों से संपर्क कर तालाब को स्वच्छ रखने में सबकी मदद मांगी, लोगों से जागरूकता के लिए तालाब में अवशिष्ट को ना डालें इसलिए सभी से सहयोग मांगा,


संजय पांडे ने स्थानीय लोगों से ऐसी वस्तु को पानी में नहीं डालने के लिए आग्रह किया जो नष्ट नहीं होते हैं ऐसी वस्तुओं को चाहे उसमें पूजा की सामग्री ही क्यों ना हो तलाब के बाहर ही नष्ट करने का आग्रह किया !भारतीय जनता पार्टी परिवार ने मिलकर गंगा मुंडा तालाब के ऊपर बने छोटी सी पार्क और वहां स्थापित भगवान विश्वकर्मा जी के मंदिर प्रांगण के आसपास की सफाई की और सभी ने सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग ना हो सभी ने संकल्प लिया, इस अवसर पर योगेंद्र पांडे रजनीश पाणिग्राही बाबुल नाग सुरेश गुप्ता दिगंबर राव राजपाल कसेर ममता पोटाई योगेश शुक्ला अभय दीक्षित योगेश ठाकुर रोशन झा पंकज आचार्य शशि पाठक रवि कश्यप अजय पाल वीरेंद्र बहोते कृष्णा राय,अमर झा सूर्यभूषण सिंह अभिषेक तिवारी रितेश सोनी अतुल कौशल प्रेम सेठिया, प्रेम यादव गजेंद्र पगारे सतीश राव, वीरेंद्र जोशी, रामनरेश पांडेय शेखर शर्मा, संतोष झा योगेश मिश्रा शिरीष मिश्रा आलेख राज तिवारी राज पांडे तारा गुप्ता दशरथ गुप्ता सिकंदर दास विक्की यादव सिमरन मंडावी लोकेश के साथ भाजपा कार्यकर्ता मौजूद थे !

सांसद दीपक बैज ने केंद्रीय मंत्री गडकरी का माना आभार,कहा – मेरे लिए जनहित सर्वोपरि

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राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण से अब सफर हो जाएगा आसान | जगदलपुर – रायपुर के बीच यात्रा महज 4 घंटे में होगी पूरी

अर्जुन झा

जगदलपुर रायपुर -जगदलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग के जगदलपुर से धमतरी तक के हिस्से को फोरलेन में तब्दील करने की मंजूरी मिलने पर बस्तर सांसद दीपक बैज ने ख़ुशी जताई है. इसके लिए बैज ने केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा है कि मेरे लिए जनहित सर्वोपरि है. उल्लेखनीय है कि केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्रालय और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने रायपुर- जगदलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग क़े चौड़ीकरण की स्वीकृति प्रदान कर दी है. इसके तहत इस राष्ट्रीय राजमार्ग के जगदलपुर से धमतरी तक के लगभग 215 किलोमीटर लम्बी सड़क को टू लेन से फोरलेन बनाए जाने की योजना है.

बस्तर के कांग्रेस सांसद दीपक बैज ने अपने नई दिल्ली प्रवास के दौरान केंद्रीय सड़क एवं भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को ज्ञापन सौंपकर इस राष्ट्रीय राजमार्ग को फोरलेन में विकसित करने की मांग की थी. सांसद बैज ने इस संवाददाता को बताया कि केंद्रीय मंत्री गडकरी ने फौरी पहल करते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को टूलेन की फोरलेन में तब्दीली के लिए जरुरी मापदंडों का परीक्षण कराने के लिए निर्देशित किया था. प्राधिकरण के अधिकारियों ने भी इस प्रकरण में विशेष रूचि लेते हुए तत्परता दिखाई और परीक्षण का काम जल्द पूरा कर लिया. बैज ने कहा कि जिस गंभीरता के साथ केंद्रीय मंत्री गडकरी ने मेरी बात सुनी और मांग को तुरंत मान लिया इसके लिए मैं स्वयं तथा क्षेत्र की जनता की ओर से उनके प्रति आभार व्यक्त करता हूं. उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण की इस शर्त की पूर्ति जरुरी है कि उस मार्ग पर प्रतिदिन दस हजार से भी अधिक वाहनों की आवाज़ाही होनी चाहिए. बैज के मुताबिक जगदलपुर – रायपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर वर्तमान में रोजाना 15 से 20 हजार के बीच वाहनों का आवागमन होता है. राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा कराए गए सर्वे में मापदंड पर खरा उतरने के बाद ही फोरलेन की मंजूरी मिली है.मिलेगा बस्तर के विकास को नया आयाम बैज ने उम्मीद जताई कि सड़क चौड़ीकरण का कार्य जल्द आरंभ हो जाएगा. इसके बाद ओड़िशा, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश आदि राज्यों से बस्तर और समूचे छत्तीसगढ़ का सड़क संपर्क और भी सुगम तथा आसान हो जाएगा. वहीं जगदलपुर से रायपुर के बीच जो सफर अभी 6 घंटे में तय होता है, उस सफर को तय करने में सिर्फ साढ़े तीन घंटे से 4 घंटे का ही समय लगेगा. इससे लोगों के समय और पेट्रोलियम ईंधन पर होने वाले खर्च की भी बड़ी बचत होगी. माल परिवहन लागत कम होने से व्यापारियों को लाभ होगा तथा व्यापार भी समृद्ध होगा.सड़क चौड़ीकरण से बस्तर के विकास को भी नया आयाम मिलेगा. जनहित सर्वोपरि : बैज यहां यह बताना लाजिमी है कि इस राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण के लिए सांसद दीपक बैज सड़क से लेकर संसद तक में लगातार आवज उठाते आ रहे थे. अंततः उनकी कोशिश कामयाब हो ही गई. बावजूद अपने इन सतत प्रयासों का श्रेय के बजाय बैज ने इसके लिए केंद्रीय मंत्री गडकरी को खुले मन से साधुवाद देकर यह साबित कर दिया है कि वे क्षेत्रवासियों के हित पर दलगत राजनीति को हावी नहीं होने देते. उनका कहना भी यही है कि जो जनप्रतिनिधि मेरे क्षेत्र की भलाई के लिए काम करेगा, उसे सम्मान देना मेरा कर्तव्य है. चाहे वह जनप्रतिनिधि विरोधी दल का ही क्यों न हो ? बैज की ऐसी साफगोई आत्म मुग्धता से परे भावना ने ही उन्हें क्षेत्र में खासा लोकप्रिय बना रखा है.

रेल लाइन के ऊपर फ्लाई ओवर निर्माण कराने की मांग

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दल्ली राजहरा नगरपालिका क्षेत्र के वार्ड कमांक 20 व 13 के मध्य रेल माग बिछा हुआ है। जिस पर राजहरा माइंस व दल्ली माइंस से आयरन ओर प्रतिदिन दिन में लगभग 8-10 बार मालगाड़ी का परिवहन होता है। वर्तमान में अंतागढ़ से भी रेल लाईन बिछ गया है वर्तमान में तीन रेल लाईन पर गाडियों का आवागमन होता रहता है। जिसके कारण वार्ड नं. 13 के निवासियों को आवागमन की बहुत ही तकलीफ उठानी पड़ रही है। वार्ड नं. 13 के साथ साथ वार्ड नं. 15, 16 व 17 मोयरटोला के ग्रामीणों का भी इसी मार्ग से आना जाना होता है तथा आई.टी.आई. के छात्र भी इसी मार्ग से आना। जाना करते है। और मदिरा दुकान व गौठान भी इसी वार्ड में स्थित है। वार्ड नं. 13 में राजस्व की खाली जमीन है, जिससे एकलव्य विद्यालय आयर्वेदिक अस्पताल प्रस्तावित है। इसी मार्ग से आवागमन होता है। मालगाड़ी यात्रीगाड़ी के परिचालन से कभी कमी मार्ग के मध्य मालगाड़ा। कई घंटो तक खडी रहती है. जिससे लोगों को आने जाने के लिए कई घंटे तक इंतजार करना पड़ता है।

महोदय जी इस समस्या से निजात दिलाने के लिए फ्लाई ओवर का निर्माण करायाजाना अतिआवश्यक है। फ्लाई ओवर हेतु वार्ड कं. 18,19,20 से 13 के मध्य या वार्ड नं. 26 न्यु बस स्टैण्ड चौक से रेल्वे स्टेशन के बाजू पुलिया के पास से भोयरटोला के मध्य, गुप्ता चौक वार्ड कं. 21 दुर्गा मंच से वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के मध्य फ्लाई ओवर का निर्माण किया जाये। मान्यवर महोदय जी से विनम्र अनुरोध है कि वार्ड नं. 13, 14, 15, 16, 17 मोयरटोला के रहवासियों की समस्या के निराकरण करने फ्लाई ओवर का निर्माण कराने की असीम कृपा करेंगे।

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टाटा ग्रुप को दिया जाए नगरनार संयंत्र

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जनभावना: बस्तर अंचल के लोगों का कहना है कि निजी क्षेत्र के हवाले प्रस्तावित संयंत्र को करना ही है तो टाटा से बेहतर विकल्प नहीं – एयर इंडिया की तर्ज पर हो सकेगा नगरनार इस्पात संयंत्र का उद्धार – इस आदिवासी अंचल के लोगों की उम्मीदें भी होंगी फलीभूत

(अर्जुन झा)

जगदलपुर : बस्तर के लोगों की उम्मीदों और सपनों को पंख लगाने में सहायक साबित होने वाले प्रस्तावित नगरनार इस्पात संयंत्र को आकार देने की सरकारी कोशिश तेज हो गई है. चर्चा है कि सरकार इस संयंत्र को निजी क्षेत्र के हवाले करने जा रही है. ऐसी चर्चाओं के बीच अंचल से अब यह आवाज़ उठने लगी है क़ि नगरनार संयंत्र को निजी क्षेत्र के हवाले करना ही है, तो क्यों ना उसे टाटा ग्रुप के हवाले कर दिया जाए. इससे संयंत्र का कामकाज बेहतर ढंग से संचालित हो सकेगा और सदैव कर्मचारी एवं श्रमिक हित का ध्यान रखने वाला यह ग्रुप बस्तर के लोगों क़ी उम्मीदों पर खरा भी उतरेगा.

फिलहाल राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) के अधीन प्रस्तावित नगरनार इस्पात संयंत्र क़ी स्थापना के लिए कवायद तेज हो गई है. सूत्र बताते हैं कि सरकार इस इस्पात संयंत्र को निजी हाथों में सौंपने वाली है. इसके लिए टेंडर भी बुलाए जा रहे हैं. बस्तर के लोग चाहते हैं कि सरकार ही इस संयंत्र को चलाए और अगर निजी हाथों में सौंपने की ही सरकार की मंशा है, तो स्टील उद्योग का विशेषज्ञ माने जाने वाले टाटा उद्योग समूह को नगरनार संयंत्र सौंप दिया जाए. इसके पीछे लोगों की दलील है कि जिस तरह लगातार दुर्दशा का शिकार हो रही सरकारी विमानन कम्पनी एयर इंडिया टाटा के हाथ में जाने से सारे देश में यह उम्मीद जागी है कि अब इसका संचालन बेहतर तरीके से होगा और यात्री सुविधाओं में भी इजाफा होगा। ठीक उसी तरह से टाटा समूह के हाथों में जाने से नगरनार इस्पात संयंत्र भी विकास के आयाम को छुएगा. आज जिन क्षेत्रों में अच्छी विमान सेवाएं उपलब्ध हैं, वहां तेजी से विकास के रास्ते खुल रहे हैं। इसी भावना से बस्तर के मुख्यालय में विमान सेवा का दायरा बढ़ा है तो इसी सिलसिले में बस्तर में यह चर्चा भी छिड़ गई है कि बस्तर के नगरनार में स्थापित एनएमडीसी के स्टील प्लांट को निजी हाथों में सौंपने के लिए केंद्र सरकार उतावली है तो क्यों न इस प्लांट का संचालन अपने हाथ में लेने टाटा समूह पहल करे। कुछ साल पहले टाटा ने बस्तर में औद्योगिक विस्तार के लिए रूचि दिखाते हुए जमीन अधिग्रहण किया था। तब टाटा ग्रुप ने यहाँ बड़ी रकम खर्च कि थी. लेकिन बाद में कुछ ऐसे हालात बने कि टाटा का उद्योग स्थापित नहीं हो सका और आखिरकार समयावधि बीत जाने के बाद जमीन आदिवासियों को वापस हो गई। अगर टाटा का उद्योग बस्तर में स्थापित हो गया होता तो यहां के आदिवासियों को रोजगार के अवसर मिलते। अन्य बस्तरियों का भी भला होता तो बस्तर विकास की संभावनाएं भी तेजी से बढ़तीं। उम्मीद की जा रही थी कि टाटा का उद्योग स्थापित होने पर बस्तर का विकास टाटानगर जमशेदपुर की तर्ज पर संभव होगा। लेकिन किन्हीं कारणों से यह उम्मीद टूट गई। अब टाटा ने एयर इंडिया के उद्धार की पहल की है तो बस्तर में इन संभावनाओं की दस्तक का इंतजार शुरू हो गया है कि टाटा बस्तर के नगरनार स्टील प्लांट के लिए क्या वैसी ही पहल करेगा, जैसी एयर इंडिया के लिए की है? वैसे भी टाटा स्टील उद्योग क्षेत्र का एक विश्वसनीय ग्रुप है। टाटा समूह देश के लोगों के बीच औद्योगिक विकास के साथ साथ सामाजिक सरोकार का भी प्रतीक माना जाता है।
सांसद बैज उठा चुके हैं मुद्दा
नगरनार स्टील प्लांट के निजीकरण के प्रयासों का शुरू से ही भारी विरोध होता आया है. छत्तीसगढ़ विधानसभा में संकल्प पारित हो चुका है कि यह प्लांट राज्य शासन को दिया जाय। राज्य इसका संचालन करेगा। बस्तर सांसद दीपक बैज भी निजीकरण का पुरजोर विरोध करते हुए लोकसभा में भी यह मामला उठा चुके हैं लेकिन अब तक केंद्र की ओर ले ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि नगरनार स्टील प्लांट छत्तीसगढ़ सरकार को मिल सकता है। यदि यह राज्य को मिलता है तो सरकार खुद संचालित करे, यह बस्तर के लोग चाहते हैं किंतु तब की स्थिति में अगर राज्य ने किसी औद्योगिक संस्थान को इसके संचालन से जोड़ा तो बात वहीं की वहीं रह जायेगी। अब ऐसी स्थिति में कि जब नगरनार स्टील प्लांट का निजीकरण न होने की कोई गारंटी नहीं है तो स्टील क्षेत्र के अनुभवी उद्योग समूह टाटा द्वारा इस दिशा में पहल की जाय तो बस्तर के विकास की राह आसान हो सकती है। यहां के आदिवासियों ने पूर्व में टाटा को अपनी जमीन आखिर विकास की उम्मीद में ही तो दी थी। अब भी यही भावना है कि बस्तर क्षेत्र के विकास और बस्तरियों के रोजगार की संभावना लेकर टाटा की बस्तर वापसी होती है तो यह भी एक आशाओं से भरा कदम होगा। हम यहां इस मामले में राजनीतिक दृष्टिकोण से परे यह देखें कि यदि निजीकरण से बस्तर का कल्याण होने की उम्मीद निकल सकती है तो इसमें राजनीतिक अड़ंगेबाजी फिजूल है। बस्तर तो सिर्फ यही चाहेगा कि नगरनार स्टील प्लांट का संचालन ऐसा हो कि बस्तर के विकास को गति मिल सके और यहां के लोगों को रोजगार मिले।

टाटा ग्रुप को दिया जाए नगरनार संयंत्र

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जनभावना: बस्तर अंचल के लोगों का कहना है कि निजी क्षेत्र के हवाले प्रस्तावित संयंत्र को करना ही है तो टाटा से बेहतर विकल्प नहीं – एयर इंडिया की तर्ज पर हो सकेगा नगरनार इस्पात संयंत्र का उद्धार – इस आदिवासी अंचल के लोगों की उम्मीदें भी होंगी फलीभूत

(अर्जुन झा)

जगदलपुर : बस्तर के लोगों की उम्मीदों और सपनों को पंख लगाने में सहायक साबित होने वाले प्रस्तावित नगरनार इस्पात संयंत्र को आकार देने की सरकारी कोशिश तेज हो गई है. चर्चा है कि सरकार इस संयंत्र को निजी क्षेत्र के हवाले करने जा रही है. ऐसी चर्चाओं के बीच अंचल से अब यह आवाज़ उठने लगी है क़ि नगरनार संयंत्र को निजी क्षेत्र के हवाले करना ही है, तो क्यों ना उसे टाटा ग्रुप के हवाले कर दिया जाए. इससे संयंत्र का कामकाज बेहतर ढंग से संचालित हो सकेगा और सदैव कर्मचारी एवं श्रमिक हित का ध्यान रखने वाला यह ग्रुप बस्तर के लोगों क़ी उम्मीदों पर खरा भी उतरेगा.

फिलहाल राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) के अधीन प्रस्तावित नगरनार इस्पात संयंत्र क़ी स्थापना के लिए कवायद तेज हो गई है. सूत्र बताते हैं कि सरकार इस इस्पात संयंत्र को निजी हाथों में सौंपने वाली है. इसके लिए टेंडर भी बुलाए जा रहे हैं. बस्तर के लोग चाहते हैं कि सरकार ही इस संयंत्र को चलाए और अगर निजी हाथों में सौंपने की ही सरकार की मंशा है, तो स्टील उद्योग का विशेषज्ञ माने जाने वाले टाटा उद्योग समूह को नगरनार संयंत्र सौंप दिया जाए. इसके पीछे लोगों की दलील है कि जिस तरह लगातार दुर्दशा का शिकार हो रही सरकारी विमानन कम्पनी एयर इंडिया टाटा के हाथ में जाने से सारे देश में यह उम्मीद जागी है कि अब इसका संचालन बेहतर तरीके से होगा और यात्री सुविधाओं में भी इजाफा होगा। ठीक उसी तरह से टाटा समूह के हाथों में जाने से नगरनार इस्पात संयंत्र भी विकास के आयाम को छुएगा. आज जिन क्षेत्रों में अच्छी विमान सेवाएं उपलब्ध हैं, वहां तेजी से विकास के रास्ते खुल रहे हैं। इसी भावना से बस्तर के मुख्यालय में विमान सेवा का दायरा बढ़ा है तो इसी सिलसिले में बस्तर में यह चर्चा भी छिड़ गई है कि बस्तर के नगरनार में स्थापित एनएमडीसी के स्टील प्लांट को निजी हाथों में सौंपने के लिए केंद्र सरकार उतावली है तो क्यों न इस प्लांट का संचालन अपने हाथ में लेने टाटा समूह पहल करे। कुछ साल पहले टाटा ने बस्तर में औद्योगिक विस्तार के लिए रूचि दिखाते हुए जमीन अधिग्रहण किया था। तब टाटा ग्रुप ने यहाँ बड़ी रकम खर्च कि थी. लेकिन बाद में कुछ ऐसे हालात बने कि टाटा का उद्योग स्थापित नहीं हो सका और आखिरकार समयावधि बीत जाने के बाद जमीन आदिवासियों को वापस हो गई। अगर टाटा का उद्योग बस्तर में स्थापित हो गया होता तो यहां के आदिवासियों को रोजगार के अवसर मिलते। अन्य बस्तरियों का भी भला होता तो बस्तर विकास की संभावनाएं भी तेजी से बढ़तीं। उम्मीद की जा रही थी कि टाटा का उद्योग स्थापित होने पर बस्तर का विकास टाटानगर जमशेदपुर की तर्ज पर संभव होगा। लेकिन किन्हीं कारणों से यह उम्मीद टूट गई। अब टाटा ने एयर इंडिया के उद्धार की पहल की है तो बस्तर में इन संभावनाओं की दस्तक का इंतजार शुरू हो गया है कि टाटा बस्तर के नगरनार स्टील प्लांट के लिए क्या वैसी ही पहल करेगा, जैसी एयर इंडिया के लिए की है? वैसे भी टाटा स्टील उद्योग क्षेत्र का एक विश्वसनीय ग्रुप है। टाटा समूह देश के लोगों के बीच औद्योगिक विकास के साथ साथ सामाजिक सरोकार का भी प्रतीक माना जाता है।
सांसद बैज उठा चुके हैं मुद्दा
नगरनार स्टील प्लांट के निजीकरण के प्रयासों का शुरू से ही भारी विरोध होता आया है. छत्तीसगढ़ विधानसभा में संकल्प पारित हो चुका है कि यह प्लांट राज्य शासन को दिया जाय। राज्य इसका संचालन करेगा। बस्तर सांसद दीपक बैज भी निजीकरण का पुरजोर विरोध करते हुए लोकसभा में भी यह मामला उठा चुके हैं लेकिन अब तक केंद्र की ओर ले ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि नगरनार स्टील प्लांट छत्तीसगढ़ सरकार को मिल सकता है। यदि यह राज्य को मिलता है तो सरकार खुद संचालित करे, यह बस्तर के लोग चाहते हैं किंतु तब की स्थिति में अगर राज्य ने किसी औद्योगिक संस्थान को इसके संचालन से जोड़ा तो बात वहीं की वहीं रह जायेगी। अब ऐसी स्थिति में कि जब नगरनार स्टील प्लांट का निजीकरण न होने की कोई गारंटी नहीं है तो स्टील क्षेत्र के अनुभवी उद्योग समूह टाटा द्वारा इस दिशा में पहल की जाय तो बस्तर के विकास की राह आसान हो सकती है। यहां के आदिवासियों ने पूर्व में टाटा को अपनी जमीन आखिर विकास की उम्मीद में ही तो दी थी। अब भी यही भावना है कि बस्तर क्षेत्र के विकास और बस्तरियों के रोजगार की संभावना लेकर टाटा की बस्तर वापसी होती है तो यह भी एक आशाओं से भरा कदम होगा। हम यहां इस मामले में राजनीतिक दृष्टिकोण से परे यह देखें कि यदि निजीकरण से बस्तर का कल्याण होने की उम्मीद निकल सकती है तो इसमें राजनीतिक अड़ंगेबाजी फिजूल है। बस्तर तो सिर्फ यही चाहेगा कि नगरनार स्टील प्लांट का संचालन ऐसा हो कि बस्तर के विकास को गति मिल सके और यहां के लोगों को रोजगार मिले।

शीश स्वतः झुक जाता है बस्तर की इस “देवी ” के आगे पाना, पेंचिस को हथियार बना किया गरीबी-भुखमरी के असुर का संहार

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नई पीढ़ी की युवतियों और महिलाओं के लिए रोल मॉडल है हेमवती बस्तर की पहली ऑटो मेकेनिक है यह आदिवासी महिला
अर्जुन शीश स्वतः झुक जाता है बस्तर की इस “देवी ” के आगे पाना, पेंचिस को हथियार बना किया गरीबी-भुखमरी के असुर का संहार नई पीढ़ी की युवतियों और महिलाओं के लिए रोल मॉडल है हेमवती बस्तर की पहली ऑटो मेकेनिक है यह आदिवासी महिला

अर्जुन झा

बकावंड जगदलपुर : नारी को देवी और शक्ति का दर्जा यूं ही नहीं दिया गया है. आदिकाल से देवी तुल्य मानते आ रहे हैं हम नारी को . इसके पीछे कुछ तो वजह होगी ? वजह हमें नारी के स्वभाव, आचरण, व्यवहार और कार्यों में साफ नज़र आ जाती है. देवी पार्वती की तरह नारी के चेहरे और आंखों से ममता तथा वात्सल्य बरसता है, तो माता दुर्गा जी की तरह विपदाओं तथा बुराई रूपी असुरों से लड़ने की शक्ति भी परिलक्षित होती है. कुछ ऐसी शक्ति स्वरूपा छवि बस्तर की नारी हेमवती नाग में भी नज़र आती है, जिसने पाना, पेंचिस जैसे औजारों को हथियार बनाकर गरीबी और भुखमरी रूपी असुर का संहार किया है.

अपनी काबिलियत के दम पर हेमवती आज बस्तर की अन्य युवतियों तथा महिलाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत और उनका रोल मॉडल बन चुकी है. ऑटो रिपेयरिंग का कार्य करने वाली यह महिला तो पुरुषों को भी ऑटो रिपेयरिंग वाला काम सिखाती है. लोगों का शीश स्वतः झुक जाता है बस्तर की इस “देवी” के आगे. बस्तर ब्लाक गांव रेटावंड निवासी आदिवासी महिला हेमवती नाग ऑटो मैकेनिक का काम कर ना सिर्फ आत्मनिर्भर बन चुकी है, बल्कि अपने परिवार का भरण पोषण भी कर रही है. वह बस्तर संभाग में ऑटो मेकेनिक का काम करने पहली महिला है. हेमवती नई पीढ़ी की युवतियों और महिलाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत तथा रोल मॉडल से कतई कम नहीं है.

वहीं उसका हौसला उन पुरुषों और युवकों के गाल पर तमाचा मारता सा प्रतीत होता है, जो अक्सर बेरोजगारी का रोना रोते रहते हैं. इंसान अगर पूरे जज्बे के साथ कोई भी पेशा अपना ले तो वह हेमवती की तरह ही सम्मान और सुखपूर्वक जीवन निर्वाह कर सकता है. हेमवती नाग ने आर्थिक तंगी की वजह से पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी और कम उम्र में ही कुछ कर दिखाने की ठान ली. उसने ऑटो रिपेयरिंग के क्षेत्र में कदम रखा और सीखते- सीखते इस काम में पारंगत हो गई. शुरू-शुरू में वह सिर्फ मोटर सायकिलों की रिपेयरिंग का काम करती रही. फिर थोड़ी आमदनी बढ़ने पर उसने ऑटो पार्ट्स की छोटी सी दुकान भी ऑटो वर्कशॉप में ही खोल ली. आज उसकी दुकान और ऑटो वर्कशॉप चल पड़ी है. मोटर सायकलों की तकनिकी खराबियों को चंद मिनटों में ही दूर कर लेने की हेमवती की काबिलियत ने उसे अंचल में खासी प्रसिद्धि दिला दी और आज आलम यह है कि उसकी वर्कशॉप में मरम्मत के लिए बाईक लेकर पहुंचने वालों की लाईन लगी रहती है। सुखद अनुभूति देने वाली बात यह है कि हेमवती ने कई युवकों को भी ऑटो रिपेयरिंग के काम में प्रशिक्षित कर दिया है. इनमें से कुछ युवक तो हेमवती की वर्कशॉप में ही काम कर बेहतर ढंग से अपना जीवन यापन कर रहे हैं. हेमवती नाग कहती है कि बाइक रिपेयरिंग के क्षेत्र में काम करना किसी चुनौती से कम नहीं था, क्योंकि पुरुष वर्ग का इस सेक्टर में दबदबा रहा है। मगर हेमवती जज्बा और हौसला उसके क़दमों को लगातार आगे बढ़ाते रहे. इसी हौसले और जज्बे के दम पर हेमवती आज इस मुकाम तक़ पहुंच पाई है. अपने इस पेशे से वह इतना कमा लेती है कि किसी भी चीज के लिए उसे मोहताज होना नहीं पड़ता तथा दूसरों के सामने हाथ फैलाना नहीं पड़ता. अपनी रोज की आय से वह कुछ आर्थिक बचत भी कर लेती है. हेमवती की काम के प्रति लगन एवं कर्मनिष्ठा को देख हर किसी का सिर उसके सामने श्रद्धा और सम्मानपूर्वक झुक जाता है. तीन बच्चों की मां है यह मातृशक्ति हेमवती ने बताया कि शुरुआती दौर में कुछ लोगों ने यह कहते हुए उसे हतोत्साहित करने की कोशिश भी की कि मोटरसाइकिल रिपेयरिंग का काम आसान नहीं है, इसमें काफी मेहनत और ताकत लगती है। हेमवती ऐसे लोगों की बातों को नजरअंदाज कर अपने काम में लगी रही और अब वह इस कार्य में किसी भी मायने में पुरुषों से कतई कमतर नहीं है.:हेमवती नाग तीन बच्चों की मां है और सबसे छोटा बच्चा दो महीने का है. वह एक मां और पालनहार की भूमिका अच्छे ढंग से निभा रही है. युवतियों को दिलाएंगे ट्रेनिंग: बैज हेमवती नाग के हौसले और जज्बे से बेहद प्रभावित बस्तर सांसद दीपक बैज ने कहा है कि हेमवती सचमुच वंदनीय और शक्ति स्वरूपा है. बस्तर की हर युवती और महिला को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए. श्री बैज ने कहा कि वे हेमवती को और आगे बढ़ाने के लिए हर संभव मदद करेंगे. इसके साथ ही उनकी वर्कशॉप में बस्तर की अन्य युवतियों को प्रशिक्षण दिलाने का भी प्रयास करेंगे.


बकावंड जगदलपुर. नारी को देवी और शक्ति का दर्जा यूं ही नहीं दिया गया है. आदिकाल से देवी तुल्य मानते आ रहे हैं हम नारी को . इसके पीछे कुछ तो वजह होगी ? वजह हमें नारी के स्वभाव, आचरण, व्यवहार और कार्यों में साफ नज़र आ जाती है. देवी पार्वती की तरह नारी के चेहरे और आंखों से ममता तथा वात्सल्य बरसता है, तो माता दुर्गा जी की तरह विपदाओं तथा बुराई रूपी असुरों से लड़ने की शक्ति भी परिलक्षित होती है. कुछ ऐसी शक्ति स्वरूपा छवि बस्तर की नारी हेमवती नाग में भी नज़र आती है, जिसने पाना, पेंचिस जैसे औजारों को हथियार बनाकर गरीबी और भुखमरी रूपी असुर का संहार किया है. अपनी काबिलियत के दम पर हेमवती आज बस्तर की अन्य युवतियों तथा महिलाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत और उनका रोल मॉडल बन चुकी है. ऑटो रिपेयरिंग का कार्य करने वाली यह महिला तो पुरुषों को भी ऑटो रिपेयरिंग वाला काम सिखाती है. लोगों का शीश स्वतः झुक जाता है बस्तर की इस “देवी” के आगे.
बस्तर ब्लाक गांव रेटावंड निवासी आदिवासी महिला हेमवती नाग ऑटो मैकेनिक का काम कर ना सिर्फ आत्मनिर्भर बन चुकी है, बल्कि अपने परिवार का भरण पोषण भी कर रही है. वह बस्तर संभाग में ऑटो मेकेनिक का काम करने पहली महिला है. हेमवती नई पीढ़ी की युवतियों और महिलाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत तथा रोल मॉडल से कतई कम नहीं है. वहीं उसका हौसला उन पुरुषों और युवकों के गाल पर तमाचा मारता सा प्रतीत होता है, जो अक्सर बेरोजगारी का रोना रोते रहते हैं. इंसान अगर पूरे जज्बे के साथ कोई भी पेशा अपना ले तो वह हेमवती की तरह ही सम्मान और सुखपूर्वक जीवन निर्वाह कर सकता है. हेमवती नाग ने आर्थिक तंगी की वजह से पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी और कम उम्र में ही कुछ कर दिखाने की ठान ली. उसने ऑटो रिपेयरिंग के क्षेत्र में कदम रखा और सीखते- सीखते इस काम में पारंगत हो गई. शुरू-शुरू में वह सिर्फ मोटर सायकिलों की रिपेयरिंग का काम करती रही. फिर थोड़ी आमदनी बढ़ने पर उसने ऑटो पार्ट्स की छोटी सी दुकान भी ऑटो वर्कशॉप में ही खोल ली. आज उसकी दुकान और ऑटो वर्कशॉप चल पड़ी है. मोटर सायकलों की तकनिकी खराबियों को चंद मिनटों में ही दूर कर लेने की हेमवती की काबिलियत ने उसे अंचल में खासी प्रसिद्धि दिला दी और आज आलम यह है कि उसकी वर्कशॉप में मरम्मत के लिए बाईक लेकर पहुंचने वालों की लाईन लगी रहती है। सुखद अनुभूति देने वाली बात यह है कि हेमवती ने कई युवकों को भी ऑटो रिपेयरिंग के काम में प्रशिक्षित कर दिया है. इनमें से कुछ युवक तो हेमवती की वर्कशॉप में ही काम कर बेहतर ढंग से अपना जीवन यापन कर रहे हैं.
हेमवती नाग कहती है कि बाइक रिपेयरिंग के क्षेत्र में काम करना किसी चुनौती से कम नहीं था, क्योंकि पुरुष वर्ग का इस सेक्टर में दबदबा रहा है। मगर हेमवती जज्बा और हौसला उसके क़दमों को लगातार आगे बढ़ाते रहे. इसी हौसले और जज्बे के दम पर हेमवती आज इस मुकाम तक़ पहुंच पाई है. अपने इस पेशे से वह इतना कमा लेती है कि किसी भी चीज के लिए उसे मोहताज होना नहीं पड़ता तथा दूसरों के सामने हाथ फैलाना नहीं पड़ता. अपनी रोज की आय से वह कुछ आर्थिक बचत भी कर लेती है. हेमवती की काम के प्रति लगन एवं कर्मनिष्ठा को देख हर किसी का सिर उसके सामने श्रद्धा और सम्मान
पूर्वक झुक जाता है.
तीन बच्चों की मां है यह मातृशक्ति
हेमवती ने बताया कि शुरुआती दौर में कुछ लोगों ने यह कहते हुए उसे हतोत्साहित करने की कोशिश भी की कि मोटरसाइकिल रिपेयरिंग का काम आसान नहीं है, इसमें काफी मेहनत और ताकत लगती है। हेमवती ऐसे लोगों की बातों को नजरअंदाज कर अपने काम में लगी रही और अब वह इस कार्य में किसी भी मायने में पुरुषों से कतई कमतर नहीं है.:हेमवती नाग तीन बच्चों की मां है और सबसे छोटा बच्चा दो महीने का है. वह एक मां और पालनहार की भूमिका अच्छे ढंग से निभा रही है.
युवतियों को दिलाएंगे ट्रेनिंग: बैज
हेमवती नाग के हौसले और जज्बे से बेहद प्रभावित बस्तर सांसद दीपक बैज ने कहा है कि हेमवती सचमुच वंदनीय और शक्ति स्वरूपा है. बस्तर की हर युवती और महिला को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए. श्री बैज ने कहा कि वे हेमवती को और आगे बढ़ाने के लिए हर संभव मदद करेंगे. इसके साथ ही उनकी वर्कशॉप में बस्तर की अन्य युवतियों को प्रशिक्षण दिलाने का भी प्रयास करेंगे.

अभाविप ने विरोध प्रदर्शन करते हुवे फुका उच्च शिक्षा मंत्री का पुतला प्रत्यक्ष प्रणाली से की छात्रसंघ चुनाव की माँग

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आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद छत्तीसगढ़ प्रांत द्वारा प्रदेश के प्रत्येक विश्वविद्यालय महाविद्यालय परिसर के सम्मुख छात्रसंघ चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से कराने की माँग को लेकर उच्चशिक्षा मंत्री का पुतला दहन किया गया । ज्ञात हो अभाविप प्रारंभ से ही प्रत्यक्ष प्रणाली से छात्रसंघ चुनाव की मांग कर रहा है और इस संदर्भ में इस वर्ष प्रत्येक महाविद्यालय और विश्वविद्यालयों में ज्ञापन सौंपा था । अभाविप का सुविचारित मत है कि छात्रसंघ चुनाव के माध्यम से ही समाज के सम्मुख एक शसक्त छात्र नेतृत्व उभर कर सामने आती है जो निकट भविष्य में समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में समाज का नेतृत्व करती है ।

प्रदेश मंत्री मनोज वैष्णव ने कहां की राजस्थान में जिस तरह से छात्र संघ चुनाव हुए और राजस्थान की युवा शक्ति ने जिस तरह से सत्तारूढ़ पार्टी के छात्र संगठन को नकारा उससे छत्तीसगढ़ सरकार डरी हुई है और कहीं पूरे प्रदेश की युवा शक्ति उसे नकार न दे इस डर से वह छात्र संघ चुनावों से पीछे हट रही है , प्रदेश सरकार छात्र शक्ति से डर रही है। जिला संयोजक वरूण साहनी ने कहा कि अभाविप विद्यार्थियों के अधिकार के लिए सैदव संघर्षरत रही है हम विद्यार्थियों के अधिकार का हनन नही होने देंगे । इसी निमित्त आज बस्तर विश्वविद्यालय के सम्मुख विद्यार्थियों संग अभाविप बस्तर द्वारा उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल का पुतला दहन कर विरोध दर्ज किया गया |

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