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डौडी क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 06.07.08 भंडारी पारा में विभिन्न कार्य कराये जाने की मांग

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नगर पंचायत डौडी क्षेत्र के वार्ड 06,07,08 भंडारी पारा में आंगनवाड़ी भवन, मांगलिक भवन की आवश्यकता है। वार्ड में सुविधा नही होने कारण वार्ड के बच्चे प्राथमिक अध्ययन हेतु किराये के कच्चे घर जर्जर आंगनबाडीयो में बैठने को मजबूर है साथ ही की आबादी बढ़ने के कारण पर व सार्वजनिक जगह सीमित को चुके है। जिसके कारण विभिन्न सार्वजनिक /सामाजिक कार्यो के संपादन हेतु वार्ड वासियो को कई प्रकार के समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। अतः मंत्री महोदया से निवेदन है कि उपरोक्त समस्याओं को ध्यान में रखते हुये क 06,07,08, भंडारी पारा में निम्नानुसार कार्य कराये जाने को स्वीकृति प्रदान करने का कष्ट करें ।

कार्य का नाम

1 वार्ड क्रमांक 06.07.08 मंडारी पारा में आंगनबाड़ी निर्माण कार्य।।2 वार्ड क्रमांक 06.07.08 भंडारी पारा में मांगलिक भवन निर्माण कार्य।वार्ड क्रमांक 07 में मंत्री प्रतिनिधि पियुष सोनी द्वारा सामुदायिक भवन हेतु 5.00 लाख की घोषणा का क्रियान्वयन कराने का कष्ट करें। 4 वार्ड क्रमांक 07 भंडारी पारा रंग मंच का जिर्णोधार कार्य।

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कारनामा दिखाने से बाज नहीं आ रहे हैं वन परिक्षेत्र अधिकारी वन के निर्माण कार्य में फिर कर रहे हैं जमकर गड़बड़ घोटाला

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  • राजनीतिक गतिविधियों में बहुत ज्यादा रूचि लेते हैं ये साहब


बकावंड इस क्षेत्र के वन परिक्षेत्र अधिकारी कारनामा दिखाने से बाज नहीं आ रहे हैं। शायद वे विभागीय कार्यों में गड़बड़ी का नया रिकार्ड बनाने पर आमादा हैं। इन दिनों इस अधिकारी की देखरेख में कराए जा रहे एक विभागीय निर्माण कार्य में भी जमकर गड़बड़ी की जा रही है।विकासखंड बकावंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत सरगीपाल में वन परिक्षेत्र बकावंड द्वारा केंद्रीय कैंपा मद के 9 लाख रु. की लागत से कराए जा रहे तेंदूपत्ता गोदाम निर्माण कार्य में वन परिक्षेत्र अधिकारी द्वारा घटिया सामग्री का उपयोग कर शासन को लाखों का चूना लगाया जा रहा है। सीमेंट का उपयोग बहुत ही कम मात्रा में किया जा रहा है। दीवारों की मोटाई भी मापदंड के अनुरूप नहीं है। मजदूरों को शासन द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी नहीं दी जा रही है। निर्माण स्थल पर कार्य से संबंधित जानकारी वाला बोर्ड भी नहीं लगाया गया है, ताकि भ्रष्टाचार की पोल न खुल जाए। वन परिक्षेत्र अधिकारी राजनीतिक रसूख रखते हैं, इसलिए उनके खिलाफ अब तक कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। वन परिक्षेत्र अधिकारी ज्यादातर राजनीतिक गतिविधियों मेंदिलचस्पी दिखाते हैं और राजनीति में व्यस्त रहते हैं। अपने विभागीय कार्यों के प्रति लापरवाही और भ्रष्टाचार कर शासन की राशि की गड़बड़ी कर रहे हैं। पहले भी इस वन परिक्षेत्र अधिकारी द्वारा कराए गए तमाम निर्माण कार्यों में भी ऐसी ही गड़बड़ी की जा चुकी है। ग्रामीण इन घटिया निर्माण कार्यों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।


पेड़ों की छंटाई की आड़ में नोटों की छपाई
वन परिक्षेत्र अधिकारी द्वारा पेड़ों की छंटाई और शाख कर्तन की आड़ में भी बड़े पैमाने पर अवैध कमाई की गई है। बकावंड विकासखंड के ही जंगलों के पेड़ों की छंटाई कराने के नाम पर उन्होंने लकड़ी माफियाओं को पेड़ों की बेतहाशा अवैध कटाई की खुली छूट दे दी थी। लकड़ी माफिया ने सागौन, बीजा व अन्य कीमती प्रजातियों के सैकड़ों विशाल पेड़ों को धाराशाई कर डाला। इन पेड़ों के गोलों की बाहर तस्करी की गई। संबंधित गांवों के ग्रामीणों ने मामले की शिकायत भी की थी, लेकिन न तो जांच हुई और ना ही वन परिक्षेत्र अधिकारी पर किसी तरह की कार्रवाई। वहीं दूसरी ओर जलावन के लिए जंगलों से गिरी पड़ी सूखी लकड़ियां लाने वाले ग्रामीणों को वन विभाग के अधिकारी पकड़ लेते हैं और प्रताड़ित करते हैं।


धर्म स्थल को भी नहीं छोड़ा
वन परिक्षेत्र अधिकारी पर अवैध कमाई का नशा इस कदर हावी है, कि वे धर्म स्थल के निर्माण और संरक्षण कार्य के लिए स्वीकृत राशि में भी गड़बड़ी करने में गुरेज नहीं करते। बकावंड के नजदीक एक गांव में स्थित मातागुड़ी के जीर्णोद्धार और सुरक्षा संबंधी निर्माण कार्य के लिए क्षेत्रीय विधायक एवं बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष लखेश्वर बघेल ने राशि की स्वीकृति प्रदान की थी। इस कार्य की जिम्मेदारी इसी वन परिक्षेत्र अधिकारी को सौंपी गई थी। वन परिक्षेत्र अधिकारी ने देवगुड़ी की चारदीवारी का बहुत ही घटिया निर्माण कराया। अन्य कार्य भी गुणवत्ता के अनुरूप नहीं हुए। ग्रामीणों ने गांव के दौरे पर पहुंचे विधायक लखेश्वर बघेल से जब इसकी शिकायत की, तब बघेल ने स्थल निरीक्षण किया। घटिया निर्माण पर वन परिक्षेत्र अधिकारी को ग्रामीणों के सामने ही कड़ी फटकार लगाई थी। इसके बाद भी वन परिक्षेत्र अधिकारी ने अपना ढर्रा नहीं बदला है। वे अब भी अन्य निर्माण कार्यों में भी गोलमाल करते आ रहे हैं।

छत्तीसगढ़ राज्य की 12 जनजातियों को अनुसूचित जनजाति सूची मे शामिल करने पर भाजपा बस्तर प्रभारी संतोष पांडेय ने लोक सभा अध्यक्ष ओम बिड़ला से की भेट, सौजन्य भेट कर दीं बधाई

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  • पूर्व वन मंत्री महेश गागड़ा एवं पूर्व युवा आयोग सदस्य संग्राम सिंह राणा थे उपस्थित

जगदलपुर – छत्तीसगढ़ राज्य की 12 जनजातियों को अनुसूचित जनजाति सूची मे शामिल करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समस्त आदिवासी समाज की ओर से आभार व्यक्त एवं धन्यवाद देने बस्तर प्रभारी संतोष पांडेय, पूर्व मंत्री महेश गागड़ा एवं पूर्व युवा आयोग सदस्य संग्राम सिंह राणा लोक सभा अध्यक्ष ओम बिड़ला से संसद भवन मे गुरुवार को सौजन्य भेट किये।
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 जातियों को मुख्यधारा से जोड़ा जिसमे गोंड,गदबा, धनगड़,बिझिया,कोध, कोंद,भारिया भूमिया,भरिया,पंडो पन्डो, नगेसिया, धनवार, सौरा सवर, सवरा एवं कोड़ाकू आते हैं।
बस्तर संभाग प्रभारी व राजनांदगांव सांसद संतोष पांडेय ने कहा इस बात का इंतजार छत्तीसगढ़ के आदिवासी लम्बे समय से कर रहें थे।नये भारत बनाने का प्रयास देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर रहें हैं।
पूर्व मंत्री महेश गागड़ा ने कहा सबको न्याय मिले, सबको उसका अधिकार मिले इस बात का प्रयास देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर रहें हैं।जातियों को अनुसूचित जाति मे लाये जाने से लाखो आदिवासियों को लाभ मिलने जा रहा हैं।लोक सभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को बस्तर आने का न्योता भी दिया गया।
इस अवसर पर पूर्व युवा आयोग सदस्य संग्राम सिंह राणा भी उपस्थित थे ।

दुर्ग इंटरसिटी एक्सप्रेस जल्द चालू करने एवं समय में परिवर्तन करने दिया गया ज्ञापन

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  • रावघाट रेल परियोजना के अंतर्गत रावघाट से जगदलपुर तक रेल लाइन के कार्य को शीघ्र प्रारंभ करने के लिए बस्तर प्रभारी संतोष पांडे ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव से की भेंट
  • पूर्व वन मंत्री महेश गागड़ा एवं पूर्व युवा आयोग सदस्य संग्राम सिंह राणा थे उपस्थित
  • केंद्रीय मंत्री अश्वनी वैष्णव ने काम जल्द चालू करने का दिया आश्वासन, जल्द होगी मीटिंग

जगदलपुर – राजनांदगांव लोकसभा के सांसद और भाजपा बस्तर संभाग प्रभारी संतोष पांडे, पूर्व मंत्री महेश गागड़ा एवं पूर्व युवा आयोग सदस्य संग्राम सिंह राणा ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव से दिल्ली के रेल भवन में गुरुवार को सौजन्य भेंट किया। इस दौरान उन्होंने रावघाट रेल परियोजना के अंतर्गत रावघाट से जगदलपुर तक रेल लाइन के कार्य को शीघ्र प्रारंभ करने, दुर्ग इंटरसिटी एक्सप्रेस को जल्द चालू करने एवं समय में परिवर्तन करने एवं भवानीपटना से जूनागढ़ से नवरंगपुर तक किए जा रहे लाइन के कार्य को जयपुर तक बढ़ाने हेतु उसे चर्चा की गई। राजनांदगांव सांसद संतोष पांडे, पूर्व मंत्री महेश गागड़ा एवं पूर्व युवा आयोग सदस्य संग्राम सिंह राणा द्वारा केंद्रीय रेल मंत्री को सौपे गए पत्र में राव घाट रेल परियोजना के अंतर्गत रावघाट से जगदलपुर तक रेल लाइन के कार्य को जनहित में शीघ्र प्रारंभ किए जाने, इंटरसिटी एक्सप्रेस को जल्द चालू करने एवं समय में परिवर्तन करने व भवानीपटना से जूनागढ़ नवरंगपुर तक लाइन का कार्य को जयपुर तक बढ़ाने का आग्रह किया गया है।

वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के छत्तीसगढ़ आगमन पर दंतेवाड़ा जिले में उनकी मौजूदगी में ही राव घाट से जगदलपुर तक 144 किलोमीटर रेल मार्ग के लिए इस्कान व स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड के बीच समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। उनके इस आग्रह पर उन्होंने जल्द से जल्द रेल लाइन के कार्य को प्रारंभ करने एवं इंटरसिटी एक्सप्रेस व लाइन विस्तार को अति शीघ्र चालू करने का आश्वासन दिया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा छत्तीसगढ़ राज्य सरकार एवं इंडियन रेलवे कंस्ट्रक्शन कंपनी इरकॉन की जल्द ही बैठक करने वाला हूं। रावघाट से जगदलपुर तक रेल लाइन के कार्य को जल्दी प्रारंभ करने अधिकारियों से बात करने वाला हूं। एवं इंटरसिटी एक्सप्रेस जल्द चालू व जयपुर तक लाइन विस्तार पर भी मैं गंभीर हूं। सांसद संतोष पांडे ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लगातार छत्तीसगढ़ के विकास हेतु हर प्रयास किए जा रहे हैं। रेलवे को लेकर केंद्र सरकार हमेशा गंभीर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री ने बस्तर संभाग के विकास और जनता की बहुप्रतीक्षित मांग को देखते हुए बस्तर में रेल विस्तार को लेकर हमेशा अपनी अग्रणी भूमिका निभाई है। पूर्व मंत्री महेश गागड़ा ने कहा रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव जल्द बस्तर प्रवास पर आने वाले हैं एवं हमें विश्वास है रावघाट रेल परियोजना के अंतर्गत राव घाट से जगदलपुर तक रेल लाइन के कार्य जल्द प्रारंभ होंगे। इस अवसर पर पूर्व युवा आयोग सदस्य संग्राम सिंह राणा भी उपस्थित थे।

बच्चों को लक्ष्य तक पहुचने मदद करे शिक्षक मनोबल भी बढाएं :- मिथलेश निरोटी

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कुसुमकसा – बच्चों को शिक्षा में अपना लक्ष्य के साथ साथ ,अनुशासन में रहते हुए खेलकूद में भी बढ़चढ़ कर भाग लेने की बात मिथलेश निरोटी उपाध्यक्ष जिला पंचायत बालोद ने शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भैसबोड के रजत जयंती समारोह में बतौर अतिथि कही ,शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भैसबोड के 25 वर्ष पूर्ण होने पर शाला परिवार व ग्रामीणों के तत्वाधान में आयोजित तीन दिवसीय रजत जयंती समारोह व वार्षिकोत्सव कार्यक्रम में मिथलेश निरोटी के हाथों शाला के मेघावी छात्र –छात्राओं का सम्मान किया गया व दो दिवसीय खेल कूद प्रतियोगिता के विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया व ग्रामीणों व शाला परिवार को शाला के 25 वर्ष पूर्ण होने पर बधाई दी ।

मिथलेश निरोटी ने उपस्थित छात्र-छात्राओं से शिक्षा ध्यन करते हुए अपना लक्ष्य बनाकर चले कि हमे शिक्षा ग्रहण कर उस मुकाम तक पहुंचना है जिससे उनका ,उनके माता पिता, गुरुजन, शाला व ग्राम का नाम गौरवान्वित हो ,शिक्षा के साथ साथ शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए खेलकूद भी जरूरी है ,खेलकूद में बढ़चढ़ कर सहभागिता दर्ज कराने की बात कही ,शिक्षा व खेल के छेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर पुरस्कृत होने वाले छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए शाला के सभी बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की ,इस अवसर पर श्रीमती टिकेंद्री बाई ठाकुर सरपंच ग्राम पंचायत भैसबोड,माधवी ठाकुर अध्यक्ष शाला प्रबंधन समिति ,भूषण देवांगन उपसरपंच ,शाला के प्राचार्य,शिक्षक –शिछिकाये ,ग्रामीणजन व छात्र -छात्राये उपस्थित थे ।

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नगरनार इस्पात संयंत्र पर बस्तर के आदिवासियों का पहला हक

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  • निजीकरण का संसद दीपक बैज ने लोकसभा में किया पुरजोर विरोध
  • बस्तर वासियों को न आरक्षण का लाभ मिल पाएगा, न ही रोजगार


जगदलपुर बस्तर के युवा शेर के रूप में विशिष्ट पहचान बना चुके कांग्रेस सांसद दीपक बैज ने नगरनार में स्थापित इस्पात संयंत्र के निजीकरण का लोकसभा में पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि केंद्र सरकार आदिवासियों का हक छीन रही है। इस संयंत्र पर बस्तर के आदिवासियों का पहला हक है। इसे निजी हाथों में दे दिए जाने पर बस्तर वासियों को न रोजगार मिल पाएगा और न ही आरक्षण का लाभ।


अनुसूचित जनजाति आरक्षण विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए बस्तर के सांसद दीपक बैज ने कहा कि केंद्र सरकार जिस तरह से सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों तथा उपक्रमों का निजीकरण कर रही है, वह देश की जनता के हित में नहीं है। निजीकरण से रोजगार के अवसर घट रहे हैं। इसके चलते आरक्षण की व्यवस्था भी बेमानी हो गई है। अगर सरकार इन कंपनियों और उपक्रमों को खुद चलाती है, तो अनुसूचित जाति, जनजाति, ओबीसी, अल्पसंख्यक वर्ग को आरक्षण व्यवस्था के तहत नौकरियों में समुचित लाभ मिलता। निजी क्षेत्र में ऐसा संभव नहीं है। क्योंकि निजी क्षेत्र में आरक्षण की बाध्यता नहीं है। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के नगरनार में सरकार ने राष्ट्रीय खनिज विकास निगम के सहयोग से इस्पात संयंत्र की स्थापना की है। केंद्र सरकार नगरनार इस्पात संयंत्र को भी निजी क्षेत्र के हवाले करने की तैयारी कर चुकी है। यह कदम बस्तर वासियों की उम्मीदों को कुचलने वाला साबित होगा। बैज ने कहा कि बस्तर संभाग में यह इकलौता बड़ा संयंत्र है। इसकी स्थापना से बस्तर के निवासियों को रोजगार, पढ़े लिखे आदिवासी युवाओं को नौकरी तथा व्यापारियों को व्यापार वृद्धि की उम्मीद बंधी थी। जबसे इस संयंत्र के निजीकरण की सुगबुगाहट शुरू हुई है, लोगों की उम्मीदें टूटती जा रही हैं। सांसद बैज ने जोर देते हुए कहा कि नगरनार इस्पात संयंत्र पर बस्तर के आदिवासियों का पहला अधिकार है। केंद्र सरकार आदिवासियों का हक छीनने की कोशिश ना करे। उन्होंने कहा कि सरकार इस बात की गारंटी दे कि नगरनार इस्पात संयंत्र में बस्तर के ही लोगों को सारी नौकरियां दिलाएगी।

रायपुर से बस्तर तक रेल के लिए फिर जूझ रहे सांसद दीपक बैज…

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  • दल्लीराजहरा,जगदलपुर, रावघाट रेल लाइन निर्माण की संसद में मांग
  • भूमि अधिग्रहण और परियोजना के समापन के बाद 4 वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है

जगदलपुर बस्तर सांसद दीपक बैज रायपुर से बस्तर तक सीधी रेल के लिए फिर नए सिरे से सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने दल्ली राजहरा,जगदलपुर, रावघाट रेल लाइन निर्माण की संसद में मांग की है। सांसद बैज पूर्व में भी कई बार रेल सेवा हेतु निर्माण कार्य में तेजी लाने की मांग कर चुके हैं। उन्होंने बस्तर को सीधी रेल दिलाने का बीड़ा उठाया है।
बस्तर सांसद दीपक बैज ने जगदलपुर और रावघाट के बीच रेल लाइन का निर्माण किए जाने के संबंध में लोकसभा में सवाल किया कि क्या रेल मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या जगदलपुर रावघाट दल्ली राजहरा रेल लाइन परियोजना का भूमि पूजन 28 सितंबर 2018 को किया गया था। यदि हां तो उक्त रेल लाइन की वर्तमान स्थिति क्या है। जगदलपुर रेल लाइन के निर्माण की अब तक की स्थिति क्या है और उक्त परियोजना के कब तक पूरा होने की संभावना है और इस दिशा में हुई प्रगति का ब्यौरा क्या है।

सांसद दीपक बैज के सवाल के जवाब में रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव का जवाब आया है कि दल्ली राजहरा रावघाट जगदलपुर रेल लाइन परियोजना के जगदलपुर राव घाट हिस्से का 28.9. 2018 को भूमि पूजन किया गया था। रेलवे ने दल्ली राजहरा रावघाट जगदलपुर रेल लाइन (235 किलोमीटर) परियोजना का दो चरणों में निर्माण शुरू कर दिया है। परियोजना का चरण 1 दल्लीराजहरा से रावघाट 95 किलोमीटर तक है और परियोजना का चरण 2 रावघाट से जगदलपुर (पंचानवे) 235 किलोमीटर है। दल्ली राजहरा रावघाट 95 किलोमीटर के बीच की परियोजना के चरण 1 का कार्य निष्पादन रेल विकास निगम लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है जिसका वित्तपोषण स्टील अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया लिमिटेड सेल द्वारा किया जा रहा है और रावघाट जगदलपुर 140 किलोमीटर के बीच परियोजना के द्वितीय चरण का कार्य निष्पादन बस्तर रेलवे प्राइवेट लिमिटेड नामक विशेष प्रयोजन योजना द्वारा किए जाने की योजना बनाई गई है। जिसमें छत्तीसगढ़ सरकार ,सेल, नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कारपोरेशन शामिल हैं।इस परियोजना की वर्तमान स्थिति निम्नानुसार है -दल्ली राजहरा आरवीएनएल द्वारा निष्पादित और सेल द्वारा वित्त पोषित किया जा रहा है। इस परियोजना की नवीनतम प्रत्याशित लागत 1622 करोड़ रुपए है। इस खंड का कार्य 2010 में शुरू किया गया था। दल्ली राजहरा से अंतागढ़ 60 किलोमीटर का कार्य पूरा हो गया है । शेष खंड में कार्य शुरू कर दिया गया है। इसका परियोजना क्षेत्र वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र और इस कार्य को प्रतिदिन मोबिलाइजेशन और डिमोबिलाइजेशन सहित समर्पित सुरक्षा व्यवस्था के साथ पूरा किया जाना है। यदि इसके लिए तंत्र की आवश्यकता है कि परियोजना के निष्पादन की गति प्रभावित होती है। किसी भी रेल परियोजना को पूरा होना विभिन्न कारकों पर निर्भर करता है जैसे राज्य सरकार द्वारा भूमि का शीघ्र अधिग्रहण, वन विभाग के अधिकारियों द्वारा वानिकी की स्वीकृति, बाधक जनोपयोगी सेवाओं का अंतरण, विभिन्न प्राधिकरण से संविधिक स्वीकृतियां क्षेत्र की भूवैज्ञानिक और स्थलाकृतिक स्थिति परियोजना साइड के क्षेत्र की कानून एवं व्यवस्था संबंधी स्थिति विशेष परियोजना साइटों पर वर्ष में कार्य करने के महीनों की संख्या आदि यह सभी कारक पर योजना के समापन समय को प्रभावित करते हैं। उपर्युक्त बाधाओं के बावजूद रेलवे द्वारा परियोजना को शीघ्रता से पूरा करने का हर संभव प्रयास किए जाते हैं। चरण 2 रावघाट जगदलपुर 140 किलोमीटर के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य प्रक्रिया के लिए आवश्यक 776 हेक्टेयर भूमि में से लगभग 249 हो गई है। 527 हेक्टेयर भूमि अभी अधिग्रहित की जानी है जिसमें से 95 हेक्टेयर निजी भूमि है और 432 हेक्टेयर वन भूमि है।योजना के द्वितीय चरण को भूमि अधिग्रहण और परियोजना के समापन के बाद 4 वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

सनातन धर्म व गौ सेवा में सर्वस्व न्यौछावर करने वाले बजरंगियों का उपहास न करें भूपेश बघेल – मोरध्वज साहू

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आज कल छत्तीसगढ़ की राजनीति काफी गरमाई हुई है। विगत दिनों प्रदेश के मुख्यमंत्री का विवादास्पद बयान सामने आया उसमे उन्होंने बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को बजरंगी गुंडे कह दिया। जिसके विरोध में सभी सनातन हिन्दू धर्म संगठनों द्वारा उनके बयान की निंदा की जा रही है और विरोध प्रदर्शन भी किये जा रहे हैं। आये दिन उनके मंत्रियों व उनके पार्टी नेताओं के भी बयान आते रहते हैं जो चर्चा के विषय बने रहते हैं।

उक्त विषय पर भूपेश बघेल के बयान की निंदा करते हुए सांसद प्रतिनिधि व गौभक्त मोरध्वज साहू ने कहा कि सनातन धर्म प्रेमी व राष्ट्रभक्त बजरंगियों का अपमान केवल एक संगठन का अपमान नही वरन सम्पूर्ण सनातन धर्म का अपमान है। बजरंग दल के साथियों को जो प्रतिदिन गौ माता की रक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं उन्हें बजरंगी गुंडे कहना यह उनकी सनातन विरोधी छवि को स्पष्ट करता है। पहले भी कांग्रेसियों के द्वारा धर्म को लेकर टिका टिपण्णी की जाती रही है जिसे न पहले सहा गया था न अब सहा जाएगा।

भूपेश बघेल प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं उन्हें मर्यादित रहना चाहिए वे प्रदेश में बढ़ रहे अपराध व गुंडागर्दी को रोकने पर ध्यान दें। आज प्रदेश में चारों तरफ अव्यवस्था व भ्रष्टाचार अपनी चरम सीमा पर हैं, सत्ता के नशे में चूर कुछ नेता अपने आप को प्रदेश का मालिक समझ बैठे हैं वे उन सब पर लगाम लगाएं तो ज्यादा ज्यादा अच्छा रहेगा। इससे भी पहले भूपेश बघेल के पिता नंदकुमार बघेल के द्वारा हमारे आराध्य मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम जी पर भी विवादित टिपण्णी की जाती रही है। आगे मोरध्वज ने कहा कि जिम्मेदारी वाले दायित्व में रहने वाले लोग ही अगर ऐसे बयानबाजी करेंगे तब उन्हें ऐसे दायित्व में रहने का कोई औचित्य नही है, प्रदेश की जनता सब कुछ अपने आंख से देख रही है, अगले वर्ष ऐसे सनातन विरोधियों को सबक सिखाने का कार्य प्रदेश की जनता करेगी।

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आदिवासियों की आवाज बनकर आरक्षण पर संसद में दीपक की सिंह गर्जना

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  • बैज बने लोकसभा में मुख्यमंत्री बघेल के दूत, बोले राजभवन बन गया राजनीति का अखाड़ा

अर्जुन झा

बस्तर सांसद दीपक बैज ने सदन को बताया कि 32 फीसदी आदिवासी आरक्षण में हाइकोर्ट से कटौती क्यों हुई, इसके लिए जिम्मेदार कौन है। आज इसी कारण से छत्तीसगढ़ में आदिवासी अपने हक से वंचित हैं। छत्तीसगढ़ सरकार ने बड़ा निर्णय लेते हुए 1 और 2 दिसंबर को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का काम किया और आरक्षण बिल पास हुआ। राजभवन हमारा बिल गया। राजभवन में हमारा आरक्षण का बिल लटका हुआ है।

आज तक माननीय राज्यपाल ने मंजूर नहीं किया। मैं तो समझता हूं इसको बहाने बनाकर, इसको बहाना ढूंढ कर इसको लटकाने का काम कर रहे हैं। राज्यपाल किसके दबाव में हैं, केंद्र सरकार के दबाव में, प्रधानमंत्री के दबाव में, आखिर किसके दबाव में हैं। अब दीपक बैज ने 32 फीसदी आदिवासी आरक्षण का मुद्दा जिस आक्रामकता के साथ उठाया है, उससे समझा जा सकता है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के मार्गदर्शन में बेहतर तैयारी के साथ यह गर्जना हुई है।

मुख्यमंत्री की ‘बारी’ में अफसर – नेताओं ने कर डाली भ्रष्टाचार की खेती

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  • नरवा, घुरवा, गरवा, बारी योजना की आड़ में किए जमकर वारे न्यारे
  • परंपरागत खेती को बढ़ावा देने की भूपेश बघेल की मंशा को पलीता
  • हार्डवेयर, स्टेशनरी दुकान वालों से कराई फसलों के बीज की आपूर्ति

अर्जुन झा

बकावंड बस्तर संभाग के कुछ स्वार्थी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की ‘बारी’ में भ्रष्टाचार की खेती कर डाली है। जो जनप्रतिनिधि मेडिकल स्टोर, हार्डवेयर, स्टेशनरी की दुकान चलाते हैं, उन्हें विभिन्न फसलों के बीज की आपूर्ति का काम दे दिया गया। मुख्यमंत्री श्री बघेल की दूरगामी सोच रही है कि परंपरागत खेती को बढ़ावा दिया जाए। मुख्यमंत्री की इस सोच और मंशा को भ्रष्ट अफसरों और जनता के तथाकथित नुमाइंदों ने रौँद कर रख दिया है। छत्तीसगढ़ में परंपरागत कृषि प्रणाली और खेती को पुनर्जिवित करने के नेक इरादे के साथ प्रदेश के किसान पुत्र मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नरवा, घुरवा, गरवा, बारी योजना का सूत्रपात किया है। जिन जिलों में इस योजना पर ईमानदारी से काम किया जा रहा है, वहां इसके उत्साहजनक परिणाम भी सामने आने लगे हैं। वहीं बस्तर संभाग में तो भ्रष्ट तंत्र ने इस योजना को भी अपने लिए दुधारू गाय बना लिया है। यहां के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की बारी ( बाड़ी ) में ही भ्रष्टाचार की खेती शुरू कर दी है। बस्तर संभाग में एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना जगदलपुर द्वारा नरवा, घुरवा, गरवा, बारी योजना की अवधारणा के तहत आदिवासी कृषि प्रणालियों के पुनरोद्धार, मिल्ट्स रिज्यूविनेशन प्रोजेक्ट और बाड़ी विकास कार्यक्रम सन 2019 से चलाया जा रहा है। इसके तहत अनुसूचित जनजाति के गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले किसानों को परंपरागत खेती के लिए प्रोत्साहित करने का प्रावधान है। ऐसे किसानों को मक्का, कोदो, कुटकी, कुलथी तथा स्थानीय सब्जियों के बीज के किट उपलब्ध कराए जाते हैं। ये बीज कृषि संबंधी खाद, बीज आदि विक्रय करने वाले व्यापारी उपलब्ध करा सकते हैं, मगर बस्तर संभाग में लोहे का सामान बेचने वाले हार्डवेयर दुकानदारों तथा स्टेशनरी बेचने वालों से अफसरों ने सांठगांठ कर बीज किटों की आपूर्ति करवा डाली है। बकावंड जनपद पंचायत में ऐसे व्यापारियों ने तथाकथित बीज किटों की आपूर्ति की है, जो मेडिकल स्टोर्स, हार्डवेयर शॉप, स्टेशनरी शॉप आदि के संचालक हैं। यही नहीं ये व्यापारी निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधि भी हैं। यह खेल सन 2019 से चल रहा है। इस अवधि में शासन से योजना के क्रियान्वयन के लिए करोड़ों रुपए एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना जगदलपुर को प्राप्त हुए। इस सरकारी रकम की जमकर हेराफेरी हुई है। गरीब आदिवासी किसानों को तो मुख्यमंत्री की अभिनव योजना का लाभ मिला नहीं, अपितु अधिकारी और जनप्रतिनिधि व्यापारी जरूर मालामाल हो गए हैं। अकेले बकावंड विकासखंड में इस तरह का गोलमाल हुआ है, ऐसी बात नहीं है। इस तरह का खेल समूचे बस्तर संभाग में हुआ है।

इन गांवों का हुआ था चयन

आदिवासियों की कृषि प्रणाली के पुनरोद्धार, मिल्ट्स रिज्यूविनेशन प्रोजेक्ट समेत बाड़ी विकास कार्यक्रम के लिए दो कलस्टर में बकावंड विकास खंड के डेढ़ दर्जन से भी अधिक गांवों के किसानों का चयन हुआ था। बकावंड – 1 के तहत ग्राम बजावंड, कोरटा, कोसमी, दाबगुड़ा, दशापाल, भेजरीपदर, तोंग कोंगेरा, कवड़ावंड, उड़ियापाल, पीठापुर व नलपावंड के आदिवासी किसान चयनित हुए थे। वहीं दूसरे कलस्टर में बकावंड – 2 के तहत बेड़ा उमरगांव, कचनार, मोंगरापाल, मीरलिंगा, नेगानार, पंडानार, सरगीपाल, छोटे देवड़ा, चोलनार, मोहलई व रामपाल गांवों के हितग्राही किसानों को योजना का लाभ देने का दावा किया गया है। जबकि जमीनी हकीकत कुछ और है। इन दोनों कलस्टर के लिए कुल 23 लाख 10 हजार रु. स्वीकृत किए गए थे।

टूट गया परंपरागत खेती का सपना

परंपरागत कृषि को प्रोत्साहन देने का जो सपना मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने संजो रखा था, उसे भ्रष्ट नेताओं और अधिकारियों की जुगलबंदी ने बस्तर में तोड़कर रख दिया है। अनुसूचित जनजाति के किसानों को योजना का समुचित लाभ नहीं मिल पाया। फर्जी बीज सप्लायर बने जनप्रतिनिधि व्यापारियों ने निहायत ही घटिया और कम मात्रा के बीजों वाले किट्स की आपूर्ति की। जो व्यापारी दवाओं, कॉपी, पुस्तकों, बाल्टी, रस्सी, कील, व लोहे का सामान बेचते रहे हैं, उनसे बीजों की गुणवत्ता की उम्मीद करना भी बेमानी है। जिन्हें कृषि क्षेत्र का कोई विशेष अनुभव ही न हो, वे भला कैसे स्तरीय बीज उपलब्ध करा सकते हैं ?*रजिस्ट्रेशन नंबर वही पुराना*तथाकथित बीज सप्लायर जनप्रतिनिधियों ने बीज किट्स की आपूर्ति के लिए अपने फर्म के जो रजिस्ट्रेशन नंबर व जीएसटी नंबर जनपद पंचायत कार्यालय में पेश किए हैं, वे उनकी मूल दुकानों के हैं। ये रजिस्ट्रेशन व जीएसटी नंबर मेडिकल स्टोर, स्टेशनरी व हार्डवेयर शॉप के नाम पर हैं। इस तरह शासन की आंखों में धूल झोंककर बड़े पैमाने पर टैक्स की भी चोरी की गई है। व्यापारी बने जनप्रतिनिधियों ने शासन के साथ धोखाधड़ी की है, जो कि अपराध की श्रेणी में आता है।

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