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श्रम संगठनों द्वारा दो दिवसीय हड़ताल को लेकर खदान मजदूर संघ ने शामिल होने से किया इंकार कहा राजनीति से प्रेरित हड़ताल है – एम.पी.सिंह

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दिनांक 28 एवं 29 मार्च 2022 को देश के कुछ केंद्रीय श्रम संगठनों द्वारा दो दिवसीय हड़ताल का आह्वाहन किया गया है। भारतीय मजदूर संघ एवं उससे सम्बद्ध सभी श्रम संगठन इस दो दिवसीय हड़ताल में शामिल नहीं हैं। इसकी जानकारी देते हुए भा.म.सं. से सम्बद्ध खदान मजदूर संघ भिलाई के अध्यक्ष (केंद्रीय) एम.पी.सिंह ने कहा कि उक्त हड़ताल वास्तविक रूप से राजनीती से प्रेरित हड़ताल है। इस दो दिवसीय हड़ताल में शामिल किये गए मुख्य मुद्दे किसान बिल, महंगाई, केंद्र सरकार को हटाकर नए सरकार को लाना, केंद्र सरकार के द्वारा प्रस्तावित नए श्रम कानून का विरोध आदि है। किन्तु स्थानीय स्तर पर कुछ श्रम संगठनों द्वारा कर्मियों को यह कहकर भ्रमित किया जा रहा है कि उक्त हड़ताल में स्टील कर्मियों के बेहतर एनजेसीएस के मुद्दे को भी शामिल किया गया है जिसके कारण अगर इस्पात कर्मी इस हड़ताल में शामिल होते हैं तो उससे सेल प्रबंधन पर दवाब बनेगा और कर्मियों को एनजेसीएस में बेहतर लाभ होगा।

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ऐसा दुष्प्रचार और भ्रमित करने वाले श्रम संगठनों से भा.म.सं. यह पूछता है कि जब इस्पात कर्मियों के लिए एनजेसीएस में वार्ता चल रही थी और जब संयुक्त रूप से सभी श्रम संगठन 28% पर्क्स की बात पर सहमत हो गए थे तब बाहर आकर अचानक तीन श्रम संगठनों ने २६.५% पर्क्स पर सहमति जताते हुए एमओयू पर हस्ताक्षर क्यों और किन कारणों से कर दिया? जब कर्मी एक लम्बे समय से बेहतर सुविधा की लड़ाई लड़ रहे थे तो ऐसे में अचानक स्वयं द्वारा लिए गए सामूहिक निर्णय से पीछे हटकर कर्मियों के साथ विश्वासघात करने का क्या कारण था? क्या तब इन श्रम संगठनों को कर्मी हित की बात ध्यान में नहीं आयी? इसके अलावा इस हड़ताल में एक ऐसा श्रम संगठन भी शामिल है जो यह प्रचारित करता है कि उसके द्वारा एमओयू पर हस्ताक्षर नहीं किया गया है क्योंकि वो इसे कर्मी हित के विरुद्ध मानता है। लेकिन मजे की बात यह है कि यही श्रम संगठन एक तरफ तो एमओयू के विरोध का दिखावा करता है तो दूसरी तरफ एनजेसीएस के सब कमिटी में अपने सदस्य को भेजकर प्रबंधन से एमओयू के मुद्दों पर चर्चा करता है। भा.म.सं. ऐसे दोगले श्रम संगठन से यह पूछता है कि क्या उसके द्वारा सैद्धांतिक रूप से एमओयू को मान लिया गया है क्योंकि अगर सब कमिटी में बैठकर इस श्रम संगठन के प्रतिनिधि एमओयू के मुद्दों पर सेल प्रबंधन से चर्चा करते हैं तो इसका साफ़ मतलब है कि उसके द्वारा इस एमओयू को मान लिया गया है और केवल कर्मियों को गुमराह और भ्रमित कर वोट की राजनीती हेतु सड़क पर एमओयू का विरोध किया जा रहा है।

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जहाँ तक नए श्रम कानून, महंगाई, इस्पात कर्मियों के बेहतर सुविधा और वेतन की बात है तो भा.म.सं. इसके लिए न केवल दृढ संकल्पित है बल्कि इस दिशा में दृढ़ता और संकल्पित रूप से कार्य कर रहा है। भा.म.सं. का यह स्पष्ट मानना है कि कर्मियों के सुविधाओं में की जा रही कटौती और वेतन में विसंगति के लिए सेल प्रबंधन के अधिकारीयों द्वारा किया जा रहा भ्रष्टाचार और उस भ्रष्टाचार का कुछ चुनिंदा श्रमिक नेताओं द्वारा किया जा रहा समर्थन मुख्य रूप से जिम्मेदार है। जहाँ तक महंगाई की बात है तो इससे केवल चुनिंदा श्रम संगठनों के लोग ही परेशान नहीं हैं बल्कि देश के सभी वर्ग के लोग विशेषकर सर्विस क्लास के लोग ज्यादा परेशान हैं और भा.म.सं. इस दिशा में भी सरकार के समक्ष समय समय पर अपना विरोध दर्ज करता रहा है और सरकार के विरुद्ध धरना प्रदर्शन भी करता रहा है। जहाँ तक नए श्रम कानून की बात है तो भा.म.सं. इसका भी विरोध करते हुए इस नए श्रम कानून के कुछ कर्मी और श्रमिक विरोधी प्रावधानों को हटाने हेतु लगातार दवाब बनाये हुए है।

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ऐसे में एक ऐसा हड़ताल जिसमे स्टील कर्मियों के हितार्थ कोई मुद्दा ही न हो और जो श्रम संगठन एनजेसीएस के फोरम में सेल प्रबंधन के प्रस्ताव का विरोध न करते हुए अपने निहित स्वार्थ हेतु कर्मियों के साथ विश्वासघात करने से नहीं चुके वे किस मुँह से कर्मियों को इस हड़ताल में शामिल होने हेतु दवाब दाल रहे हैं यह एक विचारणीय प्रश्न है। अतएव भा.म.सं. सभी खदान कर्मियों से यह एपीएल करता है कि वे दिनांक 28 और 28 मार्च 2022 को अपने अपने कार्यस्थल पर हमेशा की तरह उपस्थित होवें और पूरी लगन और निष्ठा के साथ कार्य करते हुए इस राजनैतिक हड़ताल को विफल बनावें।

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राजमहल क्या भाजपा को फिर देगी बस्तर में संजीवनी, राजनीति जो ना कराये वह भी कम, बृजमोहन ने दिये नये जज़्बात को जन्म

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(अर्जुन झा)

जगदलपुर। बस्तर में राजमहल के फरमान को सिर माथों में आदिवासियों द्वारा अभी भी लिया जाता है जिसकी बानगी दशहरा पर्व में देखने को मिलता है तथा इससे इतर गांव-गांव में महाराजा प्रवीर चंद्र भंजदेव की पूजा गुडियों (देवगुडी) व घरों में तश्वीर रखकर पूजा अर्चना किया जाता है किंतु यह राजमहल छत्तीसगढ़ बनने और भाजपा के 15 वर्षो तक कुल 18 वर्षो तक उपेक्षित था और अभी भी उपेक्षित है जिसके कारण अब भारतीय जनता पार्टी अब बस्तर में पु:न संजीवनी पाने आदिवासियों की भावनाओं को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रहा है क्या उसे संजीवनी मिल पायेगा अटकलें तेज हो गई क्योंकि आदिवासियों के भगवान प्रवीर चंद्र भंजदेव व लोहंडीगुड़ा गोलीकांड के मुद्दे को चुनाव के ठीक डेढ़ वर्ष पूर्व उठाकर यह साबित कर दिया है। इस काम को और किसी ने नहीं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश स्तरीय बड़े व कद्दावर नेता बृजमोहन अग्रवाल ने उठाकर नये जज़्बात को जन्म दे दिया है।

15 वर्षों तक लोहंडीगुड़ा व राजमहल गोलीकांड़ की नहीं ली सुध

2003 में कांग्रेस पार्टी को पटकनी देकर छत्तीसगढ़ में सरकार बनाने वाली भारतीय जनता पार्टी ने 15 वर्षो तक कभी भी लोहंडीगुड़ा गोलीकांड व प्रवीर चंद्र भंजदेव हत्याकांड मामले में अपनी स्टैंड क्लियर नहीं किया और तो और वह 2018 के बाद चार वर्षों तक इससे बचती रही किंतु इस वर्ष महाराजा प्रवीर चंद्र भंजदेव के शहादत दिवस पर बड़ी सभा कर भाजपा ने एक नई बहस छेड़ दिया है जिसको लेकर भाजपाइयों के साथ साथ कांग्रेस पार्टी भी हतप्रभ हैं और तुर्रा यह कि 2023 में सरकार बनने पर लोहंडीगुड़ा गोलीकांड और राजमहल गोलीकांड की जांच करने की बात भाजपा के बड़े पदाधिकारी कर रहें जोकि अनायास ही सभी लोगों का ध्यान बरबस ही इस ओर केंद्रित हो रही है। भाजपा के छत्तीसगढ़ के सर्वेसर्वा माने जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह दशहरा पर्व पर कई बार राजमहल की ड्योढ़ी चढ़े किंतु वह इस मामले पर कभी भी अपनी व्यक्तिगत राय नहीं रखी या सरकार के मुखिया के नाते इस मुद्दे पर कुछ कहा, क्या अब सत्ता में पु:न आने के बाद इस पर कोई कार्यवाही करा पाएगी क्योंकि भारतीय जनता पार्टी के पास इस किले को जीतने के लिए मजबूत चेहरे का अकाल है या राजपरिवार को इसके लिए कमान सौंपेंगी।

बृजमोहन के बयान पर चौक चौराहों में हंसी-ठिठोली

वर्ष 2003में बृजमोहन अग्रवाल रमन कैबिनेट के गृहमंत्री थे।उस दौरान जब वह इस मुद्दे पर सुध नहीं लिए तो कल के पत्रकार वार्ता के बाद जो उन्होंने बयान दिया है चौक चौराहों में उनका बयान हंसी ठिठोली बनकर रह गया है। कई लोगों का कहना है कि गृहमंत्री पद छोड़ने के बाद वह मंत्रालय में अहम पदों पर रहे,उस दौरान भी कभी राजमहल नहीं झांकने वाले ऐसे बयान देकर सिर्फ और सिर्फ वह सुर्खियों में ही बने रहने के सिवाय कुछ नहीं है। फिलहाल अभी भाजपा के लिए दो वर्ष का समय है और इस दौरान वह इस मुद्दे से जनता को कितना जोड़ पाता है वह तो भविष्य की गर्त में है किंतु यह एक राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा है।

क्या है बस्तर राजपरिवार की पूरानी राजनीतिक ताकत

बस्तर में आज से 59 वर्ष पूर्व लोहंडीगुड़ा गोलीकांड हुआ था जिसमें हजारों आदिवासी मारे गए और 56 वर्ष पूर्व महाराजा प्रवीर चंद्र भंजदेव गोलीकांड में मारे गए। इनके मारे जाने से लगभग दस पूर्व महाराजा प्रवीर चंद्र भंजदेव कभी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष और तो और वह विधायक भी चुने गए किंतु उनका कांग्रेस पार्टी से मोहभंग हो गया। इस दौरान उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशियों को मैदान में उतारा और कांग्रेस पार्टी को जमींदोज कर दिया तथा इसके बाद प्रवीर चंद्र भंजदेव ने राजनीति से किनारा कर लिया और समय बीतते- बीतते उनकी कथित तौर पर हत्या हो गई तथा यह परिवार राजनीति से दूर हो गया फिर भी कोई भी राजनीतिक दल तीन वर्ष पूर्व तक उनसे दूरी बना कर ही चलता था। राजपरिवार के सदस्य कमलचंद भंजदेव 2018 विधानसभा चुनाव पूर्व भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए और उन्हें युवा आयोग अध्यक्ष जैसे पद पर आसीन किया गया किंतु भाजपा कोई करिश्मा नहीं दिखा पाया और बस्तर से भाजपा का सूपड़ा साफ हो गया तथा बस्तर लोकसभा विधानसभा चुनाव में करारी हार हुई।

मुख्यमंत्री ने कहा – छत्तीसगढ़ देश का हार्ट, सभी सुविधा मिलेगी, छत्तीसगढ़ के खनिज और वन उत्पादों के एक्सपोर्ट पर जोर, मंत्री लखमा का दावा-दो गुना हुआ निर्यात

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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, कोरोना काल में बड़ी चुनौतियां थी । हमारी कुशल रणनीति के कारण हमने सफलताएँ अर्जित की…

रायपुर – निर्यात के मामले में छत्तीसगढ़ भरपूर सम्भावनाओं वाला राज्य है। देश में सबसे ज्यादा लघु वनोपज इकट्ठा करने वाले राज्य हैं और इसका वैल्यू एडिशन भी कर रहे हैं। पूरे देश का 74 प्रतिशत लघु वनोपज संग्रहित किया। यह लैंड लॉक स्टेट है, लगातार कार्गो की मांग कर रहे हैं। यहाँ 23 हजार प्रकार के धान हैं, पूरे देश मे कहीं नही होगा। वनौषधि यहाँ बहुत है, जो लोग उस पर काम करना चाहते बहुत सम्भावनायें हैं। 2019 की बहुत बढ़िया पॉलिसी है हमारी , इसलिए हमने 70 हजार करोड़ का एमओयू हुआ। एक उद्योग पति ने कहा कि आपकी पॉलिसी के कारण कोई एनपीए नहीं होगा। जैविक खेती की ओर छत्तीसगढ़ बढ़ रहा है। गोबर से अब बिजली उत्पादन का कार्य भी किया जाएगा, भाभा एटॉमिक सेंटर से हमारा एमओयू हुआ है। गोबर से अब हमारी स्व सहायता समूह की महिलाएं गुलाल भी बना रहीं है। इस माध्यम से देश भर के उद्यमियों को आमंत्रित करता हूँ, जिससे उनको लाभ भी होगा और छत्तीसगढ़ भी एक्सपोर्ट में आगे आएगा । हमने 14 जिलों को ऑर्गेनिक जिले के रूप में घोषित किया है। आप दो कदम छत्तीसगढ़ की ओर आएं।

चाहे रेलमार्ग हो, हवाई मार्ग हो , सड़क मार्ग हो आप यहाँ आ सकते हैं। छत्तीसगढ़ देश का हार्ट है। आपको सारी सुविधाएं एवँ सहयोग यहाँ उपलब्ध कराई जाएंगी |

कॉन्क्लेव में छत्तीसगढ़ के हस्तशिल्प उत्पादों की एक प्रदर्शनी भी लगाई गई है

शनिवार को एक्सपोर्ट कॉन्क्लेव की शुरुआत हुई है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गोनाइजेशन की ओर से आयोजित इस कॉन्क्लेव में प्रदेश से निर्यात की संभावना और सुविधा आदि पर चर्चा होनी है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री कवासी लखमा ने कहा, छत्तीसगढ़ में प्राकृतिक संसाधन, वनोपज और खनिज प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। जिसके प्रसंस्करण उद्योग स्थापित कर निर्यात की संभावनाएं बढ़ाई जा सकती है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य का कुल निर्यात 2 गुना हो गया है।

रायपुर के होटल में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री कवासी लखमा ने कहा, छत्तीसगढ़ से उत्पादन और निर्यात को बढ़ाने के लिए नई उद्योग नीति 2019-24 लागू की गई है। जिसमें फूड प्रोसेसिंग इकाई और वनोपज को भी उद्योग से जोड़ने के लिए बेहतर कार्य योजना की शुरुआत हुई है। जिसका सुखद परिणाम भी अब मिल रहा है। देश के कुल निर्यात में छत्तीसगढ़ राज्य का योगदान पिछले 2 वर्ष में 2 गुना हुआ है। इसे और बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किया जा रहा है।

लखमा ने कहा कि बस्तर सहित राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में वनोपज, रागी, कोदो, कुटकी एवं स्थानीय उत्पाद की प्रोसेसिंग के लिए सभी जिलों में फूड पार्क स्थापित किया जा रहा है। आवश्यकता अनुसार इसका विस्तार भी किया जाएगा। जिससे लोगों को स्थानीय स्तर ही रोजगार उपलब्ध होगा। कार्यक्रम को फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गोनाइजेशन के रीजनल चेयरमेन नंद किशोर कांग्लीवाल, वाइस प्रेसीडेंट खालिद खान और सीईओ डॉ. अजय सहाय ने भी सम्बोधित किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ में निर्यात की संभावनाओं और केंद्र सरकार की उद्योग नीति की विस्तृत जानकारी सामने रखी।

रायपुर में एक्सपोर्ट कार्यालय की मांग

उद्योग मंत्री कवासी लखमा ने केन्द्र सरकार से रायपुर में एक्सपोर्ट कार्यालय खोलने की मांग की है। उनका कहना था कि कार्यालय बन जाने से निर्यातकों की समस्याओं का निराकरण सरलता से हो सकेगा।

अधिक लचीली उद्योग नीति

वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव मनोज पिंगुआ ने कहा, राज्य सरकार के समुचित प्रयास से हम निर्यात के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मजबूती से प्रयास कर रहे हैं। राज्य की उद्योग नीति को अधिक लचीला बनाने का प्रयास किया जा रहा है। जिससे अधिक से अधिक उद्योगपतियों की भागीदारी संभव हो सके। साथ ही केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयास से निर्यात की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए सतत प्रयास किया जा रहा है।

निर्यात के लिए परिवहन अनुदान भी

प्रमुख सचिव मनोज कुमार पिंगुआ ने बताया, नई नीति से राज्य में उपलब्ध खनिज और वन उपज जैसे संसाधनों का समुचित दोहन हो सकेगा। जिसका लाभ राज्य के लोगों को मिलेगा। उन्होंने कहा कि निर्यात करने वाले उद्योगों एवं व्यापारियों को राज्य सरकार के द्वारा निकटतम बंदरगाह तक पहुंचाने के लिए परिवहन अनुदान दिया जा रहा है।

कांग्रेस के नेताद्वय बस्तर सांसद दीपक बैज व शहर जिलाध्यक्ष राजीव शर्मा का भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल को करारा जवाब भाजपा का स्तर अब इतना गिर चुका की वह सामाजिक आयोजनों में भी अपना खोया वजूद तलाश रही….

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भाजपा को 15 वर्षों में बस्तर महाराजा की प्रतिमा लगाने की याद नहीं आई, फिर आदिवासियों को झूठे आश्वासन देकर छलने की तैयारी में…कांग्रेस की नसीहत विपक्ष अब सत्ता में वापसी करने का ख्वाब देखना छोड़ दे…

संपूर्ण छत्तीसगढ़ प्रदेश सहित बस्तर अंचल में मुद्दाविहीन हो चुकी विपक्ष अब स्तरहीन राजनीति की पराकाष्ठा पार कर अपना राजनैतिक अस्तित्व बचाने का कर रही अनर्गल प्रयास.

खिसकते जनाधार को देख अब भाजपा के नेता पारिवारिक व सामाजिक कार्यक्रमो को राजनीतिक रंग देने लगे, कांग्रेस की भूपेश सरकार आदिवासियों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील रही है चाहे वह लोहंडीगुड़ा ज़मीन वापसी का मामला हो या नन्दराज पर्वत का.

आज़ादी के पूर्व बस्तर रियासत के अंतिम महाराजा रहे प्रवीरचन्द भंजदेव की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम का राजनीतिकरण कर भाजपा ने बस्तर के आदिवासीयों का किया अपमान यह कोई राजनीति मंच नही – सांसद बैज

आदिवासियों के उत्थान और बस्तर के विकास के लिए कांग्रेस की भूपेश सरकार कटिबद्ध, पूर्व के शासनकाल में मृतप्राय हो चुकी आदिवासी व छत्तीसगढ़ की संस्कृति को पहचान दिलाने और उसे जीवित रखने का कार्य भूपेश सरकार ने किया.

बस्तर विकास प्राधिकरण के प्रतिनिधित्व सहित जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिए आदिवासी समुदाय पर भरोसा जताया, भाजपा ने जो काम 15 वर्षो में नही किया वह काम कांग्रेस की भूपेश सरकार ने महज ही 3 वर्षो में कर दिखाया– शर्मा

भाजपा शासन काल के समय प्रदेश सहित बस्तर के आदिवासियों पर हुए अत्याचार और झूठे दर्ज मामलों पर भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल कुछ कहने का नैतिक साहस जुटाएं, तत्पश्चात आदिवासियों के हित की बात करें – दीपक, राजीव

15 साल के कुशासन में छत्तीसगढ़ की जनता ने भाजपा को जहां लाकर खड़ा किया कम से कम अब तो उन्हें यह समझने की जरूरत है कि छत्तीसगढ़ की जागरूक जनता ने उन्हें पर्णतः नकार दिया है साथ ही जनजन में चर्चा है कि भूपेश है तो भरोसा है…

जगदलपुर…छत्तीसगढ़ के भाजपा नेता बृजमोहन के आरोप पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर बस्तर सांसद दीपक बैज व शहर जिलाध्यक्ष राजीव शर्मा ने पलटवार कर कहा कि 15 साल के कुशासन के बाद अपना पूर्णतः जनाधार व आस्तित्व खो चुकी भाजपा किस संस्कृति की बात कर रही है, सामाजिक आयोजनों को राजनैतिक रंग देने वाले भाजपाई सियासी चश्मा उतारे व आत्ममंथन करे कि वह किस कार्यक्रम में शिरकत कर रहे हैं। कांग्रेस की भूपेश सरकार जबसे सत्ता पर काबिज हुई है, आदिवासियों सहित हर वर्ग को लेकर संवेदनशील रही है। बैज व शर्मा ने आगे कहा कि कांग्रेस के सत्ता में आने के साथ ही कांग्रेस की ऋण माफी योजना का सबसे ज्यादा लाभ भाजपाईयों ने उठाया, लाखों रुपये का कर्ज लेकर शासकीय कोष में डाका डालने वाले भाजपा नेता बहरूपिया किसान बनकर सरकार की ऋण माफी योजना का लाभ उठाने से पीछे नही रहे और ना ही इससे परहेज किया यह उनकी संकीर्ण मानसिकता का परिचायक है। भाजपा नेताओं का दोहरा चरित्र छत्तीसगढ़ की जनता देख चुकी है, अब यह सामाजिक सौहाद्र के वातावरण को दूषित करने का पुरजोर प्रयास कर रहे है। श्री बैज और शर्मा ने कहा कि आदिवासी हितैषी कांग्रेस की भूपेश सरकार ने लोहंडीगुड़ा में आदिवासियों की ज़मीन वापस लौटाई, नन्दराज पर्वत पर उसी समुदाय के हित मे निर्णय लिया और तो और बस्तर विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष भी इसी समुदाय से बनाकर आदिवासी हितैषी होने का सबूत दिया, कांग्रेस ने जो कहा सो किया।

आदिवासीयों के हित व उनकी सुरक्षा के लिए सरकार की महत्वाकांक्षी योजनायें मिल का पत्थर साबित हो रही है। अब समाज खुद को सुरक्षित महसूस करने लगा है, कांग्रेस की भूपेश सरकार को इसके अतिरिक्त अन्य किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं। सांसद दीपक बैज और अध्यक्ष राजीव शर्मा ने कहा है कि महाराजा प्रवीरचंद्र भंजदेव की पुण्यतिथि के आयोजन को भाजपा ने राजनीतिक मंच बनाने का प्रयास किया जिससे बस्तरवासियों की भावनाऐं आहत हुई है, बस्तर महाराजा प्रवीरचंद्र भंजदेव से बस्तरवासियों की भावनाएं जुड़ी हुई है और जनता आज भी उनका सम्मान करती है। इस आयोजन के संयोजक व भारतीय जनता पार्टी के स्वयंभू मुख्यमंत्री पद के दावेदार बृजमोहन अग्रवाल ने जगदलपुर आकर बस्तर अंचल की शांत फिज़ा को बिगाड़ने का अनाधिकृत प्रयास किया, बस्तर की धरती अपने आपमें सांप्रदायिक सौहार्द्र की एक अद्भुत मिसाल है जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण हमें विगत दिनों पूर्व देखने को मिला, जिसमें विभिन्न सामाजिक संघ, संगठनों ने विभिन्न धर्मावलंबियों के धर्म गुरुओं का पूरी शिद्दत के साथ आदर सत्कार किया। यही बस्तर की संस्कृति, परम्परा व पहचान रही है। सांसद बैज और जिलाध्यक्ष शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्रदेश में यशस्वी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की कार्यशैली और योजनाओं ने विपक्ष को हाशिए पर लाकर खड़ा कर दिया है, आज बस्तर अंचल का आदिवासी जल,जंगल और ज़मीन से संपन्न होकर वनोपज, किसान न्याय योजना, गोधन योजना और अपनी धान का सही समर्थन मूल्य प्राप्त कर एक खुशहाल जीवन व्यतीत कर रहा है, जिला मुख्यालय जगदलपुर अपने आप में आज एक ऐतिहासिक स्टेडियम, खूबसूरत प्लेग्राउंड, दलपत सागर जैसे स्मरणीय स्थल और अध्ययन के लिए सुंदर लाइब्रेरी से परिपूर्ण हो चुका है भूपेश सरकार की इन योजनाओं के कारण संपूर्ण बस्तर संभाग से भाजपा नेस्तनाबूद और ज़मीदोज़ हो चुकी और अब बस्तर अंचल में अपना राजनीतिक अस्तित्व बचाने के लिए भाजपा ऐसे आयोजनों के माध्यम से ज़मीन तलाश रही है |

नेताद्वय ने कहा है कि महाराजा प्रवीर चंद्र भंजदेव के प्रति बस्तर वासियों की अगाध श्रद्धा और आस्था है लेकिन भाजपा द्वारा बस्तर अंचल के सांप्रदायिक सौहार्द पूर्ण वातावरण को बिगाड़ने का अनाधिकृत प्रयास किया जा रहा है जिससे संपूर्ण बस्तरवासियों की भावनाएं आहत हुईं है। बस्तर की बदलती हुई तस्वीर सबसे बड़ा उदाहरण है कि बस्तर सहित प्रदेश अब चंहुमुखी विकास की ओर अग्रसर है, प्रदेश की जनता अब मुखर होकर कहने लगी है कि हमने एक अच्छी व मजबूत सरकार बनाई। नेताद्वय ने कहा कि बस्तर से जब भाजपा का सूपड़ा साफ हो चुका है तो अब भाजपा को महाराजा की याद सताने लगी है, 15 वर्षों में ना तो कभी महाराजा की याद आई और ना ही आदमकद प्रतिमा स्थापित करने की चेतना जागृत हुई और ना ही गोली कांड पर जांच अथवा कुछ भी कहने का साहस जुटा पाए, नेताद्वय ने कहा कि बस्तर के आदिवासी अब भाजपा के झूठे आश्वासन व बहकावे में आने वाले नहीं है इसलिए अब भाजपा सत्ता में वापसी का ख्वाब देखना छोड़ दे।

छत्तीसगढ़ सरकार कराएगी परसा कोल ब्लॉक खनन का कलेक्टर एवं डीएफओ से परीक्षण

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कलेक्टर व वनमंडलाधिकारी को मॉनिटरिंग के दिए गए निर्देश

कल ही छत्तीसगढ़ पहुंचे थे गहलोत, शनिवार को मिली अनुमति

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने अंतत: परसा कोल ब्लॉक खनन की मंजूरी दे दी है। शुक्रवार को ही राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ चर्चा के लिए छत्तीसगढ़ के दौरे पर आए थे। उन्होंने राजस्थान में बिजली संकट का हवाला देते हुए कहा था कि हम विनती करते हैं परसा कोल ब्लॉक की अनुमति छत्तीसगढ़ सरकार दे। नहीं तो हम गंभीर बिजली संकट में फंस जाएंगे। शनिवार शाम को छत्तीसगढ़ सरकार ने खनन की अनुमति दे दी। इस आशय को लेकर कलेक्टर व जिला वनमंडलाधिकारी को जारी अनुमति में उल्लेखित शर्तों का पालन कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देशित भी किया गया है। कुल मिलाकर आदेश में एक बार फिर यह संदेश दिया गया है कि नियमों के तहत ही खनन किया जाएगा।

राज्य सरकार द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के 2 फरवरी के पत्र के माध्यम से सरगुजा जिले के सरगुजा वनमंडल अंतर्गत परसा ईस्ट एवं केते बासन कोल ब्लॉक से कोयला उत्खनन कार्य हेतु फेस-2 के तहत 1136 हेक्टेयर वन भूमि व्यपवर्तन की अनुमति प्रदान की गई है। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा कलेक्टर व जिला वनमंडलाधिकारी को उपरोक्तानुसार जारी अनुमति में उल्लेखित शर्तों का पालन करा आवश्यक कार्रवाई किए जाने हेतु निर्देशित किया गया है।

केंद्र ने किया था आबंटन

केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम और अडानी की कंपनी को दक्षिण सरगुजा के हसदेव-अरण्य कोल फील्ड्स के परसा ईस्ट और केते बासन में कोल ब्लॉक की अनुमति दी थी। इस क्षेत्र के हाथी प्रभावित होने, घने वनक्षेत्र होने और हसदेव का जल संग्रहण क्षेत्र होने के आधार पर यहां के लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से जारी वन अनुमति निरस्त कर दी गई थी। साथ ही इन बिंदुओं का विस्तृत अध्ययन करने कहा था। राजस्थान सरकार ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील प्रस्तुत की थी। सुप्रीम कोर्ट ने खदान चलाने की अनुमति दी थी।

गहलोत कई बार लिख चुके पत्र

राजस्थान के मुख्यमंत्री ने राजस्थान के ताप विद्युत घरों में कोयले के संकट को लेकर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री को दो बार पत्र लिखा। उन्होंने सीधे तौर पर कोल ब्लॉक खनन की अनुमति देने की मांग रखी। मामला हल नहीं होने पर उन्होंने इसे पार्टी फोरम में भी उठाया। वहां पर भी सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को बुलाकर इसकी मंजूरी देने के दिशा में प्रयास करने कहा था। इस मामले में चर्चा के लिए गहलोत अपने अफसरों को लेकर जयपुर से रायपुर भी पहुंचे और सीएम भूपेश बघेल के साथ चर्चा के बाद अंतत: अब इसकी अनुमति मिली है।

जनपद पंचायत अध्यक्ष अनीता पोयाम ने अतिसंवेदनशील क्षेत्र गुमलवाड़ा पंचायत के ग्राम तोलावाड़ा में किया नवीन राशन दुकान का उद्घाटन…

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जनपद अध्यक्ष के प्रयासों से ग्रामीणों को अब तय नहीं करनी पड़ेगी लंबी दूरी…

आज जनपद पंचायत अध्यक्ष अनीता पोयाम के द्वारा अतिसंवेदनशील क्षेत्र ग्राम पंचायत गुमलवाड़ा पंचायत के अंतर्गत ग्राम कुलचा,तोलावाड़ा एवं गुरुगोठान के ग्रामीणों को मिली सौगात वर्षो से लंबित राशन दुकान की मांग हुई पूरी.. जनपद अध्यक्ष अनीता पोयम ने वर्षो से लंबित मांग को पूरा किया। इस से पूर्व ग्राम कुलचा,तोलावाड़ा एवं गुरुगोठान के ग्रामीणों

को राशन लेने के लिए 15-16 किमी का सफर पैदल पूरा करते हुए ग्राम गुमलवाडा तक राशन के लिए जाना पड़ता था जो की आज समस्या का समाधान होने पर ग्रामीणों ने जनपद अध्यक्ष अनीता पोयाम का आभार व्यक्त किया साथ ही ग्रामीणों ने जनपद अध्यक्ष के समक्ष पानी की समस्या दूर करने की मांग भी की। जिसे जनपद अध्यक्ष ने जल्द से जल्द पूरा करने का आश्वासन दिया। इस दौरान जनपद पंचायत अध्यक्ष अनीता पोयाम,ग्राम पंचायत गुमलवाड़ा सरपंच झितरी बघेल,माहगू राम बघेल सचिव नरसिंह गोयल, उमेश सेठिया,सांसद प्रतिनिधि सोशल मीडिया अनुराग महतो,माही श्रीवास्तव एवं ग्राम के पुजारी व ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री बोले- खैरागढ़ उप चुनाव में केंद्रीय मंत्रियों को स्टार प्रचारक बनाकर भाजपा ने प्रदेश नेतृत्व को नकारा

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भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने फिर किया प्रमाणित

रायपुर।खैरागढ़ उपचुनाव में भाजपा के स्टार प्रचारकों की लिस्ट में केंद्रीय मंत्रियों के नाम शामिल किए जाने को लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भाजपा पर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी, प्रदेश नेतृत्व को पहले से नकार रही है। भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने उसको एक बार फिर सर्टिफाइड कर दिया है कि यहां के प्रदेश नेतृत्व में कोई दम रहा नहीं। इसलिए बाहर के नेतृत्व को लाया जा रहा है।

एयरपोर्ट पर पत्रकारों से चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा, कोई भी चुनाव गंभीरता से लड़ा जाता है। हम लोग भी उस चुनाव को गंभीरता से ले रहे हैं। यहां पर प्रदेश के स्थानीय नेता ही प्रचार कर रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी को प्रदेश के नेतृत्व पर बिल्कुल विश्वास नहीं रहा। इसके चलते केंद्रीय संगठन के पदाधिकारियों को भेजा जा रहा है। प्रदेश प्रभारी डी. पुरंदेश्वरी जिस प्रकार से स्थानीय भाजपा नेताओं की उपेक्षा करती थीं, उसी प्रकार उनका राष्ट्रीय नेतृत्व भी यहां के स्थानीय नेताओं को तव्वजो नहीं दे रहा है। भाजपा का आरोप है कि किसी भी मामले में जांच या निर्णय को लेकर सरकार कमेटी गठित कर रही है। चाहे वह शराबबंदी को लेकर हो या कोई और मामला हो। इसे लेकर मुख्यमंत्री ने कहा, हम रिपोर्ट आने पर कार्रवाई भी कर रहे हैं और कमेटी गठन भी कर रहे हैं। रमन सिंह की तरह लटका के नहीं रख रहे हैं। उन्होंने 15 साल तक शिक्षाकर्मियों से शिक्षक बनाने के मामले को लटकाकर रखा था। इसे लेकर कितने आंदोलन हुए। कितने लोगों की जान गई। हम लोग उस प्रकार से नहीं कर रहे हैं। क्षेत्रीय पार्टियों के आस्तित्व को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि पार्टियां बनती और बिगड़ती हैं। कोशिश करते हैं, बहुत बार कोशिश करते हैं और ऐसा नहीं है कि और कोई क्षेत्रीय पार्टी नहीं आएगी।

विधायकों के पेंशन बंद करने पर कहा- वाहवाही लूटने वाला निर्णय

पंजाब में विधायकों के पेंशन बंद करने को लेकर किए जा रहे कार्य की तरह छत्तीसगढ़ में भी किए जाने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा, एससी-एसटी और गरीब तबके के लोग भी विधायक बनते हैं। एक बार राजनीति में आने के बाद उनका दायित्व कम नहीं होता। वे स्थानीय लोगों की समस्याओं को सुलझाने में रूचि लेते रहते हैं। उन्होंने कहा कि इस पर आखिर 10 से 25 करोड़ का ही खर्च होता होगा। जो निर्णय पंजाब सरकार ने लिया है, वह केवल वाहवाही लूटने के लिए लिया गया है। उन्होंने इसे छत्तीसगढ़ी कहावत से जोड़ते हुए कहा, मुंछ मुड़ने से लाश हल्का नहीं होता।

योजनाओं का फीडबैक लेंगे

प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों का दौरे को लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, हर विधानसभा क्षेत्र को छूने की कोशिश होगी। वहां कांग्रेस के साथियों, आम जनता, कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे और शासन के योजनाओं का भी फीडबैक लेंगे।

कांग्रेस सदस्यता अभियान, अब तक 7.70 लाख सदस्य बनाए जा चुके

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सदस्यता अभियान की मियाद खत्म होने में चार दिन बाकी

7.70 लाख सदस्य मेनुअल और पांच लाख बनाए डिजिटल

रायपुर छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के सदस्य दोगुने हो गए हैं। प्रदेश में जब कांग्रेस विपक्ष में थी, तब 6 लाख सदस्य बनाए गए थे, लेकिन अब प्रदेश के 12 लाख लोगों ने सत्ताधारी दल कांग्रेस की सदस्यता ली है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के दावों की मानें, तो वर्तमान में 12 लाख 70 हजार सदस्य बनाए जा चुके हैं। इनमें 7.70 लाख सदस्य मेनुअल सदस्यता बुक के माध्यम से बनाए गए हैं। जबकि पांच लाख सदस्य डिजिटल माध्यम से बनाए गए हैं। कांग्रेस की सदस्यता अभियान का अभी पांच दिन बाकी है। इस तरह इन पांच दिनों में सदस्यता का आंकड़ा कुछ और बढ़ सकता है। 31 मार्च तक बनाए गए सदस्यों की सूची एआईसीसी को भेजी जानी है। पांच माह पूर्व शुरू हुए सदस्यता अभियान का वर्तमान में अंतिम दौर चल रहा है।

पार्टी के संगठन महामंत्री चंद्रशेखर शुक्ला ने बताया, एक नवंबर से कांग्रेस का सदस्यता अभियान शुरू किया गया था। प्रदेश में एआईसीसी ने 10 लाख नए सदस्य बनाने का टारगेट दिया था। पार्टी ने सदस्य बनाने के के लिए 55 हजार से अधिक सदस्यता बुक तैयार कर जिला कांग्रेस कमेटी और बूथ कमेटी के माध्यम से अभियान शुरू किया था। अभियान शुरू होने पर सदस्य बनाने में कई जिलों में धीमी शुरुआत को देखते हुए प्रदेश कार्यकारिणी ने कई बार इसकी समीक्षा कर सदस्यता अभियान में तेजी लाने पर जोर दिया। समीक्षा के बाद बस्तर और सरगुजा पिछड़ने के बाद अभियान तेज किया गया। इसी बीच डिजिटल सदस्य बनाने को भी एआईसीसी ने मंजूरी दी।

अधिकांश जिलों की पहुंची सूची

फरवरी माह के बाद सदस्यता अभियान में सभी जिलों में तेजी आने के बाद अब मार्च खत्म होने के बाद कांग्रेस मुख्यालय के पास अधिकांश जिलों की सूची आ गई है। अब तक कुल 7.70 लाख सदस्यों की सूची मिली है, जो सदस्यता बुक के माध्यम से दी गई है। आने वाले चार दिनों में इसमें और वृद्धि के बाद यह संख्या तय लक्ष्य तक पहुंचने का अनुमान है। इसी के साथ लगभग पांच लाख लाेगों की डिजिटल सदस्यता को एआईसीसी ने एप्रुवल दिया है। इस तरह पीसीसी को अब तक 12 लाख सदस्यता की जानकारी मिली है।

31 मार्च तक हाेगी आंकड़ों में वृद्धि

डिजिटल सदस्यता अभियान के तहत बूथ लेबल पर एनराेलमेंट की नियुक्ति कर डिजिटल सदस्य बनाए जा रहे हैं। सभी जिलों में इस पर काम चल रहा है। शहरों में वार्ड स्तर पर डिजिटल सदस्यता अभियान को लेकर चल रहे अभियान में एक हजार तक सदस्य नियुक्त एनराेलमेंट द्वारा बनाए जा रहे है। इसके तहत अब तक पांच लाख सदस्य बने हैं। आने वाले चार दिनों में डिजिटल माध्यम से नए सदस्यों की संख्या में और वृद्धि होगी। इस तरह कांग्रेस की सदस्यता का आंकड़ा सरप्लस होते हुए 13 लाख तक पहुंच सकता है।

छत्तीसगढ़ के खनिज और वन उत्पादों के एक्सपोर्ट पर जोर, मंत्री लखमा का दावा-दो गुना हुआ निर्यात

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कॉन्क्लेव में छत्तीसगढ़ के हस्तशिल्प उत्पादों की एक प्रदर्शनी भी लगाई गई है

रायपुर शनिवार को एक्सपोर्ट कॉन्क्लेव की शुरुआत हुई है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गोनाइजेशन की ओर से आयोजित इस कॉन्क्लेव में प्रदेश से निर्यात की संभावना और सुविधा आदि पर चर्चा होनी है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री कवासी लखमा ने कहा, छत्तीसगढ़ में प्राकृतिक संसाधन, वनोपज और खनिज प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। जिसके प्रसंस्करण उद्योग स्थापित कर निर्यात की संभावनाएं बढ़ाई जा सकती है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य का कुल निर्यात 2 गुना हो गया है।

रायपुर के होटल में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री कवासी लखमा ने कहा, छत्तीसगढ़ से उत्पादन और निर्यात को बढ़ाने के लिए नई उद्योग नीति 2019-24 लागू की गई है। जिसमें फूड प्रोसेसिंग इकाई और वनोपज को भी उद्योग से जोड़ने के लिए बेहतर कार्य योजना की शुरुआत हुई है। जिसका सुखद परिणाम भी अब मिल रहा है। देश के कुल निर्यात में छत्तीसगढ़ राज्य का योगदान पिछले 2 वर्ष में 2 गुना हुआ है। इसे और बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किया जा रहा है।

लखमा ने कहा कि बस्तर सहित राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में वनोपज, रागी, कोदो, कुटकी एवं स्थानीय उत्पाद की प्रोसेसिंग के लिए सभी जिलों में फूड पार्क स्थापित किया जा रहा है। आवश्यकता अनुसार इसका विस्तार भी किया जाएगा। जिससे लोगों को स्थानीय स्तर ही रोजगार उपलब्ध होगा। कार्यक्रम को फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गोनाइजेशन के रीजनल चेयरमेन नंद किशोर कांग्लीवाल, वाइस प्रेसीडेंट खालिद खान और सीईओ डॉ. अजय सहाय ने भी सम्बोधित किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ में निर्यात की संभावनाओं और केंद्र सरकार की उद्योग नीति की विस्तृत जानकारी सामने रखी।

रायपुर में एक्सपोर्ट कार्यालय की मांग

उद्योग मंत्री कवासी लखमा ने केन्द्र सरकार से रायपुर में एक्सपोर्ट कार्यालय खोलने की मांग की है। उनका कहना था कि कार्यालय बन जाने से निर्यातकों की समस्याओं का निराकरण सरलता से हो सकेगा।

अधिक लचीली उद्योग नीति

वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव मनोज पिंगुआ ने कहा, राज्य सरकार के समुचित प्रयास से हम निर्यात के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मजबूती से प्रयास कर रहे हैं। राज्य की उद्योग नीति को अधिक लचीला बनाने का प्रयास किया जा रहा है। जिससे अधिक से अधिक उद्योगपतियों की भागीदारी संभव हो सके। साथ ही केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयास से निर्यात की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए सतत प्रयास किया जा रहा है।

निर्यात के लिए परिवहन अनुदान भी

प्रमुख सचिव मनोज कुमार पिंगुआ ने बताया, नई नीति से राज्य में उपलब्ध खनिज और वन उपज जैसे संसाधनों का समुचित दोहन हो सकेगा। जिसका लाभ राज्य के लोगों को मिलेगा। उन्होंने कहा कि निर्यात करने वाले उद्योगों एवं व्यापारियों को राज्य सरकार के द्वारा निकटतम बंदरगाह तक पहुंचाने के लिए परिवहन अनुदान दिया जा रहा है।

तेज रफ़्तार का कहर – दल्ली एरोड्रम के पास तेज रफ्तार बोलेरो मोटरसाइकिल सवार को ठोकर मार खेत में जा पलटी

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दल्लीराजहरा – दल्ली – डौंडी मुख्य मार्ग में एरोड्रम के पास तेज रफ्तार बोलेरो वाहन क्र CG 07 6468 मोटरसाइकिल सवार को ठोकर मार खेत में जा पलटी, बोलेरो की रफ्तार इतनी तेज थी कि वाहन 5 फीट नीचे खेत में जा गिरी जिससे वाहन के परखच्चे उड़ गए | घटना आज संध्या 6:00 बजे के आसपास की है | बोलेरो चालक एवं मोटरसाइकिल सवार को वैसे ज्यादा चोट नहीं आई है | प्राप्त जानकारी के अनुसार बोलेरो चालक शराब पीकर वाहन चला रहा था घटना के पहले भी एक अन्य बाइक सवार को ठोकर मारा था |

प्राप्त जानकारी के अनुसार मोटरसाइकिल सवार पास के ही गांव खैरवाही का रहने वाला है | आसपास के लोगों द्वारा दोनों घायलों को प्राथमिक उपचार के लिए ले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया  है |

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