दल्लीराजहरा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण तथा छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बालोद के मार्गदर्शन में 16 दिसंबर को व्यवहार न्यायालय दल्ली राजहरा में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। नेशनल लोक अदालत में कुल 396 आपराधिक रखे गए थे। इन प्रकरणों का निराकरण हुआ एवं समझौता राशि के रूप में 229451 रुपए प्राप्त हुए। नेशनल लोक अदालत के पीठासीन अधिकारी व्यवहार न्यायाधीश श्रीमती सोनी तिवारी व सदस्य अधिवक्ता इसराइल शाह एवं राकेश द्विवेदी थे। नेशनल लोक अदालत में व्यवहार न्यायालय के अधिवक्ताओं का सहयोग रहा। साथ ही बैंक, नगर पालिका, विद्युत विभाग के कर्मचारी भी उपस्थित थे।
जगदलपुर शहरी स्वास्थ्य केंद्र कुम्हारपारा में शनिवार 16 दिसंबर को पहला प्रसव हुआ। ओड़िशा में ब्याही गई जगदलपुर की बेटी ने स्वस्थ बच्चे को इस स्वास्थ्य केंद्र में जन्म दिया है।
ओड़िशा स्थित ससुराल से प्रसव कराने जगदलपुर के लालबाग आमागुड़ा स्थित मायके आई भुनेश्वरी पति प्रेमसिंग को रात में प्रसव पीड़ा प्रारंभ हुई, तो परिजनों ने तत्काल मितानीन से संपर्क किया। मितानिन रामेश्वरी सेन ने एंबुलेंस 102 की सहायता से भुनेश्वरी को शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कुम्हारपारा ले जाकर भर्ती कराया। आज सुबह करीब 10 बजे शहरी स्वास्थ्य केंद्र में उसका सुरिक्षत प्रसव कराया गया। इस स्वास्थ्य केंद्र में यह पहला प्रसव है। स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ डॉ. विराट तिवारी और डॉ. तृषा अवस्थी ने बताया कि जच्चा- बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। प्रसव पश्चात नवजात को लगने वाले विटामिन, बीसीजी, पोलियो, हेपटाइटिस बी आदि के टीके लगाए गए।
तीनों अर्बन हेल्थ सेंटर में प्रसव सुविधा
बस्तर के कलेक्टर विजय दयाराम के. ने जिला चिकित्सालय महारानी अस्पताल में बढ़ते मरीजों के दबाव को कम करने के लिए नगर के तीनों शहरी प्राथमिक स्वास्थ केंद्रों में जल्द से जल्द प्रसव सुविधा शुरू करने के निर्देश दिए थे। जिला खनिज संस्थान न्यास बस्तर द्वारा नवजात शिशु के लिए डाइपर, बेबी सोप, बेबी वाइपर, टॉवेल, बिस्तर, वस्त्र आदि प्रदान किए गए।सीपीएम संजीव दुबे ने प्रथम प्रसव कराने पर संस्था प्रभारी और कर्मचारियों को बधाई दी है। उन्होंने बताया कि तीनों शहरी स्वास्थ केंद्रों में प्रसव की सुविधा प्रारंभ हो चुकी है।
जगदलपुर नारायणपुर के कुकड़ाझोर गांव के एक किसान के द्वारा कर्ज बोझ के कारण की गयी आत्महत्या दुखद और गंभीर है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि भाजपा की असंवेदनशीलता और वादाखिलाफी ने एक किसान को आत्महत्या करने के लिए मजबूर कर दिया। यदि भाजपा सरकार ने पहली केबिनेट में 2 लाख तक कर्जा माफ कर दिया होता, तो किसान को आत्महत्या नहीं करनी पड़ती।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और बस्तर लोकसभा क्षेत्र के सांसद दीपक बैज ने कहा है कि किसान हीरू बढ़ई पर 1.24 लाख रु. का कर्ज था। उसे भरोसा था कि नई सरकार कर्ज माफ कर देगी। उसके पुत्र की शादी भी होने वाली थी। कर्ज वसूली के नोटिस से वह मानसिक दबाव में आ गया था। मृत किसान के बेटे ने भी कहा कि भाजपा के लोग चुनाव प्रचार के दौरान 2 लाख रू. तक का कर्ज माफ करने की बात कह गए थे। सरकार द्वारा कर्जमाफी का निर्णय नहीं लेने से पिताजी व्यथित थे।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि भाजपा के अनेकों नेताओं ने चुनाव प्रचार के दौरान किसानों का कर्ज माफ करने का वादा अपने भाषणों में किया था। इस संबंध में पाम्पलेट भी वितरित किए गए था। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा का चुनाव प्रचार का वीडियों भी सोशल मीडिया में वायरल है, जिसमें वे 2 लाख कर्जमाफी का वादा कर रहे हैं। उन्होंने चुनाव के दौरान प्रदेश की जनता से अनेक जगह सभाओं में वादा किया था कि भाजपा की सरकार बनने पर 2 लाख तक सारे बड़े और छोटे किसानों का कर्जा माफ किया जाएगा। अब भाजपा की सरकार बन गई है, तो भाजपा कर्जमाफी के वाय
दे से मुकर रही है। भाजपा की इस वादाखिलाफी से किसान दुखी और व्यथित हैं।
आटे के चोकर की तरह अनुपयोगी साबित हो रहे हैं पंचायत के सारे कार्य
फंड पूरा ले लिया और सारे निर्माण छोड़ दिए अधूरे सरपंच को नहीं है स्वीकृत फंड के बारे में जानकारी
अर्जुन झा
बकावंड ग्राम पंचायत चोकर जैसा नाम वैसा गुण वाली कहावत को चरितार्थ कर रही है। आटे के चोकर की तरह इस ग्राम पंचायत द्वारा कराए गए सारे कार्य अनुपयोगी साबित हो रहे हैं। शासन के करोड़ों खर्च हो गए, मगर ग्रामीणों को फायदा कौड़ी भर का नहीं हुआ। ग्राम पंचायत ने स्वीकृत फंड से पूरी रकम निकाल ली है, मगर सारे कार्य आधे अधूरे ही पड़े हैं। हैरानी की बात तो यह है कि सरपंच को फंड और कार्यों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उनका कहना है कि सचिव ही सारा काम देखते हैं।
बकावंड के करीब स्थित बस्तर विकासखंड की ग्राम पंचायत का वही हाल हो गया है, जैसा कि आटे को छानने के बाद निकलने वाले चोकर का होता है। इस चोकर को व्यर्थ समझ लोग या तो फेंक देते हैं, या फिर मवेशियों और मुर्गियों के खाने के लिए डाल देते हैं। ग्राम पंचायत चोकर तो वह ‘चोकर’ है, जिसके जरिए सरपंच, सचिव और अधिकारी अपने खाने का इंतजाम करते हैं। ग्राम पंचायत के हर कार्य में अनियमितता आम बात हो गई है। विभिन्न विकास एवं निर्माण कार्यों के लिए स्वीकृत फंड से पूरी रकम आहरित कर ली जाती है, लेकिन कोई भी काम पूरा नहीं कराया जाता। चोकर में पड़े आधे अधूरे निर्माण इस बात की तस्दीक करते दिखाई दे रहे हैं। जल जीवन मिशन व नल जल योजना के तहत गलियों में स्थापित सार्वजनिक नलों तथा घरों में लगाए गए निजी नलों के स्टैंड पोस्ट की प्लेटफार्म निर्माण सीसी रोड़ निर्माण के काम को पूरा नहीं किया गया है। ग्राम पंचायत कार्यालय के समीप बड़े बड़े गड्ढे हैं, जहां गंदा पानी भरा हुआ है। गड्ढे में बोरिंग का पानी भर रहा है। इस पानी में मच्छर पनपने रहे हैं।
हलाकान हो रहे हैं ग्रामीण
ग्राम पंचायत भवन के आसपास स्थित घरों में रहने वाले लोग मच्छरों और गंदगी से हलकान हो रहे हैं। वे मच्छरों के कारण रातभर सो नहीं पाते। लोग मलेरिया, डेंगू जैसी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। इन गड्ढों का पानी बुरी तरह खराब हो चुकी है और पानी से उठने वाली दुर्गंध से ग्रमीणों का जीना दुश्वार हो गया है। उसी गड्ढे से लगकर टॉयलेट बनाया गया है, जो खस्ताहाल हो चुका है। उसके अंदर तथा बाहर चारों ओर घास फूस व झाड़ियां उग आई हैं। यह टॉयलेट लोगों के लिए पूरी तरह अनुपयोगी हो गया है है। स्वच्छ भारत मिशन की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। गांव में साफ सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है। जहां देखो, वहां गंदगी पसरी पड़ी है। नलों की टोटियां गायब हैं, पीने का पानी खुले पाईप से व्यर्थ बहते रहता है। नाली निर्माण में गुणवत्ता का जरा भी ध्यान नहीं रखा गया है। नाली से वेस्टेज पानी का बहाव नहीं हो पा रहा है और सारी नालियां गंदगी से लबरेज होकर जाम हो गई हैं। कई कार्य स्वीकृत हैं, किंतु सारे कार्य अब तक अपूर्ण हैं। सीसी रोड के लिए स्वीकृत पूरी रकम निकाल ली गई है, पर काम अधूरा कराकर छोड़ दिया गया है। गोठान योजना की खाद पंचायत भवन में पड़ी है। उसे बेचने पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। गांव की स्ट्रीट लाईट कई माह से बंद है। गांव में पूरी रात अंधेरा छाया रहता है।सरपंच श्रीमती लछिन बघेल से बात करने पर वे कहती हैं कि उन्हें फंड के बारे में कोई जानकारी नहीं है। सचिव ही सारा कामकाज देखते हैं। किस कार्य के लिए कितनी राशि स्वीकृत हुई है, इस बारे में सचिव को ही पता है।
वर्सन
नहीं मिली है पूरी रकम
जितनी रकम मिली थी, उससे कार्य कराए गए हैं। बाकी रकम मिलने के बाद अधूरे कार्य पूरे कराए जाएंगे।
भारी मात्रा में विस्फोटक, वर्दी, दवाइयां व नक्सली साहित्य बरामद
सुरक्षा बलों ने ध्वस्त किया कैंप, भाग खड़े हुए नक्सली
जगदलपुर बस्तर संभाग के बीजापुर जिले में आज शनिवार की सुबह नक्सलियों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ हो गई। दोनों ओर से काफी देर तक फायरिंग होती रही। सुरक्षा बलों के आगे नक्सली टिक नहीं पाए और जंगलों में भाग निकले। मौके पर नक्सलियों द्वारा स्थापित कैंप को सुरक्षा बलों ने ध्वस्त कर दिया। घटना स्थल से भारी मात्रा में विस्फोटक पदार्थ, नक्सली साहित्य, वर्दी, दवाइयां आदि सामग्री बरामद की गई हैं। जंगलों में सर्चिंग की जा रही है।
यह मुठभेड़ शनिवार 16 दिसंबर को सुबह करीब 7 बजे हुई। नक्सली संगठन के गंगालूर एरिया कमेटी के सचिव दिनेश मोड़ियम, गंगालूर एलओएस कमांडर दुला कारम, गंगालूर एरिया आरपीसी कमलू पुनेम एवं 15- 20 अन्य सशस्त्र नक्सलियों के कोरमा- मुनगा के बीच स्थित जंगलों में उपस्थित रहने की सूचना सुरक्षा बलों को मिली थी। इसी आधार पर डीआरजी, बस्तर फाइटर, एसटीएफ एवं कोबरा बटालियन 202, व 210 की टीम जंगल में पहुंची थी। टीम द्वारा घेराबंदी कर कार्रवाई शुरू की गई। सुरक्षा बलों को देख माओवादी फायरिंग करने लगे। सुरक्षा बलों द्वारा भी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी गई। सुरक्षा बलों की ताबड़तोड़ फायरिंग के आगे नक्सली ज्यादा देर तक टिक नहीं पाए और जंगलों की आड़ लेकर भाग खड़े हुए। यह मुठभेड़ शनिवार सुबह लगभग 7 बजे कोरमा के जंगलों में हुई। घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। मुठभेड़ खत्म होने के बाद सुरक्षा बलों ने नक्सलियों द्वारा बनाए गए अस्थाई कैंप को ध्वस्त कर दिया। जवानों द्वारा खोजबीन करने पर कैंप से भारी मात्रा में विस्फोटक, दवाइयां, माओवादी वर्दी, प्रतिबंधित माओवादी संगठन की प्रचार सामग्री, माओवादी साहित्य एवं दैनिक उपयोग की अन्य सामग्री बरामद की गई। क्षेत्र में सघन गश्त अभियान जारी है। बीजापुर एसपी आंजनेय वार्ष्णेय ने इस घटना की पुष्टि की है।
धान की क्वालिटी के नाम पर भी परेशान किया जा रहा है निरीह किसानों को
अर्जुन झा
बकावंड विकासखंड बकावंड के धान खरीदी केंद्रों में किसानों को सरेआम ठगा जा रहा है। सूखत के नाम पर प्रति बोरी ज्यादा धान तौला जा रहा है। इस तरह सूखत के बहाने तराजू के कांटे को झुकाकर किसानों का घाटा किया जा रहा है। धान की क्वालिटी के नाम पर भी निरीह किसानों को परेशान किया जा रहा है।
बकावंड विकासखंड ही नहीं, अपितु बस्तर जिले के सभी धान खरीदी केंद्रों में किसानों को इसी तरह से चूना लगाने का खेल चल रहा है। जगदलपुर विधानसभा क्षेत्र के कुछ खरीदी केंद्रों में तो पूर्व विधायक रेखचंद जैन इस खेल का भंडाफोड़ कर चुके हैं। बकावंड विकासखंड में स्थित जिला सहकारी बैंक के अधीन सभी धान खरीदी केंद्रों में सूखत की आड़ में खरीदी केंद्र प्रभारियों, समिति प्रबंधकों, समिति अध्यक्षो व अधिकारियों की मिलीभगत से किसानों को ठगी का शिकार बनाया जा रहा है। ‘सूखती के लिए झुकती’ के खेल में लाखों के वारे न्यारे किए जा रहे हैं। आदिम जाति सेवा सहकारी समिति बकावंड के धान खरीदी केंद्र बकावंड के साथ ही ग्राम धनवा के खरीदी केंद्र में ऐसे ही खेल का प्रत्यक्ष उदाहरण देखने को मिला है। खरीदी केंद्रों में प्रति बारदाना (बोरा) 80 किलोग्राम धान पर दो से चार किलोग्राम तक अतिरिक्त धान किसानों से लिया जा रहा है। इस तरह प्रति क्विंटल औसतन तीन किलोग्राम ज्यादा धान किसानों से लिया जा रहा है। अतिरिक्त धान लेने का विरोध करने वाले किसानों को अपना धान वापस ले जाने के लिए कहा जाता है। खरीदी में लगे कर्मचारी दलील देते हैं कि धूप पड़ने से खरीदकर बोरों में रखे गए धान का वजन सूखकर कम हो जाता है। इसकी भरपाई हम थोड़ी न करेंगे। इसके अलावा धान की क्वालिटी को निम्न स्तर का बताते हुए खरीदने से इंकार भी कर दिया जाता है, अथवा रेट कम मिलने की बात कही जाती है। अतिरिक्त धान लिए जाने तथा क्वालिटी के नाम पर परेशान किए जाने से किसानों में आक्रोश देखा जा रहा है। धान खरीदी केंद्र प्रभारी एवं प्रबंधक की मिलीभगत से किसानों का धान अधिक मात्रा में तौलकर किसानों के पसीने की कमाई पर डाका डाला जा रहा है। किसानों से छल के इस खेल को उच्च अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है। खरीदी केंद्र प्रभारी का कहना है कि धूप में धान सूखता है और उसका वजन कम हो जाता है। इसलिए किसानों से सूखत के नाम पर थोड़ा ज्यादा धान लिया जाता है। इसमें किसानों की भी सहमति रहती है।
रेखचंद जैन जता चुके हैं नाराजगी
जगदलपुर के पूर्व विधायक रेखचंद जैन सूखत के नाम पर किसानों से अतिरिक्त धान लिए जाने को लेकर नाराजगी जता चुके हैं। जैन ने गत दिवस नानगुर और बड़े मुरमा के धान खरीदी केंद्रों का निरीक्षण किया था। इस दौरान उन्होंने पाया था कि सूखत के बहाने किसानों से अधिक मात्रा में अतिरिक्त धान लिया जा रहा है। इसके अलावा पुरानी दर पर और कम लिमिट में धान की खरीदी चल रही है। जैन ने इसे किसानों के साथ भाजपा का छल निरुपित किया। जैन का कहना था कि धूप में जरूर धान सूखता है, मगर सूखत की दर इतनी ज्यादा भी नहीं रहती कि प्रति क्विंटल के पीछे दो -तीन किलो अतिरिक्त धान लिया जाए। जैन ने खरीदी केंद्र प्रभारी को हिदायत दी कि सूखत के अतिरिक्त धान लेने का जो मात्रा तय की गई है, उतनी ही मात्रा में अतिरिक्त धान लिया जाए और किसानों को परेशान न किया जाए। पूर्व विधायक एवं संसदीय सचिव रेखचंद जैन ने कहा है कि भाजपा सत्ता में आ चुकी है, मगर आज भी भाजपा के चुनावी वादे के मुताबिक 3100 रुपए क्विंटल की दर से तथा प्रति एकड़ 21 क्विंटल के मान से धान की खरीदी नहीं की जा रही है। इससे साबित होता है कि भाजपा ने किसानों से छल किया है। इसके अलावा किसानों का कर्जा माफ न करने पर भी रेखचंद जैन ने भाजपा को आड़े हाथ लिया है।
खपाया जा रहा है ओड़िशा का धान
बकावंड विकासखंड की सीमाएं ओड़िशा राज्य से लगी हुई हैं। इसका बेजा लाभ शराब व धान तस्कर उठा रहे हैं। ओड़िशा के व्यापारी तथा बकावंड ब्लॉक के धान कोचिया ओड़िशा के किसानों से धान खरीद कर उसे बकावंड ब्लॉक के खरीदी केंद्रों में खपा रहे हैं। ये व्यापारी और कोचिए स्थानीय किसानों के नाम पर आसानी से धान बेचने में सफल हो जाते हैं। खरीदी केंद्र प्रभारी इन व्यापारियों और कोचियों से मोटा कमीशन लेकर इस गैर कानूनी कृत्य को अंजाम देने में मदद करते हैं। बकावंड ब्लॉक का ग्राम धनवा ओड़िशा से लगा हुआ है। यहां के धान खरीदी केंद्र में भी ओड़िशा का धान खपाया जा रहा है। कोचिया द्वारा ओड़िशा के किसानों से खरीदे गए धान को धनवा खरीदी केंद्र में बेचा जा रहा है। धान खरीदी केंद्र प्रभारी की इसमें मिलीभगत है। ज्ञात हो कि बीते वर्ष भी बकावंड खरीदी केंद्र में गोलमाल हुआ था, जिसकी जांच अब तक चल रही है।बस्तर संभाग के खरीदी केंद्रों में ओड़िशा का धान खापाए जाने के कई मामले जिला प्रशासन और पुलिस के अधिकारी पकड़ चुके हैं। कोंडागांव में कुछ दिनों पहले ही ओड़िशा का दो ट्रक धान पकड़ा गया था। माकड़ी पुलिस तथा भानपुरी पुलिस भी ओड़िशा का धान लदे मिनी ट्रक और ट्रेक्टर को पकड़ चुकी है। बावजूद धान की तस्करी थमने का नाम नहीं ले रही है।
वर्सन
लगवाएंगे रोक
अवैध धान की खरीदी और सूखत के नाम पर ज्यादा मात्रा में धान लेना गलत है। अगर खरीदी केंद्र प्रभारी ऐसा कैसा कर रहा रहा है, तो मैं जाकर पता करूंगा और इस पर रोक लगवाऊंगा।
दल्लीराजहरा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण तथा छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बालोद के मार्गदर्शन में दिनांक 16.12.2023 को व्यवहार न्यायालय दल्लीराजहरा में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया।
नेशनल लोक अदालत में कुल 396 आपराधिक रखे गये थे जिन प्रकरणों का निराकरण हुआ एवं समझौता राशि के रूप में 229451 रुपए प्राप्त हुई। नेशनल लोक अदालत के पीठासीन अधिकारी श्रीमती सोनी तिवारी (व्यवहार न्यायाधीश) एवं सदस्य अधिवक्ता इसराइल शाह एवं राकेश द्विवेदी थे । नेशनल लोक अदालत में व्यवहार न्यायालय के अधिवक्ताओ का सहयोग रहा, साथ ही बैंक, नगर पालिका, विद्युत विभाग के कर्मचारी भी उपस्थित रहे।
अंबेडकर वार्ड में भाजपा ने मनाया जश्न, बांटी मिठाई
जगदलपुर छत्तीसगढ़ के 18 लाख गरीब परिवारों को प्रधानमंत्री आवास दिलाने के फैसले से भाजपा कार्यकर्ताओं और आम लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई है। नगर मंडल भाजपा अध्यक्ष सुरेश गुप्ता के नेतृत्व में आज शुक्रवार की शाम शहर के अंबेडकर वार्ड में तिरंगा चौक पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। लोगों को मिठाई बांटी गई और प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, दोनों उप मुख्यमंत्रियों, विधायक केदार कश्यप व किरण देव के प्रति आभार जताया गया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में छत्तीसगढ़ के 18 लाख गरीब परिवारों को प्रधानमंत्री आवास उपलब्ध कराने का निर्णय लिए जाने पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए भाजपा नगर अध्यक्ष सुरेश गुप्ता एवं भाजपा नेताओं ने गरीब जनता के बीच मिठाई बांटकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उप मुख्यमंत्री अरुण साव व उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा को इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए बधाई दी। नगर मंडल अध्यक्ष सुरेश गुप्ता ने उपस्थित जन समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा प्रधानमंत्री आवास की मंजूरी न दी जाने के खिलाफ भाजपा लगातार आंदोलनरत करती रही। कांग्रेस सरकार ने दुर्भावना वश योजना को रोक रखा था। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव के नेतृत्व में केंद्र मंडल, जिला और प्रदेश स्तर पर प्रधानमंत्री आवास गरीबों को दिलवाने हेतु लगातार आंदोलन किया गया। अरुण साव ने प्रदेश स्तर के आंदोलन के मंच से घोषणा की थी कि भाजपा की सरकार बनते ही पहली ही कैबिनेट बैठक में गरीबों को उनका अधिकार दिलाया जाएगा।सुरेश गुप्ता ने रायपुर के प्रधानमंत्री आवास आंदोलन को याद करते हुए कहा कि, जिस वक्त छत्तीसगढ़ की गरीब जनता को प्रधानमंत्री आवास से वंचित रखा गया था, उनके अधिकारों को दिलवाने के लिए प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव के नेतृत्व में तत्कालीन गूंगी बहरी भ्रष्ट कांग्रेस की सरकार से गरीबों को उनका अधिकार दिलवाने के लिए विधानसभा का घेराव किया गया था, उस वक्त कांग्रेस की दमनकारी सरकार ने पूरे प्रदेश से आए गरीब जनता और भाजपा नेताओं के पर आंसू गैस के गोले फेंकवाए थे। कई भाजपा नेता घायल हुए थे। इस आंदोलन में जगदलपुर के हमारे कई नेताओं को भी गंभीर चोटे आई थीं।आंदोलन को कुचलने के लिए सरकार ने भरपूर प्रयास किए। इसे छत्तीसगढ़ के साथ पूरे देश की जनता ने देखा था। छत्तीसगढ़ के सारे प्रमुख नेताओं को जेलों में बंद किया गया, प्रताड़ित किया गया, फिर भी भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता कांग्रेस के इस दमनकारी नीति से न डरे और ना डिगे। सुरेश गुप्ता ने कहा कि जिस तरह से पहली कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री आवास की अटकी पड़ी फाईल को फिर से खुलवाया और उस पर हस्ताक्षर कर वंचित पीड़ित गरीबों को उनका अधिकार देने का निर्णय लिया है इससे पूरे छत्तीसगढ़ की गरीब जनता में खुशी छा गई है। राज्य की जनता अपने मुख्यमंत्री को धन्यवाद देकर अपने सपने को पूरा होते देख रही है। जनता द्वारा छत्तीसगढ़ में भाजपा के वादे पर किए गए विश्वास पर खरा उतरने का यह पहला कदम है। श्री गुप्ता ने कहा – हमारे नेताओं ने पहले ही कह दिया था कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनते ही पहली कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री आवास के हितग्राहियों को उनका अधिकार दिलाने के लिए मुख्यमंत्री सबसे पहले प्रधानमंत्री आवास की फाईल पर हस्ताक्षर करेंगे, उसके बाद ही मुख्यमंत्री निवास ग्रहण करेंगे। सुरेश गुप्ता ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता का भाजपा को जो अपार स्नेह एवं आशीर्वाद मिला है और जनता ने भारतीय जनता पार्टी के वादों तथा प्रधानमंत्री श्री मोदी की गारंटी पर विश्वास किया है आज उस विश्वास पर कायम रहते हुए हमारी सरकार ने पहला कदम बढ़ा दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपनों को पूरा करने के लिए छत्तीसगढ़ की सरकार कटिबद्ध है। इस निर्णय के बाद छत्तीसगढ़ की गरीब जनता में हर्ष का वातावरण है। सुरेश गुप्ता ने कहा कि हमारे विधायक केदार कश्यप, किरण देव और विनायक गोयल को भी हम सभी धन्यवाद देते हैं कि प्रधानमंत्री आवास के संघर्ष में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी। इस निर्णय के लिए जगदलपुर शहर के प्रधानमंत्री आवास के दायरे में आने वाले समस्त गरीब जनता की ओर से छत्तीसगढ़ सरकार को बधाई शुभकामनाएं दी गई। इस अवसर पर आशुतोष पाल, राकेश तिवारी, अभय दीक्षित राजा यादव, प्रकाश झा,योगेश ठाकुर, योगेश शुक्ला, रिंकू पांडे, सूर्यभूषण सिंह, रोशन झा, सूरज केशरवानी, शैलेष श्रीवास्तव, केतन महानंदी, प्रेम हरीश पार्क, रितेश सोनी, भुवनेश ध्रुव, सूर्यप्रकाश पटनायक, दशरथ गुप्ता, रवि शर्मा, नरेश साहू, लोकेश राव, अमित मेहता, वसीम खान, राजेश साव, कमल संती, सुखचंद बघेल, रितेश सोनी, जीवन सेठिया, रवि डे, किरण दीवान, कमला सेठिया, नारायणी गोस्वामी, सुजाता डहरिया, भागवती सेठिया, राकेश साहू, बसंती, कमल तांती, शैलेंद्र भारती, सुशील प्रसाद नायक, बसंती सिन्हा, दुर्गा साहू, जामबती, अंबिका नाग के साथ वार्डवासी उपस्थित थे।
कांग्रेस से बस्तर विधायक को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाने की मांग
जगदलपुर बस्तर संभाग के वरिष्ठ कांग्रेस विधायक लखेश्वर बघेल को छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाने की मांग आदिवासी समुदाय के लोग कर रहे हैं। आदिवासियों का कहना है कि भाजपा ने तो प्रदेश को आदिवासी मुख्यमंत्री दे दिया है। ऐसे में आदिवासी मुख्यमंत्री के सामने प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस का भी कर्तव्य बनता है कि वह नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी अपने किसी वरिष्ठ और अनुभवी विधायक को सौंपे। बस्तर के कांग्रेस विधायक इस नजरिए से नेता प्रतिपक्ष के लिए सर्वथा उपयुक्त हैं।
छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के अप्रत्याशित परिणाम आए हैं। कांग्रेस राज्य में अपनी सत्ता नहीं बचा पाई और अब विपक्ष की भूमिका में आ गई है। आदिवासी बहुल बस्तर संभाग में भी कांग्रेस को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। बस्तर के आदिवासी समुदाय के लोगों का कहना है कि विषम परिस्थितियों के बावजूद बस्तर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी लखेश्वर बघेल ने शानदार जीत हासिल करने में सफल रहे हैं। लखेश्वर बघेल एक ही विधानसभा सीट से लगातार तीसरी बार जीत दर्ज कराने वाले पहले आदिवासी नेता बन गए हैं। वे अनुभवी कांग्रेस नेता हैं। सत्ता परिवर्तन की लहर के बावजूद बस्तर विधानसभा सीट से जीत की हैट्रिक लगाने वाले लखेश्वर बघेल बस्तर के एक कद्दावर नेता के रुप में जाने जाते हैं। पिछले कई वर्षों तक उन्होंने बस्तर जिला संगठन के अध्यक्ष के रुप में संगठन को सम्हाला, पार्टी को मजबूत बनाने में बड़ी भूमिका निभाई और कांग्रेस को जिले की तीनों सीटें जितवाने में उनका अहम रोल रहा है। पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार ने उन्हें अति महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देते हुए बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया। प्राधिकरण अध्यक्ष के रूप में बघेल ने बस्तर संभाग के सभी जिलों के विकास और आदिवासियों के कल्याण के लिए उल्लेखनीय कार्य किए हैं। आदिवासी संस्कृति, परंपराओं, पूजा पद्धति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए उन्होंने बड़ा योगदान दिया है। आदिवासियों की समृद्ध परंपरा नवाखाई जोहार भेंट कार्यक्रम की श्रृंखला शुरू कर उन्होंने नई पीढ़ी को पुरातन आदिवासी संस्कृति से जोड़े रखने की अनूठी पहल की है।बस्तर के गांवों में देवगुड़ी, मातागुड़ी निर्माण, सिरहा, गुनिया, मोहरिया, बजनिया आदि के लिए मानदेय की अहम योजना लाकर लखेश्वर बघेल ने उन्हें बड़ी राहत दी है। आदिवासियों के कल्याण और आदिवासी संस्कृति के उत्थान के लिए लखेश्वर बघेल द्वारा किए गए प्रयासों की चर्चा न सिर्फ बस्तर संभाग, बल्कि राजनांदगांव, मोहला, मानपुर, अंबागढ़ चौकी, कवर्धा, जशपुर, रायगढ़, सरगुजा आदि जिलों तथा तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, ओड़िशा, महाराष्ट्र आदि पड़ोसी राज्यों के आदिवासियों के बीच भी हो रही है। आदिवासी समुदाय के अनेक समाज प्रमुखों ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी मुख्यमंत्री के सामने नेता प्रतिपक्ष भी आदिवासी समुदाय से ही होना कांग्रेस के लिए हितकर साबित होगा। बस्तर सीट से कांग्रेस विधायक लखेश्वर बघेल नेता प्रतिपक्ष पद के लिए सबसे बेहतर विकल्प हैं। आदिवासियों ने अभा कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी, राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी, केसी वेणुगोपाल, प्रदेश कांग्रेस की प्रभारी कुमारी शैलजा, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज से की है।
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के चुनाव में बस्तर से कांग्रेस का बोरिया बिस्तर सिमट गया है। भाजपा के सूखे सरोवर में एक साथ 8 कमल खिल उठे हैं। चुनाव के पहले बस्तर में कांग्रेस का मखमली बिस्तर बिछा हुआ था। उसके पांव जमीं पर नहीं पड़ रहे थे। बस्तर की सभी 12 सीटों पर एकछत्र राज कर रही थी। कल चमन था, आज इक सेहरा हुआ, देखते ही देखते ये क्या हुआ? जो हुआ, वह कांग्रेस की करनी का फल है। जिस पेड़ पर बैठे, उसी को काट रहे थे, यह तो अनुभव किया जा रहा था। इसके अलावा कांग्रेस यह हकीकत भूल बैठी थी कि शोहरत की बुलंदी पल भर का तमाशा है, जिस शाख में बैठे हो, वह टूट भी सकती है! 5 साल की सत्ता में कांग्रेसी बौरा गए थे। सब मिलकर कांग्रेस को ही काटने में लगे थे। ऐसे में नतीजा वही निकला, जो निकलना था। सत्ता से 5 साल के वनवास में उन नकचढ़े भाजपाइयों का अहंकार टूट गया, जो 15 साल की सत्ता में यह सुध बिसरा गए थे कि जहाज का पंछी कितना भी उड़ ले, लौटकर जहाज पर ही आना पड़ता है। जनता जहाज है और राजनेता पंछी। यह बात जब वे भूल जाते हैं और पंख जवाब दे देते हैं तो फिर जनता की शरण में आना पड़ता है। गनीमत है कि भाजपा के पंछियों को यह हकीकत पांच साल में समझ आ गई। कांग्रेस में इसके विपरीत प्रभाव दिखा। खैर, हो होना था, सो हो गया। जो पहले बस्तर में 15 साल तक धूम मचा रहे थे, वे भी हमारे अपने बस्तरिया ही थे। 5 साल में जिनके पर कुछ ज्यादा ही निकल आए, वे भी बस्तर के लख्ते जिगर थे। अब फिर जिन्हें बस्तर की जनता ने जिम्मेदारी सौंपी है, वे सभी बस्तर की संतान हैं। सभी का स्वागत, सभी का सम्मान। अब बात करें कि कांग्रेस के समय सत्ता में बस्तर की स्थिति की तो सभी सीटें कांग्रेस को सौंप देने वाले बस्तर को सिर्फ एक मंत्री मिला। कार्यकाल पूरा होते होते आखिर में यह संख्या 2 पर पहुंची। मगर उल्टा नुकसान हुआ। 15 साल तक भाजपा की सरकार में बस्तर का जलवा रहा है। लगभग सभी बड़े चेहरे मंत्री बने। इनमें केदार कश्यप, विक्रम उसेंडी, लता उसेंडी, महेश गागड़ा के नाम शामिल हैं। इस बार चुनाव जीतने वाले पूर्व मंत्रियों में केदार कश्यप, विक्रम उसेंडी, लता उसेंडी जैसे बड़े नाम के साथ ही नौकरशाह से राजनेता बने नीलकंठ टेकाम भी शामिल हैं। नीलकंठ को अचानक भाजपा की टिकट मिली और उन्होंने केशकाल में विधानसभा उपाध्यक्ष रहते संतराम नेताम को परास्त कर दिया। पूर्व मंत्री लता उसेंडी कांग्रेस के मोहन मरकाम से लगातार हार के बाद इस बार जीत गईं। मोहन ने लता को मंत्री रहते हुए हराकर शुरुआत की थी तो लता ने मोहन का सत्ता का सफर तब रोक दिया, जब वे मंत्री थे। विक्रम उसेंडी रमन सिंह की सरकार में मंत्री रहे, कांकेर के सांसद रहे, प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वे वरिष्ठ आदिवासी नेता हैं और केदार कश्यप तो पिछली बार हार के शिकार होकर भी भाजपा संगठन के प्रदेश महामंत्री रहे हैं। भाजपा के तीनों महामंत्री चुनाव जीते हैं। इनमें से एक प्रखर हिंदुत्व के प्रतिनिधि विजय शर्मा उप मुख्यमंत्री बन चुके हैं। एक महामंत्री ओपी चौधरी को भी सम्मान मिल सकता है लेकिन एक अन्य महामंत्री केदार कश्यप सत्ता की राजनीति के पुराने खिलाड़ी हैं। वे बस्तर के विजेताओं में भाजपा के सबसे अनुभवी नेता हैं। 15 साल सरकार में बस्तर का चेहरा रहे हैं। अब खबर यह भी है कि विष्णुदेव मंत्रिमंडल में ज्यादातर नए चेहरे हो सकते हैं लेकिन क्षेत्रीय संतुलन के लिहाज से वरिष्ठ को भी अहमियत दी जा सकती है। नए नेतृत्व की बात है तो नीलकंठ फ्रेश फेस हैं। राजनीति में ताजा हवा के झोंके हैं। नवीनता लानी है तो वे विष्णु सरकार में मंत्री हो सकते हैं। केदार और नीलकंठ की संभावना अधिक चर्चित हो रही है। यदि बस्तर को दो मंत्री मिले तो यह दोनों स्थान पा सकते हैं। लता के साथ उलझन फिलहाल यह है कि केंद्रीय राज्यमंत्री के पद से इस्तीफा देने वाली रेणुका सिंह की वजनदारी ज्यादा है। वे लता से पहले महिला बाल विकास मंत्री रह चुकी हैं। इस बार महिला मंत्री की संख्या बढ़ी तो सांसद से विधायक बनीं गोमती साय को भी नजरअंदाज करना मुश्किल होगा। ऐसे में यदि लता मंत्री नहीं बनीं तो वे भविष्य में महिला आयोग की सिरमौर बन सकती हैं। वैसे भी वे भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं और आने वाले लोकसभा चुनाव में उन्हें बस्तर सीट से उतारने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। विक्रम उसेंडी को कहीं समायोजित किया जा सकता है। भाजपा ने आदिवासी मुख्यमंत्री दे दिया है। इसलिए अब संगठन पर आदिवासी नहीं बैठ सकता, ऐसा कोई बंधन नहीं है लेकिन आम तौर पर ऐसा नहीं होता है। तब भी भाजपा प्रयोगधर्मी राजनीतिक दल है। जब यह आदिवासी दिवस पर आदिवासी अध्यक्ष हटाकर उसे ही सरकार में आते ही मुख्यमंत्री बना सकती है तो कुछ भी कर सकती है।