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बालोद में युवती पर एसिड अटैक, चेहरा और आंख बुरी तरह झुलसी

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आमापारा में वारदात के बाद तांदुला बांध की ओर भागा आरोपी, सफेद शर्ट पहने युवक की तलाश तेजगंभीर हालत में रायपुर रेफर, पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगालना शुरू किया

बालोद, 5 अक्टूबर 2026। जिला मुख्यालय बालोद के आमापारा क्षेत्र में सोमवार दोपहर एक 22 वर्षीय युवती पर अज्ञात युवक द्वारा एसिड फेंककर हमला किए जाने की सनसनीखेज घटना सामने आई है। अचानक हुए इस हमले में युवती का चेहरा, आंख और शरीर का दाहिना हिस्सा गंभीर रूप से झुलस गया। घटना के बाद आसपास के लोगों ने तत्काल युवती को जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए रायपुर रेफर किए जाने की जानकारी है। वारदात के बाद आरोपी युवक मौके से फरार हो गया, जिसकी पुलिस तलाश कर रही है।प्रारंभिक जानकारी के अनुसार युवती पढ़ाई के सिलसिले में आमापारा स्थित लाइब्रेरी गई थी और दोपहर करीब 12:30 बजे वहां से घर लौट रही थी। इसी दौरान सिंचाई कॉलोनी के पास पहले से घात लगाए बैठे एक युवक ने अचानक उसके चेहरे पर एसिड फेंक दिया। एसिड पड़ते ही युवती तेज जलन से चीखने-चिल्लाने लगी।

उसकी आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और तत्काल उसे अस्पताल पहुंचाया।बताया जा रहा है कि हमले के बाद आरोपी युवक पैदल ही मौके से फरार हुआ और तांदुला बांध की ओर जाने की सूचना है। प्रारंभिक तौर पर आरोपी के सफेद रंग की शर्ट पहने होने की जानकारी सामने आई है। घटना के बाद पुलिस ने आसपास के क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगालने शुरू कर दिए हैं। कुछ फुटेज में आरोपी के भागते हुए दिखाई देने की जानकारी भी सामने आई है।घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी, थाना प्रभारी सहित पुलिस टीम मौके पर पहुंची। घटनास्थल को सुरक्षित कर जांच की गई तथा फॉरेंसिक टीम से साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई की जा रही है। मौके से एसिड से जले हुए कपड़े मिलने की भी जानकारी है। पुलिस आसपास के सीसीटीवी फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की पहचान करने में जुटी है।जिला अस्पताल में प्राथमिक उपचार के दौरान युवती की हालत गंभीर देखते हुए चिकित्सकों ने उसे रायपुर रेफर किया। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि युवती पर हमला किस वजह से किया गया और आरोपी युवक उसका परिचित था या नहीं। हमले में किस प्रकार के एसिड का इस्तेमाल किया गया, इसकी भी जांच की जा रही है।घटना के बाद आमापारा सहित आसपास के क्षेत्र में सनसनी फैल गई है। पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर तलाश तेज कर दी है। फिलहाल पुलिस की ओर से आरोपी की पहचान और हमले के कारण को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। मामले में पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही घटना के पीछे की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।

मुर्दों के नाम पर हजम कर गए एक लाख रुपए

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उड़ियापाल में कागजों पर बना मुक्तिधाम शेड

1 लाख भुगतान का रिकॉर्ड, जमीन पर शेड का कोई अता-पता नहीं =*-अर्जुन झा

बकावंड जनपद पंचायत बकावंड की ग्राम पंचायतों में 15वें वित्त आयोग मद की राशि को हजम करने का खुला खेल चल रहा है। भ्रष्टाचार में बेशर्मी इस कदर हावी हो चुकी है कि सरपंच, सचिव एवं अधिकारी मुर्दों के नाम पर भी राशि चट करने में संकोच नहीं कर रहे हैं। ऐसा ही एक बेहद शर्मनाक मामला बकावंड विकासखंड की ग्राम पंचायत उड़ियापाल से सामने आया है, जहां मुक्तिधाम में शेड निर्माण के नाम पर पूरे एक लाख रुपए चट कर लिए गए हैं, मगर शेड का कहीं अस्तित्व भी नहीं है।

उड़ियापाल में 15वें वित्त आयोग की राशि का को लेकर सामने आए इस गड़बड़ी के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। यहां मुक्तिधाम शेड निर्माण के नाम पर हुए कथित भुगतान और आरटीआई से सामने आई जानकारी ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार ई-ग्राम स्वराज के एक्सपेंडिचर डिटेल में वाउचर क्रमांक एक्सवीएफसी/2024-25/P/11, दिनांक 08 अक्टूबर 2024 के तहत “मुक्तिधाम शेड निर्माण कार्य का राशि भुगतान” के नाम से 1 लाख का भुगतान दर्ज दिखाई देता है। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि जिस मुक्तिधाम शेड के निर्माण के नाम पर यह भुगतान दर्ज है, मौके पर ऐसा निर्माण दिखाई नहीं देता। यही अंतर अब पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल बन गया है। 15वें वित्त आयोग की राशि का उद्देश्य गांवों में मूलभूत सुविधाओं और विकास कार्यों को मजबूती देना है। लेकिन उड़ियापाल में मुक्तिधाम शेड निर्माण के नाम पर भुगतान का रिकॉर्ड सामने आने के बाद ग्रामीण पूछ रहे हैं कि आखिर जिस कार्य के नाम पर राशि जारी हुई, वह कार्य जमीन पर कहां है? ग्रामीणों का आरोप है कि बिना निर्माण कार्य कराए ही राशि का भुगतान कर दिया गया। उनका यह भी आरोप है कि भुगतान प्रक्रिया में बिल-वाउचर का इस्तेमाल किया गया और पंचायत स्तर पर जिम्मेदार लोगों की भूमिका संदिग्ध है।

हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।मामले का सबसे अहम पहलू सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी है। ग्रामीणों के अनुसार आरटीआई के माध्यम से पंचायत से मुक्तिधाम शेड निर्माण से संबंधित जानकारी मांगी गई थी। प्राप्त जवाब में कथित रूप से पंचायत ने इस तरह के कार्य से ही इंकार किया। यहीं से मामला और गंभीर हो जाता है। क्योंकि एक तरफ ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर मुक्तिधाम शेड निर्माण के नाम के लिए 1 लाख रुपए का भुगतान दर्ज है, तो दूसरी तरफ आरटीआई के जवाब में संबंधित कार्य के संबंध में अलग स्थिति सामने आने का दावा किया जा रहा है।ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि अगर कार्य हुआ था तो आरटीआई में उसकी जानकारी क्यों नहीं?और अगर कार्य नहीं हुआ था तो सरकारी पोर्टल पर भुगतान किस आधार पर दर्ज हुआ?

घेरे में पूर्व सरपंच-सचिव

ग्रामीणों ने इस मामले में पूर्व सरपंच और तत्कालीन सचिव की मिलीभगत के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर राशि निकाले जाने की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि दस्तावेजों में कार्य पूर्ण दिखाकर भुगतान किया गया है, तो इसकी जांच केवल कागजों तक सीमित न रहकर मौके के भौतिक सत्यापन के साथ की जानी चाहिए। साथ ही भुगतान से जुड़े बिल, वाउचर, संबंधित वेंडर, बैंक भुगतान और कार्य पूर्णता से संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की मांग की गई है।ग्रामीणों के मुताबिक इस मामले को लेकर जनपद पंचायत बकावंड के अधिकारियों के समक्ष शिकायत भी की गई। उनका कहना है कि जांच का आश्वासन तो मिला, लेकिन अब तक मामले में कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पंचायत के रिकॉर्ड और मौके की स्थिति में अंतर है तो इसकी जांच में देरी नहीं होनी चाहिए।

2 साल से जांच की मांग

उड़ियापाल के ग्रामीणों ने अब केवल मुक्तिधाम शेड ही नहीं, बल्कि पंचायत में पिछले दो वर्षों के दौरान 15वें वित्त आयोग सहित अन्य मदों से कराए गए सभी कार्यों की जांच की मांग की है। ग्रामीणों की मांग है कि प्रत्येक कार्य का मौके पर भौतिक सत्यापन कराया जाए और भुगतान से संबंधित दस्तावेजों की जांच की जाए। यदि जांच में राशि के दुरुपयोग या अनियमितता की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई के साथ सरकारी राशि की वसूली भी की जाए।

देना होगा हिसाब: लखेश्वर कश्यप

आदिवासी समाज के युवा जिला अध्यक्ष लखेश्वर कश्यप ने कहा कि गांवों के विकास के लिए आने वाली राशि ग्रामीणों के हित की राशि है। इसमें किसी भी प्रकार की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई और राशि की वसूली की मांग की।उड़ियापाल का यह मामला अब सिर्फ एक लाख रुपये के भुगतान तक सीमित नहीं रह गया है। एक तरफ सरकारी पोर्टल पर मुक्तिधाम शेड निर्माण के नाम पर भुगतान का रिकॉर्ड, दूसरी तरफ मौके पर निर्माण नहीं होने का ग्रामीणों का दावा, और तीसरी तरफ आरटीआई के जवाब में कार्य से कथित इंकार, ये तीनों बातें पूरे मामले को गंभीर बनाती हैं। अब सवाल प्रशासन से है कि क्या इन रिकॉर्डों का मिलान कर वास्तविकता सामने लाई जाएगी? क्या मौके पर भौतिक सत्यापन होगा? और अगर सरकारी राशि का दुरुपयोग प्रमाणित होता है, तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी? फिलहाल ग्रामीणों को जांच का इंतजार है और हम इस मामले से जुड़े दस्तावेजों एवं प्रशासनिक कार्रवाई पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

राजनीति से परे दिखी मानवीय संवेदना, शंकुतला कश्यप के पति का हाल जानने पहुंचे कांग्रेस नेता

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जगदलपुर राजनीतिक मतभेदों से इतर मानवीय संवेदना की एक तस्वीर सोमवार को डिमरापाल स्थित कांटिनेंटल सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में देखने को मिली। जिला पंचायत सदस्य श्रीमती शंकुतला कश्यप के पति के अस्वस्थ होने की जानकारी मिलने पर कांग्रेस के पदाधिकारी एवं जनप्रतिनिधि अस्पताल पहुंचे और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली।इस दौरान महिला कांग्रेस प्रदेश सचिव श्याम कुमारी ध्रुव, बस्तर जिला कांग्रेस ग्रामीण उपाध्यक्ष जितेंद्र जैन, जनपद सदस्य रूक्मणी, बड़े अलनार सरपंच मंगली बघेल एवं विरेन्द्र पांडेय ने परिवारजनों से मुलाकात कर स्वास्थ्य की वर्तमान स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हुए परिवार को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।इस दौरान सामने आई तस्वीर में राजनीतिक विचारधाराओं से अलग मानवीय रिश्तों और सामाजिक संवेदना का भाव नजर आया। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि राजनीति अपने स्थान पर है, लेकिन किसी के सुख-दुख में साथ खड़ा होना सामाजिक जिम्मेदारी और इंसानियत का परिचायक है।

संवाद और समस्या समाधान पर जोर, एसडीएम गगन शर्मा के कार्यकाल को लोगों ने सराहा

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बस्तर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व गगन शर्मा के बस्तर से रायपुर स्थानांतरण के बाद उनके कार्यकाल को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा रही। प्रशासनिक जिम्मेदारियों के निर्वहन के साथ आम नागरिकों और पत्रकारों के साथ संवाद बनाए रखने की उनकी कार्यशैली को लोगों ने सराहा।गगन शर्मा की कार्यशैली की एक प्रमुख विशेषता आम नागरिकों और पत्रकारों के लिए उनकी उपलब्धता रही। विभिन्न विषयों पर जानकारी लेने के लिए संपर्क करने पर वे यथासंभव फोन रिसीव कर सवालों का जवाब देने तथा संबंधित विषय की जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास करते रहे। नागरिकों की समस्याओं को सुनकर संबंधित विभाग या अधिकारी से समन्वय कर समाधान की दिशा में पहल करना भी उनके कार्यकाल का हिस्सा रहा।ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ी समस्याओं और राजस्व संबंधी मामलों में भी उन्होंने संबंधित अधिकारियों से जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई की दिशा में प्रयास किया। प्रशासन और आम नागरिकों के बीच संवाद को महत्वपूर्ण मानते हुए समस्याओं को सुनना और उनके निराकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना उनकी कार्यशैली में दिखाई दिया।उनके स्थानांतरण पर स्थानीय नागरिकों और पत्रकारों ने उनके कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि प्रशासनिक पद की जिम्मेदारियों के साथ जनता के लिए उपलब्ध रहना और उनकी समस्याओं को सुनना प्रशासनिक व्यवस्था में विश्वास कायम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गगन शर्मा के कार्यकाल में संवाद और समस्या समाधान की दिशा में किए गए प्रयासों को इसी दृष्टि से देखा जा रहा है।

प्रोजेक्ट री कांटेक्ट की पहल साइबर जागृति अभियान का हुआ समापन

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जगदलपुर। बस्तर पुलिस की ओर से एसपी शलभ कुमार सिन्हा के मार्गदर्शन में 15 अगस्त से 2 अक्टूबर तक चलाए गए “साइबर जागृति अभियान” का समापन किया गया। अभियान का उद्देश्य आम नागरिकों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करना तथा सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के लिए प्रेरित करना रहा।अभियान के दौरान बस्तर पुलिस की टीमों ने स्कूल, कॉलेज, संस्थानों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन एवं ग्राम चौपालों तक पहुंचकर व्यापक साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए। इस दौरान लगभग 2 लाख 29 हजार नागरिकों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया।नागरिकों को OTP, PIN, CVV, UPI PIN एवं अन्य गोपनीय बैंकिंग जानकारी साझा नहीं करने, अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करने, संदिग्ध APK अथवा एप डाउनलोड करने से बचने तथा डिजिटल अरेस्ट जैसी साइबर ठगी से सतर्क रहने की जानकारी दी गई। साथ ही साइबर अपराध की स्थिति में तत्काल पुलिस को सूचना देने के लिए प्रेरित किया।साइबर जागृति अभियान के दौरान बस्तर पुलिस के साइबर विभाग द्वारा “Project Reconnect” की पहल की गई। इसके माध्यम से तकनीकी संसाधनों और साइबर पुलिस की सतत कार्रवाई से गुम हुए मोबाइल फोन की पहचान एवं बरामदगी कर उन्हें उनके वास्तविक धारकों तक वापस पहुंचाया गया।Project Reconnect के अंतर्गत लगभग 25 लाख रुपये मूल्य के 151 गुम मोबाइल फोन उनके वास्तविक धारकों को सौंपे गए।

पुलिस अधीक्षक शलभ कुमार सिन्हा एवं सिटी एसपी श्री सुमित कुमार धोत्रे द्वारा लाभार्थियों को मोबाइल फोन सुपुर्द किए गए।मोबाइल फोन वापस मिलने पर नागरिकों के चेहरों पर खुशी और संतोष देखने को मिला। यह पहल केवल खोई हुई संपत्ति की वापसी नहीं, बल्कि नागरिकों और पुलिस के बीच विश्वास को और मजबूत करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास रहा।साइबर सुरक्षा का संकल्पसमापन कार्यक्रम में उपस्थित नागरिकों एवं मोबाइल प्राप्तकर्ताओं को “साइबर सुरक्षा संकल्प” दिलाया गया। नागरिकों ने OTP, PIN, CVV एवं अन्य गोपनीय जानकारी साझा नहीं करने, अनजान लिंक से सावधान रहने तथा स्वयं के साथ अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करने का संकल्प लिया।बस्तर पुलिस ने नागरिकों से अपील की कि साइबर जागृति अभियान का समापन केवल एक अभियान का समापन है, साइबर जागरूकता का नहीं। साइबर अपराधी लगातार नए तरीके अपना रहे हैं, इसलिए सतर्कता और जागरूकता ही सबसे प्रभावी सुरक्षा है।

बाढ़ ने रसोई में भी भरपाया कहर सब्जी का फसल नष्ट होने से कीमतों में तेजी

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जगदलपुर। बीते दिनों बस्तर में हुई भारी बारिश के चलते नदी नालों का जल स्तर बढ़ने व बाढ़ के कहर से इंसानी जिंदगी तो प्रभावित हुई ही, वही धान तथा सब्जियों की फसल को व्यापक नुकसान पहुंचा है। खेतों में पानी भर जाने से किसानों की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं। इसका सीधा असर बाजार पर देखा जा रहा है। रविवार को संभाग की सबसे बड़ी सब्जी मंडी संजय बाजार में पखवाड़े भर पूर्व की तुलना में करीब 25% अधिक दाम पर सब्जियां बेची गई। सब्जी के थोक विक्रेता मोहन राव ने बताया कि बस्तर में रायपुर समेत ओड़िशा से काफी मात्रा में सब्जियों की आवक होती है। ओड़िशा में भारी बारिश व इंद्रावती नदी में बाढ़ के चलते काफी कम मात्रा में ही सब्जियों की आवक हो रही है। वही स्थानीय स्तर पर बकावंड, बस्तर लौंहंडीगुडा व तोकापाल जनपद में भी फसल नष्ट होने से आवक पर भारी फर्क पड़ा है।इसलिए 20 से करीब 25% कीमत बढ़ी है। उन्होंने बताया कि पखवाड़े भर बाद लोकल आवक होने से कीमतों में कुछ फर्क पड़ने की उम्मीद है.रविवार को गोभी 100 रूपये प्रति किलो पत्ता गोभी ₹40 हरी मिर्च ₹70 गाजर 40 चुकंदर 50 शिमला मिर्च 80 खीर सो भट 40 ऊंचाई 60 कद्दू 30 व कुंदरु ₹60 प्रति किलो की दर से बेची गई.

बाढ़ प्रभावित 58 विद्यार्थियों को मिली नई शिक्षण सामग्री कोहकापाल में आर्थिक प्रकोष्ठ ने चलाया सेवा अभियान, बैग-कॉपी सहित स्टेशनरी और बिस्किट का किया वितरण

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जगदलपुर। बाढ़ से प्रभावित विद्यार्थियों की पढ़ाई को पटरी पर लाने के उद्देश्य से भाजपा आर्थिक प्रकोष्ठ बस्तर द्वारा शिक्षण सामग्री वितरण अभियान लगातार जारी है। इसी क्रम में आर्थिक प्रकोष्ठ की टीम ने प्रवीण वार्ड स्थित कोहकापाल बस्ती के जगतु महारा में पहुंचकर 58 बाढ़ प्रभावित विद्यार्थियों को स्कूल बैग, नोटबुक, रजिस्टर, कंपास, पेन-पेंसिल सहित अन्य शिक्षण सामग्री का वितरण किया। इस दौरान बच्चों को बिस्किट भी वितरित किए गए।गौरतलब है कि हाल ही में बस्तर में आई बाढ़ से जिले के कई ग्रामों के साथ जगदलपुर शहर की निचली बस्तियां और अनेक वार्ड भी प्रभावित हुए थे। बाढ़ के पानी में कई विद्यार्थियों की किताबें, कॉपियां, स्कूल बैग और अन्य शिक्षण सामग्री बह गई अथवा पानी में खराब हो गई। आर्थिक प्रकोष्ठ द्वारा ऐसे प्रभावित क्षेत्रों को चिन्हांकित कर विद्यार्थियों की सूची तैयार की जा रही है और आवश्यकता के अनुसार उन्हें शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।

इससे पूर्व आर्थिक प्रकोष्ठ द्वारा डोंगा घाट बस्ती में भी पहुंचकर 60 से अधिक बाढ़ प्रभावित विद्यार्थियों को शिक्षण सामग्री वितरित की गई थी।शिक्षा को पटरी पर लाने का प्रयासकार्यक्रम को संबोधित करते हुए भाजपा जिला अध्यक्ष वेद प्रकाश पांडे ने कहा कि आर्थिक प्रकोष्ठ द्वारा बाढ़ प्रभावित विद्यार्थियों के बीच शिक्षण सामग्री पहुंचाने का कार्य सराहनीय पहल है। बाढ़ के कारण बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी सामग्री नष्ट हुई है, ऐसे में उन्हें दोबारा आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराना उनकी शिक्षा को जारी रखने में महत्वपूर्ण सहयोग है। उन्होंने कहा कि अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचकर उसकी सेवा करना ही अंत्योदय की मूल भावना है।आर्थिक प्रकोष्ठ के प्रदेश सह-संयोजक मनीष पारख ने कहा कि आर्थिक प्रकोष्ठ कमजोर, गरीब एवं वंचित वर्ग के लोगों को संबल प्रदान करने के लिए सदैव प्रयासरत रहता है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में विभिन्न संस्थाओं और प्रशासन द्वारा राहत कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में आर्थिक प्रकोष्ठ ने विशेष रूप से प्रभावित विद्यार्थियों की सहायता करने का निर्णय लिया, ताकि शिक्षण सामग्री के अभाव में उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो।जिला संयोजक अविनाश जैन ने कहा कि बाढ़ में जिन बच्चों की शिक्षण सामग्री नष्ट हुई है, उन्हें दोबारा स्कूल सामग्री उपलब्ध कराना आत्मसंतोष देने वाला कार्य है। इससे बच्चे फिर से स्कूल जाकर अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगे और अपने भविष्य के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे।कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन आर्थिक प्रकोष्ठ के जिला सह-संयोजक परमेश राजा ने किया।ये रहे मौजूदकार्यक्रम में जिला महामंत्री परिषद बेसरा, जिला कार्यालय मंत्री एवं एल्डरमैन रोहित त्रिवेदी, शहर पश्चिम मंडल अध्यक्ष प्रकाश झा, प्रदेश सह-संयोजक आर्थिक प्रकोष्ठ मनीष पारख, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य राजू कुमार बोथरा, कार्यसमिति सदस्य शिरीष मिश्रा, किसान मोर्चा जिला अध्यक्ष योगेश सिंह, अनुसूचित जाति मोर्चा जिला अध्यक्ष विनय सोना, स्वच्छता प्रकोष्ठ जिला संयोजक राजा यादव, जिनेन्द्र टाटिया, महावीर बाफना, श्रीमती धनिता ठाकुर, श्रीमती किरण चौरसिया सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

विस्थापितों का दर्द साझा किया विधायक विक्रम मंडावी ने

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तेलंगाना में रह रहे हैं बस्तर के लगभग 60 हजार आदिवासी

वर्षों बाद अपने नेता से मिलकर भावुक हो उठे विस्थापित ग्रामीण

जगदलपुर अपनी जमीन से वर्षों की दूरी, अनकही पीड़ा और अधूरी राह के बीच बीजापुर के विधायक विक्रम मंडावी शनिवार और रविवार को तेलंगाना के दो दिवसीय दौरे पर रहे। वे उन बस्तियों में पहुंचे, जहां छत्तीसगढ़ के बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा जिलों से विस्थापित होकर बसे आदिवासी परिवार आज भी अनेक समस्याओं को झेल रहे और समस्याओं के समाधान के लिए सहारा की राह देख रहे हैं? इन लोगों के लिए बीजापुर के विधायक उनके लिए नई उम्मीद बनकर तेलंगाना पहुंचे। दौरे के समापन पर विधायक ने कहा- “कई वर्षों बाद अपनों के बीच आया हूं। अपनों से मिलना भावुक पल था।

” यह एक वाक्य पूरे प्रवास की तस्वीर बन गया।विधायक विक्रम मंडावी तेलंगाना राज्य के वेंकटचेरुवू, कंदीपडू, चिन्नासमुद्रम, चेरला, क्रांतिपुरम, रामचंद्रपुरम, मांगवाया, वेंकटपुरम, योगिता नागरम, येटुरनगरम, भूपतपुरम, मांगपेटा, सलवा, मदुलगुडम, सुंदरनगर, उमेशचंद्र नागरम, मीरलापुरम, सरापका और भद्रचलम सहित उन गांवों और बस्तियों में गए, जहां बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा जिले से निकले 50-60 हजार आदिवासी परिवार 20 से 25 वर्षों से संघर्षमय जीवन यापन कर रहे हैं। विस्थापित हुए लोग जिन जगह पर रह रहे है वे वहां का स्थायी पट्टा और सरकार की समस्त योजनाओं और सुविधाओं का लाभ चाहते हैं, जो अब तक उन्हें नहीं मिल रहा है। अपने बच्चों के भविष्य की बात लेकर आए कई चेहरे नम हो गए। कईयों ने पहली बार खुलकर कहा कि उनकी आवाज अब तक किसी ने सुनी ही नहीं। विस्थापित आदिवासियीं ने विधायक विक्रम मंडावी को बताया कि वे तेलंगाना सरकार से पिछले 20 से 25 वर्षों से लगातार जमीन का पट्टा और सरकारी सुविधाएं मांग रहे हैं, लेकिन सरकार उन्हें अब तक कोई सहायता नहीं दे रही है। यही स्थिति पैतृक गांवों की है वहां रह रहे परिवारों को छत्तीसगढ़ की सरकार कोई भी सहायता नहीं दे रही है। इस अनिश्चितता का नतीजा यह हो रहा है कि परिवार बीच रास्ते में अटका हुआ है, एक ओर रोजी-रोटी की चिंता है, दूसरी ओर बच्चों की पढ़ाई और आने वाले कल की चिंता, पेट पालने और पैतृक जड़ों से जुड़ने के बीच यह द्वंद्व उनकी रोजमर्रा की जिंदगी बन चुका है।

उनकी इस स्थिति को समझने व समाधान की दिशा में पहल करने पहुंचे विधायक विक्रम मंडावी का गर्मजोशी से हुए स्वागत के बीच विस्थापित लोगों ने कहा कि विधायक विक्रम मंडावी से हुई मुलाकात से पहली बार लगा कि उनकी पीड़ा सुनी जा रही है। विधायक मंडावी की मौजूदगी को उन्होंने एक उम्मीद की नई किरण बताया। चर्चा में यह सहमति बनी कि समस्या व्यक्तिगत नहीं, सामूहिक है, इसलिए उसका हल भी सामूहिक रास्ते से निकलना चाहिए। विस्थापित आदिवासी अपना एक प्रतिनिधि मंडल गठित करेंगे। यह प्रतिनिधि मंडल तेलंगाना सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार दोनों से बात करेगा, ताकि वे जमीन के पट्टा सहित अपने अन्य मांगों को तेलंगाना सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार तक पहुंच सकें। विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा ज़िलों के अंतर्गत आने वाले गांवों से लगभग 50 से 60 हजार आदिवासी तेलंगाना में विस्थापित हैं। इनकी तेलंगाना सरकार से मांग है कि उन्हें जमीन का स्थायी पट्टा और अन्य सरकारी सुविधाओं और योजनाओं का लाभ मिले। दौरा समाप्ति के बाद विस्थापित बस्तियों में एक बात बार-बार दोहराई जा रही है कि वर्षों बाद कोई अपना उनके बीच पहुंचा, उनकी बात सुनी, और उनकी मांगों को सरकारों के दरवाजे तक ले जाने का भरोसा दिलाया। अब नजर प्रतिनिधि मंडल के गठन और दोनों सरकारों से होने वाली चर्चा पर है।

आस्था, परंपरा और सेवा के सशक्त स्तंभ हैं श्री रोहित शर्मानयापारा युवा दुर्गा उत्सव समिति की 13 वर्षों की गौरवशाली यात्रा में नेतृत्व, समर्पण और संस्कार की अहम भूमिका

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जगदलपुर। नयापारा युवा दुर्गा उत्सव समिति आज अपनी गौरवशाली यात्रा के 13वें वर्ष की ओर अग्रसर है। वर्षों से आस्था, परंपरा, संस्कार और सामाजिक एकता का संदेश देने वाली इस समिति की सफलता के पीछे अध्यक्ष एवं प्रमुख स्तंभ रोहित शर्मा का निरंतर समर्पण, अथक प्रयास और मां भगवती के प्रति अटूट आस्था महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है।श्री रोहित शर्मा के कुशल नेतृत्व में समिति ने दुर्गा उत्सव को केवल भव्य आयोजन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि पूजा-पाठ की परंपरा, धार्मिक विधि-विधान और आध्यात्मिक वातावरण की शुद्धता को भी हमेशा प्राथमिकता दी। मां दुर्गा की आराधना को विशेष और भव्य स्वरूप देने के उद्देश्य से काशी एवं वृंदावन से विद्वान पंडितों को आमंत्रित कर विधिवत पूजा-अर्चना कराई जाती है।

उपलब्धियों से बढ़ा समिति का गौरवनयापारा युवा दुर्गा उत्सव समिति की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान को वर्ष 2015 में उस समय और मजबूती मिली, जब रोटरी क्लब एवं बस्तर चेंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा आयोजित पूजा-पाठ एवं झांकी प्रतियोगिता में समिति को प्रथम स्थान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान समिति की उत्कृष्ट धार्मिक परंपरा, भव्य आयोजन और समर्पित कार्यशैली का प्रमाण बना।सेवा और सामाजिक सरोकार में भी अग्रणीश्री रोहित शर्मा का योगदान केवल दुर्गा उत्सव तक सीमित नहीं रहा है। वे निरंतर विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं जनसेवा से जुड़े कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते आ रहे हैं। जरूरतमंदों की सहायता हो या सामाजिक आयोजनों में सहभागिता, उनका प्रयास हमेशा समाज में सहयोग, एकता और सेवा की भावना को मजबूत करने का रहा है।उनके नेतृत्व और मार्गदर्शन में नयापारा युवा दुर्गा उत्सव समिति के आयोजन आज भी व्यवस्थित, अनुशासित और धार्मिक परंपराओं के अनुरूप संपन्न होते आ रहे हैं। समिति के सदस्यों को एकजुट रखते हुए आयोजन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।

13 वर्षों की यात्रा, आस्था और संस्कार की पहचाननयापारा युवा दुर्गा उत्सव समिति की 13 वर्षों की यह यात्रा महज एक धार्मिक आयोजन की कहानी नहीं, बल्कि आस्था, सेवा, संस्कार, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रेरणादायी उदाहरण है।श्री रोहित शर्मा के नेतृत्व में समिति ने वर्षों से जिस समर्पण के साथ मां दुर्गा की आराधना और समाजसेवा का संकल्प निभाया है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।मां भगवती की कृपा से आस्था और सेवा का यह कारवां इसी तरह निरंतर आगे बढ़ता रहे और नयापारा में धर्म, संस्कार एवं सामाजिक एकता की यह ज्योति सदैव प्रज्वलित रहे ।

जनता पर महंगाई का बड़ा बोझ लाद दिया है मोदी सरकार ने: दीपक बैज

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कामर्शियल गैस के दामों में बढ़ोत्तरी से आम आदमी होगा परेशान

मोदी राज में महंगाई चरम पर : दीपक बैज

मुख्यमंत्री साय का बस्तर दौरा संवेदनहीन, बाढ़ से हुए नुकसान और परेशानी को नहीं लिया गंभीरता से

जगदलपुर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज लगातार बढ़ती महंगाई को लेकर मोदी सरकार पर जमकर बरसे। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय पर भी जमकर निशाना साधा। दीपक बैज ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री साय का बस्तर दौरा सिर्फ दिखावे का रहा। बाढ़ पीड़ितों के प्रति उनमें जरा भी संवेदनशीलता नजर आई। मुख्यमंत्री केवल औपचारिकता निभा कर चले गए। जगदलपुर स्थित जिला कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता के दौरान छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज मोदी और साय सरकार पर बेहद आक्रामक तेवर में नजर आए। उन्होंने कहा कि कामर्शियल गैस के दामों में बढ़ोत्तरी मोदी सरकार का जनता पर महंगाई और बोझ है। मोदी राज में महंगाई बेतहाशा बढ़ रही है। गरीब और मध्यम वर्ग परेशान है। मोदी सरकार ने कामर्शियल सिलेंडर को 62.50 रू. से लेकर 71.50 रू. तक महंगा कर दिया। पिछले 9 माह में कामर्शियल सिलेंडर के दाम में 1270 रू. की बढ़ोत्तरी मोदी सरकार ने की है। मतलब हर माह 141 रू. दाम बढ़ाया गया है। कामर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ाने से बाजार में मिलने वाली खाद्य सामग्री, रेस्टोरेंट, होटलों में मिलने वाले कुक्ड फूड नाश्ता आदि के दाम स्वाभाविक रूप से और बढ़ जाएंगे। इंडस्ट्रीयल उत्पादों के दाम भी बढ़ जाएंगे। सुई से लेकर लौह उत्पादों के दाम भी बढ़ेंगे।छत्तीसगढ़ के आयरन उद्योगों पर भी इसका असर पड़ेगा, भाव बढ़ेगा और महंगाई भी बढ़ेगी।थोक महंगाई की सूचकांक आजादी के बाद सबसे ऊंचे पायदान 9.78 पर है। मोदी सरकार जब से सत्ता में आई है, महंगाई से देश के नागरिकों की कमर टूटती जा रही है। 2014 में जो गैस का सिलेंडर 410 रू. का था, आज वह 1000 रू. के पार है वह भी मिल नहीं रहा है। पेट्रोल के दाम 70 रू. प्रति लीटर से बढ़कर 108 रु. प्रति लीटर के पार हो गए है, जबकि डीजल के दाम 55 रू. प्रति लीटर से बढ़कर 104 रू. प्रति लीटर के करीब पहुंच गए है। मोदी सरकार ने खाद्य तेलों के आयात शुल्क में 22 प्रतिशत की भारी भरकम वृद्धि की, जिसके चलते बाजार में सभी तरह के खाद्य तेलों के दाम लगभग डेढ़ गुना बढ़ गए।पॉम ऑयल, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल पर इंपोर्ट ड्यूटी 5.5 के स्तर से बढ़कर 27.5 प्रतिशत कर दिया गया है,

अर्थात सीधे तौर पर 22 फीसदी की बढ़ोत्तरी मोदी सरकार की मुनाफाखोरी का प्रमाण है। जिन खाद्य तेलों का उत्पादन स्थानीय स्तर पर होते हैं, उनमें सेंट्रल एक्साइज की दरों में वृद्धि का प्रभाव नहीं होना चाहिए था, लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार का संरक्षण जमाखोरों और मुनाफाखोरों को है। जिसके चलते राइस ब्रान आयल, सरसों तेल जैसे सभी तरह के खाद्य तेलों का दाम डेढ़ गुना बढ़ा दिया गया है। दाल, चावल, सब्जियां, साबुन, कपड़ा, दवाईयां सभी वस्तुओं के दाम बेतहाशा बढ़ गए हैं।

फोटोशूट कराने आए थे साय

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि लगभग पूरा बस्तर संभाग लगातार दूसरे वर्ष भीषण बाढ़ की चपेट में आया है। इस वर्ष भी बाढ़ ने आम आदमी को बर्बाद कर दिया। उनके मकान, सामान, पशुधन, फसल सब बर्बाद हो गये। अनेकों मार्ग का संपर्क टूट गया, पुल-पुलिये, सड़क सभी कुछ टूट कर बर्बाद हो गए हैं। जन-जीवन ठप हो गया है। वहीं मुख्यमंत्री साय का बस्तर दौरे ने जनता को सिर्फ निराश किया। मुख्यमंत्री बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के नाम पर बस्तर आए थे, लेकिन वे केवल औपचारिकता निभाते हुए पुल पर खड़े होकर फोटो खिंचवाकर, रील बनवाकर चले गए। मुख्यमंत्री का दौरा बेहद ही संवेदनहीन और बेहद दुर्भाग्यजनक रहा। मुख्यमंत्री ने बाढ़ से हुए नुकसान और परेशानी को गंभीरता से नहीं लिया। ऐसा लगा कि मुख्यमंत्री नहीं कोई पर्यटक आया था जो फोटो फोटोशूट कराने आया और चला गया। यहां से जाने के बाद उन्हें सिंगापुर जाने की जल्दी थी। वे इन्वेस्टर कनेक्ट के बहाने सिंगापुर घूमने की तैयारी करने चले गए। बस्तर का आम आदमी परेशान है, न मुख्यमंत्री को फ्रिक है और न ही मंत्रियों को। बाढ़ से आठ लोगों की मौत हुई, उनके लिए भी मुख्यमंत्री ने कोई विशेष सहायता की घोषणा नहीं की। उड़ीसा द्वारा बांध से पानी छोड़ने के कारण बस्तर में बाढ़ से हालात बिगड़े, मुख्यमंत्री दिल्ली में उड़ीसा के मुख्यमंत्री के साथ बैठक की, मगर बिना पूर्व सूचना और चेतावनी के उड़ीसा सरकार द्वारा बांध से पानी छोड़े जाने पर मुख्यमंत्री साय ने आपत्ति दर्ज नहीं कराई। यह उनकी संवेदनहीनता का प्रमाण है।

राहत के नाम पर खानापूर्ति

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने आगे कहा बाढ़ से हजारों घर प्रभावित हुए। हजारों मकान गिर गये। बड़ी संख्यों में लोग बेघर हो गए। लोगों के सामान बारिश में बर्बाद हो गया है। लाखों एकड़ तैयार फसल बर्बाद हो गईं । अनेकों सड़क, पुल-पुलिया टूट गये, बह गये।हजारों पालतू पशु गाय, बैल, मुर्गी, बकरी, बकरा सब बह गये।दो माह का राशन एक साथ मिला था पूरा राशन खराब हो गया। घर में पहले से रखी सामग्री और अन्य जरूरी सामान खराब हो गया। सरकार द्वारा चलाया गया राहत कार्य केवल खानापूर्ति वाला था। अब तो राहत शिविर भी बंद कर दिए गए हैं।सरकार ने मदद के नाम पर केवल जले पर नमक छिड़का, सरकारी सहायता अपर्याप्त थी।राहत शिविर बंद होने के बाद जो लोग वापस घर गए हैं, उनके घरों में खाना बनाने के राशन, गैस, लकड़ी कुछ नहीं है। लोग शिविर से वापस आने के बाद भूखे थे, सामाजिक संगठनों के लोगों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनके लिए भोजन की व्यवस्था की।

बैज ने उठाई दमदार मांगें

पीसीसी चीफ दीपक बैज ने कहा कि सरकार मकानों की पूर्तिक्षति में 1.20 लाख रुपए और आंशिक क्षति में 4000 दे रही है, जो अपर्याप्त है। अतः सभी की हानि का मूल्यांकन कर घर बनाने के लिए कम से कम पूर्ण क्षति पर 5 लाख आंशिक क्षति पर 1 लाख दिए जाएं। फसल के लिए सरकार प्रति हेक्टेयर 8000 का मुआवजा दे रही है जबकि सरकार 1 एकड़ में 21 क्विंटल धान खरीदती है तो इस लिहाज से नुकसान का मुआवजा हिसाब से 65 हजार 100 रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से दिया जाए। प्रभावित क्षेत्रों के किसानों का पूरा कर्जा माफ किया जाए। पशुओं की हानि का आंकलन कर बाजार रेट के अनुसार मुआवजा दिया जाए। घर में रखे सामान टीवी, फ्रिज, बेड आदि का आंकलन कर मुआवजा, दो माह के राशन एकमुश्त फिर से दिया जाए। बच्चों को कापी-किताब, स्कूल बैग मुफ्त दिए जाएं। प्रभावित क्षेत्र के लोगों के आवश्यक दस्तावेज बनाने के लिए शिविर लगाया जाए। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बाढ़ जनित संक्रमण रोकने विशेषज्ञ डॉक्टरों के शिविर लगाया जाए। पूरे बस्तर संभाग के पुल-पुलियों और इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण के लिए विशेष राहत पैकेज की घोषणा की जाए।प्रेसवार्ता में प्रदेश कांग्रेस प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गैदू, पूर्व विधायक रेखचंद जैन, बस्तर जिला कांग्रेस कमेटी शहर अध्यक्ष सुशील मौर्य, ग्रामीण अध्यक्ष प्रेमशंकर शुक्ला, नेता प्रतिपक्ष राजेश चौधरी, प्रवक्त जावेद खान,महामंत्री अभिषेक नायडू,अनुराग महतो, रविशंकर तिवारी, नीतीश शर्मा आदि मौजूद रहे।

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