बालोद–राष्ट्रीय सेवा योजना की इकाई शासकीय महाविद्यालय अरमरीकला के स्वयंसेवक प्रताप सिंह साहू ने बहुत ही साधारण रूप से जन्मदिन मनाते हुए जन-जन को पर्यावरण जागरण का संदेश दिया ,उन्होंने कहा मानव जीवन में वृक्षारोपण का बड़ा महत्व है ,आज के समय में जल स्तर लगातार घटते जा रहा है जिसका मुख्य कारण वृक्षों की कमी होना है , इसलिए पर्यावरण एवं घटते जलस्तर को बचाने के लिए हर एक व्यक्ति को एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए एवं वृक्षारोपण के साथ-साथ वृक्ष की सुरक्षा का संकल्प लेना चाहिए। इस प्राणी जगत में वृक्ष का बड़ा महत्व है ,हमें वृक्षों की रक्षा एवं अधिकाधिक वृक्षारोपण कर लोगों को जागरूक करना चाहिए ।वृक्षारोपण कर वह अपने जन्म दिवस मनाया एवं शुभ संदेश देने वाले समस्त जनों का आभार व्यक्त किया ।
महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्षा आज से बस्तर क्षेत्र के दौरे पर
बस्तर क्षेत्र के दौरे पर रहेंगी महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्षा
भारतीय जनता महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्षा श्रीमती शालिनी राजपूत मंगलवार से बस्तर क्षेत्र के दौरे पर रहेंगी। मंगलवार को जगदलपुर पहुंचकर दोपहर 3 बजे महिला मोर्चा की पदाधिकारियों से मुलाकात कर बैठक करेंगे, वही स्थानीय स्तर के कई मुद्दों पर महिला मोर्चा के पदाधिकारियों से चर्चा करेंगे। 18 नवंबर को प्रदेश अध्यक्षा दंतेवाड़ा में महिला मोर्चा की जिला इकाई से बैठक कर भविष्य की रणनीति पर चर्चा करेंगे। उसके बाद 19 नवंबर को बीजापुर और 20 नवंबर को सुकमा में पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से चर्चा करेंगे।
महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्षा की कमान संभालने के बाद प्रदेश अध्यक्षा शालिनी राजपूत लगातार प्रदेश के अलग-अलग संभागों का दौरा कर रही हैं। सरगुजा और बिलासपुर संभाग के दौरे के बाद अब उनका बस्तर क्षेत्र का प्रवास हो रहा है। बस्तर में कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के साथ मुलाकात कर भविष्य की नीतियों पर चर्चा की जाएगी। वहीं प्रदेश के अलग-अलग संभागों का दौरा करने के बाद प्रदेश अध्यक्ष अपनी नई कार्यकारिणी की घोषणा भी करेंगी। यह जानकारी महिला मोर्चा की प्रदेश मीडिया प्रभारी श्रीमती विभा अवस्थी ने दी है। मीडिया प्रभारी विभा अवस्थी ने जानकारी देते हुए बताया कि बस्तर संभाग के दौरे पर जा रही प्रदेश अध्यक्षा अलग-अलग जिलों में अलग-अलग दिन कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के साथ बैठक करेंगी वही उनके साथ पर्याप्त समय बिताएंगे, जिससे वहां की स्थिति परिस्थिति की जानकारी उन्हें बेहतर ढंग से मिल सके, साथ ही भविष्य में क्या कुछ किया जा सकता है इसकी चर्चा भी करेंगे ।
वाहनों की आपसी टक्कर में कांग्रेसी नेता की वाहन में लगी खरोच, देखें विडियो
जगदलपुर । दीपावली के पूर्व शहर में फूल बेचने आए एक छात्र पर जानलेवा हमला होने की बात सामने आई है । बकावंड विकासखंड के ग्राम पंचायत महोली के आश्रित ग्राम रामपाल का आदिवासी युवक जो वर्तमान में मूली हाई स्कूल के कक्षा 12वीं का छात्र है। दिपावली के अवसर पर अपने घर में लगाए गेंदे के फूल को बेचने शहर जगदलपुर पहुंचा था अपनी दुकान लगाकर वह कुछ जलपान करने विधायक निवास के समीप एक दुकान पर पहुंचा वहां और अव्यवस्थित रूप से खड़ी कई गाड़ी के कारण अपनी मोटरसाइकिल खड़ी करने के चक्कर में वह कुछ वाहनों से टकरा गया, जिसके फलस्वरूप उक्त वाहन समीप ही एक कार से टकरा गई
कई वाहनों के एक साथ गिरने के कारण उक्त कार जो एक स्थानीय कांग्रेसी नेता की बताई जा रही है उस पर कुछ खरोच लग गई ।इस मामले के कारण उपजे विवाद में उक्त कांग्रेसी नेता जिसे अमरीश राजपूत बताया जा रहा है उसके द्वारा आदिवासी छात्र बाल कुमार कश्यप के साथ मारपीट की गई है ।छोटे से मामले को लेकर उपजा विवाद के इस मामले में हुई मारपीट से उक्त छात्र बालकुमार के पैर की हड्डी टूट गई और हाथ पैर भी में भी चोटें आई है आदिवासी युवक बालकुमार के साथ आए अन्य युवकों द्वारा उसे तत्काल डॉक्टर के पास ले जाकर मरहम पट्टी

कराई गई लेकिन डॉक्टरी जांच में उसके पैर में फ्रैक्चर होना बताया गया ।
उक्त युवक के साथियों ने मामले की गंभीरता को देख देखकर शहर के ही उसके फूफा को सूचना दी और सारे मामले की जानकारी दी ।छोटी सी घटना के कारण अपने रिश्तेदार को स्थानीय नेता द्वारा इतनी बुरी तरह से मारे जाने से क्षुब्ध उन्होंने इस मामले की जानकारी अपने समाज के लोगों को दी तत्काल समाज के लोगों के साथ मिलकर आदिवासी थाने में इसकी रिपोर्ट दर्ज कराई गई वहां उपस्थित एसडीओपी परपा द्वारा मामला दर्ज कर आगे की जांच का आश्वासन दिया गया |
लेकिन इस मामले में मिली जानकारी के अनुसार पीड़ित आदिवासी युवक के साथियों का कहना है कि हमने पहले कोतवाली थाना आकर अपना पक्ष रखा और मामले की रिपोर्ट लिखानी चाही किंतु पीछे-पीछे दूसरे पक्ष के लोग हुजूम बना कर मामले को रफा-दफा कराने हेतु लग गए लेकिन इसी बीच स्थानीय आदिवासी नेताओं के हस्तक्षेप करने के बाद कोतवाली पुलिस द्वारा आरोपी राजपूत के खिलाफ धारा 323, 294, 306 तहत मामला दर्ज कर आदिवासी जनजाति अधिनियम की धारा के तहत कार्रवाई की गई, वहीं इस सारे घटनाक्रम के दौरान मारपीट की घटना को अंजाम देने वाले अमरीश राजपूत द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से यह प्रचारित किया जाता रहा है कि इस सारे मामले में मेरी कोई भूमिका नहीं है उसे जबरन इस घटना से जोड़ा जा रहा है।
इस घटना के कारण अगर कुछ भी प्रतिकूल स्थिति उत्पन्न होती है तो जिला पुलिस अधीक्षक समेत कोतवाली के नगर निरीक्षक ही इसके जिम्मेदार होंगे ।घटना के बाद से लगातार त्योहारी मौसम रहा जिस कारण पुलिस के अधिकारी अपने अन्य सुरक्षा मामले में व्यस्त थे लेकिन जब आज से सारे कार्यालय सामान्य रूप से खुल जाएंगे तब देखना होगा कि इस आदिवासी छात्र युवक जो अपने परिवार के पालन पोषण करने हेतु फूल बेचकर कुछ धन अर्जन करने शहर आया था उस पर इस प्रकार से छोटी सी बात को लेकर शहर के दबंग प्रवृत्ति के लोग मार-मार कर हाल बेहाल कर देते हैं इस पर पुलिस के आला अधिकारी किस प्रकार की कार्रवाई करते है।
रेल सेवा के माध्यम से जगदलपुर को दिल्ली से जोड़ने के लिए की जाएगी मांग-संग्राम
जगदलपुर। भारतीय जनता युवा मोर्चा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य संग्राम सिंह राणा ने कहा गाड़ी संख्या 18611/18612 रांची से मंडुआडीह(वाराणसी) के बीच सप्ताह में चार दिन संचालित होती है,यदि इसकी आवृत्ति को चार दिन से कम करके दो दिन करने के बाद बचे हुए दो दिन पर इस ट्रेन का रूट विस्तार नई गाड़ी संख्या के साथ मंडुआडीह से दिल्ली ,आनंद विहार(ट) वाया प्रयागराज, कानपुर सेंट्रल, टूंडला,अलीगढ़ एवं रांची से जगदलपुर वाया राउरकेला, झारसुगुड़ा, संबलपुर, टिटलागढ़,रायगढ़ा,कोरापुट तक रूट विस्तार किया जाए तो इससे दिल्ली – जगदलपुर के बीच नई रेल सेवा शुरू हो सकती है। इस प्रस्ताव को पुरज़ोर तरीके से उठाने की आवश्यकता है, जिससे जगदलपुर दिल्ली से वाया कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी,पंडित दीन दयाल उपाध्याय नगर,गढ़वा रोड,डालटनगंज,टोरी, बरकाकाना, रांची, राउरकेला,झारसुगुड़ा,संबलपुर,टिटलागढ़,रायगढ़ा,कोरापुट होकर जुड़ जाएगा।
इस प्रस्ताव को पूर्व सांसद दिनेश कश्यप एवं वर्तमान सांसद दीपक बैज को ज्ञापन के माध्यम से अवगत कराया जाएगा, जिससे बस्तर वासियों की बहुप्रतीक्षित मांग पूरी हो सकेगी। साथ ही उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव को मंज़ूरी मिल जाएगी एवं इस ट्रेन का नाम “दंडकारण्य” एक्सप्रेस रखना सार्थक होगा क्योंकि प्रयागराज और जगदलपुर का संबंध रामायण काल से रहा है।उन्होंने उम्मीद जताते कहा कि रेल मंत्री पीयूष गोयल से इस प्रस्ताव को साझा करके इस प्रस्ताव पर उचित कार्रवाई करेंगे।
गीदम कन्या आवासीय विद्यालय में लगी आग
दंतेवाडा – जिले में संचालित एक आवासीय विद्यालय में आगजनी की घटना सामने आई है। गीदम ब्लॉक के अंतर्गत कारली स्थित कन्या पोटा केबिन आश्रम में बीती रात भीषण आग लग गई। इस घटना में आवासीय विद्यालय में रखा सारा सामान जलकर खाक हो गया।
हालांकि, आगजनी की इस घटना में किसी भी प्रकार के जान माल के नुकसान की जानकारी नहीं है। कोरोना संकट काल की वजह से पिछले कई महीनों से आश्रम की सभी छात्राएं अपने घरों को चली गईं हैं। ऐसे में एक बड़ा हादसा होने से बच गया। बताया जा रहा है कि कारली स्थित कन्या पोटा केबिन में देर रात करीब 2 से 3 बजे के बीच अचानक आग की लपटें उठने

लगी और देखते ही देखते पूरे आवासीय विद्यालय को इसने अपनी चपेट में ले लिया। भीषण आगजनी के चलते पोटा केबिन आश्रम का अधिकांश सामान, फर्नीचर व सरकारी रिकार्ड आदि जल गया है। घटना की जानकारी मिलते ही विभागीय अधिकारी मौके पर पहुंचे और फायर ब्रिगेड को बुलाया गया। दमकल की टीम द्वारा काफी देर की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। आग बुझाने से पहले ही पोटा केबिन का बड़ा हिस्सा आग की चपेट में आ चुका था जिससे आश्रम में काफी नुकसान हुआ है।
शार्ट सर्किट का अंदेशा
कन्या पोटा केबिन में आग लगने के बाद आगजनी से हुए नुकसान का आंकलन किया जा रहा है। प्रथम दृश्टया शार्ट सर्किट की वजह से आश्रम में आग लगने की बात कही जा रही है। राजीव गांधी शिक्षा मिशन के जिला मिशन समन्वयक एसएल शोरी ने बताया कि आग से पोटा केबिन में बड़ा नुकसान हुआ है। डीएमसी शोरी के मुताबिक, पोटा केबिन में अचानक आग लगी और इससे पहले की इस पर काबू पाया जाता आग की लपटें पूरे आश्रम में फैल गई। इस घटना में पोटा केबिन में रखे तखत, गद्दे, कंबल, चादर व अन्य सामान जलकर खाक हो गए। वहीं लाइब्रेरी, कम्प्यूटर रूम व लैब में भी आग ने जमकर तबाही मचाई।
अनियंत्रित होकर पलटी यात्री बस, बस के उड़े परखच्चे
किरंदुल। एआरएमटी ट्रेवल्स की बस में यात्रा कर रहे यात्री उस वक्त बाल-बाल बच गए, जब किरंदुल से महज 5 किलोमीटर की दूरी पर बस अनियंत्रित होकर पेड़ जा टकराई और तेज गति की वजह से पलट गई। मिली जानकारी के अनुसार, एआरएमटी ट्रेवल्स की यात्री बस सीजी 17 एफ 9195 सुबह करीब 9 बजे किरंदुल बस स्टैंड से सवारी लेकर सुकमा के लिए रवाना हुई थी। यह बस किरंदुल से महज 5 किलोमीटर की दूरी पर मोड़ के पास बस

अनियंत्रित हो गई और पेड़ से जा टकराई तथा पलट गई। इस हादसे में सभी बस यात्री सुरक्षित है लेकिन बस के परखच्चे उड़ गए। हादसे की जानकारी देते हुए बस चालक साहू ने बताया कि बस अचानक अनियंत्रित हुई और पलट गई उसे कुछ समझ नहीं आया। वही, किरंदुल थाना प्रभारी डीके बरवा ने कहा कि बस संचालन के समय चालक का जूता क्लच में फंस गया और स्टेरिंग सीधा हो गया, जिसके कारण बस अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हुई। हादसे में किसी भी प्रकार के कोई हताहत की खबर नहीं है।
पुलिस जवाबदेही प्राधिकार, बृजेश मिश्रा और रामकली यादव सदस्य नियुक्त
रायपुर । पुलिस अफसरों और कर्मियों की जवाबदेही तय करने के लिए गठित पुलिस जवाबदेही प्राधिकार में रिटायर्ड आईएएस ब्रिजेशचंद्र मिश्रा और दुर्ग की अधिवक्ता रामकली यादव को सदस्य मनोनीत किया गया है | दोनों सदस्यों का कार्यकाल दो साल रहेगा | इस सम्बन्ध में गृह विभाग ने आदेश जारी किया है |

प्राधिकार के चेयरमैन रिटायर्ड जस्टिसआईएस उपवेजा हैं। सरकार ने दुर्ग और रायपुर कमिश्नर रहे बृजेशचंद मिश्रा को सदस्य मनोनीत किया गया है। एक अन्य सदस्य श्रीमती रामकली यादव दुर्ग में अधिवक्ता हैं। गृह विभाग ने इस आशय के आदेश जारी कर दिए हैं। बताया गया

कि पुलिस जवाबदेही प्राधिकार में पुलिस अफसरों और कर्मियों की जवाबदेही तय करेगी जिनके विरूद्ध शिकायत की जाती है। इस प्राधिकार के पास सिविल न्यायालय जैसे अधिकार होंगे, जो मामलों की सुनवाई कर जवाबदेही तय करेंगे। प्राधिकार अपना प्रतिवेदन राज्य सरकार को सौंपेगा।

पुलिस एक्ट में संशोधनों के बाद मुख्य रूप से शिकायतकर्ताओं की ओर से शपथपत्र के साथ प्रस्तुत शिकायत करने पर या फिर सरकार द्वारा साँपे गए आवेदनों आरोपों की जांच करेगा।यह संबंधित व्यक्ति को संमन जारी करके हाजिर रहने के आदेश जारी कर सकता है। किसी घटना

के छह माह बीत जाने के बाद प्राधिकार संज्ञान नहीं लेगा। दस्तावेजों के परीक्षण के लिए कमीशन जारी करने का अधिकार भी प्राधिकार को होगा। इस प्राधिकार के पास सिविल न्यायालय जैसे अधिकार होंगे जो मामलों की सुनवाई कर जवाबदेही तय करेंगे | प्राधिकार अपना प्रतिवेदन राज्य सरकार को सौंपेगा |






वार्ड पार्षद द्वारा रंगोली प्रतियोगिता करवाया गया एवं विजेता को परुस्कार वितरण किया
पार्षद रोशन द्वारा अनोखे अंदाज में अपने वार्ड वासियों के साथ मनाया दीपावली पर्व :
सैय्यद वली आज़ाद – नारायणपुर
जिला मुख्यालय नारायणपुर के वार्ड क्रं. 8 महावीर मंदिर पार्षद श्री रोशन गोलछा द्वारा कराई गई रंगोली प्रतियोगिता जिसमें वार्ड के माताओं बहनों व बेटियों ने बढ़ चढ़ के आनंद के साथ लिए हिस्सा!

नारायणपुर जिले के वार्ड क्रं. 8 के चहेते पार्षद रोशन गोलछा लगातार वार्ड वासियों के साथ कुछ ना कुछ नया करने की व वार्ड को और बेहतर करने कि कोशिश मे रहतें हैं उनके द्वारा इस महामारी के दौरान वार्ड मे दिवाली का माहौल इस कदर रंगारंग किया गया कि रंगोली के रंग भी कम पड़ गए उन्होंने इस दिपावली घर- घर जाकर माता, बहनों को रंगोली वितरण किया व एकाएक रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन कर सभी वार्ड वासीयों के मन में हर्षोल्लास का दिप प्रज्ज्वलित कर दिपावली का माहौल और भी जगमग कर दिया,रंगोली प्रतियोगिता में माता, बहनों ने हिस्सा लिया जिसमें प्रथम स्थान पर केसर जैन, द्वितीय स्थान पर पायल चंद्राकर व सुम्मी जैन, तीसरे स्थान पर चन्द्रिका निषाद,दिशा राठौड़,सीमा कड़ीयाम बनी रही,वहीं प्रतिभागीताओं को पार्षद रोशन गोलछा व वार्ड के वरिष्ठों के द्वारा पुरस्कार के साथ सम्मानित किया गया निर्णायक भूमिका में अनूप भट्टाचार्य एवं दल व सोशल मीडिया की अहम भूमिका रही श्री रोशन गोलछा द्वारा समय-समय पर अपने वार्ड में किया जाने वाला पहल अतुलनीय व सराहनीय कदम है !
अतिसंवेदनशील क्षेत्र कोलेंग के बच्चे लगायेंगे चौके-छक्के, संसदीय सचिव रेखचंद जैन व क्रेडा अध्यक्ष मिथिलेश स्वर्णकार का जताया आभार
जगदलपुर।बस्तर जिले के दरभा ब्लाक के अतिसंवेदनशील क्षेत्र कोलेंग के युवक अब क्रिकेट के खेल में चौके-छक्के लगाएंगे।इनकी मुराद संसदीय सचिव व जगदलपुर विधायक रेखचंद जैन तथा अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण(क्रेडा) अध्यक्ष मिथिलेश स्वर्णकार ने पूरा किया। खेल सामग्री मिलने पर युवाओं ने नेताओं का आभार व्यक्त किया ।
अतिसंवेदनशील क्षेत्र कोलेंग के युवकों द्वारा जगदलपुर विधायक एवं संसदीय सचिव रेखचंद जैन एवं छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय उर्जा विकास अभिकरण के अध्यक्ष मिथिलेश स्वर्णकार से मुलाकात कर उन्हें दिपावली की शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर वहां के जनपद सदस्य एवं क्रिकेट टीम के युवाओं ने नेता द्वय से क्रिकेट किट की कमी की बात बताई जिस पर संसदीय सचिव एवं विधायक जगदलपुर रेखचंद जैन एवं क्रेडा चेयरमैन मिथिलेश स्वर्णकार ने तत्काल क्रिकेट किट मंगवा कर उन्हें प्रदान किया जिस पर संवेदनशील नक्सली प्रभावित क्षेत्र कोलेंग के युवाओं ने दोनों नेताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आप दोनों नेताओं की वजह से अब सुदूरवर्ती कोलेंग के युवाओं को भी क्रिकेट खेलने के लिए अत्याधुनिक खेल सुविधाएं प्राप्त हो गई है और क्षेत्र के समस्त युवा आप दोनों नेताओं का आभार व्यक्त करते हैं।
इस अवसर पर विधायक जगदलपुर एवं संसदीय सचिव रेखचंद जैन के साथ छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय उर्जा विकास अभिकरण के अध्यक्ष मिथिलेश स्वर्णकार के साथ जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री हेमू उपाध्याय एवं जनपद सदस्य भानू राम एवं क्रिकेट टीम के कप्तान मन्नु कश्यप के साथ क्षेत्र के युवा भी मौजूद रहे।
नहाय – खाय से शुरू होगा सूर्योपसना का महापर्व छठ
छ्ठ बिहार,क्षारखण्ड , पूंर्वाच्चल तथा नेपाल का सर्वाधिक महत्वपूर्ण पर्व है। इसकी महत्ता इतनी है कि बिहारी मूल के लोग दुनिया के किसी भी कोने/हिस्से में रहे,वे अपने पैतृक घर / परिवार जरूर लौटते हैं या लौटने की पुरी कोशिश करते हैं और जो नही जा पाते,वो अपने आसपास ही छोटा – सा बिहार और पूर्वाच्चल बना लेते है। आज हालात यह है भारत के सभी शहरों/ कस्वों के साथ_ साथ दुनिया के अनेक देशों में छ्ठ पर्व घुमधाम व पुरी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।छत्तीसगढ में भी ऐसा कोई शहर / नगर नहीं है जहाँ छठ व्रतियों की भीड नहीं जुटती ।
अपनी ऊर्जा से समस्त जगत को चलायमान रखनेवाले सूर्यदेव और उनकी माता अदिति की प्रमुख रूप से अराघना का ये छ्ठपर्व संभवतःसनातन हिन्दू संस्कृति के प्राचीनतम् त्यौहारों में से एक मात्र लोकपर्व है| किंवदंतियों की माने तो दीनानाथ(सूर्यदेव) और छ्ठी मैया(माता) की उपासना चार दिन होती है।बैसे जब त्यौहार इतना पुराना हो और उससे गहरा लगाव हो तो आस्था का सैलाब हर कहीं होना स्वाभाविक है। लेकिन अगर जो इस बार घर से दूर हैं तो आप अपने पैतृक प्रान्त का एक प्रतिरूप अपने पास ही तैयार करना चाहते है तो मेरा इस लेरव में वार्णित विधि- बिघान आपकी कुछ मदद जरूर कर सकते हैं:—-
हमारे देशमें सुर्योपासना के लिए प्रसिद्ध पर्व है छ्ठ मूलतः सूर्य षट्टी ब्रत होने के कारण इसे छ्ठ कहा गया है।यह पर्व वर्ष में दो बार मनाया जाता है। पहली बार चैत्र में और दुसरी वार कार्तिक में। चैत्र शुक्ल पक्ष षष्ठी पर मनाये जाने वाले छ्ठ पर्व को चैती छ्ठ तथा कार्तिक शुक्ल पक्ष षष्ठी पर बनाये जाने वाले छ्ठपर्व को कार्तिक( कतकी)छ्ठ कहा जाता है। पारिवारिक सुख -समृद्धि तभा मनोंवांक्षित फलप्राप्ति के लिए छ्ठ पर्व मनाया जाता है। इस पर्व को स्त्री और पुरूष समान रूप से मनाते हैं। लोक परम्परा के अनुसार सूर्यदेव और षष्ठी मैया का सम्बन्ध पुत्र और माता का है। लोक मातृका षष्ठी की पहली पुजा सूर्य ने ही की थी। छ्ठ पर्व की परम्परा में बहुत गहरा विज्ञान छिपा हुआ है। षष्ठी तिथि (छ्ठ) एक विशेष खगौलीय अवसर है । उस समय. सूर्य की परावैगनी किरणें पृथ्वी की सतह पर सामान्य से अधिक मात्रा में एकत्र हो जाती है। उसके संभावित कुप्रभावों से मानव की यथा संभव रक्षा करने का सामर्थ इस परम्परा में है।
छठ पर्व का धार्मिक महत्व
सूर्मषष्टी अथवा छ्ठ पूजा सूर्योपासना का महोत्सव है। सनातन घर्म के पांच प्रमुख देवताओ मैं से एक सूर्यनारायण हैं। वाल्मीकि रचित रामायण में ॥आदित्य हृदय स्त्रोत ॥ के द्दारा सूर्यदेव का जो स्तवन किया गया है ,उससे उनके सर्वदेवमय सर्वशाक्तिमय स्वरूप का बोध होता है। सूर्य आत्मा जगतस्तस्युषश्च सूर्य सूक्त के इस वेद मंत्र के अनुसार भगवान सूर्य को सम्पूर्ण जगत का आत्मा कहा गया है। सूर्य का अर्थ सरति आकाशे सुवति कर्माणि लोक प्रेरयति वा वतलाया गया है ,अर्थात आकाश में चलते हुए लोक में जो कर्म की प्रेरणा दे ,उसे सूर्य कहा गया है। पुराणों में सूर्य को प्रत्यक्ष देवता कहा गया है। मोदनी में सूर्य को ग्रह विशेष बतलाया गया है। सूर्य के व्युप्पत्ति लभ्य अर्थ के अनुसार आकाश मण्डल से संचार की प्रेरणा देते हुए जो ग्रहों के राजा है,वही सूर्य है। पौरोहित्य शास्त्र के अनुसार सूर्य का जन्मस्थान कलिन्ग देश,गोत्र-कथ्यप,रक्त-वर्ण है। ग्रहराज होने के कारण ज्योतिष शास्त्र मानता है कि ग्रहों की अनुकूलता हेतु भगवान भाष्कर की पूजा करनी चाहिए ।पूजन में अर्ध्य का विघान मिलता है।कहा गया है कि सूर्य़ को अर्ध्य.देने से पाप विनिष्ट हो जाते हैं। स्कन्दपुराण में तो स्पष्ट उल्लेख है कि सूर्य कि सूर्य को वगैर अर्ध्य दिये भोजन तक नहीं करना चाहिए|पौरोहित्य शास्त्र के अनुसार अर्ध्य में आठ बस्तुओं का समावेश अर्थात जल,दूघ,कुश का अगला भाग,दघि ,अक्षत,तिल,यव और सरसों को अर्ध्य का अंग बतलाया है। अर्ध्य देने के लिए तांबे एंव पीतल की घातु के लोटे (जलपात्र) का प्रयोग करना चाहिए| शास्त्रों के अनुसार उगते हुए सूर्य एंव डूबते हुए सूर्य के सामने अर्ध्य देना चाहिए । पुराणों के अनुसार सूर्यदेव षष्ठ अर्थात छठवें दिन तेजोमय प्रकाश के साथ माता अदिति के समक्ष प्रकट हुए थे,इसीलिए माता अदिति को छ्ठी -मैइया के स्प में स्तुति की जाती है। ब्रती प्रसिद्ध छ्ठ पूजा के अवसर पर विशेष रन्य से सांय एव प्रातःकालीन सूर्य को अर्ध्य देकर सूर्य षष्ठी (छठ) ब्रत का परंम्परागत स्प से अनुपालन कर पवित्रता एंव तपस्या को चरमोत्कर्ष पर पहुंचाते है।
लोक उत्सव का स्वरूप
छ्ठ पूजा चार दिवसीय उत्सव है। इसकी शुरूआत चैत्र/ कार्तिक शुक्लपक्ष चतुर्थी को तभा समाप्ति चैत्र’ कार्तिक शुक्लपक्ष सप्तमी को होती है। झ्स दौरान व्रतघारी स्त्री/ पुरूष लगातार 36घंटे का निर्जला ब्रत रखते हैं। इस दौरान वे पानी भी ग्रहण नहीं करते!
कार्तिक छ्ठ व्रत 2020 का विवरण:
*18 नवम्बर 2020 : नहाय खाय
*19 नवम्बर 2020 : खरनापूजा
*20 नबम्बर 2020 : संध्या अर्ध्य
*21 नवम्बर 2020 : प्रातः अर्ध्य
. ( क ) नहाय खाय
पहला दिन शुक्लपक्ष चतुर्थी तिथी को नहाय खाय के रूप में मनाया जाता है। आमावस्या तिथी से सबसे पहले घऱ की पुरी तरह सफा३ि कर उसे पावित्र बनाया जाता है।इसके वाद लाल रंग की खाद्य जैसे टमाटर यादि खाना पूर्णतः वर्जित हो जाता है।छ्ठ व्रत की तैयारी शुरू हो जाता है तभा चुल्हा यदि का निर्माण किया जाता है। शुक्लपक्ष की चतुर्थी तिथी को प्रातः काल व्रती स्नान ध्यान से निवृत होकर सुद्धता और पावित्रता से निर्मित साकाहारी भोजन का सेवन करता/ करती है। इसी के साथ छ्ठ ब्रत की शुरूआत हो जाता है। परिवार के सभी सदस्य व्रती। के भोजनोपंरात ही भोजन ग़हण करते हैं।भोजन के रन्प में कददु(लौकी) -दाल और चावल ओल( जीमीकंदा) ,हरा वैगन,गोभी की शब्जी तथा चना दाल सेंधा नमक में बनाया हुआ खाने की परम्परा है।
( ख ) लोहंडा और खरना
दुसरे दिन अर्थात शुक्ल पक्ष पंचमी तिथी को व्रतघारी दिनभर निर्जला उपवास रखने के बाद शाम को भोजन करते हैं। इसे ॥ खरना॥ कहा जाता है। खरना का प्रसाद लेने के लिए सभी परिजनोंको निमंत्रित किया जाता हैा प्रसाद के रन्प खीर,घी लगा रोटी,चना दाल,चावल तथा चावल का पिट्ठा विशेष रन्प से बनाया जाता है| गन्ने का रस यदि उपलब्ध हो तो उसे प्रमुखता दी जाती है अन्यथा गुड का उपयेग होता है लेकिन प्रसाद में नमक या चीनी का उपयोग नही किया जाता है।खरना का विशेष प्रसाद सोहारी(घी लगा हुआ विशेष रोटी) और रसिया (गन्ना का रस अथवा गुड का खीर) होता है जिसे व्रती रात्रि में पूजा- अर्चना के वाद ही ग्रहण करता हैा इसी के बाद शुरू होता है व्रती का 36घंटे का कठोर निर्जला व्रत । विशिष्ट हालात में व्रती यदि मजबुरी हो तो रात्री में गौमुखी (गाय की तरह शरीर की अवस्था बनाकर) जल ग़हण किया जा सकता है।छ्ठ ब्रत के दौरान स्वच्छता और पावित्रता का विशेष रन्प से ध्यान ररवा जाता हैा
( ग ) संध्या अर्ध्य
तीसरे दिन अर्थात शुक्ल षष्ठी को दिन में छ्ठ प्रसाद बनाया जाता हैा प्रसाद के रन्प मैं ठेकुआ,जिसे टिकरी भी कहते हैं,के अलावा चावल के लडडू ( लड्डुआ) बनाते हैं। इसके अलावा चढ़ावा के स्प में लाया गया साँचा(चीनी का एक विशिष्ट साचा में बना मिठाई) ,गन्ना और फल भी छ्ठ प्रसाद के स्प में शामिल होता है। शाम को पुरी तैयारी और व्यवस्था कर बाँस की टोकरी में अर्ध्य का सूप सजाया जाता है ओर ब्रति के साथ परिवार और परिजन लोग अस्ताचलगामी सूर्य को अर्ध्य देने घाट की ओर चल पड़ते हैं। सभी छ्ठव्रती एक नीयत नदी/ तालाव / पोखर के किनारे एकत्र होकर सामहिक रन्पसे अर्ध्य दिया जाता है तथा छ्ठी मैया का प्रसाद भरे सूप से पूजा की जाती है । अर्ध्य के साथ ही हुमाद से हवन किया जाता है जिसमें व्रती के वाद घाट पर उपस्थित सभी लोग भाग लेते हैं। पूजन में सूर्य की पत्नी ॥ प्रत्यूषा ॥ और उनसे उत्पन्न सूर्यपुत्र ॥शनिदेव ॥की भी अर्चना की जाती हैाछ्ठी मैइया की प्रसाद भरे सूप लेकर ब्रती जल में स्नान कर खड़ी हो जाती है 1 तत्पश्चात परिजन द्वारा सूर्य को जलऔर दुघ का अर्ध्यदिया जाता हैा इस दौरान कुछ घण्टे के लिए वहाँ मेले का दृथ्य बन जाता है।
( घ ) उषा अर्थात प्रातः अर्ध्य
,चौथे दिन अर्थात शुक्ल पक्ष सप्तमी की शुबह उदियमान सूर्य को अर्ध्य दिया जाता हैा ब्रती अपने पुरे प्रियजनों के साथ उसी स्थान पर पुनः एकत्र होते हैं जहाँ उन्होंने शाम को अर्ध्य दिया था। पुनः पिछली संध्या की प्रक्रिया की पुनरावृति होती है तथा हुमाद से कण्डे ( गोबर का बना) से अग्नि प्रञ्जवलित कर ह्बन करते है । विशेष रन्प से सूर्यदेव की ब्याहता पत्नी उषा और उनसे उत्पन्न पुत्र यम तभा यमी की भी पुजा – अर्चना की जाती हैा अन्त में ब्रती कच्चे दुघ का शरबत पीकर तथा थोड़ा प्रसाद खाकर व्रत पूर्ण करते हैं । तत्पश्चात घाट पर उपस्थित सभी पारिजनों को प्रसाद वितरित किया जाता है।
( ङ) व्रत
छ्ठ त्यौहार मूलतः इतिहास के पन्नों में दर्ज ॥मगध॥ जनपद का महापर्व है लेकिन अब इसकी ०यापकता सम्पूर्ण भारत ही नही वल्कि विथ्वव्यापी हो गया है। छ्ठ न सिर्फ आस्था का महापर्व है बल्कि श्रद्धा की महापरीक्षा भी है।छ्ठ उत्सव के केन्द्र में एक कठिन तपस्या की तरह हैा व्रत रखने वाले स्त्री को परबैतिन भी कहा जाता हैा चार दिनों के इस व्रत में ब्रती को लगातार उपवास करना होता है।भोजन के साथ ही सुखद शैय्या का भी त्याग किया जाता हैापर्व के लिये आरक्षित विशेष कमरे में ही व्रती फर्स/ जमीन पर एक कबंल / चादर के सहारे ही रात बिताई जाती है। उत्सव में शामिल होने वाले लोग नए कपड़े पहनते हैं। पर व्रती ऐसे कपड़े पहनते हैं जिनमें किसी प्रकार की सिलाई नहीं की होती है lमहिलाएं साड़ी और पुरूष घोती पहनकर छ्ठ करते हैं।शुरू करने के बाद छ्ठ पर्व को सालो-साल तक करना होता है जबतक कि अगली पीढ़ी की किसी विवाहित स्त्री/ पुरूष को इसके लिए तैयार न कर लिया जाए । घर / परिवार में किसी की मृत्यू हो जाने पर यह पर्व नहीं मनाया जाता है।छ्ठ व्रत प्रमुख रन्प से पुत्र/ पुत्री की प्राप्ति हेतु,सन्तान की लम्बी उम्र के लिए,निरोगी शरीर और परिवार की सुख समृद्धि के लिए किया जाता है।
. व्रत करने वाले सभी ब्रती सुवह से ही स्नान कर गेहूं सुखाते हैं। इस वात का विशेष तौर से ध्यान रखा जाता है कि कोई पशु / पक्षी इन दानों को चुगने नहीं पाये/ आमावश्या के वाद पुरे छ: दिन लहसुन/ प्याज आदि का पुरे परिवार में सेवन पूर्णतः वर्जित होता है।पकवान / प्रसाद बनाते समय शुद्धता और पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है।तीसरे दिन सूर्यास्त के समय तथा चतुर्थ दिन प्रातः काल पति/ पुत्र में से कोई सिर पर बहगी( प्रसाद से भरा टोकरी) रखकर अपने परिवार व इस्टों के साथ पास के घाट पर जाते हैं। अर्ध्य में तीन चीजें का विशेष महत्व है,बांस से बना सूपा,टोकरी और प्रसाद । प्रसाद में सामान्यतः ठेकुआ,मौसमी फल,गन्ना, नारियल आदि रखे जाते हैं। व्रती पहले नदी / तालाव में स्नान करते हैं। फिर गीले ही कपडे पहने ही प्रसाद को सुपे में रखकर दोनों हाथ से पकड़कर जल में खड़े हो जाते हैं। दीपक भी जलता रहता है। सभी परिजन दोनो समय (संध्या / प्रातः) बारी -बारी सेअर्ध्य देते हैं। अर्ध्य देने के बाद गोबर कें कंडे से जलते हुए आग में सामान्यतः शुद्ध व पवित्र घी में मिला हुआ हुमाद से हवन किया जाता है। व्रती के वाद सभी हवन करते हैं। हवन सम्पन्न होने के वाद व्रती व्रत तोड़ता है।व्रती के प्रसाद ग़हण करने के बाद घाट पर उपस्थित सभी सदस्यों को प्रसाद वितरित किया जाता है।तदुपरान्त वचे प्रसाद की टोकरी को लेकर सभी अपने -अपने घर लौट जाते ह़ै तथा प्रसाद वितरित करते हैं। कार्तिक मास की तरह ही चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की षष्टी तिथी को छ्ठ पूजा का आयोजन इसी तरह घुमघाम से मनाया जाता हैा छ्ठ पर्व के दिनों में माहौल पूर्णतः घार्मिक होता है तथा महिलायें विशेष रूप से सूर्यदेव और छठी मईया की सामुहिकं गीत गाकर पुरे वातावरण को आध्यात्मिक बनाने में को३ि कसर शेष नहीं रखती है ।












