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अब जिप्सी से पर्यटकों को सैर कराएंगे कोटमसर के युवक

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  • वन विभाग ने स्थानीय युवकों को उपलब्ध कराए हैं वाहन
  • रोजगार के साथ ग्रामीणों की आस्था को भी अहमियत दी है सीएम भूपेश बघेल ने -रेखचंद जैन


जगदलपुर बस्तर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल कोटमसर के युवक अब वहां पहुंचने वाले पर्यटकों को जिप्सी वाहन से सैर कराएंगे। स्थानीय युवाओं को रोजगार दिलाने की मंशा से ये वाहन वन विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए हैं। युवकों को वाहनों की चाबियां संसदीय सचिव रेखचंद जैन ने सौंपी।

समारोह को संबोधित करते हुए जगदलपुर के विधायक एवं संसदीय सचिव रेखचंद जैन ने कहा कि प्रदेश में 15 साल तक सरकार चलाने के बाद भी भाजपा ने इस क्षेत्र के विकास, यहां के युवाओं को रोजगार दिलाने तथा आस्था स्थलों के जीर्णोद्धार पर ध्यान ही नहीं दिया। कांग्रेस की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रोजगार के साथ ग्रामीणों की आस्था को अहमियत दी है। बुधवार को दरभा विकासखंड के कोटमसर में देवगुड़ी निर्माण का भूमिपूजन करते हुए श्री जैन ने कहा कि भेंट- मुलाकात कार्यक्रम के दौरान जब मुख्यमंत्री श्री बघेल मंगनपुर आए थे, तब उनसे इस क्षेत्र के युवाओं को रोजगार प्रदान करने तथा देवगुड़ी निर्माण की स्वीकृति प्रदान करने का निवेदन किया गया था। मुख्यमंत्री श्री बघेल के निर्देश पर वन विभाग द्वारा जिप्सी सफारी वाहनों की व्यवस्था की गई है। श्री जैन ने कोटमसर के युवाओं को सफारी वाहनों की चाबी सौंपते हुए सीसीएफ अभय कुमार श्रीवास्तव व डीएफओ धम्मशील गणवीर से कहा कि स्थानीय युवाओं की मांग के अनुसार रोजगार की योजना बनाएं।
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सांसद बैज के साथ किया भूमिपूजन- लोकार्पण
बस्तर सांसद दीपक बैज व जगदलपुर विधायक रेखचंद जैन ने बुधवार को दरभा ब्लॉक के मावलीपदर में सीसी रोड निर्माण का भूमिपूजन तथा कामानार में यात्री शेड प्रतीक्षालय का लोकार्पण किया। इस दौरान जिला पंचायत सदस्य सीता नाग, जनपद अध्यक्ष ए जानकी राव, जनपद सदस्य तुलाराम कश्यप, शान्ति बघेल, दीनमणि बेसरा, मानसिंग ठाकुर, सरपंच सविता बघेल, कुमारी बाई बघेल, समदुराम बघेल, लैखन बघेल, बुधरू बघेल, कमलसाय नाग, रीका कर्मा, महादेव नाग, जयदेव नाग, सहदेव नाग, सुमन नाग, कमलसाय, एमआइसी सदस्य राजेश राय, एल्डरमेन कौशल नागवंशी, शहर कांग्रेस महामंत्री गौरनाथ नाग, हेमू उपाध्याय, अवधेश झा आदि मौजूद थे।
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मितानिनों का किया सम्मान
बुधवार को कामानार में मितानिन दिवस पर दरभा ब्लॉक की सैकड़ों मितानिनों का स्वागत नेताद्वय ने उन्हें पुष्पगुच्छ भेंटकर किया। इस मौके पर संबोधन में सांसद श्री बैज व विधायक श्री जैन ने मितानिनों के कार्य की जमकर सराहना की और उन्हें स्वास्थ्य सेवा की रीढ़ बताया। बड़े जनप्रतिनिधियों के हाथों से सम्मान पाकर मितानिने काफी उत्साहित नजर आ रही थीं।

सभी मितानीन बहनों को मितानिन दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं:–धुर्वे

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मितानिन दिवस पर जिलाध्यक्ष धुर्वे के नेतृत्व में किया गया मितानिनो का सम्मान

मितानिनें छत्तीसगढ़ का गौरव हैं :–धुर्वे

शॉल और श्रीफल भेंट कर मनाया गया मितानिन दिवस:– धुर्वे

दल्लीराजहरा/डौंडीअनुसूचित जनजाति मोर्चा जिला अध्यक्ष व सांसद प्रतिनिधि विक्रम धुर्वे जी के नेतृत्व में नगर पंचायत चिकलाकसा के कार्यालय में मितानिन दिवस 23 नवंबर के अवसर पर मितानिनो का सम्मान किया गया धुर्वे जी ने कहा मितानिनें छत्तीसगढ़ का गौरव हैं व विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इस साल वैश्विक स्तर पर उनके योगदान को सराहा है। धुर्वे जी ने आगे कहा की प्रदेश में हर साल 23 नवम्बर का दिन मितानिन सम्मान दिवस के रूप में मनाया जाता है। श्री धुर्वे जी ने कहा कि मितानिन ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की सबसे निचली लेकिन वहां स्वास्थ्य ढांचा की नींव होती है,

जो लोगों तक पहुंचकर न सिर्फ उन्हें स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रखती है बल्कि स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ पहुंचाने में महत्वपूर्ण कड़ी का कार्य करती है। प्रतिवर्ष 23 नवम्बर को मितानिन दिवस मनाया जाता है, जो उनके सेवा और सहयोग के लिए सामूहिक आभार प्रकट करने का अवसर होता है।मितानिन अपनी कर्तव्य निष्ठा व समर्पण से लोगों तक न केवल समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचायी बल्कि उनके लिए जीवन रक्षक भी साबित हुई। सम्मान पाने वाले प्रशिक्षक खेल सिंह ठाकुर मितानिन में सोहद्रीबाई, अहिल्याबाई, डीलेश्वरीबाई,लता गोरे व महेश्वरी कोर्राम रहे। इस दौरान नगर पंचायत चिखलाकसा अध्यक्ष श्रीमती भिखी मासिया, नगर पंचायत उपाध्यक्ष अब्दुल इब्राहिम सैयद,विजय डरसेना, तिहारूराम आर्य, लीला डरसेना, सुनीता गुप्ता,विमला जैन व नूतन दास उपस्थित रहे।

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युवक का हत्या खेत में मिला शव

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दल्ली राजहरा के समीपस्थ ग्राम पथरा टोला में खेत में युवक शव मिला। शव की सूचना मिलते ही गांव में सनसनी फ़ैल गई कबाड़ी खरीदने वाले ने सुबह खेत में लाश पढ़ी देख गांव वालो को सूचना दिया गांव वाले ने पुलिस को सूचना दी पुलिस घटना स्थल पर पहुंच शव को अपने कब्जे में लिया। साथ ही फोरेंसिक टीम और डॉग स्काट टीम भी पहुंच कर छान बीन कर रही है। मृतक का नाम कामता प्रसाद रावटे पिता शत्रुघन रावटे उम्र 26 ग्राम रजही का रहने वाला बताया जा रहा है।

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भानुप्रतापपुर में राजनीतिक आपदा के बीच अवसर तलाशे भाजपा

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(अर्जुन झा)

जगदलपुर। बस्तर संभाग के कांकेर जिले की भानुप्रतापपुर सीट का उपचुनाव भारतीय जनता पार्टी के लिए वह मौका लेकर आया है, जब वह बस्तर में शून्य से बाहर निकल कर अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए ऊर्जा एकत्र कर सकती है लेकिन उपचुनाव के बीच भाजपा प्रत्याशी ब्रम्हानंद नेताम के विरुद्ध सामने आए दुराचार के आरोप ने भाजपा की आंखों में अंधेरा छा दिया है। उसके आक्रामक प्रचार ने सुरक्षात्मक मोड़ ले लिया है। भाजपा को इस आरोप से घबराने की कोई जरूरत नहीं है। आरोप तो आरोप होता है। जब तक वह प्रमाणित न हो, किसी भी स्तर पर उसे दोषी नहीं माना जा सकता। तो, भाजपा को किसी झिझक में पड़ने की कोई जरूरत नहीं है। जो आरोप भाजपा प्रत्याशी पर लगाया गया है, उसका भानुप्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं पर कितना असर पड़ा है, भाजपा को इसकी पतासाजी करनी चाहिए। वैसे वह अपने प्रत्याशी के बचाव में आदिवासी के सम्मान का उल्लेख कर रही है। भानुप्रतापपुर सीट आदिवासी वर्ग के लिए सुरक्षित है तो जाहिर है कि सभी प्रत्याशी आदिवासी ही हैं। ऐसे में भाजपा को इसका गहन अध्ययन करना होगा कि आदिवासी मतदाता इस आरोप को महज आरोप के रूप में ले रहा है अथवा कांग्रेस की बातों पर आंख मूंदकर भरोसा कर रहा है? चुनाव काल मे राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप कोई अहमियत नहीं रखते। इतिहास गवाह है कि राजनांदगांव लोकसभा सीट के उपचुनाव के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की गिरफ्तारी ने देवव्रत सिंह को संसद भेज दिया था। इसी तरह 2018 के विधानसभा चुनाव के पहले सीडी कांड में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल की गिरफ्तारी ने कांग्रेस के पक्ष में मौसम बदल दिया था। तब भूपेश बघेल पर अश्लील सीडी मामले में आरोप लगा था, वे जेल गए थे लेकिन क्या कांग्रेस ने हथियार डाले थे? बिल्कुल नहीं। बल्कि कांग्रेस के लिए वह जुझारूपन जीत का तोहफा लेकर आया। कांग्रेस के कार्यकर्ता आवेश में आ गए थे और उनके जोश ने भाजपा के होश ठिकाने लगा दिए थे। अब ऐसा ही एक चुनौती भरा अवसर अब भानुप्रतापपुर उपचुनाव में भाजपा के सामने आया है। कांग्रेस द्वारा भाजपा के ब्रम्हानंद को दुराचारी ठहराया जा रहा है। मुख्यमंत्री से लेकर कांग्रेस के तमाम नेता यही कह रहे हैं। जवाब में भाजपा सीडी कांड की याद दिला रही है। तब बेहतर है कि भाजपा स्वयं याद करे कि कांग्रेस ने उस वक्त की चुनौती को किस प्रकार अपने पक्ष में भुना लिया था। अब भाजपा के सामने चुनौती है कि वह राजनीतिक आपदा में अवसर कैसे उत्पन्न कर सकती है। भाजपा के नए प्रदेश प्रभारी ओम माथुर कह रहे हैं कि छत्तीसगढ़ में भाजपा के लिए कोई चुनौती नहीं है। शायद उनका यह विचार अगले साल होने वाले चुनाव के संदर्भ में है लेकिन अभी जो चुनौती भानुप्रतापपुर में है, उससे तो बस्तर की जिम्मेदारी से जुड़े नेताओं को ही जूझना है। तब यह जरूरी है कि बड़े नेताओं की फौज की बजाय भानुप्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र के स्थानीय नेताओं को डेमेज कंट्रोल की जिम्मेदारी सौंप दी जाए। केंद्र सरकार के काम पर फोकस किया जाए। आदिवासी अस्मिता पर बात की जाए। कांग्रेस के राज में जो काम नहीं हुए, उन्हें हर एक मतदाता तक पहुंचाया जाए। डरने की जरूरत नहीं है। डर के भागे तो हार को कोई टाल नहीं सकता। मजबूती से लड़े तो रात कितनी भी काली हो, वह सुबह का आधार अवश्य बनती है। राजनीति में हर नीति यह तलाशती है कि कठिन से कठिन चुनौती से पार कैसे निकला जाए। भाजपा को मजबूत इरादे दिखाने होंगे। विपदा में अवसर होते हैं। भाजपा के पास अब भी अवसर है कि वह स्थानीय मंजे हुए नेताओं को चुनावी प्रबंधन में उतार दे।

किसानों के साथ अन्याय न करे भूपेश बघेल सरकार : कश्यप

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  • बस्तर संभाग के साढ़े तीन हजार किसान धान बेचने से वंचित
  • पूरा धान न खरीदने के लिए कई बहाने बना रही कांग्रेस सरकार


जगदलपुर पूर्व मंत्री केदार कश्यप ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार किसानों से पूरा धान न खरीदने के लिए तरह – तरह के हथकंडे अपना रही है। रकबा कम बताकर और पंजीयन न कर किसानों से धान नहीं खरीदा जा रहा है। बस्तर संभाग के लगभग साढ़े तीन हजार किसानों का पंजीयन न कर उन्हें धान बेचने से वंचित कर दिया गया है।


डॉ. रमनसिंह सरकार में केबिनेट मंत्री रहे केदार कश्यप ने भूपेश बघेल सरकार पर जमकर हमला बोला। पत्रकारों से चर्चा करते हुए कश्यप ने कहा कि किसानों का एक एक दाना धान खरीदने का दम भरने वाली कांग्रेस सरकार की पोल खुल गई है। भूपेश बघेल सरकार का किसान विरोधी चेहरा बेनकाब हो गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार इस खरीफ सीजन में हुई धान की पूरी उपज को न खरीदने के लिए तरह तरह के हथकंडे अपना रही है और बहानेबाजी कर रही है। पूरा धान खरीदना न पड़े इसलिए भूपेश बघेल सरकार ने अधिकारियों पर दबाव डालकर राज्य के हजारों किसानों का पंजीयन नहीं होने दिया। कश्यप ने दावा किया कि अकेले बस्तर संभाग के साढ़े तीन हजार किसानों का पंजीयन नहीं किया गया है। अब ये किसान अपना धान नहीं बेच पा रहे हैं। पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि पूरा धान खरीदने की अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए भूपेश बघेल सरकार ने धान खेती का रकबा कागजों में घटा दिया तथा प्रदेश के हजारों किसानों का पंजीयन ही नहीं होने दिया। उन्होंने कहा कि भूपेश बघेल सरकार के किसान विरोधी रवैये से प्रदेश के किसानों में भारी आक्रोश है। कश्यप ने कहा है कि कांग्रेस सरकार बहानेबाजी बंद कर उन किसानों का भी धान खरीदे, जिनका पंजीयन नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा है कि ऐसा नहीं किया गया, तो किसानों के साथ मिलकर आंदोलन किया जाएगा।

कुष्ठ किसी भी प्रकार का छुआछूत बीमारी नहीं है :– ध्रुवे

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  • विकृति बचाओ शिविर में मुख्य अतिथि ध्रुवे पहुंचे

दल्लीराजहरा/डौंडी विकृति बचाओ शिविर में मुख्य अतिथि बन अनुसुचित जनजाति मोर्चा जिला अध्यक्ष व सांसद प्रतिनिधि विक्रम धुर्वे पहुंचे। धुर्वे ने विकृति बचाओ शिविर कायकर्म के अवसर पर चिखलाकसा स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कुष्ठ रोगियों को साल वितरण किया गया। ध्रुवे जी ने कहा की कुष्ठ रोगियों से भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि ये कोई छुआछूत नही है। ध्रुवे जी ने आगे कहा की कुष्ठ रोग का ईलाज अब पूरी तरीके से आ गया है।

ध्रुवे जी ने कहा की भारत सरकार द्वारा देश में राष्ट्रीय कुष्ठ रोग नियन्त्रण कार्यकम वर्ष 1955 में लागू किया गया, जिसे वर्ष 1983 में “राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम” नाम दिया गया। वर्ष 1982 में मल्टी ड्रग थेरेपी (एमडीटी) औषधी उपयोग में लायी गयी। इस दौरान नगर पंचायत चिखलाकसा उपाध्यक्ष अब्दुल इब्राहिम सैयद जी नगर पंचायत चिखलाकसा पार्षद श्रीमति कुन्ती देवांगन जी, सुनीता गुप्ता जी आदि उपस्थित रहे।

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नगरनार बाजार के सौंदर्यीकरण के लिए मिली रकम की बंदरबांट

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  • नगरनार स्टील प्लांट प्रबंधन ने सीएसआर मद से ग्राम पंचायत को दिए हैं करोड़ों रुपए
  • बाजार में न शेड बनाए गए और ना ही सुविधायुक्त प्लेटफार्म


नगरनार विकास खंड जगदलपुर की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत नगरनार में भ्रष्टाचार के मामले भी बड़े बड़े सामने आ रहे हैं। ग्राम पंचायत के खेवनहार शासन और उद्योगों से मिलने वाले धन के सहारे अपनी नैया पार लगा रहे हैं। सरपंच, सचिव और कुछ पंच ग्राम पंचायत को विभिन्न मदों से मिलने वाली रकम की बंदरबांट करने में मशगूल हैं। नगरनार इस्पात संयंत्र से मिले करोड़ों रु. का भी गोलमाल किया गया है। यह रकम बाजार स्थल के सौंदर्यीकरण के लिए दी गई थी, लेकिन अनियमितता बरतते हुए कार्य निम्न स्तर का कराया गया और रकम डकार ली गई।

इस मसले को लेकर गांव में अब विरोध के स्वर उठने लगे हैं। नगरनार के रास्ते बस्तर संभाग का भाग्योदय होने जा रहा है। यहां विशाल इस्पात संयंत्र की स्थापना हो चुकी है। इस स्टील प्लांट के लगने से ढेरों सहायक उद्योगों की भी स्थापना के द्वार खुल गए हैं तथा बस्तरिहा युवाओं और मजदूरों के लिए रोजगार की अपार संभावनाएं भी उभरने वाली हैं। ऐसी सुखद अनुभूति के बीच भ्रष्टाचार की काली छाया भी जगदलपुर जनपद की इस सबसे बड़ी ग्राम पंचायत पर मंडराती नजर आने लगी है। शासन से विभिन्न मदों और योजनाओं के तहत नगरनार ग्राम पंचायत को मिलने वाली राशि की अफरा तफरी की बात समय समय पर सामने आती रही है, लेकिन अब बड़े पैमाने पर शासन तथा इस्पात संयंत्र की ओर से दी जाने वाली रकम की भी जमकर बंदरबांट होने लगी है। मिली जानकारी के अनुसार नगरनार इस्पात संयंत्र प्रबंधन ने कुछ माह पहले अपनी सीएसआर स्कीम के तहत बाजार स्थल के सौंदर्यीकरण के लिए नगरनार ग्राम पंचायत को करोड़ों रुपए आवंटित किए थे। सरपंच, सचिव और कुछ पंचों ने आपसी सांठगांठ कर इस रकम के बड़े हिस्से को आपस में बांट लिया तथा थोड़ी बहुत राशि से सौंदर्यीकरण के नाम पर मामूली और पूरी तरह गुणवत्ता विहीन कार्य कराए। बाजार में फुटकर व्यापारियों की दुकानें लगाने के लिए आधा फुट से भी कम ऊंचे चबूतरे बनवाए गए हैं। चबूतरों के निर्माण के लिए बहुत ही कम मात्रा में सीमेंट तथा अन्य सामग्री का उपयोग किया गया है। चबूतरों की ऊपरी सतह का भराव सीमेंट कांक्रिट से ना कर मिट्टी भरवा दी गई है। चबूतरे अभी से टूट फूट गए हैं। वहीं नालियों का निर्माण भी स्तरहीन कराया गया है। इन नालियों से बरसाती पानी के साथ ही दुकानों व आसपास के घरों से निकलने वाली गंदगी की समुचित निकासी नहीं हो पाती। बाजार स्थल का समतलीकरण भी ढंग से नहीं कराया गया है तथा वहां मिट्टीयुक्त मुरुम डलवाई गई है। इसके चलते हल्की बरसात होने पर पूरे बाजार परिसर में कीचड़ ही कीचड़ हो जाता है। कीचड़ की वजह से खरीदारों और व्यापारियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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शेड लगवाए ही नहीं गए
बाजार स्थल पर दुकानों के लिए कहीं कहीं शेड लगवाए गए हैं तथा अधिकांश चबूतरों पर शेड बनाए ही नहीं गए हैं। जो शेड बनवाए गए हैं, वे भी भ्रष्टाचार की कहानी को बयां कर रहे हैं। स्तरहीन शेड उखड़ कर गिर गए हैं। वहीं अनेक चबूतरों पर शेड लगाने के नाम से महज लोहे के पाइप, रॉड आदि के ढांचे मात्र लगाकर छोड़ दिए गए हैं। लोहे के ये पाइप और रॉड जंग लगने से खराब होते जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि पंचायत के खेवनहारों ने कार्य की पूर्णता सिर्फ दस्तावेजों में दर्शा कर राशि हजम कर ली है। बरसात के दिनों में व्यापारियों को तालपत्री या फिर प्लास्टिक लगाकर अपने सामानों का बचाव करना पड़ता है। पंचायत द्वारा व्यापारियों से पसरा टैक्स के रूप में अच्छी खासी रकम वसूली जाती है, लेकिन उन्हें जरा भी सुविधा प्रदान नहीं की जाती।
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गंदगी से भरी हैं नालियां
ग्राम पंचायत द्वारा बाजार स्थल पर जो नालियां बनवाई गई हैं, वे भी भ्रष्टाचार की गवाही खुले तौर पर दे रही हैं। नालियों के निर्माण में न तो तकनीकी पहलुओं का ध्यान रखा गया और ना ही गुणवत्ता का। नालियों से पानी और गंदगी का बहाव नहीं हो पा रहा है। सभी नालियों में झिल्ली पन्नी, कागजों और अन्य वस्तुओं का जमाव हो गया है। बरसात के दिनों में पूरा बाजार स्थल पानी से लबालब हो जाता है।
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कहां जाती है सफाई की रकम ?
नगरनार ग्राम पंचायत के पूर्व सरपंच रैनू राम बघेल के मुताबिक ग्राम पंचायत को बस्ती और बाजार स्थल की सफाई के लिए हर छह माह में 16 लाख रुपए मिलते हैं, लेकिन यह रकम आखिर किनकी जेबों में समा जाती है? यह सवाल मुंहबाए खड़ा है। बस्ती, बाजार स्थल और नालियों की सफाई सालों से नहीं कराई गई है। चारों ओर गंदगी का साम्राज्य देखने को मिल रहा है। पंचायत के वर्तमान प्रतिनिधियों की भूमिका जांच के दायरे में है। रैनूराम बघेल तथा अनेक ग्रामवासियों ने ग्राम पंचायत में व्याप्त भ्रष्टाचार की जांच कराने व दोषी पंचायत प्रतिनिधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। रैनू राम बघेल ने नगरनार इस्पात संयंत्र प्रबंधन से सीएसआर मद से दी गई राशि से कराए गए कार्यों की जांच अपने टेक्निकल एक्सपर्ट से कराने एवं रकम की रिकवरी दोषी पंचायत प्रतिनिधियों से करने की मांग उठाई है।

खेलों में भी परचम लहरा रहे हैं बीजापुर के आदिवासी बच्चे

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  • राज्य स्तर पर जलवा दिखा चुकी हैं रुक्मणि नेताम व अन्य छात्राएं
  • शिक्षा के साथ खेलों को भी बढ़ावा दे रहे हैं जिला शिक्षा अधिकारी बलिराम बघेल


अर्जुन झा
जगदलपुर बस्तर संभाग के धुर नक्सल प्रभावित बीजापुर जिला एजुकेशन हब के रूप में तो पहचान बना ही रहा है, अब स्पोर्ट्स हब के रूप में भी प्रतिष्ठित होने लगा है। बीजापुर जिला मुख्यालय के स्पोर्ट्स एकेडमी में आदिवासी बच्चों की खेल प्रतिभा को तराशने का उत्कृष्ट कार्य किया जा रहा है। यहां के बच्चे राज्य स्तर पर अपना परचम लहरा चुके हैं।

जिला शिक्षा अधिकारी बलिराम बघेल की पदस्थापना के बाद से ही बदलते बीजापुर की शानदार तस्वीर सामने आने लगी है। डीईओ अल सुबह ही स्पोर्ट्स एकेडमी काम्प्लेक्स में पहुंचकर विभिन्न खेलों का अभ्यास और प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे बच्चों का उत्साहवर्धन करते हैं। इससे बच्चों को आगे बढ़ने की प्रेरणा और ताकत मिल रही है।
बस्तर, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर आदि जिलों का नाम सुनते ही जेहन में पिछड़ेपन और नक्सली वारदातों की खूनी तस्वीर उभर आती है। आज भी इन जिलों का नाम सुनते ही दीगर प्रांतों तथा छत्तीसगढ़ के ही मैदानी जिलों के लोगों की रूह फना हो जाती है। लोगों को शायद यह पता ही नहीं है कि बस्तर संभाग अब तेजी से बदलने लगा है। इस संभाग के प्रायः सभी जिलों के विद्यार्थी और खिलाड़ी अपनी – अपनी विधाओं के दम पर बस्तर का भाल दमका रहे हैं, अपने जिले की शान में चार चांद लगा रहे हैं। चंद सालों पहले तक नक्सली वारदातों के कारण बीजापुर जिले की जो रक्तरंजित पहचान बनी हुई थी, वह अब धुल चुकी है। यह जिला अब उत्कृष्ट शैक्षणिक और खेल प्रतिभाओं के लिए पहचाना जाने लगा है। बीजापुर जिले की सरकारी शालाओं में भी क्वालिटी एजुकेशन और स्पोर्ट्स एक्टिविटीज को खास तौर पर बढ़ावा दिया जा रहा है। यहां के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे बिना कोचिंग और ट्यूशन के विभिन्न परीक्षाओं में बेहतरीन परफॉरमेंस देने लगे हैं। यही वजह है कि बीजापुर को अब बस्तर का एजुकेशन हब भी कहा जाने लगा है। जो बच्चे पहले ढंग से हिंदी भी नहीं बोल पाते थे, वे अब अंग्रेजी भी अच्छे से बोल लेते हैं। उनकी बातों को सुनकर लगता नहीं कि ये आमतौर पर हल्बी और गोंड़ी बोलियों में चर्चा करने वाले बच्चे हैं। जिले के सरकारी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के लिए हल्बी, गोंड़ी बोलियों और हिंदी व अंग्रेजी भाषाओं का सहारा लिया जाता है। अपनी बोली में पढ़ाए जाने से बच्चों के सीखने तथा अध्याय को याद रखने की क्षमता में आश्चर्यजनक ढंग से वृद्धि हो रही है। वहीं जिले प्रायमरी तथा मिडिल स्कूलों में हिंदी व अंग्रेजी के अच्छे जानकार शिक्षकों को पदस्थ किया गया है। जिला शिक्षा अधिकारी बलिराम बघेल ने बीजापुर में पदस्थ होने के बाद यहां की शालाओं का ढर्रा बदलने के लिए शानदार पहल की है। वे शिक्षक शिक्षिकाओं को क्वालिटी एजुकेशन के लिए समय समय पर मार्गदर्शन देते रहते हैं। यही नहीं श्री बघेल कभी भी किसी भी समय शिक्षण व्यवस्था का जायजा लेने शालाओं में अचानक पहुंच जाते हैं। उनकी इस छापामार कार्रवाई का ही असर है कि शालाओं में शिक्षकों की उपस्थिति लगातार बनी रहती है।
वरदान है स्पोर्ट्स एकेडमी
राज्य सरकार ने जिले के विद्यार्थियों और युवाओं की खेल प्रतिभा को निखारने के लिए बीजापुर जिला मुख्यालय में स्पोर्ट्स एकेडमी की स्थापना की है। विशाल भूभाग पर संचालित स्पोर्ट्स एकेडमी परिसर में विभिन्न खेलों के लिए विस्तृत और व्यवस्थित मैदान, पर्याप्त खेल सामग्री और एक्सपर्ट कोच की भी व्यवस्था है। रोज सुबह एकेडमी में स्कूली बच्चों को दौड़, खो खो, कबड्डी, हॉकी, क्रिकेट, कूद आदि खेलों का प्रशिक्षण दिया जाता है। यहां प्रशिक्षण ले रही रुक्मणि नेताम व कुछ अन्य छात्राएं विभिन्न वर्गों की दौड़ में राज्य स्तर पर द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त कर चुकी हैं। ये बच्चियां नेशनल व इंटर नेशनल लेवल पर पहुंचने के लिए जी जान से परिश्रम कर रही हैं। जिला शिक्षा अधिकारी बलिराम बघेल रोजाना मॉर्निंग वॉक के लिए निकलते हैं। इस दौरान वे स्पोर्ट्स एकेडमी का चक्कर लगाने तथा अभ्यास कर रहे व प्रशिक्षण ले रहे बच्चों का हौसला बढ़ाने में जरा भी कंजूसी नहीं करते। उनके इस कदम से खेलों के प्रति बच्चों की लगन और बढ़ रही है।

बिजली बिल में बेतहाशा वृद्धि बर्दाश्त नहीं की जाएगी युवा मोर्चा

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भारतीय जनता युवा मोर्चा प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर भारतीय जनता युवा मोर्चा शहर मंडल बालोद द्वारा बिजली बिल के बेतहाशा वृद्धि के विरोध में बालोद शहर में जगह-जगह नुक्कड़ सभाएं की गई


नुक्कड़ सभा में भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने लोगों को बताया कि लगातार लोगों के बिजली बिल में बेतहाशा वृद्धि की जा रही है सिक्योरिटी मनी के नाम पर लोगों के जेब में डाका डाला जा रहा है जो सरकार गंगाजल को हाथ में लेकर कसम खाकर सत्ता पर बैठी की बिजली बिल हाफ किया जाएगा परंतु बिजली बिल हाफ तो दूर की बात है लोगों के बिजली बिल को बढ़ा बढ़ा कर उनका घर चलाना मुश्किल कर दिया है भूपेश बघेल की ऐसी वादाखिलाफी के अन्य विषयों पर भी इस नुक्कड़ सभा में भाजपा नेताओं ने प्रकाश डाला गया

इस अवसर पर भाजपा नेता पवन साहू, भारतीय जनता पार्टी शहर मंडल अध्यक्ष सुरेश निर्मलकर पूर्व मंडल अध्यक्ष कमलेश सोनी,युवा मोर्चा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य अमित चोपड़ा,शहर महामंत्री संतोष कौशिक,नरेंद्र सोनवानी,किसान मोर्चा जिला अध्यक्ष तोमन साहु, भाजपा नेता बंटी बाफना,प्रीतम यादव,गणेश साव,फलेश देशलहारे,दयाल बघेल,पूर्व पार्षद अंबिका यादव,सुनीता मनहर,महिला मोर्चा अध्यक्ष हितेश्वरी कौशिक,महिला मोर्चा महामंत्री मोना टुवानी,युवा मोर्चा बालोद अध्यक्ष रौनक कत्याल,राहुल साहू,चंद्रेश जैन,राहुल नाग, राजा यादव,चेतन निर्मालकर,यश जैन,यश चांडक,धिरज माधवानी,आदि कार्यकर्ता उपस्थित रहे

फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में अफसर की भूमिका संदिग्ध

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  • आरोपी युवक को जांच प्रक्रिया के बीच जारी किया जाति प्रमाण पत्र
  • मामला बस्तर फाइटर में फर्जी तरीके से नौकरी हथियाने का
  • एसडीएम ने दोबारा जारी किया है ओड़िशा मूल के युवक को जाति प्रमाण पत्र


अर्जुन झा
बकावंड ओड़िशा मूल के एक युवक द्वारा बस्तरिहा आदिवासी बनकर फर्जी जाति प्रमाण पत्र के जरिए बस्तर फाइटर में नौकरी पाने के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। दरअसल इस मामले की जांच की जिम्मेदारी जिस अधिकारी को दी गई थी, अब उसी अधिकारी की भूमिका सवालों के घेरे में और जांच के दायरे में आ गई है। क्योंकि जांच प्रक्रिया के बीच इसी अधिकारी ने आरोपी युवक को अनुविभागीय दंडाधिकारी की हैसियत से पुनः जाति प्रमाण पत्र जारी कर दिया है।
इस प्रकरण में इंसाफ की गुहार लगाते आ रहे आदिवासी समुदाय के युवक को अफसरशाही ने प्रशासनिक दांवपेंच में उलझा कर रख दिया है। सूचना के अधिकार अधिनियम को ठेंगा दिखाते हुए अधिकारी इस आदिवासी युवक को परेशान कर रहे हैं। वहीं ओड़िशा मूल के जिस युवक पर फर्जी तरीके से नौकरी पाने का आरोप लगा है, उसे मामले की जांच के बीच आदिवासी होने का प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया है। इस युवक को जाति प्रमाण पत्र जारी करने वाले वही अनुविभागीय दंडाधिकारी हैं, जिन्हें इस समूचे प्रकरण की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। बकावंड तहसील के ग्राम छोटे देवड़ा निवासी भतरा अनुसूचित जनजाति समुदाय के युवक मानसिंह भतरा ने शिकायत की थी कि उसके गांव में आकर कुछ सालों से रह रहे ओड़िशा के युवक कमलोचन ने अपने पिता पाकलू और दादा दिशा को छोटे देवड़ा निवासी भतरा आदिवासी बताया और खुद को सोमारु भतरा का पुत्र बताते हुए फर्जी वंशवली के जरिए पटवारी से मिसल रिपोर्ट और उसके आधार पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाकर बस्तर फाइटर में नौकरी हथिया ली है। मानसिंह का कहना है कि वह ( मानसिंह ) सोमारु भतरा की बेटी घासनी का पुत्र है। सोमारु का एकमात्र पुत्र सुखराम पुत्र था।कमलोचन नाम का कोई बेटा सोमारु का नहीं था। वहीं सुखराम का निधन हो चुका है। मानसिंह की शिकायत के बाद जब हल्ला मचा तब जिला प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कराई। जांच की जिम्मेदारी बस्तर के अनुविभागीय दंडाधिकारी ओपी वर्मा को सौंपी गई। श्री वर्मा ने गांव जाकर मामले की जांच की। पंचायत प्रतिनिधियों ने भी पुष्टि की है कि मानसिंह सोमारु का बेटा नहीं है तथा वह भतरा आदिवासी समुदाय का भी नहीं है।
एसडीएम ने जारी किया जाति प्रमाण पत्र
मामले की जांच प्रक्रिया के बीच जांच अधिकारी और बस्तर के एसडीएम ओपी वर्मा ने कमलोचन को छोटे देवड़ा निवासी बताते हुए उसके नाम पर भतरा आदिवासी का जाति प्रमाण पत्र जारी किया है। एसडीएम की सील मुहर से यह जाति प्रमाण पत्र अक्टूबर 2022 में जारी किया गया है। यह सवाल उठने लगा है कि जब ग्राम पंचायत ने भी कमलोचन के भतरा आदिवासी होने तथा सोमारु भतरा के परिवार से न होने की पुष्टि कर दी है तब भला किस आधार पर कमलोचन को ऐसा जाति प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया ?
दोबारा जाति प्रमाण पत्र जारी करने की जरूरत क्यों पड़ी?
इसी एसडीएम कार्यालय द्वारा कमलोचन को इससे पहले भी जाति प्रमाण पत्र जारी किया जा चुका है, जिसके आधार पर ही कमलोचन ने बस्तर फाइटट की नौकरी हासिल की है। अब सवाल उठने लगा है कि ऐसी कौन सी जरूरत आन पड़ी कि एसडीएम ने कमलोचन को फिर से जाति प्रमाण पत्र जारी किया है? वह भी जांच प्रक्रिया जारी रहने के बीच और स्वयं जांच अधिकारी हैं तब। इस नए खुलासे से जांच अधिकारी श्री वर्मा की भूमिका को लेकर भी संदेह व्यक्त किया जाने लगा है।
भटक रहा है असली आदिवासी
ओड़िशा मूल का युवक तो नकली भतरा आदिवासी बनकर सरकारी नौकरी का लाभ उठा रहा है, वहीं असली भतरा आदिवासी युवक मानसिंह इंसाफ के लिए दर दर की ठोकरें खाते भटकने मजबूर है। मानसिंह के साथ इंसाफ करना तो दूर रहा, उसके द्वारा सूचना के अधिकार के तहत मांगी जा रही जानकारी देने से भी साफ इंकार किया जा रहा है। मानसिंह ने नगर सेना कार्यालय और पुलिस अधीक्षक कार्यालय में सूचना के अधिकार के तहत आवेदन देकर अनावेदक कमलोचन को पूर्व में जारी किए गए जाति प्रमाण पत्र और बस्तर फाइटर की नौकरी के लिए उसके द्वारा जमा कराए गए दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग की है। मगर उसे यह कहकर किसी भी तरह की जानकारी देने से मना कर दिया गया कि इसके लिए आपको कलेक्टरेट कार्यालय में आवेदन देना होगा।
पंचायत के प्रतिवेदन के आधार पर दिया है दोबारा जाति प्रमाण पत्र
कमलोचन को ग्राम पंचायत के प्रतिवेदन के आधार पर दोबारा जाति प्रमाण पत्र जारी किया गया है।स्कूल के रिकार्ड के अनुसार कमलोचन का परिवार 1947 से ग्राम छोटे देवड़ा में निवासरत है। कमलोचन ने अपनी जाति साबित करने के लिए दूसरे की वंशावली का सहारा लिया है, जो गलत है। मामले का जांच प्रतिवेदन जिला स्तरीय छानबीन कमेटी को सौंप दिया गया है। अब कमेटी फैसला लेगी।
-ओपी वर्मा
जांच अधिकारी एवं एसडीएम जगदलपुर.

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