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जिला साहू संघ बालोद द्वारा आयोजित जिला स्तरीय कर्मा महोत्सव के संबंध में बैठक रखी

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दल्लीराजहरा – तहसील साहू संघ राजहरा का आवश्यक बैठक स्थानीय साहू सदन मे विगत 13 अप्रैल को तहसील साहू संघ राजहरा द्वारा आयोजित भक्त माता कर्मा जयंती महोत्सव, निशुल्क सामूहिक आदर्श विवाह एवम लोकार्पण कार्यक्रम की समीक्षा के संबंध में आयोजित किया गया।भक्त माता कर्मा की आरती पश्चात बैठक की गतिविधि एवम चर्चा प्रारंभ किया गया।

तहसील साहू संघ के अध्यक्ष तोरनलाल साहू ने कर्मा महोत्सव , सामूहिक आदर्श विवाह एवम साहू सदन के अतिरिक्त कमरा निर्माण कार्य का लोकार्पण कार्यक्रम आयोजन के संबंध में विस्तार से चर्चा करते हुए कार्यक्रम के सफल आयोजन हेतु समस्त पदाधिकारियों एवम सदस्यों को कार्यक्रम में अपनी दायित्वों एवम जिम्मेदारियों को निष्ठापूर्वक निभाने व कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु सभी का धन्यवाद करते हुए आभार व्यक्त  किया व भविष्य में भी इसी तरह से सामाजिक आयोजनों में सभी के सहयोग करते रहने की बात कही।कार्यक्रम के कोष प्रभारी श्यामलाल साहू संयोजक न्याय प्रकोष्ठ द्वारा कर्मा महोत्सव कार्यक्रम का आय व्यय  प्रस्तुत किया गया।सभी परिक्षेत्रीय अध्यक्षों एवम वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी अपने अपने विचार रखे।

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अध्यक्ष तोरनलाल साहू ने विगत 22 मई को जिला साहू संघ बालोद द्वारा आयोजित जिला स्तरीय कर्मा महोत्सव एवम भूमिपूजन समारोह कार्यक्रम के बारे में चर्चा करते हुए कार्यक्रम में अधिक अधिक से संख्या में उपस्थिति प्रदान करने के लिए पदाधिकारियों एवम सदस्यों को धन्यवाद दिया।कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य के सम्माननीय मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल द्वारा बालोद में खुलने वाले कन्या महाविद्यालय का नाम भक्त माता कर्मा कन्या महाविद्यालय के नाम से रखने की घोषणा करने तथा जिला साहू संघ बालोद के प्रस्तावित भवन निर्माण हेतु पचास लाख रुपए की अनुदान राशि देने की घोषणा करने पर तहसील साहू संघ राजहरा ने माननीय मुख्यमंत्री जी का आभार मानते हुए हर्ष व्यक्त किया है। बैठक का संचालन राधेश्याम साहू एवम आभार प्रदर्शन शीतल साहू ने किया।

बैठक में गोविंद साहू, राधा साहू, राजेश साहू, रूपलाल साहू,संतराम साहू,शिवकुमार कलिहारी, अंजू साहू, वीणा साहू, निर्मला साहू,रेखा साहू, विमला साहू,किशोर साहू,निर्मलदास साहू,राजकुमार साहू, पुरुषोत्तम साहू, देवमन साहू, कपिल साहू, जीवराखान लाल साहू, चेतन साहू, खूबलाल साहू, जीवनलाल साहू, किशनलाल साहू, रामेश्वर हिरवानी, कुंती साहू, रेवती साहू, रमेश्वर कुमार साहू, गजेंद्र साहू, संतोष कुमार साहू, आसकरण साहू, श्यामदास साहू, राजकिशोर साहू, शंकरलाल साहू, मनहरण लाल साहू, धनीराम साहू, कुंती साहू, गायत्री साहू, मनभा साहू, नीरा साहू, बुधनतीन साहू, अंकलहीन साहू, निर्मला गोपी साहू, पुष्पा साहू,दुलारी साहू, रूखमणी साहू,माहेश्वरी साहू,नीलम साहू, मकसूदन साहू,शशिकुमार साहू, रोमन साहू,लोमेश साहू, आशा राम साहू,अजीत साहू, नरेशचंद्र साहू,नोहरसिंह साहू, कमल साहू ,सुंदरलाल साहू, जीतराम साहू, परस राम साहू, गोकुल साहू, जीवनलाल साहू,भादूराम साहू,हीरालाल साहू, रवि साहू, देवेंद्र साहू व पदाधिकारीगण एवम सदस्यगण उपस्थित थे।

चंदन का वंदन न सही अभिनंदन तो करे नौकरशाही

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अर्जुन झा

कोण्डागांव/जगदलपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जनप्रतिनिधियों के सम्मान के लिए काफी संवेदनशील हैं लेकिन उनकी नौकरशाही जनप्रतिनिधियों का सम्मान कितनी गंभीरता से कर रही है, इसकी ताजा बानगी यह है कि बस्तर के नारायणपुर विधायक चंदन कश्यप कोंडागांव जिला प्रशासन पर इसलिए भड़क उठे कि उनकी उपेक्षा हो रही है। चंदन बस्तर के ऐसे विधायक हैं जिनके कार्यक्षेत्र तीन-तीन जिले हैं किंतु तीनों जिलों में उनकी उपेक्षा की जा रही है, ऐसा उनको लग रहा है। ऐसा ही मामला कोंडागांव जिले में देखने को मिला, जिस पर विधायक चंदन भड़क गए हैं। जिले के बस्तर के करंदोंला में जन्मे चंदन कश्यप तत्कालीन भाजपा सरकार के मंत्री केदार कश्यप को हराकर नारायणपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए हैं। उनका कार्यक्षेत्र बस्तर , नारायणपुर व कोंडागांव जिले में आता है लेकिन प्रशासन हमेशा उन्हें उपेक्षित करता है। अब मुद्दा यह है कि चंदन कश्यप को राज्य सरकार ने हस्तशिल्प बोर्ड का अध्यक्ष बनाया है और राज्य मंत्री का दर्जा भी दिया है। इसके बावजूद विगत दिनों मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा लोकार्पण कार्यक्रम में उनके ही शिल्प बोर्ड के कार्यक्रम में शिलालेख में उनका नाम नहीं है। जिसके कारण चंदन कश्यप नाराज हैं। चंदन कश्यप ने जिला प्रशासन और नगर पालिका के नेताओं को कठघरे में खड़ा करते हुए नाराजगी जाहिर की है।

ग्राम बालीकोंटा,सरगीपाल एवं मारकेल के माता मेला मंडई में शामिल हुए संसदीय सचिव रेखचंद जैन

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विधि विधान से पूजा अर्चना कर छत्तीसगढ़ बस्तर के सुख शांति समृद्धि की कामना की

विधायक जगदलपुर एवं संसदीय सचिव (नगरीय प्रशासन एवं श्रम विभाग) रेखचंद जैन ने ग्राम पंचायत बालीकोंटा, सरगीपाल एवं मारकेल के माता मेला एवं मंडई में शामिल हुए एवं हिंगलाजिन माता,जलनी माता, परदेशिन माता की विधि विधान पूर्वक पूजा अर्चना कर छत्तीसगढ़ बस्तर के सुख शांति समृद्धि की कामना की |

इस अवसर पर विधायक जगदलपुर एवं संसदीय सचिव रेखचंद जैन ने कहा की हमारे प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी बस्तर की आस्था के केंद्र माता गुड़ियों के जीर्णोद्धार एवं संरक्षण के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं इस हेतु मांग अनूरूप बस्तर आदिवासी क्षेत्र विकास प्राधिकरण के मद एवं जिला खनिज न्यास निधि से राशि स्वीकृत की जा रही है आज माता के आशिर्वाद से बस्तर में वामपंथ हिंसा पर काबू पाकर पुनः विकास के पथ पर अग्रसर हो रहा है हमारी सरकार बनने के बाद से आदिम संस्कृति एवं मान्यताओं को संरक्षित करने का कार्य लगातार किया जा रहा है माता के आशिर्वाद से आज बस्तर कोरोनावायरस संक्रमण जैसी महामारी से निजात पाने में सफल हो गया है पिछले दो वर्षों से कोरोनावायरस संक्रमण के कारण मेला मंडई का आयोजन वृहद स्तर पर नहीं हो पाया था पर इस वर्ष यह आयोजन वृहद स्तर पर हो रहा है हिंगलाजिन माता,जलनी माता,परदेशिन मात से कामना है की कोरोना यदि अगले वर्ष तक खत्म हो जाएगा तो इस मेले मंडई को और वृहद स्तर पर आयोजित किया जाएगा |

इस अवसर पर विधायक जगदलपुर एवं संसदीय सचिव रेखचंद जैन के साथ शहर जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री गौरनाथ नाग, पार्षद सूर्या पाणी, विधि विभाग के जिलाध्यक्ष अवधेश झा, इंटक कांग्रेस के प्रदेश महासचिव विजय सिंह, वरिष्ठ नेता विक्की निषाद फूलमती कश्यप सरपंच बालीकोंटा खगेश्वरी पंच, पुजारी पवन कुमार,दसमू सिरहा,दयालू राम ,मन्नू,दलो, सरपंच सरगीपाल चंपा नाग,उप सरपंच हीरोमहेन्द्र नाग, पुजारी महादेव,इंदर दाढ़ी,मंगडू कोटवार,बुदु, प्रहलाद यादव मांझी, सहदेव,अमीर नाथ, रुकमनी , सरपंच मारकेल बलराम कोकडू,उप सरपंच कमल सेठिया, वरिष्ठ नेता सीताराम सेठिया, लक्ष्मी नारायण भारद्वाज,भैरों सिंह पुजारी,सोनाधर,जगतराम पटेल,पदम सेठिया सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे |

सेमेस्टर परीक्षाओं के लिए पुनः पोर्टल खोंलने व एलएलएम प्रारंभ करने अभाविप ने सौंपा ज्ञापन

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बकावंड, दंतेवाड़ा,भानपुरी,जगदलपुर समेत कई कालेजों में नए संकाय व सीट बढ़ाने की मांग

राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन,छात्रों की समस्याओं को कुलसचिव के समक्ष रखा

जगदलपुर – अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रतिनिधिमंडल द्वारा सोमवार को बस्तर विश्वविद्यालय की समस्याओं व विभिन्न मांगों को लेकर राज्यपाल के नाम ज्ञापन देकर कुलसचिव के समक्ष सम्भाग के कालेजों की समस्याओं व मांगो विस्तार से अवगत करवाया गया।

अभाविप प्रदेश सह मंत्री राजेन्द्र ठाकुर ने बताया कि विश्वविद्यालय के आगामी सेमेस्टर परीक्षाओ में छात्र परीक्षा फॉर्म भरने से वंचित हो गए है,अतःएक दिवस के लिए सेमेस्टर परीक्षा फॉर्म पोर्टल री -ओपन किया जाए जिससे छात्र एग्जाम फॉर्म भर सके, बस्तर विश्वविद्यालय के अंतर्गत शा. महाविद्यालय बकावंड में बी.ए.संकाय में समाज शास्त्र एवं इतिहास विषय साथ ही सभी संकाय में पी.जी कोर्स प्रारम्भ किया जायें,भानपुरी में भूगोल व हिंदी अंग्रेजी एमए खोंलने, दंतेवाड़ा में एम.काम व एलएलबी संकाय प्रारंभ करने,विश्वविद्यालय के प्रवेश पोर्टल पर आ रही विभिन्न समस्याओं को लेकर चर्चा किया गया।

एलएलबी के बाद एलएलएम नही हो रही समस्या – कमलेश दीवान

अभाविप जिला संयोजक कमलेश दीवान ने बताया कि बस्तर विश्वविद्यालय से एलएलबी करने के बाद बस्तर के छात्रों को एलएलएम करने अन्य विश्वविद्यालयो का रुख करना पड़ रहा है जबकि बस्तर विश्विद्यालय में वर्षों से छात्रो की मांग रही है इस सम्बंध में राज्यपाल व सरकार से पुनः पत्र लिखकर ध्यानाकर्षण करवाया जाएगा ताकि यँहा के विद्यार्थियों को जल्द एलएलएम पढ़ने की सुविधा मिल सके।

ये रहे मौजूद – प्रदेश सहमंत्री राजेन्द्र ठाकुर,अर्पित मिश्रा,कमलेश दीवान,वरुण साहनी,यश धुव्र, सोनू कशयप, लखेश्वर बैध,दिनेश कश्यप उपस्थित रहे।

युवाओं के महत्वकांक्षाओं ने शर्मा का खेल बिगाड़ा और अवस्थी मजबूत कथित मुख्यमंत्री कैंडीडेट पर बाबा का आदमी भारी

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जगदलपुर/रायपुर। 12 मई से युवक कांग्रेस का चुनाव प्रारंभ हुआ है जो कि 12 जून तक चलेगा किंतु इस बार बड़ा फेरबदल होने की संभावना व्यक्त की जा रही है । मंत्री भूपेश बघेल का समर्थक बताकर जिस आकाश शर्मा को मजबूत दावेदार बताया जा रहा है 20 दिनों में वह काफी पिछड़ गए हैं, उनकी जगह कथित तौर पर बाबा का आदमी मोनू अवस्थी मजबूत हो गया है। छत्तीसगढ़ के युवा नेता सभी प्रदेश अध्यक्ष बनना चाहते हैं यही महत्त्वकांक्षा आकाश शर्मा को ले डुबी। उनके साथ भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन जो नेता पीछे लागू हुआ करते थे ,वह ही चुनाव मैदान में ताल ठोक रहे हैं। किसी प्रकार की स्थिति अन्य पदों के लिए भी हो रही है जिसके तहत युवा नेता अपने लिए ज्यादा और आकाश के लिए कम मेहनत कर रहे हैं । युवा कांग्रेस चुनाव से जुड़े एक सूत्रों से पता चला है कि टीएस बाबा के समर्थक मोनू अवस्थी के लिए पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है जबकि मुख्यमंत्री के कथित कैंडिडेट आर्थिक संसाधन से जूझ रहे हैं। रायपुर के बड़े होटल गैंग इंटरनेशनल के संचालक होरा द्वारा गांव-गांव में चुनाव लड़ने वालों से मुलाकात कर रहे हैं तो वही भिलाई के विधायक देवेंद्र यादव अपने पुराने साथियों से मिल रहे हैं। युवा कांग्रेस के चुनाव के संदर्भ में जगदलपुर के नेतागण व जनप्रतिनिधि वैट एंड वॉच की मुद्रा पर हैं और उन्होंने अपने आप को विधानसभा और जिला स्तर के चुनाव से भी दूर कर लिया है सिर्फ बड़े नेताओं के समर्थक ही इस तिकड़म में लगे हैं।

प्रबंधक को पकड़ने में बस्तर थाने की पुलिस के फूले हाथ-पांव, 99 लाख के घोटाले में यह है नामजद

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जगदलपुर। बस्तर जिला पुलिस बल के अंतर्गत बस्तर पुलिस थाना के अधिकारियों की उदासीनता के कारण 99 लाख रुपए के घोटाले का नामजद आरोपी फरार है जबकि उनके सहयोगी कर्मचारी गिरफ्तार होकर न्यायालय से छूट गए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार आदिम जाति सेवा सहकारी समिति बस्तर में वित्तीय वर्ष 2020-21 में धान खरीदी में 99 लाख रुपए का शॉटेज आया था। इस मामले में प्रबंधक कंप्यूटर ऑपरेटर एवं धान खरीदी प्रभारी के नाम से एफ आई आर दर्ज कराया गया था और 10 से 15 दिनों के भीतर ही बस्तर पुलिस ने दो आरोपी कंप्यूटर ऑपरेटर एवं खरीदी प्रभारी को गिरफ्तार कर लिया था औ जेल भेज दिया गया था किंतु अब सबसे बड़ा प्रश्न है कि प्रबंधक कंवल सिंह दीवान के नामजद एफ आई आर के बावजूद अभी तक बस्तर पुलिस ने उसे गिरफ्तार नहीं किया।

बस्तर थाने पर उठ रही उंगली

बस्तर थाने में 8 माह पूर्व स्वयं घोटाले का एफ आई आर दर्ज किया किंतु आरोपी को वह नहीं पकड़ पा रहा है जिसके कारण तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है कहीं आरोपी प्रबंधक के साथ बस्तर थाने के लोगों की सांठगांठ तो नहीं हो गई कहीं मोटी रकम तो नहीं ली गई जिसके कारण आरोपी खुला घूम रहा है।

शिलालेख में नाम नहीं कोंडागांव जिला प्रशासन पर चंदन ने निकाली भड़ास, तीनों जिलों में लगातार हो रहे उपेक्षित

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कोण्डागांव/जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के एक ऐसे विधायक हैं जिनके कार्यक्षेत्र तीन-तीन जिले हैं किंतु तीनों जिलों में उनकी उपेक्षा किया जा रहा है। ऐसा ही मामला कोंडागांव जिला में देखने को मिला जिस पर विधायक भड़क गए हैं।

हम बात कर रहें हैं जिले के बस्तर के करंदोंला में जन्में चंदन कश्यप जोकि नारायणपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए हैं। उनका कार्यक्षेत्र बस्तर , नारायणपुर व कोंडागांव जिला आता है लेकिन मजबूत पकड़ नहीं रखने से प्रशासन हमेशा उपेक्षित करता है। अब वास्तविक मुद्दे की ओर जाते हैं, चंदन कश्यप को राज्य सरकार ने हस्तशिल्प बोर्ड का अध्यक्ष बनाया है और राज्य मंत्री का दर्जा भी दिया है उसके बावजूद विगत दिनों मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा लोकार्पण कार्यक्रम में उनके ही शिल्प बोर्ड के कार्यक्रम में शिलालेख में नाम नहीं है जिसके कारण चंदन कश्यप भड़क गए हैं। इन सबके बीच चंदन कश्यप ने जिला प्रशासन व नगर पालिका के नेताओं को कटघरे में खड़ा किया और अपनी भड़ास निकाली है।

बिना आग लगे कैसे निकला धुंआ, एक तरफ खाई, एक तरफ कुंआ…

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(अर्जुन झा)

छत्तीसगढ़ की भाजपा राजनीति में भूचाल ला देने वाले एक प्रसंग में पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. रमन सिंह का एक स्पष्टीकरण सामने आया है, जिसमें उनकी ओर से कहा गया है कि उन्होंने भाजपा की स्थिति ठीक नहीं है, ऐसा नहीं कहा। जिस अखबार ने डॉ. रमन का बयान प्रमुखता से सार्वजनिक किया, उसने डॉ. रमन का पक्ष पेश करते हुए यह भी कहा है कि भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में डॉ. रमन सिंह ने समापन भाषण दिया था। 200 से अधिक पदाधिकारी मौजूद थे। जिम्मेदार पदाधिकारियों ने चर्चा में ऐसे बयान की जानकारी दी थी, जिसे डॉ. रमन सिंह ने खारिज कर दिया। मतलब यह है कि डॉ. रमन का जो कथित बयान सुर्खियों में आया, वह मीडिया तक पहुंचाने में भाजपा के उन जिम्मेदार लोगों की कथित भूमिका है, जो उस वक्त वहां मौजूद थे और डॉ. रमन सिंह का सम्बोधन सुन रहे थे। अंदर की बात बाहर यूं ही नहीं आ जाती। वह स्वरूप बदलकर भी इस तरह बाहर आये तो भी अचरज की बात है क्योंकि भाजपा स्वयं को बहुत अनुशासित पार्टी मानती है। उसके कार्यकर्ता भाजपा को अन्य राजनीतिक दलों से भिन्न बताते हैं। मगर यह जो हो गया, वह बता रहा है कि वक्त बदल गया है। जब डॉ रमन सिंह कह रहे हैं कि उन्होंने ऐसा नहीं कहा कि भाजपा की स्थिति ठीक नहीं है तो मान लें कि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं कहा होगा।

कई बार जब कोई अपने घर में खुलकर कोई बात रख रहा हो तो पहली बात यह है कि घर की बात बाहर नहीं जानी चाहिए। दूसरी बात यह है कि किसी बात के संदर्भ और भावनाओं का स्वरूप नहीं बदला जाना चाहिए। तथ्य का मूल रूप में ही देखना चाहिए। लेकिन, अब ऐसा अक्सर नहीं होता। दीवारों के कान होते हैं तो घर के भेदिये भी कम नहीं हैं। मीडिया तो अपना काम करेगा। उसे जब भाजपा के ऐसे लोग जानकारी देंगे, जिन पर वह भरोसा कर सकता है तो वह जानकारी सामने लाने की प्रतिबद्धता निभाएगा। किसी मामले में संबंधित व्यक्ति का पक्ष भी पता कर लिया जाय तो विवाद की वैसी स्थिति नहीं बनती, जैसी इस मामले में सामने आई। फिर जब राज्य के तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके, किसी पार्टी के राष्ट्रीय पदाधिकारी के बयान की बात हो तो इतना शिष्टाचार जरूरी है कि केवल बताई गई बातों पर पूर्ण भरोसा करने की बजाय संबंधित व्यक्ति से चर्चा कर ली जाए। मगर कई बार यह अपेक्षित गंभीरता उपेक्षित हो जाती है। तब भी भाजपा को मीडिया से टकराव मोल लेने की जगह चिंता यह करनी चाहिए कि उसके अंतःपुर में यह क्या हो रहा है और सुनियोजित सी लगने वाली यह अंतर्कलह आखिरकार भाजपा के लिए ही घातक है। एक बड़ा सवाल यह भी है कि बिना आग के धुंआ कैसे निकल सकता है। कहने वाले यह भी कह सकते हैं कि जब बात बिगड़ गई तो संगठन के दबाव में आकर बात को खारिज कर दिया गया। यहां एक तर्क यह भी दिया जा रहा है कि अचानक ऐसा क्या हुआ कि कल तक रमन सिंह के चेहरे से दूरी बनाती दिखने वाली भाजपा अब उनकी सरकार के काम को जनता के सामने रखने तैयार है। भाजपा को सावधान हो जाना चाहिए कि वह इस तरह के विवादों पर नियंत्रण करे। अन्यथा वह इसका दुष्प्रभाव झेलने तैयार रहे। भाजपा में इस विवाद से एक तरफ कुंआ और एक तरफ खाई वाली नौबत दिख रही है। यह शुभ लक्षण नहीं हैं।

नाबालिग लडकी के साथ कलयुगी मां और मौसा द्वारा जान से मारने की धमकी देकर छेड़छाड़, मामला दर्ज

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बालोद जिला से एक घटना सामने आया जो मिली जानकारी के अनुसार नाबालिग के मां पर अपनी बेटी के साथ हो रहे कृत्यों को दबाने का आरोप है | आरोपी अपनी पहली पत्नी और नाबालिग की मां अपने पति को छोड़ दोनों मौसी के यहां पिछले एक माह से एक साथ रह रहे थे. मौसा पर छेड़छाड़ और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगा है. पुलिस ने कलयुगी मां और नाबालिग लड़की के मौसे को गिरफ्तार कर लिया है | नाबालिग की रिपोर्ट पर पुलिस ने मौसा द्वारिका साहू और मां के खिलाफ पास्को समेत धारा 34-IPC, 354-IPC, 354(क)-IPC, 506-IPC, 7-CHL, 8-CHL के तहत मामला दर्ज कर जेल भेजा गया है | मामला बालोद जिले के गुरुर थाना क्षेत्र का है |

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जब काम तो रमन का नाम क्यों नहीं, फालतू की लीपापोती कर रही है भाजपा

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(अर्जुन झा)

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने प्रदेश भाजपा की कार्यसमिति की बैठक में जब कथित तौर पर तीन बार की जीत का भेद खोल दिया और यह बता दिया कि अब वोटों के बंटवारे के भरोसे नहीं जीत सकते तथा भाजपा की स्थिति ठीक नहीं है तो बेचैन भाजपा ने लीपापोती अभियान शुरू कर दिया। फटाफट फैसला हो गया कि भाजपा अगले साल होने वाले छत्तीसगढ़ विधानसभा के चुनाव में रमन सिंह के 15 साल के कामकाज को भी मुद्दा बनाएगी। लेकिन सवाल यह है कि क्या जब रमन सिंह के काम मुद्दे बन सकते हैं तो रमन सिंह का नाम मुद्दा क्यों नहीं बन सकता? भारतीय जनता पार्टी में इन दिनों अगले चुनाव के लिए कोई चेहरा सामने नहीं लाने का विचार चल रहा है। भाजपा की प्रदेश प्रभारी डी. पुरंदेश्वरी बार-बार कह रही हैं कि चुनाव में कोई चेहरा स्थानीय नहीं होगा बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर चुनाव लड़ेंगे। यहां तक तो समझ में आता है कि भाजपा अपने शीर्ष नेता नरेंद्र मोदी के नाम और काम के भरोसे चुनाव में उतरना चाहती है लेकिन जब रमन सिंह ने तीखे तेवर दिखा दिए तो भाजपा डैमेज कंट्रोल के लिए मजबूर हो गई। यह सत्य है कि लोकसभा चुनाव में मोदी के नाम पर राज्य की 11 में से 9 सीटों पर भाजपा ने जंग जीत ली। यदि छत्तीसगढ़ के नेताओं के भरोसे रहती तो बमुश्किल 1 या 2 सीट आ पाती।

लेकिन यह भी तो सत्य है कि मोदी के नाम पर राज्य के चुनाव में तब कितने वोट मिल सकते हैं, कितनी सीटें मिल सकती हैं, जब दूसरे छोर पर ठेठ छत्तीसगढ़िया राजनीति करने वाले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल खड़े हों? क्या भाजपा यहां भूपेश बघेल के मुकाबले राज्य के चुनाव में मोदी के नाम और काम को खड़ा करेगी? भाजपा ने 2003 में हुए छत्तीसगढ़ के पहले चुनाव में सामूहिक नेतृत्व का दांव चला था , जो कांग्रेस की आपसी फूट की वजह से कारगर सिद्ध हुआ।स्वयं रमन सिंह इस तथ्य को स्वीकार कर चुके हैं कि 2003, 2008 और 2013 में भाजपा किन कारणों से जीती और अब किस वजह से भाजपा की स्थिति ठीक नहीं है। जब भाजपा को ऐसा लगा कि रमन सिंह के बयान से भाजपा की रही सही संभावनाएं खत्म हो गई हैं अथवा खत्म हो सकती हैं तो रमन सरकार के काम की याद आ गई। यदि भाजपा को अपने 15 साल के शासनकाल में रमन सिंह के कामकाज का एहसास था तो पहला सवाल यह है कि वर्ष 2018 के चुनाव में भाजपा को करारी शिकस्त क्यों मिली? दूसरा सवाल यह है कि यदि भाजपा रमन सिंह के काम को भी सामने रखना चाहती है तो फिर उनके नाम से परहेज क्यों है? तीसरा सवाल यह है कि यदि रमन सिंह के कामकाज की तुलना भाजपा भूपेश बघेल के कामकाज से करना चाहती है तो यह विचार पहले क्यों नहीं आया? चौथा सवाल यह है कि भाजपा आखिर रमन के काम को अब महत्व देना चाहती है तो उनके नाम और चेहरे को अहमियत क्यों नहीं देना चाहती? पांचवा सवाल यह है कि यदि रमन सिंह के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में हुए कामकाज पर भाजपा को भरोसा है तो वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निर्भर क्यों रहना चाहती है? छठवां सवाल यह है कि अब तक चेहरे की तनातनी में रमन सिंह उपेक्षित क्यों थे? सातवां सवाल यह है कि भाजपा सामूहिक नेतृत्व में राज्य के किन किन नेताओं को शामिल करना चाहती है? आठवां सवाल यह है कि ऐसे नेता जनता के बीच में कितने स्वीकार्य हैं? नवा सवाल यह है कि यदि भाजपा सामूहिक नेतृत्व में अगला चुनाव लड़ती है और मोदी का चेहरा सामने रखती है तो जीत की क्या गारंटी है? हार की जिम्मेदारी किसकी होगी? 10 वां और सबसे अहम सवाल यह है कि भाजपा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का मुकाबला करने के लिए आखिर कोई एक तयशुदा रणनीति तैयार क्यों नहीं कर पा रही है? इधर कांग्रेस पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के बयान पर यह मान सकती है कि चुनाव के डेढ़ साल पहले ही भाजपा में वह कलह मच गई है जो 2003, 2008 और 2013 में कांग्रेस में थी। कांग्रेस ने 2018 में उस आत्मघाती कमजोरी को दूर कर लिया मगर भाजपा अब ऐसी ही स्थितियों के दौर से गुजर रही है तो इससे कैसे उबरेगी? आखिर में इस पर भी भाजपा को आत्मावलोकन कर लेना चाहिए कि यदि रमनराज से जनता संतुष्ट थी तो यह नौबत क्यों आई??

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