जगदलपुर 24 जून 2023 जिला चिकित्सालय जगदलपुर में बस्तर ब्लॉक की भड़ीसगांव निवासी गर्भवती सुनिता पति बंटु नागेश गंभीर अवस्था में इलाज कराने के लिए पहुंची थी, सम्बन्धित महिला की गम्भीर स्थिति को मद्देनजर रखते हुए महारानी अस्पताल में डॉक्टरों ने जटिल ऑपरेशन कर उसे जीवनदान प्रदान किया। उक्त ग्रामीण महिला के पति ने ईलाज कराने के दौरान बताया कि बकावंड से ईलाज के लिए डिमरापाल मेडिकल कालेज अस्पताल ले जाया गया था,लेकिन मरीज को वहां से जिला चिकित्सालय जगदलपुर में ईलाज के लिए गंभीर अवस्था में भेज दिया गया। चिकित्सालय की स्त्री रोग विशेषज्ञ डाक्टर मनीषा गोयल द्वारा परीक्षण करने पर थर्ड ग्रेविडा प्लेसेंटा एवं गर्भाशय झिल्ली फट जाने से रक्त स्त्राव होना बताया गया जिससे महिला की जान जा सकती थी। उक्त गंभीर स्थिति को देखते हुए आपात समय में त्वरित शल्य क्रिया किया जाना आवश्यक हो गया था।इस प्रकरण की गंभीर स्थिति को देखते हुए स्थानीय स्तर पर सिविल सर्जन डॉ संजय प्रसाद द्वारा तुरंत संज्ञान लेते हुए तत्काल एक अन्य महिला विशेषज्ञ की सेवाएं तथा दो यूनिट ब्लड की व्यवस्था किया गया। स्थानीय स्तर पर एक अन्य महिला विशेषज्ञ की त्वरित व्यवस्था कर जिला चिकित्सालय में ही गर्भाशय की झिल्ली की सिलाई हेतु आवश्यक जटिल सर्जरी की व्यवस्था की गई। दोनों महिला विशेषज्ञ एवं निश्चेतना विशेषज्ञ की मदद से की गई सर्जरी के द्वारा अंततः महिला की जान बचाई गयी। सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक महारानी अस्पताल जगदलपुर डॉ संजय प्रसाद ने दोनों चिकित्सक एवं आपातकालीन के अन्य महिला विशेषज्ञ जिन्होंने त्वरित ही आपातकालीन में इस सर्जरी में सक्रिय सहभागिता निभाकर महिला की जान बचायी उन्हें धन्यवाद दिया ।
जिस परिवार ने किसी आदिवासी नेता को आगे बढ़ने नहीं दिया वह कर रहा आदिवासी हित की बात : खान
जगदलपुर युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता जावेद खान ने परिवारवाद को लेकर भाजपा पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि भाजपा परिवारवाद को लेकर अन्य दलों पर तंज कसती रहती है, परंतु वह कभी अपने गिरेबान में झांक कर नहीं देखती कि उसकी छलनी में कितने छेद हैं। भाजपा के नेताओं को असल परिवारवाद देखना हो, तो उन्हें बस्तर आकर देखना चाहिए कि किस तरह सालों से एक ही परिवार बस्तर भाजपा की राजनीति का धुरी बना बैठा है। यह परिवार न खुद आगे बढ़ पा रहा है और न ही बस्तर के अन्य आदिवासी भाजपा नेताओं को आगे बढ़ने देता है।अभा युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता, एआईसीसी के बस्तर लोकसभा क्षेत्र एलडीएम कोआर्डिनेटर जावेद खान ने भाजपा नेता केदार कश्यप के बयान पर पलटवार करते हुए यह तीखी प्रतिक्रिया दी है। जावेद ने केदार कश्यप के बयान पर कहा है कि कांग्रेस में चल रहे आंतरिक संगठनात्मक क्रियाकलापों पर राजनीति करने वाले वह होते कौन हैं ? कांग्रेस की राजनीति को आदिवासी हितों से जोड़कर वह अपनी जातिवादी मानसिकता को उजागर कर रहे हैं। यदि उन्हें आदिवासियों की इतनी ही फिक्र है, तो जब विश्व आदिवासी दिवस के दिन भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे विष्णुदेव साय को हटाकर भाजपा ने अरुण साव को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया था तब उन्होंने चुप्पी क्यों साध रखी थी? क्या यह आदिवासियों का अपमान नहीं था, जो विश्व आदिवासी दिवस के दिन ही विष्णुदेव साय को हटाकर भाजपा ने अपनी आदिवासी विरोधी विचारधारा को जगजाहिर किया था। जावेद खान ने कहा है कि कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस पार्टी एक लोकतांत्रिक संगठन है, जहां हर एक को अपनी बात लोकतांत्रिक तरीके से रखने की पूर्ण स्वतंत्रता है। कांग्रेस पार्टी के सारे कार्य कांग्रेस वर्किंग कमेटी के अधीन ही होते हैं। भाजपा में जिस प्रकार से बाहरी शक्तियों का दबाव संगठन में होता है, वैसी कोई शक्ति कांग्रेस के लिए काम नहीं करती। इस बात भी केदार कश्यप को समझनी चाहिए। जावेद ने कहा कि भाजपा के शीर्ष नेता परिवारवाद पर डींगे हांकते हैं। आज सबसे ज्यादा परिवारवाद की राजनीति से भाजपा ही ग्रसित है। यदि भाजपा को परिवारवाद का जीता जागता उदाहरण देखना हो और किस तरह से एक परिवार पिछले कई वर्षों से अन्य आदिवासियों नेताओं का शोषण कर उन पर आधिपत्य जमाए बैठा है यह देखना है तो भाजपा के शीर्ष नेताओं को बस्तर आकर देखना चाहिए कि किस तरह एक परिवार राजनीति में खुद तो आगे बढ़ नहीं पा रहा है और दूसरों को भी आगे बढ़ने नहीं दे रहा है। आज बस्तर में भाजपा मुद्दाविहीन हो चुकी है और पड़ोसी के घर में ताक झांक कर समय व्यतीत करने को मजबूर है। खान ने कहा है कि कांग्रेस ने सदैव आदिवासियों के हित में कार्य किया, बस्तर के आदिवासियों को आगे बढ़ाया उन्हें संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी। इसका उदाहरण हैं सांसद दीपक बैज जो आज आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं, राज्यसभा से सांसद और छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस की अध्यक्ष फूलोदेवी नेताम हैं, पीसीसी अध्यक्ष मोहन मरकाम हैं। बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा को भी आगे बढ़ाने का कार्य कांग्रेस पार्टी ने किया था। असल में बस्तर के कांग्रेसी आदिवासी नेताओं की बढ़ती लोकप्रियता को पचा पाने में असमर्थ भाजपा नेता केदार कश्यप इस तरह की बयानबाजी करते हैं।
कार्यकर्ताओं ने उनके बताये मार्ग पर चलने का लिया संकल्प
बस्तर मंडल भाजपा बस्तर के शक्ति केंद्र प्रभारियों की बैठक भाटपाल ग्राम पचायत के भुरसुंडी सामुदायिक भवन में हुई। भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को उनकी पुण्यतिथि पर याद किया गया व श्रंद्धाजलि अर्पित की गई। कार्यकर्ताओं ने उनके बताये मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। बैठक को संबोधित करते हुए जिला कार्यसमिति सदस्य व मंडल प्रभारी विजय पाण्डे ने कहा कि आज के दिन को भाजपा बलिदान दिवस के रूप में मनाती है। महान राष्ट्र चिंतक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों को आत्मसात करना और उनके बताए मार्ग पर चलना ही उन महान आत्मा के प्रति सच्ची श्रंद्धाजलि होगी। उनकी पुण्यतिथि पर भाजपा के विशेष जनसंपर्क अभियान के तहत घर-घर संपर्क कार्यक्रम की शुरुआत की गई। पाण्डेय ने कहा कि बूथ कार्यकर्ता लोगों से घर घर जाकर लोगों मिलें और केंद्र सरकार की योजनाओं के बारे में उन्हें जानकारी दें तथा राज्य की कांग्रेस सरकार की नाकामी व उसके द्वारा किये जा रहे भ्रष्टाचार को भी जनता के सामने उजागर करें।जिला पंचायत उपाध्यक्ष मनीराम कश्यप ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सभी कार्यकर्ताओं को उनके बताए राष्ट्रवाद के मार्ग पर चलना चाहिए। उन्होंने पं. जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार द्वारा कश्मीर में धारा 370 प्रभावशील किए जाने पर प्रधानमंत्री नेहरू से हुए मतभेद के कारण डॉ. मुखर्जी ने इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद उन्होंने जनसंघ का गठन किया। तब आम चुनाव में जनसंघ के 3 सांसद चुनकर आए थे। जनसंघ की छाया भारतीय जनता पार्टी आज विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है। बैठक का संचालन महामंत्री नरेंद्र जोशी और आभार प्रदर्शन जनपद उपाध्यक्ष मोहन राम मोर्य ने किया।बैठक में मंडल मंत्री चुन्नूलाल ठाकुर, विधानसभा विस्तारक बीरेंद्र साहू, नरपत कश्यप, छबिश्याम यादव, रामेश्वर दीवान, संतोष बघेल, प्रह्लाद निषाद, हेमनाथ ठाकुर, लखेश्वर बघेल, बुधूराम, धनसिंह यादव, मनीराम, बुधुराम, छेरकूराम, महादेव, राम, सुनारू राम, शिवराम, भगत कश्यप, लखमू राम, सिंधुराम, दया राम, जटियाराम सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे।
बकावंड विकासखंड बकावंड की ग्राम पंचायत बारदा में 22 जून को एक व्यक्ति की सर्पदंश से मृत्यु हो गई। मृतक का नाम मडिया राम निषाद पिता महादेव निषाद बताया गया है। मिली जानकारी के अनुसार मडियाराम शाम को गाय बैलों को चारा देने के लिए पैरा खर्री से पैरा निकाल रहा था। इसी दौरान खर्री में छुपे बैठे सांप ने उसे काट लिया। उसे परिजनों द्वारा तुरंत महारानीअस्पताल जगदलपुर ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
भीषण गर्मी के बीच श्रमदान कर किया तालाब का गहरीकरण
मवेशियों और ग्रामीणों को मिल गई है जल संकट से बड़ी राहत
बकावंड विकासखंड बकावंड की ग्राम पंचायत राजनगर के ग्रामीणों ने भीषण गर्मी के बीच श्रमदान कर सूख चले और पट चुके तालाब को नया जीवन दे दिया है। जमकर पसीना बहाते हुए ग्रामीणों ने तालाब का गहरीकरण कर दिखाया। तालाब गहरा हो जाने से वहां पानी भी भर गया है, जिससे जीव जंतुओं और ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है।
ग्रामीणों की इस पहल की अंचल में खूब प्रशंसा हो रही है। ब्लॉक मुख्यालय से सटी ग्राम पंचायत राजनगर के बोरागुड़ा, कांडगुड़ा व ठोठापारा के ग्रामीणों ने मिलकर श्रमदान के जरिए शिव मंदिर प्रांगण तालाब का गहरीकरण किया है। तीनों बस्तियों के जागरूक ग्रामीणों ने भीषण गर्मी के दौर में भी कष्ट उठाते हुए जमकर पसीना बहाया और तालाब का गहरीकरण करके ही दम लिया। हालिया हुई बरसात से तालाब में थोड़ा पानी जमा भी हो गया है। इससे मवेशियों एवं वन्य प्राणियों को पीने लायक पानी मिलने लगा है। वहीं तीनों बस्तियों के ग्रामीणों को निस्तारी सुविधा भी मिलने लगी है। तीनों मोहल्लों के ग्रामीणों मिलकर ग्राम पंचायत राजनगर के पंचों व सरपंच से तालाब गहरीकरण के विषय में चर्चा की और इसके बाद तालाब गहरीकरण कार्य को अंजाम दिया गया। ग्राम पंचायत द्वारा 15वें वित्त आयोग मद से डेढ़ लाख रु. राशि ग्रामीणों को दी गई है।
विद्युत कंपनी के जेई को फोन करते रहे, रिसीव करने तैयार नहीं
खुश किस्मती है कि छात्रावासी छात्राएं नहीं आईं चपेट में
जगदलपुर बस्तर जिले के बेसोली के एकलव्य परिसर बालिका छात्रावास कैंपस में बिजली करंट से एक मवेशी की मौत हो गई। करंट बिजली पोल और उसके स्टे तार में फैल गई थी। गनीमत रही कि छात्राएं पोल और स्टे तार के संपर्क में नहीं आईं, अन्यथा बड़ी अनहोनी हो जाती। इस घटना से विद्युत कंपनी के जूनियर इंजीनियर और अन्य कर्मियों की लापरवाही उजागर हो गई है।गत दिवस एक मवेशी चरते चरते एकलव्य परिसर बालिका छात्रावास कैंपस में घुस गया। यह मवेशी कैंपस के भीतर स्थित लोहे के बिजली पोल के संपर्क में आ गया। बताते हैं कि पोल में करंट प्रवाहित हो गई थी और करंट लगने से मवेशी की जान चली गई। इसी पोल से छात्रावास में बिजली कनेक्शन गया हुआ है। अभी बारिश भी ढंग से नहीं हुई है कि गीलेपन के कारण पोल में करंट प्रवाहित होने का अंदेशा हो। बताया गया है पोल में वायरिंग ठीक से नहीं की गई है। नंगे तार पोल से छू गए और इसी वजह से पोल में करंट प्रवाहित हो चला था। इसी के चलते गोवंश की जान चली गई। एकलव्य परिसर बालिका छात्रावास में सैकड़ों छात्राएं रहती हैं। गनीमत है कि ग्रीष्म अवकाश जारी रहने की वजह से छात्रावास में छात्राएं नहीं थीं। अगर छात्रावास में छात्राएं रहतीं, तो उनके साथ भी बड़ी अनहोनी हो जाती। मासूम आदिवासी छात्राओं की जान पर बन आती, तब इसके लिए जिम्मेदार कौन होता?
जूनियर इंजीनियर की ऐसी टशन !
वैसे तो समूचे बस्तर में विद्युत कंपनी के अधिकारी कर्मचारी अपनी मनमानी और लापरवाही के लिए जाने जाते हैं, लेकिन बेसोली के मामले से ताल्लुक विद्युत कंपनी के जूनियर इंजीनियर की टशन ही निराली है। ये जेई साहब खुद को विद्युत वितरण कंपनी के ईई यानि एक्जीक्यूटिव इंजीनियर से कम नहीं समझते। बिजली विभाग जैसे संवेदनशील महकमे में पदस्थ रहते हुए भी वे फोन कॉल रिसीव नहीं करते। आप कॉल पर कॉल करते रहिए, लेकिन साहब फोन उठाएंगे नहीं, क्योंकि किसी का भी फोन रिसीव करना वे अपनी शान के खिलाफ जो समझते हैं। मवेशी के करंट से मौत के दिन भी ऐसा ही हुआ। घटना की सूचना देने और विद्युत प्रवाह बंद कराने के लिए जेई को कई बार कॉल किया गया, लेकिन उन्होंने रिसीव ही नहीं किया। किसी तरह विद्युत वितरण केंद्र में सूचना पहुंचाकर बिजली प्रवाह बंद कराया गया। वितरण केंद्र का लैंड लाईन फोन बिल अदा न किए जाने के कारण सालों से बंद पड़ा है। कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि करंट से दो चार मौतें हो जाने पर भी वितरण केंद्र को त्वरित सूचना देना मुमकिन नहीं है।
प्रतिभावान छात्र को आगे बढ़ाने तहसील साहू संघ रिसाली की शानदार और अनुकरणीय पहल
रिसाली तहसील साहू संघ रिसाली ने समाज के एक प्रतिभावान छात्र को उच्च शिक्षित डॉक्टर बनाने के लिए शानदार और अनुकरणीय मिसाल पेश की है। साहू समाज के एक छात्र को एमबीबीएस की पढ़ाई के बाद एमएस का कोर्स करने के लिए पांच लाख रु. का आर्थिक सहयोग तहसील साहू संघ रिसाली द्वारा दिया गया है। यह रकम वापसी योग्य है। यानि कोर्स पूरा करने के बाद छात्र जब प्रेक्टिस अथवा जॉब करने लग जाएगा तब उसे यह रकम समाज को लौटानी होगी। तहसील साहू संघ रिसाली के अध्यक्ष संतोष साहू एवं उपाध्यक्ष ललित साव ने बताया कि तहसील साहू संघ रिसाली ने अपने उत्कृष्ट कार्यों, समाज सेवा एवं विविध रचनात्मक कार्यों के दम पर महज 2 वर्ष में ही उपलब्धियों का झंडा गाड़ दिया है। संघ ने छात्र को करियर निर्माण के लिए 5 लाख का सहयोग देकर सामाजिक उदारता का परिचय दिया है। तहसील साहू संघ रिसाली को अस्तित्व में आए महज 2 वर्ष हुए हैं। इस तहसील इकाई ने अल्प समय के कार्यकाल में ही अविश्वसनीय कार्यों को संपादित कर बेहतरीन कीर्तिमान स्थापित किया है। युवक युवती परिचय सम्मेलन, सामाजिक पत्रिका में बीपीएल कार्डधारियों का निशुल्क ब्यौरा प्रकाशन अन्य जिलों तहसीलों की अपेक्षा बहुत ही रियायती दरों पर युवक युवती परिचय पत्रिका का प्रकाशन कराना, समाज के कार्यक्रमों में समस्त उपस्थित साहू बंधुओं के लिए भोजन की व्यवस्था करना, 2 साल के कार्यकाल में लगभग 35 लाख रुपए की लागत से कर्मा हाल का निर्माण कराना, प्रतिभावान छात्र-छात्राओं सहित उत्कृष्ट कार्य करने वाले सामाजिक जनों का मुख्यमंत्री के हाथों से सम्मानित कराना, साहू समाज के गरिमा और गौरव के अनुरूप विशाल स्तर पर दशहरा मैदान रिसाली में कार्यक्रम कराकर साहू समाज का वर्चस्व बढ़ाना, समाज के लोगों को रियायत दरों पर मांगलिक कार्यों के लिए भवन उपलब्ध कराना जैसे तमाम रचनात्मक कार्य तहसील साहू संघ रिसाली की अगुवाई में हो रहा है। इससे तहसील साहू संघ रिसाली के समाजिक जन स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।
बेटे को कामयाब क्रिकेटर बनाने के लिए एक पिता ने रच दिया इतिहास
बेटे की प्रेक्टिस के लिए बनाया निजी खर्च पर शानदार स्टेडियम
बस्तर के बच्चों को दिया जा रहा है इंटरनेशनल लेवल का प्रशिक्षण
अर्जुन झा
बस्तर अपने बेटे को कामयाब क्रिकेटर बनाने और अपनी अधूरी ख्वाहिश को पूरा करने के लिए एक क्रिकेटर पिता ने क्रिकेट के मामले में सुविधा विहीन बस्तर जिले में अंतर्राष्ट्रीय मापदंड के अनुरूप इंटरनेशनल लेवल का क्रिकेट मैदान बना डाला। इसके लिए इस शख्स ने न सरकार से, न किसी क्रिकेट संस्था से और न ही किसी संगठन से आर्थिक मदद ली। और तो और मैदान बनाने के लिए अपने चार एकड़ रकबे वाले खेत को ही क्रिकेट के दीवाने इस शख्स ने होम कर दिया।
बस्तर जिला मुख्यालय से महज 5 किमी दूर ग्राम कालीपुर में अंतर्राष्ट्रीय स्तर का स्टेडियम बनाया गया है। यह स्टेडियम सरकारी खजाने से नहीं बना है और न ही इसे क्रिकेट एकेडमी या क्रिकेट एसोसिशन ने बनाया है। क्रिकेट स्टेडियम एक पूर्व खिलाड़ी ने अपने स्वमं के खर्चें से बनाया है। क्रिकेट के इस दीवाने शख्स का नाम है प्रदीप गुहा। गुहा ने अपने क्रिकेट प्रेमी बेटे के प्रेक्टिस करने के लिए जो मैदान बनाया था, वह अब क्रिकेट इंस्टीट्यूट में तब्दील हो चुका है। क्रिकेट से पागलपन की हद तक मोहब्बत करने वाले 43 वर्षीय प्रदीप गुहा स्वयं एक अच्छे क्रिकेटर हैं। वे वेतरन क्रिकेट खिलाड़ियों में शुमार हैं। छत्तीसगढ़ के वेटरन क्रिकेटर्स के प्रदर्शन के मामले में प्रदीप गुहा का रैंक नौवां है। श्री गुहा ने बताया कि कुछ दिनों पहले रायपुर में आयोजित वेटरन खिलाड़ियों के दो मैचों में उन्होंने चार विकेट लिए थे। क्रिकेट के प्रति जुनून को लेकर प्रदीप गुहा से इस संवाददाता ने बातचीत की। उन्होंने कहा कि मुझे क्रिकेट खेलने का बचपन से ही शौक था, लेकिन बस्तर में किसी तरह की सुविधा या मार्गदर्शन नहीं मिलने से क्रिकेट में आगे बढ़ने का अवसर नहीं मिल पाया। अपने बेटे और बेटी को क्रिकेट के क्षेत्र में लाने का प्रयास किया। गांव में ही बच्चों को क्रिकेट के गुर सिखाते हुए उन्हें हर उस मैच में ले जाता था, जहां खिलाड़ियों के प्रदर्शन को देख बच्चे भी अच्छा खिलाड़ी बनने के अपने सपने को परवान चढ़ा सकें।बेटी को लड़कों के साथ मैच खेलते हुए देखकर लोग टीका टिप्पणी भी करते थे, लेकिन मेरी सोच थी कि मैं अच्छा खिलाड़ी नहीं बन सका तो क्या हुआ, बच्चों को आगे बढ़ाकर ही दम लूंगा। इसके लिए बच्चों को देश के कई महानगरों में ले जाकर भारतीय टीम के नामी खिलाड़ियों के संस्थानों में फीस देकर दाखिला दिलवाया। अभी बेटा अंडर -16 की स्टेट टीम में खेल रहा है और बेटी पत्नी की इच्छा के अनुरूप एमबीबीएस में दाखिला ले चुकी है।उन्होंने कहा- क्रिकेट के प्रति मेरा जुनून जरा भी कम नहीं हुआ है। गांव में स्टेडियम बनाने का उद्देश्य बस्तर के खिलाड़ियों को भारतीय टीम का हिस्सा बनाना और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के मैच तक पहुंचाना है।
चार एकड़ में बनाया खुद का मैदान
कालीपुर गांव निवासी प्रदीप गुहा को क्रिकेट का ऐसा जुनून है कि उन्होंने अपने 4 एकड़ के खेत को क्रिकेट ग्राउंड में तब्दील कर दिया है, जहां टर्फ बनाने के लिए राजस्थान और रायपुर से मिट्टी मंगवाई गई और छत्तीसगढ़ क्रिकेट संघ के एक्सपर्ट की देखरेख में पिच बनाई गई। प्रदीप गुहा ने बताया कि स्टेडियम में ही रेसीडेंसियल क्रिकेट अकादमी तैयार किया गया है। बस्तर के दूर-दराज के क्रिकेट खिलाड़ी यहां रहकर अपनी प्रतिभा को निखार सकते हैं। अभी सुकमा क्षेत्र के 10 आदिवासी बच्चे हॉस्टल में रहकर ट्रेनिंग ले रहे हैं। इस क्रिकेट ग्राउंड में लगभग 50 बच्चे रोजाना अभ्यास करने आते हैं। ये बच्चे शहर से 7-8 किलोमीटर दूर के निवासी हैं। उन्होंने बताया कि मात्र 1500 रूपए महीने की फीस ली जाती है। इस राशि के एवज में ट्रेनीज को क्रिकेट किट देते हैं। यदि कोई आर्थिक रूप से गरीब बच्चा है और जिसमें क्रिकेट खेलने की प्रतिभा है, उसे फ्री में जूते, जर्सी और हॉस्टल- भोजन सब कुछ दिया जाता है।उन्होंने बताया कि हॉस्टल में रहने वाले बच्चे किसी भी समय मैदान में अभ्यास कर सकते हैं। उन्हें सिखाने के लिए बीसीसीआई लेवल का रजिस्टर्ड कोच उपलब्ध हैं, जो सुबह शाम निर्धारित समय में बच्चों और युवाओं को बैटिंग, बॉलिंग, फील्डिंग समेत क्रिकेट के मंजे हुए खिलाड़ी बनने के सारे गुर सिखा रहे हैं। जो अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी मैच में अपनाते हैं, वह सारी व्यवस्थाएं इस मैदान में उपलब्ध कराई गई हैं।
तीन साल की मेहनत रंग लाई
कोलकाता के ईडन गार्डन मैदान की तरह कालीपुर का क्रिकेट मैदान पूरी तरह हरी घास से भरा हुआ है। गांव के खेत की भूमि को मैदान का रूप देने के लिए 3 साल तक की गई मेहनत रंग लाई। उबड़ खाबड़ खेती जमीन को क्रिकेट का मैदान बनाने के लिए सैंकड़ों ट्रक मिट्टी का उपयोग किया गया, मैदान को समतल करने के लिए उन्होंने महाराष्ट्र से 4 रोलर मंगवाए, वहीं विदेशी कंपनी के ड्रिप सिस्टम से पूरे मैदान पर पानी का छिड़काव किया जाता है। ग्रास कटर मशीन भी बाहर से मंगवाई गई है। रायपुर के परसदा स्थित अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट ग्राउंड के बाद कालीपुर का यह क्रिकेट ग्राउंड, अंतर्राष्ट्रीय मैच के स्तर का बन सका है। यहां क्रिकेट के गुर सीखने आ रहे स्वर्ण राज बाफना, पुलकित जैन और खुशबू मजूमदार का कहना है कि बस्तर मुख्यालय में अच्छा क्रिकेट मैदान नहीं है। कहीं है भी तो वहां उनमें सविधाएं नहीं हैं। कालीपुर में मैदान बन जाने से खेलने का मौका मिल रहा है। यहां अच्छे कोच हैं जो खेल की बारीकियां सिखा रहे हैं।इन बच्चों ने अपने प्रदीप गुहा अंकल के प्रति आभार जताते हुए कहा कि उन्होंने ऐसा बेहतरीन मैदान हम बच्चों के लिए उपलब्ध कराया है। ये बच्चे रोज सुबह शाम दो दो घंटे प्रेक्टिस करते हैं।
बीसीसीआई के नार्म्स पर कराई जा रही प्रेक्टिस
कालीपुर में प्रदीप गुहा द्वारा निर्मित नेताजी सुभाषचंद्र बोस स्टेडियम में बीसीसीआई मान्यता प्राप्त कोच करणदीप भी बच्चों और युवाओं को प्रशिक्षण देते हैं। उनका कहना है कि यहां करीब 50 बच्चें रेगुलर अभ्यास कर रहें हैं। उन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों की तरह प्रेक्टिस कराई जा रही है। मैदान में प्रवेश के बाद पहले व्यायाम कराया जाता है। फिर दो टीमें बना कर रेगुलर मैच कराया जाता है। ताकि उनके खेल में अच्छी पकड़ बन सके। इतना ही नहीं, उन्हें अच्छी डाईट भी दी जाती है।करणदीप का कहना है कि बस्तर के बच्चों की कद काठी जबरदस्त है। उनमें दौड़ने की क्षमता भी अधिक है।कीक्रिकेट की बारीक से बारीक टेक्नीक को वे तुरंत पकड़ लेते हैं।
रणजी प्लयेर भी करते हैं यहां प्रेक्टिस
हाल ही में बनकर तैयार हुये नेताजी सुभाषचंद्र बोस स्टेडियम कालीगांव के संचालक प्रदीप गुहा ने सिर्फ बच्चों को ही बड़ा प्लेटफार्म नहीं दिया है, बल्कि बड़े और राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी भी इस मैदान का आपयोग कर रहे हैं। रणजी प्लेयर सौरभ सरकार अपनी प्रतिभा को और भी दुरुस्त करने के मकसद से इस मैदान में पसीना बहा रहे हैं। वे कहते हैं कि बस्तर में अच्छे क्रिकेट मैदान की कमी हमेशा से ही रही है।संसाधन कम थे फिर भी मेहनत कर मैं रणजी तक खेला। क्रिकेट को मैं जी भरकर जीना चाहता हूं। मैदान की कमी और सुविधाएं नहीं होने से प्रेक्टिस करने में दिक्कतें आती थीं।पता चला कि कालीपुर में प्रदीप भैया ने मैदान बनाया है, तो यहां पहुंच गया और अब मैं यहां नियमित प्रेक्टिस करता हूं। इससे मुझे काफी राहत मिली है।
फ्लड लाइट और एलईडी सुविधा भी जल्द
प्रदीप गुहा ने बताया कि रात में भी मैच हो सके, इसके लिए फ्लड लाइट की सुविधा पर काम चल रहा है, वह भी अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैदान के मानक स्तर का होगा। साथ ही एलईडी भी लगेगी, जिससे रन आउट होने के बाद खिलाड़ी अपने पिछले एक्शन को देख सकेंगे। कुल मिलाकर कालीपुर का यह अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम एक व्यक्ति के जुनून के साथ तैयार हुआ है। इसे बस्तर का ईडन गार्डन कहना उचित होगा। प्रदीप गुहा बताते हैं कि 65 मीटर की बाउंड्रीवाल है, जहां तक महेंद्र सिंह धोनी चौका -छक्का मारते हैं। इसका मतलब है अंतर्राष्ट्रीय मैच वाले देश के क्रिकेट मैदानों के बराबर कालीपुर के इस मैदान में मापदंड के अनुसार काम किया गया है।
28 जुलाई 2019 को नगरनार थाना क्षेत्र में हुई थी बड़ी वारदात
मामले में अब तक चार आरोपियों को धर चुकी है राष्ट्रीय जांच एजेंसी
अर्जुन झा
नगरनार नगरनार इस्पात संयंत्र नक्सली आतंक के साये में है। क्या इस विशाल प्लांट को नक्सली टारगेट बना सकते हैं? यह हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि अंचल का रक्तरंजित इतिहास इस तरह की आशंका कुशंका को जन्म दे रहा है। कुछ साल पहले ही नगरनार के बिल्कुल नजदीक के जंगलों में नक्सलियों का बड़ा जमावड़ा लगा था। उस समय सुरक्षा बलों और नक्सलवादियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई थी। इस मुठभेड़ में छह नक्सलियों के मारे जाने की बात सामने आई थी। मामले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी ( एनआईए ) मुठभेड़ में लिप्त रहे चार माओवादियों को गिरफ्तार कर चुकी है। नगरनार अंचल नक्सली गतिविधियों के मामले में संवेदनशील माना जाता है। अंचल में आएदिन नक्सलियों की पदचाप सुनाई देती रहती है। हालांकि छत्तीसगढ़ पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों द्वारा लगातार चलाए जा रहे नक्सल विरोधी अभियानों के चलते नक्सली गतिविधियों पर काफी हद तक लगाम लग चुका है, लेकिन ऐसी गतिविधियां पूरी तरह थमी नहीं हैं। नक्सलियों की पैठ अभी तक अंचल के दर्जनों गांवों में बनी हुई है। वे निरीह और भोले भाले आदिवासियों को आगे कर अपने मंसूबों को अंजाम देने की कोशिशों में लगे रहते हैं। नक्सलियों के डर के कारण ग्रामीण उनका साथ देने मजबूर हो जाते हैं। चार साल पहले ही नक्सलियों ने अंचल में बड़ी वारदात को अंजाम दिया था। बात 28 जुलाई 2019 की है, जब नक्सलियों ने एंटी नक्सल ऑपरेशन पर निकले सुरक्षा बलों पर अचानक हमला बोल दिया था। उस समय नक्सली शहीद सप्ताह मनाने नगरनार थाना क्षेत्र के तिरिया गांव के पास जंगलों में इकट्ठा हुए थे। इस आशय की सूचना मिलने के बाद डीआरजी, एसटीएफ और सीआरपीएफ की ज्वाइंट फोर्स ऑपरेशन और सर्चिंग गश्त के लिए निकली थी। इसी दौरान नक्सलियों ने फोर्स पर जबरदस्त फायरिंग शुरू कर दी थी। जवानों ने भी तुरंत पोजीशन लेकर जवाबी फायरिंग शुरू कर दी। नक्सली ज्यादा देर तक टिक नहीं पाए और घने जंगलों की आड़ लेकर भाग निकले। मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने छह नक्सलियों को ढेर कर दिया था। इस मुठभेड़ के बाद फोर्स ने जंगलों ने घटना स्थल से बड़ी मात्रा में गोला, बारूद व अन्य विस्फोटक पदार्थ, नक्सली साहित्य, हाथ से लिखे दस्तावेज आदि बरामद किए थे। उस समय नगरनार पुलिस ने इस मामले में आर्म्स एक्ट और यूए (ए ) एक्ट को अपराध पंजीबद्ध किया था। बाद में यह मामला एनआईए को सौंप दिया गया। तबसे राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) तिरिया नक्सली हमले की जांच कर रही है। इस मामले में एनआईए अब तक चार लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। दो आरोपी पहले ही पकड़े जा चुके थे तथा एक महिला एवं एक पुरुष आरोपी को 18 जून 2023 को गिरफ्तार किया गया। हालिया पकड़ी गई महिला आरोपी का नाम बीसीएच पदमा उर्फ मोडेम पदमा उर्फ ललिता और पुरुष आरोपी का नाम दुबासी देवेंद्र बताया गया है। बताया गया है कि ये दोनों आरोपी देश विरोधी गतिविधियों को आगे बढ़ाने में सीपीआई (माओवादी) के शीर्ष नेतृत्व के साथ सक्रियता से जुड़े हुए थे। एनआईए ने इससे पहले दोनों आरोपियों के आवास परिसरों पर की तलाशी के दौरान सीपीआई (माओवादी) कैडरों की गतिविधियों से संबंधित कई आपत्तिजनक सामग्रियां बरामद की थीं। बीसीएच पद्मा पहले भाकपा माओवादी की मंडल समिति सदस्य के रूप में सक्रिय थी और वर्तमान में अग्र संगठनों और भाकपा (माओवादी) के बीच समन्वयक के रूप में कार्य कर रही थी। वह भाकपा (माओवादी) की विचारधारा का प्रसार भी कर रही थी। दूसरा आरोपी दुबासी देवेंद्र कोर क्षेत्र में सक्रिय भाकपा (माओवादी) कैडरों से निकटता से जुड़ा हुआ है। वह सीपीआई (माओवादी) के लिए कुरियर का भी काम कर रहा था और गुप्त रूप से उनके कागज आधारित और डिजिटल संचार में सहयोग कर रहा था।*बॉक्स**प्लांट की सुरक्षा सीआईएसएफ के हवाले*हालांकि नगरनार स्टील प्लांट के निजीकरण की कवायद चल रही है, लेकिन फिलहाल सार्वजनिक क्षेत्र के अन्य उद्योगों की तरह इस प्लांट की भी सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) को सौंप दी गई है। कुछ माह पहले ही यहां सीआईएसएफ ने मोर्चा सम्हाल लिया है। सीआईएसएफ का मूल कार्य उद्योगों की आंतरिक सुरक्षा करना और उद्योगों की संपत्तियों को चोरी होने से बचाना है। आतंकी और नक्सली हमलों जैसे बाह्य खतरों से निपटने के लिए सीआईएसएफ के पास उतने अधिकार और संसाधन नहीं हैं, जितने कि दीगर केंद्रीय सुरक्षा बलों के पास होते हैं। लिहाजा कहा जा सकता है कि अगर कभी अप्रिय स्थिति आ गई तो प्लांट को भारी नुकसान पहुंच सकता है।*बॉक्स**दल्ली राजहरा में हो चुकी है घटना*स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (सेल) की दल्ली राजहरा स्थित लौह अयस्क खदान इलाके में नक्सली हमले की घटना हो चुकी है। कुछ साल पहले नक्सलियों ने दल्ली राजहरा के उस बोईरडीह डेम को नुकसान पहुंचाने की कोशिश और डेम में स्थापित पंप हाउस में तोड़फोड़ की थी, जहां से लौह अयस्क खदान को पानी की आपूर्ति की जाती है। तब नक्सलियों ने पंप हाउस के कर्मचारी को बंधक बना लिया था और उसकी जमकर पिटाई भी कर दी थी। दल्ली राजहरा की खदानों से भिलाई स्टील प्लांट को लौह अयस्क की आपूर्ति की जाती है।यहां यह बताना जरूरी है कि दल्ली राजहरा की खदानों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी सीआईएसएफ ही सम्हाल रही है। यह तथ्य भी उल्लेखनीय है कि दल्ली राजहरा अंचल में नक्सली गतिविधियां न के बराबर हैं। जबकि नगरनार अंचल कुछ ज्यादा ही संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में नगरनार इस्पात संयंत्र को बाहरी खतरे से बचाने के लिए विशेष सतर्कता और इंतजाम जरूरी है।
मुख्यमंत्री समाज के वयोवृद्ध सदस्यों, तुपकी निमार्ण करने ग्रामीण कलाकारों एवं पेंग बेचने वाले ग्रामीण महिलाओं का करेगे सम्मान
जगदलपुर, 24 जून। बस्तर गोंचा पर्व के छप्पन भोग अर्पण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 25 जून को शामिल होकर गुडि़चा मंदिर-जनकपुरी सिरहसार भवन में भगवान जगन्नाथ के दर्शन उपरांत महाआरती में शामिल होंगे। भगवान जगन्नाथ के दर्शन के उपरांत श्रीजगन्नाथ मंदिर में 360 घर आरण्यक समाज के प्रबंधकारणी एवं 14 क्षेत्रीय समितियों के अध्यक्ष व बस्तर गोंचा समिति के पदाधिकारियों से मिलेंगे। श्रीजगन्नाथ मंदिर में प्रति वर्ष आयोजित किये जाने वाले सम्मान कार्यक्रम में शामिल होकर समाज के वयोवृद्ध सदस्यों के साथ भगवान जगन्नाथ स्वामी को सलामी देने की परंपरा के लिए बस्तर गोंचा पर्व का आकर्षण तुपकी निर्माण करने वाले बस्तर के ग्रामीण कलाकारों एवं पेंग बेचने वाले ग्रामीण महिलाओं का सम्मान मुख्यमंत्री के द्वारा किया जावेगा।प्रतिवर्ष बस्तर गोंचा पर्व के दौरान समाज के वयोवृद्ध सदस्यों के साथ ही भगवान जगन्नाथ स्वामी को सलामी देने की परंपरा के लिए पर्व का आकर्षण तुपकी निर्माण की कला के संरक्षण के लिए तुपकी निमार्ण करने वाले ग्रामीण कलाकारों एवं पेगं बेचने वाली महिलाओं का सम्मान किया जाता है। इस वर्ष श्रीजगन्नाथ मंदिर परिसर में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के द्वारा इस परंपरा का निर्वहन किया जावेगा। जिसमें समाज के वयोवृद्ध ममिला सदस्यो में 1.श्रीमती रिखामनी मनी पानीग्राही उम्र 88 वर्ष पति स्व.मोहन प्रसाद पानीग्राही समाज के संस्थापक अध्यक्ष रहे हैं। 2 श्रीमती चंद्रकुमारी पानीगाही पति स्वश्री मदन पानीग्राही उम्र 85 वर्ष 3. श्रीमती मायावती पानीग्राही पति स्वश्री शंकरनाथ पानीग्राही उम्र 79 वर्ष। इसी क्रम में समाज के वयोवृद्ध पुरुष सदस्यों में 1. रामदयाल पाण्डे पिता स्व.त्रिलोचन पाण्डे उम्र 83 वर्ष 2.कलकनाथ आचार्य पिता स्व. केशव प्रसाद आचार्य उम्र 82 वर्ष 3. बंशीधर पाण्डे पिता स्व. नरहरी पाण्डे उम्र 82 वर्ष का सम्मान किया जायेगा।तुपकी निमार्ण करने वाले बस्तर के ग्रामीण कलाकारों में 1. शंकर लाल सेठिया निवासी माझिगुड़ा 2. रूपसाय धुर्वा निवासी माझिगुड़ा 3. चैतुराम धुर्वा निवासी पुसपाल 4.धरमदास धुर्वा निवासी जड़ीगुड़ा 5. राजु धुर्वा निवासी जड़ीगुड़ा का सम्मान किया जायेगा। पेंग बेचने वाले ग्रामीण महिलाओं में 1. श्रीमती चंचला सेठिया निवासी माझिगुड़ा 2. श्रीमती खेमवती धुर्वा निवासी माझिगुड़ा 3. श्रीमती दशमती धुर्वा निवासी कुरलूभाटा 4. श्रीमती सुकमी धुर्वा निवासी माझिगुड़ा 5. श्रीमती उमादेवी भतरा निवासी माझिगुड़ा का सम्मान मुख्यमंत्री के द्वारा किया जायेगा।360 घरआरण्यक समाज के अध्यक्ष ईश्वर खंबारी ने बताया कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पहले मुख्यमंत्री हैं, जो कि बस्तर गोंचा पर्व के छप्पन भोग अर्पण कार्यक्रम में शामिल होने के लिए 25 जून को संध्या 07 बजे पहुंच रहे हैं। यहां पहुंचकर सबसे पहले भगवान जगन्नाथ की दर्शन के लिए गुडि़चा मंदिर-जनकपुरी सिरहसार भवन जाएंगे,जहां महाआरती में शामिल होकर भगवान का आशीर्वाद लेंगे। तत्पश्चात श्रीजगन्नाथ मंदिर में आयोजित सम्मान कार्यक्रम में शामिल होकर समाज के वयोवृद्ध सदस्यों व तुपकी निर्माण करने वाले ग्रामीण कलाकारों एवं पेंग विक्रय करने वाले ग्रामीण महिलाओं का सम्मान करेंगे सम्मान कार्यक्रम के पश्चात श्रीजगन्नाथ मंदिर में ही भगवान जगन्नाथ को अर्पित किए गए छप्पन भोग का प्रसाद ग्रहण करेंगे।