दल्लीराजहरा आज सोमवार को दल्ली राजहरा नगर के मेडिकल संचालको की बैठक पुलिस थाना परिसर में टी आई सुनील तिर्की ने ली । मानवीय् मूल्य को महत्व देते हुए ऐसे लोगों को दवा का विक्रय कभी ना करें जो इनका उपयोग नशा के लिए करते हो ।किसी भी तरह के परेशानियां के लिए पुलिस की मदद ले। नारकोटिक एक्ट वाली दवाइयां का विक्रय निर्धारित नियमों के अनुसार ही करें। वर्तमान परिवेश के साथ अपने दुकान को अपडेट करते हुए अपने दुकान के भीतर और बाहर सीसीटीवी कैमरा भी अवश्य लगाए जिससे व्यवसायिक व सामाजिक लाभ की प्राप्ति हो सके एवं टी आई द्वारा और भी कुछ सुझाव हो तो बताये ऐसा कहा गया। इस बैठक में रवि जायसवाल,डॉ. रूप आनंद दासानी अशोक जैन, सोहनलाल जैन, क्रांति जैन ,नीलम जैन,प्रकाश गुणधर ,दिनेश माखीजा,प्रकाश हुमने, सुरेश आनंद दासानी,विनय देवांगन आदि उपस्थित थे।
आखिरकार हटा ही दिए गए बकावंड जनपदपंचायत के सीईओ एसएस मंडावी
- गंभीर आरोपों से घिरे रहे हैं मुख्य कार्यपालन अधिकारी
- अब आएगी सीईओ के लाडले सचिवों की बारी
-अर्जुन झा-
बकावंड समूचे बस्तर जिले में विभिन्न विभिन्न विभागों में ऐसे अधिकारियों की कमी नहीं है, जो सरकारी धन को दीमक की तरह चट करने और सरकारी योजनाओं को अपनी नाजायज कमाई का जरिया बनाए बनाए बैठे हैं। बस्तर के बकावंड जनपद क्षेत्र में भी ऐसे नासूरों की कमी नहीं है। इन्हीं में से एक सर्वाधिक चर्चित अधिकारी रहे हैं बकावंड जनपद पंचायत के
सीईओ एसएस मंडावी। अपने पूरे कार्यकाल के दौरान तरह -तरह के आरोपों से घिरे रहे श्री मंडावी से अब बकावंड जनपद पंचायत को मुक्ति मिल गई है। काफी जद्दोजहद के बाद उनका तबादला आखिरकार मोहला, मानपुर, अंबागढ़ चौकी जिले की मोहला जनपद पंचायत में हो गया है। मोहला भी अविभाजित राजनांदगांव जिले का आदिवासी बहुल विकासखंड है। समूचा मोहला, मानपुर, अंबागढ़ चौकी जिला राजनैतिक रूप से बेहद संवेदनशील है। वहां मनमानी और भ्रष्टाचार को पोषित करने वाले अधिकारी – कर्मचारियों की दाल नहीं गलती। वहां के राजनेता तो पीछे रह जाते हैं, जनता ही भ्रष्ट और अपनी मर्जी के मालिक बनने की कोशिश करने वाले अधिकारियों को उनके दफ्तर में घुसकर सबक सिखाने में जरा भी पीछे नहीं रहती। अतीत बताता है कि उस जिले में ऐसी दर्जन भर से ज्यादा घटनाएं हो चुकी हैं, जबकि करप्ट अफसरों का सरेआम पानी उतारा गया है। यही वजह है कि मोहला, मानपुर, अंबागढ़ जिले में पदस्थ अधिकारी कर्मचारी छाछ को भी फूंक फूंक कर पीते हैं। रही बात उस जिले के जनप्रतिनिधियों की, तो जन अदालत के फैसले के आगे जनप्रतिनिधियों नत मस्तक होना ही पड़ता है, वरना पांच साल में उनकी भी दुकानदारी पब्लिक बंद कर देती है। मानपुर, मोहला, अंबागढ़ चौकी जिला राजनांदगांव संसदीय क्षेत्र में आता है। वर्तमान में वहां के सांसद भाजपा से संतोष पाण्डेय हैं, जो अपनी ईमानदारी, जनता के प्रति समर्पण भावना और तेज तर्रार छवि के लिए जाने जाते हैं। श्री पाण्डेय छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के करीबी और विश्वस्त नेता माने जाते हैं। अगर एसएस मंडावी ने मोहला में भी बकावंड जैसी गतिविधियां जारी रखी, तो उनकी रुसवाई होने में देरी नहीं लगेगी।बेहद चर्चित रहे हैं एसएस मंडावी
एसएस मंडावी का बकावंड में कार्यकाल विवादों से घिरा रहा है। निर्माण कार्यों में गड़बड़ी, शासकीय योजनाओं में अनियमितता, अदने से कर्मचारियों को भी स्वार्थ पूर्ति के लिए माध्यम बनाने जैसे गंभीर आरोप उन पर लगते रहे हैं। विधानसभा चुनाव के दौरान पंचायत सचिवों से कांकेर के एक कांग्रेस नेता के लिए चुनावी फंड जुटाने की उनकी करतूत सुर्खियों में रही है। पंचायत सचिवों को हर निर्माण कार्य में गड़बड़ी करने की अघोषित छूट देकर उनसे रकम बटोरी गई थी। चुनावी फंड इकट्ठा करने की जिम्मेदारी तीन खास पंचायत सचिवों को दी गई थी, जिन्होंने बकावंड ब्लॉक की सभी ग्राम पंचायतों के सचिवों से लाखों रुपए एकत्रित कर सीईओ को दिए थे। बाद में यह रकम कांकेर के कथित नेता तक नहीं पहुंचाई गई और इसे लेकर सीईओ तथा कांग्रेस नेता के बीच जमकर तकरार भी हुई थी। अगर कांग्रेस राज्य की सत्ता में आई होती, तो सबसे पहले उक्त कांग्रेस नेता ही सीईओ को सबक सिखाने के लिए आगे आए होते।. ये अलग बात है कि बिल्ली के भाग्य से सिंका टूट गया। कांग्रेस सत्ता में नहीं आ पाई।अब नपेंगे पंचायत सचिव
आका की तो विदाई हो चुकी है, अब उनका मोहला मानपुर अंबागढ़ चौकी जिले में हो गया है, अब बारी उनके प्यादों यानि पंचायत सचिवों की है। सीईओ के संरक्षण में बकावंड जनपद की अधिकांश ग्राम पंचायतों में सचिवों ने निर्माण कार्यों में बेतहाशा गड़बड़ी कर जमकर अवैध कमाई की है। आलम यह हो गया था कि पंचायत सचिव सरपंचों को भी अपने पैरों की जूती समझने लगे थे। यह आलम अभी भी बरकरार है। सरपंचों को दरकिनार कर सचिव हर कार्य को अपनी मर्जी से अंजाम देते आ रहे हैं। विकासखंड की हर ग्राम पंचायत में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं।अनेक ग्राम पंचायतों में तो निर्माण कार्यों की पूरी राशि आहरित कर लेने के बाद कार्यों को आधा अधूरा छोड़ दिया गया है। ग्रामीण जनपद कार्यालय में शिकायत करते करते थक गए, मगर जब ऊपर सरपरस्त बैठा हो, तो भला कार्रवाई कैसे होगी? बहरहाल सरपरस्त आका की विदाई की तारीख मुकर्रर हो चुकी है, अब उनके चहेते सचिवों को गिन गिनकर निपटाया जाएगा, ऐसी चर्चा सियासी गालियारे में चल रही है।
कोंटा क्षेत्र में 40 एकड़ जमीन का फर्जीवाड़ा, राजस्व अमला एवं भू माफिया की साठगांठ
- शिक्षक ने मप्र के फर्म के नाम पर चिंतलनार की जमीन की करा दी फर्जी रजिस्टी
- असली जमीन मालिक ने नामांकन रोकने सुकमा कलेक्टर से लगाई गुहार
- फर्जीवाड़ा मामले में कोंटा के पूर्व एसडीएम की भूमिका संदिग्ध
-अर्जुन झा-
जगदलपुर बस्तर संभाग के सुकमा जिले के चिंतलनार में जमीन खरीदी बिक्री के नाम पर एक बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ है। कोंटा विकासखंड की केरलापेंदा प्राथमिक शाला में पदस्त प्रधान पाठक ने राजस्व अमला एवं भू माफिया से साठगांठ कर 2018- 2019 में चिंतलनार गांव में स्थित अपने रिश्तेदार की 40 एकड़ जमीन का फर्जी ढंग से रजिस्ट्री कराकर जमीन का दस्तावेज अपने नाम करवा लिया। इस जमीन को शिक्षक ने 3 माह पूर्व मध्यप्रदेश के झिझरी कटनी निवासी बालाजी मिनरल के संचालक प्रदीप कुमार मित्तल के नाम पर विक्रय कर दिया है। वास्तविक जमीन मालिक उदय भास्कर रेडी ने नामांतरण पर रोक लगाने एवं जमीन की रजिस्ट्री को शून्य घोषित करने सुकमा कलेक्टर से गुहार लगाई है। कोंटा एसडीएम को प्रकरण दर्ज करने 30 नवम्बर 2023 को आवेदन दिया गया था, लेकिन आज तक प्रकरण दर्ज नहीं किया जाना एसडीएम कोंटा की संलिप्तता की ओर इशारा करता है।
मिली जानकारी के अनुसार सुकमा जिले के कोंटा तहसील अंतर्गत चिंतलनार जो वर्तमान में जगरगुंडा तहसील में आता है, के पटवारी हल्का 6 में आंध्रप्रदेश के गुंटूर, तातीकोंटा निवासी इमनी रामकोट रेड्डी के नाम 7 टुकड़ों में 90 एकड़ से अधिक पैतृक भूमि 1970-71 से शासकीय रिकार्ड में दर्ज है। जमीन मालिक द्वारा विभिन्न भूखंडों का वर्ष 2017 तक सभी रिकार्ड भू-स्वामी के रूप में दर्ज है। इसका लगान प्रतिवर्ष भू- स्वामी द्वारा अदा किया गया है। ऋण पुस्तिका में भी इसका उल्लेख है। जानकारी के अनुसार 7 टुकड़ों की जमीन में से एक शिक्षक ने तीन टुकड़ों की लगभग 40 एकड़ से अधिक जमीन की फर्जी ढंग से रजिस्ट्री कराकर बी. उमा महेश्वर रेड्डी ने वर्ष 2018-19 में जमीन अपने नाम पर दर्ज करा ली। उक्त शिक्षक कोंटा इलाके में जमीन के मामले में विवादित और चर्चित है। शिक्षक ने राजस्व अमलों के साथ सांठगांठ कर दूसरे की जमीन को पहले अपने नाम कराया फिर तीन माह पहले भू- माफियाओं के सहारे मध्यप्रदेश के कटनी निवासी बालाजी मिनरल्स के संचालक के पास 40 एकड़ से अधिक जमीन बेच दी। जब जमीन मालिक ने नामांतरण के लिये कोंटा तहसील में आवेदन किया तो इस फर्जीवाड़ा की पोल खुली। उसके बाद वास्तविक जमीन मालिक के पुत्र उदय भास्कर रेड्डी ने 19 फरवरी को नामांतरण पर रोक लगाने एवं भूमि वापस दिलाने की गुहार लगाते हुए सुकमा कलेक्टर के समक्ष लिखित शिकायत पेश है। इसके पूर्व 30 नवम्बर को कोंटा एसडीएम को भी आवेदन दिया गया था। उदय भास्कर रेड्डी ने कहा है कि उनके पिता ने चिंतलनार की किसी भी जमीन की बिक्री नहीं की है। हमारे दूर के रिश्तेदार ने राजस्व अमले के साथ सांठगांठ कर फर्जी ढंग से जमीन को अपने नाम कराकर 40 एकड़ से अधिक जमीन की रजिस्ट्री कराई है। इसकी शिकायत जिला कलेक्टर से कर न्याय की गुहार लगाई गई है। चिंतलनार के पटवारी ने भी इस बात को स्वीकार किया है कि उक्त जमीन की पहली रजिस्ट्री 2018-19 में कराई गई थी और और दूसरी रजिस्ट्री दंतेवाड़ा में 3 माह पूर्व कराई गई है। नामांतरण का मामला तहसीलदार कार्यालय कोंटा में लंबित है।पिताजी ने नहीं बेची जमीन
भूमि मालिक के पुत्र उदय भास्कर रेड्डी ने बताया कि जालसाजी कर उनकी पैतृक जमीन की रजिस्ट्री कराई गई है। कोंटा एसडीएम ने बताया कि चिंतलनार में जमीन खरीदी बिक्री में हुई अनियमितता मामले की शिकायत प्राप्त हुई है। कोंटा के तहसीलदार को मामले की जांच के लिए निर्देशित किया गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अब भी बरकरार है बस्तर लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस के दीपक बैज का तेज
- बस्तर लोकसभा क्षेत्र के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता बने
- सर्वें में हुआ खुलासा, और भी तेज हुई दीपक की आभा
-अर्जुन झा-
जगदलपुर बस्तर लोकसभा क्षेत्र के सांसद दीपक बैज के आभा मंडल का तेज शिखर पर है। आधे बस्तर संभाग के सर्वाधिक लोकप्रिय कांग्रेस नेता के रूप में दीपक बैज प्रतिष्ठित हो चुके हैं। एक सर्वे में खुलासा हुआ है कि दीपक की रौशनी और भी ज्यादा आलोकित हो उठी है।
देश के एक प्रतिष्ठित दैनिक समाचार पत्र द्वारा कराए गए सर्वें में सांसद दीपक बैज दैदीप्यमान सितारे बनकर उभरे हैं। उनके तेज और दमक के आगे अन्य सारे नेताओं की आभा धुंधली पड़ गई है। सांसद दीपक बैज के कामकाज और व्यवहार को बस्तर लोकसभा क्षेत्र के सर्वाधिक 47 प्रतिशत लोगों ने पसंद किया है और इस बार के लोकसभा चुनाव में भी लोग दीपक बैज को ही चुनकर लोकसभा में भेजने का मन बना लिया है। सर्वें में कांग्रेस के तीन नेताओं दीपक बैज, पूर्व मंत्री के पुत्र और सुकमा के नेता हरीश लखमा, पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री मोहन मरकाम के नाम लोगों के समक्ष प्रमुखता से रखे गए थे। सर्वे के दौरान बस्तर लोकसभा क्षेत्र के मतदाताओं से पूछा गया था कि इनमें से किस नेता को आप कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में देखना चाहेंगे। इस पर 47 प्रतिशत लोगों ने दीपक बैज के नाम पर खुलकर सहमति जताई। वहीं 17 प्रतिशत लोगों की पसंद मोहन मरकाम रहे, जबकि 16 प्रतिशत लोगों ने हरीश लखमा को पसंद किया। 20 प्रतिशत लोगों का कहना था कि कोई अन्य नेता को प्रत्याशी बनाया जाना चाहिए। जिन 47 प्रतिशत लोगों ने दीपक बैज को पसंद किया है कि श्री बैज ने एक सांसद और इसके पहले विधायक के रूप में बेहतरीन परफॉरमेंस दिखाया है। विपक्ष का सांसद होने के बावजूद लोकसभा क्षेत्र के शहरों और गांवों का विकास कराने में भरपूर पहल की है। उनका व्यवहार अन्य राज नेताओं की अपेक्षा कहीं ज्यादा मृदु है। दीपक बैज हर आम आदमी से भी सहजता के साथ मिलते हैं, उनकी बातों को सुनते हैं और हर संभव मदद करते हैं।विधानसभा क्षेत्रों में भी अव्वल
इसी तरह बस्तर लोकसभा क्षेत्र में आने वाले सभी विधानसभा क्षेत्रों में भी दीपक बैज का जादू मतदाताओं के सर चढ़कर बोल रहा है। सर्वे के मुताबिक विधायक एवं पूर्व मंत्री कवासी लखमा की परंपरागत सीट कोंटा के 39 प्रतिशत मतदाताओं की पहली पसंद दीपक बैज हैं। जबकि हरीश लखमा को 28 प्रतिशत लोग पसंद करते दिखे। मोहन मरकाम को सिर्फ 11 प्रतिशत मतदाताओं ने पसंद किया। 23 फीसदी लोग किसी और की हिमायत करते नजर आए। कोंडागांव विधानसभा क्षेत्र के 47 प्रतिशत लोगों ने दीपक बैज को, 30 प्रतिशत लोगों ने हरीश लखमा को, 27 प्रतिशत लोगों ने मोहन मरकाम को और 18 प्रतिशत लोगों ने अन्य को पसंद किया। उल्लेखनीय है कि कोंडागांव मोहन मरकाम का कार्यक्षेत्र है। वहीं दीपक बैज के गृह क्षेत्र की चित्रकोट विधानसभा सीट पर दीपक बैज 43 प्रतिशत लोगों की आंखों का तारा बने हुए हैं। हरीश लखमा को 17 प्रतिशत, मोहन मरकाम को 13 प्रतिशत और अन्य को 26 फीसद लोगों ने पसंद किया। जगदलपुर क्षेत्र के 48 प्रतिशत लोगों ने दीपक बैज को, हरीश लखमा को 15 प्रतिशत, मोहन मरकाम को 13प्रतिशत और अन्य को 26 प्रतिशत लोगों ने पसंद किया है। दंतेवाड़ा क्षेत्र के बैज 51 प्रतिशत, लखमा 18 प्रतिशत, मरकाम 14 प्रतिशत और अन्य 18 प्रतिशत लोगों की पसंद हैं। नारायणपुर क्षेत्र में 35 प्रतिशत लोग दीपक बैज के, 21 प्रतिशत लोग हरीश लखमा के, 28 प्रतिशत लोग मोहन मरकाम के और 17 फीसद लोग अन्य नेता को पसंद करते हैं। बस्तर क्षेत्र में बैज को 54, लखमा को 10, मरकाम को 15 और अन्य को 21 प्रतिशत लोगों ने अपनी पहली पसंद बताया। बीजापुर क्षेत्र में दीपक बैज 50 फीसद, हरीश लखमा को 18 प्रतिशत, मोहन मरकाम को 18 और अन्य को 15 प्रतिशत लोगों की पसंद बने हुए हैं।
व्यापारियों के लिए कार्यशाला का आयोजन आज
दल्लीराजहरा छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स की दल्ली राजहरा इकाई द्वारा खाद्य उत्पादों के निर्माण, रिपैकिंग, विक्रय से जुड़े उद्योगपतियों, थोक एवं फुटकर व्यापारियों के लिए खाद्य सुरक्षा अधिनियम पर आधारित कार्यशाला का आयोजन 27 फरवरी को सुबह 10.30 बजे से सिंधु भवन दल्ली राजहरा में किया गया है। कार्यशाला में खाद्य सुरक्षा अधिनियम के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी खाद्य अधिकारियों द्वारा दी जाएगी। इसके अलावा रेलवे के अधिकारी अनरिजर्व टिकट सिस्टम और मोबइल फोन से टिकट लेने के तरीके बताएंगे। चेंबर के जिला अध्यक्ष स्वाधीन जैन, जिला मंत्री अमित कुकरेजा, इकाई अध्यक्ष शंकर कुकरेजा एवं महामंत्री भूपेंद्र डहरवाल ने व्यापारियों व रेलवे उपभोक्ताओं से कार्यशाला में उपस्थिति की अपील की है।
वैद्यराज हेमचंद मांझी को डॉक्टरेट की मानद उपाधि देने की मांग की हल्बा समाज ने
- पद्मश्री सम्मान के लिए नामित हैं वैद्य हेमचंद मांझी
जगदलपुर बस्तर संभाग के नारायणपुर जिले के छोटे डोंगर निवासी प्रख्यात वैद्य हेमचंद मांझी को डॉक्टरेट की मांग हल्बा समाज ने उठाई है। वैद्य हेमचंद मांझी को भारत सरकार ने पद्मश्री सम्मान के लिए नामित किया है।
आदिवासी हल्बा समाज 18 गढ़ महासभा मुख्यालय बड़ेडोंगर युवा प्रकोष्ठ व संभाग बड़ांजी के संयुक्त नेतृत्व में 26 फरवरी को शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय बस्तर के कुलपति को ज्ञापन सौंपा गया. समाज के मीडिया प्रभारी वरुण साहनी ने बताया कि भारत सरकार द्वारा पद्मश्री पुरुस्के लिए नामित हेमचंद मांझी (हल्बा) को डॉक्टरेट की मानद उपाधि प्रदान की जाए इस मांग को लेकर समाज के लोगों ने कुलपति से चर्चा की। युवा प्रकोष्ठ महासचिव रूपेंद्र मांझी ने बताया कि हेमचंद मांझी धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्र नारायणपुर जिले के छोटे डोंगर के हल्बा समाज से आते हैं और जो निरंतर लोगों की स्वास्थ्य सेवा में 50- 60 वर्ष से निस्वार्थ भाव से लगे हुए हैं। देश विदेश से अनेक रोगों से ग्रसित लोग उनके पास उपचार के लिए आते हैं।

मांझी सिर्फ नाड़ी छूकर देसी जड़ी बूटी से बीमारियों का इलाज करते हैं। उनके इस निस्वार्थ सेवा भाव और उनके शत प्रतिशत सफल इलाज की प्रमाणिकता को देखते हुए भारत सरकार द्वारा उन्हें पद्मश्री पुरुस्कार के लिए नामित किया गया है। यह हल्बा समाज एवं सम्पूर्ण आदिवासी समाज के लिए गौरव की बात है। वैद्यराजमांझी की इन उपलब्धियों को देखते हुए हल्बा समाज के प्रतिनिधि मंडल ने महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय के कुलपति से भेंट कर चर्चा की। कुलपति ने आश्वासन दिया है कि आगामी वाले समारोह के दौरान मांझी को यह मानद उपाधि जरूर प्रदान की जाएगी। इस अवसर पर हेमचंद मांझी के सुपुत्र दिनेश मांझी, लोकेश्वर बाकड़ा संभागीय सचिव बड़ाजी, रूपेंद्र मांझी महासचिव 18 गढ़ महासभा युवा प्रकोष्ठ, नकुल बाकड़ा, लिंगेश्वर बाकड़ा, कुलेश्वर बाकड़ा एवं अन्य उपस्थित थे।
बकावंड जनपद पंचायत के अधिकारी जो न करें, कम है
- एक सुलभ शौचालय का नहीं कर पा रहे रख रखाव
बकावंड विकासखंड बकावंड में जो न हो, कम है। शासकीय निर्माण कार्यों में गड़बड़ी हो या ग्रामीणों को शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने मे कोताही, सभी मामलों मे विकासखंड के अधिकारी, सरपंच सचिव हमेशा आगे रहते हैं। स्वच्छ भारत मिशन अभियान की भी धज्जियां उड़ाने में यहां के अधिकारी कोई गुरेज नहीं कर रहे हैं।

विकासखंड मुख्यालय बकावंड के तहसील परिसर में सुलभ शौचालय में व्याप्त गंदगी जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा बकावंड ग्राम पंचायत के सरपंच व सचिव की लापरवाही की पोल खोल रही है। गंदगी के कारण तहसील कार्यालय में आने वाले ग्रामीण बेहद नाराज नजर आ रहे हैं।तहसील परिसर में आएदिन ग्रामीणों की शिकायत रहती है कि यहां के सुलभ शौचालय की साफ सफाई नहीं कराई जाती है। लघुशंका व शौच करने के लिए गांव से बाहर जाना पड़ता है। जिससे उनके कार्य में रुकावट आती है। ग्रामीणों का कहना है कि जल्द से जल्द सुलभ शौचालय की साफ सफाई कराई जाए। अन्यथा नहीं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मामले की शिकायत की जाएगी। सुलभ शौचालय की टॉयलेट की सीट भरी रहती है। यूरिनल भी कचरे और बदबू से भरा हुआ है। पानी की व्यवस्था नहीं है। निर्माण में बरती गई लापरवाही के कारण गंदगी की निकासी नहीं हो पा रही है। लोगों ने परेशान होकर सुलभ शौचालय का उपयोग करना बंद कर दिया है। एक अति महत्वपूर्ण सरकारी दफ्तर में ऐसी अव्यवस्था के चलते स्वच्छ भारत अभियान की दुर्गति हो रही है।

यशवंत जैन के मातृशोक पर मुख्यमंत्री ने फोन के माध्यम से दी श्रद्धांजलि
छत्तीसगढ़ प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज बालोद जिले के वरिष्ठ भाजपा नेता एवं बाल संरक्षण आयोग के पूर्व अध्यक्ष यशवंत जैन से फोन पर मातृ शोक हेतु अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने फोन के माध्यम से अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए दुख की इस घड़ी में ढांढस बंधाया ज्ञात हो कि गत दिनों यशवंत जैन जी की माता कमलादेवी श्श्रीमाल के निधन पश्चात शोक मिलन कार्यक्रम में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री अरुण साव संगठन मंत्री पवन साय प्रदेश संगठन प्रभारी अजय जामवाल संगठन मंत्री रामप्रताप जी कांकेर लोकसभा के सांसद मोहन मंडावी राजनांदगांव के पूर्व सांसद अभिषेक सिंह गुंडरदेही के विधायक कुंवर सिंह निषाद संजारी बालोद विधायक संगीता सिन्हा कांकेर विधायक आशाराम नेताम अंतागढ़ के पूर्व विधायक भोजराज नाग लोकसभा के सहसंयोजक भरत मटियारा जिला भाजपा अध्यक्ष पवन साहू सहित अनेक नेतागण यशवंत जैन के निवास पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित किए वहीं मुख्यमंत्री ने फोन के माध्यम से अपनी श्रद्धांजलि दी।

8 लाख के ईनामी साक्रिय नक्सली कमांडर नागेश उर्फ पेड़कम ने किया आत्मसमर्पण
- नक्सलियों के अमानवीय एवं आधारहीन विचारधारा से हुआ एर्रा का मोहभंग
- पूना नर्कोम अभियान से प्रभावित हो उठाया कदम
–अर्जुन झा–
जगदलपुर बस्तर संभाग के सर्वाधिक नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास नीति और सुकमा जिला पुलिस द्वारा पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण के मार्गदर्शन में चलाई जा रही पूना नर्कोम मुहिम सचमुच में नक्सलियों और उनके परिवारों के लिए नई सुबह की उम्मीद भरी किरण और उनकी जिंदगी की नई शुरुआत करने वाली साबित हो रही है। शासन की नीति और पुलिस की मुहिम से प्रभावित होकर फिर सुकमा जिले के एक बड़े नक्सली लीडर ने आत्मसमर्पण कर दिया है। इस नक्सली पर शासन ने आठ लाख रू का ईनाम घोषित कर रखा है। आत्मसमर्पित नक्सली नागेश उर्फ पेड़कम एर्रा को समाज की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करने में पुलिस की आसूचना शाखा (आईबी) की विशेष भूमिका रही है
छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास के लिए नई नीति लागू कर रखी है। इसका व्यापक प्रभाव नक्सलियों और उनके मददगारों पर पड़ रहा है। नक्सली अब हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा से तेजी से जुड़ने लगे हैं। वहीं सुकमा जिले में बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी., दंतेवाड़ा रेंज के डीआईजी कमलोचन कश्यप, सुकमा रेंज सीआरपीएफ के डीआईजी (ऑपरेशन) अरविंद राय के मार्गदर्शन एवं सुकमा के पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नक्सल ऑपरेशन सुकमा निखिल अशोक कुमार राखेचा के निर्देशन तथा उप पुलिस अधीक्षक बस्तर फाइटर उत्तम प्रताप सिंह के पर्यवेक्षण में छत्तीसगढ़ शासन की छत्तीसगढ़ नक्सलवाद उन्मूलन नीति के तहत एवं सुकमा पुलिस द्वारा चलाए जा रहे पूना नर्कोम अभियान का व्यापक सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। पूना नर्कोम का अर्थ ही नई सुबह, नई शुरुआत है और वास्तव में यह अभियान नक्सलियों की जिंदगी में नई सुबह लाने वाला और नई शुरुआत करने वाला साबित हो रहा है। इससे प्रभावित होकर नक्सलियों के अमानवीय व आधारहीन विचारधारा एवं उनके शोषण, अत्याचार तथा बाहरी नक्सलियों द्वारा किए जाने वाले भेदभाव, स्थानीय आदिवासियों के साथ की जा रही निर्मम हिंसा व भयावह आतंरिक वातावरण से त्रस्त होकर प्रतिबंधित नक्सली संगठनों के सक्रिय नक्सली भी आत्मसमर्पण करते जा रहे हैं। इसी क्रम में नागेश उर्फ पेड़कम एर्रा पिता स्व. एंका ने 26 फरवरी को सुकमा पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर एसपी किरण चौव्हाण, उप पुलिस अधीक्षक बस्तर फाइटर उत्तम प्रताप सिंह, एसडीओपी दोरनापाल निशांत पाठक और रक्षित निरीक्षक रवि उपाध्याय के समक्ष बिना हथियार के आत्मसमर्पण कर दिया।नागेश नक्सली संगठन पीएलजीए की बटालियन -1 का कंपनी कमांडर बटालियन -2 का कमांडर था। नागेश पर शासन ने 8 लाख रू. का ईनाम घोषित कर रखा है। 38 वर्षीय नागेश सुकमा जिले के मंगलगुड़ा, थाना किस्टाराम थाना अंतर्गत मंगलगुड़ा का निवासी है। नागेश को राज्य शासन की छत्तीसगढ़ नक्सलवाद उन्मूलन नीति के तहत सहायता राशि व अन्य सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।
बीस साल से सक्रिय था नागेश
नागेश उर्फ पेड़कम एर्रा नक्सल गतिविधियों में बीस साल से सक्रिय था। वर्ष 2003 से 2004 तक वह पालाचलमा एलओएस सदस्य, वर्ष 2005 से 2008 तक पालाचमा एलजीएस सदस्य और कुख्यात नक्सली नेता स्व. रामन्ना का गार्ड भी रहा।वर्ष 2009 से 2011 तक नागेश बटालियन-1 कंपनी नम्बर -2 का सेक्शन कमांडर, 2012 में एक वर्ष तक बटालियन-2, प्लाटून-2 का डिप्टी कमांडर, वर्ष 2013 से 2014 माह अप्रैल तक कंपनी 2 का डिप्टी कमांडर, 2015 से 2019 तक पीएलजीए बटालियन-1, कम्पनी-2 का कमांडर पद पर था।
ताड़मेटला कांड में रहा है हाथ
नागेश सन 2004 में गोलापल्ली और मराईगुड़ा के बीच मुख्य मार्ग को 10-15 स्थानों पर खोदकर आवागमन में अवरोध पैदा करने की घटना में शामिल था। वह वर्ष 2010 में मुकरम और ताड़मेटला के बीच बीमार गुब्बल नामक टेकरी में एंबुश लगाकर फायरिंग करने की घटना में शामिल था। इस मुठभेड़ में सीआरपीएफ के 76 जवान शहीद हुए एवं 12 जवान घायल हो गए थे। सन 2011-12 में ग्राम तिम्मापुरम के जंगल में हुई पुलिस- नक्सली मुठभेड़ में भी नागेश शामिल था। इस मुठभेड़ में पुलिस के दो जवान शहीद तथा 8 पुलिस जवान घायल हुए थे। वर्ष 2013-14 में ग्राम टेटेमड़गू और पालोड़ी के बीच जंगल में पुलिस-नक्सली मुठभेड़ में वह शामिल था। वर्ष 2014 में ग्राम पिड़मेल और एंटापाड़ के बीच जंगल में पुलिस- नक्सली मुठभेड़ में शामिल था। इस मुठभेड़ में पुलिस के लगभग 6-7 जवान शहीद हुए थे। वर्ष 2015-16 में ग्राम पोटकपल्ली और डब्बामरका के बीच जंगल में पुलिस- नक्सली मुठभेड़ में भी नागेश शामिल था। इस मुठभेड़ में 14 जवान घायल हुए थे। सन 2017 में ग्राम कोत्ताचेरू और भेज्जी के बीच जंगल में पुलिस- नक्सली मुठभेड़ में नागेश शामिल रहा। इस मुठभेड़ में पुलिस के 12 जवान शहीद हुए थे और एवं 2 घायल हो गए थे। सन 2017 में ग्राम बुर्कापाल के पास जंगल में पुलिस- नक्सली मुठभेड़ में नागेश शामिल था। इस मुठभेड़ में पुलिस के 25 जवान शहीद हुए थे। उस समय पुलिस के लगभग 18 हथियार लूट लिए गए थे। वर्ष 2017 में ग्राम टोंडामरका पुलिस नक्सली मुठभेड़ में भी नागेश शामिल था। तब पुलिस के 8 जवान घायल हुए थे एवं हमारा एक नक्सली मारा गया था। सन 2018-19 में ग्राम दारेली और इत्तागुड़ा के बीच जंगल में पुलिस नक्सली मुठभेड़ में भी नागेश शामिल था।
दल्ली राजहरा के कृष्णमूर्ति बने स्ट्रांग मैनऑफ़ छत्तीसगढ़
दल्लीराजहरा छत्तीसगढ़ राज्य स्तरीय पावरलिफ्टिंग बेंचप्रेस एंड एवं डेडलिफ्ट चैंपियनशिप का आयोजन 25 फरवरी को स्वामी विवेकानंद भवन जिला दुर्ग में हुआ। जिसमें राजहरा माइंस वेट एवं पावरलिफ्टिंग क्लब के खिलाड़ियों का प्रदर्शन जबरदस्त रहा । कृष्णमूर्ति ने मास्टर पावर लिफ्टिंग 77 किलोग्राम वर्ग समूह में 120 किलोग्राम बेंच प्रेस कर स्वर्ण पदक जीते और स्ट्रांग मैन ऑफ छत्तीसगढ़ का किताब भी जीता l वे पूर्व में भी वर्ल्ड पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीत चुके हैं l इसी तरह एथलेटिक्स ,स्ट्रेंथ लिफ्टिंग, पावरलिफ्टिंग ,पंजा कुश्ती में भी कई बार राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीत कर दल्ली राजहरा एवं पूरे छत्तीसगढ़ को गौरांवित कर चुके हैं । अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी कृष्ण मूर्ति राजहरा माइंस वेट वा
पावरलिफ्टिंग के कोच भी हैं। इसी तरह छगन साहू ने मास्टर 69 किलोग्राम वर्ग समूह में स्वर्ण पदक जीते पूर्व में भी कई बार पदक जीतकर राजहरा को गौरांवित कर चुके हैं l साथ ही पावरलिफ्टिंग व पंजाकुश्ती में राष्ट्रीय स्तर पर भी श्रेष्ठ प्रदर्शन कर चुके हैं ।
मधुकर सिंह राजपूत ने भी मास्टर 62 किलोग्राम वर्ग समूह में स्वर्ण पदक जीता वह कई बार राज्य स्तरीय पावरलिफ्टिंग में पदक जीत कर दल्ली राजहरा का नाम रोशन कर चुके हैं ।
मनोज कुमार जायसवाल ने मास्टर 83 किलोग्राम वर्ग समूह में स्वर्ण पदक जीता आगे भी इनसे कई पदक जीतने की उम्मीद है l इसी तरह घनश्याम राव ने भी मास्टर 73 किलोग्राम वर्ग समूह में सिल्वर मेडल जीते हुए अपने समय के धाकड़ ,व आर्मी रिटायर फौजी हैं ,और आज भी प्रतिदिन व्यायाम करते है। इन सभी खिलाड़ियों ने अपनी सफलता का श्रेय अपने कोच अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी कृष्ण मूर्ति को दिया उनकी इस उपलब्धि पर मुख्य महाप्रबंधक आर. बी. गहरवाल उपमहाप्रबंधक नगर प्रकाशक टी.ए. मंगेश सेलकर सहायक महाप्रबंधक कार्मिक एमके रेड्डी सहायक महाप्रबंधक विद्युत अतुल कालेश कनिष्ठ प्रबंधक स्टेट महेंद्र कछुवाहा एवं राष्ट्रीय खिलाड़ियों में रणजीत सिंह ठाकुर एस अंसारी राजेंद्र कुमार, राजपूत, शेषनाथ गुप्ता,परमेश्वर,मोहन, तारा सिंह,सोनू बग्गा, विक्की बग्गा, जय साहनी, भोला दास, विशाल, रणवीर सिंह, भूपेश सिंह, अर्जुन, कोमरे, गज्जू साहू और राजेश पांडे आदि ने बधाई दी l


