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दिव्यांग बालेश्वर नाग की हुई पूरी हुई मुराद, संसदीय सचिव रेखचंद जैन ने घर पहुँचाकर दी ईलेक्ट्रिक ट्राईसायकल

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जगदलपुर.अतिसंवेदनशील क्षेत्र दरभा ब्लाक के कोटमसर का आश्रित ग्राम पेंदावाडा के बालेश्वर ने सपने मे भी नही सोचा था की कुछ दिन पूर्व ही अपनी जीविका चलाने के लिये उसके लिये सबसे जरुरत का सामान स्वयं विधायक जगदलपुर से लेकर उसके गांव तक आएंगे

आज बुधवार संसदीय सचिव रेखचंद जैन ने ग्राम पंचायत पेंदावाडा के दिव्यांग बालेश्वर के गांव मे पहुंचकर उसे ईलेक्ट्रिक सायकल प्रदान की जिसे पाकर बालेश्वर नाग सहित पूरे परिवार की खुशी का ठिकाना ना रहा |

बालेश्वर नाग ने बाताया की चुनाव के दौरान उनकी मुलाकात रेखचंद जैन से हुई थी तब मैने उनसे रोजगार के लिये कोई नौकरी एवं दोनो पैर दिव्यांग ना होने की वजह से ट्राई सायकल की माँग की थी जैन ने मुझसे वादा किया था की जरूर आपके लिये कुछ ना कुछ करूंगा। चुनाव जितने के बाद संसदीय सचिव जैन ने मुझे जनसंपर्क निधि से पंद्रह हजार रुपए की आर्थिक मदद एवं चौकीदार की नौकरी भी दिलाई औऱ आज मेरे घर पर पहुचाकर एलेक्ट्रिक ट्राई सायकल भी प्रदान की। जिसके लिये मैं प्रदेश के संवेदनशील मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एवं विधायक रेख चंद जैन सहित दरभा ब्लाक के कांग्रेस कार्यकर्ताओ का आभारी हूँ |

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इस अवसर प्रवीण सालेचा, परसोनारु नाग,मानसिंह ठाकुर, राजेंद्र त्रिपाठी,सोनधर कश्यप,सहदेव नाग,बुलकू राम, शंकर मौर्य,पीलूराम,बदरु राम, मुन्ना,दामूराम, जयदेव,पूरन, कौशल्या भंडारी मौजूद रहे |

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बोधघाट पुलिस द्वारा हत्या के प्रयास के आरोपी को 12 घण्टे के अंदर गिरफ्तार किया गया।

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जगदलपुर।बोधघाट पुलिस द्वारा हत्या के प्रयास के आरोपी को 12 घण्टे के अंदर गिरफ्तार किया गया।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दीपक झा , अति . पुलिस अधीक्षक ओ.पी शर्मा के निर्देशन व नगर पुलिस अधीक्षक हेमसागर सिदार के पर्यवेक्षण में थाना प्रभारी बोधघाट धनंजय सिन्हा के नेतृत्व में बोधघाट पुलिस द्वारा थाना क्षेत्रान्तर्गत हत्या के प्रयास के आरोपी को 12 घण्टों के भीतर गिरफ्तार किया गया । आज रात्रि सूचना मिला कि बाबा रामदेव मंदिर संतोषी वार्ड के पास अजय अधिकारी निवासी सतोषी वार्ड को किसी व्यक्ति ने चाकू मार दिया है । सूचना प्राप्त होने पर सूचना की तस्दीकी हेतू बोधघाट पुलिस स्टाफ को रवाना किया गया जहां घटना स्थल में पहुंच कर प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ करने पर बताया गया कि रोहित चक्रवर्ती पिता विश्वजीत चक्रवर्ती निवासी गुण्डाधर वार्ड द्वारा अजय अधिकारी को पुरानी बात को लेकर वाद विवाद कर जान से मारने की नियत से धारदार चाकू से हमला किया है । घायल अजय अधिकारी को ईलाज हेतु महारानी अस्पताल ले जाना बताया। जिस पर थाना आकर तत्काल अपराध पंजीबद्ध किया गया । पूछताछ से मिली जानकारी के आधार पर आरोपी रोहित चकवर्ती को गिरफ्तार करने उप निरीक्षक टूमन डडसेना , सहायक उप निरीक्षक सतीश यादव , आरक्षक क्रमांक 877 दिजेन्द्र मणी शुक्ला , आरक्षक क्रमांक 972 सन्नू मण्डावी , एम टी आरक्षक क्रमांक 1240 महेश नेताम को रवाना किया गया । टीम द्वारा त्वरित कार्यवाही करते हुए आरोपी रोहित चक्रवर्ती को हिरासत में लिया गया । आरोपी से पूछताछ करने पर अपराध करना कबूल किया एवं अपराध में प्रयुक्त हथियार भी आरोपी के निशानदेही में जप्त किया गया । आरोपी को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय पेश किया गया ।

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जिला स्तरीय समिति ने बाल देखरेख संस्थाओ का त्रैमासिक निरीक्षण किया। 

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जगदलपुर। किशोर न्याय ( बालकों की देखरेख और संरक्षण ) अधिनियम 2015 के धारा 54 तथा किशोर न्याय ( बालकों की देखरेख और संरक्षण ) नियम 2016 के नियम -41 के प्रावधानों के तहत बस्तर जिले में जिला स्तरीय गठित निरीक्षण समिति द्वारा बस्तर जिले के पंजीकृत बाल देखरेख संस्थाओं जिसमें  शा. बाल गृह (बालक), शा. सम्प्रेक्षण गृह (बालक), शा.सम्प्रेक्षण गृह (बालिका), शा. प्लेस आफ सेफ्टी (बालक), शा. विशेष गृह (बालक), शा. विशेष गृह (बालिका), बाल गृह (बालिका) सृजन सामाजिक संस्था, खुला आश्रय गृह (बालक) बस्तर सामाजिक जन विकास समिति, एवं सेवा भारती (मातृ छाया) विशेष दत्तक ग्रहण एजेंसी जगदलपुर का त्रैमासिक निरीक्षण कोविड गाइड लाइन का पालन करते हुए किया गया। समिति के सदस्य नरेन्द्र पाणिग्राही ने बताया कि सभी संस्थाएं किशोर न्याय अधिनियम के नियमानुसार संचालित की जाती है जिसमें विभिन्न प्रकार की पंजियों का संधारण किया जाता है, समिति के सदस्यों के द्वारा समस्त पंजियों का अवलोकन किया गया एवं संस्था में निवासरत बालक, बालिकाओं एवं कर्मचारियों से भी व्यक्तिगत चर्चा की गई और उनकी समस्याओं को संज्ञान में लेते हुए आवश्यक सुधार के लिए संस्था के अधीक्षकों को निर्देशित किया गया साथ ही आगामी निरीक्षण के पूर्व सभी कमियों को सुधार किए जाने को कहा गया। निरीक्षण के दौरान जिला स्तरीय समिति के सदस्य विजय शंकर शर्मा नरेंद्र पाणिग्राही, धरमुराम कश्यप, डॉ. वत्सला मरियम, शैलेश दुबे, मनोज कांत जोशी उपस्थित थे।

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मादक पदार्थ गांजा की तस्करी करते युवक पर कोतवाली पुलिस की कार्यवाही

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तस्कर पर कार्यवाही, कब्जे से 15 किग्रा गांजा बरामद

जप्तशुदा गांजा उड़ीसा कोरापुट से लाया जा रहा था

जप्तशुदा गांजा की अनुमानित कीमत करीब 75,000/- रूपये

जप्त सम्पत्ति – गांजा 15 किग्रा, एक मोटरसाइकिल हीरो शाइन क्र. CG-17- KR.5887नगद राशि – 5,00/- रूपये

नाम आरोपी –
1. लोकेश ठाकुर पिता शोभा ठाकुर, 27 वर्ष निवासी धनपुंजी थाना नगरनार जिला बस्तर

अवैध मादक पदार्थ गांजा की तस्करी पर कार्यवाही करने में कोतवाली पुलिस को सफलता हासिल हुई है । सूचना प्राप्त हुआ था कि कोई व्यक्ति जगदलपुर में अवैध मादक पदार्थ गांजा का तस्करी करने की फिराक में है । सूचना पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दीपक झा एवं अति0 पुलिस अधीक्षक ओमप्रकाश शर्मा के मार्गदर्शन एवं नगर पुलिस अधीक्षक हेमसागर सिदार के पर्यवेक्षण में थाना प्रभारी कोतवाली एमन साहू के नेतृत्व में टीम का गठन कर कार्यवाही हेतु रवाना किया गया । टीम के द्वारा एन.एम.डी.सी. चौक पर संदिग्ध व्यक्ति की पहचान कर घेराबन्दी कर पकड़ा गया । संदेही से पूछताछ पर अपना नाम लोकेश ठाकुर निवासी धनपुंजी नगरनार का होना बताया । जिनकी तलाशी लेने पर एक बैग में लोकेश ठाकुर के कब्जे से 15 किलोग्राम अवैध गांजा मिला, जिसके संबंध में पूछताछ पर गांजा रखने का कोई वैध आधार नही पाया गया । कि मामले में आरोपी लोकेश ठाकुर द्वारा अवैध रूप से मादक पदार्थ गांजा की तस्करी करते पाया जाना , जो NDPS एक्ट की परिधि में आने से आरोपी के विरूद्व थाना कोतवाली में धारा – 20 (B) एनडीपीएस एक्ट के तहत अपराध दर्ज कर कार्यवाही की गई है। मामले में आरोपी के कब्जे से कुल 15 किलोग्राम गांजा, 01 मोटरसाइकिल क्र. CG -17 – KR.5887 और 500/- रूपये नगद राशि जप्त किया गया है ।आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर न्यायालय रवाना किया गया है! जप्तशुदा गांजा की अनुमानित कीमत – 75,000/- रूपये आंकी गई है !

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महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाले अधिकारी/कर्मचारी:-
निरीक्षक :- एमन साहू
उनि0 :- गुणेश्वरी नरेटी , संजय वट्टी,
आरक्षक :- बबलू ठाकुर , रवि सरदार, सोनू बढ़ई

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वेजरिवीजन के लिए माइंस मे कामबंद हडताल शुरू।

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सेल कर्मियों के वेज रिवीजन के मुद्दे पर सेल प्रबंधन के अड़ियल रवैया के खिलाफ ट्रेड यूनियनों द्वारा पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार आज सुबह 6:00 बजे से माइंस में काम बंद हड़ताल शुरू हो गई है।प्रथम पाली में शत प्रतिशत कर्मचारी काम पर नहीं गए और खदान का उत्पादन पूरी तरह ठप्प रहा। आज सुबह 5:00 बजे से ही ट्रेड यूनियन के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने खदान के तमाम प्रवेश द्वारों पर तगड़ी मोर्चाबंदी की एवं खदान के गेट में ही एकत्र होकर प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस बीच संयुक्त खदान मजदूर संघ के नेता कमलजीत सिंह मान ने कहा की माइंस के प्रथम पाली में हड़ताल शत-प्रतिशत सफल रही है। सीटू अध्यक्ष प्रकाश सिंह क्षत्रिय ने कहा कि यदि प्रबंधन एक दिन की हड़ताल से हमारी मांगों पर विचार करने के लिए तैयार नहीं होगा, तो आगे अनिश्चितकालीन हड़ताल भी की जा सकती है। इंटक अध्यक्ष तिलक मानकर ने कहा कि खदानों में संघर्ष के प्रति हमेशा ही जुझारूपन रहा है इसलिए खदान कर्मी सेल के इस हड़ताल को सफल करने में अपना पूरा योगदान देंगे और अपनी मांगों को हासिल करेंगे । बीएमएस नेता एमपी सिंह ने कहा कि यह हड़ताल केवल प्रथम पाली में नहीं बल्कि द्वितीय और रात्रि पाली में भी पूरी तरह सफल रहेगी और हमें आशा है कि प्रबंधन को हमारी मांगों को मानना पड़ेगा । छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ के अध्यक्ष गणेश राम चौधरी ने कहा कि माइंस में संघर्ष के इतिहास को दोहराते हुए आज हम शत प्रतिशत हड़ताल सफल करेंगे जिससे नियमित एवं ठेका कर्मियों की मांगों को जल्द से जल्द हासिल किया जा सके।

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आज सुबह से ही खदान के तमाम गेटों के साथ-साथ माइंस आफिस के सामने श्रमिकों का जमावड़ा लगा हुआ है । जगह-जगह लोग समूह में नारेबाजी करते हुए नजर आए। श्रमिकों का आक्रोश बहुत ही अधिक है, और पूरी तरह यह आसार है कि अगर प्रबंधन जल्द से जल्द अच्छा वेज रिवीजन नहीं करता, तो सेल में आगे इससे भी बड़ी हड़ताल हो सकती है। जिससे प्रबंधन को बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है ।

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प्रभारी मंत्री कवासी लखमा ने अपनी सादगी से जीता बस्तर का दिल… विकास की जागी नई उम्मीद…

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जगदलपुर… अपने लोगों के बीच दादी नाम से मशहूर मंत्री कवासी लखमा ने एक बार फिर अपनी जबरदस्त ऊर्जा और उत्साह के साथ साथ अपनी सादगी से बस्तर का दिल जीता है यह तो सभी लोगों को पता है कि प्रभारी मंत्री कवासी लखमा 5 बार के विधायक रह चुके हैं और आबकारी मंत्री उद्योग मंत्री और भी अनेकों पद से कांग्रेस ने नवाजा है क्योंकि बस्तर के माटी पुत्र होने के कारण लखमा अपने आप में सहज और सरल स्वभाव के कारण जनप्रिय और लोकप्रिय हैं जमीन से जुड़े होने के कारण अपनी पारंपरिक वेशभूषा और बस्तर की संस्कृति संस्कार को समेटे हुए एक आम नागरिक की तरह शहर के ऊर्जावान युवा हेमंत ध्रुव (छोटू) व अन्य साथियों के साथ चहल कदमी कर निकल जाना यही सादगी तो लखमा दादी को आम जनता के साथ करीब से जुड़ाव और प्रेम को प्रदर्शित करता है |

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आज तक ऐसा नहीं हुआ कोई मंत्री किसी के कहने पर यूं ही रात्रि भ्रमण के लिए निकल जाए बात बीती गत रात्रि की है जब हेमंत ध्रुव ने मंत्री जी से पैदल चहल कदमी करने की इच्छा व्यक्त की तो मंत्री जी ने भी नि:संकोच सहमति देते हुए सर्किट हाउस से लालबाग तक पैदल चलकर शहर के युवा वर्ग को शांति और सद्भाव के साथ साथ मोहब्बत का संदेश दिया हेमंत ध्रुव ने बताया कि यह मेरे लिए किस्मत की बात थी और अविस्मरणीय पल था जिसमें युवा साथी कमलेश पाठक खुर्शीद खान वरिष्ठ कांग्रेसी ओमकार जायसवाल के साथ रात्रि भ्रमण करते हुए मंत्री जी सर्किट हाउस पहुंचे जिसमें समस्त युवा समूह कौमी एकता संघ एकता ग्रुप एवं स्वयं हेमंत ध्रुव ने प्रभारी मंत्री श्री कवासी लखमा दादी का धन्यवाद करते हुए आभार व्यक्त किया है ज्ञात हो कि हेमंत ध्रुव क्षेत्र के लोगों की विशेषकर गरीब और मजदूर वर्ग की सेवा के साथ हमेशा अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए अक्सर नजर आते हैं मंत्री कवासी लखमा के खास समर्थक व बेहद करीबी माने जाते हैं यही कारण है कि शहर के सभी युवा वर्ग स्वागत समारोह में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई |

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राज्य स्तरीय वेबिनार में प्राचार्य सईदा खान ने शिक्षा मंत्री के समक्ष दी प्रस्तुति

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स्कूल शिक्षा विभाग के पढ़ाई तुम्हार द्वार योजना के द्वितीय वर्ष का प्रारंभ आज राज्य स्तरीय वेबीनार के साथ आगाज किया गया। इसका आयोजन स्कूल शिक्षा विभाग एवं समग्र शिक्षा अभियान रायपुर द्वारा किया गया ऑनलाइन वेबीनार का उद्देश्य पढ़ाई तुंहर द्वार के दूसरे साल के शुरुआत के लिए राज्य भर के शिक्षकों को अलग अलग तरीके से पढ़ाई प्रारंभ करने हेतु प्रेरित करना था । इस कार्यक्रम में बस्तर जिले के बस्तर विकासखंड के अंतर्गत संचालित शासकीय हाई स्कूलकुड़कानार की प्राचार्य सईदा खान को भी इस करोना काल में बच्चों की पढ़ाई से संबंधित ऑनलाइन तथा मोहल्ला कला से संबंधित कार्यों को सभी से साझा करने का अवसर प्राप्त हुआ। विदित हो कि इस कार्यक्रम में राज्य के 23 शिक्षकों का चयन किया गया था जो करोना काल में अलग अलग तरीके से अध्यापन कार्य करवा रहे हैं प्राचार्य सईदा खान ने मोहल्ला क्लास संचालित करने में उन्होंने कुड़कानार के आश्रित ग्राम घाट कवाली कवीआसना के सरपंच तथा पालकों से संपर्क कर मोहल्ला क्लास संचालन हेतु स्थान का चयन किया तथा मोहल्ला क्लास संचालित किया इन कक्षाओं में अपने विद्यालय के छह शिक्षकों को दो-दो शिक्षक प्रति गांव प्रतिदिन विषय अनुसार रोटेशन से ड्यूटी शेड्यूल कि उन्होंने इन केंद्रों में नियमित अध्यापन से कोर्स पूरा किया ।शासकीय हाई स्कूल कुड़कानार की बालिका रोशनी 97 %कुमारी हिमांशी ठाकुर 96.6 ℅ तथा कुमारी सावित्री 95.5 % से दसवीं परीक्षा उत्तीर्ण कर शाला और गांव का नाम रोशन किया उनका कहना है कि इस वर्ष वे और भी बेहतर ढंग से बच्चों को पढ़ाएंगे साथ ही राज्य के सभी शिक्षकों को ऑनलाइन ऑफलाइन मोहल्ला क्लास आदि के द्वारा पढ़ाने हेतु प्रेरित किया वर्तमान में वे संकुल प्राचार्य का दायित्व निभा रहे हैं उनका कहना है कि वे संकुल कुड़कानार का नाम शिक्षा तथा अन्य गतिविधियों में आगे रखने का प्रयास करेंगे।

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माहारा समाज के साथ इस विश्वासघात का स्पष्टीकरण कांग्रेस पार्टी को देना होगा – नरेंद्र भवानी

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जगदलपुर।स्व. अजीत जोगी की सरकार ने 2002 में माहारा समाज को 1952 के पहले जैसे ST में ही रखने की अनुशंसा कर दी थी तब भूपेश बघेल राजस्व मंत्री थे और अब बघेल का यु टर्न विश्वासघाती कदम जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे पार्टी के प्रदेश सयुंक्त महासचिव नरेंद्र भवानी ने प्रेस विज्ञपति जारी कर कहा है।

उन्होंने बताया कि 2013 और 2018 के कांग्रेस पार्टी ने अपने जनघोषणा पत्र में माहारा समाज को ST में सम्मिलित करने का वादा किया था, जिसके कारण बस्तर की 12 सीटों में कांग्रेस पार्टी को अभूतपूर्व बढ़त मिली।किंतु आज 3 जून 2021 के पत्र के अनुसार भूपेश बघेल ने यु – टर्न लेकर उन्हें SC में सम्मिलित करने की अनुशंसा कर डाली जो कि सीधे-सीधे माहारा समाज के साथ विश्वासघात है।स्व. अजीत जोगी की सरकार ने 2002 में माहारा समाज को 1952 के पहले जैसे ST में ही रखने की अनुशंसा की थी। तब भूपेश बघेल राजस्व मंत्री थे।

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माहारा समाज के साथ इस विश्वासघात का स्पष्टीकरण कांग्रेस पार्टी को देना होगा ।

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दे दिस सब ला चकमा…..कवासी लखमा

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छत्तीसगढ़ के राजनीतिक गलियारे में एक जुमला इन दिनों काफी हिट हो रहा है। बस्तर से लेकर राजधानी रायपुर तक में इस जुमले की अनुगूंज सहज ही सुनी जा सकती है । जुमले कि बानगी देखिये – “दे दिस सब ला चकमा , आई लव यू कवासी लखमा।”

बस्तर के कोंटा विधानसभा क्षेत्र से लगातार पांच बार विधानसभा का चुनाव जीतने वाले कवासी लखमा एकमात्र ऐसे आदिवासी नेता हैं जिनके जनाधार को लेकर राजनैतिक पंडित भी अचंभे में पड़ जाते हैं। अशिक्षित होने के वावजूद उन्होंने पढ़े लिखे तेजतर्रार कम्युनिस्ट पार्टी के नेता एवं आदिवासी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनीष कुंजाम को चुनाव में कई बार पराजित कर अपने क्षेत्र में एक नया चुनावी इतिहास गढ दिया है। लखमा की लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है की “दादी” के नाम से वे सर्वत्र जाने पहचाने जाने लगे हैं। उनकी लोकप्रियता की एक और बानगी देखिये। राहुल गांधी जब बस्तर चुनाव प्रचार के लिए आए तब लोहंडीगुड़ा की एक जनसभा में मंच पर ही ठुमके लगाकर श्री लखमा ने समा बांध दिया था। मंच पर राहुल गांधी के होने के वावजूद भीड लखमा-लखमा के नारे लगा रही थी । दरअसल राहुल गांधी टाटा कंपनी के लिए अधिग्रहित आदिवासियों की भूमि उन्हें लौटाने आए थे। लिखने का आशय यह कि पढ़े लिखे नहीं होने के बावजूद जनता की नब्ज श्री लखमा अच्छी तरह से ताड़ लेते हैं। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ में जब भारी बहुमत के साथ कांग्रेस पार्टी की सत्ता में वापसी हुई तब श्री लखमा भूपेश बघेल की सरकार में बतौर कैबिनेट मंत्री शामिल कर लिए गए।उन्हे आबकारी और उद्योग जैसा विभाग भी मिला। इस दौड़ में बस्तर के कई नेता शामिल थे किंतु उन्होंने सबको पछाड़ अपने राजनैतिक कौशल से मंत्री पद हासिल कर लिया। हालांकि पर्दे के पीछे आदिवासी समाज के कुछ राजनेता उन्हें मुख्यमंत्री पद का प्रलोभन देकर विवादों में घसीटना चाह रहे थे। लेकिन श्री लखमा ने बड़ी चतुराई के साथ सबको पीछे छोड़ स्वंय आगे बढ़ गए। पिछले सप्ताह उनकी काबिलियत को देखते हुए राज्य सरकार ने बस्तर के पांच जिलों का प्रभारी मंत्री भी बना दिया है।

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राजकाज चलाने के लिए क्या शिक्षा मायने नहीं रखती है ? यदि मंत्री कवासी लखमा के व्यक्तित्व को सामने रखा जाए तो इसका उत्तर आसानी से दिया जा सकता है। कवासी लखमा के पहले अविभाजित मध्यप्रदेश में रामा कोंदा नाम के एक विधायक हुआ करते थे। वे भी पढे-लिखे नहीं थे। रामा कोंदा बस्तर के चितरकोट विधानसभा क्षेत्र से विजयी हुए थे। श्री लखमा की तरह रामाकोंदा भी लोकप्रिय हुआ करते थे। अशिक्षा उनकी राजनीति में कभी बाधा नहीं बनी। पढ़े- लिखे नहीं होने के बावजूद वे अपने क्षेत्र के नागरिकों से उनकी समस्याएं लिखवा कर लेना नहीं भूलते थे।इतना ही नहीं लिखी हुई शिकायतें लेकर वे कलेक्टर और एसपी जैसे अफसरों के पास जा धमकते थे।कई दफा तो जनता की समस्याओं का निदान कराए बगैर अफसरों के चेंबर से रामा कोंदा बाहर नहीं निकलते थे। वे समस्याओं को बीमारी की संज्ञा दिया करते थे। भले ही पीठ पीछे उनकी शैली का उपहास उड़ाया जाता हो किंतु उन्होंने ब्यूरोक्रेसी से कभी हार नहीं मानी। जनता के प्रति ऐसा ही समर्पण भाव मंत्री कवासी लखमा में भी देखा जा सकता है।

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दक्षिण- पश्चिम बस्तर के नागारास नामक एक छोटे से गांव से मंत्री तक का सफर श्री लखमा के लिए नि:संदेह काफी चुनौतीपूर्ण रहा होगा। लेकिन जब वे विधायक भी नहीं थे तब भी अपने क्षेत्र के गांवों में काफी लोकप्रिय हुआ करते थे। इसी लोकप्रियता की वजह से वे सर्वप्रथम अपने ग्राम पंचायत के निर्विरोध सरपंच निर्वाचित हुए थे। उस जमाने में ना-ना प्रकार के छोटे-मोटे व्यापार श्री लखमा किया करते थे। व्यापार के कारण गांवों में उनकी जबरदस्त धाक और साख थी। पढ़े -लिखे नहीं थे लेकिन व्यापार के हिसाब- किताब में थे बडे पक्के। अनपढ़ हो कर भी व्यापार जैसे उनकी घुट्टियों में समाया हुआ था। यही कारण है कि गांव- गांव में उन्हें “खोटला सेठ” के नाम से भी जाना जाता है। बहरहाल बात चल रही थी “दादी” की लोकप्रियता की। लॉकडाउन में भी श्री लखमा ने अपनी लोकप्रियता पूर्ववत बनाए रखा। जैसे ही उन्होंने ऑनलाइन शराब की बिक्री कराने का फैसला किया वैसे ही उनके कई शुभचिंतक सकते में आ गए।लेकिन फैसला ठीक-ठाक निकला।अब दिल्ली सरकार ने भी शराब की ऑनलाइन बिक्री प्रारंभ कर दी है। यहां यह प्रश्न उठता है कि क्या कवासी लखमा अनपढ़ हो कर भी सबसे चतुर और लोकप्रिय आदिवासी नेता साबित हो रहे हैं ? इसके उत्तर के लिए हमें आदिवासी नेताओं के राजनीतिक इतिहास के पन्ने पलटने पड़ेगें।

अविभाजित मध्यप्रदेश में वसंतराव उइके सबसे दबंग आदिवासी नेता माने जाते थे। मंडला जिले के सिवनी क्षेत्र से चुनाव जीतने वाले वसंतराव को मध्य प्रदेश का जगजीवन राम माना जाता था। लेकिन वे मुख्यमंत्री की कुर्सी तक नहीं पहुंच पाए। सन् 1980 में शिव भानु सिंह सोलंकी मुख्यमंत्री की दौड़ में आगे निकल गए थे। राजनैतिक गलियारे में पकड़ रखने वालों का कहना है कि अर्जुन सिंह के सामने सबसे बड़ी चुनौती खरगोन से जीत कर आए शिव भानु सिंह सोलंकी ही थे। उस जमाने में दिल्ली से पर्यवेक्षक बनकर भोपाल प्रणव मुखर्जी आए थे। विधायकों की रायशुमारी में बहुमत शिव भानु सिंह सोलंकी के पक्ष में था। इसके बावजूद कांग्रेस हाईकमान ने अर्जुन सिंह को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपने का फैसला किया। आदिवासी नेताओं के पर कतरने का सिलसिला इसके बाद ही मध्यप्रदेश में प्रारंभ हुआ था जो आज भी निरंतर जारी है। सन् 1984 में डॉक्टर भंवर सिंह पोर्ते को विधानसभा की टिकट इसी वजह से गंवानी पड़ी थी। झुमुक लाल भेड़िया, वेद राम, टुमन लाल, अरविंद नेताम, दिलीपसिंह भूरिया ऐसे कई नाम हैं जो मुख्यमंत्री बनने की क्षमता रखते थे। लेकिन उन्हें प्रदेश में सत्ता की शीर्ष कुर्सी कभी नसीब नहीं हो पाई। छत्तीसगढ़ बनने के बाद महेंद्र कर्मा, अरविंद नेताम, बलीराम कश्यप, नंद कुमार साय, रामविचार नेताम, प्यारेलाल कंवर जैसे कुछ नाम थे जो मुख्यमंत्री बनने के काबिल थे। इन आदिवासी नेताओं की लोकप्रियता भी अच्छी थी और जनाधार भी। आदिवासी एक्सप्रेस पर सवार हो इन नेताओं में से कुछ ने पूरे छत्तीसगढ़ का दौरा भी किया था। यह बात दिगर है कि सब के सब अजीत जोगी जैसे नेता से मात खा गए। सन् 1980 में शिवभानु सिंह सोलंकी के साथ जो कुछ हुआ वही सन् 2000 में छत्तीसगढ़ के आदिवासी नेताओं के साथ घटित हुआ। वही पुरानी कहावत चरितार्थ हुई जिसमें इतिहास को दोहराने की दुहाई दी जाती है। वैसे आदिवासी बाहुल्य राज्य छत्तीसगढ़ में अब आदिवासी मुख्यमंत्री का मुद्दा नेपथ्य में चला गया है। कई आदिवासी नेता तक यह खुलकर स्वीकारने भी लगे हैं । इसी बीच कवासी लखमा जैसे तेजतर्रार आदिवासी नेता का उभर कर सामने आना आदिवासी समाज के मध्य उत्सुकता का बिषय बना हुआ है। यद्यपि बस्तर से ही कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम भी ताल्लुकात रखते हैं। लेकिन लोकप्रियता के मामले में पार्टी अध्यक्ष से श्री लखमा काफी आगे हैं। यही वजह है कि “दे दिस सब ला चकमा, आई लव यू कवासी लखमा” वाला जुमला बस्तर सहित पूरे प्रदेश में कुछ ज्यादा ही गूंज रहा है। इस अनुगूंज के पीछे के निहितार्थ को ताड़ने में यदि मंत्री कवासी लखमा सफल रहे तो उनकी राजनीति का सितारा हमेशा बुलंद रह सकता है। यह लेख वरिष्ठ पत्रकार व अध्यक्ष
आंचलिक समाचार पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान जगदलपुर, बस्तर ,छत्तीसगढ़ के राजेंद्र कुमार तिवारी के निजी विचार है।

विधायक व संसदीय सचिव की भरी सभा में आदिवासियों से हुई झूमाझटकी

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मोहला-मानपुर क्षेत्र के विधायक व संसदीय सचिव इंद्रशाह मंडावी की भरी सभा में आदिवासियों से हुई झूमाझटकी। मोहला के बस स्टैंड में बस्तर के सिलगेर आंदोलन से जुड़े मामलों पर आदिवासियों की बड़ी बैठक हो रही थी। इसमें इंद्रशाह के अलावा पूर्व सांसद सोहन पोटाई व पूर्व विधायक संजीव शाह भी शामिल होने पहुंचे थे। उदबोधन के दौरान संसदीय सचिव ने भूपेश सरकार की तारीफ करनी शुरू कर दी। इससे नाराज आदिवासियों ने पहले तो विरोध शुरू किया। फिर उनके हाथों से माइक छीन लिया गया। शाह को मंच से उतारने कहा गया। तभी उनके साथ धक्का-मुक्की शुरू कर दी गई। बैठक के दौरान पुलिस भी मौजूद थी। नेताओं व पुलिस के बीच-बचाव के बाद मामला शांत हो पाया।

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